Full Text
भार का उच्च म न्यायालय
आपराति क अपीलीय क्षेत्राति कार
आपराति क अपील संख्या 2201/2011
राजस्थान राज्य ……
अपीलक ा"
बनाम
गुरबचन सिंसह और अन्य ...…
प्रति वादी
निनर्ण"य
संजीव खन्ना , ज.
JUDGMENT
1. आदेश निदनांक 01/05/2009 द्वारा, निवशेष अनुमति यातिचका में नोनि4स प्रथम प्रति वादी - गुरबचन सिंसह क ही सीनिम था। अन्य प्रति वानिदयों क े खिखलाफ निवशेष अनुमति यातिचका खारिरज कर दी गई। हमारा ध्यान निदनांक 17.12.2008 क े उस आदेश की ओर आक ृ ष्ट निकया जा ा है, जिजसमें मनजी कौर को बरी निकए जाने क े खिखलाफ दायर आपराति क निवनिव यातिचका संख्या 19754/2008 खारिरज की जा ी है।मनजी कौर और जांनिगड़ कौर क े खिखलाफ अभिभयोजन पक्ष द्वारा भरोसा निकया गया मामला और सबू एक जैसे हैं। हमारी राय है और हम दोहरा े हैं निक अभिभयोजन 2022 INSC 1260 जांनिगड़ कौर क े खिखलाफ अपना मामला स्थानिप करने में सक्षम नहीं रहा है। जांगीर कौर को बरी करने की चुनौ ी खारिरज की जा ी है।
2. आरोप पत्र क े अनुसार अभिभयोजन पक्ष का मामला है निक ेजा सिंसह अपने भाई हरभजन सिंसह (पीडब्लू-1) क े साथ एक रफ और गुरबचन सिंसह सह-दोनिषयों और भाइयों दश"न सिंसह, बलवीर सिंसह और मंजी सिंसह क े साथ दूसरी रफ भूनिम क े निवभाजन क े निववाद में उलझे हुए थे। 06/11/2000 को लगभग शाम 5 बजे गुरबचन सिंसह और बलवीर सिंसह जल निनमा"र्ण निवभाग क े भूखंड पर हल जो रहे थे। ेजा सिंसह ने इस पर आपखिM ज ाई थी, जिजसक े बाद एक गांव की बैठक आयोजिज की गई, जिजसमें गुरबचन सिंसह और बलवीर सिंसह दोनों गुस्से में अपने घर चले गए थे। उसी निदन शाम साढ़े सा बजे हरभजन सिंसह (पीडब्ल्यू-1) और जसवीर कौर (पीडब्ल्यू-2) गांव क े गुरुद्वारे जा रहे थे। उस समय ेजा सिंसह को गुरुद्वारा क े पास सोहन लाल की आ4ा निमल से आ े देखा गया था। इसक े बाद, गुरबचन सिंसह और बलवीर सिंसह, मंजी सिंसह और दश"न सिंसह, जो क्रमशः 'लाठी', '4ोका', क ु ल्हाड़ी और 'गंडासी' से लैस थे, ने ेजा सिंसह को पी4ा और घायल कर निदया, जिजससे उसी स्थान पर उसकी मृत्यु हो गई। इस घ4ना में हरभजन सिंसह (पीडब्लू-1) भी घायल हो गया था।
3. प्रथम सूचना रिरपो4" 1 (संक्षेप में, "एफआईआर”) उसी निदन दायर की गई थी, जिजसमें गुरबचन सिंसह, दश"न सिंसह, बलवीर सिंसह और मनजी सिंसह क े नामों का उल्लेख है, और जांनिगड़ कौर व मनजी कौर क े नाम भी हैं, जो कभिथ ौर पर घ4ना स्थल पर मौजूद थे। हालांनिक, प्राथनिमकी क े अनुसार, जांनिगड़ कौर और मनजी कौर को निकसी भी रह क े मौखिखक या शारीरिरक प्रक ृ ति क े निवभिशष्ट कायX क े खिलए जिजम्मेदार नहीं ठहराया गया था।
4. 4्रायल को4" ने निदनांक 07/11/2001 क े फ ै सले क े ह भार ीय दंड संनिह ा, 18602 (संक्षेप में, "भा.दं.सं.”) क े निनम्नखिलखिख प्राव ानों क े ह गुरबचन सिंसह क े साथ-साथ बलवीर सिंसह, मनजी सिंसह, दश"न सिंसह और जांनिगड़ कौर पर मुकदमा चलाया और उन्हें दोषी ठहराया: (क) ारा 302 सपनिठ ारा 149 भा.दं.सं. - आजीवन कारावास और जुमा"ना 1000 रुपये/- प्रत्येक, 2 महीने की तिडफ़ॉल्4 श " क े साथ सा ारर्ण कारावास। (ख) ारा 324 सपनिठ ारा 149 भा.दं.सं.- डेढ़ साल का कठोर कारावास और 500 रुपये का जुमा"ना- प्रत्येक, 1 महीने की तिडफ़ॉल्4 श " क े साथ, सा ारर्ण कारावास। (ग) ारा 323 सपनिठ ारा 149 भा.दं.सं.- 3 माह का कठोर कारावास और 100 रुपये का जुमा"ना, 7 निदन की तिडफ़ॉल्4 श " क े साथ, सा ारर्ण कारावास; और (घ) ारा 148 भा.दं.सं.- एक साल का कठोर कारावास और प्रत्येक पर 100/- रुपये का जुमा"ना, 7 निदन की तिडफ़ॉल्4 श " क े साथ, सा ारर्ण कारावास । मंजी कौर पर वष" 2004 में अलग से मुकदमा चलाया गया था, क्योंनिक वह फरार हो गई थी। उसे 4्रायल को4" ने दोषी ठहराया था, जिजसे हाई को4" ने खारिरज कर निदया था। उनक े मामले में बरी होने का फ ै सला अंति म हो गया है।
5. गुरबचन सिंसह, बलवीर सिंसह, मंजी सिंसह, दश"न सिंसह और जांनिगड़ कौर की अपील पर, जो पुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने निदनांक 04.04.2008 क े निनर्ण"य क े अनुसार, जांनिगड़ कौर द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर खिलया और उसे बरी कर निदया। गुरबचन सिंसह की अपील को आंभिशक रूप से स्वीकार कर खिलया गया क्योंनिक भा.दं.सं. की ारा 302 सपनिठ 149, ारा 147, ारा 148, ारा 324 सपनिठ 149, और ारा 323 सपनिठ 149 क े ह उनकी दोषजिसति_ रद्द कर दी गई थी और उसे ेजा सिंसह को लगी चो4ों क े खिलए भा.दं.सं. की ारा 323 क े ह दोषी ठहराया गया है, और उन्हें रिरहा करने का निनदaश निदया गया था, क्योंनिक उसने अपरा क े खिलए प्रदान की गई अति क म सजा भुग ली थी। भा.दं.सं. की ारा 149 और 148 क े ह बलवीर सिंसह, मंजी सिंसह और दश"न सिंसह की सजा को रद्द कर निदया गया था, हालांनिक, ारा 302 क े ह उनकी सजा को भा.दं.सं. की ारा 34 की मदद से बनाए रखा गया था। हरभजन सिंसह (पी डबल्यू-1) को लगी चो4ों क े खिलए IPC की ारा 34 क े साथ ारा 324 क े ह उनकी दोषजिसति_ और सजा बरकरार रखी गई थी।
6. ऐसा प्र ी हो ा है निक बलवीर सिंसह, मंजी सिंसह और दश"न सिंसह ने अपनी दोषजिसति_ और अति रोनिप दंडादेश को चुनौ ी नहीं दी है, जो अंति म रूप ले चुका है।
7. इस प्रकार, राजस्थान राज्य द्वारा इस अपील में हमारे सामने प्रश्न यह है निक क्या उच्च न्यायालय द्वारा आईपीसी की ारा 302 पनिठ अन्य प्राव ानों क े ह गुरबचन सिंसह को दी गई दोषजिसति_ और सजा को रद्द करना न्यायोतिच था, क े वल आईपीसी की ारा 323 क े ह दोषी ठहराकर, इस खोज क े मद्देनजर निक उसने ेजा सिंसह की मौ का कारर्ण बनने क े खिलए बलवीर सिंसह, मनजी सिंसह और दश"न सिंसह क े साथ सामान्य इरादा साझा नहीं निकया, क्योंनिक उसने क े वल उसक े पैरों पर 'लाठी' से घाव निकया था।
8. प्रासंनिगक रूप से, उच्च न्यायालय ने गुरबचन सिंसह द्वारा की गई अपील को आंभिशक रूप से स्वीकार कर े हुए निनम्नखिलखिख अभिभनिन ा"रिर निकया हैः "अब प्रश्न अभिभयुक्त गुरबचन क े बारे में रह ा है जो प्रत्यक्ष गवाही क े अनुसार 'लाठी' से लैस था और उसे बरामद भी कर खिलया गया था। प्रदश" 41 क े माध्यम से उसक े द्वारा दी गयी सूचना क े पश्चा और इसे प्रदश" 23 क े द्वारा बरामद निकया गया और यह मानव रक्त से भी सनी हुई थी। हरभजन सिंसह खुद घायल हैं जिजसकी चो4 रिरपो4" प्रदश" 15 डॉ. मोहन लाल गुप्ता द्वारा ैयार की गई थी। चो4 की रिरपो4" क े अनुसार उन्हें अपने शरीर पर आठ चो4ें निमली हैं, जिजनमें से एक ारदार हभिथयार से है और हरभजन सिंसह क े बयान क े अनुसार, उक्त चो4 आरोपी बलवीर सिंसह द्वारा '4ोका' से उस समय कारिर की गयी, जब वह अपने भाई को बचाने क े खिलए मौक े पर पहुंचा था। गुरबचन सिंसह ने अपने शरीर पर लाठी से प्रहार निकया। चश्मदीद गवाहों की गवाही से यह सुरतिक्ष रूप से अनुमान लगाया जा सक ा है निक आरोपी गुरबचन सिंसह सामान्य इरादे को साझा नहीं कर रहा था क्योंनिक वह क े वल 'लाठी' से लैस था और मृ क क े शरीर पर जो भी चो4ें लगी थी, जिजससे उसकी मृत्यु हुई, वो मृ क क े शरीर क े मार्मिमक अंगों पर लगी थी।"
9. उपरोक्त क " स्वीकार कर ा है और हमारी राय में सही है निक गुरबचन सिंसह घ4ना स्थल पर बलवीर सिंसह, मनजी सिंसह और दश"न सिंसह क े साथ मौजूद थे, जब हिंहसा हुई थी, जिजसक े परिरर्णामस्वरूप ेजा सिंसह की मृत्यु 06/11/2000 को लगभग 7:30 बजे हुई। हरभजन सिंसह (पी डब्ल्यू-1), ेजा सिंसह का भाई, अपनी पत्नी जसवीर कौर (पी डब्ल्यू-2) क े साथ गाँव में गुरुद्वारे जा रहे थे, गुरुद्वारे क े पास सोहन लाल की आ4ा चक्की से ेजा सिंसह को आ े देखा था। इसक े बाद गुरबचन सिंसह, दश"न सिंसह, बलवीर सिंसह और मंजी सिंसह ने ेजा सिंसह को अभिभवादन निकया था। हरभजन सिंसह (पीडब्लू-1) और उनकी पत्नी जसवीर कौर (पीडब्लू-2) ने गवाही दी है निक गुरबचन सिंसह लाठी लेकर आया था, जबनिक दश"न सिंसह को क ु ल्हाड़ी क े साथ देखा गया था, बलवीर सिंसह '4ोका' क े साथ और मनजी सिंसह 'गंडासी' क े साथ। उन्होंने ेजा सिंसह को घेर खिलया था। गुरबचन सिंसह ने ेजा सिंसह क े पैरों पर 'लाठी' मारी थी, जिजससे वो निगर पड़ा । इसक े बाद, गुरबचन सिंसह और सह-दोनिषयों ने ेजा सिंसह को पी4ा और घायल कर निदया। बलवीर सिंसह ने ेजा सिंसह क े जिसर पर चो4 लगाने क े खिलए निवशेष रूप से एक '4ोका', एक ेज ार वाले हभिथयार का उपयोग निकया था। इसका उद्देश्य और कारर्ण भाइयों क े बीच जमीन का निववाद था, और 06.11.2000 को शाम 5 बजे की घ4ना, जब ेजा सिंसह ने गुरबचन सिंसह और बलवीर सिंसह द्वारा जल काय" निवभाग क े भूखंड की जु ाई पर आपखिM ज ाई थी, और गाँव की बैठक जहाँ गुस्सा भड़क गया, गुरबचन सिंसह और बलवीर सिंसह गुस्से में बैठक छोड़कर चले गए। यह उतिच है निक हरभजन सिंसह (पी डब्लू-1) भी हिंहसा क े दौरान घायल हो गया था।
10. डॉ. मोहन लाल गुप्ता, (पीडब्लू-9) द्वारा सानिब की गई पोस्4-मॉ4"म रिरपो4", जिजसे प्रदश" पी-14 क े रूप में तिचनिm निकया गया था, मे ेजा सिंसह क े जिसर पर निवभिभन्न आकारों की 8 हतिnयों की गहरी चो4ों का उल्लेख निकया गया था।उन्होंने यह भी अभिभसाक्ष्य निदया था निक ये चो4ें क ु ल्हाड़ी, 4ोका, गंडासी, लाठी और आनिद जैसे ारदार हभिथयारों क े कारर्ण हो सक ी थीं, जो सामान्य रूप से मृत्यु का कारर्ण बनने क े खिलए पया"प्त थे।
11. उपयु"क्त स्थिस्थति को देख े हुए, हमारा निवचार है निक भा.दं.सं. की ारा 34 अथा" ् समान आशय स्पष्ट रूप से गुरबचन सिंसह क े मामले में आक ृ ष्ट है, जिजसका मामला निवभेद नहीं निकया जा सक ा है, जिजससे निक उसे ऐसे व्यनिक्त क े रूप में अपवर्जिज निकया जा सक े जिजसका दश"न सिंसह, बलवीर सिंसह और मनजी सिंसह क े साथ समान आशय नहीं था।भा.दं.सं. की ारा 34 एक सह-अपरा ी को, जिजसने अपरा में भाग खिलया था, संयुक्त दातियत्व क े जिस_ां पर समान रूप से उMरदायी बना ी है। भा.दं.सं. की ारा 34 को लागू करने क े खिलए सह-अपराति यों क े बीच एक समान आशय होना चानिहए, जिजसका अथ" है निक उद्देश्य और समान तिडजाइन का समुदाय होना चानिहए। सामान्य आशय क्षर्ण क े आवेग में और घ4ना क े दौरान ही बन सक ा है। सामान्य आशय आवश्यक रूप से एक मनोवैज्ञानिनक थ्य है और इस प्रकार, सामान्य रूप से प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब् नहीं होंगे।इसखिलए, अति कांश मामलों में, एक समान आशय है या नहीं, यह सानिब थ्यों से निनष्कष" निनकालकर निन ा"रिर निकया जाना चानिहए। रचनात्मक इरादे पर क े वल भी पहुंचा जा सक ा है जब न्यायालय यह अभिभनिन ा"रिर कर सक ा है निक अभिभयुक्त ने सामान्य आशय को आगे बढ़ाने क े खिलए परिरर्णाम की पूव" कल्पना की होगी।
12. आक्षेनिप निनर्ण"य में यह म व्यक्त निकया गया है निक गुरबचन सिंसह क े आचरर्ण से सामान्य आशय का अनुमान नहीं लगाया जा सक ा है, क्योंनिक वह क े वल 'लाठी' से लैस था और क े वल ेजा सिंसह क े पैरों पर मारा था। थानिप, हमारा यह म है निक ेजा सिंसह को घायल करने और उसकी मृत्यु कारिर करने का सामान्य आशय गुरबचन सिंसह क े आचरर्ण और कार"वाई से प्राप्त निकया जा सक ा है। सबसे पहले, यह हरभजन सिंसह (पी डब्लू-1) और जसवीर कौर (पी डब्लू-2) क े बयानों क े साथ पढ़े गए आक्षेनिप फ ै सले क े उ_ृ पैराग्राफ से निनगनिम है निक गुरबचन सिंसह अन्य लोगों क े साथ 'लाठी' लेकर ैयार होकर आए थे, जिजनक े पास '4ोका', फरसा और 'गंडासी' था। इसकी पुनिष्ट इस थ्य से हो ी है निक गुरबचन सिंसह क े कब्जे से खून से सनी 'लाठी' बरामद की गयी थी। साक्ष्य सह-प्रति भानिगयों/सह-दोनिषयों क े साथ अपरा करने में गुरबचन सिंसह की भागीदारी को स्थानिप कर ा है। दूसरा, गुरबचन सिंसह पहले व्यनिक्त थे जिजन्होंने ेजा सिंसह पर लाठी से हमला निकया और उन्हें चो4 पहुंचाई। अं में, गुरबचन सिंसह ने सह-दोनिषयों क े साथ, ेजा सिंसह क े जिसर पर 8 क4े हुए घाव और अन्य महत्वपूर्ण" निहस्सों पर चो4ें पहुंचाई ं, जैसा निक पोस्4-मॉ4"म रिरपो4" (प्रदश" 14) में दज" है। प्रत्यक्षदर्शिशयों क े बयान से स्पष्ट हो ा है निक गुरबचन सिंसह ने क े वल एक लाठी नहीं मारी, जैसा निक बचाव पक्ष द्वारा कहा जा रहा है, लेनिकन वह नीचे निगरने क े बाद भी मृ क को लाठी मार ा रहा। यह उसने अन्य सह-दोनिषयों, बलवीर सिंसह, मनजी सिंसह और दश"न सिंसह क े साथ निकया, जिजन्होंने '4ोका', क ु ल्हाड़ी और 'गंडासी' से चो4ें पहुँचाई थीं। ये थ्य जिस_ कर े हैं निक गुरबचन सिंसह ने अन्य सह-दोनिषयों क े साथ चो4 पहुंचाने क े समान इरादे साझा निकए थे, और अपरा सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने क े खिलए निकया गया था, जिजसक े कारर्ण ेजा सिंसह की मौ हो गई थी। इसखिलए, गुरबचन सिंसह सनिह वे सभी आपराति क क ृ त्य क े खिलए जिजम्मेदार होंगे, यानी भा.दं.सं. की ारा 302 क े ह अपरा, चाहे उन्होंने कोई भी भूनिमका निनभाई हो।
13. पूवyक्त को दज" कर े हुए, हम उच्च न्यायालय द्वारा भा.दं.सं. की ारा 302 क े ह गुरबचन सिंसह को बरी करने क े आक्षेनिप निनर्ण"य को खारिरज कर े हैं, और उसे भा.दं.सं. की ारा 302 सपनिठ ारा 34 क े ह ेजा सिंसह की हत्या क े खिलए दोषी ठहराया जा ा है। हरभजन सिंसह (पी डब्ल्यू -1) को लगी चो4ों क े खिलए भा.दं.सं. की ारा 324 क े ह गुरबचन सिंसह की दोषजिसति_ भी कायम है । भा.दं.सं. की ारा 302 सपनिठ ारा 34 क े ह अपरा क े खिलए, हम गुरबचन सिंसह को आजीवन कारावास की सजा सुना े हुए 4्रायल को4" द्वारा पारिर सजा क े आदेश को बहाल कर े हैं। साथ ही 1,000/- रुपये का जुमा"ना, इस श " क े साथ निक अदम अदायगी की स्थिस्थति में, उन्हें दो महीने की अवति क े खिलए सा ारर्ण कारावास की सजा भुग नी होगी।दण्ड प्रनिक्रया संनिह ा, 1973 की ारा 428 का लाभ निदया जायेगा। हालांनिक, हम उच्च न्यायालय द्वारा खिलए गए दृनिष्टकोर्ण को स्वीकार कर े हैं निक भा.दं.सं. की ारा 148 क े साथ पनिठ ारा 149 क े ह दोषजिसति_ को बनाए नहीं रखा जा सक ा है क्योंनिक भा.दं.सं. क े इन प्राव ानों को आकर्मिष करने क े खिलए गैरकानूनी असेंबली की आवश्यक ा, सं ोषजनक नही है ।
14. गुरबचन सिंसह शेष सजा का4ने क े खिलए 21 निदनों क े भी र आत्मसमप"र्ण करेगा। यनिद गुरबचन सिंसह उक्त अवति क े भी र आत्मसमप"र्ण नहीं कर ा है, ो अति कारी/अदाल गुरबचन सिंसह को निहरास में लेने क े खिलए कानून क े अनुसार कार"वाई करेगी, ानिक वह शेष सजा का4 सक े ।
15. अपील पूवyक्त श X में अनुज्ञा है।
16. लंनिब आवेदन, यनिद कोई हो, का निनस् ारर्ण निकया जाएगा। ………………....… जे. (संजीव खन्ना) ………………....... जे. (सु ांशु ूखिलया) नई निदल्ली 07 निदसंबर, 2022 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS with the help of Translator) Disclaimer: The translated judgment in vernacular language made for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purposes. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.