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भार ीय सव च्च न्यायालय
दाण्डि क मूल अति कारिर ा
रिरट याति का (दाण्डि क) सं. 121 वर्ष% 2022
विवनोद कटारा …याति काक ा%(गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य ….प्रति वादी (गण)
विनण%य
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला
JUDGMENT
1. विकसी व्यवि5 की व्यवि5ग स्व ंत्र ा उन सबसे पुरानी अव ारणाओं में से एक है जिजस पर राष्ट्रीय अदाल ों द्वारा जोर विदया जा ा रहा है। बहु पहले वर्ष% 1215 में, अंग्रेजों क े मैग्ना काटा% में उपबं था विक:" विकसी भी स्व ंत्र व्यवि5 को पकड़ा या जेल में नहीं ाला जाएगा... जिसवाय...विवति क े अ ीन।"
2. आज, व्यवि5ग स्व ंत्र ा की अव ारणा को कहीं अति क विवस् ृ व्याख्या प्राप्त हुई है। आज जिजस ारणा को स्वीकार विकया जा ा है, वह यह है विक स्व ंत्र ा में वे अति कार और विवशेर्षाति कार शाविमल हैं, जिजन्हें लंबे समय से विकसी स्व ंत्र व्यवि5 क े व्यवण्डिस्थ रूप से प्रसन्न ा क े लिलए आवश्यक माना जा ा है, न विक क े वल शारीरिरक बं न से मुवि5। यह कहने में कोई संको नहीं विक विकशोरों को वयस्क जेलों में रखना कई पहलुओं पर उनकी व्यवि5ग स्व ंत्र ा को छीनने क े बराबर है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
3. संविव ान क े अनुच्छेद 32 क े ह यह रिरट आवेदन हत्या क े अपरा क े लिलए उम्रक ै द की सजा काट रहे एक दोर्षजिसद्ध अणिभयु5 की ओर से है, जिजसमें प्रति वादी उत्तर प्रदेश राज्य को उति विनदjश देने की मांग की गई है विक वह दोर्षजिसद्ध व्यवि5 की अपरा कारिर करने की ति णिथ पर सही उम्र को सत्याविप करे क्योंविक दोर्षजिसद्ध व्यवि5 का पक्ष यह है विक अपरा कारिर करने की ति णिथ अथा% 10.09.1982 को वह लगभग 15 साल की उम्र का विकशोर था।
4. इस मुकदमे क े लिलए उत्तरदायी थ्यों को विनम्नानुसार संक्षेविप विकया जा सक ा है: (क) अन्य सह-अणिभयु5 व्यवि5यों क े साथ रिरट आवेदक का आईपीसी की ारा 302 सपविs ारा 34 भा.दं.सं. क े ह दं नीय अपरा क े लिलए विव ारण विकया गया था; (ख) अपर सत्र न्याया ीश,पं म, आगरा ने आगरा क े फ ेहपुर सीकरी जिजले में दज% मुकदमा अपरा सं. 126 वर्ष% 1982 से उद्भू सत्र विव ारण संख्या 535 वर्ष% 1983 में रिरट आवेदक और सह-अणिभयु5ों को हत्या क े अपरा का दोर्षी sहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई; (सी) व %मान रिरट आवेदक और अन्य दोविर्षयों ने विdविमनल अपील सं. 133 वर्ष% 1986 दालिखल करक े इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील की। जिजसमें विव ारण न्यायालय द्वारा विदनांक 06.01.1986 को पारिर विनण%य और दोर्षजिसतिद्ध क े आदेश की वै ा और वै ाविनक ा पर सवाल उsाया गया था; ( ी) उच्च न्यायालय द्वारा अपील की सुनवाई की गई और विदनांक 04.03.2016 क े विनण%य और आदेश को खारिरज कर विदया गया जिजससे विव ारण न्यायालय द्वारा पारिर विनण%य और दोर्षजिसतिद्ध क े आदेश की पुविष्ट हुई; उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (ई) उच्च न्यायालय द्वारा अपनी अपील को खारिरज करने क े आदेश से असं ुष्ट व %मान रिरट आवेदक ने इस न्यायालय क े समक्ष विवशेर्ष अनुमति याति का (विd.) संख्या 6048 वर्ष% 2016 दायर विकया। इस न्यायालय ने 16.08.2016 विदनांविक आदेश द्वारा अनुमति क े लिलए विनवेदन को खारिरज कर विदया और विवशेर्ष अनुमति याति का खारिरज कर दी।
5. इस स् र पर यह ब ाना अप्रासंविगक नहीं होगा विक जब क इस न्यायालय ने विदनांक 16.08.2016 क े आदेश द्वारा विवशेर्ष अनुमति याति का को खारिरज नहीं कर विदया, ब क व %मान रिरट आवेदक ने 10.09.1982 क े कणिथ अपरा क े कारिर विकए जाने की ति णिथ पर अपने विकशोर होने का प्रश्न नहीं उsाया था।
6. ऐसा प्र ी हो ा है विक जब रिरट आवेदक आजीवन कारावास की सजा भुग रहा था, ो उसका विdविमनल रिरट जनविह याति का संख्या 855 वर्ष% 2012 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खं पीs द्वारा विदए गए विनण%य क े अनुसरण में प्रति वादी राज्य द्वारा गविs मेति कल बो % द्वारा ति विकत्सा परीक्षण कराया गया। जिजसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खं पीs ने विनम्नानुसार विटप्पणी की: "बेशक, राज्य क े पहले क े हलफनामों क े अनुसार, यह दावा विकया गया था विक 72 क ै दी ऐसे थे, जिजनकी उम्र 18 वर्ष% से कम हो सक ी है और जो विवणिभन्न जिजला या क ें द्रीय जेलों में बंद हैं। उनका विववरण इस प्रकार था: बरेली में 23, लखनऊ में 1, इलाहाबाद में 4, इटावा में 2, आगरा में 18 और फ ेहगढ़ में 23 ऐसे क ै दी थे। ऐसा ही एक क ै दी राजू, जो फ ै जाबाद का रहने वाला था, जिजसकी आयु विकशोर न्याय बो % क े प्र ान मजिजस्ट्रेट द्वारा 18 वर्ष% से कम विन ा%रिर की गई थी, को फ ै जाबाद जेल में लंबे समय क विनरुद्ध रहने क े बाद विवशेर्ष गृह में भेज विदया गया था। प्रथम दृष्टया यह सुझाने क े लिलए क ु छ सामग्री विवद्यमान थी विक ऐसे क ै विदयों की आयु अपरा कारिर विकए जाने की ति णिथ को 18 वर्ष% से कम रही हो सक ी है। विकशोर उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण ) अति विनयम, 2000 (ए ण्डिश्मनपश्चा अति विनयम क े रूप में संदर्भिभ ) में अति विनयम संख्या 33 वर्ष% 2006 द्वारा संशो न क े बाद, ारा 2 (एल) क े ह विवति का उल्लंघन करने वाला विकशोर का म लब एक ऐसा विकशोर है, जिजस पर अपरा करने का आरोप है और उसने इस रह क े अपरा क े कारिर करने की ति णिथ को अsारह वर्ष% की आयु पूरी नहीं की है। अति विनयम की ारा 7 ए (1) क े परं ुक क े ह, यह उल्लेख विकया गया है विक नाबालिलग होने का दावा विकसी भी अदाल क े समक्ष उsाया जा सक ा है और इसका विकसी भी स् र पर, मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी दावा विकया जा सक ा है, और मान्य ा दी जाएगी, और ऐसे दावे का विन ा%रण इस अति विनयम में विनविह प्राव ानों और विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) विनयमावली, 2007 (ए ण्डिश्मनपश्चा विनयमावली क े रूप में संदर्भिभ ) में विनविह प्राव ानों क े अन् ग% विकया जाएगा। इसलिलए, हम जिजला न्याया ीशों को विनदjश दे े हैं, जो अपने संबंति विवति क सेवा प्राति करणों क े अध्यक्ष हैं, वे सी े ौर पर विनगरानी करें विक क ै विदयों को कानूनी सहाय ा प्रदान करने क े उद्देश्य से क ु शल वकील विनयु5 विकए जाएं, (जो विनजी वकीलों को विनयु5 करने में असमथ% हैं) जिजनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा उपलब् कराई गई सू ी में विकया गया है और जो अपरा कारिर करने की ति णिथ को 18 वर्ष% से कम आयु क े ब ाए गए हैं। उ[5] विवति क सहाय ा अति व5ाओं को दस् ावेजों को प्राप्त करक े और विकशोर न्याय अति विनयम और विनयमावली क े विनयम 12 में उपबंति अन्य उपायों को पूरा था रिरट याति का (सी) संख्या 8889 वर्ष% 2011 क े मामले में विदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुझाए गए ज% पर (न्यायालय द्वारा अपने स्व ः संज्ञान पर बनाम मविहला एवं बाल विवकास विवभाग उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" एवं अन्य), इसक े द्वारा विदए गए 11.5.2012 विदनांविक आदेश क े अनुसार क ै विदयों की उम्र का प ा लगाना ाविहए। इन क ै विदयों की सही उम्र का प ा लगाने क े लिलए अन्य भाई-बहनों की संभाविव जन्म ति णिथ क े बारे में जानकारी प्राप्त करना भी ध्यान में रखा जा सक ा है। विवति क सहाय ा अति व5ा यह भी प ा लगा सक े हैं विक क्या जेल में अन्य क ै दी भी हैं, जिजनकी उम्र अपरा विकए जाने की ारीख पर 18 वर्ष% से कम हो सक ी है। और जो वयस्कों क े लिलए विनयविम जेलों में गल रीक े से रखे गए प्र ी हो े हैं साथ ही अपने विनष्कर्ष% का आ ार भी अंविक कर सक े हैं। त्पश्चा मामले को ऊपर विन ा%रिर मानदं ों क े अनुसार आयु क े विन ा%रण क े लिलए प्र ान न्याया ीश, विकशोर न्याय बो % क े समक्ष रखा जा सक ा है। अणिभयोजन पक्ष और परिरवादी को विनतिश्च रूप से अपने स्वयं क े गवाहों की जां करने और उन गवाहों से जिजरह करने का अवसर विदया जाएगा, जिजनकी अणिभयु5 की ओर से जां की गई है और इस उद्देश्य क े लिलए जे.जे. बो % क े समक्ष काय%वाही क े नोविटस विदए अणिभयोजन/परिरवादी को विदए जाएंगे। जैसा विक यह संभव है विक क ु छ मामलों में राज्य की सू ी में उजिल्ललिख क ै दी अपरा की ति णिथ पर 18 वर्ष% से कम आयु क े हो सक े हैं, लेविकन राज्य की सू ी में विनष्कर्ष% पर पहुं ने क े आ ार क े रूप में आम ौर पर दोनों पक्षों को सुनने क े बाद कु छ प्रारंणिभक ति विकत्सा परीक्षण और उम्र का प ा लगाने क े लिलए कोई विवस् ृ कदम नहीं उsाए गए थे, और इस बा से इंकार नहीं विकया जा सक ा है विक कु छ मामलों में उम्र कम करने क े लिलए बाहरी उपायों का इस् ेमाल विकया गया हो सक ा है, हम सो े हैं विक इस रह की कवायद जैसा ऊपर वर्भिण है जिजसमें दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने क े बाद उम्र का प ा लगाया जाना ाविहए, उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आवश्यक थी। उ[5] काय% को दो महीने की अवति क े भी र पूरा विकया जाना ाविहए और इसकी अगली काय%सू ी में इस न्यायालय को रिरपोट% प्रस् ु की जानी ाविहए। जिजला न्याया ीश/जिजला विवति क सेवा प्राति करण भविवष्य में यह सुविनतिश्च करने क े लिलए सख् कदम उsाएंगे विक अपरा की ति णिथ को 18 वर्ष% से कम उम्र क े क ै विदयों को विकशोर न्याय अति विनयम और विनयमावली का उल्लंघन कर े हुए वयस्क जेलों में नहीं रखा जाए। जहाँ क इलाहाबाद जिजले का संबं है, हम जिजला न्याया ीश, इलाहाबाद को विनदjश दे े हैं विक वे जिसस्टर शीबा जोस, ए वोक े ट और श्री रोहन गुप्ता, ए वोक े ट को उनकी उम्र का प ा लगाने और काय%सू ी की अगली ारीख पर अदाल में रिरपोट% जमा करने क े उद्देश्य से संबंति क ै विदयों से विमलने और साक्षात्कार करने की अनुमति दें। याति काक ा% क े विवद्वान अति व5ा द्वारा आगे यह भी कहा गया विक जहां क क ै दी राजू का संबं है, जिजसकी आयु 18 वर्ष% से कम विन ा%रिर की गई थी, उसे पहले फ ै जाबाद जेल में रखा गया था और बाद में उसे विवशेर्ष गृह में भेज विदया गया था। उसे ारा 302 भा.दं.सं. क े ह एक मामले में वर्ष% 2001 में दोर्षी sहराया गया। उत्तरदा ाओं को इस अदाल को इस क ै दी द्वारा जेल में विब ाई गई कु ल अवति क े बारे में सूति करना ाविहए और यविद यह 3 वर्ष% से अति क हो जा ी है (जो विक अति विनयम की ारा 15 क े अनुसार अति क म अनुमेय सजा थी) ो उसे विवशेर्ष गृह में व %मान में विहरास में रखने का आ ार हो।" इस प्रकार, जनविह याति का विdविमनल (पीआईएल) विवविव रिरट याति का संख्या 855 वर्ष% 2012 की में पारिर उपरो5 संदर्भिभ आदेश विदनांविक 24.05.2012 क े द्वारा, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विकशोर न्याय बो Œ को कानून का उल्लंघन कर े समय उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकशोर होने का दावा करने वाले बंविदयों की उम्र क े विन ा%रण क े लिलए जां करने का विनदjश विदया।
7. मेति कल बो % ने व %मान रिरट आवेदक की खोपड़ी और उरोण्डिस्थ का एक्स-रे कराया । व %मान रिरट आवेदक की मेति कल जां क े बाद, मेति कल बो % ने अपनी रिरपोट% विदनांविक 10.12.2021 को यह प्रमाणिण कर े हुए विदया विक 10.09.1982 यानी कणिथ अपरा क े कारिर विकए जाने की ति णिथ पर, रिरट आवेदक की आयु लगभग 15 वर्ष% रही होगी क्योंविक ति विकत्सा परीक्षण की ति णिथ को अपरा ी की आयु लगभग 56 वर्ष% थी।
8. ऐसा प्र ी हो ा है विक क ु छ समय बाद, रिरट आवेदक ने यूपी पं ाय राज (परिरवार रजिजस्टर का रखरखाव) विनयमावली, 1970 क े ह जारी परिरवार रजिजस्टर विदनांविक 02.03.2021 क े रूप में एक दस् ावेज प्राप्त विकया। परिरवार रजिजस्टर प्रमाण पत्र में, व %मान रिरट आवेदक का जन्म वर्ष% 1968 विदखाया गया है। यविद 1968 व %मान रिरट आवेदक का सही जन्म वर्ष% है, ो 1982 में उसकी आयु लगभग 14 वर्ष% थी।
9. उपरो5 परिरण्डिस्थति यों में, रिरट आवेदक इस न्यायालय क े समक्ष प्रस् ु है। उसका दावा है विक कणिथ अपरा क े घविट होने की ति णिथ को वर्ष% 1982 में वह विकशोर था, इसलिलए उस पर अन्य सह अणिभयु5ों क े साथ मुकदमा नहीं लाया जाना था और त्कालीन समय पर प्र लिल विकशोर न्याय अति विनयम क े प्राव ानों क े ह विव ार विकया जाना ाविहए था। रिरट आवेदक की यह प्राथ%ना है विक प्रति वादी राज्य को संबंति सत्र न्यायालय या विकशोर न्याय बो % क े माध्यम से विकशोर ा क े संबं में रिरट आवेदक क े दावे को सत्याविप कराने का विनदjश विदया जाए। दोर्षजिसद्ध रिरट आवेदक की ओर से विदए गए क %: उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
10. रिरट आवेदक की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अति व5ा श्री ऋविर्ष मल्होत्रा ने जोरदार ढंग से कहा है विक यद्यविप इस न्यायालय द्वारा विदनांक 16.08.2016 क े आदेश द्वारा विवशेर्ष अनुमति याति का (आपराति क) संख्या 6048 वर्ष% 2016 को खारिरज विकए जाने क, दोर्षी ने विकशोर ा का क % नहीं विदया विफर भी विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशो न अति विनयम, 2011 क े प्राव ानों क े ह कानून उसे इस समय भी इस रह की दलील देने की अनुमति दे ा है। यह कहा गया है विक व %मान में मेति कल बो % द्वारा जारी प्रमाण पत्र क े साथ-साथ परिरवार रजिजस्टर क े रूप में रिरकॉ % में sोस सबू हैं जो यह इंविग कर े हैं विक वर्ष% 1982 में रिरट आवेदक की आयु लगभग 15 वर्ष% रही होगी। विवद्वान अति व5ा ने जोरदार ढंग से यह बा कहा है विक मेति कल बो % द्वारा जारी प्रमाण पत्र क े साथ-साथ परिरवार रजिजस्टर क े उद्धरण को न मानने का कोई आ ार नहीं है।
11. पूव 5 प्रस् ुति यों को पुष्ट करने क े लिलए, विवद्वान अति व5ा ने अबूजर हुसैन उफ % गुलाम हुसैन बनाम पतिश्चम बंगाल राज्य (2012) 10 SCC 489 क े मामले में इस न्यायालय क े ीन-न्याया ीशों की पीs क े फ ै सले का अवलंब लिलया है।
12. उपरो5 परिरण्डिस्थति यों में, विवद्वान अति व5ा का विनवेदन है विक उनकी रिरट याति का में मेरिरट होने क े कारण, उसे अनुमति दी जानी ाविहए और मामले में पूण% न्याय करने क े लिलए उति विनदjश जारी विकए जाने ाविहए। राज्य की ओर से प्रस् ुति याँ
13. दूसरी ओर, राज्य क े विवद्वान अति रिर[5] महाति व5ा श्री अ “ ुमौली क ु. प्रसाद ने व %मान रिरट आवेदन का कड़ा विवरो विकया है। विवद्वान अति व5ा का कथन है विक परिरवार रजिजस्टर साक्ष्य में स्वीकाय% नहीं है और इसमें की गई प्रविवविष्टयाँ आयु क े विन ा%रण क े लिलए उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विनणा%यक नहीं हैं। यह क % विदया गया है विक रिरट आवेदक ने विकसी भी शैक्षणिणक संस्थान क े विकसी भी दस् ावेज को रिरकॉ % में नहीं रखा है। यह भी क % विदया गया है विक उम्र क े विन ा%रण क े उद्देश्य से कोई ऑजिसविफक े शन परीक्षण नहीं विकया गया था या कोई आ ुविनक मान्य ा प्राप्त विवति नहीं अपनाई गई थी।
14. राज्य की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अति व5ा ने इस न्यायालय का ध्यान अशोक बनाम मध्य प्रदेश राज्य, विवशेर्ष अनुमति याति का अपील (विdविमनल) संख्या 643 वर्ष% 2020 क े मामले में इस न्यायालय की एक समन्वय पीs द्वारा पारिर विदनांक 29.11.2021 क े आदेश की ओर आकर्षिर्ष विकया। उपरो5 संदर्भिभ समन्वय पीs द्वारा पारिर आदेश इस प्रकार है: "29.07.1999 विदनांविक एक विनण%य और आदेश द्वारा, अपर सत्र न्याया ीश, गोहद, जिजला भिंभ, मध्य प्रदेश ने याति काक ा% को अन्य बा ों क े साथ-साथ भार ीय दं संविह ा की ारा 302 क े ह अपरा क े लिलए दोर्षी sहराया और उसे अन्य बा ों क े साथ सत्र परीक्षण dमांक 260 सन् 1997 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उ[5] विनण%य एवं आदेश क े वाद शीर्ष%क में या ी को अशोक पुत्र बलराम जाटब उम्र 16 वर्ष% 9 माह 19 विदन विनवासी ग्राम अंजनी पुरा, जिजला णिभ ब ाया गया है। याति काक ा% ने अपनी दोर्षजिसतिद्ध और सजा को ुनौ ी दे े हुए विdविमनल अपील संख्या 455 वर्ष% 1999 दायर की। उ[5] विdविमनल अपील को उच्च न्यायालय ने विदनांक 14.11.2017 क े एक आदेश द्वारा खारिरज कर विदया है, जो याति काक ा% द्वारा विवशेर्ष अनुमति याति का (विd.) संख्या 643 वर्ष% 2020 में आक्षेविप है। जिजस घटना क े कारण याति काक ा% को दोर्षी sहराया गया, वह 26.07.1997 को हुई थी। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" याति काक ा% का दावा है विक याति काक ा% का जन्म 05.01.1981 को हुआ था। इसलिलए, घटना क े विदन याति काक ा% की उम्र लगभग 16 वर्ष% और 7 महीने थी। इस न्यायालय में, याति काक ा% ने पहली बार क % विदया है विक वह घटना की ारीख पर विकशोर था। इसलिलए, उसकी दोर्षजिसतिद्ध और सजा रद्द की जानी ाविहए। विकशोर होने का दावा उच्च न्यायालय में नहीं विकया गया था। राज्य की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अपर महाति व5ा ने क % विदया विक इस विवशेर्ष अनुमति याति का में पहली बार विकशोर होने का दावा विकया गया है। विकशोर न्याय अति विनयम, 1986, जो अपरा होने की ति णिथ और दोर्षजिसतिद्ध और सजा क े आदेश की ारीख को भी लागू था, विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अति विनयम, 2000 द्वारा प्रति स्थाविप कर विदया गया। वर्ष% 2000 क े अति विनयम को 30.12.2000 को भार क े राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हुई और 01.04.2001 को यह लागू हुआ। अति विनयम, 2000 में कानून का उल्लंघन करने वाले विकशोर को एक ऐसे विकशोर क े रूप में परिरभाविर्ष विकया, जिजस पर अपरा कारिर करने का आरोप हो और जिजसने ऐसे अपरा क े कारिर करने की ति णिथ पर 18 वर्ष% की आयु पूरी नहीं की थी। 1986 क े अति विनयम क े ह, विकशोर की आयु 16 वें वर्ष% क थी। वर्ष% 2006 क े अति विनयम 33 द्वारा 22.08.2006 से अं ःस्थाविप अति विनयम, 2000 की ारा 7 ए में विनम्नानुसार उपबं विकया गया था: "7 क. जब विकसी न्यायालय क े समक्ष विकशोर होने का दावा विकया जा ा है ो अपनाई जाने वाली प्रविdया.- (1) जब भी विकसी न्यायालय क े समक्ष विकशोर होने का दावा विकया जा ा है या न्यायालय की राय है विक अपरा विकए जाने की उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारीख को अणिभयु5 व्यवि5 विकशोर था ो न्यायालय अपरा क े बारे में, जां करेगा, ऐसे साक्ष्य लेगी जो आवश्यक हो सक े हैं (लेविकन एक हलफनामा नहीं) ाविक ऐसे व्यवि5 की उम्र विन ा%रिर की जा सक े, और विनकट म उम्र ब ा े हुए यह विनष्कर्ष% दज% करेगा विक वह व्यवि5 विकशोर है या बच्चा है या नहीं: बश j विक नाबालिलग होने का दावा विकसी भी न्यायालय क े समक्ष, विकसी भी स् र पर, यहाँ क विक मामले क े अंति म विनपटारे क े बाद भी उsाया जा सक ा है और इसे मान्य ा दी जाएगी, और इस रह क े दावे को इस अति विनयम और उसक े ह बनाए गए विनयमों क े प्राव ानों क े अनुसार विन ा%रिर विकया जाएगा, भले ही विकशोर इस अति विनयम क े प्रारंभ होने की ारीख को या उससे पहले विकशोर न रह गया हो। (2) यविद न्यायालय विकसी व्यवि5 को उप- ारा (1) क े ह अपरा होने की ति णिथ पर विकशोर पा ा है, ो वह विकशोर को उति आदेश पारिर करने क े लिलए बो % को भेजेगा और न्यायालय द्वारा दी गई कोई सजा, यविद कोई हो, का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा।" इस प्रकार मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी, विकसी भी स् र पर, विकसी भी न्यायालय क े समक्ष विकशोर ा का दावा विकया जा सक ा है और यविद न्यायालय विकसी व्यवि5 को अपरा विकए जाने की ति णिथ पर विकशोर पा ा है, ो उसे विकशोर को उति आदेश पारिर करने क े लिलए बो % क े पास भेजना होगा और अदाल द्वारा पारिर सजा, यविद कोई हो, का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। भले ही इस मामले में अपरा अति विनयम,2000 क े अति विनयविम होने से पहले विकया गया हो, याति काक ा% अति विनयम,2000 की ारा 7 क क े ह विकशोर ा क े लाभ का हकदार है, अगर जां में यह पाया जा ा है विक कणिथ अपरा की ारीख पर वह 18 वर्ष% से कम उम्र का था। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" यह सही है, जैसा विक राज्य की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अपर महाति व5ा द्वारा इंविग विकया गया है, विक याति काक ा% द्वारा अवलंविब अविकक ृ शाश, हाई स्क ू ल स्क ू ल एं ोरी, जिजला भिंभ, मध्य प्रदेश का प्रमाण पत्र विदनांक 17.07.2021 को जारी विकया जाना ब ाया गया है। उ[5] प्रमाण पत्र में विवशेर्ष रूप से उल्लेख नहीं है विक प्राथविमक विवद्यालय स् र पर याति काक ा% क े पहले प्रवेश क े समय जन्म ति णिथ 01.01.1982 दज% की गई थी। इसक े अलावा, ग्राम पं ाय, एं ोरी, जिजला भिंभ, मध्य प्रदेश द्वारा जारी एक जन्म प्रमाण पत्र है, जिजसमें याति काक ा% की जन्म ति णिथ 05.01.1982 इंविग की गई है, न विक 01.01.1982, जैसा विक ऊपर संदर्भिभ स्क ू ल प्रमाण पत्र में दज% है। ग्राम पं ाय, एं ोरी, जिजला भिंभ, मध्य प्रदेश क े अणिभलेखों में भी प्रविवविष्ट समसामतियक प्र ी नहीं हो ी है और प्रमाण पत्र वर्ष% 2017 में जारी विकया गया है। हालांविक, जैसा विक याति काक ा% की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान वकील, श्री एम.पी. पार्भिथबन द्वारा ब ाया गया है विक सत्र न्यायालय ने याति काक ा% की उम्र 16 वर्ष%, 9 महीने और 19 विदन दज% की है। याति काक ा% ीन वर्ष% से अति क समय से वास् विवक विहरास में है। वर्ष% 2000 क े अति विनयम को विनरस् कर विदया गया है और विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अति विनयम, 2015 द्वारा प्रति स्थाविप विकया गया है। वर्ष% 2015 क े अति विनयम की ारा 21 विनम्नानुसार उपबं कर ी है: "21. कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे क े लिखलाफ न पारिर विकया जा सकने वाला आदेश: - कानून का उल्लंघन करने वाले विकसी भी बच्चे को विकसी भी अपरा क े लिलए इस अति विनयम क े प्राव ानों क े ह या या भार ीय दं संविह ा या त्समय उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रवृत्त विकसी अन्य कानून क े प्राव ानों क े ह मौ की सजा या रिरहाई की संभावना क े विबना आजीवन कारावास की सजा नहीं दी जाएगी" यह देख े हुए विक विव ारण न्यायालय ने याति काक ा% की आयु 16 वर्ष% और क ु छ महीने दज% की है, और ीन साल से अति क समय क वास् विवक विहरास में रहा है, जो विक एक विकशोर क े लिलए अति क म है, हम याति काक ा% को ऐसे विनयम और श Œ पर जो सत्र न्यायालय द्वारा लगाई जा सक ी हैं, अं रिरम जमान देना उति समझ े हैं। हम आगे सत्र न्यायालय को विनदjश दे े हैं विक वह कानून क े अनुसार याति काक ा% क े विकशोर होने क े दावे की जां करे, और इस आदेश क े संसू ना की ारीख से एक महीने क े भी र इस न्यायालय को एक रिरपोट% प्रस् ु करे। संबंति सत्र न्यायालय, याति काक ा% द्वारा अवलंविब दस् ावेजों की प्रामाणिणक ा और वास् विवक ा की जां करने का हकदार होगा, यह देख े हुए विक दस् ावेज समकालीन प्र ी नहीं हो े हैं। यविद दस् ावेज़ संविदग् /अविवश्वसनीय पाए जा े हैं, ो सत्र न्यायालय क े पास ऑजिसविफक े शन टेस्ट या आयु विन ा%रण क े विकसी अन्य आ ुविनक मान्य ा प्राप्त रीक े से याति काक ा% की ति विकत्सकीय जाँ कराने का विवकल्प होगा। "15. समन्वय पीs द्वारा पारिर पूव 5 आदेश पर राज्य की ओर से पेश होने वाले विवद्वान अति व5ा ने अपनी दलील को बल देने क े लिलए अवलंब लिलया है विक यविद रिरट आवेदक की विकशोर ा क े संबं में सभी मुद्दों पर विव ार करने की आवश्यक ा है, ो उसे सत्र न्यायालय द्वारा विकया जाना ाविहए अथा% वह न्यायालय जिजसने मूल रूप से कणिथ अपरा क े लिलए रिरट आवेदक का विव ारण विकया था। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
16. ऊपर संदर्भिभ ऐसी परिरण्डिस्थति यों में, राज्य की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अति व5ा ने विनवेदन विकया है विक सत्र न्यायालय को मेति कल बो % द्वारा जारी विकए गए प्रमाण पत्र, जिजसमें परिरवार रजिजस्टर शाविमल हैं, पर गौर करने दें, विवशेर्ष रूप से इसकी प्रामाणिणक ा और वास् विवक ा पर। विवश्लेर्षण:
17. पक्षकारों की ओर से पेश विवद्वान अति व5ा को सुनने और रिरकॉ % पर उपलब् सामग्री क े अवलोकन क े बाद, एकमात्र प्रश्न जो हमारे विव ार में आ ा है वह यह है विक क्या हमें सत्र न्यायालय से उन दस् ावेजों की प्रामाणिणक ा और वास् विवक ा की जां करने क े लिलए कहना ाविहए जिजन पर रिरट आवेदक द्वारा वर्ष% 1982 में कणिथ अपरा विकए जाने की ारीख को विकशोर होने की अपनी दलील क े समथ%न में अवलंब लिलया गया है और दोर्षी का आगे ऑजिसविफक े शन टेस्ट कराना ाविहए?
18. इस रिरट याति का में हमारे विव ार क े लिलए सबसे पहला और महत्वपूण% मुद्दा विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण ) अति विनयम, 2000 (संक्षेप में, "अति विनयम,2000") क े प्राव ानों की प्रयोज्य ा क े संबं में है।.
19. उपरो5 संदभ% में, हमें सबसे पहले प्रासंविगक ारीखों को विनम्नानुसार देखना ाविहए: (क) घटना की ारीख 10.09.1982 है। इस प्रकार, घटना की ारीख पर विकशोर न्याय अति विनयम, 1986 भी लागू नहीं था। जो लागू था वह बाल अति विनयम, 1960 था। बाल अति विनयम, 1960 अपराति क और उपेतिक्ष बच्चों की देखभाल क े लिलए लाभकारी कानून बनाया गया था। उ[5] अति विनयम क े ह, बच्चे का म लब एक ऐसे व्यवि5 से है, जिजसने लड़क े क े मामले में 16 वर्ष% या लड़की क े मामले में 18 वर्ष% की आयु प्राप्त नहीं की है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (ख) इस याति काक ा% को विव ारण न्यायालय द्वारा विनण%य एवं आदेश विदनांविक 06.01.1986 द्वारा दोर्षी sहराया गया था। दोर्षजिसतिद्ध की ारीख पर भी, विकशोर न्याय अति विनयम, 1986 लागू नहीं था। विकशोर न्याय अति विनयम, 1986 01.12.1986 से प्रभावी हुआ। इस प्रकार, दोर्षजिसतिद्ध की ारीख पर भी सजा क े मामले में, बाल अति विनयम, 1960 इसे विनयंवित्र कर ा था। (ग) इस याति काक ा% द्वारा विव ारण न्यायालय द्वारा पारिर दोर्षजिसतिद्ध क े विनण%य एवं आदेश क े विवरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर अपील को विनणž कर े हुए विनण%य एवं आदेश विदनांविक 04.03.2016 द्वारा खारिरज कर विदया गया। यह ध्यान रखना प्रासंविगक है विक जिजस ारीख को उच्च न्यायालय द्वारा अपील खारिरज की गई थी, उस ति णिथ पर अति विनयम,2000 लागू था। (घ) इस न्यायालय में याति काक ा% की विवशेर्ष अनुमति याति का (विd.) संख्या 6048 वर्ष% 2016 आदेश विदनांविक 16.08.2016 द्वारा खारिरज कर दी गयी।
20. 15.01.2016 को और इस ति णिथ से, विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अति विनयम, 2015 (संक्षेप में, "अति विनयम,2015 ") लागू हुआ जिजसने 2000 अति विनयम को विनरजिस कर विदया। जबविक इस याति काक ा% की दोर्षजिसतिद्ध और सजा क े लिखलाफ अपील उच्च न्यायालय में लंविब थी, अति विनयम, 2000 लागू हुआ जिजसने विकशोर न्याय अति विनयम, 1986 को विनरजिस कर विदया। अति विनयम,2000 ने अन्य बा ों क े साथ-साथ अति विनयम, 2000 की ारा 20 क े अन् ग% विकशोर आयु को 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष% कर विदया और सभी लंविब मामलों में विकशोरत्व का विन ा%रण अति विनयम, 2000 की ारा 2(1) क े अनुसार विकया जाना आवश्यक था। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
21. अति विनयम, 2000 की ारा 20 क े प्रभाव पर प्र ाप सिंसह बनाम झारखं राज्य,
े मामले में विव ार विकया गया, और विनम्नानुसार कहा गया: "31. ऊपर उद्धृ अति विनयम की ारा 20 लंविब मामलों क े संबं में विवशेर्ष प्राव ान से संबंति है और एक गैर-अण्डिस्थर खं क े साथ शुरू हो ी है। "इस अति विनयम में क ु छ भी विनविह होने क े बावजूद, विकसी भी अदाल में लंविब विकशोर क े संबं में सभी काय%वाही विकसी भी क्षेत्र में उस ारीख को जब यह अति विनयम लागू हुआ " वाक्य का बहु महत्व है। अति विनयम की ारा 20 में विनर्षिदष्ट विकसी भी अदाल में लंविब विकशोर क े संबं में काय%वाही अति विनयम, 2000 क े लागू होने से पहले शुरू की गई काय%वाही से संबंति है और जो अति विनयम, 2000 क े लागू होने क े समय लंविब हैं। "विकसी भी अदाल " शब्द में सामान्य आपराति क अदाल ें भी शाविमल होंगी। यविद व्यवि5 1986 क े अति विनयम क े ह "विकशोर" था, ो काय%वाही आपराति क अदाल ों में लंविब नहीं होगी। वे आपराति क अदाल ों में क े वल भी लंविब होंगी जब लड़का 16 वर्ष% पार कर ुका हो या लड़की 18 वर्ष% पार कर ुकी हो। इससे प ा ल ा है विक ारा 20 उन मामलों को संदर्भिभ कर ी है जहां कोई व्यवि5 1986 क े अति विनयम क े ह विकशोर नहीं रह गया, लेविकन अभी क 18 वर्ष% की आयु पार नहीं विकया, ो उस अदाल में लंविब मामला वैसे ही जारी रहेगा जैसे विक अति विनयम, 2000 पारिर नहीं विकया गया हो और यविद अदाल को प ा ल ा है विक विकशोर ने अपरा विकया है, ो वह इस रह क े विनष्कर्ष% को दज% करेगा और विकशोर क े संबं में कोई सजा देने क े बजाय विकशोर को बो % को भेजेगा जो उस विकशोर क े संबं में आदेश पारिर करेगा। " उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
22. विबजेंद्र सिंसह बनाम हरिरयाणा राज्य, (2005) 3 एससीसी 685 क े मामले में, ारा 20 क े संबं में विवति क ण्डिस्थति विनम्नलिललिख शब्दों में ब ाई गई थी: "8. 1986 क े अति विनयम और अति विनयम, 2000 क े बी बुविनयादी अं रों में से एक पुरुर्षों और मविहलाओं की आयु से संबंति है। 1986 क े अति विनयम क े ह, एक विकशोर का म लब एक पुरुर्ष विकशोर है जिजसने 16 वर्ष% की आयु प्राप्त नहीं की है, और एक मविहला विकशोर जिजसने 18 वर्ष% की आयु प्राप्त नहीं की है। अति विनयम, 2000 में, आयु क े आ ार पर पुरुर्ष और मविहला विकशोर क े बी का अं र नहीं रखा गया है। पुरुर्षों और मविहलाओं दोनों क े लिलए आयु-सीमा 18 वर्ष% है।
9. 1986 क े अति विनयम क े अनुसार 16 वर्ष% से अति क का व्यवि5 विकशोर नहीं था। इस मामले को ध्यान में रख े हुए इस सवाल का जवाब विदया जाना ाविहए विक क्या 16 साल से ऊपर का व्यवि5 अति विनयम, 2000 क े दायरे में "विकशोर" हो जा ा है, लक्ष्य और उसक े ात्पय% क े संबं में उत्तर विदया जाना ाविहए।
10. 1986 क े अति विनयम क े अनुसार, एक व्यवि5 जो विकशोर नहीं था, उस पर विकसी भी अदाल में मुकदमा लाया जा सक ा था। अति विनयम, 2000 की ारा 20 ऐसी ण्डिस्थति का ख्याल रख ी है, जिजसमें कहा गया है विक इसक े बावजूद उस अदाल में मुकदमा जारी रहेगा जैसे विक वह अति विनयम पारिर नहीं विकया गया है और यविद, वह विकसी अपरा क े विकए दोर्षी पाया जा ा है, उस आशय का विनष्कर्ष% सजा क े विनण%य में दज% विकया जाएगा, यविद कोई हो, लेविकन विकशोर क े संबं में कोई सजा पारिर करने क े बजाय, उसे विकशोर न्याय बो % (संक्षेप में "बो %") को भेजा जाएगा जो अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुसार आदेश पारिर करेगा जैसे विक यह वह सं ुष्ट हो गया है विक एक विकशोर ने अपरा विकया है। इस प्रकार, उ[5] प्राव ान में एक कानूनी कल्पना का विनमा%ण उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकया गया है। एक कानूनी कल्पना, जैसा विक सव%विवविद है, को अपना पूण% प्रभाव विदया जाना ाविहए, हालांविक इसकी सीमाएं हैं।..…
11. ……………
12. इस प्रकार, कानूनी कल्पना क े कारण, एक व्यवि5, हालांविक विकशोर नहीं है, को सजा क े प्रयोजन क े लिलए बो % द्वारा विकशोर माना जाना ाविहए, जो ऐसी ण्डिस्थति का ध्यान रख ा है विक वह व्यवि5 यद्यविप 1986 क े अति विनयम क े ह विकशोर नहीं है लेविकन अभी भी उ[5] सीविम उद्देश्य क े लिलए अति विनयम, 2000 क े ह विकशोर माना जाएगा। "
23. म%बीर बनाम राज्य (एनसीटी ऑफ विदल्ली), (2010) 5 एससीसी 344 क े मामले में, सजा क े बाद भी विकशोर ा का विन ा%रण एक मुद्दा था और यह कहा गया: "11. ारा 20 क े स्पष्टीकरण की भार्षा से यह स्पष्ट है विक सभी लंविब मामलों में, जिजसमें न क े वल विव ारण बण्डिल्क बाद में पुनरीक्षण या अपील आविद क े माध्यम से आगे की काय%वाही भी शाविमल होगी, विकसी विकशोर की विकशोर ा का विन ा%रण ारा 2 क े खं (1) क े संदभ% में करना होगा, भले ही विकशोर 1-4-2001 को या उससे पहले विकशोर नहीं रह गया हो, जब अति विनयम,2000 लागू हुआ था, और अति विनयम क े प्राव ान इस रह लागू होंगे जैसे विक उ[5] प्राव ान सभी उद्देश्यों क े लिलए और सभी भौति क समयों क े लिलए लागू था जब कणिथ अपरा विकया गया था।
12. अति विनयम, 2000 की ारा 2 क े खं (1) में प्राव ान है विक "विवति का उल्लंघन करने वाले विकशोर" का अथ% वह "विकशोर" है, जिजसक े बारे में आरोप है विक उसने अपरा विकया है और ऐसे अपरा को कारिर करने की ति णिथ क े अनुसार अsारह वर्ष% की आयु पूरी नहीं की है। ारा 20 भी अदाल को विनयविम अदाल द्वारा दोर्षी sहराए जाने क े बाद भी विकसी व्यवि5 की विकशोर ा पर विव ार करने उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और विन ा%रिर करने में सक्षम बना ी है और सजा को बरकरार रख े हुए अदाल को भी अति कार दे ी है विक वह सजा को रद्द कर सक े और मामले को अति विनयम,2000 क े प्राव ानों क े अनुसार सजा पारिर करने क े लिलए संबंति विकशोर न्याय बो % को अग्रेविर्ष कर सक े ।"
24. इसी प्रकार, कालू बनाम हरिरयाणा राज्य, (2012) 8 एससीसी 34 क े मामले में, इस न्यायालय ने विनम्नानुसार अणिभव्य[5] विकया: "21. ारा 20 लंविब मामलों क े संबं में एक विवशेर्ष प्राव ान कर ी है। इसमें कहा गया है विक विकशोर अति विनयम में विनविह विकसी भी बा क े बावजूद, विकशोर अति विनयम क े लागू होने की ति णिथ पर विकसी भी क्षेत्र में विकसी भी अदाल में विकशोर क े संबं में सभी लंविब काय%वाही उस अदाल में वैसे ही जारी रहेगी जैसे विक विकशोर अति विनयम पारिर नहीं विकया गया हो और यविद अदाल को प ा ल ा है विक विकशोर ने अपरा विकया है, ो वह इस रह क े विनष्कर्ष% को रिरकॉ % करेगी और विकशोर क े संबं में कोई सजा पारिर करने क े बजाय विकशोर को बो % क े पास भेजेगा जो विकशोर अति विनयम क े प्राव ानों क े अनुसार उस विकशोर क े संबं में इस रह आदेश पारिर करेगा जैसे विक वह विकशोर अति विनयम क े ह जां पर सं ुष्ट हो विक विकशोर ने अपरा विकया है। ारा 20 की व्याख्या स्पष्ट कर ी है विक सभी लंविब मामलों में, जिजसमें न क े वल परीक्षण बण्डिल्क संशो न या अपील क े माध्यम से बाद की काय%वाही भी शाविमल होगी, विकशोर की विकशोर ा का विन ा%रण ारा 2 क े खं (1) क े संदभ% में होगा, भले ही विकशोर 1-4-2001 को या उससे पहले, जब विकशोर अति विनयम लागू हुआ, विकशोर न रह गया हो, और विकशोर अति विनयम क े प्राव ान उसी प्रकार लागू होंगे जैसे विक उ[5] प्राव ान सभी उद्देश्यों क े लिलए और सभी भौति क समयों क े लिलए लागू थे जब कणिथ अपरा कारिर विकया गया। " उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
25. इस प्रकार यह अति विनयम, 2000 की ारा 20 क े संदभ% में अच्छी रह से स्थाविप है विक, उन सभी मामलों में जहां अणिभयु5 घटना की ति णिथ पर 16 वर्ष% से अति क लेविकन 18 वर्ष% से कम आयु का था, न्यायालय में लंविब काय%वाही जारी रहेगी और एक अपवाद क े अ ीन ार्षिकक अं क ले जाया जाएगा विक विकशोर को दोर्षी पाए जाने पर, न्यायालय उसक े लिखलाफ सजा का आदेश पारिर नहीं करेगा, बण्डिल्क विकशोर को अति विनयम, 2000 क े ह उति आदेश क े लिलए बो % को भेजा जाएगा।
26. इस प्रकार, पूव 5 ा% क े मद्देनजर, अब हम अति विनयम, 2000 को ध्यान में रख े हुए मामले पर आगे विव ार करने क े लिलए आगे बढ़ े हैं।
27. अति विनयम, 2000 की ारा 7 क विनम्नानुसार है: "7 क. जब विकसी न्यायालय क े समक्ष विकशोर होने का दावा विकया जा ा है ो पालन की जाने वाली प्रविdया- (1) जब भी विकसी अदाल क े समक्ष विकशोर होने का दावा विकया जा ा है, या अदाल की राय में आरोपी व्यवि5 अपरा करने की ारीख पर विकशोर था, अदाल जां करेगी, ऐसे सबू लेगी जो आवश्यक हो (लेविकन हलफनामा नहीं) ाविक ऐसे व्यवि5 की आयु विन ा%रिर की जा सक े, और उसकी आयु को यथासंभव ब ा े हुए एक विनष्कर्ष% दज% विकया जाएगा विक वह व्यवि5 विकशोर है या बच्चा है या नहीं: बश j विक नाबालिलग होने का दावा विकसी भी न्यायालय क े समक्ष उsाया जा सक ा है और मामले क े अंति म विनपटारे क े बाद भी इसे विकसी भी स् र पर मान्य ा दी जाएगी, और इस रह क े दावे को इस अति विनयम और उसक े ह बनाए गए उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विनयमावली क े प्राव ानों क े अनुसार विन ा%रिर विकया जाएगा, भले ही विकशोर इस अति विनयम क े प्रारंभ होने की ारीख को या उससे पहले विकशोर न रह गया हो। (2) यविद न्यायालय विकसी व्यवि5 को उप - ारा (1) क े ह अपरा होने की ति णिथ पर विकशोर पा ा है, ो वह विकशोर को उति आदेश पारिर करने क े लिलए बो % को भेजेगा और न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा, यविद कोई हो, का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। "
28. ारा 7 क को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जा ा है विक जब भी विकशोर होने का दावा विकया जा ा है, ो जां की जानी ाविहए और ऐसी पूछ ाछ साक्ष्य प्राप्त करक े, लेविकन एक हलफनामा नहीं, की जाएगी जो ऐसे व्यवि5 की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए आवश्यक होगी।
29. विकशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) विनयमावली, 2007 (संक्षेप में " विनयम 2007") क े अध्याय II, विवशेर्ष रूप से विनयम 3 (1) और विनयम 3 (2) में वर्भिण जिसद्धां II, IV, XI, XII, XIII और XIV क े संदभ% भी आवश्यक हैं। उ[5] प्राव ान और जिसद्धां नी े विदए गए हैं- "3. इन विनयमों क े प्रशासन में पालन विकए जाने वाले मौलिलक जिसद्धां - (1) राज्य सरकार, विकशोर न्याय बो %, बाल कल्याण सविमति या अन्य सक्षम प्राति करण या एजेंजिसयां, जैसा भी मामला हो, जबविक (2) विनम्नलिललिख जिसद्धां, अन्य बा ों क े साथ-साथ, अति विनयम और इसक े ह बनाए गए विनयमों क े अनुप्रयोग, व्याख्या और काया%न्वयन क े लिलए मौलिलक होंगे: XXX
II. गरिरमा और मूल्य का जिसद्धां उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (क) उप ार जो बच्चे की गरिरमा और मूल्य की भावना क े अनुरूप है, विकशोर न्याय का एक मौलिलक जिसद्धां है। यह जिसद्धां मानवाति कारों की साव%भौविमक घोर्षणा क े अनुच्छेद I में विनविह मौलिलक मानव अति कार को दशा% ा है विक सभी मनुष्य स्व ंत्र और समान पैदा हो े हैं। गरिरमा में अपमाविन न विकया जाना, व्यवि5ग पह ान की सीमाओं और स्थान का सम्मान विकया जाना, लेबल नहीं विकया जाना और कलंविक न विकया जाना, सू ना और विवकल्पों को साझा करना और उनक े क ृ त्यों क े लिलए दोर्षी नहीं sहराया जाना शाविमल है। (ख) कानून प्रव %न एजेंजिसयों क े साथ पहले संपक % से लेकर बच्चे क े साथ ब ा%व करने और उपायों को लागू करने क की पूरी प्रविdया क े दौरान विकशोर या बच्चे क े सम्मान और मूल्य क े अति कार का सम्मान और संरक्षण विकया जाना ाविहए।
III. सुने जाने क े अति कार का जिसद्धां उनक े विह को प्रभाविव करने वाले सभी मामलों में स्व ंत्र रूप से अपने विव ार व्य[5] करने क े प्रत्येक बच्चे क े अति कार का विकशोर न्याय की प्रविdया में हर रण क े माध्यम से पूण% सम्मान विकया जाएगा। बच्चों क े सुने जाने क े अति कार में विवकासात्मक रूप से उपयु5 उपकरणों का विनमा%ण और उनक े स्वयं क े जीवन संबं ी विनण%यों में सविdय भागीदारी और ा% और बहस क े अवसर प्रदान करना बच्चे क े साथ बा ी करने की प्रविdया को बढ़ावा देना शाविमल होगा।
IV. सव त्तम विह का जिसद्धां (क) विकशोर न्याय क े प्रशासन क े संदभ% में लिलए गए सभी विनण%यों में, विवति का उल्लंघन करने वाले विकशोर या बच्चे क े सव त्तम विह का जिसद्धां प्राथविमक विव ार होगा। (ख) विवति का उल्लंघन करने वाले विकशोर या बच्चे क े सव त्तम विह का जिसद्धां उदाहरण क े लिलए यह होगा विक आपराति क न्याय, प्रति शो और दमन क े पारंपरिरक उद्देश्यों की जगह विकशोर क े पुनवा%स और पुनस्था%पनात्मक उद्देश्यों को महत्व विदया जाना ाविहए। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (ग) यह जिसद्धां विवति का उल्लंघन करने वाले विकशोर या बच्चे क े शारीरिरक, भावनात्मक, बौतिद्धक, सामाजिजक और नैति क विवकास को सुविनतिश्च करना ाह ा है ाविक प्रत्येक बच्चे क े लिलए सुरक्षा, कल्याण और स्थातियत्व सुविनतिश्च विकया जा सक े और इस प्रकार प्रत्येक बच्चे को उसकी उच्च म क्षम ा प्राप्त हो। xxx xxx xxx
XI. विनज ा और गोपनीय ा क े अति कार का जिसद्धां विकशोर या बच्चे क े विनज ा और गोपनीय ा क े अति कार को सभी रीकों से और काय%वाही क े सभी रणों, देखभाल और सुरक्षा प्रविdयाओं क े माध्यम से संरतिक्ष विकया जाएगा।
XII. अंति म उपाय का जिसद्धां कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे या विकशोर का संस्थाग करण उति जां क े बाद अंति म उपाय का एक कदम होगा और वह भी न्यून म संभव अवति क े लिलए।
XIII. प्रत्याव %न और बहाली का जिसद्धां (क) कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे या विकशोर को अपने परिरवार क े साथ विफर से एकजुट होने और उसी सामाजिजक-आर्भिथक सांस्क ृ ति क ण्डिस्थति में वापस जाने का अति कार है जो इस रह क े विकशोर या बच्चे को अति विनयम क े दायरे में आने या विकसी भी प्रकार की उपेक्षा, दुव्य%वहार या शोर्षण क े प्रति सुभेद्य होने से पहले प्राप्त था। (ख) कोई भी विकशोर या बच्चा, जिजसका अपने परिरवार क े साथ संपक % टूट गया है, अति विनयम क े ह सुरक्षा का पात्र होगा और जल्द से जल्द अपने परिरवार को प्रत्यावर्ति और बहाल विकया जाएगा, जब क विक इस रह का प्रत्याव %न और बहाली विकशोर या बच्चे क े सव त्तम विह क े लिखलाफ होने की संभावना न हो।
XIV. नई शुरुआ का जिसद्धां उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (क) नए जिसरे से शुरुआ का जिसद्धां विवति का उल्लंघन करने वाले विकशोर या बच्चे क े विपछले रिरकॉ % को विमटाकर नई शुरुआ को बढ़ावा दे ा है। (ख) राज्य न्यातियक काय%वाही का सहारा लिलए विबना, दं ात्मक कानून का उल्लंघन करने वाले कणिथ या ति ण्डिन्ह बच्चों से विनपटने क े उपायों को बढ़ावा देने की कोणिशश करेगा। " ख. यह कहा गया है विक अति विनयम की ारा 51 में प्राव ान है विक परिरवीक्षा अति कारी या सामाजिजक काय%क ा% की रिरपोट% गोपनीय होगी। यह आगे कहा गया है विक विनयम 18 ारा 21 क े उल्लंघन क े संबं में अपनाई जाने वाली प्रविdया का प्राव ान कर ा है।"
30. अं रा%ष्ट्रीय सम्मेलन और अति विनयम, 2000 क े प्राव ानों क े अलावा, यह ध्यान विदया जा सक ा है विक बच्चे की सुरक्षा क े लिलए संवै ाविनक गारंटी संविव ान क े अनुच्छेद 39 में विनविह है। अनुच्छेद 39 विनम्नानुसार है: "39. नीति क े क ु छ जिसद्धां ों का राज्य द्वारा पालन विकया जाना (ङ) विक श्रविमकों, पुरुर्षों और मविहलाओं क े स्वास्थ्य और शवि5 था बच्चों की सुक ु मार अवस्था का दुरूपयोग न हो और यह विक आर्भिथक आवश्यक ा से विववश होकर नागरिरकों को ऐसे रोजगारों में न जाना पड़े जो उनकी आयु या शवि5 क े अनुक ू ल न हों; ( ) विक बच्चों को स्वस्थ रीक े से और स्व ंत्र ा और गरिरमा की ण्डिस्थति यों में विवकजिस होने क े अवसर और सुविव ाएं दी जाएं और ब पन और युवाओं को शोर्षण और नैति क और भौति क परिरत्याग क े लिखलाफ संरतिक्ष विकया जाएं। "
31. आयु विन ा%रण क े लिलए अपनाई जाने वाली प्रविdया विनयमावली, 2007 क े विनयम 12 (3) (बी) क े ह प्रदान की गई है, जो इस प्रकार है: "12. आयु क े विन ा%रण में अपनाई जाने वाली प्रविdया - उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (3) कानून का उल्लंघन करने वाले विकशोर या बच्चे से संबंति प्रत्येक मामले में, आयु विन ा%रण की जाँ न्यायालय या बो % या, जैसा भी मामला हो, द्वारा की जाएगी, (क) (i) ) मैविट्रक ु लेशन या समकक्ष प्रमाण पत्र, यविद उपलब् हो, और उसक े अभाव में;
(i) i) ) स्क ू ल से जन्म प्रमाण पत्र (प्ले स्क ू ल क े अलावा) जिजसमें पहले भाग लिलया हो; था जिजसक े न होने पर
(i) i) i) ) विनगम या नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय द्वारा विदया गया जन्म प्रमाण पत्र; (बी) और क े वल उपरो5 खं (क) क े (i) ), (i) i) ) या (i) i) i) ) की अनुपण्डिस्थति में, विवति व गविs मेति कल बो % से ति विकत्सा राय मांगी जाएगी, जो विकशोर या बच्चे की उम्र घोविर्ष करेगी। यविद आयु का सटीक विन ा%रण नहीं विकया जा सक ा है, ो न्यायालय या बो % या, जैसा भी मामला हो, सविमति, उनक े द्वारा रिरकॉ % विकए जाने वाले कारणों से, यविद आवश्यक समझे, ो बच्चे या विकशोर को एक वर्ष% क े मार्जिजन क े भी र उसकी उम्र को कम मान े हुए लाभ दे सक े हैं। और, ऐसे मामले में आदेश पारिर कर े समय, ऐसे सबू ों पर विव ार करने क े बाद, जो उपलब् हों, या ति विकत्सा राय, जैसा भी मामला हो, उसकी उम्र क े संबं में एक विनष्कर्ष% रिरकॉ % करेगा और इनमें से विकसी भी सबू में विनर्षिदष्ट विकया गया खं (क) (i) ),
(i) i) ), (i) i) i) ) या उनकी अनुपण्डिस्थति में, खं (बी) ऐसे बच्चे या कानून का उल्लंघन करने वाले विकशोर क े संबं में उम्र का विनणा%यक प्रमाण होगा। "
32. उपरो5 विनयम का उप-ख (3) स्पष्ट रूप से आदेश दे ा है विक विकसी अणिभयु5 की विकशोर ा क े बारे में जां कर े समय, विकशोर न्याय बो % मैविट्रक या समकक्ष प्रमाण पत्र प्राप्त करक े और जन्म प्रमाण पत्र की अनुपण्डिस्थति में स्क ू ल, जिजसमें पहले दालिखला हुआ हो, जन्म प्रमाण पत्र और उसक े अभाव में विनगम या नगर पालिलका या पं ाय द्वारा विदया गया जन्म प्रमाण पत्र। उप-खं (ख) में यह भी स्पष्ट विकया गया है विक उपरो5 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ीन दस् ावेजों की अनुपण्डिस्थति में ही,विवति व गविs मेति कल बो % से ति विकत्सा जानकारी मांगी जाएगी। जो विकशोर या बच्चे की उम्र घोविर्ष करेगा। इस प्रकार, उपरो5 दस् ावेजों क े अभाव मे ही विकशोर न्याय बो % ति विकत्सा जानकारी / औजिसविफक े शन परीक्षण क े लिलए कह सक ा था।
33. अति विनयम, 2000 अति विनयम, 2015 द्वारा विनरजिस हो गया। आयु विन ा%रण की प्रविdया अब अति विनयम,2015 की ारा 94 का विहस्सा है जो पहले उपरो5 विनयमावली क े विनयम 12 क े ह प्रदान की गई थी। परिरवार रजिजस्टर
34. परिरवार रजिजस्टर विनयम उत्तर प्रदेश राज्य में एक परिरवार रजिजस्टर ैयार करने का प्राव ान कर ा है जिजसमें गाँव सभा से संबंति गाँव में रहने वाले सभी व्यवि5यों क े परिरवार क े नाम और विववरण हो े हैं। ऐसे विनयम यूपी पं ाय राज अति विनयम, 1947 की ारा 110 क े ह अव ारिर विकए गए हैं, जो विनयम विनम्नानुसार हैं: "1. (1) इन विनयमों को यूपी पं ाय राज (परिरवार रजिजस्टर का रखरखाव) विनयम, 1970 भी कहा जा सक ा है।
2. परिरवार रजिजस्टर की ैयारी आैर प्रकार- फॉम% ए में एक परिरवार रजिजस्टर ैयार विकया जाएगा जिजसमें गाँव सभा से संबंति गाँव में सामान्य रूप से रहने वाले सभी व्यवि5यों क े परिरवार क े नाम और विववरण होंगे। आम ौर पर रजिजस्टर में प्रत्येक परिरवार को एक पृष्ठ आवंविट विकया जाएगा। अनुसूति जाति क े परिरवारों क े लिलए रजिजस्टर में एक अलग खं होगा। रजिजस्टर हिंहदी में देवनागरी लिलविप में ैयार विकया जाएगा।
3. रजिजस्टर में पंजीकरण की सामान्य श “- प्रत्येक व्यवि5 जो गांव सभा क े क्षेत्र में सामान्य रूप से विनवासी रहा है, परिरवार रजिजस्टर में पंजीक ृ होने का हकदार होगा। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" स्पष्टीकरण - एक व्यवि5 को गांव में सामान्य विनवासी माना जाएगा यविद वह ऐसे गांव में सामान्य रूप से रह रहा है या उसक े पास एक आवासीय घर जो रहने क े योग्य हो। 4 परिरवार रजिजस्टर में त्रैमाजिसक प्रविवविष्टयाँ- प्रत्येक वर्ष% अप्रैल से शुरू होने वाली प्रत्येक ति माही की शुरुआ में, गाँव सभा क े सति व क े द्वारा जन्म और मृत्यु से सम्बण्डिन् आवश्यक परिरव %न परिरवार रजिजस्टर में दज% करेंगे, यविद कोई विकसी परिरवार में विपछली ति माही में हुआ हो ो इस रह क े परिरव %न को ग्राम पं ाय की अगली बैsक क े समक्ष जानकारी क े लिलए रखे जाएंगे।
5. विकसी भी मौजूदा प्रविवविष्ट में सु ार - सहायक विवकास अति कारी (पं ाय ) इस संबं में सति व ग्राम सभा को विदए गए आवेदन क े ह परिरवार रजिजस्टर में विकसी भी मौजूदा प्रविवविष्ट क े सु ार का आदेश दे सक ा है और ग्राम सभा क े सति व दनुसार रजिजस्टर में सु ार करेंगे।
6. रजिजस्टर में नामों का समावेशन - (1) कोई भी व्यवि5 जिजसका नाम परिरवार रजिजस्टर में शाविमल नहीं है, वह परिरवार रजिजस्टर में अपना नाम शाविमल करने क े लिलए सहायक विवकास अति कारी (पं ाय ) को आवेदन कर सक ा है। (2) सहायक विवकास अति कारी (पं ाय ) यविद सं ुष्ट हो ा है आैर वह इस रह की जां क े बाद सं ुष्ट हो जा ा है ो आवेदक रजिजस्टर में दज% होने का हकदार है, ो वह विनदjणिश करेगा विक आवेदक का नाम उसमें शाविमल विकया जाए और गांव सभा क े सति व दनुसार उसका नाम शाविमल करेंगे। 6- क. यविद विनयमावली 5 या विनयमावली 6 क े अ ीन विकये गये आदेश से व्यणिथ कोई भी व्यवि5 ऐसे आदेश की ति णिथ से 30 विदनों क े भी र उपख अति कारी को अपील कर सक ा है जिजसका विनण%य अंति म होगा।
7. रजिजस्टर की अणिभरक्षा एवं रख-रखाव.- (1) ग्राम सभा का सति व परिरवार रजिजस्टर की सुरतिक्ष अणिभरक्षा क े लिलए उत्तरदायी होगा। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (2) प्रत्येक व्यवि5 को उत्तर प्रदेश पं ाय राज विनयमावली क े विनयम 73 में विनर्षिदष्ट रीक े से शुल्क क े भुग ान पर, यविद कोई हो, ो रजिजस्टर का विनरीक्षण करने था उसकी अनुप्रमाणिण प्रति प्राप्त करने का अति कार होगा। फाम% ए (विनयम 2 देखें) *** नोट: विटप्पणी कॉलम में आदेश की संख्या और ारीख, यविद कोई हो, जिजसक े द्वारा कोई नाम जोड़ा जा ा है या काट विदया जा ा है, प्रविवविष्ट करने वाले व्यवि5 क े हस् ाक्षर क े साथ विदया जाना ाविहए। "
35. उपरो5 विनयमों क े अवलोकन से प ा ल ा है विक प्रत्येक परिरवार को एक पृष्ठ आवंविट विकया गया है और जन्म और मृत्यु क े परिरणामस्वरूप परिरवार में विकसी भी परिरव %न को ऐसे पृष्ठ पर शाविमल विकया जाना आवश्यक है। एेसे परिरव %नों को अगली ग्राम पं ाय की बैsक क े समक्ष रखा जाना आवश्यक है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है विक ऐसे विनयम वै ाविनक रूप से एक अति विनयम क े अनुसरण में बनाए गए हैं। रजिजस्टर में प्रविवविष्टयाँ ग्राम पं ाय क े अति कारिरयों द्वारा उनक े आति कारिरक क %व्य क े विनवा%हन क े रूप में की जानी आवश्यक हैं।
36. मनोज बनाम हरिरयाणा राज्य क े मामले में (2022) 6 एससीसी 187 में इस न्यायालय ने उपरो5 संदर्भिभ परिरवार रजिजस्टर क े संबं में विनम्नानुसार अव ारिर विकया है:- "39. हम क ु छ मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा लिलए गए व्यापक दृविष्टकोण को स्वीकार करने में असमथ% हैं विक परिरवार क े सदस्यों की उम्र विन ा%रिर करने क े लिलए परिरवार रजिजस्टर प्रासंविगक नहीं है। यह थ्यात्मक प्रश्न है विक विक ना साक्ष्यात्मक मूल्य परिरवार उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" रजिजस्टर से जु ा होना ाविहए, लेविकन यह कहना विक यह पूरी रह से प्रासंविगक नहीं है आैर विवति की सही व्याख्या क े अन् ग% नहीं होगा। रजिजस्टर को एक विवति क े ह बनाए गए विनयमों क े अनुसार बनाए रखा जा रहा है। मामलों क े विनयविम पाठ्यdम में की गई प्रविवविष्टयाँ पं ाय इस प्रकार प्रासंविगक होगी लेविकन इस रह की विनभ%र ा की सीमा प्रत्येक मामले क े विवणिशष्ट थ्यों और परिरण्डिस्थति यों को ध्यान में रख े हुए होगी।" (प्रभाव वर्ति )
37. अबुजर हुसैन (उपरो5) में, इस न्यायालय ने विनम्नानुसार अणिभविन ा%रिर विकया: "30. वास् व में, हरिर राम [(2009) 13 SCC 211:(2010) 1 SCC (Cri) ) 987] और अकबर शेख [(2009) 7 SCC 415:(2009) में इस न्यायालय क े फ ै सलों से पहले ) 3 SCC (Cri) ) 431] इस न्यायालय क े विनण%य क े पहले क े विनण%य है, इस न्यायालय की ीन-न्याया ीशों की खं पीs ने पवन [(2009) 15 SCC 259:
े मामलें में हममें से एक (न्यायमूर्ति आर. एम लोढ़ा,) क े द्वारा ारा 7-ए क े संदभ% में इस न्यायालय में पहली बार विकशोर होने क े दावे की स्वीकाय% ा से संबंति प्रश्न पर विव ार विकया गया। इस न्यायालय क े समक्ष पहली बार दो अपीलक ा%ओं, अथा% ्, ए-1 की ओर और A- 2 की विकशोर ा का विववाद उsाया गया था। इस न्यायालय क े समक्ष उनकी ओर से क % यह था विक वे उ[5] ारीख पर 2000 क े अति विनयम क े अथ% क े भी र "विकशोर" थे और उनक े लिखलाफ संविह ा क े ह आयोजिज मुकदमा अवै था। A- 1 क े संबं में उसक े स्क ू ल छोड़ने क े प्रमाण पत्र पर अवलंब लिलया गया था जबविक ए 2 क े संबं में ारा 313 क े ह दज% उसक े बयान और स्क ू ल छोड़ने क े प्रमाण पत्र पर अवलंब लिलया गया। विकशोर ा क े क % क े मामले मे विव ार कर े हुए, इस न्यायालय ने कहा विक मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी विकशोर ा का दावा विकसी भी स् र पर उsाया जा सक ा है। न्यायालय ने ब रिरपोट% क े प्रस् र 41 में प्रश्न ैयार विकया विक क्या जां की जानी ाविहए या विन ली अदाल से उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" रिरपोट% मांगी जानी ाविहए जहां इस अदाल क े समक्ष पहली बार विकशोर होने का दावा विकया गया हो।
31. यह पवन, (2009) 15 एससीसी 259 में अव ारिर विकया गया था विक जहां अणिभयु5 द्वारा इस न्यायालय क े समक्ष रखी गई सामग्री, प्रथम दृष्टया, सुझाव दे ी है विक वह एक "विकशोर" था, जैसा विक उ[5] ारीख पर अति विनयम, 2000 में परिरभाविर्ष विकया गया था, यह घटना की ारीख पर उम्र क े विन ा%रण क े लिलए रिरपोट% या जां क े लिलए बुलाना आवश्यक था। हालांविक, जहां विकशोर होने की दलील बेईमानी से पाई जा ी है या सामग्री में विवश्वसनीय ा की कमी हो ी है या विवश्वास को प्रेरिर नहीं कर ी है और यहां क विक प्रथम दृष्टया यह न्यायालय को सं ुष्ट नहीं कर ा है। इस संबं में आगे की कवायद की आवश्यक ा नहीं हो सक ी है। यह भी कहा गया था विक यविद विकशोर ा की याति का विव ारण न्यायालय या उच्च न्यायालय क े समक्ष नहीं उsाई गई थी और इस न्यायालय क े समक्ष पहली बार उsाई गई है, ो न्यायालय क े न्यातियक अं ःकरण को पया%प्त सामग्री देकर सं ुष्ट विकया जाना ाविहए विक अणिभयु5 ने अपरा विकए जाने की ति णिथ को 18 वर्ष% की आयु प्राप्त नहीं की थी। पया%प्त सामग्री क े अभाव में, विकशोरत्व की विकसी और जां की आवश्यक ा नहीं होगी।
32. पवन मामले [(2009) 15 SCC 259:(2010) 2 SCC (Cri) ) 522] क े पैरा 41 में हाइलाइट विकए गए सामान्य विदशाविनदjशों क े संबं में इस न्यायालय क े दृविष्टकोण क े संबं में जहां विकशोर ा का पहली बार दावा विकया गया है, न्यायालय ने ब घटना की ारीख पर विकशोर होने क े दावे क े समथ%न में ए-1 और ए-2 द्वारा अवलंब लिलए गए दस् ावेजों पर विव ार विकया। A-2 द्वारा अवलंब लिलए गए दो दस् ावेजों क े संबं में, अथा% ्, संविह ा की ारा 313 क े ह बयान और स्क ू ल छोड़ने का प्रमाण पत्र, इस न्यायालय ने देखा विक ारा 313 क े ह दज% विकया गया बयान स-शरीर उपण्डिस्थति पर आ ारिर एक अस्थायी अवलोकन था जो आयू क े लिलए शायद ही विनणा%यक था और उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" जहां क स्क ू ल छोड़ने क े प्रमाण पत्र का संबं है, यह विकसी भी विवश्वास को प्रेरिर नहीं कर ा है क्योंविक यह ए-2 को पहले ही दोर्षी sहराए जाने क े बाद जारी विकया गया था और जन्म रजिजस्टर में प्रविवविष्ट जैसे प्राथविमक साक्ष्य प्रस् ु नहीं विकए गए थे। A-1 द्वारा स्क ू ल छोड़ने क े प्रमाण पत्र क े संबं में, इस न्यायालय ने पाया विक उसकी दोर्षजिसतिद्ध क े बाद उसे प्राप्त विकया गया था और जन्म रजिजस्टर से कोई प्रविवविष्ट प्रस् ु नहीं की गई थी। इस प्रकार, न्यायालय A-1 और A- 2 की ओर से रखी गई सामग्री से प्रथम दृष्टया प्रभाविव या सं ुष्ट नहीं था। वे दस् ावेज सं ोर्षजनक नहीं पाए गए और बो % या विव ारण न्यायालय से A- 1 और A- 2 की उम्र क े बारे में विकसी भी रिरपोट% की मांग करने क े लिलए पया%प्त नहीं थे। पैरा 39 में, न्यायालय ने कानूनी ण्डिस्थति को विनम्नानुसार संक्षेविप विकया है: "39.1.मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी विकसी भी स् र पर नाबालिलग होने का दावा विकया जा सक ा है। मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद इसे इस न्यायालय क े समक्ष पहली बार उsाया जा सक ा है। दावे को उsाने में देरी इस रह क े दावे को खारिरज करने क े लिलए विकशोर ा एक आ ार नहीं हो सक ा है। विकशोर ा का दावा अपील में उsाया जा सक ा है भले ही विव ारण न्यायालय क े सामने न रखा गया हो और इस न्यायालय क े सामने पहली बार उsाया जा सक ा है, हालांविक विव ारण न्यायालय और अपील न्यायालय क े समक्ष कोइ% जोर नहीं ाला गया। 39.[2] दोर्षजिसतिद्ध क े बाद विकशोरत्व क े संबं में दावा करने क े लिलए, दावेदार को क ु छ ऐसी सामग्री प्रस् ु करनी होगी जो प्रथम दृष्टया अदाल को सं ुष्ट कर सक ी है विक विकशोर ा क े दावे की जां आवश्यक है। प्रारंणिभक बोझ का विनव%हन उस व्यवि5 द्वारा विकया जाना ाविहए जो विकशोर ा का दावा कर ा है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 39.[3] कौन सी सामग्री प्रथम दृष्टया अदाल को सं ुष्ट करेगी और/या प्रारंणिभक बोझ को कम करने क े लिलए पया%प्त है, इसे सू ीबद्ध नहीं विकया जा सक ा है और न ही यह विन ा%रिर विकया जा सक ा है विक साक्ष्य क े एक विवणिशष्ट भाग को विक ना महत्व विदया जाना ाविहए जो विक विकशोर ा क े लिलए अनुमान लगाने क े लिलए पया%प्त हो सक ा है। लेविकन विनयम 12 (3) (ए) (i) ) से (i) i) i) ) में विनर्षिदष्ट दस् ावेज विनतिश्च रूप से विनयम 12 क े ह आगे की जां की आवश्यक ा वाले अपरा ी की उम्र क े बारे में अदाल की प्रथम दृष्टया सं ुविष्ट क े लिलए पया%प्त होंगे। संविह ा की ारा 313 बहु अस्थायी है और आम ौर पर विकशोर होने क े दावे को सही sहराने या अस्वीकार करने क े लिलए पया%प्त नहीं हो सक ी है। सजा क े बाद प्राप्त विकए गए स्क ू ल छोड़ने क े प्रमाण पत्र या म दा ा सू ी आविद जैसे दस् ावेजों की विवश्वसनीय ा और /या स्वीकाय% ा प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरण्डिस्थति यों पर विनभ%र करेगा और कोई कsोर और ेज़ विनयम विन ा%रिर नहीं विकया जा सक ा है विक उन्हें प्रथम दृष्टया स्वीकार या अस्वीकार विकया जाना ाविहए। अकबर शेख [(2009) 7 एससीसी 415: (2009) 3 एससीसी (सीआरआई) 431 में ] और पवन [(2009) 15 SCC 259:(2010) 2 SCC (Cri) ) 522] इन दस् ावेजों को प्रथम दृष्टया विवश्वसनीय नहीं पाया गया जबविक जिज ेंद्र सिंसह [(2010) 13 SCC 523:(2011) 1 SCC (Cri) ) 857 में ] दस् ावेज अथा% स्क ू ल छोड़ने का प्रमाण पत्र, माक % शीट और मेति कल रिरपोट% को अपीलक ा% की उम्र की जां और सत्यापन क े विनदjश क े लिलए पया%प्त माना गया था। यविद ऐसे दस् ावेज प्रथम दृष्टया अदाल क े विवश्वास को प्रेरिर कर े हैं, ो अदाल ऐसे दस् ावेजों पर ारा 7-ए और क े उद्देश्यों क े लिलए कार%वाई कर सक ी है। अपरा ी की आयु क े विन ा%रण क े लिलए जां का आदेश दें। 39.4.अपील या पुनरीक्षण में या मामले क े लंविब रहने क े दौरान या मामले क े विनस् ारण क े बाद इस न्यायालय क े समक्ष पहली बार उsाए गए विकशोर होने क े दावे क े समथ%न में दावेदार या मा ा-विप ा या भाई-बहन या रिरश् ेदार में से विकसी का हलफनामा ऐसे व्यवि5 की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए जां को न्यायोति sहराने क े लिलए पया%प्त नहीं होगा जब उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क विक मामले की परिरण्डिस्थति यां इ नी स्पष्ट न हों विक अपरा ी की आयु क े विन ा%रण की जां का आदेश देने क े लिलए अदाल की न्यातियक अं रात्मा सं ुष्ट हो। 39.[5] जिजस न्यायालय में विकशोरत्व की दलील पहली बार उsाई गई है, उसे हमेशा 2000 अति विनयम क े उद्देश्यों द्वारा विनदjणिश विकया जाना ाविहए और इस ण्डिस्थति क े प्रति स े रहना ाविहए विक 2000 अति विनयम में विनविह लाभकारी और विह कारी प्राव ान उच्च यांवित्रक दृविष्टकोण से पराजिज नहीं हो े हैं और ऐसे व्यवि5 जो 2000 अति विनयम क े लाभ प्राप्त करने क े हकदार है वे ऐसे लाभ प्राप्त कर े हैं। अदाल ों को अनावश्यक रूप से विकसी सामान्य ारणा से प्रभाविव नहीं होना ाविहए विक स्क ू लों में मा ा - विप ा/अणिभभावक भविवष्य क े लाभ क े लिलए अपने बच्चों की उम्र को एक या दो साल कम ब ा े हैं या वह उम्र ति विकत्सा परीक्षण द्वारा विन ा%रण बहु सटीक नहीं है। इस मामले को प्रथम दृष्टया संभाव्य ा की कसौटी पर माना जाना ाविहए। 39.6.विकशोरावस्था क े दावे में विवश्वसनीय ा की कमी या विकशोरत्व का ुच्छ दावा या स्पष्ट रूप से बे ुका या स्वाभाविवक रूप से विकशोरत्व क े अनुति दावे को न्यायालय द्वारा सीमा पर खारिरज कर विदया जाना ाविहए ाहे उसे जब भी उsाया जाए। "
38. जण्डिस्टस टीएस sाक ु र (न्याया ीश), अपने प्रथक लेविकन सम्मलित्त वालें विनण%य में, विनम्नानुसार अव ारिर विकया: "43.2.दूसरा कारक जो न्यायालय क े विववेक में हमेशा मौजूद रहना ाविहए, वह यह है विक विकशोर होने का दावा कई बार उन मामलों में भी विकया जा सक ा है, जहां अणिभयु5 क े पास विकसी साव%जविनक दस् ावेज क े संदभ% में उसकी जन्मति णिथ विदखाने वाला कोई सबू नहीं है जैसे नगरपालिलका अति कारिरयों, पं ाय ों या अस्प ालों द्वारा बनाए गए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण और न ही विकसी स्क ू ल से जारी कोई प्रमाण पत्र, क्योंविक अणिभयु5 को कभी विकसी स्क ू ल में भ ž नहीं कराया गया था। भले ही विकसी स्क ू ल में भ ž कराया गया हो, इस रह क े प्रवेश क े संबं में कोई रिरकॉ % कई बार न्यायायल क े समक्ष उपलब् नहीं हो पा ा है। विफर से, ऐसे मामले भी हो सक े हैं जिजनमें अणिभयु5 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विनगम, नगर पालिलका या पं ाय से जन्म प्रमाण पत्र प्रदान करने की ण्डिस्थति में न हो, क्योंविक हम जान े हैं विक जन्म और मृत्यु क े पंजीकरण को बनाए नहीं रखा जा सक ा है। और यविद बनाए रखा जाए ो विनयविम और सटीक नहीं हो सक ा है, और कभी- कभी सत्य भी हो सक ा है।
44. विनयमावली का विनयम 12 (3) क े वल ीन प्रमाणपत्रों को प्रासंविगक बना ा है। ये विनयम क े उप-विनयम 3 (क) (i) ) से (i) i) i) ) में शाविमल हैं जो विनम्नानुसार हैं: "(3) (क) (i) ) मैविट्रक ु लेशन या समकक्ष प्रमाण पत्र, यविद उपलब् हो; और जिजसक े अभाव में;
(i) i) ) स्क ू ल से जन्म प्रमाण पत्र (प्ले स्क ू ल क े अलावा) जिजसमें पहले भाग लिलया; और उसकी अनुपण्डिस्थति में;
(i) i) i) ) विनगम या नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय द्वारा विदया गया जन्म प्रमाण पत्र; उपरो5 प्रमाणपत्रों या उनमें से विकसी एक को प्रस् ु न करना विकशोर होने क े दावे क े लिलए घा क नहीं है, क्योंविक विनयम 12 क े उप-विनयम (3) (ख) में प्रमाण पत्रों की "अनुपण्डिस्थति " में इस प्रश्न का विन ा%रण अणिभयु5ों की ति विकत्सा परीक्षा क े आ ार पर करने का प्राव ान कर ा है।
45. विनयम 12 (3) (ख) विनम्नानुसार है: "12. (3) (ख) और क े वल उपरो5 खं (क) क े (i) ), (i) i) ) या (i) i) i) ) की अनुपण्डिस्थति में, विवति व गविs मेति कल बो % से ति विकत्सा राय मांगी जाएगी, जो विकशोर या बच्चे की आयु घोविर्ष करेगी। यविद आयु का सटीक आकलन नहीं विकया जा सक ा है, ो न्यायालय या बो % या, जैसा भी मामला हो, सविमति, उनक े द्वारा रिरकॉ % विकए जाने वाले कारणों क े लिलए, यविद आवश्यक हो, एक वर्ष% उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क े मार्जिजन क े भी र उसकी उम्र कम कर े हुए बच्चे या विकशोर की आयु को घोविर्ष कर लाभ दे सक े हैं, "उपरो5 प्राव ान में विदखाई देने वाली अणिभव्यवि5" अनुपण्डिस्थति " अति विनयम या विनयमों क े ह परिरभाविर्ष नहीं है। इसलिलए, शब्द को, इसका शाण्डिब्दक अथ% विदया जाएगा जो संतिक्षप्त ऑक्सफो % ति क्शनरी द्वारा विनम्नानुसार लिलया गया है: "अनुपण्डिस्थति । - विकसी स्थान या व्यवि5 से दूर होना; दूर होने का समय; गैर- अण्डिस् त्व या अभाव; अन्य बा ों क े विव ार क े कारण असाव ानी।" ब्लैक लॉ ति क्शनरी भी "अनुपण्डिस्थति " का अथ% इस प्रकार समझा ी है: "अनुपण्डिस्थति - (1) अपने सामान्य विनवास स्थान से दूर होने की ण्डिस्थति । (2) अपेतिक्ष होने पर, या उपलब् होने और पहुं ने में विवफल ा। (3) लुइजिसयाना कानून. अनुपण्डिस्थ व्यवि5 होने की ण्डिस्थति.अनुपण्डिस्थति भी कहा जा ा है (अथ% 3 में)।
46. यह स्वजिसद्ध है विक अणिभव्यवि5 का उपयोग और संदभ% जिजसमें इसका उपयोग विकया गया है विनयम 12(3)(ए)(i) ) से (i) i) i) ) में उजिल्ललिख दस् ावेजों की "अनुपण्डिस्थति " या ो हो सक ी है क्योंविक वे मौजूद नहीं हैं या उन्हें उन पर अवलम्ब लेने वाले व्यवि5 द्वारा प्रस् ु नहीं विकया जा सक ा है। इसलिलए क े वल न प्रस् ु करने पर, अणिभयु5 को अति विनयम क े लाभ से वंति नहीं कर सक ा है और न ही यह जानबूझकर प्रस् ु न करने क े समान हो सक ा है, जब क विक अदाल इस राय क े मामले क े अजीबोगरीब थ्यों और परिरण्डिस्थति यों में न हो, प्रति क ू ल अनुमान को जन्म दे रहा है विक जानबूझकर न प्रस् ु करना या न्यायालय को गुमराह करना या सच्चाई से विवमुख होने की मंशा है। यह इस श्रेणी क े मामलों में है विक न्यायालय को जीवन की वास् विवक ाओं में एक विनतिश्च मात्रा में अं दृ%विष्ट क े साथ अपनी शवि5यों और विववेक का प्रयोग करना पड़ सक ा है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
47. इस रह की वास् विवक ाओं में से एक यह है विक विनरक्षर ा और अपरा का घविनष्ठ संबं है, हालांविक एक दूसरे क े सी े आनुपाति क नहीं हो सक ा है। दुविनया में अन्यत्र, इस देश में विकशोर अपरा गरीबी और बेरोजगारी से उत्पन्न हो ा है, इससे कहीं अति क यह हो ा है अन्य कारण। आपराति क गति विवति यों में लिलप्त लोगों की एक बड़ी संख्या को शायद कभी स्क ू ल जाने का अवसर नहीं विमला होगा। राष्ट्रीय अपरा अणिभलेख ब्यूरो (एनसीआरबी), गृह मंत्रालय द्वारा विकए गए अध्ययन से प ा ल ा है विक खराब णिशक्षा और खराब आर्भिथक ण्डिस्थति सामान्य ः विकशोर अपराति यों की मुख्य विवशेर्ष ाएं हो ी हैं। 2011 क े अध्ययन क े परिरणाम आगे ब ा े हैं विक 2011 में विगरफ् ार विकए गए 33,887 विकशोरों में से 55.8% या ो विनरक्षर (6122) थे या क े वल प्राथविमक स् र (12,803) क णिशतिक्ष थे। इसक े अलावा, विगरफ् ार विकए गए क ु ल विकशोरों में से 56.7% सबसे कम आय वग% में आ े थे। ऐसा ही एक अध्ययन बी.एन. विमश्रा ने अपनी पुस् क जुवेनाइल ेलिलनक्वेंसी एं जण्डिस्टस जिसस्टम में विकया और प्रकाणिश विकया है, जिजसमें लेखक ने यह कहा है विक: "अपरा ी की प्रमुख विवशेर्ष ाओं में से एक खराब णिशक्षा प्राविप्त है। 63% से अति क अपरा ी विनरक्षर हैं। गरीबी उनकी विनरक्षर ा का मुख्य कारण है। खराब आर्भिथक ण्डिस्थति क े कारण उन्हें अपने पारिरवारिरक आय में परिरपूरक बनने क े लिलए श्रविमक बनने क े लिलए मजबूर होना पड़ा। यह भी महसूस विकया जा ा है विक खराब शैतिक्षक प्राविप्त बुतिद्ध की कमी क े कारण नहीं बण्डिल्क अवसर की कमी क े कारण हो सक ी है। यद्यविप अनुसूति जाति और अनुसूति जनजाति को मुफ् णिशक्षा प्रदान की जा ी है, विफर भी, अपराति यों क े पास अपने भविवष्य क े बारे में अपेक्षाओं और आकांक्षाओं का स् र बहु कम था, जो बदले में प्रोत्साहन की कमी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और उनक े मा ा-विप ा की अनणिभज्ञ ा क े कारण हो ा है विक वे काम ोरी कर े हैं।" (प्रभाव वर्ति ) सवाल यह है विक ऐसे मामलों में क्या दृविष्टकोण होना ाविहए। क्या ऐसे दुभा%ग्यपूण% और स्वच्छंद अपराति यों को एक लाभकारी कानून क े लाभ से वंति विकया जा सक ा है? क्या विकसी अणिभयु5 क े स्क ू ल न जाने क े दुभा%ग्य का पालन विकया जा सक ा है या उस लाभ से इनकार विकया जा सक ा है जो कानून इ ने सश[5] शब्दों में प्रदान कर ा है विक अंति म न्यायालय द्वारा अपील का विनपटारा करने और उसकी दोर्षजिसतिद्ध को बरकरार रखने क े बाद भी जां की अनुमति दी जा सक ी है? उत्तर नकारात्मक में होना है।
48. यविद कोई लकड़ी क े काम को ुन ा है, ो कोई एक प्रमाण पत्र से कम नहीं कह सक ा है, ाहे वह स्क ू ल से हो या नगरपालिलका प्राति करण से, अदाल क े विववेक को सं ुष्ट करेगा, जां का विनदjश देने से पहले। लेविकन विफर जां का विनदjश देना अणिभयु5 को विकशोर घोविर्ष करने क े समान नहीं है। आवश्यक सबू का मानक दोनों क े लिलए अलग है। पूव% में, न्यायालय क े वल एक प्रथम दृष्टया विनष्कर्ष% दज% कर ी है। बाद में, अदाल साक्ष्य क े आ ार पर घोर्षणा कर ी है विक वह क े वल जां कर ी है और स्वीकार कर ी है यविद यह इस रह की स्वीक ृ ति क े योग्य है। जां को विनदjणिश करने क े स् र पर दृविष्टकोण को और अति क उदार होने की आवश्यक ा है, ऐसा न हो विक न्याय की परिरहाय% हाविन हो। यह कहना पया%प्त है विक शपथपत्रों को आम ौर पर एक जां विनदjणिश करने क े लिलए अच्छे पया%प्त आ ार क े रूप में स्वीकार नहीं विकया जा सक ा है, यह विक वे इ ने स्वीक ृ नहीं हैं विक यह कानून का विनयम नहीं बण्डिल्क विववेक का विनयम उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" है। इसलिलए, न्यायालय प्रत्येक मामले में प्रासंविगक कारकों पर विव ार करेगा, यविद आवश्यक हो ो बेह र शपथपत्र दालिखल करने पर जोर देगा, और सी े मा ा- विप ा की उम्र, भाई-बहनों की उम्र और इस रह की जानकारी सविह प्रासंविगक मानी जाने वाली कोई भी अति रिर[5] जानकारी, मामलों-दर-मामलों क े आ ार पर विनण%य लेने से पहले प्रस् ु की जानी ाविहए विक ारा 7 ए क े ह जां होनी ाविहए या नहीं। यह अं ः इस बा पर विनभ%र करेगा विक अदाल प्रथम दृष्टया विनष्कर्ष% क े लिलए ऐसी सामग्री का मूल्यांकन क ै से कर ी है विक अदाल जां का विनदjश दे सक ी है या नहीं।" (प्रभाव वर्ति )
39. इस प्रकार, 2000 क े अति विनयम की ारा 7 ए (1) और उसक े परं ुक प्रदान कर े हैं विक विकशोर ा का दावा विकसी भी अदाल क े समक्ष उsाया जा सक ा है और इसे विकसी भी स् र पर मान्य ा दी जाएगी, यहां क विक मामले क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी, और ऐसा दावा 2000 अति विनयम में विनविह प्राव ानों और उसक े ह बनाए गए विनयमों क े संदभ% में विन ा%रिर विकया जाएगा, भले ही विकशोर 2000 अति विनयम क े प्रारंभ होने की ति णिथ पर या उससे पहले ऐसा नहीं हो गया हो।
40. ारा 7 ए की उप- ारा (2) में यह कहा गया है विक यविद न्यायालय विकसी व्यवि5 को उप- ारा (1) क े ह अपरा होने की ारीख पर विकशोर पा ा है, ो वह विकशोर को क उति आदेश पारिर करने क े लिलए विकशोर न्याय बो % को अग्रेविर्ष करेगा, और न्यायालय द्वारा पारिर सजा, यविद कोई हो, का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा।
41. 2000 अति विनयम की ारा 16 विनम्न प्राव ान कर ी है:- उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" "16. आदेश जो विकशोर क े विवरुद्ध पारिर नहीं विकया जा सक ा है। (1) त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य कानून में विनविह विकसी भी विवपरी बा क े हो े हुए भी, कानून का उल्लंघन करने वाले विकसी भी विकशोर को मौ की सजा नहीं दी जाएगी या विकसी भी अवति क े लिलए कारावास जो आजीवन कारावास क बढ़ाया जा सक ा है, या ति फ़ॉल्ट रूप से जेल क े लिलए प्रति बद्ध जुमा%ने क े भुग ान या जमान देने में ूक पर: बश j विक जहां एक विकशोर जिजसने सोलह वर्ष% की आयु प्राप्त कर ली है, उसने अपरा विकया है और बो % इस बा से सं ुष्ट है विक विकया गया अपरा प्रक ृ ति में इ ना गंभीर है या उसका आ रण और व्यवहार गल है। विक उसे ऐसे विवशेर्ष गृह में भेजना उसक े विह में या विकसी विवशेर्ष गृह में अन्य विकशोर क े विह में नहीं होगा और इस अति विनयम क े ह प्रदान विकए गए अन्य उपायों में से कोई भी उपयु5 या पया%प्त नहीं है,बो % कानून का उल्लंघन करने वाले विकशोर को सुरक्षा क े ऐसे स्थान पर और ऐसी रीति से रखने का आदेश दे सक ा है जो वह sीक समझे और राज्य सरकार क े आदेश क े लिलए मामले की रिरपोट% करेगा। (2) उप- ारा (1) क े ह एक बो % से एक रिरपोट% प्राप्त होने पर, राज्य सरकार विकशोर क े संबं में ऐसी व्यवस्था कर सक ी है जो वह उति समझे और ऐसे विकशोर को ऐसे स्थान पर सुरक्षात्मक विहरास में रखने का आदेश दे सक ी है और ऐसी श Œ पर जो वह sीक समझे: बश j विक इस रह से आदेणिश विहरास की अवति विकसी भी मामले में इस अति विनयम की ारा 15 क े ह प्रदान की गई अति क म अवति से अति क नहीं होगी।" उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
42. ारा 15 (1) (जी) क े ह विकशोर क े संबं में विहरास की अति क म अवति ीन वर्ष% है। उ[5] ारा में प्राव ान है विक जहां विकशोर न्याय बो % पूछ ाछ पर सं ुष्ट है विक विकशोर ने अपरा विकया है त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य कानून में विनविह विकसी प्रति क ू ल बा क े हो े हुए भी, विकशोर न्याय बो %, यविद उति समझे, ो विकशोर को ीन वर्ष% की अवति क े लिलए विवशेर्ष गृह में भेजे जाने का विनदjश दे सक ा है।
43. यहां ऊपर संदर्भिभ 2000 अति विनयम की ारा 7 ए क े मद्देनजर, इसमें रिरट आवेदक क े लिलए लागू, विकशोर ा की याति का विकसी भी अदाल में विकसी भी स् र पर उsाई जा सक ी है, यहां क विक संविव ान क े अनुच्छेद 136 क े ह विवशेर्ष अनुमति याति का क े अंति म विनस् ारण क े बाद भी। रिरट आवेदक क े मामले में, उसकी विवशेर्ष अनुमति याति का भी इस न्यायालय द्वारा खारिरज कर दी गई थी। हालाँविक, यह न्यायालय अभी भी रिरट आवेदक द्वारा ली गई विकशोर ा की दलील पर विव ार करने और उसे उति राह देने क े लिलए बाध्य है। थ्य यह है विक 2000 क े अति विनयम को बाद में 2015 क े अति विनयम से बदल विदया गया है, इससे कोई फक % नहीं पड़ेगा।
44. 2000 अति विनयम की ारा 7 ए और विनयम 12 क े ह आयु विन ा%रण में अदाल द्वारा की जाने वाली जां की प्रक ृ ति क े संबं में, अतिश्वनी क ु मार सक्सेना बनाम महाराष्ट्र राज्य, एआईआर 2013 एससी 553 में इस न्यायालय ने, विनम्नानुसार अव ारिर विकया: "25. ारा 7-ए, अदाल को क े वल एक जां करने क े लिलए बाध्य कर ी है, न विक विकसी जां या मुकदमे की, कोई जां दं प्रविdया संविह ा क े ह नहीं, बण्डिल्क जेजे अति विनयम क े ह हो ी है। आपराति क अदाल ें, विकशोर न्याय उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" बो %, सविमति यां, आविद हमने देखा है, आगे बढ़ें जैसे विक वे संविह ा क े अनुसार कोई विव ारण, जाँ, पूछ ाछ कर रहे हैं। क़ानून क े लिलए अदाल या बो % को क े वल "जां " करने की आवश्यक ा है और विकस रीक े से जां की जानी है, जेजे विनयमों में प्रदान विकया गया है। ारा 7-ए और विनयम 12 में प्रयु5 अणिभव्यवि5यों में से क ु छ का काफी महत्व है और उन प्राव ानों क े सही दायरे और सामग्री को समझने क े लिलए उनका संदभ% आवश्यक है। ारा 7-ए में भावों "अदाल जां करेगी", "ऐसे साक्ष्य लें जो आवश्यक हो सक े हैं" और "लेविकन एक शपथपत्र नहीं" का उपयोग विकया गया है। न्यायालय या बो % शपथपत्र से अति क क ु छ को साक्ष्य क े रूप में स्वीकार कर सक ा है अथा% न्यायालय या बो % दस् ावेजों, प्रमाणपत्रों आविद को साक्ष्य क े रूप में स्वीकार कर सक ा है, मौलिखक साक्ष्य होने की आवश्यक ा नहीं है।
26. विनयम 12 जिजसे ारा 7-ए क े साथ पढ़ा जाना है, उसमें क ु छ ऐसे भावों का भी प्रयोग विकया गया है जो ध्यान में रखने योग्य हैं। विनयम 12(2) "प्रथम दृष्टया" और "भौति क उपण्डिस्थति क े आ ार पर" या "दस् ावेज, यविद उपलब् हो" अणिभव्यवि5 का उपयोग कर ा है। विनयम 12 (3) "प्राप्त करक े साक्ष्य मांग कर" अणिभव्यवि5 का उपयोग कर ा है। हमारे विव ार में ये भाव इस थ्य पर विफर से जोर दे े हैं विक ारा 7-ए और विनयम 12 में जो विव ार विकया गया है वह क े वल एक जां है। इसक े अलावा, आयु विन ा%रण जां पूरी की जानी है और आवेदन करने की ति णिथ से ीस विदनों क े भी र आयु विन ा%रिर की जानी है; जो उस रीक े का भी संक े है जिजसमें जां की जानी है और पूरी की जानी है। "जां " शब्द को जेजे अति विनयम क े ह परिरभाविर्ष नहीं विकया गया है, लेविकन जेजे अति विनयम की ारा 2 (वाई) कह ी है विक सभी शब्दों और अणिभव्यवि5यों का उपयोग विकया गया है और जेजे अति विनयम में परिरभाविर्ष नहीं विकया गया है उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" लेविकन दं प्रविdया संविह ा, 1973 (2/1974) में परिरभाविर्ष विकया गया है, का अथ% dमशः उनक े लिलए विनर्षिदष्ट होंगे।
27. आइए अब हम "पूछ ाछ", "जां ", "विववे ना" और "विव ारण" शब्दों क े अथ% की जां करें जैसा विक हम दं प्रविdया संविह ा में देख े हैं और उनक े कई अथŒ को उन अणिभव्यवि5यों क े लिलए जिजम्मेदार sहराया गया है। सीआरपीसी की ारा 2 (जी) में परिरभाविर्ष "पूछ ाछ" इस प्रकार है:
2. (छ) 'पूछ ाछ' का अथ% है विकसी मजिजस्ट्रेट या अदाल द्वारा इस संविह ा क े ह विकए गए विव ारण क े अलावा हर जां; " शब्द "जाँ " को द प्रविdया संविह ा क े ह परिरभाविर्ष नहीं विकया गया है जो विक जानकारी मांगने का एक काय% है और क ु छ सबू ों पर विव ार करना, जैसे विक दस् ावेजी । सीआरपीसी की ारा 2 (ए ) में परिरभाविर्ष "विववे ना" इस प्रकार है:
2. (ए ) 'विववे ना' में इस संविह ा क े ह एक पुलिलस अति कारी या विकसी व्यवि5 (मजिजस्ट्रेट क े अलावा) द्वारा विकए गए साक्ष्य क े संग्रह क े लिलए सभी काय%वाविहयां शाविमल हैं जो इस संबं में एक मजिजस्ट्रेट द्वारा अति क ृ हैं; " अणिभव्यवि5 "विव ारण" को दं प्रविdया संविह ा में परिरभाविर्ष नहीं विकया गया है, लेविकन दं प्रविdया संविह ा की ारा 2 (जी) और 2 (ए ) में विनविह "पूछ ाछ" या "विववे ना" क े संदभ% में भावों क े आलोक में समझा जाना ाविहए।
28. अणिभव्यवि5 "विव ारण" को आम ौर पर विकए गए क ु छ अपरा ों से संबंति विनण%य देने क े उद्देश्य से एक मामले में थ्य और कानून क े मुद्दों की अदाल द्वारा परीक्षा क े रूप में समझा जा ा है। हम बहु से मामलों में पा े हैं विक अदाल /विकशोर न्याय बो % विकशोर ा क े दावे का विन ा%रण कर े समय यह भूल जा ा है विक उनसे जो अपेक्षा की जा ी है वह दं प्रविdया संविह ा की ारा 2 (जी) क े ह जां करना नहीं है, बण्डिल्क जेजे अति विनयम क े विनयम 12 क े उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ह विन ा%रिर प्रविdया का पालन कर े हुए जां करना है न विक संविह ा क े ह विन ा%रिर प्रविdया का पालन कर े हुए।
29. संविह ा भार ीय दं संविह ा क े ह या अन्य दं कानूनों क े ह हर अपरा क े लिलए हर विववे ना, पूछ ाछ या विव ारण में अपनाई जाने वाली प्रविdया को विन ा%रिर कर ी है। संविह ा न क े वल अपरा ों क े लिलए विववे ना, पूछ ाछ या विव ारण क े लिलए प्राव ान कर ी है बण्डिल्क कु छ विवणिशष्ट मामलों में भी पूछ ाछ कर ी है। संविह ा क े ह विवणिशष्ट मामलों की जां क े लिलए विन ा%रिर प्रविdया स्वाभाविवक रूप से अन्य मामलों की जां में लागू नहीं की जा सक ी है, जैसे विक 2007 की विनयमावली क े विनयम 12 क े सपविs ारा 7 ए क े ह विकशोर होने का दावा। दूसरे शब्दों में, ऐसी जां में पालन की जाने वाली प्रविdया क े संबं में कानून जां करने क े लिलए क्षेत्राति कार प्रदान करने वाले अति विनयमन में पाया जाना ाविहए।
30. फलस्वरूप, जां करने में जेजे अति विनयम क े ह पालन की जाने वाली प्रविdया उस क़ानून में विन ा%रिर प्रविdया है, यानी 2007 की विनयमावली का विनयम 12। हम अति विनयम की ारा 7 ए क े ह शवि5यों का प्रयोग करक े न्यायालय क े समक्ष उsाए गए विकशोर ा क े दावे पर विकसी व्यवि5 की विकशोर ा क े संबं में जां कर े समय दं प्रविdया संविह ा या विकसी अन्य अति विनयम में विन ा%रिर अन्य प्रविdयाओं को आया नहीं कर सक े हैं। हमारे सामने कई मामले आए हैं, यह देखा गया है विक आपराति क न्यायालयों में अभी भी संविह ा क े ह परीक्षण या जां की प्रविdया की प्रवृलित्त है जैसे विक वे दं कानूनों क े ह विकसी अपरा का विव ारण कर रहे हैं और इस थ्य को भूल गए हैं विक विवणिशष्ट प्रविdया विनयम 12 क े सपविs ारा 7 ए में विन ा%रिर की गयी है।
31. हम अति विनयम क े ह काय%र सभी न्यायालयों/जेजे बो % और सविमति यों को यह भी याद विदला े हैं विक विनयम 12 (3) (क) (i) ) से (i) i) i) ) में उजिल्ललिख उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रमाण पत्र आविद प्राप्त करक े साक्ष्य मांगना उन पर एक क %व्य है। ऐसी ण्डिस्थति यों में अदाल ें मा ा-विप ा क े रूप में काय% कर ी हैं क्योंविक उनक े पास नाबालिलगों पर एक रह का संरक्षण हो ा है जिजन्हें अपनी विवति क अक्षम ा से सुरक्षा की आवश्यक ा हो ी है।
32. अति विनयम की ारा 7 ए क े सपविs विनयमावली 2007 का विनयम 12 क े ह "आयु विन ा%रण जाँ " पर विव ार विकया गया है, जो अदाल को सबू मांगने में सक्षम बना ा है और इस प्रविdया में, अदाल मैविट्रक ु लेशन या समकक्ष प्रमाण पत्र, यविद उपलब् हो, प्राप्त कर सक ी है। क े वल मैविट्रक ु लेशन या समकक्ष प्रमाण पत्र की अनुपण्डिस्थति में, अदाल को विकसी प्ले स्क ू ल क े अलावा पहले स्क ू ल से जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यक ा हो ी है। अदाल को विनगम या नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय द्वारा विदया गया जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यक ा है (शपथ पत्र नहीं बण्डिल्क प्रमाण पत्र या दस् ावेज)। विवति व गविs मेति कल बो % से ति विकत्सा राय प्राप्त करने का प्रश्न क े वल भी उs ा है जब उपरो5 दस् ावेज अनुपलब् हों। यविद आयु का सटीक विन ा%रण नहीं विकया जा सक ा है, ो अदाल, दज% विकए जाने वाले कारणों क े साथ, यविद आवश्यक समझे, ो एक वर्ष% क े मार्जिजन क े भी र बच्चे या विकशोर की आयु को नी े की ओर मान े हुए लाभ दे सक ी है।.
33. एक बार अदाल द्वारा, ऊपर उजिल्ललिख प्रविdयाओं का पालन कर े हुए, आदेश पारिर कर विदए जाने पर; वह आदेश कानून का उल्लंघन करने वाले ऐसे बच्चे या विकशोर क े संबं में आयु का विनणा%यक प्रमाण होगा। यह उप खं (5) या विनयम 12 में स्पष्ट विकया गया है विक अदाल या बो % द्वारा विनयम 12 क े उप- विनयम (3) का उल्लेख करने क े बाद प्रमाण पत्र या कोई अन्य दस् ावेजी प्रमाण प्राप्त होने पर आगे कोई जां नहीं की जाएगी। इसक े अलावा, जेजे अति विनयम की ारा 49 भी विकशोर की आयु क े विन ा%रण पर अनुमान लगा ी है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
34. जेजे अति विनयम और विनयमों क े ह अनुमाविन आयु विन ा%रण जां का सेवा में प्रवेश, सेवाविनवृलित्त, पदोन्नति आविद जैसे अन्य कानूनों क े ह जां से कोई लेना-देना नहीं है। जिजस स्क ू ल में पहली बार पढ़ाई की हो उसका जन्म प्रमाण पत्र और यहां क विक विनगम या नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय द्वारा विदया गया जन्म प्रमाण पत्र भी सही नहीं हो सक ा है। और उन प्रमाणपत्रों क े पीछे जाने क े लिलए उन दस् ावेजों की शुद्ध ा की जां करने क े लिलए, जो सामान्य काय% व्यवहार क े दौरान रखे गए हैं। क े वल उन मामलों में जहां वे दस् ावेज या प्रमाण पत्र गढ़े या हेरफ े र विकए गए पाए जा े हैं, न्यायालय, जेजे बो % या सविमति को आयु विन ा%रण क े लिलए मेति कल रिरपोट% की जरूर हो ी है।"
45. अतिश्वनी क ु मार सक्सेना (उपरो5) में विन ा%रिर उवि5 से क्या स्पष्ट है विक, यह य करने में विक एक अणिभयु5 विकशोर है या नहीं, एक अति कनीकी दृविष्टकोण नहीं अपनाया जाना ाविहए। इस दलील क े समथ%न विक वह एक विकशोर है, अणिभयु5 की ओर से विदए गए साक्ष्य पर विव ार कर े समय, यविद एक ही साक्ष्य पर दो विव ार संभव हैं, ो न्यायालय को अणिभयु5 को सीमाव ž मामलों में विकशोर रखने क े पक्ष में झुकना ाविहए। अणिभकण्डिल्प जाँ पर विव ार विकया गया है वह एक घूमने वाली जाँ नहीं है। न्यायालय आयु क े प्रमाण क े रूप में साक्ष्य रूप में हलफनामा छोड़कर दस् ावेज अथा% प्रमाण पत्र आविद स्वीकार कर सक ा है। एक व्यवि5 द्वारा अणिभयु5 क े रूप में उसक े द्वारा दावा की गई आयु से एक या दो वर्ष% बड़ा विदखने क े बारे में राय (हे मास्टर की राय क े रूप में) व %मान मामले में) या यह थ्य विक आरोपी ने मामले में पुलिलस अति कारी द्वारा विगरफ् ार विकए जा े समय से अति क उम्र ब ाई है, का महत्व नहीं होगा। कानून का उल्लंघन करने वाले विकशोर की आयु का विन ा%रण करने में रिरकॉ % पर रखे गए दस् ावेजी सबू ही प्रमुख भूविमका विनभा े हैं। और, यह क े वल उन्हीं मामलों में है जहां विकशोर होने क े अपने दावे क े समथ%न में उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अणिभयु5 द्वारा रिरकॉ % पर रखे गए दस् ावेज या प्रमाण पत्र गढ़े या हेरफ े र विकए गए पाए जा े हैं, न्यायालय, विकशोर न्याय बो % या सविमति को आयु विन ा%रण क े लिलए ति विकत्सा परीक्षण कराने की आवश्यक ा हो ी है।
46. विनयमावली 2007 क े विनयम 12 (3) क े खं (क) में पदानुdविम आदेश शाविमल है, "जिजसक े अभाव में" प्रयु5 भार्षा क े उपयोग से स्पष्ट है। यह इंविग कर ा है विक जहां एक मैविट्रक या समकक्ष प्रमाण पत्र उपलब् है, (i) i) ) और (i) i) i) ) में संदर्भिभ दस् ावेजों पर अवलंब नहीं लिलया जा सक ा है। दूसरे शब्दों में, मैविट्रक ु लेशन सर्षिटविफक े ट को प्राथविमक ा दी जा ी है। मैविट्रक सर्षिटविफक े ट क े अभाव में ही जिजस स्क ू ल में पहली बार भाग लिलया था, उसक े जन्म प्रमाण पत्र पर भरोसा विकया जा सक ा है। मैविट्रक और पहले स्क ू ल क े जन्म प्रमाण पत्र दोनों क े अभाव में ही विनगम, नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त विकया जा सक ा है।
47. शाह नवाज़ बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2011) 13 SCC 751 में, इस न्यायालय ने विनयमावली 2007 क े विनयम 12 क े दायरे की जां कर े हुए दोहराया विक मेति कल बो % से ति विकत्सा राय भी मांगी जानी ाविहए जब मैविट्रक प्रमाण पत्र या समकक्ष प्रमाण पत्र या पहली बार दालिखल हुए स्क ू ल से जन्म प्रमाण पत्र या विनगम या नगरपालिलका प्राति करण या पं ाय या नगरपालिलका द्वारा जारी कोई जन्म प्रमाण पत्र उपलब् नहीं है। इस न्यायालय ने माना था विक माक % शीट में दज% जन्म ति णिथ साथ ही अपीलक ा% की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए स्क ू ल छोड़ने का प्रमाण पत्र भी है संबंति प्रविवविष्ट आरोपी व्यवि5 की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए एक वै साक्ष्य है।
48. व %मान मामले में, आरोपी ने अपनी उम्र साविब करने क े लिलए कोई मैविट्रक या समकक्ष प्रमाण पत्र पेश नहीं विकया है। उसक े द्वारा जो प्रस् ु विकया गया है वह क े वल यूपी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पं ाय राज अति विनयम, 1947 क े ह जारी परिरवार रजिजस्टर है। अणिभयु5 की उम्र साविब करने क े लिलए मैविट्रक प्रमाण पत्र क े समकक्ष क े रूप में दस् ावेज़ को स्वीकार नहीं विकया जा सक ा है। हालांविक, परिरवार रजिजस्टर क े साक्ष्य मूल्य को जां क े दौरान देखा जाना ाविहए जिजसका आदेश हम दे सक े हैं। विवलंविब अवस्था में विकशोरत्व क े क % का विन ा%रण
49. आदश% रूप से, विकसी व्यवि5 की आयु क े संबं में कोई विववाद नहीं होना ाविहए यविद जन्म कानून क े अनुसार पंजीक ृ है और जन्म की ारीख वास् विवक जन्म क े रिरकॉ % क े आ ार पर स्क ू ल क े रिरकॉ % में दज% की गई है। हालाँविक, भार में, गरीबी, विनरक्षर ा, अज्ञान ा, उदासीन ा और व्यवस्था की अपया%प्त ा जैसे कारक अक्सर विकसी व्यवि5 की उम्र का कोई दस् ावेजी प्रमाण नहीं होने का कारण बन े हैं। इसलिलए, उन मामलों में जहां विकशोर होने की दलील देर से दी जा ी है, अति विनयम 2015 की ारा 94 में उजिल्ललिख दस् ावेजों की अनुपण्डिस्थति में अक्सर क ु छ ति विकत्सा परीक्षणों का सहारा लिलया जा ा है। विकशोर ा की दलील को काफी देर से उsाए जाने की अनुमति देने वाले विनयम का समकालीन बाल अति कार न्यायशास्त्र में अपना क % है जिजसक े लिलए विह ारकों का बच्चे क े सव त्तम विह में काय% करना आवश्यक ा हो ी है।
50. कोट% ऑन इट्स ओन मोशन बनाम मविहला एवं बाल विवकास विवभाग, 2012 एससीसी ऑनलाइन ेल 2774 क े मामले में, जिजसमें याति काक ा%ओं ने इस बा पर प्रकाश ाला विक विक ने सौ बच्चे ति हाड़ जेल में सड़ रहे थे क्योंविक पुलिलस ने विगरफ् ारी मेमो में उनका वयस्कों क े रूप में उल्लेख विकया था।
51. उत्तर प्रदेश राज्य में भी यही कहानी है, जिजसक े कारण इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उपरो5 रिरट याति का जनविह याति का क े पैरा 6 में में आदेश पारिर विकया। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
52. विकशोर न्याय प्रणाली क े पदाति कारिरयों क े बी बच्चे क े अति कारों और संबंति क %व्यों क े बारे में जागरूक ा कम रह ी है। एक बार जब कोई बच्चा वयस्क आपराति क न्याय प्रणाली क े जाल में फ ं स जा ा है, ो बच्चे क े लिलए इससे सुरतिक्ष विनकलना मुण्डिश्कल हो ा है। कड़वा स यह है विक कानूनी सहाय ा काय%dम भी प्रणालीग अड़ नों में फ ं स गए हैं और अक्सर काय%वाही क े काफी विबलंविब रण में ही व्यवि5 अति कारों क े बारे में जागरूक हो पा ा है, जिजसमें विकशोर ा क े आ ार पर अलग व्यवहार करने का अति कार भी शाविमल है।
53. जिजसे ध्यान में रखने की आवश्यक ा है वह है विकशोर न्याय अति विनयम का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य। इस कानून का ध्यान विकशोर क े सु ार और पुनवा%स पर है ाविक उसे भी अन्य बच्चों की रह रहने का अवसर विमल सक े । प्र ाप सिंसह (उपरो5) इस न्यायालय ने विकशोर न्याय अति विनयम क े लक्ष्य को व्याख्यातिय कर े हुए विनम्नलिललिख ारिर विकया: "...उ[5] अति विनयम न क े वल एक लाभकारी कानून है, बण्डिल्क एक उप ारात्मक कानून भी है। इस अति विनयम का उद्देश्य वयस्क अपराति यों की ुलना में एक विकशोर अपरा ी की देखभाल, संरक्षण और पुनवा%स करना है। विकशोर न्याय क े प्रशासन क े लिलए संयु5 राष्ट्र मानक न्यून म विनयमावली क े विनयमों क े 4 को ध्यान में रख े हुए, यह भी ध्यान में रखा जाना ाविहए विक आपराति क जिजम्मेदारी क े नैति क और मनोवैज्ञाविनक घटक भी एक विकशोर को परिरभाविर्ष करने वाले कारकों में से एक थे। इसलिलए,पहला उद्देश्य विकशोर की भलाई को बढ़ावा देना है और दूसरा उद्देश्य आनुपाति क ा क े जिसद्धां को लाना है जिजससे और जिजसक े ह पीविड़ सविह अपरा ी और अपरा दोनों की परिरण्डिस्थति यों की प्रति विdया की आनुपाति क ा क े अनुसार सुरतिक्ष रहे......" उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" बोन ओजिसविफक े शन टेस्ट क्या है?
54. प्रजिसद्ध अमेरिरकी दाश%विनक माक % ट्वेन ने एक बार कहा था, "उम्र पदाथ% पर विव ार का एक मुद्दा है। यविद आप बुरा नहीं मान े हैं, ो इससे कोई फक % नहीं पड़ ा।" लेविकन जब उम्र की बा आ ी है ो आपराति क न्यायशास्त्र में उपरो5 मामला नहीं है। यहां उम्र मायने रख ी है क्योंविक कानून इसक े प्रति स े है।
55. बोन ऑजिसविफक े शन टेस्ट (ए ण्डिश्मनपश्चा "ऑजिसविफक े शन टेस्ट") एक ऐसा टेस्ट है जो क ु छ हति¸यों क े एक्स-रे लेकर "ह¸ी क े संलयन की मात्रा" क े आ ार पर उम्र विन ा%रिर कर ा है। सरल शब्दों में, ऑजिसविफक े शन टेस्ट या ऑस्टोजेनेजिसस विकसी व्यवि5 में जन्म और पच्चीस वर्ष% की आयु क े बी जोड़ों क े संलयन क े आ ार पर हति¸यों क े विनमा%ण की प्रविdया है। अण्डिस्थ आयु एक व्यवि5 क े क ं काल और जैविवक परिरपक्व ा का एक संक े क है जो उम्र क े विन ा%रण में सहाय ा कर ा है। ह¸ी की आयु की गणना क े लिलए उपयोग की जाने वाली सबसे आम विवति 18 वर्ष% की आयु क हाथ और कलाई की रेति योग्राफी है, जिजसक े बाद 22 वर्ष% की आयु क हंसली की औस आयु का उपयोग हाथ और कलाई की ह¸ी क े रूप में विकया जा ा है। रेति योग्राफ की गणना 18 वर्ष% की आयु क े बाद नहीं की जा सक ी क्योंविक विकशोरावस्था क े बाद ह¸ी का विवस् ार पूरा हो जा ा है। हालांविक, यह ध्यान विदया जाना ाविहए विक ऑजिसविफक े शन टेस्ट व्यवि5ग विवशेर्ष ाओं क े आ ार पर थोड़ा णिभन्न हो ा है, इसलिलए ऑजिसविफक े शन टेस्ट हालांविक प्रासंविगक है लेविकन इसे एकमात्र विनणा%यक नहीं कहा जा सक ा है।
56. विनयमावली, 2007 क े विनयम 12 (3) क े सपविs ारा 94 (2) (i) i) i) ) क े ह 2015 का अति विनयम ऑजिसविफक े शन टेस्ट या अन्य ति विकत्सा आयु विन ा%रण परीक्षण क े सं ालन क े लिलए विव ायी मंजूरी प्रदान कर ा है जो अन्य दस् ावेजी प्रमाण पत्र अथा% मैविट्रक ु लेशन प्रमाण पत्र या जन्म प्रमाण पत्र क े अभाव में जो इस रह क े आदेश की उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारीख से 15 विदनों क े भी र विदया जाना है, कराया जाना ाविहए। परीक्षण बाल कल्याण सविमति (सी ब्ल्यूसी) द्वारा कराया जाना ाविहए। यहां उजिल्ललिख प्राव ान 2000 अति विनयम क े ह विकसी बच्चा जिजसमें कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे क े अलावा वह बच्चा भी शाविमल है जो अपरा का णिशकार है, की आयु विन ा%रण का आ ार है। ।
57. विवष्णु बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2006) 1 SCC 283 क े मामले में, इस न्यायालय ने स्पष्ट विकया विक ति विकत्सा अति कारी द्वारा ऑजिसविफक े शन टेस्ट न्यायालय की सहाय ा क े लिलए है जो ति विकत्सा विवशेर्षज्ञ की राय क े दायरे में आ ा है, यानी प्रक ृ ति में सलाहकारी है और बाध्यकारी नहीं है। हालाँविक, इस रह की राय मौलिखक या दस् ावेजी साक्ष्य को पर अणिभभावी नहीं हो सक ी, जो सत्य और स्वीकाय% साविब हुई है क्योंविक वे " थ्यों का बयान" कर े हैं। विवष्णु (उपरो5) में इस न्यायालय ने मदन गोपाल कक्कड़ बनाम नवल दुबे, (1992) 3 एससीसी 204, क े मामले का अवलंब ले े हुए यह ारिर विकया विक ति विकत्सा गवाह थ्य का गवाह नहीं है, इसलिलए ऐसे ति विकत्सा विवशेर्षज्ञ द्वारा दी गई राय न्यायालय द्वारा स्वीकार विकए जाने क क े वल सलाह है, हालांविक, एक बार स्वीकार विकए जाने क े बाद, वे न्यायालय की राय बन जा े हैं। त्रुविट मार्जिजन का जिसद्धां
58. बोन ऑजिसविफक े शन टेस्ट एक सटीक विवज्ञान नहीं है जो हमें व्यवि5 की सटीक आयु प्रदान कर सक े । जैसा विक ऊपर ा% की गई है, व्यवि5ग विवशेर्ष ाएं जैसे हति¸यों और क ं काल संर नाओं की वृतिद्ध दर इस विवति की सटीक ा को प्रभाविव कर सक ी हैं। इस न्यायालय ने राम सुरेश सिंसह बनाम प्रभा सिंसह, (2009) 6 SCC 681: (2010) 2 SCC (विd.) 1194, और ज्योति प्रकाश राय बनाम विबहार राज्य, (2008) 15 SCC 223 (2009) 3 एससीसी (विd.) 796, में कहा विक ऑजिसविफक े शन टेस्ट आयु विन ा%रण क े लिलए विनणा%यक नहीं है क्योंविक यह व्यवि5 की सही उम्र का खुलासा नहीं कर ा है, उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" लेविकन रेति योलॉजिजकल परीक्षा आयु सीमा क े दोनों ओर दो साल का अं र छोड़ ी है, जैसा विक परीक्षण द्वारा विन ा%रिर विकया जा ा है ाहे कई जोड़ों का ऑजिसविफक े शन परीक्षण विकया जा ा है या नहीं। भार में अदाल ों ने इस थ्य को स्वीकार विकया है विक ीस वर्ष% की आयु क े बाद आयु विन ा%रण क े लिलए ऑजिसविफक े शन टेस्ट पर भरोसा नहीं विकया जा सक ा है। यह सामान्य है विक प्रमाण का मानक आयु क े विन ा%रण क े लिलए संभाव्य ा की मात्रा है और युवि5यु5 संदेह से परे प्रमाण नहीं है।
59. पूव 5 संदभ% में, हम मुकर%ब बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क े मामले में इस न्यायालय क े एक फ ै सले का भी उल्लेख कर सक े हैं, जिजसकी रिरपोट% (2017) 2 एससीसी 210 में दी गई है, जिजसमें इस न्यायालय ने पैरा 27 में विनम्नानुसार ारिर विकया: "...... बबलू पासी बनाम झारखं राज्य, (2008) 13 एससीसी 133 और म.प्र. राज्य बनाम अनूप सिंसह, (2015) 7 एससीसी 773 क े बाद, हम मान े हैं विक ओजिसविफक े शन टेस्ट को विनणा%यक नहीं माना जा सक ा है जब एक व्यवि5 की उम्र का प ा लगाने की बा आ ी है। इसक े अलावा, यहां अपीलक ा%ओं ने विनतिश्च रूप से ीस वर्ष% की आयु पार कर ली है जो विक एक महत्वपूण% कारक है जिजसे ध्यान में रखा जाना ाविहए क्योंविक उम्र का विन ा%रण सटीक रूप से नहीं विकया जा सक ा है।
60. अरविन दास बनाम विबहार राज्य, (2000) 5 SCC 488 क े मामले में, यह देखा गया विक अणिभयु5 की उम्र क े विन ा%रण क े लिलए साक्ष्य पर विव ार कर े हुए न्यायालय को अति - कनीकी दृविष्टकोण नहीं अपनाना ाविहए। यविद दो विव ार संभव हैं, ो सीमा रेखा क े मामलों में अणिभयु5ों को विकशोर रखने क े पक्ष में न्यायालय को झुकना ाविहए। राजेंद्र ंद्र बनाम छत्तीसगढ़ राज्य, (2002) 2 एससीसी 287 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इस दृविष्टकोण को दोहराया गया, जिजसमें यह विन ा%रिर विकया गया था विक मानक आयु विन ा%रण क े प्रमाण की संभाव्य ा की मात्रा है और उति संदेह से परे प्रमाण नहीं है।
61. ऋविर्षपाल सिंसह सोलंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2021) एससीसी ऑनलाइन एससी 1079 क े मामले में, इस न्यायालय ने स्पष्ट रूप से देखा विक 2015 अति विनयम की ारा 94 मैविट्रक और अन्य प्रमाणपत्रों को प्राथविमक ा नहीं दे ी है, क्योंविक व्यवि5 की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए कहा गया खं क े वल प्रविdया क े मामले से संबंति है। इस न्यायालय ने माना विक कानून असंभव की मांग नहीं कर ा है और जब ऑजिसविफक े शन टेस्ट भरोसेमंद और विवश्वसनीय परिरणाम नहीं दे सक ा है, ो ऐसे परीक्षण को व्यवि5 की उम्र विन ा%रिर करने क े लिलए आ ार नहीं बनाया जा सक ा है और अन्य उपलब् प्रमाणपत्रों पर विव ार विकया जा सक ा है।
62. इसी रह, राम विवजय सिंसह बनाम उ.प्र. राज्य, (2021) एससीसी ऑनलाइन एससी 142 क े मामले में, इस न्यायालय ने अपीलक ा% दोर्षी की ओर से विदए गए क % को नकार े हुए कहा विक विनयमावली 2007 क े विनयम 12 (3)(बी) में विनविह प्रविdया अब 2015 अति विनयम की ारा 94 का विहस्सा हैं और एक बार क़ानून ने विकशोर ा का विन ा%रण करने क े आ ार क े रूप में ओजिसविफक े शन टेस्ट प्रदान विकया है, ऐसे ऑजिसविफक े शन टेस्ट क े विनष्कर्षŒ को अनदेखा नहीं विकया जा सक ा है, पैरा 15 और 16 में विनम्नव ारिर है: "15. हम पा े हैं विक विनयम 12 में विन ा%रिर प्रविdया व्यवि5 की आयु विन ा%रिर करने क े लिलए अति विनयम की ारा 94 क े प्राव ानों से भौति क रूप से णिभन्न नहीं है। विनयम 12 (3) (क) (i) ) और (i) i) ) भार्षा में मामूली बदलाव क े साथ एक उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" साथ जोड़ विदया गया है। अति विनयम की ारा 94 में बच्चे या विकशोर को विदए जाने वाले आयु क े मार्जिजन क े लाभ क े प्राव ान शाविमल नहीं हैं जैसा विक विनयम 12 (3) (ख) में उपबं विकया गया था। अति विनयम की ारा 94 क े अति विनयमन क े साथ ओजिसविफक े शन टेस्ट क े महत्व में बदलाव नहीं आया है। ओजिसविफक े शन टेस्ट की विवश्वसनीय ा विनयमावली क े विनयम 12 क े ह कमजोर बनी हुई है।
16. अति विनयम की योजना क े अनुसार, जब व्यवि5 की हुलिलया क े आ ार पर सविमति या बो % को यह स्पष्ट हो जा ा है विक उ[5] व्यवि5 एक बच्चा है, ो बो % या सविमति उम्र की और पुविष्ट की प्र ीक्षा विकए विबना जिज ना संभव हो सक े बच्चे की उम्र ब ा े हुए विटप्पणिणयों को रिरकॉ % करेगी।। इसलिलए, उम्र विन ा%रिर करने का पहला प्रयास बो % या सविमति क े सामने लाए जाने पर व्यवि5 की शारीरिरक हुलिलया का आकलन करना है। क े वल संदेह की ण्डिस्थति में ही साक्ष्य मांग कर आयु विन ा%रण की प्रविdया आवश्यक हो जा ी है। उस अवस्था में, जब कानून का उल्लंघन करने वाले व्यवि5 की आयु लगभग 18 वर्ष% हो, ो व्यवि5 की अनुमाविन आयु विन ा%रिर करने क े लिलए ओजिसविफक े शन टेस्ट को प्रासंविगक कहा जा सक ा है। हालांविक, जब व्यवि5 की आयु 40-55 वर्ष% क े आसपास हो ी है, ो हति¸यों की संर ना आयु का विन ा%रण करने में सहायक नहीं हो सक ी है। अजु%न पंति राव खो कर बनाम क ै लाश क ु शनराव गोरंट्याल और अन्य में इस न्यायालय ने साक्ष्य अति विनयम, 1872 की ारा 65 बी क े ह आवश्यक प्रमाण पत्र क े संदभ% में ारिर विकया विक लैविटन मैण्डिक्सम क े अनुसार, लेक्स नॉन कॉजिजट ए इम्पॉजिसविबलिलया, कानून असंभव की मांग नहीं कर ा है। इस प्रकार, जब ओण्डिस्सविफक े शन टेस्ट भरोसेमंद और विवश्वसनीय परिरणाम नहीं दे सक ा है, इस रह क े परीक्षण को घटना की ारीख पर संबंति व्यवि5 की उम्र विन ा%रिर करने क े लिलए आ ार नहीं बनाया जा सक ा है। इसलिलए, अपीलक ा% की उम्र का प ा लगाने क े लिलए विवश्वसनीय भरोसेमंद ति विकत्सा साक्ष्य क े अभाव में, वर्ष% 2020 में कराया गया ओण्डिस्सविफक े शन टेस्ट, जब अपीलक ा% 55 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वर्ष% का था, उसे घटना की ारीख पर विकशोर घोविर्ष करने क े लिलए विनणा%यक नहीं हो सक ा। "
63. हम इस थ्य से अवग हैं विक इस मामले में दोर्षी को मेति कल बो % को भेजे जाने क े बाद ति विकत्सा परीक्षण कराया गया था। हालांविक, रिरकॉ % पर उपलब् रिरपोट% बहु अति क विवश्वासोत्पादक नहीं है। राम विवजय सिंसह (उपरो5) का मामला यह बहु स्पष्ट कर ा है विक अपीलक ा% की आयु का प ा लगाने क े लिलए एक विवश्वसनीय और भरोसेमंद ति विकत्सा साक्ष्य क े अभाव में, वर्ष% 2021 में कराया गया ऑजिसविफक े शन परीक्षण, जब अपीलक ा% 50 वर्ष% से अति क का था, घटना की ारीख पर उसे विकशोर घोविर्ष करने क े लिलए उम्र का विन ा%रक नहीं हो सक ा। इस न्यायालय ने पाया विक जब कोई व्यवि5 18 वर्ष% क े आसपास का हो ा है, ो कानून का उल्लंघन करने वाले व्यवि5 की अनुमाविन आयु विन ा%रिर करने क े लिलए ओजिसविफक े शन टेस्ट को प्रासंविगक कहा जा सक ा है। हालांविक, जब व्यवि5 की आयु 40-55 वर्ष% क े आसपास हो ी है, हति¸यों की संर ना उम्र का विन ा%रण करने में सहायक नहीं हो सक ी है। ऐसी परिरण्डिस्थति यों में, यह बहस का विवर्षय होगा विक रिरकॉ % पर आने वाली नई ऑजिसविफक े शन टेस्ट रिरपोट% पर विकस हद क भरोसा विकया जा सक ा है और यह अपीलक ा% को विकस हद क मददगार होगी।
64. रिरट आवेदक क े लिखलाफ सभी बा ाओं क े बावजूद, हम अभी भी न्याय क े व्यापक विह में मामले को देखना ाहेंगे। यह उति होगा विक रिरट अपीलाथž का जिसविवल अस्प ाल, इलाहाबाद में या कोई अन्य नवीन म ति विकत्सा आयु विन ा%रण परीक्षण कराया जाए और ऐसा परीक्षण ीन ॉक्टरों की एक टीम द्वारा विकया जाएगा, जिजनमें से एक रेति योलॉजी विवभाग का प्रमुख होना ाविहए। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
65. पूव 5 क े मद्देनजर, हम विनम्नलिललिख विनदjश जारी कर े हैं: (i) ) हम सत्र न्यायालय, आगरा को इस आदेश की संसू ना की ारीख से एक महीने क े भी र कानून क े ह रिरट आवेदक क े विकशोर होने क े दावे की जां करने का विनदjश दे े हैं;
(i) i) ) संबंति सत्र न्यायालय परिरवार रजिजस्टर की प्रामाणिणक ा और वास् विवक ा की भी जां करेगा, जिजस पर रिरट आवेदक अपरा ी द्वारा अवलंब लिलया गया है, यह देख े हुए विक दस् ावेज़ समकालीन प्र ी नहीं हो ा है। यह दस् ावेज़ विवशेर्ष रूप से इस थ्य क े आलोक में महत्व रख ा है विक ऑजिसविफक े शन टेस्ट रिरपोट% घटना की ारीख पर रिरट आवेदक की सही उम्र का विन ा%रण करने में पूण% ः सहायक नहीं हो सक ी है। यविद परिरवार रजिजस्टर सही पाया जा ा है ो हमें ऑजिसविफक े शन टेस्ट रिरपोट% पर नहीं जाना होगा। ऐसी परिरण्डिस्थति यों में, संबंति पीsासीन अति कारी इस दस् ावेज़ की ओर पया%प्त ध्यान देंगे और इसकी प्रामाणिणक ा और वास् विवक ा का प ा लगाने का प्रयास करेंगे। जरूर पड़ने पर संबंति व्यवि5यों अथा% संबंति सरकारी विवभाग से भी बयान दज% विकए जा सक े हैं;
(i) i) i) ) सत्र न्यायालय यह सुविनतिश्च करेगा विक ऑजिसविफक े शन टेस्ट या आयु विन ा%रण क े विकसी अन्य आ ुविनक मान्य ा प्राप्त रीक े से रिरट आवेदक दोर्षी की ति विकत्सकीय जां करायी जाए;
(i) v) संबंति सत्र न्यायालय इस आदेश क े सं ार की ारीख से एक महीने क े भी र इस न्यायालय को पूव 5 क े संबं में अपनी रिरपोट% प्रस् ु करेगा; (v) रजिजस्ट्री को इस आदेश की एक प्रति सत्र न्यायालय, आगरा को अग्रेविर्ष करने का विनदjश विदया जा ा है; उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (vi) ) हम राज्य की ओर से उपण्डिस्थ विवद्वान अति व5ा से अनुरो कर े हैं विक वे सत्र न्यायालय को जां पूरी करने में सहाय ा प्रदान करने क े लिलए उति कदम उsाएं।
66. सत्र न्यायालय, आगरा से प्राप्त होने वाली रिरपोट% क े साथ ार सप्ताह की अवति क े बाद इस मामले को सू ीबद्ध करें। अंति म आदेश सत्र न्यायालय, आगरा से प्राप्त होने पर रिरपोट% क े अवलोकन क े बाद पारिर विकया जाएगा।.................................… (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी).................................… (न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला) नई विदल्ली; जिस म्बर 12, 2022 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद विनण%य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु विनब`ति प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण%य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा था विनष्पादन और विdयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"