Reddy Veerana v. State of Uttar Pradesh and Others

High Court of Allahabad · 05 May 2022 · 2022 INSC 520
Vini Rana; J. K. Maheshwari
Civil Appeal No. 3637 of 2022
property appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court upheld the acquisition and compensation awarded for commercial land in NOIDA, affirming market value-based compensation with justified deductions and recognizing the appellant's ownership rights over unacquired land portions.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपील क्षेत्राति कार दीवानी याति का ं 3636 वर्ष" 2022
[विवशेर्ष अनुमति याति का (सि विवल) ं. 19035 वर्ष" 2021 े उत्पन्न]
रेड्डी वीराना .......अपीलार्थी3
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य ...... प्रत्यर्थी3
ार्थी में
सि विवल याति का ं 3637 वर्ष" 2022
विवशेर्ष अवकाश याति का (सि विवल) ं. 5500/2022 े उत्पन्न
न्यू ओखला औद्योवि?क विवका प्राति करण ........अपीलार्थी3
बनाम
रेड्डी वीराना और अन्य .............प्रत्यर्थी3
विनण"य
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की ?ई।

2. व "मान सि विवल अपीलें अपीलक ा" रेड्डी वीराना ( ह-याति काक ा") द्वारा दायर सि विवल विवविव रिरट याति का ंख्या 2272 वर्ष" 2019 इलाहाबाद उच्च उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" 2022 INSC 520 न्यायालय द्वारा पारिर 28 अक्टूबर, 2021 क े फ ै ले े उत्पन्न हुई हैं, सिज क े द्वारा उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी, 2011 को अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण) द्वारा अपीलक ा" की ?ांव छलेरा बां?र में स्थिस्र्थी ख रा ंख्या 422 और 427 क े 2.18 बीघा अति ग्रविह भूविम क े लिलए पारिर मुआवजे क े फ ै ले में हस् क्षेप कर इ याति का को विनस् ारिर कर विदया है।

3. उक्त आदेश को ुनौ ी दे े हुए, दोनों पक्ष इ न्यायालय क े मक्ष हैं। ंक्षेप में, थ्य यह हैं विक विव^य विवलेख विदनांविक 24.04.1997 क े अनु ार, अपीलक ा" ने दो अन्य लो?ों क े ार्थी विमलकर ?ौ म बुद्ध न?र सिजले क े छलेरा बां?र ?ांव में ख रा नं. 422 में अनु ूति 9 बीघा और ख रा नं. 427 में अनु ूति 2 बीघा 4 विबस्वा और 10 विबस्वा ी ंपलित्त (अर्थीा" ्, क ु ल 13757.[8] व?" मीटर) क ु ल 1, 00, 00, 00, 000/- रूपये (क े वल एक करोड़) में ^य विकया। हालाँविक, वर्ष" 1979-1980 में पूव" भूविम अति ग्रहण की काय"वाही क े माध्यम े, ख रा नंबर 427 में 1 बीघा 5 विबस्वा 15 विबस्वं ी और ख रा नंबर 422 में 1 बीघा की ीमा क खरीदी ?ई भूविम का एक विहस् ा राज्य द्वारा अति ग्रहण कर लिलया ?या र्थीा।इ प्रकार, वह ंपलित्त जो अपीलक ा" द्वारा अति ग्रही नहीं हो पाई, वह उपरोक्त दोनों ख रा नंबरों ( ंक्षेप में भूविम का अनु ूति टुकड़ा कहा जा क ा है) में 2 बीघा 18 विबस्वा 10 विब ावं ी (क ु ल 2 7400 व?" मीटर) र्थीी।

4. जै ा विक अणिभलेख े स्पष्ट है, अपीलक ा" द्वारा भूविम क े ^य क े अनु रण में, वर्ष" 2000 की शुरुआ े, एनओआईडीए क े कम" ारी?ण अपीलक ा" (भूविमस्वामी) क े शांति पूण" कब्जे में हस् क्षेप कर रहे र्थीे, सिज क े परिरणामस्वरूप अपीलक ा" द्वारा कब्जे में हस् क्षेप नहीं विकये जानेका विनवेदन कर े हुए एनओआईडीए क े विवरूद्ध स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा क े लिलए वाद दायर विकया ?या। भूविम उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" की उपयोवि? ा और मूल्य को प्रदर्शिश करने क े उद्देश्य क े लिलए एनओआईडीए ने अपने लिललिख जवाबदावे में अन्य बा ों क े ार्थी विनम्नलिललिख कर्थीन कर क " विदया, जो इ प्रकार हैः- "............ विववाविद भूविम विवका प्राति करण क े क ें द्र में स्थिस्र्थी है और भूविम को वाणिणस्थिज्यक उपयो? क े लिलए विवविह विकया ?या है।इ लिलए यह भूविम बहु महं?ी है। ूंविक अति विनयम ंख्या 6 वर्ष" 1976 की खंड 2 क े प्राव ानों क े ह ?ांव छलेरा बां?र की भूविम को औद्योवि?क क्षेत्र घोविर्ष विकया ?या है और प्रत्यर्थी3 की अनुमति क े विबना इ भूविम पर विनमा"ण अवै है।" (प्रभाव वर्धि )

5. विव ारण न्यायालय ने, दोनों पक्षों द्वारा उठाए ?ए क~ पर मुति विव ार-विवमश" करने क े उपरान्, विदनांक 16.02.2000 को एक आदेश पारिर कर अपीलार्थी3 (रेड्डी वीराना) क े पक्ष में वाद पर आंणिशक रूप े तिड^ी पारिर कर विदया और एनओआईडीए को भूविम का कब्जा लेने े रोक विदया जो वर्ष" 1979- 1980 में पूव" अति ग्रहण की विवर्षय वस् ु नहीं र्थीी। इ क े अलावा, न्यायालय ने अपीलक ा" को ख रा नंबर 422 और 427 की भूविम क े शेर्ष विहस् े का मालिलक भी घोविर्ष विकया, सिज े विवलेख विब^ी विवलेख क े द्वारा खरीदा ?या र्थीा, जै ा विक पहले उल्लेख विकया ?या है।

6. पूव€क्त आदेश े व्यणिर्थी होकर, एऩओआईडीए ने सिजला न्याया ीश क े मक्ष दीवानी याति का ं 61 वर्ष" दायर विकया, सिज े विनम्नलिललिख रीक े े विकए ?ए क ु छ विटप्पणिणयों क े ार्थी आदेश विदनांविक 30.03.2001 क े द्वारा खारिरज भी कर विदया ?या- अपीलक ा" क े विवरूद्ध ग्राम छलेरा बां?र ह ील दादरी सिजला -?ौ म बुद्ध न?र ख रा नं. ख रा नं. 422 क े अन् ?" 20900 विवघा जमीन और ख रा नं. 427 क े अन् ?" 000910 विवघा जमीन क े ंबं में वादी द्वारा दायर उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" विकया ?या र्थीा। इ वाद में विन ली अदाल ने स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा की आज्ञविƒ पारिर करक े कोई त्रुविट नहीं की है। प्रत्यर्थी3/अपीलक ा" अब भी पूव€क्त ख रा नं. की शेर्ष भूविम का अति ग्रहण करने क े लिलए स्व ंत्र है। लेविकन जब क भूविम का अति ग्रहण नहीं विकया जा ा है, ब क विन ली अदाल द्वारा जारी स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा की तिड^ी प्रवर्धि रहे?ी। (प्रभाव वर्धि ) विव ारण न्यायालय क े आदेश की पुविष्ट कर े हुए सिजला न्याया ीश द्वारा पारिर स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा देने वाले विनण"य और तिड^ी को ुनौ ी नहीं दी ?ई है और इ लिलए, यह अंति म हो ?या है। इ क े अलावा, स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा क े प्रव "न बावजूद, नोएडा ने वर्ष" 2003 में ख रा ंख्या 422 और ख रा ंख्या 427 क े शेर्ष भूविम क े टुकड़े विह भूविम क े बड़े टुकड़े क े विवका क े लिलए एक विनविवदा जारी की, जो इ मामले की विवर्षय-वस् ु है।उक्त विनविवदा को नोएडा द्वारा विवणिभन्न मा ार पत्रों में व्यापक रूप े विवज्ञाविप विकया ?या र्थीा और बाद में, एमजीएफ, यूविनटेक, न सि टी, हारा इंतिडया और ओमेक् विह नौ प्रति वि„ डेवलप " ने बोली दस् ावेज खरीदे।यह एक ज्ञा थ्य र्थीा विक भूविम क े बड़े विहस् े में े अनु ूति भूविम विववाद में र्थीी और इ लिलए, भी प्रति वि„ डेवलप " ने विनविवदा क े लिलए बोली ल?ाने े परहेज विकया।जै ा विक हो क ा है, विनविवदा की अंति म ति णिर्थी यानी 9.03.2004 पर, प्रत्यर्थी3 ंख्या-7 की ओर े क े वल एक विनविवदा, यानी मै " डीएलएफ यूविनव "ल लिलविमटेड (बाद में डीएलएफ क े रूप में ंदर्शिभ ) को प्राƒ हुआ र्थीा और कनीकी विमति द्वारा मूल्यांकन विकया ?या र्थीा, इ क े बाद, प्रत्य़र्थी3 ंख्या-7 ने दर उद्धृ विकया और उक्त विनविवदा में अह" ा प्राƒ कर लिलया। परिरणामस्वरूप, अनु ूति भूखण्ड़ विह सिज क े लिलए स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा प्रव "न में र्थीी, विह एक बड़ा भूखण्ड़, जै ा विक ऊपर उल्लेख विकया ?या है, आदेश विदनांविक 12.04.2004 द्वारा डीएलएफ को आवंविट विकया ?या र्थीा। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"

7. प्रत्यर्थी3 ं. 7 को भूविम आवंविट करने क े पश्चा ्, नोएडा द्वारा विदनांक 02.09.2005 को 'भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894' (अति विनयम, 1894 क े रूप में ंदर्शिभ ) की ारा 17 (1) पविठ आदेश 4 (1) क े ह प्रारंणिभक अति ू ना जारी की ?ई र्थीी, सिज क े पश्चा ् नोयडा क े दादरी स्थिस्र्थी ग्राम बां?र छलेरा, सिज का ख रा ं. 422 और 427 है, में 0.7400 हेक्टेयर भूविम क े अनु ूति खण्ड़ का अति ग्रहण करने क े लिलए अति विनयम, 1894 की ारा 6 क े ह विदनांक 22.11.2005 को अति ू ना जारी की ?ई।

8. अपीलक ा" ने उपरोक्त अति ू नाओं को इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े मक्ष सि विवल प्रकीण" रिरट याति का ंख्या 75152 वर्ष" 2005 और दीवानी विवविव रिरट याति का ंख्या 70088 वर्ष" 2006 में ुनौ ी विदया र्थीा।उपरोक्त याति काओं में उच्च न्यायालय क े अं रिरम आदेशों क े अनु ार, राजस्व विनरीक्षक ने विदनांक 05.08.2008 को भूविम क े विन ा"रिर खण्ड़ का दौरा विकया और अपनी रिरपोट" में विनम्नानु ार उल्लेख विकया - “घटनास्र्थील क े अनु ार, ख रा ं. 422 और 427 में दज" भूविम जो व "मान में ीमांकन क े ंबं में ेक्टर 18 में परिरवर्धि हो ?ई है, उ भूविम की कोई पह ान स्र्थील नहीं है। क्योंविक नोएडा प्राति करण पूरी रह े विवकसि हो ुका है और विक ी भी विनतिश्च पह ान क े अभाव में भूविम का ीमांकन ंभव नहीं है।” उच्च न्यायालय ने विदनांक 10.12.2009 क े आदेश द्वारा इ मामले का विनस् ारण कर विनम्नानु ार ारिर विकया - “अणिभलेख क े परिरशीलन े विवविद हो ा है विक विदनांक 2.9.2005 को अति विनयम की ारा 4 क े ह अति ू ना जारी की ?ई र्थीी और इ अति विनयम की ारा 4 क े ह इ अति ू ना में अति विनयम की ारा 17 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" (4) क े ह एक विनदŒश भी जारी विकया ?या र्थीा विक अति विनयम की ारा 5 ए का प्राव ान ला?ू नहीं हो?ा। त्काल रिरट ंलग्नक क े लिलए अनुबं ंख्या 2 में विनविह अति विनयम की खंड 6 क े ह एक अति ू ना 22.11.2005 को जारी की ?ई र्थीी और अति विनयम की ारा 17 (1) क े ह ात्कालिलक ा ारा को ला?ू विकया ?या र्थीा। श्री ए. डी. कौविटल्य, याति यों क े विवद्व वकील ने बार में एक बयान विदया विक याति यों ने व "मान रिरट याति काओं में दावा विकए ?ए अनु ोर्ष पर जोर नहीं विदया है और क े वल यह प्रार्थी"ना विकया ?या है विक उनका मुआवजा विन ा"रिर विकया जाए और उन्हें कानून क े अनु ार भु? ान विकया जाए और भोपेंद्र सिं ह और अन्य बनाम आवा विवका परिरर्षद और अन्य 2005 (2) क े मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय क े फ ै ले को भी ध्यान में रखा जाए। उनक े अनु ार यह बयान आयुक्त की रिरपोट" को ध्यान में रख े हुए विदया जा रहा है विक भूविम का ीमांकन नहीं विकया जा क ा है और याति काक ा"ओं को भूविम वाप नहीं विमल क ी है।पक्षकारों क े अति वक्ताओं को ुनने क े बाद, लेविकन मामले क े ?ुण-दोर्ष पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना, ए ए एओ को विनदŒश दे े हुए विक इ रिरट याति का का विनस् ारण विकया जा ा है वह भोपेंद्र सिं ह और अन्य (उपरोक्त) क े विनण"य में प्रति पाविद कानून क े अनु ार मुआवजा विन ा"रिर करें। मुआवजे का भु? ान अति मान ः एक महीने की अवति क े भी र विकया जाए?ा। र्थीाविप, यह आ?े प्राव ान विकया ?या है विक यविद नोएडा की नीति क े अनु ार याति काक ा"ओं को कोई भूविम दी जानी है, ो याति काक ा" क े पुनवा" क े लिलए इ में ेजी लाई जाए?ी। रिरट याति का का विनस् ारण कर विदया ?या है।" (प्रभाव वर्धि ) यह उल्लेख करना ंदभ" े परे नहीं हो क ा है विक अपीलक ा" (भूस्वामी) ने रिरपोट" में राजस्व विनरीक्षक द्वारा विकए ?ए अवलोकन क े दृविष्ट? न्यायालय क े मक्ष रिरयाय दी विक भूविम पूरी रह े नोएडा द्वारा विवकसि की ?ई र्थीी और ीमांकन उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" ंभव नहीं र्थीा। इ लिलए, 'भोपेंद्र सिं ह और अन्य बनाम आवा एवं विवका परिरर्षद और अन्य,2005'(2) उत्तरां ल,295;शंखनाद एन.ए.एन.यू./ यू. ी./0270/2005 'क े मामले में विदए ?ए विनण"य क े अनु ार मुआवजे क े विन ा"रण क े लिलए क े वल विनदŒश जारी करने की प्रार्थी"ना की ?ई र्थीी।

9. नोएडा ने व्यणिर्थी होकर विवशेर्ष अनुमति याति का (सि विवल) ंख्या 201962019[7] वर्ष" 2010 में पूव€क्त विनण"य को ुनौ ी दी (बाद में इ े स्वीकार कर सि विवल अपील ं. 731732 वर्ष" 2013 में परिरवर्धि विकया ?या)। पूव€क्त अपील क े विव ारा ीन ा क े दौरान, इ न्यायालय ने विदनांक 10.01.2011 क े आदेश को रद्द कर विदया, यह देख े हुए एक नोविट जारी विकया विक 'इ बी, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण"य और आदेश विदनांविक 10.12.2009 क े ं ालन पर रोक रहे?ी'।यह अपीलक ा" (भूस्वामी) का विवणिशष्ट मामला है विक नोएडा ने उक्त अपील विव ारा ीन ा क े दौरान अति विनयम,1894 क े खंड 11 क े ह पं ाट जारी करने क े बारे में न्यायालय को ूति नहीं विकया र्थीा।

10. जै ा विक हो क ा है, ल?भ? पां ाल की देरी क े बाद, अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण), नोएडा, ?ौ म बौद्ध न?र द्वारा अति विनयम,1894 क े खंड 11 क े ह विदनांक 31.01.2011 को एक पं ाट जारी विकया ?या र्थीा। उक्त पं ाट में, प्राति करण द्वारा विनम्नलिललिख रीक े े मुआवजा विन ा"रिर विकया ?या र्थीा - "...... ग्राम दरपार परिरक्षेत्र में बे ी ?ई भूविम क े लिलए विदनांक 04.02.2005 क े विव^य पत्र क े आ ार पर उन्हें 181.87 रुपये प्रति व?" ?ज की दर े मुआवजा देने क े लिलए ामान्य अति ग्रहण प्रवि^या क े आ ार पर बैठक में एक विनण"य लिलया ?या र्थीा, सिज की ीमाएं खंड 4 (1), 17 क े ह विदनांक 02.09.2005 को इ अति विनयम क े विवज्ञापन े ीन ाल पहले ग्राम छलेरा में बे ी ?ई भूविम क े विवरूद्ध ग्राम छलेरा बां?र की ीमाओं को छ ू ी हैं और उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" मुआवजा पाने क े लिलए उपयुक्त नहीं पाए ?ए र्थीे, सिज का अनुमोदन विदनांक 18.01.2006 को आयुक्त, मेरठ तिडवीजन, मेरठ द्वारा अपने आति कारिरक पत्र ंख्या 452/891/200406 क े माध्यम े विदया ?या र्थीा।" इ न्यायालय क े मक्ष वाद की विव ारा ीन ा क े ंबं में, पं ााट का विनम्नानु ार विनस् ारिर विकया ?या - “सि विवल विवविव रिरट याति का ंख्या 75152/2005, विवष्णु प्र ान बनाम नोएडा और अन्य क े विनस् ारण क े ंदभ" में माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विदनांक 10.12.2009 को उच्च न्यायालय, उत्तरां ल द्वारा भोपेन्द्र सिं ह एवं अन्य बनाम आवा विवका परिरर्षद क े माध्यम े मुआवजे, विन ा"रण एवं भु? ान हे ु दायर याति का क े विवरूद्ध सिजला कलेक्टरों द्वारा विन ा"रिर न्यून म क " ल रेट क े आ ार पर मुआवजे को विनस् ारिर करने का आदेश विदया ?या, लेविकन मा. उच्च न्यायालय क े आदेशों क े विवरूद्ध मा. उच्च म न्यायालय में नवीन ओखला उद्यो? विवका प्राति करण, नोएडा बनाम विवष्णु प्र ान और अन्य क े माध्यम े एक विवशेर्ष याति का ंख्या ी ी 2019[6] 20197/2010 दायर की ?ई र्थीी सिज में भार क े व€च्च न्यायालय सिज में विदनांक 10.12.2009 को मा. उच्च न्यायालय क े आदेशों विदनांविक 10.01.2001 क े प्रव "न पर रोक विदया ?या र्थीा। माननीय उच्च म न्यायालय द्वारा जारी स्र्थी?न आदेश क े कारण, ?ौ म बुद्ध न?र क े सिजला कलेक्टर की अध्यक्ष ा में बुलाई ?ई उक्त बैठक में लिलए ?ए विनण"य क े अनु ार ?ैर - अनुबंति भूविम क े लिलए 181.87 रुपये प्रति व?" ?ज की विन ा"रिर दर प्रभावी है और अति ग्रविह भूविम का विनण"य क े वल इ ी आ ार पर लिलया जाए?ा।" अं में, इ न्यायालय क े विनण"य क े अ ीन विनम्नलिललिख श ~ में पुरस्कार पं ाट विकया ?या र्थीा और मुआवजे की ?णना विनम्नानु ार की ?ई र्थीी - उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" "अ ः ग्राम छलेरा बां?ड़, पर?ना दादरी, ह ील दादरी, सिजला-?ौ म बौद्ध न?र में विनयोसिज औद्योवि?क विवका हे ु न्यू ओखला औद्योवि?क विवका प्राति करण द्वारा अति ?ृही 0.828 हेक्टेयर भूविम क े लिलए मुआवजा रु. 18,00, 481.00 और उ पर देय 30% छ ू ट की राणिश रु. 5,40, 144.00 है और 12% प्रति पूरक राणिश पर देय रु. 53, 866.00 जो क ु ल रु. 23,94,

491.00 (रुपये ेई लाख ौरा ी हजार ार ौ विनन्यानवे रुपये मात्र) है और इ पर विनण"य आज विदनांक 31.01.2011 को घोविर्ष विकया जा रहा है। यह विनण"य माननीय व€च्च न्यायालय द्वारा विवशेर्ष याति का ंख्या ी. ी. 2019[7] 2017/2010-नोएडा बनाम विवष्णु प्र ान और अन्य क े विवरूद्ध जारी विकए ?ए आदेश की आज्ञाकारिर ा क े अनु ार हो?ा । " (प्रभाव वर्धि ) इ क े बाद, विदनांक 04.11.2015 को, इ न्यायालय क े मक्ष नोयडा की अपील को मेरिरट क े आभाव क े कारण खारिरज कर विदया ?या।

11. यह उल्लेख करना भी प्रा ंवि?क है विक, आदेश विदनांक 04.11.2015 क े अनु ार, इ न्यायालय ने दीवानी याति का ं 1107/2009 को भी खारिरज कर विदया, सिज में भोपेंद्र सिं ह ( ुप्रा) में उत्तरां ल क े उच्च न्यायालय क े विनण"य को ुनौ ी विदया ?या र्थीा। पूव€क्त आदेश क े दृविष्ट?, नोएड़ा क े उप मुख्य काय"कारी अति कारी ने विदनांक 11.05.2016 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद और भार क े व€च्च न्यायालय क े आदेश का पालन करने क े लिलए अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण) को एक पत्र लिलखा र्थीा। इ बी, अपीलक ा" ने ंबंति प्राति कारी क े मक्ष अभ्यावेदन को विदया और इ न्यायालय द्वारा पारिर पूव€क्त आदेशों क े ंदभ" में मुआवजे की मां? की परन् ु यह व्यर्थी" हो ला ?या।सिजला मसिजस्ट्रेट, ?ौ म बौद्ध न?र ने विदनांक 08.01.2018 को अपीलक ा" (भूविम मालिलक) क े अभ्यावेदन को खारिरज कर विनम्नानु ार अवलोकन विकयाः - उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" "उपयु"क्त क े दृविष्ट?, यह स्पष्ट है विक जब मामला माननीय उच्च म न्यायालय क े मक्ष न्यायविनण"यन क े लिलए लंविब र्थीा, ो ऐ ी परिरस्थिस्र्थीति यों में, 31 जनवरी, 2011 को त्कालीन अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण), नोएडा, ?ौ म बुद्ध न?र और अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण ), नोएडा, ?ौ म बुद्ध न?र द्वारा इ मामले में माननीय उच्च म न्यायालय क े अंति म आदेशों की घोर्षणा/पारिर नहीं विकया ?या र्थीा।अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण) का विदनांक 31.01.2011 का अति विनण"य/विनण"य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 10.12.2009 को पारिर आदेश और माननीय उच्च म न्यायालय द्वारा विदनांक 10.01.2011 को पारिर स्र्थी?न आदेश का अनुपालन नहीं है, लेविकन यह अति विनण"य/विनण"य त्कालीन अपर सिजला मसिजस्ट्रेट (भूविम अति ग्रहण ), नोएडा, ?ौ म बुद्ध न?र द्वारा पहले ही पारिर /घोविर्ष विकया जा ुका है, इ लिलए कानूनी रूप े इ बिंबदु को सिजला मसिजस्ट्रेट क े स् र पर विनस् ारिर उति नहीं है।" सिजला मसिजस्ट्रेट द्वारा पारिर आदेश े दुखी अपीलक ा" ने सि विवल अपील ं. 731 2013 क े 732 में 2018 की अवमानना याति का (सि विवल) ं. 1841 1842 को दायर विकया। इ न्यायालय ने 22.10.2018 क े आदेश को अपास् कर विदया, पूव€क्त अवमानना को वाप ले लिलया और याति काक ा" को उच्च न्यायालय क े मक्ष उति अनुु ोर्ष प्राƒ करने की स्व ंत्र ा प्रदान विकया ?या।

12. इ न्यायालय द्वारा अवमानना याति का में पारिर आदेश क े दृष्ट?, अपीलक ा" (भूविम का मालिलक) ने पुनः रिरट याति का ंख्या 2272/ 2019 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, सिज में उच्च न्यायालय ने 28.10.2021 को विन ा"रिर भूविम पर अपीलार्थी3 क े स्वत्व क े प्रश्न क े ंबं में विनण"य और आदेश पारिर विकया। "31. हमे पहले इ प्रश्न का हल ढूँढ़ना हो?ा विक क्या ख रा नं. 422 और 427 की 2.18.00 बीघा भूविम क े मुआवजे का दावा करने क े लिलए अक े ले उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" याति काक ा" द्वारा दायर रिरट याति का पोर्षणीय है। प्रत्यर्शिर्थीयों ने व न की स्वीकार करने े इनकार करने क े लिलए ?ौ म बुद्ध न?र क े सि विवल न्याया ीश (जूविनयर तिडवीजन) द्वारा पारिर आदेश विदनांविक 12.09.2002 की एक प्रति प्रस् ु विकया है और दनु ार, पूव€क्त थ्य को णिछपाने क े बारे में आरोप ल?ाए ?ए हैं। यह भी है विक क्षम न्यायालय द्वारा कोई मझौ ा विवलेख या तिड^ी जारी नहीं की ?ई है और इ कारण े, भूविम क े एक ह-मालिलक, अर्थीा" ्, विवष्णु प्र ान ने भूविम क े अति ग्रहण को ुनौ ी देने क े लिलए मामले को अल? े लड़ा। र्थीाविप, हम पा े हैं विक या ी ने फ ली वर्ष" 1407 क े ख ौनी की एक प्रति प्रस् ु की है, जब भूविम क े वल या ी क े नाम पर दज" की ?ई र्थीी। यह भूविम राजस्व अति विनयम, 1996 की ारा 34 क े ह मुकदमा ं. 2441/2010 में विदनांक 01.09.2010 क े आदेश क े अनु रण में र्थीा और सि विवल जज ( ीविनयर तिडवीजन) का विनण"य विदनांविक 17.06.2010 ख रा ं. 422 और 427 की म्पूण" भूविम को व "मान याति काक ा" क े नाम पर दज" करने क े लिलए र्थीा।ख ौनी की एक प्रति पूरक शपर्थी पत्र क े ार्थी प्रस् ु की ?ई र्थीी, सिज े याति काक ा" क े हार्थीों में रिरट याति का की स्थिस्र्थीर ा पर आपलित्त मान्य नहीं है, बस्थिल्क याति काक ा" भू-राजस्व अति विनयम की ारा 34 और दीवानी न्यायालय का विनण"य विदनांक 17.06.2010 क े ह पारिर आदेश क े उपरान् विववादग्रस् ंपलित्त का एकमात्र मालिलक बन ?या। । दनु ार उनका नाम ख ौनी में दज" विकया ?या र्थीा। प्रत्यर्शिर्थीयों ने उत्तरव 3 क े आदेशों को नजरअंदाज कर विदया है सिज क े द्वारा अक े ले याति काक ा" क े नाम पर भूविम दज" की ?ई र्थीी।" इ क े अति रिरक्त, इ पहलू पर विक अनु ू ी ंपलित्त एक क ृ विर्ष भूविम र्थीी अर्थीवा वाणिणस्थिज्यक भूविम, उच्च न्यायालय ने वाद ंख्या 416/1998 और उत्तर प्रदेश औद्योवि?क विवका अति विनयम, 1976 क े प्राव ानों में प्रत्यर्शिर्थीयों क े स्वयं क े अणिभव नों का उल्लेख विकया विक अनु ूति भूविम एक वाणिणस्थिज्यक ंपलित्त र्थीी और उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" दनु ार मुआवजा विन ा"रिर विकया जाए?ा। विवका शुल्क में कटौ ी क े ंबं में, उच्च न्यायालय ने विनम्नानु ार अणिभविनण[3] विकया - "63. प्रत्यर्शिर्थीयों े आशा की जा ी है विक वे प्रश्न? भूविम की क " ल दर को ध्यान में रखें?े और त्पश्चा ् विवलुबेन झालेजर ठेक े दार (पूव€क्त) क े मामले में उच्च म न्यायालय क े विनण"य क े अनु ार विवका की विदशा में युविक्तयुक्त कटौ ी करें?े जो 20% और 50% क े बी हो क ी है।

64. यविद ऊपर उद्धृ विनण"य में शीर्ष" न्यायालय द्वारा प्रति पाविद कानून का प्रस् ाव ला?ू विकया जा ा है, ो प्रश्न? भूविम में प्रति व?" मीटर 1,10,000/- रुपये की क " ल दर लेकर मुआवजे का विन ा"रण विकया जाना ाविहए र्थीा और उ पर विवका क े लिलए कटौ ी विकया जाना ाविहए।विवका शुल्क इ में े 50% की ीमा क अति क म हो क ा है और दनु ार प्रत्यर्शिर्थीयों को भूविम का बाजार मूल्य होने क े लिलए रु. 5,000/- प्रति व?" मीटर लेना ाविहए र्थीा।

65. आति कारिरक प्रत्यर्शिर्थीयों ने यह कर े हुए देखा विक भूविम अति विनयम, 1894 की ारा 4 क े ह अति ू ना े डेढ़ ाल पहले प्रत्यर्थी3 ं. 7 को आवंविट की ?ई र्थीी। यह 12.04.2004 क े आवंटन पत्र द्वारा किया गया था।उस पर सर्ककया ?या र्थीा।उ पर कल रेट 16.04.2004 को विन ा"रिर विकया ?या र्थीा। प्रत्यर्थी3 ं. 7 को विकया ?या भूविम का आवंटन याति काक ा" की भूविम े 8 ?ुना बड़ा र्थीा और यह आवंटन डेढ़ ाल पहले विकया ?या र्थीा।शीर्ष" अदाल क े फ ै ले को ला?ू कर े मय, बाजार मूल्य @Rs. 55,000/- Rs. 55,000/- प्रति व?" मीटर लिलया जाना ाविहए र्थीा। र्थीाविप, उच्च म न्यायालय क े विदनांक 10.12.2009 क े विनण"य क े विवरूद्ध विदनांक 11.01.2011 को अं रिरम आदेश पारिर कर विदये जाने क े कारण प्रत्यर्शिर्थीयों ने इ न्यायालय द्वारा विदए ?ए विनदेश क े अनु ार प्रति कर का विन ा"रण नहीं विकया। और अं में, उच्च न्यायालय ने विनम्नलिललिख विनदŒशों क े ार्थी याति का का विनस् ारण कर विदया - उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" "69. दनु ार, हम 31.01.2011 क े पं ाट में हस् क्षेप का कारण पा े हैं और प्रत्यर्थी3 को मुआवजे का विन ा"रण करने का विनदŒश दे े हैं -

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1. प्रत्यर्शिर्थीयों को विनदŒश विदया जा ा है विक वे ेक्टर -18 की क " ल दर पर विव ार करें क्योंविक प्रत्यर्थी3 ं.[5] द्वारा दायर काउंटर शपर्थी पत्र क े अनुलग्नक-7 में 16.04.2004 विदया ?या र्थीा ।5. यह ेक्टर-18 क े लिलए 1,10,000/- प्रति व?" मीटर र्थीा।विवका शुल्क क े लिलए 50% कटौ ी करने क े बाद, यह रु. 55,000/- प्रति व?" मीटर और दनु ार मुआवजा 2.18 बीघा भूविम क े लिलए पूव€क्त दर पर विन ा"रिर विकया जाए?ा।

3. इ क े बाद 30% क े ोलैविटयम का जोड़ बनाया जाए?ा।पैरा (1) और (2) में विनदŒश क े अनु ार य की ?यी राणिश कब्जे की ारीख े एक वर्ष" क े लिलए 9% प्रति वर्ष" ब्याज क े ार्थी देय हो?ी अर्थीा" फरवरी, 2005 और उ क े बाद अति विनयम, 1894 की ारा 34 क े अनु ार 15% प्रति वर्ष"।

4. वर्ष" 2017 में जमा की ?ई राणिश क े वल जमा होने क 15% की दर े ब्याज अर्जिज करे?ी। जमा की ?ई राणिश का भु? ान याति काक ा" को उ पर अर्जिज ब्याज क े ार्थी विकया जाए?ा।

5. याति काक ा" को मुआवजे की राणिश का भु? ान विकया जाए?ा।"

13. 'भूविम अति ग्रहण में उति मुआवजा और पारदर्शिश ा का अति कार अति विनयम, 2013' की ारा 24 की प्रयोज्य ा क े मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने कहा विक, 'इंदौर विवका प्राति करण बनाम मनोहर लाल और अन्य, 2020 (8) ए ी ी 129' में इ न्यायालय क े विनण"य क े अनुपा को ध्यान में रख े हुए ारा 11 (ए) क े ह विन ा"रिर अवति े आ?े पारिर अति विनण"य क े लिलए अति ग्रहण क े व्यप? होने क े क " को स्वीकार नहीं विकया जा क ा है। उक्त विनण"य का परिरशीलन करने क े उपरान्, यह स्पष्ट है विक अति विनयम,2013 की ारा 24 (1) (ए) ?ैर-लाभकारी ारा क े ार्थी शुरू हो ी है और यह कह ी है विक जहां अति विनयम,1894 क े ह काय"वाही शुरू की ?ई है, लेविकन ारा 11 क े उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" ह विनण"य नहीं विदया ?या है, वहां मुआवजे क े विन ा"रण े ंबंति अति विनयम, 2013 क े प्राव ान ला?ू हों?े। व "मान मामले में, सि विवल याति का ं 731732 वर्ष" 2013 में 10.01.2011 को स्टे क े बाद 31.01.2011 को पं ाट जारी विकया विकया ?या र्थीा, यद्यविप यह 5 ाल की देरी े र्थीा।04. 11. 2015 को पारिर अंति म आदेश द्वारा, उक्त अपीलों को खारिरज कर विदया ?या।इ क े बाद, अपीलक ा" द्वारा 1,10,000 रुपये प्रति व?" मीटर की दर े मुआवजा मां? े हुए अभ्यावेदन विदया ?या र्थीा। जै ा विक उच्च न्यायालय क े अं र-पक्षकार द्वारा भोपेंद्र सिं ह (पूव€क्त) क े फ ै ले का अवलम्ब ले े हुए विनदŒश विदया ?या र्थीा, सिज को विदनांक 08.01.2018 क े आदेश द्वारा खारिरज कर विदया ?या र्थीा। त्पश्चा, उच्च न्यायालय क े आदेश का पालन न करने का आरोप ल?ा े हुए अवमानना याति काएं दायर की ?ई ं, सिजन्हें उति उपाय का लाभ उठाने क े लिलए अपीलक ा" को स्व ंत्र ा प्रदान कर े हुए वाप ले लिलया ?या।इ प्रकार, अति विनयम,2013 क े प्रारम्भ की ारीख पर, कब्जा कर लिलया ?या र्थीा और पं ाट पारिर विकया ?या र्थीा, हालांविक कणिर्थी रूप े यह ?ैर-आस्थिस् क र्थीा।हमारी राय में, आक्षेविप आदेश क े अनु ार, वाणिणस्थिज्यक भूविम क े लिलए 1,10,000 रुपये/व?" मीटर क े क " ल रेट क े अनु ार मुआवजे का विन ा"रण भोपेंद्र सिं ह (ऊपर) क े विनण"य क े आलोक में अविनण[3] विवर्षय र्थीा और पं ाट, ाहे ही या ?ल रूप े पारिर विकया ?या र्थीा, अति विनयम, 2013 क े प्रव "न की ारीख पर अस्थिस् त्व में र्थीा। इ प्रकार हमारी राय में, उच्च न्यायालय ने क्षति पूर्धि को विन ा"रिर करने लिलए अति विनयम, 2013 क े प्रव "न क े मुद्दे पर हस् क्षेप करने े इंकार कर इंदौर प्राति करण पर पारिर विनण"य ( ुप्रा) का अवलम्ब लिलया है, जो ही है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"

14. आक्षेविप आदेश े दुखी अपीलक ा" (भूविम-स्वामी) और नोएडा ने अल?-अल? अपील दायर की है, सिजन्हें एक ार्थी ुना जा ा है। अपीलार्थी3 क े वरिर„ अति वक्ता श्री रंजी क ु मार अति विनयम,2013 की ारा 24 की प्रयोज्य ा क े बिंबदु क े अलावा, सिज का ऊपर उल्लेख विकया ?या है, विनम्नानु ार क " विदया है - (a). यह विक, सिजला मसिजस्ट्रेट द्वारा पारिर 31.01.2011 का पं ाट इ न्यायालय ार्थी- ार्थी इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े आदेश क े उल्लंघन में र्थीा। (b). पं ाट स्वयं अणिभस्वीकार कर ा है विक यह आकस्थिस्मक प्रक ृ ति र्थीा । (c). अपीलक ा" को व्यविक्त? रूप े नहीं ुना ?या र्थीा, भले ही नोएडा को अनु ूति ंपलित्त में अपीलक ा" क े विह क े बारे में प ा र्थीा। (d). आक्षेपति पं ाट एक शून्य काय"वाही र्थीी क्योंविक अति विनयम, 1894 की ारा 9 क े ह ुनवाई की ारीख क े दो विदन बाद उ की ाव"जविनक ू ना दी ?ई र्थीी। (e). यह पं ाट भी ुनवाई की ारीख े 5 वर्ष" की देरी े पारिर विकया ?या र्थीा, जो अति विनयम, 1894 की ारा 11 ए क े ह अति देश का उल्लंघन कर ा है। इ लिलए क्षति पूर्धि क े पं ाट की ति णिर्थी को या ो आ?े बढ़ा विदया जाना ाविहए अर्थीवा बदल विदया जाना ाविहए, ूंविक क्षति पूर्धि को वर्ष" 2017 में जमा कर विदया ?या र्थीा, इ लिलए क्षति पूर्धि की नराणिश को अति विनयम, 2013 क े अनु ार विन ा"रिर करना हो?ा। (f). विवका शुल्क क े ंबं में कटौ ी नहीं की जा क ी है क्योंविक अति ग्रहण े पहले ही भूखंड विवकसि विकया ?या र्थीा । उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" (g). नोएडा ने अति ग्रहण े पहले ही अनु ू ी ंपलित्त को अवै रूप े बे विदया जो ंविव ान क े अनुच्छेद 300 ए क े ह ंपलित्त क े अति कार का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐ े ंवै ाविनक अपक ृ त्य को अवश्य दस्थिण्ड़ विकया जाना ाविहए और प्रत्यर्थी3 अति कारिरयों को अपने स्वयं क े ?ल काय~ का लाभ नहीं लेना ाविहए।

15. इ क े विवपरी, श्री बलबीर सिं ह ने, अपर ॉलिलसि टर जनरल को नोएडा की ओर े विनम्नानु ार क " विदया है - (a). अपीलक ा" 31,850/- रुपए े अति क क े मुआवजे पाने का अति कारी नहीं है, जो प्रत्यर्थी3 ं. 7 (डीएलएफ) द्वारा विनविवदा की ?ई कीम र्थीी। (b). इ न्यायालय द्वारा 'अविनल क ु मार श्रीवास् व बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2004) 8 ए ी ी 671' क े मामले में 31,850/- रुपए की अणिभकणिर्थी कीम का न्यायविनण"यन युविक्तयुक्त आ ार पर विकया ?या है। (c). यह माना ?या है विक प्रत्यर्थी3 ं.-7 (डीएलएफ) को अनु ूति भूविम क े अति ग्रहण की ारीख े पहले आवंटन विकया ?या र्थीा; (d). अपीलक ा" (भूस्वामी) ने वर्ष" 1997 में 1 करोड़ रुपये की विव^य पर विव ार करने क े लिलए ंपलित्त का अति ग्रहण विकया। पहले क े भू-स्वाविमयों में े विवष्णु व "न ने 07.06.2006 को विव^य का करार विकया र्थीा, सिज का विव^य प्रति फल मात्र 3 करोड़ रु. र्थीा। इन ंव्यवहार े ंक े विमल ा है विक उपरोक्त भूविम एक क ृ विर्ष भूखंड र्थीी, विफर भी, अनु ूति भूविम को क ृ विर्ष भूविम या व€त्तम आवा ीय क े रूप में ति वित्र करना हो?ा। (e). अति विनयम, 1894 की ारा 18 क े ह ?विठ न्यायालय ने मुआवजे का विन ा"रण करने में विनदŒश जारी कर उच्च न्यायालय की अनदेखी की है। (f). विवका प्रभार की कटौ ी 50% क े बजाय 75% करनी हो?ी; उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" (g). उच्च न्यायालय द्वारा विदया ?या मुआवजा अपीलक ा" क े लिलए अन्यायपूण" हो?ा सिज े कानून क े ह कायम नहीं रखा जा क ा है।

16. राज्य की ओर े उपस्थिस्र्थी अपर महाति वक्ता श्री रायजादा ने कहा है विक प्रश्न? भूविम को बेनामी ंपलित्त क े रूप में खरीदा ?या र्थीा और इ लिलए, अपीलक ा" क े वल राणिश क े 1/3 पाने का हकदार है।

17. प्रत्यर्थी3 नं. 7 क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा है विक, यह विववाद नोएडा और अपीलक ा" क े बी है और प्रत्यर्थी3 नं. 7 क े पा यह कहने क े अलावा क ु छ नहीं है विक अविनल क ु मार श्रीवास् व ( ुप्रा) में इ न्यायालय क े मक्ष भूविम का आवंटन वाद का विवर्षय र्थीा, सिज ने नीलामी की प्रवि^या क े द्वारा आवंटन को बरकरार रखा है। हालांविक, मुआवजा, यविद बढ़ाया ?या, ो क े वल नोएडा क े विवरूद्ध विनदŒणिश विकया जा क ा है।

18. दोनों पक्षों द्वारा उठाए ?ए प्रति द्वंद्वी दावों क े ?ुण-दोर्षों पर कहने े पहले, शुरुआ में यह उल्लेख करना प्रा ंवि?क है विक सि विवल विवविव रिरट याति का ंख्या 75152 वर्ष" 2005 में उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 10.12.2009 को पारिर विनण"य की वै ाविनक ा ने इ न्यायालय की ंवीक्षा को बरकरार रखा है और इ े दीवानी याति का ं 731732 वर्ष" 2013 में विदनांक 04.11.2015 क े आदेश द्वारा बरकरार रखा ?या है। यह विनण"य ने पक्षकारों क े बी अस्थिन् म हो ुका है। यह प्रत्यर्शिर्थीयों का मामला नहीं है विक पूव" विनण"य क े ार्थी - ार्थी आक्षेविप आदेश को अक्षम प्राति कारी द्वारा पारिर विकया ?या है। दू रे शब्दों में, उक्त विनण"य ने प्रभावी रूप े विववाद को दोनों पक्षकारों क ीविम कर विदया है। इ प्रकार, इ मामले में ंयो?वश जो क ु छ भी शेर्ष रह ा है, वह प्र लिल कानून क े आलोक में उच्च न्यायालय द्वारा विदए ?ए उन विनदŒशों का पालन करना है। इ लिलए, अति ग्रही भूविम क े लिलए मुआवजे क े भु? ान पर पूरी रह े विववाद करने वाला क " अस्थिस्र्थीर है उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" और इ स् र पर विव ार नहीं विकया जा क ा है। उच्च न्यायालय द्वारा विनकाले ?ए विनष्कर्ष" पर इ न्यायालय द्वारा पुविष्ट की मोहर ल?ा दी ?ई है और इ लिलए, अपीलक ा" का यर्थीाविन ा"रिर अव ारण की श ~ में मुआवजा प्राƒ करने का अति कार स्पष्ट हो ?या है और इ में हस् क्षेप नहीं विकया जा क ा है ।यह अन्यायपूण" और अनुति हो?ा विक मुद्दों को विफर े शुरू करने की अनुमति दी जाए और अपीलक ा" को दो बार ं? विकया जाए, जबविक मामले को पहले ही पक्षकारों क े बी आक्षेविप विनण"य द्वारा य विकया जा ुका है।

19. इ विबन्दु पर, हम 'आर. उन्नीक ृ ष्णन और अन्य बनाम वी. क े. महानुदेवन और अन्य, (2014) 4 ए. ी. ी. 434' का ंदभ" देना उति मझ े हैं, सिज क े प्रस् र-19 में न्यायालय ने विनम्नलिललिख म व्यक्त विकया है - "19. यह आम बा है विक कानून उन न्यायालयों द्वारा ुनाए ?ए बाध्यकारी न्यातियक विनण"यों को अंति म रूप देने क े पक्ष में है जो इ विवर्षय े विनपटने क े लिलए क्षम हैं।जनविह एक ही रह क े मुकदमे े दो बार परेशान विकए जाने क े लिखलाफ है। क्षम अति कारिर ा वाले न्यायालयों द्वारा ुनाए ?ए फ ै लों की बाध्यकारी प्रक ृ ति को हमेशा विवति क े शा न का एक अविनवाय" विहस् ा माना ?या है जो इ देश में न्याय प्रशा न का आ ार है"हम दरिरयाओ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य [ए. आई. आर. 1961 ए. ी. 1457] 'में इ न्यायालय की ंविव ान पीठ क े विनण"य को लाभप्रद रूप े विनकिया गया था।उस पर सर्कदष्ट कर क े हैं जहां न्यायालय ने ंक्षेप में विनम्नलिललिख शब्दों में विवति का ारांश विदयाः

9. …...यह व्यापक रूप े जन ा क े विह में है विक क्षम अति कारिर ा वाले न्यायालयों द्वारा ुनाए ?ए बाध्यकारी विनण"यों को अंति म रूप विदया जाना ाविहए और यह भी जनविह में है विक व्यविक्तयों को एक ही प्रकार की मुकदमेबाजी े दो बार परेशान नहीं विकया जाना ाविहए। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" * * *

11. क्षम अति कारिर ा वाले न्यायालयों द्वारा ुनाए ?ए विनण"यों का बाध्यकारी प्रक ृ ति अपने आप में विवति क े शा न का एक अविनवाय" भा? बन जा ा है, और कानून का शा न स्पष्ट रूप े न्याय प्रशा न का आ ार है सिज पर ंविव ान अत्यति क जोर दे ा है। "20. इ लिलए, अंति म रूप प्राƒ करने वाले विनण"य की बाध्यकारी प्रक ृ ति क े ंबं में य कानूनी स्थिस्र्थीति क े दृविष्ट?, इ में कोई ंदेह नहीं है विक नोयडा भोपेंद्र सिं ह ( ुप्रा) क े मामले में प्रति पाविद विवति क े अनु ार मुआवजे का विन ा"रण करने क े लिलए अविनवाय" रूप े बाध्य है। भोपेंद्र सिं ह ( ुप्रा) का ु ं? अंश विनम्मानु ार प्रस् ु विकया जा रहा हैः 4....विवद्वान ंदभ" न्यायालय ने इ ी रह की भूविम क े बाजार मूल्य का मूल्यांकन इ आ ार पर विकया है विक विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी द्वारा उ ी क्षेत्र की अन्य भूविम का भी उक्त दर पर अति ग्रहण विकया ?या र्थीा।हालांविक, अपीलक ा"ओं क े विवद्वान अति वक्ता ने दलील विदया विक प्रश्न? भूविम उ भूविम क े विवपरी मुख्य ड़क े टी हुई है सिज े ंदभ" अदाल ने विव ार में लिलया र्थीा।इ क े अति रिरक्त यह दलील विदया जा ा है विक प्रश्न? भूविम का मूल्य रु. 50/- व?" फीट े कम नहीं होना ाविहए र्थीा। पक्षकारों द्वारा प्रस् ु मौलिखक ाक्ष्य क े परिरशीलन पर हमने पाया विक पीडब्लू 1 श्रीम ी राज दुलारी ने कहा है विक वर्ष" 1976 में प्रश्न? भूविम का मूल्य रु. 50 प्रति व?" फीट र्थीा।पीडब्लू 2 अरबिंवद सिं ह, पीडब्लू 3 रणवीर सिं ह और पीडब्लू 4 हरपाल सिं ह ने भी इ ी रह क े बयान विदए हैं। लेविकन भूविम अति ग्रहण क े मामले में बाजार मूल्य का आकलन करने का ब े अच्छा रीका यह है विक ंबंति भूविम क े पड़ो में इ ी रह की भूविम क े खरीदार द्वारा भु? ान की ?ई कीम की जां की जाए। इ रह क े लेन-देन, यविद अति ग्रहण की अति ू ना की ारीख क े नजदीक है, ो इ े अदाल ों को भूविम क े अति क टीक बाजार मूल्य का आँकलन करने में मदद विमले?ी। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" हालाँविक, व "मान मामले में उपरोक्त ?वाहों में े विक ी ने भी पा की मान भूविम े ंबंति अनुकरणीय विब^ी विवलेख क े रूप में कोई बू नहीं प्रस् ु विकया ?या है। इ रह की विब^ी क े अभाव में, हम उ.प्र. स्टाम्प (प्रर्थीम ंशो न) विनयमावली, 1976 क े विनयम 340 क े ह नैनी ाल क े कलेक्टर द्वारा आ पा की भूविम का विकये ?ये मूल्यांकन को देखने क े लिलए बाध्य हैं। का?ज ं. 44 ी/1 क " ल दर की प्रति है सिज में विब^ी क े लिलख क े पंजीकरण क े लिलए कलेक्टर द्वारा मूल्यांकन विकए ?ए बाजार मूल्य को दशा" ा है। उक्त दस् ावेजों े प ा ल ा है विक दस् ावेजों पर स्टाम्प शुल्क ल?ाने क े लिलए प्रश्न? भूविम का क " ल रेट ड़क े टे भूविम क े बाजार मूल्य का रु. 95 -135 प्रति व?" मीटर और ड़क े दूर रु. 67 - 80 प्रति व?" मीटर है। अणिभलेख पर ाक्ष्य े यह स्पष्ट है विक प्रश्न? भूविम मुख्य ड़क क े विनकट र्थीी। इ प्रकार किया गया था।उस पर सर्ककल रेट क े अनु ार प्रति व?" मीटर 95 रुपये े कम स्टांप ड्यूटी व ूल करने क े उद्देश्य े बाजार मूल्य य विकया ?या र्थीा।भूविम क े मालिलक क े ार्थी अन्याय हो?ा यविद स्टांप शुल्क को व ूलने क े लिलए हम क " ल दर ला?ू कर े हैं और उ की भूविम क े अति ग्रहण पर मुआवजे का भु? ान करने में कम े कम उक्त दर को अस्वीकार कर े हैं ।इ भूविम का कु ल क्षेत्रफल 2900 व?" ?ज है। विवद्वान ंदभ" न्यायालय ने व?" ?ज क े ंदभ" में क्षेत्र क े ार्थी प्रति व?" फीट की दर को ?ुणा करक े कानून में त्रुविट की है।इ ीलिलए ?ल ?णना क े कारण यह राणिश रु. 17,400/- पर अटकी हुई है। 0.[6] एकड़ का क्षेत्रफल 2900 व?" ?ज क े बराबर है, जो 2397 व?" मीटर क े बराबर है। यविद हम क " ल रेट क े आ ार पर बाजार मूल्य का आकलन कर े हैं ो यह रु. 95/- प्रति व?" हो ा है। वर्ष" 1976 में भूविम का बाजार मूल्य रुपये 95/ ए-2397.80 व?" मीटर = 2,27,791 रुपये/ आया। xxx xxx xxx

12. क " ल क े लिलए विन ा"रिर बाजार मूल्य, न्यून म वै ाविनक बाजार मूल्य है, स्टांप अति विनयम क े ह बनाए ?ए वै ाविनक विनयमों क े अनु ार, जै ा विक उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" उ.पर. अति विनयम द्वारा ंशोति विकया ?या है, सिज क े आ ार पर, ारा 3 े जुड़ी अनु ू ी क े अनु ार स्टांप शुल्क का भु? ान विकया जा ा है और विब^ी विवलेख का भु? ान उक्त न्यून म बाजार मूल्य पर भु? ान विकए ?ए स्टांप शुल्क क े भु? ान क े बाद ही विकया जाए?ा और यविद पंजीकरण प्राति करण की राय में ंपलित्त का मूल्य विनयमानु ार विन ा"रिर न्यून म मूल्य े अति क है, ो वह इ मामले को प्राति करण को ंदर्शिभ कर क ा है जो अति क स्टांप शुल्क का भु? ान करने क े लिलए विव^ े ा े अपेक्षा कर क ा है। और यविद भु? ान नहीं विकया जा ा है ो वह विब^ी विवलेख को जब् ़ कर क ा है।इ प्रकार, शविक्त का प्रयो? विनयमानु ार विन ा"रिर न्यून म बाजार मूल्य है।यविद राजस्व बढ़ाने क े लिलए रकार ंपलित्त का बाजार मूल्य य कर ी है ो इ े भूविम अति ग्रहण अति विनयम क े उद्देश्य क े लिलए ंपलित्त क े न्यून म बाजार मूल्य क े रूप में क्यों नहीं लिलया जाना ाविहए। भूविम अति ग्रहण अति विनयम की ारा 23 क े ह उपबंति बाजार मूल्य क े विन ा"रण की प्रवि^या स्टाम्प अति विनयम क े ह बनाए ?ए विनयमों क े अनुरूप है।इ लिलए, हम मान े हैं विक भूविम अति ग्रहण अति विनयम क े ह अति ग्रविह भूविम क े लिलए मुआवजे े ब े हुए, मुआवजे का भु? ान स्टाम्प अति विनयम क े ह स्टाम्प शुल्क क े भु? ान क े उद्देश्य े विन ा"रिर बाजार मूल्य की ुलना में कम दर पर नहीं विकया जा क ा। (प्रभाव वर्धि )

21. पूव€क्त का परिरशीलन मात्र यह स्पष्ट हो जा ा है विक, मुआवजे का विन ा"रण उ क " ल रेट को ध्यान में रखकर विकया जाना ाविहए जो बाजार मूल्य क े अनु ार विन ा"रिर विकया ?या है। विक ी ंपलित्त का बाजार मूल्य वह मूल्य है जो एक इच्छ ु क ^ े ा द्वारा उ म्पलित्त की व "मान स्थिस्र्थीति, भी मौजूदा लाभों और ंभाविव ंभावनाओं को ध्यान में रख े हुए इच्छ ु क विव^ े ा को ब भु? ान कर ा है, जब विक ी भी लाभ क े सि वाय उ योजना क े काया"न्वयन े सिज क े लिलए ंपलित्त अविनवाय" रूप े अति ग्रविह विकया जा ा है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" इ लिलए, प्रश्न? भूविम क े पड़ो में स्थिस्र्थी उ ी क े जै ी भूविम क े खरीदार द्वारा भु? ान की ?ई कीम क े आलोक में बाजार मूल्य विन ा"रिर विकया जाना है और ऐ े मामलों में, जहां इ रह क े लेनदेन/खरीद क े लिलए कोई रिरकॉड" उपलब् नहीं है, स्टांप अति विनयम क े अनु ार न्यून म वै ाविनक मूल्य क " ल रेट क े लिलए बाजार मूल्य क े रूप में लिलया जाना ाविहए।

22. प्रस् ु मामले में, ूंविक भूविम क े अनु ूति खण्ड़ पर अपीलक ा" क े स्वत्व का प्रत्यर्थी3 द्वारा विवरो नहीं विकया ?या है और न्यायविनण"यन क े वल मुआवजे की मात्रा क ही ीविम है, इ लिलए हम स्वाविमत्व क े ंबं में उच्च न्यायालय क े विनष्कर्ष~ में हस् क्षेप नहीं करना उति मझ े हैं।जै ा भी हो, आ?े बढ़ े हुए, ?ौ मबुद्ध न?र क े सिजलाति कारी द्वारा 27 मा ", 2004 को पारिर आदेश सिज में क " ल रेट 1,10,000 रुपये प्रति व?" मीटर अति ूति है वह भी रिरकॉड" पर है, जो नोएडा में स्थिस्र्थी वाणिणस्थिज्यक ंपलित्तयों, आवा ीय ंपलित्तयों आविद पर ला?ू हो ा है। इ क े अलावा, अति ग्रविह भूविम की प्रक ृ ति भी इ कारण े विववाद में नहीं है विक, नोयडा ने स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा की मां? कर े हुए अपीलक ा" सि विवल वाद ं. 416/1998 दायर विकया सिज में यह खुद स्वीकार विकया विक यह भूविम वाणिणस्थिज्यक उद्देश्यों क े उपयो? क े लिलए विन ा"रिर की ?ई है और इ लिलए, यह एक मूल्यवान भूविम है।रिरट याति का ंख्या 75152 वर्ष" 2005 में उच्च न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेश क े अनुपालन में प्रस् ु राजस्व विनरीक्षक की रिरपोट" विदनांक 05.08.2008 द्वारा यह थ्य भी पुष्ट हो ?या है।उक्त रिरपोट" े स्पष्ट है विक मौक े पर ही ख रा ंख्या 422 व 427 की भूविम को ेक्टर 18 क े विहस् े में परिरवर्धि कर विदया ?या र्थीा, सिज क े लिलए ीमांकन क े लिलए कोई विनतिश्च पह ान बिंबदु न होने क े कारण ीमांकन ंभव नहीं है क्योंविक भूविम पूण" रूप े विवकसि है।इ उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" प्रकार, नोएडा इ मामले में यह नहीं कह क ा विक भूविम या ो क ृ विर्ष योग्य है या व€त्तम आवा ीय है।इ प्रकार, प्रस् ु क " रिरकॉड" क े विवपरी हैं, च्चाई े बहु दूर हैं और इ का मर्थी"न नहीं विकया जा क ा है।

23. अब, अविनल क ु मार श्रीवास् व (पूव€क्त), जो इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े मक्ष दायर की ?ई एक जनविह याति का र्थीी और बाद में इ न्यायालय को हस् ां रिर की ?ई र्थीी, क े विनण"य पर विनभ"र कर े हुए राज्य क े विवद्वान एतिडशनल ॉलीसि टर जनरल और प्रत्यर्थी3 ंख्या 7 क े अति वक्ता द्वारा प्रस् ु क " का भी विवश्लेर्षण विकए जाने की आवश्यक ा है। इ अदाल ने उपरोक्त मामले में नोएडा द्वारा 2003 में जारी की ?ई विनविवदा को ुनौ ी दी र्थीी और उक्त जनविह याति का को विनम्नानु ार अवलोकन कर े हुए खारिरज कर विदया र्थीा - "7. जवाब में, प्रत्यर्थी3 ं. 2 ने ब ाया है विक आक्षेविप योजना का व्यापक प्र ार विकया ?या; यह विक 54, 320.18 व?" मीटर क े भूखंड का विवका ेक्टर 18 की भीड़-भाड़ कम करने क े लिलए करना आवश्यक हो ?या र्थीा ूंविक वहां कार पार्किंक? एक विवकट मस्या बन ुकी है; यह विक पार्किंक? ुविव ा क े ार्थी शॉबिंप? मॉल का विनमा"ण करक े भीड़भाड़ कम विकया जा क ा है; हालांविक, प्रश्न? प्लॉट का क्षेत्रफल 54, 320.18 व?" मीटर है, एफएआर 150 क ीविम है और ग्राउंड कवर 30% क ीविम है, जबविक या ी द्वारा प्रस् ु भूखंडों इ प्रकार हैं- अपेक्षाक ृ छोटे प्लॉट 60007000 व?" मीटर, एफ०ए०आर० 150 है और 600 व?" मीटर क े छोटे भूखंडों क े लिलए, एफ०ए०आर० 250 है (अनुलग्नक पी 1 देखें)। यह विक प्राति करण विक 54,

320.18 व?" मीटर क े उक्त भूखंड की पेशकश करक े आं रिरक विवका पर ुविव ाओं, पार्किंक?, आविद की ब कर रहा है।एम।, प्राति करण है xxx xxx xxx

9. याति काक ा" की ओर े उपस्थिस्र्थी विवद्वान वरिर„ अति वक्ता श्री एल. ना?ेश्वर राव ने प्रस् ु विकया विक प्रति वादी नं. 2 द्वारा 27,500 रुपये प्रति व?" मीटर उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" की दर े विन ा"रिर आरतिक्ष मूल्य, बोड" क े विदनांक 10-7-2003 क े ंकल्प क े खंड 29-2 (ई) क े विवपरी है विक उक्त खंड क े ह, 5001 व?" मीटर या उ े अति क आकार क े वाणिणस्थिज्यक भूखंडों की आरतिक्ष दर, क्षेत्रवार दर की ुलना में 90 हजार रुपये प्रति व?" मीटर र्थीी। यह विनवेदन विकया ?या र्थीा विक 27,500 रुपये प्रति व?" मीटर क े कम आरतिक्ष मूल्य पर 54,320.18 व?" मीटर क े अणिभकणिर्थी भूखंड क े हस् ां रण े राज्यकोर्ष को 340 करोड़ रुपये का भारी नुक ान हो?ा। xxx xxx xxx

14. उपरोक्त परीक्षणों को इ मामले क े थ्यों पर ला?ू कर हमने पाया है विक अणिभलेख पर यह प्रदर्शिश करने क े लिलए कोई ामग्री नहीं है विक 31,850 रु. प्रति व?" मीटर की विनविवदा कीम एक कम कीम है। याति का का पूरा ढां ा 27,500 रुपये प्रति व?" मीटर क े आरतिक्ष मूल्य को दी ?ई ुनौ ी पर आ ारिर है।जै ा विक ब ाया ?या है, आरतिक्ष मूल्य क े विन ा"रण क े बावजूद, या ी 31,850 रुपये प्रति व?" मीटर याति काक ा" मूल्य को ुनौ ी देने क े लिलए स्व ंत्र र्थीा.30 प्रति श और 150 एफ.ए.आर. क े मान मापदंडों क े ार्थी कोई ुलनात्मक विब^ी उदाहरण हमारे ामने नहीं रखे ?ए हैं। 2800 ई ीए की ला? क े बं कोई आंकड़ा हमारे मक्ष नहीं रखा ?या है क्योंविक ऐ ी ला? ों े आरतिक्ष मूल्य में वृतिद्ध हो ?ी। दू री ओर, हम पा े हैं विक आरतिक्ष मूल्य कई कारकों को ध्यान में रखकर य विकया ?या है। व"प्रर्थीम, अ ी में उच्च आरतिक्ष मूल्य वाले अपेक्षाक ृ छोटे भूखंडों क े लिलए आमंवित्र विनविवदाएं विवफल हो ?ई र्थीीं।यह ध्यान रखना महत्वपूण" है विक विनविवदा प्रवि^या एक महं?ी प्रवि^या है।इ प्रवि^या का बार-बार हारा लेना एक महं?ा मामला है।दू रा, व "मान मामले में, आ -पा क े क्षेत्रों में ुलनात्मक प्रस् ावों /विब^ी को ध्यान में रखकर आरतिक्ष मूल्य य विकया ?या र्थीा........ उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"

15. उक्त उप ारा को पढ़ने े यह प ा ल ा है विक रू. 90,000 क े आंकड़े का उल्लेख नहीं विकया ?या है। यह याति काक ा" द्वारा अणिभकणिर्थी एक आंकड़ा है। जै ा विक ऊपर कहा ?या है, क " ल रेट और ेक्टर रेट क े बी अं र है। याति काक ा" ने दोनों को भ्रविम विकया है। उप-पंजीयक क े मा?"दश"न क े लिलए क " ल रेट को रकार द्वारा अति ूति विकया जा ा है। उ े राजस्व क े प्रायोजनों क े लिलए अति ूति विकया ?या है। ऐ ा कु छ भी नहीं है सिज े यह प ा ल ा हो विक ेक्टर रेट रू. 90,000 प्रति र्थीा। व "मान मामले में, हम 54, 320.18 व?" मीटर क े बड़े भूखंड क े ार्थी 30% ग्राउंड कवर और 150 एफएआर े ंबंति हैं। इन भी कारकों को ध्यान में रख े हुए प्राति करण ने आरतिक्ष मूल्य य विकया है। व "मान मामले में, आरतिक्ष मूल्य क े विन ा"रण को अनुति महत्व विदया ?या है। जै ा विक ऊपर कहा ?या है, आरतिक्ष मूल्य क े बावजूद, याति काक ा" अवमूल्यन विदखाने क े लिलए न्यायालय ामग्री, यविद कोई हो, क े मक्ष ला क ा र्थीा।व "मान मामले में विनविवदा मूल्य 31,850 रुपये प्रति व?" मीटर है, जो आरतिक्ष मूल्य े अति क है। ऐ ी कोई ामग्री नहीं है सिज े यह दर्शिश हो विक क्या विनविवदा की कीम कम ब ाई ?ई है।इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, याति काक ा" क े इ क " में कोई बल नहीं है विक भूविम अत्यति क कम कीम पर विव^य की ?ई है।" (प्रभाव वर्धि )

24. पूव€क्त विनण"य को पढ़ने े यह स्पष्ट है विक जनविह याति का में, याति काक ा" ने आरतिक्ष दर को क े वल इ लिलए ुनौ ी दी र्थीी विक उ की कीम बहु कम र्थीी और प्रति व?" मीटर 31,850 रुपये की विनविवदा कीम को ुनौ ी नहीं दी र्थीी। इ क े अति रिरक्त जनविह याति का याति काक ा" ने अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी भूखण्ड़ क े वास् विवक बाजार मूल्य या स्टाम्प अति विनयम क े ह विन ा"रिर क " ल रेट क े बारे में कोई बू नहीं विदखाया र्थीा। यह उति रूप े स्वीकार विकया ?या र्थीा विक नोएडा की ओर े पेश विवद्वान अति रिरक्त ॉलिलसि टर उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" जनरल द्वारा बह क े दौरान नोएडा ने इ थ्य को प्रकट नहीं विकया है विक वे औप ारिरक अति ग्रहण विकए विबना ी रे पक्ष की भूविम की नीलामी करने का इरादा रख े र्थीे। यह उल्लेख करना अप्रा ंवि?क नहीं है विक, नोएडा द्वारा प्रत्यर्थी3 ं. 7 को भूविम ौंपने क े काय" पर जनविह याति का में जोर विदया ?या र्थीा वह मनमाना र्थीा। जबविक व "मान मामले में, ी रे पक्ष की भूविम क े लिलए मुआवजा देने पर जोर विदया ?या है, सिज की भूविम दुभा"वना े और बलपूव"क विबना विक ी औप ारिरक अति ग्रहण क े, हालांविक बाद में विकए ?ए स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा क े तिड^ी क े उल्लंघन में प्रत्यर्थी3 ंख्या 7 को ौंपी ?ई है। उक्त जनविह याति का में, मुआवजे की उति राणिश क्या हो क ी है?, यह विन ा"रण क े लिलए प्रश्न नहीं र्थीा। इ लिलए, इ ंबं में अविनल क ु मार श्रीवास् व ( ुप्रा) क े फ ै ले का अवलम्ब लेकर अति रिरक्त ॉलिलसि टर जनरल द्वारा जोर विदया जाना विक ी भी मेरिरट े परे है।

25. जै ा विक ऊपर ब ाय ?या है, व "मान मामले में मुआवजे क े विन ा"रण क े ंबं में, भोपेंद्र सिं ह ( ुप्रा) का विनण"य, सिज में विब^ी विवलेख क े पंजीकरण क े लिलए कलेक्टर द्वारा मूल्यांविक बाजार मूल्य को दर्शिश करने वाला क " ल रेट को वै बना विदया ?या र्थीा। इ क े बाद इ न्यायालय द्वारा उक्त विनण"य में हस् क्षेप नहीं विकया ?या र्थीा। भूविम क े मालिलक क े मामले में, उच्च न्यायालय ने रिरट याति का ंख्या 75152 वर्ष" 2005 में पारिर 10.12.2009 क े आदेश े, विवशेर्ष भूविम अति ग्रहण अति कारी को विनदŒश विदया विक वह भोपेंद्र सिं ह ( ुप्रा में विदए ?ए फ ै ले क े अनु ार कानून क े अनु ार मुआवजा विन ा"रिर करे, जो इ न्यायालय द्वारा पोर्षणीय है।इ लिलए, मुआवजे क े विन ा"रण क े आ ार क े मुद्दे को अन् रपक्ष द्वारा ुलझा लिलया ?या है और इ न्यायालय द्वारा भी इ में कोई हस् क्षेप नहीं विकया ?या है। अब, उक्त मुद्दे पर, अविनल क ु मार श्रीवास् व ( ुप्रा) क े फ ै ले का अवलम्ब ले े हुए इ मामले में हस् क्षेप नहीं विकया जा क ा है। विक ी भी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" स्थिस्र्थीति में, स्टांप अति विनयम क े ह स्टांप शुल्क क े भु? ान क े उद्देश्य े विन ा"रिर बाजार मूल्य े कम दर पर मुआवजे का भु? ान विकया जा क ा है।

26. जै ा विक पहले ब ाया ?या है, विववाविद भूविम न क े वल वाणिणस्थिज्यक उपयो? क े लिलए नाविम की ?ई र्थीी, बस्थिल्क इ े औद्योवि?क विवका योजना क्षेत्र का विहस् ा भी घोविर्ष विकया ?या र्थीा। इ क े विवका क े बाद इ पर एक मॉल भी बना विदया ?या है। हमारे विव ार में, उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश में क " ल रेट क े मु ाविब 1,10,000 रू. प्रति व?" मीटर की दर े मुआवजे का भु? ान ही ढं? े विन ा"रिर विकया है। इ लिलए हम 1,10,000 रुपये प्रति व?" मीटर की दर े मुआवजा देने क े लिलए उच्च न्यायालय क े विनष्कर्ष~ की पुविष्ट कर े हैं।

27. पूव"व 3 ा" क े आलोक में, एकमात्र प्रश्न जो अब हमारे विव ार क े लिलए बना हुआ है, उच्च न्यायालय द्वारा आक्षेविप आदेश में 50% की ीमा क विवका शुल्क में कटौ ी क े ंबं में है। उक्त मुद्दे पर, विवका शुल्क की कटौ ी की मात्रा पर पहुं ने क े लिलए कोई ी ा ूत्र नहीं है और इ का आकलन व्यविक्त? मामले क े थ्यों क े आ ार पर उन भी कारकों पर विव ार करने क े बाद विकया जाना ाविहए जो ऐ ी मात्रा को प्रभाविव कर क े हैं।जै ा विक स्पष्ट है, उच्च न्यायालय ने इ मुद्दे े जुड़े भी कारकों पर विव ार नहीं विकया और विनयविम रूप े 50% विवका शुल्क की अति क म कटौ ी क े ार्थी आ?े बढ़ा

34. हम ऐ ा इ लिलए कह रहे हैं, क्योंविक आक्षेविप विनण"य क े अवलोकन करन पर यह स्पष्ट हो ा है विक उच्च न्यायालय ने अन्य बा ों क े ार्थी - ार्थी म्पूण" अति ग्रहण की काय"वाही में नोएडा द्वारा कारिर शरार ों को उजा?र विकया है, लेविकन ार्थी ही, यह विवका शुल्कों की अति क म कटौ ी क े लिलए पया"ƒ कारण ब ाने में विवफल रहा है।यह भी देखा ?या है विक, यह पहली बार नहीं है विक नोएडा बड़े डेवलप " क े ार्थी ांठ?ांठ कर इ अदाल क े मक्ष है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"

28. जै ा भी हो, अणिभलेख पर उपलब् ामाग्री क े परिरशीलन यह विवविद हो ा है विक इ पर विववाद नहीं है विक अनु ूति भूखण्ड़ औप ारिरक अति ग्रहण क े अभाव में नोयडा द्वारा प्रत्यर्थी3 ं. 7 को आवंविट विकया ?या र्थीा, उ क े उपरान् वाणिणस्थिज्यक क ें द्र की पंविक्त में उक्त अनु ूति भूविम को विवकसि कर उ पर एक मॉल का विनमा"ण भी कर विदया ?या र्थीा। अ ः, हमारे विव ार में, विवका शुल्क की कटौ ी की मात्रा का मूल्यांकन उच्च न्यायालय द्वारा भी ु ं? कारकों क े प्रा ंवि?क परिरप्रेक्ष्य े विकया जाना ाविहए, जो स्पष्ट रूप े त्काल मामले में नहीं विकया ?या है।ऐ ा होने पर भी, इ विव ं?ति को दूर करने क े लिलए, इ मोड़ पर 'भ?वार्थीुला मन्ना बनाम विवशेर्ष ह ीलदार और भूविम अति ग्रहण अति कारी, (1991) 4 ए ी ी 506' क े मामले में इ न्यायालय द्वारा प्रति पाविद सि द्धां का उल्लेख करना उति है, सिज में भूविम मूल्य में कटौ ी क े सि द्धां क े प्रश्न पर विव ार कर े हुए, इ न्यायालय ने विनम्नानु ार अणिभविन ा"रिर विकया -

11. इ प्रकार ुलनात्मक विब^ी क े दायरे में आने वाली भूविम क े मूल्य में कटौ ी क े सि द्धां को अति ग्रविह भूविम क े बाजार मूल्य पर पहुं ने क े लिलए अपनाया ?या। इ सि द्धां को ला?ू करने क े लिलए भी ु ं? थ्यों पर विव ार करना आवश्यक है।यह अति ग्रहण े आच्छाविद क्षेत्र की ीमा नहीं है जो एकमात्र ु ं? कारक है।यहां क विक विवशाल क्षेत्र में भी ऐ ी भूविम हो क ी है जो पूरी रह े विवकसि हो और भी ुविव ाओं े युक्त हो और एक लाभप्रद स्थिस्र्थीति में स्थिस्र्थी हो।यविद बड़े पर्थी क े भी र छोटा क्षेत्र पहले े ही विवकसि है और विनमा"ण उद्देश्यों क े लिलए उपयुक्त है और इ क े आ पा की ड़कों, जल विनका ी, विबजली, ं ार आविद में है, ो कटौ ी का सि द्धां क े वल इ कारण े है विक यह अति ग्रविह बड़े पर्थी का विहस् ा है, हो क ा है उति हो।

12. इन मामलों में शाविमल भूविम म ल और म ल या पुनग्र"हण की आवश्यक ा क े विबना विनमा"ण क े लिलए उपयुक्त है।उच्च न्यायालय ने स्वयं इ उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" ाक्ष्य पर विनष्कर्ष" विनकाला है विक अति ग्रहण द्वारा आच्छाविद भूविम उत्तर में टाउन प्लाबिंन? ट्रस्ट रोड क े ार्थी राष्ट्रीय राजमा?" और दतिक्षणी रेलवे स्टाफ क्वाट"र क े विकनारे स्थिस्र्थी है।आ -पा क े क्षेत्र पहले े ही विवकसि हैं और घरों का विनमा"ण विकया ?या है, और भूविम का उपयो? भवन स्र्थीलों क े रूप में विकया जा क ा है। यह प ा ल?ाने क े बाद विक भूविम का क े वल विनमा"ण स्र्थीलों क े रूप में मूल्य विन ा"रिर विकया जाना है और प्रति श भूविम की लाभप्रद स्थिस्र्थीति का उल्लेख करने क े बाद उच्च न्यायालय को कटौ ी क े सि द्धां ों को ला?ू नहीं करना ाविहए र्थीा। ऐ ा प्रत्येक मामले में नहीं हो ा है विक इ रह की कटौ ी पर अनुमति प्रदान की जाए।जहां अति ग्रही भूविम ड़क, विबजली इत्याविद की ुविव ाओं क े ार्थी पहले े ही विवकसि भूविम क े मध्य में आ ी है वहां ुलना की जाने भूविम क े मूल्य में कटौ ी का मर्थी"न नहीं विकया जा क ा है।

13. यह प्रस् ाव विक भूविम का बड़ा क्षेत्र ंभव ः उ ी दर पर मूल्य प्राƒ नहीं कर क ा है सिज पर छोटे भूखंड बे े जा े हैं, पूण" प्रस् ाव नहीं है और दी ?ई परिरस्थिस्र्थीति यों में भूविम क े छोटे भूखंडों द्वारा प्राƒ मूल्य को ध्यान में रखना स्वीकाय" हो?ा।यविद बड़ा भूखण्ड़ लाभप्रद स्थिस्र्थीति क े ल े उ उद्देश्य क े लिलए उपयुक्त है सिज क े लिलए छोटे भूखंडों का उपयो? विकया जा ा है और जो ऐ े विवकसि क्षेत्र में स्थिस्र्थी है जहां सिज को आ?े क े विवकासि करने की कम अर्थीवा न्यून ंभावना हो वहां ुलना करने क े लिलए भूविम क े मूल्य में कटौ ी का सि द्धां को मर्थी"न नहीं विदया जा ा है। जहां क इन दो मामलों में शाविमल भूखंडों की प्रक ृ ति का प्रश्न है, यह ं ोर्षजनक रूप े अणिभलेख पर विदखाया ?या है विक इ भूविम में ड़क और अन्य ुविव ाएं प्रदान की ?ई ं है और यह एक विवकसि कॉलोनी क े पा है और ऐ ी परिरस्थिस्र्थीति यों में, प्रश्न? म्पूण" क्षेत्र का उपयो? आवा स्र्थीलों क े रूप में करना ंभव है। ड़क क े लिलए अति ग्रही भूविम क े ंबं में मान लाभ उपलब् है और इ में आ?े विवका की आवश्यक्ता नहीं है। इ लिलए, हमारी राय में उच्च न्यायालय का दृविष्टकोण ने कटौ ी क े सि द्धां को ला?ू करने और भूविम क े उति बाजार मूल्य को 10 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" रुपये प्रति व?" ?ज े घटाकर 6.50 रुपये प्रति व?" ?ज घटाकर करने में त्रुविट कारिर की है।

29. इ क े अति रिरक्त, इ न्यायालय ने 'वित्रशाला जैन बनाम उत्तरां ल राज्य, (2011) 6 ए. ी. ी. 47' क े मामले में प्रति कर क े अव ारण और विवका प्रभारों की कटौ ी क े ंबं में विव ार कर े हुए विनम्नानु ार ारिर विकया- “44. इ प्रकार उपरोक्त प्रति पाविद सि द्धां े यह स्पष्ट है विक अति ग्रविह भूविम अपने विवकसि आ पा क े क्षेत्रों क े रूप में कमोबेश विवकसि भूविम होनी ाविहए, सिज में भी ुविव ाएं हों और ऐ ी भूविम को विबना विक ी अति रिरक्त व्यय क े सिज उद्देश्य क े लिलए अति ग्रविह विकया ?या है, उ क े लिलए उपयो? करने क े लिलए उपयुक्त हो, इ े पहले विक ऐ ी भूविम पर कोई कटौ ी नहीं मानी जा क ी है।इ ी प्रकार, विव^य क े प्रायोजनों क े लिलए कु छ कटौ ी क े ार्थी बड़े भूखण्ड़ क े बाजार मूल्य को विन ा"रिर करने क े लिलए छोटे भूखंडों पर विव ार विकया जा क ा है जब क विक ंभावना, उपयो?, ुविव ाएँ और बुविनयादी ढां ा में कोई अं र न हो। ऐ े सि द्धां ों पर प्रत्येक मामले को उ की मेरिरट पर विव ारिर करना हो?ा। इ क े अति रिरक्त, इ न्यायालय ने 'कस् ूरी और अन्य बनाम हरिरयाणा राज्य, (2003) 1 ए ी ी 354' मामले में विवणिभन्न थ्यात्मक कारकों पर विव ार कर े मय विवका प्रभारों क े लिलए मुआवजे क े भु? ान में कटौ ी को ला?ू कर े हुए विनम्नानु ार ारिर विकया-

7. …..हालांविक, क ु छ भूविम क े मामले में जहां विवकसि क्षेत्र क े आ ार पर कु छ फायदे हैं, यह कटौ ी क े प्रति श को कम करने में मदद कर क ा है, क्योंविक उ खा े पर आवश्यक विवका शुल्क कम हो क ा है।विवणिभन्न थ्यात्मक कारक हो क े हैं सिजन्हें विवका ात्मक शुल्क क े लिलए मुआवजे क े भु? ान में कटौ ी को ला?ू कर े मय ध्यान में रखना हो?ा, हो क ा है विक उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" क ु छ मामलों में यह एक ति हाई े अति क हो और कु छ मामलों में इ े कम है। यह याद रखना ाविहए विक एक विवकसि क्षेत्र और ंभाविव मूल्य वाले क्षेत्र क े बी अं र है, सिज े विवकसि विकया जाना शेर्ष है। थ्य यह है विक कोई क्षेत्र विवकसि है अर्थीवा विवकसि क्षेत्र े टा हुआ है इ बा े यह विनष्कर्ष" नहीं विनकाला जाए?ा विक इ क्षेत्र में स्थिस्र्थी प्रत्येक भूविम भवन स्र्थील या भूखंड क े रूप में विवकसि है, खा कर जब विवशाल भूक्षेत्र का अति ग्रहण विकया जा ा है, जै ा विक इ मामले में, विवका क े प्रायोजन क े लिलए विकया ?या है।" उपरोक्त विनण"य ामान्य कारकों को मान्य ा प्रदान कर ा है सिजन पर विवका शुल्क की कटौ ी की मात्रा य करने क े लिलए विव ार विकया जाना है।जै ा विक ऊपर ब ाया ?या है, ऐ े कारकों में मुख्य रूप े अति ग्रविह की जाने वाली भूविम की प्रक ृ ति, अति ग्रविह विकए जाने वाले क्षेत्र की ीमा, विनकटव 3 भूविम में विवका की ीमा क े ार्थी- ार्थी अति ग्रविह की जाने वाली प्रस् ाविव भूविम, व्याव ातियक क्षम ा आविद शाविमल हैं।अ ः उक्त कारकों पर विव ार कर े हुए व "मान मामले में विवका शुल्क की कटौ ी की जानी ाविहए र्थीी।हालाँविक, यह स्पष्ट विकया जा ा है विक यह अवलोकन व "मान मामले क े विवणिशष्ट थ्यों में विकया जा रहा है न विक ामान्य रूप े।

30. उक्त विनण"यों क े अनुपा को व "मान मामले क े थ्यों में ला?ू कर े हुए, नोएडा द्वारा उठाए ?ए कदम क े अनु ार, अनु ूति भूखण्ड़ एक महं?ी भूविम है, जो प्राति करण क े विवका क े क ें द्र में स्थिस्र्थी है और इ का वाणिणस्थिज्यक उपयो? है। मौक े पर, ीमांकन ंभव नहीं र्थीा क्योंविक भूविम पूरी रह े विवकसि र्थीी।इ पृ„भूविम में, विबना अति ग्रहण क े, अपीलक ा" का भूखण्ड़ प्रत्यर्थी3 ं. 7 को स्र्थीानां रिर कर विदया ?या र्थीा। बाद में सिजला न्यायालय द्वारा की ?ई विटप्पणिणयों को ध्यान में रख े हुए, उक्त भूविम क े लिलए स्र्थीायी विनर्षे ाज्ञा की पुविष्ट की ?ई र्थीी। कब्जा प्राƒ करने क े मय, मुआवजे की राणिश य नहीं की ?ई र्थीी और अब, उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" अपीलक ा" पया"ƒ मुआवजा प्राƒ करने क े लिलए यहां े वहां भटक रहा है।पूव" वाद में रू. 1,10,000 क " ल रेट की दर े क्षति पूर्धि क े भु? ान करने क े लिलए विववाद को य करने क े बाद भी नोयडा ने अपनी इच्छा े न ो क्षति पूर्धि विन ा"रिर विकया और न ही अपीलार्थी3 को उ का भु? ान विकया। यद्यविप अनु ूति भूखण्ड़ का कब्जा बहु पहले वर्ष" 2004 और 2005 में प्राƒ कर लिलया ?या र्थीा, लेविकन आज क, अपीलक ा" मुआवजे का लाभ नहीं उठा पाया है और उत्तरव 3 40 राउंड क अदाल ों क े मक्ष मुकदमा ला ा रहा है। इन भी पहलुओं पर विव ार कर े हुए, उक्त में उच्च न्यायालय द्वारा 50% की ीमा क की ?ई कटौ ी को बरकरार नहीं रखा जा क ा है और मुआवजे क े भु? ान क े बिंबदु पर विनष्कर्ष~ को छ ू ए विबना इ े रद्द कर विदया जा ा है।

31. जै ा विक इ में ऊपर विन ा"रिर विकया ?या है, 1,10,000 रुपये प्रति व?" मीटर की क " ल दर पर मुआवजा अपीलक ा" - रेड्डी वीराना को देय हो?ा। अब, ब्याज क े मुद्दे को अति विनयम,1894 की ारा 34 क े प्राव ानों क े ंदभ" में देखा जाना आवश्यक है, जो इ प्रकार हैः ब्याज का ंदाय- जब ऐ ी प्रति कर की रकम भूविम का कब्जा लेने पर या उ े पूव" ंदत्त या जमा नहीं की जा ी है ो कलेक्टर इ प्रकार कब्जा लेने क े मय े उ पर नौ प्रति श प्रति वर्ष" की दर े ब्याज विह अति विनण[3] नराणिश का भु? ान करे?ा जब क विक इ े इ प्रकार भु? ान या जमा नहीं विकया जाए?ा: बश Œ विक यविद सिज विदन कब्जा लिलया ?या है उ ारीख े एक वर्ष" क े अंदर ऐ े मुआवजे या उ क े विक ी विहस् े का भु? ान नहीं विकया जा ा है, उक्त अवति माƒ होने की ति णिर्थी अर्थीवा एक वर्ष" की माविƒ पर प्रति पूर्धि अर्थीवा उ क े भा? की राणिश पर, जो ऐ ी माविƒ की ति णिर्थी े पूव" भु? ान अर्थीवा जमा नहीं की ?ई है, ब्याज पंद्रह प्रति श प्रति वर्ष" की दर े देय हो?ा।" उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" परिरशीलन करने पर, यह स्पष्ट है विक यविद भूविम पर कब्जा करने े पहले या उ े पहले मुआवजे की नराणिश का भु? ान अर्थीवा जमा नहीं विकया जा ा है, ो ब्याज नौ प्रति श की दर े कब्जे में लेने क े मय े ब क देय हो?ा जब क विक उ े भु? ान या जमा नहीं विकया जाए?ा।इ में यह भी प्राव ान विकया ?या है विक यविद एक वर्ष" क े भी र मुआवजे की राणिश का भु? ान या जमा नहीं विकया ?या है, ो एक वर्ष" की अवति माƒ होने पर पन्द्रह प्रति श प्रति वर्ष" की दर े ब्याज देय हो?ा। पूव€क्त का परिरशीलन करने पर, यह स्पष्ट है विक यविद मुआवजे की राणिश का भु? ान या जमा नहीं विकया जा ा है, ो नौ प्रति श ब्याज आरोविप और देय हो?ा।यविद उक्त नराणिश एक वर्ष" क े भी र जमा या भु? ान नहीं की जा ी है, ो ब्याज @Rs. 55,000/- 15% प्रति वर्ष" देय हो?ा, जै ा विक ऊपर ा" की ?ई है, भूविम शुरू में वर्ष" 2003 में प्रत्यर्थी3 ं. 7 को दी ?ई र्थीी और बाद में अति ग्रहण विकया ?या र्थीा। अति रिरक्त अति विनण"य कब्जे में लेने की ारीख े पां ाल की देरी क े बाद 31.1.2011 को पारिर विकया ?या र्थीा।यह नराणिश वर्ष" 2017 में ल?भ? 14 वर्ष~ की देरी े जमा की ?ई र्थीी।इ मामले क े महत्वपूण" थ्यों में, हमारे विव ार में, अपीलक ा" रेड्डी वीराना क े ना?रिरक अति कार का भं? भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 300 of क क े भं? में विकया ?या है।नोयडा की ऐ ी कार"वाई स्पष्ट रूप े ंवै ाविनक अपक ृ त्य क े मान है।भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 300 ए का उल्लंघन कर े हुए इ मामले में विकए ?ए अति ग्रहण क े ंदभ" में, 'कल्याणी (मृ ) थ्रू एलआर एंड अन्य बनाम ुल् ान बर्थीेरी म्यूविन ीपॉलिलटी 42 और अन्य, 2022 की सि विवल अपील ं 3189' क े मामले में इ न्यायालय का विनण"य प्रा ंवि?क है, सिज में यह कहा ?या र्थीा विक - “20. अनुच्छेद 300 ए स्पष्ट रूप े कह ा है विक विक ी भी व्यविक्त को कानून क े प्राति कार क े विबना उ की ंपलित्त े वंति नहीं विकया जाए?ा। व "मान मामले में, हम नहीं पा े हैं, विक कानून क े प्राति कार क े ह, अपीलार्शिर्थीयों उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" की भूविम ली ?ई र्थीी और वे उ े वंति र्थीे। यविद पं ाय और पीडब्ल्यूडी इ बा का कोई बू प्रस् ु करने में विवफल रहे विक अपीलार्शिर्थीयों ने अपनी भूविम स्वेच्छा े आत्म मप"ण कर विदया है, ो अपीलार्शिर्थीयों को ंपलित्त े वंति करना ंविव ान क े अनुच्छेद 300 ए का उल्लंघन हो?ा।

21. इ न्यायालय की ंविव ान पीठ ने 'क े. टी. प्लांटेशन प्राइवेट लिलविमटेड बनाम कना"टक राज्य, 2011 (9) ए. ी. ी. 63' क े इ मामले में, अन्य क े अलावा, क्षति पूर्धि क े भु? ान े ंबंति मुद्दे पर विव ार विकया जहां एक व्यविक्त अनुच्छेद 31 (2) क े विनरसि हो जाने क े उपरान् अपनी ंपलित्त े वंति विकया जा ा है। यह प्रति पाविद विकया ?या विक विक ी व्यविक्त को उ की म्पलित्त े वंति करने की दो अपेक्षाएं हैं। ाव"जविनक प्रयोजन की आवश्यक ा एक पूव" श " है और मुआवजे का दावा करने का अति कार भी अनुच्छेद 300 (A) ) में अं किया गया था।उस पर सर्कनविह है। अनुच्छेद 221 (E) ) में ंदभ" का उत्तर दे े मय विनम्नानु ार उपबंति विकया ?या है -

221. इ लिलए, हम ंदभ" इ प्रकार हैंः xxxxxx (e) अनुच्छेद 300 क े अ ीन विक ी व्यविक्त को उ की ंपलित्त े वंति करने क े लिलए लोक प्रयोजन एक पूव" श " है और प्रति कर का दावा करने का अति कार भी उ अनुच्छेद में अं किया गया था।उस पर सर्कनविह है और जब कोई व्यविक्त अपनी ंपलित्त े वंति विकया जा ा है ो राज्य को दोनों आ ारों को न्यायोति ठहराना हो?ा जो अति विनयम, विव ायी नीति, उद्देश्य और विव ातियका क े प्रयोजन और अन्य ंबंति कारकों पर विनभ"र हो क े हैं।"

32. पूव€क्त और इ मामले क े महत्वपूण" थ्यों को ध्यान में रख े हुए, हमारा विव ार है विक वै ाविनक रूप े भु? ान विकए ?ए ब्याज क े अलावा, मुआवजे की राणिश क े विन ा"रण क े लिलए ारीख को स्र्थीानां रिर करने या अपीलक ा" रेड्डी वीराना द्वारा मां? क े अनु ार 2013 अति विनयम क े अनु ार मुआवजे का विन ा"रण उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।" करने क े स्र्थीान पर दंडात्मक ब्याज की अति रिरक्त राणिश का भु? ान विकया जाना ाविहए।यहां यह उल्लेख करना अप्रा ंवि?क नहीं है विक ब्याज की प्रक ृ ति अविनवाय" रूप े या ो पै े क े उपयो? क े लिलए भु? ान विकया ?या प्रति फल है या इ क े देय होने क े बाद इ की मां? करने े मना करना है।ब्याज, ाहे वह वै ाविनक हो या अन्यर्थीा, लाभ का प्रति विनति त्व कर ा है, हो क ा है विक लेनदार ने न का उपयो? विकया हो या नुक ान े, वह पीविड़ हो क ा है क्योंविक वह उ नराणिश का उपयो? नहीं कर का।इ लिलए, हमारे विव ार में व "मान मामले में मुआवजे की नराणिश पर मुआवजे की राणिश वै ाविनक ब्याज क े ार्थी देय हो?ी, जै ा विक उच्च न्यायालय द्वारा मामले क े विवणिशष्ट थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में 3% दंडात्मक ब्याज विनदŒणिश विकया ?या है।

33. पूव€क्त क े दृविष्ट?, नोएडा द्वारा दायर सि विवल याति का ं 3636/2022 को खारिरज कर विदया ?या है, जबविक अपीलक ा" रेड्डी वीराना द्वारा दायर सि विवल याति का ं 3637/2022 पर विनम्नलिललिख विनदŒशों क े ार्थी भा? ः अनुमति प्रदान की जा ी हैः

1. प्रत्यर्शिर्थीयों को ेक्टर 18 की क " ल दर अर्थीा" ् 1,10,000/- रुपए प्रति व?" मीटर क े विह ाब े मुआवजे की राणिश की ?णना करने का विनदŒश विदया जा ा है।

2. विवका शुल्क क े लिलए 50% कटौ ी का विनदŒश जारी करने वाले उच्च न्यायालय क े विनण"य को अपास् विकया जा ा है। व "मान मामले क े विवणिशष्ट थ्यों में, प्रत्यर्थी3 को विनदŒश विदया जा ा है विक वे क " ल दर क े अनु ार मुआवजे की राणिश की ?णना कर े मय विवका प्रभार पर कोई कटौ ी न करें, जै ा विक ऊपर पैरा 1 में विनकिया गया था।उस पर सर्कदष्ट है उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"

3. जै ा विक उच्च न्यायालय द्वारा विनदŒणिश विकया ?या है, अति विनयम,1894 की ारा 23 (2) क े ंदभ" में 30% की हजा"ना भी देय है।

4. मुआवजे की राणिश पर वै ाविनक ब्याज कब्जा लेने की ारीख े अर्थीा" फरवरी, 2005 े 45 वर्ष" की अवति क े लिलए 9 प्रति श की दर े देय हो?ा। त्पश्चा, अति विनयम,1894 की ारा 34 क े परन् ुक क े अनु ार 15% की दर े प्रति वर्ष" का भु? ान विकया जाना ाविहए। उक्त वै ाविनक ब्याज क े अलावा, इ मामले क े विवणिशष्ट थ्यों में 3% दंडात्मक ब्याज का भु? ान करने का विनदŒश विदया ?या है।

5. यहां यह स्पष्ट विकया जा ा है विक वर्ष" 2017 में जमा की ?ई राणिश भी उ ी दर पर ब्याज अर्जिज करे?ी, जै ा विक व ूली की ारीख क ऊपर पैरा 4 में विनदŒणिश है।

6. ूंविक, विव ारा ीन भूविम का अति ग्रहण नोएडा द्वारा विकया ?या र्थीा, सिज े लोक नीलामी में प्रत्यर्थी3-7 द्वारा ^य विकया ?या र्थीा, इ लिलए, मुआवजे की राणिश का भु? ान करने का दातियत्व नोएडा का हो?ा। म्पूण" राणिश का भु? ान इ विनण"य की ारीख े छह ƒाह की अवति क े भी र विकया जाए?ा।................................. (न्यायमूर्धि विवनी रन).................................. (न्यायमूर्धि जे. क े. माहेश्वरी) नई विदल्ली; 5 मई 2022 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण"य वादी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनबOति प्रयो? क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयो? नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण"य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाए?ा र्थीा विनष्पादन और वि^यान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य हो?ा।"