Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्याएँ 2859-2861/2022
(विवशेष अनुमति याति/का (सी) संख्याएँ 3384-3386/2017 से उद्भू )
/ंद्र प्रकाश विमश्रा अपीलार्थी: (गण)
बनाम
वि>पकार्ट@ इंतिBया प्राइवेर्ट लिलविमर्टेB और अन्य प्रति वादी (गण)
विनण@य
न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
2. इन अपीलों में अपीलक ा@, जो व @मान में संयुक्त आयुक्त, वाणिणज्यिTयक कर, मुरादाबाद क े रूप में काय@र है, ने रिरर्ट याति/का संख्या 80/2016 और 168/2016 में विदनांक 29.02.2016 क े आदेश और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर रिरर्ट कर संख्या 546/2016 में विदनांक 02.08.2016 क े आदेश पर भी सवाल उठाया है।
2.1. आक्षेविप आदेशों से व्यणिर्थी अपीलक ा@, जहां क प्रति क ू ल विर्टप्पणिणयां और विर्टप्पणिणयां की गई हैं और वाणिणज्यिTयक कर, रेंज-2, सेक्र्टर-2, नोएBा क े उपायुक्त क े रूप में काय@ कर े समय उसक े काय^ और /ूकों क े संबं में विनद_श उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" जारी विकए गए हैं, अर्थीा@ ्, एकपक्षीय मूल्यांकन आदेश पारिर करना और उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्ति कर अति विनयम, 2008[1] क े ह वसूली की काय@वाही को लागू करना, रिरर्ट याति/काक ा@ (यहां प्रत्यर्थी: संख्या 1)2 ।
3. आक्षेविप आदेशों को अन्यर्थीा राTय द्वारा या रिरर्ट याति/काक ा@ द्वारा /ुनौ ी नहीं दी गई है।इसलिलए सभी थ्यात्मक पहलुओं पर विवस् ार देने की आवश्यक ा नहीं है।व @मान उद्देश्य क े लिलए प्रासंविगक थ्य इस प्रकार हैंः
3.1. रिरर्ट याति/का संख्या 80/2016 क े माध्यम से, रिरर्ट याति/काक ा@ ने वसूली की काय@वाही पर सवाल उठाया, जैसा विक उसक े लिvलाफ अपीलक ा@ द्वारा मूल्यांकन प्राति करण क े रूप में अपनी क्षम ा में पारिर एक एकपक्षीय अनंति म मूल्यांकन आदेश क े अनुसार विकया गया र्थीा।कणिर्थी रिरर्ट याति/का क े जवाब में, विवभाग की ओर से ब ाया गया विक रिरर्ट याति/काक ा@ द्वारा बदले गए प े को दज@ करने क े लिलए विकया गया एक आवेदन 02.09.2014 को पहले ही vारिरज कर विदया गया र्थीा और इसलिलए, नोविर्टस की ामील क े लिलए उति/ कदम उठाकर एक पक्षीय आदेश पारिर विकया गया र्थीा।
3.2. जैसा विक पंजीकरण प्राति कारी (अपीलक ा@ नहीं) द्वारा पारिर विकया गया है कणिर्थी आदेश विदनांक 02.09.2014 को बदले हुए प े को दज@ करने की प्रार्थी@ना को vारिरज करने को अन्य रिरर्ट याति/का संख्या 168/2016 में /ुनौ ी दी गई र्थीी।
3.3. इस प्रकार, संक्षेप में और अर्थी@ में, एकपक्षीय अनंति म मूल्यांकन आदेश विदनांक 15.12.2015 और वसूली की काय@वाही र्थीा परिरवर्ति प े क े पंजीकरण 1 ए ज्यिस्मनपश्चा ् ‘उत्तर प्रदेश वैर्ट अति विनयम’ क े रूप में विनर्दिदष्ट विकया गया है। 2 प्रत्यर्थी: संख्या 1 द्वारा दालिvल रिरर्ट याति/काओं में आक्षेविप आदेश पारिर विकए गए र्थीे।वण@नों की विनरं र ा क े लिलए और विदए गए संदभ@ में, प्रत्यर्थी: संख्या 1 को 'रिरर्ट याति/काक ा@' क े रूप में भी संदर्भिभ विकया गया है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क े लिलए प्रार्थी@ना को vारिरज करना संख्या उक्त रिरर्ट याति/काओं 80/2016 और 168/2016 में उच्च न्यायालय क े समक्ष /ुनौ ी र्थीी।जैसा विक देvा गया है, अपीलक ा@ वाणिणज्यिTयक कर, रेंज-2, सेक्र्टर-2, नोएBा क े उपायुक्त क े रूप में काय@ कर रहा र्थीा और उसने विन ा@रण प्राति करण क े रूप में अपनी क्षम ा में पूव क्त एकपक्षीय आदेश पारिर विकया र्थीा। र्थीाविप, परिरवर्ति प े को पंजीक ृ आदेश की प्रार्थी@ना को अस्वीकार आदेश का पूव क्त आदेश सहायक आयुक्त, वाणिणज्यिTयक कर, प्रभाग-2, नोएBा क े रूप में पंजीकरण प्राति करण द्वारा पारिर विकया गया र्थीा।
4. उक्त रिरर्ट याति/काओं में शाविमल मुद्दों पर विव/ार विकया गया और उच्च न्यायालय ने अपने सामान्य आदेश विदनांक 29.02.2016 में विव/ार विकया।.
4.1. उच्च न्यायालय ने अविनवाय@ रूप से पाया विक रिरर्ट याति/काक ा@ क े लिvलाफ एक एकपक्षीय आदेश नोविर्टस की उति/ सेवा क े विबना पारिर विकया गया र्थीा।रिरर्ट याति/काक ा@ क े अनुसार, इस थ्य पर ध्यान विदया गया र्थीा विक इसने अपने व्यवसाय क े स्र्थीान को नोएBा से गासिजयाबाद में स्र्थीानां रिर कर विदया र्थीा, जो विक विकए गए आवेदनों और इसक े द्वारा संबोति अन्य सं/ारों क े मद्देनजर विवभाग क े ज्ञान में बहु अति क र्थीा।गासिजयाबाद में नोविर्टस की ामील क े संबं में राTय की ओर से एक सुझाव र्थीा, लेविकन विनयमों क े ह आवश्यक ाओं की व्याख्या क े बाद उस सेवा को भी उच्च न्यायालय द्वारा पया@प्त नहीं माना गया र्थीा।
4.2. इसलिलए, उच्च न्यायालय ने विदनांक 15.12.2015 क े एकपक्षीय विन ा@रण आदेश को अपास् कर विदया और वसूली की काय@वाही को रद्द कर विदया।उच्च न्यायालय ने व्यापार क े स्र्थीान क े परिरव @न क े पंजीकरण क े लिलए रिरर्ट याति/काक ा@ क े आवेदन को vारिरज कर े हुए विदनांक 02.09.2014 क े आदेश को भी अपास् कर विदया और और पंजीकरण प्राति कारी को रिरर्ट याति/काक ा@ द्वारा अपेतिक्ष शुल्क जमा करने की अनुमति देने क े बाद व्यवसाय क े स्र्थीान क े परिरव @न क े लिलए उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विदनांक 05.12.2013 को रिरर्ट याति/काक ा@ द्वारा विकए गए आवेदन पर कार@वाई करने का विनद_श विदया।
4.3. उच्च न्यायालय ने पाया विक विवभाग द्वारा रिरर्ट याति/काक ा@ क े vा े से कानूनी अति कार क े विबना 49,82,01,250/- रुपये की बड़ी राणिश विनकाली गई र्थीी। अ: उपायुक्त, वाणिणज्यिTयक कर, रेंज-II, नोएBा को स्वीक ृ कर का समायोजन कर उ 0 प्र 0 वैर्ट अति विनयम की ारा 40 क े अनुसार उक्त राणिश को ब्याज सविह वापस करने का विनद_श विदया गया।विनतिश्च रूप से उच्च न्यायालय ने विन ा@रण प्राति करण क े लिलए रिरर्ट याति/काक ा@ को नोविर्टस की उति/ ामील क े बाद और उन्हें सुनवाई का अवसर देने क े बाद कानून क े अनुसार नए मूल्यांकन करने की छ ू र्ट दे दी।
5. आक्षेविप सामान्य आदेश विदनांक 29.02.2016 क े उक्त भाग अर्थीा@, पैरा 34 क उच्च न्यायालय ने मामले में शाविमल मुख्य मुद्दों और संबंति पक्षों क े क^ पर विव/ार विकया और उसक े बाद भौति क मुद्दों पर अपने विनष्कष^ क े परिरणामस्वरूप आदेश पारिर विकया विक रिरर्ट याति/काक ा@ पर नोविर्टस की उति/ ामील नहीं की गई र्थीी और एक पक्षीय आदेश अपोषणीय र्थीे।
6. हालांविक, मामले को बंद करने से पूव@, उच्च न्यायालय ने अपनी राय व्यक्त की विक आक्षेविप कार@वाइयाँ, सिजसक े कारण नोविर्टस की उति/ ामील क े विबना एकपक्षीय आदेश/काय@वाही हुई, रिरर्ट याति/काक ा@ क े विह ों क े विवरुद्ध विवभाग की ओर से जानबूझकर विकया गया प्रयास र्थीा; और विन ा@रण प्राति कारी ने लागू विनयमों क े घोर उल्लंघन में सेवा को प्रभावी कराने क े लिलए अनुति/ रणनीति अपनाई।
6.1. इसलिलए, उच्च न्यायालय ने रिरर्ट याति/काक ा@ को विवभाग द्वारा भुग ान विकए जाने क े लिलए 2,00,000/- रुपये का v/@ अति रोविप विकया और आयुक्त, उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वाणिणज्यिTयक कर, लvनऊ पर एक जां/ करने और अति रोविप की गई राणिश की वसूली क े लिलए दोषी अति कारी पर सिजम्मेदारी य करने क े लिलए छोड़ विदया।आदेश विदनांक 29.02.2016 का उक्त भाग, सिजस पर अपीलक ा@ द्वारा इस अपील में प्रश्न विकया गया है, इस प्रकार है:- "35. हमें उस रीक े का पालन करना /ाविहए सिजसमें उत्तरदा ाओं ने मूल्यांकन क े सार्थी आगे बढ़े हैं और याति/काक ा@ क े बैंक vा े से जल्दबाजी में राणिश की वसूली की है, यह निंनदनीय है और अति विनयम क े प्राव ानों का घोर उल्लंघन है। हम पा े हैं विक विन ा@रण वष@ 2011-12, 2013-14 और 2014-15 क े लिलए एकपक्षीय विन ा@रण आदेश याति/काक ा@ को नोविर्टस की पया@प्त ामील विकए विबना विकए गए र्थीे। इन मूल्यांकन काय@वाही को अपील में इस संतिक्षप्त आ ार पर रद्द कर विदया गया र्थीा विक सम्मन की ामील उस प े पर भेजी गई र्थीी जहां याति/काक ा@ अब अपना व्यवसाय नहीं कर रहा र्थीा।इस जानकारी क े बावजूद, प्रत्यर्थी:गणों ने जानबूझकर नोएBा क े प े पर याति/काक ा@ को अप्रैल से अक्र्टूबर, 2015 की अवति क े लिलए अनंति म मूल्यांकन क े लिलए नोविर्टस देना /ुना, यह अच्छी रह से जान े हुए विक याति/काक ा@ नोएBा क े प े से कोई व्यवसाय नहीं कर रहा र्थीा। याति/काक ा@ को अच्छी रह से प ा र्थीा विक याति/काक ा@ ने नोएBा से गासिजयाबाद में अपना व्यवसाय स्र्थीान स्र्थीानां रिर कर विदया र्थीा क्योंविक उन्होंने गासिजयाबाद में नोविर्टस देने का एक विनरर्थी@क प्रयास विकया र्थीा, लेविकन बाद में उन कारणों क े लिलए जो उन्हें सबसे अच्छी रह से ज्ञा र्थीे, उन्होंने जानबूझकर नोएBा क े प े पर ति/पकाकर नोविर्टस देने का फ ै सला विकया। कर विन ा@रण प्राति कारी द्वारा याति/काक ा@ पर सेवा प्रभावी कराने क े लिलए अपनाई गई ऐसी रणनीति विनयमों क े विनयम 72 का घोर उल्लंघन है।
36. हम यह भी पा े हैं विक सेवा का पूण@ काय@ /ार विदनों क े भी र सेवा क े दूसरे रीक े अर्थीा@ ् पाव ी क े सार्थी पंजीक ृ Bाक द्वारा एक सार्थी सेवा का सहारा लिलए विबना विकया गया र्थीा।मूल्यांकन आदेश से संक े विमल ा है विक उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विन ा@रण काय@वाही सुनवाई की ारीv की पहली और अंति म ति णिर्थी 10.12.2015 र्थीी और विन ा@रण आदेश विदनांक 15.12.2015 को पारिर विकया गया र्थीा। प्रति शपर्थी पत्र से प ा /ल ा है विक मूल्यांकन आदेश की ामील नोएBा क े प े पर कु क’ द्वारा की गई र्थीी।यह प्रत्यर्थी: द्वारा जानबूझकर विकया गया र्थीा ाविक प्रत्यर्थी: बैंक अति कारिरयों पर दबाव Bालकर गार्दिनशी नोविर्टस क े माध्यम से राणिश विनकाल सक ें ।न्यायालय को यह महसूस हो ा है विक प्रत्यर्भिर्थीयों द्वारा एकपक्षीय मूल्यांकन आदेश पारिर करक े और याति/काक ा@ को वै रूप से ामील न करने की अनुमति देकर संविदग् रीक े से याति/काक ा@ क े बैंक vा े से पैसे विनकालने का एक जानबूझकर प्रयास विकया गया र्थीा।यविद वाणिणज्यिTयक कर विवभाग विबना विकसी वै सेवा क े भारी मात्रा में न विनकाल ा है ो बड़े कारोबारी घरानों क े लिलए अपना कारोबार करना मुज्यिश्कल हो जाएगा। ऐसे व्यापारिरक घरानों को अपने व्यवसाय को उत्तर प्रदेश राTय से बाहर स्र्थीानां रिर करने क े लिलए मजबूर होना पड़ेगा।
37. न ीज न, याति/काक ा@ लाग का हकदार है।रिरर्ट याति/काओं को 2,00,000/- रुपये (दो लाv रुपये मात्र) की लाग क े सार्थी अनुमति दी जा ी है, सिजसका भुग ान वाणिणज्यिTयक कर विवभाग द्वारा याति/काक ा@ को इस आदेश की प्रमाणिण प्रति दालिvल करने की ारीv से दो सप्ताह क े भी र विकया जाएगा।यविद राणिश का भुग ान नहीं विकया जा ा है, ो याति/काक ा@ इस याति/का में एक उति/ आवेदन करने क े लिलए स्व ंत्र होगा।.
38. वाणिणज्यिTयक कर आयुक्त, लvनऊ को जां/ करने और उक्त राणिश की वसूली क े लिलए दोषी अति कारी पर सिजम्मेदारी य करने का अति कार होगा।”
7. उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रकार पारिर आदेश क े बाद भी, अपीलक ा@ ने विफर से विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में रिरर्ट याति/काक ा@ क े लिvलाफ विदनांक 04.05.2016 को एक और मूल्यांकन आदेश ैयार विकया।इस आदेश पर याति/काक ा@ ने उच्च न्यायालय में एक और रिरर्ट याति/का क े माध्यम से विफर से सवाल उठाया, जो रिरर्ट र्टैक्स संख्या 546/2016 है।इसक े बाद की रिरर्ट याति/का उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" में व @मान अपीलार्थी: को व्यविक्तग रूप से प्रत्यर्थी: संख्या 1 क े रूप में प्रस् ु विकया गया र्थीा।
7.1. विदनांक 11.07.2016 को, उक्त याति/का पर प्रारंभ में काय@वाही कर े हुए, उच्च न्यायालय ने पृष्ठभूविम क े पहलुओं का उल्लेv विकया, विवशेष रूप से उक्त आदेश विदनांक 29.02.2016 को और विफर इस बा पर आपलित्त ज ाई विक व @मान अपीलक ा@ ने विदनांक 04.05.2016 को आक्षेविप मूल्यांकन आदेश पारिर करने का विवकल्प /ुना है, जो विदनांक 29.02.2016 क े आदेश क े अनुरूप नहीं र्थीा।उच्च न्यायालय ने नोविर्टस जारी कर े हुए और आक्षेविप मूल्यांकन आदेश और परिरणामी नोविर्टस क े सं/ालन पर रोक लगा े हुए विनम्नलिललिv विर्टप्पणी कीः- "यह क @ विदया गया है विक याति/काक ा@ओं क े पंजीक ृ काया@लय का प ा गासिजयाबाद में बदल विदया गया है और उपायुक्त वाणिणज्यिTयक कर, नोएBा को मूल्यांकन करने का कोई अति कार क्षेत्र नहीं र्थीा और यह इस न्यायालय द्वारा वि>पकार्ट@ इंतिBया प्राइवेर्ट लिलविमर्टेB बनाम यू.पी. राTय और अन्य, 2016 एनर्टीएन (वॉल्यूम 60) 313 में विदनांक 29.02.2016 क े अपने फ ै सले में भी न्यायालय ने पाया विक नोएBा में प्राति करण क े पास गासिजयाबाद में याति/काक ा@ क ं पनी क े व्यवसाय / पंजीक ृ काया@लय क े स्र्थीान क े परिरव @न क े बाद मूल्यांकन करने का कोई अति कार क्षेत्र नहीं र्थीा, विफर भी प्रत्यर्थी: संख्या 1 ने नोएBा में कणिर्थी प े पर नोविर्टस देने क े लिलए आगे बढ़े और उसक े बाद आक्षेविप आदेश पारिर विकया।
2. यह क @ विकया गया है विक आक्षेविप आदेश स्पष्ट रूप से अवै, अति कार क्षेत्र क े विबना है और इस न्यायालय क े उस फ ै सले को विवफल करने क े लिलए पारिर विकया गया है सिजसमें संबंति अति कारी क े लिvलाफ गंभीर सख् ी विकया गया र्थीा और इस न्यायालय ने दो लाv रुपये की लाग लगाई र्थीी। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" हम इसे एक गंभीर मामला मान े हैं।इस न्यायालय क े समक्ष विदनांक 02.08.2016 को संबंति अणिभलेvों क े सार्थी प्रत्यर्थी: 1 को स्वयं उपज्यिस्र्थी हों।वह अगली ारीv को रिरर्ट याति/का का पैरा-वार जवाब भी दालिvल करेगा।
4. अगले आदेश क, आक्षेविप विन ा@रण आदेश विदनांक 04.05.2016 र्थीा नोविर्टस विदनांक 07.04.2016 का प्रभाव एवं सं/ालन पर रोक रहेगी।”
7.2. जब मामले को उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 02.08.2016 को आगे विव/ार क े लिलए उठाया गया र्थीा, ो विवभाग क े विवद्वान स्र्थीायी अति वक्ता द्वारा यह कहा गया र्थीा विक व @मान अपीलक ा@ द्वारा विदनांक 23.07.2016 को आक्षेविप विन ा@रण आदेश वापस ले लिलए गए र्थीे और इसलिलए रिरर्ट याति/का व्यावहारिरक रूप से विनष्फल हो गई र्थीी।अपीलक ा@ जो न्यायालय में उपज्यिस्र्थी र्थीा, की ओर से यह भी कहा गया र्थीा विक उसकी ओर से एक गल ी हुई र्थीी और वह एक माफी मांग रहा र्थीा सिजस पर न्यायालय द्वारा विव/ार विकया जा सक ा है।
7.3. र्थीाविप, अपीलक ा@ क े काय@ को, विवशेष रूप से 29.02.2016 क े आदेश में कठोर और उसक े द्वारा अति रोविप दांतिBक v/^ क े बाद उसक े काय^ और लोपों क े लिलए उच्च न्यायालय ने गंभीर रूप से संविदग् माना।इस प्रकार, अपीलक ा@ पर व्यविक्तग रूप से 50,000/- रुपये की लाग अति रोविप कर े समय, उच्च न्यायालय ने विर्टप्पणी की विक विवभागीय कार@वाई की जाए और इसे जल्द से जल्द अंति म रूप विदया जाए और विवभाग इस बा पर भी विव/ार करेगा विक क्या अपीलक ा@ ऐसे महत्वपूण@ अ @-न्यातियक काय^ को सौंपे जाने क े योग्य व्यविक्त र्थीा। विदनांक 02.08.2016 क े आदेश क े प्रासंविगक भाग को उपयोगी रूप से इस प्रकार विदया जा सक ा हैः -
8. जहाँ क वे अपीलार्थी: क े विवरुद्ध काय@ कर े हैं, उक्त आदेशों पर प्रश्नति/ह्न लगाने का प्रयास कर े हुए विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री पल्लव णिशशोविदया ने कहा है विक अपीलार्थी: क े लिvलाफ उच्च न्यायालय द्वारा प्रति क ू ल विर्टप्पणिणयों और विनद_शों क े लिलए नहीं बुलाया गया र्थीा, भले ही अपीलार्थी: द्वारा मूल्यांकन प्राति कारी क े रूप में अपनी क्षम ा में पारिर आदेश अनुमोविद नहीं र्थीे क्योंविक अपीलार्थी: की ओर से कोई दुभा@वना नहीं र्थीी, सिजसने क े वल आकलन को समय पर पूरा करने और आगे की कार@वाई करने क े अपने वै ाविनक क @व्यों का पालन विकया र्थीा।
8.1. विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने प्रभावी रूप से कहा है विक रिरर्ट याति/काक ा@ (प्रति वादी संख्या 1) द्वारा प े क े परिरव @न का प्रस् ाव मौलिलक एक सविह कई कविमयों से ग्रस् र्थीा, जो विक विदनांक 05.12.2013 को विकया गया आवेदन जनवरी 2013 क े महीने में व्यवसाय क े प े में परिरव @न का आरोप लगा े हुए, यूपी वैर्ट अति विनयम की ारा 75 की आवश्यक ा क े अनुरूप नहीं र्थीा, सिजसक े ह इस रह का आवेदन घर्टना क े 30 विदनों क े भी र विकया जाना आवश्यक र्थीा। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
8.2. अपीलार्थी: क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने प्रस् ु विकया विक जब विवलंब से दालिvल विकया गया आवेदन 02.09.2014 को अस्वीकार कर विदया गया र्थीा, ो अपीलार्थी: एक विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में काय@ कर े हुए क े वल अणिभलेv पर उपलब् पंजीक ृ प े क े आ ार पर आगे बढ़ सक ा र्थीा। इसक े अलावा, यह स्पष्ट है विक जब प्रत्यर्थी: संख्या 1 पंजीक ृ प े पर उपलब् नहीं र्थीा ब अपीलार्थी: ने अपने क @व्यों का वास् विवक विनव@हन कर े हुए गासिजयाबाद में ामील की गई सू/नाओं को प्राप्त करने का भी प्रयास विकया लेविकन, उच्च न्यायालय ने उस सेवा को उति/ सेवा क े रूप में स्वीकार नहीं विकया।
8.3. विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने कहा विक एक विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में अपीलक ा@ क े वल अणिभलेv पर उपलब् थ्यों क े अनुसार आगे बढ़ा और सद्भाव क े अभाव में उस पर क ु छ भी आरोप नहीं लगाया जा सक ा है। विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने आगे बाद क े थ्यों का उल्लेv विकया है विक प े में परिरव @न क े लिलए आवेदन अं ः विदनांक 22.07.2016 को स्वीक ृ विकया गया, सिजससे विवभाग ने 20.01.2013 से प े क े परिरव @न को स्वीकार विकया; और यह विक पंजीकरण प्राति कारी अर्थीा@ सहायक आयुक्त, वाणिणज्यिTयक कर, संभाग-2, नोएBा द्वारा ऐसा आदेश पारिर करने क े ुरं बाद, अपीलक ा@ ने उनक े द्वारा पारिर आदेश विदनांक 04.05.2016 को वापस ले लिलया क्योंविक प े में इस रह क े परिरव @न क े सार्थी, मामले में उसका अति कार क्षेत्र समाप्त हो गया र्थीा।. र्थीाविप विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता का क @ है विक सक्षम प्राति कारी द्वारा इस रह क े आदेश को पारिर करने से पहले अपीलार्थी: क े वल अणिभलेv पर प्राप्त ज्यिस्र्थीति क े आ ार पर आगे बढ़ सक ा र्थीा और इस रह उस पर सद्भावना की कमी नहीं लगाई जा सक ी र्थीी।इस प्रकार, विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार आक्षेविप आदेशों में की गई कठोर और अन्य विर्टप्पणिणयों को अपास् विकए जाने की आवश्यक ा है। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
8.4. अपीलक ा@ क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने उत्तर प्रदेश वैर्ट अति विनयम की ारा 67 का भी उल्लेv विकया है विक यह प्रस् ु करने क े लिलए विक अपीलार्थी: जैसे अति कारिरयों को उनक े क @व्यों और अति कार क्षेत्र क े विनव@हन में सद्भावपूव@क विकए गए विकसी भी /ीज क े संबं में कानूनी काय@वाही क े लिvलाफ वै ाविनक संरक्षण उपलब् है।
9. राTय की ओर से उपज्यिस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री आर क े रायजादा ने प्रस् ु विकया है विक राTय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेशों क े पया@प्त अनुपालन में आगे बढ़ा है; और आदेश विदनांक 29.02.2016 क े अनुसार जां/ की गई है, लेविकन इस मामले में 27.01.2017 को इस मामले में पारिर स्र्थीगन आदेश क े मद्देनजर आगे की काय@वाही रोक दी गई है।
10. प्रत्यर्थी: संख्या 1 (रिरर्ट याति/काक ा@) श्री रुण गुलार्टी की ओर से पेश होने वाले वरिरष्ठ विवद्वान अति वक्ता ने प्रस् ु विकया है विक प्रत्यर्थी: संख्या 1 ने व @मान अपीलक ा@ क े लिvलाफ कोई व्यविक्तग मुकदमा नहीं लिलया र्थीा और न ही पहली दो याति/काएं विकसी भी आ ार पर संज्यिस्र्थी की गई र्थीीं और क े वल राTय और उसक े अति कारिरयों की कार@वाई पर सवाल उठाया गया र्थीा, विवशेष रूप से उति/ नोविर्टस क े सार्थी सुनवाई क े पया@प्त अवसर से वंति/ करने क े कारण।
10.1. विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने आगे प्रस् ु विकया है विक उच्च न्यायालय ने सही रूप में की गई कार@वाइयों और व @मान अपीलार्थी: द्वारा विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में अपनी क्षम ा में एकपक्षीय रूप से पारिर आदेशों को अस्वीक ृ विकया र्थीा। विवद्वान अति वक्ता क े अनुसार विदनांक 29.02.2016 क े आदेश का दूसरा भाग उच्च न्यायालय क े विव/ारों पर आ ारिर र्थीा स्पष्ट रूप से प्रत्यर्थी: संख्या 1 द्वारा सामना विकए गए उत्पीड़न क े कारण और राTय क े पदाति कारिरयों द्वारा उति/ और वै कार@वाई की कमी क े कारण।विवद्वान अति वक्ता ने आगे प्रस् ु विकया विक बाद की उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" रिरर्ट याति/का अर्थीा@ ् रिरर्ट र्टैक्स संख्या 546/2018 में अपीलार्थी: को व्यविक्तग रूप से एक पक्ष-प्रत्यर्थी: क े रूप में इस कारण से पक्षकार बनाया गया र्थीा विक उन्होंने उच्च न्यायालय क े आदेश विदनांक 29.02.2016 क े विवपरी होने क े बजाय विदनांक 04.05.2016 क े आदेश को पारिर करने का विवकल्प /ुना।
10.2. हालांविक, विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने स्पष्ट रूप से प्रस् ु विकया है विक प्रत्यर्थी: संख्या 1 अपीलार्थी: और अणिभयुक्त क े लिvलाफ व्यविक्तग रूप से कोई णिशकाय नहीं कर रहा है औरप्रत्यर्थी: संख्या 1 उच्च न्यायालय द्वारा अति विनण: v/_ की राणिश को बनाए रvने क े लिलए भी उत्सुक नहीं है और वह उसे वापस करने क े लिलए ैयार होगा जैसा विक इस न्यायालय द्वारा विनद_णिश विकया जाए।यह भी ब ाया गया है विक जैसा विक आदेश विदनांक 29.02.2016 द्वारा प्रदान विकया गया है, प्रत्यर्थी: संख्या 1 को क े वल 2,00,000/- रुपये की राणिश v/_ क े रूप में प्राप्त हुई है; और जैसा विक आदेश विदनांक 02.08.2016 द्वारा 50,000/- रुपये की अन्य राणिश इस न्यायालय द्वारा पारिर स्र्थीगन आदेश क े मद्देनजर प्राप्त नहीं हुआ है। 11.विकए गए अनुरो ों पर विव/ार करने क े बाद और रिरकॉB@ में रvी गई सामग्री की जां/ करने क े बाद, हमारा स्पष्ट रूप से यह विव/ार है विक आक्षेविप आदेशों क े प्रश्नग भाग v/_ क े रूप में विदए गए 2,00,000/- रुपये की राणिश क े लिलए उति/ आदेश क े सार्थी रद्द विकए जाने योग्य हैं, सिजसे प्रत्यर्थी: संख्या 1 द्वारा उति/ रूप से छोड़ विदया गया है।.
12. जहां क मामले क े गुण-दोष से संबंति आक्षेविप आदेश विदनांक 29.02.2016 में विर्टप्पणिणयों और विनष्कष^ का संबं है, उस संबं में विकसी विर्टप्पणी की आवश्यक ा नहीं है, क्योंविक इसे राTय द्वारा /ुनौ ी नहीं दी गई है। हालांविक हमारे विव/ार में भले ही आदेश क े मुख्य भाग विदनांक 29.02.2016 में उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उच्च न्यायालय क े सभी विनष्कष^ को स्वीकार कर लिलया गया हो, वे क े वल इस परिरणाम की ओर ले जाएंगे विक एकपक्षीय मूल्यांकन आदेश ैयार करने और विफर वसूली को लागू करने की मांग में आक्षेविप कार@वाई क े सार्थी-सार्थी व्यवसाय क े स्र्थीान क े परिरव @न क े पंजीकरण क े लिलए आवेदन को अस्वीकार करने में आक्षेविप कार@वाई उच्च न्यायालय क े अनुमोदन क े अनुरूप नहीं र्थीी।उच्च न्यायालय की इस रह की अस्वीक ृ ति अविनवाय@ रूप से लागू विनयमों की व्याख्या क े सार्थी-सार्थी रिरर्ट याति/का में शाविमल मुद्दों से संबंति थ्यात्मक पहलुओं क े विवश्लेषण पर आ ारिर र्थीी।
13. मामले की समग्र ा की जां/ करने क े बाद, हमारा यह म है विक भले ही उच्च न्यायालय ने पाया विक संबंति अति कारिरयों, विवशेष रूप से अपीलक ा@ क े आक्षेविप काय@ कानून क े अनुरूप नहीं र्थीे या अविनयविम र्थीे या अवै र्थीे या यहां क विक विवक ृ भी र्थीे, ऐसे विनष्कष@ अपने आप में इस विनष्कष@ की ओर नहीं ले जा रहे हैं विक विन ा@रण प्राति करण या पंजीकरण प्राति करण की ओर से कोई जानबूझकर कार@वाई या /ूक की गई र्थीी या उच्च न्यायालय द्वारा प्रयुक्त अणिभव्यविक्त क े अनुसार कोई 'रणनीति ' अपनाई गई र्थीी। प्रत्येक गल अवै या यहां क विक विवक ृ आदेश/कार@वाई को स्वयं में सद्भाव में कमी या दुभा@वना से ग्रस् नहीं कहा जा सक ा है।
14. व @मान मामले में, जब कणिर्थी रूप से प्रत्यर्थी: संख्या 1 ने कणिर्थी घर्टना क े लगभग 11 महीने बाद व्यवसाय क े स्र्थीान क े परिरव @न क े पंजीकरण क े लिलए आवेदन विकया र्थीा; और विन ा@रण आदेश ैयार कर े समय विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में अपीलार्थी: क े पास प्रत्यर्थी: संख्या 1 का कोई अन्य पंजीक ृ प ा अणिभलेv पर नहीं र्थीा, एकपक्षीय मूल्यांकन आदेश पारिर करने क े उनक े काय^ को जानबूझकर या सद्भावना में वांणिछ नहीं कहा जा सक ा र्थीा, विवशेष रूप से इस उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" थ्य को ध्यान में रv े हुए विक उनक े काया@लय से वास् व में प्रत्यर्थी: संख्या 1 पर उसक े पंजीक ृ प े पर और यहां क विक गासिजयाबाद में उसक े कणिर्थी बदले प े पर नोविर्टस ामील कराने का प्रयास विकया गया र्थीा। यविद नोविर्टस देने क े इस रह क े प्रयासों को उच्च न्यायालय द्वारा अवै या अविनयविम माना जा ा है, ो भी इसकी कर्टौ ी का समर्थी@न करना मुज्यिश्कल है विक आक्षेविप कार@वाई जानबूझकर की गई र्थीी या सद्भाव में कमी र्थीी। 14.[1] अपीलार्थी: एक विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में काय@ कर े हुए अविनतिश्च अवति क े लिलए विन ा@रण काय@वाही को लंविब नहीं रv सक ा र्थीा। 14.1. इस संदभ@ में, प्रत्यर्थी: संख्या 1 की ओर से कविमयों से संबंति उपरोक्त थ्य सबसे पहले लगभग 11 महीनों क े लिलए बदले गए व्यावसातियक प े क े पंजीकरण की मांग नहीं कर रहे हैं और विफर, सक्षम प्राति कारी (अपीलार्थी: नहीं) द्वारा इसकी देर से की गई प्रार्थी@ना को अस्वीकार करने को पूरी रह से नजरअंदाज नहीं विकया जा सक ा है।
15. उपरोक्त क े अनुसार, आवश्यक परिरव @नों क े सार्थी वह अपीलार्थी: द्वारा विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में अपनी क्षम ा में विदनांक 04.05.2016 को पारिर बाद क े आदेश पर समान रूप से लागू होगा।हालांविक, आदेश विदनांक 29.02.2016 क े विवरो में अपीलार्थी: प े क े परिरव @न क े लिलए आवेदन पर विव/ार करने क े लिलए प्र ीक्षा कर सक ा र्थीा, उच्च न्यायालय क े विनद_शानुसार या आयुक्त से विनद_श ले सक े र्थीे लेविकन, विकसी भी मामले में उसकी ओर से ऐसी गलति यों या त्रुविर्टयों या /ूक को भी द्वेष या सद्भावना क े त्वों को ले जाने क े रूप में नहीं माना जा सक ा है।
16. हमारे विव/ार में विकसी भी व्यविक्त, विवशेष रूप से एक वै ाविनक प्राति कारी में अच्छे विवश्वास की कमी क े बारे में उद्देश्यों को लागू करने और विनष्कष@ विनकालने क े उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" लिलए, क े वल त्रुविर्ट या गल ी से अति क क ु छ मौजूद होना /ाविहए।अपीलार्थी: पर आरोप लगाने क े लिलए अणिभलेv पर क ु छ महत्वपूण@ सामग्री उपलब् नहीं है, भले ही विन ा@रण प्राति कारी क े रूप में काय@ कर े समय उसक े काय^//ूक को अन्यर्थीा अस्वीक ृ ति क े लिलए बुलाया गया हो।
17. आक्षेविप आदेशों क े प्रश्नग भागों में, ऐसा प्र ी हो ा है विक उच्च न्यायालय ने मामले पर कड़ा रुv अपनाया है जो विक विदए गए थ्यों और परिरज्यिस्र्थीति यों में आवश्यक नहीं र्थीा। उल्लेvनीय है विक अपीलार्थी: को पहली दो रिरर्ट याति/काओं में व्यविक्तग रूप से एक पक्ष क े रूप में शाविमल नहीं विकया गया र्थीा, सिजनका विनण@य 29.02.2016 विदनांविक सामान्य आदेश द्वारा विकया गया र्थीा। अपीलार्थी: क े विवरूद्ध व्यविक्तग रूप से सं/ालिल होने वाली विर्टप्पणिणयों या समीक्षाओं को भी अपीलार्थी: को व्यविक्तग रूप से एक पक्ष में शाविमल विकए विबना और सुनवाई और स्पष्टीकरण का एक अवसर विदए विबना नहीं बुलाया गया र्थीा। ीसरे रिरर्ट याति/का में आदेश विदनांक 02.08.2016 द्वारा विनण@य लिलया गया, हालांविक जब उन्होंने पंजीकरण प्राति कारी द्वारा बदले गए प े क े पंजीकरण क े ुरं बाद विदनांक 04.05.2016 क े आदेश को वापस ले लिलया र्थीा और उच्च न्यायालय क े समक्ष माफी मांगी र्थीी ो अपीलक ा@ व्यविक्तग रूप से एक पक्ष-प्रति वादी क े रूप में शाविमल हुआ र्थीा, हमारे विव/ार में, मामला उसी पर बंद विकया जा सक ा र्थीा; और मामले को बहु दूर क ले जाने और v/_ क े अति रोपण क े लिलए और अपीलार्थी: की अ @-न्यातियक काय^4 क े विनव@हन की क्षम ा क े संबं में अन्य विर्टप्पणिणयों क े सार्थी विवभागीय कार@वाइयों क े लिलए और आदेश पारिर करने की कोई आवश्यक ा नहीं र्थीी। यह कहने क े बाद, हम इस मामले को विदनांक 29.02.2016 और 4 बेशक, गलति यों या त्रुविर्टयों को न्यायालय द्वारा प्रेरक क @ द्वारा विनस् ारिर विकया जाना /ाविहए और आवश्यक आदेश भी पारिर विकए जाने हैं जैसा विक दी गई परिरज्यिस्र्थीति यों में आवश्यक हो सक ा है लेविकन, हर गल ी पर दबाव देकर काय@ कराना आवश्यक नहीं है। [वी क े जैन बनाम विदल्ली उच्च न्यायालय क े मामले में इस न्यायालय की विर्टप्पणिणयाँ: (2008) 17 एससीसी 538].(2008) 17 एससीसी 538)। उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 02.08.2016 क े दोनों आक्षेविप आदेशों में अपीलार्थी: क े विवरूद्ध गुण दोष को समाप्त कर े हुए और अवलोकनों को रद्द करना उति/ समझ े हैं।
21. v/_ की राणिश क े संबं में, हम प्रत्यर्थी: संख्या 1 की ओर से लिलए गए उति/ रुv की सराहना कर े हैं।परिरज्यिस्र्थीति यों को ध्यान में रv े हुए, हम इसे उति/ समझ े हैं और इसलिलए आदेश दे े हैं विक उक्त 2,00,000/- रुपये की राणिश प्रत्यर्थी: संख्या 1 द्वारा उत्तर प्रदेश राTय कानूनी सेवा प्राति करण क े पास जमा की जाएगी।
22. पूव क्त आवश्यक ाओं क े सार्थी, आक्षेविप आदेशों में अपीलक ा@ क े विवरुद्ध विर्टप्पणिणयों और समीक्षाओं को समाप्त विकया जा ा है; और आक्षेविप आदेशों क े प्रश्नग भाग, जैसा विक यहां ऊपर प्रस् ु विकया गया है, को रद्द विकया जा ा है और अपास् विकया जा ा है।
23. यह देvने की आवश्यक ा नहीं है विक आक्षेविप आदेशों क े पूव क्त भागों क े अनुसरण में की गई कोई कार@वाई या अनुध्या भी अनावश्यक हो जा ी है।
24. अपीलों को उस सीमा क और ऊपर ब ाए गए रीक े से अनुमति दी जा ी है। …………………………………………… (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी) …………………………………………… (न्यायमूर्ति अविनरुद्ध बोस) नई विदल्ली; 30 मा/@, 2022 उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण@य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबdति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण@य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विkयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"