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भार� क
े सव�च्च न्यायालय में
आपराति�क अपीलीय अति�कारिर�ा
आपराति�क अपीलीय संख्या 490/2017
मुन्ना लाल ... अपीलक�ा&
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य ... प्रत्यर्थी0
सह
आपराति�क अपीलीय संख्या 491/2017
शिशव लाल ... अपीलक�ा&
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य ... प्रति�वादी
निनर्ण&य
न्यायमूर्ति� दीपांकर दत्ता, mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
एक ही घटना से उत्पन्न इन दोनों दाण्डिABक अपीलों में , एसटी सं.
499/1985 निE�ीय अपर सत्र न्याया�ीश, शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश क
े
न्यायालय Eारा 29 जनवरी 1986 क
े निनर्ण&य और आदेश क
े निवरूद्ध
अपीलक�ा&ओं Eारा दायर आपराति�क अपील सं. 539/1986 [जो दंB
प्रनिPया संनिह�ा(ए�ण्डिRमनपश्चा�् संक्षेप में "सीआरपीसी") की �ारा 374(2)
क
े �ह� एक अपील है] को खारिरज करने वाले उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
क
े 9 जुलाई 2014 क
े निनर्ण&य और आदेश को चुनौ�ी दी गयी है।
प्रर्थीम सूचना रिरपोट& (एफआईआर)
JUDGMENT
2. राम निवलास क े निप�ा नारायर्ण की हत्या 5 सिस�ंबर, 1985 की सुबह लगभग 10.00 बजे की गई र्थीी।इसक े �ुरं� बाद लगभग 12.10 बजे रामनिवलास Eारा एक �हरीर दज& कराई गई र्थीी, सिजसक े बाद भार�ीय दंB संनिह�ा (संक्षेप में "आईपीसी") की �ारा 302 क े �ह� एफआईआर दज& की गई।Bॉ. मोहम्मद हनीफ खान उक्त एफआईआर क े लेखक र्थीे। मुन्ना लाल, शिशव लाल, बाबू राम और कालिलका पर इस हत्या को करने का आरोप लगाया गया र्थीा। मृत्यु समीक्षा
3. एफआईआर दज& होने क े परिरर्णामRवरूप, ति�लहर पुलिलस र्थीाने क े र्थीानाध्यक्ष शैलेंद्र बहादुर चंद्र (जो निववेचक भी र्थीे) एसआई रामपाल सागर और कांRटेबल उ�म सिंसह क े सार्थी घटना Rर्थील पर पहुंचे। इस Pम में राम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds पाल सागर ने मृत्यु समीक्षा की, सिजसक े दौरान नारायर्ण को लगी चोटों में से एक चोट से निनकले हुए खून से घटना Rर्थील पर एक गोली बरामद की गई र्थीी। आरोप
4. निववेचना पूरी होने क े बाद, चारों अशिभयुक्तों क े निवरुद्ध संबंति�� न्यायालय क े समक्ष �ारा 302 क े अ�ीन आरोप-पत्र दालिखल निकया गया।इस बीच कालिलका की मृत्यु हो गई र्थीी। सुपुद&गी पर, निनचली अदाल� ने निनम्नलिललिख� आरोप �य निकएः "आरोप मैं, सनवाल सिंसह, निE�ीय अपर सत्र न्याया�ीश, शाहजहांपुर, ए�द्Eारा आप पर निनम्नलिललिख� आरोप लगा�ा हूंः-
1. शिशव लाल
2. मुन्ना लाल
3. बाबुल राम यह निक आपने कालिलका क े सार्थी 05.09.85 को सुबह लगभग 10.00 बजे गांव फ�ेहपुर बुजुग&/ मोहद्दीपुर, र्थीाना ति�लहर, सिजला शाहजहांपुर, गांव अबादी क े पतिश्चम में ण्डिRर्थी� बु�खान क े खे� में आशयपूव&क और जानबूझकर नारायर्ण की हत्या की, सिजसमें आप, मुन्ना ने गोली मारी, आप बाबू राम ने �मंचा Eारा चोट पहुंचाई और आप शिशवलाल ने कां�ा और आपक े सहयोगी मृ�क कालिलका की लाठी से चोट पहुंचाई और आप सभी ने कशिर्थी� अपरा� करने में साशय सहयोग निकया और इस प्रकार आपने आईपीसी की �ारा 302 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े �ह� दंBनीय और इस सत्र न्यायालय क े संज्ञान क े �ह� अपरा� कारिर� निकया। और मैं ए�द्Eारा यह निनदrश दे�ा हूं निक आप पर उक्त आरोप पर सत्र न्यायालय Eारा मुकदमा चलाया जाए। निवचारर्ण
5. अशिभयोजन ने अपने मामले का समर्थी&न करने क े लिलए पांच गवाहों और एक दज&न से अति�क दR�ावेजी साक्ष्यों का परीक्षर्ण निकया। बचाव पक्ष की ओर से निकसी का भी परीक्षर्ण नहीं निकया गया।
6. पीBब्ल्यू-1 Bॉ. रमेश र्थीे, सिजन्होंने पोRटमॉट&म निकया र्थीा।नारायर्ण क े शव पर निनम्नलिललिख� मृत्यु पूव& चोटें पाई ंगयीः (1) फटा घाव 2 सेमी x 1 सेमी, मार्थीे पर, बाई ंआंख की भौंह की दीवार से 3 सेमी ऊपर। भुनगे उपण्डिRर्थी�। (2) कटा हुआ घाव 4 सेमी x 1 सेमी, ठोड़ी पर, निनचले होंठ से 1 सेमी नीचे। भुनगे उपण्डिRर्थी� र्थीे। (3) कटा हुआ घाव 3 सेमी x 1 सेमी, चेहरे क े बायीं �रफ, बायें पार्श्व& से मुंह क े बाई ंओर 2 सेमी। (4) कटा हुआ घाव 17 सेमी x 8 सेमी, उदर गुहा क े सामने नाशिभ से ऊपर 5 सेमी गहरा।आं�रिरक अंग बाहर निनकले हुए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (5) गोली लगने क े घाव का प्रवेश 2 सेमी x 1 सेमी, सामने क े उदर पर, 3 सेंटीमीटर दानिहना पार्श्व& से नाशिभ पर, टैटू मौजूद।निदशा पीछे की �रफ नीचे की ओर। (6) गोली लगने क े घाव का निनकास 6 सेमी x 5 सेमी, क ू ल्हे क े बायीं �रफ, इलिलयक P े Rट से 5 सेमी नीचे। (7) गोली लगने क े घाव का निनकास 2 सेमी x 1 सेमी, दाहिंहनी जांघ पर सामने, इलिलयक Rपाइन (अग्रव�0) क े 15 सेमी नीचे, निदशा पीछे की ओर सी�ी। (8) गोली लगने क े घाव का निनकास 3 सेमी x 2 सेमी, दाहिंहने जांघ क े पार्श्व& भाग पर, इलिलयक P े Rट से 12 सेमी नीचे।"
7. पीBब्लू-1 क े अनुसार, “नारायर्ण की मृत्यु सदमे व आं�रिरक रक्तस्राव और बहु� अति�क खून बहने क े कारर्ण हुई”; चोट संख्या 5 और 6 और इसी �रह उपरोक्त उसिƒलिख� चोट संख्या 7 और 8 Pमशः एक दूसरे क े सार्थी संबंति�� प्रवेश व निनकास चोट र्थीे, जो बंदूक और �मंचा शॉट्स क े कारर्ण हो सक�े र्थीे, जबनिक चोट संख्या 1, 2, 3 लाठी से संभव र्थीी और चोट संख्या 4 "कांटा" Eारा कारिर� हुई हो सक�ी र्थीी।
8. मृ�क क े पुत्र रामनिवलास ने, पी Bब्लू-2 क े रूप में अशिभसाक्ष्य दे�े हुए कहा निक नारायर्ण और जसवं� (शिशवलाल क े निप�ा) और शिशवलाल क े बीच दस वर्ष& पहले एक झगड़ा हुआ र्थीा और जसवं� की उस झगड़े में मृत्यु हो गई र्थीी। शिशव लाल क े पक्ष से अजु�ी की हत्या कर दी गई।हालांनिक नारायर्ण को बरी कर निदया गया। पीBब्ल्यू-2 ने अन्य बा�ों क े सार्थी-सार्थी मुन्ना लाल और शिशव लाल की पहचान की, जो अदाल� में उपण्डिRर्थी� र्थीे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds पीBब्लू-2 क े अनुसार, घटना की �ारीख को, वह अपने निप�ा नारायर्ण क े सार्थी खे� जो�ने क े बाद बु�ू खान क े खे� में पहुंचा र्थीा, जब चार अशिभयुक्त अचानक शिशवलाल क े खे� से बाहर आ गए। कशिर्थी� अशिभयुक्त मुन्ना लाल, शिशव लाल, बाबू राम और कालिलका Pमशः 'बंदूक', 'कांटा' (�ारदार हशिर्थीयार), '�मंचा' (Rर्थीानीय रूप से बनी बंदूक) और 'लाठी' से लैस र्थीे। वे गाली-गलौज कर रहे र्थीे और नारायर्ण को मारने की �मकी दे रहे र्थीे। नारायर्ण को मुन्ना लाल और बाबू राम से गोली लगी, जबनिक शिशव लाल और कालिलका ने Pमशः कां�ा और लाठी से उसे घायल कर निदया। क े दार, हेमराज, खेमकरन और छंगलाल ने भी इस घटना को देखा। क े दार और हेमराज ने हत्या न करने का अनुरो� निकया।यह दोहराया गया निक हेमराज घटना क े समय आया र्थीा और उसने घटना देखी र्थीी। अशिभयुक्तों ने वहां से भागने क े बाद, अन्य अशिभयुक्त वहाँ पहुँचे। पीBब्लू-2 ने यह पाकर निक नारायर्ण मृ� र्थीे, वह Bॉ. हनीफ की दुकान पर पहुंचा और उसे घटना क े बारे में ब�ाया, सिजसक े बाद Bॉ. हनीफ ने �हरीर लिलखी और उसमें लिलखी गई बा� को पीBब्लू-2 को पढ़कर सुनाया। पीBब्लू-2 ने न �ो Bॉ. हनीफ Eारा लिलखी गई रिरपोट& पर हR�ाक्षर निकए और न ही अपने अंगूठे क े निनशान लगाए, लेनिकन जब पीBब्लू-2 पुलिलस Rटेशन में रिरपोट& ले गया, �ो उसने पुलिलस Rटेशन में 'मुंशी' Eारा लिलखी गई रिरपोट& पर अपने अंगूठे का निनशान लगाया।
9. प्रति�परीक्षा क े दौरान, पीBब्लू-2 ने ब�ाया निक नारायर्ण ने जसवं� की बंदूक का लाइसेंस रद्द करने क े लिलए एक आवेदन निकया र्थीा और 'पैरवी' की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds र्थीी। नारायर्ण पर पहले भार�ीय दंB संनिह�ा की �ारा 302 क े �ह� एक मामले में मुकदमा चलाया गया र्थीा और उसने भी एक Pॉस-क े स निकया र्थीा; आगे �ारा 107/116 सीआरपीसी क े �ह� एक मामला नारायर्ण क े लिखलाफ लंनिब� र्थीा; दंB प्रनिPया संनिह�ा की �ारा 145 क े �ह� एक मामला और लंनिब� र्थीा सिजसमें पीBब्लू-2 और उसक े निप�ा नारायर्ण अशिभयुक्त र्थीे।बाद वाले मामले में, मुन्ना लाल उनक े लिखलाफ गवाह र्थीा। 'अजुति�' की हत्या क े बाद से, शिशव लाल क े सार्थी निनरं�र दुश्मनी रही है। हालांनिक नारायर्ण की हत्या �क, पीBब्लू-2 या उसक े निप�ा क े सार्थी कोई 'मारपीट' नहीं हुई र्थीी, न 'पैरोकारी' की र्थीी। पीBब्लू-2 ने "पुलिलस Rटेशन में रिरपोट& पर अंगूठे का निनशान नहीं लगाया र्थीा", लेनिकन हनीफ की 'दुकान' पर उस पर अपना अंगूठा लगाया र्थीा और उसे मुंशी को सौंप निदया र्थीा।
10. प्रत्यक्षदश0 हेमराज ने पीBब्ल्यू-3 क े रूप में गवाही दी।पीBब्लू-3 की बहन गोपालपुर �ा�ीपुरा में रह�ी है और वह कभी कभी आ�ा जा�ा है। महादीपुर और गोपालपुर क े बीच की दूरी 1-2 मील है।जब भी पीBब्लू-3 अपने गांव से गोपालपुर जा�ा र्थीा, �ो वह मोहद्दीपुर गांव की बाहरी सड़क से निनकल�ा र्थीा।जब वह बु�ू खान क े खे� क े पास पहुंचा, �ो बंदूक, कांटा, �मंचा और लाठी से लैस होकर अशिभयुक्त नारायर्ण की हत्या कर रहे र्थीे। पीBब्ल्यू-2 घटना Rर्थील पर मौजूद र्थीा।दो राहगीर छंगलाल और खेमकरन वहां पहुंचे र्थीे। पीBब्ल्यू-3 क े अलावा दो भैंसों को चरा रहे क े दार ने भी इस घटना को देखा र्थीा। नारायर्ण पर हमला करने क े बाद, आरोपी व्यनिक्त दतिक्षर्ण निदशा की ओर भाग गए। नारायर्ण की मृत्यु हो चुकी र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
11. प्रति�परीक्षा क े दौरान, पीBब्लू-3 ने उन सुझावों का खंBन निकया निक वह नारायर्ण क े परिरवार से संबंति�� र्थीा।पीBब्लू-3 ने दोहराया निक क े दार घटना Rर्थील क े पास जानवरों को चरा रहा र्थीा और खेमकरर्ण और छंगलाल उसकी (पीBब्लू-3) उपण्डिRर्थीति� में वहां आए र्थीे। जब पीBब्लू-3 घटना Rर्थील से निनकला, �ो बीस से पच्चीस लोग वहां इकट्ठा हो गये र्थीे, सिजनमें से नारायर्ण क े परिरवार की एक बुजुग& मनिहला और एक लड़की रो रही र्थीी। न �ो पीBब्लू-3 राम निवलास की पत्नी को पहचान सका और न ही उन्हें उन ग्रामीर्णों का नाम प�ा र्थीा जो बाद में वहां पहुंचे।
12. पीBब्लू 4 रामपाल सागर र्थीे, सिजन्होंने मृत्य समीक्षा की।पीBब्ल्यू-4 ने बयान निदया निक मृत्यु-समीक्षा क े दौरान, उसने मृ�कों क े क ू ल्हे की चोट से निनकलने वाले खून में एक गोली पाई। उसने आरोप-पत्र और बरामद की गई गोली से संबंति�� जब्�ी ज्ञापन को सानिब� निकया। पीBब्लू-4 ने यह भी बयान निदया निक अन्य लोगों क े सार्थी वह घटना Rर्थील पर पहुंचने पर क े दार से निमला र्थीा।
13. कांRटेबल उ�म सिंसह ने पीBब्ल्यू-5 क े रूप में गवाही दी।पीBब्ल्यू-5 घटना Rर्थील पर निववेचक क े सार्थी गये र्थीा, जहां पीBब्ल्यू-4 ने मृत्यु- समीक्षा की र्थीी।
14. यह महत्वपूर्ण& है निक Bॉ. हनीफ, क े दार, छंगलाल, खेमकरन और निववेचना अति�कारी का अशिभयोजन Eारा परीक्षर्ण नहीं निकया गया र्थीा। इसक े अलावा न �ो बंदूक और �मंचा और न ही कांटा और लाठी जब्� की गई। कोई फोरेंसिसक प्रयोगशाला या बैलिलण्डिRटक रिरपोट& भी नहीं र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
15. अं��ोगत्वा, अशिभलेख पर मौजूद साक्ष्य पर निवचार करने पर, सत्र न्याया�ीश ने अशिभनिन�ा&रिर� निकया निक सुसंग� और निनर्विववाद प्रत्यक्ष साक्ष्य ने मामले को सानिब� निकया, जो निवर्श्वसनीय संभाव्य�ाओं, उद्देश्य क े अण्डिR�त्व, तिचनिकत्सा साक्ष्य और सभी अन्य परिरण्डिRर्थीति�यों Eारा समर्थिर्थी� र्थीा। ऐसा मानने में, निनचली अदाल� ने पीBब्लू 2 और 3 क े प्रत्यक्षदश0 बयानों पर अवलम्ब लिलया और मुन्ना लाल, शिशवलाल और बाबू राम को उन अपरा�ों क े लिलए दोर्षी ठहराया, सिजनक े लिलए उन पर आरोप लगाए गए र्थीे। यह भी अशिभनिन�ा&रिर� निकया गया निक त्वरिर� एफआईआर ने मामले की सच्चाई क े बारे में गारंटी प्रR�ु� की। न�ीज�न, 29 जनवरी 1986 को अपने फ ै सले से, न्याया�ीश ने जीनिव� अशिभयुक्तों, मुन्ना लाल, शिशवलाल और बाबू राम को दोर्षी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपील
16. जैसा निक ऊपर उƒेख निकया गया है, सत्र न्याया�ीश क े पूव�क्त निनर्ण&य और आदेश क े निवरूद्ध मुन्ना लाल, शिशवलाल और बाबू राम Eारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े समक्ष अपील की गयी।
17. अपील क े निवचारा�ीन रहने क े दौरान, बाबू राम का निन�न हो गया, इसलिलए उनक े अनुरो� पर अपील उपशनिम� हो गई।
18. मुन्ना लाल और शिशवलाल की ओर से �र्थीा उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश की गई दलीलों को सुनने क े बाद और अशिभलेख पर रखी गई Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds सामग्री पर निवचार करने पर उच्च न्यायालय ने सत्र न्याया�ीश Eारा निदए गए निनष्कर्ष• पर सहमति� व्यक्त की और कहा निक हR�क्षेप करने क े लिलए पया&प्त आ�ार नहीं है। उक्त अपील को खारिरज कर�े हुए, उच्च न्यायालय ने मुन्ना लाल और शिशव लाल, जो जमान� पर र्थीे, को 30 निदनों क े भी�र अपनी सजा की शेर्ष अवति� पूरी करने क े लिलए निनचली अदाल� क े समक्ष आत्मसमप&र्ण करने का निनदrश निदया, सिजसमें निवफल रहने पर निनचली अदाल� को उनकी निगरफ्�ारी सुनिनतिश्च� करने और कानून क े अनुसार सजा काटने क े लिलए जेल भेजने का निनदrश निदया। इस न्यायालय क े समक्ष काय&वाही
19. उच्च न्यायालय Eारा दाण्डिABक अपील संख्या 539/1986 क े खारिरज होने से व्यशिर्थी� होकर मुन्ना लाल और शिशव लाल ने अपील की निवशेर्ष अनुमति� क े लिलए आवेदन निकया, सिजस पर इस न्यायालय Eारा 6 माच& 2017 को एक आदेश Eारा अनुमति� प्रदान की गई।
20. इस बीच, उच्च न्यायालय Eारा उनकी अपील खारिरज निकए जाने क े बाद मुन्ना लाल और शिशव लाल को निहरास� में ले लिलया गया र्थीा। दोनों अपीलक�ा&ओं ने 11 साल और 11 महीने से अति�क की अपनी संबंति�� सजा काटी है, उन्होंने जमान� क े लिलए आवेदन निकया। 10 जनवरी 2023 को जमान� क े लिलए आवेदनों पर निवचार कर�े हुए, इस अदाल� ने पक्षकारों को निनदrश निदया निक वे अपीलों को गुर्ण -दोर्षों पर बहस करने क े लिलए अगले निदन बेह�र ढंग से �ैयार होकर आयें। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
21. अपीलार्थिर्थीयों मुन्ना लाल और शिशव लाल की ओर से पेश निवEान अति�वक्ता श्री मुक े श क े. निगरिर और प्रत्यर्थी0 की ओर से निवEान अति�वक्ता श्री संजय क ु मार त्यागी को निवR�ार से सुना गया है। अपीलक�ा&ओं क े �क &
22. श्री निगरिर ने निनचली अदाल� और उच्च न्यायालय Eारा निदए गए निनष्कर्ष• पर गंभीर आपलित्त ज�ाई। उनक े अनुसार, अशिभलेख पर मौजूद सबू�ों से, यह निबल्क ु ल Rपष्ट है निक नारायर्ण और जसवं� (मुन्ना लाल क े निप�ा) क े बीच लंबे समय से दुश्मनी र्थीी और निनचली अदाल�ें इस बा� पर ध्यान देने में निवफल रहीं निक यह गल� फ ं साने का एक Rपष्ट मामला र्थीा। इसक े अलावा, उन्होनें �क & निदया निक सीआरपीसी की �ारा 161 क े �ह� हेमराज, पीBब्लू-3 का बयान 29 सिस�ंबर 1985 को दज& निकया गया र्थीा जो अपीलार्थिर्थीयों Eारा नारायर्ण की कशिर्थी� रूप से हत्या निकए जाने क े चौबीस निदन से अति�क क े बाद र्थीा। निववेचक क े अदाल� में न मौजूद होने से, इस �रह क े बयान को दज& करने में इस देरी क े लिलए कोई न्यायोतिच� Rपष्टीकरर्ण नहीं र्थीा और इससे अपीलक�ा&ओं पर गहरा प्रति�क ू ल प्रभाव पड़ा। इसक े बाद, अशिभयोजन पक्ष क े गवाहों क े रूप में Bॉ. हनीफ, क े दार, छंगलाल और खेमकरन क े पेश न होने का उƒेख कर�े हुए, उनक े Eारा यह �क & निदया गया निक इसे अशिभयोजन पक्ष क े मामले क े लिलए घा�क ठहराया जाना चानिहए र्थीा।
