New Okhla Industrial Development Authority v. Central Cooperative Housing Society and Others

Supreme Court of India · 22 Sep 2022
Uday Umesh Lalit; Indira Banerjee; K. M. Joseph
Civil Appeal Nos. 58555/2005, 58702/2005, 61630/2005 and Special Leave Petition No. 790/2008
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld that land sold in violation of Section 154 UP Act vests in the State, validated NOIDA's cancellation of allotments, and directed allotment of apartments to 844 eligible cooperative society members to settle protracted litigation.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी अपील संख्या ....... वर्ष 2022
(@विवशेर्ष अनुमति याति'का (दीवानी) संख्या 25485 वर्ष 2014)
न्यू ओखला औद्योवि2क विवकास प्राति करण (नोएडा) .....अपीलक ा(2ण)
बनाम

ें द्रीय कम'ारी सहकारी जी. एन. सविमति और अन्य ..... प्रत्यर्थी<(2ण)
सह
सिसविवल अपील संख्या.........… वर्ष 2022
(@विवशेर्ष अनुमति याति'का (दीवानी) संख्या 32861-32862 वर्ष 2017)
सह
सिसविवल अपील संख्या........ वर्ष 2022 mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
(@विवशेर्ष अनुमति याति'का (दीवानी) संख्या 25488/2014)
सह
सिसविवल अपील संख्या.........वर्ष 2022
(@विवशेर्ष अनुमति याति'का (दीवानी) संख्या 25487 वर्ष 2014)
आदेश
भार क
े मुख्य न्याया ीश उदय उमेश ललिल
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की 2यी।.

2. न्यू ओखला औद्योवि2क विवकास प्राति करण (संक्षेप में ‘नोएडा’) की ओर से व मान अपीलें सिसविवल प्रकीण रिरट याति'का संख्या 58555/2005, 58702/2005 और 61630/2005 और प्रर्थीम अपील संख्या 790/2008 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (संक्षेप में 'उच्च न्यायालय ') द्वारा पारिर 19.11.2013 विदनांविक अं रिरम आदेश क े विवरूद्ध दायर की 2यी है। क ें द्रीय कम'ारी सहकारी 2ृह विनमाण सविमति लिलविमटेड (संक्षेप में, 'प्रत्यर्थी<-सोसाइटी') द्वारा सीलिंल[2] की कायवाही में पारिर आदेशों को 'ुनौ ी दे े हुए उक्त रिरट याति'काएं दायर की 2ई र्थीीं सिजसमें माना 2या र्थीा विक उक्त प्रत्यर्थी<-सोसाइटी क े पास अति रिरक्त भूविम र्थीी जो राज्य में विनविह र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. प्रत्यर्थी<-सोसाइटी द्वारा क ु छ व्यविक्त[2] भू- ारकों से भूविम क े क ु छ टुकड़े खरीदे 2ए र्थीे।प्राति कारिरयों क े अनुसार, प्रत्यर्थी<-सोसाइटी क े पक्ष में विकए 2ए स्र्थीानां रण दो कारणों से अवै र्थीे। (i) ऐसे हस् ां रण उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूविम सु ार अति विनयम, 1950 (संक्षेप में, उत्तर प्रदेश अति विनयम) की ारा 154 क े प्राव ानों का उल्लंघन कर े हुए विकए 2ए र्थीे और इसलिलए भूविम राज्य सरकार में विनविह र्थीीं। (ii) दूसरी आपलित्त अति क म सीमा कानून की प्रयोज्य ा से संबंति है, सिजसक े संदभ में 12.[5] एकड़ से अति क की कोई भी जो राज्य सरकार में विनविह हो2ी।

4. दूसरी ओर, प्रत्यर्थी<-सोसाइटी की ओर से क विदया 2या र्थीा विक संबंति प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा 2विg खोदाईजी सविमति द्वारा की 2ई सिसफारिरशों को ध्यान में रख े हुए, जब भी विकसी सहकारी सोसाइटी द्वारा विकसी भूविम का अति ग्रहण नोएडा द्वारा विकया जाए2ा, ो अति ग्रविह भूविम का 40% भूखंडों क े माध्यम से ऐसी सहकारी सोसाइटी क े सदस्यों को आवंविट विकया जाए2ा। इस प्रकार विकए 2ए काय में, 1754 व्यविक्त, जो प्रत्यर्थी<-सोसायटी क े सदस्य र्थीे, पात्र पाए 2ए और 3,23,650 व[2] फ ु ट भूविम नोएडा को 1754 सदस्यों को आवंविट करने का विनदmश विदया 2या र्थीा। दनुसार, नोएडा द्वारा 1754 सदस्यों क े पक्ष में आवंटन पत्र भी जारी विकए 2ए, सिजन्होंने 19 करोड़ रुपये जमा विकए, जो डाउन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पेमेंट क े रूप में 40 प्रति श र्थीा, इसक े बाद ब्याज सविह ीन समान छमाही विकस् ों क े सार्थी क ु ल 17 करोड़ रुपये जमा विकया।इस प्रकार, 1754 सदस्यों द्वारा क ु ल 36 करोड़ रुपये जमा विकए 2ए।

5. प्रत्यर्थी<-सोसायटी की फज< सदस्य ा क े बारे में कई शिशकाय ें र्थीीं।इसलिलए नोएडा क े उप मुख्य कायकारी अति कारी डॉ. प्रभा क ु मार द्वारा जां' की 2ई, सिजन्होंने प्रत्यर्थी<-सोसाइटी क े सदस्यों क े पक्ष में विकए 2ए आवंटन को रद्द करने की सिसफारिरश की।परिरणामस्वरूप, विदनांक 08.07.1997 को कारण ब ाओ नोविटस जारी करने क े बाद, नोएडा ने ऐसे सभी आबंटन रद्द कर े हुए विदनांक 05.05.1998 को पत्र जारी विकया। इसक े परिरणामस्वरूप इसे 'ुनौ ी दी 2ई सिजसे प्रारंभ में उच्च न्यायालय ने रिरट याति'का संख्या 39842/2001 में अपने विनणय द्वारा स्वीकार कर लिलया र्थीा। र्थीाविप, इस न्यायालय ने न्यू ओखला इंडस्ट्रिस्टtयल डेवलपमेंट अर्थीॉरिरटी बनाम क े न्द्रीय कम'ारी सहकारी 2ृह विनमाण सविमति 1 क े मामले में इस विनणय को उलट विदया।इस न्यायालय द्वारा यह अशिभविन ारिर विकया 2या र्थीा विक उच्च न्यायालय रिरट अति कारिर ा में थ्य क े मुद्दों पर नहीं जा सक ा र्थीा।

6. ल2भ[2] उसी समय, प्रत्यर्थी<-सोसाइटी द्वारा ारिर भूविम क े संबं में शुरू की 2ई ीन सीलिंल[2] कायवाविहयों में, प्राति कारिरयों द्वारा यह विनष्कर्ष विनकाला 2या विक अति रिरक्त भूविम र्थीी जो राज्य सरकार में विनविह र्थीीं। इसलिलए प्रत्यर्थी< - सोसायटी द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष ीन रिरट याति'काएं दायर की 2ई र्थीीं, 1 (2006) 9 एससीसी 524- सिसविवल अपील सं. 1569/2004 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जो रिरट याति'का संख्या 58555/2005, 58702/2005 और 61630/2005 र्थीीं, सिजसमें सीलिंल[2] कानून क े ह विदए 2ए कशिर्थी विनणयों को 'ुनौ ी दी 2यी र्थीी।

7. नोएड़ा वाद 1 में इस न्यायालय द्वारा विदए 2ए विनणय क े फलस्वरूप प्रत्यर्थी<- सोसाइटी द्वारा एक सिसविवल वाद मूल वाद संख्या 273/2006 भी दायर विकया 2या र्थीा, सिजसमें नोएडा द्वारा विदनांक 05.05.1998 को जारी विकए 2ए उस पत्र को 'ुनौ ी दी 2ई र्थीी सिजसमें उक्त 1754 सदस्यों क े पक्ष में विकए 2ए आवंटन को रद्द कर विदया 2या र्थीा। नोएड़ा द्वारा जारी विकए 2ए 05.05.1998 विदनांविक पत्र को अपास् कर े हुए उक्त वाद को विव'ारण न्यायालय द्वारा स्वीकार विकया 2या र्थीा। र्थीाविप यह अशिभविन ारिर विकया 2या र्थीा विक प्रत्यर्थी< -सोसाइटी 27.02.1988 क े बाद, अर्थीा ्, अति ग्रहण क े लिलए अति सू'ना जारी होने क े बाद, विकसी भी भूविम का अति ग्रहण नहीं कर सक ी र्थीी।इसलिलए विव'ारण न्यायालय द्वारा यह अशिभविन ारिर विकया 2या विक प्रत्यर्थी< -सोसाइटी द्वारा 27.02.1988 क े बाद खरीदी 2ई भूविम क े संबं में कोई अति कार प्रत्यर्थी< - सोसाइटी क े पक्ष में उत्पन्न नहीं हो सक ा है। विव'ारण न्यायालय क े इस फ ै सले को नोएडा द्वारा प्रर्थीम अपील संख्या 790/2008 में उच्च न्यायालय में 'ुनौ ी दी 2ई है।अपील में प्रत्यर्थी< - सोसायटी द्वारा दायर प्रत्याक्षेप को प्रर्थीम अपील संख्या 412/2013 क े रूप में दज विकया 2या है। 1 उपरोक्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

8. इन परिरस्ट्रिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय की खण्ड पीg क े समक्ष उपयुक्त सभी ीन रिरट याति'काएं और प्रर्थीम अपील संख्या 790/2008 आई ं, उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर, 2013 को अपने अं रिरम आदेश द्वारा विनम्नानुसार क ु छ मुद्दों पर विव'ार विकयाः- "......…इसलिलए, हमें यह अशिभविन ारिर करने में कोई संको' नहीं है विक भूविम र द्वारा सहकारी सविमति क े पक्ष में, ारा 154 का उल्लंघन कर े हुए, 1958 से 1976 क े उत्तर प्रदेश अति विनयम संख्या 35 क े ला2ू होने क प्रभाविव सभी अं रणों को शून्य नहीं माना जाना 'ाविहए और भूविम स्व ः राज्य सरकार में विनविह नहीं हो ी है। ारा 154 क े उल्लंघन में इस रह क े प्राव ानों क े अं 2 आने वाली भूविम से बेदखली क े लिलए मुकदमा क े वल ग्राम सभा द्वारा 'लाया जा सक ा है। हमारे विनष्कर्ष का समर्थीन ारा 166 द्वारा विकया 2या है, जैसा विक वह ब र्थीा, सिजसने सिसरदार और असामी द्वारा अति विनयम, 1950 का उल्लंघन कर े हुए विकए 2ए स्र्थीानां रण को क े वल शून्य घोविर्ष विकया। अति विनयम क े संदभ में भूविम र द्वारा विकए 2ए हस् ां रण को ारा 166 क े ह शून्य घोविर्ष नहीं विकया 2या र्थीा। हम आ2े अशिभलिललिख कर े हैं विक उत्तर प्रदेश अति विनयम सं. 37/1958 क े अं 2 आने वाली अवति से उत्तर प्रदेश अति विनयम सं. 20/1982 क े ला2ू होने क अर्थीा ् 3 जून 1981 क, जब क विक ारा 163 क े अ ीन शविक्तयों का प्रयो2 कर े हुए सहायक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कलेक्टर द्वारा यह घोर्षणा न की 2ई हो विक अं रण ारा 154(1) क े प्रति क ू ल होने क े कारण शून्य है, भूविम को ारा 163(2) क े अ ीन राज्य सरकार में विनविह नहीं समझा जाए2ा। 1976 क े उत्तर प्रदेश अति विनयम सं. 35 क े प्राव ान जब प्रवृत्त र्थीे, उस अवति क े दौरान, या'ी क े न्द्रीय कम'ारी सहकारी 2ृह विनमाण सविमति लिलविमटेड क े पक्ष में विनष्पाविद विवक्रय-विवलेखों में से विकसी में सहायक कलेक्टर द्वारा जारी कोई घोर्षणा हमारे संज्ञान में नहीं लायी 2यी है और न ही राज्य सरकार या नोएडा का यह कहना है विक इस संबं में सहायक कलेक्टर द्वारा कभी भी कोई ऐसा आदेश जारी विकया 2या र्थीा, इस संबं में अशिभलेख पर कोई सामग्री नहीं है।इसलिलए, हमें यह दज करने में कोई संको' नहीं है विक ारा 154 का उल्लंघन कर े हुए जैसा विक राज्य सरकार और नोएडा द्वारा कशिर्थी विकया 2या है, 13 नवंबर 1976 से 3 जून, 1981 क े बी' याति'काक ा क ें द्रीय कम'ारी सहकारी 2ृह विनमाण सविमति लिलविमटेड क े पक्ष में विनष्पाविद की 2ई विबक्री-विवलेखों क े संबं में भूविम, हाउसिंस[2] सोसाइटी की संपलित्त बनी रहे2ी और राज्य सरकार में विनविह नहीं समझी जाए2ी। जहां क 3 जून 1981 से 27 फरवरी 1988 क े बी' विकए 2ए हस् ां रणों का संबं है, पक्षकारों क े बी' एक मुद्दा यह है विक क्या ारा 154 क े ह "व्यविक्त" शब्द की परिरभार्षा क े अन् 2 "सहकारी सोसाइटी" को भू लक्षी रूप से शाविमल करना वै है या नहीं। यह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कहा 2या है विक विकसी प्राव ान को भू लक्षी प्रभाव से लाकर स्र्थीाविप अति कारों को अस्ट्रिस्र्थीर नहीं विकया जा सक ा है।हम उति' स् र पर इस मुद्दे का परीक्षण करें2े और इस स् र पर हमारे द्वारा कोई अंति म राय व्यक्त नहीं की जा रही है। हम आ2े पा े हैं विक 27 फरवरी 1988 क े पश्चा ् विनष्पाविद विवक्रय- विवलेखों क े संबं में, पहली अपील में आक्षेविप आदेश क े अ ीन सिसविवल न्याया ीश (वरिरष्ठ प्रव[2]), 2ौ म बुद्ध न2र द्वारा हाउसिंस[2] सोसाइटी को कोई लाभ प्रदान नहीं विकया 2या है। प्रति अपील क े 2ुण-दोर्ष पर पहली अपील की सुनवाई क े 'रण में विव'ार विकया जाए2ा और उस संबं में मुद्दों को भी ब जाँ'ने क े लिलए छोड़ विदया जा ा है। 'ूंविक रिरट याति'का संख्या 58555/2005, रिरट याति'का संख्या 58702/2005 और रिरट याति'का संख्या 61630/2005 में 'ुनौ ी क े विवर्षय क े आदेशों क े ह, उपयुक्त कानूनी पहलुओं की जां' नहीं की 2ई है।विव'ार की विवर्षय-वस् ु विबक्री-विवलेख की ारीख और उस ारीख पर ला2ू विवति जैसा विक ऊपर देखा 2या है, से संबंति थ्यों पर नए सिसरे से विव'ार करने की आवश्यक ा है। हमारे लिलए यह आवश्यक हो 2या है विक हम सिजला मसिजस्टtेट, 2ौ म बुद्ध न2र से एक रिरपोट प्राप्त करें विक रिरट याति'का संख्या Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 58702/2005, रिरट याति'का संख्या 61630/2005 और रिरट याति'का संख्या 58555/2005 में 'ुनौ ी की विवर्षय वस् ु, वाद संख्या 22/1994, 29/2004 और 43/1992 को जन्म देने वाले विवक्रय विवलेखों की सही ारीख का खुलासा करें।सिजला मसिजस्टtेट मूल अशिभलेख लब करे2ें और उपरोक्त ीन मामलों की कायवाविहयों की विवर्षय-वस् ु विवशिभन्न विवक्रय-विवलेख की सटीक ारीख क े संबं में एक रिरपोट प्रस् ु करे2ें। वह यह भी दर्थिश करे2ें विक जो ऊपर अशिभलिललिख विकया 2या है, क्या उसक े आलोक में, 2ांव सभा द्वारा उत्तर प्रदेश अति विनयम संख्या 37/1958 क े प्राव ानों क े अनुसार ारा 167 क े ह बेदखली क े लिलए कोई मुकदमा दायर विकया 2या र्थीा या सहायक कलेक्टर द्वारा ारा 163 क े ह कोई घोर्षणा जारी की 2ई र्थीी या नहीं, जैसा विक संबंति अवति क े विबक्री विवलेखों क े दायरे में आने वाली कशिर्थी भूविम क े संबं में 1976 क े उत्तर प्रदेश अति विनयम संख्या 35 क े ह पेश विकए 2ए प्राव ानों में र्थीा। यविद ऐसा कोई वाद/घोर्षणा की 2ई र्थीी, ो वादपत्र/घोर्षणा क े आदेश की एक प्रति अपनी रिरपोट क े सार्थी सिजला मसिजस्टtेट द्वारा संलग्न की जाए2ी। यह रिरपोट 19 विदसम्बर 2013 क प्रस् ु की जाए2ी।"

9. उपरोक्त आदेश व मान में इन अपीलों में 'ुनौ ी क े अ ीन है।

10. इस प्रकार, इस अव ारण को 'ुनौ ी विक अति क म सीमा से अति क भूविम र्थीी और उक्त अति रिरक्त भूविम राज्य सरकार में विनविह र्थीी, अभी भी उच्च Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय में पूव क्त कशिर्थी ीन रिरट याति'काओं में विव'ारा ीन है। दीवानी न्यायालय ने पहले ही यह विनणय दे विदया है विक नोएडा प्राति करण द्वारा 5 मई 2008 को अपने सं'ार में विकए 2ए आबंटन रद्द करना अमान्य और 2ल है। इससे उत्पन्न प्रर्थीम अपील भी उच्च न्यायालय क े समक्ष विव'ारा ीन है।

11. इन परिरस्ट्रिस्र्थीति यों में, जब मामलों को सुनवाई क े लिलए लिलया 2या र्थीा, यह देखने का प्रयास विकया 2या र्थीा विक क्या पक्षकार एक सहमति पर पहुं' सक े हैं और मामले को सुलझा सक े हैं। इस विव'ार क े सार्थी इस न्यायालय द्वारा विदनांक 23.08.2021 क े अपने आदेश में विनम्नलिललिख विटप्पशिणयां की 2ई ं। "क े न्द्रीय कम'ारी सहकारी 2ृह विनमाण सविमति (संक्षेप में "सोसायटी") की ओर से पेश वरिरष्ठ अति वक्ता श्री कविवन 2ुलाटी ने अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी कहा विकः (क) 03.06.1981 से पूव सोसाइटी द्वारा अति ग्रविह भूविम की सीमा 99.28 बीघा र्थीी, यद्यविप 03.06.1981 क े पश्चा ् 27.02.1988 को सोसाइटी की जो 202.04 बीघा क े स् र क बढ़ 2ई र्थीी। (ख) सोसाइटी 03.06.1981 को 99.28 बीघा की जो क े संबं में अपनी हकदारी को सीविम करने क े लिलए ैयार है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) खोदाईजी सविमति की रिरपोट, सिजसक े अनुसार विवकसिस भूविम का 40 प्रति श विहस्सा हस् ां रिर हो जाए2ा, सोसायटी की हकदारी 39.71 बीघा = 24.82 एकड़ हो जाए2ी। (घ) यद्यविप सोसाइटी की प्रारंशिभक सदस्य ा 2149 सदस्यों की ब ाई 2ई र्थीी, सत्यापन और पुनः सत्यापन की प्रविक्रया क े बाद, 1053 सदस्यों की सू'ी को अंति म रूप विदया 2या, जैसा विक सहायक रसिजस्टtार (सहकारी सविमति यों) को संबोति पत्रों में विदनांक 08.07.2019 और 27.02.2021 को प्रकट विकया 2या र्थीा। यहां क विक 1053 सदस्यों में से 76 सदस्यों ने अपने 'ेक भुना लिलए र्थीे, जबविक 133 सदस्यों ने अं रिरति यों क े पक्ष में अपना विह बे' विदया र्थीा। (ङ) इस प्रकार 24.82 एकड़ भूविम की पात्र ा क े सापेत्र 977 सदस्यों क े विह ों का ध्यान रखने की आवश्यक ा है। दूसरी ओर, नोएडा की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता श्री रविवन्द्र कु मार ने कहाः (क) आरंभ में, सोसाइटी क े 1754 सदस्यों को इस आ ार पर आबंटन पत्र जारी विकए 2ए र्थीे विक खोदाईजी सविमति सूत्र द्वारा शासिस सोसाइटी की पात्र ा 299 बीघा क े संबं में हो2ी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ख) हालांविक, क ु छ शिशकाय ें प्राप्त होने क े बाद, प्रभा क ु मार सविमति का 2gन विकया 2या र्थीा सिजसने सदस्य ा क े सार्थी -सार्थी सोसायटी की जो की भी जां' की। संबंति व्यविक्तयों को विवशिभन्न कारण ब ाओ नोविटस जारी विकए 2ए, सिजसक े बाद 1754 व्यविक्तयों को विकया 2या आवंटन रद्द कर विदया 2या। (2) 133 व्यविक्तयों ने नोएडा से सम्यक ् अनुमति लिलए विबना अपना विह बे' विदया है, उनक े अं रिर ी विकसी लाभ का दावा नहीं कर सक े। इस प्रकार यविद श्री 2ुलाटी की दलील को स्वीकार विकया जा ा है ो सोसायटी क े क े वल 844 सदस्यों पर ही उति' आवंटन क े लिलए विव'ार विकया जाए2ा। राज्य की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता श्री न्मय अग्रवाल ने कहा विक यविद हकदारी 99 बीघा क सीविम है सिजसे सोसाइटी ने 03.06.1981 क खरीदा है ो प्रर्थीमदृष्टया राज्य को कोई आपलित्त नहीं हो2ी। इस मामले का अस्ट्रिन् म विनणय करने क े लिलए, हम नोएडा और उत्तर प्रदेश राज्य को आमंवित्र कर े हैं विक वे आज से ीन सप्ताह क े भी र श्री कवीन 2ुलाटी, विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता द्वारा दी 2ई दलीलों क े संबं में उति' शपर्थीपत्र दालिखल करक े अपनी स्ट्रिस्र्थीति स्पष्ट करें। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नोएडा की ओर से दायर विकए जाने वाले शपर्थी पत्र में, यह भी दर्थिश विकया जाए2ा; (1) क्या नोएडा क े लिलए यह संभव हो2ा विक वह उस भूविम को आवंविट कर सक े जो नोएडा क े सेक्टर 42, 43 और आसपास क े सेक्टरों में सोसायटी क े लिलए अल[2] रखी 2ई है और सिजसका उपयो2 बहुमंसिजला समूह आवास परिरयोजना क े लिलए विकया जाए2ा? (2) यविद ऐसी परिरयोजना क े लिलए उस भूविम का उपयो2 नहीं विकया जा सक ा है, ो क्या कोई अन्य उपयुक्त भूविम सोसाइटी को उपलब् कराई जा सक ी है। (3) यविद 844 सदस्यों क े विह ों का ध्यान रखना है, ो भूविम की अति क म सीमा क्या हो2ी जो सोसाइटी क े लिलए विन ारिर की जानी 'ाविहए। ीन सप्ताह क े भी र उति' हलफनामा दालिखल विकया जाए। सोसायटी को उसक े बाद एक सप्ताह क े भी र इन हलफनामों पर जवाब देने का अवसर विमले2ा।....."

12. दनुसार, नोएडा की ओर से एक शपर्थी पत्र दालिखल विकया 2या है, जो विनम्नानुसार हैः - Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "(i) याति'काक ा क े स् र पर प्रविक्रयात्मक औप'ारिरक ा और इस माननीय न्यायालय द्वारा पारिर विकए जाने वाले आदेशों क े अ ीन रह े हुए, याति'काक ा प्राति करण सेक्टर 43 क े एक विहस्से को पुनव्यवस्ट्रिस्र्थी कर सक ा है, ाविक उक्त क्षेत्र में एक समूह आवास भूखंडों का सीमांकन और विवकास विकया जा सक े, सिजसमें उक्त सविमति क े सदस्यों द्वारा और उनक े लिलए, उनकी अपनी ला2 पर और कानून क े अनुसार या'ी से भवन योजना की मंजूरी प्राप्त करक े बहुमंसिजला फ्ल ै टों का विनमाण विकया जा सक े । (ii) इस थ्य को ध्यान में रख े हुए विक सविमति इस बा से सहम है विक विनमाण विकए जाने वाले बहुमंसिजला फ्ल ै टों क े आवंटन क े लिलए पात्र सदस्यों की क ु ल संख्या अब 844 क सीविम है, जो यह कहने क े लिलए पयाप्त है विक प्रति फ्ल ै ट ल2भ[2] 1800 व[2] फ ु ट क े क्षेत्र वाले बहुमंसिजला फ्ल ै टों क े विनमाण क े लिलए समूह आवास भूखंड का क्षेत्रफल ल2भ[2] 40,000 व[2] मीटर होना आवश्यक है। (iii) यह आदरपूवक प्रस् ु विकया 2या है विक यविद उपरोक्त प्रस् र 3 क े उप-प्रस् र (i) और (ii) में विकए 2ए अशिभकर्थीनों को इस माननीय न्यायालय द्वारा अनुमोविद विकया जा ा है, ो उक्त सविमति और/या इसक े सदस्य होने का दावा करने वाले विकसी भी व्यविक्त द्वारा विकए 2ए सभी दावे समाप्त हो जाएं2े और उक्त सविमति क े माध्यम से दावा करने वाला कोई भी व्यविक्त व्यविक्त[2] रूप से या विकसी अन्य Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA समूह आवास भूखंड क े लिलए या 844 से अति क क े फ्ल ै टों क े विनमाण क े लिलए आवंटन प्राप्त करने का हकदार नहीं हो2ा।" इसलिलए यह स्पष्ट है विक नोएडा सेक्टर 43 क े विहस्से को पुनव्यवस्ट्रिस्र्थी करने और बहुमंसिजला फ्ल ै टों का आवंटन 844 व्यविक्तयों क े पक्ष में करने क े लिलए सहम है, सिजनमें से प्रत्येक फ्ल ै ट ल2भ[2] 1800 व[2] फ ु ट का है। इस प्रकार नोएडा क े सेक्टर 43 से एक उपयुक्त क्षेत्र बनाया जा सक ा है और शपर्थी पत्र में सुझाए 2ए अनुसार बहुमंसिजला परिरसर क े लिलए प्राव ान विकया जा सक ा है। जैसा विक विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री कवीन 2ुलाटी क े अशिभकर्थीन, सिजसे 23.8.2021 क े आदेश में दज विकया 2या र्थीा, से प ा 'ल ा है विक दावा 977 सदस्यों क सीविम र्थीा।इसक े अलावा, 977 सदस्यों में से 133 व्यविक्तयों ने नोएडा से उति' अनुमति लिलए विबना अपना विह बे' विदया र्थीा और इस प्रकार, नोएडा क े अनुसार, उक्त 133 व्यविक्तयों क े अं रिर ी कोई दावा नहीं कर सक े।

13. व मान मामले में मुकदमेबाजी बहु पहले 1990 क े दशक में शुरू हुई र्थीी और ब से ये मामले न्यायालयों में लंविब हैं। ीन रिरट याति'काएं और प्रर्थीम अपील अभी भी उच्च न्यायालय क े समक्ष विव'ारा ीन हैं। मामले की उपयुक्त ा क े लिलए, हमारे सुविव'ारिर दृविष्टकोण में, पूरे विववाद को इस आ ार पर सुलझाया जा सक ा है विक प्रत्यर्थी<-सोसाइटी क े 844 सदस्यों को ल2भ[2] 1800 व[2] फीट क े अपाटमेंट प्रदान विकए जाएं2े, जैसा विक नोएडा द्वारा इस न्यायालय द्वारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पारिर विदनांक 23.8.2021 क े आदेश क े अनुसरण में दालिखल अपने शपर्थी पत्र में कहा 2या है। यह विदशाविनदmश न क े वल पक्षकारों क े बी' लंविब मुकदमेबाजी को समाप्त करे2ा, बस्ट्रि”क 844 व्यविक्तयों को आवास भी प्रदान करे2ा और उनकी लंबे समय से 'ली आ रही जरूर ों को पूरा करे2ा।

14. इन आ ारों पर, हम मामले में पूण न्याय करने क े लिलए अपनी अति कारिर ा और शविक्त का प्रयो2 कर े हैं और नोएडा को यह विनदmश दे े हैं विक वह 844 व्यविक्तयों को लाभ प्रदान करे, जैसा विक नोएडा की ओर से दायर शपर्थी पत्र में इंवि2 विकया 2या है। यह कहने की आवश्यक ा नहीं है विक भूविम की कीम नोएडा द्वारा पूरी रह से इसकी मौजूदा नीति और ला2ू मानदंडों क े अनुसार य की जाए2ी। उक्त 844 व्यविक्तयों की सू'ी प्रत्यर्थी<-सोसायटी द्वारा प्रमाशिण प्रमाणपत्र क े अन् 2 आज से दो सप्ताह क े भी र प्रस् ु की जाए2ी। ऐसी सू'ी को अंति म और विनणायक माना जाए2ा और नोएडा द्वारा ीन महीने क े भी र परिरणामी कारवाई की जाए2ी और संबंति 844 व्यविक्तयों को उति' आवंटन पत्र जारी विकए जाएं2े।इस रह क े आवंटन पत्र जारी होने पर, उच्च न्यायालय क े समक्ष लंविब रिरट याति'का संख्या 58555/2005, 58702/2005 और 61630/2005 और प्रर्थीम अपील संख्या 790/2008, संबंति पक्षों द्वारा वापस ले लिलया जाए2ा और प्रत्यर्थी< - सोसाइटी द्वारा उgाए 2ए सभी दावे या वे दावे जो प्रत्यर्थी<-सोसाइटी क े ह दावा करने वाले विकसी भी व्यविक्त द्वारा उgाए जा सक े हैं, समाप्त हो जाएं2े। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

15. इस स् र पर, हमें 133 व्यविक्तयों क े दावों पर भी विव'ार करना 'ाविहए सिजन्होंने स्र्थीानां रण द्वारा पूवव < सदस्यों क े विह अर्जिज विकए हैं।नोएडा उनक े दावों पर विव'ार करे2ा और यविद सं ुष्ट हो जा ा है ो उन्हें 844 सदस्यों क े समान लाभ प्रदान कर सक ा है।

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16. इस प्रकार, अपीलों को ला2 क े विकसी आदेश क े विबना, पूव क्त रूप में विनस् ारिर विकया जा ा है। ……………………………………………. [भार क े मुख्य न्याया ीश, उदय उमेश ललिल ] [न्यायमूर्ति इंविदरा बनज<] [न्यायमूर्ति क े. एम. जोसेफ] नई विदल्ली; 22 सिस ंबर 2022. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA