Full Text
भारत क
े सव च यायालय म
आपरािधक अपीलीय े ािधकार
आपरािधक अपील सं या 714/2022
( व.अनु.या. (आप.) सं. 7887 से उ प न)
अतबीर …….अपीलकता (गण)
बनाम
रा ीय राजधानी े द ली रा य ......... ितवाद (गण)
िनणय
दनेश माहे र , याय.
अनुमित दान क गई ।
JUDGMENT
2. भारत क े माननीय रा पित ारा मौत क सजा को कम कराने क े बाद अपने पूरे ाकृ ितक जीवन क े िलए कारावास क सजा काट रहे अपीलकता ने नई द ली उ च यायालय क े व ान एकल यायाधीश ारा र. या. (आप.) सं. 3345 म 02.08.2021 म पा रत आदेश जसम क जेल महािनदेशक, जेल मु यालय, ितहाड़, जनकपुर, नई द ली ारा जार कए गए 21.10.2019 क े आदेश क े व उसक रट यािचका को खा रज कर उसक े फरलो देने क े अनुरोध को अ वीकार कर दया गया था, से असंतु होने पर यह अपील दायर क है।
2.1. अपीलकता क े फरलो क े अनुरोध को पूव आदेश ारा अिनवाय प से भारत क े माननीय रा पित ारा दया यािचका पर जार कए गए दनांक 15.11.2012 क े आदेश क शत क े संदभ म अ वीकार कर दया गया है, जसक े अंतगत अपीलकता को द गई मौत क सजा को आजीवन कारावास म बदलते हुए, यह उपबंिधत कया गया था क अपीलकता ‘उसक े पूरे ाकृ ितक जीवन क े िलए पैरोल क े बना और कारावास क अविध म बना कसी कमी क े ’' जेल म रहेगा।
2.2. अपीलकता क ओर से मूलतः यह तक दया गया है क जहाँ तक द ली जेल िनयम, 2018 क े तहत उसक े फरलो क े अिधकार का संबंध है, 15.11.2012 क े आदेश क उपरो शत उसे ितबंिधत नह ं करती ह ।
3. जहाँ तक वतमान मामले क पूवगामी यापक परेखा का संदभ है, ासंिगक पृ भूिम क े पहलुओं को सं ेप म िन नानुसार देखा जा सकता है: 3.[1] अपीलकता पर भारतीय दंड सं हता, 1860 क धारा 302 क े तहत आपरािधक मामले म आरोप लगाया गया था जो क 1996 क एफआईआर सं या 24 क े अंतगत 08.02.1996 म मुखज नगर थाना, द ली म इस आरोप पर दज़ क गई थी क उसने अपनी सौतेली माँ, सौतेले भाई और सौतेली बहन को चाक ू से मार कर ह या कर द थी । वचारण क े प ात अित र स यायाधीश, द ली क े यायालय ने अपीलकता को दनांक 10- 09-2004 क े िनणय ारा पूव अपराध का दोषी ठहराया था और दनांक 27-09-2004 क े आदेश ारा उसे मौत क सजा सुनाई गई थी। मौत क सजा क पु क े साथ-साथ अपीलकता ारा अपनी दोषिस और सजा क े व दायर आपरािधक अपील क े संदभ म द ली उ च यायालय ने अपने दनांक 13-01-2006 क े फ ै सले ारा एक साथ िनणय िलया गया था। अपील खा रज कर द गई और मौत क सजा क पु क गई। इसक े अलावा, अपीलकता और सह-अिभयु ारा दायर 2006 क आपरािधक अपील सं या 870 और 2006 क आपरािधक अपील सं या 877 पर इस यायालय ारा 09.08.2010 को वचार कया गया और िनणय िलया गया। अिभलेख पर रखी गई साम ी क जाँच करने और ासंिगक त य और प र थितय क े व ेषण क े बाद, इस यायालय ने अपीलकता क दोषिस क पु क और इसे 'दुलभतम ेणी' म आने वाला मामला पाते हुए, उसे द गई मौत क सजा क पु क, और सह-अिभयु को द गई दोषिस और आजीवन कारावास क सजा क भी पु क । इस यायालय ने अ य बात क े साथ- साथ, िन नानुसार गौर कया और माना: "48. हालां क आरोपी अतबीर भी उस समय 25 साल का था, ले कन संप क े िलए उसक भूख और लालसा को देखते हुए, उसक े ारा अपने ह प रवार क े सद य क े बना उकसाए या वरोध कये सभी तीन य य क े मह वपूण अंग पर चाक ू से 37 बार वार करने से, हम यह िन कष िनकालते ह क यह अ यिधक अिभयो यता वाला गंभीरतम और दुलभतम मामला है और इसक े िलए िसफ़ मौत क सजा ह उिचत और पया होगी।
49. हम पहले ह नोट कर चुक े ह क आरोपी क े पास अपने कृ य क े िलए कोई उिचत आधार नह ं था। हम इस बात से भी संतु ह क पी ड़त असहाय और असुर त थे। सभी त य और सामि य को यान म रखते हुए, यह प है क अतबीर का पूरा कृ य सव च तर क े बबर और अमानवीय यवहार क े समान है। वतमान मामले म जस तरह से ह या को अंजाम दया गया, वह बेहद ू र, वीभ स, शैतानी और अशांत करने वाला है जो समुदाय क सामू हक अंतरा मा को झकझोर देता है।
50. उपरो चचा क े आलोक म, हम अतबीर को द गई दोषिस और मौत क सजा क पु करते ह और इसे कानून क े अनुसार िन पा दत कया जाएगा। हम अशोक को दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास क सजा क भी पु करते ह।
3.2. अिभलेख पर रखी गई साम ी से पता चलता है क दनांक 02.03.2011 को अपीलकता ारा दायर 2010 क समी ा यािचका सं या 518 को इस यायालय ारा खा रज कर दया गया था और 14.05.2011 को उसक े ारा दायर सुधारा मक यािचका को भी खा रज कर दया गया था। तदप ात, अपीलकता ने भारत क े सं वधान क े अनु छेद 72 क े अंतगत भारत क े माननीय रा पित क श य को मा दान करने और सजा को िनलं बत करने, माफ करने या कम करने क श य का आ य लेते हुए एक यािचका दायर क थी।
3.3. दनांक 15.11.2012 क े आदेश ारा, भारत क े माननीय रा पित ने अपीलकता को द गई मौत क सजा को संशोिधत करने क े िलए गृह मं ालय क िसफा रश को वीकार कया और तदनुसार, मौत क सजा को आजीवन कारावास म इस अपे ा क े साथ त द ल कया क वह बना पैरोल अपने ाकृ ितक जीवन का शेष समय जेल म बताएगा और कारावास क अविध म उसे कोई माफ़ नह ं िमलेगी। दनांक 15.11.2012 क े आदेश क उपयु वषय-व तु (अनुल नक पी-3) िन नानुसार है:-
1. उ ह ने कहा, 'मने सं वधान क े तहत दोषी क ै द अतबीर पु सर जसवंत िसंह ारा दायर दया यािचका का अवलोकन कया है और माननीय उ चतम यायालय क े फ ै सले और यायालय क ट प णय और िसफा रश का भी अ ययन कया है।
2. मामले क े सभी त य पर वचार करने क े बाद, म गृह मं ी ारा क गई िसफा रश से सहमत हूं क दोषी क ै द अतबीर पु ी जसवंत िसंह क मौत क सजा को आजीवन कारावास म संशोिधत कया जाएगा । हालां क, क ै द पैरोल क े बना अपने शेष ाकृ ितक जीवन क े िलए जेल म रहेगा और कारावास क अविध म कोई माफ़ नह ं िमलेगी ।
4. उपरो पृ भूिम पहलुओं को यान म रखते हुए, अपीलकता को पैरोल क े बना और कारावास क अविध म बना कसी माफ़ क े अपने पूरे ाकृ ितक जीवन क े िलए कारावास क सजा काटनी है। तदनुसार, अपीलकता कारावास क सजा काट रहा है। हालां क, उ ह ने द ली जेल िनयम, 2018 क शत क े अनुसार फरलो देने क े िलए आवेदन कया था।
4.1. अपीलकता ारा फरलो देने क े िलए कए गए अनुरोध को जेल महािनदेशक ने दनांक 21.10.2019 क े आदेश (अनुबंध पी-4) ारा खा रज कर दया था। दनांक 21.10.2019 क े इस आदेश क ासंिगक साम ी, जसे अपीलकता ारा चुनौती द जा रह है, िन नानुसार है: – " वषय: थाना मुखज नगर, द ली म भा.दं.सं. क धारा 302/34 क े अंतगत दायर मुकदमा एफ.आई.आर. सं या 24/1996 म अतबीर पु ी जसवंत िसंह को फरलो देने क े आवेदन क े संबंध म रेफर: क ं यूटर डायर सं. 3574359 यह दोषी अतबीर पु ी जसवंत िसंह को फरलो देने क े आवेदन क े संदभ म है। इस संबंध म, मुझे आपको यह सूिचत करने का िनदश दया गया है क स म ािधकार ने फरलो दान करने क े आवेदन पर वचार कया है और इस तर पर इसे िन निल खत कारण से घो षत कया गया है:-
1. भारत क े माननीय रा पित ने दनांक 17.01.13 पर एक आदेश पा रत कया है जसक े तहत उसक मौत क सजा को इस शत क े साथ आजीवन कारावास म बदल दया गया क वह शेष ाकृ ितक जीवन पैरोल क े बना और बना सजा म माफ़ क े हरासत म बताए।
2. द ली जेल िनयम 2018 क े अनु छेद 1223 (आई) क े अनुसार- जेल म अ छा आचरण और पछले 3 वा षक अ छे आचरण रपोट म पुर कार अ जत कया जाना चा हए और अ छे आचरण को बनाए रखना जार रखना चा हए। इसिलए, क ै द द ली जेल िनयम 2018 क े अनु छेद 1223 (आई) म उ ल खत मानदंड को पूरा नह ं कर रहा है य क दोषी ने पछली तीन वा षक अ छे आचरण रपोट अ जत नह ं क है। दोषी को उिचत पावती क े तहत सूिचत कया जा सकता है।
5. दनांक 21.10.2019 क े उपरो आदेश से यिथत होकर, अपीलकता ने उ च यायालय क े सम एक रट यािचका दायर क है। उ च यायालय ने पृ भूिम क े पहलुओं पर यान दया और फर, अपने दनांक 03.07.2020 क े आदेश क े संदभ म 2019 क र.या. (आप.) सं. 682: चं कांत झा बनाम रा ीय राजधानी े द ली रा य, यायालय ने पाया क अपीलकता फरलो क मांग करने का हकदार नह ं था य क वह सजा म कसी भी तरह क माफ़ का हकदार नह ं था। यािचकाकता क े मामले क े संबंध म उ च यायालय ारा पा रत सं आदेश म पूरा तक िन नानुसार है: - "3. य क यािचकाकता कसी भी कार क माफ़ का हकदार नह ं है, इसिलए यािचकाकता का फरलो मांगने का दावा र.या. (आप.) सं. 682/2019 चं कांत झा बनाम रा ीय राजधानी े द ली रा य' म दनांक 3 जुलाई, 2020 क े इस यायालय क े फ ै सले क े म ेनजर नह ं बनता है
6. जेल महािनदेशक और उ च यायालय ारा पा रत उपरो आदेश पर सवाल उठाने क मांग करते हुए, और अपीलकता क े फरलो दए जाने क े अिधकार पर जोर देते हुए, व ान वक ल सु ी नेहा कपूर ने जोरदार तक दया है क संबंिधत ािधकरण और उ च यायालय ने मामले को पूर तरह से गलत से देखा है और भारत क े माननीय रा पित ारा पा रत आदेश क े साथ-साथ 2018 क े िनयम म ासंिगक ावधान क गलत या या पर अपीलकता क े अनुरोध को अ वीकार कर दया है। व ान वक ल ने कहा क ये आदेश क ै दय को छ ु ट दए जाने क े अिधकार और वशेष प से 2018 क े िनयम म अपीलकता को उपल ध अिधकार को िनयं त करने वाले मौिलक िस ांत क े वपर त ह। 6.[1] अपीलकता क े वक ल ने तक दया है क फरलो क ै द को जेल म अ छे आचरण बनाये रखने क े प रणाम व प िमलती है; और यह क े वल इस आधार पर अ वीकृ त नह ं क जा सकती क उसे अपना पूरा ाकृ ितक जीवन जेल म बताना होगा, जो क उसे कसी भी थित म बताना ह पड़ेगा। इस कार, व ान वक ल क े अनुसार, य द अपीलकता जेल म अ छा आचरण बनाए रखता है और 2018 क े िनयम क े िनयम 1223 (आई) क े तहत दान क गई पा ता शत को पूरा करता है, यानी, उसक अंितम 3 वा षक अ छे आचरण रपोट ह, तो वह फरलो का हकदार है और उसे अ वीकार नह ं कया जा सकता है। 6.[2] व ान अिधव ा ने यह भी िनवेदन कया है क 2018 क े िनयम क े िनयम 1223 (आई) म आने वाली अिभ य "वा षक अ छे आचरण रपोट" को अिधका रय और उ च यायालय ारा "वा षक अ छे आचरण माफ " वा यांश क े साथ गलत तर क े से समक कया गया है। व ान अिधव ा ने िनवेदन कया क वगत 3 वा षक अ छे आचरण रपोट अपीलकता क े प म ह और इसिलए वह फरलो पाने क बुिनयाद आव यकता को पूरा करता है। व ान अिधव ा आगे तुत करते ह क भले ह भारत क े माननीय रा पित ने सजा म माफ क कटौती क हो, जो भारत क े सं वधान क े तहत श य का योग करक े द जा सकती थी; या, भले ह दंड या सं हता, 1973 क धारा 432 क े तहत समय से पहले रहाई क रयायत[1] उपल ध न हो, इससे अपीलकता को फरलो देने क े िलए 2018 क े िनयम क े तहत जेल अिधका रय - वतमान मामले म जेल महािनदेशक - क श म कटौती नह ं होगी। 6.[3] व ान अिधव ा ने कहा क अपीलकता लगभग 26 वष से जेल म बंद है। अ छे आचरण को बनाए रखने और उसक े ारा कए गए काय क े िलए द जाने वाली सजा म माफ़, भले ह उसक सजा म जुड़ जाए, तब तक भावी नह ं ह जब तक क स म ािधकार ारा सजा को े षत / कम नह ं कया जाता है। ले कन इससे यह िन कष नह ं िनकलता है क अपीलकता पूण प से सजा म माफ़ अ जत करना बंद कर दे; और इस तरह क सजा म माफ़ क े कारण उसे रहाई का लाभ िमलता है या नह ं, यह एक अलग मामला है और फरलो क े फ ै सले म िनणायक भूिमका अदा नह ं इसक े बाद इसे 'सीआरपीसी' क े प म संदिभत कया गया। करता है। दलील यह है क छ ु ट देने क े िलए क ै द क े मामले पर वचार करने क े उ े य से माफ देने क पा ता ासंिगक नह ं है। 6.[4] व ान अिधव ा ने तक दया है क अपीलकता क े फरलो दए जाने क े अिधकार को छ नना सुधारा मक कोण और ो साहन वृ क े वपर त है। इसक े अलावा, व ान अिधव ा क े अनुसार, एक क ै द का सबसे मह वपूण अिधकार उसक शार रक और मानिसक य व क अखंडता है; और कोई भी क ै द य गत प से अभाव क े अधीन नह ं कया जा सकता है जो क क ै द और सजा क अविध क े कोण से आव यक नह ं है। 6.[5] अपीलकता क े अिधव ा ने चं कांत झा (उपरो ) मामले म द ली उ च यायालय क े िनणय का भी स दभ दया है और कहा है क इस मामले म इस यायालय क सं वधान पीठ ारा भारत संघ बनाम वी ीहरन और अ य: (2016) 7 एससीसी 1 िनणय को आधार बनाना गलत है य क इस यायालय ारा क गई ट पणी क "जब धारा 432 क े तहत मूल सजा म माफ़ द जाती है, क े वल तब ह अ जत सजा म माफ़ का ेय दया जा सकता है, अ यथा नह ं का मतलब यह नह ं है क अपीलकता क े वल तभी फरलो का लाभ उठा सकता है जब उसक े मामले म समय से पहले रहाई पर वचार कया जाए। िनवेदन कया जाता है क फरलो क सु वधा क े वल हरासत क अविध क े दौरान उपल ध है और जैसा क उ च यायालय ारा माना गया है, सजा म माफ़ क े साथ यह सह-स ब ध क फरलो क े वल तभी उपल ध होगी जब सजा म माफ़ उपल ध हो, सह नह ं है। 6.[6] व ान अिधव ा ने हमारे सम उन माण-प क ितयां भी रखी ह जो क अपीलकता को अ छे आचरण, अ जत यो यता और यहां तक क को वड-19 क े खलाफ लड़ाई क े िलए जार कए गए ह।
7. ितवाद क ओर से पेश अित र सॉिलिसटर जनरल एस.वी. राजू ने द ली जेल अिधिनयम, 2000 क धारा 2 (एच) और द ली जेल िनयम, 2018 क े िनयम 1199 म फरलो क प रभाषा का उ लेख कया है; और फरलो क े अनुदान क े अंतिन हत िस ांत का भी उ लेख कया है, जैसा क इस यायालय ारा अशफाक बनाम राज थान रा य और अ य: (2017) 15 एससीसी 55 मामले म समझाया गया है:. 7.[1] व ान एएसजी क े अनुसार इस यायालय क े लागू ावधान और टप णय पर यापक प से वचार करते हुए, फरलो क ै द क सजा म कटौती है, जो सजा म माफ़ क े बराबर है और भारत क े माननीय रा पित क े दनांक 15-11-2012 क े आदेश क े म ेनजर इस मामले म यह कटौती वीकाय नह ं है। 2018 क े िनयम क े िनयम 1222 क े अनुसार, जब तक क दोषी फरलो पर रहते हुए अपराध नह ं करता है, फरलो क अविध सजा से काट ली जाती है; और य क इस तरह क कटौती अनुमेय नह ं है, अपीलकता फरलो दए जाने का हकदार नह ं है। 7.[2] 2018 क े िनयम क े िनयम 1223 क े संदभ म, व ान एएसजी ने िनवेदन कया है क फरलो क े वल तभी दया जा सकता है जब अपीलकता का जेल म अ छा आचरण हो और उसने पछले 3 वा षक अ छे आचरण रपोट म पुर कार अ जत कया हो और अ छा आचरण बनाए रखा हो। 2018 क े िनयम क े िनयम 1178 क े तहत वा षक अ छे आचरण माफ़ का हक़दार न होने क े कारण, अपीलकता को फरलो नह ं दया जा सकता है। 7.[3] व ान एएसजी ने गुजरात रा य और आं देश बनाम नारायण: (2021) एससीकॉनलाइन एससी 949 म इस यायालय क ट प णय का भी स दभ िलया है और िनवदेन कया है क अपीलकता जैसे क ै द क े पास फरलो का दावा करने का कोई ठोस कानूनी अिधकार नह ं है; और वतमान मामले म, जहां अ छे आचरण म माफ़ उपल ध नह ं है, अपीलकता को फरलो उपल ध नह ं होगा। हालां क, ितवाद क े ख क े बरकरार रहने क े बावजूद भी, व ान एएसजी ने पूर िन प ता क े साथ, फरलो क अवधारणा क े अंतिन हत िस ांत क े मु े को शािमल नह ं कया है, जैसा क 2018 क े िनयम ारा प रक पत है और जैसा क इस यायालय ारा समझाया गया है।
8. हमने ित ं क तुितय पर गंभीरता से वचार कया है और उपयु कानून क े संदभ म मामले क े अिभलेख क जांच क है।
9. इस मामले म उठाए गए मु े से िनपटते हुए, यानी क यह क अपीलकता अपने पूरे ाकृ ितक जीवन क े िलए कारावास क अविध म कसी भी कार क सजा म माफ़ पर रोक क े बावजूद द ली जेल िनयम, 2018 क े तहत फरलो का हकदार है, सबसे पहले, उपयु ावधान पर यान देना आव यक है।
9. 1 द ली कारागार अिधिनयम, 2000 क धारा 2(एच) म फरलो क प रभाषा इस कार द गई है: "फरलो का अथ एक ऐसे दोषी क ै द को पुर कार क े प म द गई छ ु ट है, जसे 5 साल या उससे अिधक अविध क कठोर कारावास क सजा सुनाई गई है और जसक े उसने 3 साल बताए ह" 9.[2] द ली जेल िनयम, 2018 का अ याय पैरोल और फरलो से संबंिधत मामल से संबंिधत है। पैरोल और फरलो क े उ े य िनयम 1197 से 1200 म िनधा रत कए गए ह और इसे िन नानुसार प से पुन: तुत कया जा सकता है: - "1197. क ै दय क पैरोल और फरलो सुधारा मक या क े अंतगत गितशील उपाय ह। पैरोल पर क ै द क रहाई न क े वल उसे क ै द क बुराइय से बचाती है, ब क उसे अपने प रवार और समुदाय क े साथ सामा जक संबंध बनाए रखने म भी स म बनाती है। यह उसे आ म व ास क भावना को बनाए रखने और वकिसत करने म भी मदद करता है। प रवार और समुदाय क े साथ िनरंतर संपक उनक े भीतर जीवन क े िलए आशा जी वत रखता है। फरलो पर क ै द क रहाई उसे अ छे आचरण को बनाए रखने और जेल म अनुशािसत रहने क े िलए े रत करती है।
1198. पैरोल का अथ होता है, कसी क ै द को अ पकाल क े िलए अ थायी प से रहा करना ता क वह अपने पा रवा रक और सामा जक दािय व और ज मेदा रय को पूरा करने क े िलए अपने प रवार और समुदाय क े साथ सामा जक संबंध बनाए रख सक े । यह क ै द क े िलए बाहर दुिनया क े साथ िनयिमत संपक बनाए रखने का अवसर है ता क वह समाज म नवीनतम घटनाओं से खुद को प रिचत रख सक े । हालां क, यह प कया जाता है क जहां तक उसक सजा का संबंध है, पैरोल पर रहते हुए क ै द ारा जेल क े बाहर बताई गई अविध कसी भी तरह से रयायत नह ं है । क ै द को पैरोल पर जेल क े बाहर बताई गई अविध क े िलए जेल म अित र समय बताना पड़ता है। 1199.फरलो का अथ होता है, अ छे आचरण को बनाए रखने और जेल म अनुशािसत ढंग से रहने को ो सा हत करने क े िलए क ु छ उपयु वष क े कारावास क े अंतराल क े बाद क ै द को क ु छ समय क े िलए रहा करना। यह प प से जेल म अ छे आचरण क े िलए ो साहन है। इसिलए, क ै द ारा छ ु ट पर जेल क े बाहर बताई गई अविध को उसक सजा म िगना जाएगा।
1200. कसी क ै द को पैरोल और फरलो पर रहा करने क े िन निल खत उ े य ह:. क ै द को अपने पा रवा रक जीवन क े साथ िनरंतरता बनाए रखने और पा रवा रक और सामा जक मामल से िनपटने म स म बनाना।. उसका आ म व ास बनाने और वकिसत करने म स म बनाना। iii. उसे जीवन म रचना मक आशा और स य िच वकिसत करने म स म बनाने क े िलए, ड ड iv. उसे बाहर दुिनया क े वकास से संपक म रहने म मदद करने क े िलए, v. उसे शार रक और मनोवै ािनक प से व थ रहने म मदद करने क े िलए vi. उसे क ै द क े तनाव और बुरे भाव से उबरने/उठने म स म बनाना। vii. उसे जेल म अ छा आचरण और अनुशासन बनाए रखने क े िलए े रत करने क े िलए" (जोर दया गया)
9.3. फरलो क े विश वषय को 2018 क े उ िनयम क े िनयम 1220 से 1225 म समझाया गया है, जसे िन नानुसार प से पुन: तुत कया जा सकता है: - "1220. एक क ै द जसे 5 या उससे अिधक साल क कठोर कारावास क सजा सुनाई गई है और जो दोषी ठहराए जाने क े 3 साल बाद क सजा बेदाग रकॉड क े साथ काट चुका है, फरलो का पा हो जाएगा।
1221. एक क ै द, जैसा क ऊपर व णत है, को एक दोषिस वष म क ु ल 7 स ाह का अवकाश तीन बार क े अंतराल म दया जा सकता है, जसम एक अविध म अिधकतम 03 स ाह ह हो सकते ह। नोट:- येक पा दोषी को उसक े ज म दन क े मह ने म बना कसी फरलो क े आवेदन क े एक बार फरलो द जा सकती है, जो अ य शत को पूरा करने क े अधीन है। य द क ै द इस फरलो का लाभ नह ं उठाना चाहता है तो इस संबंध म उससे िल खत वचन िलया जा सकता है।
1222. य द क ै द को फरलो पर रहा कर दया जाता है और इस अविध क े दौरान वह कोई अपराध करता है, तो इस अविध को बताई गई सजा म नह ं िगना जाएगा।
1223. फरलो ा करने क े िलए पा होने क े िलए, क ै द को िन निल खत मानदंड को पूरा करना होगा: -
1224. िन निल खत े णय क े क ै द फरलो पर रहाई क े िलए पा नह ं ह गे: i. राज ोह, आतंकवाद गित विधय और एनड पीएस अिधिनयम क े तहत दोषी ठहराए गए क ै द । ii. जन क ै दय क समाज म त काल उप थित को उनक े मूल जले क े जला म ज ेट ारा सावजिनक शांित और यव था क े िलए खतरनाक या हािनकारक माना जा सकता है या ऐसे क ु छ अ य आधार मौजूद ह जैसे क गंभीर अपराध से जुड़े मामले म लं बत जांच। iii. जन क ै दय को खतरनाक माना जाता है या जो हमले, दंगा भड़काने, व ोह या भागने जैसी गंभीर जेल हंसा म शािमल रहे ह, या ज ह फर से िगर तार कया गया है, जो पैरोल या फरलो पर रहा होने क े दौरान फरार हो गए ह या जो अपनी वा षक अ छ आचरण रपोट क े अनुसार जेल अनुशासन क े गंभीर उ लंघन को उकसाते हुए पाए गए ह।. दोषी वदेशी. मानिसक बीमार से पी ड़त क ै द, ज ह िच क सा अिधकार ारा ठ क होने का माण नह ं िमला है । नोट:- (1) सह-अिभयु दो षय को एक साथ फरलो देना आमतौर पर वीकाय नह ं है। हालां क, जब सह-आरोपी दोषी प रवार क े सद य होते ह, तो एक साथ रहाई पर क े वल असाधारण प र थितय म वचार कया जा सकता है। नोट:- (2) य द कसी दोषी क अपील उ च यायालय क े सम लं बत है या उ च यायालय क े सम अपील दायर करने क अविध समा नह ं हुई है, तो फरलो नह ं दया जाएगा और दोषी क े पास यायालय से उिचत िनदश ा करने क छ ू ट होगी ।
1225. बला कार क े बाद ह या म पॉ सो ए ट म, एक या कई मामल म कई ह याओं म, ह या क े साथ डक ै ती और फरौती क े िलए अपहरण क े बाद ह या म दोषी क ै दय क े बारे म स म ािधकार ारा िन निल खत मापदंड पर वचार कया जा सकता है: (i) जेल उप महािनर क (रज) उ मामले पर वचार करने क े िलए विश िसफा रश करगे। (ii) ऐसे फरलो आवेदन पर िनणय लेते समय समाज क याण/प रवी ा अिधकार क रपोट/िसफा रश पर वचार कया जाएगा। (iii) उपरो िनयम 1221 से िनयम 1223 म उ ल खत शत /िनयम क े अधीन, ऐसी ेणी क े िलए फरलो क अविध िन नानुसार होगी: (ए) पा ता क े पहले वष म 3 स ाह का क े वल एक बार का फरलो । (बी) पा ता क े दूसरे वष म एक 3 स ाह का और दूसरा 2 स ाह का क े वल दो बार का फरलो । (ग) बाद क े वष म अ य सभी दो षय क े समान तीन बार का फरलो ।
10. जमानत, फरलो और पैरोल क े मा यम से क ै द क रहाई क े मामले से संबंिधत विभ न ावधान से संबंिधत िस ांत पर वचार कया गया है और इस यायालय ारा अपने कई िनणय म अंतर क या या क गई है। हम और माण क आव यकता नह ं है, ले कन इस यायालय ारा अशफ़ाक़ (उपरो ) मामले म क गई ट प णय और िनंदा पर यान देना ासंिगक होगा, जहां अ य बात क े साथ-साथ देखा गया था क:- "11. पैरोल और फरलो क े बीच एक सू म अंतर है। पैरोल को क ै दय क सशत रहाई क े प म प रभा षत कया जा सकता है यानी क क ै द क े अ छे यवहार और अिधका रय क िनयिमत रपो टग क े आधार पर सशत और िनधा रत अविध क े िलए ज द रहाई । इसे सशत माफ क े प म भी प रभा षत कया जा सकता है जसक े ारा दोषी को उसक अविध क समाि से पहले रहा कर दया जाता है। इस कार, पैरोल इस शत पर अ छे यवहार क े िलए द जाती है क पैरोली िनयिमत प से एक िन द अविध क े िलए पयवे ण अिधकार को रपोट करता है। क ै द क पैरोल पर इस तरह क रहाई क ु छ बुिनयाद आधार पर अ थायी प से भी हो सकती है। उस थित म, सजा क अविध को बरकरार रखते हुए, इसे क ु छ समय क े िलए सजा क े िनलंबन क े प म माना जाना चा हए। पैरोल पर रहाई क ु छ विश अिनवायताओं क े अंतगत क ै दय को क ु छ राहत देने क े िलए बनाई गई है।
14. दूसर ओर, फरलो जेल से एक सं रहाई है। यह सशत है और लंबी अविध क े मामले म द जाती है। क ै दय ारा फरलो पर बताई गई सजा क अविध को उ ह बाद म जेल म काटने क आव यकता नह ं है, जैसा क पैरोल म कया जाता है। फरलो को अ छे आचरण क े मामले म सजा म माफ़ क े प म दया जाता है।
15. शा दक प से दोषी को सजा क अविध क े िलए या य द वह आजीवन कारावास क सजा काट रहा है तो अपने शेष जीवन क े िलए जेल म रहना चा हए । इस संदभ म थोड़े समय क े िलए जेल से उनक रहाई को न क े वल उनक य गत और पा रवा रक सम याओं को हल करने क े िलए ब क समाज क े साथ अपने संबंध को बनाए रखने क े िलए एक अवसर क े प म माना जाना चा हए। दो षय को भी कम से कम क ु छ समय क े िलए ताजी हवा म सांस लेना चा हए, बशत वे क ै द क े दौरान लगातार अ छा आचरण बनाए रख और खुद को सुधारने क वृ दखाएं और अ छे नाग रक बन। इसिलए, समाज क भलाई क े िलए कारावास क सजा काट रहे ऐसे क ै दय क े मोचन और पुनवास को उिचत मह व िमलना चा हए।
16. इस यायालय ने विभ न िनणय क े मा यम से पैरोल और फरलो क े बीच अंतर िनधा रत कया है, जनम से क ु छ िन नानुसार ह: (i) पैरोल और फरलो दोन सशत रहाई ह। (ii)पैरोल अ पकािलक कारावास क े मामले म द जा सकती है जब क फरलो म लंबी अविध क े मामले म द जाती है। (iii)पैरोल क अविध एक मह ने तक बढ़ जाती है जब क फरलो क े मामले म यह अविध अिधकतम चौदह दन तक बढ़ सकती है। (iv)पैरोल संभागीय आयु ारा द जाती है और फरलो जेल उप-महािनर क ारा द जाती है। (v) पैरोल क े िलए विश कारण क आव यकता होती है, जब क फरलो कारावास क एकरसता को तोड़ने क े िलए होता है। (vi)पैरोल क अविध क गणना कारावास क अविध म नह ं होती है, जब क फरलो म इसक े वपर त थित है। (vii) पैरोल कई बार द जा सकती है जब क फरलो क े मामले म यह सं या सीिमत है। (viii) य क फरलो कसी वशेष कारण से नह ं दया जाता है, इसिलए समाज क े हत म इसको अ वीकृ त कया जा सकता है। (महारा रा य बनाम सुरेश पांडुरंग दरवाकर और ह रयाणा रा य बनाम मो हंदर िसंह)"
10.1. इसक े अलावा, नारायण (उपरो ) मामले म, इस यायालय ने िस ांत को िन निल खत श द म सं ेप म तुत कया:- "24. िस ांत को यापक, सामा य श द म इस ितवाद को यान म रखते हुए तैयार कया जा सकता है क पैरोल और फरलो क े िलए शासी िनयम को येक संदभ म लागू कया जाना चा हए। यह िस ांत इस कार ह: (i) फरलो और पैरोल म हरासत से अ पकािलक अ थायी रहाई क प रक पना क गई है; (ii) जब क पैरोल क ै द को एक विश आव यकता को पूरा करने क े िलए द जाती है, फरलो बना कसी कारण िनधा रत वष कारावास म बताने क े बाद द जा सकती है; (iii) फरलो क मंजूर कारावास क एकरसता को तोड़ने और दोषी को पा रवा रक जीवन क े साथ िनरंतरता बनाए रखने और समाज क े साथ एक करण करने म स म बनाने क े िलए है; (iv) हालां क फरलो का दावा बना कसी कारण क े कया जा सकता है, क ै द को फरलो का दावा करने का पूण परम अिधकार नह ं है।; (v) फरलो क मंजूर को सावजिनक हत क े अनु प संतुिलत कया जाना चा हए और यह क ु छ े णय क े क ै दय क े िलए िनषेध क जा सकती है।."
11. मामले क सम ता म जांच करने क े बाद, हम आ े पत आदेश म इस तक से सहमत होना मु कल लगता है क एक बार भारत क े माननीय रा पित ारा अपीलकता का पैरोल क े बना और कारावास क अविध म सजा म माफ़ क े बना अपने शेष ाकृ ितक जीवन तक जेल म रहना िनधा रत कर दया गया, उसक े अ य सभी अिधकार, वशेष प से अ छे जेल आचरण से उ प न होने वाले, जैसा क 2018 क े िनयम म उपल ध है, पर ितबंध लग जाएगा ।
12. जैसा क ठ क ह बताया गया है, 2018 क े िनयम म, फरलो ा करने क े िलए पा ता '3 वा षक अ छे आचरण रपोट' क है, न क '3 वा षक अ छे आचरण क सजा म माफ़ '। 2018 क े िनयम क े िनयम 1223 क े खंड (1) म िनयो जत यह अिभ य यां ह क क ै द को जेल म अ छा आचरण बनाए रखना चा हए और पछले 3 वा षक अ छे आचरण रपोट म पुर कार अ जत करना चा हए था' और यह भी क उ ह इसे जार रखना चा हए'। यहाँ तक क इन अिभ य य का मतलब यह नह ं समझा जा सकता क क ै द को 'अ छे आचरण क े िलए सजा म माफ़ ' अ जत करनी चा हए। 2018 क े िनयम क योजना म यह नह ं कहा जा सकता है क पुर कार अ जत करना सजा म माफ़ अ जत करने क े बराबर है।
12.1. यह भी सह कहा गया है क जब फरलो अ छे जेल आचरण क े िलए ो साहन है, तो भले ह य को अ यथा कोई सजा म माफ़ न िमले, और उसे अपना शेष ाकृ ितक जीवन जेल म रहना पड़े, इसका सीधा मतलब यह नह ं है क इससे उसका फरलो का अिधकार समा हो जाएगा। चाहे उसने क ु छ समय फरलो पर बताया हो, इस त य क े कारण उसे सजा म माफ़ नह ं द जा सकती य क उसे अपना शेष ाकृ ितक जीवन जेल म रहना होगा।
13. हम एक और कोण और प र े य से मामले क जाँच कर सकते ह। रा पित क े दनांक 15.11.2012 का आदेश पैरोल को सजा म माफ़ क े प म अमल लाने पर रोक लगाता है, ले कन मह वपूण बात यह है क फरलो क े अिधकार क े बारे म ऐसा कोई उ लेख नह ं है। उ लेखनीय है क पैरोल सजा क े िन पादन क े अ थायी िनलंबन क े समान है। अपीलकता क सजा क े िन पादन का कोई अ थायी िनलंबन नह ं हो सकता है य क उसे सुनाई गई सजा उसे अपने पूरे ाकृ ितक जीवन क े दौरान हमेशा क े िलए चलानी होगी। इसक े अित र, पैरोल क े िलए आचरण िनणायक कारक नह ं है। यहाँ तक क, क ु छ कारण या घटना मु य प से तय करती है क य को पैरोल द जानी चा हए या नह ं? जब अपीलकता को अपने पूरे ाकृ ितक जीवन क े िलए सजा काटनी ह होती है, तो कोई भी कारण या घटना उसे पैरोल का दावा करने का कोई अिधकार नह ं दे सकती है।
13.1. हालाँ क, पैरोल क े वपर त फरलो क े दौरान क ै द को सज़ा काटते हुए माना जाता है य क फरलो क अविध वा त वक सजा क अविध से काट नह ं जाती है। यह आचरण मु य प से फरलो क े अिधकार क े िलए िनणायक है। इसिलए, भले ह अपीलकता फरलो पर हो, आने वाले समय म उसक े ारा सजा काटना माना जाएगा।
14. जब हम चं कांत झा (उपरो ) मामले म उ च यायालय क े कारण और तक पर लौटते ह तो तीत होता है क उ च यायालय ने इस धारणा पर कारवाई क थी क यह मामला द ली जेल िनयम, 2018 क े तहत सजा म माफ़ देने और 'प रणाम व प' फरलो देने क े िलए वचारणीय था। उपयु िनणय क े अनु छेद 4 म, वचारणीय मु े को इस कार सू ब कया गया था: - "4. इस कार दो यािचकाओं म जो वचारणीय मु ा उठता है, वह यह है क या एक दोषी जसे इस शत क े साथ आजीवन कारावास क सजा सुनाई गई है क उसे सजा गुजारने क े दौरान कसी वशेष अविध क े िलए या शेष जीवन जीने क े िलए कोई सजा म माफ़ नह ं द जाएगी, वह उ अविध क े दौरान फरलो का हकदार है।
14.1. उ च यायालय ने 2018 क े िनयम क जाँच करते हुए कहा क यायालय सजा म माफ़ देने और उसक े फल व प फरलो दान करने पर वचार कर रहा है'3 । इस कोण क े साथ, यायालय ने सजा म माफ़ क े मामल से िनपटने वाले 2018 क े िनयम क े िनयम 1170 से 1175 क जाँच क है । यायालय क े तक को वशेष प से चं कांत झा (उपरो ) क े िनणय क े अनु छेद 11 और 12 म देखा जा सकता है जो िन नानुसार पढ़ा गया है:
11. द ली जेल िनयम, 2018 क े िनयम 1171 म संल न नोट म प कया गया है क य द कसी क़ानून या यायालय ने अपनी सजा क े आदेश म कसी क ै द क सजा म माफ़ से अ वीकृ त कर दया है और इस तरह यह िन द नह ं कया है क कस तरह क सजा म माफ़ से इनकार कया जाना है तो सभी कार क सजा म माफ़ को अ वीकृ त कर दया जाएगा। इसिलए, जब तक सजा देने वाला यायालय जब तक सजा म माफ़ क शत िनधा रत करते हुए कसी वशेष कार क सजा म माफ़ क रोक को िन द नह ं करता है, तब तक क ै द क सभी कार क सजा म माफ़ पर रोक लगा द जाएगी। नतीजतन, य क संजय क ु मार वा मी क मामले म यािचकाकताओं को द गई सजा िनधा रत वष क े िलए और चं कांत झा क े मामले म उनक े शेष जीवन क े िलए सजा म माफ़ देने पर रोक लगाती है, इसिलए यािचकाकता सजा म माफ़ और प रणाम व प फरलो देने क े पा नह ं कहलाए जा सकते ह।
12. जैसा क सु ीम कोट ने अपने विभ न िनणय म िनधा रत कया है, पैरोल ववेक का योग है, जब क फरलो रहाई क े िलए वचाराधीन दोषी क े प म हतकार अिधकार है, जसे दोषी अिधिनयम और िनयम क आव यकता को पूरा करने पर दावा कर सकता है। पैरोल क ह ं आपातकालीन थितय क े दौरान द जाती है जब क यािचकाकता को िनधा रत शत क े अनुपालन पर फरलो ा होती है। द ली जेल िनयम, 2018 क े िनयम 1171 से 1178 और िनयम 1223 से यह प है क क ै द क े वल तभी फरलो का हकदार है जब उसने तीन वा षक अ छे आचरण रपोट और प रणाम व प तीन वा षक अ छे आचरण क े िलए सजा म माफ़ अ जत क हो। जहां दोषी क सजा म सजा म माफ़ देने पर रोक है, वहाँ तीन वा षक अ छे आचरण क े िलए सजा म माफ़ ा करने क पूव-शत पूर नह ं होती है और इसिलए फरलो देने क े िलए अहता ा करने क े िलए आव यक सीमा पूर नह ं होती है। इसिलए ऐसा क ै द जो एक वशेष अविध क े िलए कसी भी सजा म माफ़ का हकदार नह ं है या जैसा क चं कांत झा मामले म क ै द क े शेष जीवन क े िलए स य है, वह फरलो का हकदार नह ं होगा य क वह यूनतम आव यकता को पूण नह ं करता है।
14.2. हमारे वचार म, चं कांत झा (उपरो ) मामले म, उ च यायालय ने अिनवाय प से इस को इसक े वपर त तैयार कया और इसक े प रणाम व प उनका िन कष फरलो दए जाने क े व िनकला। यायालय का मानना था क य क दोषी को सजा म माफ़ नह ं िमलेगी, इसिलए वह फरलो का हकदार नह ं होगा। यायालय ने सजा म माफ़ को फरलो क े िलए एक शत माना था । हमारे वचार म, वतमान मामले म फरलो क पा ता का िनणय इस क े संदभ म नह ं कया जा सकता है क कोई सजा म माफ़ उपल ध होगी या नह ं। यहां तक क अगर अपीलकता को फरलो ( अ य शत को पूरा करने पर ह ) िमलती भी है, यह सजा म माफ़ नह ं कहलाई जायेगी य क सजा म माफ़ कसी भी कार क हो, उसे पूरा जीवन जेल म ह बताना पड़ेगा। ले कन य द उसका आचरण जेल क े अंदर अ छा हो और वह पा ता क अ य आव यकताओं को पूरा करता हो तो उसे फरलो से नह ं रोका जा सकता है ।
14.3. चं कांत झा (उपरो ) मामले म िनणय पर गौर करने से तीत होता है क इस यायालय क अशफाक (उपरो ) मामले म ट पणी ‘अ छे आचरण क े प रणाम व प सजा म माफ़ क े प म फरलो दया जाता है’ उ च यायालय ारा मामले म िनणायक मानी गई थी और इस िन कष पर पहुँचा गया था क फरलो क े वल तभी उपल ध है जब सजा म माफ़ उपल ध हो। स मान क े साथ, हम उ च यायालय क े तक क इस पं से सहमत होने म असमथ ह। अशफाक (उपरो ) िनणय म अनु छेद 14 म इस यायालय क ट प णयां अलग से नह ं पढ़ा जा सकती ह और इसका यह मतलब नह ं िनकाला जा सकता है क फरलो क े िलए सजा म माफ़ ा कर पाना पूव-शत है। फरलो क पूर योजना सुधार क े कोण और अ छे आचरण को बनाए रखने क े िलए ो साहन क े प म समझी जा सकती है।
14.4. इसक े अलावा, वतमान मामले म वी. ीहरन (उपरो ) म सं वधान पीठ क े िनणय क े संदभ म उ च यायालय ारा सजा म माफ़ क े कार और दं..सं. क धारा 432 क े प रचालन क े संबंध म फरलो दान करने क े पर कोई आवेदन नह ं है।
14.5. चं कांत झा (उपरो ) मामले म हर कोण से देखने पर, हम संतु ह क उ च यायालय का तक और कारण, जसका लागू आदेश म पालन कया गया है, को मंजूर नह ं द जा सकती है।
15. दूसरे श द म, भले ह अपीलकता को अपने पूरे जीवन क े शेष समय क े िलए जेल म रहना पड़े, ले कन जेल म अ छे आचरण क उ मीद उससे हमेशा बनी रहगी; और फरलो स हत अ छे आचरण क े वैध प रणाम से इनकार नह ं कया जा सकता है, खासकर जब इसे 15.11.2012 क े आदेश म िन ष नह ं कया गया है। यह कहने क ज रत नह ं है क छ ु ट क सजा म माफ़ से वंिचत करना और इस कार अ छे आचरण क े िलए ो साहन/ ेरणा को दूर करना न क े वल ितक ू ल होगा, ब क 2018 क े िनयम क े अंतगत चल रहे सुधारा मक कोण क े वपर त होगा।
16. हम यह भी देख सकते ह क जेल महािनदेशक ारा पा रत आदेश म, अनु छेद 2 म कहा गया है क अपीलकता ने पछली 3 वा षक अ छ आचरण रपोट अ जत नह ं क थी। इस तरह क े अवलोकन से, य तः ऐसा तीत होता है क 'वा षक अ छे आचरण रपोट' को 'वा षक अ छे आचरण म सजा म माफ़ ’ क े साथ िमला दया गया है। जो भी हो, हम अपीलकता क पा ता क े अ य सभी पहलुओं को संबंिधत अिधका रय क े वचार क े िलए छोड़ दगे। हालां क, अपीलकता को दनांक 15-11-2012 क े आदेश क े संदभ म फरलो देने से इंकार नह ं कया जा सकता है। उ आदेश से अपीलकता ारा अ छा आचरण बनाए रखने क अपे ा न रख उसक े अ छे आचरण को बनाए रखने से िमलने वाले उनक े अिधकार को छ न लेना नह ं माना जा सकता है।
17. इस कार, फरलो क अवधारणा और क ै द क े िलए इस रयायत को बढ़ाने क े कारण को देखते हुए हम मानते ह क भले ह अपीलकता जैसे क ै द को सजा म कोई सजा म माफ़ न िमले और उसे अपना पूरा ाकृ ितक जीवन कारावास म काटना पड़े, फर भी न तो उसे अ छे आचरण को बनाए रखने क अपे ाओं म सजा म माफ़ िमलती है और न ह उसक े अ छे आचरण क े िलए सुधारा मक कोण और ो साहन मौजूद है। र तेदार। इसिलए, य द वह अ छा आचरण बनाए रखता है, तो िन त प से फरलो से इनकार नह ं कया जा सकता है।
17.1. हम देखना चाहते ह क कसी दए गए मामले म फरलो दया जाना है या नह ं, यह पूण प से अलग मामला है। अपीलकता क े मामले म वह कई ह याओं का दोषी ठहराया गया है। इसिलए 2018 क े िनयम क े िनयम 1225 क अपे ा लागू हो सकती है। हालां क, यह नह ं कहा जा सकता है क उनक े मामले पर कभी भी फरलो क े िलए वचार नह ं कया जाएगा। उसम उ ल खत मापदंड पर उसे छ ु ट द जानी है या नह ं, यह कानून क े अनुसार अिधका रय ारा जांच कया जाने वाला वषय है।
18. उपरो को यान म रखते हुए, लागू आदेश म अपीलकता को फरलो देने से इनकार करते हुए, हम अपीलकता क े मामले को संबंिधत अिधका रय ारा जांच क े िलए छोड़ दगे।
19. ऊपर जो क ु छ भी देखा गया है, चचा क गई है और आयो जत कया गया है, उसम यह अपील कामयाब होती है और अनुमित द जाती है; द ली उ च यायालय ारा पा रत दनांक 02.08.2021 क े आ े पत आदेश और दनांक 21.10.2019 क े जेल महािनदेशक, जेल मु यालय, ितहाड़, जनकपुर, नई द ली ारा पा रत आदेश को र कया जाता है; और फरलो देने क े िलए अपीलकता क े मामले को उ जेल महािनदेशक क े पुन वचार क े िलए बहाल कया जाता है। उस मामले क े िलए, जेल अिधका रय से नई रपोट मांगी जा सकती है और मामले को कानूनन आगे बढ़ाया जा सकता है। हम उ मीद करते ह क जेल महािनदेशक इस मामले म तेजी से िनणय लगे, अिधमानतः आज से दो मह ने क े भीतर।................................ याय. ( दनेश माहे र )................................... याय. (अिन बोस) नई द ली; 29 अ ैल, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ के सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह कया जाएगा| सम त कायालयी एवं ावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ही अिभ मािणत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ही वरीयता दी जाएगी। Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose for all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.