Ritu Maheshwari v. Promotional Club

Delhi High Court · 05 May 2022
Uday Umesh Lalit; S. Ravindra Bhat; Pavimvidghantham Sri Narsimha
Civil Appeal Nos. 3616-3618/2022; Civil Appeal Nos. 3619-3620/2022
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that termination of a development scheme extinguishes allotment rights under it, upheld Noida's new scheme allotments, and set aside High Court orders directing consideration under the closed scheme.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 3616-3618 /2022
रिर ु माहेश्वरी अपीलार्थी* (गण)
बनाम
मेसस1 प्रमोशनल क्लब प्रत्यर्थी* (गण)

े सार्थी
सिसविवल अपील संख्या - 3619-3620/2022
विनण1य
माननीय न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट,
JUDGMENT

1. दोनों यातिAकाओं में विवशेष अनुमति अनुदत्त पक्षों क े अति वक्ताआें की सहमति से, अपीलों पर अं ः सुनवाई की गई। दोनों अपीलें इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े फ ै सलों से उत्पन्न हुई हैं। पहला विदनांक 31.07.2019[1] का है और दूसरा विदनांक 13.04.2021 क े पहले आक्षेविप फ ै सले क े खिVलाफ दायर समीक्षा यातिAका को Vारिरज आदेश क े आदेश का उल्लंघन कर ा है। दूसरी अपील अपीलक ा1 क े खिVलाफ प्रति वादी द्वारा अवमानना काय1वाही2 में जारी 1 रिरट-सी संख्या-56046/ 2013 में 2 अवमानना आवेदन (सिसविवल) संख्या 8214/2019 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ीन आदेशों (विदनांक 12.02.2020,24.08.2020 और 28.08.2020) क े खिVलाफ की गई है। 2 मामले क े संतिक्षप्त थ्य यह हैं विक अपीलक ा1 (ए स्मि_मन पश्चा नोएडा नाम से सन्दर्भिभ ) ने 2010 में (ए स्मि_मन पश्चा पुरानी योजना नाम से सन्दर्भिभ ) नोएडा क े औद्योविगक क्षेत्र क े Aरण 2 और 3 में 2000 वग[1] मीटर से अति क क े औद्योविगक भूVंडों क े आवंटन क े खिलए एक योजना प्रकाशिश की र्थीी। इस योजना का विवज्ञापन विकया गया र्थीा। उपलब् भूVंडों क े पंजीकरण क े खिलए आवेदन पत्र 5,000/- रुपये क े भुग ान पर एक विनर्दिदष्ट बैंक क े पास उपलब् र्थीे। दूसरे Aरण में 4000 वग[1] मीटर क क े भूVंडों क े खिलए सांक े ति क मूल्य 5550 रुपये प्रति वग[1] मीटर और ीसरे Aरण में 5750 रुपये प्रति वग[1] मीटर र्थीा। ब्रोशर में वर्भिण योजना की श k क े ह, व्यविक्तयों क े अलावा, साझेदारी फमn भी आवंटन क े खिलए आवेदन करने क े पात्र र्थीे। आवेदकों को दूसरे Aरण क े भूVंडों क े खिलए 20 हजार रुपये की प्रोसेसिंसग फीस और 8 लाV रुपये की पंजीकरण राशिश और ीसरे Aरण क े भूVंडों क े खिलए 10 लाV रुपये जमा करने र्थीे। इन श k क े अलावा आवेदकों को परिरयोजना रिरपोट[1], प्रव 1कों की पृष्ठभूविम का विववरण, ऑतिडट विकए गए Vा े और बैलेंस शीट र्थीा अन्य प्रासंविगक विववरण प्र_ ु करने र्थीे। एक _क्रीनिंनग सविमति द्वारा परिरयोजना क े विववरण क े बारे में पंजीक ृ आवेदकों क े साक्षात्कार क े आ ार पर आवंटन (Vंड 2 (एA) (आई) क े अनुसार) विकया जाना र्थीा। यह योजना _पष्ट र्थीी, इसखिलए योजना क े परिरशिशष्ट 1 क े Vंड 2 (i) ) क े ह नोएडा इसे विकसी भी समय बंद कर सक ा है।

3. पक्षकारों का यह सामान्य मामला है विक क्लब ने दो भूVंडों क े खिलए नोएडा प्राति करण को आवेदन विकया। _पष्ट रूप से, नोएडा ने 05.07.2012 को अपनी बैठक में योजना की व्यवहाय[1] ा क े आकलन क े आ ार पर इस योजना को समाप्त करने का फ ै सला विकया। इस विनण1य को प्रकाशिश विकया गया और 12 जुलाई, 2012 को साव1जविनक रूप से क्लब सविह सभी संबंति पक्षों को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk सूतिA विकया गया। इसक े बाद नोएडा ने क्लब द्वारा उसे जमा की गई राशिश वापस करने की मांग की।

4. क्लब व्यशिर्थी र्थीा और उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिरट यातिAका3 दायर कर े हुए दावा विकया विक उसकी जानकारी क े अनुसार, नोएडा को 95 आवेदन प्राप्त हुए, सिजनमें से 65 Vारिरज कर विदए गए और 15 को आवंटन विकए गए। क्लब ने आग्रह विकया विक उसने योजना की सभी आवश्यक ाओं को पूरा विकया है और भुग ान प्रसं_करण शुल्क, पंजीकरण राशिश, प्र_ ु विकए जाने वाले आवश्यक द_ ावेजों को प्र_ ु विकया है। इसखिलए, उसने दावा विकया विक उसक े आवेदन पर विवAार विकया जाना Aाविहए। इसने यह भी क 1 विदया विक क्लब एक विनया1 घर र्थीा और विकराए क े परिरसरों से संAाखिल हो ा र्थीा, सिजसे एक बड़ी सुविव ा की आवश्यक ा र्थीी और वह वाशिणस्मि{यक विकराये क े _र्थीानों को वहन करने में असमर्थी1 र्थीा। यह आग्रह विकया गया विक नोएडा ने आवंटन क े खिलए अपनी योजना क े विनयमों और श k की अवहेलना की विक जहां क यातिAकाक ा1 क्लब का संबं है, योजना क े ह प्लॉटों क े संबं में विवAार न करना विबल्क ु ल मनमाना र्थीा। क्लब ने दावा विकया विक पहले से विकए गए आवंटन को रद्द करने क े विनद•श और आवंटन क े खिलए यातिAकाक ा1 क्लब क े आवेदन पर विवAार करने क े खिलए एक अविनवाय[1] विनद•श सविह कई विनद•श विदए गए हैं। 5 नोएडा ने यातिAका का विवरो कर े हुए क 1 विदया र्थीा विक एक बार योजना बंद होने क े बाद, क्लब क े पास आवंटन का दावा करने का कोई आ ार नहीं र्थीा। यह भी आग्रह विकया गया विक क्लब इस थ्य से अवग र्थीा विक योजना को विकसी भी समय बंद विकया जा सक ा है, एक ऐसी शविक्त सिजसका सहारा नोएडा ने वै रूप से खिलया र्थीा। इसखिलए, यह आग्रह विकया गया विक यविद क ु छ भूVंड उपलब् र्थीे, ो भी रिरट यातिAकाक ा1 उनमें से विकसी क े भी आवंटन क े खिलए दावा नहीं कर सक ा र्थीा. 3 रिरट-सी नंबर-56046/2013 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk

6. उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिAका क े लम्बंन क े दाैरान, नोयडा क े द्वारा एक अन्य योजना (योजना कोडः नोएडा/आईपी/2013-14/ओईएस/01- सिजसे अब 2013 योजना कहा जा ा है) प्रारम्भ की गयी, क्लब क े 9 नवम्बर 2013 की रह ही इस योजना में भी अपना आवेदन प्र_ ु विकया। यह 17.07.2014 को एक आवंटन क े रूप में परिरपक्व हुआ, जब नोएडा ने 8060 रुपये प्रति वग[1] मीटर की दर से 4000 वग[1] मीटर (अ_र्थीायी रूप से आकार का भूVंड) आवंविट विकया। नोएडा द्वारा दावा विकया गया कु ल प्रीविमयम 3,46,58,000/- र्थीा। क्लब ने 01.12.2016 क इस आवंटन क े खिलए ₹1,91,83,700/- जमा कर विदया र्थीा; इसने मैसस[1] को आवंटन में परिरव 1न क े विदनांक 04.09.2016 क े पत्र द्वारा मांगा। मारिरया एस्मिक्जम प्रा. Ltd. इस अनुरो का विदनांक 27.12.2016 क े हलफनामे क े द्वारा काया1स्मिन्व विकया गया र्थीा। हालांविक, बाद की योजना क े ह इस भूVंड क े इस बाद क े आवंटन का Vुलासा उच्च न्यायालय में नहीं विकया गया, सिजसक े समक्ष पुरानी योजना क े ह मनमाने ढंग से गैर-आवंटन की शिशकाय लंविब र्थीी।

7. उच्च न्यायालय ने अपने पहले आक्षेविप विनण1य[4] में यह राय व्यक्त की र्थीी विक नोएडा द्वारा क्लब क े प्रति विनति को साक्षात्कार क े खिलए बुलाने में विवफल ा का विकसी भी कारण से समर्थी1न नहीं विकया गया र्थीा और इसकी उम्मीदवारी पर कभी आवंटन क े खिलए विवAार नहीं विकया गया र्थीा। इस विनष्कष[1] क े समर्थी1न में उच्च न्यायालय ने क 1 विदया विक उम्मीदवारी या आवेदन जो पंजीकृ र्थीे और सभी रह से पूण[1] र्थीे, को नजरअंदाज नहीं विकया जा सक ा र्थीा। इस क 1 को ध्यान में रV े हुए, नोएडा को इस योजना क े ह यातिAकाक ा1 क े दो आवेदनों पर विवAार करने का विनद•श विदया गया और क्लब को अपने दो आवेदनों क े संबं में प्रत्येक क े खिलए 8 लाV रुपये की पंजीकरण राशिश को विफर से जमा करने की अनुमति दी गई। एक महीने की अवति क े भी र और इस रह की पंजीकरण राशिश जमा करने पर, दो आवेदनों (आवेदन संख्या 284 और 285) 4 रिरट-सी संख्या 56046/2013 में विदनांविक 31.07.2019 विनण1य vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk को पुनज*विव विकया जाना र्थीा। विवति क े अनुसार नोएडा को विनद•श विदया गया र्थीा विक गैर-आवंविट शेष भूVंडों क े आवंटन क े प्रयोजनों क े खिलए Aरण - i) i) और i) i) i) में उन आवेदनों पर विवAार विकया जाए। उच्च न्यायालय ने अपने फ ै सले में कहा विक नोएडा ने प्रति वाद नहीं विकया विक योजना क े ह कु छ भूVंडों को अशिभ भी आवंविट नहीं विकया गया र्थीा। उच्च न्यायालय क े अनुसार ऐसे कु ल 12 भूVंड र्थीे।

8. नोएडा ने पहली बार _पष्टीकरण क े खिलए एक आवेदन दायर विकया विक पुरानी योजना क े ह कोई प्लॉट उपलब् नहीं र्थीा और पुरानी योजना क े ह 27 प्लॉट उपलब् र्थीे, सिजसक े ह शुरू में 15 आवंविट विकए गए र्थीे। बाद में सभी भूVंडों को 2013 की योजना क े ह 2014 क े अं क आवंविट कर विदया गया। वह आवेदन (सिसविवल प्रकीण[1] संशो न /_पष्टीकरण आवेदन संख्या 17/2020) 01.10.2020 को Vारिरज कर विदया गया र्थीा। इसखिलए नोएडा ने समीक्षा काय1वाही को प्रार्थीविमक ा दी। उच्च न्यायालय ने अपने दूसरे आक्षेविप आदेश विदनांक 13.04.2021 द्वारा समीक्षा यातिAका को Vारिरज कर विदया। मूल आक्षेविप विदनांविक 31.07.2019 आदेश एंव विनण1य एवं आदेश विदनांविक 13.04.2021 क े द्वारा Vारिरज की गयी समीक्षा यातिAका को विवशेष अनुमति यातिAका5 से उत्पन्न् होने एक आम अपील का विवषय बनाया गया है।

9. क्लब ने मूल विनण1य का अनुपालन न करने की शिशकाय की और अवमानना की काय1वाही शुरू की। अवमानना की काय1वाही में, नोविटस जारी विकया गया और 12.02.2020 को उच्च न्यायालय ने अशिभलेV मे शाविमल विकया विक क्लब का आवेदन पात्र माना गया और रिरकॉड[1] पर खिलया गया। विदनांक 12.02.2020 क े आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने _पष्ट विकया विक यविद मुख्य विनण1य का अक्षरशः अनुपालन नहीं विकया जा ा है ो “विवरो ी पक्षकार” अर्थीा1 नोएडा क े मुख्य काय1कारी अति कारी को अदाल में उपस्मि_र्थी रहना होगा। दनुसार, अगली ारीV को जब उक्त अति कारी उपस्मि_र्थी र्थीे (अर्थीा1 24.08.2020 को) 5 सिसविवल अपील संख्या 3619-3620/2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk न्यायालय ने नोट विकया विक रिरट यातिAकाक ा1 को यातिAकाक ा1 द्वारा दायर दो आवेदनों क े अनुसरण में दो प्लॉटों क े संबं में अपने विवकल्प का उपयोग करने क े खिलए प्लॉटों की एक सूAी दी गई र्थीी और जो जनवरी, 2020 में जारी नई योजना क े ह कवर विकए गए र्थीे।इसक े अलावा, न्यायालय ने दज[1] विकया विक नए भूVंड क े वल नई योजना क े अनुसार आवंविट विकए गए र्थीे और दो अन्य आवेदकों को वे भूVंड आवंविट विकए गए र्थीे। इसखिलए न्यायालय ने असं ोष व्यक्त विकया और कहा विक नोएडा क े उद्देश्यों क े मुकदमा मुद्दे को जविटल बनाने क े खिलए ीसरे पक्ष क े अति कारों की मांग की जा रही है। ये दो आदेश अर्थीा1 12.02.2020 और 24.08.2020 क े सार्थी-सार्थी बाद क े आदेश विदनांक 28.08.2020 (सिजसमें 24.08.2020 क े पहले क े आदेश को आंशिशक रूप से सही विकया गया र्थीा) नोएडा क े मुख्य काय1कारी अति कारी द्वारा अपनी ओर से एक अन्य सामान्य विवशेष अनुमति यातिAका6 से उत्पन्न सिसविवल अपील की विवषय व_ ु हैं। पक्षकारों की दलीलें

10. श्री क े. वी. विवश्वनार्थीन, विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा आग्रह विकया जा ा है विक 31.07.2019 का आक्षेविप विनण1य नोएडा क े एक विवशेष काय[1] अति कारी (ओएसडी) श्री एन. क े. सिंसह द्वारा विदनांक 10.03.2019 क े अपने शपर्थी पत्र में इस आशय क े गल थ्यात्मक बयान क े आ ार पर पारिर विकया गया र्थीा विक विपछली योजना में आठ भूVंड आवंविट नहीं विकए गए र्थीे, सिजसक े कारण नोएडा पर गंभीर प्रति क ू ल प्रभाव पड़ा है। यह क 1 विदया जा ा है विक इस अति कारी ने न क े वल शपर्थी पत्र पर भ्रामक बयान विदया, बस्मिल्क क्लब को आवंविट भूVंड को विकसी अन्य सं_र्थीा को ह_ ां रिर करने में भी मदद की। 6 एसएलपी (सी) संख्या 12866-68/2020 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk नोएडा क े विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता ने क 1 विदया विक ये क ृ त्य अनति क ृ र्थीे। यह आग्रह विकया गया र्थीा विक नोएडा, ने उच्च न्यायालय क े समक्ष विवशेष रूप से कहा र्थीा विक संबंति कम1Aारी यानी ओएसडी श्री एन. क े. सिंसह क े खिVलाफ अपने शपर्थी पत्र में गल बयान देने क े खिलए 12.06.2020 को कारण ब ाओ नोविटस जारी विकया गया र्थीा और संबंति कम1Aारी क े खिVलाफ उत्तर प्रदेश सरकार को अनुशासनात्मक कार1वाई करने की सिसफारिरश की गई र्थीी। अति वक्ता क े द्वारा यह क 1 विदया गया विक उच्च न्यायालय ने यह देVने में गल ी की विक यह _पष्ट है विक समीक्षा आवेदन क े समर्थी1न में दायर हलफनामे में नोएडा द्वारा उतिA प्रति वाद क े उपयोग क े संबं में आवश्यक दलीलों का अभाव र्थीा। आगे यह भी आग्रह विकया गया विक नोएडा ने विवशेष रूप से कहा र्थीा विक 15 आवंटन विकए गए र्थीे, जब आक्षेविप विनण1य विदया गया र्थीा, वा_ व में पुरानी योजना क े ह कोई भूVंड नहीं र्थीे। अति वक्ता क े द्वारा प्र_ ु विकया गया विक जब भी कोई योजना बंद की जा ी है, ो नोएडा क े पास उपलब् भूविम को कभी भी छोड़ा नहीं जा ा है बस्मिल्क अन्य नई योजनाओं में उपयोग विकया जा ा है। इसखिलए, वा_ व में कोई अआवंविट भूVंड नहीं र्थीे, सिजनका उपयोग बाद की योजनाओं में विकया गया र्थीा। यह प्र_ ु विकया जा ा है विक नोएडा नए भूVंडों को राश ा रह ा है और बाद में उन्हें विवशिभन्न योजनाओं क े ह आवंविट कर ा है। इसने उपलब् नए भूVंडों की सूAी प्र_ ु की र्थीी, न विक उन भूVंडों की जो शुरू में उपलब् र्थीे और सभी 27 भूVंडों को 2014 क विवशिभन्न योजनाओं में आवंविट कर विदया गया र्थीा।

11. यह क 1 विदया गया र्थीा विक क्लब ने 2009-10 की योजना क े बंद होने को Aुनौ ी नहीं दी र्थीी। इसक े बजाय उसने दावा विकया विक नोएडा ने अपने प्रति विनति को साक्षात्कार क े खिलए नहीं बुलाकर और संभाविव आवंटन करक े मनमाने ढंग से काम विकया। वा_ व में सभी पंजीयक इस बा से अवग र्थीे विक इस योजना क े ह नोएडा विकसी भी कारण से इसे समाप्त कर सक ा है और प्राप्त राशिश वापस कर सक ा है।उस विवकल्प का वा_ व में प्रयोग विकया गया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk र्थीा।अति वक्ता ने इस बा पर प्रकाश डाला विक यह योजना मुस्मिश्कल से दो साल से लागू र्थीी और बहु कम लोगों का साक्षात्कार खिलया गया और उन्हें भूVंड प्रदान विकए गए। Aूंविक रिरट यातिAकाक ा1 प्लॉट क े खिलए दावा नहीं कर सक ा र्थीा, लेविकन एक मौजूदा योजना में क े वल विवAार विकए जाने का अति कार, पहला आक्षेविप विनण1य गल है क्योंविक यह यह अशिभविन ा1रिर करने क े खिलए आगे बढ़ ा है विक क्लब को एक प्लॉट क े आवंटन का कु छ अति कार र्थीा।

12. यह आग्रह विकया गया विक उच्च न्यायालय का सविक्रय विनदेश क े वल क्लब क े आवेदनों को बहाल करने और कानून क े अनुसार उन पर आवंटन क े खिलए विवAार करने क े खिलए र्थीा। Aूंविक पुरानी योजना को रद्द करने या बंद करने पर प्रति क ू ल विटप्पणी नहीं की गई र्थीी, इसखिलए विनद•शों का उतिA रूप से अनुपालन करने का एकमात्र रीका यह र्थीा विक मौजूदा स्मि_र्थीति में Aल रही योजना क े ह आवेदनों पर विवAार विकया जाए। 2020 में बनाई गई योजना में, कोई भी आवेदक साक्षात्कार क े आ ार पर आवंटन की उम्मीद नहीं कर सक ा है। भूVंडों का आबंटन ड्रॉ क े परिरणाम पर आ ारिर है। क्लब पर विवAार विकया गया, लेविकन ड्रॉ में असफल रहा। इसखिलए, उच्च न्यायालय ने यह विनण1य देकर गल विकया विक क्लब पुरानी योजना क े अनुसार विवAार विकए जाने का हकदार र्थीा जो अस्मि_ त्व में नहीं र्थीी।

13. विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता ने क 1 विदया विक क्लब संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह विववेका ीन राह पाने का हकदार नहीं है, क्योंविक उसने पूण[1] और सही थ्यों का Vुलासा नहीं विकया। यह क 1 विदया गया र्थीा विक क्लब को 2014 में 4000 वग[1] मीटर का भूVंड आवंविट विकया गया र्थीा, सिजसक े खिलए उसने आंशिशक भुग ान भी विकया र्थीा। हालांविक, इस थ्य को उच्च न्यायालय से शिछपाया गया र्थीा। वकील ने क 1 विदया विक नोएडा ने अपनी उतिA त्पर ा क े समय, हाल ही में इस थ्य का प ा लगाया है.इसक े अलावा, यह प्र_ ु विकया गया विक यह दबाव जानबूझकर विकया गया र्थीा, और ऐसा प्र ी हो ा है विक उक्त श्री एन.क े. सिसहं क े द्वारा इसे सुगम बनाया गया र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk 14 क्लब विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री सलमान Vुश*द ने आग्रह विकया विक आक्षेविप विनण1य क े सार्थी-सार्थी पुनर्दिवलोकन में उच्च न्यायालय क े विनण1य को भंग नहीं विकया जाना Aाविहए। यह प्र_ ु विकया गया र्थीा विक नोएडा ने योजना को बंद करने का कोई कारण नहीं ब ाया; उच्च न्यायालय क े समक्ष इसक े शपर्थी पत्र में कोई कारण नहीं ब ाया गया विक क्लब क े आवेदन को क्यों नजरअंदाज कर विदया गया या अन्य आवेदकों क े मामले में इसक े प्रति विनति को साक्षात्कार क े खिलए क्यों नहीं बुलाया गया। यह एक मनमाना आAरण र्थीा सिजसक े खिलए एक प्रति क ू ल आदेश की आवश्यक ा र्थीी। इस हद क, उच्च न्यायालय का आदेश अपवादात्मक नहीं है।

15. क्लब की ओर से आग्रह विकया गया विक सूAना को दबाने का आरोप अनुतिA है। विवद्व अति वक्ता ने आग्रह विकया विक नोएडा ने विकसी विनयम या विदशा-विनद•श की ओर संक े नहीं विदया, सिजसक े खिलए क्लब को यह Vुलासा करने की आवश्यक ा हो विक उसने पहले विकसी अन्य योजना क े ह आवेदन विकया र्थीा, उसने आवेदन विकया र्थीा और 2013-14 में बनाई गई योजना में उसे एक भूVंड आवंविट विकया गया र्थीा। इन परिरस्मि_र्थीति यों में, अनुच्छेद 226 क े ह राह से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठ ा र्थीा। यह भी क विदया गया विक 31.07.2019 क े आक्षेविप फ ै सले को अवमानना काय1वाही में उच्च न्यायालय द्वारा समझा जाना Aाविहए र्थीा, सिजसका अर्थी1 यह है विक क्लब क े आवेदन को 2009-10 में योजना क े अनुसार संसाति विकया जाना र्थीा, जब वा_ व में एक आवेदन विकया गया र्थीा और _वीकार विकया गया र्थीा। दूसरे शब्दों में, क्लब क े आवेदन पर पुरानी योजना क े अनुसार विवAार विकया जाना र्थीा। इसका म लब _वाभाविवक है विक इसक े प्रति विनति को साक्षात्कार क े खिलए बुलाया गया र्थीा और दनुसार आवेदन का मूल्यांकन विकया गया र्थीा।इसक े बजाय, नोएडा ने 2020 की मौजूदा नीति क े ह आवेदन को एक रफा रूप से एक माना। बाद क े संदभ[1] में, आवंटन साक्षात्कार क े आ ार पर नहीं बस्मिल्क ड्रॉ क े आ ार पर विकया जाना है। श्री Vुश*द ने कहा विक यह आक्षेविप विनण1य vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk का आशय या _वरूप नहीं र्थीा। इन परिरस्मि_र्थीति यों में, जानबूझकर अनुपालन नहीं करने क े खिलए ैयार की गई अवमानना की काय1वाही रVरVाव योग्य र्थीी और उच्च न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनद•श पूरी रह से उतिA र्थीे। विवश्लेषण और विनष्कष[1]

16. पुरानी _कीम की श n विनण1य क े पूव[1] र भाग में नोट की गई र्थीीं। अन्य श k में शाविमल र्थीे विक नोएडा [Vंड 2 (डी)] द्वारा दशा1ई गई दरें परिरव 1न क े अ ीन र्थीीं-प्लॉट का क्षेत्र शिभन्न-शिभन्न हो सक ा है [Vंड 2 (ई)]. Vंड 2 (आई) इस प्रकार हैः यह योजना सबक े खिलए Vुली योजना र्थीी। हालांविक, नोएडा विबना विकसी नोविटस क े और विबना विकसी कारण क े विकसी भी समय इस योजना को बंद करने का अति कार सुरतिक्ष रV ा है।

17. क्लब की शिशकाय र्थीी विक उसक े आवेदन पर विवAार नहीं विकया गया। उसक े प्रति विनति यों का साक्षात्कार नहीं विकया गया। नोएडा ने ब ाया विक उसने इस योजना को बंद कर विदया या समाप्त कर विदया। रिरट काय1वाही में, क्लब ने योजना को बंद करने को Aुनौ ी नहीं दी, बस्मिल्क इसका मामला यह र्थीा विक आवंटन क े खिलए उसक े आवेदन पर विवAार करने में नोएडा की Aूक मनमानी र्थीी। एक बार जब क्लब ने योजना को बंद करने को _वीकार कर खिलया और इसे Aुनौ ी नहीं दी, ो इसक े आवेदन पर विवAार नहीं करने क े संबं में विकसी भी अति कार या शिशकाय का कोई सवाल नहीं र्थीा। क्लब इस बा से इनकार नहीं कर ा है विक अन्य पंजीक ृ व्यविक्त भी इसी रह की परिरस्मि_र्थीति यों में र्थीे, सिजन्होंने कोई आवंटन प्राप्त नहीं विकया र्थीा। संभव ः उनक े सार्थी क्लब जैसा ही व्यवहार विकया जा ा र्थीा। इस परिरस्मि_र्थीति में, क्लब क े वल योजना क े बंद होने की ाक क े कारण कोई भेदभाव _र्थीाविप विकए विबना मनमानी का आरोप नहीं लगा सक ा र्थीा। यह अच्छी रह से _र्थीाविप है विक जब व्यविक्तयों क े एक वग[1] को उपलब् लाभ को बंद करने या समाप्त करने जैसे विकसी नीति ग विनण1य को Aुनौ ी नहीं vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk दी जा ी है, ो ऐसे बंद करने क े परिरणाम (जो विवAार विकए जाने क े इच्छ ु क लोगों की विवAारा ीन ा पर प्रभाव डाल ा है) आम ौर पर शिशकाय का विवषय नहीं हो सक े हैं। क्लब क े पास क्या यह अति कार र्थीा विक जब क पुरानी योजना बनी रही ब क उसक े द्वारा आवेदन विकए गए भूVंडों क े आवंटन क े खिलए उस पर विवAार विकया जाए।

18. इस न्यायालय की राय में, विकसी योजना क े आवेदक या रसिज_ट्रार को इस बा पर जोर देने का कोई अति कार नहीं है विक उन्हें विकसी योजना क े ह आवंटन प्रदान विकया जाना Aाविहए। बहु क ु छ योजना की श k पर विनभ1र कर ा है। विदल्ली विवकास प्राति करण बनाम पुष्पेन्द्र क ु मार जैन[7] वाले मामले में इस न्यायालय ने लागू सिसद्धां को विनम्नानुसार प्रति पाविद विकया र्थीाः

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8. अब दूसरे आ ार पर आ े हुए, हम यह मानने क े खिलए कोई कानूनी आ ार पाने में असमर्थी1 हैं विक प्रति वादी ने लॉटों क े ड्रॉ पर आवंटन का विनविह अति कार प्राप्त विकया। Aूंविक डी. डी. ए. एक साव1जविनक प्राति करण है और Aूंविक आवेदकों की संख्या हमेशा उपलब् फ्ल ै टों की संख्या से अति क हो ी है, इसखिलए आवंटी की पहAान करने क े खिलए लॉटों की ड्राइंग प्रणाली का सहारा खिलया जा रहा है। यह क े वल एक माध्यम, एक रीका, आवंटी की पहAान करने की एक प्रविक्रया है, यानी यह Aयन की एक प्रविक्रया है। यह अपने आप में आवंटन नहीं है। क े वल आवंटन करने वाले की पहAान या Aयन से Aयविन व्यविक्त को लॉट विनकालने की ारीV पर प्रAखिल मूल्य पर आवंटन का कानूनी अति कार नहीं विमल ा है। अपीलक ा1 द्वारा सन्दर्भिभ योजना न ो _पष्ट रूप से और न ही आवश्यक विनविह ार्थी1 से ऐसा कह ी है.इसक े विवपरी, इसक े Vंड (14) में कहा गया है विक ब्रोशर में उसिल्लखिV अनुमाविन कीम ें दृष्टां हैं और लेआउट में विनमा1ण की लाग आविद की अविनवाय[1] ाओं क े आ ार पर संशो न/संशो न क े अ ीन हैं। 7 1994 (Supp[3]) SCR 770 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk विबहार रा{य आवास बोड[1] और अन्य बनाम रा ा बल्लभ _वा_थ्य देVभाल और अनुसं ान सं_र्थीान (पी) खिलविमटेड 8 वाले मामले में इस न्यायालय ने एक बार विफर इसी स्मि_र्थीति को दोहराया हैः प्रति वादी को प्लॉट क े आवंटन का कोई अति कार क े वल इसखिलए नहीं विमल ा है क्योंविक उसने पहले आवंटन क े खिलए आवेदन विकया है। विकसी विवज्ञापन क े प्रति प्रति विक्रया क े कारण अपीलक ा1 पर कोई भूVंड आवंविट करने की कोई बाध्य ा नहीं है.बेशक, प्रति वादी द्वारा प्र_ ु प्र_ ाव क े अनुसरण में कोई आवंटन नहीं विकया गया र्थीा.क े वल यह थ्य विक प्रति वादी ने प्लॉट क े आवंटन क े खिलए आवेदन विकया र्थीा, विकसी भी प्लॉट का आवंटन प्राप्त करने का कोई कानूनी या न्यायसंग अति कार प्रदान नहीं कर ा है.

19. विकसी अ_पष्ट ा क े अभाव में-कानून और योजना में, इस न्यायालय की राय में, रिरट यातिAकाक ा1 क्लब, इस बा पर जोर नहीं दे सक ा र्थीा विक पुरानी योजना क े बंद होने क े बाद (सिजसे इसक े द्वारा Aुनौ ी नहीं दी गई र्थीी), विफर भी, इसे आवंटन का अति कार र्थीा। अन्यर्थीा अशिभविन ा1रिर करने में और क्लब क े आवेदनों पर विवAार करने क े खिलए नोएडा को विनद•श देने की काय1वाही में आक्षेविप विनण1य कानून में गल है।

20. उच्च न्यायालय ने विनद•श विदया र्थीा विक क्लब क े आवेदनों पर कानून क े अनुसार विवAार विकया जाना Aाविहए। नोएडा ने उस विनद•श का पालन विकया, और उन आवेदनों को बहाल विकया-और इसक े अलावा, मौजूदा योजना क े अनुसार उन पर विवAार विकया। उच्च न्यायालय ने अवमानना की काय1वाही में, इस न्यायालय की राय में, पूरी रह से अनावश्यक और अवांशिछ रीक े से इस कार1वाई पर आपखित्त ज ाई है। जैसा विक पहले अशिभविन ा1रिर विकया गया र्थीा, एक बार जब पुरानी योजना को बंद करने की वै ा विनर्दिववाद र्थीी, ो क्लब क े सार्थी इस बा पर जोर देने का कोई रीका नहीं र्थीा विक विकसी भूVंड क े 8 2019 (10) SCC483 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk खिलए उसक े दावे पर विवAार विकया जाना Aाविहए। यविद इसे बाद की योजनाओं क े ह आवेदन करना Aाविहए र्थीा और अन्य आवेदकों की रह इं जार करना Aाविहए र्थीा (उस योजना क े ), ो इस संदभ[1] में उच्च न्यायालय क े फ ै सले की नोएडा की व्याख्या (विवAार करने क े खिलए) काफी सही र्थीी। न ो नोएडा ने पुरानी योजना को बंद कर े समय अपनी घोषणा में, न ही 2013 या बाद की योजना की विकसी भी श 1 में, यह विन ा1रिर विकया र्थीा विक पुरानी योजना क े आवेदकों क े सार्थी उस (2010) योजना की श k क े अनुसार विन_ ारण विकया जाएगा। इसका म लब र्थीा विक नोएडा को मौजूदा योजना क े अनुसार क्लब क े आवेदनों पर विवAार करना र्थीा। इसने ऐसा विकया और अवमानना की काय1वाही में उच्च न्यायालय क े क्रो को अनुतिA रूप से जन्म विदया। इस प्र_ ाव क े खिलए प्राति कार है विक जब विवविनयम या योजनाएं या नीति यां बदल ी हैं, ो आवेदकों को उनक े लाभों क े खिलए पुरानी नीति क े ह विवAार करने का कोई अं र्दिनविह अति कार नहीं है, बस्मिल्क विवAार नई व्यव_र्थीा क े ह होना Aाविहए, जब क विक बाद में इसक े विवपरी कोई _पष्ट श 1 न हो।

21. बम्बई क े उ_मान गनी Vत्री बनाम छावनी बोड19 वाले मामले में इस न्यायालय ने उच्च न्यायालय क े उस विनण1य की पुविष्ट की सिजसमें यह अशिभविन ा1रिर विकया गया र्थीा विक पुराने विनयम लागू नहीं विकए जा सक े और भवनों की मंजूरी क े खिलए आवेदनों पर विवAार करने क े खिलए नए विनयम लागू हो े हैं। यह अव ारिर विकया गया विक विकसी भी मामले में, उच्च न्यायालय का यह विवAार सही है विक भवन योजना क े वल इस रह की भवन योजनाओं की मंजूरी क े समय प्रAखिल भवन विवविनयमों क े अनुसार ही _वीक ृ की जा सक ी है। व 1मान में 30 अप्रैल, 1988 को प्रकाशिश वै ाविनक उप-विनयम लागू हैं और यातिAकाक ा1ओं द्वारा प्र_ ु की जाने वाली नई भवन 9 1992 (3) SCR 1 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk योजनाएं, यविद कोई हों, अब इन उप-विनयमों द्वारा शासिस होंगी, न विक विकसी अन्य उप-कानूनों या योजनाओं द्वारा, जो अब लागू नहीं हैं। यविद हम एक विवपरी मामले पर विवAार कर े हैं, जहां पहले प्र_ ु की गई भवन योजनाओं को मंजूरी देने से पहले विबल्डरों क े खिलए भवन विवविनयमों में अति क अनुक ू ल संशो न विकया जा ा है, ो विबल्डर विनतिश्च रूप से दावा करेंगे और अपने लाभ क े खिलए संशोति विनयमों का लाभ प्राप्त करेंगे। इसी प्रकार, हावड़ा नगर विनगम और अन्य अन्य गंगा रोप क ं पनी खिलविमटेड और अन्य 10 10 में एक समान प्रश्न विवAारार्थी1 उठाया गया। नगर विनगम को न्यायालय द्वारा समयबद्ध रीक े से मंजूरी क े खिलए एक आवेदन पर विनण1य लेना र्थीा। लागू विनयमों में बदलाव विकया गया है। विनगम ने संशोति विनयमों क े आलोक में आवेदन करने का विनण1य खिलया।इस न्यायालय ने आवेदक की इस दलील को Vारिरज कर विदया विक उसे पुराने विनयमों क े ह विवAार विकए जाने का अति कार है, जो इस प्रकार हैः “20 अ ः अति विनयम क े उपबं ों में विकसी व्यविक्त को भवन का विनमा1ण या विनमा1ण करने की अनुमति देने से पूव[1] विनगम द्वारा दी जाने वाली अशिभव्यक्त मंजूरी पर विवAार विकया गया है। इस प्रकार, सामान्य प्रविक्रया में, क े वल विनमा1ण क े खिलए मंजूरी क े खिलए आवेदन प्र_ ु करने से, प्राव ानों क े वै ाविनक संAालन द्वारा विकसी भी पक्ष क े पक्ष में कोई विनविह अति कार नहीं बनाया जा ा है। हमारी सुविवAारिर राय में, न्यायालय क े विदनांक २३. १२. १९९३ क े आदेश द्वारा, सिजसमें कहा गया है विक याAी को Aौर्थीी मंसिजल से ऊपर अति रिरक्त मंसिजलों की और _वीक ृ ति क े खिलए 'आवेदन आदेश से नहीं रोका गया है' और न्यायालय क े बाद क े २४. ६. १९९४ क े आदेश में व्यक्त 'अपेक्षा', विनगम से Aार सप्ताह क े भी र मंजूरी क े खिलए लंविब 10 [2003] Supp (6) SCR1212 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk आवेदन पर विनण1य लेने क े खिलए, प्रति वादी-क ं पनी क े पक्ष में कोई विनविह अति कार नहीं बनाया जा सक ा है, जैसा विक वे उनक े दूसरे अावेदन की ारीV को अस्मि_ त्व में र्थीे” कानून में उपरोक्त स्मि_र्थीति क े आलोक में, यह _पष्ट है विक क्लब यह दावा नहीं कर सक ा र्थीा विक उसक े आवेदन को पुरानी योजना क े संदभ[1] में विनपटाया जाना र्थीा, जो 2012 में समाप्त हो गई र्थीी। उच्च न्यायालय क े विनद•श का अर्थी1 क े वल यह हो सक ा है विक आवेदनों को पुनज*विव विकया जाना र्थीा, और इसक े विवAार की ारीV, यानी 31.07.2019 क े बाद प्रAखिल योजना क े सार्थी विन_ ारण गया र्थीा। उच्च न्यायालय द्वारा की गई यह व्याख्या विक मौजूदा भूVंड र्थीे, सिजन पर पुरानी योजना क े ह कार1वाई की जा सक ी र्थीी, पूरी रह से गल है। ऐसे मामलों में, यह देV े हुए विक पुरानी योजना को बंद करने की वै ा को अंति म रूप दे विदया गया है, विकसी भी भूविम या भूVंड को कु क 1 करने या संबंति होने का कोई सवाल ही नहीं उठ ा क्योंविक यह विकसी पुरानी योजना से संबंति र्थीा।यविद कोई भूविम या भूVंड या औद्योविगक इकाई वा_ व में शेष रह जा ी है ो यह हमेशा विवकास प्राति करण या एजेंसी (यहां नोएडा) पर विनभ1र कर ा है विक उनसे क ै से विनपटा जाए।अवमानना की काय1वाही में जारी विकए गए विनद•श, जो एक अन्य अपील का विवषय हैं, दनुसार ऋ ु विटपूण[1] अशिभविन ा1रिर विकए जा े हैं।

22. जैसा विक पहले देVा गया है, क्लब को एक भूVंड 2014 में आवंविट विकया गया र्थीा एवं इसक े द्वारा आवश्यक राशिश का भुग ान विकया र्थीा। इस भूVंड का क्षेत्रफल 4000 वग[1] मीटर है। अब, जबविक यह सA है विक इस थ्य को उच्च न्यायालय में प्रकट नहीं विकया जा सक ा र्थीा, रिरट यातिAका दायर कर े समय (2013 में), इस अदाल की राय में, रिरट काय1वाही विवAारा ीन ा रहने क े दौरान इसका Vुलासा करना क्लब का दातियत्व र्थीा। यह थ्य ास्मित्वक र्थीा, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk यह देV े हुए विक लागू विकया गया अति कार क्षेत्र न्यायसंग और विववेका ीन है। इसक े अलावा, क्या शिशकाय उतिA और अच्छी रह से _र्थीाविप र्थीी, यह देV े हुए विक रा{य एजेंसिसयां ऐसी औद्योविगक इकाइयों का विवकास और आवंटन उतिA कीम ों पर कर ी हैं, और यह विक एक आवेदक बाद में एक भूVंड हासिसल करने में सफल हो जा ा है, प्रासंविगक थ्य हैं, सिजन्हें न्यायालय को सूतिA विकया जाना Aाविहए।इस न्यायालय की राय में ऐसा करने में क्लब की असफल ा विकसी भी राह क े खिलए हकदार नहीं है।

23. पूव1गामी कारणों से, नोएडा की अपीलों को आक्षेविप विनण1य और उच्च न्यायालय क े आदेशों को इसक े द्वारा अपा_ विकया जा ा है। लाग पर कोई आदेश नहीं होगा। …………………………………... न्यायमूर्ति उदय उमेश लखिल …………………………………... न्यायमूर्ति एस. रविवन्द्र भट ….……………………………….. न्यायमूर्ति पाविमविदघनटम श्री नरसिसम्हा नई विदल्ली 05 मई, 2022. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk