Lucknow Vikas Pratishthan v. Mehdi Hasan

Supreme Court of India · 12 Dec 2022
M. R. Shah; M. M. Sundresh
Civil Appeal No. 8887 of 2022
property appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that land acquisition completed before the enforcement of the 2013 Rules cannot be invalidated under Rule 24(2) of those Rules, upholding the validity of acquisition under the 1894 Act.

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Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या - 8887/2022
लखनऊ विवकास प्राति करण ...अपीलक ा(
बनाम
मेहदी हसन (मृ क) क
े विवति क प्रति विनति एवं अन्य ...प्रति वादी
विन ण( य
माननीय न्यायमूर्ति एम. आर. शाह,
JUDGMENT

1. प्रकीण( पीठ संख्या 4149/2006 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ द्वारा पारिर 03.07.2017 विदनांविक आक्षेविप आदेश एवं विनण(य से व्यथिD एवं असं ुष्ट Dे सिGसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने उक्त रिरट यातिJका को प्लाट संख्या 219,[1] बीघा, 10 विबस्वा, 10 विबस्वानी सिGला मलेसेमऊ, सिGला एवं हसील लखनऊ एवं यह स्पष्ट विकया विक भूविम अG(न, पुनवा(सन और पुनव्य(वस्Dापन में उतिJ प्रति कर और पारदर्शिश ा अति कार अति विनयम, 2013( ए स्मिस्मन पश्चा '' अति विनयम 2013 '' क े रूप में सन्दर्शिभ ) की ारा 24 की उप- ारा (2)1 क े ह उक्त भूविम क े अति ग्रहण को व्यपग माना Gायेगा, लखनऊ विवकास प्राति करण ने व (मान अपील को प्राDविमक ा दी है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. सम्बस्मिन् पक्षों की ओर से पेश हुए विवद्व अति वक्ता श्री आर. बसन् एवं उत्तरोत्तर खरीददारों की ओर से पेश हुए वरिरष्ठ विवद्व अति वक्ता को सना एवं इन्दौर विवकास प्राति करण बनाम मनोहरलाल एवं अन्य (2020) 8 एससीसी 129 क े मामले में न्यायालय क े विनण(य पर विवJार करने क े बाद और Gैसा विक यह ब ाया गया है विक प्रश्नग भूविम का कब्Gा पहले से ही 2003 में ले लिलया गया Dा, अपील को प्राDविमक ा देने में विवलंब क े कारण माफी दी गई, सिGसे पहले ही 25.11.2022 क े पहले क े आदेश द्वारा माफ कर विदया गया Dा। उच्च न्यायालय क े समक्ष मूल रिरट यातिJकाक ा(ओं ने भूविम क े अलग-अलग भूखंडों क े संबं में अति ग्रहण की काय(वाही पर प्रश्न उठाया Dा, हालांविक रिरट यातिJका विवJारा ीन ा रहने क े दौरान रिरट यातिJका संख्या 2 में एक आवेदन दायर विकया गया Dा Gो क े वल मालेसेमू, हसील और सिGला लखनऊ क े गांव क े प्लॉट संख्या 219 क े वल 1 बीघा, 10 विबस्वा और 10 विबस्वांसी क सीविम Dा।

3. 1 उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण(य और आदेश से और प्रति वादी संख्य- 2 और 3 -कलेक्टर और लखनऊ विवकास प्राति करण की ओर से उच्च न्यायालय में दालिखल Gवाबी शपD पत्र पर भी विवJार कर े हुए, यह प्र ी हो ा है विक यह अपीलक ा(-प्राति करण की ओर से विवशेष मामला Dा विक प्रश्नग भूविम का कब्Gा विवशेष भूविम अति ग्रहण अति कारी द्वारा 13.02.2003 को विवति व लिलया गया Dा और 13.02.2003 को लखनऊ विवकास प्राति करण को सौंपा गया Dा।यह भी कहा गया विक मुआवGा अब भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 30 (2) क े ह सिGला न्याया ीश की न्यायालय में Gमा कर विदया गया है।विवशेष भूविम vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd अति ग्रहण अति कारी द्वारा 13.02.2003 को लखनऊ विवकास प्राति करण को सौंपे गए कब्Gे पर विकसी भी रह की JJा( विकए विबना, उसक े बाद उच्च न्यायालय ने रिरट यातिJका को स्वीकार कर लिलया और अति विनयम, 2013 की ारा 24 (2) क े ह सम्बस्मिन् प्रश्नग भूविम को व्यपग करने की घोषणा की, क े वल इस आ ार पर विक भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 2013 की ारा 30(2) क े ह 3 मूल भू-स्वाविमयों को मुआवGे का भुग ान नहीं विकया गया Dा, Gब अति विनयम, 2013 लागू हुआ Dा। Dाविप, थ्य यह है विक भूविम अति ग्रहण अति कारी और लखनऊ विवकास प्राति करण क े अनुसार प्रश्नग भूविम का कब्Gा विवति व रूप से 13.02.2003 को लिलया गया Dा और 13.02.2003 को ही लखनऊ विवकास प्राति करण को सौंप विदया गया Dा।एक बार यह कब्Gा अति विनयम 2013 क े लागू होने से काफी पहले ले लिलया गया Dा।इंदौर विवकास प्राति करण (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा विन ा(रिर कानून क े अनुसार, यह नहीं कहा Gा सक ा है विक भूविम की काय(वाही समाप्त हो गई है।इस न्यायालय द्वारा अति विनयम, 2013 की ारा 24 (2) को आकर्षिष करने क े लिलए विन ा(रिर कानून क े अनुसार, कब्Gा नहीं लेने और मुआवGे का विनविवदा/भुग ान नहीं करने की दोहरी श n को पूरा करना आवश्यक है।उपयु(क्त विनण(य में इस न्यायालय द्वारा विन ा(रिर कानून क े अनुसार, यविद कोई एक श ( सं ुष्ट नहीं हो ी है, ो अति ग्रहण की काय(वाही को अति विनयम, 2013 की ारा 24 (2) क े ह व्यपग नहीं माना Gा ा है।

3. 2 इस न्यायालय की संविव ान पीठ ने पैरा 366 में विनम्नलिललिख म व्यक्त विकया है और अथिभविन ा(रिर विकया हैः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd

366. उपयु(क्त JJा( को ध्यान में रख े हुए, हम विनम्नलिललिख प्रश्नों का उत्तर दे े हैंः ारा 24 (1) (क) क े प्राव ानों क े ह यविद 2013 क े अति विनयम क े लागू होने की ारीख 1-1-2014 को पंJाट नहीं विदया Gा ा है ो काय(वाही में कोई Jूक नहीं होगी।मुआवGे का विन ा(रण 2013 क े अति विनयम क े ह विकया Gाना है। 366.[2] यविद पंJाट न्यायालय क े अं रिरम आदेश क े अं ग( आने वाली अवति को छोड़कर पांJ वष( की अवति क े भी र पारिर विकया गया है, ो 1894 अति विनयम क े ह 2013 अति विनयम की ारा 24 (1) (बी) क े ह काय(वाही Gारी रहेगी, मानो इसे विनरस् नहीं विकया गया हो। 366.[3] ारा 24(2) में कब्Gे और मुआवGे क े बीJ प्रयुक्त शब्द "या" को "न" या "और" क े रूप में पढ़ा Gाना Jाविहए।2013 क े अति विनयम की ारा 24 (2) क े ह भूविम अति ग्रहण की काय(वाही की समझी Gाने वाली व्यपग अवति उस स्मिस्Dति में हो ी है, Gब उक्त अति विनयम क े लागू होने से पहले पांJ साल या उससे अति क समय क अति कारिरयों की विनस्मिxyय ा क े कारण भूविम का कब्Gा नहीं लिलया गया हो या क्षति पूर्ति का भुग ान नहीं विकया गया हो।दूसरे शब्दों में, यविद कब्Gा ले लिलया गया है, ो मुआवGा नहीं विदया गया है ो कोई Jूक नहीं हुई है।इसी रह, अगर मुआवGा विदया गया है, कब्Gा नहीं लिलया गया है ो कोई Jूक नहीं हो ी है।

366.4. - 2013 अति विनयम की ारा 24 (2) क े मुख्य भाग में "भुग ान" अथिभव्यविक्त में न्यायालय में प्रति कर Gमा करना शाविमल नहीं है। ारा 24(2) क े परन् ुक में यविद भुग ान Gमा न विकया Gाये ो उसक े परिरणाम विदये गये है यविद इसे बहु से भूविम ारको क े द्वारा Gमा नहीं विकया Gा ा ो सभी लाभाDz 1894 अति विनयम की ारा 4 क े ह भूविम अति ग्रहण की अति सूJना vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd क े ति थिD से 2013 क े ह मुआवGे क े हकदार होंगें। यविद भूविम अति ग्रहण अति विनयम 1894 की ारा ३१ क े श n को पूरा नहीं कर े ो उक्त अति विनयम की ारा 34 क े ह व्याG को भी अनुमति प्रदान की Gा सक ी है। मुआवGा को Gमा न करने का परिरणाम यह नहीं हाे सक ा की भूविम अति ग्रहण की काय(वाही को व्यपग कर विदया Gाये।पांJ वष( या उससे अति क अवति क े लिलए अति कांश Gो क े संबं में गैर-Gमा क े मामले में, 1894 अति विनयम की ारा 4 क े ह भूविम अति ग्रहण क े लिलए अति सूJना की ारीख से 2013 े ह भूविम मालिलकों को मुआवGा का भुग ान विकया Gाना है। यविद कोई व्यविक्त 1894 क े अति विनयम की ारा 31 (1) क े अ ीन उपबंति रूप में प्रति कर क े लिलए आवेदन कर ा है ो उसक े लिलए यह दावा करना संभव नहीं है विक न्यायालय में प्रति कर का भुग ान न विकए Gाने या Gमा न विकए Gाने क े कारण ारा 24 (2) क े अ ीन अG(न व्यपग हो गया है।भुग ान करने की बाध्य ा ारा 31 (1) क े ह राथिश को टेंडर करक े पूरी की Gा ी है।सिGन भू-स्वाविमयों ने मुआवGा लेने से इनकार कर विदया Dा या सिGन्होंने अति क मुआवGे क े लिलए संदभ( की मांग की Dी, वे यह दावा नहीं कर सक े विक 2013 क े अति विनयम की ारा 24 (2) क े ह अति ग्रहण की प्रविyया समाप्त हो गई Dी।

366.6. 2013 अति विनयम की ारा 24 (2) क े परन् ुक को ारा 24 (2) क े भाग क े रूप में माना Gाना है, न विक ारा 24 (1) (बी) क े भाग क े रूप में।

366.7. 1894 क े अ ीन और ारा 24 (2) क े अ ीन अनुध्या रूप में कब्Gा लेने का रीका पंJनामा/ज्ञापन ैयार करना है।एक बार 1894 क े अति विनयम की ारा 16 क े ह कब्Gा लेने पर अति विनण(य पारिर हो Gाने क े बाद, 2013 क े अति विनयम की ारा 24 (2) क े ह कोई विवविनवेश का vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd प्राव ान नहीं है, क्योंविक एक बार कब्Gा लेने क े बाद ारा 24 (2) क े ह कोई Jूक नहीं हो ी है। 1-1-2014 को संबंति प्राति कारी क े पास लंविब भूविम अति ग्रहण की काय(वाही में 2013 े लागू होने से पहले पांJ वष( या उससे अति क समय क कब्Gा लेने और मुआवGा देने में अति कारिरयों की विनस्मिxyय ा क े कारण व्यपग समझी Gाने वाली काय(वाही क े लिलए ारा 24 (2) क े प्राव ान लागू हो े हैं।न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े अस्मिस् त्व की अवति को पांJ वष( की गणना में अपवर्जिG विकया Gाना है।

366.9. 2013 अति विनयम की ारा 24 (2) भूविम अति ग्रहण की पूण( काय(वाही की वै ा पर सवाल उठाने क े लिलए नए वाद हे ुक को Gन्म नहीं दे ी है। ारा 24 2013 क े लागू होने की ारीख अDा( 1-1-2014 को लंविब विकसी काय(वाही क े लिलए लागू हो ी है।यह न ो पुराने और समयबद्ध दावों को पुनGzविव कर ा है और न ही अंति म काय(वाही को विफर से खोल ा है और न ही भूविम मालिलकों को अति ग्रहण को अवै घोविष करने क े लिलए न्यायालय क े बGाय ट्रेGरी में मुआवGे की Gमा करने क े रीक े की वै ा पर सवाल उठाने की अनुमति दे ा है।

4. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और विवशेष भूविम अति ग्रहण अति कारी क े अनुसार, Gैसा विक कब्Gा 13.02.2003 को लिलया गया Dा और 13.02.2003 को लखनऊ विवकास प्राति करण को सौंप विदया गया Dा और इंदौर विवकास प्राति करण उपरोक्त क े मामले में इस न्यायालय क े विनण(य को ध्यान में रख े हुए, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण(य और आदेश अपोषणीय है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd परिरणामस्वरूप, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण(य और आदेश को विनरस् और अपास् विकया Gा ा है। दनुसार व (मान अपील को अनुमति है। उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर मूल रिरट यातिJका खारिरG की Gा ी है। कोई लाग नहीं। …………………... [एम. आर. शाह] …………………… [एम. एम. सुन्दरेस] नई विदल्ली 12 विदसम्बर, 2022 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd