Full Text
भा त का उच्चतम न्यायालय
आप ाधि क अपीलीय क्षेत्राधि का
आप ाधि क अपील संख्या 1050 /2022
(एस.एल.पी. (आप ाधि क) संख्या 2403/2017 से उत्पन्न)
शि.व क
ु मा .मा ..........अपीलकता (गण)
बनाम
ाजस्थान ाज्य ............प्रधितवादी (गण)
निनणय
बी. आ . गवई, जे.
JUDGMENT
1. अनुमधित दी गई।
2. यह अपील ाजस्थान उच्च न्यायालय, जयपु क े निवद्वत एकल न्याया ी. द्वा ा निदनांक 06.01.2017 को निदए गए निनणय औ आदे. को चुनौती देती है,जिजसमें अपीलकता/आ ोपी द्वा ा दाय की गई उस अपील को खारि ज क निदया गया था,जिजसेअपीलाथI द्वा ा निवद्वत निव.ेष न्याया ी., भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम संख्या 1, जयपु (जिजसे इसमें इसक े बाद "निव.ेष न्याया ी."कहा गया है) द्वा ा निदनांक 24.10.2013 को पारि त फ ै सले औ आदे. को चुनौती देते हुए दाय निकया गया था,जिजसमें अपीलकता को भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम, 1988 ('पीसी अधि निनयम') 2022 INSC 765 की ा ा13 (1) (डी) (ii) सपनिUत ा ा 15 औ भा तीय दंड संनिहता की ा ा 477 ए क े तहत दंडनीय अप ा ों क े लिलए दोषी Uह ाया गया था औ उसे दोनों अप ा ों क े लिलए एक वष क े कUो का ावास औ 5000-5000 रुपये जुमाने की सजा सुनाई गई थी।
3. निव.ेष न्याया ी. ने, निदनांक 03.06.2004 क े आदे. द्वा ा, अपीलाथI क े निवरुद्ध निनम्नलिललिखत आ ोप निव धिचत निकएः "सवप्रथम,वष 1994 में 25.04.1994 को औ लगभग उसी समय, लोक सेवक क े रूप में काम क ते हुए, आपने सह- अशिभयुक्त भगवान सहाय क े साथ षड्यंत्र चा औ उस आप ाधि क षड्यंत्र को आगे बढ़ाने क े लिलए, आपने प्राथनिमक निवद्यालय, मानकोर्ट में कम ों औ ब ामदे क े निनमाण क े संबं में 91,500/- रुपये की स्वीक ृ त ाशि. में से 15,000/- रुपये की अनिcम ाशि. प्राप्त की औ भगवान सहाय ने तीन मस्र्ट ोल में 14508 रुपये का काय औ 18994 रुपये की निनमाण सामcी क े वाउच प्रस्तुत निकए थे औ 33502 रुपये व्यय होना बताया था जिजसे मापन पुस्तक संख्या 51 क े पृष्ठ संख्या 71 औ 72 में स्वीका निकया गया था औ इसे शि.व क ु मा.मा द्वा ा 34580.13 रुपये क े रूप में उल्लेलिखत निकया गया था, लेनिकन बाद में,शि.कायत प,उक्त ाशि. 34580 रुपये को सं.ोधि त क 25911 रुपये क निदया गया। इसी त ह, उपयुक्त आप ाधि क षड्यंत्र को आगे बढ़ाने क े लिलए, आपने प्राथनिमक निवद्यालय सु जनपु में कम ों औ ब ामदे क े निनमाण क े लिलए 80,000/- रुपये की स्वीक ृ त ाशि. में से 28,000/- रुपये का अनिcम प्राप्त निकया औ श्री भगवान सहाय ने निनमाण काय का खच 61,843.40 रुपये, जिजसमें 7 मस्र्ट ोल का खच 36,552/- रुपये औ निनमाण क े वाउच क े लिलए 25,291.40 रुपये की ाशि..ानिमल थी। उक्त ाशि. श्री शि.व क ु मा.मा द्वा ा मापन पुस्तिस्तका सं. 51 क े पृष्ठ संख्या 71-72 प 68,776 रुपये क े रूप में दज की गई थी, लेनिकन शि.कायत प, 68,776/- रुपये की कशिथत ाशि. कार्ट क 45,582/- रुपये क दी गई थी।जांच में यह पाया गया निक सु जनपु में क े वल 28,264.42 रुपये का काय निकया गया था औ मानकोर्ट में 25,911 रुपये का काय निकया गया था औ इस प्रका, आपने श्रम औ निनमाण का अधितरि क्त व्यय निदखाया है जो मनकोर्ट में 7,698/- रुपये अधि क था औ सु जनपु में 16,644/- रुपये अधि क था, आपको क ु ल निमलाक 22,353/- रुपये का अधितरि क्त भुगतान निकया गया औ ाज्य स का को गलत त ीक े से नुकसान पहुंचाक आपने गलत त ीक े से लाभ प्राप्त निकया। आपने रि कॉडk में फ े बदल क झूUा रि कॉड भी तैया निकया। लोक सेवक क े रूप में आपका उक्त काय एक दंडनीय अप ा है। इस प्रका, आपने भा तीय दंड संनिहता की ा ा 417, 477A सपनिUत भा तीय दंड संनिहता की ा ा 120B औ भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम, 1988 की ा ा 13 (1) (डी) (2) क े तहत दंडनीय अप ा निकया है, जिजसक े लिलए मैंने संज्ञान लिलया है।"
4. ऐसा प्रतीत होता है निक प्राधि कारि यों को प्राथनिमक निवद्यालय, मानकोर्ट औ सु जनपु में कम ों औ ब ामदों क े निनमाण में कदाचा क े बा े में शि.कायत की गई थी। अशिभयोजन पक्ष यह थानिक मानकोर्ट क े संबं में शि.कायत निकए जाने क े बाद अपीलाथI द्वा ा मापन पुस्तिस्तका में यह ाशि. 34,580 रुपये से घर्टाक 25,911 रुपये क दी गई थी। जहां तक सु जनपु में निनमाण काय का संबं है, शि.कायत निकए जाने क े बाद यह ाशि. 68,776 रुपये से घर्टक 45,582 रुपये क दी गई।
5. शि.कायत निमलने क े बाद श्री महे. प्रसाद माथु को जांच अधि का ी निनयुक्त निकया गया। जांच पू ी होने क े बाद उन्होंने एक जांच रि पोर्ट पे. की। जांच रि पोर्ट क े आ ा प अप ा दज निकया गया। आ ोप पत्र दालिखल निकया गया। अपीलकता ने खुद को निनदtष बताया औ अन्वीक्षा चाही।निवद्वान निव.ेष न्याया ी. ने, निवचा ण की समानिप्त प, अपीलाथI को पूवtक्त रूप में दोषी Uह ाया। अपीलकता ने उच्च न्यायालय में एक अपील दाय की औ उच्च न्यायालय ने निवद्वत निव.ेष न्याया ी. क े आदे. को सही Uह ाया। इसलिलए वतमान अपील दाय की गई है।
6. अपीलाथI की ओ से उपस्तिस्थत निवद्वान अधि वक्ता श्री रि ते. अcवाल का कहना है निक उच्च न्यायालय औ निवद्वान निवचा ण न्यायालय दोनों ने ही पी.डब्लू. 8 श्री महे. प्रसाद माथु औ पी.डब्लू.14 जय भगवान, जांच अधि का ी क े साक्ष्य को उधिचत महत्व न देक गलती की है।
7. निवद्वत अधि वक्ता ने आगे कहा निक यह सानिबत क ने क े लिलए कोई तथ्य नहीं है निक अपीलाथI ने या तो कोई मांग की थी या एक लोक सेवक क े रूप में अपनी स्तिस्थधित का दुरुपयोग क क े, अपने लिलए या निकसी अन्य व्यनिक्त क े लिलए कोई मूल्यवान वस्तु या आर्थिथक लाभ प्राप्त निकया था। यह कहा गया निक अपीलाथI ने अपने लिलए या निकसी अन्य व्यनिक्त क े लिलए कोई मूल्यवान वस्तु या आर्थिथक लाभ प्राप्त क ने का प्रयास निकया, इसको सानिबत क ने वाले तथ्यों क े अभाव में भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम की ा ा 13(1) (घ) (ii) सपनिUत ा ा 15 क े तहत दोषजिसधिद्ध सं ा णीय नहीं थी। वह आगे कहता है निक भा तीय दंड संनिहता की ा ा 477 ए क े तहत दंडनीय अप ा क े लिलए, अशिभयोजन पक्ष से यह अपेधिक्षत है निक वह यह सानिबत क े निक कशिथत काय ोखा ड़ी क े इ ादे से जानबूझक निकया गया था। यह उनका निनवेदन है निक ऐसा कोई सबूत रि कॉड में नहीं आया है।
8. अतः निवद्वत अधि वक्ता का कहना है निक दोष जिसधिद्ध क े समवतI आदे. द्द निकए जाने योग्य है औ अशिभयुक्त ब ी निकए जाने का हकदा है।
9. ाजस्थान ाज्य क े निवद्वत अप महाधि वक्ता डॉ. मनीष सिंसघवी ने अपील का पु जो निव ो निकया है। उनका कहना है निक तथ्य क े समवतI निनष्कषk में हस्तक्षेप की गुंजाइ. बहुत सीनिमत है। उनका कहना है निक निवद्वत निवचा ण न्यायालय औ उच्च न्यायालय ने, सबूतों क े सही मूल्यांकन प, यह पाया है निक अपीलाथI ने बेईमानी क े इ ादे से रि कॉड में हे फ े निकया था। उन्होने कहा निक उच्च अधि कारि यों को शि.कायत निकए जाने क े बाद ही, अपीलकता ने खुद को बचाने क े लिलए रि कॉड में हे फ े निकया था औ इस प्रका, यह मामला स्पष्ट रूप से भा तीय दंड संनिहता की ा ा 477 ए क े तहत आता है.
10. इसमें कोई संदेह नहीं है निक तथ्य क े समवतI निनष्कषk में हस्तक्षेप की गुंजाइ. बहुत सीनिमत है। जब तक निनष्कष निवक ृ त या असंभव नहीं पाए जाते, न्यायालय तथ्यों क े समवतI निनष्कषk में हस्तक्षेप नहीं क ेगा। हालांनिक, यह सुस्थानिपत है निक जब निवचा ण न्यायालय द्वा ा दज निकए गए निनष्कष साक्ष्य की उपेक्षा क क े दज निकए जाते हैं या साक्ष्य का मूल्यांकन स्पष्ट रूप से गलत है, तो इसमे न्यायालय को हस्तक्षेप क ना होगा।
11. भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम की ा ा 13 (1) (घ) (ii) सपनिUत ा ा 15 क े तहत दंडनीय अप ा क े लिलए यह सानिबत क ना आवश्यक है निक निकसी लोक सेवक ने अपने लिलए या निकसी अन्य व्यनिक्त क े लिलए कोई मूल्यवान वस्तु या न संबं ी लाभ अशिभप्राप्त क ने का प्रयास निकया है।वतमान मामले में, ऐसा कोई तथ्य ेकॉड प नहीं आया है। इसक े निवप ीत, पीडब्लू 14 जय भगवान, जांच अधि का ी क े साक्ष्य स्पष्ट रूप से निदखाते हैं निक निनमाण सामcी की ाशि. का भुगतान पंचायत सनिमधित द्वा ा सी े cाम सेवक को निकया गया था। इससे यह भी पता चलता है निक पंचायत सनिमधित द्वा ा सामcी का निबल भी सी े cाम सेवक को भेजा गया था। अपीलाथI द्वा ा इसका कोई सत्यापन नहीं निकया गया था। यह स्पष्ट रूप से स्वीका निकया गया है निक अपीलकता को निनमाण सामcी क े संबं में cाम सेवक को भुगतान की गई ाशि. क े बा े में जानका ी नहीं थी। आगे यह स्वीका निकया गया है निक उस समय वतमान अपीलाथI की देख ेख में लगभग 100 से 125 पंचायत काय चल हे थे। आगे यह भी स्वीका निकया गया है निक यह निदखाने क े लिलए रि कॉड प कोई तथ्य नहीं है निक शि.कायत क े बाद अपीलकता द्वा ा एक्स-आर्टिर्टकल 2 में प्रद. P22 से लेक प्रद. P27 में सु ा निकया गया था। पी डब्लू 14 जय भगवान, जांच अधि का ी क े साक्ष्य क े निनम्नलिललिखत भाग का उल्लेख क ना प्रासंनिगक होगाः "मुख्यालय को भेजी गई अपनी जांच रि पोर्ट में मुझे शि.व क ु मा क े लिखलाफ कोई आप ाधि क आ ोप नहीं निमले थे औ मैंने क े वल निवभागीय जांच क े लिलए जिसफारि. की थी। हालांनिक उच्च अधि कारि यों क े निनणय प आ ोप पत्र दालिखल निकया गया था।"
12. पीडब्लू 14 आगे स्वीका क ता है निक पंचायत सनिमधित द्वा ा भुगतान की गई ाशि. अपीलाथI द्वा ा सही की गई ाशि. क े अनुसा थी। आगे यह भी स्वीका निकया गया है निक यह सानिबत क ने क े लिलए कोई सबूत नहीं था निक अशिभयुक्त भगवान सहाय औ अपीलाथI ने निमलक उसमें सु ा निकए थे। वह आगे स्वीका क ता है निक शि.व क ु मा.मा, जो वतमान अपीलकता है, ने जिजला मजिजस्र्ट्रेर्ट क े समक्ष भगवान सहाय, cाम सेवक द्वा ा निनमाण काय में अनिनयनिमतता क े बा े में शि.कायत की थी.
13. अपीलाथI की न की मंजू ी या भुगतान क ने में कोई भूनिमका नहीं थी, इन महत्वपूण पहलुओं को दोनों न्यायालयों द्वा ा पू ी त ह से नज अंदाज क निदया गया है। जांच में जांच अधि का ी को अपीलकता की कोई आप ाधि क मं.ा नहीं निदखी, इस साक्ष्य को भी नज अंदाज क निदया गया है। मामले को देखते हुए, भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम की ा ा 13 (1) (डी) (ii) सपनिUत ा ा 15 क े तहत दोषजिसधिद्ध सं ा णीय नहीं है.
14. अब भा तीय दंड संनिहता की ा ा 477 क क े तहत दोषजिसधिद्ध प बात क ते हैं। भा तीय दंड संनिहता निक ा ा 477 ए क े तहत दोषजिसधिद्ध क े लिलए अशिभयोजन पक्ष क े लिलए यह सानिबत क ना आवश्यक है निक झूUी प्रनिवनिष्ट या चूक या इस त ह की प्रनिवनिष्टयों में हे फ े जानबूझक ोखा ड़ी क े इ ादे से निकया गया है। अशिभयोजन पक्ष द्वा ा ऐसा कोई तथ्य ेकॉडमें पे. नहीं निकया गया है। इसक े निवप ीत, पीडब्लू 8 महे. प्रसाद माथु, जिजन्हें एक जांच अधि का ी क े रूप में निनयुक्त निकया गया था, क े साक्ष्य से पता चलता है निक अपीलाथI क े लिखलाफ लगाए गए आ ोप सं ा णीय नहीं थे. पीडब्लू महे. प्रसाद माथु क े बयान का उल्लेख क ना प्रासंनिगक होगा, जो इस प्रका हैः "जब मैं पूछताछ क ने क े लिलए मौक े प गया तो मानकोर्ट औ सु जपु की मापन पुस्तिस्तकाएँ मुझे दी गई ं । जिजसक े आ ा प निदनांक 4.10.94 औ 19.10.94 को मैंने घर्टनास्थल का दौ ा क ने क े बाद जांच की थी। सी.ओ. क े निनद‡. प मैंने 17.2.95 को ाशि. में आ हे अंत का निवव ण तैया निकया था। मापन पुस्तिस्तका संख्या51 (आर्टिर्टकल सं0 2) क े पृष्ठ सं. 71,72 प माप कनिनष्ठ अशिभयंता द्वा ा अशिभलिललिखत की गई है। जो मे ी जांच में सही पाई गई। 25911/- रुपये क े इस काय क े लिलए श्रम.ुल्क क े रूप में 13422/- रुपये का भुगतान निकया गया था, जो एक्स से वाई तक मापन पुस्तिस्तका में दज निकया गया था, मुझे मानकोर्ट गांव क े काम में कोई अनिनयनिमतता नहीं निमली। यनिद गलती से मापन पुस्तिस्तका क े योग में कोई गलती हो जाती है, तो मापन पुस्तिस्तका क े आ ा प निबल तैया क ते समय, इस गलती को लेखा.ाखा द्वा ा Uीक निकया जा सकता है। अकाल ाहत काय समाप्त होने क े तीन महीने बाद मैं वहां गया था। उस जगह (सु जनपु ) प निनमाण काय की सामcी क े पयवेक्षण क े लिलए कोई व्यनिक्त निनयुक्त नहीं निकया गया था। मौक े प कोई चौकीदा नहीं था, जिजसकी अनुपस्तिस्थधित में अग कोई भी वहां पड़ी सामcी ले जाएगा, मैं नहीं कह सकता। जिजन पैर्टीज को मापन पुस्तिस्तका में निदखाया गया है, वे मौक े प नहीं पाए गए, इसलिलए मैंने रि पोर्ट में इसक े बा े में उल्लेख निकया था। निनमाण काय क वाने निक निˆम्मेदा ी cाम सेवक की होती है। यनिद, 40267 रुपये क े मूल्यांकन में, जो मे े द्वा ा निकया गया था, 6914/- रुपये क े पैर्टीज की लागत को.ानिमल निकया जाएगा, तो मूल्यांकन ाशि. 47181/- रुपये हो जाएगी। पैर्टीज की लागत 6914 रुपये बीएसआ क े अनुसा लिलखी गई है। जब मुझे मापन पुस्तिस्तका 51 (आर्टिर्टकल-2) प्राप्त हुआ, उस समय कनिनष्ठ अशिभयंता द्वा ा योग (क ु ल) में गलती क े का ण 59273 रुपए कार्ट क 47183 रुपए लिलख निदये गए थे, जिजस प कनिनष्ठ अशिभयंता क े हस्ताक्ष हैं। निनमाण सामcी की ाशि. का भुगतान cाम पंचायत क े स पंच को निकया गया था, जो एजेंसी काम का संचालन क ाती है, जबनिक मस्र्ट ोल का भुगतान तहसील क े कमचारि यों द्वा ा निकया जाता है। निनमाण सामcी की ाशि. का भुगतान पंचायत द्वा ा निकया गया था।"
15. उपयुक्त बयान स्पष्ट रूप से द.ाता है निक अपीलाथI द्वा ा दज की गई माप जांच अधि का ी द्वा ा सही पाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीका निकया निक उन्हें मानकोर्ट गांव क े काय में कोई अनिनयनिमतता नहीं निमली। उन्होंने आगे स्वीका निकया निक यनिद निबल तैया क ने क े समय मापन पुस्तिस्तकाओं क े योग में कोई गलती की गई थी, तो लेखा.ाखा द्वा ा गलती को सु ा ा जा सकता था।
16. पी. डब्लू. 8 महे. प्रसाद माथु ने आगे कहा निक जहां तक सु जनपु का संबं है, वहाँ निकसी भी व्यनिक्त को चौकीदा या पयवेक्षक क े रूप में निनयुक्त नहीं निकया गया था। उन्होने कहा निक एक चौकीदा क े अभाव में, यह संभव है निक साइर्ट प पड़ी सामcी को कोई भी ले जा सकता है। उन्होंने स्वीका निकया निक यहां तक निक पैर्टीज भी मौक े प नहीं पाए गए थे औ उन्होने रि पोर्ट में इस बा े में उल्लेख निकया है। उन्होंने आगे स्वीका निकया निक यनिद 40,677/- रुपये में पैर्टीज की लागत 6914/- रुपये को.ानिमल निकया जाता है तो क ु ल ाशि.47,181/- रुपये होती है।
17. पी.डब्ल्यू.[8] महे. प्रसाद माथु ने आगे कहा है निक निनमाण सामcी की ाशि. का भुगतान एजेंसी द्वा ा सी े cाम पंचायत क े स पंच को निकया गया था, जबनिक मस्र्ट ोल का भुगतान तहसील क े कमचारि यों द्वा ा निकया गया था। निनमाण सामcी की ाशि. का भुगतान पंचायत द्वा ा निकया गया था। इस प्रका, यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है निक अपीलाथI की भुगतान को मंजू ी देने या भुगतान क ने में कोई भूनिमका नहीं थी.
18. पी.डब्ल्यू.[8] महे. प्रसाद माथु का साक्ष्य स्पष्ट रूप से द.ाता है निक अधि क से अधि क, अपीलाथI क े काय को अनिनयनिमत कहा जा सकता है। हालांनिक, यह निदखाने क े लिलए रि कॉड प कोई सबूत नहीं था निक ऐसी अनिनयनिमतताएं ोखा ड़ी क े इ ादे से जानबूझक की गई थीं।
19. मामले क े उस दृनिष्टकोण से, हम पाते हैं निक जहां तक भा तीय दंड संनिहता की ा ा 477 ए क े तहत दोषजिसधिद्ध का संबं है, यह भी कानून की दृनिष्ट से सं ा णीय नहीं है।
20. ाजस्थान ाज्य क े निवद्वत अप महाधि वक्ता डॉ. मनीष सिंसघवी ने कहा निक चूंनिक तथ्य क े निनष्कष समवतI हैं, न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप क ने में जल्दबाˆी नहीं क नी चानिहए।
21. यह निवधि का स्थानिपत जिसद्धांत है निक तथ्य क े समवतI निनष्कषk में तब तक हस्तक्षेप नहीं निकया जा सकता है जब तक निक वे स्पष्ट रूप से निवक ृ त ना नज आए। आलिख का, समरूपता निवक ृ धित का कोई प्रत्युत्त नहीं है।
22. इस न्यायालय ने महे. दत्तात्रेय तीथक बनाम महा ाष्ट्र ाज्य क े प्रक ण में क ु छ जिसद्धांत निन ारि त निकए थे निक कब यह न्यायालय भा त क े संनिव ान क े अनुच्छेद 136 क े तहत.निक्तयों का उपयोग क ने औ तथ्य क े निनष्कषk में हस्तक्षेप क ने का हकदा होगा। निन ारि त जिसद्धांतों में से एक इस प्रका हैः "जहां अ ीनस्थ न्यायालयों क े निनष्कषk को निवक ृ त या निबना निकसी साक्ष्य या अप्रासंनिगक साक्ष्य क े आ ा प निदखाया गया है या कशिथत निनष्कषk को प्रभानिवत क ने वाली अनिनयनिमतताएं हैं या जहां न्यायालयों को लगता है निक वे न्याय प्रदान क ने मे निवफल हुएहैं औ निनष्कषk क े परि णामस्वरूप अत्यधि क कनिUनाई होने की संभावना है।"
23. पूवtक्त मामले में इस न्यायालय ने इस मुद्दे प इस न्यायालय द्वा ा पूव में निदये गए निनणयों को निनर्टिदष्ट निकया है। इसका उल्लेख क ना उधिचत होगा, जो इस प्रका हैं: "29. पुनः एच. पी. प्र.ासन बनाम ओम प्रका. [(1972) 1 एस. सी. सी. 249:1972 एस. सी. सी. (निŽनिम.) 88] में इस न्यायालय ने तथ्य क े निनष्कष क े साथ हस्तक्षेप क े प्रश्न प भा त क े अनुच्छेद 136 क े तहत अपनी.निक्त प निवचा क ते हुए इस प्रका मत व्यक्त निकयाः (एस. सी. सी. पृष्ठ 256, पै ा 4)" "4. अनुच्छेद 136 क े तहत निव.ेष अनुमधित द्वा ा दोषमुनिक्त क े लिखलाफ अपील में, इस न्यायालय को तथ्य क े निनष्कषk में हस्तक्षेप क ने की.निक्त निनस्संदेह रूप से प्राप्त है, दोषमुनिक्त औ दोषजिसधिद्ध क े निनणयों क े बीच कोई अंत नहीं निकया जा हा है, हालांनिक दोषमुनिक्त क े मामले में यह आमतौ प सबूतों क े मूल्यांकन या तथ्यों क े निनष्कषk प तब तक हस्तक्षेप नहीं क ेगा जब तक निक उसे यह न लगे निक उच्च न्यायालय ने इसमें'निवक ृ त या अन्यथा अनुधिचत त ीक े से'काय निकया है।"
30. अरुणाचलम बनाम पी. एस. आ. सा ननाथम [(1979) 2 एस. सी. सी. 297:1979 एस. सी. सी. (निŽनिम.) 454] में इस न्यायालय ने पूवtक्त निवनिनश्चयों में व्यक्त निवचा ों से सहमधित व्यक्त क ते हुए इस प्रका कहाः (एससीसी पृष्ठ 300, पै ा
4) "4.........निक्त इस अथ में परि पूण है निक अनुच्छेद 136 में उस.निक्त को परि भानिषत क ने वाला कोई.ब्द नहीं हैं। लेनिकन,.निक्त की प्रक ृ धित ने न्यायालय को ऐसी.निक्त का प्रयोग क ने क े लिलए स्वयं की सीमा निन ारि त क ने क े लिलए प्रेरि त निकया है। यह इस न्यायालय की सुस्थानिपत पद्धधित है निक अनुच्छेद 136 क े अ ीन इस.निक्त का सहा ा क े वल बहुत ही असा ा ण परि स्तिस्थधितयों में लिलया जा सकता है, जैसे निक जब सामान्य लोक महत्व का कोई निवधि का प्रश्न उUता है या कोई निवनिनश्चय न्यायालय की अंत ात्मा को झकझो देता है। लेनिकन, स्वयं द्वा ा लगाए गए प्रधितबं ों क े बावजूद, इस न्यायालय को तथ्य क े निनष्कषk क े साथ हस्तक्षेप क ने, दोषमुनिक्त औ दोषमुनिक्त क े निनणयों क े बीच कोई अंत नहीं क ने की भी निनस्संदेह.निक्त है, यनिद उच्च न्यायालय ने उन निनष्कषk प पहुंचने में, 'निवक ृ त या अन्यथा अनुधिचत रूप से'काय निकया है। (बल निदया गया)
31. पुनः उत्त प्रदे. ाज्य बनाम बाबुल नाथ [(1994) 6 एस. सी. सी. 29:1994 एस. सी. सी. (Žी.) 1585] में इस न्यायालय ने निनम्नलिललिखत मत व्यक्त निकयाः (एस सी सी पृष्ठ 33, पै ा 5) “5 आ ंभ में हम यह उल्लेख क सकते हैं निक संनिव ान क े अनुच्छेद 136 क े तहत एक अपील में यह न्यायालय सामान्य रूप से साक्ष्य का मूल्यांकन नहीं क ता है औ गवाहों की निवश्वसनीयता औ उच्च न्यायालय द्वा ा निकए गए साक्ष्य क े मूल्यांकन प सवाल नहीं उUाता है। सवtच्च न्यायालय उच्च न्यायालय द्वा ा निकए गए साक्ष्यों क े मूल्यांकन को स्वीका क ता है, जब तक निक निनधिश्चत रूप से, साक्ष्य क े मूल्यांकन औ निनष्कष प्रनिŽया कानून की निकसी भी त्रुनिर्ट से दूनिषत हो या नैसर्टिगक न्याय क े जिसद्धांतों क े निवप ीत हो, रि कॉड में त्रुनिर्टयां औ साक्ष्य की गलत व्याख्या की गई हो, या जहां उच्च न्यायालय क े निनष्कष रि कॉड प उपलब् साक्ष्य से स्पष्ट रूप से अलग औ असमथनीय हों।”
32. पट्टकल क ुं निहकोया बनाम Uुनिपयक्कल कोया (2000) 2 एस. सी. सी. 185) में यह अशिभनिन ारि त निकया गया था निक जब भा त क े अनुच्छेद 136 क े अ ीन कोई अपील उUती है, "उच्चतम न्यायालय की यह प्रथा नहीं है निक वह इस बात की जांच क ने क े उद्देश्य से साक्ष्य की पुनः समीक्षा क े निक क्या उच्च न्यायालय औ अ ीनस्थ न्यायालयों द्वा ा प्राप्त तथ्य सही है या नहीं। अपवाद क े वल उसी स्तिस्थधित मे लाये जा सकते है जंहा वह न्यायालय न्याय प्रदान क ने में गंभी रूप से निवफल हुआ हो या स्पष्ट रूप से अवै हो, लेनिकन अन्य निकसी आ ा प नहीं।
33. निमशिथले. क ु मा ी बनाम प्रेम निबहा ी ख े [(1989) 2 एससीसी 95] वाले प्रक ण में इस न्यायालय ने (एससीसी पृष्ठ 99) में यह अशिभनिन ारि त निकया है निक जहां अ ीनस्थ न्यायालयों क े निनष्कष "निवक ृ त या निबना निकसी साक्ष्य या अपूण साक्ष्य क े आ ा प निदखाए जाते हैं या कशिथत निनष्कषk को प्रभानिवत क ने वाली अनिनयनिमतताएं हैं या जहां न्यायालय यह महसूस क ता है निक न्याय नहीं निमल पाया है औ यह पाया गया है निक इसक े परि णामस्वरूप अत्यधि क कनिUनाइयाँ होने की संभावना है,उच्चतम न्यायालय क े वल इस आ ा प हस्तक्षेप क ने से इनका नहीं क सकता था निक निवचा ा ीन निनष्कष तथ्य क े निनष्कष हैं (बल निदया गया)
24. हाल ही में, इस न्यायालय ने अ.ोकसिंसह जयेन्द्रसिंसह बनाम गुज ात ाज्य क े प्रक ण में यह भी अशिभनिन ारि त निकया था निक जब उच्च न्यायालय सही परि प्रेक्ष्य में मौलिखक साक्ष्य का मूल्यांकन क ने में निवफल हा है, तो यह न्यायालय निनधिश्चत रूप से साक्ष्य की पुनः मूल्यांकन क ने का हकदा होगा। उक्त प्रक ण में भी, इस न्यायालय द्वा ा महत्वपूण साक्ष्य की उपेक्षा क ने क े बाद दोषजिसधिद्ध की गई थी, दोषजिसधिद्ध क े आदे. को द्द क निदया है औ अशिभयुक्त को ब ी क निदया है.
25. वतमान मामले में, जैसा निक इसमें ऊप चचा की गई है, निवचा ण न्ययालय औ उच्च न्यायालय दोनों पी डब्लू 8 श्री महे. प्रसाद माथु औ पी डब्लू 14 जय भगवान क े साक्ष्य में प्रासंनिगक औ महत्वपूण स्वीका ोनिक्त को ध्यान में खने में निवफल हे हैं। हमा े निवचा में, उक्त स्वीका ोनिक्तयाँ महत्वपूण थीं। हमा े निवचा में, उक्त महत्वपूण स्वीक ृ धितयों को नज अंदाज क क े दोषजिसधिद्ध क े आदे. का आ ा बनाना, आक्षेनिपत निनणय को निवक ृ धित क े दाय े में लाएगा।
26. इस प्रका, अपील स्वीका की जाती है। निवद्वत निव.ेष न्याया ी., भ्रष्टाचा निनवा ण अधि निनयम संख्या 1, जयपु द्वा ा दज औ उच्च न्यायालय द्वा ा पुनिष्ट निकए गए दोषजिसधिद्ध औ दंड क े आदे. को द्द क निदया जाता है. अपीलकता को सभी आ ोपों से ब ी निकया जाता है। जमानत मुचलकों का उन्मोचन क निदया जाता है।
27. लंनिबत आवेदन, यनिद कोई हो, निनस्तारि त निकए जाते है। जे. (बी. आ. गवई) जे. (पमीदीघंर्टम श्री न जिसम्हा) नई निदल्ली। 28 जुलाई, 2022 यह अनुवाद आर्टिर्टनिफशि.यल इंर्टेलिलजेंस र्टूल 'सुवास'क े जरि ए अनुवादक की सहायता से निकया गया है। अस्वीक ण: यह निनणय वादी क े प्रधितबंधि त उपयोग क े लिलए उसकी भाषा में समझाने क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुवानिदत निकया गया है औ निकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं निकया जा सकता है। सभी व्यावहारि क औ आधि कारि क उद्देश्यों क े लिलए, निनणय का अंcेजी संस्क ण प्रामाशिणक होगा औ निनष्पादन औ कायान्वयन क े उद्देश्य से अंcेजी संस्क ण ही मान्य होगा। (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.