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भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सि विवल याति का ं 4807/2022
(विवशेष अनुमति याति का (सि विवल) ंख्या 19886/2019 े उद्भू )
भार ंघ एवं अन्य ..................अपीलक ा2 (गण)
बनाम
महेंद्र सिं ह ........................ प्रत्यर्थी< (गण)
विनण2य
न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता
JUDGMENT
1. व 2मान अपील में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा पारिर आदेश को ुनौ ी दी गई है सिM क े द्वारा अपीलार्थिर्थीयों द्वारा दायर अपील को खारिरM कर विदया गया र्थीा। इ रह की अपील उच्च न्यायालय की विवद्वान एकल पीठ द्वारा पारिर एक आदेश क े विवरूद्ध विनदSशिश की गई र्थीी, सिM में, अपीलार्थिर्थीयों द्वारा विदनांक 27.1.2017 को पारिर आदेश को रद्द कर विदया गया र्थीा और इ प्रकार, प्रत्यर्थी<1 की उम्मीदवारी पर विव ार विकया Mाना र्थीा और अपीलार्थिर्थीयों द्वारा स्वीकार विकया Mाना र्थीा। 1 ंक्षेप में 'रिरट याति काक ा2' उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण2य वादी क े अपनी भाषा में मझने हे ु विनब_ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Mा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण2य का अंग्रेMी ंस्करण प्रामाशिणक माना Mाएगा र्थीा विनष्पादन और विfयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2022 INSC 747
2. रेलवे प्रोटेक्शन फो 22 में कांस्टेबलों क े 11952 पदों को भरने क े लिलए रोMगार ू ना ंख्या 1/2011 प्रकाशिश की गई र्थीी। इ यन की प्रविfया में 120 अंकों की बहुविवकल्पीय प्रश्न वाली लिललिख परीक्षा शाविमल र्थीी सिM में प्रत्येक प्रश्न क े लिलए एक अंक और क ु ल मय 90 विमनट विन ा2रिर विकया गया र्थीा। उम्मीदवारों को अन्य परीक्षा Mै े विक शारीरिरक दक्ष ा परीक्षा 3 में विव ारिर विकये Mाने क े लिलए कम े कम 35% अंक (अनु ूति Mाति और अनु ूति MनMाति क े उम्मीदवारों क े लिलए 30% अंक) प्राप्त करना Mरूरी र्थीा। इ विवज्ञापन क े पैरा 8 खंड B में कहा गया है विक उम्मीदवार को एक आवेदन पत्र भरना होगा सिM को वह अपने हस् लेख में विहन्दी अर्थीवा अंग्रेMी भाषा में भरेगा। इन आवेदन पत्रों क े ार्थी शैतिक्षक योग्य ा और आयु क े प्रमाण क े लिलए स्व- त्याविप हाईस्क ू ल प्रमाण पत्र ंलग्न करना आवश्यक र्थीा। ु ंग श t इ प्रकार हैंः "8. xxx xxx
1. मुख्य ुरक्षा आयुक्त, उत्तर पूव< रेलवे, पोस्ट बॉक् नं.- 2, प्र ान डाकघर काया2लय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश विवत्तीय लाहकार और मुख्य लेखाति कारी, उत्तर पूव< रेलवे गोरखपुर, उ.प्र. विहन्दी, ऊदू2, पंMाबी, गुMरा ी 2 **** **** **** (e) आवेदन उम्मीदवारों द्वारा अपने स्वयं क े हस् लेख में क े वल हिंहदी या अंग्रेMी में भरा Mाना ाविहए। पुरुष आवेदकों क े मामले में बाएं हार्थी क े अंगूठे का विनशान और मविहला आवेदकों क े मामले में दाएं हार्थी क े अंगूठे का विनशान आवेदन क े नी े विदए गए बॉक् में लगाया Mाएगा। बड़े अक्षरों/स्पे आउट अक्षरों में हस् ाक्षरिर आवेदनों को अमान्य माना Mाएगा। ंशोति अर्थीवा अति लिललिख अर्थीवा ुं ले अंगूठे क े विनशान वाले आवेदन पत्रों को अस्वीकार विकया Mा क ा है। **** **** **** 9 (e) भ < प्रविfया क े विक ी भी रण में यविद विक ी भी प्रकार का प्रति रूपण का प ा ल ा है, ो आवेदक और प्रति रूपण उद्घोषणा करने वाले क े विवरूद्ध आपराति क मामले शुरू विकया Mा क ा है और ार्थी ही उ की उम्मीदवारी को रद्द विकया Mा क ा है।
3. यह रिरट याति काक ा2 अन्य विपछड़े वग[2] श्रेणी े ंबंति है और उ ने भार ीय डाक आदेश विदनांक 5.3.2011 क े ार्थी अपना आवेदन पत्र अंग्रेMी में भरा है। उनक े हस् ाक्षर अंग्रेMी में हैं, सिM में दो अक्षर एम और ए हैं। इ रह क े आवेदन पत्र क े ार्थी हाई स्क ू ल परीक्षा की स्व- त्याविप अंकपत्र और अन्य प्रमाण पत्र हो े हैं। ऐ े भी दस् ावेM स्व-प्रमाशिण एवं हिंहदी में हस् ाक्षरिर हैं।
4. रिरट याति काक ा2 ने 23 Mून, 2013 को लिललिख परीक्षा में शाविमल हुआ, सिM में उ ने ओएमआर शीट पर हिंहदी में एक पैराग्राफ लिलखा, हालांविक आवेदन पत्र में, उ ने इ े अंग्रेMी में लिलखा र्थीा। ब उन्होंने हिंहदी में हस् ाक्षर विकए र्थीे। इ क े बाद, Mब रिरट याति काक ा2 07 मा 2, 2014 को पी.ई.टी. में शाविमल हुआ, ो उ ने विफर े “एम. ए.“ लिलखकर हस् ाक्षर विकया।
5. अपीलार्थिर्थीयों ने 2.9.2014 को प्रश्नग दस् ावेMों4 क े राMकीय परीक्षक की राय प्राप्त की। विवशेषज्ञ की राय यह र्थीी विक ओ.एम.आर. पत्रक और प्रमाणपत्रों की छायाप्रति यों में एक ही व्यविक्त क े हस् ाक्षर हैं। यह भी कहा विकया गया विक ओ.एम.आर. पत्रक में विहन्दी में और आवेदन पत्र में अंग्रेMी में लिलखे गये पैराग्राफ क े ंबं में कोई राय व्यक्त करना ंभव नहीं है।
6. ूंविक रिरट याति काक ा2 की विनयुविक्त नहीं हुई र्थीी, हालांविक उ ने अ.विप.व. में 58.[5] अंकों क े कट-ऑफ क े मुकाबले 73.32 अंक प्राप्त विकए र्थीा, उ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े मक्ष एक रिरट याति का दायर की। उच्च न्यायालय द्वारा 19.10.2016 को एक आदेश पारिर विकया गया र्थीा। इ मामले को परीक्षा क े विवशिभन्न रणों में प्राप्त विकए गए अँगूठे क े विनशान और अँगुलिल छाप विह मस् 4 ंक्षेप में, ‘Mी.ई.क्यू.डी.’ उद्घोषणा मुद्दे पर पुनर्विव ार करने क े लिलए अपीलक ा2ओं को पुनः प्रेविष कर विदया गया र्थीा। रिरट याति काक ा2 को एक नया आवेदन करने का अव र विदया गया र्थीा सिM पर मुख्य ुरक्षा आयुक्त द्वारा ुनवाई की Mाएगी। रिरट याति काक ा2 की उम्मीदवारी क्षम प्राति कारी द्वारा अन्य बा ों क े ार्थी- ार्थी विनम्नलिललिख आ ारों पर 27 Mनवरी, 2017 को खारिरM कर दी गई र्थीीः “माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश क े अनुपालन में, याति काक ा2 े ंबंति मस् प्रमाण पत्रों का स्क ै न विकया गया और इ को याति काक ा2 को भी विदखाया गया। प्रश्नग दस् ावेMों क े राMकीय परीक्षक द्वारा विनम्नलिललिख दस् ावेMों पर याति काक ा2 क े रिरकॉड[2] हस् ाक्षर और हस् लिलविप की Mां की गई है:
1. प्रश्न-1 और प्रश्न-1/1 = ओ.एम.आर. पर हस् लेख एवं विकया गया हस् ाक्षर
2. प्रश्न-2 = पी.ई.टी. प्रोफॉमा2 पर विकया गया हस् ाक्षर
3. प्रश्न-3 और प्रश्न-3/1 = आवेदन पत्र में विकया गया हस् ाक्षर एवं हस् लेख
4. ए -1 े ए -7 = मौलिखक परीक्षा क े दौरान विकया गया हस् ाक्षर विवशेषज्ञ की राय क े अनु ार प्रश्न-1 और 5-1 े 5-7 क े रूप में ति विœ दस् ावेMों पर विकए गए हस् ाक्षर/हस् लेख एक ही हैं, लेविकन प्रश्न-2 और प्रश्न-3 क े रूप में ति विœ दस् ावेMों पर विकए गए हस् ाक्षर/लिलखावट प्रश्न-1 और ए -1 े ए -7 क े रूप में ति विœ दस् ावेMों पर विकए गए हस् ाक्षर/लिलखावट े अलग हैं। Mहां क अशिभलेख पर विकए गए हस् ाक्षर/हस् लेखन, Mो प्रश्न-1 और प्रश्न-3/1 क े रूप में वर्थिण है, का ंबं है, इन दस् ावेMों पर विकए गए हस् ाक्षर/हस् लेखन की गहन Mां की गई र्थीी और अशिभलेखों पर विकए गए हस् ाक्षर/हस् लेखन क े ार्थी उपरोक्त ति œ की उद्घोषणा ुलना करने पर, यह पाया गया विक याति काक ा2 ने अंग्रेMी में अपने आवेदन को भरा है और ओएमआर शीट पर उ ने अपने लेखन को रिरकॉड[2] करने क े लिलए हिंहदी ंस्करण का उपयोग विकया है Mो ओएमआर शीट क े पैरा-3 में विदए गए विनदSश का उल्लंघन कर ा है। ओएमआर शीट क े पैरा-3 में यह विनदSश विदया गया र्थीा विक ओएमआर शीट पर अपने लेख में लिलखने क े लिलए उ ी भाषा का उपयोग विकया Mाना ाविहए, सिM े आवेदन पत्र में भरने क े लिलए अपनाया गया र्थीा। याति काक ा2 की गल ी क े कारण याति काक ा2 क े लेखन का विमलान विवफल हो गया क्योंविक उ ने दो भाषाओं का उपयोग विकया र्थीा। इ ी रह, हस् ाक्षरों का विमलान विवफल रहा, क्योंविक याति काक ा2 ने आवेदन पत्र पर अंग्रेMी में अपने हस् ाक्षर विकए, Mबविक हिंहदी में ओएमआर शीट पर, Mो याति काक ा2 की गल ी है। यह अं र विदखाकर या ी को स्पष्ट विकया गया। इ प्रकार, याति काक ा2 विवशेषज्ञ की राय े अ हम होने क े लिलए कोई ठो आ ार पेश नहीं कर का।
7. रिरट याति काक ा2 ने क्षम प्राति कारी क े विनण2य को ुनौ ी दे े हुए पुनः एक रिरट याति का दायर की। उक्त विनण2य को उच्च न्यायालय की विवद्वान एकल पीठ ने 20 फरवरी, 2019 को अपास् कर विदया र्थीा। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने व 2मान अपील में आक्षेविप आदेश पारिर कर उक्त आदेश की पुविष्ट की।
8. आवेदन पत्र में एक पैराग्राफ लिलखने की आवश्यक ा इ लिलए र्थीी विक Mब कभी और विक ी स् र पर अभ्यर्थी< की पह ान े ंबंति विववाद उत्पन्न हो विक वही व्यविक्त लिललिख परीक्षा में शाविमल हुआ है सिM ने आवेदन पत्र को भरा र्थीा उ स्थिस्र्थी में उम्मीदवार क े हस् लेख की ुलना की Mा क े । उच्च न्यायालय ने मूल रूप े इ थ्य पर भरो ा विकया है विक लिलखावट विवशेषज्ञ की राय े, प्रति रूपण क े आरोप का कोई बू नहीं है। हालांविक, यह ारिर विकया गया विक आवेदन पत्र वष[2] 2011 में भरा गया र्थीा Mबविक परीक्षा वष[2] 2013 में हुई र्थीी, इ लिलए, रिरट उद्घोषणा याति काक ा2 ने अनMाने में आवेदनपत्र भरने और परीक्षा क े बी मय क े अं राल क े कारण हिंहदी में ओएमआर पत्रक का कॉलम नं. 3 भर विदया र्थीा।
9. यहां पर सिM प्रश्न की Mां की Mानी है वह विवज्ञापन में दी गई श 2 क े उल्लंघन का प्रभाव रख ा है और आवेदन उ भाषा में विकया Mाना ाविहए सिM में उम्मीदवार प्रश्न पत्र हल करना ाह े हैं, और ओएमआर पत्रक की ुलना में आवेदन पत्र में विवशिभन्न भाषाओं का उपयोग करने का क्या प्रभाव है।
10. विवद्वान ए.ए.Mी. ुश्री मा वी दीवान ने क 2 विदया है विक आवेदन पत्र में विवशिभन्न भाषाओं का उपयोग करने की बMाय ओएमआर पत्रक में प्रयुक्त भाषा े ही उम्मीदवारी नामंMूर हो Mा ी है। ुश्री दीवान ने विमलनाडु राज्य और अन्य बनाम Mी. हेमल ा और अन्य[5] विनण2य का उल्लेख विकया है। दू री ओर, रिरट या ी क े विवद्वान अति वक्ता श्री प्रशां भूषण ने क 2 विदया विक विक ी अलग भाषा का उपयोग क े वल एक अविनयविम ा है, हालांविक यह स्वीकार विकया Mा ा है विक एक ही भाषा का उपयोग करने का उद्देश्य प्रति रूपण े ब ना और उम्मीदवार की वास् विवक ा का प ा लगाना है। श्री भूषण ने अMय क ु मार विमश्रा बनाम भार ंघ और अन्य[6], राम क ु मार विगMरोया बनाम विदल्ली अ ीनस्र्थी ेवा यन बोड[2] और अन्य[7] और अव ार सिं ह बनाम भार ंघ और अन्य[8] क े मामले में पारिर विनण2यों का उल्लेख विकया है।
11. हमने पक्षकारों क े अति वक्ता को ुना है और ुश्री दीवान और श्री भूषण द्वारा ंदर्थिभ विनण2य व 2मान मामले क े थ्यों पर लागू नहीं हो ा है। Mी. हेमलर्थी 5 (2020) 19 ए. ी. ी. 430 6 2016 ए. ी. ी. ऑनलाइन डी.ई.एल 6553 7 (2016) 4 ए. ी. ी. 754 8 (2016) 8 ए. ी. ी. 471 उद्घोषणा क े मामले में, यह श 2 आरोविप की गई र्थीी विक यविद व्हाइटनर, स्क े पेन, पेंसि ल, कलर पेंसि ल, मल्टी कलर पेन का प्रयोग विकया Mा ा है ो उत्तर पुस्थिस् का अवै हो Mाएगी। इन परिरस्थिस्र्थीति यों में, यह माना गया विक उम्मीदवार ऐ ी अविनवाय[2] श £ का उल्लंघन कर ा है विक सि विवल MM क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए उ क े परिरणाम की घोषणा नहीं की Mाएगी। विदल्ली उच्च न्यायालय क े अMय कु मार विमश्रा का विनण2य रिरट या ी की वास् विवक Mन्म ति शिर्थी क े बारे में गल Mानकारी देने क े कारण उम्मीदवारी विनरस् करने क े थ्य े उत्पन्न हो ा है। राम कु मार विगMरोया क े मामले में, उम्मीदवार ने आवेदन Mमा करने की अंति म ति शिर्थी क े बाद अन्य विपछड़ा वग[2] े ंबंति होने का अपना प्रमाण पत्र प्रस् ु विकया र्थीा। अव ार सिं ह एक ऐ ा मामला है Mहां आपराति क मामलों े ंबंति ामग्री की Mानकारी शिछपाई गई र्थीी सिM में उम्मीदवार ंलिलप्त हो क ा है। इ प्रकार, ये भी मामले अपने स्वयं क े थ्यों पर आ ारिर हैं, सिM में एक ही विववाद्य शाविमल नहीं है Mै ा विक व 2मान अपील में उत्पन्न हो ा है।
12. व 2मान मामले में, आर.पी.एफ. में कांस्टेबलों क े 11,000 े अति क पदों को भरने क े लिलए विवज्ञापन Mारी गया र्थीा। यद्यविप इ रह क े विवज्ञापन पर परीक्षा में शाविमल होने वाले उम्मीदवारों की ंख्या उपलब् नहीं है, लेविकन आम ौर पर, यह कहा Mा क ा है विक विवज्ञाविप पदों की ुलना में अति क उम्मीदवार ऐ े पदों क े लिलए इच्छ ु क हैं। श 2 यह है विक आवेदन पत्र में भाषा का उपयोग ओएमआर परीक्षा क े प्रयोMनों क े लिलए विकया Mाएगा, क्योंविक यविद उम्मीदवार की पह ान क े ंबं में कोई विववाद उत्पन्न हो ा है, ो उ े दो हस् लेखों े त्याविप विकया Mा क े । इ क े अलावा, प्रश्न पत्रों को हिंहदी और अंग्रेMी क े अलावा अन्य भाषाओं में भी ेट विकया Mाना आवश्यक है। विवशिभन्न भाषाओं में आवेदन गोरखपुर, कोलका ा, भुवनेश्वर और ेन्नई में विवशिभन्न नोडल अति कारिरयों को भेMा Mाना र्थीा। इ क े अलावा, ओएमआर उत्तर पत्रक विद्वभाषी यर्थीा-हिंहदी एवं अंग्रेMी में है, यविद उद्घोषणा उम्मीदवार ने अंग्रेMी या हिंहदी क े अलावा विक ी अन्य भाषा को ुना है ो ओ.एम.आर. उत्तर पत्रक विक ी अन्य भाषा में हो क ा है।
13. उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा आवेदन पत्र भरने और परीक्षा क े बी मय क े अं राल क े ंबं में विदया गया एकमात्र क 2 है और इ लिलए रिरट या ी द्वारा हिंहदी में ओ.एम.आर. पत्रक को अनMाने में भरा Mाना आशंका और अनुमान पर आ ारिर है। Mब एक बार रिरट याति काक ा2 ने अंग्रेMी में आवेदन पत्र भर विदया है, और अंग्रेMी में भी हस् ाक्षर विकए हैं, ो इ े अनMाने में की गई गल ी नहीं कहा Mा क ा है Mब उ ने पैरा हिंहदी में लिलखा है। विवशिभन्न भाषा में ऐ ा लेखन विवज्ञापन में स्पष्ट रूप े उसिल्ललिख विनदSशों का उल्लंघन कर ा है।
14. श्री भूषण का यह क 2 विक विवशिभन्न भाषा क े प्रयोग का कोई परिरणाम नहीं विनकल ा है और इ लिलए इ े आज्ञापक नहीं कहा Mा क ा, क 2 ंग नहीं है। सिM भाषा का ुनाव विकया गया है वह यह ुविनति§ करने क े लिलए प्रा ंविगक है विक सिM उम्मीद्वार ने आवेदन पत्र भरा है, क े वल वही त्यविनष्ठा बनाए रखने क े लिलए लिललिख परीक्षा में शाविमल हुआ है। उत्तर पुस्थिस् काएं आवेदन पत्र में उम्मीदवार द्वारा ुनी गई भाषा में होनी ाविहए। यह ुस्र्थीाविप है विक यविद आवेदन पत्र भरने में कोई विवशेष प्रविfया विन ा2रिर की Mा ी है, ो क े वल उ ी प्रविfया का पालन कर े हुए आवेदन पत्र भरना ाविहए। यह नMीर अहमद बनाम राMा- म्राट[9] क े मामले में विप्रवी काउंसि ल द्वारा प्रति पाविद विकया गया र्थीा, सिM में यह माना गया र्थीा विक "Mहां एक विनति§ रीक े े अमुक ीM को करने की शविक्त दी Mा ी है, उ ीM को उ रह े विकया Mाना ाविहए अर्थीवा नहीं। अन्य रीक े े विकया गया काय[2] आवश्यक रूप े विनविषद्ध है। 9 1936 ए. ी. ी. ऑनलाइन पी. ी. 41 उद्घोषणा
15. इ न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ ने ंद्र विकशोर झा बनाम महावीर प्र ाद और अन्य10 क े मामले में विनम्नानु ार ारिर विकयाः "17... यह ुस्र्थीाविप कल्याणकारी सि द्धां है विक यविद विक ी क़ानून में विक ी ीज़ को एक विवशेष रीक े े करने का प्राव ान है, ो उ े उ ी रीक े े विकया Mाना ाविहए और विक ी अन्य रीक े े नहीं।(देखेंः नMीर अहमद बनाम हिंकग एम्परर [(1935-36) 63 ए.आई.आर. 372: ए.आई.आर. 1936 पी. ी. 253 (II)], राव शिशव बहादुर सिं ह बनाम वीपी राज्य [ए.आई.आर. 1954 ए. ी. 322:1954 ए. ी.आर. 1098], उत्तर प्रदेश राज्य बनाम सिं घारा सिं ह [ए.आई.आर. 1964 ए ी 358: (1964) 1 ए. ी.डब्ल्यू.आर. 57]।विनयमों क े ह ुनाव याति का क े वल 16-5-1995 क खुली अदाल में शाम 4.15 बMे क (न्यायालय क े काय[2] मय ) क विनयम 6 (पूव¯क्त) द्वारा विन ा2रिर रीक े े न्याया ीश या न्यायपीठ क े मक्ष प्रस् ु की Mा क ी र्थीी, Mै ा भी मामला हो, ाविक परिर ीमा की अवति को ब ाया Mा क े ।हालांविक, ऐ ा नहीं विकया गया..."
16. ेरुक ु री मशिण बनाम मुख्य ति व, आंध्र प्रदेश रकार और अन्य11 में इ न्यायालय ने उक्त सि द्धां का पालन कर े हुए विनम्नानु ार ारिर विकया: "14. Mहां कानून कह ा है विक कोई काय[2] विवविह प्रकार े विकया Mाना ाविहए ो उ काय[2] को उ ी विवविह प्रकार े विकया Mाना ाविहए ब विवविह प्रकार े विव लिल हुए विबना कानून क े प्राव ानों का पालन कर े हुए उ ी प्रकार े विकया Mाएगा..."
17. इ ी प्रकार, इ न्यायालय ने ग्रेटर मुंबई नगर विनगम (एम. ी.Mी.एम.) अन्य अशिभलाष लाल और अन्य और ओ.पी.टी.ओ. र्विकट इंतिडया लिलविमटेड अन्य एस्थिक् बैंक और अन्य मामले में उक्त सि द्धां का पालन विकया गया है। ूंविक 10 (1999) 8 ए. ी. ी. 266 11 (2015) 13 ए. ी. ी. 722 उद्घोषणा विवज्ञापन में आवेदन पत्र भरने और उत्तर पुस्थिस् काओं क े हल करने की रीति पर विव ार विकया गया र्थीा, इ लिलए इ े इ प्रकार विवविह रीति े विकया Mाना ाविहए। इ लिलए, उच्च न्यायालय की खंडपीठ का यह क 2 विक इ बा की ंभावना हो क ी है विक मय बी ने क े कारण रिरट या ी ने उत्तर पुस्थिस् का को अलग भाषा में हल करने का प्रया विकया होगा, उति नहीं है क्योंविक विवशिभन्न भाषा का प्रयोग करना ही रिरट या ी को न्यातियक मीक्षा की शविक्त क े प्रयोग करने में विक ी ंलिलप्त ा े वंति कर दे ा है।
18. ूंविक रिरट या ी ने आवेदन पत्र और ओ.एम.आर. उत्तर पुस्थिस् का को भरने क े लिलए अलग-अलग भाषा का प्रयोग विकया है, इ लिलए अपीलार्थिर्थीयों द्वारा उनकी उम्मीदवारी को नामंMूर कर विदया Mाना उति र्थीा।
19. इ लिलए, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश को कानून में बरकरार नहीं रखा Mा क ा है और उ े अपास् विकया Mा ा है। यह रिरट याति का खारिरM की Mा ी है। परिरणामस्वरूप, अपील अनुज्ञा की Mा ी है। …………………….. न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता …………………….. न्यायमूर्ति विवfम नार्थी नई विदल्ली 25 Mुलाई 2022 उद्घोषणा