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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी अपील संख्या 9085/2022
(@विवशेष अनुमति याति)का (दीवानी) संख्या 9558/2020)
(@ डायरी संख्या 16450/2020)
न्यू ओखला इण्ड़स्ट्रि678यल डेवलपमेन्7 अथॉरिर7ी ... अपीलक ा<
बनाम
ओमवीर सिंसह और अन्य ... प्रत्यथBगण
विनण<य
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT
1. प्रथम अपील तिडफ े स्ट्रिI7व संख्या 308/2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 28.01.2020 को पारिर आक्षेविप विनण<य और आदेश से mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व्यथिथ और असं ुष्ट महसूस कर े हुए नोएडा ने व <मान अपील दायर की है, जिVसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने लगभग 16 साल की अवति क े बाद (अपीलक ा< क े अनुसार, 26 साल की देरी हुई थी) उक्त अपील को खारिरV कर विदया है, जिVसक े ह उच्च न्यायालय ने भूविम मालिलकों को देय मुआवVे को 297 रुपये प्रति वग< गV क बढ़ा विदया है।
2. संक्षेप में, व <मान अपील क े थ्य विनम्नलिललिख हैंः 2.[1] यह विक गाजिVयाबाद जिVले (अब जिVला गौ म बुद्ध नगर) क े हसील और परगना दादरी क े घेVा ति लपा7ाबाद गांव में स्ट्रि6थ प्रश्नग भूविम का अति ग्रहण नोएडा द्वारा विनयोजिV विवकास क े लिलए विकया गया था, जिVसक े लिलए विदनांक 22.11.1982 को ारा 4 क े ह अति सू)ना Vारी की गई थी। भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 6 क े प्राव ानों क े ह एक घोषणा 23.11.1982 को Vारी की गई थी। अति ग्रविह भूविम का कब्Vा राज्य द्वारा 22.02.1983 को ले लिलया गया था। भूविम अति ग्रहण अति कारी/कलेI7र ने विदनांक 05.09.1983 क े अति विनण<य की घोषणा की और गाँव में ही भूविम क े क ु छ विह6सों क े विदनांक 02.11.1982 क े विवक्रय विवलेख क े आ ार पर प्रति बीघा 30,000/- रुपये का मुआवVा अति विनणB /विन ा<रिर विकया। प्रत्यर्थिथयों क े विप ा ने मुआवVे को 6वीकार कर लिलया। मूल मालिलकों - प्रत्यर्थिथयों क े विप ा की ओर पर, भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 18 क े ह अति विनण<य क े लिखलाफ आपलिoयां उठा े हुए एक रेफ े रेन्स(संदभ<) विकया गया। मूल दावेदारों ने प्रति बीघा 60,000 रुपये की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds दर से मुआवVे का दावा विकया। 04.05.1989 को एक विव[6] ृ विनण<य और आदेश द्वारा, संदभ< न्यायालय ने अन्य संदभr क े साथ उक्त संदभ< को खारिरV कर विदया। पुनर्विवलोकन प्राथ<ना पत्र दायर विकए गए थे Vो वष< 1998 में खारिरV कर विदए गए थे। यह विक वष< 2014/2015 में पुनर्विव)ार आवेदनों क े अ6वीकार विकए Vाने की ारीख से 16 साल की अवति क े बाद, प्रत्यथB ने उच्च न्यायालय क े समक्ष व <मान पहली अपील दायर की और कु छ अन्य प्रथम अपीलों में विनण<य पर अलम्ब लिलया जिVसक े द्वारा मुआवVा प्रति वग< गV 297 रुपये क बढ़ा विदया गया था। आक्षेविप विनण<य और आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने 16 वष< की देरी को माफ कर विदया है, हालांविक उन्होनें विवलंब की अवति क े दौरान ब्याV से इनकार कर विदया है और मुआवVे की राथिश को 297 रुपये प्रति गV क बढ़ा विदया है। इसलिलए नोएडा की ओर से व <मान अपील की गयी।
3. नोएडा की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता ने Vोरदार रीक े से कहा है विक उच्च न्यायालय ने पुनर्विवलोकन आवेदन क े खारिरV होने की ारीख से 16 साल की अवति क े बाद और संदभ< न्यायालय द्वारा विनण<य की ारीख से 26 साल की अवति क े बाद अपील पर विव)ार करने में व[6] ु ः गल ी की है। 3.[1] यह कहा गया है विक अन्यथा भी, 1982 क े भूविम अति ग्रहण क े संबं में आशा राम (मृ ) द्वारा विवति क प्रति विनति और अन्य बनाम उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद और एक अन्य, (2022) 2 एससीसी 567 क े मामले में इस न्यायालय क े बाद क े विनण<य को ध्यान में रख े हुए मेरिर[7] पर भी, इस माननीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds न्यायालय ने मुआवVे की राथिश को घ7ाकर 120/- रुपये प्रति वग< गV कर विदया है, दावेदार उच्च न्यायालय द्वारा विदए गए 297/- रुपये प्रति वग< गV की दर से मुआवVे क े हकदार नहीं होंगे। 3.[2] यह कहा गया है विक इस प्रकार, उoर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद (पूव क्त) क े मामले में बाद क े विनण<य में, इस न्यायालय ने नरेंद्र और अन्य बनाम उoर प्रदेश राज्य और अन्य, (2017) 9 एससीसी 4 426 क े मामले में अपने पहले क े विनण<य पर विव)ार विकया, जिVसक े द्वारा इस न्यायालय ने वष< 1988 क े नVदीकी गांवों क े संबं में अति ग्रहण क े लिलए प्रति वग< गV 297 रुपये की दर से मुआवVे की अनुमति दी है। थाविप यह कहा गया है विक वष< 1982 से 1986/1988 क े बी) हुए विवकास को देख े हुए, इस न्यायालय ने उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद (उपरोक्त) ने दावेदारों की ओर से 297 रुपये प्रति वग< गV देने का मामला 6वीकार नहीं विकया और वष< 1982 में अति ग्रविह भूविम का मुआवVा 120 रुपये प्रति वग< गV विन ा<रिर विकया।
4. व <मान अपील का विवरो कर े हुए, मूल दावेदारों की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता ने Vोरदार रीक े से कहा है विक मामले क े थ्यों और परिरस्ट्रि6थति यों में, उच्च न्यायालय ने यह कह े हुए 16/26 वषr की देरी को माफ करने में कोई गल ी नहीं की है विक दावेदार न्यायसंग मुआवVे क े हकदार हैं। 4.[1] यह कहा गया है विक विनक7व B गांवों क े संबं में, समान अति ग्रहण क े संबं में वष< 2014 में पारिर विनण<य और आदेश द्वारा य विकए गए अन्य भूविम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds मालिलकों क े मामले को ध्यान में रख े हुए, मुआवVे की राथिश को प्रति वग< गV 297 रुपये क बढ़ा विदया गया था। इसी क े अनुसरण में, व <मान मामले में मुआवVे की राथिश 297 रुपये प्रति वग< गV की दर से दी गई है, जिVसे अनुति) नहीं कहा Vा सक ा और उच्च न्यायालय ने कोई गल ी नहीं की है। 4.[2] मूल दावेदारों की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ता ने उच्च न्यायालय क े विनम्नलिललिख विवविनश्चयों पर अत्यति क अवलम्ब लिलया है, जिVसकी इस न्यायालय द्वारा पुविष्ट की गई है, जिVसक े द्वारा मुआवVा 297/- रुपए प्रति वग< गV अव ारिर विकया गया है। सू)ी विववरण मकनपुर गांव में भूविम अति ग्रहण क े विनण<यों की सू)ी क्रम सं. गाँव अति सू)नाओं की ति थिथ और क्षति पूर्ति (प्रति वग< गV) न्यायालय का विनण<य पृष्ठ संख्या 1 मकनपुर, (वैशाली) जिVला गाजिVयाबाद, हसील दादरी 12.09.1986/ 28.02.1987 [297/-] एफ.ए. संख्या 910/2000 वाद: Vीडीए बनाम काशी राम. [विनण<य की ति थी: 13.11.2014]. एसएलपी (सी) संख्या 5815/2015, Vीडीए बनाम काशी राम और अन्य को 15.05.2015 को खारिरV की गयी। 6-26 27-32 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds पुनर्विवलोकन याति)का(सी) संख्या 2632/2015 06.10.2015 को खारिरV की गई। उप)ारात्मक याति)का(सी) संख्या 94/2016 विदनांक 15.03.2016 को खारिरV कर दी गई। 33-34 35-37 2 मकनपुर, (सेI7र 62, नोएडा) जिVला गौ म बुद्ध नगर, 15.03.1988 [297/-] एफ संख्या 737, नोएडा बनाम सुरेन्द्र सिंसह क े वाद में उच्च न्यायालय द्वारा मकनपुर क े लिलए 135 रू/ की दर से क्षति पूर्ति दे े हुए विदनांक 15.04.2015 क े विनण<य को इस न्यायालय द्वारा दीवानी अपील संख्या 1506-1517/2016, प्रदीप क ु मार बनाम उ.प्र. राज्य (2016) 6 एससीसी 308 क े वाद में विदनांक 16.02.2016 क े विनण<य क े द्वारा अपा6 कर विदया गया था और मुकदमें पर नए जिसरे से विव)ारण क े लिलए प्रति प्रेविष कर विदया गया था। प्रति प्रेषण क े बाद, उच्च न्यायालय ने एफए संख्या 737 में नोएडा बनाम सुरेंद्र सिंसह क े साथ नोएडा की अन्य प्रथम अपीलों को खारिरV कर विदया और विकसानों द्वारा दायर प्रथम अपीलों (एफए संख्या 522/2009 प्रदीप क ु मार बनाम उoर प्रदेश राज्य, मुख्य मामला होने से) को 6वीकार कर लिलया और विदनांक 21.04.2016 क े अंति म विनण<य द्वारा प्रति वग< गV 297 रुपये का मुआवVा प्रदान विकया। इसे अंति म रूप दे विदया 38-95 96-98 99- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds गया है। [नो7ः इस न्यायालय क े समक्ष सू)ीबद्ध मामलों क े व <मान समूह में, विदनांक 21.04.2016 क े इस फ ै सले क े आ ार पर मुआवVा को 297 रुपये प्रति वग< गV विदया गया है Iयोंविक वे उसी अति सू)ना और उसी गांव (मकनपुर) से संबंति हैं और उसी संदभ< न्यायालय क े आदेश से उत्पन्न हुए हैं।]
3. मकनपुर, (वैशाली) 24.02.1988 [297/- रुपये] इस न्यायालय ने दीवानी अपील संख्या 10429-10430/2017, नरेंद्र बनाम उoर प्रदेश राज्य (2017) 9 एससीसी 426 क े मामले में 297/- रुपए की दर से मुआवVा अति विनणB विकया है। 125-
4. मकनपुर, (इंविदरापुरम) जिVला गाजिVयाबाद, 16.08.1988 [297/ रूपये] इस न्यायालय ने दीवानी अपील संख्या 16960/2017, Vयप्रकाश (डी) बनाम उoर प्रदेश राज्य, (2020) 11 एससीसी 770 में विदनांक 24.11.2017 क े विनण<य द्वारा मुआवVे को बढ़ाकर 297 रुपये (नरेन्द्र क े वाद में अनुसार) कर विदया। 136-
5. मकनपुर, इस माननीय न्यायालय ने दीवानी अपील संख्या 16961/2017, ओम प्रकाश बनाम उoर प्रदेश राज्य में Vय प्रकाश (पूव क्त) क े मामले में विदनांक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds हसील दादरी 24.10.2017 क े उसी फ ै सले क े ह मुआवVे को बढ़ाकर 297/- रुपये कर विदया।
6. मकनपुर, (वैशाली) 28.02.1987 यह मामला भी उपरोक्त उजि•लिख काशीराम क े विनण<य (पूव क्त) से उत्पन्न हुआ था। काशी राम मामले में फ ै सले क े बाद, प्रथम अपीलों में से एक एफए संख्या 484/2019 गाजिVयाबाद विवकास प्राति करण बनाम वित्रलोक )ंद एवं अन्य क े मामले में एक प्राथ<ना -पत्र सीएमएएन संख्या 194412/2016 दालिखल विकया गया था, इसको भी काशी राम (पूव क्त) क े समूह क े साथ विनणB कर विदया गया जिVसमें 297/- रुपये प्रति वग< गV की दर से विन ा<रिर मुआवVे में से विवकास शुल्क क े रूप में 33 प्रति श क7ौ ी क े रूप में विनणB कर विदया गया था, लेविकन इसे खारिरV कर विदया गया था। एसएलपी (सी) संख्या 12547/2017, गाजिVयाबाद विवकास प्राति करण बनाम वित्रलोक )ंद और अन्य को उक्त खारिरV करने क े लिखलाफ दायर विकया गया था, जिVसमें नोवि7स Vारी कर े समय, विदनांक 28.04.2017 क े आदेश द्वारा, यह विवशेष रूप से दV< विकया गया था विक Vीडीए विवकास प्रभारों क े रूप में 33% की क7ौ ी न होने से व्यथिथ था। 138- 140- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds थाविप, उक्त एसएलपी को विदनांक 03.08.2017 क े आदेश द्वारा खारिरV कर विदया गया था।
7. मकनपुर, इस न्यायालय ने दीवानी अपील संख्या 9208- 9211/2018, मंगू सिंसह बनाम उoर प्रदेश राज्य क े मामले में विदनांक 10.09.2018 क े फ ै सले क े ह मुआवVा बढ़ाकर 297/- रुपये कर विदया। 142- उपरोक्त दलीलों को रख े हुए और उच्च न्यायालय क े साथ -साथ इस न्यायालय द्वारा पारिर उपरोक्त विनण<यों/आदेशों पर अवलम्ब ले े हुए, यह प्राथ<ना की गयी विक व <मान अपील को खारिरV कर विदया Vाए।
5. हमने संबंति पक्षों की ओर से पेश विवद्वान अति वक्ताओं को विव[6] ार से सुना है। 5.[1] Vहां क अपीलक ा< की ओर से विदए गए इन कr का संबं है विक उच्च न्यायालय ने अपील करने में 16/26 वष< क े विवलंब को माफ करक े त्रुवि7 कारिर की है, मामले क े विवथिशष्ट थ्यों और परिरस्ट्रि6थति यों में और इस थ्य को ध्यान में रख े हुए विक प्रति कर की राथिश को बढ़ाने और अपील को ग्रहण कर े हुए भी, उच्च न्यायालय ने विवलंब की अवति क े लिलए ब्याV से इंकार कर विदया है और दावेदारों क े पक्ष में अपने विववेकाति कार का प्रयोग विकया है, हमें अपील करने में विवलंब को माफ करने क े उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश में ह[6] क्षेप करने का कोई कारण नहीं विदख ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds 5.[2] अब Vहां क अपील क े गुण-दोष और उच्च न्यायालय द्वारा प्रति कर की रकम को 297/- रुपए प्रति वग< गV क बढ़ाने क े आक्षेविप विनण<य और आदेश का संबं है और दावेदारों की ओर से उच्च न्यायालय व इस न्यायालय क े पूव क्त उजि•लिख विवविनश्चयों पर अवलम्ब लेने का संबं है, प्रारंभ में यह ध्यान विदया Vाना आवश्यक है विक व <मान मामले में, अति ग्रहण वष< 1982 का है और अन्य सभी मामलों में अति ग्रहण वष< 1986/88 का है।उन सभी मामलों में, Vहां मुआवVे की राथिश 297 रुपये प्रति वग< गV की दर से विन ा<रिर की गई है, अति ग्रहण वष< 1986/1988 क े हैं, Vो नोएडा/गाजिVयाबाद क े विवकास क े लिलए अति ग्रविह मकनपुर गांव और आसपास क े अन्य गांवों क े संबं में है। नरेंद्र और अन्य (पूव क्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने मकनपुर गांव में अति ग्रही भूविम और उसी परिरयोVना क े लिलए आसपास क े अन्य गांवों में अति ग्रविह भूविम क े संबं में मुआवVे की राथिश को 297 रुपये प्रति वग< गV क बढ़ा विदया था, लेविकन वह वष< 1986/1988 क े अति ग्रहण क े संबं में था। थाविप, बाद में उoर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद (पूव क्त) क े मामले में और वष< 1982 क े अति ग्रहण क े संबं में ग्राम मकनपुर और ग्राम प्रह्लादगढ़, ग्राम झंडापुर, ग्राम साविहबाबाद, ग्राम अथ<ला में स्ट्रि6थ आसपास क े अन्य गांवों क े संबं में, नरेन्द्र और अन्य (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय क े विनण<य पर विव)ार करने क े बाद, इस न्यायालय ने 120 रुपये प्रति वग< गV का मुआवVा विन ा<रिर विकया है। उपरोक्त विनण<य में, नरेंद्र और अन्य (पूव क्त) क े मामले में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds विदए गए 297 रुपये प्रति वग< गV क े दावे को 6वीकार करने से इनकार कर े हुए, Vो 1988 क े अति ग्रहण क े संबं में था, इस न्यायालय ने कहा है विक 5 साल बाद की अति सू)ना क े आ ार पर विन ा<रिर मुआवVा, उस भूविम क े लिलए मुआवVा विन ा<रिर करने का पैमाना नहीं हो सक ा है Vो पां) साल पहले अति ग्रविह की गई है। इस न्यायालय ने इस थ्य का भी संज्ञान लिलया है विक वष< 1982 और 1987/1988 क े बी), विवकास गति विवति यां शुरू की गई थीं। उoर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद (पूव क्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति को व <मान मामले में लागू कर े हुए, दावेदार व <मान मामले में अति ग्रहण की ारीख से 5 साल क े बाद अति ग्रही भूविम क े संबं में अति विनणB उसी मुआवVे क े हकदार नहीं होंगे। Vैसा विक ऊपर कहा गया है, व <मान मामले में, ारा 4 की अति सू)ना 22.11.1982 को Vारी की गई थी और ग्राम मकनपुर व अन्य गांवों क े संबं में अवलम्ब लिलए गए विनण<य वष< 1986/88 क े हैं, Vो, Vैसा विक इस न्यायालय द्वारा उoर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद (पूव क्त) क े मामले में पूव क्त विनण<य में पाया गया था, आ ार नहीं हो सक ा है। उपरोक्त परिरस्ट्रि6थति यों में, 297/- रुपए प्रति वग< गV की दर से मुआवVा देने का उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण<य और आदेश पोषणीय नहीं है और यह अथिभविन ा<रिर विकया Vा ा है विक मूल दावेदार 120/- रुपए प्रति वग< गV की दर से मुआवVा पाने क े हकदार होंगे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds
6. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और ऊपर ब ाए गए कारण से, व <मान अपील भाग ः सफल हो ी है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप विनण<य और आदेश को ए द्द्वारा संशोति विकया Vा ा है। यह आदेश और विनदˆश विदया Vा ा है विक मूल दावेदार भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 क े प्राव ानों क े ह अनुम अन्य सभी वै ाविनक लाभों और ब्याV क े साथ 120 रुपये प्रति वग< गV की दर से मुआवVे क े हकदार होंगे। थाविप, दावेदार उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील करने में विवलंब की अवति क े लिलए, अथा< पुनर्विवलोकन क े खारिरV होने की ति थी से उच्च न्यायालय क े समक्ष प्रथम अपील दायर करने क की अवति क े लिलए, मुआवVे की बढ़ी हुई राथिश पर अति विनयम, 1894 क े ह ब्याV सविह सांविवति क लाभों क े हकदार नहीं होंगे। दनुसार, व <मान अपील को पूव क्त सीमा क अनुमति प्रदान की Vा ी है। लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। ………………………….. (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह) ………………………….. (न्यायमूर्ति विहमा कोहली) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds नई विद•ी; 15 विदसंबर, 2022. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds