Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 3656/2022
(विवशेष अनुमति याति)का (सी) संख्या 20919/2021 से उत्पन्न)
भार संघ और अन्य ...... अपीलार्थी4 (गण)
बनाम
नवनी क
ु मार ...... प्रत्यर्थी4 (गण)
विनण8य
न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
1. न्यातियक सदस्य, क ें द्रीय प्रशासविनक न्यायाति करण क े रूप में विनयुविD की अवति को एक और काय8काल क े लिलए बढ़ाने क े प्रति वादी क े अनुरो को विदनांक 11.10.2019 को क ै विबनेट की विनयुविD सविमति (संक्षेप में "एसीसी") द्वारा खारिरज कर विदया गया र्थीा। विदनांक 24.10.2019 को प्रति वादी को सूति) विकया गया र्थीा। प्रति वादी द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ क े समक्ष एक रिरट याति)का दायर की गई र्थीी, जिजसे उच्च न्यायालय ने 27.08.2021 को अनुमति दी र्थीी। इस प्रकार, अपीलक ा8 द्वारा यह अपील उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनण8य की सत्य ा पर सवाल उठा े हुए दायर की गई है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. प्रासंविगक थ्यों का उल्लेख करना आवश्यक है जिजनक े कारण इस अपील को दायर विकया गया है। विदनांक 19.05.2011 को, प्रति वादी को क ें द्रीय प्रशासविनक न्यायाति करण क े न्यातियक सदस्य क े रूप में विनयुD करने क े लिलए सक्षम प्राति कारी द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा। प्रति वादी को विदनांक 30.05.2011 को प्रभार ग्रहण करने की ारीख से पां) साल की अवति क े लिलए या 65 वष[8] की आयु प्राप्त करने क, जो भी पहले हो, न्यातियक सदस्य क े रूप में विनयुD विकया गया र्थीा। उन्होंने विदनांक 28.6.2011 को न्यातियक सदस्य, क न्यायाति करण, कोलका ा पीठ क े रूप में काय8भार संभाला। 2013 में उनक े अनुरो पर प्रति वादी को क ें द्रीय प्रशासविनक न्यायाति करण की लखनऊ पीठ में स्र्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा। विदनांक 21 मा)8 2014 क े संशो न क े माध्यम से विनयम 9 और 10 को प्रशासविनक न्यायालय (सदस्यों की विनयुविD की प्रवि_या ) विनयम, 2011 (संतिक्षप्त रूप से "विनयम 2011") में डाला गया र्थीा। विनयम 9 क ें द्रीय प्रशासविनक न्यायाति करण क े सदस्य की विनयुविD की अवति क े विवस् ार से संबंति है।
3. प्रति वादी द्वारा विदनांक 21.12.2015 को एक अभ्यावेदन विदया गया र्थीा जिजसमें 2011 क े विनयमों क े अनुसार क े न्यातियक सदस्य क े रूप में अपने काय8काल क े विवस् ार का अनुरो विकया गया र्थीा। क ें द्रीय े अध्यक्ष ने विदनांक 21.12.2015 क े एक पत्र द्वारा प्रति वादी क े काय8काल क े विवस् ार क े लिलए कार्मिमक और प्रशिशक्षण विवभाग (संक्षेप में "डीओपीटी") को एक प्रस् ाव भेजा। क े न्द्रीय प्रशासविनक न्यायाति करण क े अध्यक्ष का प्रस् ाव इंटेलिलजेंस ब्यूरो से प्राप्त रिरपोट[8] क े सार्थी विदनांक 19.02.2016 को )यन सविमति क े समक्ष रखा गया। इस न्यायालय क े एक काय8र न्याया ीश की अध्यक्ष ा वाली )यन सविमति ने प्रति वादी क े काय8काल को बढ़ाने की जिसफारिरश Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds की। उD जिसफारिरश को विदनांक 08.03.2016 को भार क े माननीय मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा।
4. विदनांक 01.06.2016 को एसीसी ने डीओपीटी से अनुरो विकया विक वह अति रिरD सामग्री क े प्रकाश में प्रति वादी क े प्रस् ाव की विफर से जां) करे। डीओपीटी ने अपनी विटप्पणी प्रस् ु की और उसक े बाद एसीसी ने विदनांक 06.03.2017 को प्रति वादी क े विवस् ार का प्रस् ाव वापस कर विदया। एसीसी का विनण8य )यन सविमति क े समक्ष रखा गया र्थीा जिजसकी अध्यक्ष ा विदनांक 11.03.2017 को इस न्यायालय क े एक न्याया ीश ने की र्थीी। )यन सविमति ने े प्रस् ाव को वापस करने क े लिलए एसीसी क े विनण8य पर ध्यान विदया, और जिसफारिरश की विक मौजूदा रिरविDयों को अगले रिरविD वष[8] यानी 2017 क आगे बढ़ाया जाए।)यन सविमति क े विनण8य को भार क े मुख्य न्याया ीश ने विदनांक 06.04.2017 को अनुमोविद विकया र्थीा।डीओपीटी क े पत्र 12.04.2017 विदनांविक द्वारा क े अध्यक्ष को )यन सविमति क े विनण8य क े बारे में सूति) विकया, जिजसे भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा। सविमति ने जिसफारिरश की विक दोनों रिरविDयों को अगले वष[8] यानी 2017 क आगे बढ़ाया जा सक ा है।
5. प्रति वादी ने एक रिरट याति)का दायर की, जिजसमें अपीलक ा8ओं को प्रशासविनक न्यायाति करण अति विनयम, 1985 की ारा 6 (3) क े अनुसार अपने काय8काल क े विवस् ार क े लिलए विनयुविD आदेश जारी करने का विनदiश देने की मांग की गई। उच्च न्यायालय ने विदनांक 08.05.2019 क े एक विनण8य द्वारा उD रिरट याति)का को स्वीकार विकया और अपास् कर विदया: (i) ) आदेश विदनांक 06.03.2017 जिजसक े द्वारा प्रति वादी को सूति) विकया गया र्थीा विक एसीसी ने प्रति वादी क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवस् ार क े प्रस् ाव को वापस कर विदया है; और (i) i) ) आदेश विदनांक 12.04.2017 जिजसक े द्वारा डीओपीटी ने क े अध्यक्ष को )यन सविमति क े विनण8य क े बारे में सूति) विकया जिजसे भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा।उच्च न्यायालय ने आगे एसीसी को )यन सविमति की जिसफारिरशों पर विनण8य लेने और 4 महीने की अवति क े भी र उति) आदेश पारिर करने का विनदiश विदया। त्पश्चा, एसीसी ने विदनांक 11.10.2019 को एक आदेश पारिर विकया, जिजसमें क न्यायाति करण क े रूप में एक अन्य काय8काल क े लिलए प्रति वादी को विनयुविD की अवति बढ़ाने से इनकार विकया गया और विदनांक 24.10.2019 को प्रति वादी को सूति) विकया गया। इससे व्यशिर्थी होकर प्रति वादी ने विदनांक 11.10.2019 क े आदेश की वै ा को )ुनौ ी दे े हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ क े समक्ष एक रिरट याति)का दायर की। उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनण8य पारिर विकया और सक्षम प्राति कारी को आदेश प्राप्त होने की ारीख से दस सप्ताह की अवति क े भी र क े न्यातियक सदस्य क े रूप में प्रति वादी की विनयुविD की अवति क े संबं में नए जिसरे से विनण8य लेने का विनदiश देने वाली रिरट याति)का की अनुमति दी।
6. उच्च न्यायालय की राय र्थीी विक विदनांक 08.05.2019 क े पहले क े फ ै सले क े मद्देनजर, डीओपीटी द्वारा क े अध्यक्ष को लिलखे गए विदनांक 12.04.2017 क े पत्र को रद्द कर विदया गया र्थीा। इसक े परिरणामस्वरूप, अगले वष[8] यानी 2017 क रिरविDयों को आगे बढ़ाने क े लिलए )यन सविमति क े विनण8य को भी उच्च न्यायालय ने रद्द कर विदया र्थीा और डीओपीटी द्वारा विफर से अवलम्ब नहीं लिलया जा सक ा र्थीा।प्रति वादी क े विवरुद्ध संबंति प्राति कारिरयों द्वारा प्राप्त कति पय शिशकाय ों क े बावजूद, उच्च न्यायालय ने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अव ारिर विकया विक विदनांक 08.05.2019 क े विनण8य पारिर होने से पहले पूरे अशिभलेख की जां) की गई र्थीी, जिजसमें यह अव ारिर विकया गया र्थीा विक उD शिशकाय ों में प्रति वादी क े लिखलाफ क ु छ भी प्रति क ू ल नहीं र्थीा। उच्च न्यायालय ने डीओपीटी क े प्रस् ाव में गल ी पाई क्योंविक उन्होंने अपने पहले क े विनण8य विदनांक 08.05.2019 में दज[8] विनष्कषw को ध्यान में नहीं रखा है।सक्षम प्राति कारी द्वारा लिलए गए विनण8य क े लिलए डीओपीटी का उD प्रस् ाव आ ार र्थीा। उच्च न्यायालय का विव)ार र्थीा विक प्रशासविनक विवभाग द्वारा की गई जिसफारिरश जो सक्षम प्राति कारी को भेजी गई र्थीी, पर प्रति वादी क े विवस् ार को अस्वीकार करने क े उद्देश्य से अवलम्ब नहीं लिलया जा सक ा र्थीा। डीओपीटी क े विकसी भी क 8 पर विव)ार विकए विबना, 2011 क े विनयमावली क े विनयम 9(4) क े अनुसार एसीसी का विनण8य सख् ी से होना )ाविहए। उच्च न्यायालय ने एसीसी क े विनण8य में दोष पाया क्योंविक यह )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरशों क े विवपरी र्थीा जिजसे भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा।उच्च न्यायालय ने रिरट याति)का की अनुमति दी और एसीसी को क े न्यातियक सदस्य क े रूप में प्रति वादी की विनयुविD की अवति क े लिलए नए जिसरे से विनण8य लेने का विनदiश विदया।
7. अपीलक ा8ओं की ओर से विवद्व अपर सॉलिलजिसटर जनरल श्री संजय जैन ने कहा विक उच्च न्यायालय ने यह अव ारिर करने में त्रुविट की विक )यन सविमति द्वारा अगले वष[8] यानी 2017 क रिरविDयों को आगे बढ़ाने क े लिलए की गई जिसफारिरश, उच्च न्यायालय क े विदनांक 08.05.2019 क े विनण8य द्वारा अपास् की गई र्थीी। विवद्वान एएसजी क े अनुसार, )यन सविमति द्वारा सक्षम प्राति कारी को जिसफारिरश विकए जाने क े बाद, अति कारिरयों क े संज्ञान में आई अति रिरD सामग्री को )यन सविमति क े समक्ष रखा गया र्थीा। उसक े अनुसार, )यन सविमति ने विनण8य लिलया विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जो रिरविDयां प्रति वादी एवं श्री ए.क े. भारद्वाज की विनयुविD से भरी जानी हैं, उन्हें अगले वष[8] अर्थीा8 2017 क े लिलए बढ़ाया जाना )ाविहए।)यन सविमति की उD जिसफारिरश को भार क े मुख्य न्याया ीश ने अनुमोदन विकया र्थीा।श्री जैन द्वारा आगे यह क 8 विदया गया विक उच्च न्यायालय ने विदनांक 08.05.2019 क े एक विनण8य द्वारा, क े वल सक्षम प्राति कारी को 2011 क े विनयमावली क े अनुसार आदेश पारिर करने का विनदiश विदया। अपीलक ा8ओं की ओर से यह क विदया गया र्थीा विक )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरशों क े संदभ[8] में एक उपयुD आदेश जिजसे भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा, पारिर विकया गया र्थीा।
8. प्रति वादी की ओर से पेश वरिरष्ठ विवद्वान अति वDा श्री प्रदीप कां ने कहा विक े काय8काल को बढ़ाने क े लिलए )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरशों का सक्षम प्राति कारी द्वारा अनुपालन विकया जाना है।हालांविक, सक्षम प्राति कारी ने डीओपीटी द्वारा विदए गए क ु छ इनपुट को ध्यान में रख े हुए प्रति वादी क े अनुरो को विनयुविD की अवति बढ़ाने क े लिलए )यन सविमति को भेज विदया। एसीसी द्वारा )यन सविमति को जो अनुरो विकया गया र्थीा, वह क े वल 2016 की रिरविDयों को अगले वष[8] क ले जाने से संबंति है, जिजसे )यन सविमति द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा।उD अनुमोदन विकसी अन्य अवति क े लिलए अपने काय8काल क े लिलए प्रति वादी क े अनुरो को अस्वीकार करने क े लिलए नहीं है।प्रति वादी की ओर से यह कहा गया र्थीा विक उच्च न्यायालय क े विदनांक 08.05.2019 क े विनण8य ने विदनांक 06.03.2017 की काय8वाही को अपास् कर विदया, जिजसक े द्वारा एसीसी ने प्रति वादी की विनयुविD की अवति बढ़ाने क े प्रस् ाव को वापस कर विदया र्थीा और पत्र विदनांक 12.04.2017 जिजसक े द्वारा क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अध्यक्ष को प्रति वादी क े काय8काल को आगे बढ़ाने की अस्वीक ृ ति क े बारे में सूति) विकया गया र्थीा।प्रति वादी क े लिलए उपस्थिस्र्थी वरिरष्ठ अति वDा ने यह क 8 दे े हुए आक्षेविप विनण8य का समर्थी8न विकया विक उच्च न्यायालय ने विदनांक 08.05.2019 क े अपने फ ै सले में पहले से ही उन शिशकाय ों पर विव)ार विकया र्थीा जो प्रति वादी क े लिखलाफ की गई र्थीीं, जो प्रति वादी क े अनुरो को अस्वीकार करने का आ ार र्थीा। उच्च न्यायालय ने विदनांक 08.05.2019 क े अपने फ ै सले में कहा विक प्रति वादी क े लिखलाफ क ु छ भी प्रति क ू ल नहीं र्थीा जिजसक े आ ार पर काय8काल को आगे बढ़ाने क े अनुरो को खारिरज विकया जा सक ा है।
9. इस मामले क े थ्य विववाद में नहीं हैं।प्रारंभ में इस न्यायालय क े काय8र न्याया ीश की अध्यक्ष ा वाली )यन सविमति ने एक अन्य काय8काल क े लिलए क े रूप में प्रति वादी क े काय8काल को आगे बढ़ाने की जिसफारिरश की।उD जिसफारिरश को भार क े मुख्य न्याया ीश ने अनुमोविद विकया र्थीा।इसक े बाद, अन्य थ्य सामने आए, जिजसे पूव[8] क े विनण8य की समीक्षा क े लिलए सक्षम प्राति कारी द्वारा )यन सविमति क े समक्ष रखा गया र्थीा।हमने मूल अशिभलेख की साव ानीपूव8क जां) की है।अशिभलेख से स्पष्ट है विक )यन सविमति ने अशिभलेलिख विकया विक एसीसी ने प्रति वादी का काय8काल बढ़ा कर रिरविDयों को न भरने का विनण8य लेने क े बाद प्रति वादी और श्री ए.क े. भारद्वाज क े प्रस् ाव को वापस कर विदया र्थीा।)यन सविमति द्वारा वष[8] 2017 क उD रिरविDयों को आगे बढ़ाने की जिसफारिरश की गई र्थीी।इसलिलए, हम े इस क 8 से सहम नहीं हैं विक 2016 की रिरविDयों को वष[8] 2017 क आगे ले जाने क े लिलए )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरश प्रति वादी क े क ें द्रीय े रूप में उनक े काय8काल को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds बढ़ाने क े अनुरो को अस्वीकार करने की नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं हो सक ा है विक )यन सविमति द्वारा प्रति वादी क े विवस् ार की जिसफारिरश नहीं करने क े लिलए एक स)े विनण8य लिलया गया र्थीा।)यन सविमति द्वारा लिलए गए विनण8य को भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा विवति व अनुमोविद विकया गया र्थीा।
10. उच्च न्यायालय ने यह मान े हुए एक त्रुविट की विक )यन सविमति द्वारा रिरविDयों को वष[8] 2017 क आगे बढ़ाने क े लिलए की गई जिसफारिरश को उच्च न्यायालय ने अपने पहले क े आदेश विदनांक 08.05.2019 में खारिरज कर विदया र्थीा।इस रह क े विनष्कष[8] का कारण यह है विक पत्र विदनांक 12.04.2017 जिजसक े द्वारा डीओपीटी ने क े अध्यक्ष को सूति) विकया विक 2016 की उD रिरविDयों को वष[8] 2017 क े लिलए रिरविDयों क े सार्थी भरा जाएगा, को अपास् कर विदया गया र्थीा।विदनांक 08.05.2019 क े विनण8य की बारीकी से जां) से प ा )ल ा है विक उच्च न्यायालय का विनदiश र्थीा विक एसीसी को )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरशों और भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद क े अनुसार 2011 क े विनयमों क े अनुसार एक आदेश पारिर करना )ाविहए। विदनांक 12.04.2017 क े आदेश को अपास् करने को )यन सविमति की अनुशंसा को अपास् करने क े रूप में नहीं समझा जा सक ा है।
11. एसीसी ने )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरश क े विवपरी कोई विनण8य नहीं लिलया जिजसे भार क े मुख्य न्याया ीश द्वारा अनुमोविद विकया गया र्थीा। उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 08.05.2019 को जारी विनदiश क े अनुसार, एसीसी द्वारा पारिर आदेश विदनांक 11.10.2019 न ो )यन सविमति द्वारा की गई जिसफारिरश क े विवपरी है और न ही उच्च न्यायालय द्वारा जारी विनदiशों का उल्लंघन है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
12. पूव8गामी कारणों क े लिलए उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनण8य को अपास् विकया जा ा है। अपील की अनुमति है।............................… [न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव]............................… [न्यायमूर्ति बी. आर. गवई] नई विदल्ली, मई 5,2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds