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भा त का उच्चतम न्यायालय
सि वि लअपीलीय क्षेत्राधि का
सि वि ल अपील ंख्या 872 /2022
(ए एलपी ( ी) ंख्या 10551/2021 े उत्पन्न)
ाजस्थान ाज्य औ अन्य -अपीलकता (ओं)
बनाम
अंजु रि नी ैनी -प्रधित ादी (ओं)
विनर्णय
क
े . एम. जो ेफ, जे.
अनुमधित प्रदान की गयी।
JUDGMENT
(1) विदनांक 15.02.2013 क े वि ज्ञापन द्वा ा, अ श्रेर्णी लिलविपक (एलडी ी) की रि विGयों को भ ने क े लिलए आ ेदन आमंवित्रत विकए गए थे। आ श्यकता यह थी की अन्य बातों क े ाथ आ ेदन जमा क ने की अंधितम धितथिथ 22 मार्च, 2013 तक आ ेदक क े पा ाजस्थान ाज्य ूर्चना प्रौद्योविगकी प्रमार्ण पत्र (आ ए ीआईर्टी) की योग्यता होनी र्चाविहए। मविहलाओं की श्रेर्णी में आ क्षर्ण प वि र्चा विकया गया था औ मविहलाओं में वि ाओं की श्रेर्णी क े लिलए क ु छ पदों को अलग खा गया था। प्रधित ादी ने वि ा होने क े नाते 15.04.2013 को अ श्रेर्णी लिलविपक (एलडी ी) पद क े लिलए आ ेदन विकया। आ ेदन क ने की विन ारि त अंधितम ता ीख को प्रधित ादी क े पा आ ए ीआईर्टी की अहता नहीं थी। आ ेदकों े अनु ो क े बाद आम तौ प अधि कारि यों ने प्रमार्ण पत्र प्रस्तुत क ने की अ धि को तब तक बढ़ाने का विनर्णय लिलया जब तक विक दस्ता ेजों को 2022 INSC 137 त्याविपत विकया जाना था या या र्चयविनत ूर्ची तैया क ने े पहले तक। प्रधित ादी ने वि स्तारि त अ धि, जो 07.05.2013 थी, क े भीत आ ए ीआईर्टी पेश नहीं विकया। इ क े का र्ण 28 जून, 2013 को आयोसिजत सिजला स्थापना विमधित की बैठक में उनक े आ ेदन को अस् ीका क विदया गया। इ क े बाद, 10.11.2014 को, प्रत्यथ[ ने स् ीक ृ त रूप े आ ए ीआईर्टी की योग्यता प्राप्त की। उ क े बाद, ऐ ा हुआ की क ु छ मुकदमेबाजी थी सिज ने भत[ प्रवि`या को बाधि त क विदया । (2) बाद में, र्ष 2017 में, 21.08.2017 को एक वि ज्ञापन जा ी विकया गया सिज क े द्वा ा र्चयन की प्रवि`या को आगे बढ़ाने का विनर्णय लिलया गया। हम इ की त फ ध्यान आक ृ ष्ट क ना उधिर्चत मझते हैंः 'वि ज्ञापन' वि थिभन्न न्याधियक विनर्णयों क े अनुपालन में, शा न धिर्च ए ं आयुG, ग्रामीर्ण वि का ए ं पंर्चायती ाज वि भाग क े पत्र ंख्या एफ 37 () पीआ डी/पीआ -2/एल. डी. ी. ी ी भत[ 2013/17/3263 जयपु विदनांविकत 17.08.2017 क े अनुपालनमें एल. डी. ी. भत[ 2013 की ंशोधि त योग्यता ूर्ची क े अनु ा पात्र उम्मीद ा औ श्रेर्णी ा प्राप्त अंकों की अंधितम कर्ट ऑफ में आने ाले अभ्यथ[ (नीर्चे उल्लेलिखत अनु ा ) विदनांक 24.08.2017 को प्रातः 09.00 बजे कायालय सिजला परि र्षद, दौ ा में वि स्तृत आ ेदन पत्र भ क ए ं वि स्तृत आ ेदन पत्र, उनक े शैधिक्षक औ व्या ाधियक योग्यता प्रमार्णपत्रों की प्रमाथिर्णत प्रधितयां औ अन्य आ श्यक प्रमार्ण पत्र औ ऑनलाइन आ ेदन पत्र की फोर्टोकॉपी ंलग्न क मय मूल प्रमार्ण पत्रों क े ाथ व्यविGगत रूप े उपस्थिस्थत हेंगे। अनुपस्थिस्थत होने की स्थिस्थधित में यह मान लिलया जाएगा विक आपको इ भत[ में कोई विदलर्चस्पी नहीं है।यह अंधितम अ है इ क े बाद दस्ता ेजों क े त्यापन क े लिलए कोई अ नहीं विदया जाएगा। श्रेर्णी ा अंकों की कर्ट ऑफ ूर्ची एल. एल. डी. ी. भत[ 2013 इ प्रका हैः- ग ामान्य ामान्य वि ा परि त्यG भू त पू ै वि नक बे ह त ीन लिखलाड़ी एर्च.आई. एल.डी बीएल मविहला ी.पी ामान्य 69.431 66.616 38.662 45.231
26. 44.046
43. 66.616
50. अन्य विपछड़ा ग
67. 62.620
26. - - वि शेर्ष विपछड़ा ग
66. 62.000 - अनु ूधिर्चत जाधित 64.160 60.800 - -
39. अनु ूधिर्चत जनजाधित
65. 62.416
31.
40. नोर्टः- -
1. सिजन उम्मीद ा ों ने आ ए ीआईर्टी को छोड़क विक ी अन्य ाज्य/विनजी वि श्ववि द्यालय/डीम्ड वि श्ववि द्यालय े अपनी व्या ाधियक योग्यता प्राप्त की है, उन्हें वि भाग क े विनदtशानु ा विन ारि त प्रारूप में रू 100 का शपथ पत्र प्रस्तुत क ना होगा।
2. ऐ े उम्मीद ा सिजनकी विनयुविG क े आदेश पहले ही जा ी विकए जा र्चुक े हैं लेविकन विकन्हीं का र्णों े े कायभा नहीं ंभाल क े । वि भागीय पत्र ंख्या 3263 विदनांविकत 17.08.2017 क े अनुपालन में, उनक े दस्ता ेजों औ पात्रता का विफ े विन ीक्षर्ण क ने क े बाद, काय प्रभा लेने क े लिलए अंधितम अ विदया जाता है।" (3) इ क े बाद, प्रधित ादी ने 27.08.2017 को एक प्राथना पत्र दाय विकयाः " े ा में, मुख्य कायका ी अधि का ी, सिजला परि र्षद, दौ ा ( ाज) वि र्षयः एलडी ी भत[ 2013 क े लिलए दस्ता ेज त्यापन में शाविमल क ने क े लिलए। महोदय, यह अनु ो है विक मैंने पंर्चायत ाज वि भाग द्वा ा र्ष 2013 में की गई एलडी ी भत[ 2013 में दस्ता ेज़ त्यापन क ाया था लेविकन आ ए ीआईर्टी प्रमार्ण पत्र नहीं होने क े का र्ण मे ा र्चयन नहीं हो का। लेविकन तमान में विफ े एलडी ी भत[ शुरू की जा ही है सिज में मैं योग्यता क े अनु ा कर्ट ऑफ क े भीत हूं औ मे ा आ ए ीआईर्टी प्रमार्णपत्र भी उपलब् है सिज े मैंने 10 न ंब 2014 को अर्हिहत विकया है। अतः आप े अनु ो है विक मे ा र्चयन 'वि ा'श्रेर्णी में विकया गया है। आप मुझ प क ृ पा क क े लाभ प्रदान क ें। 27/8/17" (4) इ आ ेदन को 01.09.2017 को आयोसिजत सिजला स्थापना विमधित की बैठक में अस् ीक ृ त क विदया गया था, सिज का प्रा ंविगक विहस् ा इ प्रका हैः "प्रस्ता 10 इ े पहले सिजला स्थापना विमधित द्वा ा पात्रता अस् ीका विकए जाने क े बाद भी विनम्नलिललिखत उम्मीद ा ों ने आ ेदन दालिखल क ते मय विफ े विनयुविG क े लिलए अनु ो विकया है। ंख्यानाम विपता का नाम/पधित का नाम पहले अस् ीका क ने का का र्ण विर्टप्पथिर्णयां
4. अंजु रि नी ैनी ूय ना ायर्ण अनुमोविदत नहीं क ं प्यूर्ट प्रमार्णपत्र ैनी क्योंविक ै कम्प्यूर्ट प्रमार्णपत्र नहीं है विन ारि त धितथिथ े बाद में जा ी विकए जाने प अस् ीक ृ त विकया जा कता है विर्टप्पथिर्णयों क े अनु ा, इ ूर्ची का अनुमोदन म्मधित े विकया जाता है।" (5) इ परि स्थिस्थधित े रि र्ट याधिर्चका दाय क ने का अ उत्पन्न हुआ सिज क े का र्ण तमान अपील हुई। वि द्वत एकल न्याया ीश ने प्रत्यथ[ द्वा ा दालिखल रि र्ट याधिर्चका की अनुमधित दी। ऐ ा क ते हुए, वि द्वान एकल न्याया ीश ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ क े विदनांक 11.02.2016 क े फ ै ले े मथन प्राप्त विकया। इ क े अधितरि G, वि द्वान एकल न्याया ीश ने ाजस्थान पंर्चायती ाज विनयम, 1996 क े विनयम 266-क क े उपबं ों (सिज े इ में इ क े पश्चात् ंधिक्षप्तता क े लिलए 'विनयम 1996 'कहा गया है) क े आ ा प विनर्णय पारि त विकया। अपीलकताओं ने खंडपीठ क े मक्ष अपील की। आक्षेविपत विनर्णय द्वा ा खंडपीठ ने वि द्वान एकल न्याया ीश क े विनर्णय की पुविष्ट की है। (6) हमने अपीलार्थिथयों की ओ े वि द्वान कील श्री ुशील क ु मा सिं ह, औ प्रत्यथ[ की ओ े श्री प्रकाश क ु मा सिं ह, वि द्वान कील को ुना है ।अपीलार्थिथयों का मामला ऐ ा प्रतीत होता है विक प्रत्यथ[ क े पा आ ेदन क ने क े लिलए विन ारि त अंधितम धितथिथ तक औ यहां तक विक वि स्तारि त धितथिथ तक भी विन ारि त योग्यता (आ ए ीआईर्टी) नहीं थी. इ लिलए उन्हें विनयुविG क े लिलए पात्र नहीं माना गया।यह तथ्य विक उन्होंने र्ष 2014 में बाद में प्रश्नगत योग्यता हासि ल की, उनक े मामले को मजबूत नहीं बनाता । क्या हुआ था विक क ु छ मुकदमेबाजी थी सिज ने भत[ प्रवि`या को ोक विदया था। दू े शब्दों में, र्ष 2013 में वि ज्ञापन द्वा ा शुरू की गई भत[ प्रवि`या को र्ष 2017 में विफ े शुरू विकया गया था। उन्होने आगे प्रस्तुत विकया की यह ऐ ा मामला नहीं है जहां प्रधित ादी को विनयुG विकया गया था सिज े की विनयम 266-क क े प्रा ानों को लागू विकया जा क े । उन्होंने आगे बताया विक धिड ीजन बेंर्च क े सिज फ ै ले को आ ा बनाया गया है ह हो कता है प्रा ंविगक न हो औ प्रधित ादी क े मामले को मजबूत नहीं बनाएगा । इ क े वि प ीत,प्रत्यथ[ क े वि द्वत कील ने प्रस्तुत विकया की र्ष 2017 में वि ज्ञापन जा ी क ने े प्रत्यथ[ को अधि का प्राप्त हुआ.उन्होंने इ तथ्य प जो विदया विक यह न्यायालय एक ं ै ाविनक न्यायालय है। प्रधित ादी का अधि का ंवि ान क े अनुच्छेद 15 े विनकलता है। उन्होने तक प्रस्तुत विकया विक प्रत्यथ[ एक वि ा है जो र्ष 2013 े पीविड़त है। यह अनुच्छेद 136 क े तहत वि शेर्ष अधि का क्षेत्र में हस्तक्षेप का मामला नहीं है। प्रधित ादी ने 2017 में वि ज्ञापन जा ी होने तक योग्यता हासि ल क ली थी। दू े शब्दों में, जब भत[ 2017 क े बाद हुई, तो प्रधित ादी क े पा अपेधिक्षत योग्यता थी. उन्होंने आगे बताया विक प्रत्यथ[ क े पा ऐ े अंक थे जो श्रेर्णी क े लिलए विन ारि त कर्ट-ऑफ े अधि क थे. उन्होनें खंडपीठ द्वा ा लिलए गए दृविष्टकोर्ण को हमा ी स् ीक ृ धित क े लिलए ाहा औ इ ंबं में उन्होंने खंडपीठ क े विदनांक 11.02.2016 क े विनर्णय े भी मथन प्राप्त विकया। (7) इ मामले में यह न्यायालय सिज पद प वि र्चा क हा है ह एलडी ी (वि द्यालय हायक) का पद है।वि द्वान एकल न्याया ीश ने एक अंतरि म आदेश द्वा ा वि ा क े रूप में प्रत्यथ[ की उम्मीद ा ी प वि र्चा क ने का विनदtश विदया था। आइए हम वि द्वान एकल न्याया ीश क े तक की थोड़ा औ वि स्ता े जाँर्च क ें। प्रधित ादी का तक यह हा है विक कथिथत विनयम 266-ए क े तहत, विनयुविG क े बाद भी योग्यता अर्जिजत की जा कती है. इ क े बाद, वि द्वान एकल न्याया ीश ने डीबी ीडब्ल्यूपी ंख्या- 13268/2015 औ ंबंधि त मामलों क े 11.02.2016 को विकए गए उच्च न्यायालय क े फ ै ले े मथन लिलया । इ क े बाद, न्यायालय ने पाया विक क्योंविक प्रत्यथ[ ने विनयमों क े अनु ा औ वि ज्ञापन क े अनु ा भी भी योग्यताएं अर्जिजत की थीं, क े ल इ लिलए क्योंविक उ क े पा प ीक्षा की अंधितम धितथिथ प आ ए ीआईर्टी प्रमार्ण पत्र नहीं था, उ े वि ा श्रेर्णी क े तहत प्रधितफल े ंधिर्चत नहीं विकया जा कता है । भा त क े ंवि ान क े अनुच्छेद 226(3) क े तहत अपीलार्थिथयों द्वा ा दाय आ ेदन को उप ोG तक प खारि ज क विदया गया औ अंतरि म आदेश को पूर्ण बना विदया गया । इ क े बाद, यह देखते हुए विक मामले में विक ी अन्य बिंबदु प विनर्णय नहीं विकया जाना था, वि द्वत एकल न्याया ीश ने यह पाया विक ओबी ी (वि ा) कोर्टा क े तहत 1996 विनयमों क े विनयम 266-ए क े ंदभ में प्रत्यथ[ आ ए ीआईर्टी विहत योग्यता औ शैक्षथिर्णक योग्यता क े अनु ा विनयुविG क े लिलए वि र्चा विकए जाने का हकदा था, भले ही जो ो बाद में अधि ग्रविहत विकया गया था, यविद ह अन्यथा उपयुG पाई जाती है. रि र्ट याधिर्चका स् ीका की गई। खंडपीठ ने, आक्षेविपत फ ै ले द्वा ा, डी. बी. सि वि ल रि र्ट याधिर्चका ंख्या- 13268/2015 विदनांविकत 11.02.2016 में दू ी खंडपीठ क े फ ै ले का भी वि स्ता े उल्लेख विकया। क ु छ अनुच्छेद उद्धृत क ने क े बाद, खंडपीठ यह विनष्कर्ष विनकालने क े लिलए आगे बढ़ती है विक कथिथत विनर्णय प विनभ ता खते हुए वि द्वत एकल न्याया ीश ने ही विनर्णय विदया विक आ ए ीआईर्टी प्रमार्ण पत्र क े ंबं में प्रधित ादी को छ ू र्ट दी जानी र्चाविहए। (8) हमें प्रश्नगत विनयमों प ध्यान देना र्चाविहए। ाजस्थान शैधिक्षक अ ीनस्थ े ा विनयम, 1971 क े विनयम 11 में यह प्रा ान है विक उम्मीद ा क े पा बताए गई योग्यता क े अला ा ांथिछत अनुभ भी होना र्चाविहए। (9) 1996 क े विनयमों का विनयम 266-क इ प्रका हैः “266 क. इन विनयमों में क ु छ भी विनविहत होने क े बा जूद, वि ा/तलाकशुदा मविहलाओं, सिजन्हें विनयम 266 क े पू त[ प ंतुक क े तहत बी. ए. र्टी. ी/बी. एड. की आ श्यक शैक्षथिर्णक योग्यता में छ ू र्ट देने क े बाद थिशक्षक क े पद प विनयुविG दी गई है, को अपेधिक्षत शैक्षथिर्णक योग्यता अर्जिजत क ने की ता ीख े विनयविमत विकया जाएगा।" यह ह विनयम है जो खंडपीठ औ वि द्वान एकल न्याया ीश दोनों क े विनर्णय का आ ा है। र्चूंविक उप ोG 11.02.2016 क े खंडपीठ क े विनर्णय प भी विनभ ता खी गई है, हम ंक्षेप में उ मुद्दे का उल्लेख क कते हैं जो उG मामले में उठा था औ ह आदेश जो ास्त में उG खंडपीठ द्वा ा पारि त विकया गया था। न्यायालय ाजस्थान वि द्यालय हायक अ ीनस्थ े ा विनयम, 2015 क े विनयम 16(1) की ै ता प वि र्चा क हा था। इ में याधिर्चकाकता या तो वि ाएं/तलाकशुदा थे सिजनक े लिलए आ क्षर्ण था।स्पष्ट रूप े न्यायालय क े मक्ष उठाई गई थिशकायत उ अनुभ क े ंबं में थी जो एक वि ा/तलाकशुदा उम्मीद ा क े लिलए पात्रता की शत‹ में े एक क े रूप में विन ारि त विकया गया था। उनका यह तक था विक अन्य बातों क े ाथ- ाथ प्रदान विकया गया आ क्षर्ण एक पूर्ण प्रह न बना हेगा क्योंविक तलाकशुदा/वि ाओं े अनुभ प्राप्त क ने प जो देने े आ क्षर्ण का प्रा ान एक मृत पत्र बन जाएगा। इ में न्यायालय ने ाजस्थान शैधिक्षक अ ीनस्थ े ा विनयम, 1971 क े विनयम 11 का उल्लेख विकया।उ में ंशो न विकया गया। इ क े बाद न्यायालय ने 1996 क े विनयमों क े विनयम 266-ए का उल्लेख विकया। विनयम 16, यह खंडपीठ द्वा ा देखा गया था एक मन् य पीठ द्वा ा ब क ा खा गया था।.इ क े पश्चात्, न्यायालय ने विनम्नलिललिखत मत व्यG विकयाः "पक्षका ों क े कील द्वा ा की गई प्रस्तुधितयों औ विनर्णय (उपयुG) को ध्यान में खते हुए, जहां तक विनयम 16 की ै ता का ंबं है, हम इ मुद्दे की जांर्च क ने क े लिलए कोई औधिर्चत्य नहीं पाते हैं औ यह विनर्णय (उपयुG) क े आलोक में अनछ ु आ नहीं है, हालांविक वि ा/तलाकशुदा मविहला उम्मीद ा ों क े लिलए अनुभ में छ ू र्ट प्रदान क ने क े लिलए औ विनयमा ली 2015 में ंलग्न अनु ूर्ची में शाविमल वि ालय हायक क े पद क े लिलए आयोसिजत र्चयन प्रवि`या में भाग लेने क े लिलए औ इ क े प्रकाश में अभ्या ेदन क ने की स् तंत्रता का हम उधिर्चत औधिर्चत्य पाते हैं औ इथिछत स् तंत्रता प्रदान क ना उधिर्चत मझते हैं। तदनु ा, विनयम, 2015 क े विनयम 16 की ै ता को ब क ा खते हुए, सिज े हमा े ामने आक्षेपधित विकया गया है, हम याधिर्चकाकताओं को ाज्य का /विनयुG प्राधि का ी क े मक्ष वि ा/तलाकशुदा उम्मीद ा को वि ज्ञापन विदनांक 21-7-2015 क े अनु र्ण में विनयम 16 क े ंदभ में अपेधिक्षत योग्यता खने/प्राप्त क ने में एक र्ष क े अनुभ में छ ू र्ट प्रदान क ने क े लिलए अभ्या ेदन क ने की स् तंत्रता क ने की स् तंत्रता प्रदान क ना उधिर्चत मझते हैं। औ यविद इ त ह का अभ्या ेदन विकया जाता है, तो ाज्य का /विनयुG प्राधि का ी े यह उम्मीद की जाती है विक ह विनयमा ली 2015 क े विनयम 41 क े तहत अपनी शविG का उपयोग क ते मय इ प हानुभूधितपू क वि र्चा क ेगा औ उ प जल्द े जल्द विनर्णय लिलया जाएगा। इन विनदtशों/विर्टप्पथिर्णयों क े ाथ, रि र्ट याधिर्चका का विनपर्टा ा विकया जाता है।" (10) इ मामले क े तथ्यों प आते हुए, प्रधित ादी ने उ वि ज्ञापन क े अनु र्ण में आ ेदन विकया जो लिलविपक की विनयुविG क े लिलए र्ष 2013 में जा ी विकया गया था। प्रधित ादी क े पा आ श्यक योग्यताओं में े एक नहीं थी अथात, आ ए ीआईर्टी।यह योग्यता आ ेदन दालिखल क ने की विन ारि त अंधितम धितथिथ तक अर्जिजत नहीं की जा की। औ तो औ ह बढ़ी हुई अ धि क े भीत भी योग्यता हासि ल नहीं क की औ वि ज्ञापन क े ंदभ में उ की उम्मीद ा ी प आगे का ाई नहीं की जा की। बाद में यह हुआ विक उ ने र्ष 2014 में विन ारि त मय े काफी बाद में योग्यता हासि ल क ली।इ में कोई ंदेह नहीं है विक यह वि ज्ञापन र्ष 2017 में जा ी विकया गया था, जै ा विक पहले ही देखा जा र्चुका है।वि ज्ञापन े हमें पता र्चलता है विक यह कोई नया वि ज्ञापन नहीं है। यविद यह एक नया वि ज्ञापन होता सिज में आ ेदनों को आमंवित्रत विकया गया होता औ एक नई ता ीख का प्रा ान विकया गया होता, जो वि ज्ञापन में विन ारि त की गई विक ी भी ता ीख क े अभा में इ न्यायालय द्वा ा विदए गए विनर्णय क े आलोक में आ ेदन क ने की ता ीख क े रूप में ली जा कती थी, तो मामला अलग होता । लेविकन 2017 में जा ी वि ज्ञापन क े तहत 2013 की भत[ को उन लोगों क े ंबं में आगे बढ़ाने प वि र्चा विकया गया था, सिजन्होंने र्ष 2013 में जा ी विकए गए पू वि ज्ञापन क े अनु ा पात्रता हासि ल की थी। इ का मतलब था विक सिजन उम्मीद ा ों क े पा अंधितम धितथिथ को योग्यता थी जो विन ारि त की गई थी या कम े कम वि स्तारि त अ धि क े भीत सिजनक े पा थी, उन प ही वि र्चा विकया जाएगा। प्रधित ादी ने एक आ ेदन दालिखल विकया जै ा विक पहले े ही नोर्ट विकया गया है। उ में ह इ तथ्य प वि ाद नहीं क ती है विक उ क े पा र्ष 2013 में आ ए ीआईर्टी की योग्यता नहीं थी। इ े स्पष्ट रूप े एक नए वि ज्ञापन क े रूप में लेते हुए, ह आ ेदन क ती है।इ आ ेदन को विमधित द्वा ा यह देखते हुए खारि ज क विदया जाता है क्योंविक उ क े पा आ शयक योग्यता नहीं थी। इ स्त प एक औ पहलू जो ध्यान में आया है ह है विमधित का काय ृत्त सिज में यह वि र्चा विकया गया है विक ऐ े व्यविG भी हो कते हैं सिजन्हें विनयुविG दी गई है। इ तथ्य को ध्यान में खते हुए, हम कथनात्मक क े ाथ आगे बढ़ते हैं। (11) जहां तक स् यं विनयम 266-क का ंबं है, विनम्नलिललिखत प ध्यान विदया गया हैः विनयम 266 क े पू त[ प्रा ान क े तहत बी. ए. र्टी. ी/बी. एड. की आ श्यक शैधिक्षक योग्यता में छ े बाद थिशक्षक क े पद प विनयुविG पाने ाली वि ा/तलाकशुदा मविहलाओं को उ धितथिथ े विनयविमत विकया जाएगा सिज धितथिथ को उन्होंने अपेधिक्षत शैधिक्षक योग्यता हासि ल की थी। विनयम 266-ए क े आ ेदन क े लिलए पहली आ श्यक आ श्यकता यह है विक वि ा/तलाकशुदा को विनयुG विकया गया हो। इ ंदभ में, हम देखते हैं विक बाद में जा ी विकए गए वि ज्ञापन क े ंबं में भी, यह वि र्चा विकया गया था विक ऐ े व्यविG हो कते हैं सिजन्हें विनयुG विकया गया हो। यहां तक विक इ आ ा प आगे बढ़ते हुए विक विनयम 266-ए थिशक्षक क े अला ा अन्य पदों क े मामलों में अन्यथा लागू है, तथ्य यह है विक यह विनयम इ का र्ण े लागू नहीं होगा विक सिज विनयुविG क े आ ा प विनयम 266-ए का लाभ प्रधित ादी को विमल कता था, उ प्रश्नगत पद प उ े विनयुG नहीं विकया गया था। आगे यह भी देखा जा कता है विक विनयम 266-ए में यह विनविहत है की बीए र्टी ी/बीएड की आ श्यक शैधिक्षक योग्यता में छ े बाद विनयम 266 क े पू प्रा ान क े तहत थिशक्षक को विनयुविG दी जाती है। सिज अहता प न्यायालय इ मामले में चिंर्चताशील है, ह आ ए ीआईर्टी है। विनयम 266 क में आ. ए. ी. आई. र्टी. की अहता क े बा े में कोई उल्लेख नहीं है। आहता, दू े शब्दों में, जो वि र्षय स्तु हैं, विनयम में स्पष्ट रूप े विन ारि त की गई हैं औ जो प्राशनगत आहता े अलग हैं। सिज पद क े ंदभ में न्यायालय वि र्चा शील है ह विनयम 266-क में दशाए गए पद े थिभन्न है। प्रधित ादी क े वि द्वान कील ने ास्त में यह प्रस्तुत विकया की विनयम 266-ए एलडी ी क े पद प भी लागू होता है। अग ऐ ा भी है, मामले क े तथ्यों में विनयम का अविन ाय घर्टक प्रधित ादी द्वा ा स्पष्ट रूप े पू ा नहीं विकया गया है क्योंविक प्रधित ादी विनयुG नहीं विकया गया था। (12) जहां तक 11 फ ी, 2016 को खंडपीठ क े विनर्णय का ंबं है, न्यायालय उ मे ास्त में विनयम 16 की र्चुनौती प वि र्चा क हा था। न्यायालय उ मन् य पीठ े हमत हो गया सिज ने विनयम 16 की ै ता को ब क ा खा था। न्यायालय ने क े ल इतना विकया विक उ ने वि ा/अवि ाविहता उम्मीद ा को एक र्ष क े अनुभ में छ े लिलए का क े मक्ष अपनी थिशकायतों का अभ्या ेदन प्रस्तुत क ने क े लिलए याधिर्चकाकताओं को विनदtश विदया औ न्यायालय ने का े अपेक्षा की विक ह 2015 क े विनयम 41 क े तहत शविG का प्रयोग क क े इ प हानुभूधितपू क वि र्चा क ेगी। हमा ा वि र्चा है विक प्रत्यथ[ द्वा ा मांगी गई ाहत प्रदान क ने क े लिलए उ प कोई विनभ ता नहीं खी जा कती थी। हमने यह भी पाया विक प्रधित ादी प विनयम 266-ए लागू क ने का कोई औधिर्चत्य नहीं है।दू े शब्दों में, प्रधित ादी क े पा आ ेदन की अंधितम धितथिथ या वि स्तारि त धितथिथ तक एक आ श्यक योग्यता (आ ए ीआईर्टी) नहीं होने क े का र्ण, र्ष 2017 में अधि ूर्चना जा ी विकए जाने क े मय, जो एक नई अधि ूर्चना नहीं थी, बस्थिल्क विपछली अधि ूर्चना की विन ंत ता में एक अधि ूर्चना थी, उ प वि र्चा नहीं विकया जा कता था। यह ऐ ा मामला नहीं है जहां प्रत्यथ[ को अंत ाल में विनयुG विकया गया था। इ लिलए, यह ऐ ा मामला नहीं है जहां आक्षेविपत विनर्णय क े आ ा का मथन विकया जा क े । परि र्णामस् रूप, हम पाते हैं विक अपीलकताओं ने आक्षेविपत विनर्णय में हस्तक्षेप का मामला बनाया है। (13) हम प्रधित ादी क े इ तक को स् ीका नहीं क पा हें हैं विक एक ं ै ाविनक न्यायालय होने क े नाते औ र्चूंविक अधि का ों को अनुच्छेद 15 में घोविर्षत विकया गया है औ एक वि ा होने क े नाते हानुभूधितपूर्ण दृविष्टकोर्ण अपनाने की आ श्यकता क े र्चलते, हम अनुच्छेद 136 क े तहत अपनी अधि कारि ता का उपयोग क ने े इनका क कते हैं। यह विनस् ंदेह र्च है विक अनुच्छेद 136 एक वि शेर्ष औ अ ा ा र्ण क्षेत्राधि का है लेविकन उ अथ में वि र्चा क ना दू की बात है, जब यहाँ प प्रधित ादी क े पा आ श्यक योग्यता नहीं खने का स्पष्ट मामला बनता है, प न्यायालय विफ भी विनयुविG का विनदtश दे कता है।यह स्पष्ट रूप े अ ै औ अ ं ै ाविनक होगा। प्रधित ादी क े प्रधित इ न्यायालय की विनधिश्चत रूप े प्रधित ादी क े लिलए पू ी हानुभूधित होने क े बा जूद इ का परि र्णाम ये नहीं हो कता की विनयुविG को विनयंवित्रत क ने ाले कानून क े इत जाक ा जविनक ोजगा विदया जा क े । यह एक स्पष्ट मामला है जहां प्रधित ादी विनयुविG क े लिलए वि र्चा विकए जाने क े योग्य नहीं था। उन प वि र्चा क ने क े विनदtथिश का आ ा हमें बहुत नाजुक औ अ मथनीय प्रतीत होता है। ास्त में, ऐ े मामलों में ं ै ाविनक न्यायालय का यह कतव्य है विक ह प्राधि कारि यों की का ाई को बनाए खे जो प्रश्नगत प्रवि`या क े ख्त अनुरुप हों। (14) हमें आक्षेविपत फ ै ले को पलर्टने का कोई का र्ण नज नहीं आता।तदनु ा, अपील स् ीका की जाती है है।आक्षेविपत विनर्णय द्द माना जाएगा। रि र्ट याधिर्चका खारि ज की जाती है। लागत क े ंबं में कोई आदेश नहीं होगा।.................... (क े. एम. जो ेफ, जे.) …..................... (ऋविर्षक े श ॉय, जे.) नई विदल्ली; 2 फ ी, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.