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भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 4258/2022
राम क
ु मार …अपीलार्थी' (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य …प्रत्यर्थी' (गण)
विन ण5 य
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई,
JUDGMENT
1. यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े 21 फरवरी, 2019 क े फ ै सले और आदेश को चुनौ ी दे ी है, सिEसमें प्रति वादी संख्या 9 द्वारा दायर की गई रिरट यातिचका को अनुमति दी गई है, सिEसमें उप कलेक्टर, रसूलाबाद द्वारा 18 नवंबर, 2017 को पारिर आदेश को रद्द कर विदया गया है, आैर प्रति वादी संख्या 9 का उतिच मूल्य की दुकान का लाइसेंस रद्द कर विदया गया है और अति रिरक्त आयुक्त (न्यातियक), कानपुर खण्ड, (सिEसे इसमें इसक े बाद अपीलीय प्राति करण कहा गया है) द्वारा 20 Eुलाई, 2018 को पारिर आदेश को रद्द कर विदया गया है।
2. व 5मान अपील को Eन्म देने वाले थ्य संक्षेप में विनम्नानुसार हैंः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2. 1 यहां प्रति वादी संख्या -9 विकरन देवी मूल रिरट यातिचकाक ा5 को ग्राम पंचाय अं ा, हसील रसूलाबाद, सिEला कानपुर देहा में एक उतिच मूल्य की दुकान चलाने क े लिलए लाइसेंस प्रदान विकया गया र्थीा। उपयु5क्त उतिच मूल्य की दुकान क े डीलर द्वारा विकए गए कदाचार क े संबं में उप खण्डीय अति कारी, रसूलाबाद, सिEला कानुपर देहा (ए स्मि\मन पश्चा एसडीओ क े नाम से सन्दर्भिभ ) को विवभिभन्न भिशकाय ें प्राप्त हुई ं, सिEसे क्षेत्रीय आपूर्ति विनरीक्षक क े माध्यम से 3 Eून, 2017 को उतिच मूल्य की दुकान का \र्थील विनरीक्षण विकया गया। \र्थील क े विनरीक्षण में भी, उक्त उतिच मूल्य की दुकान क े संचालन में विवभिभन्न कदाचार और अविनयविम ाएं पाई गई ं । इस प्रकार, 7 Eुलाई, 2017 को एसडीओ द्वारा प्रति वादी संख्या 9 को एक कारण ब ाओ नोविटस Eारी विकया गया। प्रारंभ में, विन ा5रिर ति भिर्थी पर, प्रति वादी नं. 9 ने अपना \पष्टीकरण दालिखल नहीं विकया। इसक े बाद, उन्होंने 16 अग\, 2017 को अपना \पष्टीकरण प्र\ ु विकया।
2. 2 इसक े पश्चा ्, एसडीओ द्वारा एक Eांच की गई एवं कई बयान दE[5] विकये गये। Eांच क े समापन पर, एसडीओ ने पाया विक आरोप साविब हो गए हैं और इस प्रकार, 18 नवंबर, 2017 क े आदेश द्वारा, प्रति वादी संख्या 9 का उतिच मूल्य की दुकान का लाइसेंस रद्द कर विदया गया।
2. 3 एसडीओ द्वारा पारिर आदेश से व्यभिर्थी होने क े कारण, प्रति वादी नं. 9 ने अपीलीय प्राति कारी क े समक्ष अपनी अपील प्र\ ु की। उक्त अपील को भी अपीलीय प्राति कारी द्वारा विदनांक 20 Eुलाई, 2018 क े आदेश द्वारा खारिरE कर दी गई र्थीी।
2. 4 यह उल्लेखनीय है विक इस बीच, कभिर्थी उतिच मूल्य की दुकान चलाने क े लिलए लाइसेंस व 5मान अपीलक ा5-राम क ु मार क े पक्ष में 15 मई, 2018 क े आदेश द्वारा प्रदान विकया गया र्थीा। ऐसा 19 अप्रैल, 2018 को हसील \ रीय चयन सविमति द्वारा लिलए गए विनण5य क े आ ार पर विकया गया र्थीा। इस थ्य को vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk 20 Eुलाई, 2018 को अपीलीय प्राति कारी क े आदेश में विवशेष रूप से नोट विकया गया र्थीा।
2. 5 अपीलीय प्राति कारी द्वारा पारिर पूव क्त आदेश से व्यभिर्थी होने क े कारण, प्रति वादी नं. 9 ने सिसविवल प्रकीण[5] रिरट यातिचका संख्या 29832/2018 क े इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष एक रिरट यातिचका प्र\ ु की।
2. 6 उच्च न्यायालय इस विनष्कष[5] पर पहुंचा विक प्रति वादी नं. 9 क े उतिच मूल्य दुकान लाइसेंस का रद्दीकरण पूण[5] Eांच प्रविpया का पालन विकए विबना विकया गया र्थीा और इसलिलए, पूरन सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य 1 क े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े पूण[5] पीठ क े विनण5य पर भरोसा कर े हुए, पूव क्त रूप में पीठ यातिचका क े Eैसे अनुमति दी गई।
2. 7 इस प्रकार व्यभिर्थी होने क े कारण, व 5मान अपील प्र\ ु की गयी है।
3. हमने अपीलक ा5 की ओर से उपस्मि\र्थी विवद्व अति वक्ता श्री उदयाविदत्य बनE' और प्रति वादी नं. 1 से 7 की ओर से उपस्मि\र्थी विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता श्री एस आर सिंसह, प्रति वादी नं. 8 की ओर से उपस्मि\र्थी विवद्व अति वक्ता श्री अभिभनव अग्रवाल और प्रति वादी नं. 9 की ओर से उपस्मि\र्थी विवद्व अति वक्ता श्री इरशाद अहमद को सुना है।
4. विवद्व अति वक्ता श्री उदयाविदत्य बनE', प्र\ ु कर े हैं विक यद्यविप प्रति वादी नं. 9 बहु अच्छी रह से अवग र्थीा विक अपीलीय प्राति करण क े समक्ष अपील विवचारा ीन ा रहने क े दौरान, उतिच मूल्य की दुकान चलाने का लाइसेंस व 5मान अपीलक ा5 को आवंविट विकया गया र्थीा, उसने न क े वल रिरट यातिचका में कभिर्थी थ्य को दबा विदया है, बस्मिल्क एक बयान भी विदया है Eो उसक े ज्ञान से पूरी रह से झूठ है। यह प्र\ ु विकया Eा ा है विक उच्च न्यायालय क े समक्ष काय5वाविहयों में अपीलक ा5 क े असम्बद्ध होने क े इस छोटे 1 (2010) 2 UPLBEC 947 = 2010 SCC OnLine All 2707 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk से आ ार पर, व 5मान अपील को \वीकार विकए Eाने की आवश्यक ा है। वह पवन चौबे बनाम भार संघ मामले2 में इस न्यायालय क े विनण5य पर विनभ5र कर ा है। उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य उसक े इस कर्थीन क े समर्थी5न में विक अपीलक ा5 बाद में आबंविट होने क े कारण एक आवश्यक पक्षकार र्थीा और इस प्रकार, उसे एक पक्षकार क े रूप में शाविमल विकए विबना उच्च न्यायालय का आक्षेविप विनण5य और आदेश, विवति में पोषणीय नहीं है.
5. इसक े विवपरी श्री इरशाद अहमद, विवद्व अति वक्ता प्र\ ु कर े हैं विक इस न्यायालय ने पूनम बनाम उत्तर प्रदेश एवं ीन अन्य[3] क े वाद में अभिभविन ा5रिर विकया है विक पूव[5] आवंटी क े आ ार पर विवति क काय5वाही में विवचारण क े दौरान एक आवंटी आवश्यक पक्षकार नहीं है एवं इस प्रकार आक्षेविप विनण5य एवं आदेश सिEसे आरोविप विकए विबना पारिर विकया गया है क े आ ार पर उसका विवरो नहीं विकया Eा सक ा है।
6. वह इस प्र\ ाव क े समर्थी5न में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोट[5] प्राइवेट लिलविमटेड बनाम रीEेंसी कन्वेंशन सेंटर एंड होटल प्राइवेट लिलविमटेड और अन्य[4] क े मामले में इस न्यायालय क े फ ै सले पर भी भरोसा कर ा है विक राह अपीलक ा5 की अनुपस्मि\र्थीति में दी Eा सक ी र्थीी और इस प्रकार, वह उच्च न्यायालय क े समक्ष एक आवश्यक पक्ष नहीं र्थीा।
7. श्री इरशाद अहमद, विवद्व अति वक्ता, यह भी प्र\ ु कर े हैं विक प्रति वादी नं. 9 क े लिखलाफ काय5वाही राEनीति क प्रति द्वंविद्व ा क े कारण शुरू की गई र्थीी। वह प्र\ ु कर ा है विक इसे देख े हुए, व 5मान मामले में विकसी ह\ क्षेप की आवश्यक ा नहीं है.
2 Civil Appeal No.3668 of 2022, decided on May 6, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
8. मुंबई इंटरनेशनल एयरपोट[5] प्राइवेट लिलविमटेड उपरोक्त क े मामले में इस न्यायालय को यह विवचार करने का अवसर विमला विक काय5वाविहयों में आवश्यक पक्षकार कौन है। उक्त विनण5य क े पैराग्राफ 15 का उल्लेख करना प्रासंविगक होगा, Eो इस प्रकार हैः- "15. "आवश्यक पक्षकार" वह व्यविक्त है सिEसे एक पक्षकार क े रूप में शाविमल होना चाविहए र्थीा और सिEसकी अनुपस्मि\र्थीति में न्यायालय द्वारा कोई प्रभावी तिडpी पारिर नहीं की Eा सक ी र्थीी।" यविद कोई ‘आवश्यक पक्षकार’ अभिभयोसिE नहीं विकया Eा ा है ो मुकदमा \वयं खारिरE विकया Eा सक ा है। "समुतिच पक्षकार" एक ऐसा पक्षकार है Eो, यद्यविप एक आवश्यक पक्षकार नहीं है, एक ऐसा व्यविक्त है सिEसकी उपस्मि\र्थीति न्यायालय को मुकदमा में सभी मामलों पर पूण[5], प्रभावी और पया5प्त रूप से विनण5य करने में सक्षम बनाएगी, हालांविक उसे ऐसा व्यविक्त होने की आवश्यक ा नहीं है सिEसक े पक्ष में या सिEसक े लिखलाफ तिडpी दी Eानी है। "यविद कोई व्यविक्त एक उतिच या आवश्यक पक्षकार नहीं पाया Eा ा है, ो अभिभयोक्ता की इच्छा क े विवरुद्ध उसे पक्षकार बनाने का न्यायालय का कोई अति कार क्षेत्र नहीं है। यह थ्य विक कोई व्यविक्त अभिभयोक्ता क े लिखलाफ वाद का विनण5य होने क े बाद वाद संपलित्त में अति कार/विह प्राप्त कर सक ा है, ऐसे व्यविक्त को विवभिशष्ट प्रदश5न क े मुकदमा का एक आवश्यक पक्षकार या उतिच पक्षकार नहीं बना सक ा है।
9. इस प्रकार यह देखा Eा सक ा है विक एक आवश्यक पक्षकार एक ऐसा व्यविक्त है सिEसकी अनुपस्मि\र्थीति में न्यायालय द्वारा कोई प्रभावी तिडpी पारिर नहीं की Eा सक ी है। यह अभिभविन ा5रिर विकया गया है विक यविद एक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk “आवश्यक पक्षकार” को अभिभयोसिE नहीं विकया Eा ा है, ो मुकदमा \वयं खारिरE विकया Eा सक ा है।
10. एक अन्य पहलू सिEस पर विवचार करने की आवश्यक ा है वह यह है विक श्रीम ी उर्मिमला देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 6 अन्य[5] क इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूण[5] पीठ को इस मुद्दे पर विवचार करने का अवसर विमला विक क्या उतिच मूल्य की दुकान क े लाइसेंस क े विनलंबन या रद्द विकए Eाने पर राज्य क े लिलए एक नए उतिच मूल्य की दुकान क े ारक की विनयुविक्त द्वारा एक अं रिरम या अ\र्थीायी व्यव\र्थीा करना अनुज्ञेय र्थीा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पूण[5] न्यायपीठ ने यह अभिभविन ा5रिर विकया विक Eगन्नार्थी उपाध्याय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क े मुख्य सतिचव खाद्य एवं रसद विवभाग[6] क उक्त उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने यह म व्यक्त विकया विक Eब क कानूनी अपील का विवविनश्चय नहीं विकया Eा ा है ब क उतिच मूल्य की दुकान दर्थी5 आ ार पर आबंविट नहीं की Eानी चाविहए और इसे क े वल विकसी अन्य पड़ोसी उतिच मूल्य की दुकान क े सार्थी संलग्न विकया Eाना चाविहए Eो विवति की सही अवस्मि\र्थी ी का वण5न नहीं कर ा है। यह अव ारिर विकया गया विक राज्य सरकार को अनुज्ञविप्त पत्र क े रद्द या विनलंबन क े लिखलाफ पूव[5] आवंटी द्वारा दायर अपील विवचार ीन ा रहने क े दोरान विनयविम आवंटन करने का अति कार विदया गया है।
11. यह ध्यान विदया Eाना चाविहए विक व 5मान मामले में, अपीलीय प्राति करण क े समक्ष अपील विवचारा ीन ा रहने क े दौरान, 19 अप्रैल, 2018 को हसील \ रीय चयन सविमति की सिसफारिरश पर, व 5मान अपीलक ा5 को विनयविम आवंटन क े माध्यम से 15 मई, 2018 को उतिच मूल्य डीलर क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा।
6 Misc. Bench No.10373 of 2011 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
12. Eहां क पूनम (उपरोक्त) क े वाद में इस न्यायालय क े विनण5य का संबं है, सिEस पर विवद्व अति वक्ता श्री इरशाद अहमद द्वारा Eोरदार भरोसा विकया गया है, इस न्यायालय को पूनम चौबे (उपरोक्त ) क े मामले में पूव क्त विनण5य पर विवचार करने का अवसर विमला। इस न्यायालय ने पवन चौबे (उपरोक्त ) क े मामले में सुविमत्रा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य[7] क े मामले में अपने पहले क े विनण5य पर भी ध्यान विदया 7 इन दोनों विनण5यों को ध्यान में रख े हुए, इस न्यायालय ने इस प्रकार म व्यक्त विकयाः हमारा ध्यान पूनम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2016) 2 एससीसी 779 क े मामले में इस न्यायालय क े विनण5य की रफ ध्यान आकर्मिष विकयाः-पूव क्त विनण5य पर भरोसा कर े हुए, प्रति वादी नं. 4 की ओर से उपस्मि\र्थी विवद्व अति वक्ता ने प्रति वाद विकया विक अपीलक ा5 को सुनने की आवश्यक ा नहीं है। उसक े पास मुकदमा चलाने का कोई अति कार नहीं र्थीा। पूनम (उपरोक्त) क े वाद में, उत्तरोत्तर आवंविटयों को वा\ व में सभी चरणों में सुना गया र्थीा।न्यायालय ने Eो अभिभविन ा5रिर विकया वह यह र्थीा विक पश्चात्व ' आवंटी अपने अति कार को \व ंत्र रूप से \र्थीाविप करने का प्रयास कर रही र्थीी। उन्होंने दलील दी विक उनक े पास एक \व ंत्र कानूनी अति कार है। इस न्यायालय ने पाया विक यह मानना बहु मुस्मिश्कल र्थीा विक उसक े पास एक \व ंत्र कानूनी अति कार र्थीा। सुविमत्रा देवी न्यायालय उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2014 की सिसविवल अपील संख्या 9363-9364) में, माननीय न्यायमूर्ति रंEना प्रकाश देसाई और माननीय न्यायमूर्ति 7 Civil appeal Nos. 9363-9364 of 2014, decided on 8th October 2014 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अन्य एन. वी. रमण ( त्कालीन प्रभु ा क े रूप में) की पीठ ने विदनांक 08.10.2014 को एक आदेश पारिर विकया, सिEसक े प्रासंविगक विह\सों को नीचे उद्धृ विकया गया हैः- अपीलक ा5 ने बाद में आबंविट होने क े कारण 17.10.2008 को रिरट यातिचका में शाविमल होने क े लिलए एक आवेदन दालिखल विकया.उस आवेदन पर न ो विवचार विकया गया और न ही अनुमति दी गई। XXX XXX XXX अपीलक ा5 क े विवद्व अति वक्ता ने आग्रह विकया और, हमारी राय में यह सही है विक उच्च न्यायालय को प्रति वादी नं. 6 क े लाइसेंस को बहाल करने से पहले अपीलक ा5 की सुनवाई करनी चाविहए र्थीी क्योंविक अपीलक ा5 क े बाद उत्तरोत्तर में आवंटी र्थीा और प्रति वादी नं. 6 क े लाइसेंस की बहाली से उसक े अति कार प्रभाविव हुए र्थीे। हम अपीलक ा5 क े विवद्व अति वक्ता क े सार्थी पूरी रह सहम हैं.हमारी राय में, उच्च न्यायालय अपीलक ा5 को सुने विबना प्रति वादी नं. 6 का लाइसेंस बहाल नहीं कर सक ा र्थीा क्योंविक ऐसे आदेश से उसक े अति कार विनतिश्च रूप से प्रभाविव हुए र्थीे। भले ही बाद में आवंटी को \व ंत्र अति कार न विमले, लेविकन उसे अभी भी सुनवाई का अति कार है और रद्द करने क े आदेश का बचाव कर े हुए अपना पक्ष रखने का अति कार है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk यह सच है विक अपीलक ा5 की विनयुविक्त क े आदेश में लिलखा है विक आदेश न्यायालय में लंविब काय5वाही क े परिरणाम क े अ ीन है.यह अपीलक ा5 को यह विदखाने की कोभिशश करक े विक प्रति वादी नं. 4 क े लिखलाफ रद्द करने का आदेश सही ढंग से पारिर विकया गया र्थीा, काय5वाही में उपस्मि\र्थी होने और उसका विवरो करने से उसे अयोग्य नहीं ठहरा ा है.
13. इस प्रकार यह देखा Eा सक ा है विक इस न्यायालय ने यह अभिभविन ा5रिर विकया र्थीा विक भले ही विकसी पश्चात्व ' (1994) 1 SCC 1 आवंटी को \व ंत्र अति कार नहीं है, उसे अभी भी सुनवाई का और रद्द आदेश क े आदेश का बचाव आदेश क े लिलए प्र\ ुति यां देने का अति कार है।
14. यह भी ध्यान देने योग्य है विक कभिर्थी मामले में, अर्थीा5 ्, पवन चौबे (उपरोक्त) में, अपीलक ा5 की विनयुविक्त का आदेश न्यायालय में लंविब काय5वाविहयों क े परिरणाम क े अ ीन र्थीा। व 5मान में मामला काफी बेह र स्मि\र्थीति में है। इस मामले में अपीलक ा5 का चयन हसील \ रीय चयन सविमति द्वारा 19 अप्रैल, 2018 को हुई अपनी बैठक में विकया गया र्थीा और उसक े बाद उसे सक्षम प्राति कारी क े 15 मई, 2018 क े आदेश क े अनुसार विनयविम आ ार पर उतिच मूल्य क े डीलर क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा।
15. इस पृष्ठभूविम में, हम पा े है विक उच्च् न्यायालय क े समक्ष काय5वाविहयों में एक आवश्यक पक्षकार र्थीा। व 5मान अपील को इस संतिक्षप्त आ ार पर \वीकार विकया Eाना चाविहए। र्थीाविप, एक और अति क गंभीर आ ार है सिEस पर व 5मान अपील को \वीकार विकया Eाना चाविहए।
16. अपीलीय प्राति कारी ने 20 Eुलाई, 2018 क े अपने आदेश में \पष्ट रूप से इस प्रकार कहा हैः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk व 5मान में, नए डीलर श्री राम क ु मार सिंसह पुत्र छोटे सिंसह को उतिच मूल्य डीलर, ग्राम अंटा हसील रसूलाबाद, कानपुर देहा क े आदेश में अनुमोविद विकया गया है।अं में यह प्रार्थी5ना विकया विक अपील गुण-दोष से रविह होने क े कारण खारिरE की Eा सक ी है।
17. आगे यह म व्यक्त विकया गया हैः'' Eनविह में खण्ड विवकास अति कारी द्वारा विदए गए प्र\ ाव क े अनुसार ग्राम पचांय अं ा में उतिच मूल्य क े डीलर क े चयन क े लिलए एक आम सभा २०१८ में बुलायी गयी र्थीी, सिEसमें ग्राम पंचाय अं ा, हसील रसूलाबाद, कानपुर देहा क े विनवासी श्री राम क ु मार सिंसह पुत्र श्री छोटे सिंसह का नाम विवचार-विवमश[5] क े बाद लिलया गया र्थीा। सिEला मसिE\ट्रेट, रसूलाबाद, कानपुर देहा विदनांक 15.05.2018 क े आदेश क े अनुसार, श्री राम क ु मार सिंसह पुत्र श्री छोटे सिंसह, ग्राम पंचाय अं ा, हसील रसूलाबाद, कानपुर, देहा को उप आयुक्त (खाद्य) कानपुर तिडवीEन और माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Eारी आदेशों क े अनुसार नया कोटेदार विनयुक्त विकया गया है।
18. इस प्रकार यह देखा Eा सक ा है विक प्रति वादी नं. 9 बहु अच्छी रह से अवग र्थीा विक काय5वाही विवचारा ीन ा रहने क े दौरान, अपीलक ा5 को 15 मई, 2018 को उतिच मूल्य डीलर क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा। अपीलीय प्राति करण का आदेश 20 Eुलाई, 2018 को पारिर विकया गया है। यह स्मि\र्थीति होने क े बावEूद, प्रति वादी नं. 9 ने रिरट यातिचका क े ज्ञापन में इस प्रकार उल्लेख आदेश क े लिलए पया5प्त साहस विदखायाः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk ''33. यहां यह उल्लेख करना भी उल्लेखनीय है विक उतिच मूल्य की दुकान विवचारा ीन ा रहने क े दौरान,विकसी भी ीसरे पक्षकार को आवंटन नहीं विकया गया र्थीा और इस माननीय न्यायालय क े विनद•श क े अनुसार, यातिचकाक ा5 की दुकान एक अन्य उतिच मूल्य की दुकान ारक से Eुड़ी हुई र्थीी।
19. इस प्रकार यह देखा Eा सक ा है विक यद्यविप प्रति वादी सं-9 बहु अच्छी रह से अवग र्थीा विक अपीलीय प्राति करण क े समक्ष काय5वाही विवचार ीन ा रहने क े दौरान, व 5मान अपीलक ा5 क े पक्ष में एक आवंटन विकया गया र्थीा, उसने अपनी रिरट यातिचका में यह प्रकर्थीन विकया है विकसी ीसरे पक्षकार को आवंटन नहीं विकया गया र्थीा। उसने आगे कहा है विक, उच्च न्यायालय क े विनद•शों क े अनुसार, प्रति वादी नं. 9 की उतिच मूल्य की दुकान एक अन्य उतिच मूल्य की दुकान क े सार्थी संलग्न र्थीी। यह बयान थ्यात्मक रूप से प्रति वादी संख्या 9 क े ज्ञान से गल है.इसे मैदान में इस प्रकार दोहराया गया हैः ''(एन)- क्योंविक उतिच मूल्य की दुकान क े विवचारा ीन ा क े दौरान, इस माननीय न्यायालय क े विनद•श क े अनुसार विकसी ीसरे पक्ष को आवंटन नहीं विकया गया र्थीा, यातिचकाक ा5 की दुकान विकसी अन्य उतिच मूल्य की दुकान क े सार्थी संलग्न र्थीी।
20. इस प्रकार यह \पष्ट है विक प्रति वादी नं. 9 ने न क े वल इसमें अपीलक ा5 को उतिच मूल्य की दुकान क े बाद आवंटन क े बारे में थ्य को दबाया है, बस्मिल्क उच्च न्यायालय को गुमराह करने का भी प्रयास विकया है विक प्रति वादी नं. 9 (उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिचकाक ा5 ) की उतिच मूल्य की दुकान दूसरे उतिच मूल्य की दुकान क े सार्थी संलग्न र्थीी।
21. इस न्यायालय ने एस.पी. चेंगायुवैराया क े विवति क उत्तराति कारी क े द्वारा बनाम Eगन्नार्थी (मृ ) क े विवति क उत्तराति कारी और अन्य[8] क े मामले में यह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अभिभविन ा5रिर विकया है विक असम्यक लाभ प्राप्त करने की दृविष्ट से सुसंग और ास्मित्वक द\ ावेEों का प्रकटन न करना कपट क े बराबर होगा। यह अभिभविन ा5रिर विकया गया है विक कपट द्वारा प्राप्त विनण5य या तिडpी को अकृ माना Eाएगा। हम पा े हैं विक प्रति वादी नं. 9 ने न क े वल एक भौति क थ्य को दबाया है, बस्मिल्क उच्च न्यायालय को गुमराह करने की भी कोभिशश की है। इस आ ार पर भी, व 5मान अपील \वीक ृ विकये Eाने योग्य है।
22. परिरणाम\वरूप, अपील को अनुमति दी Eा ी है।उच्च न्यायालय क े 21 फरवरी, 2019 क े आदेश को विनर\ और अपा\ विकया Eा ा है।तिडप्टी कलेक्टर, रसूलाबाद द्वारा 18 नवंबर, 2017 को प्रति वादी नं. ९ का उतिच मूल्य की दुकान का लाइसेंस रद्द करने क े आदेश और अति रिरक्त आयुक्त (न्यातियक), कानपुर तिडवीEन, कानपुर द्वारा प्रति वादी नं. ९ की अपील को खारिरE कर े हुए विदनांक २० Eुलाई, २०१८ को पारिर आदेश की पुविष्ट की Eा ी है. (1994) 1 SCC 1
23. लंविब आवेदन, यविद कोई हो (1994) 1 SCC 1, का विन\ ारण विकया Eा ा है। लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं।................................ माननीय न्यायमूर्ति बी आर. गवई.............................… माननीय न्यायमूर्ति सी.टी रवीक ु मार नई विदल्ली vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk 28 सिस ंबर, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk