Rajasthan State v. Phool Singh

Supreme Court of India · 02 Dec 2022
S. Ravindra Bhatt; Suanshu Sulilya
Civil Appeal No 5930 of 2022 @ SLP (Crl) No 11195 of 2021
2022 INSC 902
service_law appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that acquittal in criminal proceedings does not automatically entitle reinstatement in service where disciplinary proceedings have established misconduct on the basis of preponderance of probabilities.

Full Text
Translation output
प्रति वैद्य
भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल याति का संख्या 5930/2022
(एसएलपी (सी) संख्या 11195/2021 से उत्पन्न)
राजस्थान राज्य और अन्य .......अपीलक ा2
बनाम

ू लसिंसह .......प्रत्यथ9
विनर्ण2य
सु ांशु ूलिलया, न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमति दी गई।

2. राजस्थान राज्य ने राजस्थान उच्च न्यायालय, बें जयपुर की खण्ड पीठ द्वारा विदनांक 09.09.2020 को पारिर आदेश क े लिखलाफ इस न्यायालय में यह अपील की है। खण्ड पीठ ने आक्षेविप आदेश द्वारा विवद्वान एकल न्याया ीश क े आदेश को यथाव रखा है सिजसमें व 2मान प्रत्यथ[9] की रिरट याति का को स्वीकार कर े हुए उसकी सेवा से बखा2स् गी क े आदेश को रद्द कर विदया था। 2022 INSC 902

2. प्रत्यथ[9] फ ू ल सिंसह वर्ष[2] 1987 में राजस्थान पुलिलस सेवा में एक कांस्टेबल क े रूप में भ 9 हुआ था। उसी वर्ष[2], जब वह ौलपुर (राजस्थान) सिजले क े माविनया पुलिलस स्टेशन में ैना था, उसने कथिथ रूप से घोर अनुशासनहीन ा क े अलावा एक दंडनीय अपरा भी विकया। विदनांक 15.10.1987 की शाम को वह लोकमान नामक व्यविX क े साथ शहर में घूम रहा था। प्रति वादी उस समय ड्यूटी पर नहीं था, लेविकन उसने पुलिलस की वद[9] पहन रखी थी, जब उसने कथिथ रूप से महेश क ु मार नामक व्यविX को पकड़ा और उससे 100/- रुपये की मांग की। महेश क ु मार क े मना करने पर, फ ू ल सिंसह ने उसे अपनी मोटरसाइविकल क े कागजा विदखाने क े लिलए कहा और जब वह ये कागजा नहीं विदखा पाया, ो फ ू ल सिंसह ने उस मोटरसाइविकल को लेकर भागने की कोथिशश की। इस बी, महेश क ु मार द्वारा शोर म ाने क े कारर्ण महेश क ु मार क े समथ2न में भीड़ भी इकट्ठा हो गई। उस समय, फ ू ल सिंसह पर कथिथ रूप से भीड़ की ओर एक बंदूक (प पेरा) लहराने का आरोप है, लेविकन विफर भी भीड़ द्वारा उसका ब क पीछा विकया गया, जब क वह अपने घर क े अंदर जाने में सफल नहीं हो गया, जो पास में ही था। अपने घर क े अंदर घुस े ही उसने अपनी बंदूक से गोलिलयां लाई सिजससे घर में रहने वाले लोग, यानी उसक े परिरवार क े सदस्य घायल हो गए और संपलिa को नुकसान पहुं ा। इसक े परिरर्णामस्वरूप प्रत्यथ[9] क े लिखलाफ माविनया पुलिलस थाने में भार ीय दंड संविह ा की ारा 392, 307 और पुलिलस अति विनयम की ारा 34 सपविठ शस्त्र अति विनयम की ारा 3/25 क े ह प्राथविमकी संख्या 146/1987 दज[2] की गई। मामले में जां क े बाद फ ू ल सिंसह और लोकमान क े लिखलाफ आरोप पत्र दालिखल विकया गया था। अं ः विव ारर्ण न्यायालय द्वारा भार ीय दंड संविह ा की ारा 392 और शस्त्र अति विनयम की ारा 3/25 क े ह आरोप विवरति विकए गए। इसक े बाद विव ारर्ण न्यायालय ने फ ू ल सिंसह को भार ीय दंड संविह ा की ारा 392 और शस्त्र अति विनयम की खंड 3/25 क े ह दोर्षी ठहरा े हुए उसे 31 मा 2, 1994 क े आदेश क े ह तिडफॉल्ट श h क े साथ उपरोX दोनों अपरा ों में से प्रत्येक क े लिलए एक साल क े कठोर कारावास और जुमा2ने की सजा सुनाई। सह- आरोपी लोकमान को बरी कर विदया गया। इस आदेश को फ ू ल सिंसह द्वारा अपील में ुनौ ी दी गई थी और विवद्वान सत्र न्याया ीश, ौलपुर, ने अपील को स्वीक ृ ति प्रदान की और अथिभयुX को "संदेह का लाभ"दे े हुए विव ारर्ण न्यायालय क े आदेश को रद्द कर विदया। 3.इस बी, अप ारी कांस्टेबल क े लिखलाफ ीन आरोपों पर एक विवभागीय काय2वाही भी शुरू की गई थी, जो इस प्रकार हैः - "आरोप संख्या-1:विदनांक 15.10.87 को आप श्री फ ू ल सिंसह कांस्टेबल नं. 386 पुलिलस स्टेशन माविनया में ैना थे। लगभग 3 बजे अपराह्न आपने ऑफ ड्यूटी हो े हुए भी पुलिलस की वद[9] पहनी हुई थी, आपने शराब पी रखी थी और अत्यति क नशे में आप कस्बा माविनया में घूम े रहे और थिशवराम कच्छी से उसकी लाइसेंसशुदा प फ े रा (राइफल) छीन ली। आरोप संख्या 2:- विदनांक 15.10.87 को आप नशे की हाल में लोकमान गुज2र क े साथ बेविड़या कस्बा मोहल्ले में गए थे और ऑफ ड्यूटी हो े हुए भी विबना विकसी प्राति कार क े महेश क ु मार पुत्र थिशव हरे ब्राह्मर्ण, विनवासी पटपारा, ौलपुर से उसकी राजदू मोटरसाइविकल से संबंति दस् ावेजों की मांग की और अभद्र रीक े से गाली-गलौ की और 100 रुपये की रिरश्व मांगी और महेश क ु मार से मोटरसाइविकल नंबर आरजेडी 7722 जबरन छीन ली और सिजसक े कारर्ण बहु से लोग इकट्ठा हो गए और आपका पीछा विकया। आरोप संख्या-3: जन ा द्वारा पीछा विकए जाने पर आप पुलिलस स्टेशन माविनया क े परिरसर में बने अपने क्वाट2र में भाग गए और नशे की हाल में आत्मरक्षा में अपने घर क े अंदर से उस प फ े रा से गोली लाई, सिजसे आपने थिशव राम से छीन लिलया था, लेविकन गोली क्वाट2र क े ौक में बालकनी में लगी और परिरर्णामस्वरूप बालकनी क े टूटे-फ ू टे टुकड़े आपक े सदस्यों पर विगर गए और आपक े सदस्य घायल हो गए और उX घटना क े बाद आपक े लिखलाफ पुलिलस अति विनयम की ारा 392, 307/34 और शस्त्र अति विनयम की ारा 3/25 क े ह प्राथविमकी संख्या 146 विदनांक 15.10.87 दज[2] की गई। विवभागीय जां में अथिभयोजन पक्ष क े 14 गवाहों से पूछ ाछ की गई।इनमें से क ु छ गवाहों ने अथिभयोजन पक्ष का समथ2न विकया, क ु छ ने नहीं विकया। इसक े अति रिरX, प्रदशh की भी जां की गई थी जैसे विक प्रथम सू ना रिरपोट[2], मोटरसाइविकल की जब् ी का ज्ञापन और सबसे महत्वपूर्ण[2] प्रत्यथ[9] का सांस अल्कोहल विवश्लेर्षर्ण परीक्षर्ण, सिजसका परिरर्णाम सकारात्मक था अथा2 प्रत्यथ[9] ने शराब पी रखी थी। अप ारी कांस्टेबल ने भी ब ाव पक्ष क े नौ गवाहों से पूछ ाछ की थी। अं ः अनुशासनात्मक काय2वाही में प्रत्यथ[9] क े लिखलाफ सभी ीनों आरोप साविब हो गए और उसे आदेश विदनांक 18.12.1989 क े ह सेवा से बखा2स् कर विदया गया। अनुशासविनक प्राति कारी का यह आदेश प्रत्यथ[9] द्वारा अपील में ले जाया गया था, सिजसे भी अपीलीय प्राति कारी द्वारा विदनांक 23.08.1990 को खारिरज कर विदया गया था। विफर एक समीक्षा याति का भी दायर की गई, सिजसे विदनांक 03.06.1994 को खारिरज कर विदया गया। सिजस समय समीक्षा प्राति करर्ण ने प्रत्यथ[9] की समीक्षा याति का को खारिरज कर विदया था (अथा2, 03.06.1994 को), उस समय प्रत्यथ[9], जो दांतिडक विव ारर्ण का सामना कर रहा था, को भार ीय दंड संविह ा की ारा 392 क े ह और शस्त्र अति विनयम की खंड 3/25 क े ह विदनांक 31.03.1994 को, जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, विव ारर्ण न्यायालय द्वारा दोर्षी ठहराया गया। बाद में, जैसा विक हम जान े हैं, उसकी दोर्षसिसति| क े आदेश को सेशन न्यायालय द्वारा रद्द कर विदया गया था।

4. प्रत्यथ[9] फ ू ल सिंसह ने अपनी दोर्षमुविX क े बाद अपनी सेवा में बहाली क े लिलए अति कारिरयों क े समक्ष एक आवेदन विदया। ूंविक अति कारिरयों ने अनुक ू ल प्रति वि}या नहीं दी, इसलिलए उसने वर्ष[2] 1998 में राजस्थान उच्च न्यायालय क े विवद्वान एकल न्याया ीश क े समक्ष एक रिरट याति का दायर की। उसकी सेवा से बखा2स् गी को ुनौ ी हालांविक आपराति क मामले में उसकी दोर्षमुविX क े बाद ही दी गई थी, विफर भी ुनौ ी विवथिभन्न आ ारों पर भी थी, जैसे विक विनयुविX प्राति कारी द्वारा बखा2स् गी का आदेश पारिर नहीं विकया जाना, जां रिरपोट[2] की आपूर्ति नहीं करना, गवाह से सिजरह करने की अनुमति नहीं देना आविद। इन सभी आ ारों को विवद्व एकल न्याया ीश का समथ2न नहीं विमला, सिसवाय प्रत्यथ[9] द्वारा उठाए गए इस आ ार क े विक अब ूंविक उसने एक ही प्रकार क े आरोपों पर दांतिडक विव ारर्ण का सामना विकया है, जहां उसे अं ः सत्र न्यायालय द्वारा दोर्षमुX कर विदया गया था, इसलिलए उसकी बखा2स् गी क े आदेश रद्द विकए जाने योग्य है और उसे सेवा में बहाल विकया जाना ाविहए। विवद्वान एकल न्याया ीश ने उसकी रिरट याति का को स्वीकार कर लिलया और उसकी बखा2स् गी क े आदेश को रद्द कर विदया गया और 50% विपछले वे न क े साथ उसकी बहाली क े आदेश विदए गए। राजस्थान राज्य ने उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष इस आदेश क े लिखलाफ एक अपील दायर की, सिजसे विदनांक 09.09.2020 को खारिरज कर विदया गया।राजस्थान राज्य अब राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पारिर बहाली क े आदेश क े लिखलाफ इस न्यायालय क े समक्ष है। 5.हमें यह दोहराना ाविहए विक राजस्थान उच्च न्यायालय ने, रिरट याति का और विवशेर्ष अपील दोनों में, प्रत्यथ[9] फ ू ल सिंसह क े मामले को क े वल इस आ ार पर मंजूर विकया था विक अब ूंविक उसे एक दांतिडक न्यायालय द्वारा उन्हीं थ्यों और आरोपों पर दोर्षमुX कर विदया गया है, सिजस पर उसने विवभागीय काय2वाही का सामना विकया था इसलिलए विवभागीय काय2वाही में पारिर आदेश रद्द विकए जाने योग्य हैं और उसे सेवा में बहाल विकया जाना ाविहए। जैसा विक हमने पहले ही उल्लेख विकया है, प्रत्यथ[9] की ओर से उठाए गए कh जैसे विवभागीय काय2वाविहयों में प्रवि}यात्मक विवसंगति यों, विनष्पक्ष व्यवहार न विकया जाना और नैसर्गिगक न्याय क े सिस|ां ों का उल्लंघन या प्राति करर्ण क े अति कार क्षेत्र की कमी को ुनौ ी देने वाले कh में से विकसी को भी विवद्व एकल न्याया ीश या खण्ड पीठ का समथ2न नहीं विमला था। 6.राज्य, जो इस न्यायालय क े समक्ष अपीलक ा2 है, की दलील यह है विक प्रत्यथ[9] एक अनुशासिस बल का सदस्य था। विवभागीय काय2वाही में प्रत्यथ[9] क े लिखलाफ बेहद गंभीर आरोप थे। उस पर जन ा को मकाने और जबरन पैसे वसूलने, शराब क े नशे में साव2जविनक स्थान पर घूमने और विफर एक फायर आम[2] का उपयोग करने और लोगों को घायल करने का आरोप लगाया गया था, जो सभी बहु गंभीर आरोप थे। प्रत्यथ[9] को विवभागीय काय2वाही में अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर विदया गया था। उसे अथिभयोजन पक्ष क े गवाहों से सिजरह करने का अवसर विदया गया और उसने ब ाव पक्ष क े नौ गवाहों को भी पेश विकया, सिजनसे विवभागीय काय2वाही क े दौरान पूछ ाछ की गई। अनुशासनात्मक प्राति करर्ण ने विनष्कर्ष[2] विनकाला विक अप ारी कांस्टेबल (प्रत्यथ[9]) ने घोर अनुशासनहीन ा और लापरवाही क े साथ-साथ क 2व्यों की उपेक्षा और दुव्य2वहार और कदा ार का काय[2] विकया था, और इस प्रकार उसने राजस्थान पुलिलस की छविव को साव2जविनक रूप से ूविमल विकया था। इन परिरस्थिस्थति यों में, अप ारी अति कारी को पुलिलस सेवा में नहीं रखा जा सक ा और इसलिलए उसे त्काल प्रभाव से सेवा से बखा2स् कर विदया गया। राज्य यह भी क 2 देगा विक जहां क विवभागीय काय2वाविहयों का संबं है, दांतिडक न्यायालय द्वारा उसे दोर्षमुX विकए जाने का कोई महत्व नहीं है।

7. इसलिलए इस न्यायालय क े समक्ष प्रश्न क े वल यह है विक क्या प्रत्यथ[9] को इस कारर्ण से सेवा में बहाल विकया जा सक ा है विक अब उन्हीं आरोपों पर उसे एक दांतिडक न्यायालय द्वारा बरी कर विदया गया है? 8.इस विवर्षय पर कानून में कोई अस्पष्ट ा नहीं होनी ाविहए विक विवभागीय काय2वाही आपराति क काय2वाही से थिभन्न हो ी है। इन दोनों क े बी मौलिलक अं र यह है विक जहां विवभागीय काय2वाही में एक अप ारी कम[2] ारी को 'संभावनाओं की प्र ूर ा'क े आ ार पर अप ारी ठहराया जा सक ा है, वहीं दांतिडक न्यायालय में अथिभयोजन पक्ष को अपने मामले को 'संदेह से परे'साविब करना हो ा है। संक्षेप में, दोनों काय2वाविहयों क े बी अं र साक्ष्य की प्रक ृ ति और उसक े परीक्षर्ण क े स् र में विनविह है। इसलिलए दोनों न्यायालय अलग-अलग स् रों पर काम कर े हैं। इस कारर्ण से, इस न्यायालय ने बार-बार यह अथिभविन ा2रिर विकया है विक क े वल इसलिलए विक विकसी व्यविX को दांतिडक विव ारर्ण में बरी कर विदया गया है, उसे स्वयमेव सेवा में बहाल नहीं विकया जा सक ा है। 9.जैसा विक यह हो सक ा है विक सेवा से बखा2स् गी क े बाद एक अप ारी कम[2] ारी जब समान आरोपों और थ्यों पर एक दांतिडक न्यायालय द्वारा बरी कर विदया जा ा है, ो वह बहाली ाह ा है। क ै प्टन एम. पॉल एंथनी बनाम भार गोल्ड माइन्स लिलविमटेड और अन्य क े प्रकरर्ण में इस न्यायालय द्वारा विदए गए विनर्ण2य पर भरोसा विकया गया है, व 2मान प्रत्यथ[9] द्वारा भी विवद्व एकल न्याया ीश और राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े समक्ष इस पर भरोसा विकया गया है। दोनों न्यायालयों ने प्रत्यथ[9] क े पक्ष में अपना विनर्ण2य दे े समय इस विनर्ण2य पर भरोसा विकया है। क ै प्टन एम पॉल एंथनी क े प्रकरर्ण में, इस न्यायालय ने वास् व में अथिभविन ा2रिर विकया था विक ूंविक याति काक ा2 को एक दांतिडक न्यायालय द्वारा समान आरोपों पर बरी कर विदया गया था, इसलिलए उसे सेवा में बहाल विकया जाना ाविहए, ाहे उसे विवभागीय काय2वाही का सामना करने क े बाद सेवा से बखा2स् कर विदया गया हो। लेविकन क ै प्टन एम. पॉल एंथनी क े मामले का इसक े विवथिशष्ट थ्यों की पृष्ठभूविम में मूल्यांकन विकया जाना ाविहए। 10.क ै प्टन एम. पॉल एंथनी वर्ष[2] 1985 में 'भार गोल्ड माइन्स लिलविमटेड'में एक 'सुरक्षा अति कारी'क े रूप में काम कर रहे थे, जो कना2टक में कोलार गोल्ड माइन्स में सोने क े खनन में संलग्न था। पुलिलस अ ीक्षक द्वारा विदनांक 02.06.1985 को क ै प्टन एम. पॉल एंथनी (सिजसे हमें यहां 'याति काक ा2'क े रूप में भी संदर्भिभ करना ाविहए) क े आवास पर छापेमारी की गई, जहां से 4.[5] ग्राम वजन वाली एक स्पंज की सोने की गेंद और 1276 ग्राम 'सोने वाली रे 'बरामद की गई। उन्हें त्काल सेवा से विनलंविब कर विदया गया और उसी विदन एफ. आई. आर. दज[2] की गई।अगले विदन याति काक ा2 को एक आरोप पत्र विमला और इसलिलए उसक े लिखलाफ विवभागीय कार2वाई भी शुरू कर दी गई। इसक े बाद याति काक ा2 ने अपने अनुशासनात्मक अति कारिरयों क े समक्ष एक आवेदन विदया, सिजसमें अनुरो विकया गया विक आपराति क काय2वाही क े विनष्कर्ष[2] आने क विवभागीय काय2वाही पर रोक लगाई जाए, लेविकन उनका अनुरो अस्वीकार कर विदया गया। इस बी वे अपने गृह राज्य क े रल लौट आए और अनुशासनात्मक काय2वाही को स्थविग करने का अनुरो विकया। इस मांग को भी खारिरज कर विदया गया। याति काक ा2 क े लिखलाफ विवभागीय कार2वाई एक रफा हो गई, जहां उसे कदा ार का दोर्षी पाया गया। 07.06.1986 को याति काक ा2 को सेवा से बखा2स् कर विदया गया। उनक े विनलंबन की पूरी अवति क े दौरान, उन्हें कोई गुजारा भaा नहीं विदया गया। विदनांक 3 फरवरी, 1987 को क ै प्टन एम. पॉल एंथनी को दांतिडक विव ारर्ण में इस आ ार पर दोर्षमुX कर विदया गया विक अथिभयोजन अपना पक्ष, विवशेर्ष रूप से वह पुलिलस छापा सिजस पर पूरा मामला आ ारिर था, साविब करने में विवफल रहा था। याति काक ा2 ने, अपने दोर्षमुविX क े ुरं बाद, दांतिडक न्यायालय क े फ ै सले की एक प्रति अपने विवभागीय अति कारिरयों क े समक्ष प्रस् ु की और अपनी बहाली क े लिलए विनवेदन विकया। यह विनवेदन अस्वीकार कर विदया गया और परिरर्णामस्वरूप याति काक ा2 ने एक विवभागीय अपील दायर की, सिजसे भी खारिरज कर विदया गया। इसक े बाद उसने कना2टक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां उसकी रिरट याति का को न्यायालय द्वारा स्वीक ृ ति प्रदान की गई और उसकी बहाली का आदेश इस आ ार पर विदया गया विक याति काक ा2 को एक दांतिडक न्यायालय द्वारा उन्हीं आरोपों पर बरी कर विदया गया है और इसलिलए उसे विफर से सेवा में बहाल विकया जाना ाविहए। राज्य ने खण्ड पीठ क े समक्ष एक विवशेर्ष अपील दायर की, सिजसे स्वीक ृ ति प्रदान की गई और विवद्वान एकल न्याया ीश क े आदेश को रद्द कर विदया गया। याति काक ा2 (क ै प्टन एम. पॉल एंथनी) ने ब इस न्यायालय क े समक्ष कना2टक उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ क े आदेश को ुनौ ी दी। उस प्रकरर्ण का विनर्ण2य कर े समय उच्च म न्यायालय क े समक्ष दो पहलू थे। पहला स्वीक ृ पहलू यह था विक या ी को उसक े विनलंबन की अवति क े दौरान कोई गुजारा भaा नहीं विदया गया था और इसलिलए, जब वह क े रल में रह रहा ब वह कना2टक में विवभागीय काय2वाही का सामना करने की स्थिस्थति में नहीं था। दूसरा पहलू यह था विक याति काक ा2 पर दो काय2वाविहयों में एक ही रह क े आरोप थे और इसलिलए, उसने विवभागीय अति कारिरयों से आपराति क मामले क े विनष्कर्ष[2] आने क विवभागीय काय2वाही पर रोक लगाने का अनुरो विकया था, सिजसे अस्वीकार कर विदया गया था। यह पहलू सबसे महत्वपूर्ण[2] कारक है, क्योंविक इस न्यायालय की राय थी विक आरोपों में, (दांतिडक न्यायालय और विवभाग दोनों में), पुलिलस द्वारा विकए गए 'छापे'से संबंति थ्य और कानून का एक जविटल सवाल शाविमल था, और इसलिलए विवभागीय काय2वाही को रोक विदया जाना ाविहए था और इसे दांतिडक काय2वाही क े परिरर्णाम का इं जार करना ाविहए था। पुलिलस द्वारा की गई छापेमारी में उसक े घर से कथिथ ौर पर 'गोल्ड स्पंज बॉल'और 'गोल्ड विबयरिंरग सैंड'बरामद विकए गए थे।छापेमारी और बरमदगी का यह थ्य, जो इस मामले का आ ार था, गल साविब हुआ। इन परिरस्थिस्थति यों में, यह अथिभविन ा2रिर विकया गया विक याति काक ा2 को बहाल विकया जा सक ा है। इस प्रकार क ै प्टन एम. पॉल एंथनी प्रकरर्ण का अपने अनूठे थ्यों क े कारर्ण मूल्यांकन विकया जाना ाविहए और हमारे विव ार में यह प्रकरर्ण साव2भौविमक अनुप्रयोग क े कानून को विन ा2रिर नहीं कर ा है।

11. हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक क ै प्टन एम. पॉल एंथनी प्रकरर्ण क े विवरु| हमारे पास बड़ी संख्या में ऐसे प्रकरर्ण हैं सिजनमें इस न्यायालय ने लगा ार यह अथिभविन ा2रिर विकया है विक दोनों काय2वाविहयां अथा2 ् दांतिडक और विवभागीय पूरी रह से थिभन्न हैं और विकसी ऐसे व्यविX को सेवा में पुनः बहाल नहीं विकया जाएगा सिजसे दांतिडक विव ारर्ण में दोर्षमुX करार विदया गया है लेविकन विवभागीय काय2वाही में उसे दोर्षी पाया गया है। हम इनमें से क ु छ विनर्ण2यों का उल्लेख कर सक े हैं। भार संघ बनाम सी ाराम विमश्रा [2007 एस. सी. सी. ऑनलाइन कलः 718: (2008) 1 कल एल जे 863) क े प्रकरर्ण में क ें द्रीय रिरजव[2] पुलिलस बल (सीआरपीएफ) क े एक कांस्टेबल पर उपेक्षाकारी होने और लापरवाही बर ने का आरोप लगाया गया और इसलिलए उसे सेवा से बखा2स् कर विदया गया। इस मामले क े थ्य यह थे विक कांस्टेबल ने अपनी 9 एम.एम. काबा2इन बंदूक की मेगज़ीन को हटा े समय दुघ2टनावश आठ राउंड गोलिलयां लाई ं, सिजसक े परिरर्णामस्वरूप एक कांस्टेबल की मौ हो गई, जो उस समय उसी बैरक में था। कांस्टेबल को अनुशासनात्मक काय2वाही में कदा ार का दोर्षी पाया गया और उसे सेवा से बखा2स् कर विदया गया। इस बी, एक आपराति क मुकदमे में भी भार ीय दंड संविह ा की ारा 304 क े ह अपरा क े लिलए उX कांस्टेबल पर मुकदमा लाया गया, जहां उसे दोर्षमुX करार विदया गया।इसक े बाद उसने अपनी सेवा से बखा2स् गी को ुनौ ी दे े हुए उच्च न्यायालय में एक रिरट याति का दायर की। रिरट याति का खारिरज कर दी गई, लेविकन बाद में एक खण्ड पीठ क े समक्ष एक अपील पर, विवद्व एकल न्याया ीश क े आदेश को रद्द कर विदया गया और यह आदेश विदया गया विक ूंविक उस समय क कांस्टेबल को दांतिडक न्यायालय में बरी कर विदया गया था, इसलिलए उसे सेवा में बहाल विकया जाना ाविहए और ूंविक उस समय क वह सेवा से सेवाविनवृa हो ुका था, इसलिलए उसे इस विनद”श क े साथ सेवा में माना जाएगा विक उसे वापस वे न और पेंशन विदया जाए। इस न्यायालय ने भार संघ द्वारा फाइल की गई अपील का विवविनश्चय कर े हुए यह विनष्कर्ष[2] विनकाला विक सिजन आ ारों पर उच्च न्यायालय ने यह विनर्ण2य विदया, वे विवविनर्गिदष्ट थे और क े वल इसलिलए विक कम[2] ारी को दांतिडक न्यायालय द्वारा दोर्षमुX कर विदया गया था, इसका यह अथ[2] नहीं है विक वह सेवा में बहाल होने का हकदार है, क्योंविक उसे अनुशासविनक काय2वाही का सामना करने क े बाद सेवा से बखा2स् कर विदया गया था। इसका कारर्ण यह है विक अनुशासविनक काय2वाविहयां सबू क े एक अलग मानक द्वारा शासिस हो ी हैं, जो विकसी दांतिडक काय2वाही में लागू की जाने वाली प्रवि}या से अलग हो ी हैं। जबविक दांतिडक विव ारर्ण में आरोप को संदेह से परे साविब करने का भार अथिभयोजन पक्ष पर हो ा है और विवभागीय काय2वाही में, आरोपों को संभावनाओं की प्र ुर ा क े आ ार पर साविब करना हो ा है। उपयु2X प्रकरर्ण में इस न्यायालय द्वारा 'दांतिडक अपरा 'और 'कदा ार'क े बी अं र भी स्पष्ट विकया गया है। इनमें से एक को दांतिडक न्यायालय में और दूसरे को विवभागीय काय2वाही में साविब करना हो ा है, और भले ही दोनों एक ही रह क े थ्यों से उत्पन्न हो े हैं, विफर भी दोनों क े बी स्पष्ट अं र है और क्योंविक विकसी व्यविX को आपराति क मुकदमे में बरी कर विदया गया है, इसका अथ[2] यह नहीं है विक यह विवभागीय काय2वाही में विदये गए कदा ार क े विनष्कर्षh को पलट देगा। इस न्यायालय ने यह भी अवलोकन विकया विक उच्च न्यायालय ने क ै प्टन एम. पॉल एंथोनी प्रकरर्ण में विदए गए इस न्यायालय क े विनर्ण2य से 'गल विनष्कर्ष2'विनकालकर ठीक यही त्रुविट की। इसलिलए, हमें सी ाराम विमश्रा (ऊपर) में इस न्यायालय क े विनर्ण2य क े दो पैराग्राफ यहां पुनः प्रस् ु करने होंगे: - "14. थ्य यह है विक दांतिडक विव ारर्ण क े दौरान पहले प्रत्यथ[9] को दोर्षमुX करार विदया गया था, वह अनुशासनात्मक काय2वाही क े दौरान विदये गए कदा ार क े विनष्कर्ष[2] को गल साविब करने क े लिलए एक आ ार क े रूप में स्व ः काय[2] नहीं कर सक ा है। हमारे विव ार में उच्च न्यायालय ने एम. पॉल एंथोनी बनाम भार गोल्ड माइन्स लिलविमटेड [एम. पॉल एंथोनी बनाम भार गोल्ड माइन्स लिलविमटेड, (1999) 3 एससीसी 679:1999 एससीसी (एल एंड एस) 810] वाले प्रकरर्ण में इस न्यायालय क े विनर्ण2य से एक गल विनष्कर्ष[2] विनकाला है। उच्च न्यायालय ने उपयु2X विनर्ण2य में अति कथिथ विवति क े विनम्नलिललिख सिस|ां का उल्लेख विकयाः (एससीसी पृष्ठ 687, पैरा 13) "13... विवभागीय काय2वाही में सबू का मानक संभावनाओं की प्र ूर ा में से एक हो ा है, लेविकन दांतिडक मामले में, आरोप को अथिभयोजन द्वारा संदेह से परे साविब करना पड़ ा है। मामूली अपवाद वहाँ हो सक ा है जहां विवभागीय काय2वाही और दांतिडक प्रकरर्ण एक ही रह क े थ्यों पर आ ारिर हो और विबना विकसी विवसंगति क े दोनों काय2वाविहयों में साक्ष्य भी समान हो।"

15. विनःसंदेह यह सही है विक दांतिडक विव ारर्ण में आरोप एक सहकम[9] की मृत्यु से उत्पन्न हुआ, जो उस हथिथयार से गोली लने क े परिरर्णामस्वरूप हुई थी सिजसे बल क े सदस्य क े रूप में पहले प्रत्यथ[9] को सौंपा गया था। लेविकन कदा ार का आरोप पहले प्रत्यथ[9] द्वारा अपने हथिथयार को लाने में लापरवाही और विकस रीक े से हथिथयार को संभाला जाना ाविहए, उसक े संबं में विवभागीय विनद”शों का पालन करने में उसकी विवफल ा क े आ ार पर है। इसलिलए, आपराति क मामले में दोर्षमुविX क े आ ार पर अनुशासनात्मक जां क े दौरान लगाए गए जुमा2ने को रद्द नहीं विकया जा सक ा। अ ः, अनुशासनात्मक प्रकरर्णों में न्यातियक पुनर्गिवलोकन क े प्रयोग को शासिस करने वाले मापदंडों को ध्यान में रख े हुए, हमारा यह म है विक उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ का विनर्ण2य सं ारर्णीय नहीं है।" इस न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ ने अजी क ु मार नाग बनाम महाप्रबं क (पीजे), इंतिडयन ऑयल कॉप रेशन लिलविमटेड, में कानून की स्थिस्थति की व्याख्या इस प्रकार की है:- "11. हमारे म में, कानून सुस्थाविप है। एक दांतिडक न्यायालय द्वारा दोर्षमुX करार विदये जाने से विनयोXा को विनयमों और विवविनयमों क े अनुसार शविX का प्रयोग करने से वंति नहीं विकया जाएगा। दांतिडक और विवभागीय दोनों काय2वाही पूरी रह से अलग हैं। वे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर ीं हैं और उनक े अलग-अलग उद्देश्य हैं। जहां दांतिडक विव ारर्ण का उद्देश्य अप ारी को समुति दंड देना है, वहीं जां काय2वाही का उद्देश्य दोर्षी से विवभागीय ौर पर विनपटना और सेवा विनयमों क े अनुसार दंड लगाना है। दांतिडक विव ारर्ण में क ु छ परिरस्थिस्थति यों में या क ु छ अति कारिरयों क े समक्ष आरोपी द्वारा विदया गया आपलिaजनक बयान साक्ष्य क े रूप में पूरी रह से अस्वीकाय[2] है। साक्ष्य और प्रवि}या क े ऐसे सख् विनयम विवभागीय काय2वाविहयों पर लागू नहीं होंगे। दोर्षसिसति| का आदेश देने क े लिलए आवश्यक सबू का स् र, अपरा को अथिभलिललिख करने क े लिलए आवश्यक सबू क े स् र से थिभन्न है। दोनों काय2वाविहयों में साक्ष्य क े मूल्यांकन से संबंति विनयम भी समान नहीं है। दांतिडक कानून में, अपने पक्ष को साविब करने का बोझ अथिभयोजन पर हो ा है और जब क अथिभयोजन पक्ष अथिभयुX क े अपरा को 'संदेह से परे'साविब नहीं कर पा ा है, ब क उसे न्यायालय द्वारा दोर्षी नहीं ठहराया जा सक ा है। दूसरी ओर, विवभागीय जां में 'संभावनाओं की बहुल ा'क े आ ार पर दज[2] विनष्कर्ष[2] क े आ ार पर अप ारी अति कारी पर जुमा2ना लगाया जा सक ा है।" 12.इस प्रकार, व 2मान प्रकरर्ण में, विवद्वान एकल न्याया ीश क े साथ-साथ राजस्थान उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ राजस्थान पुलिलस क े अनुशासनात्मक प्राति करर्ण क े आदेश में हस् क्षेप करने और क े प्रकरर्ण पर भरोसा करने में स्पष्ट रूप से गल थे।अनुशासनात्मक प्राति करर्ण ही इस विनष्कर्ष[2] पर पहुं ने क े लिलए सक्षम है विक कोई कदा ार विकया गया है या नहीं। न्याया ीश क े लिलए चिं ा का विवर्षय यह होना ाविहए विक क्या नैसर्गिगक न्याय और विनष्पक्ष ा क े सिस|ां ों का पालन कर े हुए यह विनर्ण2य विदया गया है। इस पहलू को इस न्यायालय क े हाल क े विनर्ण2य (राजस्थान राज्य बनाम हीम सिंसह) में रेखांविक विकया गया है। संबंति पैरा इस प्रकार हैः - "39. अनुशासनात्मक मामलों में न्यातियक समीक्षा करने में स्पेक्ट्रम क े दो छोर हो े हैं। पहला छोर संयम क े विनयम का प्र ीक है। दूसरा छोर यह परिरभाविर्ष कर ा है विक हस् क्षेप कब स्वीकाय[2] है।संयम का विनयम न्यातियक समीक्षा क े दायरे को सीविम कर ा है। यह एक वै कारर्ण क े लिलए है। कदा ार विकया गया है या नहीं, इसका विन ा2रर्ण मुख्य रूप से अनुशासविनक प्राति कारी क े अति कार क्षेत्र में आ ा है। न्याया ीश अनुशासविनक प्राति कारी क े रूप में काय[2] नहीं कर ा है। न ही न्याया ीश एक विनयोXा क े रूप में काय[2] कर ा है। अनुशासनात्मक प्राति कारी द्वारा विदये गए थ्यों क े विनष्कर्ष[2] को आदर विदया जाना इस विव ार को मान्य ा देना है विक यह विनयोXा है जो उनकी सेवा क े क ु शल सं ालन क े लिलए सिजम्मेदार है। अनुशासनात्मक जां में नैसर्गिगक न्याय क े विनयमों का पालन विकया जाना ाविहए। किंक ु वे साक्ष्य क े उन कड़े विनयमों द्वारा शासिस नहीं हो े हैं जो न्यातियक काय2वाविहयों पर लागू हो े हैं। अ ः सबू का मानक कठोर मानक नहीं है जो सबू क े आपराति क विव ारर्ण को संदेह से परे शासिस कर ा है, बस्थिल्क एक सिसविवल मानक है जो संभाव्य ाओं की प्रबल ा द्वारा शासिस हो ा है। प्र ान ा क े विनयम क े भी र, संदभ[2] और विवर्षय क े आ ार पर अलग-अलग दृविष्टकोर्ण हैं। स्पेक्ट्रम का पहला छोर सम्मान और स्वायa ा पर आ ारिर है-एक थ्यान्वेर्षर्ण प्राति कारी क े रूप में अनुशासनात्मक प्राति कारी की स्थिस्थति का सम्मान और सेवा में अनुशासन और दक्ष ा को बनाए रखने में विनयोXा की स्वायa ा का सम्मान। स्पेक्ट्रम क े दूसरे छोर पर यह सिस|ां है विक जब जां क े विनष्कर्ष[2] विकसी साक्ष्य पर आ ारिर न हों या जब वे विवक ृ ति से ग्रस् हों ो न्यायालय इसमें हस् क्षेप कर सक ा है। महत्वपूर्ण[2] साक्ष्य पर विव ार करने में विवफल ा एक ऐसी स्थिस्थति है सिजसे कानून द्वारा थ्य का विवक ृ विन ा2रर्ण माना जाएगा। आनुपाति क ा हमारे न्यायशास्त्र की एक महत्वपूर्ण[2] विवशेर्ष ा है। सेवा न्यायशास्त्र ने लंबे समय से इस बा को मान्य ा प्रदान की है विक न्यायालय क े प्राति कार को इसमें ब हस् क्षेप करने की अनुमति है जब विनष्कर्ष[2] या जुमा2ना,साक्ष्य या कदा ार की ुलना में असंग हो।न्यातियक थिशल्प इन दोनों टों क े बी एक स्थिस्थर पाल बनाए रखने में विनविह है सिजसे स्पेक्ट्रम क े दो छोर कहा जा ा है। न्याया ीश न्यातियक समीक्षा कर े समय क े वल मंत्रोच्चार की भांति मौलिखक समीक्षाएं नहीं कर े हैं। एक प्रारंथिभक या शुरुआ ी स् र की जां यह विन ा2रिर करने क े लिलए की जा ी है विक क्या अनुशासनात्मक जां क े विनष्कर्ष[2] विकसी साक्ष्य पर आ ारिर है। यह न्यायालय की अं रात्मा को सं ुष्ट करने क े लिलए है विक कदा ार क े आरोप का समथ2न करने और विवक ृ ति से ब ने क े लिलए कोईसाक्ष्य हैं। लेविकन यह न्यायालय को अनुशासनात्मक जां में साक्ष्य संबं ी विनष्कर्षh का पुनमू2ल्यांकन करने या ऐसे दृविष्टकोर्ण को प्रति स्थाविप करने की अनुमति नहीं दे ा है जो न्याया ीश को अति क उपयुX प्र ी हो ा है। ऐसा करने से प्रथम सिस|ां को ठेस पहुं ेगी सिजसकी रूपरेखा ऊपर दी गई है। सामान्य बुति| का प्रयोग ही अंति म माग2दश2क सिस| हो ा है। सिजसक े विबना न्याया ीशों द्वारा विनर्ण2य देने का थिशल्प व्यथ[2] है।" यह स है विक क े प्रकरर्ण क े अलावा इस न्यायालय ने क ु छ प्रकरर्णों में ऐसे कम[2] ारी की बहाली में हस् क्षेप नहीं विकया सिजसे अनुशासनात्मक काय2वाही क े परिरर्णामस्वरूप बखा2स् कर विदया गया था और क े वल आपराति क काय2वाही में उसे दोर्ष मुX करार देने क े कारर्ण उसे सेवा में बहाल कर विदया गया था, लेविकन ऐसे मामलों में न्यायालय क े लिलए वजहें यह थीं विक लगभग ऐसे सभी मामलों में, दोर्षमुविX ससम्मान दोर्षमुविX थी, सांक े ति क दोर्षमुविX या संदेह क े लाभ क े कारर्ण दी गई दोर्षमुविX नहीं थी। 13.हस् ग प्रकरर्ण में, प्रत्यथ[9] को विव ारर्ण न्यायालय द्वारा दोर्षी ठहराया गया था और अपील में अपीलीय न्यायालय ने उसे 'संदेह का लाभ'दे े हुए दोर्षमुX करार विदया था। अपीलीय प्राति कारी क े विदनांक 26.11.1994 क े आदेश का प्रभावी भाग इस प्रकार हैः - "इसलिलए, उपरोX विवश्लेर्षर्ण क े आ ार पर, अपीलाथ[9] अथिभयुX की ओर से प्रत्यथ9/अथिभयोजन पक्ष क े लिखलाफ व 2मान अपील को अनुमति दी जा ी है और मुंसिसफ और न्यातियक मसिजस्ट्रेट ौलपुर क े अ ीनस्थ न्यायालय द्वारा विदनांक 21.3.94 को पारिर विनर्ण2य और सजा को इसक े द्वारा खारिरज कर विदया जा ा है और उपरोX अपीलक ा2/अथिभयुX फ ू ल सिंसह को संदेह का लाभ दे े हुए भा.दं.सं. की ारा 392 और शस्त्र अति विनयम की ारा 3/25 क े ह आरोप से दोर्षमुX विकया जा ा है।"

14. इसलिलए, व 2मान प्रकरर्ण में प्रत्यथ[9] की दोर्षमुविX एक सम्मानजनक दोर्षमुविX नहीं है, बस्थिल्क संदेह क े लाभ क े कारर्ण दी गई दोर्षमुविX है। इन परिरस्थिस्थति यों क े ह और कानून की स्थिस्थति को देख े हुए, जैसा विक ऊपर कहा गया है, यह अपील स्वीकार की जा ी है और राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ क े विवद्व एकल न्याया ीश क े विदनांक 29.01.2014 क े आदेश और खण्ड पीठ क े विदनांक 09.09.2020 क े आदेश को ए दद्वारा रद्द विकया जा ा है। न्याया ीश [एस. रविवन्द्र भट्ट] न्याया ीश [सु ांशु ूलिलया] नई विदल्ली 02 सिस ंबर, 2022 यह अनुवाद आर्गिटविफथिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुवास'क े जरिरए अनुवादक की सहाय ा से विकया गया है। अस्वीकरर्ण: यह विनर्ण2य पक्षकार को उसकी भार्षा में समझाने क े सीविम उपयोग क े लिलए स्थानीय भार्षा में अनुवाविद विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और आति कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण2य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाथिर्णक होगा और विनष्पादन और काया2न्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।