Full Text
भारतीय सव�च्च न्यायाल
दां�डक अपील�य अ�धका�रता
आपरा�धक अपील संख्य- 1001-1002/2022
[�वशेष अनुम�त अपील (दां�डक) संख्य-6128-29/2021 से उत्पन
या�चका]
नारको�टक्स कण्ट्रोल ब् ..अपीलाथ�
बनाम
मो�हत अग्रवाल ...प्रत्
�नणर्
JUDGMENT
1. अनुम�त प्रदा�| न्य. �हमा कोहल�
2. अपीलाथ� -एनसीबी मामला संख्य एससी/1334/2020 म� प्रत्-अ�भयुक् को �गरफ्तार क े बाद ज़मानत देने क े �दल्ल उच् न्यायाल क े �नणर् और आदेश �दनांक 16.03.2021 से व्य�थ है िजसम� प्रत् स्वापक औष�ध और मनः प्रभावी पदाथर् अ�ध�,1985 क� धारा 8/22 और 29 क े तहत अपराध क े �लए मुकदमे का सामना कर रहा है।
3. अ�भयोजन द्वार स्था�प मामला यह है �क स्वापक �नयंत्रकब् क े अ�धका�रय� द्वार �दनांक 09.01.2020 को प्रा गुप् सूचना क े आधार पर, �क एक पासर् आगरा क े गौरव क ु मार अग्रव नाम क े एक व्यिक द्वार बुक �कया गया था, िजसे लु�धयाना, पंजाब म� एक मनोज क ु मार को �दया जाना था और एक क ू �रयर क ं पनी क े गोदाम म� रखा गया था, जो �क गांव समालखा, कापसहेरा, नई �दल्ल म� िस्थत थ, िजसम� एनआरएक्स टेबलेट होने का संदेह था। गो�लयां नशीला पदाथर होने क े कारण एनसीबी क� ट�म उक् गोदाम म� पहुंची और तलाशी क� कायर्वाह� क� क ू �रयर क ं पनी क े स्टा सदस्य म� से दो स्वतं गवाह� क� उपिस्थ� म� सं�दग् पासर् क� पहचान क� गई और उसे खोला गया। उक् पासर् को खोला गया और 20 �कलो वजन क े 50,000 ट्रामाड टैबलेट बरामद �कए गए। चूं�क सं�दग् पासर् म� मौजूद गो�लयां गलत घो�षत क� गई थीं और �बना �कसी वैध �बल क े थीं, एनसीबी क े अ�धका�रय� द्वार जब्त क� कायर्वाह शुर क� गई ।
4. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव द्वार �दए गए स्वैिच् बयान म�, उन्ह�न कहा �क उन्ह�न एक क ू �रयर क ं पनी क े माध्य से पासर् बुक �कया था, िजसे पंजाब क े लु�धयाना �नवासी मनोज क ु मार तक पहुंचाया जाना था और उसने प्रत् से तलाशी क� कायर्वाह क े दौरान बरामद ट्रामाड टैबलेट �बना �कसी �बल या नुस्ख क े खर�द� थी। बिल्, पासर् पर यह उल्ले �कया गया था �क इसम� "सिजर्क आइटम" ह� । अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव ने आगे कहा �क प्रत् ने उपरोक् दवाएं जयपुर �नवासी प्रम जयपु�रया उफ र द�वंदर खंडेलवाल से खर�द� थीं और प्रम जयपु�रया का दामाद आगरा म� उसका व्यवसा देखता था और उसका एक गोदाम था जहाँ ड्र का भंडारण �कया जाता था।
5. अ�भयोजन प� ने आगे कहा �क गौरव क ु मार अग्रव ने खुलासा �कया था �क वह जानता था �क प्रत् का �नवास और दुकान कहाँ िस्थ है और वह उनक� पहचान कर सकता है। तद्नुसा, उक् अ�भयुक्त व्यिक छापेमार� दल क े साथ प्रत् क े प�रसर म� गया। प्रत् द्वार �कए गए खुलासे पर छापेमार� ट�म प्रम जयपु�रया क े गोदाम म� गई और तलाशी ल� िजसक े दौरान एनडीपीएस अ�ध�नयम क े दायरे म� आने वाल� दवाओं का एक जखीरा बरामद �कया गया। उक् दवाओं म� ट्रामाड, ज़ोल�पडेम और अल्प्राज टैबलेट / क ै प्सू स�हत �व�भन् न�सले पदाथ� क� 6,64,940 गो�लयां शा�मल ह�, िजनका वजन लगभग
328.82 �कलोग्र है, 1400 पािज़ंक इंजेक्श 1.[4] ल�टर और 80 कोरेक् �सरप क� बोतल� 8 ल�टर वजन क� ह�। एनसीबी अ�धका�रय� द्वार लु�धयाना म� अ�भयुक्त मनोज क ु मार क े प�रसर� म� क� गई तलाशी क े दौरान 990 ग्र वजन क� 9,900 गो�लयां बरामद क� ग�।
6. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अपने बयान म�, प्रत् ने खुलासा �कया �क वह प्रोम जयपु�रया से उक् टैबलेट और क ै प्सू को अवैध रू से बेच और खर�द रहा था। प्रत् को 11 जनवर�, 2020 को �हरासत म� ले �लया गया। उसने माननीय �वशेष न्यायाधी, एनडीपीएस क े सम� दो ज़मानत अज़� दायर क�। उक् दोन� अज़� का अपीलाथ� -एनसीबी द्वार पुरजोर �वरोध �कया गया और �वशेष न्यायाधी, एनडीपीएस द्वार खा�रज कर �दया गया। 21 जुलाई, 2020 क े आदेश द्वार अपनी दूसर� ज़मानत अज़� खा�रज �कये जाने से व्य�थत होक, प्रत् ने ज़मानत हेतु दंड प्र�क सं�हता, 1973 क� धारा 439 क े तहत एक या�चका दायर क� िजसे उच् न्यायाल क े माननीय एकल न्यायाधी द्वार पा�रत आ�े�पत आदेश क े ज़�रये मंजूर �कया गया है।
7. अपीलाथ� -एनसीबी क� ओर से बहस करते हुए, अ�त�रक् सॉ�ल�सटर जनरल श् जयंत क े. सूद ने �नवेदन �कया �क प्रत् को ज़मानत देने का आदेश को पा�रत करते हुए, उच् न्यायाल ने यह �टप्पणी करन म� गलती क� है �क एनसीबी अ�धका�रय� द्वार उनक े आवास से कोई अ�भयोगात्म सामग् बरामद नह�ं हुई। उन्ह�न कहा �क उच् न्यायाल ने इस तथ् क� पूर� तरह से अनदेखी क� है �क यह प्रत् द्वार स्वय �कए गए उस खुलासे क े आधार पर था �क सह-अ�भयुक्त प्रम जयपु�रया क े गोदाम से भार� मात् म� नशील� दवाएं और इंजेक्श जब् �कए गए थे, िजन्ह बाद म� �वभाग ने �गरफ्ता कर �लया था; यह �क उच् न्यायाल ने एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े �नयम� और शत� को लागू न करक े गंभीर त्रु क� है; यह �क प्रत् द्वार �कया गया अपराध नशीले पदाथ� क� वा�णिज्य मात् क� बरामदगी क� श्रे म� आता है और एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 म� लगाए गए प्र�तब क े प�रप्रे म�, प्रत् क� ज़मानत स्वीका नह�ं क� जानी चा�हए थी और यह �क यह प्र�तबं� पदाथ� क े अप्रत/सचेत कब्ज का मामला है क्यूं�क प्रत एक संग�ठत �गरोह म� स�क् भागीदार था जो ड्र क� तस्कर म� शा�मल था। अंत म�, यह कहा गया �क प्रत् क े �खलाफ पयार्प प�रिस्थ�तजन सा�य उपलब् ह� जो उसे ज़मानत �दए जाने से वं�चत कर देगा।
8. दूसर� ओर, प्रत्यथ� के �वद एडवोक े ट-ऑन-�रकॉडर श् पी.क े. जैन ने वतर्मा अपील का पुरजोर �वरोध करते हुए कहा �क एक साल और तीन मह�ने �हरासत म� रहने क े बाद उच् न्यायाल ने सह� ढंग से प्रत् क� ज़मानत स्वीका क� है। उन्ह�न कहा �क अपीलाथ�-एनसीबी और प्रत् क े अ�धवक्त को सुनने क े बाद आ�े�पत आदेश पा�रत �कया गया था और प्रत् ने उस पर लगाए गए ज़मानत क े �कसी भी �नयम और शत� का उल्लंघ नह�ं �कया है। गुणागुण क े आधार पर, यह आग् �कया गया था �क क�थत घटना म�, मादक दवाओं क� खेप प्रत् द्वार या उसक े �लए बुक नह�ं क� गई थी। प्रत् क े पास से क ु छ भी बरामद नह�ं हुआ और उसक े आवास और दुकान पर क� गई तलाशी म� क ु छ भी नह�ं �मला। �वद्वा अ�धवक्त ने प्रत् को आगरा म� दवा बेचने वाला एक छोटा दुकानदार बताते हुए कहा �क उसका अन् सह-आरो�पय� से कोई संबंध नह�ं था और उसका नाम एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत सह-अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव क े बयान क े दौरान सामने आया था, जो आं�शक रू से आगरा और �दल्ल म� दजर �कया गया था। हालां�क गौरव क ु मार अग्रव एनसीबी ट�म क े अ�धका�रय� को प्रत् क� दुकान पर ले गए थे, िजसक� �व�धवत तलाशी ल� गई, ले�कन वहां से क ु छ भी आप��जनक नह�ं �मला। उपरोक् क े अलावा, सह-अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव और प्रत् दोन� पहले अवसर पर एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अपने बयान� से मुकर गए थे। और इस न्यायाल द्वार तोफान �संह बनाम त�मलनाडु राज् म� �नधार्�रत �कए ग कानून क े मद्देनज, एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर �कया गया कोई भी इकबा�लया बयान, उक् अ�ध�नयम क े तहत अपराध क े मुकदमे म� अस्वीकाय है। यह आग् करते हुए �क उच् न्यायाल ने उक् न्या�य �सद्धां का पालन �कया है और इस तथ् को ध्या म� रखते हुए �क आरोप-पत पहले ह� दायर �कया जा चुका है और एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान� क े अलावा, कोई अन् आप��जनक सामग् सामने नह�ं आ रह� थी, प्रत् क� ज़मानत सह� ढंग से स्वीकार क� गई थी। इ प्रक, प्रत् क े �वद्वा अ�धवक्त ने तक र �दया �क आ�े�पत आदेश म� हस्त�े योग् कोई त्रु नह�ं है।
9. हमने प�कार� क े �वद्वा अ�धवक्ताग क े तक� पर ध्यानपूवर �वचार �कया है और अ�भलेख� का अवलोकन �कया है।
10. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े प्रावध इस प्रक ह�: "[37. अपराध� का सं�ेय और गैर-जमानती होना।-(1) दंड प्र�क सं�हता, 1973 (1974 का 2) म� �कसी बात क े होते हुए भी- (क) इस अ�ध�नयम क े तहत दंडनीय प्रत् अपराध सं�ेय होगा; (ख) [धारा 19 या धारा 24 या धारा 27ए क े तहत अपराध और वा�णिज्य मात् से जुड़े अपराध� क े �लए दंडनीय अपराध क े अ�भयुक्त व्यिक को तब तक ज़मानत पर या अपने बांड पर �रहा नह�ं �कया जाएगा जब तक �क – (i) लोक अ�भयोजक को ऐसी �रहाई क े �लए आवेदन का �वरोध करने का अवसर न �दया जाये, और (ii) जहां लोक अ�भयोजक आवेदन का �वरोध करता है, अदालत संतुष् हो �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क वह इस तरह क े अपराध का दोषी नह�ं है और ज़मानत पर रहते हुए उसक े कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।
2. उप-धारा (1) क े खंड (बी) म� �न�दर्ष ज़मानत देने क� सीमाएँ दंड प्र�क सं�हता, 1973 (1974 का 2) या उस समय लागू �कसी अन् कानून क े तहत ज़मानत देने से संबं�धत सीमाओं क े अ�त�रक् ह�।
11. धारा 37 क� उप-धारा (1) म� सिम्म�ल खंड और उप-धारा (2) म� लगाई गई शत� क े साधारण पठन से स्पष हो जाता है �क एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध करने वाले अ�भयुक्त व्यिक को ज़मानत देते समय न्यायाल क� शिक् पर क ु छ प्र�तब लगाए गए ह�। न क े वल दंड प्र�क सं�हता, 1973 क� धारा 439 क े तहत लगाई गई सीमाओं बिल् धारा 37 क� उप-धारा (1) क े खंड (बी) क े तहत लगाए गए प्र�तबं को भी ध्या म� रखा जाना चा�हए। धारा 37 क� उप-धारा (1) म� लगाई गई शत� यह ह� �क (i) लोक अ�भयोजक को अ�भयुक्त व्यिक द्वार �रहाई क े �लए पेश �कए गए आवेदन का �वरोध करने का अवसर �दया जाना चा�हए और (ii) य�द ऐसे �कसी आवेदन का �वरोध �कया जाता है, तो न्यायाल को अवश्य संतुष होना चा�हए �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क अ�भयुक्त व्यि ऐसे अपराध का दोषी नह�ं है। इसक े अ�त�रक्, न्यायाल को इस बात से भी ज़रूर संतुष होना चा�हए �क ज़मानत पर रहते हुए अ�भयुक्त व्यिक द्वार कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।
12. इस न्यायाल क े कई फ ै सल� म� अ�भव्यिक्"उ�चत आधार" पर चचार हो चुक� है। "कलेक्ट ऑफ कस्टम, नई �दल्ल बनाम अहमदल�वा नो�दरा" म�, इस न्यायाल क े तीन न्यायाधीश क� पीठ द्वार �दए गए एक �नणर् म�, इस प्रक कहा गया है: - "7. ज़मानत देने म� बाधाएं तभी आती ह� जब ज़मानत देने का सवाल गुणागुण क े आधार पर उठता है। लोक अ�भयोजक को अवसर प्रद करने क े अलावा, अन् दो शत� जो वास्त म� वतर्मा अ�भयुक्त-प्रत् क े संबंध म� प्रासं� ह�, वे ह�: अदालत क� संतुिष् �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है और ज़मानत पर रहते हुए उसक े कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है। शत� जुडी हुई ह� वैकिल्प नह�ं। अ�भयुक् क े दोषी न होने क े संबंध म� िजस संतुिष् पर �वचार �कया गया है, वह उ�चत आधार� पर आधा�रत होनी चा�हए। अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर प्र दृष्ट आधार से क ु छ अ�धक है। यह �वश्वा करने क े �लए पयार्प संभा�वत कारण� पर �वचार करता है �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। प्रावध म� �वचार �कए गए उ�चत �वश्वा क े �लए ऐसे तथ्य और प�रिस्थ�तय क े अिस्तत क� आवश्यकत होती है जो संतुिष् को सह� ठहराने क े �लए अपने आप म� पयार्प ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है।” (ज़ोर �दया गया)
13. अ�भव्यिक " उ�चत आधार" " क े रल राज् और अन् बनाम राजेश और अन्" म� चचार क े �लए आई और इस न्यायाल ने �नम्नानुसा �टप्पणी क है: “20. अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर प्र दृष्ट आधार से क ु छ अ�धक है। यह �वश्वा करने क े �लए पयार्प संभा�वत कारण� पर �वचार करता है �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। प्रावध म� �वचार �कए गए उ�चत �वश्वा क े �लए ऐसे तथ्य और प�रिस्थ�तय क े अिस्तत क� आवश्यकत होती है जो संतुिष् को सह� ठहराने क े �लए अपने आप म� पयार्प ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। इस मामले म�, उच् न्यायाल ने धारा 37 क े अंत�नर्�ह उद्देश को पूर� तरह से नजरअंदाज कर �दया है �क दं.प.सं. या तत्समय प्र �कसी अन् �व�ध क े तहत प्रद क� गई सीमाओं क े अलावा, ज़मानत को �व�नय�मत करने क े �लए, एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत ज़मानत क े मामले म� इसका उदार दृिष्टक वास्त म� अनावश्य है।”(ज़ोर �दया गया)
14. सं�ेप म�, धारा 37 क� उप-धारा (1) क े खंड (बी) म� प्रयु अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर �वश्वसनी, स्वीकाय और न्यायाल क े �लए यह मानने का आधार होगा �क अ�भयुक्त व्यिक क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। इस तरह क े �कसी �नष्कष पर पहुंचने क े �लए ऐसे तथ् और प�रिस्थ�तया मौजूद होनी चा�हएं जो अदालत को यह मानने क े �लए �वश्वास �दल सक � �क अ�भयुक्त व्यिक ने ऐसा अपराध नह�ं �कया होगा। उपरोक् संतुिष् को सिम्म�लत करना एक अ�त�रक् �वचार है �क ज़मानत पर रहते हुए अ�भयुक्त व्यिक द्वार कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।
15. हम स्पष कर द� �क अ�ध�नयम क� धारा 37 क े संदभर म� ज़मानत अज़� क� जांच करते समय, न्यायाल को यह �नष्कष दजर करने क� आवश्यकत नह�ं है �क अ�भयुक् व्यिक दोषी नह�ं है। न्यायाल से यह भी उम्मी नह�ं क� जाती है �क वह इस �नष्कष पर पहुंचने क े �लए सबूत� को तोलेगा �क अ�भयुक् ने एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध �कया है या नह�ं। इस स्त पर अदालत से जो पूर� कवायद करने क� उम्मी है, वह उसे ज़मानत पर �रहा करने क े सी�मत उद्देश क े �लए है। इस प्रक, यह �वश्वा करने क े �लए उ�चत आधार क� उपलब्धत पर ध्या क � �द् �कया गया है �क अ�भयुक् उन अपराध� क े �लए दोषी नह�ं है िजन का उस पर आरोप लगाया गया है और ज़मानत पर रहते हुए अ�ध�नयम क े तहत अपराध करने क� संभावना नह�ं है।
16. वतर्मा मामले क े तथ्य पर वापस आते हुए, तोफान �संह (उपरोक्) म� इस न्यायाल क� तीन न्यायाधीश क� पीठ द्वार �नधार्�र कानून क े आलोक म�, उच् न्यायाल क े माननीय एकल न्यायाधी को यह मानने क े �लए दोषी नह�ं ठहराया जा सकता है �क अपीलाथ�-एनसीबी एनडीपीएस अ�ध�नयम धारा 67 क े तहत दजर प्रत् और अन् सह-अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान� पर भरोसा नह�ं कर सकता था िजसम� बहुमत क े �नणर् क े अनुसार, एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर �कए गए इकबा�लया बयान को एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध क े मुकदमे म� अस्वीकाय माना गया है। इस�लए, प्रत् द्वार �हरासत म� रहते हुए इस आशय से क� गई स्वीकारोिक �क उसने नशील� दवाओं का अवैध रू से व्यापा �कया था, को अलग रखना होगा। हालां�क, यह एकमात तथ् नह�ं था िजस पर अपीलाथ�-एनसीबी ने प्रत् द्वार दायर ज़मानत अज़� का �वरोध करने क े �लए भरोसा �कया था। अपीलाथ�-एनसीबी ने �वशेष रू से कहा था �क प्रत् द्वार �कए गए खुलासे ने एनसीबी ट�म को सह-अ�भयुक् प्रम जयपु�रया क े गोदाम म� पहुंचने और छापेमार� करने क े �लए प्रे� �कया था िजसक े प�रणामस्वर गो�लय�, इंजेक्श और �सरप क े रू म� बड़ी मात्रा म �व�भन् मनोदै�हक पदाथ� को बरामद �कया गया। अपीलाथ� -एनसीबी क े अ�धवक्ता ने यह भी बताया �क यह प्रत् था िजसने सह-अ�भयुक्त प्र जयपु�रया क े पते और स्था का खुलासा �कया था िजसे बाद म� �गरफ्ता �कया गया था और प्रत् स�हत सभी सह-अ�भयुक्त क े मोबाइल फोन क े सीडीआर �ववरण से पता चलता है �क वे एक-दूसरे क े सं प क र म� थे।
17. इसक े अ�त�रक्त एनडीपीए अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर प्रत् और अन् सह-अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान िजससे बाद म� वे मुकर गए थे को खा�रज कर देने पर भी, अपीलाथ�-एनसीबी द्वार अ�भलेख पर लाए गए अन् प�रिस्थ�तजन सा�य को उच् न्यायाल को प्रत् क े प� म� अपने �ववेक का प्रय करने और यह �नष्कष �नकालने से रोकना चा�हए था �क यह न्यायसंगत ठहराने क े उ�चत आधार थे �क वह एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत इस तरह क े अपराध का दोषी नह�ं था। हम प्रत् क े �वद्वा अ�धवक्त द्वार �कए गए �नवेदन और आ�े�पत आदेश म� क� गई �टप्पण से सहमत नह�ं ह� �क चूं�क प्रत् क े कब्ज से क ु छ भी नह�ं �मला इसी�लए वह उस अपराध का दोषी नह�ं है िजसक े �लए उस पर आरोप लगाया गया है। इस स्त पर ऐसी धारणा समय पूवर होगी।
18. हमार� राय म� अ�ध�नयम क� धारा 37 क े तहत उपलब् ज़मानत क े सी�मत मानदंड वतर्मा मामले क े तथ्य म� पुरे नह� �कये गए है। इस स्त पर, यह �नष्कष �नकालना उ�चत नह�ं है �क प्रत् ने सफलतापूवर् प्रद�श �कया है �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क वह अपने �खलाफ आरो�पत अपराध का दोषी नह�ं है, क्य�� उसक� ज़मानत स्वीकार क� ग है। उसक� �हरासत क� अव�ध या यह तथ् �क आरोप-पत दायर कर �दया गया है और मुकदमा शुर हो गया है, अपने आप म� �वचार नह�ं है िजसे एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े तहत प्रत् को राहत देने क े �लए प्रे आधार क े रू म� माना जा सक े ।
19. पूव�क् चचार क े प�रणामस्वर, वतर्मा अपील� को मंजूर �कया जाता है और प्रत् को �गरफ्तार क े बाद ज़मानत पर �रहा करने का आ�े�पत आदेश रद् और अपास् �कया जाता है। प्रत् क े ज़मानत बांड रद् �कए जाते ह� और उसे तत्का �हरासत म� लेने का �नद�श �दया जाता है।........................सीजेआई. (एन.वी रमना)........................न्य. (कृ ष्ण मुरार)........................न्य. (�हमा कोहल�) नई �दल्ल, जुलाई 19, 2022 अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ के सी�मत प्रयोग हेतु �कया गया है ता�क वो भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया | समस्त कायार्लयी एव व्यावहा�रक प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरूप ह� अ�भप्रमा�णत माना जाएगा और कायार्न्वयन त जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी|