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भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 6622 और 6623 वर्ष 2022
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य...
अपीलार्थी)
बनाम
वीरेंद्र क
ु मार एवं अन्य.…
प्रति वादी
सह
सिसविवल अपील सं 6626 वर्ष 2022
और
सिसविवल अपील सं 6627 वर्ष 2022
विनर्णय mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
न्यायमूर्ति अभय एस. ओक
JUDGMENT
1. विदनांक 10 फरवरी 2020 को, अभिभलिललि= कारर्णों से, इस न्यायालय क े दो माननीय न्याया ीशों की एक पीठ इस विनष्कर्ष पर पहुंची विक उत्तर प्रदेश राज्य बनाम प्री म सिंसह एवं अन्य[1] (प्री म सिंसह का मामला) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा लिलए गए दृविJकोर्ण पर पुनर्विवचार करने की आवश्यक ा है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद अति विनयम, 1965 ( संक्षेप में '1965 का अति विनयम') की ारा 3 क े ह, उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद (संक्षेप में 'बोर्ड') की स्र्थीापना की गई र्थीी। बोर्ड की स्र्थीापना का मूल उद्देश्य उत्तर प्रदेश राज्य में आवास और सु ार योजनाएं ैयार करना और उन्हें कायान्विन्व करना र्थीा। मुख्य विवर्षय सिजस पर एक वृहद पीठ को संदर्भिभ विकया गया है, वह यह है विक क्या बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों की सेवा श ^ का विन ारर्ण करना बोर्ड क े वै ाविनक काय^ में से एक है। थ्यात्मक पहलू
2. विदनांक 21 फरवरी, 1995 को बोर्ड ने व मान अंशदायी पेंशन योजना (संक्षेप में 'पुरानी पेंशन योजना') क े स्र्थीान पर पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी योजना (संक्षेप में 'नई पेंशन योजना') द्वारा अपने कमचारिरयों को पेंशन लाभ देने का विवविनश्चय विकया। विदनांक 16 मई
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 1996 को राज्य सरकार ने नई पेंशन योजना क े लिलए अपनी सहमति इस श क े अ ीन दी विक बोर्ड नई पेंशन योजना क े कायान्वयन क े लिलए कोई विवत्तीय सहाय ा मांगने का हकदार नहीं होगा।
3. बोर्ड ने 5 नवंबर 1997 को एक प्रस् ाव पारिर कर नई पेंशन योजना को मंजूरी दी। नई पेंशन योजना सिसविवल सेवकों पर लागू राज्य सरकार की पेंशन योजना पर आ ारिर र्थीी। 26 नवम्बर, 1997 को राज्य सरकार ने नई पेंशन योजना क े कायान्वयन पर रोक लगाने का आदेश पारिर विकया। ऐसा प्र ी हो ा है विक राज्य सरकार ने बोर्ड की नई पेंशन योजना की जांच क े लिलए विवशेर्षज्ञों की एक सविमति विनयुक्त की र्थीी। विवशेर्षज्ञों की सविमति की रिरपोट पर विवचार करने क े बाद, राज्य सरकार ने 14 सिस ंबर, 1999 क े आदेश द्वारा पूव में विदए गए स्र्थीगन को इस श क े सार्थी रद्द कर विदया विक इस योजना का विवत्त पोर्षर्ण बोर्ड द्वारा भविवष्य विनति में विकए गए अंशदान से विकया जाएगा और न ो राज्य सरकार और न ही बोर्ड नई पेंशन योजना को लागू करक े विवत्तीय दातियत्व उठाएगा।
4. प्री म सिंसह एवं अन्य जो बोर्ड क े कमचारी र्थीे, ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक रिरट यातिचका दायर की। शुरुआ में, यातिचका में की गई प्रार्थीना 14 सिस ंबर, 1999 को जारी सरकारी आदेश को चुनौ ी क सीविम र्थीी। उक्त यातिचका क े विवचारा ीन रह े, 7 मई 2003 को, राज्य सरकार ने इस श क े सार्थी नई पेंशन योजना क े लिलए अनापलित्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA देने क े अपने पहले क े रु= को दोहराया विक उक्त योजना को लागू करने क े लिलए बोर्ड को कोई विवत्तीय सहाय ा प्रदान नहीं की जाएगी। 16 जनवरी, 2004 को बोर्ड ने एक कायालय आदेश द्वारा अपने कमचारिरयों को यह विवकल्प विदया विक वे या ो नई पेंशन योजना का विवकल्प चुनें या पुरानी पेंशन योजना को जारी र=ें। बोर्ड द्वारा विदए गए विवकल्प क े अनुसार, राज्य सरकार क े पक्ष क े अनुसार, 582 कमचारिरयों ने आवश्यक शपर्थीपत्र दालि=ल करक े पुरानी पेंशन योजना का विवकल्प चुना। 13 सिस म्बर, 2005 को राज्य सरकार ने 7 मई, 2003 क े अपने पत्र संसूचना को इस आ ार पर दरविकनार कर े हुए एक आदेश जारी विकया विक वह सावजविनक क्षेत्र क े उद्यमों क े कमचारिरयों को पेंशन क े भुग ान क े संबं में व्यापक विदशा-विनदsश ैयार आदेश रही है। 12 जुलाई, 2007 विदनांविक संसूचना क े माध्यम से राज्य सरकार ने बोर्ड की नई पेंशन योजना को दी गई मंजूरी को वापस ले लिलया। प्री म सिंसह एवं अन्य द्वारा दायर रिरट यातिचका को संशोति विकया गया और 13 सिस म्बर, 2005, और 12 जुलाई, 2007, विदनांविक आदेशों को चुनौ ी दे े हुए यातिचका में शाविमल विकया गया। प्री म सिंसह एवं अन्य द्वारा दायर यातिचका क े विवचारा ीन रह े, राज्य सरकार ने अपने कमचारिरयों क े लाभ क े लिलए 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी संशोति पेंशन, ग्रेच्युटी/परिरवार पेंशन और कम्यूटेशन योजना लागू करने क े लिलए 8 विदसंबर, 2008 को एक कायालय ज्ञापन जारी विकया। उक्त ज्ञापन उत्तर प्रदेश वे न सविमति, 2008 की सिसफारिरशों क े अनुसार mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जारी विकया गया र्थीा। हालांविक, स्र्थीानीय विनकायों और सावजविनक उद्यमों क े कमचारिरयों को विवशेर्ष रूप से उक्त कायालय ज्ञापन की प्रयोज्य ा से बाहर र=ा गया र्थीा। 1 जनवरी, 2006 से पहले सेवाविनवृत्त हुए सरकारी कमचारिरयों को संशोति पेंशन लाभ प्रदान करने क े लिलए राज्य सरकार द्वारा 8 विदसंबर, 2008 को एक अन्य कायालय ज्ञापन जारी विकया गया। यह आदेश उन सावजविनक क्षेत्र क े उद्यमों क े कमचारिरयों पर लागू विकया गया र्थीा, जो 1 जनवरी, 2006 से पहले ही पेंशन प्राप्त कर रहे र्थीे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की =ण्र्ड पीठ ने 16 जनवरी, 2009 विदनांविक विनर्णय एवं आदेश द्वारा प्री म सिंसह एवं अन्य द्वारा दायर की गई रिरट यातिचका को अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने 13 सिस ंबर, 2005 और 12 जुलाई, 2007 विदनांविक आदेशों को उस सीमा क रद्द कर विदया सिजस सीमा क वे बोर्ड से संबंति र्थीे। बोर्ड को 5 नवंबर 1997 को बनाए गए विवविनयमों क े अनुसार नई पेंशन योजना को लागू करने क े लिलए परमादेश रिरट जारी की गयी।
5. उच्च न्यायालय क े विनर्णय को ध्यान में र= े हुए, बोर्ड द्वारा 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए 19 मई, 2009 विदनांविक एक अति सूचना जारी की गई। अति सूचना में अभिभलिललि= विकया गया विक बोर्ड ने उक्त अति सूचना में उसिxलि= विनयमों एवं विवविनयमों क े ह राज्य सरकार क े कमचारिरयों एवं अति कारिरयों को यर्थीा स्वीकाय नई पेंशन योजना लागू mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने का विनश्चय विकया है। बोर्ड ने विनदsश विदया विक नई पेंशन योजना लागू होगी और यह उन अति कारिरयों पर लागू होगी जो 1 जनवरी 1996 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए हैं। हालांविक, यह कहा गया र्थीा विक नए सिसरे से परिरभाविर्ष राज्य सरकार क े अंशदायी पेंशन विनयम बोर्ड क े उन कमचारिरयों पर लागू होंगे सिजन्हें 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद रोजगार विमला है। अति सूचना में यह भी प्राव ान विकया गया विक पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी क े संबं में राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर जारी विकए गए आदेश बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर लागू होंगे।
6. राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय क े विनर्णय को इस न्यायालय क े समक्ष चुनौ ी दी गई र्थीी सिजसमें प्री म सिंसह क े मामले में1 इस न्यायालय का विनर्णय विदया गया र्थीा। इस न्यायालय क े अंति म विनर्णय क े प्रस् र 21 में यह कहा गया विक इस न्यायालय द्वारा पारिर 7 अगस्, 2012, विदनांविक अं रिरम आदेश का प्रभाव 19 मई, 2009, विदनांविक अति सूचना पर रोक लगाना र्थीा। इस न्यायालय क े 7 सिस ंबर 2012 विदनांविक अं रिरम आदेश द्वारा बोर्ड क े कमचारिरयों को पुरानी पेंशन योजना क े ह लाभ का दावा करने की अनुमति दी गई र्थीी। हालांविक, यह कहा गया विक अं रिरम आदेश उक्त कमचारिरयों द्वारा अपने दावे क े लिलए विवरो करने और और उच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त अनु ोर्ष का समर्थीन करने क े रास् े में नहीं आएगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
7. प्री म सिंसह क े मामले1 में इस न्यायालय क े समक्ष उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा विदया गया मुख्य क उत्तर प्रदेश सावजविनक विनगमों पर राजकीय विनयंत्रर्ण अति विनयम, 1975 (संक्षेप में '1975 का अति विनयम') की ारा 2 की उप ारा (1) क े उपबं ों पर आ ारिर र्थीा। 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) में यह प्राव ान है विक उत्तर प्रदेश क े विकसी अति विनयविम क े ह स्र्थीाविप या गविठ प्रत्येक सांविवति क विनकाय को अपने काय^ क े विनवहन में नीति यों क े प्रश्नों पर ऐसे विनदsशों द्वारा विनदsभिश विकया जाएगा, जो राज्य सरकार द्वारा उसे जारी विकए जाएं, भले ही राज्य सरकार को इस रह की कोई भी शविक्त कानून द्वारा स्पJ रूप से प्रदान नहीं की गई हो। राज्य सरकार की दलील यह र्थीी विक 13 सिस ंबर 2005 और 12 जुलाई 2007 विदनांविक जारी विकए गए आदेशों को 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए जारी विकया गया माना जाना चाविहए।
8. प्री म सिंसह क े मामले1 का विनर्णय 24 सिस म्बर 2014 को कर े समय, इस न्यायालय ने 1965 क े अति विनयम की ारा 15 का उxे= विकया सिजसमें बोर्ड क े काय^ को व्यापक रूप से शाविमल विकया गया है। इस न्यायालय ने यह विनष्कर्ष विनकाला विक अपने कमचारिरयों की सेवा श ^ का न विन ारर्ण करना बोर्ड क े दातियत्व का गठन नहीं कर । इसलिलए, इस न्यायालय ने अभिभविन ारिर विकया विक राज्य सरकार क े पास 13 सिस म्बर, 2005 और 12 जुलाई, 2007 विदनांविक अपने आदेशों में अं र्विवJ विनदेश जारी करने का कोई अति कार नहीं है। इस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ने यह भी ारिर विकया विक 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) में बोर्ड को अपने अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा की श ^ का विन ारर्ण करने क े लिलए विवविनयम बनाने की शविक्त दी गई है। यह ारिर विकया गया विक नई पेंशन योजना बोर्ड द्वारा ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए बनाई गई है। राज्य सरकार द्वारा दायर विवशेर्ष अनुमति यातिचका को =ारिरज कर े समय, इस न्यायालय ने 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए बोर्ड द्वारा जारी की गई 19 मई 2009 विदनांविक अति सूचना को संदर्भिभ विकया। इस न्यायालय ने बोर्ड को 19 मई, 2009 की अति सूचना द्वारा शासिस सेवाविनवृत्त कमचारिरयों को ीन महीने की अवति क े भी र पेंशन लाभ जारी करने का विनदsश विदया। इस न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनदsशों को समाविवJ करने वाले विनर्णय क े प्रस् र 21 को नीचे पुनप्रस् ु विकया गया हैः "21. हमारे लिलए उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा इस न्यायालय क े समक्ष 16-1-2009 विदनांविक आक्षेविप विनर्णय [प्री म सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2009 एस.सी.सी. ऑनलाइन एएलएल 33:(2009)2 एएलएल एलजे 702)..को चुनौ ी विदए जाने क े परिरर्णामों का विन ारर्ण करना भी आवशयक है। इस न्यायालय ने अपीलक ा द्वारा दायर यातिचका पर विवचार कर े हुए, 7-8-2012 को अं रिरम [उत्तर प्रदेश राज्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बनाम प्री म सिंसह, सिसविवल यातिचका सं 6307 वर्ष 2010 में आइए नंबर 7, आदेश विदनांविक 7-8-2012 (एससी), सिजसमें यह विनदsभिश विकया गया र्थीाः “सुनवाई क े लिलए लिलया गया. रिरट यातिचका संख्या 1433 वर्ष 2011 में विदनांक 24- 7-2012 को पारिर आदेश पर रोक रहेगी। आइ.ए. सं. 7 का विनस् ारर्ण विकया जा ा है। रसिजस्ट्री को आई.ए. सं. 4 को 27-8-2012 को सूचीबद्ध करने का विनदsश विदया जा ा है यविद यह क्रम में है।],सिजसका प्रभाव उच्च न्यायालय द्वारा जारी विनदsशों का स्र्थीगन र्थीा अर्थीा 15-5-2009 विदनांविक अति सूचना क े कायान्वयन का स्र्थीगन। परिरर्णामस्वरूप, 15- 5-2009 विदनांविक अति सूचना से शासिस कमचारिरयों को अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े ह उनकी सेवाविनवृलित्त की बकाया राभिश का भुग ान विकया गया। चूंविक अब हमने उच्च न्यायालय क े 16-1-2009 विदनांविक आक्षेविप विनर्णय [प्री म सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2009 एससीसी ऑनलाइन एएलएल 33:(2009) 2 एएलएल एलजे 702] की पुविJ कर दी है, यह स्पJ है विक विवकास परिरर्षद क े सभी पात्र कमचारी 19 मई 2009 विदनांविक अति सूचना द्वारा शासिस होंगे। इसलिलए वे अपनी सेवाविनवृलित्त की ति भिर्थी से पेंशन लाभ क े हकदार होंगे।विनःसंदेह, इस न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य की यातिचका पर पारिर अं रिरम आदेश क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरर्णामस्वरूप, उन्हें उक्त सेवाविनवृलित्त लाभों से वंतिच कर विदया गया है।उपयुक्त मामले को ध्यान में र= े हुए हम विवकास परिरर्षद को आज से ीन महीने क े भी र सेवाविनवृत्त कमचारिरयों को पेंशन लाभ जारी करने का विनदsश दे े हैं। पात्र सेवाविनवृत्त कमचारिरयों को अब क देय पेंशन लाभों का विन ारर्ण कर े समय, यविद यह पाया जा ा है विक कोई भी सेवाविनवृत्त कमचारी अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े ह पहले से ही भुग ान विकए गए बकाये से अति क विवत्तीय बकाये का हकदार है, ो उक्त कमचारी को उक्त राभिश पर 9 प्रति श प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुग ान विकया जाएगा। विवभेदक राभिश पर पूव क्त ब्याज घटक का भार विवकास परिरर्षद द्वारा सबसे पहले वहन विकया जाएगा।हालांविक, यह उत्तर प्रदेश राज्य से वसूल विकया जाएगा, जो संबंति कमचारिरयों को ब्याज क े भुग ान क े आदेश क े लिलए पूरी रह से सिजम्मेदार है। (प्रभाव वर्ति )
9. विदनांक 16 अक्त ू बर, 2009 को राज्य सरकार ने सावजविनक उद्यमों/विनगमों में काम करने वाले कमचारिरयों की विवभिभन्न श्रेभिर्णयों क े लिलए संशोति वे न संरचना, वे न बैंर्ड और ग्रेर्ड वे न को मंजूरी देने का आदेश जारी विकया। संशोति वे न संरचना को उक्त आदेश क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संलग्नक में शाविमल विकया गया र्थीा। सरकारी आदेश में कहा गया है विक सावजविनक उद्यम विवभाग/विवत्त विवभाग क े परामश से सावजविनक उद्यमों/विनगमों द्वारा आवश्यक कारवाई की जाएगी। सरकारी आदेश में यह भी प्राव ान विकया गया है विक सरकारी आदेश का कायान्वयन सावजविनक क्षेत्र क े उद्यमों क े विनदेशक मंर्डल द्वारा इस आशय क े प्रस् ाव को मंजूरी देने क े बाद ही विकया जाएगा। 30 नवम्बर, 2009 को बोर्ड क े आवास आयुक्त ने राज्य सरकार को पत्र लिल=कर संशोति वे न ढांचे को अपने कमचारिरयों पर लागू करने क े बोर्ड क े प्रस् ाव क े बारे में सूतिच विकया। इसक े जवाब में राज्य सरकार ने 14 जनवरी, 2010 को एक पत्र जारी कर बोर्ड को उत्तर प्रदेश वे न सविमति, 2008 की सा वीं रिरपोट की सिसफारिरशों क े अनुसार अपने कमचारिरयों को संशोति वे न संरचना प्रदान करने की अनुमति दी।राज्य सरकार ने बोर्ड को 16 अक्त ू बर, 2009 विदनांविक सरकारी आदेश क े अनुसार अपने कमचारिरयों को संशोति वे न देने की अनुमति दे दी। उक्त आदेश अति कार प्राप्त सविमति की सिसफारिरशों क े आ ार पर जारी विकया गया र्थीा। र्थीाविप, उस पत्र में यह कहा गया र्थीा विक लाभ की गर्णना अनुमाविन आ ार पर 1 जनवरी 2006 से की जाएगी जो विदनांक 16 अक्त ू बर, 2009 क े सरकारी आदेश में संलग्न सारर्णी क े अनुसार विदए गए वे न बैंर्ड और ग्रेर्ड वे न क े अनुरूप होगी।इसमें प्राव ान र्थीा विक वास् विवक लाभ त्काल प्रभाव से अर्थीा 14 जनवरी, 2010 से प्रदान विकया जाए। संक्षेप में, बोर्ड क े कमचारी 1 जनवरी 2006 से प्रभावी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संशोति वे न संरचना क े अनुसार वे न बकाया क े हकदार नहीं र्थीे। वे क े वल अनुमाविन आ ार पर 1 जनवरी, 2006 से संशोति वे नमान पाने क े हकदार र्थीे और क े वल 14 जनवरी, 2010 से वास् विवक लाभ पाने क े हकदार र्थीे। उक्त पत्र क े आ ार पर बोर्ड द्वारा विदनांक 14 जनवरी, 2010 क े पत्र को प्रभावी बनाने क े लिलए 23 जनवरी, 2010 को एक कायालय आदेश जारी विकया गया। वास् व में 15 सिस म्बर, 2011 को एक अन्य सरकारी आदेश जारी विकया गया र्थीा, सिजसमें कहा गया र्थीा विक 14 जनवरी, 2010 क े आदेश क े अनुसार बोर्ड क े कमचारिरयों क े वे नमानों में 1 जनवरी, 2006 से आभासी संशो न विकया जाएगा, लेविकन वास् विवक लाभ क े वल 14 जनवरी, 2010 से ही विदए जाएंगे। उक्त सरकारी आदेश में दोहराया गया है विक बोर्ड क े कमचारी 1 जनवरी 2006 से 13 जनवरी 2010 की अवति क े लिलए संशोति वे न संरचना का लाभ पाने क े हकदार नहीं होंगे।
10. राज्य सरकार ने 5 मई, 2015 को बोर्ड को एक और आदेश जारी विकया सिजसमें बोर्ड क े कमचारिरयों को 1 जनवरी 2006 से पूवव्यापी प्रभाव क े सार्थी नई पेंशन योजना का लाभ प्रदान करने क े माननीय राज्यपाल क े विनर्णय की जानकारी दी गई र्थीी। राज्य सरकार क े विनर्णय में अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी यह प्राव ान विकया गया र्थीा विक वे कमचारी जो 31 माच, 2005 को या उससे पहले कायर र्थीे और जो आज क सेवाविनवृत्त नहीं हुए हैं, उन्हें पेंशन दी जाएगी। इसमें यह भी प्राव ान विकया गया है विक जो कमचारी पहले ही सेवाविनवृत्त हो चुक े हैं और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पुरानी पेंशन योजना क े ह लाभ ले चुक े हैं, वे नई पेंशन योजना क े ह पेंशन प्राप्त करने क े हकदार नहीं होंगे। सरकार ने विनदsश विदया विक बोर्ड क े वे कमचारी जो 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद कायर हुए हैं, वे पेंशन क े हकदार नहीं होंगे। 05 मई, 2015 विदनांविक सरकारी आदेश क े अनुसार बोर्ड ने 13 मई, 2015 को कायालय आदेश जारी विकया।
11. इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट यातिचकाओं क े दो वग र्थीे। पहली यातिचका बोर्ड क े क ु छ कमचारिरयों द्वारा दायर रिरट यातिचका संख्या 12645 वर्ष 2016 र्थीी। यातिचका में विनम्नलिललि= प्रार्थीनाएं की गई ंर्थीी:- "(i) 01.01.2006 से प्रभावी छठे वे न आयोग की सिसफारिरशों क े आ ार पर यातिचयों क े सेवाविनवृलित्त क क े वे न और उसक े बाद उनक े पेंशन लाभों का पुनर्विन ारर्ण करने क े लिलए प्रति वादी को परमादेश की प्रक ृ ति में एक रिरट,आदेश या विनदsश जारी करें। (ii) 19-5-2009 विदनांविक पेंशन विवविनयमन सपविठ माननीय सव च्च न्यायालय का 23.09.2014 विदनांविक विनर्णय एवं आदेश क े आलोक में उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े कमचारिरयों पर इसकी अप्रयोज्य ा क े बारे में प्रति बं ात्मक प्राव ानों को उपयुक्त रूप से पढ़ े हुए, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परिरर्षद क े अति कारिरयों पर सरकारी आदेश संख्या 1508 विदनांविक 8.12.2008 क े प्राव ानों को लागू करने का आदेश देने क े लिलए परमादेश की प्रक ृ ति की रिरट, आदेश या विनदsश जारी करें। (iii) छठे वे न आयोग की सिसफारिरश क े संदभ में यातिचकाक ाओं क े वे न को 1.1.2006 से उनकी सेवाविनवृलित्त क की अवति क े लिलए पुनर्विन ारिर /विफर से य करने एवं उसक े बाद संशोति अंति म वे न क े अनुसार उनक े पेंशन लाभ को विफर से विन ारिर करने और वे न क े बकाया भुग ान और संशोति पेंशन लाभ को उनकी सेवाविनवृलित्त की ारी= से आज क शासनादेश विदनांविक 8.12.2008 क े अनुसार दो माह की अवति क े भी र विन ारिर करने, यातिचकाक ाओं क े पेंशन लाभ में दी गयी राभिश से घटाकर,क े लिलए प्रत्यर्थी) आदेश देने क े लिलए परमादेश की प्रक ृ ति की रिरट,आदेश या विनदेश जारी करें। (iv) सरकारी आदेश विदनांविक 8.12.2008 क े अनुसार यातिचयों को 10 ला= रुपये की अति क म ग्रेच्युटी का लाभ प्रदान करने क े लिलए प्रति वादी को आदेश देने क े लिलए परमादेश की प्रक ृ ति की रिरट,आदेश या विनदsश जारी करें। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (v) छठे वे न आयोग की सिसफारिरशों क े अनुसार संगभिर्ण वे न और पेंशन लाभ बकाया का भुग ान करने, सिजसमें 10 ला= रुपये की बढ़ी हुई ग्रेच्युटी व प्रचलिल बैंक दरों पर ब्याज का भुग ान शाविमल है, का दो माह क े भी र भुग ान करने क े लिलए प्रत्यर्थी) को आदेभिश करने क े लिलए परमादेश की प्रक ृ ति की रिरट, आदेश या विनदेश जारी करें। (vi) छठे वे न आयोग की सिसफारिरश क े अनुसार यातिचयों की व मान पेंशन का भुग ान करने क े लिलए प्रत्यर्थी) को ात्कालिलक परमादेश जारी करें” रिरट यातिचका संख्या 10355 वर्ष 2017 बोर्ड क े कमचारिरयों क े एक अन्य समूह द्वारा राज्य सरकार द्वारा पारिर 5 मई, 2015 विदनांविक आदेश और बोर्ड द्वारा पारिर 13 मई, 2015 विदनांविक आदेश को चुनौ ी देने क े लिलए दायर की गई र्थीी।
12. आक्षेविप विनर्णय द्वारा, पूव क्त दो यातिचकाओं का विनस् ारर्ण विकया गया। इन यातिचकाओं का विनस् ारर्ण कर े समय, प्रस् र 41 में, विनम्नलिललि= विनदsश जारी विकए गए र्थीेः “41. दनुसार, दोनों रिरट यातिचकाओं को अनुमति दी जा ी है और रिरट यातिचका संख्या 126345 (एस/बी) वर्ष 2017 क े संलग्नक संख्या 1 और 2 में विनविह 05.05.2015 और 13.05.2015 विदनांविक आक्षेविप आदेश उस सीमा क रद्द mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकए जा े हैं जहाँ क वे उत्तर प्रदेश राज्य बनाम प्री म सिंसह एवं अन्य क े मामले में माननीय सव च्च न्यायालय द्वारा पारिर विनर्णय क े विवपरी हैं।: सिसविवल अपील संख्या 6307 वर्ष 2010: प्रति वादी को एक परमादेश जारी विकया जा ा है विक वे 19 मई, 2009 को अति सूतिच उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद विवविनयम क े प्राव ानों एवंसिसविवल अपील संख्या 6307 वर्ष 2010 में माननीय उच्च म न्यायालय क े आदेश क े आलोक में परिरर्षद क े कमचारिरयों को 1 जनवरी, 2006 से 13 जनवरी, 2010 क देय वे न की बकाया राभिश का लाभ प्रदान करें और उनकी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन विन ारिर करें र्थीा इस आदेश की प्रमाभिर्ण प्रति प्रस् ु करने की ति भिर्थी क े दो माह की अवति क े भी र 9 प्रति श प्रति वर्ष की दर से ब्याज सविह ग्रेच्युटी भी विनग करें, सिजसमें विवफल रहने पर यातिचकाक ा 12 प्रति श प्रति वर्ष की दर से ब्याज क े भुग ान क े हकदार होंगे।" (प्रभाव वर्ति ) वृहद पीठ को सन्दर्भिभ करने का आदेश
13. अब, हम इस न्यायालय द्वारा पारिर 10 फरवरी, 2020 विदनांविक आदेश पर आ े हैं। इस न्यायालय क े दो माननीय न्याया ीशों की पीठ ने प्रर्थीमदृJया पाया विक 1965 क े अति विनयम की ारा 15 क े ह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुध्या बोर्ड क े काय इ ने व्यापक र्थीे विक इसक े कमचारिरयों की सेवा श ^ को य करने का काय भी इसक े अन् ग आ जाए। प्रस् र 43 में, इस न्यायालय ने वृहत्तर न्यायपीठ क े विवचार क े लिलए ीन प्रश्न विवरतिच विकए। उक्त आदेश का प्रस् र 43 इस प्रकार हैः “43. उपरोक्त कारर्णों से, हमारा यह म है विक ीन पहलुओं अर्थीा ् (1), (2) और (3) क े संबं में, जैसा विक ऊपर उxे= विकया गया है, प्री म सिंसह क े मामले में विनर्णय पर पुनर्विवचार करने की आवश्यक ा है। हम वृहत्तर पीठ द्वारा विवचार विकए जाने क े लिलए विनम्नलिललि= प्रश्नों को ैयार कर े हैंः (1) क्या प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय का विनर्णय सिजसमें यह ारिर विकया गया है विक अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श “ उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े काय^ क े अन् ग नहीं आ ी, सही विवति प्रति पाविद कर ी है, जबविक विनर्णय 1965 क े अति विनयम की ारा 8,92,94 (2) (एनएन) क े प्राव ानों को सन्दर्भिभ कर ा है? (2) क्या प्री म सिंसह क े विनर्णय में व्यक्त यह विवचार विक उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े काय क े वल 1965 क े अति विनयम की ारा 15 में वर्भिर्ण विवभिशJ काय हैं सिजसमें बोर्ड क े कमचारिरयों की सेवा श “ शाविमल नहीं हैं, सही विवति प्रति पाविद कर ा है? जबविक अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े अन्य mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्राव ानों में विनर्विदJ बोर्ड क े काय, जैसा विक “ इस अति विनयम और विनयमों एवं विवविनयमों क े प्राव ानों क े अ ीन रह े हुए” पद का उपयोग करक े ारा 15 (1) में स्पJ रूप से प्राव ान विकया गया है, भी बोर्ड क े काय होंगे, जो 1965 क े अति विनयम की ारा 95 (1) (च) क े अनुसार अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को शाविमल कर े हैं। (3) क्या राज्य सरकार को 1965 क े अति विनयम और 1975 क े अति विनयम क े प्राव ानों क े ह उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ और राज्य सरकार क े सार्थी अन्य सभी सक्षम शविक्तयों क े बारे में विनदsश जारी करने का कोई क्षेत्राति कार नहीं र्थीा? राज्य सरकार और बोर्ड की दलीलें
14. राज्य सरकार की ओर से उपन्विस्र्थी विवद्वान अपर सॉलिलसिसटर जनरल सुश्री ऐश्वया भाटी ने विनवेदन विकया विक बोर्ड क े सांविवति क काय^ में अपने कमचारिरयों क े विनयोजन की श “ और विनयम य करने का काय शाविमल है। उन्होंने 1965 क े अति विनयम की ारा 92 का अवलंब लिलया, जो राज्य सरकार को 1965 क े अति विनयम क े उद्देश्यों mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को पूरा करने क े लिलए बोर्ड को विनदsश जारी करने की शविक्त प्रदान कर ी है। उन्होंने कहा विक राज्य सरकार क े विनदsशों का पालन करना बोर्ड का क व्य है। आगे कहा गया विक 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े अलावा, 1965 क े अति विनयम की ारा 8 क े ह राज्य सरकार क े पास अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त करने क े लिलए बोर्ड की शविक्तयों को विनयंवित्र करने और उन पर प्रति बं लगाने क े लिलए पयाप्त शविक्त है। विवद् वान एएसजी ने हमारा ध्यान 19 मई 2009 विदनांविक अति सूचना की ओर आकर्विर्ष विकया सिजसक े द्वारा बोर्ड ने उन कमचारिरयों क े लिलए नई पेंशन योजना लागू की जो 1 जनवरी 1996 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए र्थीे। उन्होंने कहा विक उक्त अति सूचना में यह विवशेर्ष रूप से विनदsश विदया गया है विक राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी क े संबं में आदेश बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर भी लागू होंगे। उन्होंने कहा विक इस अति सूचना को कभी भी चुनौ ी नहीं दी गई। इसलिलए, उन्होंने कहा विक विनजी प्रति वादी द्वारा आक्षेविप राज्य सरकार क े विनदsशों को गल नहीं ठहराया जा सक ा है । इस न्यायालय द्वारा 7 सिस ंबर 2012 को पारिर अं रिरम आदेश पर हमारा ध्यान आकर्विर्ष करने क े बाद, विवद्वान एएसजी ने कहा विक सिजन लोगों ने 7 सिस ंबर 2012 से पहले पुरानी पेंशन योजना का विवकल्प विबना श चुना है, उन्हें नई पेंशन योजना क े संदभ में पेंशन का दावा करने का कोई अति कार नहीं है। उन्होंने कहा विक राज्य सरकार क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बाध्यकारी विनदsशों क े अनुसार 1 जनवरी, 2006 से 13 जनवरी, 2010 क े बीच की अवति क े लिलए कमचारी संशोति वे न संरचना क े अनुसार वे न क े हकदार नहीं हैं। बोर्ड का प्रति विनति त्व करने वाले विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता ने भी इसी रह का प्रकर्थीन विकया है। विनजी प्रति वादीगर्ण की दलीलें
15. सिसविवल अपील सं. 6624 और 6625 वर्ष 2022 में प्रति वादी की ओर से उपन्विस्र्थी विवद्वान अति वक्ता ने भी विवति क दलीलें दी है। हम यहां नोट कर सक े हैं विक 15 सिस ंबर 2022 को फ ै सला सुरतिक्ष र= े हुए, हमने उक्त अपीलों को अलग कर विदया र्थीा। विफर भी, हम विवति क े उन ीन सवालों क े संबं में अलग की गई अपीलों में प्रति वादी द्वारा दी गई दलीलों पर भी विवचार कर रहे हैं, सिजन पर विनर्णय विकए जाने की आवश्यक ा है। विवद्वान अति वक्ता की दलील है विक चूंविक अनेक कमचारी अपनी सेवाविनवृलित्त क े बाद विवत्तीय कविठनाइयों का सामना कर रहे र्थीे, इसलिलए उनक े पास कोई विवकल्प नहीं र्थीा सिसवाय पुरानी पेंशन योजना को स्वीकार करने और नई पेंशन योजना का विवकल्प न चुनने का शपर्थीपत्र देने क े । इस न्विस्र्थीति को ध्यान में र= े हुए, इस न्यायालय ने प्री म सिंसह क े मामले1 में पारिर एक अं रिरम आदेश द्वारा विनदsश विदया र्थीा विक भले ही कमचारिरयों ने शपर्थीपत्र देकर पुरानी पेंशन योजना का लाभ उठाया हो, वे 19 मई, 2009 की अति सूचना क े अनुसार नई पेंशन योजना क े लाभ क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हकदार होंगे। विवद्वान अति वक्ता ने हमारा ध्यान राज्य सरकार द्वारा पारिर 5 मई, 2015 विदनांविक उस पश्चात्व ) आदेश की ओर आकर्विर्ष विकया सिजसक े द्वारा उन लोगों को नई पेंशन योजना का लाभ देने से इनकार कर विदया गया सिजन्होंने 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद बोर्ड क े रोजगार में शाविमल होने का विवकल्प चुना र्थीा। उनका कहना है विक यह विनदsश भेदभावपूर्ण है जो विबना विकसी कसंग आ ार क े पेंशनभोविगयों क े दो वग^ का विनमार्ण कर ा है। उन्होंने र्डी. एस. नकारा एवं अन्य बनाम भार संघ[2] एवं अन्य और भार वी. सुक ु मारन बनाम क े रल राज्य एवं अन्य[3] क े मामलों में इस न्यायालय द्वारा विदए गए विनर्णयों का अवलंब लिलया है। इसलिलए, उनका कहना है विक प्री म सिंसह क े मामले1 में लिलए गए दृविJकोर्ण पर पुनर्विवचार करना विबल्क ु ल भी आवश्यक नहीं है।
16. विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता अति वक्ता श्री विन ेश गुप्ता ने कहा विक वह क े वल उन प्रति वादीगर्ण का प्रति विनति त्व कर े हैं सिजन्होंने कभी पुरानी पेंशन योजना का विवकल्प नहीं चुना र्थीा और पुरानी योजना क े ह कोई राभिश प्राप्त नहीं की र्थीी। उन्होंने कहा विक 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह बोर्ड को अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा की श ^ क े लिलए विनयम बनाने का अति कार है। 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (2)
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की ओर हमारा ध्यान आकर्विर्ष कर े हुए श्री गुप्ता ने कहा विक जब बोर्ड द्वारा बनाया गया कोई भी विवविनयम राज्य द्वारा ारा 94 क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए बनाए गए विनयमों क े प्रति क ू ल होगा भी विनयम प्रभावी होंगे। उन्होंने कहा विक स्वीक ृ रूप से राज्य सरकार ने ारा 94 क े ह विनयम बनाने की शविक्त का प्रयोग नहीं विकया है। उन्होंने कहा विक ारा 94 की उप ारा (2) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह, राज्य सरकार को विकसी भी ऐसे मामले से संबंति विनयम बनाने का अति कार है, सिजसक े लिलए ारा 95 क े ह विवविनयम बनाए जा सक े हैं। उन्होंने कहा विक यह सुस्र्थीाविप है विक जब विकसी अति विनयमन में यह अपेतिक्ष हो ा है विक कोई बा विकसी विनतिश्च रीक े से की जानी चाविहए ो वह उसी रीक े से की जानी चाविहए अर्थीवा विबल्क ु ल भी नहीं की जानी चाविहए। उन्होंने इस संबं में विवभिभन्न विनर्णयों का अवलंब लिलया जैसे ए.आर.अं ुले बनाम रामदास श्रीविनवास नायक एवं अन्य[4]; नंजय रेड्डी आविद बनाम कनाटक राज्य[5]; और गुजरा ऊजा विवकास विनगम लिलविमटेर्ड बनाम एस्सार पावर लिलविमटेर्ड[6] ।
17. 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) की ओर हमारा ध्यान आक ृ J कर े हुए उन्होंने कहा विक विनदेश जारी करने क े लिलए राज्य सरकार को उक्त उपबं द्वारा प्रदत्त शविक्त एक सामान्य शविक्त है। यह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA शविक्त नीति यों क े प्रश्नों पर विनदsश जारी करने क ही सीविम है। उन्होंने कहा विक बोर्ड क े काय^ क े विनवहन क े संबं में उक्त शविक्त का प्रयोग विकया जा सक ा है। उन्होंने कहा विक 1965 क े अति विनयम क े अध्याय 3 की ारा 15 बोर्ड क े काय^ को विन ारिर कर ी है। उन्होंने कहा विक अध्याय 3 में बोर्ड से विवभिभन्न योजनाएं बनाने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने विनवेदन विकया विक ारा 15 क े =ंर्ड (क) से ( ) में यह विवविह नहीं विकया गया है विक कमचारिरयों की विनयुविक्त और उनकी सेवा श ^ को य करना 1965 क े अति विनयम क े ह बोर्ड का काय है। 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े अनुसार प्रदत्त शविक्त क े प्रयोग में बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ क े बारे में विनदsश जारी नहीं विकए जा सक े।
18. 1965 क े अति विनयम की ारा 7 का उxे= कर े हुए उन्होंने कहा विक इसकी उप ारा (2) में स्पJ रूप से यह प्राव ान है विक आवास आयुक्त की सेवा की श “ ऐसी होंगी जो विवविह की जाए। ारा 2 क े =ंर्ड (ढ) में 'विवविह ' शब्द की परिरभार्षा का अवलंब ले े हुए, उन्होंने कहा विक आवास आयुक्त की सेवा की श “ राज्य सरकार द्वारा विनयम बनाने की शविक्त का उपयोग करक े विवविह की जानी चाविहए। र्थीाविप, ारा 8, सिजसमें बोर्ड क े अति कारिरयों और सेवकों की विनयुविक्त का उपबं है, में ऐसा कोई उपबं नहीं है। उन्होंने कहा विक ारा 8 की उप ारा (1) द्वारा अनुध्या राज्य सरकार क े विवशेर्ष या सामान्य आदेश क े वल बोर्ड क े अति कारिरयों और सेवकों की विनयुविक्त क े रीक े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और रीति क े बारे में जारी विकए जा सक े हैं और इनका सेवा श ^ से कोई लेना-देना नहीं है। सामान्य या विवशेर्ष आदेश जारी करने की राज्य सरकार की शविक्त क े वल बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त पर विनयंत्रर्ण और विनबं न लगाने क े उद्देश्य से है। इसलिलए, ारा 8 की उप- ारा (1) का यह अर्थी नहीं लगाया जा सक ा विक सामान्य या विवशेर्ष आदेश जारी करक े राज्य सरकार बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा की श “ विन ारिर कर सक ी है। उन्होंने कहा विक चूंविक 1965 क े अति विनयम की ारा 7 और 8 में दो अलग-अलग पदों का उपयोग विकया गया है, इसलिलए उक्त अलग- अलग पदों को अलग-अलग अर्थी देने होंगे। इस मुद्दे पर, उन्होंने र्डीएलएफ क ु ुब एन्क्ल े व कॉम्प्लेक्स एजुक े शनल चैरिरटेबल ट्रस्ट बनाम हरिरयार्णा राज्य[7] क े मामले में इस न्यायालय क े का अवलंब लिलया।
19. उन्होंने दलील दी विक राज्य सरकार 1965 क े अति विनयम क े उद्देश्यों को पूरा करने क े लिलए आवश्यक विनदsश जारी करक े ारा 92 की उप ारा (2) क े ह शविक्त का उपयोग कर सक ी है। उन्होंने कहा विक विकसी भी न्विस्र्थीति में, बोर्ड द्वारा ऐसे विवविनयम बनाए गए हैं जो पेंशन लाभ विदए जाने से संबंति हैं।
20. उन्होंने कहा विक 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े ह विनदsश जारी करने की शविक्त एक सामान्य शविक्त है और 1965 क े अति विनयम की ारा 8 और 92 क े ह शविक्त एक विवभिशJ या विवशेर्ष mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA शविक्त है। वाभिर्णज्य कर अति कारी, राजस्र्थीान बनाम विबनानी सीमेंट्स लिलविमटेर्ड एवं अन्य[8] क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय का अवलंब ले े हुए, उन्होंने कहा विक 1965 क े अति विनयम क े ह विवभिशJ प्राव ान 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े ह सामान्य प्राव ान पर अभिभभावी होंगे।
21. उन्होंने हरविवन्द्र क ु मार बनाम मुख्य अभिभयं ा, कार्विमक एवं अन्य[9] क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय का अवलंब लिलया। उन्होंने कहा विक नई पेंशन योजना क े संबं में विवविनयम बनाकर बोर्ड द्वारा की गई शविक्तयों क े प्रयोग को कायकारी आदेश अस्वीकार नहीं कर सक ा है। उन्होंने कहा विक यविद राज्य सरकार की यह दलील स्वीकार कर ली जा ी है विक कायकारी आदेश जारी करक े वह 1965 क े अति विनयम की ारा 95 क े ह बनाए गए विवविनयमों क े प्राव ानों का उxंघन कर सक ी है, ो 1965 क े अति विनयम की ारा 94 और 95 की पूरी योजना पूरी रह से विनरर्थीक हो जाएगी। इस न्यायालय द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ चाटर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंतिर्डया बनाम प्राइस वाटरहाउस एवं अन्य10 क े मामले में विदए गए विनर्णय का अवलंब ले े हुए उन्होंने कहा विक इस रह की व्याख्या को स्वीकार नहीं विकया जा सक ा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
22. उन्होंने कहा विक यविद पेंशन संशोति वे नमान क े आ ार पर प्रदान नहीं की जा ी है, ो पेंशन प्रदान करने का ही उद्देश्य विवफल हो जाएगा। उन्होंने कहा विक कमचारिरयों को दो वग^ में नहीं बांटा जा सक ा है- एक वे जो 1996 से पहले सेवाविनवृत्त हुए और दूसरे वे जो 1996 क े बाद सेवाविनवृत्त हुए। उन्होंने कहा विक संशोति पेंशन का लाभ एक जनवरी 2006 से नहीं बन्विल्क 14 जनवरी 2010 से प्रदान करने क े लिलए सावजविनक उद्यम ब्यूरो द्वारा 14 जनवरी 2010 को पत्र लिल=ने का कोई औतिचत्य नहीं है। उन्होंने कहा विक 14 जनवरी, 2010 की ारी= य करने क े लिलए उच्च न्यायालय या इस न्यायालय क े समक्ष कोई स्पJीकरर्ण नहीं विदया गया है। उन्होंने राजस्र्थीान राज्य एवं अन्य बनाम प्रेम राज11 क े मामले में इस न्यायालय क े एक विनर्णय का अवलंब लिलया
23. उन्होंने कहा विक संशोति पेंशन का लाभ राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश विवद्यु विनगम क े कमचारिरयों को 1 जनवरी, 2006 से विदया गया र्थीा। उत्तर प्रदेश जल विनगम क े कमचारिरयों को संशोति पेंशन का लाभ क े वल 12 अप्रैल, 2010 से ही विदया गया र्थीा। जल विनगम क े कमचारिरयों ने उच्च न्यायालय क े समक्ष एक रिरट यातिचका दायर की, सिजसे यह कह े हुए स्वीकार कर लिलया गया विक कमचारी 1 जनवरी 2006 से संशोति पेंशन का लाभ प्राप्त करने क े हकदार हैं। इस आदेश क े लि=लाफ राज्य सरकार द्वारा दायर विवशेर्ष अनुमति यातिचका mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को 20 मई 2022 को =ारिरज कर विदए जाने से उक्त विनर्णय अंति म हो गया है गया। उन्होंने कहा विक बोर्ड क े पास 1 जनवरी 2006 से संशोति पेंशन क े भुग ान का भार वहन करने क े लिलए पयाप्त संसा न हैं। उनका कर्थीन है विक प्री म सिंसह क े मामले में1 इस न्यायालय द्वारा अति कभिर्थी विवति पर पुनर्विवचार करने की आवश्यक ा नहीं है। विवरतिच प्रश्नों पर विवचार
24. 10 फरवरी, 2020 विदनांविक आदेश क े ह विवरतिच ीन प्रश्न आपस में जुड़े हुए हैं। इन ीन प्रश्नों का विनर्णय करने क े लिलए हमें यह य करना होगा विक क्या बोर्ड क े काय 1965 क े अति विनयम की ारा 15 में वर्भिर्ण काय क सीविम हैं और क्या बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त और उनकी सेवा श ^ का विन ारर्ण बोर्ड क े काय हैं। एक अन्य प्रश्न सिजस पर विवचार विकया जाना चाविहए वह, बोर्ड को अपने अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा की श ^ क े विन ारर्ण क े बारे में विनदsश जारी की राज्य सरकार की शविक्त, यविद कोई हो, क े बारे में। बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श “ विन ारिर करने की शविक्त
25. हमने 1965 क े अति विनयम क े प्राव ानों का अध्ययन विकया है। इसक े अध्याय 2 का शीर्षक है, “बोर्ड की स्र्थीापना और काय संचालन”। अध्याय 2 में ारा 3 से 14 शाविमल हैं। ारा 3 में बोर्ड क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गठन का प्राव ान है। ारा 7 में आवास आयुक्त की विनयुविक्त का प्राव ान है। ारा 7 इस प्रकार हैः "7. आवास आयुक्त से संबंति प्राव ान:- (1) इस अति विनयम क े प्रयोजनों क े लिलए राज्य सरकार द्वारा एक आवास आयुक्त की विनयुविक्त की जाएगी। (2) आवास आयुक्त की सेवा श “ ऐसी होंगी जो विवविह की जाएं। उसे बोर्ड की विनति से पारिरश्रविमक विदया जाएगा। (3) यविद राज्य सरकार की यह राय है विक विवशेर्ष परिरन्विस्र्थीति यों में ऐसी आवश्यक ा है ो वह अपने क व्यों क े अति रिरक्त आवास आयुक्त को भी अध्यक्ष विनयुक्त कर सक ा है। (4) राज्य सरकार विकसी अन्य कानून क े ह भी आवास आयुक्त को एक प्राति कारी क े रूप में विनयुक्त कर सक ी है। (प्रभाव वर्ति ) ारा 8 “अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त” से संबंति है। ारा 8 इस प्रकार हैः "8. अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त (1) ऐसे विनयंत्रर्ण और विनबं नों क े अ ीन रह े हुए, जो राज्य सरकार द्वारा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA समय-समय पर विवशेर्ष या सामान्य आदेशों द्वारा अति रोविप विकए जाएं, बोर्ड ऐसे अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त कर सक े गा जो वह अपने क ृ त्यों क े क ु शल विनष्पादन क े लिलए आवश्यक समझे। (2) बोर्ड, राज्य सरकार क े पूव अनुमोदन से, अपने अ ीन विकसी पद पर क े न्द्रीय या राज्य सरकार या स्र्थीानीय प्राति कारी क े विकसी कमचारी को ऐसे विनबं नों और श ^ पर विनयुक्त कर सक े गा, सिजन पर सहमति हो। (प्रभाव वर्ति ) जैसा विक ारा 7 की उप ारा (1) में प्राव ान विकया गया है, आवास आयुक्त की विनयुविक्त राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। ारा 7 की उप ारा (2) में यह प्राव ान है विक आवास आयुक्त की सेवा श “ विनयमों द्वारा विवविह की जानी चाविहए। ारा 94 क े ह विनयम बनाने की शविक्त राज्य सरकार क े पास है। ारा 94 क े उप- ारा (2) का =ंर्ड (=) राज्य सरकार को आवास आयुक्त की सेवा श ^ का विन ारर्ण करने क े लिलए विनयम बनाने का अति कार दे ा है। राज्य सरकार को सेवा श ^ का विन ारर्ण करने की शविक्त प्रदान करने का स्पJ कारर्ण राज्य सरकार का विनयुविक्त प्राति कारी होना प्र ी हो ा है।
26. इसक े विवपरी, ारा 8 की उप ारा (1) में यह उपबं है विक विवशेर्ष या सामान्य आदेशों द्वारा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लगाए गए विनयंत्रर्ण और विनबन् नों क े अ ीन रह े हुए, बोर्ड ऐसे अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त कर सक ा है जो वह अपने क ृ त्यों क े क ु शल विनष्पादन क े लिलए आवश्यक समझे। ारा 7 की उप- ारा (2) और ारा 8 की उप- ारा (1) द्वारा उपयोग की जाने वाली भार्षा क े बीच एक स्पJ अं र है, हालांविक दोनों प्राव ान बोर्ड क े अति कारिरयों की विनयुविक्त की शविक्त से संबंति हैं। इस प्रकार, ारा 7 और 8 में दो अलग-अलग पदों या शब्दावली का उपयोग विकया गया है। इसलिलए, विव ातियका का आशय विवभिभन्न अर्थी^ को व्यक्त करना र्थीा। ारा 8 की उप ारा (1) में यह प्राव ान नहीं है विक राज्य सरकार क े पास बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को विन ारिर करने की शविक्त होगी। विनयुविक्त को विनयंवित्र करने की शविक्त और विनबन् न लगाने की शविक्त बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को विन ारिर करने की शविक्त से अलग और भिभन्न है। राज्य सरकार का विनयंत्रर्ण और ारा 8 की उप- ारा (1) में विदए गए प्राव ान क े अनुसार विनबन् न लगाने की शविक्त बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों क े पदों क े सृजन क विवस् ृ होगी। विवभिभन्न श्रेभिर्णयों क े पदों क े सृजन का विनदsश देकर विनयंत्रर्ण का प्रयोग विकया जा सक ा है। विनयंत्रर्ण का प्रयोग विवभिभन्न श्रेभिर्णयों क े पदों की संख्या विन ारिर करक े भी विकया जा सक ा है। इस संदभ में, 1965 क े अति विनयम की ारा 94 और 95 भी प्रासंविगक हैं। ारा 94 की उप- ारा (1) क े ह राज्य सरकार क े पास अति विनयम क े उद्देश्यों को पूरा करने क े लिलए विनयम बनाने की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सामान्य शविक्त है। जैसा विक पहले ब ाया गया है, राज्य सरकार को ारा 94 क े उप- ारा (2) क े =ंर्ड (=) द्वारा प्रदत्त विवभिशJ शविक्तयों में से एक आवास आयुक्त की सेवा श “ विन ारिर करने क े लिलए विनयम बनाना है। ारा 94 की उप ारा (2) का =ंर्ड (nn) इस प्रकार हैः “94.विनयम बनाने की शविक्त- (1)……………… (2) विवशेर्ष रूप से और पूवगामी शविक्त की व्यापक ा पर प्रति क ू ल प्रभाव र्डाले विबना, ऐसे विनयमों में, …………………………... (एनएन) कोई भी मामला सिजसक े लिलए बोर्ड द्वारा ारा 95 क े ह विवविनयमन विकया जा सक ा है। ………………………... इस प्रकार, ारा 94 क े उप- ारा (2) का =ंर्ड (एनएन) राज्य सरकार को विकसी भी मामले क े संबं में विनयम बनाने की शविक्त प्रदान कर ा है सिजसक े लिलए बोर्ड द्वारा विवविनयम बनाए जा सक े हैं। ारा 95, जो विवविनयम बनाने क े लिलए बोर्ड को शविक्तयां प्रदान कर ी है, इस प्रकार हैः "95. विवविनयम बनाने की शविक्त. (1) बोर्ड, राजपत्र में अति सूचना द्वारा विनम्नलिललि= क े लिलए उपबं कर े हुए विवविनयम बना सक ें गे mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (क)........................................................................… (=)........................................................................… (ग).........................................................................… (घ).........................................................................… (ङ) बोर्ड क े अति कारिरयों एवं कमचारिरयों क े क व्य (च) बोर्ड क े अति कारिरयों एवं कमचारिरयों की सेवा श “ (छ)........................................................................… (ज)........................................................................… (झ)........................................................................… (ञ)........................................................................… (ट).........................................................................… (ठ).........................................................................… (र्ड)........................................................................... (ढ)............................................................................. (र्ण) कोई अन्य विवर्षय सिजसका इस अति विनयम या विनयमों क े अ ीन विवविनयमों द्वारा उपबं विकया जा जाना है या विकया जा सक ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (प्रभाव वर्ति ) ारा 95 की उप- ारा (1) का =ंर्ड (च) बोर्ड को विवशेर्ष रूप से बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को विनयंवित्र करने क े लिलए विवविनयम बनाने क े लिलए सशक्त बना ा है। ारा 94 क े उप- ारा (2) क े =ंर्ड (=) क े ह राज्य सरकार क े पास आवास आयुक्त की सेवा श ^ को विन ारिर करने का अति कार है। इस प्रकार, विव ानमंर्डल ने ारा 7 में विवशेर्ष रूप से शाविमल विकया है विक राज्य सरकार क े पास आवास आयुक्त की सेवा श ^ को विन ारिर करने की शविक्त होगी। र्थीाविप, बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों की विनयुविक्त से संबंति ारा 8 में ऐसा प्राव ान स्पJ रूप से अनुपन्विस्र्थी है। इसका कारर्ण यह है विक अन्य अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को विन ारिर करने की शविक्त बोर्ड को प्रदान की गई है सिजसका उपयोग विवविनयम बनाकर विकया जा सक ा है।
27. ारा 95 की उप ारा (2) सपविठ ारा 94 की उप ारा (2) का उप=ंर्ड (एनएन) को ध्यान में र= े हुए, बोर्ड द्वारा अपने अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवाओं श ^ का विन ारर्ण करने क े लिलए बनाए गए विवविनयम, यविद कोई हों, हमेशा उन विनयमों क े अ ीन हो े हैं जो राज्य सरकार द्वारा ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े अ ीन शविक्त का प्रयोग करक े बनाए जा सक े हैं। जब भी mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह बनाए गए विवविनयमों और ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह बनाए गए विनयमों क े बीच कोई असंगति हो ो विनयम अभिभभावी होंगे और उस सीमा क, विवविनयमों क े प्राव ान जो विनयमों क े प्रति क ू ल हैं, शून्य होंगे। इसे अलग शब्दों में कहें ो अति कारिरयों (आवास आयुक्त को छोड़कर) और बोर्ड क े कमचारिरयों की सेवा श ^ को विन ारिर करने की शविक्त बोर्ड में विनविह है और उक्त शविक्त का उपयोग ारा95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह विवविनयम बनाकर ही विकया जा सक ा है। जब क राज्य सरकार द्वारा सेवा श ^ को विन ारिर करने क े लिलए बोर्ड द्वारा बनाए गए विवविनयमों क े प्राव ानों को पर अभिभभावी होने क े लिलए ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह विनयम नहीं बनाए जा े हैं, ब क विवविनयमों क े प्राव ान हमेशा क्षेत्र को विनयंवित्र करेंगे। ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े अ ीन विनयम बनाने की शविक्त का प्रयोग करने क े सिसवाय, 1965 क े अति विनयम क े अ ीन या 1975 क े अति विनयम क े अ ीन राज्य सरकार को ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए बोर्ड द्वारा बनाए गए विवविनयमों क े अन् ग अपने अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को विनरस् करने या अति क्रविम करने की कोई विवविनर्विदJ शविक्त नहीं है। बोर्ड क े काय mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
28. अब बोर्ड क े काय^ क े विवर्षय पर आ े हुए, हम यह नोट कर सक े हैं विक 1965 क े अति विनयम क े अध्याय 3 का शीर्षक “बोर्ड क े काय और शविक्तयां” है। जैसा विक पहले उxे= विकया गया है, आवास आयुक्त, और बोर्ड क े अति कारिरयों एवं कमचारिरयों की विनयुविक्त क े संबं में विवभिशJ प्राव ानों को ारा 2 में स्र्थीान विदया गया है न विक ारा 3 में। जैसा विक ारा 8 की उप ारा (1) में विवभिशJ प्राव ान है विक बोर्ड अपने काय^ क े क ु शल विनष्पादन क े लिलए आवश्यक अति कारिरयों एवं कमचारिरयों की विनयुविक्त क े लिलए अति कार संपन्न है। यह एक कारक है जो यह ब ा ा है विक अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त बोर्ड का काय नहीं है, बन्विल्क उनकी विनयुविक्तयां इसक े काय^ क े क ु शल विनष्पादन क े लिलए की जानी चाविहए।
29. “बोर्ड क े काय^ और शविक्तयों” से संबंति अध्याय 3 में ारा 15 से 49 शाविमल हैं। ारा 15 का शीर्षक “बोर्ड क े काय” है जो इस प्रकार हैः "15. बोर्ड क े काय (1) इस अति विनयम क े प्राव ानों और विनयमों और विवविनयमों क े अ ीन रह े हुए, बोर्ड क े काय^ होंगे- (क) आवास और सु ार योजनाएं र्थीा अन्य परिरयोजनाएं बनाना और कायान्विन्व करना; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (=) राज्य में विवभिभन्न आवास गति विवति यों की योजना बनाना और उनका समन्वय करना और राज्य में आवास और सु ार योजनाओं का त्वरिर और क ु शल कायान्वयन सुविनतिश्च करना; (ग) क ें द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रायोसिज या सहाय ा प्राप्त आवास और सु ार योजनाओं क े ह विवभिभन्न परिरयोजनाओं क े लिलए कनीकी सलाह प्रदान करना और उनकी जांच करना; (घ) राज्य सरकार की ऐसी स्र्थीावर संपलित्तयों का प्रबं न ग्रहर्ण करना जो इस प्रयोजन क े लिलए उसे अं रिर या सुपुद की जाए; (ङ) बोर्ड क े विनयंत्रर्ण और प्रबं न क े अ ीन र=े गए बोर्ड या राज्य सरकार क े भू=ंर्डों, भवनों और अन्य संपलित्तयों का र=- र=ाव, उपयोग, आबंटन, पट्टा या अन्यर्थीा अं रर्ण; (च) भवन विनर्णाम सामग्री बनाने एवं भण्र्डारर्ण क े लिलए वकशाप और भण्र्डार गृह की व्यवस्र्थीा एवं संचालन करना; (छ) बोर्ड और राज्य सरकार क े बीच सहम विनबं नों और श ^ पर, विकसी योजना क े विनष्पादन में इसक े द्वारा विनर्विम आवासों को उत्तर प्रदेश औद्योविगक आवास अति विनयम, 1955 (1955 का उत्तर प्रदेश अति विनयम सं. XXIII) क े अ ीन आवासों क े रूप में घोविर्ष करना; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ज) विबल्डिंल्र्डग ऑपरेशनों को विवविनयविम करना; (झ) स्लम बन्विस् यों को बेह र बनाना और साफ करना; (ञ) इसक े द्वारा विवकसिस क्षेत्रों में सड़क, विबजली, स्वच्छ ा, पानी की आपूर्ति और अन्य नागरिरक सुविव ाएं और आवश्यक सेवाएं प्रदान करना; (ट) उपरोक्त वर्भिर्ण उद्देश्य क े लिलए चल और अचल संपलित्तयों का अति ग्रहर्ण करना; (ठ) बाजार से उ ार लेना, राज्य सरकार, क े न्द्रीय सरकार, स्र्थीानीय प्राति करर्णों और अन्य सावजविनक विनगमों से अनुदान और ऋर्ण प्राप्त करना और स्र्थीानीय प्राति करर्णों, अन्य सावजविनक विनगमों, आवास सहकारी सविमति यों और अन्य व्यविक्तयों को विकसी भी प्रयोजन क े लिलए अनुदान और ऋर्ण देना; (र्ड) विकसी संपलित्त का अन्वेर्षर्ण, परीक्षर्ण या सवsक्षर्ण करना या विकसी स्र्थीानीय प्राति कारी या राज्य सरकार द्वारा विकए गए विकसी ऐसे अन्वेर्षर्ण, परीक्षर्ण या सवsक्षर्ण की लाग में योगदान करना; (ढ) बेह री शुल्क उद्गृही करना; (र्ण) इस अति विनयम या त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य विवति द्वारा या उसक े अ ीन अति रोविप विकसी अन्य बाध्य ा को पूरा करना; और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ( ) ऐसे सभी अन्य काय और चीजें करना जो पहले उसिxलि= क ृ त्यों क े विनवहन क े लिलए आवश्यक हों। (2) इस अति विनयम और विनयमों एवं विवविनयमों क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए, बोर्ड, जहां वह आवश्यक समझे, विनम्नलिललि= काय^ में से कोई भी कर सक ा है, अर्थीा ् (क) भवनों क े विनमार्ण में ेजी लाने और उनकी लाग कम करने क े उद्देश्य से अनुसं ान को बढ़ावा देना; (=) लोक संस्र्थीाओं, स्र्थीानीय प्राति कारिरयों और अन्य लोक विनगमों र्थीा क े न्द्रीय सरकार और राज्य सरकार क े विवभागों की ओर से राज्य में काय विनष्पाविद करना; (ग) विनमार्ण सामग्री की आपूर्ति और विबक्री; (घ) भवन विनमार्ण सामग्री क े उत्पादन में समन्वय, सरलीकरर्ण और मानकीकरर्ण और संरचनात्मक घटकों क े बड़े पैमाने पर उत्पादन को प्रोत्साविह और संगविठ करना; (ङ) विकसी शहर, नगरपालिलका में और उसक े आसपास जनसंख्या क े आवागमन को सुगम बनाने की दृविJ से शहरी क्षेत्र या अति सूतिच क्षेत्र में सड़कों और पुलों क े विनमार्ण, उन्हें चौड़ा करने या उनमें सु ार लाने क े लिलए विकसी भी परिरवहन सेवा की स्र्थीापना, र=र=ाव और mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संचालन क े लिलए और ऐसे उद्देश्यों क े लिलए दूसरों को विवत्तीय सहाय ा देना; (च) ऐसे सभी अन्य काय और चीजें करना जो उपर उसिxलि= क ृ त्यों क े विनवहन क े लिलए आवश्यक हों। चूंविक बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्तयों पर विवचार अध्याय 2 की ारा 7 और 8 में की गई हैं, इसलिलए इन्हें बोर्ड क े काय^ क े रूप में ारा 15 में या अध्याय 3 की विकसी अन्य ारा में स्र्थीान नहीं विदया गया है। अध्याय III में विवभिभन्न योजनाएं एवं उन्हें कायान्विन्व करने क े लिलए बोर्ड द्वारा प्रयोग की जाने वाली शविक्त का प्राव ान है।
30. 1965 क े अति विनयम क े अध्याय 5 में अति विनयम क े प्रयोजनों क े लिलए बोर्ड द्वारा भूविम क े अजन और विनपटान का उपबं है। ारा 59 क े अन् ग बोर्ड ऋर्णपत्र जारी कर सक ा है। ारा 58 (3) क े ह बोर्ड अति विनयम क े उद्देश्यों क े लिलए ऋर्ण जमा करने का हकदार है। स्पJ ः सम्पलित्त का अजन एवं विबक्री, ऋर्णपत्र जारी करना और लोन जमा करना बोर्ड क े काय नहीं हो सक े। ये शविक्तयां अध्याय 5 द्वारा बोर्ड को अपना काय^ क े क ु शल विनष्पादन क े लिलए प्रदान की गई हैं। बोर्ड जैसे सांविवति क विनकाय क े काय^ की प्रक ृ ति हमेशा ऐसे विनकाय की स्र्थीापना क े उद्देश्य पर विनभर करेगी। बोर्ड क े विवभिशJ काय^ क े कु शल विनष्पादन क े लिलए अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त विकए जाने की आवश्यक ा हो ी है। बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों को विनयुक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने की शविक्त का प्रयोग और उनकी सेवा श ^ का विन ारर्ण बोर्ड क े काय^ का गठन नहीं कर सक ा है। अध्याय 5 क े अ ीन शविक्तयों और अध्याय 2 की ारा 7 और 8 क े अ ीन अति कारिरयों और कमचारिरयों की विनयुविक्त की शविक्त का प्रयोग बोर्ड क े क ृ त्यों का उतिच विनवहन सुविनतिश्च करने क े सार्थी-सार्थी अध्याय 3 में दी गई शविक्तयों का प्रयोग करने क े लिलए विकए जाने की आवश्यक ा है। बोर्ड की सेवा श ^ क े विन ारर्ण क े बारे में बोर्ड को विनदsश जारी करने की राज्य सरकार की शविक्त
31. ारा 92 जो बोर्ड पर राज्य सरकार क े विनयंत्रर्ण का प्राव ान कर ी है,"बाहरी विनयंत्रर्ण" "शीर्षक क े ह अध्याय 10 का विहस्सा है। ारा 92 इस प्रकार हैः "92. बोर्ड और अन्य स्र्थीानीय प्राति करर्णों पर राज्य सरकार का विनयंत्रर्ण- (1) बोर्ड (क) राज्य सरकार को ऐसी रिरपोट“ और विववरभिर्णयां ऐसे प्ररूपों में और ऐसे अं रालों पर, जो विवविह विकए जाएं, प्रस् ु करेगा; (=) राज्य सरकार को बोर्ड क े विनयंत्रर्ण क े अ ीन विकसी मामले क े संबं में ऐसे दस् ावेज, विववरभिर्णयां, विववरर्ण, प्राक्कलन या अन्य जानकारी दे सक े गा जो राज्य सरकार द्वारा विनदेभिश की जाए; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (2) राज्य सरकार बोर्ड को ऐसे विनदेश दे सक ी है जो उसकी राय में इस अति विनयम क े प्रयोजनों को कायान्विन्व करने क े लिलए आवश्यक या समीचीन हैं और ब बोर्ड का यह क व्य होगा विक वह ऐसे विनदेशों का अनुपालन करे। (3) इस अति विनयम क े अन्य उपबं ों पर प्रति क ू ल प्रभाव र्डाले विबना और त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य विवति में अं र्विवJ विकसी बा क े हो े हुए भी, राज्य सरकार विकसी स्र्थीानीय प्राति कारी को ऐसे विनदेश दे सक े गी जो उसकी राय में इस अति विनयम क े प्रयोजनों को कायान्विन्व करने में बोर्ड को समर्थी बनाने क े लिलए आवश्यक या समीचीन हैं और ब ऐसे विनदेशों का अनुपालन करना स्र्थीानीय प्राति कारी का क व्य होगा। (प्रभाव वर्ति ) ारा 92 की उप ारा (2) क े ह शविक्त का प्रयोग अति विनयम 1965 क े उद्देश्यों की पूर्ति क े लिलए विनदsश जारी करने क े लिलए है। मुद्दा यह है विक क्या राज्य सरकार ारा 95 की उप- ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए बोर्ड द्वारा बनाए गए वै ाविनक विवविनयमों पर अभिभभावी होने क े लिलए ारा 92 की उप- ारा (2) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर सक ी है। यविद राज्य सरकार ऐसे विवविनयमों को रद्द करना चाह ी है ो 1965 क े उक्त अति विनयम क े ह एक विवभिशJ प्राव ान है जो राज्य सरकार को ऐसा करने में सक्षम बना ा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है। ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) और ारा 95 की उप ारा (2) क े संयुक्त पठन पर, राज्य सरकार को बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ का विन ारर्ण करने क े लिलए विनयम बनाने की शविक्त है और एक बार राज्य सरकार द्वारा इस संबं में विनयम बनाए जाने क े बाद, बोर्ड द्वारा बनाए गए विवविनयमों क े प्राव ान क े वल उस सीमा क लागू होंगे सिजस सीमा क वे विनयमों क े प्रति क ू ल नहीं हैं। ारा 92 की ारा (2) क े ह राज्य सरकार विनदsश जारी करक े ारा 95 क े ह बनाए गए वै ाविनक विवविनयमों को रद्द नहीं कर सक ी। इसक े अलावा, जब 1965 का अति विनयम राज्य सरकार को विवशेर्ष रूप से विनयम बनाने की शविक्त का उपयोग करक े विवविनयमों को विनरस् करने में सक्षम बना ा है। चूंविक 1965 क े अति विनयम की योजना में विवशेर्ष रूप से यह प्राव ान है विक ारा 94 क े ह बनाए गए विवविनयमों को ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े अनुसार विनयम बनाकर अभिभभावी विकया जा सक ा है, इसलिलए विवविनयमों को अभिभभावी करने का काय क े वल विनयम बनाकर विकया जाना चाविहए, न विक विकसी अन्य रीक े से। इस दृविJकोर्ण का समर्थीन इस न्यायालय क े विनर्णयों की एक श्रृं=ला द्वारा विकया जा ा है सिजसमें एक सुसंग दृविJकोर्ण अपनाया गया है विक जहां विकसी अति विनयम क े अन् ग एक विनतिश्च रीक े से क ु छ करने की आवश्यक ा हो ी है, वहां काय को उस रीक े से विकया जाना चाविहए, न विक विकसी अन्य रीक े से। गुजरा ऊजा विवकास विनगम 6 क े मामले सविह इस mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय क े कई विनर्णयों में इस रह का दृविJकोर्ण अपनाया गया है। हालांविक इस विवर्षय पर मूल बिंबदु नजीर अहमद बनाम द् बिंकग इंपरर12 क े मामले में विप्रवी काउंसिसल द्वारा विदया गया विनर्णय है सिजसमें ारिर विकया गया है: “जहां विकसी काम को एक विनतिश्च रीक े से करने की शविक्त दी जा ी है, वहां काम उसी रीक े से विकया जाना चाविहए, या विबल्क ु ल नहीं। काय करने क े अन्य रीक े विनतिश्च रूप से विनविर्षद्ध हैं।” उपयुक्त चचा का विनष्कर्ष यह है विक राज्य सरकार क े पास ारा 92 की उप ारा (2) क े ह बोर्ड द्वारा ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एफ) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए बनाए गए विवविनयमों को रद्द करने या अविवभावी करने क े लिलए विनदsश जारी करने की कोई शविक्त नहीं है।
32. राज्य सरकार का एक अन्य क ारा 15 की उप ारा (1) पर आ ारिर है जो इस अभिभव्यविक्त ''अति विनयम और विनयमों और विवविनयमों क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए’’ क े ह आ ा है। उक्त अभिभव्यविक्त क े उपयोग से, अति कारिरयों और सेवकों की सेवा की श ^ को विन ारिर करने क े लिलए विवविनयम बनाने की शविक्त का प्रयोग बोर्ड का एक काय नहीं बन जा ा है। ारा 15 की उप- ारा (1) क े प्रारंभिभक भाग का अर्थी है विक बोर्ड क े काय^ का विनवहन 1965 क े अति विनयम क े ह बनाए गए विनयमों और विवविनयमों की बा ाओं क े अ ीन विकया जाना चाविहए। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
33. राज्य सरकार क े क का अगला अंग 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) पर आ ारिर है।
2. (1) सांविवति क विनकाय को विनदेश जारी करने की शविक्त - उत्तर प्रदेश राज्य विवश्वविवद्यालय अति विनयम, 1973 द्वारा यर्थीा अति विनयविम और संशोति उत्तर प्रदेश विवश्वविवद्यालय (पुनः अति विनयविमति और संशो न अति विनयम, 1974) द्वारा शासिस विवश्वविवद्यालयों को छोड़कर, उत्तर प्रदेश राज्य विवश्वविवद्यालय अति विनयम, 1973 क े अ ीन स्र्थीाविप या गविठ प्रत्येक सांविवति क विनकाय (चाहे वह विकसी भी नाम से ज्ञा हो) अपने क ृ त्यों का विनवहन, नीति यों क े प्रश्नों पर ऐसे विनदेशों द्वारा मागदर्भिश हो, जो राज्य सरकार द्वारा उसे विदए जाएं, इस बा क े हो े हुए भी विक ऐसे सांविवति क विनकाय की स्र्थीापना या गठन करने वाली विवति क े अ ीन ऐसी कोई शविक्त अभिभव्यक्त रूप से राज्य सरकार को प्रदत्त नहीं की गई है। (प्रभाव वर्ति ) उपयुक्त प्राव ान क े पठन पर, राज्य सरकार में विनविह विनदsश जारी करने की शविक्त का प्रयोग क े वल नीति यों क े प्रश्नों क सीविम विनदsश जारी करने क े लिलए विकया जा सक ा है। ये विनदsश सांविवति क विनकाय क े काय^ क े विनवहन से संबंति नीति यों क ही सीविम हो सक े हैं। नीति यों क े प्रश्नों पर राज्य सरकार द्वारा जारी विकए गए विनदsश प्रत्येक सांविवति क विनकाय को अपने काय^ क े विनवहन में मागदशन कर े हैं। उन कारर्णों क े लिलए, जो हमने 1965 क े अति विनयम की ारा 92 की ारा 2 (2) क े ह उप- ारा से विनपटने क े दौरान पहले ही दज विकए हैं, यहां क विक 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) क े ह दी गई शविक्त का उपयोग बोर्ड द्वारा बनाए गए कानूनी विवविनयमों को रद्द करने क े लिलए नहीं विकया जा सक ा है, सिजनक े पास कानून की शविक्त है। ऐसा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 1965 क े अति विनयम की ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े अ ीन विनयम बनाने की शविक्त का प्रयोग करक े ही विकया जा सक ा है। 1975 अति विनयम की ारा 2(1) क े ह शविक्त सामान्य शविक्त है विक 1965 अति विनयम द्वारा प्रदत्त विवशेर्ष शविक्तयों का पालन करना चाविहए। ारा 2 की उप ारा (1) क े ह विनयम बनाने की शविक्त वै ाविनक विनयम बनाने क े लिलए शविक्त से अलग है। ीन सवालों पर विनष्कर्ष
34. उपयुक्त चचा द्वारा विवरतिच ीन प्रश्नों क े उत्तर देने क े लिलए पयाप्त है। ऊपर हमने जो अभिभविन ारिर विकया है उसक े अ ीन रह े हुए, हम प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय द्वारा लिलए गए दृविJकोर्ण से सहम हैं। उपयुक्त ीन प्रश्नों क े उत्तर विनम्नानुसार है - प्रश्न 1-क्या प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय में यह विन ारिर विकया गया है विक अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा की श “ उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े काय^ का गठन नहीं कर ी हैं, जो सही है क्या विनर्णय में 1965 क े अति विनयम की ारा 8,92,94 (2) (एन) क े उपबं ों का उxे= नहीं है? उत्तरः यह विनर्णय कानून क े सही प्रस् ाव को विन ारिर कर ा है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रश्न 2 - क्या प्री म सिंसह क े विनर्णय में व्यक्त विवचार विक उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े काय क े वल 1965 क े अति विनयम की ारा 15 में वर्भिर्ण विवभिशJ काय हैं सिजसमें बोर्ड क े कमचारिरयों की सेवा श “ शाविमल नहीं हैं सही कानून विन ारिर कर ा? जबविक अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े अन्य प्राव ानों में विनर्विदJ बोर्ड क े काय, जैसा विक ारा 15 (1) में स्पJ रूप से प्राव ान विकया गया है, इस "अति विनयम और विनयमों और विवविनयमों क े प्राव ानों क े अ ीन रह े हुए '' अभिभव्यविक्त का उपयोग करक े बोर्ड क े काय भी होंगे जो 1965 क े अति विनयम की ारा 95 (1) (एफ) क े अनुसार अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ को शाविमल कर े हैं। उत्तरः प्रश्न क े पहले भाग का उत्तर सकारात्मक है। बोर्ड क े काय 1965 क े अति विनयम क े अध्याय 3 में ारा 15 और अन्य प्रासंविगक ाराओं में विनर्विदJ हैं। प्रश्न 3- क्या राज्य सरकार को 1965 क े अति विनयम और 1975 क े अति विनयम क े प्राव ानों और राज्य सरकार क े सार्थी अन्य सभी सक्षम शविक्तयों क े ह उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े अति कारिरयों और कमचारिरयों की सेवा श ^ क े बारे में विनदsश जारी करने की कोई अति कार क्षेत्र नहीं र्थीी? mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उत्तरः इसका सकारात्मक जवाब विदया गया। लेविकन राज्य सरकार बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों की सेवा की श ^ का विन ारर्ण करने क े लिलए 1965 क े अति विनयम की ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए हमेशा विनयम बना सक ी है। जब भी ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एफ) क े ह बनाए गए विवविनयमों और ारा 94 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह बनाए गए विनयमों क े बीच कोई विवसंगति होगी, ो विनयम प्रभावी होंगे और उस हद क, विवविनयमों क े प्राव ान जो विनयमों क े प्रति क ू ल हैं, शून्य होंगे। आक्षेविप विनर्णय क े ह विदए गए अनु ोर्ष से संबंति अनुर्षंविगक मुद्दों पर विवचार
35. प्रश्नों का विवविनश्चय करने क े पश्चा ् हमारा यह म है विक सिसविवल अपीलों को दो माननीय न्याया ीशों की न्यायपीठ को वापस भेजने क े बजाय हमारे विनष्कर्ष^ क े अनुसार विवविनतिश्च विकया जा सक ा है। पेंशन
36. अब, हम आनुसंविगक मुद्दों पर विवचार करने लिलए आगे बढ़ े हैं। अब नई पेंशन योजना की बा आ ी है ो बोर्ड द्वारा 16 जनवरी 2004 को एक कायालय आदेश जारी विकया गया र्थीा सिजसमें कहा गया र्थीा विक पेंशन योजना ैयार करने का प्रस् ाव विवचारा ीन है। कायालय क े 16 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जनवरी, 2004 विदनांविक क े आदेश में यह प्राव ान विकया गया है विक वे कमचारी जो नई पेंशन योजना का विवकल्प चुनने में रुतिच नहीं र= े हैं, उन्हें 10/- रुपये क े स्टांप पेपर पर एक शपर्थी पत्र दालि=ल करना होगा। उक्त शपर्थी पत्र में यह स्पJ रूप से और विवशेर्ष रूप से कहा जाना चाविहए विक लाभार्थी) नई पेंशन योजना में रुतिच नहीं र= ा है और बोर्ड क े विहस्से क े सार्थी उसक े द्वारा अपने विहस्से क े रूप में जमा की गई पूरी राभिश का भुग ान लाभार्थी) को विकया जाना चाविहए। यह भी प्राव ान विकया गया र्थीा विक शपर्थी पत्र में यह उxे= होना चाविहए विक भविवष्य में लाभार्थी) विकसी भी प्राति करर्ण या अदाल क े समक्ष पेंशन लाभ का दावा नहीं करेगा। राज्य सरकार क े रवैये क े अनुसार कु ल 582 कमचारिरयों/अति कारिरयों ने शपर्थी पत्र/उपक्रम दालि=ल करक े पुरानी योजना का विवकल्प चुना। राज्य सरकार ने अपील में प्रति वादी नं.1- वीरेंद्र क ु मार क े शपर्थी पत्र की एक प्रति अभिभले= पर र=ी गइ है। इसमें कोई विववाद नहीं है विक सिजन कमचारिरयों ने नई पेंशन योजना का विवकल्प नहीं चुनने का फ ै सला विकया है, कमाचारिरयों क े सभी शपर्थीपत्र एक ही प्रारूप में हैं। शपर्थी पत्र में, यह शाविमल विकया गया र्थीा विक कमचारी की पेंशन योजना में विबल्क ु ल भी रुतिच नहीं र्थीी और वह पुरानी योजना क े ह भुग ान लेने में रुतिच र= ा र्थीा। यह विवशेर्ष रूप से कहा गया है विक वह नई पेंशन योजना क े संबं में कोई दावा नहीं करेंगे।
37. राज्य सरकार क े अनुमोदन क े पश्चा ्, 5 नवम्बर, 1997 को बोर्ड ने नई पेंशन येाजना का अनुमोदन करने क े लिलए एक संकल्प पारिर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकया। उच्च न्यायालय ने प्री म सिंसह और अन्य द्वारा दायर यातिचकाओं को स्वीकार कर े हुए बोर्ड को 5 नवंबर 1997 क े अपने विनर्णय क े अनुसार नई पेंशन योजना को लागू करने का विनदsश विदया। उच्च न्यायालय ने 16 जनवरी, 2009 को यातिचका स्वीकार कर ली। इस विनर्णय को प्रभावी बनाने क े लिलए 19 मई, 2009 को बोर्ड ने एक अति सूचना जारी की, सिजसमें 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप- ारा (1) क े =ंर्ड (एफ) और (एन) क े ह शविक्तयों का प्रयोग कर े हुए यह विनर्णय लिलया गया है विक राज्य सरकार क े अति कारिरयों और कमचारिरयों क े लिलए पेंशन योजना और ग्रेच्युटी स्वीकाय होगी आैर बोर्ड क े कमचारिरयों को स्वीकाय होंगी। उक्त अति सूचना का प्रासंविगक विहस्सा इस प्रकार हैः ''...... अब, उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद ने, उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद अति विनयम, 1965 (1966 का उत्तर प्रदेश अति विनयम 1) की ारा 95 की उप- ारा (1) क े =ंर्ड (एफ) (i) और (n) क े ह शविक्तयों का उपयोग कर े हुए, राज्य सरकार क े अति कारिरयों और कमचारिरयों क े लिलए स्वीकाय पेंशन/परिरवार पेंशन और ग्रेच्युटी काे स्वीकाय करने का फ ै सला विकया है, जो उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े कमचारिरयों एवं अति कारिरयों को भी स्वीकाय होगी सिजसे विनम्नलिललि= विनयमों, योजनाओं और सरकारी आदेशों द्वारा शासिस विकया गया है
1. सिसविवल सेवा विवविनयम जैसा की यूपी में लागू है ----------- यर्थीा संशोति
2. उत्तर प्रदेश उदारीक ृ पेंशन विनयम, 1961 ------- दैव mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 3.उत्तर प्रदेश सेवाविनवृलित्त लाभ विनयम, 1961 क े अनुसार ------- दैव 4.नई परिरवार पेंशन योजना, 1965 ------- दैव 5.उत्तर प्रदेश क े विवत्त विवभाग क े सभी आदेश पेंशन से संबंति सरकार /परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटीकरना ------- दैव
6. नए परिरभाविर्ष अंशदायी पेंशन विनयम अति सूचना संख्या एस. ए. - 3 - 379 / Das - 2005 – 301 (9)/2003, 28 माच, 2018 विदनांविक क े ह 2005 अति कारिरयों और कमचारिरयों क े लिलए लागू सेवा में शाविमल होने वाले राज्य सरकार क े अति कारी 01 अप्रैल, 2005 से प्रभावी करना। ------- दैव राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी क े संबं में जारी आदेश उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर भी लागू होगा। परिरर्षद द्वारा यह भी विनर्णय लिलया गया है विक सामान्य भविवष्य विनति विनयम, 1985 अंशदायी भविवष्य विनति (सीपीएफ) विवविनयम, 1973 क े बजाय उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर लागू होंगे। जीपीएफ विनयमों और इस संबं में जारी विकए गए सरकार विनयम/ आदेश का अर्थी है 'उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद', 'महाले=ाकार' का अर्थी है 'उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरर्षद क े विवत्त विनयंत्रक' और 'विवभाग प्रमु=' का अर्थी है 'आवास आयुक्त'। राज्य सरकार उक्त पेंशन योजना क े कायान्वयन क े लिलए कोई विवत्तीय सहाय ा प्रदान नहीं करेगी। अति सूचना की विवर्षयवस् ु 1 जनवरी, 1996 से प्रभावी होगी और उक्त ारी= को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त होने वाले आवास एवं विवकास परिरर्षद क े ऐसे अति कारी और कमचारी इस विनर्णय से लाभान्विन्व होंगे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA राज्य सरकार द्वारा अति सूतिच नए परिरभाविर्ष अंशदायी पेंशन विनयम उन कमचारिरयों पर लागू होंगे जो 1 अप्रैल, 2005 या उसक े बाद परिरर्षद की सेवाओं में शाविमल हुए हैं। (प्रभाव वर्ति ) इस प्रकार, नई पेंशन योजना को 1 जनवरी 1996 से पूवव्यापी रूप से लागू विकया गया र्थीा और इसे बोर्ड क े उन कमचारिरयों और अति कारिरयों पर लागू विकया गया जो उस ारी= को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए र्थीे। इसमें यह भी दज विकया गया है विक नए परिरभाविर्ष राज्य सरकार द्वारा अति सूतिच अंशदायी पेंशन विनयम बोर्ड क े उन कमचारिरयों पर लागू होंगे जो 1 अप्रैल, 2005 से पहले रोजगार में शाविमल हुए हैं। इस प्रकार, नई पेंशन योजना की प्रयोज्य ा उन अति कारिरयों और कमचारिरयों क सीविम र्थीी जो 1 जनवरी 1996 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए र्थीे। 1 अप्रैल 2005 को या उसक े बाद विनयुक्त अति कारिरयों और कमचारिरयों को नई पेंशन योजना की प्रयोज्य ा से बाहर र=ा गया र्थीा। हमें यहां ध्यान देना चाविहए विक 19 मई 2009 की अति सूचना अंति म हो गई है और विकसी भी यातिचका में, जो इन अपीलों की विवर्षय वस् ु है, सिजसे चुनौ ी नहीं दी गई र्थीी। थ्यानुसार, रिरट यातिचका संख्या 10355 वर्ष 2017 में, अति सूचना को लागू करने क े लिलए एक परमादेश जारी करने की प्रार्थीना की गई र्थीी। इसक े अलावा, प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय क े पैराग्राफ 21 में, इस न्यायालय ने उक्त अति सूचना पर कारवाई करने का आदेश जारी विकया। 19 मई, 2009 की अति सूचना में विवशेर्ष रूप से कहा गया है विक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी क े संबं में राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर जारी विकए गए आदेश बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर लागू होंगे। इस प्रकार, बोर्ड क े क े वल वे कमचारी जो 1 जनवरी, 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए हैं, वे नई पेंशन योजना क े लाभ क े हकदार हैं और जो लोग 1 अप्रैल 2005 को या उसक े बाद विनयुक्त विकए जा े हैं, वे 19 मई 2009 की अति सूचना में उसिxलि= विनयमों समूह द्वारा शासिस होंगे।
38. प्री म सिंसह और अन्य क े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े विनर्णय क े लि=लाफ राज्य सरकार द्वारा दायर विवशेर्ष अनुमति यातिचका में, इस न्यायालय द्वारा 7 अगस् 2012 को एक अं रिरम आदेश पारिर विकया गया र्थीा, सिजसका प्रभाव उच्च न्यायालय क े विनर्णय और 19 मई 2009 की अति सूचना पर रोक लगाना र्थीा। 7 सिस ंबर, 2012 को जारी अं रिरम आदेश में कहा गया है विक यविद बोर्ड क े कमचारी, जो सेवा से सेवाविनवृत्त हो चुक े हैं, अंशदायी भविवष्य विनति और अन्य सेवाविनवृलित्त लाभों (पुरानी योजना क े अनुसार) का दावा कर े हैं ो बोर्ड पुरानी योजना क े ह लाभ प्रदान करने क े लिलए उतिच आदेश पारिर करेगा। हालांविक, यह स्पJ विकया गया विक यह अं रिरम आदेश प्रति वादी क े लिलए बा क नहीं बनेगा, जो इस न्यायालय क े समक्ष उनक े दावे और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई राह का समर्थीन कर ा है। फ ै सले क े प्रस् र 21 में अभिभलिललि= है विक अं रिरम आदेश द्वारा, 19 मई 2009 की अति सूचना पर रोक लगा दी गई र्थीी, और इसलिलए, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विकसी को भी नई योजना क े ह पेंशन नहीं विमल सक ी है।इसलिलए, अं रिरम आदेश पारिर विकया गया, सिजससे उन कमचारिरयों को पुरानी योजना या नई पेंशन योजना क े ह लाभ नहीं विमला र्थीा, जो पुरानी योजना क े ह लाभ ले सक े र्थीे। यह अं रिरम आदेश इसलिलए विदया गया क्योंविक 19 मई, 2009 को जारी अति सूचना पर रोक क े कारर्ण विकसी को भी पुरानी योजना का लाभ नहीं विमल सका।इस प्रकार 7 सिस ंबर का अं रिरम आदेश क े वल उन कमचारिरयों क े लिलए लागू र्थीा सिजन्होंने 7 सिस ंबर 2012 क पुरानी योजना क े ह लाभ नहीं लिलया र्थीा। जाविहर है, बोर्ड क े सिजन अति कारिरयों और कमचारिरयों ने 16 जनवरी 2004 क े कायालय आदेश क े संदभ में शपर्थी पत्र दालि=ल करक े पुरानी योजना का विवकल्प चुना और 7 सिस ंबर 2012 क े अं रिरम आदेश से पहले पुरानी योजना क े ह लाभ प्राप्त विकए, वे नई पेंशन योजना क े ह पेंशन का दावा करने क े हकदार नहीं हैं। बोर्ड क े वे अति कारी और कमचारी सिजन्होंने 7 सिस ंबर 2012 क े बाद पुरानी योजना क े ह लाभ लेने का विवकल्प चुना है, वे नई योजना क े ह पेंशन क े भुग ान क े संबं में प्री म सिंसह क े मामले में विदए गए विनर्णय क े प्रस् र 21 में इस न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनदsश क े ह पेंशन योजना और अलग-अलग राभिश पर ब्याज का भुग ान का लाभ लेने क े हकदार होंगे।।
39. राज्य सरकार ने विदनांक 08 विदसंबर, 2008 को दो कायालय ज्ञापन जारी विकए। पहला उत्तर प्रदेश वे न सविमति, 2008 की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिसफारिरशों क े आ ार पर 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी पेंशन/ग्रेच्युटी/ पारिरवारिरक पेंशन और कम्यूटेशन में संशो न से संबंति र्थीा ।उक्त आदेश में विवशेर्ष रूप से दज विकया गया है विक यह स्र्थीानीय विनकायों और सावजविनक उद्यमों पर लागू नहीं होगा। दूसरा कायालय ज्ञापन विदनांक 08 विदसंबर, 2008 को उन कमचारिरयों क े संबं में जो 1 जनवरी, 2006 से पहले सेवाविनवृत्त हुए हैं, पेंशन और परिरवार पेंशन क े संशो न को लागू करने क े लिलए जारी विकया गया र्थीा। जाविहर है, दूसरा कायालय ज्ञापन प्रासंविगक नहीं है क्योंविक बोर्ड की नई पेंशन योजना उन लोगों क े लिलए लागू की गई र्थीी जो 1 जनवरी 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए र्थीे, जैसा विक 19 मई 2009 की अति सूचना में प्राव ान विकया गया र्थीा। बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों को अपवर्जिज करने वाले 08 विदसंबर, 2008 क े पहले कायालय ज्ञापन को 2016 में पहली बार रिरट यातिचका संख्या 126445 वर्ष 2016 में विवलंब से चुनौ ी दी गई र्थीी। हम यहां यह नोट कर सक े हैं विक बोर्ड की 19 मई, 2009 की अति सूचना विवविनयमन बनाने की शविक्त का प्रयोग कर े हुए जारी की गई र्थीी। 1965 क े अति विनयम की ारा 95 की उप ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह पेंशन/परिरवार पेंशन/ग्रेच्युटी क े संबं में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी विकए गए आदेश बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों पर लागू होंगे। 19 मई, 2009 को बोर्ड द्वारा बनाए गए विवविनयमों क े विकसी भी भाग को कभी चुनौ ी नहीं दी गई। इसलिलए, बोर्ड क े अति कारी और कमचारी जो 19 मई 2009 की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति सूचना क े ह लाभार्थी) र्थीे, वे 08 विदसंबर 2008 क े पहले ज्ञापन और पेंशन और परिरवार पेंशन क े संबं में समय -समय पर राज्य सरकार द्वारा पारिर आदेशों से विनबन्विन् र्थीे। इसक े अलावा, राज्य सरकार क े कमचारिरयों को संशोति पेंशन प्रदान की गई क्योंविक उत्तर प्रदेश वे न सविमति, 2008 की सिसफारिरशों को उन पर लागू कर विदया गया र्थीा। उक्त सिसफारिरशें 14 जनवरी, 2010 को बोर्ड क े कमचारिरयों पर लागू की गई र्थीीं। हम यहां यह नोट कर सक े हैं विक इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने, आक्षेविप विनर्णय द्वारा, विदनांक 08 विदसंबर, 2008 क े कायालय ज्ञापन को रद्द या संशोति नहीं विकया है।
40. 16 अक्त ू बर, 2009 को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी विकया सिजसमें 7 वीं उत्तर प्रदेश वे न सविमति, 2008 में शाविमल विनयमों और श ^ क े अ ीन संशोति वे न संरचना को सावजविनक उद्यमों एवं विनगमों पर लागू विकया गया। बोर्ड ने 30 नवम्बर, 2009 को एक पत्र क े माध्यम से राज्य सरकार को संशोति वे न संरचना लागू करने क े अपने विनर्णय क े बारे में सूतिच विकया। कु छ प्रति वादी द्वारा यह क देने का प्रयास विकया गया विक 14 जनवरी, 2010, विदनांविक आदेश पेंशन से संबंति है। वास् व में, यह क े वल बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों क े लिलए संशोति वे न संरचना की प्रयोज्य ा से संबंति है। 14 जनवरी, 2010 क े आदेश द्वारा राज्य सरकार ने बोर्ड को अनुमाविन आ ार पर संशोति वे न संरचना लागू करने की अनुमति देने क े अपने विनर्णय की सूचना दी, जो विदनांक 16 अक्त ू बर, 2009 क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सरकारी आदेश की संलग्न सारर्णी क े अनुसार 1 जनवरी, 2006 से संशोति वे न संरचना में वे न बैंर्ड और ग्रेर्ड वे न में लागू होगी। उक्त आदेश में दज विकया गया है विक 1 जनवरी, 2006 से अनुमाविन आ ार पर लाभ की गर्णना करक े वे न संरचना का लाभ बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों को त्काल प्रभाव से प्रदान विकया जाएगा। बोर्ड ने 14 जनवरी, 2010 क े उपरोक्त आदेश क े कायान्वयन क े लिलए 23 जनवरी, 2010 को कायालय आदेश जारी विकया र्थीा। 16 जनवरी, 2010 विदनांविक आदेश का अर्थी र्थीा विक संशोति वे न संरचना का वास् विवक लाभ 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी संशोति वे न संरचना क े संदभ में अनुमाविन आ ार पर वे न की गर्णना करक े उस ति भिर्थी से त्काल उपलब् होगा। दूसरे शब्दों में, 14 जनवरी, 2010 क े आदेश में यह स्पJ विकया गया है विक बोर्ड क े अति कारी और कमचारी 1 जनवरी, 2006 से 14 जनवरी, 2010 क संशोति वे न क े हकदार नहीं होंगे और उन्हें क े वल 14 जनवरी, 2010 से संशोति वे न का लाभ विमलेगा। लेविकन 14 जनवरी, 2010 से प्रभावी संशोति वे न की गर्णना कर े समय, संशोति वे न संरचना का लाभ 1 जनवरी, 2006 से सैद्धांति क रूप से प्रदान विकया जाना र्थीा। इस प्रकार, 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी नए वे न ढांचे का लाभ प्रदान कर े हुए 14 जनवरी, 2010 क क े वे न का विन ारर्ण विकया जाना चाविहए। राज्य सरकार द्वारा 15 जनवरी, 2011 को बोर्ड क े आवास आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है विक बोर्ड क े अति कारी और कमचारी 1 जनवरी, 2006 से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 13 जनवरी, 2010 क की अवति क े लिलए संशोति वे न बकाये क े हकदार नहीं होंगे। 16 अक्त ू बर, 2009, 14 जनवरी, 2010 और 15 जनवरी, 2011 क े ये आदेश पेंशन से संबंति नहीं र्थीे। ये आदेश क े वल संशोति वे न संरचना क े अनुदान से संबंति हैं। लेविकन पेंशन की गर्णना लागू वे न संरचना क े आ ार पर की जानी है। इसलिलए, जो लोग 1 जनवरी 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए और जो 19 मई 2009 की अति सूचना क े ह नई पेंशन योजना क े लाभ क े हकदार र्थीे, वे संशोति वे न संरचना से इस हद क लाभान्विन्व होंगे विक उनकी पेंशन की गर्णना 1 जनवरी 2006 से अनुमाविन आ ार पर वे न संरचना क े संशो न क े आ ार पर की जाएगी।
41. राज्य सरकार ने 05 मई, 2015 को बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों को पेंशन लाभ क े संबं में एक और आदेश जारी विकया, सिजसक े संदभ में कायालय आदेश विदनांक 13 मई, 2015 को जारी विकया गया र्थीा। 05 मई, 2015 क े उक्त आदेश का सार इस प्रकार हैः (i) उत्तर प्रदेश आवास और विवकास परिरर्षद क े ऐसे कमचारी सिजनकी भ ) 31 माच 2005 को या उससे पहले की गई र्थीी और जो आज क सेवाविनवृत्त नहीं हुए हैं, वे पेंशन पाने क े हकदार होंगे; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) उत्तर प्रदेश आवास और विवकास परिरर्षद क े ऐसे कमचारी जो सेवाविनवृत्त हो चुक े हैं और सिजन्होंने सेवाविनवृत्त होने क े बाद सीपीएफ योजना क े ह सभी लाभ प्राप्त विकए हैं, वे पेंशन क े हकदार नहीं होंगे; (iii) उत्तर प्रदेश राज्य आवास और विवकास परिरर्षद क े ऐसे कमचारी सिजनकी भ ) 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद की गई र्थीी, वे पेंशन प्राप्त करने क े हकदार नहीं होंगे; और (iv) प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय क े आदेश क े आलोक में, सी. पी. एफ. स्कीम में विकसी सेवाविनवृत्त कमचारी को 9 प्रति श ब्याज देय नहीं है। भविवष्य में, यविद विकसी कमचारी सदस्य को ब्याज देने का सवाल उठ ा है, ो बोर्ड उक्त =च =ुद वहन करेगा और सरकार से कोई दावा नहीं विकया जा सक ा है। उपरोक्त विनदेशों को बोर्ड द्वारा 13 मई, 2015 को जारी विकए गए आदेश में शाविमल विकया गया र्थीा। बोर्ड द्वारा 19 मई, 2009 को जारी अति सूचना में स्पJ रूप से यह प्राव ान विकया गया है विक वे सभी अति कारी और कमचारी जो 1 जनवरी, 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए हैं, वे नई पेंशन योजना क े लाभ क े हकदार होंगे, लेविकन जो लोग 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद कायर र्थीे, वे राज्य सरकार क े नए परिरभाविर्ष अंशदायी पेंशन विनयमों क े ह लाभ क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA हकदार होंगे। उस सीमा क, 5 मई, 2015 क े सरकारी आदेश क े =ंर्ड (i) में संशो न की आवश्यक ा होगी यहां क विक =ंर्ड (ii) में भी इस विनर्णय क े संदभ में स्पJीकरर्ण की आवश्यक ा होगी। सिजन अति कारिरयों और कमचारिरयों ने 7 सिस ंबर 2012 से पहले पुरानी योजना का लाभ लिलया है, वे सिजन उपक्रमों ने 7 सिस ंबर, 2012 क े अं रिरम आदेश की ारी= क े बाद पुरानी योजना का लाभ शपर्थीपत्र देकर ले लिलया है, वे नई पेंशन योजना का लाभ लेने क े हकदार नहीं होंगे। लेविकन सिजन्होंने 7 सिस ंबर, 2012 विदनांविक अं रिरम आदेश क े बाद पुरानी पेंशन योजना का लाभ लिलया है वे नई पेंशन योजना का लाभ लेने क े हकदार होंगे। आदेश क े =ंर्ड (iii) का अर्थी है विक 19 मई, 2009 की अति सूचना क े मद्देनजर, सिजन्हें 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद विनयुक्त विकया गया है, उन्हें उक्त अति सूचना क े ह नई पेंशन योजना का लाभ नहीं विमलेगा। जहां क =ंर्ड (iv) का संबं है, प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय क े विनर्णय क े अनुसार ब्याज क े वल उन कमचारिरयों और अति कारिरयों को देय होगा सिजन्होंने इस न्यायालय द्वारा विदनांक 07 सिस ंबर, 2012 को पारिर अं रिरम आदेश से पहले पुरानी योजना का लाभ नहीं लिलया र्थीा। इस न्यायालय क े विनर्णय क े संदभ में ब्याज उन लोगों को अलग-अलग राभिशयों पर देय होगा, सिजन्होंने 7 सिस ंबर 2012 क े बाद पुरानी योजना क े ह लाभ लिलया है। उपयुक्त सीमा क प्री म सिंसह क े मामले1 में इस न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनदेशों को स्पJ करना होगा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संशोति वे न अवभिशJ क े ह वे न का बकाया
42. अब एक अन्य मुद्दा यह है विक क्या अति कारी और कमचारी 1 जनवरी, 2006 से 13 जनवरी, 2010 क े बीच की अवति क े लिलए संशोति वे न संरचना क े अनुसार वे न बकाए क े हकदार हैं। आक्षेविप विनर्णय इस आ ार पर आगे बढ़ ा है विक राज्य सरकार का यह विनदsश विक बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों को 1 जनवरी 2006 से नए वे न ढांचे का लाभ विमलेगा अभासीय रूप में और वास् व में 14 जनवरी 2010 से 1975 क े अति विनयम की ारा 2 (1) और 1965 क े अति विनयम की ारा 92 (2) क े ह शविक्त का उपयोग कर े हुए जारी विकया गया है। इसलिलए, उच्च न्यायलय ने ारिर विकया विक राज्य सरकार को सेवा श ^ क े विन ारर्ण क े संबं में ऐसा विनदsश जारी नहीं करना र्थीा क्योंविक सेवा श ^ का विन ारर्ण बोर्ड का काय नहीं र्थीा।
43. जहां क बोर्ड क े कमचारिरयों और अति कारिरयों क े लिलए वे न संरचना की प्रयोज्य ा का संबं है, यह दशाने क े लिलए अभिभले= पर कोई सामग्री नहीं र=ी गई है विक ारा 95 क े ह विवविनयमन बनाने की शविक्त का उपयोग बोर्ड द्वारा राज्य सरकार क े कमचारिरयों पर लागू संशोति वे न संरचना को अपने कमचारिरयों पर लागू करने क े संबं में विकया गया र्थीा। बोर्ड ने क े वल इ ना विकया विक उसने अपने कमचारिरयों को संशोति वे न संरचना प्रदान करक े 14 जनवरी, 2010 क े राज्य सरकार क े आदेश को लागू विकया र्थीा। उक्त आदेश 16 अक्त ू बर, 2009 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को जारी राज्य सरकार क े उस आदेश पर आ ारिर है, सिजसक े ह राज्य सरकार क े कमचारिरयों क े लिलए लागू संशोति वे न संरचना को सावजविनक क्षेत्र क े उद्यमों क े कमचारिरयों पर लागू करने का विनर्णय लिलया गया र्थीा। जैसा विक पहले उxे= विकया गया है, 1965 क े अति विनयम की ारा 94 की उप ारा 2 क े =ंर्ड (एनएन) क े ह विनयम बनाने की शविक्त का उपयोग करक े, राज्य सरकार हमेशा बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों क े वे नमान का विन ारर्ण कर सक ी र्थीी। यविद यह माना जा ा है विक राज्य सरकार क े पास 16 अक्त ू बर, 2009 और 14 जनवरी, 2010 क े आदेश जारी करने का कोई अति कार नहीं है, ो बोर्ड क े कमचारिरयों को सरकारी कमचारिरयों क े लिलए लागू संशोति वे न संरचना का लाभ नहीं विमलेगा, क्योंविक बोर्ड ने कमचारिरयों को संशोति वे न संरचना प्रदान करने क े लिलए 1965 अति विनयम की ारा 95 की उप- ारा (1) क े =ंर्ड (च) क े ह विवविनयम नहीं बनाए हैं। आश्चयजनक रूप से, आक्षेविप विनर्णय क े पैराग्राफ 22 में, उच्च न्यायालय ने अभिभविन ारिर विकया है विक 16 अक्त ू बर, 2009 और 14 जनवरी, 2010 विदनांविक आदेशों का बोर्ड क े कमचारिरयों की सेवा श ^ को विन ारिर करने क े प्रयोज्य ा नहीं होंगी ।यविद इस विनष्कर्ष को बरकरार र=ा जा ा है, ो बोर्ड क े कमचारी संशोति वे न संरचना क े लाभ से पूरी रह से वंतिच हो जाएंगे, क्योंविक इस क्षेत्र में कायर बोर्ड द्वारा कोई विवविनयमन नहीं विकया गया है। इसलिलए, बोर्ड क े कमचारी उक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आदेशों क े अनुसार संशोति वे न संरचना क े हकदार होंगे, जैसा विक 15 सिस ंबर, 2011 क े अगले आदेश में स्पJ विकया गया है।
44. 1 जनवरी, 2006 से 14 जनवरी, 2010 क बकाया राभिश क े अनुदान में बोर्ड क े लिलए भारी विवत्तीय विनविह ार्थी शाविमल होंगे ।संशोति वे न संरचना क े अनुसार बकाया राभिश न देने क े लिलए विवत्तीय बाध्य ा एक वै आ ार है। बोर्ड क े अति कारिरयों और कमचारिरयों को उच्च वे न संरचना का लाभ प्रदान करने का विनर्णय राज्य सरकार द्वारा 1 जनवरी 2006 से 14 जनवरी 2010 क े बीच की अवति क े लिलए बकाया का भुग ान न करने की श क े अ ीन लिलया गया र्थीा। इसलिलए, हम आक्षेविप विनर्णय क े ह 1 जनवरी 2006 से 14 जनवरी 2010 की अवति क े लिलए नए नए वे न ढांचे क े अनुसार बकाये का भुग ान करने क े उच्च न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनदsश का अनुमोदन नहीं कर सक े हैं।
45. अ ः, हमारे विनष्कर्ष विनम्नानुसार हैंः (i) हम प्री म सिंसह क े मामले1 में इस न्यायालय क े विनर्णय की इस संशो न क े सार्थी अभिभपुविJ कर े हैं विक राज्य सरकार हमेशा अति विनयम 1965 की ारा 94 की उप- ारा (1) क े =ंर्ड (एनएन) क े ह बोर्ड क े अति कारिरयों (आवास आयुक्त क े अलावा ) और कमचारिरयों की सेवा श ^ का विन ारर्ण कर सक ी है। यविद इस रह की शविक्त का उपयोग विकया जा ा है, ो ारा 95 की उप ारा (1) क े mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA =ंर्ड (च) क े ह बनाए गए विवविनयमों क े वे प्राव ान जो विनयमों क े प्रति क ू ल हैं, शून्य होंगे; (ii) बोर्ड क े वे सभी अति कारी और कमचारी, सिजन्हें 07 सिस ंबर,2012 क पुरानी योजना का लाभ नहीं विमला है और 1 जनवरी, 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए हैं वे बोर्ड द्वारा 19 मई, 2009 को जारी अति सूचना क े अनुसार नई पेंशन योजना का लाभ पाने क े हकदार होंगे बश s वे अन्यर्थीा पात्र हों। र्थीाविप, 1 अप्रैल, 2005 को या उसक े बाद विनयुक्त अति कारी और कमचारी राज्य सरकार द्वारा अति सूतिच नव परिरभाविर्ष अंशदायी पेंशन विनयम से शासिस होंगे; (iii) बोर्ड क े वे अति कारी और कमचारी जो 1 जनवरी, 2006 को या उसक े बाद सेवाविनवृत्त हुए हैं और सिजन्हें आज क पुरानी योजना क े ह लाभ प्राप्त नहीं हुआ है, वे इस न्यायालय द्वारा प्री म सिंसह क े मामले1 में विदए गए विनर्णय क े प्रस् र 21 में यर्थीा विनर्विदJ ब्याज क े भुग ान क े हकदार होंगे। वे अति कारी और कमचारी भी, जो विदनांक 19 मई 2009 की अति सूचना क े अनुसार नई पेंशन योजना क े लाभ क े हकदार हैं और सिजन्होंने 07 सिस ंबर 2012 विदनांविक अं रिरम आदेश क े अनुसार पुरानी योजना क े ह लाभ लिलया है, अं रक राभिश पर ब्याज क े हकदार होंगे जैसा विक प्री म सिंसह क े मामले1 में इस न्यायालय क े विनर्णय क े प्रस् र 21 क े संदभ में विनदsभिश है; mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (iv) बोर्ड क े वे अति कारी और कमचारी सिजन्होंने विदनांक 16 जनवरी 2004 क े कायालय आदेश क े संदभ में शपर्थीपत्र देने क े बाद 7 सिस ंबर 2012 से पहले पुरानी योजना क े ह लाभ स्वीकार कर लिलया है, वे 19 मई, 2009 विदनांविक अति सूचना क े अनुसार लागू की गई नई पेंशन योजना क े लाभ क े हकदार नही होंगे; (v) 19 मई, 2009 की अति सूचना क े अनुसार नई पेंशन योजना क े हकदार लोगों को देय पेंशन राभिश की गर्णना कर े समय, 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी संशोति वे न संरचना क े अनुसार अनुमाविन वे न विन ारर्ण का लाभ प्रदान विकया जाएगा; और (vi) बोर्ड क े वे सभी अति कारी और कमचारी जो 14 जनवरी, 2010 क े सरकारी आदेश क े अनुसार संशोति वे न संरचना का लाभ लेने क े हकदार हैं, उन्हें आज से ीन महीने की अवति क े भी र उक्त लाभ प्रदान विकया जाएगा, यविद पहले प्रदान नहीं विकया गया है। उक्त लाभ दे े समय उनका वे न 1 जनवरी, 2006 से संशोति वे न संरचना क े अनुसार अनुमाविन रूप से विन ारिर विकया जाएगा। र्थीाविप, वे 1 जनवरी, 2006 से 14 जनवरी, 2010 क की अवति क े लिलए संशोति वे न संरचना क े अनुसार वे न बकाये क े हकदार नहीं होंगे। हालांविक, सिजन कमचारिरयों और अति कारिरयों को बकाए का भुग ान पहले ही विकया जा चुका है, उनक े विवरुद्ध कोई वसूली कायवाही प्रारंभ नहीं की जाएगी। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
46. उपरोक्त विनष्कर्ष^ क े संदभ में आक्षेविप विनर्णय और आदे को संशोति विकया जा ा है। दनुसार, लाग क े संबं में विकसी आदेश क े विबना, सिसविवल अपीलों का विनस् ारर्ण विकया जा ा है।................................ न्यायमूर्ति संजय विकशन कौल................................ न्यायमूर्ति अभय एस. ओक................................ न्यायमूर्ति विवक्रम नार्थी नई विदxी 25 नवंबर, 2022 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA