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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी याति का संख्या 3520/2022
(विवशेष अनुमति याति का (दीवानी) संख्या 19303/2021 से उत्पन्न)
समप/ण वरिरष्ठ जन परिरषद और अन्य ...... अपीलार्थी7 (गण)
बनाम
राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल और अन्य ...... उत्तरदा ा (गण)
विनण/य
न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता
JUDGMENT
1. जैसा विक विवद्वान विव ारण न्यायालय द्वारा स्वीक ृ विकया गया र्थीा, व /मान अपील में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश विदनांक 01.10.2021 को ुनौ ी दी गई है जिजसक े द्वारा वादी-प्रति वाविदयों द्वारा दायर पुनरीक्षण याति का की अनुमति दी गई र्थीी और अं रिरम विनषे ाज्ञा बहाल की गई र्थीी।
2. नगर विनगम, लखनऊ ने आविदल नगर, रिंरग रोड लखनऊ में समप/ण नाम से एक वृद्धाश्रम का विनमा/ण विकया है।विदनांक 05.12.2004 को प्रकाशिश विवज्ञापन क े संदभ/ में अपीलक ा/ को शुरू में ऐसे वृद्धाश्रम को विदनांक 01.09.2005 से 15 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वष/ क े लिलए लाने क े लिलए लेविकन 1 वष/ की अवति क े लिलए नवीनीकरण की श / क े सार्थी पट्टे पर विदया गया र्थीा। पट्टे में विनविह श ^ में से एक यह र्थीा विक पट्टेदार यानी अपीलक ा/ द्वारा एक सलाहकार बोड/ का गठन विकया जाएगा। अपीलक ा/ ने वृद्धाश्रम में सेवाओं क े अनुदान क े लिलए विनयम और विवविनयमन बनाए। इस रह क े विनयमों और विवविनयमों पर विव ार विकया गया र्थीा विक क ै विदयों द्वारा जमा की गई सहयोग विनति का उपयोग आवास, भोजन, विबस् र और रहने की अन्य आवश्यक सेवाओं और सामान्य उप ार क े लिलए विकया जाएगा, लेविकन महंगा ति विकत्सा उप ार और ख / क ै विदयों को स्वयं वहन करना र्थीा। इसमें यह भी प्राव ान विकया गया है विक यविद विकसी व्यविc द्वारा परिरसर क े विकसी विनयम का उल्लंघन विकया जा ा है ो प्रशासन को उसे एक माह की अवति का नोविfस जारी कर उसे विनष्काजिस करने और उसकी सदस्य ा समाप्त करने का पूरा अति कार है। प्रासंविगक खंड इस प्रकार हैः “21. यविद विकसी व्यविc द्वारा परिरसर क े विनयमों का उल्लंघन विकया जा ा है, ो प्रशासन को उसे एक महीने की अविग्रम सू ना जारी कर उसे विनष्काजिस करने और उसकी सदस्य ा समाप्त करने का पूरा अति कार है। प्रबं न ऐसा करने का अपना अति कार सुरतिक्ष रख ा है।"
3. विदनांक 23.04.2016 को वादी-प्रति वाविदयों ने अपने ार बच्चों, एक पुत्र और ीन पुवित्रयों का विववरण दे े हुए वृद्धाश्रम में रहने क े लिलए आवेदन विकया। दो बेविfयां लखनऊ में रह ी हैं और एक बेfा और एक बेfी फ ै जाबाद में रह रही हैं। वादी ने ऊपर उजिल्ललिख विनयमों और विवविनयमों का पालन करने क े लिलए शपर्थीपत्र भी विदया र्थीा र्थीा।
4. इस बा पर विववाद है विक क्या वादी संख्या 2 एक मनोरोग रोगी है और अन्य क ै विदयों और कम/ ारिरयों क े सार्थी दुव्य/वहार कर ा है, लेविकन इस थ्य में जाने क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विबना इस प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यक ा है विक वृद्धाश्रम में रहने वाले को ऐसे वृद्धाश्रम में रहने का क्या अति कार है।
5. यह कहा गया है विक पट्टे की श ^ क े संदभ/ में सविमति ने विदनांक 26.10.2019 को अपनी बैठक आयोजिज की। उc बैठक में वादी का कहना र्थीा विक यविद प्रशासन को उनक े लिखलाफ कोई शिशकाय विमली है ो उन्हें माफ विकया जा सक ा है और उन्होंने यह सुविनतिq विकया विक भविवष्य में ऐसी कोई शिशकाय प्राप्त नहीं होगी।यह ब ाया गया विक बुढ़ापे क े कविठन समय में, अपीलक ा/ का दृविuकोण बहु उदार होना ाविहए।सविमति द्वारा वादी को एक महीने का और समय देने का विनण/य लिलया गया ाविक उनक े व्यवहार का विनरीक्षण विकया जा सक े । यविद कोई सु ार विदखाई नहीं दे रहे र्थीे, ो उन्हें विनयम 21 क े अनुसार परिरसर छोड़ने क े लिलए कहा जाएगा।
6. ूंविक कोई व्यवहार परिरव /न विदखाई नहीं दे रहा र्थीा इसलिलए अपीलक ा/ ने विदनांक 22.11.2019 को वादी की सदस्य ा रद्द कर दी। इसक े बाद, वादी ने विवज्ञापन-अं रिरम विनषे ाज्ञा क े लिलए एक आवेदन क े सार्थी, जिसविवल कोf/ क े समक्ष विनषे ाज्ञा क े लिलए एक मुकदमा दायर विकया। अं रिरम विनषे ाज्ञा क े लिलए इस रह क े आवेदन पर, विव ारण न्यायालय ने विदनांक 17.12.2019 को एक आदेश पारिर विकया विक वाद क े लंविब रहने क े दौरान वादी को बेदखल नहीं विकया जाना ाविहए। हालांविक, अपील में इस रह क े आदेश को अपर जिजला न्याया ीश लखनऊ की अदाल ने विदनांक 20.10.2020 को खाली कर विदया र्थीा।वादी द्वारा प्रस् ु पुनरीक्षण में आदेश को अपास् कर विदया गया।
7. वादी ने इस न्यायालय क े समक्ष एक प्रति शपर्थी पत्र दायर विकया है, जिजसमें अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी वृद्धाश्रम की विवत्तीय अविनयविम ाओं, गबन, आं रिरक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds गल प्रबं न अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी उनकी दयनीय ा, जबरन वसूली अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी या ना की जां की मांग की गई है। 3 यह वादी-प्रति वाविदयों का रूख है विक उन्होंने विवत्तीय हेराफ े री, क ु कम^ और अमानवीय रवैये को उजागर करने क े लिलए एक स े क क े रूप में काम विकया। खाद्य सुविव ाओं की गुणवत्ता या ति विकत्सा उप ार में दान विकए गए वाहनों क े दुरुपयोग आविद क े संबं में शिशकाय की गई र्थीी।
8. एसीपी गाजीपुर श्री सुनील क ु मार शमा/ द्वारा दायर एक अलग हलफनामे में कहा गया है विक वादी वृद्ध मा ा-विप ा हैं जिजन्हें उनक े ही बच्चों ने छोड़ विदया है। 24 अन्य व्यविc भी हैं लेविकन उनकी ओर से र्थीाने में ऐसी कोई शिशकाय नहीं की गई है। इसमें यह भी उल्लेख विकया गया र्थीा विक 25,000/- रुपये की जमान क े बदले अपीलक ा/ ने 75,000/- रुपये जमा करने की मांग की है। यह कहा जा सक ा है विक र्थीानाध्यक्ष इस मुकदमे का पक्षकार नहीं र्थीे, लेविकन संविव ान क े अनुच्छेद 227 क े ह पुनरीक्षण याति का में वादी द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष पक्ष रखा गया र्थीा।
9. अपीलक ा/ द्वारा दायर एक प्रत्युत्तर शपर्थीपत्र में श्री शमा/ द्वारा विकए गए दावों का खंडन विकया गया है। यह ब ाया गया है विक दो बेविfयां शिशखा अग्रवाल और रुति का अग्रवाल अपने मा ा-विप ा से विमलने जा ी हैं और उन्होंने शपर्थीपत्र विदया है विक वे अपने मा ा-विप ा क े अशिभभावक क े रूप में काय/ करेंगी और उनकी ति विकत्सीय आवश्यक ाओं का ध्यान रखेंगी।यह भी कहा गया है विक जिजला समाज कल्याण विवभाग क े पय/वेक्षक श्री हरपाल सिंसह विदनांक 08.11.2020 को वृद्धाश्रम गये और वादी को और समाज कल्याण विवभाग क े एक वैकल्पिल्पक वृद्धाश्रम की विनःशुल्क पेशकश की। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
10. नगर विनगम और राज्य क े लिलए उपल्पिस्र्थी विवद्वान अति वcा ने कहा विक उनक े पास व /मान अपील में जोड़ने क े लिलए क ु छ भी नहीं है।
11. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अति वcा को सुना और पाया विक जां विकए जाने क े लिलए आवश्यक मुद्दा यह है विक वृद्धाश्रम में क ै विदयों की ल्पिस्र्थीति क्या है, क्या वे लाइसेंस ारी व्यविc हैं और /या उन्हें अति कार क े रूप में आजीवन वृद्धाश्रम में रहने का अति कार है।
12. कानून ीन प्रकार क े कब्जे को मान्य ा दे ा है। एक मालिलक क े रूप में, सह-मालिलकों सविह, दूसरा एक विकरायेदार क े रूप में, जब संपलित्त में एक अति कार बनाया जा ा है, और ीसरा अनुमेय कब्जा, वह कब्जा जो अवै या अति ार क े रूप में होगा। व /मान अपील में, हम ीसरी श्रेणी में आने वाले कब्जे से संबद्ध हैं। इस न्यायालय ने एसोजिसएfेड होfल्स ऑफ इंतिडया बनाम आर.एन. कपूर[1] मामले में अपने विनण/य में अव ारिर विकया है विक लाइसेंस ारी व्यविc क े मामले में भार ीय सुगम ा अति विनयम, 1882 की ारा 52 क े अनुसार, मालिलक क े पास कानूनी अति कार जारी रह ा है और दूसरे की संपलित्त पर क े वल अति कार का अनुदान, क ु छ ऐसा जो इस रह क े अति कार क े अभाव में गैरकानूनी होगा। इस प्रकार, यह आवश्यक विवशेष ा है जो एक पट्टे से लाइसेंस को अलग कर ी है।
13. सोहन लाल नारायणदास बनाम लक्ष्मीदास रघुनार्थी गाविद 2 में, यह माना गया है विक एक पट्टा संपलित्त में ब्याज बन ा है जबविक एक लाइसेंस अनुदानक ा/ की अ ल संपलित्त में कोई संपलित्त या ब्याज नहीं बन ा है। इसे विनम्नानुसार ारिर विकया गया र्थीाः-
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
18. जनरल म •f एसोजिसएशन, सेक्र े fरी और f्रेजरर और अन्य बनाम विद काप रेशन आफ ेन्नई, और इसक े कविमश्नर, ेन्नई[6] क े रूप में रिरपोf/ विकये गए एक विनण/य में मद्रास उच्च न्यायालय की तिडवीजन बें ने एक फ ै सले में अव ारिर विकया गया विक अपीलक ा/ काप रेशन में फल मंडी में एक दुकान क े आवंfी र्थीे। दुकानदारों ने उनक े लाइसेंस को समाप्त करने और लाइसेंस ारिरयों को अपने कब्जे में संबंति दुकानों क े कब्जे को खाली करने और आत्मसमप/ण करने क े लिलए विनगम की कार/वाई को ुनौ ी दी। यह रिरf याति काओं को खारिरज कर े हुए अव ारिर विकया गया र्थीाः “24. इस विवषय पर पूरा मामला कानून कार्तिडनल f स्fोन क े इद/- विगद/ घूम ा है, जिजस पर पक्षकारों क े बी संबं जो लाइसेंसक ा/ व्यविc या लाइसेंस ारी व्यविc या पट्टेदार होने का दावा कर े हैं, यह य करना हो ा है विक क्या अनुदान समझौ े की विवषय वस् ु क े भी र संपलित्त में ब्याज या संपलित्त बना ा है।जैसा विक अव ारिर विकया गया है, अनन्य
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कब्जे का देना यह मानने क े लिलए विनणा/यक नहीं होगा विक अनुदान एक पट्टा है। व /मान मामले में आसपास की परिरल्पिस्र्थीति यों और पक्षकारों क े आ रण से प ा ल ा है विक नगर विनगम क े स्fालों क े रिरf याति काक ा/ओं/लाइसेंस ारिरयों क े पक्ष में विकसी भी समय संपलित्त में कोई विह नहीं बनाया गया है और याति काक ा/ओं का यह दावा विक वे पट्टेदार हैं, दूर की कौड़ी है और इसे कायम नहीं रखा जा सक ा। xx xx xx
26. यह भी समान रूप से अच्छी रह से य विकया गया है विक समाविप्त क े बाद एक लाइसेंस ारी की ल्पिस्र्थीति गैरकानूनी हो जा ी है और लाइसेंस ारी विकसी भी विनषे ाज्ञा का हकदार नहीं है जो लाइसेंसक ा/ को उसे बेदखल करने से रोक ा है क्योंविक एक विकरायेदार क े विवपरी एक लाइसेंस ारी क े पास न्यातियक कब्जा नहीं हो ा है और कब्जा हमेशा लाइसेंसक ा/ क े पास रह ा है और जो विदया गया र्थीा वह लाइसेंस क े संदभ/ में एक विवशेषाति कार है, जो इस रह क े अनुदान क े अभाव में गैरकानूनी हो जा ा है।
27. साव/जविनक बाजार में स्fालों /दुकानों क े संबं में रिरf याति काक ा/ओं का कब्जा मूल रूप से विदए गए लाइसेंस क े लिलए संदर्भिभ है क्योंविक उनकी ल्पिस्र्थीति लाइसेंस ारी की है। एक बार इस रह क े लाइसेंस को समाप्त कर विदए जाने क े बाद, स्fालों का कब्जा गैरकानूनी हो जा ा है क्योंविक उनक े पास कोई अति कार नहीं हो ा है और समाविप्त क े बाद इस रह क े कब्जे का कब्जा विकसी वै ाविनक प्राव ान द्वारा संरतिक्ष नहीं हो ा है। सुगम ा अति विनयम 1982 की ारा 63 क े अनुसार, जहां लाइसेंस विनरस् विकया जा ा है, लाइसेंस ारी व्यविc अपने सभी सामानों को हfाने क े लिलए संपलित्त छोड़ने क े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उति समय का हकदार है, जिजसे उसे रखने की अनुमति दी गई है।जैसा विक पहले ही ब ाया गया है लाइसेंस की समाविप्त क े बाद भी परिरसर में रहने वाला व्यविc की ल्पिस्र्थीति गैरकानूनी है और उसे परिरसर में बने रहने का कोई अति कार नहीं है।”
19. रामे गोडा (मृ ) क े विवति क प्रति विनति द्वारा बनाम एम. वरदप्पा नायडू (मृ ) क े विवति क प्रति विनति द्वारा7 मामले में इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ अं रिरम विनषे ाज्ञा क े प्रश्न पर विव ार कर रही र्थीी। यह माना गया विक शांति पूण/ कब्जे वाला व्यविc अपने कब्जे को बनाए रखने का हकदार है और इस रह क े कब्जे की रक्षा क े लिलए, वह एक अति ारी को बाहर रखने क े लिलए उति बल का उपयोग भी कर सक ा है। यह आगे कहा गया विक यह विबना हक क े विकसी व्यविc का लिलया हुआ कब्जा या प्रभावी कब्जा जो उसे सच्चे मालिलक क े लिखलाफ भी अपने कब्जे की रक्षा करने का अति कार दे ा है। इसे विनम्नानुसार ारिर विकया गया र्थीाः "9 बसा हुआ कब्जा (i) प्रभावी, (ii) अबाति, और (iii) मालिलक की जानकारी में या अति ारी द्वारा शिछपाने क े विकसी भी प्रयास क े विबना होना ाविहए।वाक्यांश बसाए हुए कब्जे में कोई विवशेष आकष/ण या जादू नहीं है; न ही यह कोई कम/कांडीय सूत्र है जिजसे जंजीर में बां ा जा सक ा है। विकसी व्यविc द्वारा एजेंf या नौकर क े रूप में संपलित्त का कब्जा मालिलक क े कहने पर काम करना वास् विवक भौति क कब्जा नहीं होगा।"
20. मारिरया मागा/रीडा सेल्पिक्वरा फना¥तिडस एवं अन्य बनाम एरासमो जैक दा सेक्वेरिरया (मृ )8 क े विवति क प्रति विनति क े माध्यम से अन्य ीन न्याय ीशों की पीठ क े विनण/य में क े बी विनषे ाज्ञा क े प्रश्न पर विव ार कर रही र्थीी और वादी - भाई, जिजसे एक काय/वाहक क े रूप में संपलित्त दी गई र्थीी और वादी की बहन
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds मालिलक है। इस न्यायालय क े समक्ष एक क / विदया गया र्थीा विक एक काय/वाहक का कब्जा कभी भी विकसी क े अति कार में नहीं हो सक ा है और विवशिशu राह अति विनयम की ारा 6 क े ह विनषे ाज्ञा क े लिलए कोई मुकदमा लाने योग्य नहीं र्थीा। इसे विनम्नानुसार ारिर विकया गया र्थीाः “83. दीवानी मुकदमा में विनषे ाज्ञा देना या इनकार करना दीवानी मुकदमा में सबसे महत्वपूण/ रण है। विनषे ाज्ञा देने या इनकार कर े समय न्यातियक अति कारिरयों और न्याया ीशों द्वारा उति देखभाल, साव ानी, परिरश्रम और ध्यान विदया जाना ाविहए। अति कांश मामलों में, मामले का भाग्य एक विनषे ाज्ञा क े अनुदान या इनकार द्वारा य विकया जा ा है।अनुभव से प ा ला है विक एक बार विनषे ाज्ञा विदए जाने क े बाद, इसे खाली करना प्रति वादी क े लिलए एक दुःस्वप्न बन जाएगा। xx xx xx
97. इस मामले में उभरने वाले कानून क े जिसद्धां ों को विनम्नानुसार स्वरूप विदया गया है: (1) विकसी व्यविc को परिरसर में रहने की अनुमति दी जाने पर उसे उस संपलित्त का हक नहीं प्राप्त हो सक ा है।यहाँ क विक वष^ या दशकों क े लंबे समय क कब्जे क े बाद भी ऐसा व्यविc उc संपलित्त में कोई अति कार या विह अर्जिज नहीं करेगा। (2) क े यरfेकर, ौकीदार या नौकर कभी भी अपने लंबे समय से कब्जे क े बावजूद संपलित्त में विह प्राप्त नहीं कर सक ा है।क े यरfेकर या नौकर को मांग विकये जाने पर ुरं कब्जा देना हो ा है। (3) अदाल ें विकसी काय/वाहक, नौकर या विकसी ऐसे व्यविc क े कब्जे की रक्षा करने में न्यायोति नहीं हैं जिजसे क ु छ समय क े लिलए परिरसर में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds रहने की अनुमति दी गई र्थीी या ो विमत्र, रिरश् ेदार, काय/वाहक या नौकर क े रूप में। (4) न्यायालय का संरक्षण क े वल उसी व्यविc को विदया या बढ़ाया जा सक ा है जिजसक े पास वै, मौजूदा विकराया समझौ ा, पट्टा समझौ ा या उसक े पक्ष में लाइसेंस समझौ ा है। (5) क े यरfेकर या अशिभक ा/ क े वल मूल न की ओर से मूल न की संपलित्त रख ा है। वह अपने लंबे समय क रहने या कब्जे क े बावजूद ऐसी संपलित्त में अपने लिलए कोई अति कार या विह प्राप्त नहीं कर ा है।"
21. इस रह की विनष्कष/ क े मद्देनजर, अपील को अनुमति दी गई र्थीी और वाद परिरसर क े कब्जे को अपीलक ा/, मालिलक को सौंपने का विनद«श विदया गया र्थीा।
22. बेहराम ेजानी और अन्य बनाम अजीम जगनी9 मामले में विकए गए एक अन्य फ ै सले में, प्रति वादी ने अपील में वादी को वाद परिरसर से विनकालने से रोक े हुए विनषे ाज्ञा का दावा कर े हुए एक वाद दायर विकया।न्यायालय ने इस प्रकार अव ारिर विकया हैः- “14. इस प्रकार, एक व्यविc जो विबना विकसी शुल्क क े या एक काय/वाहक या नौकर क े रूप में परिरसर में रह ा है ो संपलित्त में कोई अति कार या विह प्राप्त नहीं करेगा और उस ल्पिस्र्थीति में लंबे समय क कब्जे में रहने का कोई कानूनी परिरणाम नहीं होगा।इन परिरल्पिस्र्थीति यों में, दीवानी न्यायालय अं रिरम विनषे ाज्ञा क े लिलए प्रार्थी/ना को अस्वीकार करने में सही और न्यायसंग र्थीा और उस विनण/य को उच्च न्यायालय द्वारा अपास् नहीं विकया जाना ाविहए र्थीा।इसलिलए हम अपील की अनुमति दे े हैं और अपील क े ह विनण/य को अपास् कर े हैं और
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds वाद संख्या 408/2013 में नोविfस आफ मोशन संख्या 344/2013 में बॉम्बे जिसfी जिसविवल कोf/ द्वारा पारिर आदेश विदनांक 29-4-2013 को बहाल कर े हैं।”
23. अब, व /मान अपील क े थ्यों को ध्यान में रख े हुए, प्रति वादी संख्या 1 और 2-वादीगण को भोजन और मामूली ति विकत्सा देखभाल क े आवश्यक ख ^ को पूरा करने क े लिलए क ु छ भुग ानों क े अ ीन वृद्धाश्रम में रहने की अनुमति दी गई र्थीी।एक वृद्धाश्रम क े एक कमरे में प्रति वादी संख्या 1 और 2 का कब्जा एक लाइसेंस ारी का है जिजसे रहने की अनुमति है, लेविकन संपलित्त में कोई रूति लिलए विबना। अपीलक ा/ओं ने प्रति वादी संख्या 1 और 2 क े व्यवहार को सार्थी रहने वाले व्यविcयों और वृद्धाश्रम क े कम/ ारिरयों क े अनुक ू ल नहीं पाया। यह न्यायालय अपीलक ा/ओं की राय क े बारे में न्यातियक समीक्षा नहीं करेगा।कानूनी मुद्दे पर, प्रति वादी संख्या 1 और 2, ूंविक लाइसेंस ारिरयों को वृद्धाश्रम क े कमरे में रहने का कानूनी अति कार है, जब क विक वे ऐसे लाइसेंस क े विनयमों और श ^ का पालन कर े हैं। ूंविक प्रति वादी संख्या 1 और 2 को संबंति दातियत्वों का पालन विकए विबना अपने कब्जे की रक्षा करने का कोई कानूनी अति कार नहीं र्थीा, क्योंविक उनका कब्जा कानूनी अति कार नहीं है, बल्पिल्क क े वल एक अनुमेय कब्जा है और वे वृद्धाश्रम क े प्रबं न को बाति न करने क े लिलए विकसी विनषे ाज्ञा की मांग नहीं कर सक े।
24. यह दुभा/ग्यपूण/ ल्पिस्र्थीति है जब मा ा-विप ा की देखभाल बच्चों द्वारा नहीं की जा सक ी है, लेविकन थ्य यह है विक अपने बच्चों द्वारा मा ा-विप ा का परिरत्याग अब जीवन का एक कविठन थ्य है।मा ा-विप ा क े लिलए इस ल्पिस्र्थीति को संभालना मुल्पिश्कल हो ा है विक उस उम्र में उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ ा है।इसलिलए मा ा - Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विप ा अपने जीवन की शाम को जिजस मानजिसक आघा का सामना कर े हैं, उसे कोई भी समझ सक ा है लेविकन मा ा-विप ा की पीड़ा अन्य सार्थी रहने वाले व्यविcयों या आयोजकों क े लिलए परेशानी का कारण नहीं हो सक ी, जिजन्होंने वृद्धाश्रम की देखभाल करने और लाने का संकल्प लिलया है।वृद्धाश्रम में रहने वाले लोग लाइसेंस ारी हो े हैं और उनसे अपेक्षा की जा ी है विक वे न्यून म स् र का अनुशासन और अच्छा व्यवहार बनाए रखें और सार्थी रहने वाले व्यविcयों को परेशान न करें जो वरिरष्ठ नागरिरक भी हैं। इसलिलए, यविद एक वृद्धाश्रम में अन्य रहने वाले व्यविcयों की शांति में व्यव ान का कारण है, ो वृद्धाश्रम का प्रशासन लाइसेंस समाप्त करने और व्यविc को आवंविf कमरा खाली करने क े लिलए कहने क े लिलए स्व ंत्र है। भले ही वृद्धाश्रम क े आयोजक वादी की अपेक्षाओं या आवश्यक ाओं को पूरा करने में सक्षम न हों, इससे वादी को अन्य सार्थी रहने वाले व्यविcयों को परेशान करने का कोई कारण नहीं विमलेगा।एक लाइसेंस ारी व्यविc क े रूप में वादी को आवंविf आवास में रहने का कोई अति कार नहीं है जो विवशुद्ध रूप से वृद्धावस्र्थीा में लोगों द्वारा सामना की जाने वाली मानवीय समस्या का एक दृविuकोण है।वादी को वैकल्पिल्पक आवास की भी पेशकश की गई है।
25. एक लाइसेंस ारी क े रूप में वादी वृद्धाश्रम में रहने क े लिलए विनषे ाज्ञा नहीं मांग सक े, जब क विक वे अन्य व्यविcयों को शांति पूण/ सह -अल्पिस् त्व की अनुमति नहीं दे े।इसलिलए, हम पा े हैं विक उच्च न्यायालय द्वारा दी गई विनषे ाज्ञा पेfेंf अवै ा से ग्रस् है।इसलिलए, उच्च न्यायालय द्वारा दी गई विनषे ाज्ञा की विवति में आवश्यक ा नहीं है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
26. जैसा विक समाज कल्याण विवभाग द्वारा प्रस् ाविव है, अपीलक ा/ प्रति वादी संख्या 1 और 2 क े लिलए एक वैकल्पिल्पक वृद्धाश्रम की व्यवस्र्थीा करेगा।
27. हालांविक, हम देख े हैं विक वृद्धाश्रम में रहने वाले लोगों की रहने की ल्पिस्र्थीति की जां करने क े लिलए नगर विनगम या समाज कल्याण विवभाग क े विव ार करने क े लिलये है ाविक वहां रहने वाले व्यविc उस उम्र में यर्थीासंभव आरामदायक परिरल्पिस्र्थीति यों में रह सक ें ।
28. हम उत्तर प्रदेश राज्य विवति क सेवा प्राति करण को भी विनद«श दे े हैं विक वह एक अ /-विवति क स्वयंसेवी को वृद्धाश्रम में ऐसे अं राल पर आने क े लिलए प्रति विनयुc करे जो संभव हो सक े और जिजला विवति क सेवा प्राति करण क े सदस्य सति व को शुरू में महीने में कम से कम एक बार वृद्धाश्रम का दौरा करना होगा ाविक रहने वाले व्यविcयों को होने वाली कविठनाइयों का प ा लगाया जा सक े और यविद आवश्यक हो ो वृद्धाश्रम क े व्यविcयों द्वारा कानूनी सहाय ा प्रदान करने सविह विनवारण कदम उठाया जा सक े ।
29. पूव c विनद«शों और स्व ंत्र ा क े सार्थी, व /मान अपील को अनुमति दी जा ी है और वाविदयों-प्रति वाविदयों द्वारा मांगी गई अं रिरम विनषे ाज्ञा खारिरज की जा ी है।................................… (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA...............................… (न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम) नई विदल्ली; 06 मई, 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds