Agra Vikas Prati Karan v. Anek Singh & Ors.

Supreme Court of India · 20 May 2022
M. R. Shah; B. V. Nagarathna
Civil Appeal No. 2914 of 2022
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that acquisition proceedings under the 2013 Land Acquisition Act do not lapse merely due to non-payment of compensation for some land portions, setting aside the High Court's invalidation of acquisition on this ground.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 2914/2022
आगरा विवकास प्राति करण, आगरा ......अपीलार्थी, बनाम
अनेक सिंसह और अन्य ..........प्रत्यर्थी, विनण2य
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह
JUDGMENT

1. सिसविवल प्रकीण[2] रिरट याति:का संख्या 13927/2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विकए गए आक्षेविप विनण2य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए मूल रिरट याति:काक ा2ओं क े प्रति वाविदयों द्वारा दायर की गई उक्त रिरट याति:का को उच्च न्यायालय ने अनुमति दी है और यह अव ारिर विकया है विक भूविम अति ग्रहण, पुनवा2स और पुनर्स्थार्थीा2पन अति विनयम, 2013 (ए स्मिर्स्थामनपश्चा 'अति विनयम 2013' क े रूप में संदर्भिभ ) में उति: मुआवजे और पारदर्भिश ा क े अति कार की ारा 24 की उप- ारा (2) क े ह प्रश्नग भूविम क े संबं में अति ग्रहण की काय2वाही को व्यपग माना जाएगा और आगरा विवकास प्राति करण, आगरा ने व 2मान अपील को प्रार्थीविमक ा दी है।

2. हमने संबंति पक्षों क े विवद्वान अति वक्ताओं को विवर्स्था ार से सुना।हमने उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण2य और आदेश का परिरशीलन विकया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. उच्च न्यायालय क े समक्ष आगरा विवकास प्राति करण - अपीलक ा2 की ओर से यह विवथिशष्ट मामला र्थीा विक इस रह विव:ारा ीन भूविम का कब्जा पहले ही ले लिलया गया र्थीा और यहां क विक राजर्स्थाव अथिभलेख में प्राति करण का नाम भी बदल विदया गया र्थीा। प्राति करण की ओर से यह भी विवथिशष्ट मामला र्थीा विक प्रश्नग भूविम का कब्जा उनक े पास र्थीा लेविकन मूल रिरट याति:काक ा2ओं ने अवै रूप से उस पर वि[र से कब्जा कर लिलया। प्राति करण की ओर से यह भी कहा गया विक संबंति भूविम पर विवकास काय[2] पहले ही विकए जा:ुक े हैं और पूरा मुआवजा पहले ही विवशेष भूविम अति ग्रहण अति कारी क े पास जमा विकया जा:ुका है। प्राति करण की ओर से यह भी मामला र्थीा विक मूल रिरट याति:काक ा2ओं ने जानबूझकर 6 विबर्स्थावा और 15 विबर्स्थावांसी क े शेष भूखंड क े लिलए मुआवजा नहीं लिलया और इसलिलए, रिरट याति:काक ा2ओं की गल ी क े कारण अति ग्रहण की काय2वाही समाप्त नहीं हो सक ी है। हालांविक, आक्षेविप विनण2य और आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने अव ारिर विकया और घोविष विकया है विक विव:ारा ीन भूविम क े संबं में अति ग्रहण की काय2वाही को 2013 अति विनयम की ारा 24 की उप ारा (2) क े ह इस आ ार पर व्यपग माना जाएगा विक मुआवजे की राथिश का भुग ान वार्स्था व में भूर्स्थावाविमयों को नहीं विकया गया र्थीा। ऐसा अव ारिर कर े हुए उच्च न्यायालय ने पुणे नगर विनगम और एक अन्य बनाम हरक:ंद विमसरीमल सोलंकी और अन्य (2014) 3 एससीसी 183 मामले में इस न्यायालय क े विनण2य पर अवलम्ब लिलया है और उस पर विव:ार विकया है। 3.[1] इस प्रकार, आक्षेविप विनण2य और आदेश पारिर कर े समय उच्च न्यायालय ने पुणे नगर विनगम (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय क े विनण2य और अन्य विनण2यों पर पूरी रह से अवलम्ब लिलया है सिजसमें पुणे नगर विनगम (उपरोक्त) क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds मामले में विनण2य का पालन विकया गया र्थीा। (आक्षेविप विनण2य और आदेश का प्रर्स्था र 12) हालाँविक, पुणे नगर विनगम (सुप्रा) क े विनण2य को बाद में इंदौर विवकास प्राति करण बनाम मनोहरलाल और अन्य (2014) 3 एससीसी 183 2020) क े मामले में इस न्यायालय की संविव ान पीठ द्वारा शासिस विकया गया है। प्रर्स्था र 366 में इसे विनम्नानुसार देखा और अव ारिर विकया गया है: “366. उपयु2क्त::ा2 को ध्यान में रख े हुए, हम विनम्नलिललिख प्रश्नों का उत्तर दे े हैंः

366.1. ारा 24(1)(ए) क े प्राव ानों क े ह यविद 1.1.2014 को 2013 क े अति विनयम क े प्रारंभ होने की ति थिर्थी को अति विनण2य नहीं विकया जा ा है, ो काय2वाही में कोई:ूक नहीं है। मुआवजे का विन ा2रण 2013 क े ह विकया जाना है।

366.2. यविद न्यायालय क े अं रिरम आदेश क े अन् ग[2] आने वाली अवति को छोड़कर पां: साल की अवति क े भी र आदेश पारिर विकया गया हो ो 1894 अति विनयम क े ह 2013 अति विनयम की ारा 24(1)(बी) क े ह काय2वाही जारी रहेगी जैसे विक यविद इसे विनरसिस न विकया गया हो।

366.3. कब्जे और मुआवजे क े बी: ारा 24(2) में प्रयुक्त शब्द "या" को "न ही" या "और" क े रूप में पढ़ा जाना:ाविहए। 2013 क े अति विनयम की ारा 24(2) क े ह भूविम अति ग्रहण की काय2वाही की:ूक मानी जा ी है, जहां उक्त अति विनयम क े शुरू होने से पहले पां: साल या उससे अति क समय क अति कारिरयों की विनस्मिstय ा क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कारण, न जमीन का कब्जा लिलया गया है और न ही मुआवजा विदया गया है।दूसरे शब्दों में, यविद कब्जा ले लिलया गया है, ो मुआवजा नहीं विदया गया है ो कोई:ूक नहीं हुई है। इसी रह, यविद मुआवजा विदया गया है और कब्जा नहीं लिलया गया है ो कोई:ूक नहीं हो ी है।

366.4. 2013 अति विनयम की ारा 24(2) क े मुख्य भाग में "भुग ान" की उविक्त में न्यायालय में मुआवजे की जमा राथिश शाविमल नहीं है।जमा न विकये जाने का परिरणाम ारा 24(2) क े परं ुक में विकया गया है यविद अति कांश भूविम जो ों क े संबं में इसे जमा नहीं विकया गया है ो 1894 अति विनयम की ारा 4 क े ह भूविम अति ग्रहण क े लिलए अति सू:ना की ति थिर्थी क े अनुसार सभी लाभार्थी, (भूर्स्थावामी) 2013 अति विनयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार होंगे। यविद भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 31 क े ह दातियत्व पूरा नहीं विकया गया है ो उक्त अति विनयम की ारा 34 क े ह ब्याज विदया जा सक ा है। मुआवजे क े गैर-लाभकारी जमा (न्यायालय में) क े परिरणामर्स्थावरूप भूविम अति ग्रहण की काय2वाही नहीं हो ी है।अति कांश जो ों क े संबं में पां: साल या उससे अति क क े लिलए जमा न करने क े मामले में 2013 अति विनयम क े ह मुआवजे का भुग ान 1894 अति विनयम की ारा 4 क े ह भूविम अति ग्रहण क े लिलए अति सू:ना की ारीख क े अनुसार "भूर्स्थावाविमयों" को विकया जाना है।

366.5. यविद विकसी व्यविक्त को 1894 अति विनयम की ारा 31(1) क े ह प्रदान विकए गए मुआवजे क े लिलए विनविवदा दी गई है, ो वह यह दावा नहीं कर सक ा है विक न्यायालय में मुआवजे का भुग ान न करने या न जमा करने क े कारण ारा 24 (2) क े ह अति ग्रहण व्यपग हो गया है।भुग ान करने की बाध्य ा ारा 31(1) क े ह राथिश को विनविवदा देकर पूण[2] की जा ी है। सिजन भूर्स्थावाविमयों ने मुआवजे को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds र्स्थावीकार करने से इनकार कर विदया र्थीा या सिजन्होंने अति क मुआवजे क े लिलए संदभ[2] मांगा र्थीा, वे यह दावा नहीं कर सक े विक अति ग्रहण की काय2वाही 2013 क े अति विनयम की ारा 24 (2) क े ह समाप्त हो गई र्थीी।366.6. 2013 क े अति विनयम की ारा 24(2) क े परन् ुक को ारा 24(2) क े भाग क े रूप में माना जाना:ाविहए, न विक ारा 24(1)(बी) का विहर्स्थासा।

366.7. 1894 क े अ ीन और ारा 24 (2) क े ह अनुध्या रूप में कब्जा लेने का रीका पं:नामा/ज्ञापन ैयार करना है। एक बार 1894 अति विनयम की ारा 16 क े ह कब्जा लेने पर आदेश पारिर विकया गया हो, ो भूविम राज्य में विनविह है और 2013 अति विनयम की ारा 24 (2) क े ह कोई अति कार नही विदया गया है, क्योंविक एक बार कब्जा लेने क े बाद ारा 24 (2) क े ह कोई:ूक नहीं हो ी है।

366.9. अति विनयम की ारा 24 (2) भूविम अति ग्रहण की पूण[2] वाद हे ुक वै ा पर सवाल उठाने क े लिलए नए वाद हे ुक को जन्म नहीं दे ी है। ारा 24 2013 क े प्रव 2न की ति थिर्थी अर्थीा2 1.1.2014 को लंविब काय2वाही पर लागू हो ी है। खंड 24 (2) क े प्राव ान उस स्मिर्स्थार्थीति में लागू हो े हैं जब विदनांक 1/1/2014 को संबंति प्राति कारी क े पास लंविब भूविम अति ग्रहण की काय2वाही में प्राति कारी 2013 क े लागू होने से पहले पां: साल या उससे अति क क े लिलए कब्जा लेने और मुआवजे का भुग ान करने में उनकी विनस्मिstय ा क े कारण विव[ल रहे हों। न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े विनवा2ह की अवति को पां: साल की गणना में शाविमल नहीं विकया जाना:ाविहए।" Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

366.8. विदनांक 1/1/2014 को संबंति प्राति करण क े पास लंविब भूविम अति ग्रहण की काय2वाही में, ारा 24 (2) क े प्राव ान उस स्मिर्स्थार्थीति में लागू हो े हैं जब प्राति कारी 2013 क े लागू होने से पहले पां: साल या उससे अति क समय क कब्जा लेने और मुआवजा देने में विव[ल रहे हों। न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े विनवा2ह की अवति को पां: साल की गणना में शाविमल नहीं विकया जाना:ाविहए।"

4. इंदौर विवकास प्राति करण (उपरोक्त) क े उपरोक्त संविव ान पीठ क े विनण2य को देख े हुए और पुणे नगर विनगम (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय क े पूव[2] क े विनण2य को विवशेष रूप से इस न्यायालय द्वारा खारिरज कर विदया गया है, सिजस पर आक्षेविप विनण2य और आदेश पारिर कर े समय उच्च न्यायालय द्वारा अवलम्ब लिलया गया है, और जो उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विकया गया है वह अपोषणीय है और इसे रद्द और अपार्स्था विकया जाना:ाविहए। 4.[1] इंदौर विवकास प्राति करण (उपरोक्त) क े विनण2य क े मद्देनजर और यहां वर्भिण थ्यों और परिरस्मिर्स्थार्थीति यों पर विव:ार कर े हुए, यह नहीं कहा जा सक ा है विक संबंति भूविम क े संबं में अति ग्रहण की काय2वाही 2013 अति विनयम क े ह व्यपग मानी जा ी है।

5. उपयु2क्त::ा2 को ध्यान में रख े हुए और उपयु2क्त कारणों से व 2मान अपील स[ल हो ी है।उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण2य और आदेश को रद्द Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds और अपार्स्था विकया जा ा है। परिरणामर्स्थावरूप, उच्च न्यायालय क े समक्ष मूल रिरट याति:काक ा2 द्वारा पेश की गई रिरट याति:का खारिरज की जा ी है। मामले क े थ्यों और परिरस्मिर्स्थार्थीति यों में, ख:z क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। ………………………………… (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह) ………………………………… (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई विदल्ली, 20 मई, 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds