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भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी याति का सं. 1964 वर्ष# 2022
(एसएलपी (सिसविवल) सं. 871 वर्ष# 2017 से उद्भू )
उमेश ंद्र यादव ....अपीलक ा# (गण)
बनाम
महाविनरीक्षक एवं मुख्य सुरक्षा आयुक्त, आरपीएफ, उत्तर रेलवे,नई विदल्ली एवं अन्य ......प्रति वादी (गण)
विनण#य
न्यायमूर्ति रस् ोगी
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गयी।
2. अपीलक ा# विनर्विववाद रूप से एक विकशोर था जब 25 अक्टूबर, 1997 को उसक े खिLलाफ भार ीय दंड संविह ा की ारा 465,468 और 471 क े ह अपरा ों क े खिलए एक आपराति क मामला इस आरोप क े साथ शुरू विकया गया था विक उसने ोLे से जाली जाति प्रमाण पत्र ैयार विकया था। उसक े खिLलाफ आरोप पत्र दायर होने क े बाद, उसने बरी विकए जाने क े खिलए एक आवेदन विदया और विवद्वान एसीजेएम ने स्पष्ट विनष्कर्ष# दज# विकया विक अभिभयोजन अपीलक ा# क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA खिLलाफ पया#प्त सबू एकत्र करने में विवफल रहा है और उसे 15 विदसंबर, 2001 विदनांविक एक आदेश द्वारा कभिथ अपरा ों से बरी कर विदया गया।
3. इसक े लगभग एक दशक बाद रेलवे सुरक्षा बल में कांस्टेबलों क े यन और भ Z विकए जाने क े खिलए प्रति वादी द्वारा 23 फरवरी, 2011 को विवज्ञापन प्रकाभिश विकया गया। विवज्ञापन क े अनुसरण में, यन प्रवि\या जून 2014 में शुरू की गई थी और यन की प्रवि\या से गुजरने क े बाद, अपीलक ा# का अंति म रूप से यन विकया गया और 7 अक्टूबर, 2014 विदनांविक पत्र द्वारा उसे पुखिलस भ Z प्रभिशक्षण क ें द्र, होभिशयारपुर प्रभिशक्षण हे ु भेजा गया। इसक े बाद वह 1 नवंबर, 2014 को प्रभिशक्षण क ें द्र में शाविमल हुआ। अपीलक ा# को उस समय झटका लगा जब वर्ष# 1997 में उसक े विवरुद्ध संस्थिस्थ विकए गए आपराति क मामले की जानकारी न देने क े आ ार पर उसे 19 फरवरी, 2015, विदनांविक आदेश द्वारा उसकी विनयुविक्त रद्द आदेश वाले आदेश की ामील की गई।
4. उसकी विनयुविक्त रद्द करने क े संबं में 19 फरवरी, 2015 विदनांविक आदेश को इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह रिरट याति का दायर करक े ुनौ ी दी गई।
5. विवद्वान एकल न्याया ीश ने अभिभलेL पर उपलब् सामग्री और इस थ्य को भी ध्यान में रLने क े बाद विक वह उस समय विकशोर था जब उसक े खिLलाफ वर्ष# 1997 में आपराति क मामला संस्थिस्थ विकया गया था और यह थ्य विक विवद्वान विव ारण न्याया ीश ने 15 विदसंबर, 2001 को उन्मो न का आदेश पारिर विकया था, इस विनष्कर्ष# पर पहुं े विक यह सारवान जानकारी क े दमन का मामला नहीं था जो उसे उसकी विनयुविक्त से वंति करे और राम क ु मार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य[1] क े मामले में इस न्यायालय क े विनण#य का अवलंब ले े हुए, 19 फरवरी, 2015 विदनांविक विनरस् ीकरण का आदेश अपास् कर विदया और 20 जनवरी,
1. 2011(14) SCC 709 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 2016 विदनांविक विनण#य क े ह की गई विटप्पभिणयों क े आलोक में अपीलक ा# क े मामले पर नए सिसरे से पुनर्विव ार करने का विनदnश विदया।
6. विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर 20 जनवरी, 2016 विदनांविक आदेश को प्रति वादी द्वारा ुनौ ी दी गयी। उच्च न्यायालय की Lण्ड पीठ ने इस आ ार पर विक ूंविक उसक े खिLलाफ एक बार संस्थिस्थ विकए गए आपराति क मामले क े थ्य का Lुलासा नहीं विकया गया है, जो विक सारवान सामग्री को भिछपाना प्र ी हो ा है और इसक े परिरणामस्वरूप, विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनण#य को अपास् कर े हुए, 6 मई, 2016 विदनांविक आदेश द्वारा अपील की अनुमति दी सिजसे हमारे समक्ष अपील में ुनौ ी दी गयी है।
7. अपीलक ा# क े विवद्वान अति वक्ता का कथन है विक यह थ्य विववाविद नहीं है विक अपीलक ा# की जन्म ति भिथ जो स्क ू ल क े अभिभलेLों में दज# है, वह 15 जुलाई, 1985 है और 25 अक्टूबर, 1997 को, जब उसक े खिLलाफ आपराति क मामला संस्थिस्थ विकया गया था, वह 12 वर्ष# का था। विकशोर क े खिLलाफ इस रह का कोई आरोप नहीं लगाया जा सक ा था विक उसने ोLा ड़ी से एक जाली जाति प्रमाण पत्र ैयार विकया था और यांवित्रक प्रवि\या में आरोप पत्र दायर विकया गया था, लेविकन विवद्वान विव ारण न्याया ीश ने रिरकॉड# का परीक्षण करने क े उपरां 15 विदसंबर, 2001 विदनांविक आदेश द्वारा अपीलक ा# को इस स्पष्ट विनष्कर्ष# का उल्लेL कर े हुए बरी कर विदया विक विक रिरकॉड# पर कोई सबू उपलब् नहीं था सिजसक े आ ार पर अपीलक ा# क े खिLलाफ लगाए गए विकसी भी अपरा क े खिलए प्रथमदृष्टया आरोप को साविब विकया जा सक े और एक दशक क े बाद, 23 फरवरी, 2011 विदनांविक विवज्ञापन क े अनुसरण में प्रति वादी द्वारा यन की प्रवि\या शुरू की गई थी, सिजसमें उससे Lंड 12 क े ह एक अनुप्रमाणन फॉम# दाखिLल करक े यह दशा#ने की अपेक्षा की गई थी विक क्या उसे कभी अभिभयोसिज या विगरफ् ार या विहरास में खिलया गया था। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
8. व #मान थ्यों और परिरस्थिस्थति यों में, जब सक्षम क्षेत्राति कार वाले न्यायालय द्वारा उन्मो न का आदेश पारिर विकया गया था, न ो उसे अभिभयोसिज विकया गया और न ही उसे विगरफ् ार विकया गया था और इस प्रकार, जो जानकारी उसक े द्वारा भरे गए प्रणाणन प्रपत्र क े Lंड 12 क े संदभ# में दी गई थी, वह गल बयानी या भिछपाने का मामला नहीं था सिजसक े कारण अति कारिरयों द्वारा 19 फरवरी, 2015 विदनांविक आदेश द्वारा उसकी विनयुविक्त रद्द कर दी गई।
9. विवद्वान अति वक्ता ने आगे कहा है विक Lंडपीठ मामले क े सारवान पहलू पर गौर करने में विवफल रही है और भिछपाने क े बारे में दज# विकया गया विनष्कर्ष#, सिजसे उसने अनुप्रमाणन प्रारूप में जानबूझकर प्रकट नहीं विकया, रिरकॉड# पर मौजूद सामग्री द्वारा समर्थिथ नहीं है और विवति द्वारा पोर्षणीय नहीं है। अपने क # क े समथ#न में, विवद्वान अति वक्ता ने अव ार सिंसह बनाम भार संघ एवं अन्य[2] क े मामले में इस न्यायालय क े विनण#य का अवलंब खिलया है।
10. इसक े विवपरी, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने, Lंड न्यायपीठ द्वारा अभिभखिलखिL विनष्कर्ष# का समथ#न कर े हुए, यह कहा है विक अपीलक ा# द्वारा अपने अनुप्रमाणन प्रपत्र में सही थ्यों का Lुलासा नहीं करक े और विवशेर्ष रूप से Lंड 12 में, जहां उससे विवशेर्ष रूप से यह इंविग करने क े खिलए कहा गया था विक क्या उसे कभी विगरफ् ार विकया गया है या अभिभयोसिज विकया गया है, सारवान थ्यों को भिछपाया गया है और रिरकॉड# से यह थ्य स्थाविप हो जाने पर विक उसक े खिLलाफ एक आपराति क मामला दज# विकया गया था सिजसका वह Lुलासा करने में विवफल रहा था, और यही उसक े विनयुविक्त आदेश को रद्द करने हे ु 19 फरवरी, 2015 विदनांविक विनरस् ीकरण एक आदेश का आ ार था, उच्च न्यायालय की Lण्ड पीठ द्वारा उस आक्षेविप विनण#य में कोई गल ी नहीं की गई थी सिजसमें इस न्यायालय क े हस् क्षेप की मांग की गई है। 2 2016(8) SCC 471 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
11. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्तागण को सुना है और उनकी सहाय ा से अभिभलेL पर उपलब् सामग्री का अवलोकन विकया।
12. यह विववाविद नहीं है विक स्क ू ल क े रिरकॉड# में अपीलक ा# की जन्म ति भिथ 15 जुलाई, 1985, है और वह उस समय 12 वर्ष# का विकशोर था जब उसक े विवरुद्ध 25 अक्त ू बर, 1997 को आपराति क भिशकाय संस्थिस्थ की गई थी। उसक े खिLलाफ आरोप था विक उसने ोLा ड़ी से जाली जाति प्रमाण पत्र ैयार विकया था। एक विकशोर क े खिलए फजZ जाति प्रमाण पत्र ैयार करना क ै से संभव हो सक ा था। आरोप पत्र दाखिLल विकए जाने क े स् र पर, विवद्वान विव ारण न्याया ीश ने आरंभ में ही, यह विनष्कर्ष# अभिभखिलखिL करने क े बाद विक अभिभलेL पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब् नहीं है जो कभिथ अपरा को आकर्विर्ष कर सक े सिजसक े खिलए भिशकाय संस्थिस्थ की गई थी, अपीलक ा# को 15 विदसंबर, 2001, विदनांविक आदेश द्वारा उन्मोति कर विदया और विदए गए समय पर उसक े खिLलाफ आपराति क भिशकाय, सभी व्यावहारिरक उद्देश्यों क े खिलए अं ः बंद कर दी गई थी।
13. अपीलक ा# द्वारा भरा गया अनुप्रमाणन फॉम# और विवशेर्ष रूप से Lंड 12 और इस उद्देश्य क े खिलए प्रासंविगक भाग विनम्नव ् पुनः प्रस् ु विकया जा रहा हैः अनुप्रमाणन फॉम# की े ावनी उमेश ंद्र यादव अनुप्रमाणन फॉम# में झूठी जानकारी देना या विकसी भी थ्यात्मक जानकारी को भिछपाना विनरह# ा होगी और इससे अभ्यथZ सरकारी रोजगार क े खिलए अयोग्य हो जाएगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
2. यविद विहरास में खिलए गये हों, विगरफ् ार विकए गये हों,अभिभयोसिज विकए गये हों, है, विकसी मामले में वांभिछ हैं,जुमा#ना लगाया गया हो, दोर्षी ठहराया गया हो, दोर्षमुक्त विकए गये हों, इत्याविद, ो इस फॉम# को भरने और जमा करने क े ुरं बाद उसका विववरण संघ लोक सेवा आयोग या वह प्राति करण सिजसे अनुप्रमाणन फॉम# पहले भेजा गया हो, जैसा भी मामला हो, को सूति विकया जाना ाविहए। ऐसा नहीं करने पर इसे थ्यात्मक जानकारी को भिछपाना माना जाएगा।
3. यविद विकसी व्यविक्त की सेवा क े दौरान विकसी भी समय यह थ्य सामने आ ा है विक झूठी जानकारी दी गई है या अनुप्रमाणन फॉम# में विकसी थ्यात्मक जानकारी को भिछपाया गया है, ो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सक ी हैं। 1... 2....
12. (क) क्या आपको कभी विगरफ् ार विकया गया है? हां/नहीं (L) क्या आप पर कभी मुकदमा लाया गया है? हां/नहीं (ग) क्या आपको कभी विहरास में रLा गया है? हां/नहीं (घ) क्या आप विकसी मामले में वांभिछ हैं? हां/नहीं (ङ) क्या आप पर कभी विकसी न्यायालय द्वारा जुमा#ना विकया गया है? हां/नहीं
14. बाद में, जब प्रति वादी द्वारा रिरत्र और पूव#वृत्त प्रमाण पत्र सत्यापन कराया ो, गोरLपुर क े सिजला मसिजस्ट्रेट ने 30 विदसंबर, 2014 क े अपने पत्र द्वारा सूति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विकया विक एक रण में अपीलक ा# क े खिLलाफ अपरा संख्या 586/98 पंजीक ृ विकया गया था, लेविकन सक्षम क्षेत्राति कार वाले न्यायालय क े 15 विदसंबर, 2001 विदनांविक आदेश द्वारा उन्मोति कर विदया गया था। विफर भी, प्राति कारिरयों ने, अभिभलेL पर उपलब् सामग्री पर ध्यान विदए विबना, 19 फरवरी, 2015, विदनांविक आदेश द्वारा अपीलक ा# की उम्मीदवारी को रद्द करने का विनण#य खिलया, जो अपीलक ा# द्वारा दी गयी ुनौ ी का विवर्षय है।
15. इस पर कोई विववाद नहीं हो सक ा विक यन प्रवि\या में भाग लेने क े इच्छ ु क अभ्यथZ को सेवा में शाविमल होने से पहले या बाद में सत्यापन/अनुप्रमाणन फॉम# में अपने रिरत्र और पूव#वृत्त से संबंति सही जानकारी देना हो ा है। साथ ही, यह भी स है विक सिजस व्यविक्त ने सारवान जानकारी को दबाया है, वह विनयुविक्त या सेवा में विनरं र ा की मांग करने क े असीविम अति कार का दावा नहीं कर सक ा है, लेविकन, इसक े साथ ही, उसक े साथ मनमाना व्यवहार नहीं विकया जाना ाविहए और शविक्त का उपयोग उति रीक े से विकया जाना ाविहए और मामले क े थ्यों को ध्यान में रL े हुए वस् ुविनष्ठ ा क े साथ विकया जाना ाविहए। वह मापदंड सिजसका सदैव प्रयोग विकया जाना ाविहए, वह पद की प्रक ृ ति, क #व्यों की प्रक ृ ति, उपयुक्त ा पर भिछपाने का प्रभाव पर विनभ#र कर ा है सिजस पर सक्षम प्राति कारी द्वारा पद/सेवाओं की प्रक ृ ति को ध्यान में रL े हुए विव ार विकया जाना ाविहए और विदए गए समय पर विवभिभन्न पहलुओं पर विव ार करने क े उपरां ही शविक्त का उपयोग विकया जाना ाविहए और इस संबं में कोई सव#भू विनयम विन ा#रिर नहीं विकया जा सक ा है।
16. इससे पहले इस न्यायालय की Lण्ड पीठ क े विवभिभन्न विनण#यों में म वैभिभन्य होने क े कारण, इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की न्यायपीठ ने अव ार सिंसह (उपयु#क्त) क े मामले इस न्यायालय क े विवभिभन्न विनण#यों को ध्यान में रL े हुए और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवस् ृ विव ार-विवमश# क े बाद, पैरा 38 में विनष्कर्ष• को संक्षेप में प्रस् ु विकया गया है, प्रासंविगक भाग विनम्नानुसार हैः
38. हमने विवभिभन्न विनण#यों पर गौर विकया है और उन्हें यथासंभव सुलझाने और व्याख्यातिय करने की कोभिशश की है। उपयु#क्त ा# को ध्यान में रL े हुए, हम अपने विनष्कर्ष# को इस प्रकार संक्षेप में प्रस् ु कर े हैंः 38.[1] अभ्यथZ द्वारा विकसी आपराति क मामले में दोर्षमुविक्त, दोर्षसिसतिद्ध या विगरफ् ारी या विव ारा ीन ा क े बारे में विनयोक्ता को दी गई जानकारी, ाहे वह सेवा में प्रवेश करने से पहले या बाद में दी गयी हो, सही होनी ाविहए और आवश्यक जानकारी का कोई भिछपाव या गल उल्लेL नहीं होना ाविहए। 38.[2] गल जानकारी देने क े खिलए सेवाओं की समाविप्त या उम्मीदवारी रद्द करने का आदेश पारिर कर े समय, विनयोक्ता ऐसी जानकारी दे े समय मामले की विवशेर्ष परिरस्थिस्थति यों, यविद कोई हो, का संज्ञान ले सक ा है। 38.[3] विनयोक्ता विनण#य ले े समय कम# ारी पर लागू सरकारी आदेशों/अनुदेशों/विनयमों को ध्यान में रLेगा। 38.[4] यविद विकसी आपराति क मामले में संखिलप्त ा का भिछपाव या गल सू ना है, जहां आवेदन/सत्यापन फाम# भरने से पहले दोर्षमुविक्त या दोर्षसिसतिद्ध पहले ही दज# की जा ुकी है और ऐसा थ्य बाद में विनयोक्ता क े संज्ञान में आ ा है, ो मामले क े खिलए उपयुक्त विनम्नखिलखिL उपायों में से विकसी को भी अपनाया जा सक ा हैः 38.4.[1] ऐसे मामूली मामले में सिजसमें दोर्षसिसतिद्ध दज# की गई हो, जैसे कम उम्र में नारे लगाना या विकसी छोटे अपरा क े खिलए, सिजसक े बारे में Lुलासा होने पर कोई व्यविक्त प्रश्नग पद क े खिलए अयोग्य नहीं हो जा ा, विनयोक्ता अपने विववेक से इस रह क े थ्य को दबाने या झूठी जानकारी देेने को अनदेLा कर सक ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 38.4.[2] ऐसे मामले में जहां दोर्षसिसतिद्ध दज# की गई है जो ुच्छ प्रकृ ति का नहीं है, विनयोक्ता कम# ारी की उम्मीदवारी रद्द कर सक ा है या उसकी सेवाओं को समाप्त कर सक ा है। 38.4.3. यविद दोर्षमुविक्त जघन्य /गंभीर प्रक ृ ति क े अपरा या नैति क अ म ा क े मामले में कनीकी आ ार पर दज# की जा ुकी है और यह साफ-सुथरा रिरहाई या युविक्तयुक्त संदेह क े लाभ का मामला नहीं है, ो विनयोक्ता पूव#वृत्त क े बारे में सभी उपलब् प्रासंविगक थ्यों पर विव ार कर सक ा है और कम# ारी को जारी रLने क े बारे में उति विनण#य ले सक ा है। 38.[5] ऐसे मामले में जहां कम# ारी ने विकसी समाप्त आपराति क मामले की घोर्षणा सच्चाई क े साथ की है, विनयोक्ता को विफर भी पूव#वृत्त पर विव ार करने का अति कार है और उसे अभ्यथZ को विनयुक्त करने क े खिलए मजबूर नहीं विकया जा सक ा है। 38.[6] ऐसे मामले में जब ुच्छ प्रक ृ ति क े आपराति क मामले विव ारा ीन होने क े संबं में रिरत्र सत्यापन प्रपत्र में सच्चाई घोविर्ष की गई हो, ो विनयोक्ता मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्थति यों में, अपने विववेक से ऐसे मामले क े विनण#य क े अ ीन अभ्यथZ की विनयुविक्त कर सक ा है। 38.[7] कई लंविब मामलों क े संबं में जानबूझकर थ्य भिछपाने क े मामले में इस रह की झूठी जानकारी अपने आप में महत्वपूण# हो जाएगी और कोई विनयोक्ता अभ्यथZ की उम्मीदवारी रद्द करने या सेवाओं को समाप्त करने क े खिलए उति आदेश पारिर कर सक ा है क्योंविक ऐसे व्यविक्त क े खिLलाफ कई आपराति क मामले लंविब थे। 38.[8] यविद आपराति क मामला लंविब था, लेविकन फॉम# भरने क े समय उम्मीदवार को इसकी जानकारी नहीं थी, ो भी इसका प्रति क ू ल प्रभाव पड़ सक ा है और विनयुविक्त प्राति कारी अपरा की गंभीर ा पर विव ार करने क े बाद विनण#य लेंगे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 38.[9] यविद कम# ारी की सेवा में पुविष्ट हो जा ी है, ो दबा देने या सत्यापन प्रपत्र में झूठी जानकारी प्रस् ु आदेश क े आ ार पर बLा#स् गी /हटाए जाने या बLा#स् गी का आदेश पारिर आदेश से पहले विवभागीय जां कराना आवश्यक होगा।
38.10 भिछपाव या गल सू ना क े विन ा#रण क े खिलए सत्यापन/अनुप्रमाणन फॉम# स्पष्ट होना ाविहए, न विक अस्पष्ट। क े वल ऐसी जानकारी का Lुलासा विकया जाना ाविहए सिजसका विवशेर्ष रूप से उल्लेL विकया जाना आवश्यक है। यविद जानकारी मांगी नहीं गई है, लेविकन संबंति है, ो विफटनेस क े सवाल पर विव ार कर े समय वस् ुविनष्ठ रीक े से उस पर विव ार विकया जा सक ा है।हालांविक, ऐसे मामलों में विकसी ऐसे थ्य क े बारे में गल जानकारी को भिछपाने या गल जानकारी देने क े आ ार पर काय#वाही नहीं की जा सक ी सिजसे मांगा ही नहीं गया था।
38.11 इससे पहले विक विकसी व्यविक्त को भिछपाने या गल जानकारी देने का दोर्षी ठहराया जाए, थ्य का ज्ञान उसक े पास होना ाविहए।
17. व #मान मामले में, अपीलक ा# एक विकशोर था जब उसक े खिLलाफ 25 अक्टूबर, 1997 को एक आपराति क मामला दज# विकया गया था और 15 विदसंबर, 2001 को विवद्वान विव ारण न्याया ीश द्वारा उन्मो न का आदेश पारिर विकया गया था ब भी वह विकशोर था। यह विनर्विववाद रूप से एक विवशेर्ष परिरस्थिस्थति थी सिजसे प्राति कारी द्वारा 19 फरवरी 2015 क े आदेश द्वारा उनकी विनयुविक्त को रद्द करने का आदेश पारिर कर े समय ध्यान में नहीं रLा गया था।
18. Lण्ड पीठ ने इस थ्य पर ध्यान विदए विबना विक एक विकशोर को अक्टूबर 1997 में उसक े खिLलाफ दायर आपराति क मामले में नहीं फ ं साया जा सक ा था, आक्षेविप विनण#य में यांवित्रक रूप से काय# विकया और इस थ्य को तिडवीजन बें द्वारा ध्यान में नहीं रLा गया विक वह उस समय विकशोर था जब 15 विदसंबर, 2001 को उन्मो न का आदेश पारिर विकया गया था और उसक े लगभग एक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds दशक बाद, 23 फरवरी, 2011 क े एक विवज्ञापन क े अनुसरण में प्रति वादी द्वारा यन की प्रवि\या शुरू की गई थी, थ्यों की \मवार प्रक ृ ति दशा# ी है विक वह जानकारी जो अपीलक ा# द्वारा नहीं दी गयी थी, उसे विकसी रह से उसक े द्वारा भरे गए अनुप्रमाणन सत्यापन क े Lंड 12 में ऐसे सारवान थ्य का भिछपाव नहीं माना जा सक ा सिजसे सविदच्छ ु रूप से न विदया गया हो। इस संबं में, Lण्ड पीठ द्वारा यह दज# विकया गया यह विनष्कर्ष# विक सारवान जानकारी को दबाया गया था, पोर्षणीय नहीं है और इसे अपास् विकए जाने योग्य है।
19. शुरुआ में ो, हम अपीलक ा# को परिरणामी लाभ प्रदान आदेश क े खिलए इच्छ ु क नहीं थे क्योंविक उसने 19 फरवरी, 2015 को विनयुविक्त क े रद्द होने क े कारण उसकी सेवाएं समाप्त होने क े बाद काम नहीं विकया था, लेविकन व #मान थ्यों और परिरस्थिस्थति यों में, जब अपीलक ा# की कोई गल ी नहीं थी और विकसी ने उसे औति त्य सिसद्ध करने का उति अवसर नहीं विदया है और, साथ ही, प्राति कारी यह विव ार करने में भी विवफल रहे हैं विक अपीलक ा# उस ारीL को विकशोर था जब भिशकाय की गई थी और जब 15 विदसंबर, 2001 को विवद्वान विव ारण न्याया ीश द्वारा बरी विकया गया था, प्राति कारी द्वारा अपने विववेक क े प्रयोग में इन विवभिशष्ट थ्यों पर ध्यान नहीं विदया विक क्या थाकभिथ भिछपाव अपीलक ा# को सेवा जारी रLने से पूरी रह वंति कर ा है।
20. न ीज न, अपील सफल हुई और इसे ए द्द्वारा अनुमति दी जा ी है। प्राति कारी द्वारा 19 फरवरी, 2015 को जारी विनयुविक्त आदेश को रद्द करने वाले आदेश क े साथ-साथ उच्च न्यायालय की Lण्ड पीठ क े 6 मई, 2016 विदनांविक आदेश को भी Lारिरज और अपास् विकया जा ा है। प्रति वादी को वे न, वरिरष्ठ ा आविद सविह सभी पारिरणाविमक लाभों क े साथ अपीलक ा# को सेवा में बहाल करने का विनदnश विदया जा ा है। कोई लाग नहीं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
21. लंविब आवेदन (ओं), यविद कोई हों, विनस् ारिर विकए जा े हैं।.................. (न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी)................. (न्यायमूर्ति अभय एस. ओक) नई विदल्ली। 02 मा #, 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds