Rajasthan State v. Mangat Lal Sisadana

Supreme Court of India · 23 Mar 2022 · 2022 INSC 333
K. M. Joseph; R. Subhash Reddy
Civil Appeal No 2386 of 2022 @ SLP (C) No 32112 of 2016
2022 INSC 333
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that under Rule 54 of Rajasthan Service Rules, government employees not fully convicted in disciplinary proceedings are entitled to proportionate salary during suspension, and directed payment of 50% salary for the suspension period, emphasizing natural justice and fair exercise of authority.

Full Text
Translation output
"रि पोर्ट योग्य"
भा त का उच्चतम न्यायालय
दीवानी अपीलीय क्षेत्राधि का
दीवानी अपील संख्या 2386/2022
(एसएलपी (सी) संख्या 32112/2016 से उत्पन्न )
ाजस्थान ाज्य औ अन्य
अपीलकता(ओं)
बनाम
मंगत लाल सिसदाना प्रधितवादी
(ओ)
सम्बद्घ
दीवानी अपील संख्या 2365/2022
(एसएलपी (सी) संख्या 30740/2017 से उत्पन्न)
निनर्णय

े . एम. जोसेफ, जे.
अनुमधित प्रदान की गई।
चूंनिक दोनों अपीलें समान मुद्दों को उठाती हैं, अतः हम एक सामान्य निनर्णय
द्वा ा इसका निनस्ता र्ण क ते हैं।
2022 INSC 333
JUDGMENT

(1) हम एसएलपी (सी) संख्या 32112/2016 से उत्पन्न अपील अथात् सिसनिवल अपील संख्या 2386/2022 को अग्रर्णी मामले क े रूप में लेते हैं। इसमें प्रधितवादी अपीलकताओं क े साथ सहायक अभिभयंता क े संवग में काय त था। प्रधितवादी क े खिFलाफ अनुशासनात्मक का वाई की गई थी। अनुशासनात्मक कायवाही क े अवलोकन से होता है निक प्रधितवादी को वर्ष 1981 में एक आदेश द्वा ा निनलंनिबत क निदया गया था। अग्रर्णी मामले में प्रत्यथK क े मामले में, कायवाही अनिनवाय सेवानिनवृखिM क े दंड क े रुप में समाप्त हुई। प्रधितवादी ने दीवानी मुकदमा दाय निकया। दीवानी न्यायालय ने ाहत दी सिजसक े द्वा ा अपीलकताओं को मामले प नए सिस े से निवचा क ने का निनदQश निदया गया। नए सिस े से निवचा निकए जाने क े परि र्णामस्वरूप, प्रधितवादी प संचयी प्रभाव से तीन ग्रेड वेतन वृधिR ोकने का जुमाना लगाया गया। प्रधितवादी ने मामले को निवभागीय कायवाही में आगे बढ़ाया।इतना ही कहना पयाप्त है निक ाजस्थान सिसनिवल सेवा (वगKक र्ण, निनयंत्रर्ण औ अपील) निनयम, 1958 क े निनयम 34 क े तहत शनिT का प्रयोग क ते हुए दंड क े स्थान प निंनदा दंड का आदेश पारि त निकया गया। तत्पश्चात् ाजस्थान सेवा निनयमावली, 1951 क े निनयम 54 क े अथ में आगे की कायवाही की गई (संधिक्षप्तता क े खिलए इसे 'निनयम' कहा गया है)। इस कायवाही क े परि र्णामस्वरूप आक्षेनिपत आदेश निदया गया, जो अंततः रि र्ट याधिचका में द्द निकया गया, सिजसने वतमान अपील को जन्म निदया है। (2) प्रमुF मामले में आदेश का सा इस प्रका है: ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि, सिजसमें निनलंबन की अवधि शानिमल है, सिजसमें पहले प्रधितवादी को Fा गया था, को क े वल पेंशन क े प्रयोजन क े खिलए ड्यूर्टी क े रूप में माना गया था। यह भी आदेश निदया जाता है निक निनवाह भMा क े अधितरि T अन्य कोई ाभिश देय नहीं होगी। इससे प्रधितवादी द्वा ा रि र्ट याधिचका दाय क ने की शुरुआत हुई। निवद्वान एकल न्याया ीश ने रि र्ट याधिचका की अनुमधित दी औ आदेश का प्रभावी भाग निनम्नखिलखिFत है: "तद्नुसा, रि र्ट क े खिलए इस याधिचका की अनुमधित दी जाती है। निदनांक 3/9/2001 क े आदेश में यह उस अवधि को मानता है सिजसक े दौ ान याधिचकाकता ोजगा से बाह था, अनिनवाय सेवानिनवृखिM क े आदेश क े परि र्णामस्वरूप "अकाय निदवस" क े रूप में औ निनलंबन क े अ ीन हने की अवधि क े खिलए पू ी मजदू ी क े भुगतान से भी इनका क ता है, उसे अवै घोनिर्षत निकया जाता है औ इसखिलए, उसे द्द क निदया जाता है। याधिचकाकता ने घोनिर्षत निकया निक वह निनलंबन की अवधि क े खिलए पू े वेतन का हकदा है। वर्ष 1978-79 की रि निTयों क े निवरुR सहायक अभिभयंता क े पद प पदोन्नधित क े उद्देश्य से प्रधितवानिदयों को निफ से याधिचकाकता की उम्मीदवा ी प निवचा क ने का निनदQश निदया जाता है। यनिद याधिचकाकता वर्ष 1978- 79 की रि निTयों क े खिFलाफ पदोन्नधित क े खिलए उपयुT पाया जाता है, तो पदोन्नधित को अन्य सभी परि र्णामी लाभों क े साथ उसी रूप में दज निकया जाएगा। Fच का कोई आदेश नहीं है।" अपीलार्थिथयों द्वा ा की गई अपील असफल ही। (3) अन्य मामले में भी प्रधितवादी को पहले भी वेतन वृधिR की निनकासी क े खिलए दंधिडत निकया गया था। उसने परि निनन्दा क े दंड क े साथ दंड क े प्रधितस्थापन क े रूप में भी ाहत प्राप्त की। उसने निनयमों क े तहत पारि त आदेश से असंतुष्ट होक एक रि र्ट याधिचका भी दाय की। निवद्वान एकल न्याया ीश ने अपने मामले में मंगत लाल सिसदाना (अग्रर्णी मामले) क े मामले में फ ै सले का पालन निकया औ ाहत दी, जो समान तज प मांगी गई थी। इस मामले में अपीलकताओं द्वा ा दाय अपील भी असफल ही। इसखिलए यह अपील हुई । (4) हमने डॉ. मनीर्ष सिसघवी, निवद्वान अधितरि T महाधि वTा, एसएलपी (सी) संख्या 32112/2016 में प्रधितवादी क े निवद्वान वकील सुश्री अचना पाठक दवे को सुना है औ यह पाते हुए निक एसएलपी (सी) संख्या 30740/2017 में प्रधितवादी उपस्थिस्थत नहीं हुआ, एनिमकस क्यू ी (न्याय निमत्र) क े रूप में निनयुT निवद्वान वकील श्री अजय चौ ी को भी सुना है । (5) निववाद की मुख्य जड़ निनयमों क े वास्तनिवक तात्पय से उत्पन्न होती प्रतीत होती है। अपीलकताओं की ओ से उपस्थिस्थत निवद्वान अधितरि T महाधि वTा डॉ. मनीर्ष सिंसघवी क े अनुसा, निनयम 54 वेतन औ भMों क े रूप में पूर्ण लाभ देने प निवचा क ता है, जहां कमचा ी को बहाल निकया गया है, जो निक वास्तव में उत्पीड़न का भिशका था । इसमें अनुशासनात्मक प्राधि क र्ण द्वा ा पाया गया है निक वह पू ी त ह से निनदeर्ष था औ इससे भी बढ़क, वह पू ी त ह से दोर्षमुT है। अग कोई कमचा ी पू ी त ह दोर्षमुT नहीं होता है, तो मामले को निनयम 54 क े उप-निनयम (3) क े तहत निनपर्टाया जाएगा। इसका मतलब यह है निक कमचा ी पू े वेतन औ भMों को पाने का हकदा नहीं होगा, जो उसे अन्यथा निमलता। अपीलार्थिथयों की ओ से उपस्थिस्थत निवद्वान अप महाधि वTा क े अनुसा हमा े समक्ष जो मामला है, उसका निनर्णय निनयम 54(3) क े संदभ में निकया जाना है। उनक े अनुसा, उच्च न्यायालय ने यह ध्यान न देक गलती की है निक अंत में, दोनों मामलों में उM दाताओं को पू ी त ह से दोर्षमुT नहीं निकया गया है। दूस ी ओ, उन प लगाए जा हे जुमाने क े रूप में अनुशासनात्मक कायवाही ने निनधिश्चत रूप से अंधितम रूप प्राप्त क खिलया है। जुमाना एक मामूली जुमाना हो सकता है लेनिकन जो प्रासंनिगक है वह यह है निक क्या कमचा ी को निनयम 54(2) क े अथ में पू ी त ह से दोर्षमुT निकया गया था। यह उनका निनवेदन है निक उन्हें पू ी त ह से दोर्षमुT नहीं निकया गया था औ इसखिलए, उच्च न्यायालय क े फ ै सले की बुनिनयाद ही त्रुनिर्टपूर्ण है। (6) इसक े निवप ीत, प्रमुF मामले में प्रधितवादी क े निवद्वान वकील, सुश्री अचना पाठक दवे, यह इंनिगत निकया निक उच्च न्यायालय क े फ ै सले को एक अन्य आ ा प ब क ा Fा जाना चानिहए, जो निक निनयमावली क े तहत आक्षेनिपत आदेश पारि त क ने से पहले, प्रधितवानिदयों को कोई नोनिर्टस जा ी नहीं निकया गया था। इस अदालत क े निनर्णयों का समथन निमलता है। वह आगे बताती हैं निक लगाए गए दंड की प्रक ृ धित क े संबं में जो निक एक मामूली दंड है औ निनष्कर्ष, जो दज निकए गए हैं, आक्षेनिपत निनर्णय का क े वल समथन निकया जाना है। निवद्वान एनिमकस क्यू ी (न्याय निमत्र), अन्य मामले में, निनयम 54 क े संदभ में, निनयम 54 क े प्रभाव प अपना निनवेदन क ते हैं निक निनयम 54 इस बात प निवचा क ता है निक दोर्षमुनिT प, कमचा ी पूर्ण वेतन औ भMे का हकदा है। जबनिक दूस े मामले में मामला यह होता निक कमचा ी को पू ा वेतन औ भMा नहीं निमल हा होता। (7) निनयमों का निनयम 54 इस प्रका हैः

54. पुनः कथन - (1) जब एक स का ी कमचा ी सिजसे बFास्त, हर्टा निदया गया, अनिनवाय रूप से सेवानिनवृM या निनलंनिबत क निदया गया हो, को बहाल निकया जाता है या निफ से बहाल निकया गया होता, लेनिकन निनलंबन क े दौ ान अधि वर्षिर्षता प उसकी सेवानिनवृखिM क े खिलए, निफ से बहाली का आदेश देने वाला सक्षम प्राधि का ी निवचा क ेगा औ एक निवभिशष्ट आदेश दें:- (क) शासकीय सेवक को उसकी ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि क े खिलए या अधि वर्षिर्षता प उसकी सेवानिनवृखिM की धितभिथ क े साथ समाप्त होने वाले निनलंबन की अवधि, जैसा भी मामला हो, क े खिलए भुगतान निकए जाने वाले वेतन औ भMों क े संबं में; औ (F) उT अवधि को ड्यूर्टी प व्यतीत अवधि क े रूप में माना जाएगा या नहीं। (2) जहाँ ऐसा सक्षम प्राधि का ी यह मानता है निक स का ी सेवक को पू ी त ह से दोर्षमुT क निदया गया है या निनलंबन की स्थिस्थधित में यह पू ी त ह से अनुधिचत था, तो स का ी कमचा ी को वह पू ा वेतन औ मंहगाई भMा निदया जाएगा, सिजसका वह हकदा होता अग उसे दंड क े रूप में बFास्त, हर्टाया या अनिनवाय रूप से सेवानिनवृM नहीं निकया जाता या निनलंनिबत नहीं निकया जाता, जैसा भी मामला हो, (3) अन्य मामलों में, स का ी सेवक को ऐसे वेतन औ मंहगाई भMे का ऐसा अनुपात निदया जायेगा जैसा सक्षम प्राधि का ी निन ारि त क े। (4) Fंड (2) क े तहत आने वाले मामले में ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि को सभी उद्देश्यों क े खिलए ड्यूर्टी प निबताई गई अवधि क े रूप में माना जाएगा। (5) Fंड (3) क े तहत आने वाले मामले में ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि को ड्यूर्टी प अवधि क े रूप में नहीं माना जाएगा जब तक निक ऐसा प्राधि का ी निवशेर्ष रूप से निनदQश नहीं देता है निक इसे निकसी निवनिनर्षिदष्ट प्रयोजन क े खिलए ऐसा माना जाएगा: बशतQ निक यनिद स का चाहे तो ऐसा प्राधि का ी यह निनदQश दे सकता है निक ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि स का ी सेवक को देय औ स्वीकाय निकसी भी प्रका क े अवकाश में परि वर्तितत क दी जायेगी। (8) निनयम 54 एक प्राव ान है जो ाज्य सेवाओं औ क ें द्रीय सेवाओं दोनों में एक सामान्य प्राव ान है। निनयमावली का निनयम 54 क ें द्रीय सेवाओं में समकक्ष है।वास्तव में, पंजाब सिसनिवल सेवा निनयमों का निनयम 7.[3] (F) एक अलग प्राव ान है जो एक व्यनिT को निनलंनिबत निकए जाने औ निबना जुमाना लगाए बहाल निकए जाने से संबंधि त है। (9) निनयम 54, सिजससे हमा ा संबं है, ऐसी स्थिस्थधितयों क े सस्थिम्मश्रर्ण की अव ा र्णा क ता है जो अनुशासनिनक कायवानिहयों क े परि र्णामस्वरूप पदच्युधित, अनिनवाय सेवानिनवृखिM औ हर्टाए जाने तक पहुंचती हैं औ यह निनलंबन क े का र्ण कतव्य से अनुपस्थिस्थधित से भी संबंधि त है। दूस े शब्दों में, जब निकसी कमचा ी को अनुशासनात्मक कायवाही क े अंत में उसक े संदभ में दंधिडत निकया जाता है औ पारि त आदेश क े परि र्णामस्वरूप बहाल निकया जाता है, तब सक्षम प्राधि का ी को ड्यूर्टी से अनुपस्थिस्थधित की अवधि क े खिलए भुगतान निकए जाने वाले वेतन औ भMों क े संबं में निवभिशष्ट आदेश प निवचा क ने औ पारि त क ने क े खिलए कहा जाता है। ऐसा प्रतीत होता है निक यह निनयम अधि वर्षिर्षता प सेवानिनवृखिM की धितभिथ क े साथ समाप्त होने वाले निनलंबन की अवधि क े खिलए वेतन औ भMे प्रदान क ने क े कतव्य प अलग से निवचा क ता है, जैसा भी मामला हो। दूस े शब्दों में, निनयम अपने आवेदन में ऐसी स्थिस्थधित प निवचा क ता है सिजसमें एक स का ी कमचा ी, जो बFास्त, हर्टाया, अनिनवाय रूप से सेवानिनवृM या निनलंनिबत हा, को बहाल निकया जाता है। यह उस मामले में भी लेता है जहां उनकी सेवानिनवृखिM क े खिलए निनलंबन क े दौ ान उन्हें बहाल क निदया गया होता। इन दोनों मामलों में, सक्षम प्राधि का ी का कतव्य निनयम 54(1) (क) औ (F) क े तहत आदेश पारि त क ना है। इसका मतलब यह है निक वेतन औ भMों से निनपर्टने क े अलावा, अनुपस्थिस्थधित की अवधि को ड्यूर्टी क े रूप में माना जाना चानिहए या नहीं, इस प भी निवचा निकया जाना चानिहए। यह निनयम 54 (1) (F) से प्रवानिहत होता है। सिजस त ीक े से प्राधि क र्ण को आदेश पारि त क ना है वह निनयम 54 में बाद क े प्राव ानों द्वा ा निवनिनयनिमत है। उप-निनयम 54(2) में निवचा निकया गया है निक सक्षम प्राधि का ी को कायवाही की जांच क नी चानिहए, अपना निववेक का प्रयोग क ना चानिहए, औ यह पता लगाना चानिहए निक क्या यह एक ऐसा मामला है जहां अंत में स का ी कमचा ी को पू ी त ह से दोर्षमुT क निदया गया है। निनलंबन क े मामले में, जहां निनलंबन क े अ ीन निकसी व्यनिT को बहाल निकया जाता है, यह सक्षम प्राधि का ी का कतव्य है निक वह इस प्रश्न प निवचा क े निक निनलंबन न्यायोधिचत था या पू ी त ह से अनुधिचत था। यनिद निनलंबन पू ी त ह से अनुधिचत था, तो स का ी कमचा ी पू े वेतन औ मंहगाई भMे क े भुगतान का हकदा होगा, सिजसका वह हकदा था यनिद उसे निनलंनिबत नहीं निकया गया होता।बFास्तगी, हर्टाने या अनिनवाय सेवानिनवृखिM से दंधिडत स का ी कमचा ी प भी यही बात लागू होती है। यनिद यह पाया जाता है निक अंत में जुमाना पू ी त ह से अनुधिचत था, योग्यता क े आ ा प यह पाया जाता है निक कमचा ी पू ी त ह से निनदeर्ष है, तो वह पूर्ण वेतन औ महंगाई भMा पाने का हकदा होगा। निनयम 54 (3) अवभिशष्ट Fंड है। निनयम 54(2) औ (3) क े प्राव ान प स्प अनन्य हैं। दूस े शब्दों में, यनिद निकसी कमचा ी को पू ी त ह दोर्षमुT नहीं निकया जाता है, तो उसे वेतन औ भMों का उतना अनुपात निदया जाना चानिहए, सिजतना सक्षम प्राधि का ी निन ारि त क े। निनयम 54 का उपनिनयम (4) उप-निनयम 54 (1) (F) से संबंधि त है। दूस े शब्दों में, जब भी निनयम 54 को लागू क ने वाली परि स्थिस्थधितयों में बहाली होती है, प्राधि क र्ण को भुगतान निकए जाने वाले वेतन औ भMों से संबंधि त एक निवभिशष्ट आदेश पारि त क ना होता है औ साथ ही क्या ऐसी अनुपस्थिस्थधित की अवधि को ड्यूर्टी प निबताई गई अवधि क े रूप में माना जा हा है। इन दोनों पहलुओं को आदेश में दशाया जाना चानिहए। (10) ऐसे मामले में जहां पूर्ण दोर्षमुनिT है, निनयम-निनमाता ने यह स्पष्ट क निदया था निक अनुपस्थिस्थधित की अवधि को सभी उद्देश्यों क े खिलए कतव्य क े रूप में माना जाना है। हालांनिक, निनयम 54(5) क े प्राव ान ऐसी स्थिस्थधित प निवचा क ते हैं जहां कमचा ी पू ी त ह से दोर्षमुT नहीं होता है औ इसखिलए निनयम 54(3) द्वा ा शासिसत होता है। तब अनुपस्थिस्थधित की अवधि को ड्यूर्टी क े रूप में नहीं माना जाना चानिहए जब तक निक प्राधि क र्ण निवशेर्ष रूप से निनदQश न दे निक यह निकसी निनर्षिदष्ट उद्देश्य क े खिलए ड्यूर्टी होगी। निनयम 54(5) क े प ंतुक में निवचा निकया गया है निक स का यह निनदQश दे सकती है निक अनुपस्थिस्थधित की अवधि स का ी सेवक क े खिलए देय औ स्वीकाय निकसी भी प्रका क े अवकाश में परि वर्तितत की जाएगी। यह निनयम 54 का दाय ा औ तात्पय प्रतीत होता है।(11) हमने प्रमुF मामले में पारि त आदेश देFा है। यह एक ऐसा मामला है जहां उM दाताओं को इस प्रका पू ी त ह से दोर्षमुT नहीं निकया गया है। इसका प्रमार्ण इस तथ्य में पाया जाना है निक उन्हें दंधिडत निकया गया है क्योंनिक अनुशासनात्मक कायवाही का अंत दंड पारि त निकए जाने से हुआ, जो एक मामूली दंड हो सकता है। (12) मामले का दूस ा पहलू प्राक ृ धितक न्याय क े सिसRांतों क े पालन क े बा े में है। कोई भी आदेश पारि त क ने से पहले कमचा ी को एक अवस निदया जाना चानिहए। मामला अब अनिनर्णKत निवर्षय नहीं है। [देFें - एम. गोपालक ृ ष्र्ण नायडू बनाम मध्य प्रदेश ाज्य एआईआ 1968 एससी 240]। यह दोह ाने की आवश्यकता नहीं है निक निनयम 54 क े अंतगत भी स्थिस्थधित समान है। प्रक ृ धित क े न्याय क े सिसRांतों का पालन उस कमचा ी क े खिलए अत्यंत महत्वपूर्ण है सिजसका जीवन ही दांव प लगा होगा एक ओ यनिद उसे सुना जाता है तो उसे सक्षम प्राधि का ी को मनाने का अवस निमलेगा निक उसका मामला निनयम 54(2) क े तहत आएगा न निक निनयम 54(3) क े तहत। अवस से वंधिचत क ने क े बहुत गंभी परि र्णाम हो सकते हैं।इस मामला में Fोज यह है निक प्राक ृ धितक न्याय क े सिसRांतों का पालन नहीं निकया गया था।इस आ ा प, प्रधितवादी निनर्णय का समथन क ेंगे। (13) डॉ. मनीर्ष सिंसघवी, निवद्वान अप महाधि वTा, जो अपीलकताओं की ओ से पेश हुए, ऐसी परि स्थिस्थधितयों में यह इंनिगत क ते है निक अपनाई जाने वाली प्रनिrया यह होगी निक इसे सक्षम प्राधि का ी को वापस भेज निदया जाए तानिक सक्षम प्राधि का ी यह सुनिनधिश्चत क सक े निक प्रधितवादी अधि कारि यों क े सामने पेश हों औ निफ मामले का फ ै सला निकया जाए।वास्तव में, हम पाते हैं निक एम. गोपालक ृ ष्र्ण नायडू (सुप्रा) में अंततः इस न्यायालय द्वा ा अपनाया गया ास्ता कमचा ी को सुनने क े बाद आदेश पारि त क ने क े खिलए मामले को वापस सक्षम प्राधि का ी को भेजना था। लेनिकन निफ, प्रधितवादी क े निवद्वान वकील यह इंनिगत क ते है निक प्रधितवादी 76 वर्ष का है औ इस स्त प मामले को वापस भेजना अत्यधि क अनुधिचत होगा। प्रमुF मामले में, हमने देFा, स्वीक ृ धित क े समय, इस न्यायालय ने निपछले वेतन क े 50 प्रधितशत क े भुगतान क े अ ीन हने का आदेश पारि त निकया था। (14) पक्षों क े निवद्वान अधि वTा को सुनने क े बाद, हमा ा निवचा है निक निनम्नखिलखिFत निनष्कर्ष प पहुंचा जा सकता है। दोनों ही मामलों में प्रधितवानिदयों क े खिFलाफ अनुशासनात्मक कायवाही ऐसी स्थिस्थधित में समाप्त नहीं हुई है जहां यह कहा जा सक े निक उन्हें पू ी त ह से दोर्षमुT क निदया गया है। यह उनक े मामले को निनयमावली क े निनयम 54(2) की परि सीमा से बाह ले जाएगा। उनका निनलंबन अनुधिचत निनलंबन की श्रेर्णी में नहीं आ सकता है। यह अनिनवाय रूप से औ अनिनवाय रूप से उनक े मामलों को निनयम 54(3) क े दाय े में लाएगा।इसका अनिनवाय रूप से यह अथ होगा निक भुगतान की जाने वाली वेतन औ भMों की सही ाभिश पूर्ण वेतन औ भMों से कम होनी चानिहए।हालांनिक यह कवायद कमचा ी को नोनिर्टस देने क े बाद ही की जा सकती है। निनधिश्चत रुप से, इस संबं में अपीलार्थिथयों की निवफलता है।लेनिकन, साथ ही, इस उद्देश्य क े खिलए इसे वापस क ना हमा े निवचा में अन्यायपूर्ण होगा।इसखिलए हम यह निनदQश देक बीच का ास्ता अपनाएंगे निक मामले क े तथ्यों औ परि स्थिस्थधितयों में, प्रधितवानिदयों को वेतन औ भMों क े 50 प्रधितशत प निन ारि त वेतन औ भMे का भुगतान निकया जाए जो उन्हें उनकी अनुपस्थिस्थधित की अवधि क े खिलए निमलता।तदनुसा, अपीलों को आंभिशक रूप में से अनुमधित दी गई है। हम निनदQश देते हैं निक दोनों मामलों में उM दाताओं को उस ाभिश क े 50 प्रधितशत प वेतन औ भMे का भुगतान निकया जाएगा, सिजसक े वे निवचा ा ीन अवधि क े खिलए हकदा होंगे। उप ोTानुसा अपील स्वीका की जाती है। लागत क े संबं में कोई आदेश नहीं है। ….………………………, जे. [क े. एम. जोसेफ] ………………………………, जे. [ऋनिर्षक े श ॉय] नई निदल्ली; 23 माच, 2022. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.