23. आगे जारी रह�े हुए, श्री निगरिर ने �क & निदया निक पीBब्लू-3 क े वल एक मौका गवाह र्थीा और उस गांव से अलग गांव का निनवासी होने क े ना�े, जहां Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपीलार्थी0 और नारायर्ण अपने परिरवार क े सदRयों क े सार्थी रह�े र्थीे, उसक े पास सुबह 10 बजे घटना Rर्थील पर होने का कोई कारर्ण नहीं र्थीा और उसक े Eारा कोई निवर्श्वसनीय Rपष्टीकरर्ण नहीं निदया गया र्थीा। श्री निगरिर ने अपनी इस दलील का समर्थी&न करने क े लिलए निक एक मौक े क े गवाह क े साक्ष्य की साव�ानी और बारीकी से जांच करने की आवश्यक�ा है, यह निक घटना Rर्थील पर उसकी उपण्डिRर्थीति� को पया&प्त रूप से Rर्थीानिप� निकया जाना चानिहए और एक मौक े क े गवाह की गवाही, सिजसकी उपण्डिRर्थीति� घटना Rर्थील पर संनिदग्� है, को खारिरज कर निदया जाना चानिहए, श्री निगरिर Eारा (2009) 9 एससीसी 719 (जरनैल सिंसह बनाम पंजाब राज्य) में निदए गए इस न्यायालय क े निनर्ण&य पर अवलम्ब लिलया गया र्थीा।
24. श्री निगरिर ने आगे प्रति�वाद निकया निक मुन्नालाल की Bबल बैरल बंदूक का लाइसेंस र्थीा और ऐसी बंदूक को जब्� करने का कभी कोई प्रयास नहीं निकया गया र्थीा। निदलचRप बा� यह है निक सिजस Rर्थीान पर नारायर्ण का शव पड़ा र्थीा, वहां से एक गोली बरामद होने क े बाद, बैलिलण्डिRटक निवशेर्षज्ञों की राय लेने का कोई प्रयास भी नहीं निकया गया निक क्या गोली मुन्ना लाल की बंदूक से चलाई जा सक�ी र्थीी।
25. श्री निगरिर ने यह भी �क & निदया निक निववेचक की गवाही को दज& करने में अशिभयोजन की निवफल�ा को एक गंभीर दोर्ष माना जाना चानिहए, जो बचाव पक्ष क े इस कर्थीन को निवर्श्वासनीय बना�ा है निक नारायर्ण की हत्या निकसी और Eारा की गई हो सक�ी है, लेनिकन पुरानी दुश्मनी क े कारर्ण मुन्ना लाल और शिशव लाल को झूठे �रीक े से आरोपी बनाया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds राज्य की दलीलें
26. इसक े निवपरी�, उभयनिनष्ठ प्रत्यर्थी0 क े निवEान अति�वक्ता ने �क & निदया निक निनचली अदाल� क े सार्थी-सार्थी उच्च न्यायालय ने अशिभलेख पर मौजूद साक्ष्य की बारीकी से जांच की और इस निनष्कर्ष& पर पहुँचे निक मुन्ना लाल और शिशव लाल, बाबू राम क े सार्थी हत्या क े अपरा� क े दोर्षी र्थीे। उनक े अनुसार, जांच की प्रनिPया में खानिमयां मात्र, इस प्रकार निदए गए निनष्कर्ष• को बदलने क े लिलए पया&प्त नहीं होंगी। चश्मदीद गवाहों, पीBब्ल्यू-2 और पीBब्ल्यू-3 क े बयानों को निनचली अदाल�ों Eारा निवर्श्वसनीय और भरोसेमंद पाया गया और ऐसे बयानों नकारने क े लिलए अशिभलेख पर कु छ भी नहीं है, निकसी हR�क्षेप की आवश्यक�ा नहीं है। उन्होंने यह भी �क & निदया निक अपरा� क े हशिर्थीयारों को जब्� करने में चूक और/या क े वल बैलिलण्डिRटक रिरपोट& पेश न करना अशिभयोजन क े मामले क े लिलए घा�क नहीं हो सक�ा है, जहां अशिभलेख पर निवर्श्वसनीय प्रत्यक्ष(चRमदीद) साक्ष्य मौजूद हो जो आरोपी की दोनिर्ष�ा को Rपष्ट�ः दर्थिश� कर�ा हो। उन्होंने यह कह�े हुए समापन निकया निक अपीलों में कोई बल न होने क े कारर्ण, उन्हें खारिरज निकया जाना चानिहए। सवाल
27. सवाल यह है निक इस न्यायालय को इन आपराति�क अपीलों पर निनर्ण&य करने का काम सौंपा गया है, क्या निनचली अदाल�, अपने समक्ष रखी गई सामग्री क े आ�ार पर, दोर्षसिसतिद्ध अशिभलिललिख� करने और इसक े परिरर्णामRवरूप, अपीलक�ा&ओं को अपना बाकी जीवन जेल में निब�ाने क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds लिलए सजा देने में न्यायोतिच� र्थीा। चूंनिक उच्च न्यायालय ने निनचली अदाल� क े निनर्ण&य और आदेश को बरकरार रखा है, इसलिलए इस सवाल का जवाब इस न्यायालय को अपीलों को एक या दूसरे �रीक े से �य करने क े लिलए निनदrशिश� करेगा। निनर्ण&य
28. इन अपीलक�ा&ओं क े भाग्य का निनर्ण&य करने से पहले, इन दो अपीलों पर निनर्ण&य लेने क े लिलए प्रासंनिगक कु छ सिसद्धां�ों पर ध्यान देना उतिच� होगा। यह कहने की आवश्यक�ा नहीं है निक ऐसे सिसद्धां� वर्ष• क े दौरान निवकसिस� हुए हैं और ‘कानून क े Rर्थीानिप� सिसद्धां�ों’ में परिरवर्ति�� हुए हैं। ये निनम्न हैंः (क) भार�ीय साक्ष्य अति�निनयम, 1872 की �ारा 134 में इस मान्य�ा को शानिमल निकया गया है निक साक्ष्य को �ौला जाना चानिहए और निगना नहीं जाना चानिहए। दूसरे शब्दों में, सबू�ों की गुर्णवत्ता मायने रख�ी है न निक मात्रा। निनष्कर्ष& रूप में, यहां �क निक हत्या क े मामले में भी, गवाहों की बहुल�ा पर जोर देना आवश्यक नहीं है और एकल गवाह का मौलिखक साक्ष्य, यनिद निवर्श्वसनीय और भरोसेमंद पाया जा�ा है, �ो उसक े आ�ार पर दोर्षी ठहराया जा सक�ा है। (ख) सामान्य�या, मौलिखक परिरसाक्ष्य को �ीन श्रेशिर्णयों में वग0कृ � निकया जा सक�ा है, अर्थीा&�्ः (i) पूर्ण& रूप से निवर्श्वसनीय (ii) पूरी �रह से अनिवर्श्वसनीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (iii) न �ो पूर्ण& रूप से निवर्श्वसनीय और न ही पूर्ण& रूप से अनिवर्श्वसनीय। मामलों की पहली दो श्रेशिर्णयों से न्यायालय को अपने निनष्कर्ष& पर पहुंचने में शायद अति�क कनिठनाई न हो।�र्थीानिप, मामलों की �ीसरी श्रेर्णी में, न्यायालय को साव�ानी बर�नी होगी और निववेक क े निनयम की आवश्यक�ा क े रूप में प्रत्यक्ष या पारिरण्डिRर्थीति�क रूप से निवर्श्वसनीय साक्ष्य Eारा निकन्हीं �ाण्डित्वक निवशिशष्टति�यों की पुनिष्ट की �लाश करनी होगी। (ग) दोर्षपूर्ण& निववेचना अशिभयोजन क े लिलए हमेशा घा�क नहीं हो�ी, जहां चक्षु(प्रत्यक्षदश0) साक्ष्य निवर्श्वसनीय और �क & संग� पाया जा�ा है। ऐसे मामले में अदाल� को साक्ष्यों क े मूल्यांकन में साव�ानी बर�नी होगी, लेनिकन सभी मामलों में एक दोर्षपूर्ण& निववेचना निवर्श्वसनीय अशिभयोजन कर्थीानक को खारिरज करने क े लिलए एक निन�ा&रक कारक नहीं हो सक�ी है। (घ) निववेचना अति�कारी का परीक्षर्ण न करने से अशिभयुक्त पर प्रति�क ू ल प्रभाव पड़ेगा; यनिद कोई प्रति�क ू ल प्रभाव नहीं पड़�ा है, �ो क े वल परीक्षर्ण न करना अशिभयोजन मामले को घा�क नहीं बनायेगा। (ङ) जब कोई साक्षी कु छ समय बी�ने क े पश्चा�् प्राक ृ ति�क रीति� से साक्ष्य दे�ा है �ो निवसंगति�यां आ�ी हैं और यनिद ऐसी निवसंगति�यां �ुलनात्मक रूप से मामूली प्रक ृ ति� की हैं और अशिभयोजन क े कर्थीानक क े मूल में नहीं जा�ी हैं, �ो उन्हें अनुतिच� महत्व नहीं निदया जा सक�ा है।
29. पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 Eारा निदए गए मौलिखक साक्ष्य क े मूल्यांकन पर, इस न्यायालय का निवचार है निक उसक े निनष्कर्ष& आक्षेनिप� निनर्ण&यों में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आए निनर्ण&यों से अलग नहीं हो�े, लेनिकन कु छ महत्वपूर्ण& कारकों पर, सिजन पर र्थीोड़ी देर बाद चचा& की जानी प्रR�ानिव� र्थीी, दुभा&ग्य से निनचले न्यायालयों का ध्यान नहीं गया। इसक े अलावा, यनिद कनिमयां मामूली प्रकृ ति� की हो�ीं, �ो इस न्यायालय क े लिलए पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 Eारा निदए गए बयान को पीBब्लू-1 Eारा निदए गए तिचनिकत्सा साक्ष्य क े आलोक में Rवीकार करना और इस निनष्कर्ष& को बरकरार रखना निबल्कु ल भी मुण्डिश्कल नहीं हो�ा निक नारायर्ण गोली लगने और अपीलक�ा&ओं Eारा उसे पहुँचायी अन्य चोटों क े कारर्ण मर गया। वाR�व में, यह हत्या का एक Rपष्ट मामला हो�ा सिजसमें नारायर्ण पीनिड़� र्थीा और अपीलक�ा& अपरा� क े अपरा�ी र्थीे।
30. �र्थीानिप, नारायर्ण की हत्या से लगभग दस वर्ष& पूव&, उसक े (नारायर्ण) और अपीलार्थिर्थीयों क े बीच व्याप्त शत्रु�ा क े निपछले इति�हास को ध्यान में रख�े हुए, अशिभयोजन क े लिलए ण्डिRर्थीति� बद�र हो जा�ी है। न क े वल अपीलक�ा&ओं ने �ारा 313 सीआरपीसी क े �ह� परीक्षा क े दौरान गवाही दी निक शिशव लाल और राम निवलास (पीBब्लू-2) क े निह�-पूवा&ति�कारी (पूव&जों) क े बीच संपलित्त निववाद से संबंति�� �ारा 145 सीआरपीसी क े �ह� काय&वानिहयों में शिशव लाल की ओर से मुन्ना लाल एक गवाह र्थीा, यह Rवयं पीBब्लू-2 क े बयान से Rपष्ट है निक एक �रफ नारायर्ण और दूसरी �रफ जसवं� (शिशव लाल क े निप�ा) व शिशव लाल क े बीच निपछले दस वर्ष• क े दौरान एक लंबे समय से झगड़ा र्थीा; इसक े अलावा उस झगड़े में जसवं� और एक अन्य व्यनिक्त की मृत्यु हो गई र्थीी; और यह दुश्मनी जारी रही क्योंनिक शिशव लाल नारायर्ण की हत्या क े पहले से ही आवासीय भूनिम पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जबरन कब्जा करना चाह�ा र्थीा, सिजसक े लिलए दंB प्रनिPया संनिह�ा की �ारा 145 क े �ह� एक मामला दज& निकया गया र्थीा और सिजसमें मुन्ना लाल पीBब्लू 2 क े लिखलाफ एक गवाह र्थीा। अपीलक�ा&ओं की ओर से इस न्यायालय क े समक्ष यह प्रदर्थिश� करने का प्रयास निकया गया है निक मुन्ना लाल और शिशव लाल को झूठा फ ं साया गया है क्योंनिक पीBब्लू-2 का इरादा यह सुनिनतिश्च� करना र्थीा निक उन्हें सलाखों क े पीछे Bाल निदया जाए और इस �रह संपलित्त निववाद को उस �रीक े से समाप्त कर निदया जाए जो कानून Eारा समर्थिर्थी� नहीं है।
31. अपीलार्थिर्थीयों क े �क & क े इस भाग को पूरी �रह से दरनिकनार नहीं निकया जा सक�ा है। दो समूहों क े बीच, नारायर्ण की कशिर्थी� हत्या से पहले दस वर्ष• से निवद्यमान निनरं�र शत्रु�ा क े निनर्विववाद साक्ष्य क े कारर्ण, यह Rर्थीानिप� निकया जा सक�ा है निक पीBब्लू -2 ने अपीलार्थिर्थीयों क े प्रति� व्यनिक्तग� दुभा&वना पाल ली और पीBब्लू-2 Eारा अपीलार्थिर्थीयों को कानूनी काय&वानिहयों से हटाने क े इरादे से काय& करने की संभावना क े सार्थी-सार्थी संपलित्त क े अति�कारों में हR�क्षेप को पूरी �रह से खारिरज नहीं निकया जा सक�ा है, इसलिलए पीBब्लू-2 का अपीलार्थिर्थीयों क े निवरो�ी होने क े कारर्ण, उसकी गवाही को निवर्श्वसनीय�ा क े सार्थी Rवीकार नहीं निकया जा सक�ा और अशिभलेख पर मौजूद अन्य साक्ष्य की, वाR�व में उपरोक्त संदर्थिभ� Rर्थीानिप� सिसद्धां�ों को ध्यान में रख�े हुए, भी गहन जांच की जानी चानिहए।
32. पीBब्लू-2 क े मौलिखक साक्ष्य से प�ा चला है निक उस घटना की सुबह क्या हुआ, इसलिलए पीBब्लू-3 क े मौलिखक साक्ष्य पर गौर करना आवश्यक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds समझा जा�ा है। वाR�व में अपीलार्थिर्थीयों की ओर से यह Rर्थीानिप� करने का प्रयास निकया गया र्थीा निक पीBब्लू-3 पीBब्लू-2 का एक रिरश्�ेदार र्थीा और यह निक एक 'संयोग गवाह' क े अलावा एक निह�बद्ध गवाह होने क े ना�े, उसकी गवाही पूरी �रह से निवर्श्वसनीय नहीं है। पीBब्लू-3 की गवाही से यह Rपष्ट नहीं है निक क्यों, इ�नी सुबह, वह घटना Rर्थील से गुजरा।यह पाया गया है निक पीBब्ल्यू-3 नेवनिड़या, र्थीाना खुदागंज, सिजला शाहजहांपुर का निनवासी है, जबनिक पीBब्ल्यू-2 को फ�ेहपुर बुजुग&, र्थीाना ति�लहर, सिजला शाहजहांपुर का निनवासी होना पाया गया। दोनों Rर्थीानों क े बीच की दूरी 1- 2 मील है। हत्या की यह घटना ति�लहर र्थीाने क े अति�कार क्षेत्र में हुई। पीBब्ल्यू-3 क े साक्ष्यों से पूर्ण& Rपष्ट रूप से यह सामने नहीं आया है निक उसने कहां से शुरुआ� की और वह कहां जा रहा र्थीा। गोपालपुर �ादीपुरा गांव हो सक�ा है, जहां पीBब्ल्यू-3 की बहन की ससुराल है, लेनिकन वह निकस उद्देश्य क े लिलए गया र्थीा, यह Rपष्ट नहीं है। पीBब्लू-3 Eारा यह नहीं कहा गया र्थीा निक वह अपनी बहन क े घर जा रहा र्थीा। प्रति�-परीक्षा में, पीBब्ल्यू-3 ने "फ�ेहपुर बुजुग& @ मुहद्दीपुर" में रहने से इनकार निकया।
33. अपीलार्थिर्थीयों क े अपरा� को युनिक्तयुक्त संदेह से परे सानिब� करने क े लिलए, क ु छ और निववरर्णों की आवश्यक�ा र्थीी इस परिरण्डिRर्थीति� को देख�े हुए निक पीBब्लू-3 सव�त्तम रूप से एक 'मौका/संयोगवश साक्षी' र्थीा। संयोग से, पीBब्लू-2 ने पीBब्लू-3 से संबंति�� होने से इनकार निकया र्थीा और पीBब्लू-2 से अशिभयोजन पक्ष Eारा यह प�ा नहीं लगाया गया र्थीा निक उसे पीBब्लू-3 का नाम क ै से प�ा चला, इस �थ्य को देख�े हुए निक पीBब्लू- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 3 एक अलग गांव का निनवासी र्थीा। इसी �रह, पीBब्ल्यू-3 ने भी यह नहीं कहा निक वह पीBब्ल्यू-2 या उसक े निप�ा को पहले से जान�ा र्थीा। पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 क े परिरतिच� होने की प्रकृ ति� को अशिभयोजन Eारा सामने लाया जाना चानिहए र्थीा। इसक े अलावा, हालांनिक यह सच है निक पीBब्लू-3 ने नारायर्ण को मुन्नालाल Eारा गोली मारने क े बारे में एक Rपष्ट निववरर्ण निदया र्थीा, जहां �क शिशवलाल का संबं� है, कोई निवशिशष्ट भूनिमका नहीं दी गयी र्थीी, सिसवाय इसक े निक सभी चार अशिभयुक्त नारायर्ण की 'निपटाई' कर रहे र्थीे (जैसा निक हिंहदी में दज& साक्ष्य से समझा गया) और न निक 'हत्या' (जैसा निक पेपर-बुक में अनुवानिद� संRकरर्ण से उपलब्� है)। निफर से, प्रति�परीक्षा क े दौरान, पीBब्लू-3 ने बयान निदया निक मुन्ना लाल ने नारायर्ण को गोली मारी र्थीी, इस बारे में निवR�ार से ब�ाए निबना निक क्या शिशवलाल ने भी नारायर्ण को कोई चोट पहुंचाई र्थीी। जहां �क पीBब्लू-2 Eारा शिशव लाल की भूनिमका का संबं� है, पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 क े कर्थीानकों क े बीच एक Rपष्ट निवसंगति� है, सिजसे शायद ही नजरअंदाज निकया जा सक�ा है।
34. �र्थीानिप, जो सबसे अति�क महत्वपूर्ण& है वह यह है निक अशिभलेख से प्रकट होने वाली परिरण्डिRर्थीति�यां घटना Rर्थील पर पीBब्लू-3 की उपण्डिRर्थीति� को न्यायोतिच� नहीं ठहरा�ी हैं। इसलिलए इस न्यायालय का दृढ़ म� है निक पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 की मौलिखक गवाही संदेह से मुक्त नहीं है और उनका साक्ष्य निनर्विववाद गुर्णवत्ता का नहीं है, निववेक क े निनयम में उन अन्य गवाहों से उनक े कर्थीानकों की संपुनिष्ट की आवश्यक�ा होगी जो, पीBब्लू-2 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds और पीBब्लू-3 क े अनुसार, घटना Rर्थील पर उपण्डिRर्थी� र्थीे और नारायर्ण की हत्या क े गवाह र्थीे।
35. पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 क े साक्ष्य क े अनुसार, अन्य चश्मदीद गवाह र्थीे, सिजनमें से क े दार एक प्रमुख गवाह र्थीा और छंगे लाल और खेमकरन Rव�ंत्र गवाह र्थीे। चूंनिक पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 का यह कहना र्थीा निक क े दार, छंगे लाल और खेमकरन घटना Rर्थील पर मौजूद र्थीे और अन्य बा�ों क े सार्थी सार्थी, शिशव लाल Eारा नारायर्ण को 'कांटा' से पीटने और मुन्ना लाल Eारा उस पर गोली चलाने की घटना को भी देखा र्थीा, इसलिलए पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 क े बयानों की पुनिष्ट करने वाले �ीन (क े दार, छंगे लाल और खेमकरन) में से निकसी एक Eारा प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रदान निकया जा सक�ा र्थीा। अशिभयोजन पक्ष ने अज्ञा� कारर्णों से, पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 Eारा अन्य चश्मदीद गवाहों क े रूप में ब�ाए गए इन �ीन व्यनिक्तयों का परीक्षर्ण नहीं निकया गया र्थीा, सिजससे इस न्यायालय ने यह निनष्कर्ष& निनकाला निक यनिद उनका परीक्षर्ण निकया गया हो�ा, �ो अशिभयोजन की कहानी का उनक े Eारा समर्थी&न नहीं निकया गया हो�ा।
36. न क े वल क े दार, छंगेलाल और खेमकरन का परीक्षर्ण नहीं निकया गया, बण्डिल्क अशिभयोजन पक्ष ने Bॉ. हनीफ का भी परीक्षर्ण नहीं निकया, सिजनक े पास पीBब्लू-2 गया र्थीा और रिरपोट& पर लिलखने क े लिलए कशिर्थी� रूप से हत्या की घटना का वर्ण&न निकया र्थीा। क्या Bॉ. हनीफ ने लिललिख� रूप में पीBब्लू-2 क े कर्थीानक को लिलख निदया र्थीा, यह उनक े Eारा ब�ाया जा सक�ा र्थीा, लेनिकन इसक े अभाव में, संदेह उत्पन्न हो जा�ा है सिजसक े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds यह न्यायालय निफर से यह निनष्कर्ष& निनकालने क े लिलए मजबूर है निक Bॉ. हनीफ परिरदृश्य में ही न रहे हों। हालांनिक यह न्यायालय पीBब्लू -2 क े बयान में इस Rपष्ट निवसंगति� को ज्यादा महत्व नहीं दे�ा है निक उसने रिरपोट& पर, अपना अंगूठा कहां लगाया र्थीा अर्थीा&�् Bॉ. हनीफ की दुकान या पुलिलस Rटेशन पर।यह एक छोटी सी निवसंगति� है सिजसे हटाया जा सक�ा है।
37. उपरोक्त परिरण्डिRर्थीति�यों को �ीन अन्य परिरण्डिRर्थीति�यों क े आलोक में समझा जाना चानिहए, सिजन्हें इसे सीनिम� करने क े रूप में देखा जा सक�ा है।
38. पहला, दंB प्रनिPया संनिह�ा की �ारा 161 क े �ह� पीBब्लू-3 का बयान घटना क े लगभग 24 निदन बाद दज& निकया गया र्थीा। चूंनिक निववेचक को कटघरे में नहीं लाया गया र्थीा (परीक्षर्ण नहीं निकया गया र्थीा ), इसलिलए अपीलार्थिर्थीयों को उनसे प्रति�-परीक्षा करने और इस प्रकार इस �रह क े निवलंब का कारर्ण जानने का अवसर नहीं निमला। परिरर्णामRवरूप, निववेचना क े दौरान पीBब्लू-3 क े बयान को दज& करने में देरी को उसिƒलिख� नहीं निकया गया है और इसलिलए यह गैर-न्यायोतिच� बनी हुई है। निववेचना की प्रनिPया क े दौरान पीBब्लू-3 को बाद में एक चश्मदीद गवाह क े रूप में Rर्थीानिप� निकए जाने की संभावना से पूरी �रह से इंकार नहीं निकया जा सक�ा है।
39. दूसरा, यद्यनिप पी Bब्लू-4 घटना Rर्थील पर 5 सिस�ंबर, 1985 को दोपहर 1.30 बजे पहुंचा और मृ� शरीर क े क ू ल्हे पर लगी चोट से बह�े हुए खून में एक गोली बरामद की गई, लेनिकन उन हशिर्थीयारों को जब्� करने क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds लिलए कोई प्रयास नहीं निकया गया सिजसक े Eारा प्रार्णघा�ी हमला निकया गया र्थीा। यह सच है निक हशिर्थीयार को जब्� करने में निवफल�ा /उपेक्षा ही अशिभयोजन पक्ष क े मामले को खारिरज करने का एकमात्र कारर्ण नहीं हो सक�ा है, लेनिकन यह �र्थीाकशिर्थी� चश्मदीद गवाहों अर्थीा&�्, पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 की मौलिखक गवाही क े सामने महत्व रख�ा है, सिजसे इस न्यायालय Eारा पूरी �रह से निवर्श्वसनीय नहीं पाया गया है। छू टी हुई कड़ी को निववेचना Eारा ब�ाया जा सक�ा र्थीा, सिजसका निफर से, परीक्षर्ण नहीं निकया गया। साक्षी की परीक्षा न निकए जाने से प्रति�रक्षा पर प्रति�कू ल प्रभाव पड़ा है या नहीं, यह अनिनवाय& रूप से �थ्य का प्रश्न है और प्रत्येक मामले की �थ्यों और परिरण्डिRर्थीति�यों को ध्यान में रख�े हुए निनष्कर्ष& निनकालने की आवश्यक�ा है। जैसा निक पी Bब्लू-4 Eारा ब�ाया गया है, निववेचक एक गवाह क े रूप में बयान नहीं दे सका, इसका कारर्ण यह है निक उसे प्रशिशक्षर्ण क े लिलए भेजा गया र्थीा। यह नहीं निदखाया गया निक निववेचक निकसी भी परिरण्डिRर्थीति� में निवचारर्ण न्यायालय में अपने बयान को अशिभलिललिख� करने को छोड़ नहीं सक�ा र्थीा। यह ध्यान देने योग्य है निक न �ो निवचारर्ण न्यायालय और न ही उच्च न्यायालय ने निववेचक की परीक्षा न होने क े मुद्दे पर निवचार निकया। व�&मान मामले क े �थ्यों में, निवशेर्ष रूप से अशिभयोजन पक्ष क े मामले में Rपष्ट रिरक्त�ा और पीBब्लू -2 व पीBब्लू-3 का साक्ष्य पूरी �रह से निवर्श्वसनीय नहीं है, यह न्यायालय व�&मान मामले को एक ऐसे मामले क े रूप में मान�ा है जहां निववेचक की परीक्षा महत्वपूर्ण& र्थीी क्योंनिक वह अपेतिक्ष� साक्ष्य प्रR�ु� कर सक�ा र्थीा। उसकी परीक्षा न होना अशिभयोजन पक्ष क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपीलार्थिर्थीयों क े लिखलाफ कार&वाई करने क े प्रयास में एक �ाण्डित्वक कमी पैदा कर�ी है, सिजससे अशिभयोजन पक्ष क े मामले में युनिक्तयुक्त संदेह पैदा हो�ा है।
40. जहां �क बैलिलण्डिRटक रिरपोट& प्राप्त न करने का संबं� है, इसमें कोई संदेह नहीं है निक इसकी अनिनवाय&�ा प्रत्येक मामले की परिरण्डिRर्थीति�यों पर निनभ&र करेगी।यहां, चूंनिक अपरा� का कोई हशिर्थीयार जब्� नहीं निकया गया र्थीा, इसलिलए कोई बैलिलण्डिRटक रिरपोट& नहीं मांगी गई और न ही प्राप्त की गई। हालांनिक श्री निगरिर ने �क & निदया निक मुन्ना लाल क े पास लाइसेंसी बंदूक र्थीी, लेनिकन यह अदाल� इस संबं� में अशिभलेख में निकसी भी सबू� का प�ा लगाने में सक्षम नहीं है। हालांनिक, इससे कु छ हासिसल नहीं हो�ा है। व�&मान मामले क े �थ्यों और परिरण्डिRर्थीति�यों में, अपरा� क े हशिर्थीयारों को जब्� करने की निवफल�ा/उपेक्षा का प्रभाव अशिभयोजन क े कर्थीानक पर प्रति�कू ल रूप से इ�ना अति�क प्रभानिव� कर�ा है निक यह सार्थी ही �ाण्डित्वक गवाहों की गैर-परीक्षा अपीलार्थिर्थीयों को संदेह का लाभ देने क े लिलए एक महत्वपूर्ण& परिरण्डिRर्थीति� का गठन कर�ी है।
41. �ीसरा, पीBब्लू-1 Eारा निदए गए तिचनिकत्सा साक्ष्य, यनिद पूरी �रह से निवर्श्वास निकया जा�ा है, �ो इस न्यायालय को यह राय बनाने क े लिलए प्रेरिर� कर�ा है निक पीBब्लू-4 का सबू� निक उसने एक गोली बरामद की र्थीी,यह घटना Rर्थील पर उसकी जब्�ी को संनिदग्� बना�ा है। पीBब्लू-1 क े अनुसार, चोट संख्या 5 और 7, पीनिड़� पर चली गोली क े प्रवेश हिंबदु र्थीे, जबनिक चोट संख्या 6 और 8 गोली क े निनकास हिंबदु र्थीे। गोलिलयां पीनिड़� क े पेट और दानिहनी जांघ को वे�कर गयी हैं और वहां से बाहर निनकलने क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds हिंबदु हैं, इसलिलए निवचार का निवर्षय यह है निक पीBब्ल्यू-4 को �ब भी "मृ� शरीर क े क ू ल्हे पर चोट से निनकलने वाले रक्त में गोली" क ै से निमल सक�ी है। अलग-अलग निनकास हिंबदु होने क े बावजूद, यह काफी असंभव है निक चोट संख्या 6 क े बाद भी पीBब्ल्यू-4 Eारा क ू ल्हे पर चोट से निनकलने वाले रक्त में एक गोली पाई गई, जो दो निनकास हिंबदुओं में से एक र्थीी। निकसी भी ण्डिRर्थीति� में, इस �रह की गोली हालांनिक जब्�ी ज्ञापन क े �ह� जब्� की गई है, लेनिकन परीक्षर्ण क े दौरान प्रदर्थिश� नहीं की गई है जो पीBब्ल्यू-4 क े कर्थीानक को अRवीकाय& बना�ा है।
42. यद्यनिप, निववेचना की प्रनिPया में मात्र दोर्षों को दोर्षमुनिक्त क े लिलए आ�ार नहीं बनाया जा सक�ा है, यह न्यायालय की निवति�क बाध्य�ा है निक वह प्रत्येक मामले में निववेचक Eारा की गई चूकों को छोड़कर अशिभयोजन पक्ष क े अन्य साक्ष्य की साव�ानीपूव&क जांच करे और यह प�ा लगाए निक क्या अशिभलेख पर लाया गया साक्ष्य निवर्श्वसनीय है और क्या ऐसी चूक ें सत्य का प�ा लगाने क े उद्देश्य को प्रभानिव� कर�ी हैं। निवति� की उपरोक्त ण्डिRर्थीति� क े प्रति� सचे� होने और आपराति�क न्याय-प्रशासन में लोगों की आRर्थीा और निवर्श्वास में कमी से बचने क े लिलए, इस न्यायालय ने अशिभयोजन पक्ष Eारा निदए गए सबू�ों का बारीकी से परीक्षर्ण निकया है और निववेचक की लापरवाही सार्थी ही उसक े Eारा की गई लापरवाह निववेचना क े परिरर्णामRवरूप होने वाले चूक या लोप को प्र�ान�ा देने से परहेज निकया है। इस न्यायालय का प्रयास अशिभलेख पर साक्ष्य का निवश्लेर्षर्ण और मूल्यांकन करक े और यह सुनिनतिश्च� करने क े लिलए निक क्या अपीलार्थी0 सम्यक् रूप से दोर्षी पाए गए र्थीे Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds और सार्थी ही यह सुनिनतिश्च� करने क े लिलए निक दोर्षी कानून क े शिशक ं जे से बच न जाए, मामले की जड़ �क पहुंचने का रहा है। निववेचना की प्रनिPया में खानिमयां, सिजन पर पहले ध्यान निदया गया है, अपीलक�ा&ओं को संदेह का लाभ देने क े लिलए न्यायालय क े निदमाग में नहीं आयी हैं, लेनिकन निवशिभन्न �थ्यों और परिरण्डिRर्थीति�यों क े उतिच� मूल्यांकन पर, यह प�ा चला है निक ऐसे कारर्ण र्थीे सिजनक े लिलए पीBब्लू -2 ने अपीलक�ा&ओं को गल� �रीक े से फ ं साया होगा और यह भी निक पीBब्लू-3 पूरी �रह से निवर्श्वसनीय गवाह नहीं र्थीा। अशिभयोजन पक्ष की कहानी में काफी हद �क अनिनतिश्च��ा है और ऐसा लग�ा है निक निनचली अदाल�ें पीBब्लू-2 और पीBब्लू-3 की मौलिखक गवाही से क ु छ हद �क प्रभानिव� हुई हैं, सिजसमें अन्य उपण्डिRर्थी� परिरण्डिRर्थीति�यों क े प्रभाव को ध्यान में नहीं रखा गया है, सिजससे हR�क्षेप की आवश्यक�ा है। निनष्कर्ष&
43. पूव�क्त कारर्णों से, इस न्यायालय की राय है निक अपीलार्थिर्थीयों ने नारायर्ण की हत्या की र्थीी, यह आरोप संदेह से परे सानिब� नहीं निकया जा सक�ा है, इसलिलए वे संदेह क े लाभ क े हकदार र्थीे। निनचली अदाल� Eारा 29 जनवरी 1986 को निदए गए फ ै सले में दोर्षी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने क े फ ै सले को बरकरार नहीं रखने क े कारर्ण अपाR� हो जा�ा है; फलRवरूप, दोर्षसिसतिद्ध और सजा को बरकरार रख�े हुए उच्च न्यायालय Eारा पारिर� निदनांक 9 जुलाई 2014 का आक्षेनिप� निनर्ण&य और आदेश भी अपाR� हो जा�ा है। अपीलार्थिर्थीयों को अपीलीय निनर्ण&य और आदेश निदए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जाने क े बाद से सु�ार गृह में रखा गया है, यनिद निकसी अन्य मामले में वांशिछ� नहीं हों, �ो उन्हें �ुरं� मुक्त कर निदया जाएगा।
44. इस प्रकार, अपीलों को लाग� क े लिलए निकसी आदेश क े निबना अनुमति� प्रदान की जा�ी है। …………………………... (न्यायमूर्ति� रनिवन्द्र भट्ट) …………………………... (न्यायमूर्ति� दीपांकर दत्त) नई निदƒी; 24 जनवरी 2023 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds