Pawan Daubey v. State of Uttar Pradesh & Ors.

Delhi High Court · 06 May 2022
Indira Banerjee; A. S. Bopanna
Civil Appeal No 3668/2022 @ Special Leave Petition (Crl) No 15501/2021
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal, holding that a subsequent licensee must be heard before cancellation of a license affecting their rights, setting aside the High Court order and directing fresh hearing.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 3668/2022
(विवशेष अनुमति याति*का (सी) संख्या 15501/2021 से उत्पन्न)
पवन *ौबे .................... अपीलार्थी5
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ................... प्रत्यर्थी5
(गण)
विनण;य
न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5
अनुमति प्रदान की गई।
यह अपील अंति म विनण;य और आदेश विदनांक 18.08.2021 क
े विवरूद्ध है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 द्वारा दायर रिरट याति*का डब्ल्यू सी संख्या
27656/2018 है, सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 क
े उति* मूल्य की दुकान क

लाइसेंस को रद्द करने क
े आदेश को *ुनौ ी दी गई है।
हमारे समक्ष अपीलार्थी5 उति* मूल्य की दुकान क
े लिलए लाइसेंस का
अनुव 5 आवंटी है। अपीलार्थी5 उति* मूल्य की दुकान *ला ा है। अपीलार्थी5 ने
उद्घोषणा
“क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण;य वादी क
े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबYति प्रयोग क
े लिलए है और विकसी अन्य
उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया र्जीा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क
े लिलए, विनण;य का अंग्रेर्जीी
संस्करण प्रामाणिणक माना र्जीाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क
े उद्देश्यों क
े लिलए मान्य होगा।"
कणिर्थी रिरट याति*का में प्रत्यर्थी5 क
े रूप में शाविमल विकए र्जीाने क
े लिलए आवेदन विकया
र्थीा। उक्त आवेदन पर विव*ार नहीं विकया गया।
प्रत्यर्थी5 संख्या 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता और प्रत्यर्थी5
प्राति कारिरयों की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता को सुनने क
े बाद , उच्च
न्यायालय ने पाया विक लाइसेंसिंसग प्राति कारी ने प्रत्यर्थी5 संख्या 4 क
े विपछले
आ*रण क
े आ ार पर लाइसेंस को पूरी रह से रद्द करने क
े लिलए आगे बढ़े र्थीे
क्योंविक उनका लाइसेंस इससे पहले 2013-2014 में रद्द कर विदया गया र्थीा।
उच्च न्यायालय का विव*ार र्थीा विक एक बार 2013-14 में विनलंबन क

आदेश को विनरस् करने क
े बाद, लाइसेंस को उसक
े विपछले आ*रण क
े कारण रद्द
नहीं विकया र्जीा सक ा र्थीा, लेविकन क
े वल नई सामग्री क
े आ ार पर सिर्जीस पर
संबंति प्राति कारी **ा; करने क
े लिलए बाध्य र्थीा और आरोपों को साविब करने की
आवश्यक ा र्थीी।ऐसा प्र ी हो ा है विक संबंति लाइसेंसिंसग प्राति कारिरयों ने
प्रत्यर्थी5 संख्या 4 क
े लिnलाफ या ो अपीलीय प्राति कारी क
े समक्ष या उच्च
न्यायालय क
े समक्ष आरोपों को साविब करने क
े लिलए कोई प्रयास नहीं विकया।उच्च
न्यायालय ने विनष्कष; विनकाला विक प्राति कारिरयों ने अपीलक ा; क
े विपछले आ*रण

े आ ार पर लाइसेंस रद्द करने क
े र्जीाल में फ
ं स गए र्थीे।
यह अपीलक ा; का मामला है विक अपीलक ा; को पक्षकार क
े रूप में
शाविमल विकया र्जीाना *ाविहए र्थीा और उति* मूल्य की दुकान का लाइसेंस रद्द करने
से पहले सुनवाई की र्जीानी *ाविहए र्थीी। इसमें कोई संदेह नहीं विक आक्षेविप आदेश
सिर्जीसमें प्रत्यर्थी5 संख्या 4 क
े उति* मूल्य की दुकान क
े लाइसेंस को रद्द करने का
आदेश रद्द कर विदया गया है सिर्जीससे उति* मूल्य दुकान लाइसेंस क
े बाद क

आवंटी क
े रूप में अपीलक ा; क
े विह पर प्रति क
ू ल प्रभाव डाल ा है।
उद्घोषणा
हमारा ध्यान पूनम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2016) 2 SCC
779 में इस न्यायालय क
े विनण;य की ओर आकर्षिष विकया गया है। उक्त विनण;य पर
अवलम्ब ले े हुए प्रत्यर्थी5 bमांक 4 की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वान अति वक्ता ने क
;
विदया विक अपीलार्थी5 को सुने र्जीाने की आवश्यक ा नहीं है।
उसक
े पास मुकदमा *लाने का कोई अति कार नहीं र्थीा।
पूनम (उपरोक्त) मामले में बाद क
े आवंविटयों को वास् व में सभी *रणों में सुना
गया र्थीा।न्यायालय ने र्जीो अव ारिर विकया वह यह र्थीा विक पश्चा व 5 आवंटी अपने
अति कार को स्व ंत्र रूप से स्र्थीाविप करने का प्रयास कर रही र्थीी।उन्होंने क
;
विदया विक उनक
े पास एक स्व ंत्र कानूनी अति कार है।इस न्यायालय ने पाया विक
यह मानना बहु मुस्थिश्कल र्थीा विक उसक
े पास एक स्व ंत्र कानूनी अति कार र्थीा।
सुविमत्रा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (सिसविवल अपील संख्या
9363-9364/2014) मामले में माननीय न्यायमूर्ति रंर्जीना प्रकाश देसाई और
माननीय न्यायमूर्ति एन. वी. रमण ( त्कालीन न्यायमूर्ति क
े रूप में) की पीठ ने
विदनांक 08.10.2014 को एक आदेश पारिर विकया, सिर्जीसका प्रासंविगक सन्दभ;
नी*े उद्धृ विकया गया हैः-
“अपीलार्थी5 ने बाद में आबंविट होने क
े कारण 17.10.2008 को रिरट याति*का
में अणिभयोग क
े लिलए एक आवेदन दायर विकया। उस आवेदन पर न ो विव*ार
विकया गया और न ही अनुमति दी गई। xxx xxx xxx
हमारी राय में अपीलक ा; क
े विवद्वान अति वक्ता ने क
; विदया और कहा विक उच्च
न्यायालय को प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल करने से पहले अपीलार्थी5
को सुनना *ाविहए र्थीा क्योंविक अपीलार्थी5 बाद में आबंविट र्थीा और उसक

अति कार प्रत्यर्थी5 संख्या 6 क
े लाइसेंस की बहाली से प्रभाविव र्थीे।हम
उद्घोषणा
अपीलार्थी5 क
े विवद्वान अति वक्ता से पूरी रह सहम हैं।हमारी राय में, उच्च
न्यायालय अपीलार्थी5 को सुने विबना प्रत्यर्थी5 संख्या 6 का लाइसेंस बहाल नहीं
कर सक ा र्थीा क्योंविक ऐसे आदेश से उसक
े अति कार विनतिश्च रूप से प्रभाविव
हुए र्थीे।”
भले ही बाद क
े आबंविट ी क
े पास स्व ंत्र अति कार न हो, विफर भी उसे सुनवाई
का अति कार है और रद्दीकरण क
े आदेश का ब*ाव करने क
े लिलए विनवेदन करने
का अति कार है।
यह स* है विक अपीलार्थी5 की विनयुविक्त क
े आदेश में कहा गया है विक आदेश
अदाल में लंविब काय;वाही क
े परिरणाम क
े अ ीन है।यह अपीलक ा; को यह
विदnाने की कोणिशश करक
े विक प्रत्यर्थी5 संख्या 4 क
े लिnलाफ रद्द करने का आदेश
सही ढंग से पारिर विकया गया र्थीा, काय;वाही में उपस्थिस्र्थी होने और लड़ने से
अयोग्य नहीं कर ा है।
दनुसार, अपील को अनुमति दी र्जीा ी है।आक्षेविप विनण;य और आदेश को
अपास् विकया र्जीा ा है।
अपीलार्थी5 को रिरट काय;वाविहयों में पक्षकार क
े रूप में माना र्जीाएगा।
अपीलार्थी5 को सुनवाई का उति* अवसर देने क
े बाद रिरट काय;वाविहयों का
विनस् ारण विकया र्जीाएगा।यह देn े हुए विक काय;वाही लंबे समय से लंविब है और
हम उच्च न्यायालय से अनुरो कर े हैं विक इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की
ारीn से ीन महीने क
े भी र उच्च न्यायालय में लंविब रिरट याति*का का
विनस् ारण करें।
…………………………
( न्यायमूर्ति इंविदरा बनर्जी5 )
उद्घोषणा
…………………………
( न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना )
नई विदल्ली;
06 मई, 2022
उद्घोषणा
JUDGMENT