Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 8822-8823/2022
[एसएलपी (सी) संख्या 10386-10387/2020 से उत्पन्न]
उत्तर प्रदेश राज्य ... अपीलक ा3
बनाम
करूणेश क
ु मार और अन्य ... प्रत्यर्थी; (गण)
विन ण3 य
माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश,
JUDGMENT
1. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की खण्ड पीठ ने व्यविHग प्रत्यर्थिर्थीयों की रिरट यातिMका को अपने विनण3य क े माध्यम से अनुमति दे े हुए हमारे सामने Mुनौ ी विदये गये विवद्व एकल न्याया ीश क े आदेश को अपास् कर विदया। सिUन उम्मीदवारों ने विवति क प्रविWया का अवलोकन कर े हुए प्र ीक्षा की र्थीी, उन्होंने आक्षेविप विनण3य और आदेश क े विवस् ारिर लाभ की मांग कर े हुए अभिभयोग क े लिलए आवेदन दायर विकया। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2022 INSC 1274
2. व 3मान अपीलें उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी सार्थी-सार्थी यह दलील दे े हुए दायर की गई हैं विक Uो उम्मीदवार उत्तर प्रदेश अ ीनस्र्थी सेवा Mयन आयोग (सिUसे इसमें इसक े पश्चा ् 'आयोग' कहा गया है) द्वारा अग्रेविb सूMी का विहस्सा नहीं हैं, उन्हें भी ग्राम पंMाय अति कारी, एकल संवग[3], समूह (सी) क े पद पर प्रस् ाविव नौकरिरयों को ग्रहण न कर े हुए, विनयुविH प्राति कारी द्वारा अनुमोविद Mयविन उम्मीदवारों क े अनुसरण में उत्पन्न होने वाली रिरविHयों में विवMार करने क े लिलए विनदdभिश विकया गया र्थीा। विवद्व एकल न्याया ीश ने विनUी प्रति वादी द्वारा दायर रिरट यातिMका को खारिरU कर विदया, सिUसे खण्ड पीठ द्वारा इस आ ार पर खारिरU कर विदया गया र्थीा विक उत्तर प्रदेश ग्राम पंMाय अति कारी सेवा विनयम, 1978 (सिUसे इसमें इसक े बाद 1978 विनयमों क े रूप में संदर्थिभ विकया गया है) क े विनयम 15, यविद उतिM व्याख्या की Uा ी है, ो उनक े प्रदश3न क े आ ार पर क ार में इं Uार कर रहे व्यविHयों पर विवMार करने में सुविव ा होगी।अपीलक ा3 क े द्वारा एक पुन3विवMार यातिMका का आवेदन दायर विकया गया सिUसमें अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी यह भी कहा गया र्थीा विक लागू विकया Uाने वाला प्रासंविगक विनयम उत्तर प्रदेश ग्रुप 'सी' पदों पर सी ी भ; (मोड और प्रविWया) विनयम, 2015 है (सिUसे ए स्मिस्मन पश्चा '2015 विनयम' क े रूप में संदर्थिभ विकया गया है)। कभिर्थी आवेदन उपयु3H दलीलों पर ध्यान विदए विबना खारिरU कर विदया गया.राज्य व 3मान काय3वाही में पूव H दोनों आदेशों पर Mुनाै ी देना Mाह ा है।
3. अपीलक ा3 की विवद्व अति वHा सुश्री रुतिMरा गोयल और प्रति वादी नं. १ से ३ क े विवद्वान वरिरष्ठ अति वHा श्री वी. क े. शुक्ला, और श्री एम. आर. शमशाद को प्रति वादी नं. ४ क े लिलए सुना। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk थ्यों परः
4. ग्राम पंMाय अति कारी क े 3587 ग्रुप सी पदों को भरने क े उद्देश्य से 22.06.2015 को एक विवज्ञापन विदया गया र्थीा।लिललिख परीक्षा और साक्षात्कार क े बाद 2015 क े विनयमों क े अनुसार Mयन प्रविWया पूरी की गई। अत्यति क साव ानी बर े हुए, हालांविक आवश्यक नहीं है, 1978 क े विनयमों में भी 22.11.2016 को संशो न विकया गया।अंति म परिरणाम 24 विदसंबर, 2016 को घोविb विकया गया र्थीा और अप्रैल और मई, 2017 क े दौरान विनयुविH पत्र Uारी विकए गए र्थीे।रिरट यातिMका विवMारा ीन ा रहने क े दौरान, पूव[3] परीक्षा की भर्ति में रिरH रिरविHयों को ध्यान में रख े हुए अगले Mयन की प्रविWया शुरू की गई र्थीी।उस समय, आक्षेविप आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा पारिर विकए गए र्थीे।
5. विनUी प्रत्यर्थी; और भ; विकए गए आवेदकों ने स्वेच्छा से Mयन प्रविWया में भाग लिलया।Uाविहर है, उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया गया र्थीा, लेविकन दूसरों क े सार्थी लिललिख परीक्षा और साक्षात्कार की भ; प्रविWया से गुUरना पड़ा र्थीा।यह उनक े दुभा3ग्य की बा है विक उन्हें आयोग द्वारा विनयुविH प्राति कारी को भेUी गई सूMी में स्र्थीान नहीं विमला।हालांविक, पूरी प्रविWया 2015 क े अनुरूप और उत्तर प्रदेश अ ीनस्र्थी सेवा Mयन आयोग अति विनयम, 2014 (सिUसे ए स्मिस्मनपश्चा 2014 अति विनयम कहा गया है) क े ह प्रदत्त शविHयों का उपयोग कर े हुए की गई र्थीी, लेविकन 1978 क े विनयमों पर अवलंब लिलया गया र्थीा, सिUसे उच्च न्यायालय का समर्थी3न विमला है। प्रासंविगक विनयमः vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
6. हम पहले भ; प्रविWया को शासिस करने वाले उपबं ों क े विवभिशष्ट संदभ[3] में, अं व3लिल मुद्दे की सही समझ रखने क े लिलए सभी सुसंग विनयमों और परिरभाbाओं पर विवMार करेंगे। ए. उत्तर प्रदेश ग्राम पंMाय अति कारी सेवा विनयम, 1978:-
7. ये विनयम भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 309 क े परन् ुक क े अ ीन प्रदत्त शविHयों द्वारा पुरःस्र्थीाविप ग्राम पंMाय अति कारी क े पद पर विनयुविH से संबंति हैं। इसमें वb[3] 1989 में संशो न विकया गया है।हम दो संशो नों क े बारे में चिंMति हैं, सिUनक े द्वारा सविमति क े गठन में परिरव 3न क े सार्थी समूह 'डी' पदों को समूह 'सी' पदों में बदल विदया गया र्थीा।पहला संशो न उपयु3H परिरव 3न का प्राव ान करने वाले विनयम में है और दूसरा विनयम 15 (1) क े संबं में है।
8. विनयम 15 (1) Mयन सविमति की संरMना में परिरव 3न कर ा है Uबविक विनयुविH प्राति कारी वही रह ा है।विनयम 15 (4), सिUसमें संशो न नहीं विकया गया, सिUसमें Mयन सविमति को साक्षात्कार में प्राप्त अंकों द्वारा प्रकट विकए गए अनुसार योग्य ा क े Wम में उम्मीदवारों की सूMी ैयार आदेश में सक्षम बनाया।इसमें यह भी प्राव ान विकया गया है विक सूMी को क ु ल रिरविHयों की संख्या क े 25 प्रति श से अति क नहीं बढ़ाया Uाएगा।
9. उपरोH विनयमों क े ह, Mयन सविमति द्वारा क े वल एक साक्षात्कार क े बUाय विकसी भी लिललिख परीक्षा पर विवMार नहीं विकया गया र्थीा।इस रह की कोई प्र ीक्षा सूMी स्पष्ट रूप से उपलब् नहीं कराई गई है, हालांविक रिरविHयों की ुलना में सूMी में vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk बड़ी संख्या में नाम शाविमल होंगे।अब हम एक बेह र समझ क े लिलए पूव H प्राव ान को रिरकॉड[3] पर रखेंगे। विनयम 15 (4). Mयन सविमति साक्षात्कार में प्राप्त अंकों द्वारा प्रकट योग्य ा क े अनुसार उम्मीदवारों की सूMी ैयार करेगी।सूMी में शाविमल नामों की संख्या रिरविHयों की संख्या से अति क (लेविकन 25 प्रति श से अति क नहीं) होगी। बी. सरकारी आदेश विदनांक 15.11.1999:
10. अपीलक ा3 द्वारा एक पद क े लिलए Mयन क े मामले को छोड़कर प्र ीक्षा सूMी की विकसी भी अव ारणा को समाप्त करने क े लिलए सरकारी आदेश पारिर विकया गया र्थीा, सिUसका अर्थी3 है विक यविद विकसी एक विवशेb पद क े लिलए Mयविन उम्मीदवार को उम्मीदवार क े शाविमल न होने क े कारण भरा नहीं Uा ा है, ो पंविH में अगले को इस आ ार पर विƒर से विवMार विकया Uाएगा विक पूण[3] प्रविWया बेकार नहीं Uाए।अ ः उद्देश्य स्पष्ट है। न ीU न, उH आदेश Mयन और भ; प्रविWया को लोक सेवा आयोग को सौंप दे ा है, सिUसे राज्य में ƒ ै ले सभी पदों पर लागू विकया Uाना है।यह पहले क े सभी आदेशों क े अति Wमण में पारिर विकया गया र्थीा। सी. उत्तर प्रदेश अ ीनस्र्थी सेवा Mयन आयोग अति विनयम, 2014:-
11. 2014 क े अति विनयम द्वारा, समूह (ग) पदों क े समय पर Mयन क े लिलए एक स्व ंत्र विवशेbज्ञ एUेंसी की आवश्यक ा महसूस की गई, Uैसा विक नीMे विदए गए उद्देश्यों और कारणों क े कर्थीन से देखा Uा सक ा हैः "...विनकट समय में समूह 'ग' पदों पर Mयन राज्य सरकार क े सी े पय3वेक्षण में विकया Uा रहा र्थीा लेविकन विवभागाध्यक्षों को उपरोH Mयनों क े लिलए अति क समय देना पड़ ा र्थीा Uो vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk सरकारी काय† क े सार्थी-सार्थी साव3Uविनक विह को भी बुरी रह प्रभाविव कर रहा है। इन सभी कारणों से ग्रुप सी क े क ु छ पदों पर समय पर Mयन क े लिलए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े समान अध्यक्ष और सदस्यों से विमलकर एक स्व ंत्र अ ीनस्र्थी सेवा Mयन आयोग की स्र्थीापना करना अत्यं आवश्यक है।इसलिलए राज्य में समूह ‘सी’ क े कु छ पदों पर Mयन क े लिलए उत्तर प्रदेश अ ीनस्र्थी सेवा Mयन आयोग क े नाम से एक आयोग की स्र्थीापना क े लिलए कानून बनाने का विनण3य लिलया गया है।
12. यह विव ान मंडल द्वारा पारिर अति विनयम होने क े कारण विनतिश्च रूप से संघb[3] में सभी प्रMलिल विनयमों को अभिभभावी कर देगा।2014 क े अति विनयम क े ह आयोग की शविHयों और क 3व्यों को स्पष्ट ा क े सार्थी परिरभाविb विकया गया है। यह कहना पया3प्त होगा विक समूह 'सी' पदों पर भ; की पूरी प्रविWया आयोग को सौंपी गई है, Uैसा विक ारा 15 क े ह देखा Uा सक ा है, Uो उम्मीदवारों क े Mयन क े लिलए परीक्षाओं क े संMालन, साक्षात्कार आयोसिU करने को सक्षम बना ा है। डी. उत्तर प्रदेश समूह ‘सी’ पदों पर सी ी भ; (पद्धति और प्रविWया) विनयम,
13. 2015 क े अति विनयमों को 11.05.2015 से कानून में लाया गया है। विनयम (1) समूह 'ग' पदों पर लागू होने क े बारे में बा कर ा है, Uबविक विनयम (2) इस थ्य पर प्रकाश डाल ा है विक भार क े संविव ान क े परन् ुक क े अ ीन बनाए गए विकसी अन्य सेवा विनयमों में विकसी प्रति क ू ल बा क े हो े हुए भी इसका अभिभभावी प्रभाव होगा।विनयम 8 (2) क े ह, यह स्पष्ट विकया Uा ा है विक समूह 'सी' क े सभी पद इसक े दायरे में आएंगे, सिसवाय उन पदों क े सिUन्हें सरकार द्वारा अति सूMना क े माध्यम से विवशेb रूप से बाहर रखा गया है, और लिललिख परीक्षा और साक्षात्कार क े माध्यम से सी ी भ; की प्रविWया विन ा3रिर की गई है।इसक े बाद आयोग योग्य ा क े आ ार पर उम्मीदवारों की सूMी ैयार करेगा और इसे विनयुविH प्राति कारी को भेUेगा।इस प्रकार, इन विनयमों में विकसी प्र ीक्षा सूMी का प्राव ान नहीं vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk है। क े वल योग्य ा क े आ ार पर भेUी Uाने वाली सूMी ही आरक्षण क े विनयम क े अ ीन है। पक्षकारों क े क 3:अपीलक ा3 क े क 3:-
14. एक विवभिशष्ट सव परिर खंड क े अस्मिस् त्व को ध्यान में रख े हुए, विवविनयम 2015, बाद हो े हुए भी एक सामान्य कानून होने क े बावUूद, 1978 विनयमों की ुलना में प्रार्थीविमक ा लेंगे, Uो विवशेb सेवा विनयम हैं।Mूंविक विनयमों क े दो सेट पूरी रह से असंग हैं, इस थ्य को ध्यान में रख े हुए विक भ; प्रविWया का संMालन करने वाला प्राति कारी दो विनयमों में अलग है, इसलिलए भ; की प्रविWया, इस प्रकार, विनयमों क े दो सेटों क े विकसी भी सामंUस्यपूण[3] अध्ययन की कोई संभावना नहीं है।
15. वb[3] 2016 में विवशेb विनयमों में विकया गया संशो न स्मिस्र्थीति को नहीं बदलेगा क्योंविक यह प्रक ृ ति में स्पष्टीकरण क े रूप में विकया गया र्थीा।विनUी प्रति वादी और आवेदकों को इस पद पर विनयुH करने का कोई अति कार नहीं है और प्र ीक्षा सूMी को भ; क े स्र्थीायी स्रो क े रूप में नहीं देखा Uा सक ा है।भ; की प्रविWया में भाग लेने क े बाद, वे खुद को विववस्मिन् मान ले े हैं।अन्यर्थीा भी, 1999 Uीओ क े आलोक में, प्रत्यर्थी; या अभिभयोगी अपीलक ा3 विनयुविH क े हकदार नहीं होंगे।
16. यह अपीलक ा3 और आयोग का एकमात्र विवशेbाति कार है विक Mयन का कोई भी रीका विन ा3रिर विकया Uाए।2015 क े विनयमों को इसक े संज्ञान में लाए Uाने क े बावUूद, उच्च न्यायालय उन पर विवति व विवMार करने में विवƒल रहा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अभिभयोग करने वाले आवेदक उदासीन व्यविH हो े हैं और वैसे ो वे विकसी भी राह क े हकदार नहीं हो े हैं।पूव H क† को मUबू करने क े लिलए, विनम्नलिललिख मामलों में इस न्यायालय क े विनण3यों पर अवलंब लिलया गया हैः ० अUॉय क ु मार बनU; बनाम भार संघ (1984) 3 एससीसी 127 ० मोहन करन बनाम यू.पी. राज्य (1998) 3 एससीसी 444 ० सुरेंद्र सिंसह बनाम पंUाब राज्य (1997) 8 एससीसी 488, ० अनुपाल सिंसह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2020) 2 एससीसी 173 ० भार संघ बनाम Uी. आर. प्रभावलकर (1973) 4 एससीसी 183। ० बालू बनाम क े रल राज्य (2009) 2 एससीसी 479 प्रति वादी क े क 3 ः-
17. 1978 क े विनयम एक विवविनर्दिदष्ट पद से संबंति हैं और इसलिलए, 2015 क े विनयम, पश्चात्व; होने क े बावUूद, इसे स्वीकार करना होगा, पूव[3] विनयम इस क्षेत्र को शासिस करने वाला विवशेb कानून है।1978 क े विनयम 15 (4) में प्र ीक्षा सूMी का स्पष्ट रूप से उपबं है।एक सामान्य विनयम को विकसी विवशेb विनयम क े ऊपर वरीय ा नहीं दी Uाएगी, भले ही एक सव परिर खंड हो, Uब क विक दोनों क े बीM स्पष्ट असंग ा न हो, इस स्मिस्र्थीति में विनयमों क े दो सेट का सामंUस्यपूण[3] रूप से अर्थी3 लगाना होगा।
18. 1978 क े विनयम, 2016 क े संशो न क क्षेत्र को शासिस कर े र्थीे, Uो क े वल आक्षेविप Mयन प्रविWया में साक्षात्कार क े बाद लागू हुआ और इस प्रकार, प्रविWया शुरू होने क े बाद प्रविWया क े विनयमों को नहीं बदला Uा सक ा है। वैसे भी विवज्ञाविप पद vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk पर विनयुविH का विनविह अति कार है, Uो अति क मे ावी उम्मीदवार क े शाविमल न होने क े कारण भरा नहीं गया है।
19. यह क े वल Mयविन उम्मीदवार क े शाविमल होने में विवƒल रहने क े कारण सृसिU रिरविHयों को भरने क े लिलए प्र ीक्षा सूMी क े संMालन का मामला नहीं है। पूव H क† को विनम्नलिललिख मामलों में इस न्यायालय क े विनण3यों द्वारा बल देेने की कोभिशश की गई हैः ० माया मैथ्यू बनाम क े रल राज्य (2010) 4 एससीसी 498, ० विगरिरUा बनाम रेशमा पराइल (2019) 2 एससीसी 34 7, ० मुख्य सूMना आयुH बनाम गुUरा उच्च न्यायालय (2020) 4 एससीसी 702 ० उत्तर प्रदेश राज्य और एक अन्य बनाम राUीव कु मार श्रीवास् व और अन्य एसएलपी (सी) 2013 की सीसी संख्या 10604 विदनांक 26.07.2013 ० क े. मंUुश्री बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य (2008) 3 एससीसी 512 ० विदनेश क ु मार कश्यप और अन्य दतिक्षण पूव[3] मध्य रेलवे और अन्य (2019) 12 एससीसी 798 MMा3ः
20. हमने पहले ही संबंति विनयम बनाए हैं और उनक े आया पर विवMार विकया है। 1978 क े विनयमों का खंड 15(1) एक Mयन सविमति से संबंति है, Uबविक हम Mयन आयोग द्वारा वै ाविनक रूप से एक अति विनयमन, 2014 अति विनयम द्वारा की गई भ; से संबंति हैं। 1978 क े ह मात्र साक्षात्कार क े स्र्थीान पर 10 वीं की लिललिख परीक्षा पर विवMार नहीं विकया गया र्थीा। लिललिख परीक्षा और उसक े बाद साक्षात्कार क े द्वारा Mयन प्रविWया में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की Uानकारी में यह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk Uानबूझकर विदया गया र्थीा।यह प्रविWया 2015 क े अनुरूप और 2014 अति विनयम क े ह आयोग को प्रदत्त शविHयों क े संदभ[3] में अपनाई गई र्थीी। इसलिलए, 1978 क े विनयमों को लिललिख परीक्षा आयोसिU करने क े समय भी Mयन क े आ ार को नUरअंदाU कर विदया Uा ा है।
21. एक उम्मीदवार, सिUसने 2015 क े ह अपनाई गई Mयन प्रविWया में भाग लिलया है, को नौकरी दी गई है और उसने उसक े बाद उस पर सवाल उठाने से स्वयं को मना कर विदया है, Uैसा विक अनुपाल सिंसह (पूव H) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा अभिभविन ा3रिर विकया गया हैः
55. साक्षात्कार में भाग लेने क े बाद, विनUी प्रत्यर्थी; विदनांक 12-10-2014 क े काया3लय ज्ञापन और Mयन को Mुनौ ी नहीं दे सक े।अपीलार्थिर्थीयों की ओर से, यह क 3 विदया गया विक 12-10-2014 को संशोति अति सूMना क े बाद, विनUी प्रति वादी विबना विवरो क े साक्षात्कार में भाग लिलया और परिरणाम की घोbणा क े बाद ही यह पाया विक उनका Mयन नहीं विकया गया र्थीा, विनUी प्रति वादी 12-10- 2014 को संशोति अति सूMना को Mुनौ ी देने का विवकल्प Mुना और विनUी प्रत्यर्थिर्थीयों को Mयन प्रविWया को Mुनौ ी देने से रोका गया। यह एक स्र्थीाविप कानून है विक Uानबूझकर साक्षात्कार में भाग लेने वाला व्यविH पीछे नहीं मुड़ सक ा और न ही Mयन प्रविWया को Mुनौ ी नहीं दे सक ा है।
56. यह देख े हुए विक साक्षात्कार क े परिरणाम को ऐसे उम्मीदवार द्वारा Mुनौ ी नहीं दी Uा सक ी है सिUसने साक्षात्कार में भाग लिलया है और उH साक्षात्कार में Mयविन होने का मौका लिलया है और अं ः स्वयं को असƒल पाया है, मदनलाल बनाम Uम्मू और कश्मीर राज्य [(1995) 3 एससीसी 486:1995 एससीसी (एल एंड एस) 712] में, यह विनम्नलिललिख रूप में अव ारिर विकया गयाः(एससीसी पृष्ठ 493, पैरा 9) 9....... यातिMयों ने आयोग क े संबंति सदस्यों द्वारा आयोसिU मौलिखक साक्षात्कार में भी भाग लिलया सिUन्होंने यातिMयों क े सार्थी-सार्थी संबंति पत्यर्थी; का साक्षात्कार लिलया।इस प्रकार यातिMकाक ा3ओं ने कभिर्थी मौलिखक साक्षात्कार में खुद को Mयविन करने का मौका लिलया.क े वल इसलिलए विक वे लिललिख परीक्षा और मौलिखक साक्षात्कार दोनों में अपने संयुH प्रदश3न क े परिरणामस्वरूप सƒल नहीं हुए, अ ः उन्होंने यह यातिMका दायर की है। अब यह य हो गया है विक यविद कोई उम्मीदवार सुविवMारिर अवसर ले ा है और साक्षात्कार में उपस्मिस्र्थी हो ा है, ो क े वल इसलिलए विक साक्षात्कार का परिरणाम उसे पसंद नहीं है, वह पीछे नहीं मुड़ सक ा और बाद में यह क 3 नहीं दे सक ा विक साक्षात्कार की प्रविWया अनुतिM र्थीी या Mयन सविमति का गठन ठीक से नहीं विकया गया र्थीा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
57. क े. एM. सिसराU बनाम क े रल उच्च न्यायालय [(2006) 6 एस. सी. सी. 395:2006 एस. सी. सी. (एल.&एस)1345 ], यह एस.एस. सी क े पेU संख्या 426 क े प्रस् र संख्या 73 में विनम्नानुसार अव ारिर विकया गया र्थीा। "73. इस पृष्ठभूविम में साक्षात्कार में भाग लेने वाले अपीलक ा3 -यातिMकाक ा3ओं क े लिलए यह सुविव ा उपल्ब् नहीं है विक वे उसक े बाद Uब वे साक्षात्कार में विवƒल रहे हो ब वह परिरवाद करें और यह क 3 विदया विक साक्षात्कार क े लिलए न्यून म अंक का प्राव ान उतिM नहीं र्थीा।"
58. भार संघ बनाम एस. विवनोद क ु मार [(2007) 8 एससीसी 100:: (2007) 2 SCC (L&S) 792] मे इसक े पेU संख्या 107 क े प्रस् र संख्या 19 मे विनम्नलिललिख अव ारिर विकया गया र्थीा-
19. Mंद्र प्रकाश ति वारी बनाम शक ुं ला शुक्ला [(2002) 6 एससीसी 127:2002 एससीसी (एल एंड एस) 830] xxx xxx xxx आगे यह म व्यH विकया गयाः (एससीसी पृष्ठ - 149, प्रस् र 34) 34.इस प्रकार इसमें कोई संदेह नहीं है विक Uबविक आMरण द्वारा विकसी विवबं का प्रश्न प्रासंविगक थ्यों में नहीं उठ ा है, लेविकन कानून अच्छी रह से स्र्थीाविप प्र ी हो ा है विक यविद कोई उम्मीदवार साक्षात्कार में उपस्मिस्र्थी हो ा है और उसमें भाग ले ा है, ो क े वल इसलिलए विक साक्षात्कार का परिरणाम उसे 'स्वीकाय3' नहीं है, वह पलट नहीं सक ा है और बाद में यह क 3 नहीं दे सक ा है विक साक्षात्कार की प्रविWया अनुतिM र्थीी या प्रविWया में क ु छ कमी र्थीी।
59. इसी सिसद्धां को सदानंद हालो बनाम मुम ाU अली शेख [(2008) 4 एससीसी 619:(2008) 2 एससीसी (एल एंड एस) 9] सिUसमें यह विनम्नलिललिख रूप में अव ारिर विकया गया र्थीाः (एससीसी पृष्ठ 645-46, प्रस् र - 59)
59. यह एक सुस्र्थीाविप विवति है विक असƒल अभ्यर्थी; वापस नहीं मुड़ सक ा एवं न हीं Mयन प्रविWया को Mुनाै ी दे सक ा है।विनतिश्च रूप से इस सामान्य विनयम क े लिलए इस न्यायालय द्वारा बनाए गए अपवाद हैं।इस स्मिस्र्थीति को इस न्यायालय ने भार संघ बनाम एस. विवनोद क ु मार [(2007) 8 एससीसी 100] में अपने नवीन म विनण3य में दोहराया हैः(2007) 2 एस. सी. सी. (एल एंड एस) 792]न्यायालय ने ओम प्रकाश शुक्ला बनाम अलिखलेश क ु मार शुक्ला [1986 सप्लीमेंट एससीसी 285:1986 एससीसी (एल एंड एस) 644] वाले मामले में विदए गए विनण3य का भी उल्लेख विकया। Uहां यह विवशेb रूप से विन ा3रिर विकया गया है विक Uब कोई उम्मीदवार विबना विवरो क े परीक्षा में उपस्मिस्र्थी हो ा है और बाद में परीक्षा में सƒल नहीं पाया Uा ा है, ो ऐसी परीक्षा को Mुनौ ी देने वाली यातिMका पर विवMार करने का सवाल ही नहीं उठ ा है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
22. व 3मान मामले में, अMयविन उम्मीदवार 2015 क े विनयमों को स्वीकार कर े हुए 1978 क े एक भाग को सेवा में डालना Mाह े हैं।इस प्रकार का Mयनात्मक प्रविWया को ग्रहण करना विवति क े ह अनुज्ञेय नहीं है क्योंविक विकसी भी पक्षकार को स्वीकाय[3] या अस्वीकाय[3] करने की अनुमति नहीं है Uैसा विक न्यायलय ने वाद भार संघ न्यायालय एन मुरुगेसन (2022) 2 एस. सी. सी. 25: में अव ारिर विकया गया है "स्वीकाय[3] और अस्वीकाय3"
26. ये वाक्यांश स्कॉट्स विवति से लिलए गए हैं।इसका म लब यह है विक विकसी भी पाट; को एक ही बा को स्वीकार और अस्वीकार करने की अनुमति नहीं दी Uा सक ी है, और इस प्रकार कोई भी व्यविH विकसी भी मुद्दे को गम[3] और ठंडा नहीं कर सक ा है।Mुनाव क े सिसद्धां क े पीछे अनुमोदन और अस्वीकाय[3] या स्वीकाय[3] की अव ारणा में अं र्दिनविह है।एक बार विƒर, यह समान ा का सिसद्धां है Uो कॉमन लॉ क े दायरे में आ ा है।इसलिलए, Uो Uान ा है विक अगर वह विकसी उपकरण पर आपलित्त कर ा है, ो उसे वह लाभ नहीं विमलेगा Uो वह Mाह ा है, उसे ƒल का आनंद ले े हुए ऐसा करने की अनुमति नहीं दी Uा सक ी है।कोई एक विहस्से का ƒायदा उठाकर बाकी को खारिरU नहीं कर सक ा।विकसी व्यविH को विकसी लिलख पर सवाल उठा े समय उसका लाभ लेने की अनुमति नहीं दी Uा सक ी।ऐसे पक्ष को या ो संव्यवहार की पुविष्ट करनी होगी या अपुष्ट करना होगा।इस सिसद्धां को कॉमन लॉ क े सिसद्धां क े रूप में अति क उत्साह क े सार्थी लागू विकया Uाना Mाविहए, यविद ऐसा पक्षकार वास् व में एक भाग का पूरी रह से और उH आनंद क े लगभग पूरा होने पर आनंद ले ा है, ो उसक े बाद दूसरे भाग पर सवाल उठा ा है। इस सिसद्धां में विनष्पक्ष ा का एक त्व अं र्दिनविह है।यह पक्षकार क े आMरण से संबंति विवबं की एक प्रUाति भी है।हम पहले ही एक पक्ष क े आMरण और उसकी ज्ञान की ारणा क े बारे में संविवदा अति विनयम क े प्राव ानों क े बारे में विवMार कर Mुक े हैं, Uबविक उसकी स्वीक ृ ति क े माध्यम से एक प्रस् ाव की विबना श 3 पुविष्ट की गई है।
27.2. पंUाब राज्य बनाम नUी सिंसह सं ू [(2014) 15 एससीसी 144]:(SCC pp. 153-54, paras 22-23 & 25-26) "22. "स्वीकाय[3] एवं अस्वीकाय[3] "का सिसद्धां क े वल विवबं की एक प्रUाति है, इसका ात्पय[3] क े वल पक्षकारों क े आMरण से है।" ""Uैसा विक विवबं क े मामले में हो ा है, यह अति विनयम क े प्राव ानों क े लिखलाƒ काम नहीं कर सक ा है।(देखें सीआईटी बनाम श्री आर. पी. ƒम[3] मुआर [एआईआर 1965 एससी 1216]। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk
23. विवति की यह सुस्र्थीाविप प्रस्र्थीापना है विक एक बार आदेश पारिर हो Uाने पर, उसका अनुपालन हो Uाने पर, दूसरा पक्ष उसे स्वीकार कर ले ा है और उससे लाभ प्राप्त कर ले ा है, वह उसे विकसी भी आ ार पर Mुनौ ी नहीं दे सक ा।( महाराष्ट्र राज्य सड़क परिरवहन विनगम बनाम बलवं विनयविम मोटर सेवा [एआईआर 13 1969 एससी 329])। आर. एन. गोसाई ं बनाम यशपाल ीर [(1992) 4 एस. सी. सी. 683] में इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख म व्यH विकया हैः(आर. एन. गोसाई ं वाला मामला [(1992) 4 एस. सी. सी. 683], एस. सी. सी. पृष्ठ 687-88, पैरा 10)।
10. कानून विकसी व्यविH को स्वीक ृ ति एवं अस्वीक ृ ति दोनों की अनुमति नहीं दे ा है।यह सिसद्धां विनवा3Mन क े सिसद्धां पर आ ारिर है Uो यह अभिभविन ा3रिर कर ा है विक कोई भी पक्ष एक ही लिलख को स्वीकार और अस्वीकार नहीं कर सक ा है और यह विक 'कोई व्यविH एक ही समय में यह नहीं कह सक ा है विक कोई लेन- देन वै है और इस प्रकार क ु छ लाभ प्राप्त कर सक ा है, सिUसक े लिलए वह क े वल इस आ ार पर हकदार हो सक ा है विक वह वै है, और विƒर पलट कर कह ा है विक यह क ु छ अन्य लाभ प्राप्त करने क े उद्देश्य से शून्य है।' XXX XXX XXX 25.उच्च म न्यायालय ने राUस्र्थीान राज्य औद्योविगक विवकास एवं विनवेश विनगम में बनाम डायमंड एंड Uेम डेवलपमेंट काप रेशन लिलविमटेड [(2013) 5 SCC 470: (2013) 3 SCC (Civ) 153], में एक अवलोकन विकया विक विकसी पक्षकार को "गम[3] और ठंडा करने", " ेU और ढीला" या "स्वीक ृ एवं अस्वीक ृ " करने की अनुमति नहीं दी Uा सक ी है। Uहां कोई Uानबूझकर विकसी संविवदा या हस् ां रण या आदेश क े लाभों को स्वीकार कर ा है, उसे ऐसी संविवदा या हस् ां रण या आदेश की वै ा या बाध्यकारी प्रभाव से वंतिM आदेश क े लिलए विववश विकया Uा ा है।इस विनयम को समान ा क े लिलए लागू विकया Uा ा है, हालांविक, इसे इस रह से लागू नहीं विकया Uाना Mाविहए विक सही और अच्छे विववेक क े सिसद्धां ों का उल्लंघन हो।
26. यह स्पष्ट है विक Mुनाव का सिसद्घान् विवबन् क े सिसद्घान् पर आ ारिर है एवं सिसद्घान् यह है विक कोइ[3] विकसी को स्वीकाय[3] या आ अस्वीकाय[3] नही कर सक ा Uो उसी में अन् र्दिनविह है।Mुनाव द्वारा विवबं का सिसद्धां पेस (या न्यायसंग विवबं ) में विवबं की प्रUाति यों में से एक है, Uो समान ा का विनयम है।इस कानून क े द्वारा, एक व्यविH को अपने काय†, या आMरण, या Uब उसे बोलना हो ो Mुप्पी क े माध्यम से, एक अति कार का दावा करने से रोका Uा सक ा है Uो अन्यर्थीा उसक े पास हो ा।
23. विवति का पूव H सिसद्धां व 3मान मामले में लागू हो ा है।उम्मीदवार को इसक े विवपरी प्रति स्प ा3 करने का अति कार नहीं है ाविक वह दोनों विनयमों का सव त्तम vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk पालन कर सक े ।न क े वल Mयन क े रीक े में अं र है, बस्मिल्क भ; प्राति कारी क े गठन में भी अं र है।यह ध्यान देने की बा है विक 2015 क े ह प्र ीक्षा सूMी ैयार करने क े लिलए ऐसी कोई प्रविWया नहीं है, Uैसा विक प्रत्यर्थी; दावा करना Mाह े हैं।
24. हमने उपयु3H प्रस् ुति यों पर विवMार विकया है सिUससे विक विदए गए क† की सराहना की Uा सक े ।यहां क विक 1978 क े ह भी Uब कोई उम्मीदवार ज्वाइन नहीं कर ा है ो बाद में कोई प्र ीक्षा सूMी नहीं विमल ी है।ऐसी सूMी 1978 क े विनयम 15 (4) क े अ ीन क े वल रिरविHयों को भरने क े लिलए विनयुविH प्राति कारी को सुकर बनाने क े लिलए उपबंति की गई है।इस प्रकार, रिरविHयों को भरने क े बाद, अन्य उम्मीदवारों क े लिलए दरवाUे बंद हो Uा े हैं।
25. 2015 क े अ ीन यही स्मिस्र्थीति है सिUसक े द्वारा आयोग से यह अपेक्षा की Uा ी है विक वह क े वल मेरिरट सूMी को उस विनयुविH प्राति कारी को भेUे Uो उसने वास् व में की र्थीी और पदग्रहण न करने क े मामले में रिरविHयों को Mयन की अगली प्रविWया क े लिलए आगे बढ़ाया Uा ा है, Uैसा विक व 3मान मामले में प्राति कारी द्वारा ठीक ही विकया गया है।कम3Mारी क े Mयन में लMीलेपन क े सार्थी विनयोHा क े पास हमेशा पया3प्त विववेकाति कार होगा।हस् क्षेप क े वल भी विकया Uा सक ा है Uब Mयन मनमाना या कानून क े विवपरी हो, सिUसे हम व 3मान मामले में नहीं पा े हैं।उच्च न्यायालय का दृविष्टकोण एक दृविष्टबाति व्यविH की रह है Uो अं ेरे कमरे में एक काली विबल्ली की लाश कर रहा है Uब विबल्ली स्वयं वहां नहीं है।
26. अब हम दो विनयमों, अर्थीा3 ्, 1978 विनयम, Uो एक विवशेb विनयम है, और वb[3] 2015 में पुरःस्र्थीाविप सामान्य विनयम क े बीM विवरो क े प्रश्न पर आएंगे।वb[3] 2015 क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk अति विनयमों क े अस्मिस् त्व में आने क े बाद कानून में 1978 क े अति विनयम मौUूद नहीं हैं। 2014 क े अति विनयम क े लागू होने से, विव ातियका ने अपने विववेक से वग[3] ‘सी’ क े पदों को भरने की भूविमका आयोग को सौंप दी।हमें प्रत्यर्थी; द्वारा उठाए गए कानूनी दावों का अवलोकन करने में कोई कविठनाई नहीं है, हालांविक, विदए गए विनण3यों का कोई आवेदन नहीं है, विनयमों क े दो समूहों क े बीM असंग ा को देख े हुए।
38. Uैसा विक हमने पहले ही दो विनयमों को एक-दूसरे क े सार्थी असंग माना है, यह स्पष्ट है विक बाद क े विनयम, भले ही प्रक ृ ति में सामान्य हों, इस क्षेत्र को विनयंवित्र करेंगे।इस पहलू पर, हम अUय क ु मार बनU; उपरोH क े मामले में इस न्यायालय क े विनण3य को लाभ क े सार्थी उद्धृ करना Mाह े हैं। Uैसा विक इसमें पहले उल्लेख विकया गया है, यविद इस योUना को वै ठहराया गया र्थीा, ो यह सवाल उठ ा है विक सामान्य कानून क्या है और विवशेb कानून क्या है और टकराव की स्मिस्र्थीति में कौन सा कानून प्रभावी होगा और इसक े लिलए सामान्य शब्द विवशेb शब्दो क े प्रभाव को न्यून नहीं कर े है।दो कानूनों क े बीM टकराव क े मामले में सामान्य विनयम का पालन विकया Uाना Mाविहए विक बाद वाला पहले वाले कानून को विनरस् कर दे ा है। दूसरे शब्दों में, यविद विनम्नलिललिख दो श † में से कोई एक पूरी हो Uा ी है ो पूव[3] विवशेb कानून बाद क े सामान्य कानून क े अनुरूप होगाः ( i ) दोनों एक दूसरे क े सार्थी असंग हैं। ( ii ) परव; अति विनयम में पूव3व; अति विनयम क े प्रति कु छ अभिभव्यH विनदdश है।यविद इन दोनों श † में से कोई एक पूरी हो Uा ी है, ो बाद का कानून, भले ही सामान्य हो, प्रबल होगा।
39. मूल पाठ और विनण3यों से Mार परीक्षण अप्राप्य हैं और ये हैंः (i) विव ातियका को यह विनःसंदेह अति कार है विक वह विकसी ऐसे कानून को बदल सक ा है सिUसे बाद क े विव ान क े माध्यम से पहले ही लागू विकया Uा Mुका है।( ii ) विकसी विवशेb विवति को विकसी अभिभव्यH उपबं ों द्वारा विकसी पश्चात्व; सामान्य विवति द्वारा परिरवर्ति, विनराक ृ या विनरसिस विकया Uा सक ा है।(iii) बाद की सामान्य विवति पूव[3] विवशेb विवति को अति भावी कर देगी यविद दोनों एक दूसरे क े प्रति इ ने प्रति क ू ल हैं विक सामान्य विवति में इस विनविमत्त कोई अभिभव्यH उपबं न पाए Uाने क े बावUूद वे सह-अस्मिस् त्व में नहीं रह सक े, और( iv ) क े वल इसक े विवपरी विकसी उपबं क े अभाव में और स्पष्ट असंगति क े कारण बाद क े सामान्य कानून से कोई विवशेb कानून पूरी रह अप्रभाविव रहेगा।"इस संबं में देखें, मैक्सवेल ऑन द इंटरविप्रटेशन ऑƒ स्टेट्यूट्स, बारहवां संस्करण, पृष्ठ 196-198."
27. क े वल इसलिलए विक अपीलक ा3 ने 2016 में बाद में 1978 क े अति विनयमों में संशो न करने की मांग की र्थीी, यह नहीं माना Uा सक ा है विक विवशेb रूप से अति विनयम 15 क े संबं में 1978 क े अति विनयम इस थ्य पर विवMार कर े हुए विक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk 2016 का संशो न 16 क े वल स्पष्टीकरण प्रक ृ ति का र्थीा, Uो विवति की पुस् क में मौUूद हैं। हम यह कहने में Uल्दबाUी कर सक े हैं विक दोनों विनयम भार क े संविव ान क े ह प्रदत्त शविHयों का प्रयोग कर े हुए बनाए गए र्थीे।
28. विदनांक 15.11.1999 को पारिर सरकारी आदेश पर बहु अति क भरोसा विकया गया है।उH आदेश दो बिंबदुओं पर बहु स्पष्ट है।इसमें लोक सेवा आयोग द्वारा विनभाई Uा रही भूविमका और एक पद क े लिलए Mयन क े मामले को छोड़कर प्र ीक्षा सूMी को समाप्त करने की बा कही गई है।ध्यान देने योग्य बा यह है विक Mयन और वह भी एक पद क े लिलए।इसका क े वल यह अर्थी3 होगा विक एक पद क े लिलए एक व्यविH का Mयन, सिUसका अर्थी3 विकसी विवशेb श्रेणी क े पद या एकल क ै डर पद क े रूप में नहीं विनकाला Uा सक ा है, Uैसा विक प्रत्यर्थी; क े विवद्व अति वHा द्वारा क 3 विदया गया है.उद्देश्य बहु स्पष्ट है विक उपयुH उम्मीदवार क े Mयन में की गई कवायद बेकार नहीं Uाएगी यविद उस व्यविH का वास् व में विकसी कारण से Mयन नहीं विकया गया है, उस स्मिस्र्थीति में पंविH में अगला व्यविH प्रवेश करेगा।अन्यर्थीा, पूरी प्रविWया बबा3द हो Uाएगी, सिUससे भ; एUेंसी को एक ही पद क े लिलए इसे विƒर से करना होगा।
29. प्रति वादी की ओर से उपस्मिस्र्थी विवद्व अति वHा ने राUीव कु मार श्रीवास् व उपरोH क े मामले में विदए गए विवविनश्चय का एक विवभिशष्ट संदभ[3] विदया सिUसमें यह क विदया गया विक, Uब कोई पद उम्मीदवार क े शाविमल न होने क े कारण नहीं भरा Uा ा है, ो बिंवगों में प्र ीक्षा कर रहा एक व्यविH पद विवMार क े योग्य है, क्योंविक यह उसक े लाभ का विनविह अति कार है।
30. हमारे सुविवMारिर विवMार से, पूव H विवविनश्चय का व 3मान मामले में कोई लागू नहीं हो सक ा है।इसमें प्रासंविगक विनयमों क े प्रभाव पर विवMार नहीं विकया गया है, क्योंविक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk Mयविन सूMी Mयविन उम्मीदवारों क े अलावा अन्य सभी क े लिलए दरवाUे बंद कर दे ी है।उपयु3H 17 विनण3य 1999 क े Uीओ क े संदभ[3] में र्थीा, र्थीाविप, Uैसा विक हमने अभिभविन ा3रिर विकया है विक 1978 क े विनयम व 3मान भ; पर लागू नहीं हो े हैं, पूव H विनण3य विकसी सेवा में लागू नहीं होगा। इसक े अलावा, यह स्र्थीाविप कानून है विक प्र ीक्षा सूMी ैयार करने क े लिलए आवश्यक विकसी भी विनयम क े अभाव में, असƒल उम्मीदवार को अपने विवMार पर Uोर देने का कोई विनविह अति कार नहीं है। इस न्यायालय ने वल्लमपति स ीश बाबू बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (सिसविवल अपील संख्या 2473/2022) में हाल ही में विदए गए विनण3य में यह अभिभविन ा3रिर विकया हैः
7. 4 व 3मान मामले में 33 उम्मीदवारों की अंति म Mयन सूMी ैयार की गई र्थीी।इसक े बाद सभी Mयविन उम्मीदवारों को काउंसलिंलग क े लिलए बुलाया गया, लेविकन एक उम्मीदवार ने काउंसलिंलग क े लिलए रिरपोट[3] नहीं की।उपरोH आयोUन अंति म Mयन सूMी ैयार करने और प्रकाभिश करने क े बाद हुआ।Mूंविक प्र ीक्षा सूMी ैयार करने की कोई आवश्यक ा नहीं र्थीी, इसलिलए योग्य ा में अगला होने का दावा करने वाला अपीलक ा3 विकसी भी समय पर विमलने का दावा नहीं कर सक ा क्योंविक उसका नाम न ो Mयविन उम्मीदवारों की सूMी में और न ही विकसी प्र ीक्षा सूMी में है क्योंविक प्र ीक्षा सूMी ैयार करने क े लिलए कोई प्राव ान नहीं र्थीा।विनयम 16 का उप-विनयम (5) बहु स्पष्ट है।इसलिलए, अंति म सूMी में एक उम्मीदवार क े काउंसलिंलग क े लिलए उपस्मिस्र्थी न होने और/या रोUगार स्वीकार न करने क े कारण यह पद भरा नहीं गया। इसलिलए, उस पद को अगली भ; क े लिलए आगे बढ़ाना होगा।
7. 5 अपीलक ा3 उस पद पर विनयुविH का दावा कर सक ा र्थीा Uो भरा नहीं गया र्थीा बश d कानूनी प्राव ान क े अनुसार प्र ीक्षा सूMी क े लिलए एक प्राव ान हो।प्र ीक्षा सूMी क े लिलए विकसी विवशेb प्राव ान क े अभाव में और इसक े विवपरी, एक विवभिशष्ट प्राव ान यह है विक कोई प्र ीक्षा सूMी नहीं होगी और विकसी भी आ ार पर खाली पड़े पद को अगली भ; क े लिलए आगे बढ़ाना होगा।इस प्रकार, अपीलक ा3 को उस पद पर, Uो भरा नहीं गया र्थीा, विकसी भी विनयुविH का दावा करने का कोई अति कार नहीं र्थीा. 8.[1] - इस न्यायालय द्वारा सुरेश प्रसाद और अन्य (उपरोH) क े मामले में एक समान प्रश्न पर विवMार विकया गया। उH विनण3य में, यह विवशेb रूप से देखा गया है और अभिभविन ा3रिर विकया गया है विक यविद विनयुविH क े लिलए Mयविन उम्मीदवार शाविमल नहीं हुए हैं, ो इसक े विवपरी, विकसी वै ाविनक विनयमों क े अभाव में, विनयोHा मेरिरट सूMी में उH उम्मीदवारों क े नीMे आने वाले उम्मीदवारों को रिरH स्र्थीान की पेशकश करने क े लिलए बाध्य नहीं है।यह भी कहा गया है विक विकसी प्राव ान क े अभाव में विनयोHा Mयविन उम्मीदवारों क े पैनल क े अलावा प्र ीक्षा सूMी ैयार करने और पैनल क े उम्मीदवारों क े शाविमल न होने की स्मिस्र्थीति में प्र ीक्षा सूMी से vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk उम्मीदवारों को विनयुH करने क े लिलए बाध्य नहीं है।इस न्यायालय क े पूव H विनण3य काे बाद में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा समीउला शरीƒ और अन्य उपरोH क े अन्य में अनुसरण विकया गया है।
31. हम उस स्मिस्र्थीति को दोहराना नहीं Mाह े Uब दो विनयमों को एक -दूसरे क े लिखलाƒ खड़ा करने की कोभिशश की Uा ी है, क्योंविक हमें ऐसा कोई विवरो नहीं विमला है।न्यायालय से यह अपेक्षा की Uा ी है विक वह विनयमों में सामंUस्य स्र्थीाविप करे और इसलिलए विकसी प्रकार क े टकराव का पूवा3नुमान या पूवा3नुमान न लगाए।
32. उत्तरदा ाओं ने क े. मंUुश्री (उपरोH) क े मामले में इस न्यायालय क े विनण3य पर भी भरोसा विकया है........ हालांविक, हमारे विवMार में, पूव H विनण3य क े थ्य व 3मान मामले से काƒी अलग हैं।.पूरी प्रविWया पूरी होने क े बाद पहली बार पूण[3] न्यायालय द्वारा विकए गए विनण3य क े आ ार पर कटौ ी को विनरस् कर विदया गया र्थीा।दूसरा, ऐसा नहीं है विक विनUी प्रत्यर्थिर्थीयों ने भ; प्रविWया में भाग लेने क े लिलए अनुपयुH र्थीे।खेल क े विनयमों को बदलने वाले सिसद्धां का ब कोई उपयोग नहीं होगा Uब परिरव 3न Mयन प्रविWया क े संबं में होगा लेविकन योग्य ा या पात्र ा क े संबं में नहीं होगा।दूसरे शब्दों में, विवज्ञापन क े बाद और अति क प्रगति क े सार्थी एक उम्मीदवार द्वारा आवेदन विकए Uाने क े बाद, एक विनयम नहीं लाया Uा सक ा, सिUससे उसे Mयन प्रविWया में भाग लेने क े लिलए अयोग्य घोविb विकया Uा सक े ।क े वल ऐसे मामलों में, उपयु3H सिसद्धां का एक आवेदन होगा अन्यर्थीा यह नौकरी क े लिलए उपयुH व्यविH की भ; करने की विनयोHा की शविH को बाति करेगा।
33. उच्च न्यायालय द्वारा विदए गए विनण3य क े परिरशीलन पर, Uैसा विक पहले पाया गया है, उसका ध्यान आकर्दिb करने क े प्रयास विकए Uाने क े बावUूद समुतिM उपबं ों पर विवMार विकए विबना आक्षेविप विनण3य विकए Uा े हैं।उच्च न्यायालय ने हमारे सुविवMारिर vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk दृविष्टकोण में समीक्षा यातिMका में उठाए गए आ ारों पर ध्यान नहीं विदया।भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शुरू की गई एक काय3वाही में, समीक्षा क े दायरे को अलग रीक े से देखा Uाना Mाविहए, सिUससे एक विवस् ृ दृविष्टकोण सुलभ हो सक े । हम पहले ही विनयम 15 क े दायरे और 2015 क े विनयमों में प्र ीक्षा सूMी क े लिलए विकसी भी प्राव ान की अनुपलब् ा पर MMा3 कर Mुक े हैं। दनुसार, अपील की अनुमति दी Uा ी है और 09.08.2018 और 30.10.2019 क े आक्षेविप विनण3यों को अपास् कर विदया Uा ा है और परिरणामस्वरूप विवद्व एकल न्याया ीश द्वारा पारिर आदेश को बहाल कर विदया Uा ा है।कोई लाग नहीं। …..…………………… न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ………………………... (एम. एम. सुंदरेश) नई विदल्ली, 12 विदसंबर, 2022. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk