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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 3784 वर्ष# 2022
अंजना सरैया ......अपीलक ा#
बनाम
उ.प्र. राज्य और अन्य .... प्रत्यर्थी/गण
निनण#य
न्यायमूर्ति एम आर शाह
JUDGMENT
1. रिरट सी संख्या 56136/2006 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 03.04.2019 क े आक्षेनिप निनण#य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट होकर, जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने व #मान अपीलक ा# द्वारा दायर उक्त रिरट यातिJका को खारिरज कर निदया है, मूल रिरट यातिJकाक ा# ने व #मान अपील दायर की है।
2. यहां अपीलक ा#, लगभग 55 वर्ष# की एक मनिहला, को मध्यम आय वग# की श्रेणी क े ह प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा संगनिR निवकास योजना, Jरण III, निपलखुवा, जिजला- गाजिजयाबाद, उत्तर प्रदेश में 150 वग# मीटर क े भू-खण्ड़ संख्या 415 में एक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 561 आवासीय संपत्तित्त आवंनिट की गई र्थीी। ड्रॉ में सफल होने क े बाद, अपीलक ा# को 2,70,000/- रुपये की कीम पर कथिर्थी भूखंड आवंनिट निकया गया र्थीा। यह निक अपीलक ा# ने वर्ष# 2003 में ही रु. 94,500/- का अनि_म भुग ान निकया और उसक े बाद पहली ीन निकस् ों का भुग ान निनयनिम रूप से और समय पर निकया। हालांनिक, इसक े बाद निकस् संख्या 4 से 7 का भुग ान करने में Jूक हुई। अपीलक ा# क े अनुसार उसक े पति की लगा ार बीमारी क े कारण वह निवत्तीय संकट में र्थीी जिजसक े कारण वह शेर्ष निकस् ों को जमा करने में असमर्थी# र्थीी। यह निक याJी को नगर परिरर्षद क े काया#लय से 14.06.2006 निदनांनिक एक नोनिटस दी गई र्थीी, अपीलक ा# क े अनुसार, जिजसे उसको 19.06.2006 को निदया गया र्थीा, जिजसक े द्वारा अपीलक ा# को सूतिJ निकया गया र्थीा निक शेर्ष राथिश की निकस् ों क े जमा न करने क े कारण आवंटन रद्द कर निदया गया है। हालांनिक अपीलक ा# क े अनुसार, उसे कथिर्थी नोनिटस निदए जाने से पहले ही, उसने अपने रिरश् ेदारों से पैसे इकट्ठा कर त्तिलया र्थीा और 16.06.2006 को ब्याज सनिह 1,39,000/- रुपये जमा कर निदए। 16 जून 2006 को 1,39,000/- रूपये क े भुग ान में से 1,04,128/- रूपये (अंति म Jार निकस् ों क े त्तिलए) मूल राथिश क े रूप में र्थीे और 34,872/- रूपये ब्याज राथिश क े रूप में र्थीे। इस प्रकार, 16.06.2006 को अपीलक ा# ने पूरी राथिश जमा की और ब्याज सनिह सभी निकस् ों का भुग ान निकया।इसक े बाद अपीलक ा#-आबंनिट ी ने उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिJका दायर की और निनम्नत्तिलत्तिख राह क े त्तिलए प्रार्थी#ना कीः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "(i) प्रत्यर्थी/ संख्या 3 द्वारा जारी भूखण्ड़ संख्या 415 क े आबंटन क े निवरुद्ध 14.06.2006 क े पत्र/नोनिटस/आदेश को रद्द करने क े त्तिलए उत्प्रेर्षण की प्रक ृ ति में एक लेख, आदेश या निनदnश जारी करें। (ii) प्रत्यर्थी/ संख्या 3 द्वारा 14.06.2006 को जारी पत्र/नोनिटस/आदेश क े अनुसरण में याJी क े भूखण्ड़ संख्या 415 क े त्तिखलाफ कोई काय#वाही शुरू न करने क े त्तिलए प्रत्यर्थिर्थीयों को आदेश दे े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में एक लेख, आदेश या निनदnश जारी करें। (iii) परमादेश की प्रक ृ ति में एक लेख, आदेश या निनदnश जारी करें जिजसमें प्रति वानिदयों को पंजीकरण काय#वाही पूरी करने का निनदnश निदया जाए और प्रत्यर्थिर्थीयों को यह भी निनदnश निदया जाए निक वे यातिJकाक ा# को छोड़कर निकसी अन्य व्यनिक्त को उक्त भूखण्ड़ संख्या 415 आवंनिट न करें।" 2.[1] यह निक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेश क े अनुसरण में, अपीलक ा# ने 21.11.2006 को 50,000/- रुपए की अति रिरक्त राथिश जमा की। इसत्तिलए, जब क उच्च न्यायालय द्वारा यातिJका की सुनवाई की गई, ब क अपीलक ा# ने भू- खण्ड़ क े क ु ल मूल्य अर्थीा# ् 2,70,000/- रुपये क े सापेक्ष क ु ल 3,84,546/- रुपये (ब्याज सनिह ) जमा निकए। आक्षेनिप निनण#य और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने क े वल इस आ ार पर और यह कह े हुए उक्त रिरट यातिJका को खारिरज कर निदया है निक अपीलक ा# ने योजना क े ह यर्थीा प्राव ानिन निनयमों और श r को पूरा नहीं निकया और निनयनिम रूप से निकस् ों को जमा नहीं निकया जब वह देय र्थीा, इसत्तिलए अति कारिरयों का आवंटन को रद्द करना उनक े अति कारों क े ह र्थीा। इस स् र पर, यह नोट निकया जाना आवश्यक है निक इस बीJ और आवंटन क े रद्द होने पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रत्यर्थिर्थीयों ने जमा की गई राथिश में से 20% की कटौ ी करने क े बाद पूरा पैसा वापस कर निदया, जो Jेक क े माध्यम से अपीलक ा# को भेजा गया र्थीा, जो निक अपीलक ा# द्वारा भुनाया नहीं गया है। आक्षेनिप निनण#य और आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने उस रिरट यातिJका को खारिरज कर निदया है जिजसने व #मान अपील को जन्म निदया है।
3. अपीलक ा# की ओर से पेश वरिरष्ठ अति वक्ता श्री कवीन गुलाटी ने कहा निक इस प्रकार क ु ल 2,70,000/- रुपए क े निवक्रय प्रति फल क े सापेक्ष अब क अपीलक ा# ने क ु ल 3,84,546/- रुपए की राथिश (ब्याज सनिह ) जमा कर दी है जो प्रत्यर्थी/ क े पास है। 3.[1] यह कहा गया है निक इस प्रकार अपीलक ा# की ओर से निनयनिम रूप से निकस् ों को जमा नहीं करने में जानबूझकर कोई Jूक नहीं की गई र्थीी जब वह देय र्थीी। यह कहा गया है निक उसक े पति क े खराब स्वास्थ्य क े कारण और निवत्तीय कनिRनाई में होने क े कारण, वह निकस् ों को समय पर जमा नहीं कर सकी। यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेश क े अनुसरण में अपीलार्थी/ द्वारा जमा की गई 50,000/- रुपये की राथिश क े अलावा, अपीलार्थी/ निवलंनिब भुग ान क े मुआवजे क े त्तिलए दो लाख रुपये का भुग ान करने क े त्तिलए ैयार र्थीा। यह कहा गया है निक अभी भी अपीलक ा# निवलंनिब भुग ान क े त्तिलए मुआवजे क े रूप में और /या निकस् ों क े भुग ान को निनयनिम करने क े त्तिलए 2 लाख रुपये की राथिश जमा करने क े त्तिलए ैयार है।
4. उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री वी. क े. शुक्ला और प्रत्यर्थी/ संख्या 3 की ओर से पेश निवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री निदनेश कु मार गग# ने उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण#य और आदेश का समर्थी#न निकया है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 4.[1] यह कहा गया है निक योजना क े अ ीन और आबंटन पत्र क े अनुसार, अपीलक ा# को निकस् ों की रकम निनयनिम रूप से जमा करनी र्थीी, जब भी देय हो। यह कहा गया है निक पहली ीन निकस् ों क े भुग ान क े बाद, अपीलक ा# ने अगली Jार निकस् ों का भुग ान नहीं निकया और इसत्तिलए प्राति करण का आवंटन को रद्द करना उनक े अति कार क े ह र्थीा। यह कहा गया है निक उसक े बाद यह पाकर निक अपीलार्थी/ ने निनयनिम रूप से निकस् ों का भुग ान नहीं निकया र्थीा जब वह देय र्थीा और आवंटन रद्द कर निदया गया र्थीा। यह कहा गया है निक उच्च न्यायालय ने रिरट यातिJका को Rीक ही खारिरज निकया है।
5. संबंति पक्षों क े निवद्वान अति वक्ता को सुनने क े बाद और मामले क े थ्यों व परिरस्थिस्र्थीति यों में, हमारी राय है निक यनिद निकस् ों क े निवलंनिब भुग ान क े त्तिलए मुआवजे क े रूप में दो लाख रुपये की और राथिश का भुग ान करने पर, अपीलक ा# का लेखा-जोखा निनयनिम निकया जा सक ा है और मध्य आय योजना क े ह निकया गया आवंटन अपीलक ा#, जो एक मनिहला है, क े पक्ष में बJाया जा सक ा है। 5.[1] इस स् र पर, यह नोट निकया जाना आवश्यक है और यह निववानिद नहीं है निक आबंटन क े समय, अपीलक ा# ने 94,500/- रुपए का अनि_म भुग ान निकया और उसक े बाद पहली ीन निकस् ों का भुग ान निकया र्थीा। हालांनिक, उसक े बाद उसक े पति की खराब स्वास्थ्य क े कारण, वह निवत्तीय कनिRनाई में र्थीी और इसत्तिलए वह शेर्ष Jार निकस् ों का भुग ान नहीं कर सकी, जो उसने 16.06.2006 को ब्याज सनिह निकया। पूव क्त भुग ान उसकी सद्भावना को दशा# ा है और यह निक समय पर निकस् ों का भुग ान न करने में, अपीलक ा# की ओर से कोई जानबूझकर देरी नहीं की गई र्थीी। इसक े बाद भी अपीलक ा# ने उच्च न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े अनुसरण में 50,000/- रुपए की अति रिरक्त राथिश जमा की है और इसत्तिलए अब क अपीलक ा# ने 2,70,000/- रुपए क े क ु ल मूल्य/लाग क े सापेक्ष 3,84,546/- रुपए (ब्याज सनिह ) की क ु ल राथिश जमा कर दी है। इसत्तिलए, अब जब अपीलक ा# निकस् ों क े भुग ान में देरी क े त्तिलए मुआवजे क े रूप में दो लाख रुपये की अति रिरक्त राथिश का भुग ान करने क े त्तिलए ैयार और इच्छ ु क है, ो हमारी राय है निक अपीलक ा# द्वारा की गई पेशकश एक उतिJ पेशकश है और एक मनिहला क े पक्ष में भू-खण्ड़ का आवंटन जो मध्य आय समूह योजना क े ह निकया गया है और भू-खण्ड़ अभी भी खाली है और निकसी अन्य व्यनिक्त को आवंनिट नहीं निकया गया है, इसत्तिलए रद्द करने क े आदेश को अपास् निकया जा सक ा है।
6. उपरोक्त क े मद्देनजर और ऊपर ब ाए गए कारण से, व #मान अपील को अनुमति दी जा ी है। आज से छह सप्ताह क े भी र प्रत्यर्थी/ क े पक्ष में जमा की जाने वाली 2,00,000/- रुपये (दो लाख रुपये) की अति रिरक्त राथिश क े भुग ान पर, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण#य और आदेश को रद्द निकया जा ा है। परिरणामस्वरूप, प्रश्नग भू-खण्ड़ क े आवंटन को रद्द करने वाले 14.06.2006 निदनांनिक आदेश को ए द्द्वारा रद्द और अपास् निकया जा ा है। ऊपर निन ा#रिर समय क े भी र 2,00,000/- रुपए (दो लाख रुपए) की अति रिरक्त राथिश क े भुग ान पर, प्रत्यर्थी/ को निनदnश निदया जा ा है निक वे प्रश्नग भूखंड का खाली कब्जा अपीलक ा# को सौंप दें और उसक े बाद Jार सप्ताह की अवति क े भी र निनष्पानिद निकए जाने वाले आवश्यक दस् ावेज, यनिद कोई हों, निनष्पानिद करे।उपयु#क्त सीमा क व #मान अपील को अनुमति दी जा ी है।खJ„ क े त्तिलए कोई आदेश नहीं है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ………………................ (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह) …………………............. (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई निदल्ली, 12 मई 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA