K. Raghupati v. Uttar Pradesh State and Others

Supreme Court of India · 12 May 2022
L. Nageswara Rao; B. R. Gavai
Civil Appeal No 3913 of 2022 @ SLP(Crl) No 9214 of 2022
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that termination of a contractual employee without due process is unlawful and directed reinstatement, clarifying protections for contractual appointees under service rules.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी याति का संख्या 3913/2022
[एसएलपी(सी) संख्या 9214/2022 से उत्पन्न]
[डायरी संख्या 17212/2020]

े . रघुपति ...... अपीलार्थी4 (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ...... प्रत्यर्थी4 (गण)
निनण=य
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई
JUDGMENT

1. निवलंब माफ निकया जा ा है।

2. अनुमति प्रदान की जा ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. अपीलक ा= क े. रघुपति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 23 मई 2018 क े आक्षेनिप आदेश से व्यथिर्थी होकर इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिजसक े ह अपीलक ा= द्वारा दायर रिरट याति का संख्या 51962/2014 को खारिरज कर निदया गया र्थीा, जिजसमें प्रत्यर्थी4 संख्या 3, निनबं क, गौ म बुद्ध निवश्वनिवद्यालय, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश (ए स्मिZमनपश्चा ् "उक्त निवश्वनिवद्यालय" कहा गया है) क े 12 अगZ 2014 क े सं ार को ुनौ ी दी गयी र्थीी, इस सं ार में अपीलक ा= को सूति निकया गया र्थीा निक उनकी सेवाएं समाप्त की जा ी हैं।

4. संक्षेप में व =मान अपील को जन्म देने वाले थ्य इस प्रकार हैं: प्रत्यर्थी4 संख्या 3 द्वारा जारी निकए गए निवज्ञापन क े प्रत्युत्तर में, अपीलक ा= ने वरिरष्ठ वैज्ञानिनक अति कारी क े पद क े लिलए आवेदन निकया र्थीा। उति यन प्रनिfया से गुजरने क े बाद, अपीलक ा= का यन निकया गया और 3 अगZ 2011 क े अपने आदेश द्वारा, उक्त निवश्वनिवद्यालय में संनिवदा क े आ ार पर वरिरष्ठ वैज्ञानिनक अति कारी क े रूप में निनयुक्त निकया गया। उक्त निनयुनिक्त शुरू में दो वर्षोंi क े लिलए की गई र्थीी। उक्त निवश्वनिवद्यालय द्वारा 7 अगZ 2013 क े अपने आदेश द्वारा अपीलार्थी4 की सेवाओं को एक वर्षों= की अवति क े लिलए बढ़ा निदया गया र्थीा। र्थीानिप, 12 अगZ 2014 क े उक्त निवश्वनिवद्यालय क े सं ार द्वारा, अपीलक ा= को सूति निकया गया निक उसकी संनिवदात्मक निनयुनिक्त की अवति 11 अगZ 2014 को समाप्त हो गई र्थीी और उसे सेवा से निनमु=निक्त क े संबं में औप ारिरक ाओं को पूरा करने का निनदlश निदया गया र्थीा। इससे व्यथिर्थी होकर, अपीलक ा= ने रिरट याति का, रिरट ए सं. 51962/2014 दायर करक े इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 23 मई 2018 क े आदेश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उक्त रिरट याति का को खारिरज कर निदया।इसलिलए, व =मान अपील दायर की गयी।

5. हमने अपीलार्थी4 को व्यनिक्तग रूप से और प्रत्यर्थिर्थीयों की ओर से पेश निवद्वान अति वक्ता श्री निवभव निमश्रा को सुना।

6. अपीलक ा= ने कहा है निक उसे उति यन प्रनिfया का पालन करने क े बाद निनयुक्त निकया गया र्थीा और ऐसे में उसकी सेवाओं को जां निकए निबना समाप्त नहीं निकया जा सक ा र्थीा। उन्होनें आगे कहा निक यद्यनिप 12 अगZ 2014 निदनांनिक उक्त निवश्वनिवद्यालय की संसू ना द्वारा, अपीलक ा= को काय=मुक्त कर निदया गया है, वाZ व में यह दंडात्मक निनलंबन क े समान होगा। उन्होंने आगे कहा निक उपरोक्त संसू ना दुभा=वनापूण= रीक े से पारिर निकया गया है।

7. इसक े निवपरी, श्री निमश्रा ने कहा निक अपीलक ा= की निनयुनिक्त निवशुद्ध रूप से संनिवदात्मक र्थीी और इस प्रकार, अपीलक ा= को संनिवदात्मक अवति की समानिप्त क े बाद सेवा में बने रहने का कोई अति कार नहीं र्थीा। इसलिलए उन्होंने कहा निक इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े आक्षेनिप आदेश में कोई हZ क्षेप की आवश्यक ा नहीं है।

8. श्री निमश्रा ने आगे कहा निक ूंनिक अपीलक ा= क ु छ गति निवति यों में लिलप्त र्थीा, जो उक्त निवश्वनिवद्यालय क े निह क े लिलए हानिनकारक र्थीे, इसलिलए यह पाया गया निक अपीलक ा= की सेवा में बने रहना उक्त निवश्वनिवद्यालय क े निह में नहीं र्थीा।

9. इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष उक्त निवश्वनिवद्यालय की ओर से दायर पूरक प्रति -शपर्थी पत्र क े सुसंग भाग को संदर्थिभ करना प्रासंनिगक होगाः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "5. यह निक 2008 क े संशो न अति निनयम क े खंड (6) ने गौ म बुद्ध निवश्वनिवद्यालय अति निनयम, 2002 की ारा 29(1) को प्रति Zर्थीानिप निकया। संशोति ारा 29(1) इस प्रकार हैः "(1) प्रत्येक कम= ारी को पहली बार एक लिललिख संनिवदा क े ह निनयुक्त निकया जाएगा, जिजसे निवश्वनिवद्यालय द्वारा दज= निकया जाएगा और जिजसकी प्रति संबंति कम= ारी को दी जाएगी।"

6. यह निक निवश्वनिवद्यालय क े अति निनयम में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा निकए गए पूव क्त संशो न क े परिरणामZवरूप, निवश्वनिवद्यालय क े लिलए यह अनिनवाय= है निक वह आरंभ में क े वल संनिवदा क े आ ार पर कम= ारिरयों की निनयुनिक्त करे।

7. यह निक इस Z र पर यह भी Zपष्ट करना आवश्यक है निक भले ही निवश्वनिवद्यालय संनिवदा क े आ ार पर अपने कम= ारिरयों की निनयुनिक्त कर रहा है, लेनिकन यन की निवति और उसक े बाद इन कम= ारिरयों की निनयुनिक्त वही है जो इसक े कम= ारिरयों की निनयनिम निनयुनिक्त क े मामले में अपनाई जा ी है।

8. यह निक प्रत्येक पद जो रिरक्त है और जिजसे भरा जाना प्रZ ानिव है, उसक े लिलए निवश्वनिवद्यालय सभी इच्छ ु क अभ्यर्थिर्थीयों से आवेदन आमंनित्र कर े हुए एक साव=जनिनक निवज्ञापन प्रकाथिश कर ा है। इसक े बाद इस प्रकार प्राप्त आवेदनों को निवति व गनिy यन सनिमति क े समक्ष रखा जा ा है, जो निवथिभन्न पदों क े लिलए आवेदकों/अभ्यर्थिर्थीयों क े साक्षात्कार आयोजिज Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर ी है। निवति व गनिy यन सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों क े आ ार पर ही संनिवदा क े आ ार पर कम= ारिरयों की निनयुनिक्त क े लिलए निनयुनिक्त पत्र निवश्वनिवद्यालय द्वारा जारी निकए जा े हैं।

9. ये कम= ारी, हालांनिक कनीकी रूप से संनिवदा पर निनयुक्त निकए गए हैं, लागू निनयमों क े अनुसार सभी लाभ और भत्ते प्राप्त कर े हैं। उन्हें निनयनिम वे नमान पर रखा जा ा है और वार्षिर्षोंक वृतिद्ध, अवकाश, ईपीएफ/जीपीएफ कटौ ी/योगदान और अन्य लाभ निदए जा े हैं। लेनिकन काय=काल में Zर्थीायी होने क े लिलए, उनकी निनयुनिक्त क े निनयम और श | निकसी निनयनिम रूप से निनयुक्त उम्मीदवार क े समान हैं।

10. यह कहा जा सक ा है निक 2011 से, निवश्वनिवद्यालय ने निकसी भी थिशक्षक पद पर निकसी भी उम्मीदवार को निनयनिम नहीं निकया है। सभी थिशक्षक कम= ारी संनिवदा आ ार पर काम कर रहे हैं।

11. निनयनिम ीकरण पर निव ार करने क े लिलए, निवश्वनिवद्यालय निवZ ृ निदशा- निनदlशों को अंति म रूप दे रहा है। इन निदशानिनदlशों को प्रबं न बोड= द्वारा निदनांक 18-5-2015 की बैyक में अनुमोनिद निकया गया है। ये निदशानिनदlश निवश्वनिवद्यालय क े बोड= ऑफ गवन=स= की मंजूरी क े लिलए लंनिब हैं, जो इसका शीर्षों= निनकाय है।

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12. जब क निवश्वनिवद्यालय क े बोड= ऑफ गवन=स= द्वारा निदशानिनदlशों को अंति म रूप से अनुमोनिद नहीं निकया जा ा है, ब mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क निवश्वनिवद्यालय अपने निकसी भी कम= ारी को निनयनिम करने की स्मिZर्थीति में नहीं होगा।" [प्रभाव वर्ति ]

10. उक्त निवश्वनिवद्यालय क े शपर्थी पत्र क े अनुसार, यह Zपष्ट रूप से देखा जा सक ा है निक प्रत्येक रिरक्त पद क े लिलए, उक्त निवश्वनिवद्यालय सभी इच्छ ु क अभ्यर्थिर्थीयों से आवेदन आमंनित्र कर े हुए एक साव=जनिनक निवज्ञापन प्रकाथिश कर ा है। यह आगे दशा= ा है निक निनयुनिक्तयां यन सनिमति द्वारा अभ्यर्थिर्थीयों का यन करने क े बाद ही की जा ी हैं। इस प्रकार यह Zपष्ट है निक हालांनिक निनयुनिक्त क े लिलए निदया गया नामकरण संनिवदात्मक है, लेनिकन उम्मीदवारों को पूरी यन प्रनिfया से गुजरना पड़ ा है। आगे यह भी देखा जा सक ा है निक Zवयं उक्त निवश्वनिवद्यालय क े शपर्थी पत्र क े अनुसार, हालांनिक कम= ारिरयों को कनीकी रूप से संनिवदा क े आ ार पर निनयुक्त निकया जा ा है, पर उन्हें लागू निनयमों क े अनुसार सभी लाभ और भत्ते निमल े हैं। शपर्थी पत्र से यह भी प ा ल ा है निक उक्त निवश्वनिवद्यालय क े अनुसार भी, काय=काल में Zर्थीातियत्व क े लिलए, उनकी निनयुनिक्त क े निनयम और श | निनयनिम रूप से निनयुक्त निकए गए उम्मीदवारों क े समान हैं।

11. इस प्रकार यह Zपष्ट है निक अपीलक ा= को पूरी यन प्रनिfया से गुजरने क े बाद निनयुक्त निकया गया र्थीा। निवश्वनिवद्यालय क े अनुसार भी, हालांनिक निनयुनिक्त से प ा ल ा है निक यह संनिवदा क े आ ार पर है, लेनिकन सभी उद्देश्यों क े लिलए यह निनयनिम आ ार पर है। इस प्रकार यह देखा जा सक ा है निक उक्त निवश्वनिवद्यालय में संनिवदा क े आ ार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर निनयुनिक्त क े लिलए भी, एक अभ्यर्थी4 को पूरी यन प्रनिfया से गुजरना पड़ ा है। हालांनिक उनकी निनयुनिक्त संनिवदा क े आ ार पर की जा ी है, लेनिकन उनक े निनयम और श | लगभग एक निनयनिम कम= ारी की रह हैं। यह नोट करना प्रासंनिगक होगा निक 2012-13 की अवति क े दौरान अपीलक ा= की वार्षिर्षोंक प्रदश=न मूल्यांकन रिरपोट= (संक्षेप में ''एपीएआर'') उसक े प्रदश=न को उत्क ृ ष्ट दशा= ी है। उनक े एपीएआर में प्रत्येक अन्य मापदण्ड़ को उत्क ृ ष्ट निदखाया गया है। उसकी सत्यनिनष्ठा क े संबं में, यह उल्लेख निकया गया है निक ऐसा क ु छ भी नहीं है जो अपीलक ा= की सत्यनिनष्ठा को प्रति क ू ल रूप से प्रभानिव कर ा हो।उनक े एपीएआर में आगे कहा गया है निक उनकी अच्छी प्रति ष्ठा है और उनकी अच्छी सत्यनिनष्ठा है।

12. आगे प्रत्यर्थी4 सं. 2 से 4 की ओर से इस न्यायालय क े समक्ष दालिखल प्रति - शपर्थी पत्र का उल्लेख करना प्रासंनिगक होगा। प्रZ र (4) में यह कहा गया है निक अपीलक ा= को सेवा में जारी नहीं रखने क े कारण संलग्नक पी-9 (पृष्ठ 116-120) और संलग्नक पी-26 (पृष्ठ 165-166) पर हैं।

13. जहां क संलग्नक पी-9 का संबं है, यह एक एपीएआर है जिजसक े बारे में हम ऊपर पहले ही उल्लेख कर ुक े हैं। इस प्रकार, यह अपीलक ा= की सेवाओं को जारी न रखने का एक आ ार नहीं हो सक ा है। थ्य क े रूप में, उसक े बाद अपीलार्थी4 की सेवाएं 7 अगZ, 2013 क े आदेश द्वारा एक और वर्षों= क े लिलए जारी रखी गई।

14. जहां क संलग्नक पी-26 क े दZ ावेज का संबं है, यह 10 जनवरी 2014 को उक्त निवश्वनिवद्यालय क े डीन द्वारा अपीलक ा= को जारी की गई एक प्रशासनिनक े ावनी है, जो इस प्रकार हैः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "डीन काया=लय, योजना और अनुसं ान जीबीयू013/डीपीएलएनजी/09/2014-21 निदनांक: 10/1/14. प्रशासनिनक े ावनी यह देखा गया है निक आप फाइलों पर सा ारण या यह लिलख े हैं निक "पत्रावली को अमुक ति थिर्थी पर पेश करें। "मेरे अनेक मौलिखक संदेशों और इसक े निवरूद्ध े ावनिनयों क े बाद भी आप ऐसा कर े रहे हैं। यह न क े वल नैति क ा और आति कारिरक थिशष्टा ार क े लिखलाफ है, बस्मिल्क प्रशासनिनक मानदंडों क े भी लिखलाफ है। मेरी आपलित्तयों क े जवाब में, आपने मुझे ब ाया निक आपको निवत्त अति कारी और पहले क े पदासीन निनबं क श्री पंकज शमा= ने ऐसा करने का निनदlश निदया है। जब मैं छ ु ट्टी पर र्थीा ब भी आपने इस निटप्पणी को ारीखों पर डाल निदया है। इस रह की हालिलया निटप्पथिणयों की छायाप्रति सबू क े रूप में संलग्न की जा रही है। एक नोट में उजिल्ललिख ारीख में एक ओवरराइटिंटग भी है। आपकी उपरोक्त सभी गति निवति यां आपक े काम में गंभीर अनिनयनिम ा क े समान हैं और सार्थी ही आपक े र्षोंड्यंत्रकारी रिरत्र को भी ब ा ी है। यह निनतिश्च रूप से आपको निकसी भी जिजम्मेदार पद पर काम करने क े लिलए अयोग्य बना ा है। आपको लिललिख रूप में यह े ावनी दी जा रही है ानिक आपको अपने आति कारिरक कामकाज और आ रण में सु ार करने का अवसर निमल सक े । हZ ाक्षर अनुरा ा निमश्रा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA डीन, योजना व अनुसं ान सीसी:

1. निनबं क, सू ना और अथिभलेख 2. माननीय उप-क ु लपति क े निनजी सति व को सू नार्थी=

15. इस प्रकार यह देखा जा सक ा है निक हालांनिक कथिर्थी निवश्वनिवद्यालय क े 12 अगZ 2014 क े पत्र में कहा गया है निक अपीलक ा= की संनिवदा अवति समाप्त हो गई है, व =मान मामले क े थ्यों से, यह प ा लेगा निक कथिर्थी निवश्वनिवद्यालय क े डीन द्वारा उसक े लिखलाफ लगाए गए आरोपों क े कारण उसकी सेवाएं रोक दी गई र्थीीं। ूंनिक उक्त निवश्वनिवद्यालय क े अनुसार भी, यद्यनिप रोजगार संनिवदात्मक र्थीा लेनिकन कम= ारी निनयनिम कम= ारी क े सभी लाभ प्राप्त करने का हकदार र्थीा, हम पा े हैं निक व =मान मामले क े थ्यों से, अपीलार्थी4 की सेवाओं को प्राक ृ ति क न्याय क े जिसद्धां ों का पालन निकए निबना समाप्त नहीं निकया जा सक ा र्थीा। इसलिलए हम पा े हैं निक व =मान अपील को इस संतिक्षप्त आ ार पर Zवीकार निकया जाना ानिहए।

16. न ीज न, इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 23 मई 2018 को पारिर आक्षेनिप आदेश, जिजसमें अपीलक ा= द्वारा दायर रिरट याति का को खारिरज कर निदया गया र्थीा और 12 अगZ 2014 क े उक्त निवश्वनिवद्यालय द्वारा पारिर पत्र को रद्द और अपाZ निकया जा ा है, जिजसमें अपीलक ा= की सेवाओं को समाप्त कर निदया गया र्थीा।

17. अपीलक ा= को सेवा में अनवर ा क े सार्थी बहाल करने का निनदlश निदया जा ा है। हालांनिक, अपीलक ा= निकसी भी बकाया वे न का हकदार नहीं होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

18. अपील को उपयु=क्त श i में अनुमति दी जा ी है। लंनिब आवेदन, यनिद कोई हों, उपरोक्त श i में निनZ ारिर हो जाएंगे। ख i क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा।............................................. [न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव]........................................... [न्यायमूर्ति बी. आर. गवई] नई निदल्ली; 12 मई 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA