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भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सि विवल याति का ं 2929/2022
वीना सिं ह (मृ )-एल. आर. क
े माध्यम े ....अपीलक ा, बनाम
सि.ला विनबं क/अपर कलेक्टर (एफ/आर) .... प्रत्यर्थी4 और अन्य 2
विनर्ण,य
मा. न्यायमूर्ति डॉ नं.य वाई ंद्र ूड़
विवश्लेषर्ण की ुविव ा े इ विनर्ण,य को विनम्नलिललिF Fंडों में विवभासि. विकया गया
है। .ो इ प्रकार हैंः
A एक परिर य……………………………………………….....3
B अति वक्ता का विनवेदन ...…………………….. ……………...13
C विवश्लेषर्ण ...………………………………………………....18
C.1 पं.ीकरर्ण अति विनयम का वै ाविनक ढां ा………………....18
C.2 विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा की अपनाए गए ा न की वै ा ….... 27
C.3 "विनष्पादन" का अर्थी, ..………………………………....33 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
D विनष्कष,……………………………………………………...61
A एक परिर य
JUDGMENT
1. यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश क े 31 मई, 2018 क े फ ै ले े उत्पन्न हुई है। उच्च न्यायालय ने अपीलक ा, Yारा अनुच्छेद 226 क े ह दायर एक याति का को Fारिर. कर विदया, सि. में सि.ला विनबं क/ अति रिरक्त कलेक्टर (विवत्त और रा.स्व), बरेली1,.ो व,मान अपील में पहले प्रति वादी हैं, क े 31 मा, 2012 क े आदेश को रद्द आदेश क े लिलए उत्प्रेषर्ण की प्रक ृ ति में एक रिरट की मांग की गई र्थीी।इ अपील विव ारा ीन रहने क े दौरान, अपीलक ा, का मृत्यु हो गयी है और इ न्यायालय क े 9 विद ंबर 2021 को एक आदेश पारिर कर अपीलक ा, को उ क े विवति क उत्तराति कारी Yारा प्रति स्र्थीाविप कर विदया है।
2. इ विववाद की मुख्य बा 3,793 वग, ग. का भूFण्ड़ है,.ो 110-B, सि विवल लाइं, बरेली, उत्तर प्रदेश में स्थिस्र्थी है, सि. पर ी.पी. सिं ह का स्वाविमत्व र्थीा। अपने.ीवनकाल क े दौरान उन्होंने लगभग 415 वग, ग. भूविम ार विवशिशष्ट व्यविक्तयों को हस् ां रिर कर दी र्थीी। उनकी मृत्यु क े उपरान्, अपीलक ा,,.ो उ की पत्नी है, अपनी दो बेविटयों नी ा सिं ह और नीलम सिं ह और पुत्र प्रदीप सिं ह क े ार्थी ंपलित्त का ंयुक्त मालविकन बन गयी। अपीलार्थी4 क े पुत्रों एवं पुवित्रयों 11 - सि.ला विनबं क mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA Yारा उ क े पक्ष में 17.04 2010 को एक मुख् ारनामा विनष्पाविद विकया गया र्थीा, सि. े 27 सि ंबर 2011 को विनरस् कर विदया गया र्थीा।
3. अपीलक ा, पर एक डेवलपर-गु.राल ए ोसि एट् क े ार्थी दो करार करने का आरोप है,.ो व,मान अपील में विY ीय प्रत्यर्थी4 हैः(i) ) प्रर्थीम, भूविम क े ामने क े विहस् े में 1000 वग, मीटर क े क्षेत्र को कशिर्थी ौर पर विवकसि करने का करार विकया गया र्थीा। यह उल्लेF करना महत्वपूर्ण, है विक इ करार की प्रक ृ ति विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा विववाविद है (.ो आरोप है विक यह विवक्रय क े करार े अन्यर्थीा करार र्थीा), लेविकन इ विववाद को व,मान अपील में इ न्यायालय क े मक्ष उठाया नहीं गया है; और (i) i) ) विY ीय, इ भूविम क े पीछे क े विहस् े में स्थिस्र्थी 839.[4] वग, मीटर क े क्षेत्र 1.[6] करोड़ रुपये प्रति फल पर बें ने क े लिलए विवक्रय का करार विकया गया र्थीा, सि. का विनष्पादन 22 अक्टूबर 2010 को विकया गया र्थीा। दू री ओर, विY ीय प्रत्यर्थी4 क, है विक विवक्रय का करार 1 839.[4] वग, मीटर क े क्षेत्र क े लिलए र्थीा। यह भी उल्लेF करना महत्वपूर्ण, है विक 39,61,000 रुपये की राशिश (विY ीय प्रत्यर्थी4 क े अति वक्ता क े अनु ार) में स्टांप ड्यूटी का भुग ान भूविम क े क, ल रेट यानी 6,11,53,000 रुपये क े आ ार पर विकया गया र्थीा।
4. अक्टूबर 2010 और 3.नवरी 2011 क े बी, विY ीय प्रत्यर्थी4 ने कशिर्थी रूप े अपीलक ा, को बारह विकस् ों में 93 लाF रुपये का भुग ान विकया।शेष 67 लाF रुपये की राशिश का एक ेक विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा 20.ून 2011 को अपीलक ा, को ौंपा गया र्थीा। अपीलक ा, ने कहा है विक उ े यह मह ू हुआ विक उ क े ार्थी ोFा ड़ी की गई है, इ ेक को नही भुनाया।उ ी ारीF को, विवक्रय क े करार क े आ ार पर और शेष विवक्रय प्रति फल क े भुग ान पर अपीलक ा, Yारा विY ीय प्रत्यर्थी4 क े पक्ष में एक विवक्रय विवलेF विनष्पाविद विकया mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA.ाना र्थीा। इ विबक्री विवलेF का विनष्पादन और पं.ीकरर्ण व,मान अपील में विववाद का आ ार है।
5. 5 विद ंबर 2011 को, विY ीय प्रत्यर्थी4 ने विबक्री विवलेF को विनष्पाविद करने की अनुमति मांग े हुए एक आवेदन प्रस् ु विकया।इ क े उपरान् 15 विद ंबर, 2011 को उन्होंने ब-विनबं क-1, बरेली क े मक्ष विवक्रय विवलेF क े पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु विकया। उप-विनबं क क े एक नोविट क े.वाब में, अपीलक ा, 17 फरवरी 2012 को उप-विनबं क क े मक्ष पेश हुआ और उ ने लिललिF में एक आपलित्त प्रस् ु की, सि. में विY ीय प्रत्यर्थी4 क े पक्ष में अ ूरे और.ाली विबक्री विवलेF को विनष्पाविद न करने का अनुरो विकया गया।अपीलक ा, ने कहा विक उ की आयु 78 वष, र्थीी और वह अव ाद, हृदय रोग और उच्च रक्त ाप पीविड़ र्थीी और उ का बेटा एक शराबी र्थीा.ो अपने दम पर कोई विनर्ण,य लेने में अ मर्थी, र्थीा। अपीलक ा, ने कहा विक विY ीय प्रत्यर्थी4 उ की ंपलित्त को लेकर.बरन विबक्री विवलेF पर हस् ाक्षर करने क े लिलए उ े परेशान कर रहा र्थीा।अपीलक ा, ने आगे कहा विक विY ीय प्रत्यर्थी4 ने उ े दस् ावे.ों पर हस् ाक्षर आदेश क े लिलए गुमराह करने वाली और झूठी.ानकारी दी, यहां क विक उ े अपने परिरवार क े दस्यों े लेन-देन को शिछपाने क े लिलए भी म.बूर विकया। विवशेष रूप े भूविम क े ामने और पीछे क े विहस् े क े ंबं में दो लेन -देन क े ंबं में, अपीलक ा, ने विनम्नानु ार अशिभकर्थीन विकयाः (A) मे, गु.राल ए ोसि एट् क े ार्थी 100 वग, मीटर करार का विववरर्ण-.ो 110 बी सि विवल लाइं, बरेली में स्थिस्र्थी है सि. का कम े कम बा.ार मूल्य 5 करोड़ रुपये है और 22.10.2010 को सि. का विवक्रय प्रति फल 1,30,00,000/- रुपये है, मुझे रु. 18,00,000/- की राशिश का भुग ान करने की श, है, सि. में 90,00,000/- रुपये नकद और 3,00,000/- रुपये की राशिश विदनांक 03.06.2009 बैंक ऑफ बड़ौदा क े ेक ंख्या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 111681, भुग ान करना शाविमल है.ो वास् व में मुझे कभी भी भुग ान नहीं विकया गया र्थीा और उपयु,क्त ेक विक ी और क े Fा े में.मा है और मेरे Fा े में नहीं है। मेरे और कानून क े अनु ार करार शून्य और विनष्प्रभावी हो.ा ा है क्योंविक पक्षकारों का आशय अवै ा नों Yारा ोFा ड़ी करने का है। (B) मे, गु.राल ए ोसि एट् क े ार्थी 1839.48 वग, मीटर क े लिलए करार का विववरर्ण.ो 11- बी सि विवल लाइं, बरेली में स्थिस्र्थी है सि. का बा.ार मूल्य ा करोड़ रुपये े कम नहीं है, सि. का विवक्रय प्रति फल क े 22.10.2010 को 1,60,00,000/- रुपये दर्शिश है, सि. में 8,00,000/- रुपये की राशिश विह 83,00,000/- रुपये की राशिश का भुग ान नकद में विकया गया है,.ो वास् व में मुझे (श्रीम ी वीर्णा सिं ह) कभी भी भुग ान नहीं विकया गया है ।मेरे और कानून क े अनु ार यह करार शून्य और विनष्प्रभावी हो.ा ा है क्योंविक इ का इरादा अवै ा नों े ोFा ड़ी करने का है। अपीलक ा, ने आगे कहाः कशिर्थी ौर पर सि. मय क े भी र विबक्री विवलेF को विनष्पाविद करने क े लिलए हमति व्यक्त की गई र्थीी, वह आठ महीने की अवति र्थीी,.ो 22.06.2011 को भी माप्त हो गई है और कानूनी परिरर्णामों े ब ने क े लिलए उन्होंने विदनांक 22.06.2011 को अपूर्ण, विबक्री विवलेF पर हस् ाक्षर प्राप्त विकए र्थीे। 20.ून, 2011 को.ब वे मुझ पर पं.ीकरर्ण काया,लय क े बंद होने े पहले काग.ा पर.ल्दी हस् ाक्षर करने क े लिलए दबाव डाल रहे र्थीे और हस् ाक्षर करने े पहले काग.ा पढ़ने का मौका नहीं दे रहे र्थीे, ो मेरी पो ी ने कमरे में प्रवेश विकया और इ क े क े बारे में पूछ ाछ की।उ ने पूछा विक क्या काग.ा विक ी क े Yारा पढ़ा गया र्थीा, सि. पर मैंने उत्तर विदया नहीं। इ लिलए उन्होंने दस् ावे.ों की एक फोटो कॉपी मांगी ाविक हमारे वकील उन्हें देF क ें ।उ मय यह थ्य ामने आया विक.ो क ु छ भी ल रहा र्थीा वह गल और भ्रामक र्थीा, मे, गु.राल ए ोसि एट् क े लोग और उनक े वकील श्री अविनल कु. अग्रवाल ब ौंक गए.ब मेरी पो ी ने फोटो कॉपी मांगी क्योंविक वह मुझे अपने कमरे में 5 लोगों े ति‡रा देFकर डर गई र्थीी और विफर.ब हमें यह एह ा हुआ विक उन्होंने भूविम क्षेत्र में हेरफ े र विकया र्थीा वे मेरे भूविम क्षेत्र में हेरफ े र कर रहे र्थीे और वे मेरा ‡र भी अवै रूप े हड़प रहे र्थीे, इ लिलए मैं इ विवक्रय विवलेF क े लिFलाफ हूं क्योंविक उन्होंने ोFा ड़ी की है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अपीलक ा, ने आगे दावा विकया विकः (i) ) विवलेF में 1839.48 वग, मीटर की.ो ीमाएं विन ा,रिर की गई र्थीीं, वे गल र्थीीं और स्पष्ट नहीं है विक क्या बे ा.ाना है।इ क े अलावा, विY ीय प्रत्यर्थी4 ने वास् विवक भूविम क्षेत्र में अपीलक ा, क े ‡र को भी शाविमल करक े हेरफ े र विकया र्थीा,.हां वह पां दशकों े रह रही र्थीी, हालांविक उ का इरादा इ े अलग-र्थीलग करने का नहीं र्थीा;
(i) i) ) विवक्रय विवलेF स्वयं अपूर्ण, र्थीा, किंक ु दू रे प्रत्यर्थी4 ने.बरन उ पर रसि.स्ट्रीकरर्ण क े लिलए मय ीमा क े भी र विवक्रय विवलेF दालिFल करने की हड़बड़ी में हस् ाक्षर कर विदए।
(i) i) i) ) विY ीय प्रत्यर्थी4 स्वयं इ बा े अवग र्थीा विक भूविम क े ह -अंश ारिरयों क े बी कोई विवभा.न नहीं हुआ र्थीा, विफर भी विवक्रय विवलेF ैयार करने क े लिलए आगे बढ़ा। इ लिलए, उ क े उपरोक्त दावों क े आ ार पर, अपीलक ा, ने उप-विनबं क े विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा की गई.ाल ा.ी क े विवरूद्ध कार,वाई करने का अनुरो विकया और विY ीय प्रत्यर्थी4 को 1839.48 वग, मीटर क े क्षेत्र क े लिलए अ ूरे विबक्री विवलेF को पं.ीक ृ करने े रोकने का अनुरो विकया।
6. 17 फरवरी 2012 क े एक आदेश Yारा, उप-विनबं क ने अपीलक ा, क े विनम्नलिललिF बयान को द., करने क े बाद विबक्री विवलेF को पं.ीकरर्ण करने े इनकार कर विदयाः मैं अक े ला र्थीा, इ विवक्रय विवलेF पर मेरे हस् ाक्षर.बरन लिलए गए र्थीे, मैं अस्वस्थ्य ल हूं, और मैं नींद की दवा भी ले ा हूं, मुझे म ुमेह भी है, मैं उच्च रक्त ाप े भी पीविड़ हूं।4-5 लोगों की ंख्या में कई लोग वहां पहुं कर.बरन मेरे हस् ाक्षर ले लिलए।दू रा कागज़ मुझे पढ़ कर ुनाय गया और उ पर मेरा दस् F ले लिलया गया।मैं अक े ला रह ा हूं।वे आ. मुझे परेशान कर रहे हैं।भूविम.ो इ नी अति क मात्रा में नहीं है.ो उन्होंने लिलFी है।उनक े अनु ार, वे उ ‡र पर भी कब्.ा करने की कोशिशश कर े हैं.ो मेरा है।मैं इ विबक्री विवलेF को विनष्पाविद नहीं करना ाह ा हूं।मुझे आराम े रहने विदया.ाए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उप-विनबं क ने उनक े Yारा विदए गए बयान क े आ ार पर विनम्नलिललिF विनर्ण,य ुनायाः उपयु,क्त कर्थीन क े आ ार पर श्रीम ी बीना उपयु,क्त विबक्री विवलेF को पं.ीक ृ करने क े लिलए ैयार नहीं हैं, सि. े वह कपटपूव,क विनष्पाविद कराया.ाना ब ा ी हैं।इ लिलए, भार ीय पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 (3) ए क े ह और पं.ीकरर्ण मैनुअल, भाग-2 क े विनयम 249 क े ह विबक्री विवलेF क े पं.ीकरर्ण े इनकार विकया.ा ा है।
7. उप-विनबं क ने विबक्री विवलेF क े पं.ीकरर्ण का करने े इनकार कर विदया र्थीा, इ लिलए विY ीय प्रत्यर्थी4 ने 2 मा, 2012 को पं.ीकरर्ण अति विनयम 1908[2] की ारा 72 क े ह एक अपील[3] दायर की। अपीलक ा, ने इ आ ार पर उप- पं.ीयक क े आदेश का मर्थी,न करने क े अति रिरक्त ारा 72 क े ह दायर अपील की पोषर्णीय ा पर आपलित्त कर े हुए कहा विक विववादग्रस् विबक्री विवलेF उ क े Yारा विनष्पाविद नहीं विकया गया र्थीा।
8. सि.ला विनबं क ने अपील स्वीकार कर े हुए विदनांक 31 मा, 2012 क े एक आदेश पारिर कर विदया और पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 74 Yारा विन ा,रिर प्रविक्रया का पालन करने हुए यह अव ारिर विकया विक क्याअपीलक ा, Yारा विवक्रय विवलेF का विनष्पाविद विकया गया र्थीा। सि.ला विनबं क ने बाद में विनर्ण,य विदया विक अपीलक ा, ने दस् ावे. पर अपने हस् ाक्षर स्वीकार कर लिलए र्थीे और विY ीय प्रत्यर्थी4 विबक्री विवलेF को पं.ीक ृ कराने का हकदार र्थीा। इ विनष्कष, पर पहुं ने में, सि.ला विनबं क ने विबक्री विवलेF क े मुंशी और विबक्री विवलेF क े गवाहों Yारा विदए गए बयानों पर भरो ा विकया, इ प्रभाव क े लिलए विक दस् ावेज़ को अपीलक ा, Yारा उनकी उपस्थिस्र्थीति में विबना विक ी दबाव क े विनष्पाविद विकया गया र्थीा। सि.ला 2 पंजीकरण अधिनियम अधि धि यम 3 अपील सं सं. 01 स ् 2012 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनबं क ने यह भी कहा विक विबक्री विवलेF े पहले 22 अक्टूबर 2010 को विवक्रय का करार पं.ीक ृ विकया गया र्थीा, सि. क े ह अपीलक ा, को 1.[6] करोड़ रुपये क े विबक्री मूल्य क े रूप में नकद और ेक क े रूप में 93 लाF रुपये की राशिश प्राप्त हुई र्थीी। विवक्रय क े करार क े अनु रर्ण में ेक Yारा प्रति फल की प्राविप्त विववाद में नहीं ब ाई गई र्थीी। इ क े अलावा, सि.ला विनबं क ने पाया विक लगभग एक वष, और दो महीने की अवति क े दौरान, विवक्रय का करार क े पं.ीकरर्ण और 15 विद ंबर 2011 को विबक्री विवलेF की प्रस् ुति क े बी, अपीलक ा, ने ोFा ड़ी का आरोप लगा े हुए कोई शिशकाय द., नहीं की र्थीी। सि.ला विनबं क ने यह भी पाया विक विवक्रय विवलेF और विवक्रय क े करार पर अपीलक ा, क े हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/अँगुलिल ति न्ह की.ां एक हस् लेFन विवशेषज्ञ Yारा की गई र्थीी, और वे मान पाए गए र्थीे। इन विनष्कष• क े आ ार पर सि.ला विनबं क ने उप विनबं क क े विनर्ण,य को दरविकनार कर विदया और 15 विद ंबर 2011 को प्रस् ु विवक्रय विवलेF क े पं.ीकरर्ण का आदेश विदया। परिरर्णामस्वरूप, विवक्रय विवलेF 16 अप्रैल 2012 को पं.ीक ृ कर लिलया गया।
9. महत्वपूर्ण, रूप े, अपीलक ा, ने सि.ला विनबं क क े आदेश क े बाद हुए क ु छ ‡टनाक्रमों का उल्लेF विकया है।अपीलक ा, क े अनु ार, हायक महाविनरीक्षक, पं.ीकरर्ण, बरेली ने विवक्रय विवलेF में शाविमल भूविम क े उप-विनबं क Yारा स्र्थील विनरीक्षर्ण का आदेश विदया। उप-विनबं क ने 30 अप्रैल 2012 की अपनी रिरपोट, में यह विनष्कष, विनकाला विक विवलेF Yारा आच्छाविद वास् विवक क्षेत्र 1341.73 वग, मीटर र्थीा, सि. में े 740.73 वग, मीटर अपीलक ा, क े ‡र का क्षेत्र र्थीा।इ क े अलावा, उप-विनबं क ने कहा विक विवक्रय विवलेF क े अनु ार उत्तरी और पति•मी ीमाएं मौ.ूद र्थीीं, लेविकन मौक े पर दतिक्षर्णी और पूव[4] ीमाएं विबक्री विवलेF में उसिल्ललिF ीमाओं े मेल नहीं Fा रहीं र्थीीं।बाद में, उप-विनबं क की सि फारिरश mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े बाद, नायब ह ीलदार Yारा एक और स्र्थील त्यापन भी विकया गया।नायब ह ीलदार ने 26 मई 2012 की एक रिरपोट, में कहा विक विवक्रय विवलेF में उसिल्ललिF ीमाएं पूरी रह े गल र्थीीं।इ क े अलावा, यह भी कहा गया विक स्र्थील पर वास् विवक क्षेत्र 849.12 वग, मीटर र्थीा,.बविक 1839.48 वग, मीटर क े क्षेत्र में विबक्री विवलेF विदFाया गया र्थीा।भाग A में रिरपोट, में कहा गया विक यविद 1839.48 वग, मीटर क े क्षेत्र को विवक्रय विवलेF क े क्षेत्र क े रूप में लिलया.ा ा है, ो यह आंशिशक रूप े अपीलक ा, क े आवा ीय ‡र, ‡र क े ामने स्थिस्र्थी उद्यान क्षेत्र और ीन ंपलित्तयों को आच्छाविद करेगा.ो पहले अपीलक ा, क े मृ पति Yारा बे ी गई र्थीीं। इ लिलए, नायब ह ीलदार ने विनष्कष, विनकाला विक पं.ीक ृ विबक्री विवलेF पूरी रह े गल र्थीा।
10. इ स् र पर, यह उल्लेF करना भी महत्वपूर्ण, होगा विक अपीलक ा, Yारा भार ीय दंड ंविह ा 1860 की ारा 420, 467, 468, 471 और 506 क े ह दंडनीय अपरा ों क े लिलए विY ीय प्रत्यर्थी4 क े मालिलकों क े विवरूद्ध र्थीाना को वाली, उप-सि.ला दर, बरेली में 4 मई 2012 को एक प्रर्थीम ू ना रिरपोट,[4] दायर की गई र्थीी।इ क े बाद,.ां अति कारी Yारा एफआईआर में एक अंति म रिरपोट, लगा दी गई र्थीी।अंति म रिरपोट, क े लिFलाफ अपीलक ा, Yारा दायर एक विवरो याति का को मसि.स्ट्रेट Yारा 20 सि ंबर 2013[5] क े एक आदेश Yारा Fारिर. कर विदया गया है, सि. क े लिFलाफ अपीलक ा, का पुनरीक्षर्ण लंविब है।
11. इन ‡टनाक्रमों क े ार्थी, अपीलक ा, ने ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े मक्ष सि.ला विनबं क क े 31 मा, 2012 क े आदेश को ुनौ ी दी।31 मई, 2018 क े आक्षेविप विनर्ण,य Yारा अपीलार्थी4 की रिरट 4 एफ.आई.आर. सं. 192/ 2012; म ुकदम ा अपराध सं अपरा अपराध सं सं. 1118/2012 5 प्रकीर्ण, वाद ं. 225/2013 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA याति का का विनर्ण,य कर े हुए, उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने विव ार क े लिलए विनम्नलिललिF प्रश्न ैयार विकएः 38. ―38. इ मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में और पक्षकारों क े अति वक्ता Yारा विदए गए क• को ध्यान में रF े हुए इ न्यायालय Yारा विव ार विकए.ाने वाले प्रश्न का ारांश यह हैः क्या रिरट सि. रीति े दायर की गयी र्थीी उ में वह पोषर्णीय र्थीी? अति विनयम की ारा 35 (3) (ए) क े ह उप विनबं क Yारा प्रयोग की गई शविक्तयों का दायरा क्या है?क्या याति काक ा, Yारा विबक्री विवलेF क े विनष्पादन े इनकार को उप पं.ीयक Yारा ारा 35(3)(a) ) क े ह शविक्त का प्रयोग करने और पं.ीकरर्ण े इंकार करने की ही व्याख्या की गई र्थीी? क्या सि.ला विनबं क प्रत्यर्थी4 ंख्या 2 Yारा अभ्यावेदन क े रूप में दायर की गई अपील पर विव ार कर क े र्थीे और मूल प्राति कारी क े रूप में न विक अपीलीय प्राति कारी क े रूप में शविक्त का प्रयोग कर क े र्थीे ?क्या इ न्यायालय Yारा अपना अं रिरम आदेश पारिर करने े पहले 16.04.2012 को पं.ीक ृ विबक्री विवलेF को इ न्यायालय Yारा यह कह े हुए रद्द विकया.ा क ा है विक यह गल रीक े े पं.ीक ृ विकया गया र्थीा?‖ ब एकल न्याया ीश ने यह म व्यक्त विकयाः (i) ) त्य पाल आनंद बनाम मध्य प्रदेश राज्य[6] क े मामले में इ न्यायालय क े विनर्ण,य क े ंदभ, में, पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 34 और 35 क े ह उप-विनबं क को विबक्री विवलेF में लेन-देन क े हक या वै ा की वै ा क े बारे में.ां करने की कोई अ,-न्यातियक शविक्त नहीं है, लेविकन क े वल यह ुविनति• करना है विक पं.ीकरर्ण अति विनयम क े प्राव ानों का अनुपालन विकया गया है या नहीं।इ ंव्यवहार क े स्वत्व या वै ा े ंबंति प्रश्नों का विनर्ण,य क े वल क्षम सि विवल न्यायालय Yारा ही विकया.ा क ा है। 6 (2016) 10 एस.सी.सी. 767 सत्य पा अपराध संल सं धिसंह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (II ) उप-विनबं क ने व,मान मामले में पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 (3) (a) ) क े ह विबक्री विवलेF का पं.ीकरर्ण करने े इनकार कर विदया र्थीा क्योंविक अपीलक ा, ने यह माना है विक विक उ ने विबक्री विवलेF पर अपने अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान लगाया र्थीा और हस् ाक्षर विकये र्थीे और इ आ ार पर पं.ीकरर्ण पर आपलित्त. ाई र्थीी विक उ क े हस् ाक्षर ोFा ड़ी कराए गए र्थीे,.बविक विबक्री विवलेF में विदFाया गया क्षेत्र 1839 वग, मीटर र्थीा। हालांविक, यह माना गया विक ारा 35 क े ह उप-विनबं क क े पा विबक्री विवलेF क े विनष्पादन क े ंबं में.ां करने की शविक्त नहीं र्थीी, और वह क े वल अपीलक ा, Yारा विनष्पादन े इनकार को द., कर क ा र्थीा।दू री ओर, यह उल्लेF विकया गया विक पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 74 (ए) क े ह विनबं क को यह विन ा,रिर करने की व्यापक शविक्त ौंपी गई है विक दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है या नहीं। 55…रसि.स्ट्रीकरर्ण विनष्पादक की हमति पर विनभ,र नहीं कर ा है, बस्थिल्क विनबं क की यह विनष्कष, है विक विनष्पादक ने वास् व में ंबंति दस् ावे. पर हस् ाक्षर विकए र्थीे, लेविकन अब वह अनुरो कर रहा र्थीा विक इ े विनष्पादन क े अलावा अन्य कारर्णों े पं.ीक ृ नहीं विकया.ा क ा है। ारा 74 क े ह विनबं क े.ां कराना आवश्यक है।यविद विनबं क को प ा ल ा है विक दस् ावेज़ लेFक/विवलेF लेFर Yारा विवति व ैयार विकया गया र्थीा और ऐ े दस् ावेज़ क े अनुप्रमार्णक गवाहों ने यह भी अशिभ ाक्ष्य विदया विक दस् ावेज़ पर हस् ाक्षर विकए गए र्थीे और विवक्र े ा Yारा उनकी उपस्थिस्र्थीति में अंगूठे और उंगली क े विनशान बनाए गए र्थीे, और विवक्र े ा े.ां करने पर यह प ा ल ा है विक ऐ े थ्य वास् व में ही र्थीे, ो विनबं क पीविड़ व्यविक्त Yारा उ क े मक्ष विनष्पादन े इनकार करने क े बाव.ूद दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण का विनदšश दे क ा है यविद ऐ ेपं.ीकरर्ण अति विनयम क े ह अविनवाय, है।
12. एकल न्याया ीश ने यह भी कहा विक रिरट याति का अपीलक ा, Yारा एफ.आई.आर. क े पं.ीकरर्ण क े बाद ंस्थिस्र्थी की गई र्थीी, सि. क े पहले 31 मा, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2012 को सि.ला विनबं क क े आदेश का 16 अप्रैल 2012 को विवक्रय विवलेF क े पं.ीकरर्ण Yारा पहले ही अनुपालन विकया.ा ुका र्थीा।एकल न्याया ीश ने उल्लेF विकया विक शुरू में, अपीलक ा, ने उच्च न्यायालय क े मक्ष दलील दी र्थीी विक उ क े हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान विबक्री विवलेF पर नहीं विकए गए र्थीे, बस्थिल्क विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा.ाल ा.ी कर कराए गए र्थीे। हालांविक, एकल न्याया ीश ने नोट विकया विक यह 4 मई 2012 की एफआईआर में विवस् ृ रूप े अपीलक ा, की कहानी े एक ु ार र्थीा,.हां यह कहा गया र्थीा विक अपीलक ा, ने स्वेच्छा े विबक्री विवलेF पर अपने हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान विदए और बाद में उ की पो ी को विबक्री विवलेF में क्षेत्र क े गल आंकड़े का एह ा हुआ। उच्च न्यायालय अवलोकन विकया विक क्या अपीलक ा, क े हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा.ाली बनाए गए र्थीे, सि. े थ्य का एक विववाविद प्रश्न उठा र्थीा और इ प्रश्न को क े वल एक क्षम सि विवल न्यायालय क े मक्ष प्रस् ु ाक्ष्य क े आ ार पर हल विकया.ा क ा र्थीा। यह मान े हुए विक उच्च न्यायालय अपने रिरट क्षेत्राति कार क े प्रयोग में विक ी भी रह का विनष्कष, प्रस् ु नहीं कर का, एकल न्याया ीश Yारा रिरट याति का Fारिर. कर दी गई,.बविक अपीलक ा, को यह ‡ोषर्णा करने क े लिलए सि विवल न्यायालय में.ाने क े लिलए स्व ंत्र ा प्रदान कर दी गई विक विबक्री विवलेF ोFा ड़ी े प्राप्त विकया गया र्थीा और अक ृ र्थीा.
13. हमने अपीलक ा, की ओर े उपस्थिस्र्थी विवYान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री प्रदीप कां और विY ीय प्रत्यर्थी4 की ओर े उपस्थिस्र्थी विवYान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री वी क े शुक्ला को ुना है।
14. विवYान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री प्रदीप कां ने विनवेदन विकया विकः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) ) रसि.स्ट्रीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 क े अ ीन उप-विनबं क Yारा विक ी दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए विक ी प्रपत्र को स्वीकार करने े इंकार आदेश क े आदेश क े विवरुद्ध विनबं क क े मक्ष अपील की.ा क ी है, सि वाय उ स्थिस्र्थीति क े.ब विनष्पादन न करने क े आ ार पर इंकार विकया गया हो।व,मान मामले में अपीलक ा, Yारा विवक्रय विवलेF क े विनष्पादन े इंकार कर विदया गया र्थीा और उप-विनबं क ने ारा 35(3)(a) ) क े ह उ आ ार पर पं.ीकरर्ण े इनकार कर विदया र्थीा। इ लिलए, ारा 72 क े ह कोई अपील विव ारर्णीय नहीं होगी;
(i) i) ) विक ी भी स्थिस्र्थीति में, ारा 72 क े ह अपील में, विनबं क को ारा 74 क े ह.ां करने का अति कार नहीं है। ारा 74 क े ह प्रविक्रया का पालन क े वल भी विकया.ा ा है.ब ारा 73 क े ह कोई आवेदन दायर विकया.ा ा है। ारा 74 क े ह, कोई व्यविक्त सि. ने ारा 73 क े ह एक दस् ावे. क े अपं.ीकरर्ण को ुनौ ी दे े हुए आवेदन विकया र्थीा, सि. क े विनष्पादन को विक ी ऐ े व्यविक्त Yारा अस्वीकार कर विदया गया है सि. क े Yारा इ े विनष्पाविद विकया गया है, विनबं क को अपना अति कार स्र्थीाविप कर दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण क े लिलए आवेदन कर क ा है। ।व,मान मामले में, विY ीय प्रत्यर्थी4 ने ारा 72 क े ह अपील दायर की है, ारा 73 और 74 क े प्राव ानों को आकर्षिष नहीं विकया.ा क ा र्थीा;
(i) i) i) ) अपीलक ा, विवक्रय विवलेF पर हस् ाक्षर करने और दस् ावे.ों पर अपने अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान लगाने े इंकार नहीं कर ा है। र्थीाविप, विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन को मात्र उ क े हस् ाक्षर े नहीं.ोड़ा.ा क ा है। अपीलक ा, ने अपने हस् ाक्षर स्वीकार विकया लेविकन ोFा ड़ी और अ म्यक अ र क े आ ार पर पं.ीकरर्ण करने पर आपलित्त. ाई।इ लिलए, विबक्री विवलेF पर उ क े हस् ाक्षर को ाविब करने का प्रश्न कभी भी कोई मुद्दा नहीं र्थीा।विवशेष रूप mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA े, न ो विनबं क और न ही उच्च न्यायालय ने विनष्कष, विनकाला है अपीलक ा, विबक्री विवलेF की ामग्री े उ मय अवग र्थीा अर्थीवा भूविम की ीमाओं और क्षेत्रफल विह विबक्री की विवषय वस् ु क े ंबं में उ े उन दातियत्वों े अवग कराया गया र्थीा.ब उ ने दस् ावे.ों पर अपने हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/अँगुलिल ति न्ह लगाया र्थीा । इ लिलए, क े वल थ्य यह है विक गवाहों ने विबक्री विवलेF पर अपीलक ा, क े हस् ाक्षर ाविब कर विदए हैं, इ विनष्कष, पर नहीं पहुं ा.ा क ा है विक अपीलक ा, ने विबक्री विवलेF को विवति व 'विनष्पाविद ' विकया र्थीा अर्थीवा विनष्पादन े विक ी प्रकार इनकार नहीं विकया.ा क ा र्थीा; (i) v)) अपीलक ा, की विवशिशष्ट आपलित्त यह है विक विवक्रय विवलेF कपटपूर्ण, है और हम श • क े विवपरी है क्योंविक: (a) ) विवक्रय विवलेF में परिरलतिक्ष क्षेत्र पक्षकारों क े बी करार विकए गए क्षेत्र का लगभग दोगुना है; और (b) विबक्री विवलेF में दशा,ए गए क्षेत्र में उत्तरी विदशा में एक ाव,.विनक रास् ा और ार्थी ही अपीलक ा, क े आवा ीय ‡र का एक विहस् ा शाविमल है; और (v)) ंक्षेप में, अपीलक ा, की ओर े विनवेदन यह हैः(a) ) अपील स्वयं विनबं क क े मक्ष पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 क े ह पोषर्णीय नहीं र्थीी। (b) अपीलक ा, विवक्रय विवलेF पर अपने हस् ाक्षर या अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान े इंकार नहीं कर ा है।इ लिलए, विनबं क का विबक्री विवलेF पर अपीलक ा, क े हस् ाक्षर को ाविब करने क े लिलए दो गवाहों और हस् लेF विवशेषज्ञों क े बयानों पर भरो ा करना,.बविक यह विनष्कष, विनकालना विक इ े अपीलक ा, Yारा 'विवति व रूप े विनष्पाविद ' विकया गया र्थीा, गल है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (c) अपीलक ा, Yारा विवक्रय विवलेF क े म्यक विनष्पादन क े ंबं में कोई विनष्कष, नहीं विनकाला गया है,.ो विववाद का विवषय है; और (d) विवक्रय विवलेF में परिरलतिक्ष क्षेत्र और सि. पर पूव, में हमति हुई र्थीी, उ को लेकर पक्षकारों क े बी गंभीर विववाद की स्थिस्र्थीति में अपीलक ा, Yारा कोई अंति म विनष्पादन नहीं विकया.ा क ा र्थीा।
15. दू री ओर, विY ीय प्रत्यर्थी4 की ओर े उपस्थिस्र्थी विवYान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री वी. क े. शुक्ला ने विनवेदन विकया विकः (i) ) अपीलक ा, ने उप-विनबं क क े मक्ष अपनी आपलित्तयों में और 4 मई 2012 को द., एफ.आई.आर. में विवक्रय विवलेF क े विनष्पादन को स्वीकार विकया है,.हां अपीलक ा, स्वीकार कर ी है विक उ क े Yारा विबक्री विवलेF पर हस् ाक्षर विकए गए र्थीे। यविद कोई लिलF पर दोनों पक्षों Yारा हस् ाक्षर विकए.ा े हैं, ो यह इ थ्य की परिरकल्पना है विक दोनों ने इ े विनष्पाविद विकया गया है, हालांविक यह अनुमान Fंडनीय है। व,मान मामले में, पक्षकारों Yारा हस् ाक्षरिर और दो गवाहों Yारा अनुप्रमाशिर्ण विवक्रय विवलेF को विवति मान्य रूप े विनष्पाविद माना.ाना ाविहए। (a) ) ारा 72 क े अ ीन अपीलीय शविक्त; और (b) ारा 74 पविठ ारा 73 क े अ ीन प्रदत्त शविक्त यह अव ारिर करने क े लिलए है विक क्या कोई दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और क्या उ े पं.ीक ृ विकया.ा क ा है; ूंविक विनबं क क े पा ारा 73 और ारा 74 क े ह एक स्व ंत्र शविक्त है, इ लिलए विY ीय और विनबं क Yारा गल प्राव ान ( ारा 72) का उल्लेF करना ही काय,वाही को अवै नहीं ठहरा देगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
(i) i) i) ) कोई दस् ावे., एक बार पं.ीक ृ हो.ाने पर, क्षम अति कारिर ा वाले सि विवल न्यायालय Yारा ही विनरस् अर्थीवा अपास् विकया.ा क ा है।16 अप्रैल 2012 को विबक्री विवलेF क े पं.ीकरर्ण पर, पं.ीकरर्ण अति कारिरयों को अप्रभावी बना विदया गया है और उनमें ोFा ड़ी या अन्य अविनयविम ाओं क े आ ार पर भी पं.ीकरर्ण रद्द करने की कोई शविक्त नहीं होगी;
(i) v)) अपीलक ा, क े विनम्नलिललिF क ृ त्यों ने उ े अनु ोष प्राप्त करने े वंति कर विदया हैः (a) ) अपीलक ा, ने विवक्रय विवलेF क े प्रत्येक पृष्ठ पर अपने हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/उंगलिलयों क े विनशान क े ार्थी- ार्थी क ु ल 340 पृष्ठों की फोटोकॉपी प्रस् ु की; (b) अपीलक ा, ने 1.[6] करोड़ रुपये क े विवक्रय प्रति फल की विदशा में भी भुग ान प्राप्त विकए, सि वाय 67 लाF रुपये क े अंति म ेक क े, सि. े उ ने पं.ीकरर्ण का विवरो करने क े लिलए.ानबूझकर भुनाया नहीं है; (c) अपीलक ा, ने अपने.ीवनकाल क े दौरान अपने पति Yारा ी रे पक्ष को लगभग 300 वग, मीटर क े विहस् े बे े.ाने क े बाव.ूद, पूरे 3,172 वग, मीटर भूविम का मालिलक होने का दावा कर े हुए एक सि विवल वाद[7] विकया है; (d) अपीलक ा, ने 4 अक्टूबर 2011 और 22 अक्टूबर 2011 को अपनी पो ी क े पक्ष में उ भूविम क े ंबं में उपहार विवलेF विनष्पाविद विकए हैं,.ो विवक्रय विवलेF क े ह विY ीय प्रत्यर्थी4 क े नाम पर पं.ीक ृ की गई है; और 7 वा अपराध संद सं. 727/2012 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (e) विवक्रय विवलेF े पूव, विवक्रय करार विकया गया र्थीा,.ो अपीलक ा, Yारा विनष्पाविद एक पं.ीक ृ दस् ावे. भी है।पं.ीक ृ विवक्रय विवलेF विदनांविक 22 अक्टूबर 2010 का उपयोग हस् लेFन/ किंफगरकिंप्रट विवशेषज्ञ Yारा भी विवक्रय विवलेF पर अपीलक ा, क े हस् ाक्षर की ुलना करने क े उद्देश्य े विकया गया र्थीा,.ो मान पाया गया र्थीा।
16. अब, परस्पर विवरो ी विनवेदनों का विवश्लेषर्ण विकया.ाना ाविहए। C विवश्लेषर्ण
17. यहां पर दो व्यापक मुद्दे हैं.ो व,मान सि विवल अपील में उत्पन्न हो े हैंः (i) ) क्या पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 का हारा उप-पं.ीयक क े आदेश क े विवरूद्ध उन्हें विक ी भी उप ार े वंति करेगा सि. ने अपीलार्थी4 क े विनष्पादन न कराने क े आ ार पर पं.ीकरर्ण करने े इंकार कर विदया है; और
(i) i) ) क्या विवक्रय विवलेF पर अपीलार्थी4 Yारा उ क े हस् ाक्षर और अंगूठे क े विनशान/अंगुलिलयों क े विनशान को स्वीकार करना भी उ क े विनष्पादन ंबं ी दस् ावे. को स्वीकार करने क े बराबर है। हालांविक, इन मुद्दों पर ा, करने े पहले, पं.ीकरर्ण अति विनयम क े वै ाविनक ढां े को मझना महत्वपूर्ण, है। C.[1] पं.ीकरर्ण अति विनयम का ांविवति क ढां ा
18. पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 17 में यह कहा गया है विक कौन े दस् ावे. अविनवाय, रूप े पं.ीकरर्ण योग्य हैं।उप ारा (b) में ऐ े गैर - व ीय नामा लिलF का वर्ण,न हैं.ो 100 रुपये े अति क मूल्य की अ ल mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ंपलित्त में या उ क े अति कार, स्वत्व या विह को बनाने, ‡ोविष करने, प्रदान करने, ीविम करने या माप्त करने क े लिलए ात्पर्तिय अर्थीवा ं ालिल हैं। ारा 23,.ो दस् ावे.ों को प्रस् ु करने क े मय े ंबंति है, में अनुबंति है विक ारा 24, 25 और 26 क े अ ीन रह े हुए, व ीय अलावा कोई भी दस् ावे. पं.ीकरर्ण क े लिलए स्वीकार नहीं विकया.ाएगा.ब क विक इ े विनष्पादन की ारीF े ार महीने क े भी र उति अति कारी क े मक्ष प्रस् ु नहीं विकया.ा ा है।
19. ारा 32 में यह उपबं है विक पं.ीक ृ विकए.ाने वाले प्रत्येक दस् ावे. को विनम्नलिललिF व्यविक्तयों Yारा पं.ीकरर्ण काया,लय में प्रस् ु विकया.ाएगाः (a) ) दस् ावेज़ क े ह विनष्पाविद या दावा करने वाले व्यविक्त; या (b) ऐ े व्यविक्त का प्रति विनति या मनुदेशिश ी; या (c) ऐ े व्यविक्त का ए.ेंट, या उनका प्रति विनति या मनुदेशिश ी.ो उपबंति रीति े विनष्पाविद और प्रमाशिर्ण मुख् ारनामा Yारा विवति व अति क ृ हो। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
20. ारा 348 कह ी है विक इ में विनर्षिदष्ट उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, कोई भी दस् ावे. ब क पं.ीक ृ नहीं विकया.ाएगा.ब क विक ऐ े दस् ावे. को विनष्पाविद करने वाला व्यविक्त या उ का प्रति विनति, मनुदेशिश ी या प्राति क ृ अशिभक ा,, प्रस् ु करने क े लिलए अनुज्ञा मय क े भी र विनबं क अति कारी क े मक्ष उपस्थिस्र्थी न हो। इ प्राव ान में विन ा,रिर मय ीमा क े भी र दस् ावे. प्रस् ु करने क े बाद पं.ीकरर्ण अति कारी पर.ां करने क े क,व्यों को भी रेFांविक विकया गया है।
21. ारा 35 में कहा गया है विक पं.ीकरर्ण अति कारी दस् ावेज़ को पं.ीक ृ करेगा यविद: 8 34. पं.ीकरर्ण अति कारी Yारा पं.ीकरर्ण े पहले.ां.- (1) इ भाग में अं र्षिवष्ट उपबं ों क े अ ीन और ारा 41, 43, 45, 69, 75, 77, 88 और 89 में अं र्षिवष्ट उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, कोई दस् ावे. इ अति विनयम क े अ ीन ब क पं.ीक ृ नहीं विकया.ाएगा.ब क विक ऐ े दस् ावे. को विनष्पाविद करने वाले व्यविक्त, या उनक े प्रति विनति, पूव¦क्त रूप में प्राति क ृ अशिभक ा,, ारा 23, 24, 25 और 26 क े अ ीन प्रस् ु क े लिलए अनुज्ञा मय क े भी र पं.ीकरर्ण अति कारी क े मक्ष उपस्थिस्र्थी न होंः बश š विक, यविद त्काल आवश्यक ा या अपरिरहाय, दु‡,टना क े कारर्ण ऐ े भी व्यविक्त उपस्थिस्र्थी नहीं हो े हैं, ो विनबं क, उन मामलों में.हां उपस्थिस्र्थीति में देरी ार महीने े अति क नहीं हो ी है, यह विनदšश दे क ा है विक.ुमा,ने की राशिश क े द गुना े अति क नहीं होने पर ारा 25 क े अ ीन देय.ुमा,ने, यविद कोई हो, क े अति रिरक्त उति पं.ीयन शुल्क क े ंदाय पर दस् ावे. को पं.ीक ृ विकया.ा क ा है। उप ारा (1) क े अ ीन उपस्थिस्र्थीति एक ार्थी या अलग-अलग मय पर हो क ी है।(3) इ क े बाद पं.ीकरर्ण अति कारी - (a) ) पूछ ाछ करें विक क्या ऐ ा दस् ावे. उन व्यविक्तयों Yारा विनष्पाविद विकया गया र्थीा सि.नक े Yारा इ े विनष्पाविद विकया.ाना है; (b) अपने ामने पेश व्यविक्तयों की पह ान क े बारे में Fुद को ं ुष्ट करेगा और यह अशिभकर्थीन करेगा विक उन्होंने दस् ावेज़ को विनष्पाविद विकया है; और (c) प्रति विनति, मनुदेशिश या ए.ेंट क े रूप में उपस्थिस्र्थी विक ी भी व्यविक्त क े मामले में, उपस्थिस्र्थी होने क े लिलए ऐ े व्यविक्त क े अति कार क े बारे में स्वयं को ं ुष्ट करें। (4). उप ारा (1) क े परन् ुक क े अ ीन विनदेश देने क े लिलए कोई आवेदन उप-विनबं क क े मक्ष प्रस् ु विकया.ा क े गा,.ो इ े त्काल उ विनबं क को अग्रेविष करेगा सि. क े वह अ ीनस्र्थी है। (5) इ Fंड की कोई बा तिडविक्रयों या आदेशों की प्रति यों को लागू नहीं हो ी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) ) दस् ावे. को विनष्पाविद करने वाले भी व्यविक्त.ो व्यविक्तग रूप े उपस्थिस्र्थी हो े हैं, उन्हें पं.ीकरर्ण अति कारी व्यविक्तग रूप े.ान े हैं, या यविद पं.ीकरर्ण अति कारी अन्यर्थीा ं ुष्ट हो ा है विक वे स्वयं वही व्यविक्त हैं.ो वे होने का प्रति विनति त्व कर े हैं और वे भी दस् ावे. क े विनष्पादन को स्वीकार कर े हैं;
(i) i) ) प्रति विनति, मनुदेशन या अशिभक ा, Yारा उप ं.ा व्यविक्त रसि.स्ट्रीकरर्ण अति कारी क े मक्ष विनष्पादन को स्वीकार कर ा है; और
(i) i) i) ).हां दस् ावे. का विनष्पादन करने वाला व्यविक्त मर.ा ा है, वहां उ का प्रति विनति या मनुदेशन पं.ीकरर्ण अति कारी क े मक्ष उपस्थिस्र्थी हो ा है और उ क े विनष्पादन को स्वीकार कर ा है। दू री ओर, ारा 35 की उप- ारा (3)(a) ) अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी यह विन ा,रिर कर ी है विक यविद कोई व्यविक्त सि. क े Yारा दस् ावेज़ विनष्पाविद विकया.ाना है, इ क े विनष्पादन े इनकार कर ा है, ो पं.ीकरर्ण अति कारी दस् ावेज़ को पं.ीक ृ करने े इंकार कर देगा। ारा 35 नी े उद्धृ की गई हैः
35. क्रमशः विनष्पादन पर मं.ूरी अर्थीवा नामं.ूरी पर प्रविक्रया.- (1) (a) ) यविद दस् ावे. का विनष्पादन करने वाले भी व्यविक्त व्यविक्तग रूप े पं.ीकरर्ण अति कारी क े मक्ष उपस्थिस्र्थी हो े हैं और व्यविक्तग रूप े उनक े परिरति हैं, या यविद उनका अन्यर्थीा यह मा ान हो.ा ा है विक वे स्वयं ऐ े व्यविक्त हैं सि.नका वे प्रति विनति त्व कर े हैं, और यविद वे भी दस् ावे. क े विनष्पादन को स्वीकार कर े हैं, या (b) यविद विक ी प्रति विनति, मानुदेशिश ी या अशिभक ा, Yारा उप ं.ा विक ी व्यविक्त की दशा में, ऐ ा प्रति विनति, मनुदेशिश ी या अशिभक ा, विनष्पादन को स्वीकार कर ा है, या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (c) यविद दस् ावे. का विनष्पादन करने वाला व्यविक्त मर गया है और उ का प्रति विनति या मनुदेशन पं.ीकरर्ण अति कारी क े मक्ष उपस्थिस्र्थी हो ा है और विनष्पादन को स्वीकार कर ा है, पं.ीकरर्ण अति कारी ारा 58 े 61 में विदए गए विनदšश क े अनु ार दस् ावे. का पं.ीकरर्ण करेगा। (2) पं.ीयन अति कारी, अपने मा ान क े लिलए विक उ क े ामने उपस्थिस्र्थी व्यविक्त वे व्यविक्त हैं सि.नका वे स्वयं प्रति विनति त्व कर े हैं, या इ अति विनयम Yारा अपेतिक्ष विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए, अपने काया,लय में उपस्थिस्र्थी विक ी भी व्यविक्त की.ां कर क ा है। (3)(a) ) यविद कोई व्यविक्त सि. क े Yारा दस् ावे. विनष्पाविद विकया.ाना ात्पर्तिय है, उ क े विनष्पादन े इंकार कर ा है, या (b) यविद पं.ीयन अति कारी को ऐ ा कोई व्यविक्त अवयस्क, मूF, या पागल प्र ी हो ा है, या (c) यविद ऐ ा कोई व्यविक्त सि. क े Yारा दस् ावे. विनष्पाविद विकया.ाना ात्पर्तिय है, मर गया है और उ का प्रति विनति या मनुदेशिश ी उ क े विनष्पादन े इंकार कर ा है, पं.ीयन अति कारी इ प्रकार इनकार करने वाले, प्रकट होने वाले या मृ व्यविक्त क े ंबं में दस् ावे. को पं.ीक ृ करने े मना कर देगा: बश š विक.हां ऐ ा अति कारी एक विनबं क है, वह भाग 12 में विन ा,रिर प्रविक्रया का पालन करेगाः आगे यह प्रति बं है विक राज्य रकार, रकारी रा.पत्र में अति ू ना Yारा, यह ‡ोषर्णा कर क ी है विक अति ू ना में नाविम कोई भी उप -विनबं क, दस् ावे.ों क े ंबं में, सि. क े विनष्पादन े इनकार विकया.ा ा है, इ उप ारा और भाग 12 क े प्रयो.नों क े लिलए विनबं क मझा.ाएगा।
22. उपयु,क्त प्राव ान इंविग कर े हैं विक उप-विनबं क Yारा विक ी दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण े पहले विनम्नलिललिF का उल्लेF विकया.ाना ाविहएः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (i) ) विक ी उति व्यविक्त Yारा दस् ावे. को प्रस् ु करने क े लिलए अनुज्ञा मय क े भी र प्रस् ु करना; और
(i) i) ) दस् ावेज़ क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति ।
23. ारा 58 में पं.ीकरर्ण क े लिलए स्वीकार विकए गए दस् ावे.ों पर पृष्ठांविक विकए.ाने वाले विववरर्णों का उपबं है। ारा 58 (2) में यह उपबं विकया गया है विक यविद विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन को स्वीकार करने वाला कोई व्यविक्त उ का पृष्ठांकन करने े इंकार कर ा है ो पं.ीयन अति कारी उ े द., करेगा, लेविकन ार्थी ही ार्थी ऐ ेइनकार का एक नोट भी लिलFेगा। ारा 59 में कहा गया है विक पृष्ठांकन की ारीF य की.ानी ाविहए और उ पर पं.ीकरर्ण अति कारी क े हस् ाक्षर होने ाविहए। ारा 60 में यह प्राव ान है विक एक बार ारा 34, 35, 58 और 59 की श • का अनुपालन हो.ाने क े बाद, पं.ीयन अति कारी को पं.ीकरर्ण प्रमार्ण पत्र क े ार्थी दस् ावे. का अनुमोदन करना होगा।
24. ारा 719 में यह कहा गया है विक उप -विनबं क.ो विक ी दस् ावेज़ को पं.ीक ृ करने े इनकार कर ा है, सि वाय इ क े विक सि. ंपलित्त े ंबंति है वह उ क े उप-सि.ले क े भी र स्थिस्र्थी नहीं है, इनकार करने और उ क े कारर्णों को द., करने और इनकार का मर्थी,न करने क े लिलए दस् ावेज़ पर पं.ीकरर्ण का आदेश कर क ा है। इ क े अलावा, उप-विनबं क को दस् ावे. क े ह 9 ारा 71. पं.ीकरर्ण करने े इंकार करने क े कारर्ण का द., विकया.ाना. - (1) प्रत्येक उप-विनबं क विक ी दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश े मना कर ा है, सि वाय इ आ ार क े विक वह ंपलित्त, सि. े वह ंबंति है, उ क े उप-सि.ले क े भी र स्थिस्र्थी नहीं है, ऐ ेआदेश क े लिलए अपने कारर्णों को अपनी पुस् क ंख्या 2 में द., करेगा और दस् ावे. पर पं.ीकरर्ण े इनकार कर देगा और दस् ावे. क े ह विनष्पाविद या दावा आदेश वाले विक ी भी व्यविक्त Yारा विकए गए आवेदन पर, विबना भुग ान और अनावश्यक देरी क े, उ े द., विकए गए कारर्णों की एक प्रति देगा। (2) कोई भी पं.ीयन अति कारी इ प्रकार पृष्ठांविक दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए ब क स्वीकार नहीं करेगा.ब क विक इ क े बाद क े प्राव ानों क े ह उ े पं.ीक ृ करने का विनदšश नहीं विदया.ा ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनष्पाविद या दावा करने वाले विक ी भी व्यविक्त को द., विकए गए कारर्णों की एक प्रति प्रस् ु करना आवश्यक है।
25. ारा 72 में उप-विनबं क क े उ आदेश क े विवरुद्ध विनबं क को अपील करने का प्राव ान है सि. में विनष्पादन े इंकार करने क े अलावा विक ी अन्य आ ार पर पं.ीकरर्ण े इंकार विकया गया है। ारा 72 इ प्रकार हैः
72. विनष्पादन े इनकार क े अलावा अन्य आ ार पर पं.ीकरर्ण े इनकार करने वाले उप-विनबं क क े आदेश े विनबं क को अपील. - (1) उन मामलों को छोड़कर.हां विनष्पादन े मना करने क े आ ार पर इंकार विकया.ा ा है, और उप-विनबं क Yारा विक ी दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए अस्वीकार करने क े आदेश क े विवरूद्ध ( ाहे ऐ े दस् ावे. का पं.ीकरर्ण अविनवाय, या वैकस्थिल्पक हो) उ विनबं क को अपील की.ा क ी है सि. क े अ ीन ऐ ा उप- विनबं क है, यविद आदेश की ारीF े ी विदनों क े भी र ऐ े विनबं क को प्रस् ु विकया.ा ा है; और विनबं क ऐ े आदेश को उलट या बदल क ा है। (2) यविद विनबं क का आदेश दस् ावे. को पं.ीक ृ करने का विनदšश दे ा है और ऐ ेआदेश क े ी विदनों क े भी र दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए विवति व प्रस् ु विकया.ा ा है, ो उप-विनबं क उ का पालन करेगा, और उ क े बाद,.हां क व्यावहारिरक हो क ा है, ारा 58, 59 और 60 में विन ा,रिर प्रविक्रया का पालन करें; और ऐ ेपं.ीकरर्ण प्रभावी होगा.ै े विक दस् ावेज़ पं.ीक ृ विकया गया र्थीा.ब इ े पहली बार पं.ीकरर्ण क े लिलए विवति व प्रस् ु विकया गया र्थीा। ारा 72 की उप-Fंड (1) क े अनु ार, उप-विनबं क Yारा विक ी दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए स्वीकार करने े इनकार करने क े आदेश क े विवरूद्ध विनबं क क े मक्ष अपील की.ा क ी है।
26. ारा 73 में विनबं क क े मक्ष आवेदन करने का प्राव ान विदया गया है.हां उप-विनबं क ने विनष्पादन को अस्वीकर करने क े आ ार पर दस् ावे. को पं.ीक ृ करने े इनकार कर विदया है। ारा 73 विनम्नव हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
73. विनबं क को आवेदन,.हां उप-विनबं क विनष्पादन े इंकार करने क े आ ार पर रसि.स्टर करने े इंकार कर ा है.- (1).ब उप-विनबं क ने इ आ ार पर विक ी दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश े इनकार कर दे ा है विक कोई व्यविक्त सि. क े Yारा इ े विनष्पाविद विकया.ाना ात्पर्तिय है, या उ का प्रति विनति या मानुदेशिश ी विनष्पादन करने े इनकार कर ा है, ो ऐ े दस् ावे. क े ह दावा आदेश वाला कोई भी व्यविक्त, या उ का प्रति विनति, मानुदेशिश ी या ए.ेंट,.ै ा विक ऊपर कहा गया है, इनकार करने का आदेश देने क े बाद ी विदनों क े भी र, उ विनबं क को आवेदन कर क ा है, सि. क े लिलए ऐ ा उप-विनबं क अ ीनस्र्थी है, ाविक दस् ावे. को पं.ीक ृ कराने का अपना अति कार स्र्थीाविप विकया.ा क े । (2) ऐ ेआवेदन लिललिF में होगा और उ क े ार्थी ारा 71 क े ह अशिभलिललिF कारर्णों की एक प्रति होगी और आवेदन में विदए गए बयानों का त्यापन आवेदक Yारा उ रीक े े विकया.ाएगा सि. रह े कानून Yारा वादपत्रों क े त्यापन क े लिलए आवश्यक है। ारा 73 क े अनु ार,.हां उप-विनबं क इ आ ार पर पं.ीकरर्ण े इनकार कर ा है विक सि. व्यविक्त Yारा इ का विनष्पादन विकया.ाना है (या उनक े प्रति विनति या मानुदेशिश ी), विनष्पादन े इनकार कर ा है, कोई भी व्यविक्त.ो दस् ावे. (अर्थीवा प्रति विनति, मानुदेशिश ी या अति क ृ ए.ेंट) क े ह दावा कर ा है, वह दस् ावे. को पं.ीक ृ कराने क े अपने अति कारों को स्र्थीाविप करने क े लिलए ी विदनों क े भी र विनबं क क े पा आवेदन कर क ा है। ऐ ा आवेदन लिललिF में होना ाविहए और को ारा 71 क े ह ऐ ा करने क े कारर्णों का उल्लेF भी होना ाविहए। आवेदन में विकए गए कर्थीनों का त्यापन कानूनी रूप े अपेतिक्ष रीति े विकया.ाना ाविहए।
27. ऐ े आवेदन पर, विनबं क को प्रविक्रया का पालन करना होगा.ो ारा 74 में वर्शिर्ण है। ारा 74 विनम्नलिललिF रूप में उपबं कर ी हैः mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
74. ऐ े आवेदन पर विनबं क Yारा अपनायी.ाने वाली प्रविक्रयाः ऐ े मामले में और.हां विनबं क क े मक्ष पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु विकए गए दस् ावे. क े ंबं में इनकार विकया.ा ा है सि. का उल्लेF ऊपर विकया गया है, वहां विनबं क ुविव ा क े अनु ार.ल्द े.ल्द पूछ ाछ करेगा - (a) ) क्या दस् ावे. को विनष्पाविद विकया गया है; (b) क्या, यर्थीास्थिस्र्थीति, आवेदक या दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु करने वाले व्यविक्त की ओर े त् मय प्रवृत्त विवति की अपेक्षाओं का अनुपालन विकया गया है सि. े विक दस् ावे. का पं.ीकरर्ण.ा क े । उपयु,क्त प्राव ान क े ंदभ, में, विनबं क को ऐ े मामले में और.हां विनबं क क े मक्ष विनष्पादन े इंकार विकया.ा ा है, विनम्नलिललिF की.ां करनी होगीः (i) ) क्या दस् ावे. को विनष्पाविद विकया गया है; और
(i) i) ) क्या पं.ीकरर्ण क े लिलए दस् ावे. प्रस् ु करने वाले आवेदक या व्यविक्त की ओर े त् मय प्रवृत्त विवति की अपेक्षाओं का अनुपालन विकया गया है।
28. ारा 7510 में यह प्राव ान है विक यविद विनबं क को प ा ल ा है विक दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और कानून क े ह आवश्यक ाओं का
1075. विनबं क Yारा पं.ीकरर्ण करने का आदेश और उ पर प्रविक्रया.- (1) यविद विनबं क को प ा ल ा है विक दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और कशिर्थी आवश्यक ाओं का अनुपालन विकया गया है, ो वह दस् ावे. को पं.ीक ृ करने का आदेश देगा। (2) यविद दस् ावे. ऐ े आदेश क े विकए.ाने क े ी विदन क े भी र पं.ीकरर्ण क े लिलए म्यक रूप े प्रस् ु विकया.ा ा है ो विनबं क अति कारी उ का पालन करेगा और ब,.हां क व्यवहाय, हो क े, ारा 58,59 और 60 में विवविह प्रविक्रया का पालन करेगा। (3) ऐ ा पं.ीकरर्ण इ प्रकार प्रभावी होगा मानो दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए पहली बार विवति व प्रस् ु विकए.ाने क े मय पं.ीक ृ विकया गया हो। (4) विनबं क, ारा 74 क े अ ीन विक ी.ां क े प्रयो.न क े लिलए, ातिक्षयों को मन कर क ा है और उनकी उपस्थिस्र्थीति को प्रवृत्त कर क ा है और उन्हें ाक्ष्य देने क े लिलए इ प्रकार विववश कर क ा है मानो वह सि विवल न्यायालय हो और वह यह भी विनदेश दे क ा है विक विक क े Yारा ऐ ी विक ी.ां क े ंपूर्ण, F, का या उ क े विक ी मुकदमा का ंदाय विकया.ाएगा और ऐ े F, व ूल विकए.ाने योग्य होंगे मानो वे सि विवल प्रविक्रया ंविह ा, 1908 (1908 का 5) क े अ ीन विक ी वाद में अति विनर्ण[4] विकए गए हों। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुपालन विकया गया है, ो विनबं क दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश का आदेश देगा।इ क े बाद, यविद दस् ावे. विनबं क क े आदेश क े ी विदनों क े भी र पं.ीकरर्ण क े लिलए विवति व प्रस् ु विकया.ा ा है, ो पं.ीकरर्ण अति कारी को आदेश का पालन करना होगा और.हां क व्यवहारिरक हो, ारा 58, 59 और 60 में दी गई प्रविक्रया का पालन करना ाविहए। पं.ीकरर्ण प्रभावी हो.ा ा है मानो दस् ावे. को पं.ीकरर्ण कर लिलया गया है.ब यह पहली बार पं.ीकरर्ण करने क े लिलए प्रस् ु विकया गया र्थीा। ारा 75 की उप-Fंड (4) क े ह विनबं क, ारा 74 क े ह.ां क े उद्देश्य े, गवाहों को म्मन कर क ा है और उनकी उपस्थिस्र्थीति ुविनति• कर क ा है और उन्हें ाक्ष्य देने क े लिलए म.बूर कर क ा है, मानो वह विनबं क सि विवल प्रविक्रया ंविह ा, 190811 क े ह एक सि विवल न्यायालय है।
29. ारा 7612 में यह उपबं विकया गया है विक ारा 72 या 75 क े अ ीन विनबं क Yारा नामं.ूर करने का आदेश क, ंग होना ाविहए और विनबं क े यह अपेक्षा की.ा ी है विक वह दस् ावे. क े ह विनष्पाविद या दावा आदेश वाले विक ी व्यविक्त को अशिभलिललिF कारर्णों की एक प्रति प्रदान करें। इ में यह भी प्राव ान है विक नामं.ूरी क े इ आदेश क े विवरूद्ध कोई अपील नहीं की होगी। 11सि.प्र. ं.
1276. विनबं क Yारा नामं.ूर विकये.ाने वाला आदेश- (1) प्रत्येक विनबं क.ो इनकार कर ा है विक - (a) ) विक ी दस् ावे. को इ आ ार पर रसि.स्टर करना विक वह ंपलित्त, सि. े वह ंबंति है, उ क े सि.ले क े भी र स्थिस्र्थी नहीं है या यह विक दस् ावे. को उप-विनबं क क े काया,लय में पं.ीक ृ विकया.ाना ाविहए, या (b) ारा 72 या ारा 75 क े अ ीन विक ी दस् ावे. क े रसि.स्ट्रीकरर्ण का विनदेश देना, मना करने का आदेश देगा और अपनी पुस् क ंख्या 2 में ऐ े आदेश क े कारर्णों को द., करेगा, और दस् ावे. क े ह विनष्पाविद या दावा करने वाले विक ी भी व्यविक्त Yारा विकए गए आवेदन पर, अनावश्यक विवलंब क े विबना, उ े अशिभलिललिF विकए गए कारर्णों की एक प्रति देगा। (2) इ ारा या ारा 72 क े अ ीन विनबं क क े विक ी आदेश क े विवरुद्ध अपील नहीं की.ा क ी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
30. विनबं क Yारा नामं.ूर विकए.ाने की स्थिस्र्थीति में, कोई पक्षकर दस् ावे. को विनष्पाविद करने की तिडक्री की प्रार्थी,ना कर े हुए ारा 7713 क े ह सि विवल न्यायालय क े मक्ष वाद दायर कर क ा है। दू री ओर, सि. आदेश में विनबं क ने दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण का विनदšश विदया है उ को ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह ुनौ ी दी.ा क ी है। उत्प्रेषर्ण की रिरट की मांग कर े मय, उच्च न्यायालय क े मक्ष याति का दायर करने वाला व्यविक्त यह स्र्थीाविप करने का हकदार होगा विक क्या पं.ीकरर्ण वै ाविनक प्राव ानों क े उल्लं‡न में आदेशिश विकया गया है और कानून क े विवपरी है। सि विवल न्यायालय क े मक्ष मात्र उप ार यह है विक सि.प्र. ं. की ारा 9 क े ह दस् ावेज़ का परिरव.,ने या इ की अमान्य ा क े ंबं में ‡ोषर्णा की मांग विक ी व्यविक्त को परिरवाद करने े वंति नहीं करेगा विक पं.ीकरर्ण क े लिलए विनबं क Yारा पारिर आदेश दस् ावेज़ वै ाविनक प्राव ानों क े विवपरी र्थीा,.ो विक ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह न्यायालय क े रिरट क्षेत्राति कार क े प्रयोग में उपलब् है। विनः ंदेह, क्या विक ी रिरट पर विव ार विकया.ाना ाविहए या नहीं, यह न्यायालय क े विववेक पर विनभ,र कर ा है और विदए गए मामले में, उच्च न्यायालय इ आ ार पर ऐ ा करने े इनकार कर क ा है विक थ्य ंबं ी विववाविद प्रश्न उत्पन्न हो े हैं। हालाँविक, इ बा पर.ोर देने की आवश्यक ा है विक रिरट क्षेत्राति कार क े प्रयोग में, यह विन ा,रिर करने क े लिलए उच्च न्यायालय क े लिलए Fुला होगा विक क्या वै ाविनक प्राव ान.ो उप-पं.ीयक की
1377. विनबं क Yारा अस्वीकार विकए.ाने की दशा में वाद.-(1).हां विनबं क ारा 72 या ारा 76 क े ह दस् ावे. को पं.ीक ृ करने का आदेश देने े इंकार कर ा है, ऐ े दस् ावे. क े ह दावा करने वाला कोई भी व्यविक्त, या उ का प्रति विनति, मनुदेशिश ी या ए.ेंट, इनकार करने क े आदेश क े बाद ी विदनों क े भी र सि विवल न्यायालय में, सि. की मूल अति कारिर ा की स्र्थीानीय ीमा क े भी र वह काया,लय स्थिस्र्थी है सि. में दस् ावेज़ को पं.ीकृ करने की मांग की गई है, वाद दायर कर क ा है, तिडक्री क े लिलए वाद सि. में दस् ावेज़ को ऐ े काया,लय में पं.ीक ृ करने का विनदšश विदया गया है अगर यह पं.ीकरर्ण क े लिलए ऐ ेतिडक्री पारिर होने क े ी विदनों क े भी र विवति व प्रस् ु विकया.ा ा है। (2). ारा 75 की उप- ारा (2) और (3) में विनविह प्राव ान, यर्थीोति परिरव,न विह, पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु विकए गए भी दस् ावे.ों पर ऐ े विक ी भी तिडक्री क े अनु ार लागू होंगे, और, इ अति विनयम में विनविह विक ी भी बा क े बाव.ूद, दस् ावेज़ ऐ े वाद में ाक्ष्य क े रूप में प्राप्य होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA शविक्त का माग,दश,न कर े हैं या,.ै ा भी मामला हो, विनबं क ने दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण क े आदेश को विवति व पूरा कर लिलया है।यहां क विक.हां विक ी भी लिलF को रद्द करने क े लिलए सि विवल न्यायलय Yारा कोई तिडक्री पारिर की.ा ी है, विवशिशष्ट अनु ोष अति विनयम 1963 की ारा 31 की उप- ारा (2) उपबं कर ी है विक:
31. रद्द करने का आदेश कब विदया.ा क ा है। [...] (2) यविद लिलF भार ीय रसि.स्ट्रीकरर्ण अति विनयम, 1908 (1908 का 16) क े अ ीन रसि.स्ट्रीक ृ है ो न्यायालय अपनी तिडक्री की एक प्रति उ अति कारी को भी भे.ेगा सि. क े काया,लय में लिलF इ प्रकार रसि.स्ट्रीक ृ है और ऐ ा अति कारी अपनी पुस् कों में अं र्षिवष्ट लिलF की प्रति पर उ क े रद्द विकए.ाने क े थ्य को नोट करेगा। C.[2] विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा अपनाए गए ा न की वै ा
31. सि. उप-विनबं क क े मक्ष विबक्री विवलेF पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु विकया गया र्थीा, उ ने 17 फरवरी 2012 क े एक आदेश पारिर कर विबक्री विवलेF क े पं.ीकरर्ण का आदेश देने े इनकार कर विदया। उप-पं.ीयक का आदेश र्थीा अपीलक ा, क े बयान े पहले, सि. में कहा गया र्थीा विक विबक्री विवलेF पर उ क े हस् ाक्षर.बरन लिलए गए र्थीे। उप-विनबं क क े मक्ष, अपीलक ा, ने पं.ीकरर्ण क े लिलए विबक्री विवलेF प्रस् ु विकए.ाने पर आपलित्त द., कराई र्थीी। अपीलक ा, ने उप-विनबं क क े मक्ष अपनी आपलित्तयों क े दौरान विवशेष रूप े विनम्नलिललिF शिशकाय ों का विवरो विकया, अर्थीा, ्:(i) ) विY ीय प्रत्यर्थी4 ने उ े झूठी और भ्रामक.ानकारी दी र्थीी; (i) i) ) 1839.48 वग, मीटर माप की भूविम का बा.ार मूल्य 7 करोड़ रुपये े कम नहीं र्थीा और 1.[6] करोड़ रुपये का विबक्री मूल्य बहु कम र्थीा;
(i) i) i) ) विबक्री विवलेF में विन ा,रिर मय माप्त हो गया र्थीा; (i) v)) अपूर्ण, विबक्री mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवलेF पर अपीलक ा, क े हस् ाक्षर लिलये विकए गए र्थीे; (v)) अपीलक ा, क े हस् ाक्षर उ े काग.ों को पढ़ने या पढ़ने का मौका विदए विबना लिलए गए र्थीे, और.ब वह पां व्यविक्तयों े ति‡री हुई र्थीी; (v)i) ) विबक्री विवलेF क े ह भूविम क्षेत्र में हेरफ े र विकया गया है, उ का आवा ीय ‡र भी ोFा ड़ी े छीन लिलया गया र्थीा; (v)i) i) ) विबक्री विवलेF में उसिल्ललिF ीमाएँ गल र्थीीं और उ भूविम को स्पष्ट रूप े नहीं दशा, ी र्थीीं सि. पर विवक्रय की हमति दी गई र्थीी; (v)i) i) i) ) विवक्रय विवलेF अ ूरा र्थीा और भी ह-भागीदारों ने कभी कोई विवभा.न नहीं विकया र्थीा; (i) x)) विवक्रय विवलेF पर पूं.ीग लाभ कर लगेगा.ो विबक्री प्रति फल े अति क होगा; और (x)) विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा विक्रय.ाल ा.ी की गई र्थीी। 32..ै ा विक अपीलक ा, Yारा उप-विनबं क क े मक्ष की गई आपलित्तयों े स्पष्ट है विक उ ने विबक्री विवलेF पर हस् ाक्षर करने े इनकार नहीं विकया र्थीा। उ की शिशकाय का ार यह र्थीा विक उ क े हस् ाक्षर.बरन लिलए गए र्थीे; विबक्री विवलेF उ क्षेत्र क े ंदभ, में पक्षकारों क े इरादे को प्रति किंबविब नहीं कर ा र्थीा सि. े बे ने का इरादा र्थीा; विबक्री क े प्रति फल का मूल्यांकन नहीं विकया गया र्थीा; विबक्री विवलेF का परिरर्णाम यह र्थीा विक अपीलक ा, क े आवा ीय ‡र को भी बे विदया.ाएगा,.ो विक उ की मझ क े विवपरी है; और विवक्रयनामा ोFे े प्राप्त विकया गया र्थीा। उप-विनबं क क े आदेश े यह स्पष्ट हो ा है विक अपीलक ा, विबक्री विवलेF को पं.ीक ृ कराने क े लिलए ैयार नहीं र्थीा, सि. क े बारे में दावा विकया गया र्थीा विक उ े ोFा ड़ी े विनष्पाविद विकया गया र्थीा और सि. क े विनष्पादन े इनकार विकया.ा रहा र्थीा।इ लिलए, उप-विनबं क Yारा पं.ीकरर्ण अति विनयम की 35(3)(a) ) क े ंदभ, में पं.ीकरर्ण े इनकार कर विदया गया र्थीा।
33. यविद कोई व्यविक्त सि. क े Yारा दस् ावे. को विनष्पाविद विकया.ाना है, इ क े विनष्पादन करने े मना कर दे ा है और उन आ ारों पर पं.ीकरर्ण करने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA े इनकार कर विदया.ा ा है, ो विनष्पादन े मना करने वाले उप-पं.ीयक क े आदेश क े विवरूद्ध दायर की गई अपील पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 क े ह ुनवाई योग्य नहीं होगी। ारा 72 स्पष्ट रूप े यह प्राव ान कर ी है विक उप- विनबं क Yारा पं.ीकरर्ण करने े इनकार करने क े आदेश पर सि वाय उ दशा में अपील होगी.हां विनष्पादन न करने क े आ ार पर दस् ावे. को नामं.ूर विकया गया है।
34. व,मान मामले में, उप-विनबं क ने ारा 35 (3) (a) ) क े ंदभ, में विवशेष रूप े पं.ीकरर्ण करने े इनकार कर विदया र्थीा इ लिलए आदेश ारा 72 क े ह की गई अपील पोषर्णीय नहीं र्थीी। हालांविक, अपील पर विव ार करने क े दौरान, विनबं क ने इ क े ब.ाय Fंड 73 क े अ ीन प्रदत्त शविक्तयों का हारा लिलया।.ै ा विक इ विनर्ण,य में पहले उल्लेF विकया गया है, ारा 73 विनबं क को उ स्थिस्र्थीति में अति कार प्रदान कर ी है.ब उप-विनबं क ने विक ी व्यविक्त Yारा इ क े विनष्पादन े इनकार करने पर दस् ावे. को पं.ीक ृ करने े इनकार कर विदया हो।इ क े बाद, ऐ ा प्र ी हो ा है विक विनबं क ने उ प्रविक्रया का पालन विकया है सि. पर ारा 74 में बल विदया गया है। ारा 74 में ऐ ी प्रविक्रया का प्राव ान है.हां विनबं क का दोहरा काय, है। व,प्रर्थीम, क्या दस् ावेज़ विनष्पाविद विकया गया है; और दू री बा, क्या आवेदक या पं.ीकरर्ण क े लिलए दस् ावे. प्रस् ु करने वाले व्यविक्त Yारा उ मय लागू कानून की श • का अनुपालन विकया गया है, ाविक उन्हें दस् ावे. पं.ीक ृ करने का अति कार विमल क े । ारा 74 क े ह ऐ ी.ां पर, ारा 75 विनबं क को दस् ावे. को पं.ीक ृ करने का आदेश देने में क्षम बना ी है यविद यह पाया.ा ा है विक:(i) ) दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और (i) i) ) कानून की अपेक्षाओं का अनुपालन विकया गया है। ारा 75(4) भी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनबं क को ारा 74 क े ह ठीक े.ां करने क े लिलए गवाहों मन करने और उनकी उपस्थिस्र्थीति ुविनति• करने की अनुमति प्रदान कर ी है।
35. विनस् ंदेह, ारा 73 क े ह आवेदन पर विव ार करने क े दौरान विनबं क की शविक्त ारा 35 क े ह उप-विनबं क को ौंपी गई शविक्तयों े अति क व्यापक है। ारा 35(1)(a) ) क े ह, यविद दस् ावे. विनष्पाविद करने वाले भी व्यविक्त व्यविक्तग रूप े पं.ीयन अति कारी क े ामने पेश हो े हैं और दस् ावे. क े विनष्पादन को स्वीकार कर े हैं, ो पं.ीयन अति कारी दस् ावे. को पं.ीक ृ करेगा। Fंड 35 (2) पं.ीयन अति कारी को काया,लय में उपस्थिस्र्थी विक ी भी व्यविक्त की.ां करने का अति कार दे ी है, ाविक वह इ बा े ं ुष्ट हो क े विक उ क े मक्ष उपस्थिस्र्थी व्यविक्त वही व्यविक्त हैं, सि.नक े रूप में वे स्वयं का प्रति विनति त्व कर े हैं। ारा 35 की उप- ारा (1) क े विवपरी, उप- ारा (3) विवविह कर ी है विक एक बार उ व्यविक्त Yारा विनष्पादन े इनकार कर विदया.ा ा है.ो दस् ावेज़ को विनष्पाविद करने का दावा कर ा है, पं.ीकरर्ण अति कारी इ े पं.ीक ृ करने े इंकार कर देगा।दू री ओर, ारा 73 और 74 क े ह, विनबं क को यह.ां करने का क,व्य ौंपा गया है विक क्या दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और क्या कानून की भी श • का पालन विकया गया है। इ.ां क े प्रयो.नों क े लिलए, ारा 75 (4) विनबंं क को गवाहों को म्मन करने और उनकी उपस्थिस्र्थीति को ुविनति• करने की शविक्त प्रदान कर ी है।इ प्रकार,.बविक ारा 35(3)(ए) क े ह उप-विनबं क को अविनवाय, रूप े पं.ीकरर्ण े इंकार करना पड़ ा है,.ब दस् ावे. क े विनष्पादन को दस् ावे. विनष्पाविद करने वाले व्यविक्त Yारा अस्वीकार कर विदया.ा ा है, विनबं क को ारा 73 क े ह आवेदन पर ारा 74 क े ह प्रविक्रया का पालन कर े हुए.ां करने की शविक्त ौंपी.ा ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
36. व,मान मामले में, विनबं क क े मक्ष अपील ारा 72 क े ह पोषर्णीय नहीं र्थीी। वास् व में, विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा दायर अपील क े ज्ञापन क े.वाब में, अपीलक ा, ने विवशेष रूप े अपनी आपलित्तयों में यह दलील दी विक भार ीय पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 क े ह अपील की ुनवाई करना या कोई भी विनर्ण,य देना कानून क े विवरूद्ध होगा। उ ी मय, हालांविक, अपीलक ा, ने यह भी दलील दी विक उ े "भार ीय पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 75 (4) क े ह और सि विवल प्रविक्रया ंविह ा, 1908 क े ह गवाहों और अपीलक ा, े बह करने का पूरा अति कार र्थीा।" विनबं क को ारा 73 और 74 क े ह.ां क े उद्देश्य े ारा 75(4) क े ह गवाहों को बुलाने का अति कार है।इ प्रकार यह उभर कर आ ा है विक पक्षकार इ आ ार पर आगे बढ़ें विक यह काय,वाही ारा 73 क े ह.ां क े आ ार पर य की.ाएगी, और.ां ारा 74 क े प्राव ानों क े ंदभ, में की गई र्थीी। अपीलक ा, ने स्वयं विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा दायर अपील में की गई अपनी आपलित्तयों में इ स्थिस्र्थीति को मझा, क्योंविक उ ने ारा 75(4) क े ह अपने अति कारों का आह्वान विकया र्थीा,.ो ारा 74 क े ह.ां काय,वाही पर लागू हो ा है। उप-विनबं क क े आदेश क े विवरूद्ध अपील ारा 72 क े ह पोषर्णीय नहीं र्थीी।.हां उप -विनबं क ने इ आ ार पर पं.ीकरर्ण े इनकार कर विदया विक अपीलक ा, ने दस् ावेज़ क े विनष्पादन े इनकार कर ा है वहां विY ीय प्रत्यर्थी4 को ारा 73 क े ह अनु ोष प्राप्त है।विनबं क ने ारा 73 और 74 क े प्राव ानों क े ह.ां की।दोनों पक्षों ने.ां में भाग लिलया।
37. पं.ीकरर्ण अति विनयम क े ंबं में मुल्ला महोदय की विटप्पर्णी एक ऐ ी स्थिस्र्थीति का विवश्लेषर्ण कर ी है.हां ारा 73 क े ह आवेदन को गल ी े ारा 72 क े ह अपील ब ाया गया है.ो इ प्रकार14 हैः 14न्यायमूर्ति क े. कन्नन, मुल्ला Yारा रति द रसि.स्ट्रेशन एक्ट (लेस्थिक् नेस्थिक्, 2012) पृष्ठ 416 (मुल्ला Yारा रति द रसि.स्ट्रेशन एक्ट) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यविद विनष्पादन े इंकार करने क े आ ार पर नामं.ूर विकया.ा ा है, ो अपील अति विनयम की ारा 72 क े ह नहीं होगी।.ब विनष्पादन पर इनकार े नामं.ूर विकया.ा ा है, ो अति विनयम की ारा 73 क े ह आवेदन दायर करने का उप ार उपलब् है। क े वल थ्य यह है विक आवेदन गल रीक े े अपील क े रूप में विकया गया है और क़ानून की गल ारा का उल्लेF विकया गया है, यह ारहीन है, यविद वास् व में और कानून में पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 73 क े ह आवेदन विकया.ा ा है। इ ी प्रकार, पं.ीकरर्ण अति विनयम पर ए. पी. ेन गुप्त की विटप्पर्णी में यह कहा15 गया हैः
4. ारा 72 क े अ ीन 'अपील' या 'उप- ारा' क े रूप में गल ी े वर्शिर्ण काय,वाही एक अपील है,.बविक ारा 73 क े अ ीन काय,वाही अपील नहीं है, यह क े वल आवेदक क े दस् ावे. को पं.ीक ृ कराने क े अति कार को स्र्थीाविप आदेश क े लिलए विनबं क क े मक्ष एक आवेदन है।व्यशिर्थी पक्ष या यहां क विक विनबं क क े लिलए भी यह य करना हमेशा आ ान नहीं हो ा है विक दोनों ाराओं में े कौन ी ारा- ारा 72 या ारा 73 दी गई थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों पर लागू होगी।कानून न्याय करने क े लिलए हो ा है।इ प्रकार, विनबं क क े मक्ष काय,वाही क े ार पर विव ार विकया.ाना ाविहए, न विक उ क े प्रपत्र पर।अ ः यविद ारा 72 क े अ ीन अपील ारा 73 क े अ ीन आवेदन क े रूप में की.ा ी है और ारा 72 क े अ ीन अपील ारा 73 क े अ ीन आवेदन क े रूप में की.ा ी है, यह ‡ा क नहीं होगा।
38. इ प्रकार, यह स्पष्ट है विक ारा 72 क े ह अपील क े रूप में ारा 73 क े ह आवेदन करना स्वयं में विनबं क क े मक्ष की काय,वाविहयों को दूविष नहीं करेगी। यह विवशेष रूप े हो.ा ा है.ब विनबं क क े मक्ष काय,वाही, वास् व में, ारा 73 क े ह ही काय,वाही र्थीी और दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप े या उनक े आ रर्ण े उन्हें ऐ ा होने क े लिलए स्वीकार विकया र्थीा।यह स्पष्ट रूप े व,मान मामले में भी हुआ है,.ै ा विक अपीलक ा, की ारा 75(4) क े ंदभ, 15 ेनगुप्ता Yारा रति कमेंट्री. ऑन रसि.स्ट्रेशन ऐक्ट, 1908 (कमल लॉ हाउ, 2017 पृष्ठ 617-618) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और सि.ला विनबं क क े मक्ष.ां काय,वाही में उ की भागीदारी े स्पष्ट है। इ लिलए, हमरी राय यह हैं विक विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा ारा 72 क े ह अपने आवेदन को अपील ब ाना काय,वाही प्रभाविव नहीं करेगी, सि. क े कारर्ण सि.ला विनबं क ने विदनांक 31.04.2012 को आदेश विकया र्थीा। इ लिलए, इन काय,वाविहयों क े प्रयो.न क े लिलए, हम अब इ बा का विवश्लेषर्ण करने क े लिलए आगे बढ़ेंगे विक क्या सि.ला विनबं क ने विबक्री विवलेF क े पं.ीकरर्ण का विनदšश दे े हुए वै रूप े आदेश पारिर विकया र्थीा। C.[3] “विनष्पादन“ का अर्थी,
39. पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35(1)(a) )) में 'दस् ावे. क े विनष्पादन को स्वीकार करना' अशिभव्यविक्त का प्रयोग विकया गया है,.बविक ारा 35(3)(a) ) में 'विनष्पादन े इंकार करना' अशिभव्यविक्त का प्रयोग विकया गया है। इ ी प्रकार, ारा 72 (1) में 'विनष्पादन े इंकार' अशिभव्यविक्त को अपनाया गया है.बविक ारा 73 (1) में 'विनष्पादन े इंकार' अशिभव्यविक्त का प्रयोग विकया गया है। हालांविक, “विनष्पादन” शब्द स्वयं पं.ीकरर्ण अति विनयम में परिरभाविष नहीं है। प्रर्थीम, विनष्पादन विक ी दस् ावे. पर हस् ाक्षर करने क े मान है।इ लिलए, एक बार कोई व्यविक्त विक ी दस् ावे. पर अपने हस् ाक्षर क े लिलए स्वीकार कर ले ा है, ो वे स्वीकार कर े हैं विक उन्होंने इ े विनष्पाविद विकया है। विY ीय, विनष्पादन की प्रविक्रया को क े वल दस् ावे. पर हस् ाक्षर करने क े मान नहीं माना.ा क ा।इ लिलए, भले ही दस् ावेज़ पर विक ी व्यविक्त क े हस् ाक्षर स्वीकार विकए गए हों, विफर भी वे इ क े विनष्पादन े इनकार कर क े हैं यविद वे हस् ाक्षर कर े मय दस् ावेज़ की ामग्री े हम नहीं र्थीे या उ े नहीं मझ े र्थीे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अब हमें यह य करना होगा विक इन दोनों में े विक व्याख्या को इ न्यायालय Yारा अपनाया.ाना ाविहए।
40. "विनष्पादन" की पहली व्याख्या स्टाम्प अति विनयम 189916 में प्रदान की गई परिरभाषा Yारा मर्शिर्थी है........ ारा 2(12) विनम्नलिललिF शब्दों में "विनष्पाविद " और "विनष्पादन" को परिरभाविष कर ी है: (12) विनष्पाविद और विनष्पादन. - "विनष्पाविद " और "विनष्पादन", लिलF क े ंदभ, में उपयोग विकया.ा ा है, सि. का अर्थी, है "हस् ाक्षरिर " और "हस् ाक्षर" और इ में ू ना प्रौद्योविगकी अति विनयम, 2000 की ारा 11 क े अर्थी, क े भी र इलेक्ट्रॉविनक रिरकॉड, का श्रेय शाविमल है। 2000 का 21);“ हालाँविक, पं.ीकरर्ण अति विनयम को स्टाम्प अति विनयम े शिभन्न उद्देश्य क े लिलए अति विनयविम विकया गया है इ लिलए स्टाम्प अति विनयम क े ह परिरभाषा विनर्णा,यक नहीं है।
41. ब्लैक लॉ तिडक्शनरी अशिभव्यविक्त "विनष्पादन" और "विनष्पाविद " को इ प्रकार17 परिरभाविष कर ा है: विनष्पाविद करें, वी. बी. (14c) 1. पालन करने या पूरा करने क े लिलए ( ंविवदा या क,व्य) <एक बार ंविवदा पूरी रह े विनष्पाविद हो.ाने क े बाद, पक्षकारों को एक दू रे क े प्रति ंविवदात्मक क,व्य मुक्त हो.ा े हैं>… 3।विक ी कानूनी दस् ावे. हस् ाक्षर करक े वै बनाना; विक ी कानूनी दस् ावे. अस्थिन् म रूप े प्रव,न करना <प्रत्येक पक्ष ने हस् ाक्षर गवाह क े विबना ंविवदा को विनष्पाविद विकया>... विनष्पाविद, एडी.ी. (16c) 1. कोई दस् ावे. सि. पर हस् ाक्षर विकए गए हैं- <विनष्पाविद व ीय > अशिभव्यविक्त 'विनष्पाविद ' एक परिरव 4 शब्द है। इ क े उपयोग े ब ा.ाना ाविहए, सि वाय इ क े विक.ब स्पष्टीकरर्ण क े ार्थी... एक अनुबं को अक् र 16स्टा अपराध संम्प ऐक्ट 17ब्रायन ए गान,र, ब्लैक लॉ तिडक्शनरी (र्थीॉम न रॉयट,, 2009) पृष्ठ 649-650 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ब विनष्पाविद विकया.ा ा है.ब दस् ावेज़ पर हस् ाक्षर विकए गए हों, या हस् ाक्षर विकए गए हों, ील विकए गए हों और परिरदत्त विकए गए हों। इ क े अलावा, विनष्पाविद ंविवदा का अर्थी, अक् र ऐ ा हो ा है सि. े दोनों पक्षों Yारा पूरी रह े विनष्पाविद विकया गया हो।विवलिलयम आर. एन् न, किंप्रसि पल् ऑफ द लॉ ऑफ कांट्रेक्ट 26 एन * (आर्थी,र एल. कॉर्षिबन एड, ृ ीय ंशो न 1919)। अशिभव्यविक्त "विनष्पादन" को विनम्नलिललिF शब्दों में शब्दों और वाक्यांशों में आगे विनम्नलिललिF श •18 परिरभाविष विकया गया है: “कानूनी उपकरर्ण क े रूप में काय, पूरा करने क े लिलए आवश्यक है विक कानूनी मान्य ा प्रदान की.ाए।” इन दोनों शब्दकोशों की परिरभाषाएं एक बार विफर यह दशा, ी हैं विक विक ी दस् ावे. पर हस् ाक्षर करना उ क े विनष्पादन क े म ुल्य हो क ा है।हालांविक, ये परिरभाषाएं विक ी भी रह े विनति• नहीं हैं और इन्हें ंदभ, े बाहर नहीं माना.ा क ा है, क्योंविक वे यह भी ुझाव दे ी प्र ी हो ी हैं विक विक ी करार का विनष्पादन इ े पूरी रह े वै और कानूनी रूप प्रव,नीय बना दे ा है।
42. पं.ीकरर्ण अति विनयम ( ुप्रा) में विनष्पादन क े अर्थी, क े ंबं में विनम्नलिललिF विटप्पर्णी19 की गई हैः विनष्पादन को स्वीकार करना...यह विनवेदन विकया.ा ा है विक विक ी दस् ावे. पर विक ी व्यविक्त क े हस् ाक्षर होने का मात्र प्रमार्ण या स्वीक ृ ति ही दस् ावे. का विनष्पादन नहीं हो क ा है।....हां विक ी व्यविक्त ने दस् ावेज़ की प्रक ृ ति क े बारे में.ागरूक होने क े बाद एक दस् ावेज़ पर हस् ाक्षर विकए र्थीे, उ ने दस् ावेज़ को विनष्पाविद विकया है, और यह प्रस् ु विकया गया है, विनबं क इ प्रश्न में नहीं उठा क ा है विक क्या दस् ावेज़ को प्रपीड़न े प्राप्त विकया गया है; परन् ु.ब कोई हस् ाक्षर विमथ्या 18शब्द और वाक्यांश (स्र्थीायी ंस्करर्ण) (र्थीॉम न रॉयट,, 2020) 19पूव¦क्त विटप्पर्णी 15 पर, पृष्ठ 254-256 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभ्यावेदनों Yारा अशिभप्राप्त विकया गया हो और प्रकट रूप े विनष्पादक ने दस् ावे. की श • े आबद्ध होने क े इरादे े हस् ाक्षर नहीं विकए हों ो ऐ ा नहीं कहा.ा क ा विक ऐ े व्यविक्त ने दस् ावे. को विनष्पाविद विकया है; (प्रभाव वर्ति ) इ ी प्रकार, ए. पी. ेन गुप्ता की कमेंट्री ( ुप्रा) में विनम्नलिललिF स्थिस्र्थीति 20 विन ा,रिर कर ा हैः विक ी दस् ावे. को सि विवल न्यायालय Yारा रद्द या विनष्प्रभावी ‡ोविष विकया.ा क ा है.ब वह स्वेच्छा े विनष्पाविद नहीं विकया गया हो।लेविकन यह पूरी रह े एक अलग विव ार है और न ही यह पं.ीकरर्ण अति कारी क े अति कार क्षेत्र में आ ा है। ही कानूनी स्थिस्र्थीति ऐ ी प्र ी हो ी है विक यद्यविप पं.ीयन अति कारी विक ी उ लिलF की वै ा क े बारे में कोई विनर्ण,य नहीं ले क ा है सि. को पं.ीकरर्ण क े लिलए उ क े मक्ष प्रस् ु विकया गया है,.बविक विनष्पादक Yारा पं.ीकरर्ण अति कारी क े मक्ष की गई दलील, यविद ही पाई.ा ी है, ो विवलेF को अमान्य कर देगा, ऐ ी स्थिस्र्थीति में विनष्पादन को स्वीकार नहीं विकया.ा क ा है। विनष्पादन का अर्थी, क े वल हस् ाक्षर करना नहीं है बस्थिल्क दस् ावे. में तिन्नविह श • पर हमति क े माध्यम े हस् ाक्षर करना है।.ब विनष्पादक दस् ावे. पर अपने हस् ाक्षर स्वीकार कर ा है किंक ु यह कह ा है विक विक ी कमरे में उ े विनरुद्ध करने क े प•ा ् उ क े हस् ाक्षर.बरदस् ी लिलए गए र्थीे अर्थीवा विवलेF पर उ क े हस् ाक्षर करवाने क े लिलए ोFा ड़ी की गई र्थीी अर्थीवा विवलेF पर हस् ाक्षर करने क े लिलए उ क े ार्थी ठगी की गई र्थीी इत्याविद और विनष्पादक का Fण्ड़न करने क े लिलए पं.ीयन अति कारी क े मक्ष कोई ामग्री नहीं है ो अति विनयम की ारा 35 (1) (क) क े अर्थी, क े भी र कोई 'स्वीक ृ ति ' नहीं कही क ी.ा क ी है क्योंविक हस् ाक्षरक ा, ने अपनी इच्छा े हस् ाक्षर नहीं विकया र्थीा। (प्रभाव वर्ति ) 20 ुप्रा विटप्पर्णी 16 पर, पृष्ठ 389-390,390,617-618 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA.बविक उपरोक्त उद्धरर्ण ारा 35(1)(a) ) क े ह पं.ीकरर्ण अति कारी की शविक्त े ंबंति है,.ो यह ुझाव दे ा है विक "विनष्पादन" ब हो ा है.ब दस् ावेज़ पर विक ी व्यविक्त क े हस् ाक्षर क े ार्थी दस् ावेज़ की ामग्री क े लिलए उनकी पूर्ण, हमति हो ी है सि. े उन्होंने हस् ाक्षर करने े पहले मझा है।
43. इ वाक्यांश की इ मझ को ाक्ष्य की विवति े ंबंति पाठ्यपुस् कों Yारा भी अपनाया गया है। भार ीय ाक्ष्य अति विनयम 187221 की ारा 6822 यह ाविब करने की आवश्यक ा विन ा,रिर कर ी है विक एक दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है। ारा 68 क े परन् ुक में कहा गया है विक यविद विक ी दस् ावेज़ क े विनष्पादन को ाविब करने क े लिलए एक प्रमाशिर्ण गवाह को बुलाना आवश्यक नहीं होगा यविद इ े पं.ीकरर्ण अति विनयम क े ह पं.ीक ृ विकया गया है, बश š विक इ क े विनष्पादन को उ व्यविक्त Yारा विवशेष रूप े अस्वीकार नहीं विकया गया हो, सि. क े Yारा इ का विनष्पादन विकया.ाना ात्पर्तिय है। इ उपबं क े ंबं में रकार की ाक्ष्य विवति 23 विटप्पर्णी: "अशिभव्यविक्त- विनष्पादन को विक ी भी अति विनयम में परिरभाविष नहीं विकया गया है।" ""इ का अर्थी, है पूरा करना, अर्थीा, अंति म काय, या काय,.ो एक दस् ावे. को पूरा कर े हैं और अंग्रे.ी कानून में विनष्पादन को- हस् ाक्षरिर करना, ील 21 ाक्ष्य अति विनयम
2268. विवति Yारा अपेतिक्ष दस् ावे. क े विनष्पादन का ाक्ष्य त्याविप विकया.ाना.- यविद विक ी दस् ावे. का त्यापन विवति Yारा अपेतिक्ष है, ो उ का उपयोग ब क ाक्ष्य क े रूप में नहीं विकया.ाएगा.ब क विक उ क े विनष्पादन को ाविब करने क े प्रयो.न क े लिलए कम े कम एक अनुप्रमार्णक ाक्षी को नहीं बुलाया.ा ा है, यविद कोई अनुप्रमार्णक ाक्षी.ीविव है, और न्यायालय की प्रविक्रया क े अध्य ीन और ाक्ष्य देने में क्षम हैः बश š विक भार ीय पं.ीकरर्ण अति विनयम, 1908 (1908 का 16) क े उपबं ों क े अनु ार पं.ीक ृ विक ी दस् ावे.,.ो व ीय नहीं है, क े विनष्पादन क े प्रमार्ण में विक ी अनुप्रमार्णक ाक्षी को बुलाना ब क आवश्यक नहीं होगा.ब क विक उ व्यविक्त Yारा सि. क े Yारा विनष्पाविद विकया.ाना ात्पर्तिय है, उ क े विनष्पादन े विवविनर्षिदष्ट रूप े इंकार न कर विदया.ाए। 23 ुदीप्तो रकार और डॉ. ए. आर. सिंझगटा, रकारः लॉ ऑफ एविवडें -इन इंतिडया, पाविकस् ान, बांग्लादेश, बमा,, ीलोन, मलेशिशया और सिं गापुरः Fंड 1 (लेस्थिक् नेस्थिक्, 2016) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करना और परिरदान करना कहा.ा ा है। ामान्य अर्थी, में विक ी प्रपत्र का विनष्पादन इ को हस् ाक्षरिर करने े है। [….] [ ारा 67.4] विनष्पादन का अर्थी, और प्रमार्ण विनष्पादन में विक ी दस् ावे. को लिलFाकर, पढ़ाकर और मझाकर हस् ाक्षर करना शाविमल है और इ में क े वल एक Fाली काग. पर विक ी नाम पर हस् ाक्षर करना शाविमल नहीं है। इ ी प्रकार, र नलाल और ीर.लाल क े ाक्ष्य विवति में.ो कहा गया है वह विनम्नव 24 हैः [s 67.3] ―38. दस् ावे. का विनष्पादन-अर्थी, [......] विक ी दस् ावे. का विनष्पादन क े वल दस् ावे. पर हस् ाक्षर कर देना नहीं है। विनष्पादन शब्द को परिरभाविष नहीं विकया गया है....... विक ी दस् ावे. को विनष्पाविद करने का ामान्य अर्थी, उ पर हमति देने वाले पक्षकार क े रूप में हस् ाक्षर करना है...... दस् ावे. क े विनष्पादन का अर्थी, है विक विनष्पादक को हस् ाक्षर करना ाविहए या अपने अंगूठे का विनशान/छाप देना ाविहए, क े वल दस् ावे. की ामग्री पूरी रह े उसिल्ललिF होने क े बाद और विनष्पादक Yारा उ पर अपना हस् ाक्षर करने े पहले पढ़ा.ाना ाविहए।विनष्पादक Yारा विनष्पादन क े लिलए विक ी दस् ावे. को स्वीकार करना विनष्पादन नहीं होगा।
44. इ विवषय पर रा.ेंद्र प्र ाप सिं ह बनाम रामेश्वर प्र ाद 25 का मामला प्रा ंविगक है,.हां विबहार भवन (पट्टा, विकराया और बेदFली) विनयंत्रर्ण अति विनयम, 1982 क े ह बेदFली की एक तिडक्री की वै ा इ न्यायालय की दो न्याया ीशों की पीठ क े मक्ष प्रश्नग र्थीी।इ न्यायालय ने ंपलित्त हस् ां रर्ण अति विनयम 1882 की Fंड 107 क े ी रे पैराग्राफ क े प्राव ानों पर विव ार कर े 24एन. विव.यरा‡वन और शर ंद्रन, र नलाल और ीर.लालः ाक्ष्य विवति (लेस्थिक् नेस्थिक्, 2021) 25 25(1998) 7 ए. ी. ी. mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हुए कहा विक विक ी अ ल ंपलित्त क े पट्टे क े लिलए एक पं.ीक ृ लिलF को पट्टेदार और पट्टेदार दोनों Yारा विनष्पाविद विकया.ाना आवश्यक है।इ न्यायालय ने विनष्पादन की व्याख्या कर े हुए विनम्नु ार ारिर विकयाः 11… कोई लिलF आम ौर पर विवशिभन्न अनुक्रमों क े विवविव रर्णों क े माध्यम े विनष्पाविद विकया.ा ा है।पहली बार में दोनों पक्ष विव ार-विवमश, करक े करार कर क े हैं, दू री बार में सि.न श • पर हमति बन ी है, वो लिलFकर क े रF दी.ा ी हैं, कभी-कभी सि फ, एक पक्ष उ पर हस् ाक्षर करक े दू रे पक्ष को दे दे ा है, कभी-कभी दोनों पक्ष उ पर हस् ाक्षर कर दे े हैं। यविद कानून क े अनु ार दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण अपेतिक्ष है, ो दोनों पक्षकार उनमें े विक ी एक क े हस् ाक्षर प्राप्त विकए बगैर इ प्रविक्रया में शाविमल हो क े हैं।ऐ े भी मामलों में यह कहा.ा क ा है विक लिलF को दोनों पक्षों Yारा विनष्पाविद विकया गया है।यविद लिलF पर दोनों पक्षों Yारा हस् ाक्षर विकए.ा े हैं, ो यह इ थ्य की परिरकल्पना है विक दोनों ने इ े विनष्पाविद विकया है, विनति• रूप े यह क े वल Fंडनीय उप ारर्णा है। इ ी प्रकार, यविद कोई दस् ावे. क े वल एक पक्ष Yारा हस् ाक्षरिर विकया.ा ा है, ो इ का अर्थी, यह नहीं है विक दोनों पक्षों ने इ े एक ार्थी विनष्पाविद नहीं विकया है। क्या दोनों पक्षों ने लिलF को विनष्पाविद विकया है, यह थ्य का प्रश्न होगा.ो ाक्ष्य पर अव ारिर विकया.ाएगा यविद ऐ ा विन ा,रर्ण विवशेष वाद क े अशिभव नों े अपेतिक्ष है।क े वल इ लिलए विक दस् ावे. में क े वल एक पक्षकार क े हस् ाक्षर हैं, यह विनष्कष, विनकालना पया,प्त नहीं है विक हस् ाक्षर न करने वाला पक्षकार लिलF क े विनष्पादन में शाविमल नहीं हुआ है।‖ (प्रभाव वर्ति ) उपयु,क्त कर्थीन को ध्यान में रF े हुए, न्यायालय ने अशिभविन ा,रिर विकया विक.ब उ मामले में प्रति वादी ने अपने लिललिF कर्थीन में यह आपलित्त नहीं विकया र्थीा विक पट्टा विवति मान्य रूप े विदया गया र्थीा, ो बाद में उ क े लिलए यह विववाद उठाना ंभव नहीं र्थीा विक वह लिलF शून्य र्थीा क्योंविक इ े पट्टेदार और पट्टेदार दोनों Yारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनष्पाविद नहीं विकया गया र्थीा। इ प्रकार बेदFली की तिडक्री को बरकरार रFा गया।हालांविक, एक ामान्य सि द्धां क े रूप में, इ न्यायालय क े विनर्ण,य े उपयु,क्त उद्धरर्ण, हालांविक एक अलग ांविवति क ंदभ, में, इ बा पर.ोर दे ा है विक दोनों पक्षों Yारा एक प्रलेF पर हस् ाक्षर करना इ थ्य की परिरकल्पना है विक दोनों ने इ े विनष्पाविद विकया है, विफर भी यह Fंडनीय अनुमान है.
45. एन. एम. राम ंद्रैया बनाम कना,टक राज्य26 क े मामले में, कना,टक उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 74 क े अ ीन विनबं क की शविक्त का अर्थीा,न्वयन कर े हुए विनम्नलिललिF म व्यक्त विकयाः
8. अति विनयम की ारा 74 क े अ ीन.ां में, विनब क को यह प ा लगाना ाविहए विक क्या दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया र्थीा और क्या कानून की अपेक्षाओं का अनुपालन विकया गया है ाविक दस् ावे. को पं.ीकरर्ण विकया.ा क े । विनबं क को न क े वल इ बा े ं ुष्ट होना ाविहए विक ंबंति पक्षकारों ने दस् ावे. पर हस् ाक्षर विकए हैं, बस्थिल्क उ े इ विनष्कष, पर भी पहुं ना ाविहए विक दस् ावे. की ामग्री और श • को मझने क े बाद पक्षकारों Yारा हस् ाक्षर विकए गए हैं।विनबं क को विनष्पादन ाविब करने क े लिलए याति काक ा, Yारा अपेतिक्ष गवाहों को बुलाना ाविहए।इ ारा क े ह.ां स्वयं विनबं F Yारा की.ानी ाविहए और एक बार ऐ ी.ां क े बाद, वह ं ुष्ट हो.ा ा है विक दस् ावे. पर न क े वल विनष्पादक क े हस् ाक्षर होने ाविहए, बस्थिल्क दस् ावे. की ामग्री और श • को मझने क े बाद विनष्पादक Yारा भी इ े विवति व विनष्पाविद विकया गया है, वह दस् ावेज़ ामाग्री और श • का उ्ल्लेF कर े हुए उ े विनष्पाविद करने का आदेश दे क ा हैः पं.ीक ृ है।कशिर्थी.ां में उ क े पा ंभाव्य ाओं और आ पा की परिरस्थिस्र्थीति यों में प्रवेश करने की कोई शविक्त नहीं है.वह क े वल यह प ा लगाने क े लिलए है विक क्या प्रस् ु विकया गया दस् ावे. वास् व में उ स्थिस्र्थीति में है सि. में इ े इ क े पक्षकारों Yारा विनष्पाविद विकया गया र्थीा। ारा 74 में वर्शिर्ण अपेतिक्ष 26 2007 ए. ी. ी. ऑनलाइन क े.ए.आर. 192 (एन. एम. राम ंद्रैया) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA.ां क े दायरे विवशेष रूप े, "विनष्पाविद " शब्द का अर्थी, को विवशिभन्न विनर्ण,यों में मझाया गया है। (प्रभाव वर्ति ) इ दृविष्टकोर्ण को अपना े हुए, एकल न्याया ीश ने कना,टक उच्च न्यायालय क े ार्थी- ार्थी अन्य उच्च न्यायालयों क े विवशिभन्न विनर्ण,यों का उल्लेF विकया। 46 मद्रा उच्च न्यायालय की Fण्ड पीठ ने बना े प्पा लाल.ी ीक्कन्ना बनाम सि.ला विनबं क27 क े मामले में यह अशिभविन ा,रिर विकयाः 5… ारा 74 सि.ला विनबं क को.ां करने और इ विनष्कष, पर पहुं ने का आदेश दे ी है विक 'क्या दस् ावेज़ विनष्पाविद विकया गया है।' व,मान मामले में यह विक सि.ला विनबं क ने ब ाया है विक वह ं ुष्ट र्थीा विक याति काक ा, ने विवक्रय विवलेF पर हस् ाक्षर विकया र्थीा। उ े इ विनष्कष, पर पहुं ना ाविहए र्थीा विक दस् ावे. की ामग्री और शब्द को मझने क े बाद याति काक ा, Yारा हस् ाक्षर विकए गए र्थीे। विनष्पादन का अर्थी, क े वल हस् ाक्षर करना नहीं है, बस्थिल्क दस् ावे. में तिन्नविह अन्य ंक्रामर्ण ंविवदा की श • क े लिलए अनुमति क े माध्यम े हस् ाक्षर करना है। (प्रभाव वर्ति )
47. य्यप्पारा.ू ुरैया बनाम राम ंदर प्र ाद सिं ह और अन्य28 क े मामले में मद्रा उच्च न्यायालय की Fण्ड पीठ ने पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35(1) (a) ) और (b) क े उपबं ों का अर्थीा,न्वयन हुए विनम्नलिललिF म व्यक्त विकयाः अ ः अपेतिक्ष स्वीक ृ ति दस् ावे. क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति है।..... यह उ व्यविक्त क े लिलए पया,प्त नहीं है.ो प्रकट रूप े विनष्पादक है, और.ो उ काग. पर अपने हस् ाक्षर को स्वीकार कर ा है।सि.न दस् ावे.ों पर हस् ाक्षर विकए गए हैं, उनकी पह ान पया,प्त नहीं है।यविद कोई व्यविक्त कह ा है विक उ ने इ 27 1965 ए. ी. ी. ऑनलाइन क े.ए.आर. 132 281949 ए. ी. ी. ऑनलाइन एम. ए.डी. 227 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभ्यावेदन पर एक कोरे काग. पर हस् ाक्षर विकए हैं विक याति का प्रस् ु करने क े लिलए यह आवश्यक र्थीा,.ै ा विक व,मान मामले में है या यविद कोई व्यविक्त इ अभ्यावेदन पर विक उ क े हस् ाक्षर या अंगूठे क े विनशान की एक अनुप्रमार्णक ाक्षी क े रूप में आवश्यक ा है, एक पूर्ण, दस् ावे. पर हस् ाक्षर कर ा है, ो उन परिरस्थिस्र्थीति यों में हस् ाक्षर या अंगूठे क े विनशान क े प्रवेश को दस् ावे. क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति क े रूप में नहीं माना.ा क ा है।यह एक स्वीक ृ ति होने े बहु दूर है, यह दस् ावे. क े विनष्पादन का एक स्पष्ट और स्पष्ट इंकार है।उ े ारा 35 (1) क े उपबं ों को आकर्षिष आदेश क े लिलए यह स्वीकार करना ाविहए विक उ ने दस् ावे. पर हस् ाक्षर विकए र्थीे।.....इ लिलए विनष्पादन की स्वीक ृ ति ऐ ी स्वीक ृ ति की कोविट में आनी ाविहए, लिलF क े अ ीन विक ी बाध्य ा स्वीकार करने वाले व्यविक्त लिलF क े अ ीन हो ा है; दू रे शब्दों में, यह विक उ ने दस् ावे. को विनष्पाविद विकया र्थीा,.ै ा भी मामला हो, विवक्रय विवलेF, बं क विवलेF या पट्टे विवलेF क े रूप में हस् ाक्षर विकए र्थीा। 48..ोगेश प्र ाद सिं ह और अन्य बनाम राम ंदर प्र ाद सिं ह और अन्य29 क े मामले में पटना उच्च न्यायालय की Fण्डपीठ ने यह उल्लेF विकया विक विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन को उच्च न्यायालय की अन्य Fण्ड पीठ Yारा अच्छी रह े विन ा,रिर विकया गया र्थीा। एबादु अली ( ुप्रा)30 में Fण्ड पीठ का फ ै ला, सि. े.ोगेश प्र ाद सिं ह ( ुप्रा) में मं.ूरी क े ार्थी उद्धृ विकया कहा: हमारे विव ार में, विनष्पादन में लिललिF रूप में विक ी दस् ावे. पर हस् ाक्षर करना और उ े पढ़ना और मझना शाविमल है, और इ में क े वल एक Fाली काग. पर विक ी नाम पर हस् ाक्षर करना शाविमल नहीं है।.हां विनष्पादक स्पष्ट रूप े कह ा है विक उ ने कोरे काग. पर हस् ाक्षर विकए हैं और सि. दस् ावे. को उ ने प्राति क ृ विकया है, वह वह दस् ावे. नहीं है, सि. पर उ ने विव ार विकया र्थीा, वहां वक्तव्य विनष्पादन की स्वीक ृ ति नहीं, अस्वीक ृ ति है। 291950 ए. ी. ी. ऑनलाइन पैट 31 ( ंक्षेप में योगेश प्र ाद सिं ह) 30ए. आई. आर. (3) 1916 पैट 206:35 इस्थिण्डया क ै. 56 ( ैक्र े लर इबादु अली ैक्र े लर) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
49. उपरोक्त विनर्ण,यों और कलकत्ता31, उड़ी ा और अ म उच्च न्यायालय32 क े दृविष्टकोर्ण का उल्लेF कर े हुए, एन. एम. राम ंद्रैया ( ुप्रा)33 में कना,टक उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने इ बा पर.ोर विदया विक दस् ावे. क े विनष्पादन का अर्थी, क े वल उ पर हस् ाक्षर करना नहीं है, बस्थिल्क उ की ामग्री को पूरी रह मझने क े बाद उ पर हस् ाक्षर करना हैः
15. विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन का अर्थी, क े वल हस् ाक्षर करना नहीं है, बस्थिल्क दस् ावे. में तिन्नविह ंविवदा की श • पर हमति क े रूप में हस् ाक्षर करना है। विनष्पादन में विक ी दस् ावे. पर हस् ाक्षर करना शाविमल हो ा है, सि. े लिलFा.ा ा है और पढ़ा.ा ा है और मझा.ा ा है, और इ में क े वल एक Fाली काग. पर एक नाम पर हस् ाक्षर करना शाविमल नहीं हो ा है।यह विनष्पादक का पविवत्र काय, है विक उ े लिलF की ामाग्री का प्रति ज्ञान करना ाविहए और इ बा का स्पष्ट प्रमार्ण होना ाविहए विक वह दस् ावे. की अं व,स् ु को पूरी रह े.ानने क े बाद हस् ाक्षर कर ा है।विनष्पाविद विकए.ाने क े लिलए, दस् ावे. अस्थिस् त्व में होना ाविहए.हां कोई दस् ावे. अस्थिस् त्व में नहीं है वहां विनष्पादन नहीं विकया.ा क ा है। विक ी दस् ावे. पर विक ी व्यविक्त क े हस् ाक्षर का क े वल प्रमार्ण या स्वीक ृ ति विक ी दस् ावे. का विनष्पादन नहीं हो क ा है। विनष्पादन े इंकार विकए.ाने पर पं.ीकरर्ण विनष्पादन को प्रमाशिर्ण विकये.ाने की आवश्यक ा को माप्त नहीं कर ा है।इ प्रकार, दस् ावे. का विनष्पादन क े वल उ पर हस् ाक्षर करना नहीं है।‖ (प्रभाव वर्ति )
50. एनएम राम ंद्रैया ( ुप्रा) में कना,टक उच्च न्यायालय की मझ विप्रवी काउंसि ल और भार क े विवशिभन्न उच्च न्यायालयों े विनकलने वाली विम ालों क े अनुरूप है। पूरन ंद नाहट्टा बनाम मोनमोर्थीो नार्थी मुF.[4] और अन्य34 में विप्रवी 31मोविहमा ंदर ुर बनाम.ुगुल विकशोर भुट्टा ार.ी, आईएलआर वॉल्यूम VII कलकत्ता 32श्रीम ी उमा देवी बनाम नारायर्ण नायक, 1984 ए ी ी ऑनलाइन ओरी 33 भुटकानी नार्थी बनाम श्रीम ी कमलेश्वरी नार्थी, एआईआर 1972 अ म और नगालैंड 15 34 1927 ए. ी. ी. ऑनलाइन पी. ी. 100 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काउंसि ल क े विनर्ण,य में, विवस्काउंट ुमनेर ने पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 क े प्राव ानों का अर्थी, लगा े हुए कहा: "पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 Yारा पं.ीकरर्ण का विनदšश ब विदया.ा ा है.ब क ु छ व्यविक्त उपस्थिस्र्थी हो े हैं, उनकी विवति व पह ान की.ा ी है, और वे प्रस् ाविव दस् ावेज़ क े विनष्पादन को स्वीकार कर े हैं, और आवश्यक व्यविक्त वे व्यविक्त हो े हैं दस् ावेज़ का विनष्पादन कर े हैं। अपीलक ा, का क, है विक इन शब्दों में विनष्पादन का अर्थी, क े वल वास् व में हस् ाक्षर करना है।न्यायालय इ े स्वीकार नहीं कर क ा है। कोई दस् ावे. विनष्पाविद हो.ा ा है,.ब इ क े ह लाभ और दातियत्वों को लेने वाले अपना नाम इ में लिलF दे े हैं उनक े नाम लिलFवा विदये.ा े हैं।व्यविक्तग हस् ाक्षर करने की आवश्यक ा नहीं है और म्यक रूप े प्राति क ृ कोई अन्य व्यविक्त विनष्पादन करने वाले पक्षकार का नाम लिलFकर, अपना विवति मान्य विनष्पादन कर क ा है और उ े अं व,लिल दातियत्वों क े अ ीन कर क ा है।इ लिलए अति विनयम में "विनष्पादन करने वाले व्यविक्त" शब्द को क े वल "हस् ाक्षर करने वाले व्यविक्त" क े रूप में नहीं पढ़ा.ा क ा है।उनका म लब क ु छ और है, अर्थीा, ्, वह व्यविक्त.ो एक वै विनष्पादन क े Yारा लिलF क े ह बाध्य ा में प्रवेश कर ा है।.ब विनदšशिश हासि.री विनष्पादन को,.ो पहले पूरा हो ुका है, स्वीकार करने क े प्रयो.न क े लिलए है, ो कोई भी बा विनष्पादन करने वाले व्यविक्त को विवति मान्य स्वीकृ ति देने क े लिलए व्यविक्तग रूप े या विक ी प्राति क ृ और क्षम अति वक्ता Yारा उप ं.ा होने े रोक नहीं क ी है।न्यायमूर्ति गर्ण अति विनयम की इ स्कीम में इ अर्थीा,न्वयन े विवपरी क ु छ भी Fो.ने में विवफल रहे हैं। विक ी अन्य मामले में भ्रम का.ोलिFम हो ा है और ऐ े व्यविक्तयों को गुर्णा करक े ांविवति क प्रविक्रया को भी विवफल विकया.ा क ा है, सि.न्हें या ो स्वयं या विक ी प्रति विनति Yारा उपस्थिस्र्थी होने क े लिलए प्रेरिर विकया.ाना है। (प्रभाव वर्ति )
51. ‡सि ा राम ब.ा. बनाम रा. कमल रेतिडयो इलैक्ट्रॉविनक35 क े मामले में, विदल्ली उच्च न्यायालय की एकल न्याया ीश ने ा ारर्ण दस् ावे.ों पर विकए गए 35 1973 ए. ी. ी. ऑनलाइन डेल 109 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हस् ाक्षर और विनगोशिशएबल इन् ट्रूमेंट् े ंबंति विवति क े मु ाविब स्टांप विकए गए दस् ावे.ों क े बी अं र कर े हुए यह म व्यक्त विकया विकः 8…विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन का अर्थी, ामान्य ः यह है विक विनष्पादन क े माध्यम े अपना हस् ाक्षर करने वाला व्यविक्त उ दस् ावे. की प्रक ृ ति.ान ा र्थीा या उ े.ानना ाविहए र्थीा सि. पर वह हस् ाक्षर कर रहा र्थीा..
52. कमलाबाई बनाम शांति राय36 वाले मामले में बम्बई उच्च न्यायालय की Fण्ड पीठ ने ाक्ष्य अति विनयम की ारा 68 क े ंदभ, में यह अशिभविन ा,रिर विकयाः 30… रकार क े ाक्ष्य अति विनयम, पृष्ठ 639 में, विनष्पादन की प्रविक्रया 'शब्द का अर्थी, और प्रमार्ण उपवर्शिर्ण विकया गया है।इ में कहा गया है विक विनष्पाविद का अर्थी, है-पूर्ण,। विनष्पादन अंति म काय, या काय• की श्रृंFला हो ी है.ो इ े पूरा कर ी है। विनष्पादन में लिलFे गए और पढ़े गए और मझे गए दस् ावेज़ पर हस् ाक्षर करना शाविमल है और इ में काग. की एक Fाली शीट पर क े वल एक नाम पर हस् ाक्षर करना शाविमल नहीं है। विनष्पाविद विकए.ाने क े लिलए दस् ावे. को अस्थिस् त्व में होना ाविहए.हां अस्थिस् त्व में कोई दस् ावे. नहीं है, कोई विनष्पादन नहीं हो क ा है। हमें यह स्पष्ट प्र ी हो ा है विक विक ी व्यविक्त को विक ी दस् ावे. को विनष्पाविद करने क े लिलए नहीं कहा.ा क ा है.हां वह उ े विनष्पादन क े इरादे े ऐ ा नहीं कर ा है।यह रल प्र ी हो क ा है, लेविकन हमारी राय में यह स्पष्ट रूप े अर्थी, और महत्व े भरा हुआ है। " "विनष्पादन" "शब्द का अर्थी, है" "दस् ावे. बनाना" "और ऐ ा कहा.ा क ा है विक विक ी व्यविक्त ने ऐ ा दस् ावे. बनाया या प्राति क ृ विकया है.हां वह विक ी विवशेष प्रकार क े दस् ावे. को अस्थिस् त्व में लाने क े इरादे और ज्ञान क े ार्थी ैयार कर ा है या ैयार करवा ा है, और इ े अस्थिस् त्व में लाने की इच्छा क े ार्थी उ दस् ावे. को स्वीकार कर ा है और प्रमाशिर्ण कर हस् ाक्षर कर ा है। उ दस् ावेज़ को अस्थिस् त्व में लाने क े इरादे क े विबना विक ी दस् ावेज़ पर क े वल हस् ाक्षर करना, 361980 ए ी ी ऑनलाइन बॉम 152 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अर्थी, है विक उ े प्रभावी बनाना उति रूप े 'विनष्पादन' शब्द को आकर्षिष नहीं करेगा। (प्रभाव वर्ति )
53. ए. राममूर्ति बनाम.यलक्ष्मी अम्मल37 क े मामले में मद्रा उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 का विनव, न कर े हुए विन्म्नलिललिF म व्यक्त विकयाः
11. हम पहले "पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 क े उद्देश्य क े लिलए दस् ावेज़ क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति " क े अर्थी, की.ां करें, दस् ावेज़ का विनष्पादन क े वल उ पर हस् ाक्षर करना नहीं है।यह विनष्पादक का एक पविवत्र काय, है सि. े लिलF में उद्धरर्ण लिलFना ाविहए और इ बा का स्पष्ट प्रमार्ण होना ाविहए विक वह अपनी ामग्री को पूरी रह.ानने क े बाद दस् ावे. में अपने हस् ाक्षर कर ा है।विक ी दस् ावे. क े विनष्पादक को, दस् ावे. की अं व,स् ु और शब्द को पूरी रह मझने क े बाद, अपने हस् ाक्षर करने ाविहए या अपने अंगूठे क े विनशान को लगाना ाविहए।दू रे शब्दों में, विक ी दस् ावे. क े विनष्पादन का अर्थी, क े वल हस् ाक्षर करना नहीं है बस्थिल्क दस् ावे. में तिन्नविह अन्य ंक्रामर्ण ंविवदा की श • क े लिलए अनुमति क े रूप में हस् ाक्षर करना है।
54. यूविनयन बैंक ऑफ इंतिडया बनाम ति यन पति 38 क े मामले में विहमा ल प्रदेश उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश को यह अव ारिर करना र्थीा विक क्या बं क विवलेF विवति मान्य रूप े विनष्पाविद विकया गया र्थीा। ूंविक भार ीय ंविवदा अति विनयम 1872 और पं.ीकरर्ण अति विनयम ने विनष्पादन क े मय को परिरभाविष नहीं विकया र्थीा इ लिलए एकल न्याया ीश ने शब्दकोशों, कानूनी शब्दकोशों और पूव, विनर्ण,यों क े आ ार पर इ वाक्यांश का अर्थीा,न्वयन कर े हुए विनम्नलिललिF विनष्कष, विनकालाः 37 1990 ए. ी. ी. ऑनलाइन मैड 501 381996 ए. ी. ी. ऑनलाइन ए.पी. 90 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
21. इ प्रकार, 'दस् ावे. का विनष्पादन' शब्दों क े पूव¦क्त अर्थी, क े आ ार पर यह क े वल यह दशा, ा है विक ऐ े दस् ावे. को विनष्पाविद करने वाले व्यविक्त को स्व ंत्र हमति े ऐ े दस् ावे. पर हस् ाक्षर करना ाविहए। विक ी दस् ावेज़ का विनष्पादन पूरा हो.ाएगा यविद विनष्पादक ने दस् ावेज़ की अं व,स् ु को.ान े हुए विबना विक ी विवबाध्य ा क े स्वेच्छा े उ दस् ावेज़ पर हस् ाक्षर कर विदए है।
55. ाक्ष्य अति विनयम क े उपबं ों का विनव, न कर े हुए, क े रल उच्च न्यायालय की Fण्ड पीठ ने इन री क ु ट्टम39 क े मामले यह अव ारिर विकया विक क्या विक ी दस् ावे. पर हस् ाक्षर करना उ क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति क े मान है। क े रल उच्च न्यायालय और भार क े अन्य उच्च न्यायालयों क े विवविन•यों पर विव ार करने क े प•ा ्, Fण्ड पीठ ने यह अशिभविन ा,रिर विकयाः
9. हस् ाक्षर करने का अर्थी, हस् ाक्षर करना है, लेविकन.ब विक ी लिलFे हुए लिलF पर हस् ाक्षर करने की बा आ ी है, ो इ का ात्पय, हस् ाक्षर करने क े काय, े अति क है। इ का अर्थी, क े वल नाम लिलFने क े लिलविपक क े काय, े अति क है।हस् ाक्षर करने वाले व्यविक्त का आशय महत्वपूर्ण, है। व्यविक्त को इ आशय े हस् ाक्षर करना लिलF पर हस् ाक्षर करना ाविहए विक वह लिलF की श • क े बं ा है। यह कहा गया है विक हस् ाक्षर करने क े लिलए विक ी व्यविक्त का नाम लिलFने का काय, और गवाह क े रूप में विनष्पाविद करने, त्याविप करने या हस् ाक्षर करने का इरादा दोनों शाविमल हो े हैं। विक ी विवलेF या अन्य प्रपत्र क े विनष्पादन में उन भी काय• का विनष्पादन शाविमल है.ो इ े विवलेF या प्रपत्र क े रूप में पूर्ण, करने क े लिलए आवश्यक हो क े हैं,.ो प्रपत्र को वै ा प्रदान करने क े लिलए अपेतिक्ष प्रत्येक काय, की वांशिछ बाध्य ा वहन कर े हैं, या इ े प्रभावी करने क े लिलए या इ क े लिलए अपेतिक्ष प्रपत्र देने क े लिलए आवश्यक हो क े हैं। इ प्रकार, हस् ाक्षर इ बा की स्वीक ृ ति है विक हस् ाक्षर करने वाला व्यविक्त दस् ावे. की श • पर हम हो गया है।यह भी हासि ल विकया.ा क ा है.ब कोई व्यविक्त दस् ावे. ैयार होने क े बाद हस् ाक्षर करे और उन श • की.ानकारी हस् ाक्षरक ा, को हो।मामले क े उ दृविष्टकोर्ण में, क े वल हस् ाक्षर करने को दस् ावे. का विनष्पादन नहीं कहा.ा क ा है। 39 2001 ए. ी. ी. ऑनलाइन क े.ई.आर. 14 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (प्रभाव वर्ति )
56. बैंक ऑफ बड़ौदा बनाम श्री मो ी इंडस्ट्री.40 क े मामले में बम्बई उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने ाक्ष्य अति विनयम क े अ ीन दस् ावे. ाविब करने क े ंदभ, में विनम्नलिललिF विटप्पर्णी कीः 21… शब्द “विनष्पादन” विक ी भी क़ानून में परिरभाविष नहीं है।इ का अर्थी, है पूरा करना, यानी अंति म काय, या काय,.ो दस् ावे. को पूरा कर े हैं और अंग्रे.ी कानून में इ े ील करना, हस् ाक्षर और परिरदान करना कहा.ा ा है। विक ी दस् ावे. को विनष्पाविद करने का ामान्य अर्थी, है उ पर हमति देने वाले पक्ष क े रूप में हस् ाक्षर करना।
57. विक ी दस् ावे. का विनष्पादन मात्र इ व.ह े स्वीकार नहीं विकया.ा ा है क्योंविक कोई व्यविक्त दस् ावे. पर हस् ाक्षर करने की बा स्वीकार कर ा है। ऐ ेव्याख्या उन परिरस्थिस्र्थीति यों क े लिलए हो ी है.हां व्यविक्त एक कोरे काग. पर हस् ाक्षर कर ा है और बाद में इ े एक अलग दस् ावे. में बदल विदया.ा ा है, या.ब विक ी व्यविक्त को उ की ामग्री को पूरी रह े मझे विबना दस् ावे. पर हस् ाक्षर करने क े लिलए म.बूर विकया.ा ा है।इ क े विवपरी व्याख्या करने े विनष्पादन े इंकार करने वाले व्यविक्त पर सि विवल न्यायालय या रिरट न्यायालय क े मक्ष पं.ीकरर्ण को ुनौ ी देने का अनुति बोझ पड़ेगा, क्योंविक हस् ाक्षर स्वीकार विकए.ाने क े बाद पं.ीकरर्ण की अनुमति देनी होगी।
58. पं.ीकरर्ण अति विनयम क े उपबं ों में 'विनष्पादन करना' अशिभव्यविक्त को अर्थी, देने क े लिलए, पं.ीकरर्ण क े उद्देश्य को ंरतिक्ष करने, ुगम बनाने क े लिलए उद्देश्यपूर्ण, अर्थीा,न्वयन को अपनाया.ाना आवश्यक है। ूर. लैंप् एंड इंडस्ट्री. प्राइवेट लिलविमटेड बनाम हरिरयार्णा राज्य और अन्य41 क े मामले में न्यायमूर्ति आर. 40 2008 ए ी ी ऑनलाइन बॉम 486 41 41(2009) 7 ए. ी. ी. 363 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वी. रवीन्द्रन ने इ न्यायालय की दो न्याया ीशों की पीठ की ओर े बोल े हुए पं.ीकरर्ण क े उद्देश्य पर प्रकाश डालाः
18. पं.ीकरर्ण स्र्थीावर ंपलित्त े ंबंति ंव्यवहारों को ुरक्षा प्रदान कर ा है, भले ही दस् ावे. Fो गया हो या नष्ट हो गया हो। यह प्र ार कर ा है और दस् ावे.ों को ाव,.विनक रूप े उ.ागर कर ा है सि. े लेनदेन और दस् ावे.ों क े विनष्पादन क े ंबं में.ाल ा.ी और ोFा ड़ी को रोका.ा ा है।पं.ीकरर्ण उन लोगों को.ानकारी प्रदान कर ा है.ो विक ी ंपलित्त े ंबंति हो क े हैं, विक उ ंपलित्त को प्रभाविव करने वाले व्यविक्तयों क े अति कारों की प्रक ृ ति और ीमा क्या है।दू रे शब्दों में, यह लोगों को यह प ा लगाने में क्षम बना ा है विक क्या कोई विवशेष ंपलित्त, सि. े उनका ंबं है, विक ी कानूनी दातियत्व क े अ ीन है और व,मान में ंपलित्त में अति कार, स्वाविमत्व और विह रFने वाला व्यविक्त कौन है।यह दस् ावे. को पविवत्र ा प्रदान कर ा है और उन दस् ावे.ों को स्र्थीायी रूप े द., कर ा है.ो कानूनी रूप े महत्वपूर्ण, अर्थीवा प्रा ंविगक हैं,.हां लोग रिरकॉड, को देF क े हैं और पूछ ाछ कर क े हैं और यह ुविनति• कर क े हैं विक विववरर्ण क्या हैं और.हां क भूविम का ंबं है विक उनक े ंबं में क्या बाध्य ाएं हैं। यह ुविनति• कर ा है विक अ ल ंपलित्त का लेन-देन करने वाला प्रत्येक व्यविक्त भी लेन- देन क े पूर्ण, विववरर्ण रूप में उक्त अति विनयम क े ह बनाए गए रसि.स्टरों में विनविह बयानों पर विवश्वा क े ार्थी भरो ा कर क ा है, सि. क े Yारा ंपलित्त का हक प्रभाविव हो क ा है और विवति व प्रमाशिर्ण अंश/प्रति यां ुरतिक्ष कर क ा है।
59. भार इंदु और ओ, बनाम हकीम मोहम्मद हाविमद अली Fान42 में, लाड, विफलिलमोर ने विप्रवी काउंसि ल क े लिलए बोल े हुए, पं.ीकरर्ण अति विनयम क े प्राव ानों क े उद्देश्य पर विनम्नलिललिF शब्दों में.ोर विदयाः "पं.ीकरर्ण अति विनयम क े प्राव ानों को ोFा ड़ी या अनुति प्रभाव े.ाल ा.ी और वाहन या बं क की Fरीद को रोकने क े लिलए बहु ाव ानी े ैयार विकया गया है, और हालांविक यह अति विनयम क े प्राव ानों 421920 ए. ी. ी. ऑनलाइन पी. ी. 37 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े टीक अनुपालन पर.ोर देने क े लिलए कु छ हद क कनीकी प्र ी हो क ा है, ऐ ा करना आवश्यक है।उन न्यायमूर्ति गर्ण ने पहले ही इ मामले में इन प्रपत्रों क े ख् अनुपालन की आवश्यक ा को मं.ूरी दे दी है सि. े बार में ंदर्शिभ विकया गया र्थीा,.म्बू प्र ाद बनाम मोहम्मद आफ ाब अली Fान [L.R. 42 I.A. 22: s.c. I.L.R. 37 All. 49; 19 C.W.N. 282 (1914)].
60. पं.ीकरर्ण अति विनयम इ लिलए बनाया गया है ाविक दस् ावे.ों क े बारे में.ानकारी ाव,.विनक डोमेन में रFी.ा क े,.हां.ाल ा.ी और ोFा ड़ी को रोकने क े लिलए कोई भी इ े प्राप्त कर क ा है, और ाविक व्यविक्त ंपलित्त की स्थिस्र्थीति े अवग हो क ें । यविद विनष्पादन क े ार्थी व्याख्या को अपनाया.ा ा है, ो यह ुविनति• हो.ाएगा विक उप-विनबं क/विनबं क लगा ार दस् ावे.ों का पं.ीकरर्ण करेंगे सि.नकी वै ा अविनवाय, रूप े सि विवल वाद या रिरट याति का में विववाविद होगी।.बविक मुकदमा या रिरट काय,वाही ल ी रहेगी, दस् ावे. पं.ीक ृ लिलF क े रूप में लोक दस् ावे. रहेगा, सि. े और अति क व्यव ान पैदा होने की ंभावना है। इ लिलए, ऐ े व्याख्या को इ न्यायालय Yारा नहीं अपनाया.ाना ाविहए।
61. हालाँविक, व,मान व्याख्या को अपना े हुए - विक विक ी दस् ावेज़ पर विक ी क े हस् ाक्षर को स्वीकार करना उ क े विनष्पादन की स्वीक ृ ति की कोविट में नहीं है - पं.ीकरर्ण अति विनयम क े ह उप-विनबं क/विनबं क की शविक्त और उनकी प्रविक्रयाओं पर विव ार करना महत्वपूर्ण, है।
62. श्रीम ी राय ा बेगम बनाम सि.ला विनबं क, हारनपुर और एक अन्य43 वाले मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने कहाः 43 2011 ए. ी. ी. ऑनलाइन ऑल 2335 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
33. ारा 35 दस् ावे. क े विनष्पादन क े बारे में विनबं क की ं ुविष्ट की अपेक्षा कर ी है।यविद कोई दस् ावे. उति रूप े प्रस् ु विकया.ा ा है और उ का विनष्पादन क्षम व्यविक्त Yारा स्वीकार विकया.ा ा है,.ै ा विक अति विनयम में विन ा,रिर है, ो विनबं क क े पा दस् ावे. को पं.ीक ृ करने क े अलावा कोई विवकल्प नहीं है।पं.ीकरर्ण अति विनयम का उद्देश्य ंपलित्त क े ंबं में मुकदमेबा.ी को कम करना र्थीा,.ो विक ी दस् ावे.ी ाक्ष्य क े अभाव में त्कालीन रकार क े लिलए बहु अति क प्रशा विनक और अन्यर्थीा मस्या पैदा कर रहा र्थीा।यह न ो ंबंति व्यविक्त को स्वत्व प्रदान कर ा है और न ही इ े मान्य कर ा है बस्थिल्क ंबंति व्यविक्त की ंपलित्त क े लेनदेन े ंबंति दस् ावेज़ क े विनष्पादन को मान्य ा दे ा है और ऐ ेलेनदेन को ाविब करने क े लिलए ाक्ष्य क े रूप में काय, कर ा है सि. रीति े यह दस् ावेज़ में लिलFा गया है और विनबं क क मक्ष पं.ीक ृ विकया गया है। एकल न्याया ीश ने ब उत्तर प्रदेश पं.ीकरर्ण विनयमावली, विवशेष रूप े पैरा 285, 304, 305, 306 और 307 का उल्लेF विकया।पैरा 285 और 304,.ो एकल न्याया ीश क े विनर्ण,य में उद्धृ विकए गए हैं,.ो विनम्नव हैंः 285..ब पं.ीकरर्ण क े लिलए दस् ावे. प्रस् ु विकया.ा ा है ो पं.ीयन अति कारी क े ध्यान को आकर्षिष करने वाले किंबदुओं को विनम्नानु ार ंक्षेविप विकया.ा क ा है: (1) क्या उ क े पा दस् ावे. को पं.ीक ृ करने की क्षेत्राति कार है?(2) क्या दस् ावे. मय ीमा Yारा बाति है? (3) क्या दस् ावे. ारा 19,20 और 21 में की गई आपलित्तयों े मुक्त है? (4) क्या दस् ावे. पर उति रूप े मुहर लगाई गई है? (5) क्या दस् ावे. मुति व्यविक्त Yारा प्रस् ु विकया.ा ा है?(6) क्या दस् ावे. उन व्यविक्तयों Yारा विनष्पाविद विकया गया र्थीा सि.नक े Yारा इ े विनष्पाविद विकया.ाना ात्पर्तिय है?‖ [….] 304..ब कोई दस् ावे. पं.ीकरर्ण क े लिलए स्वीकार विकया.ा ा है ो विन ा,रिर शुल्क लगाया.ाना ाविहए और शुल्क पुस्थिस् का में आवश्यक प्रविवविष्टयां mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की.ानी ाविहए।इ क े बाद प्रति लिलविप र ीद ैयार की.ानी ाविहए और दस् ावेज़ की र ीदें और प्रस् ु क ा, को फी दी.ानी ाविहए। पं.ीयन अति कारिरयों को यर्थीा ंभव अविवलंब यह पूछना ाविहए विक क्या दस् ावे. कशिर्थी विनष्पादक Yारा विनष्पाविद विकया गया र्थीा और विनष्पादन को स्वीकार करने क े लिलए उ क े मक्ष उपस्थिस्र्थी व्यविक्त की पह ान क े बारे में स्वयं को ं ुष्ट करना ाविहए।उ े स्वयं को भी ं ुष्ट करना ाविहए विक विनष्पादन को स्वीकार करने वाले व्यविक्त ने दस् ावेज़ की ामग्री को पढ़ और मझ लिलया है और यविद वह व्यविक्त विनरक्षर है या दस् ावेज़ को पढ़ और मझ नहीं क ा है ो उ े प्रक ृ ति और ामग्री क े बारे में ब ाया.ाना ाविहए।यविद प्रस् ु क ा, विनष्पादक है, या उ का प्रति विनति, मनुदेशिश ी या अशिभक ा, है, और यविद ऐ ा विनष्पादक, प्रति विनति, मनुदेशिश ी या अशिभक ा, उपस्थिस्र्थी है, ो विनबं क अति कारी ुरं आवश्यक.ां करेगा।.ब पं.ीयन अति कारी विनष्पादकों े व्यविक्तग रूप े परिरति नहीं है, ो वह उन े अपनी पह ान क े लिलए ाक्ष्य देने वाले व्यविक्तयों को पेश करने की अपेक्षा करेगा। यविद ंभव हो ो ऐ े व्यविक्त पं.ीयन अति कारी को व्यविक्तग रूप े परिरति व्यविक्त होंगे या ऐ ा न होने पर वे म्माविन व्यविक्त हों। सि.न गवाहों क े बारे में पं.ीयन अति कारी को कोई.ानकारी नहीं है, उनक े अंगूठे क े विनशान विनष्पादकों क े मामले में द., विकए.ाएंगे (विनयम 308 देFें,.हां क यह लागू है) विक ी पक्षकार या ाक्षी में विक ी विवशिशष्ट शारीरिरक विवशिशष्ट ा या ति विÃ विवक ृ ति को पृष्ठांकन में नोट विकया.ाना ाविहए।लेविकन ंविदग् मामलों को छोड़कर वर्ण,नात्मक नामावली को द., करने की आवश्यक ा नहीं है। यह प्रविक्रया ारा 34 Yारा अपेतिक्ष प्रविक्रया क े अति रिरक्त होनी ाविहए और उ का स्र्थीान नहीं लेनी ाविहए विक पं.ीयन अति कारी उनकी पह ान े ं ुष्ट हो.ाए। ऐ ी वर्ण,नात्मक ूति यां अपने आप में कोई प्रमार्ण नहीं दे ी हैं। एकल न्याया ीश ने अशिभविनर्ण[4] विकया विक.हां सि.ला विनबं क क े मक्ष काय,वाही की रह विक ी ंतिक्षप्त काय,वाही में कपट और हेराफ े री का गंभीर प्रश्न उठाया गया र्थीा, वहां यह एक गंभीर सि विवल विववाद का विनर्ण,य करने का विवकल्प नहीं हो क ा र्थीा सि. का प्रभाव उ क े मालिलकों े विक ी अ ल ंपलित्त को दू रों को हस् ां रिर करने का हो ा।इ लिलए,.ब उति व्यविक्त Yारा उप-विनबं क क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मक्ष दस् ावे. प्रस् ु नहीं विकया गया र्थीा और विनष्पादक ने इ े विनष्पाविद करने े इनकार कर विदया र्थीा, ो यह विनर्ण,य विदया गया विक इ का उप ार ‡ोषर्णा और विवविनर्षिदष्ट पालन क े लिलए सि विवल वाद दायर करना है, न विक पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 72 और 73 क े ह ंतिक्षप्त काय,वाही।
63. पं.ीकरर्ण अति विनयम की Fंड 73 में यह परिरकल्पना की गई है विक विक ी व्यविक्त Yारा ऐ ी स्थिस्र्थीति में विनबं क क े मक्ष दस् ावे. को पं.ीक ृ कराने क े अपने अति कार को गविठ करने क े लिलए आवेदन प्रस् ु विकया.ा क ा है.हां उप-विनबं क ने इ आ ार पर दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश े इनकार कर विदया है विक सि. व्यविक्त Yारा इ े विनष्पाविद विकया गया है, उ ने इ े विनष्पाविद करने े इनकार कर विदया है।इ क े बाद ारा 74 में विनबं क Yारा अपनाई.ाने वाली प्रविक्रया विन ा,रिर की गई है, सि. में विनबं क Yारा इ बा की.ां की.ाएगी विक क्या दस् ावे. विनष्पाविद विकया गया है और क्या आवेदक या पं.ीकरर्ण क े लिलए दस् ावे. प्रस् ु करने वाले व्यविक्त की ओर े कानून की आवश्यक ाओं का अनुपालन विकया गया है।.ब विनबं क यह पा ा है विक ारा 74 क े उप ारा (a) ) और (b) की दोहरी श • को पूरा कर विदया गया है, ो विनबं क ारा 75 की उप- ारा (1) क े ह दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश का आदेश करेगा। ारा 75 की उप- ारा (4) में कहा गया है विक ारा 74 क े ह.ां करने क े उद्देश्य े विनबं क गवाहों को म्मन कर क ा है और उनकी उपस्थिस्र्थीति को ुविनति• कर क ा है और उन्हें ाक्ष्य देने क े लिलए विववश कर क ा है।विनबं क को विक ी पक्षकार पर.ां क े F, का भुग ान करने की बाध्य ा अति रोविप करने का भी अति कार है और ऐ ेF, की व ूली उ रीति की.ाएगी है.ै े सि.प्र. ं. में विक ी F, को व ूल करने की रीति ब ायी गयी है। इ प्रकार, ारा 75 की उप- ारा (4) दो परिरप्रेक्ष्यों में एक कस्थिल्प ारर्णा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को ब ा ी है- प्रर्थीम, विनबं क को गवाहों को म्मन.ारी करने और उनकी उपस्थिस्र्थीति ुविनति• करने क े लिलए शक्त बनाना और उन्हें ाक्ष्य देने क े लिलए म.बूर करना, मानो वह सि विवल न्यायालय है, विY ीय, उन F • को अति विनर्ण[4] करना.ो सि.प्र. ं. क े ह मुकदमे में विदए गए हैं। ारा 74 क े ह.ां करने क े उद्देश्य े एक अ,-न्यातियक काय, विनबं क को ौंपा गया है।यविद विनबं क ारा 72 या 76 क े ह विक ी दस् ावे. को पं.ीक ृ आदेश े इनकार कर ा है ो ऐ े आदेश क े विवरूद्ध कोई अपील नहीं की.ा क ी है।हालांविक, ारा 77 में यह उपबं है विक यविद विनबं क दस् ावे. को पं.ीक ृ विकए.ाने का आदेश देने े इंकार कर ा है ो ऐ े दस् ावे. या उ क े प्रति विनति क े अ ीन दावा आदेश वाला कोई व्यविक्त, मनुदेशिश ी या अशिभक ा, विन ा,रिर मय क े भी र सि विवल न्यायालय क े मक्ष ऐ ी तिडक्री का विनदेश करने क े लिलए वाद दायर कर क ा है विक दस् ावे. पं.ीक ृ विकया.ाएगा। इ प्रकार यह स्पष्ट है विक.ब विनबं क ारा 74 क े ह.ां कर ा है, ो वह सि विवल न्यायालय क े रूप में गविठ नहीं हो ा है। विनबं क क े मक्ष की गई.ां ंतिक्षप्त प्रक ृ ति की हो ी है। विनबं क का दस् ावे. को पं.ीक ृ करने का आदेश देने या विक ी दस् ावे. को पं.ीक ृ करने े इनकार करने का विनर्ण,य विनर्णा,यक नहीं है और उ की न्यातियक मीक्षा की.ा क ी है।
64. इ लिलए, ऐ ी स्थिस्र्थीति में.हां कोई व्यविक्त विक ी दस् ावे. पर अपने हस् ाक्षर स्वीकार कर ा है लेविकन उ क े विनष्पादन े इनकार कर ा है, उपविनबं क पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35(3)(a) ) क े अनु ार पं.ीकरर्ण े इनकार करने क े लिलए बाध्य है। इ क े बाद, अगर ारा 73 क े ह आवेदन दायर विकया.ा ा है, ो विनबं क को ारा 74 क े ह अ,-न्यातियक प्रक ृ ति की.ां करने क े लिलए शक्त है। यविद विनबं क ारा 76 क े ह पं.ीकरर्ण े इनकार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने का आदेश पारिर कर ा है, ो पं.ीकरर्ण क े लिलए दस् ावे. प्रस् ु करने वाला पक्षकार पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 77 क े ह एक सि विवल वाद दायर कर क ा है,.हां क्षम सि विवल न्यायालय थ्य े ंबंति प्रश्न पर विनर्ण,य करने में क्षम होगा।
65. अं में, हमारा ध्यान पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 58 (2) की ओर आकर्षिष विकया गया है,.ो विनम्नानु ार हैः 58.पं.ीकरर्ण क े लिलए स्वीकार विकए गए दस् ावे.ों पर पृष्ठांविक विकए.ाने वाले विववरर्ण। [...] (2) यविद कोई व्यविक्त विक ी दस् ावेज़ क े विनष्पादन को स्वीकार कर ा है, ो उ का मर्थी,न करने े इंकार कर ा है, विफर भी पं.ीकरर्ण अति कारी पं.ीकरर्ण करेगा, विकन् ु इ प्रकार अस्वीकार विकये.ाने का कारर्ण द., करेगाा। विY ीय प्रत्यर्थी4 की ओर े विनवेदन विकया.ा ा है विक उपरोक्त प्राव ान को उत्तर प्रदेश पं.ीकरर्ण विनयमावली क े अनुच्छेद 241 क े ार्थी पढ़ा.ाना ाविहए, सि. में यह प्राव ान हैः
241. पं.ीकरर्ण अति कारी दस् ावे.ों की वै ा े ंबंति नहीं हैं। पं.ीकरर्ण अति कारिरयों को यह ध्यान रFना ाविहए विक वे पं.ीकरर्ण क े लिलए उनक े पा लाए गए दस् ावे.ों की वै ा े विक ी भी रह े ंबंति नहीं हैं, और उनक े लिलए विनम्नलिललिF आ ारों पर पं.ीकरर्ण े इंकार करना गल होगा: (1) यह विक विनष्पादक ऐ ी ंपलित्त का लेनदेन कर रहे र्थीे.ो उनकी नहीं र्थीी; (2) यह विक लिलF ने पर व्यविक्तयों क े अति कारों का उल्लं‡न विकया.ो इ ंव्यवहार क े पक्षकार नहीं र्थीे; (3) यह विक ंव्यवहार कपटपूर्ण, या लोक नीति क े विवरुद्ध र्थीा; (4) यह विक विनष्पादक दस् ावेज़ की कु छ श • े हम नहीं र्थीे; (5) यह विक विनष्पादक दस् ावेज़ की श • े परिरति नहीं र्थीे; (6) यह विक विनष्पादकों ने ‡ोषर्णा की विक उन्हें विनष्पाविद करने में ोFा विदया गया र्थीा; (7) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह विक विनष्पादक अं े हैं और विगन ी नहीं कर क े हैं।यविद आवश्यक हो ो ये और ऐ े अन्य मामले क्षम न्यायालयों क े विनर्ण,य क े लिलए हैं और पं.ीकरर्ण अति कारिरयों का इ े कोई लेना-देना नहीं है।यविद विक ी क्षम व्यविक्त Yारा उति रीक े े, उति काया,लय में, कानून Yारा विन ा,रिर मय क े भी र दस् ावे. प्रस् ु विकया.ा ा है और यविद पं.ीकरर्ण अति कारी ं ुष्ट हो.ा ा है विक कशिर्थी विनष्पादक वह व्यविक्त है.ो Fुद का प्रति विनति त्व कर ा है, और यविद ऐ ा व्यविक्त विनष्पादन को स्वीकार कर ा है, ो पं.ीकरर्ण अति कारी इ क े ंभाविव प्रभावों की परवाह विकए विबना दस् ावे. को पं.ीक ृ करने क े लिलए बाध्य है। लेविकन पं.ीकरर्ण अति कारी को उपरोक्त आ ार (1) े (7) में उसिल्ललिF प्रकार की आपलित्तयों को ध्यान में रFना होगा,.ो ारा 58 Yारा आवश्यक पृष्ठांकन में उ क े ध्यान में लाया.ाए। उत्तर प्रदेश पं.ीकरर्ण विनयमावली क े उपरोक्त प्राव ानों का अवलम्ब लिलया गया है ाविक यह रेFांविक विकया.ा क े विक उपरोक्त ा आ ारों में े विक ी पर भी विक ी व्यविक्त क े इनकार े उ क े विनष्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, विकन् ु क े वल ारा 58 (2) क े ह मर्थी,न की आवश्यक ा होगी।हम इ विनवेदन े अ हम हैं।हम उन कारर्णों े सि. का उल्लेF विनर्ण,य में पहले ही विकया.ा ुका है "विनष्पादन" शब्द की व्याख्या को स्वीकार करने क े लिलए इच्छ ु क हैं, सि. का अर्थी, है विक विक ी व्यविक्त ने दस् ावेज़ को पूरी रह े मझने और उ की श • े हम होने क े बाद हस् ाक्षर विकए हैं। इ लिलए, ूंविक पैराग्राफ 241 और ारा 58 (2) क े वल भी स्वीर में आ े हैं.ब विनष्पादन को स्वीकार विकया.ा ा है, वे व,मान रर्ण में प्रा ंविगक नहीं हैं।
66. इ स् र पर, त्य पाल आनंद ( ुप्रा) में इ न्यायालय क े विनर्ण,य को ंदर्शिभ करना महत्वपूर्ण, होगा,.हां दो न्याया ीशों क े बी म भेद क े बाद ीन न्याया ीशों की पीठ का गठन विकया गया र्थीा।उ मामले में, अपीलक ा, की मां को हकारी विमति Yारा पं.ीक ृ विवलेF क े माध्यम े एक भूFंड आवंविट विकया गया र्थीा। उ की मृत्यु क े बाद, हकारी विमति ने भूFंड क े आवंटन को रद्द mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर े हुए एक रफा विनवा,पन का एक विवलेF विनष्पाविद विकया और पां वें प्रत्यर्थी4 क े पक्ष में एक पं.ीक ृ विवलेF विनष्पाविद कर विदया। अपीलक ा, ने इ ंव्यहार पर आपलित्त की, सि. क े बाद मा. और पां वें प्रत्यर्थी4 क े ार्थी मझौ े का एक वित्रपक्षीय विवलेF ैयार विकया गया। इ क े बाव.ूद, अपीलक ा, ने हकारी विमति यों क े उप विनबं क क े मक्ष आवेदन विकया।विववाद क े विव ारा ीन रहने क े दौरान, ो ाइटी ने छठे और ा वें प्रत्यर्थी4 को प्लॉट क े हस् ां रर्ण की अनुमति दे दी। इ क े बाद अपीलक ा, ने उप-विनबं क क े मक्ष विनवा,पन विवलेF और बाद क े दो विवलेFों क े पं.ीकरर्ण को रद्द करने क े लिलए एक आवेदन विदया, लेविकन इ आवेदन को उप-विनबं क Yारा अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी इ आ ार पर Fारिर. कर विदया गया विक उ े पं.ीक ृ दस् ावे. का पं.ीकरर्ण रद्द करने का कोई अति कार क्षेत्र नहीं है। इ क े बाद अपीलक ा, ने पं.ीकरर्ण अति विनयम की Fंड 69 क े ह पं.ीकरर्ण महाविनरीक्षक क े मक्ष आवेदन विकया, सि. ने आवेदन को Fारिर. कर विदया। अपीलक ा, Yारा अनुच्छेद 226 क े ह विवलेF को विनवा,विप करने और उत्तरव 4 दोनों विवलेFों को अक ृ करने की ‡ोषर्णा की मांग कर े हुए उच्च न्यायालय क े मक्ष दायर की गई, इ को भी उच्च न्यायालय ने Fारिर. कर विदया र्थीा। इ पृष्ठभूविम में न्यायमूर्ति ए. एम. Fानविवलकर ने ीन न्याया ीशों की पीठ की ओर े कहा विक अपीलक ा, ने मझौ ा विकया है और बहुमूल्य प्रति फल स्वीकार विकया है, सि. क े बाव.ूद उन्होंने मध्य प्रदेश हकारी विमति अति विनयम 1960 क े ह विववाद शुरू विकया र्थीा। इ क े अलावा, विववाद क े लंविब रहने क, अपीलक ा, Yारा उप-विनबं क क े मक्ष एक आवेदन दायर विकया गया र्थीा, सि. में ी रे पक्षकार क े पक्ष में विनवा,पन विवलेF और उत्तरव 4 विवलेFों क े पं.ीकरर्ण को रद्द करने की मान राह की मांग की गई र्थीी। इन परिरस्थिस्र्थीति यों क े दृविष्टग, इ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ने अशिभविनर्ण[4] विकया विक उच्च न्यायालय Yारा अपीलार्थी4 की प्रेरर्णा पर रिरट याति का को ग्रहर्ण करने े इनकार करना न्यायोति र्थीाः
25. यह ुस्र्थीाविप स्थिस्र्थीति है विक भार क े ंविव ान क े अनुच्छेद 226 क े अ ीन रिरट क े ंबं में अनु ोष प्रदान विकया.ाना अ ा ारर्ण और विववेका ीन है।रिरट अति कार क्षेत्र का प्रयोग कर े हुए, उच्च न्यायालय उ उप ार का अवलंब लेने वाले पक्षकार क े आ रर्ण े अन.ान नहीं हो क ा है।यह थ्य विक पक्षकार क े पा एक ही वाद हे ुक क े लिलए अनेक उप ार हो क े हैं, उ े अपना उप ार अवश्य ुनना ाविहए और उ े अनेक कार,वाइयों में लिलप्त होने की अनुमति नहीं दी.ा क ी।रिरट.ारी करने क े विववेक का प्रयोग न्यायोति राह प्रदान करने ंबं ी मामला है।यह ास्थिम्यक अनु ोष है।व,मान मामले में, उच्च न्यायालय ने उपरोक्त थ्यों पर ध्यान देने क े बाद अपीलक ा, क े कहने पर हस् क्षेप करने े इनकार कर विदया।अपीलक ा, क े मान अनु ोष प्राप्त करने क े लिलए कई काय,वाही करने क े आ रर्ण क े कारर्ण और यह भी विक अपीलक ा, क े पा एक वैकस्थिल्पक और प्रभावी वै ाविनक उपाय है, सि. क े कारर्ण उ क े रिरट क्षेत्राति कार का प्रयोग करने े इनकार करने में उच्च न्यायालय क े दृविष्टकोर्ण में कोई दोष नहीं पाया.ा क ा है सि. का उ ने पहले े ही मदद ली है।… यह अशिभविन ा,रिर विकया गया विक उच्च न्यायालय क े मक्ष दायर की गई रिरट याति का उपरोक्त कारर्णों े पोषर्णीय नहीं र्थीी और इ न्यायालय ने यह भी कहा विक दस् ावे. पं.ीक ृ होने क े बाद उप-विनबं क की भूविमका का विनव,हन हो.ा ा है, क्योंविक पं.ीकरर्ण अति विनयम में ऐ ा कोई स्पष्ट प्राव ान नहीं है.ो उ े पं.ीकरर्ण वाप लेने का अति कार दे ा है। इ न्यायालय ने यह अशिभविन ा,रिर विकयाः "34..ब बार दस् ावे. पं.ीक ृ कर लिलया.ा ा है ो उप-विनबं क (पं.ीकरर्ण) की भूविमका का विनव,हन हो.ा ा है (देFेंः रा.ा मोहम्मद आविमर अहमद Fान [उत्तर प्रदेश राज्य बनाम रा.ा मोहम्मद आविमर अहमद Fान, ए.आई.आर. 1961 ए. ी. 787]. अति विनयम, 1908 में ऐ ा कोई स्पष्ट प्राव ान नहीं है.ो विनबं क को ऐ ा पं.ीकरर्ण वाप लेने की शविक्त प्रदान mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर ा हो। यह थ्य विक दस् ावे. को पं.ीकरर्ण क े लिलए उति रूप े प्रस् ु विकया गया र्थीा, विनबं क Yारा इ क े पं.ीकरर्ण क े बाद विफर े नहीं Fोला.ा क ा है।पं.ीकरर्ण विनरस् करने की शविक्त एक महत्वपूर्ण, मामला है। इ ंबं में विक ी स्पष्ट प्राव ान क े अभाव में यह मानना ंभव नहीं है विक उप-पं.ीयक (पं.ीकरर्ण) प्रश्नग दस् ावे.ों का पं.ीकरर्ण विनरस् करने क े लिलए क्षम होगा। इ ी प्रकार, महाविनरीक्षक की शविक्त पं.ीकरर्ण काया,लयों क े अ ीक्षर्ण और इ ंबं में विनयम बनाने क ीविम है। महाविनरीक्षक को भी पं.ीक ृ विक ी दस् ावे. का पं.ीकरर्ण विनरस् करने का अति कार नहीं है सि. का पं.ीकरर्ण पहले ही विकया.ा ुका है।" इ न्यायालय ने कहा विक पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 35 पं.ीयन अति कारी को अ,-न्यातियक शविक्त प्रदान नहीं कर ी है, और न ही उ े दस् ावे. में स्वत्व या अविनयविम ा का मूल्यांकन करने की उम्मीद नहीं की.ा ी है।इ प्रकार, विनवा,पन क े पं.ीक ृ विवलेF की वै ा को क्षम अति कारिर ा वाले न्यायालय क े मक्ष ही रFा.ा क ा है।उपरोक्त थ्यों क े आ ार पर, इ न्यायालय ने उच्च न्यायालय Yारा रिरट याति का को Fारिर. विकए.ाने को बरकरार रFा, सि. में अपीलक ा, को कानून क े अनु ार उप ार प्राप्त करने का अव र विदया गया र्थीा। इ लिलए, त्य पाल आनंद ( ुप्रा) क े मामले में विनर्ण[4] कर कहा गया है विक एक बार पं.ीयन अति कारी Yारा विनवा,पन का विवलेF पं.ीक ृ हो.ाने क े बाद, पं.ीकरर्ण अति कारी वाप नहीं ले क ा र्थीा और न ही इ पर पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 69 क े ह पं.ीकरर्ण महाविनरीक्षक का पय,वेक्षी विनयंत्रर्ण र्थीा।
67. पूव¦क्त विनर्ण,य व,मान मामले.ै ी स्थिस्र्थीति े ंबंति नहीं है,.हां उप- विनबं क ने पहली बार दस् ावे. क े पं.ीकरर्ण का आदेश देने े इनकार कर विदया र्थीा और विY ीय प्रत्यर्थी4 Yारा ारा 72 क े ह दायर अपील में उप-विनबं क क े आदेश पर वाल उठाया गया र्थीा।विनबं क ने अपीलीय काय,वाही क े दौरान पं.ीकरर्ण अति विनयम की ारा 74 क े ह अनुध्या प्रक ृ ति की.ां करने क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिलए ात्पर्तिय विकया और विनष्कष, विनकाला विक विबक्री विवलेF का विनष्पादन स्र्थीाविप हो गया है और यह पं.ीक ृ होने क े लिलए उत्तरदायी है। विनबं क को स्पष्ट रूप े एक ऐ े मामले े अवग कराया गया र्थीा.हां पर उप-विनबं क ने इ आ ार पर पं.ीक ृ करने े इनकार कर विदया र्थीा विक ारा 35 (3) (a) ) क े ह अपीलक ा, Yारा दस् ावे. क े विनष्पादन े मना कर विदया गया र्थीा। ारा 72 क े ह उप ार की मांग क े अनु रर्ण में अति कार क्षेत्र का उपयोग कर े हुए, विनबं क ने विवक्रय विवलेF क े लिलविपक क े बयानों और इ आशय क े अनुप्रमाशिर्ण गवाहों पर भरो ा विकया विक विवक्रय विवलेF पर अपीलक ा, Yारा हस् ाक्षर विकए गए र्थीे और यह विक अपीलक ा, ने उ पर अपनी उंगलिलयों क े विनशान भी लगाए र्थीे। हालांविक,.ै ा विक अपीलक ा, Yारा ही ढंग े इंविग विकया गया है, उ क े Yारा विबक्री विवलेF पर हस् ाक्षर करना और उ की उंगलिलयों क े विनशान लगाना विववाविद नहीं है।वास् विवक मुद्दा यह है विक क्या अपीलक ा, Yारा विवक्रय विवलेF का उति विनष्पादन विकया गया र्थीा। अपीलक ा, ने अपनी आपलित्तयों क े प्रस् ु कर े मय विवशेष रूप े ोFा ड़ी का अशिभव न विकया और यह कहा विकः (i) ) विवक्रय विवलेF में परिरलतिक्ष.ो क्षेत्र पं.ीकरर्ण क े लिलए प्रस् ु विकया गया र्थीा उ में इ बा को लेकर शिभन्न ा र्थीी विक वास् व में पक्षकारों क े बी विक बा क े लिलए करार हुआ र्थीा;
(i) i) ) विबक्री विवलेF में दशा,ई गई ीमाएं उ भूविम क े अनुरूप नहीं र्थीीं सि. े बे ने क े लिलए हमति बनी र्थीी;
(i) i) i) ) विबक्री प्रति फल को गंभीर ा े कम आंका गया र्थीा; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
(i) v)) कशिर्थी विबक्री विवलेF क े परिरर्णामस्वरूप न क े वल अत्यति क भूविम का हस् ां रर्ण हो रहा र्थीा, बस्थिल्क वह आवा ीय ‡र भी हस् ां रिर हो रहा र्थीा.ो उ क े पति की मृत्यु क े बाद अपीलक ा, क े कब्.े में र्थीा; (v)) ंव्यवहार की श • क े अ ीन ंदेय पूर्ण, प्रति फल अपीलक ा, को प्राप्त नहीं हुआ र्थीा; अपीलक ा, की यह दलील विक उ क े Yारा हस् ाक्षरिर कशिर्थी विबक्री विवलेF को ोFा ड़ी और अ म्यक अ र डालकर े प्राप्त विकया गया र्थीा, यह एक ऐ ा मामला र्थीा सि. ने एक गंभीर विववाद Fड़ा कर विदया र्थीा। अपने दावों क े मर्थी,न में, अपीलक ा, ने उप-विनबं क और नायब ह ीलदार Yारा हमारे मक्ष विनरीक्षर्ण रिरपोट, भी प्रस् ु विकया है। हालांविक, हम यह कहना ाह े हैं विक हम इ स् र पर विववाद क े गुर्ण-दोष पर फ ै ला नहीं कर क े हैं, क्योंविक विनबं क ने स्पष्ट रूप े ोFा ड़ी और अनुति प्रभाव क े मुद्दे पर विनर्ण,य देकर अपने क्षेत्राति कार का उल्लं‡न विकया है।
68. विनबं क को ारा 74 क े ह प्रदत्त शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए यह विनष्कष, विनकाला ाविहए विक विबक्री विवलेF पर अपीलक ा, Yारा विवति व हस् ाक्षर विकए गए र्थीे और इ लिलए इ े पं.ीक ृ विकया.ा क ा र्थीा। हालांविक, अपीलक ा, की आपलित्तयों ने एक विव ारर्णीय प्रक ृ ति क े गंभीर मुद्दे उठाए, सि.न पर क े वल क्षम सि विवल अति कारिर ा वाले न्यायालय Yारा पहले ही विव ार कर विनर्ण,य विकया.ा क ा र्थीा। वास् व में, ुनवाई क े दौरान, इ न्यायालय को इ थ्य े अवग कराया गया है विक भूविम क े ामने क े विहस् े में शेष 1000 वग, मीटर क े क्षेत्र क े ंबं में विवविनर्षिदष्ट पालन44 क े लिलए विY ीय प्रत्यर्थी4 एक वाद दायर विकया गया है सि. क े परिरर्णामस्वरूप 16 नवंबर 2018 को विवविनर्षिदष्ट पालन क े लिलए एक तिडक्री 44मूल वाद ंख्या 568/2014 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हुई।.हां क विवक्रय विवलेF की विवषय-वस् ु का ंबं है, विY ीय प्रत्यर्थी4 ने वरिरष्ठ ने सि विवल.., ीविनयर तिडवी.न फास्ट ट्रैक कोट,45 क े मक्ष कब्.े क े लिलए एक मुकदमा दायर विकया है,.हां क ु छ काय,वाही लंविब है।इ मामले को ध्यान में रF े हुए, हमारी स्पष्ट राय है विक व,मान मामले में विनबं क ने विबक्री विवलेF को पं.ीक ृ करने का विनदšश देकर कानून क े विवपरी काय, विकया।
69. आक्षेविप विनर्ण,य में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने कहा है विक पं.ीकरर्ण विनष्पादक की हमति पर विनभ,र नहीं कर ा है, बस्थिल्क विनबं क क े इ विनष्कष, पर विनभ,र कर ा है विक विनष्पादक ने वास् व में दस् ावे. पर हस् ाक्षर विकए र्थीे।उच्च न्यायालय ने अशिभविन ा,रिर विकया विक.ां क े दौरान यह पाया गया विक विवक्रय विवलेF लेFक Yारा विवति व रूप े ैयार विकया गया र्थीा, यह विक अनुप्रमार्णक ाक्षी ने कहा र्थीा विक विवक्रय विवलेF पर अपीलक ा, Yारा हस् ाक्षर विकए गए र्थीे और उ ने उनकी उपस्थिस्र्थीति में अपनी उंगलिलयों क े विनशान भी लगाये र्थीे, अपीलक ा, Yारा इ का विनष्पादन विकए.ाने े इनकार करने क े बाव.ूद विनबं क क े लिलए प्रत्यक्ष पं.ीकरर्ण करना Fुला र्थीा। ऐ ा कर े हुए, उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने, म्मान क े ार्थी, विवक्रय विवलेF पर हस् ाक्षर करने को इ क े विनष्पादन क े ार्थी.ोड़ विदया है।इ फ ै ले में सि.न कारर्णों का उल्लेF विकया गया है, वे पूरी रह े गल हैं और उनका मर्थी,न नहीं विकया.ा क ा है। D विनष्कष,
70. उपरोक्त कारर्णों े, हम अपील की अनुमति दे े हैं और अपीलक ा, की रिरट याति का में 31 मई, 2018 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश क े आक्षेविप विनर्ण,य और आदेश को विनरस् कर े हैं। सि.ला विनबं क Yारा 31 मा,, 2012 को पारिर आदेश को इन परिरस्थिस्र्थीति यों में अपास् हो.ाए.ा। हालांविक, 45 वाद ं. 264/ 2016 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यह स्पष्ट विकया.ा ा है विक व,मान फ ै ले े ंव्यवहार की विवषय वस् ु क े ंबं में लंविब विक ी भी सि विवल/आपराति क काय,वाही पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इ मामले की परिरस्थिस्र्थीति यों में, F š क े ंबं कोई आदेश नहीं पारिर विकया.ा रहा है।
71. यविद कोई लंविब आवेदन है ो उ का विनपटारा विकया.ा ा है।....................................… न्यायमूर्ति डॉ. नं.य वाई ंद्र ूड़.....................................… न्यायमूर्ति ए. ए. बोपन्ना......................................... न्यायमूर्ति बेला एम. वित्रवेदी नई विदल्ली; 10 मई, 2022 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA