Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 3762/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 5863/2020 से उत्पन्न)
नोएडा औद्योवि4क विवकास प्राति करण अपीलक ा6
बनाम
रविंवद्र क
ु मार और अन्य प्रत्यर्थी;
क
े सार्थी
सिसविवल अपील संख्या - 3781/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 15759/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3782/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 15760/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3783/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 15761/2020 से उत्पन्न) vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सिसविवल अपील संख्या - 3779/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8336/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3780/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8337/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3778/2022
( विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8335/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3777/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8334/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3777/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8332/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3774/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8333/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3768/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8321/2020 से उत्पन्न)
अवमानना याति)का (सिसविवल) संख्या - 237/2021 में
सिसविवल अपील संख्या - 3782/2022 vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 15760/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3765/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 3531/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3772/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 6761/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3776/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 6762/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3764/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 29444/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3769/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 721/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3770/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 6379/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3771/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 2086/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3775/2022 vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 7763/2020 से उत्पन्न)
सिसविवल अपील संख्या - 3767/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 8818/2020 से उत्पन्न)
( डी. संख्या 44718/2019)
सिसविवल अपील संख्या - 3766/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 2081/2020 से उत्पन्न)
और
सिसविवल अपील संख्या - 3763/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) संख्या 27568/2019 से उत्पन्न)
विन ण6 य
माननीय न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, विवशेष अनुमति याति)काएं
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की 4ई।
2. अपीलों का यह समूह इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खण्ड पीठ क े 13 सिस ंबर, 2019 क े एक समान विनण6य और आदेश से उत्पन्न हो ा है।क ु छ अपीलें नोएडा औद्योवि4क विवकास प्राति करण (संक्षेप में, 'अति ग्रहणक ा6 विनकाय') द्वारा दायर की 4ई हैं।अन्य अपीलें मूल रिरट याति)काक ा6ओं द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर की 4ई हैं जो अति ग्रविह भूविम क े मालिलक होने का दावा कर रहे हैं. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk 3 राज्य सरकार ने भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 (संक्षेप में, '1894 अति विनयम') की ारा 4 क े ह 7 नवंबर, 2007 को एक अति सू)ना जारी की। उक्त अति सू)ना द्वारा, राज्य सरकार ने 4ौ म बुद्ध न4र सिजले क े हसील सदर, पर4ना दानकौर क े 4ांव बे4मपुर में 108.233 हेक्टेयर भूविम का अति ग्रहण करने की अपनी मंशा को अति सूति) विकया।इस अति ग्रहण का उद्देश्य न्यू ओखला औद्योवि4क विवकास प्राति करण (नोएडा) क े माध्यम से विनयोसिज औद्योवि4क विवकास र्थीा।राज्य सरकार ने 1894 अति विनयम की ारा 17 की उप- ारा (1) क े ह अत्यावश्यक ा खंड को ला4ू विकया और 1894 अति विनयम की ारा 5 ए क े ह जां) को समाप्त करने क े लिलए ारा 17 की उप ारा (4) क े ह एक आदेश भी पारिर विकया। 17 मा)6 2008 को राज्य सरकार द्वारा 1894 अति विनयम की ारा 6 क े ह एक घोषणा जारी की 4ई। राज्य सरकार ने 7 जून, 2008 को 7.559 हेक्टेयर क्षेत्र पर कब्जा कर लिलया र्थीा।अति ग्रहण की 4ई 100.64 हेक्टेयर भूविम क े शेष क्षेत्र का कब्जा 15 जून, 2013 को ले लिलया 4या र्थीा।12 जनवरी, 2011 और 31 विदसंबर, 2013 को दो अल4-अल[4] अति विनण6य विदए 4ए। 4 12 जनवरी 2011 क े अति विनण6य क े ह, उत्तर प्रदेश (समझौ े द्वारा मुआवजे का विन ा6रण और अति विनण6य की घोषणा) विनयम, 1997 (संक्षेप में, 'कराड़ विनयमवाली') क े अनुसार मुआवजा स्वीकार करने क े लिलए सहम हुए लो4ों क े लिलए अल4-अल[4] दरें विन ा6रिर की 4ई र्थीीं।करर विनयामावली क े ह मुआवजे को स्वीकार करने वाले सामान्य काय6काल ारकों को प्रति व46 मीटर 870 रुपये की दर से मुआवजा विदया 4या।कराड़ विनयमावली क े अनुसार मुआवजे को स्वीकार करने क े लिलए सहम हुए पै ृक पट्टेदारों को प्रति व46 मीटर 1000/- रुपये की दर से मुआवजा विदया 4या।1894 अति विनयम की ारा 23 की उप- ारा (2) क े ह 30 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk प्रति श सोलविटयम और 1894 अति विनयम की ारा 23 की उप- ारा (1 ए) क े ह 12 प्रति श की दर से ब्याज क े सार्थी 135.28 रुपये प्रति व46 मीटर की दर से बाजार मूल्य की पेशकश की 4ई र्थीी।हालांविक, सामान्य खा ा ारको क े मामले में, जो करार विनयमावली क े लिलए सहम हुए र्थीे, उन्हें 1,490 रुपये प्रति व46 मीटर की दर से मुआवजा विदया 4या र्थीा।इसी प्रकार, पै ृक पट्टा ारकों को, जो कराड़ विनयमावली क े लिलए सहम हुए र्थीे, प्रति व46 मीटर 1,295/- रुपये की दर से मुआवजा विदया 4या।
5. ऐसा प्र ी हो ा है विक 2011 से 2014 क, इन अपीलों की विवषय-वस् ु वाली रिरट याति)काएं, अति ग्रहण की काय6वाही को )ुनौ ी देने क े लिलए इच्छ ु क मालिलकों/व्यविक्तयों द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष विवशेष ारा क े ह त्काल दायर की 4ई र्थीीं। आक्षेविप विनण6य और आदेश में, उच्च न्यायालय ने एक विनष्कष[6] दज[6] विकया विक 1894 अति विनयम की ारा 17 क े ह त्काल आवेदन करने वाली ाारा को ला4ू करने में राज्य सरकार की काय6वायी अवै र्थीी। र्थीाविप, उच्च न्यायालय ने 1894 अति विनयम की ारा 6 क े अ ीन की 4ई घोषणा और अति विनण6यों को खारिरज और अपास् नहीं विकया 4या। उच्च न्यायालय ने अभिभविन ा6रिर विकया विक साव6जविनक विह क े सार्थी व्यविक्त[4] अति कारों क े सं ुलन क े लिलए, राह इस कारण से दी जानी )ाविहए विक अति ग्रविह भूविम पर पया6प्त विवकास काय[6] विकया 4या र्थीा। अ ः उच्च न्यायालय ने अभिभविन ा6रिर विकया विक सिजन भूविम मालिलकों/विह बद्ध व्यविक्तयों ने करार विनयमवाली क े अनुसार प्रति कर स्वीकार नहीं विकया है, उन्हें भूविम अति ग्रहण, पुनवा6स और पुनस्र्थीा6पन में उति) प्रति कर और पारदर्शिश ा का अति कार अति विनयम, 2013 (संक्षेप में '2013 अति विनयम') क े उपबं ों क े अनुसार देय प्रति कर का भु4 ान विकया जाना )ाविहए। उच्च न्यायालय ने यह भी विनदuश विदया विक 2013 क े अति विनयम क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk प्राव ानों क े अनुसार बाजार मूल्य विनण6य की ारीख को विन ा6रिर विकया जाए4ा। हालांविक, उच्च न्यायालय ने कहा विक सिजन लो4ों ने करार विनयामावली क े ह एक समझौ े क े ह मुआवजा स्वीकार विकया है, वे विकसी भी राह क े हकदार नहीं हैं।
6. अति ग्रहणक ा6 विनकाय द्वारा दालिखल याति)काओं क े समर्थी6न में, विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री रविवन्द्र क ु मार द्वारा यह प्रस् ु विकया 4या विक रिरट याति)काओं को भारी विवलंब और अवति बी जाने क े कारण नुकसान उठाना पड़ा। यह प्रस् ु विकया 4या विक यद्यविप ारा 17 क े ह त्काल प्रवा ान को ला4ू करने क े बाद, 1894 अति विनयम की ारा 6 क े ह घोषणा 2008 में जारी की 4ई र्थीी, लेविकन भूविम मालिलकों द्वारा 2011 से 2014 क याति)काएं दायर की 4ई र्थीीं। विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता क े द्वारा प्रस् ु विकया 4या विक विकसी भी रिरट याति)का में, इ ने लंबे विवलंब क े लिलए कोई स्पष्टीकरण नहीं र्थीा। उन्होंने कहा विक संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह उच्च न्यायालय क े अति कार क्षेत्र का उपयो4 करने क े लिलए त्काल प्रवा ान को )ुनौ ी देने वाले याति)काक ा6ओं क े लिलए विदन में बहु देर हो )ुकी र्थीी। उन्होंने यह अभिभविन ा6रिर करने क े लिलए उच्च न्यायालय द्वारा विदए 4ए कारणों की ओर ध्यान विदलाया विक त्काल उपबं ला4ू नहीं विकया जा सक ा र्थीा। उनक े द्वारा यह क विदया 4या विक उक्त कारण त्रुविटपूण[6] हैं। उसने प्रस् ु विकया विक रा ेश्याम मृ क क े विवति क उत्तराति कारी क े द्वारा और अन्य बनाम यू पी राज्य और अन्य[1] क े मामले में इस न्यायालय क े विनण6य पर उच्च न्यायालय द्वारा लिलया 4या अवलंब पूरी रह से 4ल है क्योंविक उस मामले में, भूविम मालिलक 1894 अति विनयम की ारा 5 ए क े ह जां) करने में विवफल रहने क े परिरणामस्वरूप उनक े प्रति पूवा6ग्रह स्र्थीाविप करने में सक्षम र्थीे। उन्होंने कहा विक उच्च न्यायालय क े फ ै सले की ारीख को बाजार मूल्य vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk लेकर 2013 क े अनुसार मुआवजा देने का विनदuश देना पूरी रह से अवै है। इसलिलए, वह प्रस् ु करे4ा विक आक्षेविप विनण6य को रद्द विकया जाना )ाविहए।
7. सिजन भूविम मालिलकों को करार विनयमावली क े ह मुआवजा नहीं विमला र्थीा, उन्होंने यह कह े हुए आक्षेविप विनण6य का समर्थी6न विकया है विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश बहु न्यायसं4 है जो भूविम मालिलकों क े अति कारों और अति ग्रहण विनकाय क े अति कारों क े बी) सं ुलन स्र्थीाविप कर ा है। सिजन भूविम मालिलकों ने अपनी अपीलों क े समर्थी6न में करार विनयामावली क े ह मुआवजा स्वीकार विकया है, उन्होंने कहा विक उच्च न्यायालय को उन लो4ों क े बी) अं र नहीं करना )ाविहए सिजन्होंने मुआवजा स्वीकार विकया है और सिजन्होंने मुआवजा स्वीकार नहीं विकया है, विवशेष रूप से इस विनष्कष[6] को दज[6] आदेश क े बाद विक ारा 5 ए क े ह त्काल खंड का आह्वान और जां) का आदेश अवै र्थीा। उनका कहना है विक इस रह का मनमाना अं र उच्च न्यायालय द्वारा नहीं विकया जाना )ाविहए र्थीा।
8. भूविम मालिलकों की ओर से यह दलील दी 4ई विक रा े श्याम क े मामले1 में इस न्यायालय क े एक विनण6य पर अवलंब ले े हुए यह क 6 विदया 4या विक एक बार यह माना 4या है विक 1894 क े अति विनयम की ारा 17 की उप ारा (4) क े सार्थी पविठ उप- ारा (1) को ला4ू करने की कार6वाई अवै है अ ः अति ग्रहण को विबल्क ु ल भी बरकरार नहीं रखा जा सक ा है। यह इंवि4 विकया जा ा है विक 446 वूलन प्राइवेट लिलविमटेड अन्य उत्तर प्रदेश 2 राज्य और अन्य क े मामले में रा ेश्याम 1 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अपनाए 4ए दृविष्टकोण का अनुसरण विकया 4या र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
9. भूविम मालिलकों क े लिलए उपस्थिस्र्थी विवद्व अति वक्ता क े द्वारा भी इस न्यायालय क े ीन न्याया ीशों की खण्ड पीठ क े वाद साविवत्री देवी इत्यादी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं ीन अन्य[3] क े विनण6य अवलंब लिलया सिजसक े द्वारा एक माक u ट वैल्यू को 64.[7] प्रति श बढ़ाने का विनदuश जारी विकया 4या र्थीा। इसक े अलावा, प्रत्येक भूविम मालिलक को अति ग्रविह भूविम क े 10 प्रति श की सीमा क विवकसिस भूविम का आवंटन करने क े विनदuश जारी विकए 4ए। हमने प्रस् ुति यों पर साव ानीपूव6क विव)ार विकया है। हम पहले ही थ्यात्मक स्थिस्र्थीति का उल्लेख कर )ुक े हैं जो विववाविद नहीं है। हालांविक 1894 क े अति विनयम की ारा 6 क े ह घोषणा 17 मा)6 2008 को की 4ई र्थीी, लेविकन रिरट याति)काएं वष[6] 2011 में और उसक े बाद दायर की 4ई र्थीीं। जैसा विक पहले ब ाया 4या है, अति ग्रविह भूविम क े एक विहस्से का कब्जा 7 जून 2008 को लिलया 4या र्थीा और शेष भूविम का कब्जा 15 जून 2013 को ले लिलया 4या र्थीा। उच्च न्यायालय ने एक थ्य दज[6] विकया है विक कई भूविम मालिलक करार विनयमावली क े ह मुआवजा स्वीकार करने क े लिलए सहम हुए हैं। इसक े अलावा अति ग्रविह भूविम पर अति ग्रविह विनकाय द्वारा विवकास का पया6प्त काय[6] विकया 4या।
11. पहला प्रश्न जो हमारे विव)ारार्थी6 उठ ा है वह यह है विक क्या उच्च न्यायालय ने यह विनष्कष[6] अभिभलिललिख करने क े पश्चा ् विक सिजन आदेशों द्वारा 1894 क े अति विनयम की ारा 17 की उप ारा (1) और उप ारा (4) का अवलंब लिलया जाना अवैद्य र्थीा क े ह अति ग्रहण क े आदेश को अपास् न करक े 4ल ी की र्थीी। हम यहां यह नोट कर सक े हैं विक 1894 क े अति विनयम की ारा 5 ए क े ह त्कालिल ा उपबं को ला4ू करने और जां) से छ ू ट देने क े बाद 17 मा)6, 2008 को ारा 6 की घोषणा जारी की 4ई र्थीी। मालिलकों द्वारा दायर सभी रिरट याति)काएं ारा 6 क े ह घोषणा की vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk ारीख से ३ से ४ साल से अति क समय क े बाद दालिखल की 4ई र्थीीं.यह स) है विक उच्च न्यायालय का यह विनण6य सही र्थीा विक मामले क े थ्यों में त्कालिल ा उपबं का आह्वान नहीं विकया जा सक ा र्थीा। र्थीाविप, उच्च न्यायालय द्वारा यह थ्य अभिभलिललिख विकया 4या है विक अति ग्रविह भूविम का कब्जा अति ग्रविह विनकाय को सौंपे जाने क े बाद, उसे विवकसिस विकया 4या है और उनको को आबंविट विकया 4या है। विवभिभन्न व्यविक्तयों क े स्वाविमत्व वाले 108.233 हेक्टेयर क े एक बहु बड़े क्षेत्र का अति ग्रहण विकया 4या र्थीा। हालांविक, भूविम मालिलक होने का दावा करने वाले क े वल 11 लो4ों ने देर से रिरट याति)काएं दायर की। इन थ्यों को ध्यान में रख े हुए, उच्च न्यायालय ने भूविम मालिलकों क े विनजी विह ों और जनविह क े बी) सं ुलन बनाने क े लिलए अति ग्रहण की प्रवि‡या को रद्द करने से इनकार कर विदया। उच्च न्यायालय ने यह विनदuश दे े हुए एक आदेश पारिर विकया विक क्षति पूर्ति 2013 क े प्राव ानों क े अनुसार फ ै सले की ारीख को देय हो4ी। भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह रिरट अति कार क्षेत्र हमेशा विववेका ीन हो ा है। यह एक न्यायसं4 उपाय है। उच्च न्यायालय क े लिलए प्रत्येक अवै ा को सही करना आवश्यक नहीं है। यविद अवै ा क े सु ार क े अनुति) परिरणाम होने की संभावना है, ो उच्च न्यायालय आम ौर पर अनुच्छेद 226 क े ह अपने अति कार क्षेत्र का उपयो4 करने से इनकार कर दे4ा। अति ग्रहण की काय6वाही को जारी रख े हुए उच्च न्यायालय ने 2013 अति विनयम क े ह मुआवजे क े भु4 ान का विनदuश देकर भूविम मालिलकों को पया6प्त राह प्रदान की जो 1894 अति विनयम क े ह देय मुआवजे से अति क है। इस दृविष्टकोण को दोष नहीं विदया जा सक ा है।दूसरा प्रश्न जो उठ ा है वह यह है विक क्या उच्च न्यायालय को साविवत्री देवी क े मामले में इस न्यायालय क े विनण6य क े अनुसार उच्च बाजार मूल्य और विवकसिस भूविम क े आबंटन की राह दी जानी vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk )ाविहए र्थीी। उक्त विनण6य क े पैराग्राफ 50 में, इस न्यायालय ने इस प्रकार म व्यक्त विकयाः इन सभी विवभिशष्ट परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, हमारी राय है विक ये ऐसे मामले नहीं हैं जहां इस न्यायालय को संविव ान क े अनुच्छेद 136 क े ह हस् क्षेप करना )ाविहए। हालांविक, हम यह स्पष्ट कर े हैं विक उच्च न्यायालय क े विनदuश पूव क्त अविद्व ीय और विवभिशष्ट /विवभिशष्ट पृष्ठभूविम में विदए 4ए हैं और इसलिलए, यह भविवष्य क े मामलों क े लिलए विमसाल नहीं बने4ा। (प्रभाव वर्ति ) कभिर्थी मामले क े थ्यों से यह प्र ी हो ा है विक ीन 4ांवों में अपीलों की विवषय - वस् ु क े ह अति ग्रही भूविम पर कोई विवकास नहीं हुआ र्थीा। व 6मान मामलों में, हम एक पूरी रह से अल[4] थ्य परिरदृश्य से विनपट रहे हैं और इसलिलए, कभिर्थी विनण6य पर भरोसा करने से भूविम मालिलकों को मदद नहीं विमले4ी। साविवत्री देवी 3 क े मामले में विनण6य मामले की विवभिशष्ट थ्य स्थिस्र्थीति क सीविम र्थीा।
13. सहारा इंतिडया कमर्शिशयल कॉरपोरेशन लिलविमटेड और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य[4] 4 क े मामले में, इस अदाल ने पाया विक ारा 17 क े ह त्कालिल ा उपबं का आह्वान अ ार्किकक और अवै र्थीा। इस न्यायालय ने राह क े लिलए और 2013 अति विनयम क े संदभ[6] में मुआवजे क े भु4 ान का विनदuश विदया और संबंति ारीख को अपने फ ै सले की ारीख माना। इसलिलए, हम उच्च न्यायालय क े दृविष्टकोण में कोई त्रुविट नहीं पा े हैं,जब उसने उन भूविम मालिलकों को 2013 क े अति विनयम क े अनुसार 4णना की 4ई बाजार मूल्य का भु4 ान करने का विनदuश विदया, सिजन्होंने 2013 क े अति विनयम का पालन करने क े बाद विनण6य की ारीख को एक मानी हुई ारीख क े रूप में कर विनयमावली क े ह मुआवजे को स्वीकार नहीं विकया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk है। उच्च न्यायालय ने भू-स्वाविमयों को उक्त आर्शिर्थीक राह प्रदान कर े हुए अति ग्रहण की काय6वाही को ब)ाकर सं ुलनकारी काय[6] विकया है।
14. ीसरा प्रश्न यह है विक क्या 2013 क े अनुसार बाजार मूल्य क े अनुदान की राह से उन भूस्वाविमयों को वंति) विकया जा सक ा र्थीा सिजन्होंने समझौ े द्वारा करार विनयमावली क े संदभ[6] में मुआवजा स्वीकार कर लिलया र्थीा। उच्च न्यायालय ने इस दृविष्टकोण को अपनाने क े लिलए कारण विदए हैं। इसका मुख्य कारण यह है विक विबना विकसी भिशकाय क े, भूविम मालिलकों ने स्वेच्छा से करार विनयामावली क े संदभ[6] में एक समझौ े द्वारा मुआवजा स्वीकार विकया। इसक े बाद काफी समय बी ने क े बाद भूविम मालिलकों ने उच्च न्यायालय में रिरट याति)का दायर करने का विवकल्प )ुना। एक समझौ े क े ह मुआवजे को स्वीकार करक े सरकार की कार6वाई को स्वीकार करने क े बाद, भूविम मालिलक देर से भिशकाय करने क े लिलए उति) नहीं र्थीे। इसलिलए, हमें उन भूविम मालिलकों क े संबं में उच्च न्यायालय द्वारा लिलए 4ए दृविष्टकोण में कोई त्रुविट नहीं विमल ी है, सिजन्होंने करार विनयामावली क े ह मुआवजा स्वीकार विकया र्थीा। अवमानना याति)का (सी) संख्या 237/2021
15. विवशेष अनुमति याति)का (सिसविवल) सं. 15760/ 2020 से उत्पन्न् सिसविवल अपील में अपीलार्थी; द्वारा दालिखल विकए 4ये अवमानना याति)का (सिसविवल) संख्या 237/2021 क े ह अपीलक ा6ओं ने आरोप ल4ाया है विक 28 जनवरी 2021 को इस अदाल द्वारा पारिर अं रिरम आदेश का उल्लंघन कर े हुए, अति ग्रहण विनकाय ने विनमा6ण शुरू विकया। अति ग्रहणक ा6 विनकाय द्वारा दायर प्रति उत्तर शपर्थीपत्र में, अवमानना याति)का में ल4ाए 4ए आरोपों से इनकार विकया 4या है.विकसी भी मामले में, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अब हम आक्षेविप विनण6य की पुविष्ट कर रहे हैं। इसलिलए अवमानना याति)का क े आ ार पर कोई कार6वाई शुरू करने की जरूर नहीं है। सभी मामलें 16 इसलिलए, हमें आक्षेविप विनण6य में कोई त्रुविट नहीं विमल ी है। दनुसार, अपीलें खारिरज की जा ी हैं। अवमानना याति)का का विनस् ारण विकया जा ा है। ………………………… (न्यायमूर्ति अजय रस् ो4ी) ………………………….. (न्यायमूर्ति अभय एस ओका) नई विदल्ली; 09 मई, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk