Sa Na Chouri v. Rajasthan State and Others

Supreme Court of India · 12 Jul 2022 · 2022 INSC 712
Nivkram Narthi; Ajay Rastogi
Criminal Appeal No 936 of 2022 @ SLP (Crl) No 8477 of 2021
2022 INSC 712
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside anticipatory bail granted to a police officer accused of serious sexual offences, emphasizing strict scrutiny of bail in such cases to ensure fair investigation.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का सव च्च्च न्यायालय
दांति क अपीलीय क्षेत्राति कार
दाण्डि क अपीलीय संख्या 936/2022
(एसएलपी (सीआरएल) संख्या 8477/2021 से उत्पन्न)
सा ना चौ री अपीलार्थी4 (गण)
बनाम
राजस्र्थीान राज्य और अन्य प्रति वादी (गण)
निनण>य
निवक्रम नार्थी, न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमति दी गई।

2. अपीलक ा>, शिशकाय क ा> / पीनिG ा / अशिभयोक्त्री है। उसने यह अपील राजस्र्थीान उच्च न्यायालय, ख पीठ जयपुर द्वारा निदनांक 25.08.2021 को एस. बी. दाण्डि कनिवनिव जमान यातिचका संख्या 6394 (क ं वर पाल सिंसह बनाम राजस्र्थीान राज्य) में पारिर आदेश/निनण>य की सत्य ा की आलोचना कर े हुए दायर की है, जिजसक े ह उच्च न्यायालय ने पुलिलस र्थीाना, करणी निवहार, जयपुर, में भार ीय दं संनिह ा की ारा 323, 341, 354, 379 और 376 क े ह दज> प्रार्थीनिमकी संख्या 161/2020 में द प्रनिक्रया संनिह ा की ारा 438 क े ह अनिVम जमान की राह क े लिलए आवेदन को स्वीकार निकया । 2022 INSC 712

3. जैसा निक व >मान मामला अनिVम जमान मंजूर करने वाले आदेश से संबंति है, हम स क > ा से थ्यों और कZ को संतिक्षप्त में संदर्भिभ कर रहे हैं ानिक कोई भी पक्ष पूवा>Vह से Vजिस न हो या निनचली अदाल निकसी भी नि^प्पणी से प्रभानिव न हो, जो हमारे द्वारा इस आदेश में की जा सक ी है।

4. अशिभयोजन पक्ष की संक्षेप में कहानी यह है निक वर्ष> 2018 में, जब प्रति वादी नं.2,र्थीाना अति कारी, मनिहला र्थीाना, झुंझुनू क े रूप में ैना र्थीा, अपीलक ा> की बहन ने उसक े ससुराल वालों क े लिखलाफ उसी पुलिलस र्थीाने में शिशकाय की र्थीी। प्रति वादी नं.[2] ने बैंक पास बुक, निववाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, निववाह क े फो^ो, आ ार का > और अपनी बहन का जन्म प्रमाण पत्र अपने पास रखा र्थीा और उससे कहा र्थीा निक वह बाद में वापस ले जाये । 25 जिस ंबर, 2018 को, जब अपीलक ा> को प्रत्यर्थी4 नं. 2 से कागजा वापस लेने क े लिलए बुलया ो उसक े झुंझुनू पहुंचने पर, उसे सूतिच निकया गया निक उसक े आति कारिरक आवास से कागजा वापस ले लें, जहां उसे अनिनवाय> रूप से जाना पGा क्योंनिक उसे उसी निदन जयपुर वापस लौ^ना र्थीा। आवास पर, प्रति वादी नं.[2] ने अपीलक ा> को छाछ की पेशकश की, जिजसका उसने भोलेपन में सेवन कर लिलया, लेनिकन जानिहरा ौर पर वह ्रग्स से युक्त र्थीा जिजसक े परिरणामस्वरूप अपीलक ा> बेहोश हो गई। जब उसे होश आया, ो उसने खुद को बहु अजीब ण्डिस्र्थीति में पाया और ुरं महसूस निकया निक प्रति वादी नं.[2] ने उसका शोर्षण निकया है। प्रति वादी नं.[2] ने उसे मकी दी निक उसने अपने मोबाइल पर अश्लील और आपलिjजनक परिरण्डिस्र्थीति यों में वीति यो बनाए हैं और स्वीरें खींची हैं और अगर उसने उसकी मांगों और आदेशों को मानना जारी नहीं रखा, ो वह सब क ु छ साव>जनिनक कर देगा।

5. यह ब ाया गया है निक अपीलक ा> का शोर्षण लगभग दो वर्षZ क जारी रहा। मई, 2020 में, प्रति वादी नं.[2] उसक े निनवास पर आया,जहां वह अपने पति और बच्चों क े सार्थी रह ी है। वह उसे अपनी जीप में जबरन निकसी अज्ञा स्र्थीान पर ले गया, शारीरिरक रूप से उस पर हमला निकया, उसका मोबाइल छीन लिलया, निफर उसे गाGी से निकसी जगह पर ले गया जहां बाद में निकसी समय पर उसकी पत्नी और बच्चे आए और उन्होंने भी उस पर हमला निकया, जिजसक े परिरणामस्वरूप वह बेहोश हो गई। पुलिलस निवभाग क े गश् ी वाहन ने उसे बचा लिलया, जिजसक े बाद उसने करणी निवहार पुलिलस स्^ेशन, जयपुर में भा.दं.सं. की ारा 376, 323, 341, 354 और 379 क े ह दं नीय अपरा ों क े लिलए 01.06.2020 को प्रार्थीनिमकी संख्या 161/2020 दज> कराई। प्रार्थीनिमकी क े वल उस निदन की घ^ना क े बारे में र्थीी, हालांनिक, बाद में, जब अपीलक ा> ठीक हो गई, ो उसने द.प्र.सं. की ारा 164 क े ह अपने बयान में पूरी कहानी सुनाई।

6. इसक े अलावा, अपीलक ा> का वाद है की प्रत्यर्थी4 नं.[2] ने अपने आति कारिरक पद का दुरुपयोग कर े हुए अपनी पत्नी द्वारा एक झूठी रिरपो^> अपीलक ा> क े लिखलाफ पांच निदन बाद 05.06.2020 को दज> कराई, जो पुलिलस स्^ेशन, झो^वाGा, जयपुर में प्रार्थीनिमकी संख्या 234/2020 क े रूप में दज> की गई र्थीी। यह भी ब ाया गया निक जांच क े बाद कशिर्थी प्रार्थीनिमकी में पूरी रह से गल और झूठे थ्य पाए गए हैं और एक समापन रिरपो^> पहले ही पेशकी जा चुकी है। हालांनिक, जहां क अपीलक ा> द्वारा दज> प्रार्थीनिमकी का संबं है,क्योंनिक प्रत्यर्थी4 नं.[2] को निहरास में नहीं लिलया गया है, वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और निनष्पक्ष और उतिच जांच क े लिलए उससे कई चीजें और मोबाइल फोन बरामद निकए जाने की आवश्यक ा है। अपीलक ा> क े अश्लील वीति यो और स्वीरों पर निनयंत्रण रखना भी आवश्यक है, इसलिलए आरोपों की गंभीर ा को ध्यान में रख े हुए उसकी न्यातियक निहरास की आवश्यक ा है ।

7. अनिVम जमान का आदेश, जिजसे उच्च न्यायालय क े समक्ष यातिचका में निननिह दावों को सही मान कर सरसरी रीक े से पारिर निकया गया है, को रद्द करने की आवश्यक ा है। यह भी अपीलक ा> का वाद है निक प्रत्यर्थी4 नं.[2] ने आगे जाकर अपने आति कारिरक पद का दुरुपयोग कर े हुए अपीलक ा> क े लिखलाफ बण्डिsक उसक े परिरवार क े सदस्यों क े लिखलाफ भी कई झूठी शिशकाय ें दज> कारवाई, ानिक उस पर व >मान प्रार्थीनिमकी को वापस लेने का दबाव बनाया जा सक े ।

8. राज्य-प्रति वादी ने एक निवस् ृ प्रति -शपर्थीपत्र दालिखल निकया है। संबंति अनुछेद सं.[5] से 10 क प्रासंनिगक हैं जो इस प्रकार हैंः “5. यह अत्यं सम्मान क े सार्थी प्रस् ु निकया जा ा है निक प्रार्थीनिमकी 161/2020 की जांच में पया>प्त साक्ष्य का प ा चला है, जो सानिब कर ा है निक अशिभयुक्त/प्रति वादी संख्या 2, जो खुद एक पुलिलस अति कारी है, भा.दं.सं. की ारा 323,341,354,504,379,376 क े ह अपरा ों का दोर्षी है, जैसा निक

23.11. 2021 की थ्यात्मक रिरपो^> में निवस् ार से ब ाया गया है।

6. इसक े अलावा, 05.06.2020 को एक और प्रार्थीनिमकी संख्या 234/2020 श्रीम ी उर्षा क ं वर जो की प्रति वादी की पत्नी है, क े कहने पर भा.दं.सं. की ारा 143,323,341,384,504,379,452 क े ह जयपुर पति{म क े पुलिलस र्थीाना झो^वाGा में दज> की गई र्थीी। निवस् ृ जांच क े बाद, यह पाया गया निक कशिर्थी प्रार्थीनिमकी झूठी जानकारी क े आ ार पर दज> की गई र्थीी और प्रति वादी और उसक े परिरवार क े निकसी भी सदस्य क े लिखलाफ कोई आपराति क क ृ त्य नहीं पाया गया। इस प्रकार, द.प्र.सं.की ारा 173 क े ह अंति म रिरपो^> पहले ही 27.09.2021 को एसीजेएम श्रेणी-3 की अदाल क े समक्ष दायर की जा चुकी है, जिजसमें सुनवाई की अगली ारीख 25.01.2022 निन ा>रिर की गई है । निदनांक 25.11.2021 की थ्यात्मक रिरपो^> की एक मूल अनुवाद प्रति लिलनिप जिजसमें इसकी जांच और ण्डिस्र्थीति का निववरण निदया गया है, यहां संलग्न है और अनुलग्नक- आर 2 (पृष्ठ संख्या 45 से 99)क े रूप में तिचण्डिन्ह निकया गया है।

7. उपरोक्त दोनों थ्यात्मक प्रति वेदनों में ब ाए गए थ्यों क े अलावा, यह अत्यं सम्मान क े सार्थी निनवेदन निकया जा ा है निक अशिभयुक्त/प्रत्यर्थी4 नं. 2 एक पुलिलस अति कारी है जो कानून की प्रनिक्रया से अच्छी रह वानिकफ है और राजस्र्थीान राज्य में कानून प्रव >न ंत्र का एक अंदरूनी सूत्रहै, इसलिलए, यह और भी अति क महत्वपूण> है निक अशिभयुक्त/प्रत्यर्थी4 नं. 2 माननीय न्यायालय क े संरक्षण में हुए निबना जांच आगे बढ़े।

8. इसक े अलावा, उपरोक्त दो थ्यात्मक रिरपो^Z में अब क की जांच में सामने आया थ्य यातिचकाक ा> द्वारा लगाए गए आरोपों की पुनि• कर ा है और उन्हें सानिब कर ा है। इसक े अलावा, प्रार्थीनिमकी 234/2020 में एफआर में निवस् ार से ब ाया गया है निक क ै से यातिचकाक ा> और उसक े लिखलाफ एक झूठा मामला बनाया गया र्थीा।

9. यह अत्यं सम्मान क े सार्थी निनवेदन निकया जा ा है निक ऊपर निदए गए थ्यों क े बल पर, उjरदा ा प्रत्यर्थी4 अशिभयुक्त/प्रत्यर्थी4 नं. 2 को दी गई अनिVम जमान को रद्द करने की मांग कर ा है। निवशेर्ष रूप से, यह आवश्यक है निक सबू क े अन्य ^ुकGों क े अलावा पीनिG क े अश्लील फो^ो, वीति यो, मोबाइल फोन और कपGे क े बैग को खोजने क े लिलए सभी प्रयास निकए जाएं, जिजसकी जानकारी क े वल अशिभयुक्त/प्रति वादी नं. 2 को होगी। यह नो^ निकया जा सक ा है निक आरोपी/प्रति वादी नं. 2 ने जांच में पूरी रह से सहयोग नहीं निकया है, जैसा निक निदनांक 23.11.2021 की थ्यात्मक रिरपो^> में उल्लेख निकया गया है।

10. उपयु>क्त प्रस् ुति यों क े आलोक में, माननीय न्यायालय क े समक्ष यह अत्यं सम्मान क े सार्थी प्रार्थी>ना की जा ी है निक प्रत्यर्थी4 नं. 2 की अनिVम जमान मंजूर करने वाले आक्षेनिप आदेश को रद्द निकया जाए और अशिभयुक्त को माननीय न्यायालय से निकसी संरक्षण क े निबना, प्रत्यर्थी4-राज्य जैसा वह ठीक समझे, अन्वेर्षण करने क े लिलए स्व ंत्र है।"

9. उपयु>क्त जवाबी शपर्थी पत्र में, अति रिरक्त पुलिलस उपायुक्त, जयपुर (पति{म), जयपुर ने, जो राजस्र्थीान राज्य द्वारा निवति व रूप से प्राति क ृ है, हलफनामा दायर निकया है ।अनुछेद 5 में कहा है निक पया>प्त साक्ष्य का प ा चला है जो सानिब कर ा है निक प्रत्यर्थी4 नं.2, जो एक पुलिलस अति कारी है, अपरा ों का दोर्षी है, जिजसका निववरण 23.11.2021 की रिरपो^> में निदया गया है। 10.अनुछेद 6 में यह कहा गया है निक प्रति वादी नं.[2] ने प्रार्थीनिमकी संख्या 234/2020 क े रूपमें अपीलक ा> क े लिखलाफ एक झूठी रिरपो^> दज> करवाई, जिजसे निवस् ृ जांच क े बाद झूठी सूचना क े आ ार पर होना पाया गया और अपीलक ा> या उसक े सदस्यों क े लिखलाफ कोई आपराति क क ृ त्य नहीं पाया गया। द.प्र.सं. की ारा 173 (2) क े ह अंति म रिरपो^> पहले ही 27.09.2021 को प्रस् ु की जा चुकी है।

19,464 characters total

11. अनुछेद 7 में यह कहा गया है निक पुलिलस अति कारी, जो कानून की प्रनिक्रया में अच्छी रह से पारंग है और कानून प्रव >न ंत्र का एक निहस्सा है, यह और भी जरूरी हो जा ा है निक प्रत्यर्थी4 नं.[2] क े इस न्यायालय का संरक्षण निदये निबना जांच जारी रहे।

12. अनुछेद 9 में यह कहा गया है निक अनिVम जमान मंजूर करने क े आदेश को निवशेर्ष रूप से इस कारण रद्द करने की आवश्यक ा इसलिलए है निक निक सबू क े अन्य ^ुकGों क े अलावा पीनिG क े अश्लील फो^ो, वीति यो, मोबाइल फोन और कपGे क े बैग को खोजने क े लिलए प्रयास अभी जारी हैं, जिजसकी जानकारी क े वल अशिभयुक्त/प्रति वादी नं. 2 को होगी।अनुछेद 9 में यह भी निवशेर्ष रूप से कहा गया है निक उसने जांच में पूरी रह से सहयोग नहीं निकया है, जैसा निक 23.11.2021 की थ्यात्मक रिरपो^> से स्प• है।

13. दूसरी ओर, प्रति वादी नं.[2] ने उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश को न्यायोतिच ठहराया है। निवद्वान अति वक्ता क े अनुसार, अपीलक ा> प्रत्यर्थी4 नं.[2] और उनक े परिरवार क े सदस्यों का शोर्षण कर रही है। अनिVम जमान का आदेश पारिर कर े समय उच्च न्यायालय द्वारा निदए गए कारण निवति क रूप से Vाह्य थ्यों और उच्च न्यायालय क े समक्ष रखी गई परिरण्डिस्र्थीति यों पर आ ारिर हैं।उन्होंने यह भी कहा निक एक बार जब उच्च न्यायालय अपने निववेक का प्रयोग कर ले ा है, ो यह न्यायालय इसमें हस् क्षेप नहीं कर सक ा है।यह भी निनवेदन निकया जा ा है निक अपीलक ा> और उसक े रिरश् ेदारों क े लिखलाफ दज> की गई अन्य प्रार्थीनिमनिकयाँ ीसरे व्यनिक्तयों/अजननिबयों द्वारा है जो अपीलक ा> और उसक े रिरश् ेदारों द्वारा उगाही क े शिशकार हैं। उनका प्रति वादी नं. 2 से कोई लेना देना नहीं है।

14. दं प्रनिक्रया संनिह ा की ारा 438 क े अ ीन अनिVम जमान की प्रयोज्य ा या मंजूरी पर निवति को संक्षेप में निनम्नलिललिख रूप में प्रस् ु निकया जा सक ा हैः

14.1. श्री गुरबख्श सिंसह जिसनिबया और अन्य बनाम पंजाब राज्य ( (1980) 2 एससीसी 565) वाले मामले में,इस न्यायालय की एक संनिव ान पीठ में मुख्य न्याया ीश वाई. वी. चंद्रचूG ने न्यायालय क े लिलए बोल े हुए अनिVम जमान की मंजूरी क े लिलए निवचारों पर निवस् ार से निवचार निकया।

14.2. जिसद्धराम स लिंलगप्पा म्हेत्रे बनाम महारा•्र राज्य और अन्य ((2011) 1 एससीसी 694)वाले मामले में,इस न्यायालय ने श्री गुरबख्श सिंसह जिसनिबया में संनिव ान पीठ क े निनण>य पर भरोसा कर े हुए प्रति वेदन क े अनुछेद 112 में निनम्नलिललिख कारक और मानदं अति कशिर्थी निकए गए हैं जिजन पर अनिVम जमान क े आवेदन पर निवचार कर े समय निवचार निकया जाएः "(i) आरोप की प्रक ृ ति और गंभीर ा और अशिभयुक्त की स^ीक भूनिमका को निगरफ् ारी से पहले अच्छी रह समझा जाना चानिहए।" (ii) आवेदक का पूव>वृj जिजसक े अं ग> यह थ्य भी है निक क्या अशिभयुक्त को पहले निकसी संज्ञेय अपरा क े संबं में न्यायालय द्वारा दोर्षजिसतिद्ध पर कारावास भोगना पGा । (iii) आवेदक क े न्याय से भागने की संभावना (iv) अशिभयुक्त द्वारा समान या अन्य अपरा ों को दोहराए जाने की संभावना (v) जहां आरोप क े वल आवेदक को निगरफ् ार करक े उसे आह करने या अपमानिन करने क े उद्देश्य से लगाए गए हैं (vi) अनिVम जमान मंजूर करने का प्रभाव निवशेर्ष रूप से बGी संख्या में लोगों को प्रभानिव करने वाले मामलों में (vii) न्यायालयों को अशिभयुक्त क े निवरुद्ध पूरी उपलब् थ्यों का साव ानीपूव>क मूsयांकन करना चानिहए। अदाल को मामले में आरोपी की सही भूनिमका को भी स्प• रूप से समझना चानिहए। जिजन मामलों में आरोपी को दं संनिह ा, 1860 की ारा 34 और 149 की मदद से शानिमल निकया गया है, उन पर अदाल को और अति क साव ानी और एहति या क े सार्थी निवचार करना चानिहए क्योंनिक मामलों में अत्यति क उलझाव होना आम है और यह चिंच ा का निवर्षय है। (viii) अनिVम जमान की मंजूरी क े लिलए प्रार्थी>ना पर निवचार कर े समय, दो कारकों क े बीच एक सं ुलन बनाया जाना चानिहए, अर्थीा> ्, स्व ंत्र, निनष्पक्ष और पूण> जांच पर कोई प्रति क ू ल प्रभाव नहीं ाला जाना चानिहए और अशिभयुक्त व्यनिक्त क े उत्पीGन, अपमान और अनुतिच निनरो की रोकर्थीाम होनी चानिहए । (ix) न्यायालय को गवाहों से छेGछाG करने या शिशकाय क ा> को मकी देने की युनिक्तयुक्त आशंका पर निवचार करना चानिहए; (x) अशिभयोजन में गंभीर ा में कमी पर हमेशा निवचार निकया जाना चानिहए और यह क े वल वास् निवक ा का त्व है जिजस पर जमान मंजूर करने क े मामले में निवचार निकया जाना चानिहए और घ^नाओं क े सामान्य अनुक्रम में अशिभयोजन की वास् निवक ा क े बारे में क ु छ संदेह होने की ण्डिस्र्थीति में अशिभयुक्त जमान क े आदेश का हकदार है।"

14. एक अन्य संनिव ान पीठ क े निनण>य, सुशीला अVवाल और अन्य बनाम राज्य (रा•्रीय राज ानी क्षेत्र निदल्ली) और अन्य ((2020) 5 एससीसी 1)क े मामले में, प्रति वेदन क े अनुछेद 85 में न्याया ीश रनिवन्द्र भट्ट ने ारा 438 क े ह आवेदनों पर निवचार करने क े लिलए माग>दश>क जिसद्धां ों को निन ा>रिर निकया। न्यायमूर्ति एम आर शाह ने एक अलग राय लिलखी र्थीी। न्यायमूर्ति अरुण निमश्रा, न्यायमूर्ति इंनिदरा बनज[4] और न्यायमूर्ति निवनी सरन दोनों म ों से सहम र्थीे। अनुछेद 92, 92.[1] से 92.[9] में ब ाए गए अंति म माग>दश>क कारक यहां पुन: प्रस् ु निकए गए हैं: “92. यह न्यायालय, दो निनण>यों में उपयु>क्त चचा> क े आलोक में, और संदभ> क े जवाबों को ध्यान में रख े हुए, स्प• कर ा है निक द.प्र.सं. की ारा 438 क े ह यातिचकाओं पर निवचार कर े हुए न्यायालयों द्वारा निनम्नलिललिख बा ों को ध्यान में रखने की आवश्यक ा है।

92.1. श्री गुरबक्श सिंसह जिसनिबया और अन्य बनाम पंजाब राज्य ((1980) 2 एससीसी 565)वाले मामले क े फ ै सले क े अनुरूप, जब व्यनिक्त निगरफ् ारी की आशंका की शिशकाय कर ा है और आदेश क े लिलए आ ा है, ो आवेदन ठोस थ्यों पर आ ारिर होना चानिहए (अस्प• या सामान्य आरोप नहीं)। अनिVम जमान की मांग करने वाले आवेदन में अपरा से संबंति क े वल आवश्यक थ्य होने चानिहए और आवेदक को उतिच रूप से निगरफ् ारी की आशंका क्यों है, सार्थी ही सार्थी कहानी में उसका पक्ष भी होना चानिहए। ये न्यायालय क े लिलए आवश्यक हैं, जो उसक े आवेदन पर निवचार कर रहा है की ख रे या आशंका, उसकी गंभीर ा या संजीदगी और कोईभी श > जो लगानी पG सक ी हो की उपयुक्त ा का मूsयांकन करे। यह आवश्यक नहीं है निक कोई आवेदन प्रार्थीनिमकी निकए जाने क े प{ा ् ही प्रस् ु निकया जाए, इसे पहले प्रस् ु निकया जा सक ा है, बश • निक थ्य स्प• हों और निगरफ् ारी की आशंका करने क े लिलए युनिक्तयुक्त आ ार हो।

92. 2.जिजस अदाल क े पास ारा 438 क े ह आवेदन क े सार्थी संपक > निकया गया हो उसक े लिलए यह लिलए उतिच होगा की वह(निगरफ् ारी की) आशंका की गंभीर ा क े आ ार परलोक अशिभयोजक को नोनि^स जारी करे और सीनिम अं रिरम अनिVम जमान मंजूर कर े समय भी थ्य अशिभप्राप्त करें।

92.3. द प्रनिक्रया संनिह ा की ारा 438 में ऐसा क ु छ भी नहीं है जो अदाल ों को समय क े संदभ> में, या प्रार्थीनिमकी दज> करने, जांच या पूछ ाछ क े दौरान पुलिलस द्वारा निकसी गवाह क े बयान दज> करने आनिद पर राह को सीनिम करने की श > लगाने क े लिलए बाध्य कर ा हो।निकसी आवेदन (अनिVम जमान की मंजूरी क े लिलए) पर निवचार कर े समय न्यायालय को अपरा की प्रक ृ ति, व्यनिक्त की भूनिमका, अन्वेर्षण प्रनिक्रया को प्रभानिव करने या साक्ष्य क े सार्थी छेGछाG (गवाहों को राने- मकाने सनिह ) की संभावना, न्याय से भागने की संभावना (जैसे देश छोGकर जाना), आनिद पर निवचार करना न्यायसंग होगा। ारा 437 (3), द प्रनिक्रया संनिह ा में दी गई श Z को लागू करना चानिहए। [ ारा 438 (2) क े आ ार पर]। अन्य प्रति बं ात्मक श • अति रोनिप करने की आवश्यक ा का निनण>य मामले क े आ ार पर और राज्य या जांच एजेंसी द्वारा प्रस् ु थ्यों क े आ ार पर निकया जाएगा। यनिद मामला या मामले की जरूर हो ो ऐसी निवशेर्ष या अन्य प्रति बं ात्मक श ™ अति रोनिप की जा सक ी हैं, लेनिकन सभी मामलों में निनयनिम रीक े से अति रोनिप नहीं की जानी चानिहए। इसी प्रकार, ऐसी श • जो अनिVम जमान की मंजूरी को सीनिम कर ी हैं, मंजूर की जा सक ी हैं, यनिद वे निकसी मामले या मामलों क े थ्यों में अपेतिक्ष हैं, र्थीानिप, ऐसी सीनिम श • हमेशा अति रोनिप नहीं की जा सक ी हैं।

92.4. न्यायालयों को आम ौर पर अनिVम जमान मंजूर करने या इससे इनकार करने पर निवचार कर े समय अपरा ों की प्रक ृ ति और गंभीर ा, आवेदक की भूनिमका और मामले क े थ्यों जैसे निवचारों से प्रेरिर होकर निवचार करना चानिहए की अनिVम जमान देना है या नहीं। जमान देना या न देना निववेक का निवर्षय है। समान रूप से और यनिद ऐसा है ो निकस प्रकार की निवशेर्ष श • अति रोनिप की जानी हैं (या अति रोनिप नहीं की जानी हैं) मामले क े थ्यों पर निनभ>र हैं और न्यायालय क े निववेकाति कार क े अ ीन हैं।

92.5. अनिVम जमान, अशिभयुक्त क े आचरण और व्यवहार क े आ ार पर, आरोप पत्र दालिखल करने क े बाद निवचारण क े अं क जारी रह सक ी है।

92.6. अनिVम जमान का आदेश इस अर्थी> में 'आवरण'नहीं होना चानिहए, यानिन निक निगरफ् ारी से अनिनति{ संरक्षण निमलने पर यह अशिभयुक्त को आगे अपरा करने का संबल न दे। यह उस अपरा या घ^ना क सीनिम होना चानिहए जिजसक े लिलए निकसी निवशिश• घ^ना क े संबं में निगरफ् ारी की आशंका ज ाई गई है। यह भनिवष्य की निकसी घ^ना क े संबं में काम नहीं कर सक ा है जिजसमें कोई अपरा शानिमल हो।

92.7. अनिVम जमान का आदेश निकसी भी रह से पुलिलस या जांच एजेंसी क े अति कारों या क >व्यों को सीनिम या प्रति बंति नहीं कर ा है, उस व्यनिक्त क े लिखलाफ आरोपों की जांच करने क े लिलए जो निगरफ् ारी पूव> जमान चाह ा है और उसे मंजूरी दी जा ी है।

92.8. अन्वेर्षण प्राति कारी की अपेक्षाओं को सुकर बनाने क े लिलए "सीनिम अशिभरक्षा"या "मानिन अशिभरक्षा"क े संबं में जिसनिबया में की गई नि^प्पशिणयां, निकसी वस् ु की वसूली या निकसी थ्य की खोज की दशा में, ारा 27 क े उपबं ों को पूरा करने क े प्रयोजन क े लिलए पया>प्त होंगी, जो ऐसी निकसी घ^ना (अर्थीा> ् मानिन अशिभरक्षा में) क े दौरान निकए गए निकसी कर्थीन से संबंति है। ऐसी ण्डिस्र्थीति में, अशिभयुक्त से अलग से आत्मसमप>ण करने और जमान लेने क े लिलए कहने का कोई प्रश्न (या आवश्यक ा) नहीं है। जिसनिबया (पूव क्त) ने यह म व्यक्त निकया र्थीा निक "यनिद और जब भी अवसर पैदा हो ा है, ो अशिभयोजन पक्ष क े लिलए इस न्यायालय द्वारा उjर प्रदेश राज्य बनाम देओमन उपाध्याय (एआईआर 1960 एससी 1125)वाले मामले में निदए गए जिसद्धां का अवलंब लेकर जमान पर रिरहा व्यनिक्त द्वारा दी गई जानकारी क े अनुसरण में निकए गए थ्यों की खोज क े संबं में साक्ष्य अति निनयम की खं 27 क े लाभ का दावा करना संभव हो सक ा है।"

92.9. निकसी भी श > क े उल्लंघन निकए जाने पर जैसे निक फरार होने, जांच क े दौरान सहयोग नहीं करने, परिरहार करने, जांच या मुकदमे क े परिरणाम को प्रभानिव करने की दृनि• से गवाहों को मकाने या उकसाने की ण्डिस्र्थीति में पुलिलस या जांच एजेंसी को ारा 439 (2) क े ह आरोपी को निगरफ् ार करने क े निनद•श क े लिलए संबंति अदाल में जाने का अति कार है जिजसने अनिVम जमान प्रदान की है।

15. प्रस् ुति यों पर निवचार करने क े बाद, रिरकॉ > पर आए थ्यों, निवशेर्ष रूप से राज्य-प्रति वादी संख्या-1 का उनक े प्रति -शपर्थी पत्र में लिलया गया म और अनिVम जमान की मंजूरी या अस्वीक ृ ति पर माजूद कानून क े मद्देनजर, हमारा यह म है निक अशिभकशिर्थी अपरा ों की गंभीर ा को ध्यान में रख े हुए, यह अनिVम जमान मंजूर करने क े लिलए एक उपयुक्त मामला नहीं र्थीा, जबनिक राज्य क े अनुसार, बरामदनिगयां अभी की जानी हैं और प्रत्यर्थी4 नं.[2] ने जांच में पूरा सहयोग नहीं निदया है।

16. प्रति वादी नं.[2] एक आम आदमी नहीं है, कानून का पालन करने वाला व्यनिक्त होने क े ना े कानून क े प्रति उसकी निनष्ठा सामान्य रूप से एक आम आदमी से की जाने वाली अपेक्षा से अति क होनी चानिहए, जिजसका पालन करने में वह स्प• रूप से निवफल रहा।

17. हम यह भी महसूस कर े हैं निक उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्थी4 नं. 2 द्वारा उसकी यातिचका में स्र्थीानिप मामले को सच क े रूप में स्वीकार कर काय>वाही की है और उस आ ार पर अनिVम जमान मंजूर की है। हमारी राय में उच्च न्यायालय ने त्रुनि^ की है ।

18. दनुसार, अपील मंजूर निकए जाने की आवश्यक ा है। उच्च न्यायालय क े निदनांक 25.08.2021 क े आक्षेनिप निनण>य और आदेश को रद्द निकया जा ा है और प्रति वादी नं.[2] द्वारा दं प्रनिक्रया संनिह ा की ारा 438 क े ह दायर यातिचका को बखा>स् निकया जा ा है।

19. हम प्रत्यर्थी4 नं.[2] को आत्मसमप>ण क े लिलए दो सप्ताह का समय दे े हैं, जिजसक े न होने पर जांच एजेंसी उसे ुरं निगरफ् ार करने और कानून क े अनुसार निनष्पक्ष और उतिच रीक े से जांच करने क े लिलए स्व ंत्र होगी।

20. इसमें ऊपर की गई नि^प्पशिणयां क े वल अपील क े निनप^ान क े लिलए हैं। यनिद निनयनिम जमान आवेदन दायर निकया जा ा है, ो ऊपर की गई निकसी भी नि^प्पणी से प्रभानिव हुए निबना कानून क े अनुसार उसक े स्वयं क े गुण-दोर्ष पर निवचार निकया जा सक ा है।

21. अपील उपयु>क्त रूप में स्वीकार की जा ी है। …………………… न्याया ीश [अजय रस् ोगी] …………………… न्याया ीश [निवक्रम नार्थी] नई निदल्ली, 12 जुलाई, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.