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भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 5038 वर्ष 2022
(विवशेर्ष अनुमति याति'का (सिसविवल) संख्या 3987 वर्ष 2022 से उद्भू )
सुनील क
ु मार ...अपीलक ा
बनाम
उ.प्र. राज्य एवं अन्य ...प्रति वादी (गण)
विनणय
अनुमति प्रदान की गयी।
JUDGMENT
2. अपीलक ा का विप ा जो ' ुर्थ श्रेणी कम'ारी (स्वीपर) क े रूप में विवकास खंड कायालय खु म, जौनपुर, उत्तर प्रदेश में काम कर रहा र्था, 23.11.2016 को उसका देहावसान हो गया। अपीलक ा द्वारा उत्तर प्रदेश मृ क आश्रिश्र कम'ारी भ J विनयमावली, 1974 (ए श्मिMमनपश्चा ् '1974 की विनयमावली’ क े रूप में संदर्भिभ ) क े विनयम 5 क े ह विनयुविS क े लिलए आवेदन विकया। विनयम 5 इस प्रकार हैः - “[5. मृ क क े परिरवार क े विकसी सदस्य की भ J-(1) यविद इन विनयमों क े प्रारंभ क े पश्चा ् विकसी सरकारी कम'ारी की सेवा में मृत्यु हो जा ी है और मृ क सरकारी कम'ारी का पति /पत्नी पहले से ही क ें द्र सरकार या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 787 राज्य सरकार या क ें द्र सरकार क े स्वाविमत्व या विनयंत्रण वाले विकसी विनगम या राज्य सरकार क े अ ीन विनयोसिज नहीं है, उसक े एक सदस्य जो पहले से ही क ें द्र सरकार या राज्य सरकार या क ें द्र सरकार क े स्वाविमत्व या विनयंत्रण वाले विकसी विनगम या राज्य सरकार क े ह कायर नहीं है, को इस उद्देMय क े लिलए आवेदन करने पर सामान्य भ J विनयमों में छ ू ट दे े हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े दायरे में आने वाले पद को छोड़कर विकसी अन्य पद पर सरकारी सेवा में उपयुS रोजगार विदया जाएगा, यविद ऐसा व्यविS - (i) पद क े लिलए विवविह शैक्षश्रिणक योग्य ाओं को पूरा कर ा है, (ii) अन्यर्था सरकारी सेवा क े लिलए अर्हिह है, और (iii)सरकारी कम'ारी की मृत्यु की ारीख से पां' वर्ष क े भी र रोजगार क े लिलए आवेदन कर ा हैः बश m विक राज्य सरकार सं ुष्ट हो विक रोजगार क े लिलए आवेदन करने क े लिलए विन ारिर समय सीमा विकसी विवशेर्ष मामले में असम्यक कविpनाई का कारण बन ी है, ो वह मामले पर विव'ार न्यायोति' ढंग से विव'ार कर े हुए ऐसी आवMयक ा को समाप्त कर सक ी है या उसमें छ ू ट दे सक ी है, जैसा वह आवMयक समझे। (2) जहां क संभव हो सक े, ऐसा रोजगार उसी विवभाग में विदया जाना 'ाविहए सिजसमें मृ क सरकारी कम'ारी अपनी मृत्यु से पहले कायर र्था।] [5 क. पुलिलस/पी.ए.सी. कमJ सिजसकी मृत्यु मई, 1973 में हुई, क े परिरवार क े सदस्य की विनयुविS -विनयम 5 या विकसी अन्य विनयम में इसक े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवपरी विकसी बा क े हो े हुए भी, इन विनयमों क े प्राव ान उन बाईस पुलिलस या प्रति प्रां ीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी कर्हिमयों क े सदस्यों क े मामले में लागू होंगे सिजनकी मृत्यु मई, 1973 में उपद्रव क े कारण हुई र्थी, जैसे विक वे इन विनयमों क े लागू होने क े बाद विकसी सरकारी कम'ारी की सेवाकाल मृत्यु क े मामले में लागू हो े हैं।]
3. अपीलक ा एक स्ना क है और उसे क ं प्यूटर साक्षर ा भी प्राप्त है। उसे स्वीपर क े पद की पेशकश की गई, सिजस पद पर उसक े विदवंग विप ा र्थे। हालांविक, अपीलक ा को इस रह की सलाह विदए जाने पर उसने प्रस् ाव को अस्वीकार कर विदया और पद ग्रहण नहीं विकया और अपना प्रति विनति त्व विदया सिजसक े द्वारा उसने पद ग्रहण करने क े प्रति अपनी अविनच्छा व्यS की, सिजसका प्रभावी रूप से अर्थ है विक उसने प्रस् ाव को अस्वीकार कर विदया। इसक े बाद, अपीलक ा ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया सिजसने उसक े प्रति विनति त्व पर विव'ार करने का विनदmश विदया। प्रति वादी अपीलक ा को वग-III पद में समायोसिज करने क े अनुरो को वि|र से अस्वीकार कर विदया गया। इस पर ध्यान विदया जाना 'ाविहए विक अपीलक ा ने विवशेर्ष रूप से ग्राम पं'ाय अति कारी क े रूप में विनयुविS की मांग की, एक ऐसा पद जो श्रेणी-III क े क ै डर से आरंभ हो ा है। इसमें कोई विववाद नहीं है विक उS पद विनयम 5 क े ह अनुशंसिस उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े दायरे में नहीं आ ा है। इसलिलए, इस संबं में विनयम अपीलक ा क े दावे क े लिलए कोई बा ा नहीं र्था। हालांविक, प्रति वादी ने विनयम 5 में 'उपयुS रोजगार' शब्दों की अपनी समझ को ध्यान में रख े हुए प्रति विनति त्व को अस्वीकार कर विदया। इससे वि|र से एक और रिरट याति'का दालिखल की गयी। यह उS रिरट याति'का ही अं ः अपीलक ा क े लिखला| उच्च न्यायालय क े | ै सले क े रूप में समाप्त हुई। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. हमने अपीलक ा की ओर विवद्वान वरिरष्ठ अति वSा श्री अरिरजी प्रसाद,और प्रति वादी सं.- 1 उ.प्र. राज्य की ओर से उपश्मिस्र्थ विवद्वान अति वSा सुश्री रुति'रा गोयल को सुना।
5. अपीलक ा की ओर से पेश विवद्वान वरिरष्ठ अति वSा श्री अरिरजी प्रसाद ने क विदया है विक उच्च न्यायालय ने इस न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम प्रेमल ा, (2022) 1 एससीसी क े मामले में अपनाए गए दृविष्टकोण क े आ ार पर अपने विनणय को अविनवाय रूप से विन ारिर विकया है। सिजसमें,इसमें कोई संदेह नहीं, विक इस न्यायालय ने अन्य बा ों क े सार्थ-सार्थ विनम्नव ारिर विकया है:- “11.उपरोS को ध्यान में रख े हुए और उपरोS कारणों से, उच्च न्यायालय की खण्ड पीp ने 1974 क े विवविनयम क े विनयम 5 का गल अर्थ लगाया है और कहा है विक सेवाकालीन मृत्यु विनयमावली, 1974 क े विनयम 5 क े ह उपयुS पद का अर्थ उम्मीदवार की योग्य ा क े लिलए उपयुS कोई भी पद होगा और करुणा क े आ ार पर विनयुविS की पेशकश आश्रिश्र की शैक्षश्रिणक योग्य ा पर विव'ार करक े की जाएगी। जैसा विक ऊपर कहा गया है, इस रह की व्याख्या अनुक ं पा क े आ ार पर विनयुविS क े उद्देMय और लक्ष्य को विव|ल कर देगी।”
6. उन्होंने क विदया है विक यह विव'ार इस न्यायालय द्वारा इस संबं में प्रासंविगक विनयमों क े रूप में शुरू में वर्भिण विनयमों को ध्यान में रखे विबना बनाया गया र्था। सिजसे उन्होंने विनयमों क े रूप में उल्लेख विकया है, वह संलग्नक पी-1 से प्राप्त विकया जा सक ा है, जो अन्य बा ों क े सार्थ सार्थ सार्थ-सार्थ विनम्नानुसार हैः Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “1. सरकारी कम'ारिरयों क े उन आश्रिश्र ों की श्मिस्र्थति में सु ार लाने क े उद्देMय से सिजनकी सेवाकाल क े दौरान मृत्यु हो जा ी है, “उत्तर प्रदेश मृ क आश्रिश्र (सरकारी कम'ारी) भ J विवविनयम 1974” (संशोति ) परिर'ालिल विकया गया। इन विवविनयमों में, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े दायरे से बाहर मृ क क े आश्रिश्र ों की विनयुविS की एक प्रणाली है जो समूह सी और समूह डी पदों में पद भरने क े लिलए है। अब क इन विवविनयमों में 11 संशो न विकए गए हैं। मूल विवविनयम 11 संशो नों क े सार्थ संलग्न हैं।
2. मृ क कम'ारिरयों क े आश्रिश्र ों की विनयुविS क े संबं में, एक डब्ल्यूपी (सी) संख्या 2228 (एसएस) वर्ष 2014, प्रकाश अग्रवाल बनाम रसिजस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद क े रूप में दायर की गयी, सिजसमें माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ पीp ने 17.04.2014 को आदेश पारिर विकया र्था, सिजसक े पैरा 49 में विनम्नलिललिख विटप्पश्रिणयां की गई र्थीं। क. आवेदन का विनस् ारण नौकरी क े लिलए आश्रिश्र द्वारा आवेदन विदए जाने की ारीख से ीन महीने क े भी र विकया जाना 'ाविहए। विनयमों क े ह, कोई समय सीमा विन ारिर नहीं की गई है, लेविकन इस विनयम का उद्देMय शोक सं प्त परिरवार को विवत्तीय संकट से विनपटने क े लिलए त्काल राह प्रदान करना है। (श्रिशव क ु मार दुबे (उपरोS)। इस पृष्ठभूविम में उपयुS प्राति करण से अपेक्षा की जा ी है विक वह कम से कम समय में ऐसे आवेदनों का विनस् ारण करे। विकसी भी मामले में, आवेदन को ीन महीने से अति क समय क लंविब नहीं रखा जाना 'ाविहए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ख. विनयमों क े ह विनयुविS से क े वल इस आ ार पर इनकार नहीं विकया जा सक ा है विक आवेदक की विवत्तीय श्मिस्र्थति मजबू है। मृत्यु क े समय सेवाविनवृलित्त लाभों क े भुग ान से इनकार करने का कोई आ ार नहीं बन ा है। ग. पदों की अनुपलब् ा विनयुविS से इनकार करने का कोई आ ार नहीं है। घ. वग III क े पद पर विनयुविS से क े वल इस आ ार पर इंकार नहीं विकया जा सक ा विक मृ क वग 3/वग 4 का कम'ारी र्था। ङ. उम्मीदवार की योग्य ा और उपयुS ा क े अनुसार विनयुविS की पेशकश की जानी 'ाविहए और आवेदक को उसी क े अनुरूप विनयुविS दी जानी 'ाविहए। यविद विनयुविS प्राति कारी अनुपयुS ा क े कारण आवेदक द्वारा दावा विकए गए पद पर विनयुविS नहीं दे ा है, ो विनयुविS प्राति कारी द्वारा कारण दज विकए जाने 'ाविहए। '. मृ क क े आश्रिश्र को विवशेर्ष श्मिस्र्थति या स्र्थान का दावा करने का कोई अति कार नहीं है और मामले क े थ्यों और परिरश्मिस्र्थति यों में उति' आदेश पारिर करना विनयुविS प्राति कारी क े विववेक पर है। 3 इस संबं में, मुझे यह कहने का विनदmश विदया गया है विक मृ क कम'ारिरयों क े आश्रिश्र ों की विनयुविS क े संदभ में,माननीय उच्च न्यायालय क े विदशाविनदmश, विनदmश का अनुपालन सख् ी से विकया जाना आवMयक है।
7. दूसरे शब्दों में, उनका कर्थन है विक उS विनयमों क े खंड-2 (घ) क े परिरशीलन से प ा 'ल ा है विक वग-III क े पद पर विनयुविS से क े वल इस आ ार पर इंकार नहीं Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया जाना 'ाविहए विक मृ क ृ ीय श्रेणी या ' ुर्थ श्रेणी कम'ारी र्था। उनका कर्थन है विक यविद इस न्यायालय को इस विनयम क े अश्मिस् त्व क े बारे में विवश्वास में लिलया गया हो ा, ो इस न्यायालय द्वारा लिलया गया दृविष्टकोण, जैसा विक पहले से ही देखा गया है, शायद नहीं लिलया गया हो ा। उनकी कर्थन है विक उपयुS ा क े प्रश्न का विनणय उस पद क े संदभ में करने की आवMयक ा नहीं है जो मृ क कम'ारी द्वारा ारिर विकया गया र्था। इस रह क े एक मामले में, जहां अपीलक ा स्पष्ट रूप से अपनी योग्य ा क े संदभ में ग्राम पं'ाय अति कारी क े रूप में विनयुS होने का हकदार है, और इससे भी अति क, यह ध्यान में रख े हुए विक यह ऐसा पद नहीं है जो लोक सेवा आयोग क े दायरे में आ ा है, अपीलक ा को समायोसिज करने में कोई कानूनी बा ा नहीं है। वैकश्मिल्पक रूप से, यह भी कहा गया विक यविद यह न्यायालय उसकी दलील को स्वीकार करने क े लिलए इच्छ ु क नहीं है, ो अपीलक ा को कम से कम एक स्वीपर क े रूप में रोजगार की सुरक्षा दी जा सक ी है।
8. इसक े विवपरी, प्रति वादी उ.प्र. राज्य की ओर से उपश्मिस्र्थ विवद्वान अति वSा सुश्री रुति'रा गोयल, ने मामले को 'ुनौ ी दी और सबसे पहले यह इंविग विकया विक अपीलक ा क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वSा द्वारा र्थाकश्रिर्थ विनयमों क े प्रति विकया गया संदभ गल हो सक ा है। रिरट डब्ल्यू. पी. (सी) 2228 (एसएस) वर्ष 2014, प्रकाश अग्रवाल बनाम रसिजस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद, में उच्च न्यायालय द्वारा व्यS विव'ार क े आ ार पर सरकार द्वारा अविनवाय रूप से आदेश पारिर विकया गया। उन्होंने आगे कहा विक उच्च न्यायालय क े विनणय की उति' समझ पर, अपीलक ा द्वारा की जाने वाली व्याख्या सामने न आ ी। वह आगे विहमा'ल प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम शश्रिश क ु मार, (2019) 3 एससीसी 653 क े मामले में इस न्यायालय क े विनणय को हमारे संज्ञान में लायी और क विदया विक अनुक ं पा योजना क े ह विनयुविS का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA म लब भ J का स्रो होना नहीं है। यह अविनवाय रूप से शोक सं प्त परिरवार क त्काल सहाय ा पहुं'ाने क े लिलए है। दूसरे शब्दों में, एक सरकारी कम'ारी क े अ'ानक विन न से विवत्तीय खालीपन पैदा हो जा ा है और परिरवार क े वास् व में जरूर मंद सदस्यों की मदद करने क े लिलए उन्हें समय विदया जा ा है। यह कभी भी भ J का स्रो बनने क े लिलए नहीं है। आगे यह प्रति वाद विकया गया है विक यद्यविप वग- III और वग-IV पदों क े संबं में विनयुविS की जा सक ी है, इसका यह अर्थ नहीं है विक जब मृ क कम'ारी वग-IV काडर पर र्था, ो आश्रिश्र वग-III विनयुविS क े लिलए दावा कर सक े हैं। जहां क वैकश्मिल्पक कर्थन का संबं है, यह कहा गया विक अपीलक ा ने स्वीपर क े रूप में विनयुविS क े प्रस् ाव को स्वीकार करने का विवकल्प नहीं 'ुना और इससे भी अति क, उसने इसे अस्वीकार कर विदया और अपीलक ा को समायोसिज करने क े लिलए कोई रिरविS नहीं हो सक ी है।
9. यह एक ऐसा मामला है जहां अपीलक ा का विप ा एक स्वीपर क े रूप में काम कर रहा र्था। विनःसंदेह, अपीलक ा योग्य है (उसक े अनुसार) और उS अर्थ में ग्राम पं'ाय अति कारी क े रूप में विनयुS होने क े लिलए उपयुS है। इस मामले में कम'ारी की मृत्यु बहु दूर नहीं हुई, अर्था यह 23.11.2016 को हुई। इसलिलए, यह ऐसा मामला नहीं है जहां मृत्यु की ारीख और इस न्यायालय द्वारा मामले पर विव'ार करने क े समय क े बी' संबं टूट गया है। हमें इस थ्य से अनजान नहीं होना 'ाविहए विक मृ क कम'ारी एक स्वीपर र्था।
10. सार्थ ही, जहां क ग्राम पं'ाय अति कारी क े पद पर विव'ार विकए जाने क े लिलए अपीलक ा की पात्र ा से संबंति प्रश्न का संबं है, यह विनःसंदेह श्रेणी III का पद है। अपीलक ा का विप ा ' ुर्थ श्रेणी क े पद पर स्वीपर क े रूप में काम कर रहा र्था। हमने प्रेमल ा (उपरोS) मामले में इस न्यायालय द्वारा व्यS विकए गए दृविष्टकोण पर ध्यान Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदया है। दूसरे शब्दों में, घोविर्ष की गई विवति इस आशय की है विक विनयम 5 में 'उपयुS रोजगार' शब्दों को मृ क कम'ारी द्वारा ारिर पद क े संदभ में समझा जाना 'ाविहए। विकसी आश्रिश्र द्वारा ारिर श्रेष्ठ योग्य ा 'उपयुS रोजगार' शब्दों की गुंजाइश का विन ारण नहीं कर सक ी।
11. यह स्पष्ट है विक संलग्नक पी-1 सांविवति क विनयमों का प्रति विनति त्व नहीं कर ा है। हमें नहीं लग ा विक हमें अलग दृविष्टकोण अपनाने क े लिलए राजी विकया जाना 'ाविहए। हम इस आयाम को बाति नहीं कर सक े विक अनुक ं पा विनयुविS की योजना का पूरा उद्देMय शोक सं प्त परिरवार को त्काल राह पहुं'ाना है। ऐसी परिरश्मिस्र्थति यों में, मृ क कम'ारी द्वारा ारिर पद को ध्यान में रख े हुए 'उपयुS रोजगार' शब्दों पर रखे गए अर्थ को अनुति' या गल नहीं कहा जा सक ा है।
12. ऐसा अश्रिभविन ारिर करने क े बाद, हमें अब कम से कम एक स्वीपर क े रूप में विनयुविS क े लिलए अपीलक ा क े मामले पर विव'ार करना 'ाविहए। यह स' हो सक ा है विक अपीलक ा को इस मामले में मुकदमा 'लाने और विकसी विवश्रिशष्ट पद क े लिलए अपने दावे पर अतिडग रहने क े लिलए विकसी ने सलाह विदया हो। यह स' हो सक ा है विक मुकदमेबाजी क े दौर र्थे, लेविकन जैसा विक हम पहले ही देख 'ुक े हैं विक कम'ारी की मृत्यु की ारीख को ध्यान में रख े हुए, अपीलक ा क े दावे को ऐसे विवलंब से आच्छाविद नहीं कहा जा सक ा है जो उसे और उसक े परिरवार को अपीलक ा की एक स्वीपर क े रूप में विनयुविS की राह से वंति' कर सक े, एक ऐसा अति कार जो कानूनी विनयम क े ह विदया गया है।
13. ऐसी परिरश्मिस्र्थति यों में, अपील आंश्रिशक रूप से अनुज्ञा है। आक्षेविप विनणय अपास् विकया जा ा है और हम प्रति वादी नं. 3 -सिजला पं'ाय राज अति कारी, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिजला जौनपुर, उत्तर प्रदेश को विनदmश दे े हैं विक अपीलक ा को स्वीपर क े पद पर विनयुS करें। अपीलक ा की विनयुविS का आवMयक आदेश इस विनणय की प्रति क े पेश विकए जाने की ारीख से आp सप्ताह की अवति क े भी र जारी विकया जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं है विक हम इस मामले क े विवश्रिशष्ट थ्यों को ध्यान में रख े हुए यह | ै सला दे रहे हैं। अपील आंश्रिशक रूप से स्वीकार की जा ी है। लाग क े रूप में कोई आदेश नहीं।........................................ [न्यायमूर्ति क े. एम. जोसे|]........................................ [न्यायमूर्ति हृविर्षक े र्ष रॉय] नई विदल्ली 02 अगस्, 2022 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA