Narcotics Control Bureau v. Mohit Agrawal

Supreme Court of India · 19 Jul 2022
N. V. Ramana; Krishna Murari; Hima Kohli
Criminal Appeal Nos. 1001-1002 of 2022
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the High Court's bail order in an NDPS case, emphasizing strict adherence to Section 37 conditions and rejecting reliance on retracted confessions for bail determination.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च्च न्यायाल
दां�डक अपील�य अ�धका�रता
आपरा�धक अपील संख्य- 1001-1002/2022
[�वशेष अनुम�त अपील (दां�डक) संख्य-6128-29/2021 से उत्पन
या�चका]
नारको�टक्स कण्ट्रोल ब् ..अपीलाथ�
बनाम
मो�हत अग्रवाल ...प्रत्
�नणर्
JUDGMENT

1. अनुम�त प्रदा�| न्य. �हमा कोहल�

2. अपीलाथ� -एनसीबी मामला संख्य एससी/1334/2020 म� प्रत्-अ�भयुक् को �गरफ्तार क े बाद ज़मानत देने क े �दल्ल उच् न्यायाल क े �नणर् और आदेश �दनांक 16.03.2021 से व्य�थ है िजसम� प्रत् स्वापक औष�ध और मनः प्रभावी पदाथर् अ�ध�,1985 क� धारा 8/22 और 29 क े तहत अपराध क े �लए मुकदमे का सामना कर रहा है।

3. अ�भयोजन द्वार स्था�प मामला यह है �क स्वापक �नयंत्रकब् क े अ�धका�रय� द्वार �दनांक 09.01.2020 को प्रा गुप् सूचना क े आधार पर, �क एक पासर् आगरा क े गौरव क ु मार अग्रव नाम क े एक व्यिक द्वार बुक �कया गया था, िजसे लु�धयाना, पंजाब म� एक मनोज क ु मार को �दया जाना था और एक क ू �रयर क ं पनी क े गोदाम म� रखा गया था, जो �क गांव समालखा, कापसहेरा, नई �दल्ल म� िस्थत थ, िजसम� एनआरएक्स टेबलेट होने का संदेह था। गो�लयां नशीला पदाथर होने क े कारण एनसीबी क� ट�म उक् गोदाम म� पहुंची और तलाशी क� कायर्वाह� क� क ू �रयर क ं पनी क े स्टा सदस्य म� से दो स्वतं गवाह� क� उपिस्थ� म� सं�दग् पासर् क� पहचान क� गई और उसे खोला गया। उक् पासर् को खोला गया और 20 �कलो वजन क े 50,000 ट्रामाड टैबलेट बरामद �कए गए। चूं�क सं�दग् पासर् म� मौजूद गो�लयां गलत घो�षत क� गई थीं और �बना �कसी वैध �बल क े थीं, एनसीबी क े अ�धका�रय� द्वार जब्त क� कायर्वाह शुर क� गई ।

4. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव द्वार �दए गए स्वैिच् बयान म�, उन्ह�न कहा �क उन्ह�न एक क ू �रयर क ं पनी क े माध्य से पासर् बुक �कया था, िजसे पंजाब क े लु�धयाना �नवासी मनोज क ु मार तक पहुंचाया जाना था और उसने प्रत् से तलाशी क� कायर्वाह क े दौरान बरामद ट्रामाड टैबलेट �बना �कसी �बल या नुस्ख क े खर�द� थी। बिल्, पासर् पर यह उल्ले �कया गया था �क इसम� "सिजर्क आइटम" ह� । अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव ने आगे कहा �क प्रत् ने उपरोक् दवाएं जयपुर �नवासी प्रम जयपु�रया उफ र द�वंदर खंडेलवाल से खर�द� थीं और प्रम जयपु�रया का दामाद आगरा म� उसका व्यवसा देखता था और उसका एक गोदाम था जहाँ ड्र का भंडारण �कया जाता था।

5. अ�भयोजन प� ने आगे कहा �क गौरव क ु मार अग्रव ने खुलासा �कया था �क वह जानता था �क प्रत् का �नवास और दुकान कहाँ िस्थ है और वह उनक� पहचान कर सकता है। तद्नुसा, उक् अ�भयुक्त व्यिक छापेमार� दल क े साथ प्रत् क े प�रसर म� गया। प्रत् द्वार �कए गए खुलासे पर छापेमार� ट�म प्रम जयपु�रया क े गोदाम म� गई और तलाशी ल� िजसक े दौरान एनडीपीएस अ�ध�नयम क े दायरे म� आने वाल� दवाओं का एक जखीरा बरामद �कया गया। उक् दवाओं म� ट्रामाड, ज़ोल�पडेम और अल्प्राज टैबलेट / क ै प्सू स�हत �व�भन् न�सले पदाथ� क� 6,64,940 गो�लयां शा�मल ह�, िजनका वजन लगभग

328.82 �कलोग्र है, 1400 पािज़ंक इंजेक्श 1.[4] ल�टर और 80 कोरेक् �सरप क� बोतल� 8 ल�टर वजन क� ह�। एनसीबी अ�धका�रय� द्वार लु�धयाना म� अ�भयुक्त मनोज क ु मार क े प�रसर� म� क� गई तलाशी क े दौरान 990 ग्र वजन क� 9,900 गो�लयां बरामद क� ग�।

6. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अपने बयान म�, प्रत् ने खुलासा �कया �क वह प्रोम जयपु�रया से उक् टैबलेट और क ै प्सू को अवैध रू से बेच और खर�द रहा था। प्रत् को 11 जनवर�, 2020 को �हरासत म� ले �लया गया। उसने माननीय �वशेष न्यायाधी, एनडीपीएस क े सम� दो ज़मानत अज़� दायर क�। उक् दोन� अज़� का अपीलाथ� -एनसीबी द्वार पुरजोर �वरोध �कया गया और �वशेष न्यायाधी, एनडीपीएस द्वार खा�रज कर �दया गया। 21 जुलाई, 2020 क े आदेश द्वार अपनी दूसर� ज़मानत अज़� खा�रज �कये जाने से व्य�थत होक, प्रत् ने ज़मानत हेतु दंड प्र�क सं�हता, 1973 क� धारा 439 क े तहत एक या�चका दायर क� िजसे उच् न्यायाल क े माननीय एकल न्यायाधी द्वार पा�रत आ�े�पत आदेश क े ज़�रये मंजूर �कया गया है।

7. अपीलाथ� -एनसीबी क� ओर से बहस करते हुए, अ�त�रक् सॉ�ल�सटर जनरल श् जयंत क े. सूद ने �नवेदन �कया �क प्रत् को ज़मानत देने का आदेश को पा�रत करते हुए, उच् न्यायाल ने यह �टप्पणी करन म� गलती क� है �क एनसीबी अ�धका�रय� द्वार उनक े आवास से कोई अ�भयोगात्म सामग् बरामद नह�ं हुई। उन्ह�न कहा �क उच् न्यायाल ने इस तथ् क� पूर� तरह से अनदेखी क� है �क यह प्रत् द्वार स्वय �कए गए उस खुलासे क े आधार पर था �क सह-अ�भयुक्त प्रम जयपु�रया क े गोदाम से भार� मात् म� नशील� दवाएं और इंजेक्श जब् �कए गए थे, िजन्ह बाद म� �वभाग ने �गरफ्ता कर �लया था; यह �क उच् न्यायाल ने एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े �नयम� और शत� को लागू न करक े गंभीर त्रु क� है; यह �क प्रत् द्वार �कया गया अपराध नशीले पदाथ� क� वा�णिज्य मात् क� बरामदगी क� श्रे म� आता है और एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 म� लगाए गए प्र�तब क े प�रप्रे म�, प्रत् क� ज़मानत स्वीका नह�ं क� जानी चा�हए थी और यह �क यह प्र�तबं� पदाथ� क े अप्रत/सचेत कब्ज का मामला है क्यूं�क प्रत एक संग�ठत �गरोह म� स�क् भागीदार था जो ड्र क� तस्कर म� शा�मल था। अंत म�, यह कहा गया �क प्रत् क े �खलाफ पयार्प प�रिस्थ�तजन सा�य उपलब् ह� जो उसे ज़मानत �दए जाने से वं�चत कर देगा।

8. दूसर� ओर, प्रत्यथ� के �वद एडवोक े ट-ऑन-�रकॉडर श् पी.क े. जैन ने वतर्मा अपील का पुरजोर �वरोध करते हुए कहा �क एक साल और तीन मह�ने �हरासत म� रहने क े बाद उच् न्यायाल ने सह� ढंग से प्रत् क� ज़मानत स्वीका क� है। उन्ह�न कहा �क अपीलाथ�-एनसीबी और प्रत् क े अ�धवक्त को सुनने क े बाद आ�े�पत आदेश पा�रत �कया गया था और प्रत् ने उस पर लगाए गए ज़मानत क े �कसी भी �नयम और शत� का उल्लंघ नह�ं �कया है। गुणागुण क े आधार पर, यह आग् �कया गया था �क क�थत घटना म�, मादक दवाओं क� खेप प्रत् द्वार या उसक े �लए बुक नह�ं क� गई थी। प्रत् क े पास से क ु छ भी बरामद नह�ं हुआ और उसक े आवास और दुकान पर क� गई तलाशी म� क ु छ भी नह�ं �मला। �वद्वा अ�धवक्त ने प्रत् को आगरा म� दवा बेचने वाला एक छोटा दुकानदार बताते हुए कहा �क उसका अन् सह-आरो�पय� से कोई संबंध नह�ं था और उसका नाम एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत सह-अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव क े बयान क े दौरान सामने आया था, जो आं�शक रू से आगरा और �दल्ल म� दजर �कया गया था। हालां�क गौरव क ु मार अग्रव एनसीबी ट�म क े अ�धका�रय� को प्रत् क� दुकान पर ले गए थे, िजसक� �व�धवत तलाशी ल� गई, ले�कन वहां से क ु छ भी आप��जनक नह�ं �मला। उपरोक् क े अलावा, सह-अ�भयुक्त गौरव क ु मार अग्रव और प्रत् दोन� पहले अवसर पर एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अपने बयान� से मुकर गए थे। और इस न्यायाल द्वार तोफान �संह बनाम त�मलनाडु राज् म� �नधार्�रत �कए ग कानून क े मद्देनज, एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर �कया गया कोई भी इकबा�लया बयान, उक् अ�ध�नयम क े तहत अपराध क े मुकदमे म� अस्वीकाय है। यह आग् करते हुए �क उच् न्यायाल ने उक् न्या�य �सद्धां का पालन �कया है और इस तथ् को ध्या म� रखते हुए �क आरोप-पत पहले ह� दायर �कया जा चुका है और एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान� क े अलावा, कोई अन् आप��जनक सामग् सामने नह�ं आ रह� थी, प्रत् क� ज़मानत सह� ढंग से स्वीकार क� गई थी। इ प्रक, प्रत् क े �वद्वा अ�धवक्त ने तक र �दया �क आ�े�पत आदेश म� हस्त�े योग् कोई त्रु नह�ं है।

9. हमने प�कार� क े �वद्वा अ�धवक्ताग क े तक� पर ध्यानपूवर �वचार �कया है और अ�भलेख� का अवलोकन �कया है।

10. एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े प्रावध इस प्रक ह�: "[37. अपराध� का सं�ेय और गैर-जमानती होना।-(1) दंड प्र�क सं�हता, 1973 (1974 का 2) म� �कसी बात क े होते हुए भी- (क) इस अ�ध�नयम क े तहत दंडनीय प्रत् अपराध सं�ेय होगा; (ख) [धारा 19 या धारा 24 या धारा 27ए क े तहत अपराध और वा�णिज्य मात् से जुड़े अपराध� क े �लए दंडनीय अपराध क े अ�भयुक्त व्यिक को तब तक ज़मानत पर या अपने बांड पर �रहा नह�ं �कया जाएगा जब तक �क – (i) लोक अ�भयोजक को ऐसी �रहाई क े �लए आवेदन का �वरोध करने का अवसर न �दया जाये, और (ii) जहां लोक अ�भयोजक आवेदन का �वरोध करता है, अदालत संतुष् हो �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क वह इस तरह क े अपराध का दोषी नह�ं है और ज़मानत पर रहते हुए उसक े कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।

2. उप-धारा (1) क े खंड (बी) म� �न�दर्ष ज़मानत देने क� सीमाएँ दंड प्र�क सं�हता, 1973 (1974 का 2) या उस समय लागू �कसी अन् कानून क े तहत ज़मानत देने से संबं�धत सीमाओं क े अ�त�रक् ह�।

11. धारा 37 क� उप-धारा (1) म� सिम्म�ल खंड और उप-धारा (2) म� लगाई गई शत� क े साधारण पठन से स्पष हो जाता है �क एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध करने वाले अ�भयुक्त व्यिक को ज़मानत देते समय न्यायाल क� शिक् पर क ु छ प्र�तब लगाए गए ह�। न क े वल दंड प्र�क सं�हता, 1973 क� धारा 439 क े तहत लगाई गई सीमाओं बिल् धारा 37 क� उप-धारा (1) क े खंड (बी) क े तहत लगाए गए प्र�तबं को भी ध्या म� रखा जाना चा�हए। धारा 37 क� उप-धारा (1) म� लगाई गई शत� यह ह� �क (i) लोक अ�भयोजक को अ�भयुक्त व्यिक द्वार �रहाई क े �लए पेश �कए गए आवेदन का �वरोध करने का अवसर �दया जाना चा�हए और (ii) य�द ऐसे �कसी आवेदन का �वरोध �कया जाता है, तो न्यायाल को अवश्य संतुष होना चा�हए �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क अ�भयुक्त व्यि ऐसे अपराध का दोषी नह�ं है। इसक े अ�त�रक्, न्यायाल को इस बात से भी ज़रूर संतुष होना चा�हए �क ज़मानत पर रहते हुए अ�भयुक्त व्यिक द्वार कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।

12. इस न्यायाल क े कई फ ै सल� म� अ�भव्यिक्"उ�चत आधार" पर चचार हो चुक� है। "कलेक्ट ऑफ कस्टम, नई �दल्ल बनाम अहमदल�वा नो�दरा" म�, इस न्यायाल क े तीन न्यायाधीश क� पीठ द्वार �दए गए एक �नणर् म�, इस प्रक कहा गया है: - "7. ज़मानत देने म� बाधाएं तभी आती ह� जब ज़मानत देने का सवाल गुणागुण क े आधार पर उठता है। लोक अ�भयोजक को अवसर प्रद करने क े अलावा, अन् दो शत� जो वास्त म� वतर्मा अ�भयुक्त-प्रत् क े संबंध म� प्रासं� ह�, वे ह�: अदालत क� संतुिष् �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है और ज़मानत पर रहते हुए उसक े कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है। शत� जुडी हुई ह� वैकिल्प नह�ं। अ�भयुक् क े दोषी न होने क े संबंध म� िजस संतुिष् पर �वचार �कया गया है, वह उ�चत आधार� पर आधा�रत होनी चा�हए। अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर प्र दृष्ट आधार से क ु छ अ�धक है। यह �वश्वा करने क े �लए पयार्प संभा�वत कारण� पर �वचार करता है �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। प्रावध म� �वचार �कए गए उ�चत �वश्वा क े �लए ऐसे तथ्य और प�रिस्थ�तय क े अिस्तत क� आवश्यकत होती है जो संतुिष् को सह� ठहराने क े �लए अपने आप म� पयार्प ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है।” (ज़ोर �दया गया)

13. अ�भव्यिक " उ�चत आधार" " क े रल राज् और अन् बनाम राजेश और अन्" म� चचार क े �लए आई और इस न्यायाल ने �नम्नानुसा �टप्पणी क है: “20. अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर प्र दृष्ट आधार से क ु छ अ�धक है। यह �वश्वा करने क े �लए पयार्प संभा�वत कारण� पर �वचार करता है �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। प्रावध म� �वचार �कए गए उ�चत �वश्वा क े �लए ऐसे तथ्य और प�रिस्थ�तय क े अिस्तत क� आवश्यकत होती है जो संतुिष् को सह� ठहराने क े �लए अपने आप म� पयार्प ह� �क अ�भयुक्त क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। इस मामले म�, उच् न्यायाल ने धारा 37 क े अंत�नर्�ह उद्देश को पूर� तरह से नजरअंदाज कर �दया है �क दं.प.सं. या तत्समय प्र �कसी अन् �व�ध क े तहत प्रद क� गई सीमाओं क े अलावा, ज़मानत को �व�नय�मत करने क े �लए, एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत ज़मानत क े मामले म� इसका उदार दृिष्टक वास्त म� अनावश्य है।”(ज़ोर �दया गया)

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14. सं�ेप म�, धारा 37 क� उप-धारा (1) क े खंड (बी) म� प्रयु अ�भव्यिक "उ�चत आधार" का अथर �वश्वसनी, स्वीकाय और न्यायाल क े �लए यह मानने का आधार होगा �क अ�भयुक्त व्यिक क�थत अपराध का दोषी नह�ं है। इस तरह क े �कसी �नष्कष पर पहुंचने क े �लए ऐसे तथ् और प�रिस्थ�तया मौजूद होनी चा�हएं जो अदालत को यह मानने क े �लए �वश्वास �दल सक � �क अ�भयुक्त व्यिक ने ऐसा अपराध नह�ं �कया होगा। उपरोक् संतुिष् को सिम्म�लत करना एक अ�त�रक् �वचार है �क ज़मानत पर रहते हुए अ�भयुक्त व्यिक द्वार कोई अपराध करने क� संभावना नह�ं है।

15. हम स्पष कर द� �क अ�ध�नयम क� धारा 37 क े संदभर म� ज़मानत अज़� क� जांच करते समय, न्यायाल को यह �नष्कष दजर करने क� आवश्यकत नह�ं है �क अ�भयुक् व्यिक दोषी नह�ं है। न्यायाल से यह भी उम्मी नह�ं क� जाती है �क वह इस �नष्कष पर पहुंचने क े �लए सबूत� को तोलेगा �क अ�भयुक् ने एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध �कया है या नह�ं। इस स्त पर अदालत से जो पूर� कवायद करने क� उम्मी है, वह उसे ज़मानत पर �रहा करने क े सी�मत उद्देश क े �लए है। इस प्रक, यह �वश्वा करने क े �लए उ�चत आधार क� उपलब्धत पर ध्या क � �द् �कया गया है �क अ�भयुक् उन अपराध� क े �लए दोषी नह�ं है िजन का उस पर आरोप लगाया गया है और ज़मानत पर रहते हुए अ�ध�नयम क े तहत अपराध करने क� संभावना नह�ं है।

16. वतर्मा मामले क े तथ्य पर वापस आते हुए, तोफान �संह (उपरोक्) म� इस न्यायाल क� तीन न्यायाधीश क� पीठ द्वार �नधार्�र कानून क े आलोक म�, उच् न्यायाल क े माननीय एकल न्यायाधी को यह मानने क े �लए दोषी नह�ं ठहराया जा सकता है �क अपीलाथ�-एनसीबी एनडीपीएस अ�ध�नयम धारा 67 क े तहत दजर प्रत् और अन् सह-अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान� पर भरोसा नह�ं कर सकता था िजसम� बहुमत क े �नणर् क े अनुसार, एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर �कए गए इकबा�लया बयान को एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत अपराध क े मुकदमे म� अस्वीकाय माना गया है। इस�लए, प्रत् द्वार �हरासत म� रहते हुए इस आशय से क� गई स्वीकारोिक �क उसने नशील� दवाओं का अवैध रू से व्यापा �कया था, को अलग रखना होगा। हालां�क, यह एकमात तथ् नह�ं था िजस पर अपीलाथ�-एनसीबी ने प्रत् द्वार दायर ज़मानत अज़� का �वरोध करने क े �लए भरोसा �कया था। अपीलाथ�-एनसीबी ने �वशेष रू से कहा था �क प्रत् द्वार �कए गए खुलासे ने एनसीबी ट�म को सह-अ�भयुक् प्रम जयपु�रया क े गोदाम म� पहुंचने और छापेमार� करने क े �लए प्रे� �कया था िजसक े प�रणामस्वर गो�लय�, इंजेक्श और �सरप क े रू म� बड़ी मात्रा म �व�भन् मनोदै�हक पदाथ� को बरामद �कया गया। अपीलाथ� -एनसीबी क े अ�धवक्ता ने यह भी बताया �क यह प्रत् था िजसने सह-अ�भयुक्त प्र जयपु�रया क े पते और स्था का खुलासा �कया था िजसे बाद म� �गरफ्ता �कया गया था और प्रत् स�हत सभी सह-अ�भयुक्त क े मोबाइल फोन क े सीडीआर �ववरण से पता चलता है �क वे एक-दूसरे क े सं प क र म� थे।

17. इसक े अ�त�रक्त एनडीपीए अ�ध�नयम क� धारा 67 क े तहत दजर प्रत् और अन् सह-अ�भयुक्त क े इकबा�लया बयान िजससे बाद म� वे मुकर गए थे को खा�रज कर देने पर भी, अपीलाथ�-एनसीबी द्वार अ�भलेख पर लाए गए अन् प�रिस्थ�तजन सा�य को उच् न्यायाल को प्रत् क े प� म� अपने �ववेक का प्रय करने और यह �नष्कष �नकालने से रोकना चा�हए था �क यह न्यायसंगत ठहराने क े उ�चत आधार थे �क वह एनडीपीएस अ�ध�नयम क े तहत इस तरह क े अपराध का दोषी नह�ं था। हम प्रत् क े �वद्वा अ�धवक्त द्वार �कए गए �नवेदन और आ�े�पत आदेश म� क� गई �टप्पण से सहमत नह�ं ह� �क चूं�क प्रत् क े कब्ज से क ु छ भी नह�ं �मला इसी�लए वह उस अपराध का दोषी नह�ं है िजसक े �लए उस पर आरोप लगाया गया है। इस स्त पर ऐसी धारणा समय पूवर होगी।

18. हमार� राय म� अ�ध�नयम क� धारा 37 क े तहत उपलब् ज़मानत क े सी�मत मानदंड वतर्मा मामले क े तथ्य म� पुरे नह� �कये गए है। इस स्त पर, यह �नष्कष �नकालना उ�चत नह�ं है �क प्रत् ने सफलतापूवर् प्रद�श �कया है �क यह मानने क े �लए उ�चत आधार ह� �क वह अपने �खलाफ आरो�पत अपराध का दोषी नह�ं है, क्य�� उसक� ज़मानत स्वीकार क� ग है। उसक� �हरासत क� अव�ध या यह तथ् �क आरोप-पत दायर कर �दया गया है और मुकदमा शुर हो गया है, अपने आप म� �वचार नह�ं है िजसे एनडीपीएस अ�ध�नयम क� धारा 37 क े तहत प्रत् को राहत देने क े �लए प्रे आधार क े रू म� माना जा सक े ।

19. पूव�क् चचार क े प�रणामस्वर, वतर्मा अपील� को मंजूर �कया जाता है और प्रत् को �गरफ्तार क े बाद ज़मानत पर �रहा करने का आ�े�पत आदेश रद् और अपास् �कया जाता है। प्रत् क े ज़मानत बांड रद् �कए जाते ह� और उसे तत्का �हरासत म� लेने का �नद�श �दया जाता है।........................सीजेआई. (एन.वी रमना)........................न्य. (कृ ष्ण मुरार)........................न्य. (�हमा कोहल�) नई �दल्ल, जुलाई 19, 2022 अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर्य का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ के सी�मत प्रयोग हेतु �कया गया है ता�क वो भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नह�ं �कया | समस्त कायार्लयी एव व्यावहा�रक प्रयोजन� हेतु �नणर्य का अंग्रेज़ी स्वरूप ह� अ�भप्रमा�णत माना जाएगा और कायार्न्वयन त जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी|