Jagdish Prasad Saini v. Rajasthan State and Others

High Court of Rajasthan · 26 Dec 2022 · 2022 INSC 1023
Uday Umesh Lakhil; S. Ravindra Bhatt
Civil Appeal No /2022; Special Leave Petition (Civil) No 16813/2019
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that gratuity and cash payment in lieu of leave form part of wages payable to employees of grant-in-aid educational institutions integrated into State service, directing the State and institution to pay dues with retrospective effect.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी याति का संख्या /2022
[विवशेष अनुमति याति का (दीवानी) संख्या 16813/2019)
जगदीश प्रसाद सैनी व अन्य .....अपीलक ा1
बनाम
राजस्थान राज्य और अन्य ..... प्रत्यथ8गण
विनण1य
एस. रवींद्र भट्ट, न्याया ीश
JUDGMENT

1. विवशेष अनुमति दी गई। पक्षकारों क े अति वक्ता की सहमति से अपील की अन्तिन् म सुनवाई की गई। यह अपील राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ क े एक विनण1य/आदेश SBWMA 357/2017 विदनांविक 26-04-2019 क े खिSलाफ विनदUशिश है, जिजसमें इस न्यायालय क े विपछले विनण1य जिसविवल अपील संख्या 6601- 6603/2016 विदनांविक 19-07-2016 को लागू करने की मांग करने वाले अपीलक ा1 क े आवेदन को Sारिरज कर विदया गया है।

2. अपीलक ा1ओं की विनयुविक्त ौथे प्रत्यथ[8] (एक वरिरष्ठ माध्यविमक विवद्यालय, जिजसकी स्थापना और विनयंत्रण पां वें प्रत्यथ[8] न्यास द्वारा विकया गया था, जिजसे सामूविहक रूप से 'स्थापना' क े रूप में संदर्भिभ विकया गया था) द्वारा 1993 में स्वीक ृ पदों क े विवरुद्ध की गई थी। अपीलक ा1 विनयविम रूप से उस प्रति ष्ठान में विनबा1 रूप से काय[1] कर े रहे। यह प्रति ष्ठान राजस्थान राज्य (इसक े बाद राज्य) से अनुदान सहाय ा प्राप्त कर ा था। 5 नवम्बर, 2008 क े एक एक रफा प्रस् ाव द्वारा प्रति ष्ठान की प्रबं सविमति ने 1 अप्रैल, 2008 से राज्य से अनुदान सहाय ा प्राप्त करना बंद करने का विनण1य खिलया। 2022 INSC 1023 दनुसार, 28 विदसंबर 2012 क े एक आदेश द्वारा राज्य ने 1 मा 1 2012 से सहाय ा देना बंद कर विदया।

3. इस बी, राज्य ने सहाय ा प्राप्त संस्थानों में काय1र कम[1] ारिरयों को सुरक्षा प्रदान करने क े उद्देश्य से और उन्हें राज्य की सेवा में समाविह करने क े खिलए राजस्थान स्वैन्तिmछक ग्रामीण शिशक्षा सेवा विनयम, 2010 (इसक े बाद "2010 विनयम") बनाया और लागू विकया। अपीलक ा1ओं ने इस संबं में अनुपयुक्त रूप से प्रति विनति त्व कर े हुए, विनयमों क े अनुसार राज्य क े साथ अपने समावेशन की मांग की। अं में, उन्हें उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट याति काएं दायर करने क े खिलए मजबूर विकया गया। राज्य ने, अपने द्वारा बनाए गए विनयमों क े अनुसार, सहाय ा प्राप्त संस्थानों से अन्य कम[1] ारिरयों और शिशक्षकों को समाविह विकया, लेविकन अपीलक ा1ओं को इस लाभ से वंति कर विदया।

4. अपीलक ा1ओं की रिरट याति काओं को कई अन्य याति काओं क े साथ जोड़ विदया गया और उच्च न्यायालय द्वारा इन कम[1] ारिरयों को समाविह करने क े खिलए राज्य को विनदUश देने से इनकार कर े हुए विनस् ारिर कर विदया। अपीलक ा1ओं सविह कम[1] ारिरयों ने असफल रूप से उन आदेशों क े पुनर्विव ार की मांग की थी, जिजसे 29 नवंबर 2013 को Sारिरज कर विदया गया था। इसक े बाद अपीलक ा1ओं ने उच्च न्यायालय क े आदेशों पर सवाल उठा े हुए अपील करने की विवशेष अनुमति क े खिलए याति का दायर कर इस न्यायालय का दरवाजा SटSटाया।

5. 19 जुलाई 2016 क े अपने अंति म आदेश द्वारा, इस न्यायालय ने अपीलक ा1ओं क े समावेश से इनकार को अपास् कर विदया। न्यायालय ने विनम्नानुसार विनदUश विदया: "इसखिलए हम आश्वस् हैं विक उक्त ग्यारह शिशक्षक सहाय ा प्राप्त पदों पर स्क ू ल प्रबं न की सेवा में रहे हैं और राज्य सरकार से इस रह की सहाय ा प्राप्त कर रहे हैं, उनक े सेवा में प्रवेश की ारीS से 2008 में सहाय ा बंद होने क, क े वल विवद्यालय प्रबं न क े कहने पर, जिजसे अब इस अदाल क े आदेशों क े अनुसार बहाल विकया गया है, राज्य सरकार को 2010 क े विनयमों को लागू कर े हुए उनक े समावेशन क े खिलए आवश्यक आदेश पारिर करने का विनदUश विदया जा सक ा है क्योंविक ऐसे विनयम प्रभावी होने की ारीS से हैं। इसखिलए हम इस रह क े समावेशन से इनकार करने वाले आदेशों को अपास् कर े हैं और मामले को प्रत्यथ[8] संख्या एक राज्य सरकार को वापस भेज े हैं विक 2010 क े विनयम लागू होने की ारीS से 11 सहाय ा प्राप्त शिशक्षकों क े दावे पर उनक े समायोजन पर विव ार विकया जाए और इस रह क े आदेश इस आदेश की एक प्रति प्राप्त होने की ारीS से एक महीने क े भी र पारिर विकए जाएंगे। समायोजन क े ऐसे आदेश पारिर करने क े बाद यह कहना अनावश्यक होगा विक उक्त ग्यारह शिशक्षकों को विपछली अवति अथा1 23 मा 1, 2008 से देय और देय वे न को उसी प्रकार से बहाल विकया जाएगा, जिजस प्रकार से 2010 क े विनयमों क े लागू होने से पहले दी जाने वाली सहाय ा को बहाल विकया जाना है। दूसरे शब्दों में, ऐसी सहाय ा 70% की सीमा क स्वीक ृ की जानी है और 30% स्क ू ल प्रबं न द्वारा वहन की जानी है, ऐसी गणना की जाएगी, और जिजस सीमा क सहाय ा स्वीक ृ की जानी है, वह उस ति शिथ क प्रदान की जाएगी, जिजसक े द्वारा समायोजन का आदेश पारिर विकया जा ा है त्पश्चा ् राज्य सेवा में समायोजिज शिशक्षक क े खिलए देय पूण[1] वे न की भी गणना की जायेगी और प्रत्यथ[8] संख्या 1/राज्य सरकार द्वारा स्वीक ृ की जायेगी। इस रह क े आदेश पारिर होने क े बाद हम स्क ू ल प्रबं न को राज्य सरकार द्वारा पारिर आदेशों क े अनुसार मा 1 2008 से ग्यारह शिशक्षकों क े शाविमल होने की ारीS क अपनी देनदारी का 30 प्रति श अदा करने क े खिलए आवश्यक कदम उठाने का विनदUश दे े हैं। हम स्क ू ल प्रबं न को ग्यारह शिशक्षकों को 30% का भुग ान आसान विकश् ों में संबंति शिशक्षकों क े साथ बा ी करक े करने की अनुमति दे े हैं ाविक यह सुविनतिश्च विकया जा सक े विक स्क ू ल प्रबं न पर अ ानक भारी विवत्तीय देनदारी न डाली जाए ाविक उस स्थान पर स्क ू ल जाने वाले बच्चों क े लाभ क े खिलए स्क ू ल का सं ालन विकया जा सक े । * * * * * हम स्क ू ल प्रबं न को अप्रैल, 2008 क े महीने से सहाय ा प्राप्त शिशक्षकों क े साथ-साथ गैर-सहाय ा प्राप्त शिशक्षकों को वास् व में विव रिर विकए गए वे न क े संबं में गणना का विववरण प्रस् ु करने का भी विनदUश दे े हैं।स्क ू ल प्रबं न सहाय ा प्राप्त शिशक्षकों को भुग ान विकए जाने वाले वे न क े संबं में अलग से गणना का एक विववरण ैयार करेगा और इसे भुग ान क े प्रमाण क े साथ राज्य सरकार को अग्रेविष करेगा ाविक राज्य सरकार समायोजन की ारीS क देय वे न भुग ान क े संबं में हमारे विनदUशों का पालन करने में सक्षम हो सक े ।जहां क वे न क े भुग ान में संशो न की बा है, उसे भी ैयार विकया जाएगा और राज्य सरकार द्वारा उति आदेश पारिर विकया जाएगा।इस रह का भुग ान स्क ू ल प्रबं न द्वारा भी विनतिश्च रूप से विकया जाएगा।"

6. इस आदेश क े बाद, जिस ंबर 2016 में, प्रति ष्ठान ने इस अदाल से विनदUश मांगने क े खिलए एक आवेदन दायर विकया। आवेदन में क 1 विदया गया विक प्रति ष्ठान को 11 सहाय ा प्राप्त कम[1] ारिरयों (यानी, अपीलक ा1ओं) को 57.68 लाS रुपये और विवशेषाति कार अवकाश वे न क े रूप में 36.20 लाS रुपये का भुग ान करना था। आवेदन ने ग्रेmयुटी और अवकाश क े बदले नक़द भुग ान की गणना का एक ाट[1] भी ैयार विकया। इस आवेदन को स्वीकार नहीं विकया गया। साथ ही, अपीलक ा1ओं ने अवमानना काय1वाही भी दायर की, यानी सी.पी. संख्या (जिसविवल) 640 - 642/2017, जिसविवल अपील संख्या 6601-6603/2016 क े विनस् ारण में इस अदाल ने 6 मा 1 2017 क े आदेश से अपीलक ा1ओं को अवमानना याति काओं को वापस लेने की अनुमति दी, जिजसमें 4 उच्च न्यायालयों को स्थानां रिर करने की स्व ंत्र ा थी। इन परिरन्तिस्थति यों में, अपीलक ा1ओं ने यह कह े हुए उच्च न्यायालय का रुS विकया विक इस अदाल क े आदेशों का ठीक से पालन नहीं विकया गया था, इस हद क विक उन्हें विवशेषाति कार अवकाश क े बदले नक़द भुग ान और ग्रेmयुटी की राशिश का भुग ान नहीं विकया गया था।

7. आक्षेविप आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने उसक े समक्ष पेश विकए गए आवेदनों को इस आ ार पर Sारिरज कर विदया विक ूंविक संविव रिर विकए जाने क े खिलए आवश्यक वे न वास् व में अपीलक ा1 कम[1] ारिरयों को भुग ान विकया गया था, इसखिलए मामले को आगे बढ़ाने का कोई कारण नहीं था। उच्च न्यायालय की राय थी विक 2010 क े विनयमों क े विनयम 10 क े ह या राजस्थान गैर-सरकारी शैतिक्षक संस्थानों (मान्य ा अनुदान सहाय ा और सेवा श ‚) आविद क े ह ) विनयम, 1993 (इसक े बाद, "1993 विनयम") क े अं ग[1] भी न ो ग्रेmयुटी और न ही अवकाश क े बदले नक़द भुग ान अशिभव्यविक्त "वे न" क े अं ग[1] था।

8. इसखिलए व्यशिथ अपीलक ा1ओं ने इस न्यायालय का दरवाजा SटSटाया है। उनकी ओर से विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री दीपक नारगोकर ने क 1 विदया विक अशिभव्यविक्त "वे न" में दोनों घटक शाविमल हैं, अथा1 ग्रेmयुटी, साथ ही अवकाश क े बदले नक़द भुग ान। यह इंविग विकया गया था विक इस न्यायालय मे आने वाले वाले मूल अपीलक ा1ओं में से एक को वास् व में प्रत्यथ[8] संस्थान द्वारा ग्रेmयुटी क े साथ-साथ अवकाश क े बदले नक़द भुग ान का भुग ान विकया गया था। यह भी क 1 विदया गया विक 2010 क े विनयम 5 क े ह, कम[1] ारी विनजी संस्थानों से अवकाश क े बदले नक़द भुग ान और ग्रेmयुटी लाभ क े हकदार थे।

9. इसक े बाद विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता प्रबं न संस्थान द्वारा इस अदाल में दीवानी अपील संख्या 6601-6603/2016 में दायर प्राथ1ना पत्र में, विवशेष रूप से पैरा 13 (6) में विदए गए प्रकथनों पर भरोसा विकया। यह क 1 विदया गया विक प्रबं न प्रति ष्ठान ने बकाया अवकाश क े बदले नक़द भुग ान और ग्रेmयुटी क े भुग ान क े खिलए अपने दातियत्व को स्पष्ट रूप से स्वीकार विकया। इन परिरन्तिस्थति यों में, संस्थान उन उत्तरदातियत्वों से इनकार नहीं कर सक ा था। उन्होंने संस्थापन प्रबं न द्वारा ैयार विकए गए ाट[1] पर भी भरोसा विकया, जिजसमें विवशेष रूप से ग्रेmयुटी और अवकाश क े बदले नक़द भुग ान की राशिश विन ा1रिर की गई थी, जिजसक े सभी 11 कम[1] ारी हकदार थे। उन्होंने इस न्यायालय क े विनण1य राजस्थान राज्य एवं अन्य बनाम वरिरष्ठ उच्च र माध्यविमक विवद्यालय, लछमनगढ़ 2005 (10) SCC 346 पर भरोसा विकया, जिजसमें अदाल ने घोविष विकया विक अवकाश क े बदले नक़द भुग ान को "वे न शब्द की परिरभाषा क े साथ पढ़ा और समझा जाना ाविहए"।

10. राज्य क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता डॉ. मनीष सिंसघवी ने क 1 विदया विक 2010 क े विनयम 5 (xi) क े अनुसार प्रत्येक कम[1] ारी ने यह व न विनष्पाविद विकया था विक वह 2010 क े विनयमों द्वारा विन ा1रिर सेवा क े सभी विनयमों और श ‚ को स्वीकार कर ा है। इसक े अलावा, 2010 क े विनयम 5(viii) द्वारा 'विवशेषाति कार प्राप्त अवकाश क े सं ुलन को आगे ले जाने' की अव ारणा को भी अस्वीकार कर विदया गया था। यह विनवेदन विकया गया था विक विनयम 5(viii) क े अनुसार, कम[1] ारी क े वल विनजी संस्थानों से विवशेषाति कार प्राप्त अवकाश क े शेष क े अवकाश क े बदले भुग ान की मांग कर सक े हैं। इसखिलए, राज्य को उस कारण पर दातियत्व क े साथ बां ा नहीं जा सका। जहां क ग्रेmयुटी की देनदारी का सवाल है, डॉ. सिंसघवी ने राजस्थान वेलफ े यर सोसाइटी बनाम राजस्थान राज्य क े फ ै सले पर भरोसा विकया और कहा विक 1993 क े विनयम 82 क े आ ार पर, सहाय ा प्राप्त शिशक्षण संस्थानों क े कम[1] ारी ग्रेmयुटी भुग ान अति विनयम, 1972 क े ह ग्रेmयुटी क े हकदार थे। विफर भी, 1993 क े विनयम 14 क े अनुसार, ग्रेmयुटी एक स्वीक ृ व्यय नहीं था।परिरणामस्वरूप, इस अदाल ने स्पष्ट रूप से कहा विक ग्रेmयुटी आव 8 अनुदान का विहस्सा नहीं था और उस संबं में राज्य उत्तरदायी नहीं था।

11. प्रति ष्ठान की ओर से उपन्तिस्थ विवद्वान वरिरष्ठ वकील श्री सी.यू. सिंसह ने कहा विक इस अदाल का आदेश अपनी श ‚ में स्पष्ट था और अवकाश क े बदले नकद भुग ान और ग्रेmयुटी को "वे न" का विहस्सा नहीं कहा जा सक ा है। आगे यह क 1 विदया गया विक अपीलक ा1ओं द्वारा विदया गया उदाहरण, अथा1 विक उनमें से एक (श्री एस.एस. शेSाव, प्रत्यथ[8] संख्या 8) को ग्रेmयुटी का भुग ान विकया गया था, यह एक अक े ला उदाहरण है जो वास् व में कानून में भी सम ुल्य बाध्य ा क े विबना दातियत्व नहीं डाल सक ा था।

12. आगे यह क 1 विदया गया था विक विवशेषाति कार प्राप्त छ ु ट्टी को वे न अवति क े भी र शाविमल नहीं विकया जा सक ा है, जो विक राजस्थान गैर-सरकारी शैतिक्षक संस्थान अति विनयम, 1989 ( ारा 2 (r)) क े ह "कम[1] ारी की परिरलन्तिब् यों का योग" है। विवद्वान अति वक्ता ने उच्च माध्यविमक विवद्यालय लछमनगढ़ (पूव क्त) में इस अदाल क े फ ै सले पर भरोसा विकया और कहा विक विवशेषाति कार प्राप्त छ ु ट्टी क े भुग ान को सक्षम करने क े खिलए, इसी सहाय ा को राज्य सरकार द्वारा संविव रिर विकया जाना है।

13. जहाँ क ग्रेmयुटी का संबं है, विवद्वान अति वक्ता ने अन्तिम्बका विमशन बॉयज मॉडल स्क ू ल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2020) 2 सीएलआर 177 मामले में छत्तीसगढ़ उच्च े एक विनण1य पर भरोसा विकया और आग्रह विकया विक राज्य सहाय ा प्राप्त संस्थानों क े कम[1] ारिरयों की ग्रेmयुटी का संविव रण करने क े खिलए मुख्य रूप से उत्तरदायी है। यह भी क 1 विदया गया था विक छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने क्षेत्रीय भविवष्य विनति आयुक्त बनाम सना न म[1] बाखिलका माध्यविमक विवद्यालय और अन्य मामले 2007 (1) एस. सी. सी. 268 में इस अदाल क े विपछले फ ै सले पर भरोसा विकया था, यह मानने क े खिलए विक हालांविक सहाय ा प्राप्त संस्थान क ें द्र या राज्य सरकार से संबंति नहीं थे। विफर भी वे विवशिभन्न रीकों से राज्य क े "विनयंत्रण" में थे। विनण1य में आगे कहा गया था विक ग्रेmयुटी भुग ान अति विनयम, 1972, 3 अप्रैल 1997 को भू लक्षी प्रभाव क े साथ ारा 2 (ङ) क े ह "कम[1] ारी" की परिरभाषा में संशो न विकया था। विवश्लेषण और विनष्कष[1]

14. राजस्थान में गैर-सरकारी शैक्षशिणक संस्थान राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षशिणक संस्थान अति विनयम, 1989 (इसक े बाद "अति विनयम") और बनाए गए विनयमों द्वारा शाजिस हैं।अति विनयम की ारा 2 (r) वे न को "मंहगाई भत्ता या विकसी अन्य भत्ते या उस समय देय राह सविह विकसी कम[1] ारी की क ु ल परिरलन्तिब् यों क े योग क े रूप में परिरभाविष कर ी है, लेविकन इसमें प्रति पूरक भत्ता शाविमल नहीं है"। Sंड 2 (घ) द्वारा प्रति पूरक भत्ता का अथ[1] हैः "(घ) "क्षति पूर्ति भत्ता" का अथ[1] विवशेष परिरन्तिस्थति यों में आवश्यक व्यविक्तग व्यय को पूरा करने क े खिलए विदया गया भत्ता है जिजसमें क 1व्य का पालन विकया जा ा है और इसमें यात्रा भत्ता शाविमल होगा लेविकन सत्कार भत्ता शाविमल नहीं होगा और न ही भार क े बाहर विकसी भी स्थान से आने या जाने क े खिलए मुफ् यात्रा का अनुदान शाविमल होगा।"

15. अति विनयम की ारा 3 अनुदान सहाय ा संस्थानों की मान्य ा प्रदान कर ी है; अति विनयम की ारा 4 से 6 मान्य ा से इंकार करने, सहाय ा वापस लेने और संस्था क े खिलए उप ार प्रदान कर ी है।अति विनयम की ारा 7 आगे विनयामक प्राव ान हैं जिजनक े खिलए ऑतिडट, भ 8, शिशक्षकों की बSा1स् गी क े आदेश, बSा1स् गी या बSा1स् गी आविद क े संबं में शिशक्षकों की शिशकाय ों क े विनवारण क े खिलए न्यायाति करण का प्राव ान है।अति विनयम की ारा 29, जो व 1मान उद्देश्यों क े खिलए प्रासंविगक है, विनम्नानुसार ब ा ा है:- "29. कम[1] ारी क े वे न और भत्तेः (1)कम[1] ारिरयों क े वे न और भत्ते विकसी सहाय ा प्राप्त संस्थान क े सभी कम[1] ारिरयों क े संबं में प्रति पूरक भत्तों को छोड़कर वे न और भत्तों का वे नमान सरकारी संस्थानों में समान श्रेशिणयों से संबंति कम[1] ारिरयों क े खिलए विन ा1रिर वे नमानों से कम नहीं होगा। (2) इसक े विवपरी विकसी संविवदा क े हो े हुए भी, इस अति विनयम क े प्रारंभ क े पश्चा ् विकसी अवति क े खिलए विकसी मान्य ाप्राप्त संस्था क े कम[1] ारी का वे न, उस मास क े, जिजसक े संबं में वह संदेय है, अगले मास क े पंद्रहवें विदन या ऐसे पूव[1] र विदन की समाविप्त से पूव[1] प्रबं न द्वारा उसे संदत्त विकया जाएगा जिजसे राज्य सरकार सामान्य या विवशेष आदेश द्वारा विनय करे:बश U विक राज्य सरकार विकसी भी समय भुग ान या वे न और भत्तों क े खिलए एक अलग प्रविšया विन ा1रिर कर सक ी है। (3) वे न का भुग ान विकसी भी प्रकार की कटौ ी क े विबना विकया जाएगा, जिसवाय उन कटौ ी क े जो इस े ह बनाए गए विनयमों या विकसी अन्य कानून द्वारा लागू होने क े खिलए अति क ृ हैं।"

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16. 1993 क े प्रासंविगक प्राव ान विनयम 47 हैं, और प्रासंविगक रूप से 82 हैं। विनयम 47 विवशेषाति कार अवकाश से संबंति है।

47. विवशेषाति कार अवकाश- (1) गैर-शिशक्षण कम[1] ारी - गैर-शिशक्षण कम[1] ारी वग[1] क े सदस्य ाहे अस्थायी हों या स्थायी, एक क ै लेंडर वष[1] में 30 विदनों क े विवशेषाति कार अवकाश क े हकदार होंगे।प्रत्येक वष[1] 1 जनवरी को कम[1] ारी क े अवकाश Sा े में 15 विदन का विवशेषाति कार अवकाश और शेष 15 विदन 1 जुलाई को जमा विकया जाएगा, जो अति क म 300 विदनों क क ु ल सं य क े अ ीन होगा। (2) शिशक्षण कम[1] ारी - (क) विकसी भी क ै लेंडर वष[1] में विकए गए क 1व्य क े संबं में शिशक्षण स्टाफ क े सदस्यों को, ाहे अस्थायी या स्थायी, विवशेषाति कार अवकाश स्वीकाय[1] नहीं है, जिजसमें वे इस उप-विनयम क े Sंड (बी) क े ह विनर्विदष्ट सीमा को छोड़कर पूण[1] अवकाश का लाभ उठा े हैं; (S) विवद्यालयों और महाविवद्यालयों में शिशक्षण स्टाफ एक क ै लेंडर वष[1] में पंद्रह विदनों/विवशेषाति कार अवकाश क े हकदार होंगे।प्रत्येक क ै लेंडर वष[1] की समाविप्त क े ुरं बाद अवकाश Sा े में पंद्रह विदन का विवशेषाति कार अवकाश जमा विकया जाएगा, इसखिलए जमा विकए गए विवशेषाति कार अवकाश का अप्रयुक्त भाग अगले वष[1] क े खिलए अति क म 300 विदनों क आगे बढ़ाने क े खिलए योग्य होगा। (ग) एक क ै लेंडर वष[1] क े दौरान विनयुक्त विकए गए शिशक्षण कम[1] ारिरयों को उस क ै लेंडर वष[1] की समाविप्त क े ुरं बाद उसकी सेवा क े प्रत्येक पूरे विकए गए महीने क े खिलए 1 1/4 विदनों की दर से विवशेषाति कार अवकाश की अनुमति दी जाएगी, जो šमशः 8:7 क े अनुपा में उपरोक्त Sंड (बी) में दी गई श 1 क े अ ीन होगा। विनयम 82 इस प्रकार है। "82. ग्रेmयुटी और बीमा:- (1) सहाय ा प्राप्त शैक्षशिणक संस्थानों क े कम[1] ारी समय- समय पर संशोति ग्रेmयुटी का भुग ान अति विनयम, 1972 क े ह स्वीकाय[1] ग्रेmयुटी क े हकदार होंगे. (2) प्रबं सविमति भार ीय जीवन बीमा विनगम की संबंति योजना क े ह अपने कम[1] ारिरयों क े समूह बीमा की व्यवस्था करेगी।

17. व 1मान मामले में, अपीलक ा1ओं को अपने अति कारों क े खिलए संघष[1] करना पड़ा। राज्य ने शुरू में उन्हें विनयविम ीकरण का लाभ देने से इनकार कर विदया। अनु ोष क े खिलए उनकी याति काएं असफल रहीं। अं: इस अदाल ने अपने आदेश विदनांक 19 जुलाई 2016 द्वारा उन्हें विनयविम करने का विनदUश विदया।अदाल ने स्वप्रेरणा से अवमानना की काय1वाही भी शुरू की, जिजसक े बाद अपीलक ा1ओं को वे न आयोग की जिसफारिरशों क े अनुसार उनक े वे न और बकाया का भुग ान विकया गया।हालांविक, अपीलक ा1ओं की अनुदान प्राप्त संस्थान में रहने की अवति क े खिलए अवकाश क े बदले नकद भुग ान और ग्रेmयुटी का भुग ान करने क े प्रत्यथ[8] क े दातियत्व का पालन न करने की शिशकाय पर ध्यान नहीं विदया गया था।उन्हें उच्च न्यायालय क े समक्ष उस परिरवेदना को उठाने की अनुमति दी गई। ऐसा करने क े बाद, उच्च न्यायालय ने अपने आक्षेविप आदेश द्वारा उनक े विववाद को कम कर विदया और कहा विक ूंविक वे न क े बकाये बकाया राशिश का भुग ान कर विदया, इसखिलए और क ु छ करने की आवश्यक ा नहीं है।

18. जहां क अवकाश क े बदले नकद भुग ान देय राशिशयों का संबं है, अब मुद्दा बड़ा नहीं है। वरिरष्ठ माध्यविमक विवद्यालय लछमनगढ़ (उपयु1क्त) में इस न्यायालय ने अशिभविन ा1रिर विकया विक इस अति विनयम क े अ ीन वे न में अवकाश क े बदले नकद भुग ान शाविमल है। सुसंग विटप्पशिणयों का सार विनम्नानुसार है: “19. क 1 विदया गया है विक ारा 16 वे न सविह सेवा की विवशिभन्न श ‚ को संदर्भिभ कर ी है जबविक ारा 29(1) क े वल 'वे नमान और भत्तों क े स् रों' को संदर्भिभ कर ी है न विक 'सेवा की श ‚' को।विवद्वान अति वक्ता क 1 दे े है विक विनविह ाथ[1] द्वारा, ारा 29 अवकाश क े बदले नकद भुग ान का लाभ को अपवर्जिज कर ी है । हम उपरोक्त क 1 को स्वीकार करने में असमथ[1] हैं। (घ) विकसी क े संबं में ऐसे कम[1] ारी को स्वीकाय[1] विवशेषाति कार अवकाश, जिजसमें उसे पूण[1] अवकाश का लाभ उठाने से रोका जा ा है, 15 विदनों क े ऐसे अनुपा में होगा, जो अवकाश न खिलए गए विदनों की संख्या का पूण[1] अवकाश क े साथ संबं है। यविद विकसी क ै लेंडर वष[1] में कम[1] ारी पूण[1] अवकाश का लाभ नहीं उठा ा है, ो उस क े संबं में अवकाश क े अं में उसे 15 विदनों का विवशेषाति कार अवकाश स्वीकाय[1] होगा। (ङ) इन विनयमों क े अ ीन विकसी भी प्रकार क े अवकाश क े साथ या उसक े šम में अवकाश खिलया जा सक ा है, बश U विक अवकाश की क ु ल अवति था अन्य अवकाश क े šम में अथवा संयोजन में खिलए गए विवशेषाति कार अवकाश, उपयु1क्त उप- विनयम (1) क े ह एक समय में विकसी कम[1] ारी को देय और स्वीकाय[1] विवशेषाति कार छ ु ट्टी की राशिश से अति क नहीं होगी।

20. ारा 16 राज्य सरकार को भ 8 और सेवा की श ‚ को विवविनयविम करने क े खिलए विनयम बनाने की शविक्त प्रदान कर ी है जिजसमें अनुदान प्राप्त संस्थानों क े कम[1] ारिरयों की योग्य ा, वे न, ग्रेmयुटी, बीमा, सेवाविनवृखित्त की आयु, अवकाश की पात्र ा, आ रण और अनुशासन आविद से संबंति श ž शाविमल हैं। ारा 16 को पढ़ना होगा और ारा 29 क े साथ सामंजस्यपूण[1] रीक े से काम करना होगा जो अनुदान प्राप्त संस्थानों और सरकारी संस्थानों क े कम[1] ारिरयों क े बी वे न और भत्तों क े स् र में समान ा बनाए रSने का विनदUश दे ा है।

21. जैसा विक हमने अति विनयम की ारा 2 (द) में 'वे न' शब्द की व्यापक परिरभाषा क े साथ सपविठ ारा 29 में 'वे न और भत्ते' अशिभव्यविक्त क े ऊपर अशिभविन ा1रिर विकया है का बहु ही व्यापक अथ[1] है।हम इस विनष्कष[1] पर पहुं े हैं विक "अवकाश क े बदले भुग ान का लाभ" इस अशिभव्यविक्त में शाविमल है जो कम[1] ारी क े Sा े में छ ु विट्टयों क े खिलए वे न क े अलावा क ु छ भी नहीं है।

22. ारा 16 राज्य सरकार को अनुदान प्राप्त संस्थानों क े कम[1] ारिरयों की सेवा श ‚ को विवविनयविम करने क े खिलए विनयम बनाने की शविक्त प्रदान कर ी है।वह ारा विवशेष रूप से अवकाश की पात्र ा क े संबं में विनयम बनाने की शविक्त प्रदान कर ा है।यविद अवकाश वे न ारा 2(द) क े ह 'वे न' की व्यापक परिरभाषा क े अं ग[1] एक प्रकार का वे न है, ो अनुदान प्राप्त संस्थानों क े कम[1] ारिरयों की सेवा की श ‚ को विवविनयविम करने क े खिलए विनयम इस प्रकार बनाए जाने ाविहए विक उनमें सरकारी संस्थानों में कम[1] ारिरयों क े संबं में सेवा की श ‚ में समान ा बनी रहे। यह अति विनयम की ारा 29 मे बाध्यकारी है। इसखिलए, क 1 विदया गया विक लीव इनक ै शमेंट की पात्र ा की विवषय-वस् ु राज्य की ारा 16 क े अं ग[1] है, लेविकन अति विनयम की ारा 29 क े दायरे से बाहर है, भ्रामक है और इसे Sारिरज विकया जाना ाविहए।

23. विव ारा ीन उपबं का अथा1न्वयन कर े समय, यह ध्यान में रSा जाना ाविहए विक कल्याणकारी विव ान का विनव[1] न शिशक्षा को बढ़ावा देने क े खिलए विकया जाना ाविहए।शैतिक्षक मानकों को बनाए रSने क े खिलए अनुदाविन संस्थानों क े कम[1] ारिरयों की सेवा श ‚ में सु ार करने और सरकारी शिशक्षण संस्थानों क े बराबर लाने की मांग की गई है। यह भी ध्यान रSना होगा विक हमारे संविव ान विनमा1 ाओं ने शिशक्षा क े क्षेत्र को उच्च स्थान विदया है और इसे विवशेष दजा1 विदया है। संविव ान क े विवशिभन्न प्राव ान शिशक्षा की उन्नति क े पहलू से संबंति हैं। उन्नी क ृ ष्णन, जेपी व अन्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य 1993 (1) SCC 645 में इस े विनण1य में प्राथविमक शिशक्षा को एक मौखिलक अति कार माना गया है और यह पहलू टी एम ए पई फाउंडेशन व अन्य बनाम कना1टक राज्य व अन्य 2002 (8) एस सी सी में क ु छ अन्य पहलुओं पर विनण1य को उलटने क े बावजूद यह पहलू अभी भी अनुसरण में है। शिशक्षा में सु ार क े खिलए, विवशिभन्न राज्य सरकारें शैतिक्षक संस्थानों को अनुदान प्रदान कर ी हैं और, बड़े पैमाने पर, अनुदान प्राप्त विनजी स्क ू लों क े शिशक्षकों को यथासंभव सरकारी संस्थानों क े शिशक्षकों क े बराबर माना जाना ाविहए।इन अति विनयमों क े प्राव ान शिशक्षक वग[1] क े पक्ष में उदार ापूव1क व्याख्या विकए जाने क े योग्य हैं, जिसवाय इसक े विक क़ानून अन्यथा बाध्य कर सक ा है। विकसी अन्य राज्य का ऐसा कानून हमारे संज्ञान में नहीं लाया गया है जहां शिशक्षा में सु ार क े खिलएअनुदाविन संस्थानों क े शिशक्षकों को समान लाभ से वंति रSा गया हो। शिशक्षकों की सेवा श ‚ में भी सु ार विकया जाना ाविहए।"

19. इस न्यायालय की यह राय है विक अवकाश क े बदले नकद भुग ान क े लाभों का दावा करने क े खिलए अपीलार्भिथयों की पात्र ा क े संबं में उपरोक्त क 1 बाध्यकारी और विनणा1यक है। हालाँविक, राज्य ने विनवेदन विकया था विक 2010 क े विनयम 5 क े आ ार पर, विनयविम विकए गए कम[1] ारी इन लाभों का दावा नहीं कर सक े। 2010 क े विनयम संविव ान क े अनुmछेद 309 क े परं ुक क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए बनाए गए थे। विनयम 5, जहां क वह प्रासंविगक है, विनम्नखिलखिS रूप में कह ा हैः "5. सरकारी सेवा में कम[1] ारिरयों की विनयुविक्त क े खिलए विनयम और श ž।सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षशिणक संस्थानों में विनयविम रूप से विनयुक्त मौजूदा कम[1] ारी जो इन विनयमों क े शुरू होने की ारीS को स्वीक ृ अनुदान प्राप्त पद क े खिSलाफ काम कर रहे हैं, उन्हें राजस्थान स्वैन्तिmछक ग्रामीण शिशक्षा सेवा क े ह विनम्नखिलखिS विनयमों और श ‚ पर विनयुक्त विकया जाएगा अथा1:- (i) कम[1] ारी क े पास समान संवग[1] क े सरकारी सेवकों पर लागू अपेतिक्ष सेवा विनयमों क े अनुसार संबंति पदों क े खिलए आवश्यक शैतिक्षक और व्यावसातियक योग्य ा होनी ाविहए। (ii) सरकार में जिजन पदों पर कम[1] ारिरयों की विनयुविक्त की जाएगी, वे कम[1] ारिरयों की प्रत्येक श्रेणी क े खिलए एक अलग मरणासन्न संवग[1] का गठन करेंगे। (iii) विनयुक्त कम[1] ारिरयों को अनुसू ी क े कॉलम संख्या 2 में विनर्विदष्ट समकक्ष पदों पर क े वल ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेजों / स्क ू लों, यथास्थति, में ैना विकया जाएगा। थाविप, यविद सरकार में ऐसा कोई सम ुल्य पद नहीं है, ो उन्हें अनुदाविन पदों क े समान वे नमान वाले अन्य पदों पर विनयुक्त विकया जाएगा: * * * * * * * (vi) सभी विनयुक्त कम[1] ारिरयों का वे न छठे वे न आयोग क े अनुसार विनयुविक्त क े समय विमलने वाले वे न क े आ ार पर इन विनयमों क े ह उनक े सरकार में शाविमल होने की ति शिथ से प्रभावी होगा। जो राजस्थान जिसविवल सेवा (संशोति वे नमान) विनयम, 1998, राजस्थान जिसविवल सेवा (संशोति वे नमान) सरकारी कॉलेज शिशक्षकों क े खिलए लाइब्रेरिरयन और पीटीआई विनयम, 1999 सविह और सरकारी पॉखिलटेन्तिक्नक कॉलेज शिशक्षकों क े खिलए राजस्थान जिसविवल सेवा संशोति वे नमान में वे न आहरिर कर रहे हैं। लाइब्रेरिरयन और विफजिजकल ट्रेनिंनग इंस्ट्रक्टर विनयम, 2001 को राजस्थान जिसविवल सेवा (संशोति वे न) विनयम, 2008, राजस्थान जिसविवल सेवा (संशोति वे नमान) राजकीय महाविवद्यालय क े शिशक्षकों क े खिलए लाइब्रेरिरयन और पीटीआई विनयम, 2009 और राजस्थान जिसविवल सेवा (संशोति वे न) का लाभ विदया जाएगा। राजकीय पॉखिलटेन्तिक्नक महाविवद्यालय शिशक्षक, पुस् कालयाध्यक्ष एवं शारीरिरक प्रशिशक्षण अनुदेशक विनयमावली, 2010 हे ु वे नमान) इन विनयमों क े अ ीन विनयुविक्त क े उपरान् सरकार में काय1भार ग्रहण करने की ति शिथ से šमशः प्रभावी होगा। (vii) इन विनयमों क े ह विनयुविक्त क े बाद सरकार में उनक े काय1भार ग्रहण करने की ारीS से पहले की अवति क े खिलए राज्य सरकार द्वारा विकसी भी Sा े में कोई भी बकाया (वे न, यन वे नमान, सुविनतिश्च क ै रिरयर प्रगति या क ै रिरयर उन्नति योजना क े बकाया सविह ) का भुग ान नहीं विकया जाएगा। (viii) शेष विवशेषाति कार अवकाश को आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।कम[1] ारी संबंति अनुदान प्राप्त शैक्षशिणक संस्थानों से पी.एल. क े शेष राशिश का भुग ान प्राप्त करने क े खिलए स्व ंत्र होंगे। (x) अनुदाविन संस्थानों में सेवा की अवति को ग्रेmयुटी क े भुग ान क े खिलए नहीं विगना जाएगा, कम[1] ारी अनुदाविन शैक्षशिणक संस्थान में संबंति अनुदान से ग्रेmयुटी का भुग ान प्राप्त करने क े खिलए स्व ंत्र होंगे। (xi) प्रत्येक कम[1] ारी को प्रपत्र -2 में यह व नबं विनष्पाविद करना होगा विक वह स्वेmछा से इन विनयमों क े ह विन ा1रिर सेवा क े सभी विनयमों और श ‚ को स्वीकार कर ा है और सरकारी सेवा में सेवाविनवृखित्त की आयु प्राप्त करने क ग्रामीण क्षेत्रों में न्तिस्थ सरकारी शैक्षशिणक संस्थानों में सेवा करने क े खिलए सहम हो ा है।"

20. स्पष्ट है विक ये विनयम गैर-सरकारी अनुदाविन संस्थानों क े कम[1] ारिरयों और शिशक्षकों को शाविमल करने क े खिलए बनाए गए थे।इस मामले क े प्रयोजनों क े खिलए जो बा प्रासंविगक है वह यह है विक विनयम 5 (viii) द्वारा, मौजूदा विवशेषाति कार अवकाश को आगे ले जाने से इसी रह इंकार कर विदया जा ा है, इसी रह, विनयम 5(ix) क े ह ग्रेmयुटी क े प्रयोजन क े खिलए अनुदाविन संस्थानों में सेवा की अवति की गणना नहीं की जानी है।प्रत्येक कम[1] ारी को विनयम और श ‚ को प्रति ग्रही करने क े खिलए विन ा1रिर प्रपत्र में एक अंडरटेनिंकग देनी होगी।आम ौर पर विकसी कम[1] ारी की भ 8 से पहले पूव1- श 1 लगाने में विकसी भी साव1जविनक विनयोक्ता को दोष नहीं विदया जा सक ा है।हालांविक, ऐसी न्तिस्थति यां मनमानी नहीं हो सक ी हैं, या इ नी कविठन नहीं हो सक ी हैं विक वे अनथ1क हो।इस न्यायालय की राय में, विनयम 5 क े Sंड (viii) में दी गई श 1 अथा1 शेष विवशेषाति कार अवकाश को आगे ले जाना वर्जिज है और कम[1] ारिरयों को अपने विपछले विनयोक्ता, अथा1 ् अनुदाविन संस्थानों से नकदीकरण की मांग करने की आवश्यक ा है, एक मनमानी और अनैति क श 1 है, जिजसे लागू नहीं विकया जा सक ा है।यह कह े हुए विक ऐसी श ž प्रव 1नीय हैं, इस न्यायालय ने, हाल ही में, पानी राम बनाम भार संघ और अन्य में 2021 SCC Online SC 1277, सेंट्रल इनलैंड वाटर ट्रांसपोट[1] कॉरपोरेशन खिलविमटेड और अन्य बनाम ब्रोजो नाथ गांगुली और अन्य (1986)3 SCC 156 क े अवलोकन क े बाद, यह अशिभविन ा1रिर विकया:

23. “…भार क े संविव ान क े अनुmछेद 14 क े ह प्रत्याभू समान ा का अति कार उस व्यविक्त पर भी लागू होगा, जिजसक े पास कोई विवकल्प नहीं है या बन्तिल्क कोई साथ1क विवकल्प नहीं है, लेविकन अनुबं क े खिलए अपनी सहमति देने या विन ा1रिर या मानक रूप में विबन्दुविक रेSा पर हस् ाक्षर करने क े खिलए या विकसी अनुबं क े विहस्से क े रूप में विनयमावली को स्वीकार विकया है, हालांविक उस अनुबं या प्रपत्र या विनयमों में एक Sंड अन्यायपूण[1], अनुति और अनथ1क हो सक ा है। ”

21. इस न्यायालय ने वरिरष्ठ उच्च र माध्यविमक विवद्यालय (पूव क्त) में स्पष्ट रूप से विनण1य विदया था विक छ ु ट्टी नकदीकरण वे न का विहस्सा है।1993 क े विनयमों की योजना में, विकसी भी संस्था को दी जाने वाली सहाय ा का मूल्यांकन और विन ा1रण, विनयम 13 द्वारा प्रदान विकया जा ा है। अनुमोविद व्यय का क्या विहस्सा है जो सहाय ा की सामग्री होगी, विनयम 14 द्वारा प्रदान विकया जा ा है। व 1मान मामले में, प्रबं न संस्थान अनुदान क े रूप में 70% सहाय ा प्राप्त कर रहा था। इन परिरन्तिस्थति यों में, राज्य अपीलक ा1ओं को अवकाश क े बदले नकद भुग ान क े विहस्से का भुग ान करने की अपनी जिजम्मेदारी से पीछे नहीं हट सक ा है, और उन्हें विनयम 5 (vii) या उनक े द्वारा विनष्पाविद विकए जाने वाले विकसी भी विनयम क े पीछे छ ु पा नहीं सक ा है। अपीलक ा1 को इस रह क े लाभ क े हकदार हैं।इस रह क े लाभ की गणना राज्य द्वारा 2016 में, संस्थान की सेवा में काय1भार प्रारम्भ करने की ारीS से उनक े समावेशन की ारीS क की जाएगी। राज्य 70% की सीमा क शेष परिरलाभ का भुग ान करेगा, और शेष 30% प्रबं न संस्थान द्वारा देय होगा।

22. ग्रेmयुटी क े मुद्दे पर, विफर से, दातियत्व क े प्रश्न का विनणा1यक रूप से विनस् ारण कर विदया गया है। हालांविक प्रबं न ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय क े विनण1य अन्तिम्बका विमशन बॉयज़ मॉडल स्क ू ल (पूव क्त) पर भरोसा विकया था, इस न्यायालय की यह राय है विक इसे एक प्राति करण क े रूप में नहीं माना जा सक ा है, क्योंविक उस मामले में न्यायालय ने ग्रेmयुटी भुग ान अति विनयम,1972 क े प्राव ानों का विवश्लेषण विकया था जिजसे 2009 में संशोति विकया गया था। हालांविक, व 1मान मामले में, 1993 क े विनयमों की योजना, जिजसमें अनुदान की श ž शाविमल थीं, स्पष्ट रूप से विनयोक्ता पर ग्रेmयुटी का भुग ान करने का दातियत्व डाल ी हैं, अथा1, अनुदाविन संस्थान, अथा1 इस प्रकरण मे ौथा,पां वां और छठा प्रति वाविदगण है। इसक े अलावा, राजस्थान वेलफ े यर सोसाइटी (पूव क्त) एक प्राति करण है, जिजसमें उसने 1993 क े प्रभाव पर विव ार विकया, और कहा विक यह अनुदाविन संस्थान का प्रबं न है जिजसे ग्रेmयुटी क े भुग ान क े दातियत्व वहन करना है: “7. विनयम 10 सहाय ा अनुदान को शाजिस करने वाली सामान्य श ‚ का प्राव ान कर ा है। अन्य बा ों क े साथ-साथ यह प्राव ान कर ा है विक अनुदान क े खिलए आवेदन करने वाली प्रत्येक संस्था को इसमें विन ा1रिर श ‚ का पालन करने क े खिलए अपने दातियत्व को स्वीकार करना माना जाएगा, इनमें से एक यह है विक प्रबं न शिशक्षकों और अन्य कम[1] ारिरयों की विनयुविक्त करेगा और जैसा विनयमों मे विवविह है विन ा1रिर सेवा श ‚ का पालन करेगा। विनयम 11 अनुदान सहाय ा की प्रविšया से संबंति है।विनयम 13 वार्विषक आव 8 अनुदान क े आकलन से संबंति है।इसमें परस्पर यह भी प्राव ान है विक वार्विषक आव 8 अनुदान ालू वष[1] क े अनुमाविन व्यय क े आ ार पर विदया जाएगा और यह अगले वष[1] में देय अनुदान से समायोजन क े अ ीन होगा।इसमें यह भी अशिभविन ा1रिर विकया गया है विक अनुमोविद व्यय की गणना विनयमों और ऐसे अन्य विनदUशों क े अनुसार की जाएगी जो समय- समय पर जारी विकए जा सक े हैं।विनयम 14 अनुमोविद व्यय क े बारे में और व 1मान मामले क े खिलए प्रासंविगक सीमा क विनम्नानुसार हैः विनयम 14. स्वीक ृ व्यय- उपरोक्त विनयम 13 में संदर्भिभ स्वीक ृ व्यय क े वल विनम्नखिलखिS मदों से संबंति होगा- नी े उजि®खिS (A) से (v) क की सभी मदें व्यय की स्वीकाय[1] मदों का घटक 'A' बनेंगी। (क) शिशक्षण और गैर-शिशक्षण कम[1] ारिरयों क े संबं में वास् विवक वे न और भविवष्य विनति योगदान 8.33% से अति क नहीं होगा। (B) से (v)......

8. नोट 2 विनयम 14 में व 1मान संलग्नक उद्देश्यों क े खिलए प्रासंविगक है और इस प्रकार पढ़ा जा ा है: नोट-2. संस्थान द्वारा विकसी पेंशन फ ं ड या ग्रेmयुटी स्कीम में विकए गए अंशदान या पूव[1] शिशक्षकों को भुग ान की गई पेंशन या ग्रेmयुटी क े मद में प्रभार आम ौर पर अनुदान सहाय ा क े उद्देश्य क े खिलए ब क स्वीकार नहीं विकए जा े हैं जब क विक इस विवषय पर विनयमों को सरकार द्वारा अनुमोविद नहीं विकया जा ा है। परं ु विक विकसी राज्य सरकार या भार सरकार से उ ार सेवाओं पर प्राप्त कम[1] ारिरयों क े मामले में, पेंशन और छ ु ट्टी वे न अंशदान को स्वीक ृ व्यय क े रूप में अनुमति दी जाएगी। " 9.विनयम 82 में यह प्राव ान है विक अनुदाविन शैक्षशिणक संस्थान क े कम[1] ारी समय-समय पर संशोति ग्रेmयुटी भुग ान अति विनयम, 1972 क े ह देय ग्रेmयुटी क े हकदार होंगे।

14. अति विनयम की ारा 2 (r) में परिरभाविष वे न की परिरभाषा क े ह आने क े खिलए कम[1] ारिरयों को देय समय क े खिलए ग्रेmयुटी को एक परिरलन्तिब् नहीं कहा जा सक ा है। इसक े अति रिरक्त, विनयम 14 में 'वास् विवक वे न' शब्द का प्रयोग विकया गया है।जैसा भी हो, यह स्पष्ट प्र ी हो ा है विक इस प्रकार क े अनाव 8 भुग ान को वे न की परिरभाषा में शाविमल नहीं विकया जा सक ा है।ग्रेmयुटी का भुग ान सेवाविनवृखित्त / सेवा की समाविप्त क े समय विकया जा ा है।मेटल बॉक्स क ं पनी ऑफ इंतिडया खिलविमटेड बनाम उनक े कम1कारों (1969) आई एलएलजे 785 (एससी) क े मामले क े विनण1य पर भरोसा अपीलक ा1 को बहु कम सहाय ा प्रदान कर सक ा है.यह मामला अति लाभ भुग ान े ह है। यह क े वल लेSाशास्त्र क े जिसद्धां ों से संबंति था।इस बा पर गौर विकया गया विक ग्रेmयुटी योजनाओं क े ह अनुमाविन देय ा, भले ही यह आकन्तिस्मक देय ा हो और संपखित्त कर अति विनयम क े ह एक ऋण न हो, यविद उति रूप से अशिभविनतिश्च विकया जा सक ा है और इसका व 1मान मूल्य उति रूप से छ ू ट प्राप्त है, ो लाभ और हाविन Sा ा ैयार कर े समय सकल प्राविप्तयों से कटौ ी योग्य है। वाशिणन्तिज्यक क्षेत्रों में या लाभ अति विनयम में विनयम या विदशा में, इस रह क े अभ्यास से कोई विनषे नहीं था। उस मामले में सवाल यह था विक क्या शुद्ध लाभ की गणना कर े समय व्यापारी अपनी सकल प्राविप्तयों से प्रत्येक अति रिरक्त वष[1] की सेवा क े खिलए एक विनतिश्च राशिश का भुग ान करने क े खिलए अपनी देय ा प्रदान कर सक ा है जो वह अपने कम[1] ारिरयों से प्राप्त कर ा है।इसका सकारात्मक जवाब विदया गया।यविद ऐसा दातियत्व उति रूप से अशिभविनतिश्च विकया जा सक ा था ो उति रिरयाय ी दर पर पहुं पाना संभव था।हमारे विव ार में, यह विनण1य व 1मान मामले में मुद्दे क े निंबदु को विन ा1रिर करने क े खिलए प्रासंविगक नहीं है।

15. आगे, ग्रेmयुटी को अनुमोविद व्यय में शाविमल नहीं विकया जा सक ा है क्योंविक विनयम 9 क े ह राज्य सरकार ार मदों क े ह अनुदान स्वीक ृ कर सक ी है और ग्रेmयुटी उनमें से विकसी एक क े भी अं ग[1] नहीं आ ी है।यह दावा नहीं विकया जा ा है विक ग्रेmयुटी 2 से 4 मदों क े अं ग[1] आ ा है।मद संख्या 1 'रSरSाव या आव 8 अनुदान' है।विन:संदेह ग्रेmयुटी रSरSाव की श्रेणी में नहीं आ सक ी। यह आव 8 अनुदान भी नहीं है जैसा विक इसमें पहले ही देSा गया है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक ग्रेmयुटी का भुग ान विनयम 9 में उजि®खिS ार श्रेशिणयों में से विकसी क े ह नहीं आ सक ा है।

16. उपरोक्त को ध्यान में रS े हुए, अति विनयम और विनयमों क े अथ[1] में ग्रेmयुटी आव 8 अनुदान का विहस्सा नहीं बन सक ी है। यह अपीलक ा1 को देय अनुदान की राशिश की गणना क े उद्देश्य से देय अनुदान की राशिश की गणना क े प्रयोजनों क े खिलए अनुमोविद व्यय क े भाग क े रूप में शाविमल नहीं है।इस दृविष्टकोण से, राजस्थान सरकार क े विदनांक 26 मई, 1994 क े पत्र में इस आशय का उ®ेS विकया गया है विक विनयमों में ग्रेmयुटी की राशिश पर सहाय ा अनुदान का प्राव ान नहीं है, इसे अनुमोविद व्यय में शाविमल नहीं विकया गया है, इसे अवै नहीं माना जा सक ा है। हालांविक, इससे संबंति संस्थान से ग्रेmयुटी प्राप्त करने क े कम[1] ारिरयों क े अति कार प्रभाविव नहीं होंगे।

17. स्र्ख़स होने से पहले, हम नोट करना ाह े हैं विक यविदअनुदाविन गैर-सरकारी शैक्षशिणक संस्थानों द्वारा अभ्यावेदन विदए जा े हैं, ो राज्य सरकार अनुदान सहाय ा की राशिश की गणना करने क े उद्देश्य से कम[1] ारिरयों को देय ग्रेmयुटी राशिश क े प्रश्न पर सहानुभूति पूव1क विव ार करेगी।हालांविक, हम स्पष्ट कर े हैं विक इस रह का अभ्यावेदन करने और इस पर विव ार करने क, कम[1] ारिरयों को ग्रेmयुटी क े भुग ान में देरी नहीं की जाएगी।" न ो विनयम 82 बदला गया है और न ही विकसी अन्य सामग्री को न्यायालय क े संज्ञान में लाया गया है, यह कहने क े खिलए विक प्रबं न, अथा1 ्, प्रत्यथ[8] संख्या 3-7 अपीलार्भिथयों क े साथ उनक े विनयोक्ता क े रूप में उनक े समाप्त होने पर ग्रेmयुटी का भुग ान करने क े अपने दातियत्व से मुक्त हैं। विनयम 82 अनुदान की एक श 1 है, जिजसका अथ[1] है विक प्रबं न संस्थान 1993 क े ह अपने दातियत्व क े प्रति स े और जागरूक था और उसे सहाय ा प्रदान की गई थी। इसखिलए वह इस मामले में अपने उत्तरदातियत्व से ब नहीं सक ा है।

23. उपयु1क्त ा1 को ध्यान में रS े हुए, यह अशिभविन ा1रिर विकया गया है विक अवकाश नकदीकरण क े संबं में, राज्य और प्रत्यथ[8] संख्या 3 से 7 šमशः 70:30 क े अनुपा में अपीलार्भिथयों को भुग ान करने क े खिलए उत्तरदायी हैं। प्रत्यथ[8] राज्य, आज से ार सप्ताह क े भी र, प्रत्येक अपीलक ा1 की पात्र ा की सीमा का विन ा1रण करेगा और प्रबं न संस्थान (प्रत्यथ[8] संख्या 3 से 7) द्वारा देय राशिश की सीमा की सू ना अपीलार्भिथयों को देगा। इन राशिशयों का भुग ान आज से छह सप्ताह क े भी र सभी प्रत्यथ8गणों द्वारा विकया जाएगा।प्रत्यथ[8] संख्या 3 से 7 आज से छह सप्ताह क े भी र अपीलार्भिथयों को (स्क ू ल में प्रवेश की उनकी प्रारंशिभक ारीS क े आ ार पर, प्रत्यथ[8] राज्य द्वारा समावेशन क े आदेश की ारीS क) ग्रेmयुटी की राशिश की गणना और भुग ान भी करेगा। ूंविक प्रत्यथ8गणों क े दोनों समूहों ने अपने दातियत्व का विवरो विकया और उन्हें अपीलार्भिथयों को देने से इंकार कर विदया है, इसखिलए अपीलार्भिथयों को देय राशिशयों में उनकी हकदारी की ारीS (ओं) से भुग ान की ारीS क 10% की दर से ब्याज भी शाविमल होगा।

24. इसखिलए आक्षेविप आदेश को अपास् विकया जा ा है। उपयु1क्त विनदUशों क े अनुसार अपील स्वीकार की जा ी है। लाग पर कोई आदेश नहीं होगा। भार क े मुख्य न्याया ीश [उदय उमेश लखिल ] न्याया ीश [एस. रवींद्र भट्ट] नई विद®ी, 26 जिस ंबर, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.