Union of India v. Ashish Agrawal

Supreme Court of India · 04 May 2022 · 2022 INSC 510
M. R. Shah; B. V. Nagarathna
Civil Appeal Nos. 3005/2022 and others
2022 INSC 510
tax appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that reassessment notices issued under Section 148 after April 1, 2021, must comply with the amended procedural safeguards under the Finance Act, 2021, and quashed non-compliant notices, passing a common order to regulate pending appeals.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 3005/2022
भार संघ एवं अन्य …अपीलार्थी$ (गण)
बनाम
आशीष अग्रवाल ...प्रत्यर्थी$ (गण)
सह
सिसविवल अपील सं. 3006/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3009/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3007/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3008/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3010/2022
सह mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2022 INSC 510
सिसविवल अपील सं. 3013/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3011/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3012/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3014/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3015/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3016/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3017/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3019/2022
सह
सिसविवल अपील सं. 3020/2022 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6448/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 5381/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 5079/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6092/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6534/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6158/2022 से उद्भू ) mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6316/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6281/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या. (सी) सं. 6545/2022 से उद्भू )
सह
सिसविवल अपील सं./2022
(विव.अ.या.(सी) सं. 6038/2022 से उद्भू )
विनण;य
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह
विव.अ.या.(सी) सं.6448/2022, 5381/2022, 5079/2022, 6092/2022, 6534/2022, 6158/2022, 6316/2022, 6281/2022, 6545/2022, 6038/2022 में अनुमति प्रदान की गयी। mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
JUDGMENT

1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रिरट टैक्स नं. 524/2021 और अन्य संबद्ध रिरट टैक्स यातिJकाओं में पारिर आक्षेविप सामान्य विनण;य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, सिPसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने उक्त रिरट यातिJकाओं को अनुमति दी और आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 148 क े ह राPस्व द्वारा Pारी विकए गए कई पुनमू;ल्यांकन नोविटसों को इस आ ार पर रद्द कर विदया है विक विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा संशो न क े मद्देनPर ये विवति ः गल हैं, सिPसक े द्वारा 1 अप्रैल, 2021 से नए प्राव ान अर्थीा; ् ारा 147 से 151 को शाविमल करक े आयकर अति विनयम में संशो न विकया गया है, राPस्व ने व;मान अपीलें दायर की है।

2. इसी प्रकार क े विनण;य और आदेश विदल्ली उच्च न्यायालय, राPस्र्थीान उच्च न्यायालय, कलकत्ता उच्च न्यायालय, मद्रास उच्च न्यायालय,बम्बई उच्च न्यायालय, सविह विवथिभन्न अन्य उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर विकए Pा े हैं सिPनका विववरण विनम्नानुसार हैः क्रम संख्या विववरण

1. अशोक क ु मार अग्रवाल बनाम भार संघ (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा रिरट टैक्स सं. 524/2021 में पारिर 30.09.2021 विदनांविक विनण;य

2. बीपीआईपी इन्फ्रा प्रा. लिल. बनाम आयकर अति कारी एवं अन्य (राPस्र्थीान उच्च न्यायालय) एस.बी. सिसविवल रिरट यातिJका सं. 13297/2021 में राPस्र्थीान उच्च न्यायालय,Pयपुर द्वारा पारिर 25.11.2021 विदनांविक विनण;य

3. मनमोहन कोहली बनाम एसीआईटी (विदल्ली उच्च न्यायालय) रिरट यातिJका (सी) सं. 6176/2021 में माननीय विदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 15.12.2021 विदनांविक विनण;य

4. बगारिरया प्रॉपट$P एंड इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिलविमटेड बनाम भार संघ (कलकत्ता उच्च mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय) डब्ल्यू.पी.ओ. संख्या 244/2021 में माननीय कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 17.01.2022 विदनांविक विनण;य

5. मनोP Pैन बनाम भार संघ (कलकत्ता उच्च न्यायालय ) डब्ल्यू.पी.ए. संख्या 11950/2021 में माननीय कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 17.01.2022 विदनांविक विनण;य

6. सुदेश नेPा बनाम आईटीओ (राPस्र्थीान उच्च न्यायालय) डी.बी. सिसविवल रिरट यातिJका संख्या 969/2021 में माननीय राPस्र्थीान उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 27.01.2022 विदनांविक विनण;य

7. वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉPी बनाम सीबीडीटी (मद्रास उच्च न्यायालय) रिरट यातिJका सं. 15019/2021 में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 04.02.2022 विदनांविक विनण;य

8. टाटा कम्युविनक े शंस ट्रांसफॉमkशन सर्विवसेP बनाम एसीआईटी (बॉम्बे हाई कोट;) रिरट यातिJका संख्या 1334 /2021 में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 29.03.2022 विदनांविक विनण;य 5 इस स् र पर, यह ध्यान देने की आवश्यक ा है विक असंशोति आयकर अति विनयम की ारा 148 क े ह लगभग 90,000 ऐसे पुनमू;ल्यांकन नोविटस 01.04.2021 क े बाद राPस्व द्वारा Pारी विकए गए र्थीे, Pो देश भर क े विवथिभन्न उच्च न्यायालयों क े समक्ष 9000 से अति क रिरट यातिJकाओं की विवषयवस् ु बने और विवथिभन्न विनण;य एवं आदेश द्वारा, सिPनका विववरण ऊपर विदया गया है, उच्च न्यायालयों ने समान दृविष्टकोण अपनाया है और समान आ ारों पर ारा 148 क े ह Pारी संबंति पुनमू;ल्यांकन नोविटसों को अपास् कर विदया।

2. 1 इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर सामान्य विनण;य और आदेश व;मान अपीलों की विवषय-वस् ु है। विवद्वान एएसPी श्री एन. वेंकटरमन ने बार में कहा विक राPस्व विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर इसी रह क े विनण;य एवं आदेशों क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिtलाफ अपील करने पर विवJार कर रहा है। र्थीाविप, Jूंविक विवषय सामान्य है और काय;वाविहयों की बहुल ा होगी और इस न्यायालय क े बोझ को कम करने क े लिलए और इसमें नीJे विदए गए कारणों से, Pैसा विक हम भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 142 क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए एक आदेश पारिर करने का प्रस् ाव कर े हैं, व;मान आदेश समान विवषय पर विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर सभी अन्य विनण;यों एवं आदेशों को शासिस करेगा। इसलिलए, हमारी विटप्पणी है विक राPस्व विवभाग को अलग-अलग व्यविक्तग अपील दायर करने की आवश्यक ा नहीं है सिPनकी संख्या 9000 से अति क हो सक ी है। 2.[2] वास् व में, हमने विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री सी.ए. सुंदरम, को सुना है, Pो संबंति विन ा;रिर ी की ओर से पेश हुए र्थीे, Pो विदल्ली उच्च न्यायालय क े समक्ष भी पेश हुए र्थीे।

3. विववाद को समझने क े लिलए, 01.04.2021 से पहले और 01.04.2021 क े बाद लागू प्रासंविगक वै ाविनक प्राव ानों और क ु छ थ्यों का उल्लेt करना आवश्यक है। विवत्त अति विनयम, 2021 क े लागू होने से पहले पुनमू;ल्यांकन की प्रविक्रया को संJालिल करने वाली प्रविक्रया विनम्नलिललिt प्राव ानों द्वारा शासिस हो ी र्थीीः- “कर विन ा;रण से बJने वाली आय

147. यविद विन ा;रण अति कारी क े पास यह विवश्वास करने का कारण है विक कर योग्य कोइ; आय विकसी विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रण से छ ू ट गइ; है, ो वह ारा 148 से ारा 153 क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, ऐसी आय का और कर योग्य विकसी अन्य आय का भी, Pो विन ा;रण से छ ू ट गइ; है और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Pो बाद में इस ारा क े अ ीन काय;वाविहयों क े दौरान Pानकारी में आ ी है, विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण कर सक ा है, या संबंति विन ा;रण वष; क े लिलए (सिPसे इस ारा में और ारा 148 से ारा 153 में प्रासंविगक विन ा;रण वष; कहा गया है) हाविन या अवक्षयण भत्ता या विकसी अन्य भत्ते को पुनः संगथिण कर सक ा है: बश k Pहां प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए ारा 143 की उप ारा (3) या इस ारा क े अ ीन विन ा;रण विकया गया है, वहां प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से Jार वष; की समावि• क े पश्चा ् इस ारा क े अ ीन कोइ; कार;वाई ब क नहीं की Pाएगी Pब क विक ारा 139 क े अ ीन या ारा 142 की उप ारा (1) या ारा 148 क े अ ीन Pारी की गइ; नोविटस क े उत्तर में या उस विन ा;रण वष; क े लिलए उसक े विन ा;रण क े लिलए आवश्यक सभी ात्वित्वक थ्यों को पूरी रह से और वास् व में प्रकट करने में विन ा;रिर ी की ओर से असफल ा क े कारण ऐसे विन ा;रण वष; क े लिलए कर योग्य कोइ; आय विन ा;रण से छ ू ट न गइ; हो: बश k यह और विक पहले परं ुक में अं र्विवष्ट कोइ; बा उस दशा में लागू नहीं होगी Pहां भार क े बाहर अवत्विस्र्थी विकसी आत्विस् क े संबं में (सिPसक े अं ग; विकसी इकाई में विवत्तीय विह भी है) कर से प्रभाय; कोइ; आय विकसी विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रण से छ ू ट गइ; है: बश k यह भी विक विन ा;रण अति कारी ऐसी आय से थिभन्न, सिPसमें ऐसे मामले अं व;लिल हैं, Pो विकसी अपील, विनदkश या पुनरीक्षण क े विवषय हैं, विकसी आय का Pो कर योग्य है और कर विन ा;रण से छ ू ट गया है, विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण कर सक े गा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्पष्टीकरण 1. –विन ा;रण अति कारी क े समक्ष लेtा बविहयों या अन्य साक्ष्य को प्रस् ु करना, सिPससे विन ा;रण अति कारी द्वारा सम्यक सPग ा क े सार्थी ात्वित्वक साक्ष्य का प ा लगा हो, आवश्यक रूप से पूव;गामी परं ुक क े अर्थी; में प्रकटन क े बराबर नहीं होगा। स्पष्टीकरण 2. –इस ारा क े प्रयोPनों क े लिलए विनम्नलिललिt को भी ऐसे मामले माना Pाएगा Pहां कर योग्य आय विन ा;रण से छ ू ट गई है, अर्थीा; ्ः - (क) Pहां विन ा;रिर ी द्वारा आय का कोइ; विववरण नहीं विदया गया है, यद्यविप उसकी क ु ल आय या विकसी अन्य व्यविक्त की क ु ल आय, सिPसक े संबं में वह पूव;वष; क े दौरान इस अति विनयम क े अ ीन विन ा;रण योग्य है, उस अति क म रकम से अति क है Pो आय कर योग्य नहीं है; (t) Pहां विन ा;रिर ी द्वारा आय का विववरण प्रस् ु विकया गया है किंक ु कोइ; विन ा;रण नहीं विकया गया है और विन ा;रण अति कारी द्वारा यह पाया Pा ा है विक विन ा;रिर ी ने आय को कम करक े विदtाया है या विववरण में अत्यति क हाविन, कटौ ी, भत्ता या राह का दावा विकया है; (tक) Pहां विन ा;रिर ी विकसी ऐसे अं रराष्ट्रीय संव्यवहार क े संबं में रिरपोट; प्रस् ु करने में असफल रहा है सिPसकी ारा 92 ड़ क े अ ीन उसक े लिलए इस प्रकार अपेक्षा की गइ; र्थीी; (ग) Pहां विन ा;रण विकया गया है, किंक ु- (i) कर योग्य आय का कम मूल्यांकन विकया गया है; या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) ऐसी आय का मूल्यांकन अत्यति क कम दर पर विकया गया है; या (iii) इस अति विनयम क े अ ीन ऐसी आय को अत्यति क अनु ोष का विवषय बनाया गया है; या (iv) इस अति विनयम क े ह अत्यति क हाविन या मूल्यह्रास भत्ते या विकसी अन्य भत्ते की गणना की गई है, (गक) Pहां विन ा;रिर ी द्वारा आय का विववरण नहीं विदया गया है या उसक े द्वारा ारा 133 सी की उप- ारा (2) क े ह विन ा;रिर आय कर प्राति करण से प्रा• Pानकारी या दस् ावेP क े आ ार पर आय का विववरण विदया गया है, विन ा;रण अति कारी द्वारा यह पाया Pा ा है विक विन ा;रिर ी की आय उस अति क म राथिश से अति क है, Pो कर योग्य नहीं है, या, Pैसा भी मामला हो, विन ा;रिर ी ने आय को कम कर विदtाया गया है या अत्यति क हाविन, कटौ ी, भत्ता या राह का दावा विकया है; (घ) Pहां विकसी व्यविक्त क े पास भार क े बाहर त्विस्र्थी कोइ; आत्विस् (सिPसक े अं ग; विकसी इकाई में विवत्तीय विह भी है) पाया Pा ा है। स्पष्टीकरण 3. –इस ारा क े अ ीन विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण क े प्रयोPन क े लिलए, विन ा;रण अति कारी विकसी ऐसे विववाद्यक की बाब, Pो विन ा;रण से छ ू ट गया है, आय का विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण कर सक े गा और ऐसा विववाद्यक बाद में इस ारा क े अ ीन काय;वाविहयों क े अनुक्रम में उसकी Pानकारी में आ ा है, इस बा क े हो े हुए भी विक ऐसे विववाद्यक क े कारणों को ारा 148 की उप ारा (2) क े अ ीन अथिभलिललिt कारणों में सत्विम्मलिल नहीं विकया गया है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA स्पष्टीकरण 4. –शंकाओं को दूर करने क े लिलए यह स्पष्ट विकया Pा ा है विक विवत्त अति विनयम, 2012 द्वारा यर्थीा संशोति इस ारा क े उपबं 1 अप्रैल, 2012 को या उससे पहले प्रारंभ होने वाले विकसी विन ा;रण वष; क े लिलए भी लागू होंगे। Pहां आय विन ा;रण से छ ू ट गई है वहां नोविटस Pारी करना

148. (1) ारा 147 क े अ ीन विन ा;रण, पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना करने से पूव;, विन ा;रण अति कारी विन ा;रिर ी को एक सूJना की ामील करेगा सिPसमें उससे यह अपेक्षा की Pाएगी विक वह ऐसी अवति क े भी र, Pो सूJना में विवविनर्विदष्ट की Pाए, अपनी आय की या विकसी अन्य व्यविक्त की आय की, सिPसकी बाब वह प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े त्समान पूव;वष; क े दौरान इस अति विनयम क े अ ीन विन ा;रणीय है, विवविह प्ररूप में और विवविह रीति से सत्याविप और ऐसी अन्य विवथिशविष्टयों का उल्लेt कर े हुए, Pो विवविह की Pाएं, एक विववरण प्रस् ु करे और इस अति विनयम क े उपबं, Pहां क हो सक े, दनुसार लागू होंगे Pैसे विक ऐसा विववरण ारा 139 क े अ ीन प्रस् ु विकया Pाने वाला विववरण हो: बश k विक ऐसी त्विस्र्थीति में (क) Pहां इस ारा क े अ ीन ामील की गइ; सूJना क े उत्तर में 1 अक्त ू बर, 1991 को आरंभ होने वाली और 30 सिस ंबर, 2005 को समा• होने वाली अवति क े दौरान विववरण विदया गया है, और (t) त्पश्चा ् ारा 143 की उप ारा (2) क े परं ुक में विवविनर्विदष्ट बारह मास की समावि• क े पश्चा ्, Pैसा विक वह विवत्त अति विनयम, 2002 (2002 का 20) द्वारा उक्त उप ारा क े संशो न क े ठीक पूव; विवद्यमान र्थीा, किंक ु mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारा 153 की उप ारा (2) में विवविनर्विदष्ट विन ा;रण पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना क े लिलए समय सीमा समा• होने क े पूव; इस tंड में संदर्भिभ सभी नोविटस वै मानी Pाएगी: बश k आगे त्विस्र्थीति में - (क) Pहां 1 अक्त ू बर, 1991 को आरंभ होने वाली और 30 सिस म्बर, 2005 को समा• होने वाली अवति क े दौरान इस ारा क े अ ीन ामील की गइ; सूJना क े उत्तर में विववरण विदया गया हो, और (t) त्पश्चा ् ारा 143 की उप ारा (2) क े tंड (ii) क े अ ीन एक सूJना की ामील ारा 143 की उप ारा (2) क े tंड (ii) क े परं ुक में विवविनर्विदष्ट बारह मास की समावि• क े पश्चा ् किंक ु ारा 153 की उप ारा (2) में विवविनर्विदष्ट विन ा;रण, पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना करने की समय- सीमा की समावि• से पूव; की गइ; है, इस tंड में विनर्विदष्ट प्रत्येक ऐसी नोविटस को विवति मान्य सूJना समझा Pाएगा। स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने क े लिलए यह घोविष विकया Pा ा है विक पहले परं ुक या दूसरे परं ुक में अं र्विवष्ट कोइ; बा विकसी ऐसे विववरण पर लागू नहीं होगी Pो इस ारा क े अ ीन ामील की गइ; नोविटस क े उत्तर में 1 अक्त ू बर, 2005 को या उसक े पश्चा ् दी गइ; है। (2) विन ा;रण अति कारी, इस ारा क े अ ीन कोई नोविटस Pारी करने से पूव;, ऐसा करने क े अपने कारण अथिभलिललिt करेगा। नोविटस Pारी करने की समय सीमा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

149. (1) प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए ारा 148 क े अ ीन कोई नोविटस Pारी नहीं की Pाएगी, - (क) यविद प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े अं से Jार वष; बी गए हैं, Pब क विक मामला tंड (t) या tंड (ग) क े अ ीन नहीं आ ा है– (t) यविद Jार वष;, किंक ु छह वष; से अति क नहीं, प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े अं से बी गए हैं Pब क विक कर योग्य आय, Pो विन ा;रण से छ ू ट गई है, उस वष; क े लिलए एक लाt रुपए या उससे अति क है या होने की संभावना है; (ग) यविद Jार वष;, किंक ु सोलह वष; से अति क नहीं, प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े अं से बी गए हैं Pब क विक भार क े बाहर त्विस्र्थी विकसी आत्विस् (सिPसक े अं ग; विकसी इकाई में विवत्तीय विह भी है) क े संबं में आय कर योग्य विन ा;रण से छ ू ट न गइ; हो। स्पष्टीकरण-इस उप ारा क े प्रयोPनों क े लिलए विन ा;रण से छ ू ट गइ; कर योग्य आय का अव ारण करने में ारा 147 क े स्पष्टीकरण 2 क े उपबं उसी प्रकार लागू होंगे Pैसे वे उस ारा क े प्रयोPनों क े लिलए लागू हो े हैं। (2) नोविटस Pारी करने क े बारे में उप ारा (1) क े उपबं ारा 151 क े उपबं ों क े अ ीन होंगे। (3) यविद वह व्यविक्त, सिPस पर ारा 148 क े अ ीन नोविटस की ामील की Pानी है, ारा 163 क े अ ीन अविनवासी क े अथिभक ा; क े रूप में माना Pाने वाला व्यविक्त है और नोविटस क े अनुसरण में विकए Pाने वाले विन ा;रण, पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना ऐसे अविनवासी क े अथिभक ा; क े रूप में उस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पर की Pानी है ो नोविटस प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से छह वष; की अवति की समावि• क े पश्चा ् Pारी नहीं की Pाएगी। स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने क े लिलए, यह स्पष्ट विकया Pा ा है विक विवत्त अति विनयम, 2012 द्वारा यर्थीा संशोति ारा (1) और (3) क े प्राव ान 1 अप्रैल, 2012 को या उससे पहले शुरू होने वाले विकसी भी विन ा;रण वष; क े लिलए भी लागू होंगे। नोविटस Pारी करने क े लिलए मंPूरी

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151. (1) विकसी विन ा;रण अति कारी द्वारा प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से Jार वष; की अवति की समावि• क े पश्चा ् ारा 148 क े अ ीन कोइ; नोविटस ब क Pारी नहीं की Pाएगी Pब क विक विन ा;रण अति कारी द्वारा अथिभलिललिt कारणों से प्र ान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्र ान आयुक्त या आयुक्त को यह समा ान नहीं हो Pा ा है विक ऐसी नोविटस Pारी करने क े लिलए यह एक उपयुक्त मामला है। (2) उप ारा (1) क े अं ग; आने वाले विकसी मामले से थिभन्न विकसी मामले में, विकसी ऐसे विन ा;रण अति कारी द्वारा, Pो संयुक्त आयुक्त की रैंक से नीJे का है, ारा 148 क े अ ीन कोइ; नोविटस ब क Pारी नहीं की Pाएगी Pब क विक संयुक्त आयुक्त को अथिभलिललिt कारणों से समा ान नहीं हो Pा ा है विक ऐसी नोविटस Pारी करने क े लिलए यह एक उपयुक्त मामला है। (3) उप ारा (1) और उप ारा (2) क े प्रयोPनों क े लिलए, यर्थीात्विस्र्थीति, प्र ान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्र ान आयुक्त या आयुक्त या संयुक्त आयुक्त को, ारा 148 क े अ ीन नोविटस Pारी करने क े लिलए मामले mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की उपयुक्त ा क े बारे में विन ा;रण अति कारी द्वारा अथिभलिललिt कारणों से समा ान हो Pाने पर, स्वयं ऐसी नोविटस Pारी करने की आवश्यक ा नहीं है।

3. 1 छ ू ट अति विनयम, 2020 की ारा 3 क े ह विनविह शविक्त क े अनुसरण में, क ें द्र सरकार ने आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 148 क े ह पुनमू;ल्यांकन नोविटस Pारी करने क े लिलए ारा 149 क े ह विन ा;रिर समय सीमा बढ़ाने क े सार्थी-सार्थी विनम्नलिललिt अति सूJनाएं Pारी की: अति सूJना की ति थिर्थी अति विनयम की ारा 148 क े ह नोविटस Pारी करने की मूल सीमा विवस् ारिर सीमा

31.03. 2020 20.03.2020 से 29.06.2020 क 30.06. 2020

24.06. 2020 20.03.2020 से 31.12.2020 क 31.03. 2021 31.03.2021 31.03.2021 30.04.2021 27.04.2021 30.04.2021 30.06.2021 छ ू ट अति विनयम, 2020 की ारा 3 क े ह 31 माJ;, 2021 और 27 अप्रैल, 2021 को Pारी अति सूJनाओं क े स्पष्टीकरण में यह भी विन ा;रिर विकया गया र्थीा विक वे प्राव ान विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा संशो न पहले यर्थीा विवद्यमान रूप में, इसक े ह शुरू की गई पुनमू;ल्यांकन प्रविक्रया पर लागू होंगे। 3.[2] संसद ने आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 147 से 151 में सु ारात्मक परिरव;न विकए, Pो विवत्त अति विनयम, 2021 क े माध्यम से पुनमू;ल्यांकन की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काय;वाही को विनयंवि‘ कर े हैं, सिPसे 28 माJ;, 2021 को पारिर विकया गया र्थीा। विवत्त अति विनयम, 2021 में 01.04.2021 से लागू प्रति स्र्थीाविप ारा 147 से 149 और ारा 151 विनम्नानुसार हैंः विन ा;रण से बJने वाली आय “147. यविद विकसी विन ा;रिर ी क े मामले में कर योग्य कोइ; आय विकसी विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रण से छ ू ट गइ; है, ो विन ा;रण अति कारी, ारा 148 से 153 क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, ऐसी आय का विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण कर सक े गा या ऐसे विन ा;रण वष; क े लिलए हाविन या अवक्षयण भत्ता या विकसी अन्य भत्ते या कटौ ी की पुनः संगणना कर सक े गा (सिPसे इस ारा में और ारा 148 से 153 में इसक े पश्चा ् प्रासंविगक विन ा;रण वष; कहा गया है)। स्पष्टीकरण-इस ारा क े अ ीन विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना क े प्रयोPनों क े लिलए, विन ा;रण अति कारी विकसी ऐसे विवषय क े संबं में, Pो विन ा;रण से छ ू ट गया है, आय का विन ा;रण या पुनर्विन ा;रण कर सक ा है और ऐसा विवषय बाद में इस ारा क े अ ीन काय;वाविहयों क े अनुक्रम में उसकी Pानकारी में आ ा है, इस थ्य क े बावPूद विक ारा 148 क क े उपबं ों का अनुपालन नहीं विकया गया है। Pहां आय विन ा;रण से छ ू ट गई है वहां नोविटस Pारी करना

148. ारा 147 क े अ ीन विन ा;रण, पुनर्विन ा;रण या पुनः संगणना करने से पूव; और ारा 148 क क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, विन ा;रण अति कारी विन ा;रिर ी पर ारा 148 क क े tंड (घ) क े अ ीन, यविद अपेतिक्ष हो, पारिर आदेश की प्रति क े सार्थी एक नोविटस, सिPसमें उससे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ऐसी अवति क े भी र, Pो ऐसी नोविटस में विवविनर्विदष्ट की Pाए, अपनी आय की या विकसी अन्य व्यविक्त की आय की, सिPसक े संबं में वह प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े त्समान पूव;वष; क े दौरान इस अति विनयम क े अ ीन विन ा;रणीय है, विवविह प्रारूप में और विवविह रीति में सत्याविप और ऐसी अन्य विवथिशविष्टयों को उपवर्भिण कर े हुए, Pो विवविह की Pाएं, एक विववरण प्रस् ु करने हे ु Pारी करेगा और इस अति विनयम क े उपबं, Pहां क हो सक े, दनुसार लागू होंगे मानो ऐसा विववरण ारा 139 क े अ ीन प्रस् ु की Pाने वाली अपेतिक्ष विववरण होः बश k इस ारा क े अ ीन कोइ; नोविटस ब क Pारी नहीं की Pाएगी Pब क विक विन ा;रण अति कारी क े पास यह सूJना न हो विक कर योग्य आय प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रिर ी क े मामले में विन ा;रण से छ ू ट गइ; है और विन ा;रण अति कारी ने ऐसी नोविटस Pारी करने क े लिलए विवविनर्विदष्ट प्राति कारी का पूव; अनुमोदन प्रा• कर लिलया है। स्पष्टीकरण 1. –इस ारा और ारा 148 क क े प्रयोPनों क े लिलए विन ा;रण अति कारी क े पास ऐसी Pानकारी विक कर योग्य आय विन ा;रण से छ ू ट गई है, इसका अर्थी; है - (i) बोड; द्वारा समय-समय पर ैयार की गई Pोलिtम प्रबं न रणनीति क े अनुसार प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रिर ी क े मामले में दी गई कोई Pानकारी (ii) भार क े विनयं‘क और महालेtापरीक्षक द्वारा इस आशय की उठाई गई अंति म आपलित्त विक प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए विन ा;रिर ी क े मामले mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA में विन ा;रण इस ारा क े उपबं ों क े अनुसार नहीं विकया गया है। स्पष्टीकरण 2.—इस ारा क े प्रयोPनों क े लिलए, Pहां— (i) विकसी विन ा;रिर ी क े मामले में ारा 132 या tा ा बही क े ह एक tोP शुरू की Pा ी है, अन्य दस् ावेPों या विकसी संपलित्त का अति ग्रहण ारा 132 ए क े ह, 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विकया Pा ा है;या (ii) विकसी विन ा;रिर ी क े मामले में 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद उस ारा की उप- ारा (2 क) या उप- ारा (5) क े ह क े अलावा ारा 133 क क े ह एक सवkक्षण विकया Pा ा है; या (iii) विन ा;रण अति कारी को प्र ान आयुक्त या आयुक्त क े पूव; अनुमोदन से यह समा ान हो Pाए विक 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विकसी अन्य व्यविक्त क े मामले में ारा 132 या ारा 132 क क े ह अथिभगृही या अध्यपेतिक्ष कोई न, सोना-Jांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस् ु या JीP विन ा;रिर ी की है; या (iv) विन ा;रण अति कारी को प्र ान आयुक्त या आयुक्त क े पूव; अनुमोदन से यह समा ान हो Pाए विक 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विकसी अन्य व्यविक्त क े मामले में ारा 132 या ारा 132 क क े अ ीन अथिभगृही या अध्यपेतिक्ष लेtा बविहयां या दस् ावेP विन ा;रिर ी से संबंति हैं या उनमें अं र्विवष्ट विकसी सूJना से संबंति हैं, ो विन ा;रण अति कारी क े बारे में यह समझा Pाएगा विक उसक े पास ऐसी सूJना है सिPससे यह प ा Jल ा है विक कर योग्य आय उस पूव;वष; से ठीक पहले क े ीन विन ा;रण वष” क े लिलए, सिPसमें PाँJ आरंभ की Pा ी है या tा े की बविहयां, अन्य दस् ावेP या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आत्विस् यां अध्यपेतिक्ष की Pा ी हैं या सवkक्षण विकया Pा ा है, सुसंग विन ा;रण वष; क े ठीक पूव;व $ ीन विन ा;रण वष” क े लिलए विन ा;रिर ी क े मामले में विन ा;रण से छ ू ट गई है। स्पष्टीकरण 3. –इस ारा क े प्रयोPनों क े लिलए, विवविनर्विदष्ट प्राति कारी से ारा 151 में विनर्विदष्ट विवविनर्विदष्ट प्राति कारी अथिभप्रे है।” ारा 148 क े ह नोविटस Pारी करने से पहले PांJ करना, अवसर प्रदान करना “148 क. विन ा;रण अति कारी, ारा 148 क े अ ीन कोई नोविटस Pारी करने से पूव;, – (क) ऐसी नोविटस क े संबं में, यविद आवश्यक हो, विवविनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन से कोई PांJ कर सक ा है, सिPससे प ा Jल ा हो विक कर योग्य आय विन ा;रण से छ ू ट गई है; (t) विवविनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन से उस पर कारण ब ाओ नोविटस की ामील करक े, Pो नोविटस में विवविनर्विदष्ट विकया Pाए, विन ा;रिर ी को सुने Pाने का अवसर प्रदान करेगा, Pो उस ारीt से, सिPसको ऐसी नोविटस Pारी की Pा ी है, कम से कम सा विदन और किंक ु ीस विदन से अति क न हो, या ऐसा समय हो, Pो उसक े द्वारा इस विनविमत्त आवेदन क े आ ार पर विवस् ारिर विकया Pाए विक tंड (क) क े अनुसार PाँJ, यविद कोई हो, क े परिरणामस्वरूप ऐसी सूJनाएं Pो इस बा का संक े दे ी हैं विक कर योग्य आय संबंति विन ा;रण वष; क े लिलए उसक े मामले में आकलन से बJ गई है को आ ार पर ारा 148 क े अ ीन नोविटस क्यों न Pारी की Pाए; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ग) tंड (t) में विनर्विदष्ट कारण ब ाओ नोविटस क े उत्तर में विन ा;रिर ी द्वारा विदए गए उत्तर पर, यविद कोइ; हो,पर विवJार कर सक े गा (घ) यह विनण;य कर सक े गा विक ारा 148 क े अ ीन उस मास क े अं से, सिPसमें tंड (ग) में विनर्विदष्ट उत्तर उसे प्रा• हो ा है, एक मास क े भी र, सिPसमें tंड (t) क े अनुसार उत्तर प्रस् ु करने क े लिलए अनुज्ञा समय समा• हो ा है, ारा 148 क े अ ीन नोविटस Pारी करना उतिJ मामला है या नहीं: बश k इस ारा क े उपबं ऐसे मामले में लागू नहीं होंगे Pहां, – (क) 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विन ा;रिर ी क े मामले में ारा 132 क े अ ीन PाँJ आरंभ की Pा ी है या ारा 132 क क े अ ीन लेtा बविहयों, अन्य दस् ावेPों या विकन्हीं आत्विस् यों की अध्यपेक्षा की Pा ी है; या (t) विन ा;रण अति कारी को प्र ान आयुक्त या आयुक्त क े पूव; अनुमोदन से यह समा ान हो Pा ा है विक 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विकसी अन्य व्यविक्त क े मामले में ारा 132 क े अ ीन PाँJ में अथिभगृही या ारा 132 क क े अ ीन अध्यपेतिक्ष कोइ; न, सोना-Jांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस् ु या JीP विन ा;रिर ी की है; या (ग) विन ा;रण अति कारी को प्र ान आयुक्त या आयुक्त क े पूव; अनुमोदन से यह समा ान हो Pा ा है विक 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद विकसी अन्य व्यविक्त क े मामले में ारा 132 क े अ ीन PाँJ में अथिभगृही या ारा 132 क क े अ ीन अध्यपेतिक्ष कोइ; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लेtा बही, दस् ावेP विन ा;रिर ी क े हैं, या उसमें विनविह कोई सूJना विन ा;रिर ी से संबंति है। स्पष्टीकरण-इस ारा क े प्रयोPनों क े लिलए, विवविनर्विदष्ट प्राति कारी से ारा 151 में विनर्विदष्ट विवविनर्विदष्ट प्राति कारी अथिभप्रे है। नोविटस Pारी करने की समय सीमा “149. (1) प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए ारा 148 क े ह कोई नोविटस Pारी नहीं की Pाएगी, - (क) यविद प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से ीन वष; बी गए हैं, Pब क विक मामला tंड (t) क े अं ग; नहीं आ ा हो; (t) यविद प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से ीन वष;, किंक ु दस वष; से अति क नहीं बी गए हैं, Pब क विक विन ा;रण अति कारी क े पास अपनी लेtा बविहयां या अन्य दस् ावेP या साक्ष्य नहीं हैं, Pो यह प्रकट कर े हों विक कर योग्य आय आत्विस् क े रूप में है, Pो उस वष; क े लिलए विन ा;रण से छ ू ट गई है, पJास लाt रुपए है या उससे अति क की रकम की होने की संभावना हैः बश k 1 अप्रैल, 2021 को या उससे पहले प्रारंभ होने वाले प्रासंविगक विन ा;रण वष; क े लिलए विकसी मामले में ारा 148 क े अ ीन विकसी भी समय कोई नोविटस Pारी नहीं की Pाएगी, यविद इस ारा की उप ारा (1) क े tंड (t) क े उपबं ों क े अ ीन विवविनर्विदष्ट समय सीमा से अति क होने क े कारण उस समय ऐसी नोविटस Pारी नहीं की Pा सक ी र्थीी, Pैसा विक वे विवत्त अति विनयम, 2021 क े प्रारंभ से ठीक पहले र्थीे: mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बश k यह और विक इस ारा क े उपबं ऐसे मामले में लागू नहीं होंगे, Pहां ारा 153 क या ारा 153 ग सपविठ ारा ारा 153 क क े अ ीन सूJना 31 माJ;, 2021 को या उससे पूव; ारा 132 क े अ ीन आरंभ की गइ; PाँJ या ारा 132 क क े अ ीन अध्यपेतिक्ष लेtा बविहयों, अन्य दस् ावेPों या विकन्हीं आत्विस् यों क े संबं में Pारी की Pानी अपेतिक्ष हैः बश k यह भी विक इस ारा क े अनुसार परिरसीमा अवति की संगणना आदेश क े प्रयोPनों क े लिलए ारा 148 क क े tंड (t) क े अ ीन Pारी कारण ब ाओ नोविटस क े अनुसार या विकसी न्यायालय क े आदेश या व्यादेश द्वारा ारा 148 क क े अ ीन काय;वाही पर रोक लगाने की अवति क े अनुसार विन ा;रिर ी को अनुज्ञा समय या विवस् ारिर समय को अपवर्जिP विकया Pाएगाः बश k यह भी विक Pहां ठीक पूव;व $ परं ुक में विनर्विदष्ट अवति क े अपवP;न क े पश्चा ् ारा 148 क क े tंड (घ) क े अ ीन आदेश पारिर करने क े लिलए विन ा;रण अति कारी को उपलब् परिरसीमा की अवति सा विदन से कम है, वहां ऐसी शेष अवति सा विदन क बढ़ा दी Pाएगी और इस उप ारा क े अ ीन परिरसीमा की अवति दनुसार विवस् ारिर समझी Pाएगी। स्पष्टीकरण-इस उप ारा क े tंड (t) क े प्रयोPनों क े लिलए '' आत्विस् '' में अJल संपलित्त, Pो भूविम या भवन या दोनों हैं, शेयर और प्रति भूति यां, ऋण और अविग्रम, बैंक tा े में Pमा शाविमल होंगे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) नोविटस Pारी करने क े बारे में उप ारा (1) क े उपबं, ारा 151 क े उपबं ों क े अध्य ीन होंगे। नोविटस Pारी करने क े लिलए मंPूरी

“151. ारा 148 और ारा 148 क के प्रयोPनों के लिलए विवविनर्विदष्ट
प्राति कारी होगा -
(i) प्र ान आयुक्त या प्र ान विनदेशक या आयुक्त या विनदेशक, यविद प्रासंविगक विन ा;रण वष; के अं से ीन वष; या ीन वष; से कम बी गए हैं
(ii) प्र ान मुख्य आयुक्त या प्र ान महाविनदेशक या Pहां कोई प्र ान मुख्य आयुक्त या प्र ान महाविनदेशक न हो, मुख्य आयुक्त या महाविनदेशक, यविद प्रासंविगक विन ा;रण वष; की समावि• से ीन वष; से अति क बी गए हैं।
3.[3] आयकर अति विनयम की ारा 151 ए की उप- ारा (1) में, आरंथिभक विहस्से में “ ारा 148 क े ह नोविटस Pारी करना” शब्दों क े बाद,” या PाँJ विकया Pाना या कारण ब ाओ नोविटस Pारी करना या ारा 148 ए क े ह आदेश पारिर करना” शब्दों को शाविमल विकया गया है।

4. आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 147 से 151 का विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा प्रस्र्थीापन क े 1 अप्रैल, 2021 को प्रभाव में आने क े बावPूद, विवद्वान एएसPी क े अनुसार, राPस्व विवभाग ने 31 माJ;, 2021 और 27 अप्रैल, 2021 की अति सूJनाओं में स्पष्टीकरण क े आ ार पर पूव;व $ ारा 148 से 151 क े ह संबंति करदा ाओं को लगभग 90,000 पुनमू;ल्यांकन नोविटस Pारी विकए। उक्त पुनमू;ल्यांकन नोविटस विवथिभन्न उच्च न्यायालयों क े समक्ष रिरट यातिJकाओं का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवषय र्थीा। संबंति उच्च न्यायालयों ने माना है विक आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 148 से 151 क े ह Pारी विकए गए सभी संबंति पुनमू;ल्यांकन नोविटस कानून क े लिलहाP से गल हैं क्योंविक 01.04.2021 क े बाद Pारी विकए गए पुनमू;ल्यांकन नोविटस विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा प्रति स्र्थीाविप आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 147 से 151 द्वारा शासिस हैं। न ीP न, संबंति उच्च न्यायालयों ने आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 148 क े ह Pारी विकए गए सभी पुनमू;ल्यांकन नोविटसों को रद्द कर विदया है ।इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर सामान्य विनण;य और आदेश व;मान अपीलों का विवषय है।हालांविक, विदल्ली उच्च न्यायालय ने संबंति पुनमू;ल्यांकन नोविटसों को रद्द कर े हुए 15.12.2021 को अपने समान विनण;य और आदेश में यह भी कहा है विक यविद कानून राPस्व को इस मामले में आगे कदम उठाने की अनुमति दे ा है ो वे ऐसा करने क े लिलए स्व ं‘ होंगे।

5. हमने राPस्व की ओर से उपत्विस्र्थी विवद्वान एएसPी श्री एन. वेंकटरमन और संबंति विन ा;रिर ी की ओर से उपत्विस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री सी.ए. सुंदरम और श्री एस. गणेश को सुना है।

6. इसमें विववाद नहीं हो सक ा है विक विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा आयकर अति विनयम (आईटी अति विनयम) की ारा 147 से 151 क े प्रस्र्थीापन से, पुनमू;ल्यांकन की प्रविक्रया को विनयंवि‘ करने क े लिलए मौलिलक और सु ारात्मक परिरव;न विकए गए हैं। आयकर अति विनयम की संशोति ारा 147 से 149 और ारा 151 में पुनमू;ल्यांकन की प्रविक्रया शुरू करने की प्रविक्रया विन ा;रिर की गई है। हालांविक, कई कारणों से, इससे कई मुकदमें सामने आए और इन्हें विफर से tोलने को अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी विनम्न आ ार पर Jुनौ ी दी गई, Pैसे (1) “विवश्वास करने का कोई वै कारण” नहीं है (2) विन ा;रण अति कारी क े पास कोई mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मू;/विवश्वसनीय सामग्री/Pानकारी नहीं है सिPससे यह विवश्वास पैदा हुआ विक आय मूल्यांकन से बJ गई है, (3) नोविटस Pारी करने से पहले विन ा;रण अति कारी द्वारा कोई PांJ नहीं की Pा रही है; विन ा;रण अति कारी और विफर से tोलना विन ा;रण अति कारी की राय में बदलाव पर आ ारिर है और (4) अं में इस न्यायालय द्वारा Pीक े एन ड्राइवशाफ्ट्स (इंतिडया) लिलविमटेड बनाम आयकर अति कारी और अन्य (2003) 1 एससीसी 72, क े मामले में विवविह अविनवाय; प्रविक्रया का पालन नहीं विकया गया है। 6.[1] आगे, विवत्त अति विनयम, 2021,क े अनुसार, अति क म छह वष; क की अवति क े लिलए और क ु छ मामलों में छह वष; से भी अति क की अवति क े लिलए विफर से tोलने की अनुमति र्थीी, सिPससे काफी समय क अविनतिश्च ा बनी रही। इसलिलए, संसद ने कर प्रशासन को सरल बनाने, अनुपालन को आसान बनाने और मुकदमेबाPी को कम करने क े लिलए आयकर अति विनयम में संशो न करना उतिJ समझा। अ ः, उक्त उद्देश्य को प्रा• करने की दृविष्ट से, विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा ारा 147 से 149 और ारा 151 को प्रति स्र्थीाविप विकया गया है। 6.[2] विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा आईटी अति विनयम क े प्रति स्र्थीाविप प्राव ानों क े ह, आईटी अति विनयम की ारा 148 क े ह आईटी अति विनयम की ारा 148 क क े ह विन ा;रिर प्रविक्रया का पालन विकए विबना कोई नोविटस Pारी नहीं की Pा सक ी है। आईटी अति विनयम की ारा 148, क े ह दी गयी नोविटस क े सार्थी विन ा;रण अति कारी (एओ) से आईटी अति विनयम की ारा 148 क क े ह पारिर आदेश की ामील करना अपेतिक्ष है। आईटी अति विनयम की ारा 148 क एक नया प्राव ान है Pो एक श; की प्रक ृ ति का है Pो पूव; श; है। इस प्रकार आयकर अति विनयम की ारा 148 क को कर प्रशासन को सरल बनाने, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुपालन को आसान बनाने और मुकदमेबाPी को कम करने क े अंति म उद्देश्य को प्रा• करने क े लक्ष्य की विदशा में एक गेम JेंPर कहा Pा सक ा है। 6.[3] लेविकन पूव;-विवत्त अति विनयम, 2021 से पहले, विकसी आकलन को विफर से tोल े समय, विफर से tोले Pाने क े लिलए कारण देने की प्रविक्रया और विन ा;रिर ी को एक अवसर और Pीक े एन ड्राइवशाफ्ट्स (इंतिडया) लिलविमटेड (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय क े फ ै सले उद्देश्यों का पालन करना आवश्यक र्थीा। 6.[4] र्थीाविप, ारा 148 क क े माध्यम से, प्रविक्रया को अब सुव्यवत्विस्र्थी और सरल बनाया गया है। इसमें प्राव ान विकया गया है विक ारा 148 क े ह कोई भी नोविटस Pारी करने से पहले, विन ा;रण अति कारी (i) यविद आवश्यक हो, ो विवथिशष्ट प्राति कारी क े अनुमोदन से ऐसी सूJना क े संबं में PाँJ करेगा सिPससे लग ा है विक कर योग्य आय मूल्यांकन से बJ गयी है। (ii) विनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन से विन ा;रिर ी को सुनवाई का अवसर देगा। (iii) ारा (बी) में उसिल्ललिt कारण ब ाओ नोविटस क े Pवाब में प्रस् ु विकए गए विन ा;रिर ी क े उत्तर, यविद कोई हो, पर विवJार करेगा। और (iv) करदा ा क े उत्तर सविह अथिभलेt पर उपलब् सामग्री क े आ ार पर विनण;य करेगा विक क्या यह आयकर अति विनयम की ारा 148 क े ह नोविटस Pारी करने क े लिलए यह उपयुक्त मामला है या नहीं, और (v) एओ विन ा;रिर समय क े भी र एक विवथिशष्ट आदेश पारिर करेगा। 6.[5] इसलिलए, आईटी अति विनयम की ारा 148 क े ह नोविटस Pारी करने से पहले सभी सुरक्षा उपाय प्रदान विकए Pा े हैं। ारा 148 क (क) क े अनुसार PांJ करने क े लिलए भी प्रत्येक Jरण में विनर्विदष्ट प्राति कारी की पूव; अनुमति की आवश्यक ा हो ी है। क े वल ऐसे मामले में, Pहां विन ा;रण अति कारी की राय है विक ारा 148 क (t) क े ह कोई भी नोविटस Pारी करने से पहले विन ा;रिर ी को एक अवसर विदया Pाना Jाविहए, PांJ करने की आवश्यक ा होने पर, विन ा;रण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति कारी ऐसा कर सक ा है और कोई भी PांJ कर सक ा है। इस प्रकार, यविद विन ा;रण अति कारी की राय है विक विकसी PांJ की आवश्यक ा है, ो विन ा;रण अति कारी ऐसा कर सक ा है। लेविकन कर योग्य आय क े विन ा;रण से बJने की सूJना क े संबं में विवविनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन क े सार्थी। 6.[6] प्रति स्र्थीाविप ारा 149 सूJना प्रौद्योविगकी अति विनयम की ारा 148 क े अ ीन नोविटस Pारी करने की समय-सीमा को शासिस करने वाला उपबं है। इसमें उन अति रिरक्त सुरक्षा उपायों का भी प्राव ान विकया गया है, Pो पहले की व्यवस्र्थीा पूव; विवत्त अति विनयम, 2021 क े ह अनुपत्विस्र्थी र्थीे।

7. इस प्रकार, विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा प्रति स्र्थीाविप नए प्राव ान उपJारात्मक और उदार प्रक ृ ति क े हैं और विन ा;रिर ी क े अति कारों और विह क े सार्थी-सार्थी Pनविह में होने क े कारण, संबंति उच्च न्यायालयों ने उतिJ रूप से कहा है विक नए प्राव ानों का लाभ विपछले विन ा;रण वष” से संबंति काय;वाही क े संबं में भी उपलब् कराया Pाएगा, बश k विक ारा 148 का नोविटस 1 अप्रैल, 2021 को या उसक े बाद Pारी विकया गया हो। ऐसा अथिभविन ा;रिर करने में विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा अपनाए गए दृविष्टकोण से हम पूरी रह सहम हैं।

8. हालांविक, इसक े सार्थी ही, कई उच्च न्यायालयों क े फ ै सलों क े परिरणामस्वरूप कोई पुनमू;ल्यांकन काय;वाही नहीं होगी, भले ही विवत्त अति विनयम, 2021 और आईटी अति विनयम की ारा 147 से 151 क े ह इसकी अनुमति दी गई हो। राPस्व को विबना भरपाई नहीं छोड़ा Pा सक ा और पुनमू;ल्यांकन काय;वाविहयों क े उद्देश्य को रोका नहीं Pा सक ा। यह सही है विक एक वास् विवक गल ी क े कारण और विवथिभन्न अति सूJनाओं क े माध्यम से समय क े बाद विवस् ार क े मद्देनPर, राPस्व विवभाग ने 01.04.2021 से संशो न लागू होने क े बाद ारा असंशोति ारा 148 क े ह ारा 148 क े आक्षेविप नोविटस Pारी विकए। हमारी राय में mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नोविटस असंशोति अति विनयम क े ह Pारी नहीं विकए Pाने र्थीे और इन्हें विवत्त अति विनयम, 2021 क े अनुसार आईटी अति विनयम की प्रस्र्थीाविप ारा 147-151 क े ह Pारी विकया Pाना Jाविहए र्थीा। ऐसा प्र ी हो ा है विक संशो नों को वास् विवक रूप से लागू नहीं विकया गया है क्योंविक राPस्व अति कारिरयों को यह विवश्वास रहा हो सक ा है विक संशो न अभी क नहीं विकए गए हैं। इसलिलए, हमारी राय है विक इस संबं में क ु छ छ ू ट दी Pानी Jाविहए Pो उच्च न्यायालय ऐसा कर सक े र्थीे। इसलिलए, आईटी अति विनयम क े असंशोति प्राव ान क े ह Pारी विकए गए पुनमू;ल्यांकन नोविटसों को रद्द और विनरस् करने क े बPाय, उच्च न्यायालयों को असंशोति अति विनयम/आईटी अति विनयम क े असंशोति प्राव ान क े ह Pारी विकए गए नोविटसों का अर्थी; नए प्राव ान ारा 148 क क े अनुसार आईटी अति विनयम की ारा 148 क क े ह Pारी विकए गए समझने क े लिलए एक आदेश पारिर करना Jाविहए र्थीा, और राPस्व को विवत्त अति विनयम, 2021 क े अनुसार आईटी अति विनयम की ारा 147 से 151 क े प्रति स्र्थीाविप प्राव ानों क े ह पुनमू;ल्यांकन काय;वाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी Pानी Jाविहए र्थीी, Pो सभी प्रविक्रयात्मक अपेक्षाओं और बJाव क े अनुपालन क े अध्य ीन हो ी, Pो आईटी अति विनयम की ारा 147 से 151 क े प्रति स्र्थीाविप प्राव ानों क े ह विन ा;रिर ी को उपलब् हो सक ी है और Pो विवति क े अनुसार विवत्त अति विनयम, 2021 क े ह उपलब् हो सक े हैं। इसलिलए, हम संबंति उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर विनण;यों और आदेशों को विनम्नलिललिt रूप में संशोति करने का प्रस् ाव कर े हैंः (i) संबंति करदा ाओं को Pारी संबंति ारा 148 क े नोविटस को विवत्त अति विनयम, 2021 द्वारा प्रति स्र्थीाविप आईटी अति विनयम की ारा 148 क क े ह Pारी विकया गया माना Pाएगा और ारा 148 क (t) क े संदभ; में कारण ब ाओ नोविटस माना Pाएगा। संबंति विन ा;रण अति कारी आP से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ीस विदन क े भी र करदा ाओं को वह Pानकारी और सामग्री उपलब् कराएंगे, सिPसका राPस्व ने अवलंब लिलया है, ाविक करदा ा दो स•ाह क े भी र इन नोविटसों का Pवाब दे सक ें; (ii) ारा 148 क (क) क े ह विनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन से कोई भी PांJ करने की आवश्यक ा को असंशोति अति विनयम की ारा 148 क े ह 01.04.2021 से अब क Pारी विकए गए नोविटस क े संबं में एक बार क े उपाय क े रूप में समा• कर विदया Pाना Jाविहए, सिPसमें उच्च न्यायालयों द्वारा रद्द विकए गए नोविटस भी शाविमल हैं; (iii) इसक े बाद विन ा;रण अति कारी विन ा;रिर प्रविक्रया का पालन कर े हुए ारा 148 क (घ) क े संदभ; में प्रत्येक विन ा;रिर ी क े संबं में आदेश पारिर करेंगे; (iv) ारा 149 क े ह विन ा;रिर ी को उपलब् सभी बJाव और/या Pो विवत्त अति विनयम, 2021 क े ह और कानून में उपलब् हो सक े हैं और विवत्त अति विनयम, 2021 क े ह मूल्यांकन अति कारी को Pो भी अति कार उपलब् हैं, उन्हें tुला रtा Pाएगा और/या उपलब् रहना Pारी रहेगा; (v) व;मान आदेश संबंति उच्च न्यायालयों द्वारा असंशोति आईटी अति विनयम की ारा 148 क े ह Pारी विकए गए समान नोविटसों को रद्द करने वाले संबंति विनण;यों और आदेशों को प्रति स्र्थीाविप /संशोति करेगा, भले ही उन्हें इस न्यायालय क े समक्ष Jुनौ ी दी गयी हो या नही।

9. राPस्व की ओर से उपत्विस्र्थी विवद्वान एएसPी और संबंति विन ा;रिरति यों की ओर से उपत्विस्र्थी विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ताओं/विवद्वान अति वक्ताओं क े बीJ उपरोक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पहलुओं पर एक व्यापक सहमति है। हमारी भी यह राय है विक यविद पूव क्त आदेश पारिर विकया Pा ा है, ो यह राPस्व क े अति कारों क े सार्थी-सार्थी संबंति करदा ाओं क े बीJ सं ुलन स्र्थीाविप करेगा क्योंविक राPस्व क े अति कारिरयों क े लगभग 90,000 ऐसी नोविटस Pारी करने कारण राPस्व को नुकसान नहीं होना Jाविहए क्योंविक अं ः सरकारी tPाने को नुकसान होगा। इसलिलए, हमने इस न्यायालय क े समक्ष और अपील दायर करने से बJने और विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर समान विनण;यों और आदेशों क े लिtलाफ लगभग 9000 अपीलों क े बोझ से इस न्यायालय को बJाने की दृविष्ट से व;मान आदेश पारिर आदेश का प्रस् ाव विकया है, सिPनमें से क ु छ का विववरण इसमें ऊपर विदया गया है। हमने भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 142 क े ह अपनी शविक्तयों का उपयोग कर े हुए उपरोक्त आदेश पारिर करने का भी प्रस् ाव विकया है, सिPसमें कहा गया है विक व;मान आदेश न क े वल इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण;यों और आदेशों को विनयंवि‘ करेगा, बत्विल्क इसे देश क े सभी उच्च न्यायालयों द्वारा इसी रह क े विनण;यों और आदेशों क े संबं में भी लागू विकया Pाएगा और इसलिलए व;मान आदेश पूरे भार में लागू होगा।

10. उपयु;क्त को ध्यान में रt े हुए और उपयु;क्त कारणों से व;मान अपीलों को अंश ः अनुज्ञा विकया गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा डब्ल्यूटी संख्या 524/2021 और अन्य संबद्ध कर अपीलों/यातिJकाओं में पारिर आम विनण;यों और आदेशों को ए दद्वारा संशोति विकया Pा ा है और विनम्नानुसार प्रति स्र्थीाविप विकया Pा ा है: (i) आयकर अति विनयम की असंशोति ारा 148 क े ह संबंति करदा ाओं को Pारी विकए गए आक्षेविप ारा 148 नोविटस, Pो विवथिभन्न संबंति उच्च न्यायालयों क े समक्ष रिरट यातिJकाओं का विवषय र्थीे, को विवत्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति विनयम, 2021 द्वारा प्रति स्र्थीाविप आईटी अति विनयम की ारा 148 क क े ह Pारी विकया गया माना Pाएगा और ारा 148 क (t) क े संदभ; में कारण ब ाओ नोविटस माना Pाएगा। विन ा;रण अति कारी आP से ीस विदन क े भी र संबंति करदा ा को अवलंविब सूJना और सामग्री उपलब् कराएगा, ाविक करदा ा कारण ब ाओ नोविटस का Pवाब दो स•ाह क े भी र दे सक ें; (ii) ारा 148 क (क) क े ह विनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन क े सार्थी, यविद आवश्यक हो, ो कोई भी PांJ करने की आवश्यक ा को असंशोति अति विनयम की ारा 148 क े ह 01.04.2021 से लेकर अब क Pारी विकए गए उन नोविटसों क े सार्थी उच्च न्यायालयों द्वारा रद्द विकए गए नोविटसों क े लिलए एक बार क े उपाय क े रूप में छोड़ विदया Pा ा है। वैसे अन्यर्थीा भी, Pैसा ऊपर कहा गया है, विनर्विदष्ट प्राति कारी क े पूव; अनुमोदन से कोई PांJ करना अविनवाय; नहीं है, लेविकन यविद आवश्यक हो ो संबंति विन ा;रण अति कारी PांJ कर ा है; (iii) इसक े बाद विन ा;रण अति कारी प्रत्येक संबंति करदा ा क े संबं में ारा 148 क (घ) क े संदभ; में आदेश पारिर करेंगे और इसक े बाद ारा 148 क क े ह आवश्यक प्रविक्रया का पालन करने क े बाद ारा 148 (यर्थीा प्रस्र्थीाविप ) क े ह नोविटस Pारी कर सक े हैं; (iv) आयकर अति विनयम की ारा 149 क े ह विन ा;रिर ी को उपलब् सभी बJाव और विवत्त अति विनयम, 2021 क े ह संबंति विन ा;रिर ी और राPस्व क े लिलए उपलब् सभी अति कार और दलीलें Pारी रहेंगी।

11. व;मान आदेश पूरे भार में लागू होगा और इस मुद्दे पर विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर सभी विनण;य और आदेश सिPनमें अति विनयम की ारा 148 क े अन् ग; 01.04.2021 क े बाद Pारी विकए गए इसी रह क े नोविटस को mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपास् कर विदया गया है, अपास् विकए Pा े हैं और व;मान आदेश द्वारा शासिस होंगे और उपरोक्त सीमा क संशोति होंगे। व;मान आदेश भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 142 क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए पारिर विकया गया है, ाविक इसी रह क े विनण;यों और आदेशों को Jुनौ ी देने वाले राPस्व विवभाग की अपीलों से बJा Pा सक े, ाविक इस न्यायालय पर लगभग 9000 अपीलों का बोझ न पड़े। हम यह भी विटप्पणी कर े हैं विक व;मान आदेश विवथिभन्न उच्च न्यायालयों क े समक्ष लंविब रिरट यातिJकाओं को भी शासिस करेगा सिPसमें अति विनयम की ारा 148 क े ह 01.04.2021 क े बाद Pारी इसी रह क े नोविटस को Jुनौ ी दी Pा रही है।

12. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप सामान्य विनण;य और आदेश र्थीा विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर ऐसे ही विनण;य और आदेश, विवशेष रूप से विवथिभन्न उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर ऐसे संबंति विनण;य और आदेश, सिPनका विववरण ऊपर विदया गया है, को क े वल पूव क्त सीमा क संशोति /प्रति स्र्थीाविप विकया Pाएगा। दनुसार, इन सभी अपीलों को उपयु;क्त सीमा क आंथिशक रूप से अनुमति दी Pा ी है। मामले क े थ्यों क े दृविष्टग, लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा।........................................ (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह)........................................ (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई विदल्ली 4 मई, 2022 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA