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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 1913/2022
(एसएलपी(सी) सं. 26763/2015 से उत्पन्न)
दिदनेश चंद्र शुक्ला ... अपीलार्थी5 (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य। ... प्रत्यर्थी5(गण)
दिनण=य
न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम
JUDGMENT
1. महात्मा गां ी काशी दिवद्यापीठ दिवश्वदिवद्यालय (बाद में 'दिवश्वदिवद्यालय' क े रूप में संदर्भिभ ) क े क ु लाति पति का आदेश, जिKसमें व्याख्य ा (कम= काण्ड़) क े रूप में दिनयुदिN दिकए Kाने क े लिलए उनक े अनुरो को अस्वीकार कर दिदया गया है, को रद्द mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 339 करने की मांग करने वाली उनकी रिरट यातिचका को खारिरK करने से व्यथिर्थी होने क े कारण अपीलक ा= इस न्यायालय क े समक्ष आया है।
2. हमने अपीलक ा= क े दिवद्वान अति वNा, दिवश्वदिवद्यालय क े क ु लाति पति क े दिवद्वान अति वNा, दिवश्वदिवद्यालय की ओर से दिवद्वान अति वNा और राज्य की ओर से दिवद्वान स्र्थीायी अति वNा को सुना।
3. उपरोN अपील क े दिनस् ारण क े लिलए आवश्यक संतिक्षप्त थ्य, इस प्रकार हैंः- (i) 22.10.1996 दिदनांदिक आदेश द्वारा, उत्तर प्रदेश राज्य ने दिवश्वदिवद्यालय में संस्क ृ दिवभाग में 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े एक पद को मंKूरी दी, जिKसे यहां 5 वें प्रत्यर्थी5 क े रूप में प्रस् ु दिकया गया है। दिवश्वदिवद्यालय क े क ु लाति पति, काय=कारी परिरषद और दिवश्वदिवद्यालय क े क ु लपति को यहाँ अलग-अलग प्रत्यर्थी5 संख्या 2 से 4 क े रूप में दिदखाया गया है, इसक े पीछे क े कारण को समझना कदिठन नहीं है। (ii) ऐसा प्र ी हो ा है दिक श्री Kय प्रकाश पांडे को शुरू में उN पद पर दिनयुN दिकया गया र्थीा और उनकी सेवाओं को दिनयदिम भी दिकया गया र्थीा। लेदिकन उनकी सेवाओं क े दिनयदिम ीकरण को उच्च न्यायालय ने रिरट यातिचका संख्या 35149/1999 में 19.08.2006 दिदनांदिक आदेश द्वारा अपास् कर दिदया। (iii) इसक े बाद, अपीलक ा= को दिवश्वदिवद्यालय द्वारा संस्क ृ दिवभाग में छात्रों को 'कम= काण्ड़' पढ़ाने क े लिलए अति थिर्थी व्याख्या ा क े रूप में दिनयोजिK दिकया गया र्थीा। उन्हें देय पारिरश्रदिमक 250 रुपये प्रति व्याख्यान दिन ा=रिर दिकया गया र्थीा, Kो अति क म 5,000 रुपये प्रति माह र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iv) 16.10.2006 को संस्क ृ दिवभागाध्यक्ष द्वारा दिनयदिम आ ार पर पद भरने का प्रस् ाव प्रस् ु दिकया गया र्थीा।इसे 18.10.2006 को क ु लपति द्वारा अनुमोदिद दिकया गया र्थीा। इसक े अनुसरण में, दिवश्वदिवद्यालय ने दिवज्ञापन संख्या 2/2006 का एक दिवज्ञापन Kारी दिकया, जिKसमें 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े एक पद पर दिनयुदिN क े लिलए आवेदन आमंदित्र दिकए गए र्थीे।दिवज्ञापन में दिवथिभन्न दिवभागों में दिवथिभन्न अन्य पदों क े आवेदन क े लिलए दिनमंत्रण भी र्थीा। हमारा इस मामले में अन्य दिवभागों में उन पदों से सरोकार नहीं हैं जिKनक े लिलए एक ही दिवज्ञापन में आवेदन आमंदित्र दिकए गए र्थीे। यह कहना ही पया=प्त है दिक दिवथिभन्न दिवषयों में व्याख्या ाओं क े 8 पदों पर दिनयुदिN क े लिलए आवेदन आमंदित्र दिकए गए र्थीे, जिKनमें से एक 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े पद पर दिनयुदिN क े लिलए र्थीा। (v) दुभा=ग्य से, एक दिववाद ब खड़ा हो गया, Kब दिवश्वदिवद्यालय क े त्कालीन क ु लाति पति ने मौलिखक आदेश Kारी कर उप -क ु लपति को उN दिवज्ञापन क े अनुसरण में 3 चयन सदिमति यों की बैठक ें आयोजिK करने से इस आ ार पर रोक दिदया दिक उप-क ु लपति 31.12.2007 को सेवादिनवृत्त होने वाले र्थीे। लेदिकन उच्च न्यायालय ने एक रिरट यातिचका में पारिर 04.10.2007 क े एक आदेश द्वारा यह स्पष्ट कर दिदया दिक उप-क ु लपति द्वारा दिकए गए वै ादिनक कायw को क ु लपति क े मौलिखक आदेशों द्वारा रोका नहीं Kा सक ा है। इसक े बाद, क ु लपति द्वारा 14.12.2007 को एक लिललिख आदेश Kारी दिकया गया र्थीा। हालाँदिक, उN आदेश को एक अन्य रिरट यातिचका में चुनौ ी दी गई र्थीी और इस पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी र्थीी, जिKससे चयन सदिमति यों क े लिलए दिवज्ञापन संख्या 2/2006 क े अनुसरण में आगे बढ़ने का माग= प्रशस् हुआ। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (vi) परिरणामस्वरूप, दिवथिभन्न पदों क े संबं में चयन सदिमति यों ने बैठक ें कीं और जिसफारिरशें कीं।इनमें से क ु छ जिसफारिरशों को काय=कारी परिरषद ने अपने संकल्प दिदनांक 24.12.2007 द्वारा स्वीकार कर लिलया। (vii) चूंदिक जिसफारिरशें लागू होने से पहले क ु लपति इस बीच सेवादिनवृत्त हो गए र्थीे, इसलिलए कई रिरट यातिचकाएँ दायर की गयी र्थीी। कई अं रिरम आदेश पारिर दिकए गए जिKसक े अनुसरण में काय=कारी परिरषद ने उ.प्र.राज्य दिवश्वदिवद्यालय अति दिनयम, 1973 की ारा 31(8)(क) क े परन् ुक क े ह चयन सदिमति यों की जिसफारिरशों को क े पास भेKने का दिनण=य लिलया। (viii) अपीलक ा= क े मामले में, चयन सदिमति ने 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े पद पर दिनयुदिN क े लिलए उसकी उम्मीदवारी की जिसफारिरश की र्थीी।लेदिकन काय=कारी परिरषद इस आ ार पर चयन सदिमति से असहम र्थीी दिक उप-क ु लपति चयन सदिमति में दिवषय दिवशेषज्ञों को नादिम करने क े लिलए क ु लपति से अनुरो करने में दिवफल रहे। यहां यह नोट करना प्रासंदिगक है दिक चयन सदिमति ने क े वल दो व्यदिNयों को शॉट=लिलस्ट दिकया, जिKनमें से एक अपीलक ा= और दूसरे डॉ. Kय प्रकाश पांडे र्थीे। उN डॉ. Kय प्रकाश पांडे ने न्यून म अंक क े मुकाबले क े वल 49.2% अंक प्राप्त दिकए र्थीे। इसलिलए उन्हें साक्षात्कार कॉल लेटर Kारी नहीं दिकया गया। (ix) काय=कारी परिरषद क े दिनण=य से सहम हो े हुए, क ु लाति पति ने अपीलक ा= की दिनयुदिN क े लिलए चयन सदिमति द्वारा की गई जिसफारिरश को रद्द कर े हुए दिदनांक 23/28.12.2010 को एक आदेश पारिर दिकया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (x) अपीलक ा= ने रिरट यातिचका संख्या 6389/2011 में एक रिरट यातिचका क े माध्यम से क े उN आदेश को चुनौ ी दी।दिदनांक 02.12.2011 क े एक आदेश द्वारा, उN रिरट यातिचका को अनुमति दी गई और मामला क ु लपति को वापस भेK दिदया गया। इस मामले को क ु लाति पति को वापस भेKने का कारण यह र्थीा दिक स्वीकाय= ः देश में 'कम= काण्ड़' में स्ना कोत्तर उपाति प्रदान करने वाला कोई दिवश्वदिवद्यालय नहीं र्थीा और इसलिलए, वास् व में 'कम= काण्ड़' क े दिवषय में कोई दिवशेषज्ञ नहीं र्थीे, Kैसा दिक क ु लाति पति द्वारा प्रस् ादिव दिकया गया र्थीा। चूंदिक यह प्रश्न दिक क्या दिवषय दिवशेषज्ञ 'कम= काण्ड़' क े क्षेत्र में उपलब् र्थीे, इस मामले क े बुदिनयाद में र्थीा, इसलिलए उच्च न्यायालय ने इस मामले को क ु लपति को वापस भेKना उतिच समझा। (xi) उपरोN दिनदƒश क े अनुसरण में, क ु लाति पति ने इस मामले पर दिवचार दिकया और चयन सदिमति की जिसफारिरश को खारिरK कर े हुए 24.08.2012 दिदनांदिक एक नया आदेश पारिर दिकया।इस आदेश को अपीलक ा= ने एक नई रिरट यातिचका दालिखल करक े रिरट यातिचका संख्या 63137/2012 में चुनौ ी दी र्थीी। इस अपील में 14.05.2015 दिदनांदिक आक्षेदिप आदेश द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने अपीलक ा= की रिरट यातिचका को इस आ ार पर खारिरK कर दिदया दिक वापस भेKने क े आदेश क े बाद, क ु लाति पति ने क ु छ दिवशेषज्ञों से परामश= दिकया र्थीा और पाया दिक दिवषय 'कम= काण्ड़' दिवषय संस्क ृ से दिबल्क ु ल अलग है और इसलिलए अपीलक ा= क े पास Kो योग्य ा है, उससे उसे दिनयुदिN क े लिलए नहीं चुना Kा सक ा र्थीा। यह उच्च न्यायालय क े इस आदेश क े लिखलाफ है जिKससे अपीलक ा= हमारे सामने है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. इससे पहले दिक हम दिवचार क े लिलए उत्पन्न होने वाले मुख्य मुद्दे पर दिवचार करने क े लिलए आगे बढ़ें, हम इस थ्य पर ध्यान देने क े लिलए बाध्य हैं दिक अपीलक ा= वष= 2006 से अति क म 5000/- रुपये प्रति माह क े अ ीन प्रति व्याख्यान 250/- रुपये क े पारिरश्रदिमक पर अति थिर्थी व्याख्या ा क े रूप में लगे हुए र्थीे। ब से अपीलक ा= दिपछले लगभग 16 वषw से 'कम= काण्ड़' में एक वष= का तिडप्लोमा पाठ्यक्रम करने वाले छात्रों को पढ़ा रहा है।
5. इससे पहले दिक हम उपरोN अपील में उत्पन्न होने वाले मुद्दे पर दिवचार करें, अगली बा जिKस पर हमें ध्यान देना होगा वह यह है दिक अपीलक ा= और शायद दिवश्वदिवद्यालय द्वारा 2006 में की गई पूरी चयन प्रदिक्रया, क ु लाति पति और क ु लपति क े बीच झगड़े का थिशकार हो गई। स्वीकाय= ः यह पद मूल रूप से एक ऐसे व्यदिN द्वारा भरा गया र्थीा Kो वास् व में उत्तर प्रदेश राज्य क े त्कालीन राज्यपाल क े पुरोदिह र्थीे। लेदिकन उनकी दिनयुदिN को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 19.08.2006 क े एक आदेश द्वारा अपास् कर दिदया र्थीा। इसक े बाद ही दिवज्ञापन संख्या 2/2006 Kारी दिकया गया, जिKसमें पद पर दिनयुदिN क े लिलए आवेदन आमंदित्र दिकए गए।
6. लेदिकन यह ध्यान रखना दिदलचस्प है दिक दिवज्ञापन में दिवशेष रूप से यह दिनर्दिदष्ट नहीं दिकया गया र्थीा दिक 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े पद क े लिलए आवेदन करने वाले उम्मीदवार क े पास 'कम= काण्ड़ ' में मास्टर तिडग्री होनी चादिहए। वास् व में, 24.08.2012 का क ु लाति पति का आदेश Kो रिरट यातिचका की दिवषयवस् ु बना, दिवशेष रूप से इस प्रकार हैः “महात्मा गां ी काशी दिवद्यापीठ क े क़ानून में कम= काण्ड़ दिवषय का कोई उल्लेख नहीं है और न ही ारा 51/52 क े ह दिकसी अध्यादेश और न ही उ.प्र. राज्य दिवश्वदिवद्यालय अति दिनयम, 1973 की ारा 53 क े ह दिकसी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दिवदिनयम में कोई उल्लेख है। क ु लाति पति का आदेश क े वल दिवश्वदिवद्यालय की प्रर्थीम संदिवति, 1977 क े संदिवति 11.01(1) पर अवलम्बिम्ब है, जिKसमें दिन ा=रिर दिकया गया र्थीा दिक दिवश्वदिवद्यालय में व्याख्या ा क े पद पर दिनयुदिN क े लिलए आवश्यक न्यून म योग्य ा कम से कम 55% अंकों क े सार्थी प्रासंदिगक दिवषय में मास्टर तिडग्री या समकक्ष तिडग्री और लगा ार अच्छा शैक्षथिणक रिरकॉड= और नेट या पीएच. डी. तिडग्री है।"
7. 24.08.2012 क े अपने आदेश में, क ु लाति पति ने कहा दिक अपीलक ा= क े पास 'कम= काण्ड़' में मास्टर तिडग्री नहीं है। लेदिकन इस रह क े दिनष्कष= पर पहुंचने से पहले, क े सार्थी-सार्थी उच्च न्यायालय को यह सत्यादिप करना चादिहए दिक (i) क्या संदिवति ने 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े लिलए आवश्यक कोई दिवथिशष्ट योग्य ा दिन ा=रिर की है, और (ii) यदिद नहीं, ो क्या 'प्रासंदिगक दिवषय' क े रूप में माना Kाना चादिहए और दिकसक े द्वारा।"
8. इस स् र पर यह इंदिग दिकया Kाना चादिहए दिक पहली बार में, काय=कारी परिरषद ने एक स्टैंड लिलया दिक अपीलक ा= का चयन मुख्य रूप से 'कम= काण्ड़' क े क्षेत्र में दिवषय दिवशेषज्ञों को शादिमल नहीं करने क े कारण दूदिष हो गया। काय=कारी परिरषद ने अपीलक ा= को दिनयुदिN क े लिलए दिन ा=रिर योग्य ा नहीं रखने वाला व्यदिN नहीं माना। यही कारण है दिक 02.12.2011 को उच्च न्यायालय द्वारा पारिर वापस भेKने क े आदेश में दिवशेष रूप से क ु लाति पति को दिवचार करने का दिनदƒश दिदया गया र्थीा दिक चयन सदिमति में शादिमल दिकए Kाने क े लिलए 'कम= काण्ड़' क े दिवषय दिवशेषज्ञ र्थीे या नहीं। खुद को उN प्रश्न क सीदिम करने क े बKाय, क ु लाति पति ने संस्क ृ क े दिवभागाध्यक्ष प्रोफ े सर गया राम पांडे की राय ली और इस दिनष्कष= पर पहुंचे दिक 'कम= काण्ड़' और संस्क ृ दो अलग-अलग दिवषय हैं और 'कम= काण्ड़' एक व्यावहारिरक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दिवषय है, Kबदिक संस्क ृ नहीं है। उN प्रोफ े सर गया राम पांडे ने इस आशय की भी Kानकारी प्रदान की है (i) दिक बनारस हिंहदू दिवश्वदिवद्यालय, संपूणा=नंद संस्क ृ दिवश्वदिवद्यालय, लखनऊ दिवश्वदिवद्यालय और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्क ृ दिवद्यापीठ Kैसे क ु छ दिवश्वदिवद्यालयों ने अपने पाठ्यक्रम में 'कम= काण्ड़' को एक दिवषय क े रूप में शादिमल दिकया है; और (ii) हालांदिक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्क ृ दिवद्यापीठ क े दिनबं क से प्राप्त Kानकारी क े अनुसार, 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा का कोई पद नहीं है।24.08.2012 क े अपने आदेश में क ु लाति पति ने यह भी दK= दिकया दिक क ु छ दिवश्वदिवद्यालय कम= काण्ड़/पुरोदिह क े दिवषय पढ़ा े हैं और आचाय= (एमए) व दिवद्यावरिरति (पीएचडी) Kैसी तिडग्री प्रदान कर े हैं।
9. स्पष्ट ौर पर, क ु लाति पति द्वारा क ु छ व्यदिNयों क े सार्थी दिकए गए परामश= और उच्च न्यायालय क े समक्ष क े आक्षेदिप आदेश को पारिर करने से पहले उनक े द्वारा एकत्र की गई Kानकारी, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर वापस भेKने क े आदेश क े दायरे से परे र्थीी। क ु लाति पति द्वारा एकत्र की गई Kानकारी ने न क े वल अपीलक ा= क े चयन पर उनकी मूल आपलित्तयों का दिवस् ार दिकया, बम्बिल्क अपीलक ा= की Kानकारी क े दिबना एकत्र भी की गयीं र्थीी।
10. उपरोN अपील की सुनवाई क े दौरान, हमने दिवश्वदिवद्यालय की ओर से पेश दिवद्वान अति वNा श्री संदीप डी. दास से एक इंदिग प्रश्न उठाया दिक क्या दिवश्वदिवद्यालय की संदिवति 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े लिलए कोई दिवथिशष्ट योग्य ा दिन ा=रिर कर ी है या कम से कम दिवज्ञापन संख्या 2/2006 में योग्य ा क े बारे में ब ाया गया है। उनक े पास यह स्वीकार करने क े अलावा कोई दिवकल्प नहीं र्थीा दिक संदिवति में 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े पद क े बारे में कोई दिनदƒश नहीं हैं। उन्होंने यह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भी स्वीकार दिकया दिक दिवज्ञापन में कोई दिवथिशष्ट योग्य ा नहीं ब ायी गयी र्थीी, जिसवाय इसक े दिक अभ्यर्थी5 क े पास संबंति दिवषय में स्ना कोत्तर तिडग्री होनी चादिहए।
11. दिकसी दिवथिशष्ट दिनदƒश क े अभाव में, दिवश्वदिवद्यालय को चयन की प्रदिक्रया शुरू करने से पहले, कौन- कौन से दिबषय प्रासंदिगक दिवषयों माने Kाएँगें, इस प्रश्न का उल्लेख करना चादिहए र्थीा।न ो दिवश्वदिवद्यालय और न ही क ु लाति पति ने पहली बार यह स्टैंड लिलया दिक अपीलक ा= "प्रासंदिगक दिवषय" में योग्य नहीं र्थीा।उनकी प्रारंथिभक आपलित्त यह र्थीी दिक चयन सदिमति में क ु लाति पति द्वारा नादिम दिवषय दिवशेषज्ञ शादिमल नहीं र्थीे। यह दर्भिश दिकए Kाने क े बाद दिक 'कम= काण्ड़' में कोई दिवषय दिवशेषज्ञ नहीं र्थीे, क्योंदिक दिकसी भी दिवश्वदिवद्यालय में 'कम= काण्ड़' में दिवथिशष्ट पाठ्यक्रम नहीं चलाया Kा रहा र्थीा, उच्च न्यायालय ने यह प ा लगाने क े लिलए इस मामले को क ु लपति को वापस भेKना उतिच समझा दिक क्या दिवषय दिवशेषज्ञ वास् व में उपलब् र्थीे और क्या कु लाति पति से ऐसे दिवशेषज्ञों क े नामांकन की मांग करने में उप -क ु लपति की दिवफल ा ने पूरी प्रदिक्रया को दूदिष कर दिदया। यह देख े हुए दिक उN प्रश्न का उत्तर प्रदान करना बहु मुम्बिश्कल र्थीा, क ु लाति पति ने यह प ा लगाने क े लिलए, दिक संस्क ृ क े दिवषय और 'कम= काण्ड़' क े दिवषय क े बीच क्या अं र है, एक असामान्य प्रदिक्रया अपनायी। यह स्पष्ट रूप से गल र्थीा और उच्च न्यायालय ने दुभा=ग्य से इस गल ी पर ध्यान नहीं दिदया।
12. स्वीकाय= ः अपीलक ा= दिपछले लगभग 16 वषw से उसी दिवश्वदिवद्यालय में 'कम= काण्ड़' पढ़ा रहे हैं। यद्यदिप दिवश्वदिवद्यालय क े दिवद्वान अति वNा ने कहा दिक उनकी दिनरं र ा इस न्यायालय द्वारा पारिर यर्थीाम्बिस्र्थीति क े अं रिरम आदेश क े कारण र्थीी, हम ध्यान दे े हैं दिक यर्थीाम्बिस्र्थीति का अं रिरम आदेश क े वल 14.09.2015 को पारिर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दिकया गया र्थीा।Kब क अपीलक ा= उस ारीख को अपने सेवाएं दिनरं र Kारी नहीं रख ा, ब क यर्थीाम्बिस्र्थीति क े आदेश का उसक े लिलए कोई म लब नहीं हो ा।
13. ऐसे मामले में लागू दिकए Kाने वाले मापदण्ड़ Kहां दिकसी पद का पद ारी उस पद क े लिलए दिन ा=रिर योग्य ा को पूरा नहीं कर ा है, उन मामलों में लागू दिकए Kाने वाले मापदंडों से थिभन्न हैं Kहां दिकसी दिवशेष पद क े लिलए कोई दिवथिशष्ट योग्य ा ही दिन ा=रिर नहीं है। यह प्रश्न दिक "सुसंग दिवषय" कौन-कौन से हैं, दिवज्ञापन Kारी दिकए Kाने से पहले दिवशेषज्ञों पर छोड़ दिदया Kाना चादिहए र्थीा, खासकर ब Kब संदिवति यों में कोई दिवथिशष्ट योग्य ा दिन ा=रिर नहीं की गयी र्थीी। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। वास् व में यह प्रश्न दिक क्या दिवषय दिवशेषज्ञ 'कम= काण्ड़' में उपलब् र्थीे, स्वयं एक दिववाद का दिवषय बन गया। ऐसा लग ा है दिक पूरा दिववाद वष= 2006 में त्कालीन क ु लाति पति और त्कालीन उप-क ु लपति क े बीच रस्साकशी क े परिरणामस्वरूप उत्पन्न हुआ र्थीा, जिKसमें अपीलक ा= इस झगड़े का थिशकार बन गया। दुभा=ग्य से, उच्च न्यायालय ने इन सब पर ध्यान नहीं दिदया।
14. "सम ुल्य अह= ाएं" पद का "सुसंग दिवषय" पद से थिभन्न अर्थी= है। पंKाब दिवश्वदिवद्यालय बनाम नरिंरदर क ु मार और अन्य[1] में, यह न्यायालय "प्रासंदिगक दिवषय" अथिभव्यदिN की व्याख्या से संबंति र्थीा। लेदिकन उस मामले में, खुद दिवज्ञापन में एक शीष= क े अन् ग= 'आवश्यक योग्य ाएं' और दूसरे शीष= क े अन् ग= 'वांछनीय दिवशेषज्ञ ा' दिन ा=रिर की गयी र्थीी। इसलिलए इस न्यायालय ने पाया दिक यद्यदिप "सुसंग दिवषय" शब्दों ने इस प्रश्न पर कोई प्रकाश नहीं डाला दिक दिकसी दिवदिनर्दिदष्ट दिवषय में व्याख्या ा क े पद क े लिलए प्रासंदिगक दिवषय क्या हैं, "वांछनीय योग्य ा" से संबंति 1 (1999) 9 एससीसी 8 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कॉलम ने इस पर प्रकाश डाला दिक क्या प्रासंदिगक र्थीा। इसलिलए ऐसे मामले जिKनमें दिवज्ञापन में कोई संक े मौKूद है, उन मामलों की ुलना में एक अलग म्बिस्र्थीति में हो ा है Kहां ऐसा कोई संक े ही नहीं है।
15. गणप सिंसह गंगाराम सिंसह राKपू बनाम गुलबग= दिवश्वदिवद्यालय 2 में, यह न्यायालय एक ऐसे मामले से संबंति र्थीा, Kहां "प्रासंदिगक दिवषय" में स्ना कोत्तर तिडग्री रखने वाले अभ्यर्भिर्थीयों से एमसीए में व्याख्या ा क े लिलए आवेदन आमंदित्र दिकए गए र्थीे। थ्य क े मामले क े रूप में, इस न्यायालय ने पाया दिक क ं प्यूटर एप्लीक े शन में परास्ना क की तिडग्री वाले अभ्यर्थी5 उपलब् र्थीे, लेदिकन गथिण में परास्ना क की तिडग्री वाले उम्मीदवार का चयन दिकया गया र्थीा।इस न्यायालय ने गथिण में परास्ना क तिडग्री वाले अभ्यर्थी5 का चयन करने में दिनयुदिN बोड= क े दिनण=य में इस त्रुदिटपूण= क = में दोष पाया दिक गथिण एमसीए में पढ़ाए Kाने वाले दिवषयों में से एक है।
16. प्रस् ु मामले में 'कम=काण्ड़' में स्ना कोत्तर तिडग्री वाला कोई भी अभ्यर्थी5 उपलब् नहीं र्थीा और चयन सदिमति जिKसमें संस्क ृ दिवभाग क े एक प्रति दिनति शादिमल र्थीे, ने अपीलक ा= को प्रासंदिगक दिवषय में स्ना कोत्तर तिडग्री रखने वाला पाया।दिनयुदिN स्वयं संस्क ृ दिवभाग में पद पर र्थीी।
17. वास् व में, उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिचका दिवचारा ीन ा रहने क े दौरान, दिवश्वदिवद्यालय की अकाददिमक परिरषद ने 22.08.2013 को एक बैठक आयोजिK की। 'कम= काण्ड़' में व्याख्या ा क े लिलए योग्य ा से संबंति उN बैठक क े लिलए एKेंडा संख्या 10।संस्क ृ दिवभागाध्यक्ष द्वारा की गई जिसफारिरश को 2 (2014) 3 एससीसी 767 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अकाददिमक परिरषद ने स्वीकार कर लिलया। अकाददिमक परिरषद की उN बैठक का एKेंडा मद संख्या 10 इस प्रकार हैः "एKेंडा संख्या 10: संस्क ृ दिवभाग की जिसफारिरशें। संस्क ृ दिवभाग की दिवभागाध्यक्ष प्रो उमा रानी दित्रपाठी ने संस्क ृ दिवभाग की अनुशंसा से संबंति Kानकारी दे े हुए अवग कराया दिक कम=काण्ड की शैक्षथिणक योग्य ा र्थीा संस्क ृ क े प्रोफ े सर पद क े लिलए एक समान रखी Kाये सार्थी ही कम=कांड क े दिवथिशष्ट अनुभव को अदिनवाय= रूप से दिन ा=रिर दिकया गया र्थीा जिKसे सव=सम्मति से पारिर दिकया गया र्थीा।"
18. यदिद उच्च न्यायालय ने क े वल अकाददिमक परिरषद की बैठकों क े काय=वृत्त पर गौर दिकया हो ा ो यह आसानी से समझ सक ा र्थीा दिक अपीलक ा= सफल होने का हकदार र्थीा।
19. उ.प्र. दिवश्वदिवद्यालय अति दिनयम की ारा 25(1)(ग) क े ह, अकाददिमक परिरषद को दिवशेष दिवषयों पर दिनदƒश देने वाले व्यदिNयों क े पास होने वाली योग्य ा क े संबं में काय=कारी परिरषद को सलाह देने का अति कार है। इसलिलए अकाददिमक परिरषद की 22.08.2013 दिदनांदिक बैठकों क े काय=वृत्त ने मुद्दे को अपीलक ा= क े पक्ष में दिदया है। इसलिलए दिवश्वदिवद्यालय को इस 'युद्ध कांड ' को समाप्त करने और अपीलक ा= को 'कम= कांड' से 'कम= फल कांड' में Kाने की अनुमति देने का समय आ गया है।
20. इसलिलए अपील को अनुमति दी Kा ी है, उच्च न्यायालय क े आक्षेदिप आदेश को अपास् दिकया Kा ा है और अपीलक ा= द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यातिचका को अनुमति दी Kा ी है, जिKसकी प्रार्थी=ना की गई है। इस थ्य क े मद्देनKर (i) दिक अपीलक ा= दिपछले लगभग 16 वषw से वही दिवषय पढ़ा ा आ रहा है; और (ii) यह दिक मूल चयन सदिमति जिKसने उसे दिनयुदिN क े लिलए पात्र पाया, जिKसमें संस्क ृ दिवभाग क े प्रोफ े सर शादिमल र्थीे, जिKसका 'कम= काण्ड़' में तिडप्लोमा पाठ्यक्रम का एक भाग र्थीा, 5 वें प्रत्यर्थी5/दिवश्वदिवद्यालय को एक दिनदƒश Kारी दिकया Kा ा है दिक वह अपीलक ा= की सेवाओं को दिनयदिम करे। लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। ………............................ (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता).…………........................... (न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम) नई दिदल्ली 24 माच= 2022. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA