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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्या 4149/2022
डॉ. गजेंद्र सिंसह ......अपीलक ा, बनाम
भार संघ और अन्य ...... प्रत्यर्थी2गण
निनण,य
न्यायमूर्ति एम आर शाह
JUDGMENT
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रिरट अपील संख्या 64492/2008 में पारिर 14.02.2017 निदनांनिक आक्षेनिप निनण,य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट होकर मूल यातिGकाक ा, ने व,मान अपील दायर की है, जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने कथिर्थी अपील को खारिरज कर निदया है और निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर निनण,य और आदेश में हस् क्षेप नहीं निकया है, जिजसमें यातिGकाक ा, ने "सेवा से हटाने जो भनिवष्य क े रोजगार क े लिलए अयोग्य ा नहीं होगी" क े अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा लगाए गए दंड को Gुनौ ी दी र्थीी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 677
2. अपीलक ा, 1995 और 96 की अवति क े दौरान यूनाइटेड इंश्योरेंस क ं पनी का शाखा प्रबं क र्थीा। उन्होंने 20.03.1996 से 19.03.1997 की अवति क े लिलए Gंद्र सिंसह नामक व्यनिY की वाहन संख्या डीएल 1 पी 7143 क े संबं में 20.03.1996 को एक बीमा कवर नोट संख्या 543675 जारी की।उसी निदन उन्होंने एक और कवर नोट जारी निकया। यह पाया गया निक पहले कवर नोट संख्या 543675 क े लिलए उन्होंने कोई प्रीनिमयम नहीं लिलया र्थीा और दूसरे कवर नोट संख्या 543680 क े लिलए बीनिम व्यनिY द्वारा निदया गया Gेक बाउंस हो गया र्थीा। बीनिम वाहन 20.04.1996 को दुघ,टना का थिशकार हो गया, जिजसक े संबं में प्रर्थीम बीमा कवर नोट संख्या 543675 क े आ ार पर दावा दायर निकया गया र्थीा। मोटर वाहन दुघ,टना अति करण द्वारा 3,24,400/- रुपए का एक अति निनण,य पारिर निकया गया। बीमा क ं पनी ने इसे स्वीकार कर लिलया। हालांनिक, अनुशासनात्मक प्राति कारी ने 18.10.2001 को अपीलक ा, को एक आरोप पत्र जारी निकया, जिजसमें आरोप लगाया गया निक अपीलक ा, ने निबना निकसी प्रीनिमयम क े कवर नोट संख्या 543675 जारी निकया र्थीा, इस प्रकार उसने बीमा क ं पनी को निवत्तीय नुकसान पहुंGाया र्थीा। इसलिलए, यह आरोप लगाया गया र्थीा निक अपीलक ा, क,व्य क े प्रति सत्यनिनष्ठा, समप,ण बनाए रखने में निवफल रहा र्थीा और उसने क ं पनी क े निह ों क े प्रति क ू ल रीक े से काम निकया र्थीा। अपीलक ा, द्वारा आरोपों का जवाब निदया गया।उन्होंने उन परिरस्थिस्र्थीति यों का वण,न निकया जिजनक े ह उन्होंने पहला कवर नोट जारी निकया र्थीा, क्योंनिक उस समय जब कवर नोट जारी निकया गया र्थीा, ो उन्होंने बीनिम व्यनिY द्वारा निदए गए आश्वासन पर भरोसा निकया र्थीा निक वह उनको व्यनिYग रूप से राथिश भेजेगा, लेनिकन उसने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रीनिमयम राथिश नहीं भेजी।इसक े बजाय, बीनिम व्यनिY ने एक अन्य बीमा पॉलिलसी क े लिलए आवेदन निकया, जिजसक े लिलए एक Gेक निदया गया र्थीा, हालांनिक Gेक बाउंस हो गया।इसलिलए, अपीलक ा, की ओर से यह मामला र्थीा निक बीनिम व्यनिY और बीमा क ं पनी क े बीG लंबे समय से संबं होने क े कारण, उसने बीनिम व्यनिY द्वारा निदए गए इस आश्वासन पर भरोसा निकया निक वह राथिश भेजेगा और उस आश्वासन पर, उसने पहला कवर नोट जारी निकया।निवभागीय जांG में अपीलक ा, क े लिखलाफ लगाए गए आरोप सानिब हुए। अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा जांG रिरपोट, स्वीकार कर ली गई।इसलिलए अपीलक ा, को सेवा से हटा निदया गया, हालांनिक भनिवष्य क े रोजगार क े लिलए अयोग्य नहीं ठहराया गया। अपीलक ा, ने हटाए जाने क े आदेश को निवद्वान एकल न्याया ीश क े समक्ष Gुनौ ी दी। निवद्वान एकल न्याया ीश ने रिरट यातिGका को खारिरज कर निदया। रिरट यातिGका को खारिरज कर े हुए निवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा पारिर निनण,य और आदेश की खण्ड पीठ द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण,य और आदेश द्वारा पुनिष्ट की गई है।
3. संबंति पक्षों क े निवद्वान अति वYा को सुनने क े बाद और अपीलक ा, द्वारा निदए गए आरोप पत्र क े जवाब और क, संग स्पष्टीकरण पर निवGार करने पर, हमारी राय है निक अपीलक ा, क े लिखलाफ अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा पारिर हटाए जाने का आदेश, जिजसने लगभग बीस साल से अति क की सेवा प्रदान की र्थीी और यह थ्य निक अपीलक ा, का एक बेदाग सेवा रिरकॉड, र्थीा, हमारी राय है निक सेवा से हटाने की सजा आरोप और सानिब निकए जाने वाले कदाGार से असंग है। ऐसा प्र ी हो ा है निक बीनिम व्यनिY एक पुराना ग्राहक र्थीा और बीनिम व्यनिY व बीमाक ा, क ं पनी का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उसक े सार्थी लंबे समय से संबं र्थीा। याGी ने बीनिम व्यनिY द्वारा निदए गए इस आश्वासन पर भरोसा निकया निक वह न भेजेगा और उस आश्वासन पर यातिGकाक ा, ने पहला कवर नोट जारी निकया। हालांनिक, उसी समय जब उस वाहन क े संबं में दूसरा कवर जारी निकया गया र्थीा, अपीलक ा, को पहले कवर नोट को रद्द करना र्थीा जिजसे अपीलक ा, ने रद्द नहीं निकया, जिजसक े परिरणामस्वरूप बीमा क ं पनी को नुकसान हुआ है। हालांनिक, सार्थी ही यह नहीं कहा जा सक ा है निक अपीलक ा, सत्यनिनष्ठा बनाए रखने में निवफल रहा।अ ः यह सेवा से हटाए जाने से कम का दण्ड़/अन्य कोई दंड अति रोनिप करने का एक उपयुY मामला है।
4. उपयु,Y को ध्यान में रख े हुए और उपयु,Y कारण से व,मान अपील भाग ः सफल हो ी है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेनिप निनण,य और आदेशों को ए द्द्वारा रद्द और अपास् निकया जा ा है। अनुशासनिनक प्राति कारी द्वारा अपीलक ा, को सेवा से हटाने क े लिलए आरोनिप दंड क े आदेश को ए द्द्वारा रद्द और अपास् निकया जा ा है और मामले को अनुशासनिनक प्राति कारी को सेवा से हटाने क े आदेश से कम/अन्य कोई भी उपयुY दंड देने क े लिलए भेजा जा ा है। पूव Y काय, व,मान आदेश की ारीख से ीन महीने की अवति क े भी र पूरा कर लिलया जाएगा। व,मान अपील को आंथिशक रूप से पूव Y सीमा क अनुज्ञा निकया जा ा है। हालांनिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, खGp क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA....................................… (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह)...................................… (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई निदल्ली, 11 जुलाई 2022. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA