Rajasthan State v. Ultratech Cement Limited

Supreme Court of India · 26 Aug 2022 · 2022 INSC 871
N. V. Ramana; V. Ramasubramanian; C. T. Ravikumar
Special Appeal No. 5841 of 2022 @ Appeal (Special) No. 37439 of 2016
2022 INSC 871
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's order directing the Rajasthan State Government to allocate disputed land for a cement plant after finding no environmental impediments to reclassifying the land from 'jod' to government land.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारिरता
सिसविर्वोल याधि का संख्या 5841/2022
अपील(सिसविर्वोल)सं.37439/2016 क
े लिलए विर्वोशेष अनुमधित क
े लिलए याधि का
राजस्थान राज्य और अन्य - अपीलकता5
बनाम
अल्ट्राटेक सीमेंट लिलविमटेड - प्रधितर्वोादी
विनर्ण5य
वि?मा को?ली, न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमधित अनुदत्त गई।

2. अपीलकता5-राजस्थान राज्य (संक्षेप में राज्य सरकार) ने राजस्थान उच्च न्यायालय बें जयपुर की खण्ड पीठ द्वारा पारिरत विदनांक 26 फरर्वोरी, 2016 क े विनर्ण5य को ुनौधित दी ?ै, सिजसक े द्वारा विर्वोद्वत एकल न्याया ीश द्वारा एस. बी. सिसविर्वोल रिरट पीटीशन नंबर 15416/2012 में विदनांक 05 अक्टूबर, 2012 को पारिरत आदेश को अपास्त करते ?ुए प्रत्यथT-अल्ट्राटेक सीमेंट लिलविमटेड (संक्षेप में क ं पनी) द्वारा पेश की गई अपील को स्र्वोीकार करते ?ुए अपीलकता5-राज्य सरकार को विदनांक 23 फरर्वोरी 2013 तक त?सील नर्वोलगढ़, सिजला झून्झुनू में एक सीमेंट संयंत्र स्थाविपत करने क े लिलए ?स्ताक्षरकता5-क ं पनी क े पक्ष में भूविम क े आर्वोंटन की प्रविXया करने क े का विनदYश विदया । 2022 INSC 871 संक्षेप में मामले क े तथ्यों का एक संधिक्षप्त अर्वोलोकन आर्वोश्यक ?ै। 3.[1] त?सील नर्वोलगढ़, सिजला झुंझुनू में स्थिस्थत ार गांर्वोों में प्रधितर्वोष[5] 3 विमलिलयन टन सीमेंट की क्षमता र्वोाला एक सीमेंट संयंत्र स्थाविपत करने क े विर्वो ार से, प्रत्यथT क ं पनी ने प्रत्यक्ष बात ीत द्वारा से 400 ?ेक्टेयर भूविम खरीदी/अधि ग्रवि?त की और विनजी बात ीत द्वारा और साथ ?ी रिरको द्वारा भूविम क े शेष वि?स्से का अधि ग्र?र्ण करने क े लिलए कदम उठाए। सीमेंट विनमा5र्ण क े इस प्रोजेक्ट को प्रारंभ करने क े लिलए प्रत्यथT क ं पनी ने अपीलाथT राज्य सरकार से र्वोष[5] 2000-2001 में त?सील नर्वोलगढ़, सिजला झुन्झुनू में लाईम स्टोन खविनज (सीमेंट ग्रेड) क े लिलए पास की लगी ?ुई खनन पट्टों क े अनुदान क े लिलए आर्वोेदन विकया । दो खनन पट्टों क े संबं में अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा विदनांक 16 मा 5, 2002 को आशय पत्र (एलओआई) जारी विकया गया था, लेविकन विन ा5रिरत समय क े भीतर पया5र्वोरर्ण मंजूरी की अनुपलब् ता क े कारर्ण, राज्य सरकार द्वारा उक्त एलओआई को 7 फरर्वोरी, 2005 क े आदेश द्वारा रद्द कर विदया गया था। प्रत्यथT क ं पनी ने इस आदेश को ुनौती देते ?ुए खान न्यायाधि करर्ण क े समक्ष एक पुनरीक्षर्ण याधि का दायर की थी, सिजसे विदनांक 19 जुलाई, 2007 क े आदेश द्वारा अनुमधित दी गई थी और मामले को कानून क े अनुसार नए सिसरे से जां क े लिलए राज्य सरकार को र्वोापस भेज विदया गया था। अपीलकता5-राज्य सरकार ने विदनांक 22 नर्वोम्बर 2007 क े आदेश से क ु छ शतh क े अनुपालन और प्रधितर्वोादी क ं पनी द्वारा प्रस्तुत विकए जाने र्वोाले एक उपXम क े अ ीन र?ते ?ुए, एलओआई को पुनस्था5विपत विकया । तथाविप, उक्त एलओआई को खान अधि करर्ण द्वारा विदनांक 29 जुलाई, 2009 क े आदेश द्वारा रद्द कर विदया गया था। उक्त रद्द करने क े आदेश से व्यथिथत प्रत्यथT क ं पनी ने एक रिरट याधि का दायर करक े उच्च न्यायालय का दरर्वोाजा खटखटाया, सिजसे विदनांक 19 अगस्त, 2010 क े आदेश द्वारा स्र्वोीकार विकया गया और अपीलाथT-राज्य सरकार ने अंततः 28 अक्टूबर, 2010 को एक एलओआई जारी विकया.

3. 2 इस बार, झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर ने खनन पट्टे क े क्षेत्र में आने र्वोाली सरकारी भूविम क े आर्वोंटन क े लिलए प्रधितर्वोादी क ं पनी को एक सीमेंट संयंत्र स्थाविपत करने क े लिलए 23 फरर्वोरी, 2012 को एक अनुमोदन पत्र जारी विकया, जो उसमें विन ा5रिरत क ु छ शतh को पूरा करने क े अ ीन ?ै। झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर द्वारा जारी उपयु5क्त पत्र का उद्धरर्ण नी े विदया गया ?ैः 'सर, उपयु5क्त विर्वोषय क े त?त उसिnलिखत पत्र क े माध्यम से, राज्य सरकार ने सीमेंट संयंत्र की स्थापना क े लिलए खनन पट्टे क े क्षेत्र में आने र्वोाली भूविम क े आरक्षर्ण और आर्वोंटन क े लिलए मंजूरी दी ?ै, जो एल. आर. अधि विनयम की खंड 92 क े त?त दी जाती ?ै, जो विनम्नलिललिखत शतh क े पूरा ?ोने क े अध्य ीन ?ोगीः- - (i) खनन पट्टे पर विदए गए क्षेत्र में ारागा? क े रूप में दज[5] भूविम क े आर्वोंटन का अनुमोदन आर्वोेदक क ं पनी क े पक्ष में इस शत[5] क े साथ विदया जाता ?ै विक क ं पनी उसी गांर्वो में इसे खरीदने क े बाद और इसे राई भूविम क े रूप में विर्वोकसिसत करने क े बाद आर्वोंविटत भूविम क े बराबर भूविम का आत्मसमप5र्ण करेगी और इस भूविम की ार दीर्वोारों की बाड़ लगाने क े बाद संबंधि त ग्राम पं ायत को भी उपलब् कराएगी। (ii) खनन पट्टे क े क्षेत्र में आने र्वोाली गैर मुमविकन जो?ड़ भूविम क े लिलए सैद्धांधितक स?मधित क ं पनी क े पक्ष में दी जाती ?ै, बशतY विक क ं पनी अन्य भूविम खरीदेगी और उसे जो?ड़ क े रूप में विर्वोकसिसत करेगी और इसे ग्राम पं ायत को सौंप देगी। क ं पनी माननीय उच्च न्यायालय से प्राप्त जो?ड़ भूविम क े लिलए एनओसी/आदेश भी प्रस्तुत करेगी। (iii) आर्वोंटन क े लिलए क ं पनी क े आर्वोेदन पर विर्वो ार तभी विकया जाएगा जब र्वो? खनन पट्टे र्वोाले क्षेत्र में स्थिस्थत गैर- मुमविकन अबादी स्क ू ल, कविtस्तान, मस्थिस्जद आविद क े लिलए पं ायत राज विर्वोभाग और थिशक्षा विर्वोभाग क े सक्षम प्राधि कारी की अनुमधित/अनापलित्त प्रमार्ण पत्र प्रस्तुत करेगी। (iv) खनन पट्टा क्षेत्र में 0.32 ?ेक्टेयर भूविम अजमेर विर्वोद्युत विर्वोतरर्ण विनगम लिलविमटेड क े नाम दज[5] ?ै। उक्त भूविम अजमेर विर्वोद्युत विर्वोतरर्ण विनगम लिलविमटेड से अनापलित्त प्राप्त कर प्रस्तुत करने पपर क ं पनी क े नाम पर आर्वोंविटत की जायेगी । (v) विनयमों क े अनुसार इस उद्देश्य क े लिलए खनन पट्टे क्षेत्र क े अंतग5त आने र्वोाले प्रस्तार्वो क े अनुसार गैर-मुमविकन बानी और गैर-मुमविकन माग[5] की र्वोगTक ृ त भूविम क े लिलए स?मधित जारी की जाती ?ै। इसलिलए क ृ पया उपरोक्त कार5र्वोाई सुविनधिxत करें। संलग्नः जैसा विक ऊपर बताया गया ?ै। एसडी सिजला कलेक्टर, झुंझुनू

3. 3 उपरोक्त पत्र में विनवि?त शत[5] संख्या (iii) को ध्यान में रखते ?ुए, सिजसमें प्रत्यथT क ं पनी को उच्च न्यायालय से 'जो?ड़'भूविम क े लिलए एनओसी/आदेश प्रस्तुत करने क े लिलए क?ा गया था, प्रत्यथT क ं पनी ने एस. बी. सिसविर्वोल रिरट याधि का संख्या 15416/2012 दायर करक े उच्च न्यायालय का दरर्वोाजा खटखटाया। कथिथत रिरट याधि का क े साथ साइट क े स्थल विनरीक्षर्ण, त?सीलदार की रिरपोट[5] और पक्षकारों क े बी पत्रा ार से संबंधि त कई दस्तार्वोेज थे, जो य? प्रदर्शिशत करते ?ैं विक विर्वोषय भूविम सिजसे 'जो?ड़'क े रूप में र्वोगTक ृ त विकया गया था, न तो य? जलग्र?र्ण क्षेत्र में आता था, न ?ी र्वो?ां पानी इकट्ठा ?ोता था और इस विर्वोषय भूविम पर पानी का कोई प्राक ृ धितक स्रोत मौजूद न?ीं था और इसलिलए, विर्वोषय भूविम क े र्वोगTकरर्ण को 'सिसर्वोाई क'भूविम में परिरर्वोर्तितत विकया जा सकता था। रिरट याधि का में विकए गए प्रकथनों से स?मत न?ीं ?ुए, विर्वोद्वान एकल न्याया ीश ने रिरट याधि का को इस विटप्पर्णी क े साथ खारिरज कर विदया विक य? राज्य सरकार को तय करना ?ै विक विर्वोर्वोाविदत भूविम 'जो?ड़'भूविम ?ै या न?ीं और य? विक न्यायालय अब्दुल र?मान बनाम राजस्थान राज्य और अन्य 2004 (4) WLC (Raj.) 435 क े मामले में उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े फ ै सले से बं ा ?ुआ था।

3. 4 अपनी रिरट याधि का क े सीविमत रूप से खारिरज ?ोने से असंतुष्ट प्रधितर्वोादी क ं पनी ने डी. बी. विर्वोशेष अपील (रिरट) सं. 73/2013 क े रूप में पंजीक ृ त उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष एक अपील प्रस्तुत की। य? देखते ?ुए विक प्रत्यथT-क ं पनी द्वारा मामले की नए सिसरे से जां करने और राजस्र्वो रिरकॉड[5] में आर्वोश्यक सु ार करने क े लिलए अपीलाथT-राज्य सरकार को प्रस्तुत विकए गए कई अभ्यार्वोेदन लंविबत थे, खण्ड पीठ ने 23 नर्वोंबर, 2015 क े आदेश द्वारा, अपीलाथT- राज्य सरकार को विनदYश विदया विक र्वो? म?ाविनदेशक, अनुसं ान और विर्वोकास बनाम राजस्थान राज्य और अन्य 211 SCC Online Raj 3197 क े मामले में की गई विटप्पथिर्णयों क े आलोक में प्रत्यथT क े अभ्यार्वोेदन पर विर्वो ार करे, जो विर्वोशेष रूप से, उसक े पैरा 3 में नी े उद्धृत विकया गया ?ैः "तथ्यों क े आ ार पर य? स्र्वोीकार विकया जाता ?ै विक र्वोास्तर्वो में घटनास्थल पर कोई गैर मुमविकन नदी मौजूद न?ीं ?ै, इसलिलए इस न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा विदया गया विनर्ण5य (अब्दुल र?मान बनाम राजस्थान राज्य और अन्य) आर्वोंटन करने में प्रधितर्वोादी क े रास्ते में न?ीं आएगा । उपयु5क्त तथ्यात्मक मैविट्रक्स और आर्वोश्यकता की प्रक ृ धित को ध्यान में रखते ?ुए, ?म विनदYश देते ?ैं विक आज से छ? सप्ता? क े भीतर आर्वोंटन प्रविXया को पूर्ण[5] करें ।" पूर्वो क्त आदेश पारिरत करते समय, य? स्पष्ट विकया गया था विक यविद अपीलकता5 राज्य सरकार प्रत्यथT-क ं पनी क े प्रधितविनधि त्र्वो का विनर्ण5य न?ीं करती ?ै, तो अपील पर गुर्ण- दोष क े आ ार पर विनर्ण5य लिलया जाएगा ।

3. 5 पूर्वो क्त आदेश क े अनुपालन में, अपीलाथT-राज्य सरकार अन्य बातों क े साथ साथ बातों क े साथ-साथ य? अथिभविन ा5रिरत करते ?ुए विदनांक 25 जनर्वोरी, 2016 का एक आदेश पारिरत विकया विक राजस्र्वो अथिभलेख में 'जो?ड़'क े रूप में अथिभलिललिखत की गई विर्वोषय भूविम क े कारर्ण प्रत्यथT-क ं पनी क े पक्ष में कोई आबंटन न?ीं विकया जा सकता था।अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा लिलए गए पूर्वो क्त दृविष्टकोर्ण को ध्यान में रखते ?ुए, खण्ड पीठ ने प्रत्यथT की अपील को गुर्ण-दोष क े आ ार पर सुना और उस आक्षेविपत विनर्ण5य क े आ ार पर इसकी अनुमधित दी, सिजसक े त?त अपीलकता5 राज्य सरकार को प्रश्नगत विर्वोषय भूविम प्रत्यथT क ं पनी को आर्वोंविटत करने और मामले में परिरर्णामी कदम उठाने का विनदYश विदया गया ?ै ।

3. 6 उच्च न्यायालय ने आक्षेविपत विनर्ण5य में विर्वोविनर्दिदष्ट रूप से अथिभलिललिखत विकया ?ै विक अपीलाथT-राज्य सरकार क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने न्यायालय क े समक्ष भी इस तथ्य पर विर्वोर्वोाद न?ीं विकया विक यद्यविप प्रश्नगत विर्वोषय भूविम 'जो?ड़'क ृ त की गई थी, य? न तो विकसी जलग्र?र्ण क्षेत्र क े भीतर आती थी और न ?ी र्वो?ां कभी पानी इकट्ठा ?ोता था और विर्वोषयागत भूविम पर कोई पानी का प्राक ृ धितक स्त्रोत भी न?ीं था। न्यायालय ने क?ा विक क्षेत्र की स्थलाक ृ धित को देखते ?ुए इस स्थल का विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए कोई उपयोग न?ीं था। र्वोास्तर्वो में, खनन क े लिलए यविनत उक्त स्थल में र्वोाथिर्णस्थिज्यक रूप से व्यर्वो?ाय[5] ूना पत्थर क े भंडार थे और ग्राम पं ायत, बसर्वोा क े साथ उधि त परामश[5] क े बाद यन विकया गया था। इस प्रकार, भूविम की स्थिस्थधित क े बारे में त?सीलदार, भूविम अथिभलेख, नर्वोलगढ़ द्वारा दायर तथ्य-खोज रिरपोट[5] को अस्र्वोीकार करने का कोई औधि त्य न?ीं था। र्वोास्तर्वो में, उक्त रिरपोटh को अपीलाथT-राज्य सरकार द्वारा विर्वोधि र्वोत स्र्वोीकार कर लिलया गया था ।

3. 7 आक्षेविपत विनर्ण5य य? अथिभलिललिखत करता ?ै विक विर्वोद्वत एकल न्याया ीश द्वारा विनर्दिदष्ट अब्दुल र?मान क े मामले में, न्यायालय ने क े र्वोल राज्य सरकार को उनक े मूल आकार क े जलग्र?र्ण क्षेत्रों की ब?ाली क े लिलए एक योजना तैयार करने का विनदेश विदया था। उक्त विनर्ण5य में सार्वो5जविनक न्यास क े रूप में ारिरत संपलित्त क े अलगार्वो को प्रधितबंधि त न?ीं विकया गया, सिसर्वोाय इस तथ्य को उजागर करने क े विक इस तर? क े विकसी भी अलगार्वो क े लिलए उच्च स्तर की न्याधियक जां की आर्वोश्यकता ?ोगी, इस प्रकार सार्वो5जविनक न्यास क े सिसद्धांत और सतत विर्वोकास क े सिसद्धांत क े बी एक संतुलन बनाया जा सकता ?ै। य? देखा गया विक इस मामले में एक व्यार्वो?ारिरक दृविष्टकोर्ण अपनाया जाना ावि?ए, विर्वोशेष रूप से जब 'जो?ड़'क ृ त क्षेत्र, विकसी भी जलग्र?र्ण क्षेत्र में न?ीं आता ?ै, न ?ी कोई प्राक ृ धितक जल जलाशय ?ै सिजसे 'जो?ड़'की श्रेर्णी से 'सर्वोाई क'भूविम में र्वोगTक ृ त विकया जा सक े । 4 श्री विमलिंलद क ु मार, अपीलाथT-राज्य सरकार की ओर से उपस्थिस्थत स्थायी अधि र्वोक्ता ने य? प्रस्तुत करक े आक्षेविपत विनर्ण5य की आलो ना की विक उच्च न्यायालय ने म?ाविनदेशक, अनुसं ान और विर्वोकास अब्दुल र?मान क े मामले में उच्च न्यायालय क े विनर्ण5य क े विर्वोपरीत, ज?ां खण्ड पीठ ने य? विनर्ण5य विदया ?ै विक विनमा5र्ण गधितविर्वोधि क े लिलए नदी की भूविम या अन्य जल विनकायों का उपयोग करने का कोई अधि कार न?ीं विदया जा सकता ?ै और तालाब/जलाशय का जलग्र?र्ण विकसी भी व्यविक्तगत/र्वोाथिर्णस्थिज्यक उद्देश्य क े लिलए आर्वोंविटत न?ीं विकया जाएगा जो विक व्यार्वोसाधियक उद्देश्य क े लिलए 'जो?ड़'भूविम का उपयोग करने से पया5र्वोरर्ण को नुकसान ?ो सकता ?ै। उच्च न्यायालय ने म?ाविनदेशक, अनुसं ान और विर्वोकास पर भरोसा करक े गलती की ?ै; इस न्यायालय क े विर्वोथिभन्न विनर्ण5यों यथा र्वोेnोर र्वोेnोर नागरिरक कल्यार्ण फोरम बनाम भारत संघ और अन्य (1996) 5 SCC 647, ए.पी. प्रदूषर्ण विनयंत्रर्ण बोड[5] बनाम प्रो. एम. र्वोी. नायडू (सेर्वोाविनर्वोृत्त) और अन्य (1999) 2 SCC 718, लाफाज[5] उविमयाम माइनिंनग प्राइर्वोेट लिलविमटेड (आर्वोेदक) ने टी. एन. गोदरर्वोम5न थिथरुमुलपाद बनाम भारत संघ और अन्य(2011) 7 SCC 338, इलेक्ट्रोथम[5] (इंधिडया) लिलविमटेड बनाम पटेल विर्वोपुलक ु मार रामजीभाई और अन्य (2016) 9 SCC 300, कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2017) 9 SCC 499, एलेस्थिम्बक फामा5स्यूविटकल्स लिलविमटेड बनाम रोवि?त प्रजापधित और अन्य (2020) 17 SCC 157 में पया5र्वोरर्ण मामलों में ए?धितयाती सिसद्धांत क े उपयोग पर प्रकाश डाला ?ै और माना ?ै विक सबूत का बोझ परिरयोजना क े प्रस्तार्वोक पर ?ै जो यथास्थिस्थधित को बदलने या पया5र्वोरर्ण पर प्रभार्वो डालने का प्रस्तार्वो कर र?ा ?ै। इस न्यायालय क े जगपाल सिंस? और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य (2011) 11 SCC 396 र्वोाले मामले में विदए गए फ ै सले पर भी विर्वो ार करने की मांग की गई, ज?ां सभी राज्य सरकारों को क े अर्वोै कब्जों की बेदखली क े लिलए योजनाएं तैयार करने क े लिलए विनदYश जारी विकए गए थे। ग्राम सभा की भूविम क्षेत्र क े ग्रामीर्णों क े सामान्य उपयोग क े लिलए और उक्त भूविम की ब?ाली क े लिलए ?ै। अपीलकता5-राज्य सरकार क े विर्वोद्वत अधि र्वोक्ता ने ?ाल ?ी में दालिखल क ु छ अधितरिरक्त दस्तार्वोेजों को, विर्वोशेष रूप से, नर्वोलगढ़ क े त?सीलदार द्वारा सिजला कलेक्टर को संबोधि त 7 जुलाई, 2014 क े पत्र को संदर्शिभत विकया, सिजसमें झुंझुनू सिजले में खनन क्षेत्र क े रूप में प? ाने गए ार गांर्वोों में से एक में भूविम की स्थिस्थधित का उnेख विकया गया था, अथा5त् गांर्वो बसर्वोा और क?ा गया था विक उक्त गांर्वो की क ु छ खसरा संख्याओं में, एक पक्का तालाब ?ै जो बारिरश क े पानी क े जलग्र?र्ण क्षेत्र क े रूप में काय[5] करता ?ै। राज्य सरकार द्वारा जारी विकए गए क ु छ परिरपत्रों को भी उद्धृत विकया गया ?ै, सिजसमें क?ा गया ?ै विक राजस्र्वो अथिभलेखों में दज[5] विकए गए सभी आबंटन जो 1955 क े बाद नाला, नदी, तालाब, बां या तटबं क े रूप में दज[5] विकए गए थे और भूविम क े र्वोगTकरर्ण को क ृ विष उद्देश्य से गैर-क ृ विष उद्देश्य में बदल कर परिरर्वोर्तितत विकए गए थे, उन्?ें आर्वोंटन क े र्वोगTकरर्ण क े लिलए संबंधि त तथ्यों क े साथ सक्षम न्यायालय को भेजा जाएगा। 5 पूर्वो क्त प्रस्तुधितयों को श्री वि?रेन पी. रार्वोल, प्रत्यथT क ं पनी की ओर से पेश र्वोरिरष्ठ अधि र्वोक्ता द्वारा खारिरज कर विदया गया ?ै, सिजन्?ोंने प्रस्तुत विकया ?ै विक र्वोत5मान अपील विर्वो ारर्णीय न?ीं ?ै जब अपीलकता5-राज्य सरकार ने प?ले ?ी उच्च न्यायालय से अनापलित्त प्रमार्ण पत्र प्राप्त करने क े अध्य ीन प्रत्यथT क ं पनी को खनन उद्देश्य क े लिलए विर्वोषय भूविम का उपयोग करने क े लिलए अपनी सैद्धांधितक स?मधित दे दी ?ै। एक बार जब उच्च न्यायालय ने आक्षेविपत विनर्ण5य में व्यक्त विर्वो ार क े संदभ[5] में अनापलित्त प्रमार्ण पत्र दे विदया ?ै, तो र्वोत5मान अपील दायर करने का कोई अर्वोसर न?ीं था। मेरिरट पर, य? भी तक 5 विदया गया विक इस तथ्य क े बार्वोजूद विक त?सीलदार, नर्वोलगढ़ और सिजला कलेक्टर, झुंझुनू अन्य बातों क े साथ साथ बातों क े साथ-साथ य? बताते ?ुए दो रिरपोट[5] प्रस्तुत की विक विकसी भी समय विर्वोषय भूविम पर कोई जलाशय न?ीं था, अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा भूविम क े पास5ल क े र्वोगTकरर्ण क े संबं में राजस्र्वो रिरकॉड[5] में त्रुविट को सु ारने से इनकार करने का कोई अच्छा कारर्ण न?ीं ?ै, सिजसक े एक वि?स्से को गलत तरीक े से 'गेर-मुमविकन जो?ा'यानी जलाशय भूविम क े रूप में र्वोगTक ृ त विकया गया ?ै । कथिथत प्रस्तुधितयों को सिसद्ध करने क े लिलए, विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने त?सीलदार, नर्वोलगढ़ द्वारा 19/27 अप्रैल, 2011 और 25 नर्वोंबर, 2012/5 विदसंबर, 2012 को प्रस्तुत दो रिरपोटh का उnेख विकया । उन्?ोंने झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर द्वारा की गई सिसफारिरशों द्वारा से राज्य सरकार से इस मामले की जां करने और उधि त आदेश पारिरत करने का आह्वान विकया। विर्वोशेष रूप से, उन्?ोंने 19 विदसंबर, 2012 और 26 फरर्वोरी, 2013 को झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर द्वारा राज्य सरकार क े राजस्र्वो विर्वोभाग क े उप सधि र्वो को संबोधि त पत्रों का उnेख विकया, सिजसमें त?सीलदार, नर्वोलगढ़ द्वारा जारी विकए गए प्रमार्णपत्रों क े आ ार पर 'गेर- मुमविकन जो?ड़'से 'सर्वोाई क'भूविम में भूविम की श्रेर्णी को बदलने की सिसफारिरश की गई थी। विर्वोद्वत अधि र्वोक्ता ने बताया विक विकसी भी स्तर पर अपीलाथT-राज्य सरकार ने त?सीलदार की रिरपोटh या सिजला कलेक्टर द्वारा की गई सिसफारिरशों पर विर्वोर्वोाद न?ीं विकया ?ै। इसक े बजाय, य? अब्दुल र?मान क े मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े फ ै सले का उnेख करता र?ा ?ै, इस बात की सरा?ना विकए विबना विक उक्त फ ै सले में य? घोषर्णा न?ीं की गई ?ै विक सार्वो5जविनक न्यास क े रूप में ारिरत संपलित्त पूरी तर? से प्रधितबंधि त ?ै। य? प्रस्तुत विकया गया विक विनर्ण5य लेने से प?ले प्रत्येक मामले की तथ्य स्थिस्थधितयों की जां की जाएगी और र्वोत5मान मामले में, अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा य? विर्वोर्वोाविदत न?ीं ?ै विक विर्वोषय भूविम विकसी जलग्र?र्ण क्षेत्र में न?ीं आती ?ै, पानी र्वो?ां इकट्ठा न?ीं ?ोता ?ै और भूविम पर कोई प्राक ृ धितक जल-जलाशय न?ीं ?ै। र्वोष[5] 2000 में शुरू ?ुई और अब तक जारी ?ै, प्रधितर्वोादी- क ं पनी क े पक्ष में जारी की गई पया5र्वोरर्ण मंजूरी र्वोष[5] 2022 क े अंत में समाप्त ?ोने र्वोाली ?ै, सिजसक े परिरर्णामस्र्वोरूप अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा जारी विकए गए एलओआई को स्र्वोतः रद्द कर विदया जाएगा, इस प्रकार प्रधितर्वोादी-क ं पनी विबना विकसी गलती क े अस?ाय र? जाएगी। इसलिलए य? आग्र? विकया गया विक आक्षेविपत विनर्ण5य में ?स्तक्षेप विकए जाने का ?कदार न?ीं ?ै, क्योंविक य? राजस्र्वो अधि कारिरयों द्वारा प्रस्तुत तथ्य खोज रिरपोटh पर आ ारिरत ?ै, सिजन पर अब तक अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा सर्वोाल न?ीं उठाया गया ?ै। 6 ?मने पक्षकारों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वारा दी गई दलीलों को सुना ?ै, आक्षेविपत विनर्ण5य और अथिभलेख पर रखे गए दस्तार्वोेजों का अर्वोलोकन विकया ?ै। इस न्यायालय क े विर्वो ार क े लिलए क े र्वोल एक मुद्दा उठता ?ै विक एक बार अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा प?ले से ?ी प्रधितर्वोादी क ं पनी क े पक्ष में खनन पट्टे क े त?त सीमेंट संयंत्र स्थाविपत करने क े लिलए विर्वोषय भूविम क े आरक्षर्ण और आर्वोंटन क े लिलए सैद्धांधितक रूप से स?मधित दे दी गई ?ै और 23 फरर्वोरी, 2012 क े अनुमोदन पत्र में दी गई शत[5] ?ै विक प्रधितर्वोादी क ं पनी को उच्च न्यायालय क े आक्षेविपत विनर्ण5य क े आ ार पर 'गेर-मुमविकन जो?ान्सेरी'भूविम क े आबंटन की अनुमधित देने र्वोाले आदेश/आपलित्त प्रमार्ण-पत्र को प्रस्तुत करना ावि?ए और क्या अपीलकता5-राज्य सरकार क े क?ने पर ुनौती दी जाएगी? 7 आक्षेविपत विनर्ण5य का परिरशीलन विनम्नलिललिखत कारकों को इंविगत करता ?ै जो प्रधितर्वोादी क ं पनी द्वारा की गई अपील को मंजूर करने क े लिलए उच्च न्यायालय क े साथ भारिरत ?ैंः (क) नर्वोलगढ़ क े त?सीलदार ने 19 अप्रैल, 2011 को संबंधि त भूविम का भौधितक विनरीक्षर्ण विकया था और सिजला कलेक्टर, झुंझुनू को एक विर्वोस्तृत रिरपोट[5] प्रस्तुत की थी, अन्य बातों क े साथ-साथ य? उnेख विकया गया था विक 'जो?ड़'क ृ त विर्वोषय भूविम न तो जलग्र?र्ण क्षेत्र में आती ?ै और न ?ी र्वो?ां कभी पानी इकट्ठा ?ोता ?ै और इस विर्वोषय भूविम पर पानी का कोई प्राक ृ धितक स्रोत मौजूद न?ीं ?ै।इसलिलए, भूविम की श्रेर्णी को बदलने और इसे 'सर्वोाई क'भूविम क े रूप में दज[5] करने क े लिलए एक सिसफारिरश की गई थी । (ख) विक सिजला कलेक्टर, झुंझुनू ने राजस्र्वो अथिभलेखों को स?ी करने और 'सर्वोाई क'भूविम क े रूप में दज[5] की जाने र्वोाली भूविम क े र्वोगTकरर्ण को बदलने क े लिलए आर्वोश्यक आदेश जारी करने क े लिलए दो अलग-अलग अर्वोसरों पर राज्य सरकार को अपनी सिसफारिरशें दी ?ैं। (ग) राज्य सरकार से 01 फरर्वोरी, 2013 को एक पत्र प्राप्त ?ोने पर, सिजसमें उनसे इस मामले की विफर से जां करने और उधि त आदेश पारिरत करने क े लिलए क?ा गया था, झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर ने 26 फरर्वोरी, 2013 क े पत्र क े माध्यम से एक बार विफर सिसफारिरश की थी विक इस मामले में राजस्र्वो रिरकॉड[5] को ठीक करने क े लिलए आर्वोश्यक आदेश विदए जाने ावि?ए। (घ) विक ग्राम पं ायत बसर्वोा, त?सील नर्वोलगढ़, सिजला झुंझुनू ने विदनांक 3 फरर्वोरी, 2011 को संकल्प संख्या 21 पारिरत विकया, सिजसमें क?ा गया था विक विर्वोषय भूविम में कभी भी पानी जमा न?ीं ?ुआ ?ै और ग्राम पं ायत को खनन पट्टे क े प्रयोजनों क े लिलए ं पनी को 'जो?ड़'क ृ त भूविम देने में कोई आपलित्त न?ीं थी, बशतY विक क ं पनी उसी गांर्वो में ग्राम पं ायत को विर्वोकसिसत भूविम समान रूप से दे (ङ) न्यायालय ने प्रधितर्वोादी क ं पनी द्वारा आसपास क े गांर्वोों क े लाभ क े लिलए विनम्नलिललिखत गधितविर्वोधि यों को शुरू करने क े लिलए रिरट काय5र्वोावि?यों में विदए गए र्वो न ध्यान दें विदया- (i) समान और र्वोैकस्थिल्पक भूविम को उसी गांर्वो में खनन गधितविर्वोधि क्षेत्र में 'जो?ाद'भूविम क े स्थान पर 'जो?ाद'क े रूप में विर्वोकसिसत विकया जाएगा ताविक ग्रामीर्णों को बुविनयादी सुविर्वो ाओं का लाभ विमल सक े । (ii) खनन क्षेत्र में जलाशय का विनमा5र्ण। (iii) क्षेत्र में भूजल रिर ार्जिंजग को बढ़ाने क े लिलए जल सं यन संर नाओं का विर्वोकास। (iv) आसपास क े गांर्वोों में सीएसआर गधितविर्वोधि यों की शुरुआत। ं पनी ने न्यायालय क े समक्ष एक र्वो न विदया विक र्वोैकस्थिल्पक 'जो?ड़'क े लिलए स्थल का विर्वोकास योजनाबद्ध तरीक े से विकया जाएगा ज?ां जलग्र?र्ण क्षेत्र, जल सं यन संर नाओं और मर्वोेशी राई भूविम का विर्वोकास विकया जाएगा। क ं पनी ने भूजल स्तर को बढ़ाने क े लिलए उपयुक्त जल विनकासी पैटन[5] विर्वोकसिसत आदेश क े लिलए डग- कम-बोर र्वोेल (डीसीबी र्वोेल) को इंजेक्शन क ु ओं में बदलने का भी काम विकया । 8 य? अथिभलेख की बात ?ै विक अपीलाथT-राज्य सरकार ने दो अर्वोसरों पर मौक े का विनरीक्षर्ण करने क े बाद नर्वोलगढ़ क े त?सीलदार द्वारा तैयार की गई रिरपोटh पर सर्वोाल न?ीं उठाया ?ै। य? स्थिस्थधित अब भी र्वोैसी ?ी ?ै। प?ली रिरपोट[5] 19/27 अप्रैल, 2011 को त?सीलदार द्वारा और दूसरी 25 नर्वोंबर, 2012/05 विदसंबर, 2012 को तैयार की गई थी। दोनों रिरपोट¥ अपने विनष्कषh में स्पष्ट थीं विक 'जो?ड़'क े रूप में र्वोगTक ृ त विर्वोषय भूविम पर कोई प्राक ृ धितक जल विनकाय न?ीं था और य? विक विर्वोषय भूविम न तो जलग्र?र्ण क्षेत्र में आती थी और न ?ी र्वो?ां पानी इकट्ठा ?ोता था और न ?ी विर्वोषय भूविम पर पानी का कोई प्राक ृ धितक स्रोत था। य? स्थिस्थधित ?ोने क े कारर्ण, ?म अपीलाथT-राज्य सरकार क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता को बसर्वोा गांर्वो में आने र्वोाली विर्वोषय भूविम क े एक वि?स्से क े संबं में सिजला कलेक्टर को त?सीलदार द्वारा संबोधि त 2 जुलाई, 2014 क े एक पत्र पर भरोसा करने की अनुमधित देने का कोई कारर्ण न?ीं देखते विक क ु छ स्थानों पर एक पक्का तालाब मौजूद ?ै, और भी अधि क जब दस्तार्वोेज दालिखल न करने क े लिलए कोई स्पष्टीकरर्ण न?ीं ?ै। उपयु5क्त संसू ना, आक्षेविपत विनर्ण5य क े पारिरत ?ोने की तारीख से ब?ुत प?ले, समुधि त स्तर पर, अपीलाथT-राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष आसानी से दालिखल की जा सकती थी। अपीलाथT-राज्य सरकार को गांर्वो बसर्वोा क े भीतर क ु छ स्थानों पर मौजूद कथिथत पक्क े तालाब की प्रासंविगक तस्र्वोीरें पेश करने से न?ीं रोका । य? अपीलकता5-राज्य सरकार का मामला न?ीं ?ै विक त?सीलदार, नर्वोलगढ़ द्वारा भौधितक स्थल विनरीक्षर्ण करने क े बाद प्रस्तुत की गई विपछली रिरपोटh में ?ेराफ े री की गई थी या दुभा5र्वोनापूर्ण[5] तरीक े से तैयार की गई थी, न ?ी अपील में कोई प्रकथन विकया गया था विक तत्कालीन त?सीलदार, नर्वोलगढ़ क े लिखलाफ घटनास्थल विनरीक्षर्ण की गलत रिरपोट[5] तैयार करने क े लिलए विर्वोभागीय कार5र्वोाई शुरू की गई थी । कथिथत स्थिस्थधित को देखते ?ुए, त?सीलदार, नर्वोलगढ़ द्वारा तैयार की गई दो विनरीक्षर्ण रिरपोटh को खारिरज करने का कोई कारर्ण न?ीं ?ै, जो रिरकॉड[5] का एक वि?स्सा ?ैं । दोनों रिरपोटh में स्पष्ट शब्दों में क?ा गया ?ै विक इस विर्वोषय भूविम पर कोई प्राक ृ धितक जल विनकाय न?ीं ?ै और 'गेर-मुमविकन जो?ड़"क े त?त आती ?ै। य? क्षेत्र जलभरार्वो क्षेत्र या जलग्र?र्ण क्षेत्र क े अंतग5त न?ीं आता ?ै। इसलिलए, ?म 7 जुलाई, 2014 को त?सीलदार, नर्वोलगढ़ द्वारा सिजला कलेक्टर, झुंझुनू को संबोधि त पत्र को कोई भी म?त्र्वो देने से इनकार करते ?ैं। 9 राजस्र्वो विर्वोभाग द्वारा 26 जून, 2012,17 अप्रैल, 2013 और 26 जुलाई, 2017 को जारी विकए गए परिरपत्र भी अपीलकता5-राज्य सरकार क े लिलए कोई स?ायता न?ीं ?ो सकते, क्योंविक सा ारर्ण कारर्ण य? ?ै विक उक्त परिरपत्र उच्च न्यायालय और इस न्यायालय क े विनर्ण5यों क े अनुपालन में जारी विकए गए थे, जो ग्राम पं ायत की भूविम से अधितXमर्ण को ?टाने और र्वो?ां से अनधि क ृ त कब्जा ारिरयों को बेदखल करने का विनदYश देते ?ैं।र्वोत5मान मामला उपरोक्त श्रेथिर्णयों में न?ीं आता ?ै क्योंविक प्रत्यथT-क ं पनी ने खनन उद्देश्य क े लिलए भूविम क े लिलए उधि त ैनल द्वारा से आर्वोेदन विकया ?ै।खनन पट्टे क े क्षेत्र में आने र्वोाली भूविम क े आरक्षर्ण और आर्वोंटन क े लिलए राज्य सरकार से आर्वोश्यक मंजूरिरयों क े साथ, प्रधितर्वोादी क ं पनी ने राजस्र्वो अधि कारिरयों से इस विर्वोषय पर एक संयंत्र स्थाविपत करने क े लिलए संपक 5 विकया था और अनुरो विकया था विक क ु छ स्थानों पर 'जो?ड़'क े रूप में र्वोर्शिर्णत भूविम से संबंधि त राजस्र्वो रिरकॉड[5] में आर्वोश्यक बदलार्वो विकए जाएं, ज?ां र्वोास्तर्वो में कोई 'जो?ड़'मौजूद न?ीं था। इस संदभ[5] में, झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर द्वारा की गई सिसफारिरशों का म?त्र्वो ?ै। इस संबं में प?ला पत्र सिजला कलेक्टर द्वारा अपीलकता5- राज्य क े उप सधि र्वो, राजस्र्वो विर्वोभाग को संबोधि त विकया गया था। सरकार ने 19 विदसंबर, 2012 को इसक े प्रासंविगक अंश को य?ां पुनः प्रस्तुत विकया ?ैः "जब इस संबं में त?सीलदार, नर्वोलगढ़ से एक साइट विनरीक्षर्ण रिरपोट[5] मांगी गई थी, तो उन्?ोंने अपने पत्र संख्या 2501 विदनांक 5.12.12 क े माध्यम से सूधि त विकया विक खसरा नंबर 493 क्षेत्र में गैर-मुमविकन जो?ड़ भूविम पर एक सरकारी प्राथविमक विर्वोद्यालय भर्वोन ?ै, खसरा नंबर 546 रकबा 16.73 ?ेक्टेयर, खसरा नंबर 608 रकबा 17.55 ?ेक्टेयर, खसरा नंबर 649 रकबा 4.81 ?ेक्टेयर, खसरा नंबर 1304/493 रकबा 0.14 ?ेक्टेयर और खसरा नंबर 1316/608 रकबा 0.11 ?ेक्टेयर भूविम बसर्वोा गांर्वो में स्थिस्थत ?ै और शेष भूविम जलग्र?र्ण क्षेत्र क े भीतर न?ीं आती ?ै। उपयु5क्त खसरा संख्या की भूविम में न तो कोई प्राक ृ धितक जलाशय ?ै और न ?ी य? जलग्र?र्ण क्षेत्र में ?ै।नर्वोलगढ़ क े त?सीलदार ने अपनी श्रेर्णी बदलने और इसे थिशर्वो क भूविम घोविषत करने की सिसफारिरश की ?ै। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय क े उपरोक्त विनर्ण5यों क े परिरप्रेक्ष्य में और पत्र संख्या 2501 विदनांक 5.12.12 (प्रधित संलग्न) और संर्वोत 2067-2070 क े लिलए संलग्न जमाबंदी की प्रधित क े साथ संलग्न त?सीलदार रिरपोट[5] को संलग्न करते ?ुए, य? प्रस्तुत विकया जाता ?ै विक त?सीलदार की रिरपोट[5] का विर्वोश्लेषर्ण विकया गया ?ै और मैं रिरपोट[5] से संतुष्ट ?ूं।खसरा नं. 493 क्षेत्र की गेर-मुमविकन जो?ाद भूविम की स्थल विनरीक्षर्ण रिरपोट[5] क े अनुसार खसरा नं. 546 रकबा 16.73 ?ेक्टेयर, खसरा नं. 608 रकबा 17.55 ?ेक्टेयर, खसरा नं. 649 रकबा 4.81 ?ेक्टेयर, खसरा नं. 1304/4 93 रकबा 0.14 ?ेक्टेयर और खसरा नं. 1316/608 रकबा 0.11 ?ेक्टेयर भूविम बसर्वोा गांर्वो में स्थिस्थत ?ै।" 10 उपरोक्त पत्र प्राप्त करने क े बाद, राजस्र्वो विर्वोभाग क े सधि र्वो ने 1 फरर्वोरी, 2013 को झुंझुनू क े सिजला कलेक्टर को संबोधि त एक पत्र अन्य बातों क े साथ-साथ स्पष्ट रूप से क?ा विक क े र्वोल 'सिजला कलेक्टर'क े रूप में उन्?ें य? प्रमाथिर्णत करना ावि?ए विक विर्वोर्वोाविदत भूविम 'जो?ड़'भूविम ?ै या न?ीं और कथिथत प्रमार्णन राज्य सरकार द्वारा न?ीं विकया जाना ?ै। इसलिलए, सिजला कलेक्टर को स्र्वोयं साइट का दौरा करने का विनदYश विदया गया था विक मामले की जां करें और विफर उधि त आदेश जारी करें। उक्त विनदYशों क े अनुपालन में, सिजला कलेक्टर ने 26 फरर्वोरी, 2013 को राजस्र्वो विर्वोभाग क े उप सधि र्वो को एक और पत्र लिलखा, सिजसमें दो?राया गया विक राजस्र्वो रिरकॉड[5] संबंधि त भूविम क े संबंधि त खसरा नंबरों में कोई भी जलाशय दज[5] न?ीं करता ?ै और इसी पृष्ठभूविम में उनक े द्वारा 19 विदसंबर, 2012 को पत्र जारी विकया गया था सिजसमें राजस्र्वो रिरकॉड[5] में त?सीलदार, नर्वोलगढ़ क े प्रमार्णन क े आ ार पर भूविम की श्रेर्णी बदलने की सिसफारिरश की गई थी। सिजला कलेक्टर द्वारा एक बार विफर य? क?ा गया विक त?सीलदार की रिरपोट[5] और पुराने तथा र्वोत5मान राजस्र्वो अथिभलेखों की प्रधितलिलविपयों को ध्यान में रखते ?ुए राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताविर्वोत भूविम क े र्वोग[5] परिरर्वोत5न क े संबं में आदेश जारी विकए जा सकते ?ैं, जो राजस्र्वो अथिभलेखों में 'जो?ड़'क े रूप में दज[5] ?ै।

11. उपरोक्त सामग्री की आक्षेविपत विनर्ण5य में विर्वोस्तार से जां की गई ?ै। उच्च न्यायालय ने ग्राम पं ायत, ग्राम बसर्वोा द्वारा पारिरत प्रस्तार्वो और ग्राम पं ायत द्वारा जारी प्रमार्ण ध्यान दें का भी संज्ञान लिलया ?ै, सिजसमें क?ा गया ?ै विक इस विर्वोषय की भूविम पर कभी भी पानी जमा न?ीं ?ुआ ?ै और ग्राम पं ायत को खनन पट्टे क े उद्देश्य क े लिलए प्रधितर्वोादी क ं पनी को दी जा र?ी उक्त भूविम पर कोई आपलित्त न?ीं थी, बशतY विक उसे खनन पट्टे क े उद्देश्य क े लिलए उसी गांर्वो में प्रधितर्वोादी क ं पनी से समान रूप से विर्वोकसिसत भूविम प्राप्त ?ो र?ी ?ो। न्यायालय को य? भी र्वो न विदया ?ै विक गांर्वो का र्वोातार्वोरर्ण प्रधितक ू ल न?ीं ?ोगा और पारिरस्थिस्थधितकी संतुलन को बनाए रखा जाएगा। ं पनी द्वारा विदए गए उपXमों में से एक य? ?ै विक र्वोैकस्थिल्पक 'जो?ड़'क े विर्वोकास क े लिलए धि स्थिन्?त स्थल की प? ान की जाएगी और योजनाबद्ध तरीक े से विर्वोकसिसत विकया जाएगा, ताविक एक जलग्र?र्ण क्षेत्र, जल सं यन संर ना और मर्वोेशी राई भूविम का विनमा5र्ण विकया जा सक े । 12 उपरोक्त पृष्ठभूविम को देखते ?ुए, अपीलकता5-राज्य सरकार क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वारा उसक े द्वारा उद्धृत विनर्ण5यों पर भरोसा करना गलत पाया गया ?ै। र्वोेnोर नागरिरक कल्यार्ण मं और आंध्र प्रदेश प्रदूषर्ण विनयंत्रर्ण बोड[5] में, इस न्यायालय ने सतत विर्वोकास क े एक प?लू क े रूप में विर्वोकास और पारिरस्थिस्थधितकी की अर्वो ारर्णा क े बी सामंजस्य की आर्वोश्यकता को मान्यता दी। अनुच्छेद 21,47,48-ए, 51-ए (जी) सवि?त भारत क े संविर्वो ान क े प्रासंविगक अनुच्छेदों पर प्रकाश डाला गया ?ै जो पया5र्वोरर्ण की रक्षा और सु ार करते ?ैं और ए?धितयाती सिसद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिसद्धांत को देश क े पया5र्वोरर्ण कानून का एक वि?स्सा घोविषत विकया गया ?ै।य? भी स्र्वोीकार विकया गया ?ै विक सबूत का बोझ विकसी ऐसी गधितविर्वोधि का प्रस्तार्वो करने र्वोाली संस्था पर ?ोना ावि?ए जो पया5र्वोरर्ण क े लिलए संभाविर्वोत रूप से ?ाविनकारक ?ो। उपरोक्त स्थिस्थधित क े साथ कोई विर्वोर्वोाद न?ीं ?ो सकता ?ै, लेविकन उपरोक्त विनर्ण5यों में से कोई भी र्वोत5मान मामले क े तथ्यों और परिरस्थिस्थधितयों क े लिलए प्रासंविगक न?ीं ?ै, क्योंविक ं पनी पर य? प्रदर्शिशत करने क े लिलए कोई बोझ न?ीं डाला गया ?ै विक उसक े द्वारा स्थाविपत विकए जाने क े लिलए प्रस्ताविर्वोत उद्योग, क्षेत्र की पारिरस्थिस्थधितकी को कोई गंभीर और/या अपरिरर्वोत5नीय नुकसान न?ीं प?ुं ाएगा । इसक े विर्वोपरीत, य? अपीलकता5-राज्य सरकार क े राजस्र्वो विर्वोभाग का ?ी रुख ?ै क्षेत्र की पारिरस्थिस्थधितकी को कोई नुकसान ?ोने की संभार्वोना न?ीं ?ै क्योंविक स्थल विनरीक्षर्ण से पता लता ?ै विक विर्वोषय भूविम पर कोई तालाब मौजूद न?ीं ?ै जो प्रधितक ू ल रूप से प्रभाविर्वोत ?ो सकता ?ै।

13. नम5दा ब ाओ आंदोलन बनाम भारत संघ मामले में, इस न्यायालय को ए?धितयाती सिसद्धांत पर ा5 करने का अर्वोसर विमला था और य? अथिभविन ा5रिरत विकया गया था विक उक्त सिसद्धांत और सबूत का ऐसा व्यविक्त जो यथास्थिस्थधित को बदलना ा?ता ?ै, उस पर तदनुरूप भार, सामान्यतः प्रदूषर्ण फ ै लाने र्वोाली या अन्य परिरयोजनाओं या उद्योग क े मामले में लागू ?ोगा ज?ां ?ोने र्वोाले नुकसान की सीमा ज्ञात न?ीं ?ै।लेविकन जब परिरयोजना क े प्रभार्वो का पता ल जाएगा, तो सतत विर्वोकास क े सिसद्धांत लागू ?ो जाएंगे जो य? सुविनधिxत करेंगे विक पारिरस्थिस्थधितक संतुलन को संरधिक्षत करने क े लिलए कम से कम कदम उठाए जा सकते ?ैं।र्वोत5मान मामले में, क्षेत्र क े पारिरस्थिस्थधितक संतुलन को ?ोने र्वोाले नुकसान क े बारे में डेटा या र्वोैज्ञाविनक सामग्री की उपलब् ता क े कारर्ण ऐसी कोई अविनधिxतता न?ीं ?ै। इसक े बजाय, राजस्र्वो अधि कारिरयों द्वारा समय-समय पर विर्वोस्तृत स्थल विनरीक्षर्ण विकया गया ?ै जो य? स्थाविपत करता ?ै विक विर्वोषय भूविम पर कोई ‘जो?ड़’ मौजूद न?ीं ?ै। इसक े बार्वोजूद ं पनी को उसी क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीक े से एक र्वोैकस्थिल्पक 'जो?ड़'विर्वोकसिसत करने का विनदYश विदया गया ?ै, सिजसे उसने विनष्पाविदत करने का बीड़ा उठाया ?ै।

14. लाफाज[5] उविमयम माइनिंनग प्राइर्वोेट लिलविमटेड में, इस न्यायालय ने इस तथ्य को मान्यता दी ?ै विक पया5र्वोरर्ण क े विर्वोथिभन्न प?लू ?ैं और सबसे बुविनयादी जरूरतों क े लिलए पया5र्वोरर्णीय संसा नों क े उपयोग क े लिलए मनुष्यों की सार्वो5भौविमक विनभ5रता ?ै, अपरिर?ाय[5] रूप से पया5र्वोरर्णीय संरक्षर्ण पर विर्वोथिभन्न स्तरों पर विर्वोकल्प बनाने की आर्वोश्यकता ?ै और जोलिखम में कारक सिजन्?ें विर्वोविनयविमत विकया जाना ?ै, जैसा विक सतत विर्वोकास की अर्वो ारर्णा द्वारा मान्यता प्राप्त ?ै।य? स्र्वोीकार करते ?ुए विक 'एXोस-द-बोड5'सिसद्धांतों को विन ा5रिरत करना असंभर्वो ?ै और ब?ुत क ु छ प्रत्येक मामले क े तथ्यों पर विनभ5र करेगा, इस न्यायालय ने य? राय व्यक्त की विक य? देखने की आर्वोश्यकता थी विक विकतना संरक्षर्ण पया5प्त ?ोगा और क्या संसा नों को अन्य उपयोगों क े लिलए डायर्वोट[5] करक े और साथ ?ी, पया5र्वोरर्ण संरक्षर्ण और पया5र्वोरर्ण जोलिखम क े बी एक अच्छा संतुलन बनाए रखा जाएगा। तत्काल मामले में इस तर? क े विकसी भी फाइन बैलेंस की आर्वोश्यकता न?ीं ?ै, जब विनधिxत रूप से, स्थल विनरीक्षर्ण से पता लता ?ै विक विर्वोषय भूविम पर कोई 'जो?ड़'मौजूद न?ीं ?ै, जो राजस्र्वो रिरकॉड[5] में प्रस्ताविर्वोत परिरर्वोत5न क े कारर्ण प्रभाविर्वोत ?ोने की संभार्वोना ?ै।

15. जगपाल सिंस? क े मामले में जारी विकए गए विनदेश, सिजसमें राज्य सरकारों से ग्राम सभा की भूविम पर अर्वोै /अनधि क ृ त रूप से कब्जा जमाए बैठे लोगों को बेदखल करने क े लिलए एक स्कीम तैयार करने को क?ा गया ?ै, भी प्रत्यथT क ं पनी क े रास्ते में न?ीं आते। इस विनदYश का उद्देश्य अर्वोै कब्जों को तेजी से ?टाने क े लिलए एक योजना तैयार करना था। य? प्रधितर्वोादी क ं पनी को में राजस्र्वो रिरकाड[5] में सु ार क े लिलए अदालत में जाने से न?ीं रोकता ?ै, जबविक राजस्र्वो प्राधि कारिरयों द्वारा तैयार की गई स्थल विनरीक्षर्ण रिरपोटh से पता लता ?ै विक विर्वोषय भूविम पर कोई जल विनकाय या जलग्र?र्ण क्षेत्र न?ीं ?ै ।

16. इलेक्ट्रोथम[5] (इंधिडया) लिलविमटेड क े मामले में पया5र्वोरर्ण मंजूरी प्रविXया की अविनर्वोाय[5] आर्वोश्यकता क े रूप में सार्वो5जविनक सुनर्वोाई आयोसिजत करने पर ध्यान क ें वि®त विकया गया था और न्यायालय ने विनर्ण5य लेने की प्रविXया क े दौरान सार्वो5जविनक सुनर्वोाई को समाप्त करने पर नाराजगी व्यक्त की ?ै। ‘कॉमन कॉज सेलसेस’ क े मामले में, इस न्यायालय को ओधिडशा राज्य में अर्वोै /गैरकानूनी खनन क े प?लू से अर्वोगत कराया गया और य? पाया गया विक न्यायालय खनन नीधित में ?स्तक्षेप न?ीं कर सकते या खनन गधितविर्वोधि की सीमा विन ा5रिरत न?ीं कर सकते, सिजसकी अनुमधित राज्य/क ें ® सरकार द्वारा दी जानी ावि?ए।उक्त विनर्ण5य का तत्काल मामले क े तथ्यों क े लिलए कोई आर्वोेदन न?ीं ?ै, ज?ां अपीलकता5-राज्य सरकार ने प?ले ?ी प्रत्यथT-क ं पनी क े पक्ष में एक सीमेंट संयंत्र स्थाविपत करने क े लिलए सैद्धांधितक स?मधित दे दी ?ै और उच्च न्यायालय से क े र्वोल उस विर्वोषय भूविम क े संबं में राजस्र्वो रिरकॉड[5] में सु ार क े प?लू की जां करने की आर्वोश्यकता थी, ज?ां 'जो?ाद'का उnेख विकया गया था, लेविकन साइट पर कोई भी मौजूद न?ीं था ।

17. एलेस्थिम्बक फामा5स्यूविटकल्स क े मामले में, इस न्यायालय क े समक्ष मुद्दा लंबे समय तक पूर्वो5 पया5र्वोरर्णीय मंजूरी प्राप्त विकए विबना उद्योगों क े सं ालन और ऐसे अनुपालन क े कारर्ण उनकी देयता क े संबं में था। य? देखते ?ुए विक उद्योगों ने पया5र्वोरर्ण मंजूरी प्राप्त करने की कानूनी रूप को टाल विदया था, य? विनर्ण5य विदया गया विक विनयमों और विर्वोविनयमों की अर्वोज्ञा और गैर-अनुपालन क े लिलए उन पर जुमा5ना लगाया जाना ावि?ए। य?ां, प्रत्यथT-क ं पनी ने विनधिxत रूप से पया5र्वोरर्ण मंजूरी प्राप्त कर ली ?ै और इसक े बार्वोजूद, अपीलाथT-राज्य सरकार द्वारा पैदा की गई विर्वोथिभन्न बा ाओं क े कारर्ण इसकी परिरयोजना शुरू न?ीं ?ो पाई ?ै.स्पष्ट रूप से, र्वोत5मान मामला प्रधितर्वोादी क ं पनी पर जुमा5ना लगाने क े विकसी भी मानदंडों क े भंग का न?ीं ?ै. 18 य?ां तक विक अब्दुल र?मान क े मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े विनर्ण5य को भी अपीलकता5-राज्य सरकार द्वारा पूरी तर? से गलत समझा जा र?ा ?ै। उक्त विनर्ण5य में जल ग्र?र्ण क्षेत्र को उसक े मूल आकार में ब?ाल करने पर ध्यान क ें वि®त विकया गया था सिजसक े लिलए एक योजना तैयार करने का विनदYश विदया गया था सिजसमें जल ग्र?र्ण क्षेत्रों का सीमांकन, जल विनकासी ैनलों का सीमांकन आविद शाविमल थे। ?म प्रत्यथT क ं पनी क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वारा दी गई इस दलील को प्रधितग्र?र्ण करना करने क े लिलए प्रर्वोृत्त ?ैं विक मौक े पर विकसी तालाब की अनुपस्थिस्थधित में में, अब्दुल र?मान क े मामले में विकया गया विनर्ण5य सीमेंट संयंत्र की स्थापना क े लिलए, विर्वोषय भूविम क े लिलए प्रत्यथT क ं पनी क े आर्वोेदन की प्रविXया में बा ा न?ीं बन सकता ?ै । उच्च न्यायालय ने स?ी रूप से म?ाविनदेशक, अनुसं ान और विर्वोकास में इस न्यायालय क े विनर्ण5य का उnेख विकया ?ै, ज?ां इस तथ्य पर ध्यान देते ?ुए विक घटनास्थल पर कोई 'गेर-मुमविकन नदी'मौजूद न?ीं थी, य? पाया गया विक अब्दुल र?मान में उच्च न्यायालय का विनर्ण5य याधि काकता5 को भूविम आर्वोंविटत करने क े रास्ते में न?ीं आएगा ।

19. उपरोक्त कारर्णों से, ?म आक्षेविपत विनर्ण5य में र्वोापस आए विनष्कषh से स?मत ?ैं, सिजसे बरकरार रखा गया ?ै। अपीलकता5-राज्य सरकार को आज से ार सप्ता? क े भीतर प्रत्यथT क ं पनी क े पक्ष में विर्वोषय भूविम क े आर्वोंटन की प्रविXया क े लिलए आर्वोश्यक कदम उठाने का विनदYश विदया जाता ?ै।प्रधितर्वोादी क ं पनी को राज्य सरकार क े साथ उसी समय सीमा क े भीतर एक नया ?लफनामा दालिखल करना ?ोगा, जो उसने उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर विकया था, ताविक आसपास क े गांर्वोों क े लाभ क े लिलए समयबद्ध गधितविर्वोधि यां शुरू की जा सक ें । पक्षकारों को अपने स्र्वोयं क े ख h का र्वो?न करने क े लिलए छोड़ते ?ुए य? अपील खारिरज कर दी जाती ?ै। मुख्य न्याया ीश (एन. र्वोी. रमन्ना) न्याया ीश (वि?मा को?ली) न्याया ीश (सी. टी. रविर्वोक ु मार) नई विदnी, 26 अगस्त, 2022 य? अनुर्वोाद आर्दिटविफथिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास'क े जरिरए अनुर्वोादक की स?ायता से विकया गया ?ै। अस्र्वोीकरर्ण: य? विनर्ण5य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया ?ै और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग न?ीं विकया जा सकता ?ै। सभी व्यार्वो?ारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण5य का अंग्रेजी संस्करर्ण ?ी प्रामाथिर्णक ?ोगा और विनष्पादन और काया5न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ?ी मान्य ?ोगा।