Full Text
भारतीय सव�� �ायालय
दा��क अपीलीय अिधका�रता
दांिडक अपील सं. 257/2023
(िवशेष अनुमित यािचका (दा��क) सं. 8586/2017 से उद् भूत)
नईम अहमद .... अपीलाथ�
बनाम
रा� (रा.रा.�े. िद�ी) .... प्र�
िनण�य
JUDGMENT
1. अनुमित प्रदािन �ा., बेला एम. ित्रवे
2. अपीलाथ�-अिभयु� �ारा दायर अपील दांिडक अपील सं. 46/2016 म� िद�ी उ� �ायालय �ारा पा�रत िदनांक 30.09.2016 क े िनण�य एवं आदेश, िजसम� उ� �ायालय ने अपील का िनपटान करते �ए सत वाद सं. 67/2015 म� अित�र� सत �ायाधीश, िवशेष फ़ा� ट�ैक �ायालय, �ारका �ायालय, नई िद�ी (एतद् प�ात सत �ायालय) �ारा पा�रत िदनांक 27.11.2015 क े िनण�य एवं आदेश का उपांतरण िकया, क े िव�� दायर की गई है।
3. सत �ायालय ने अपीलाथ�-अिभयु� को भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त अपराधी मानते �ए उसे 10 साल की अविध क े िलए कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी और ₹50000/- का जुमा�ना लगाया था, िजसे न भरने पर उसे एक साल क े कारावास की सज़ा और दी जाएगी। सत �ायालय ने अपीलाथ� को अिभयो�ी को ₹500000/- का मुआवज़ा देने का िनद�श भी िदया िजससे वह अपना और अपने अ�सक ब�े का भरण पोषण कर सक े । अपीलाथ� �ारा दायर अपील म�, उ� �ायालय ने सत �ायालय �ारा पा�रत द�ादेश का उपांतरण करते �ए मु� दंडादेश को घटा कर 7 साल और जुमा�ने को घटा कर ₹5000/- कर िदया और अिभयो�ी को ₹500000/- का मुआवज़ा देने क े िनद�श की पुि� की। यह िनवेदन िकया जाता है िक अपीलाथ� ने उ� �ायालय क े िनद�शानुसार अिभयो�ी को ₹500000/- मुआवज़े क े �प म� दे िदए ह�।
4. अिभयोजन प� ने सत �ायालय क े सम� िन�िल�खत वाद प्र� िकया था: साल 2009 म� अिभयो�ी अपने पित और तीन ब�ों क े साथ िकराये क े मकान- सी- 1/3/5, संजय एन्�े, उ�म नगर, िद�ी म� रहती थी। अिभयु� भी अिभयो�ी क े सामने वाले िकराये क े मकान म� रहता था। िदनांक 21.03.2015 को अिभयो�ी ने अिभयु� क े िव�� एक िशकायत दज� करवाई िजसम� उसने अिभयु� पर यह आरोप लगाया िक उसने उसक े पित की अपया�� आमदनी क े बहाने उसे अपनी अ�ी नौकरी और अपनी हैिसयत क े िहसाब से रखने का वचन देकर फ ु सला िलया। अिभयु� ने अिभयो�ी से शादी (िनकाह) करने का वचन भी िदया िजसक े प�ात वह अिभयो�ी से नाजायज़ स�� बनाने क े िलए उसे अलग- अलग स्थानो पर बुलाने लगा िजसक े प�रणाम��प अिभयो�ी साल 2011 म� गभ�वती हो गई। इसक े अित�र�, अिभयो�ी ने अिभयु� पर यह भी आरोप लगाया िक उसने उससे ब�े क े ज� क े बाद शादी करने का वचन भी िदया था और यह भी आ�ासन िदलाया था िक वह अिववािहत है और शादी क े बाद उसे अपने पैतृक घर ले जाएगा। साल 2012 म� अिभयु� उसे फ ु सलाकर कपाशेरा बॉड�र नाथू मल िब��ंग म� एक और िकराये क े मकान म� ले गया और वहां भी अिभयो�ी क े साथ नाजायज़ स�� बनाए रखे। क ु छ समय प�ात, अपने माँ-बाप की झूठी बीमारी क े कारण अपने पैतृक घर जाने क े बहाने अिभयु� ने किथत िकराए क े मकान को खाली कर िदया और अिभयो�ी को अपने अवय� ब�े, नमन क े साथ एक आश् गृह म� जा कर रहने को कहा। अिभयु� ने अिभयो�ी को अपने पित को तलाक देने क े िलए भी मजबूर िकया। अपनी िशकायत म� अिभयो�ी ने यह भी आरोप लगाया िक अिभयु� ने उसे अपने पैतृक घर जाने क े बारे म� झूठ बोला था और वह कहीं नहीं गया था। अिभयो�ी को उसकी स�ाई का पता तब लगा जब वह उस कॉल स�टर गयी जहाँ अिभयु� काम करता था। जब अिभयो�ी ने अिभयु� क े काया�लय म� तमाशा िकया तो उसने उससे ज� शादी करने का आ�ासन िदया। साल 2012 म� जब अिभयो�ी अिभयु� क े पैतृक घर गई तो उसे पता चला क े वह पहले से िववािहत है और उसक े ब�े भी ह�। अिभयु� क े माता-िपता ने अिभयो�ी को �ीकारने से इनकार कर िदया। इस घटना क े बाद भी अिभयु� लगातार अिभयो�ी से शादी करने का वचन देता रहा। पर�ु उसने ऐसा नहीं िकया और उसक े प�रणाम��प अिभयो�ी ने िशकायत दज� करवा दी। िदनांक 21.03.2015 को किथत िशकायत प्राथिम सं. 412/2015 क े �प म� थाना िबंदापुर, िजला दि�ण-पि�म िद�ी म� अिभयु� क े िव�� भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त दज� �ई।
5. अिभयोजन प� �ारा �ारह गवाहों क े परी�ण क े प�ात अिभयु� क े सम� आपि�जनक सा� रखा गया और दं.प.सं. की धारा 313 क े अंतग�त ��ीकरण माँगा गया। पर�ु अिभयु� ने अपने ऊपर लगाए गए हर आरोप से इंकार करते �ए यह िनवेदन िकया िक अिभयो�ी क े साथ उसक े स�� आपसी सहमित पर आधा�रत थे और अिभयो�ी जानती थी िक वह एक िववािहत ��� है और उसक े ब�े भी ह�। वा�व म�, अिभयो�ी उसक े घर पर उसकी प�ी से भी िमल चुकी थी। इसक े अित�र�, अिभयु� ने यह भी िनवेदन िकया िक वह अिभयो�ी की िनयिमत �प से आिथ�क सहायता कर रहा था और जब उसने अिभयो�ी क े ₹1.5- ₹2 लाख की मांग को पूरा करने से मना िकया तो अिभयो�ी ने उसक े िव�� एक झूठा मामला दज� करवा िदया। सत �ायालय ने अिभलेख पर मौजूद सा� की िववेचना क े प�ात अपीलाथ�-अिभयु� को अपराधी ठहराते �ए उपरो� दंडादेश पा�रत िकया।
6. अपीलाथ� की ओर से उप�स्थ फािज़ल अिधव�ा ने पुरज़ोर िवरोध करते �ए यह िनवेदन िकया िक सत �ायालय एवं उ� �ायालय ने सा� की िववेचना उिचत �ि�कोण से नहीं की और अपीलाथ� को भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त सज़ा सुना दी िजसक े प�रणाम��प घोर अ�ाय �आ है। इस स�� म�, भा.दं.सं. की धारा 375 और सहपिठत धारा 90 का संदभ� लेते �ए, फािज़ल अिधव�ा ने यह िनवेदन िकया िक अिभयो�ी ने अपने सा� म� यह �ीकार िकया है िक 2009- 2010 म� उसने अपनी सहमित से अपीलाथ� क े साथ यौन स�� बनाए थे और यह स�� 2011 म� उसक े ब�े क े ज� क े प�ात 2015 म� िशकायत दज� होने तक चलते रहे। अतः भा.दं.सं. की धारा 375 क े ि�तीय खंड और सहपिठत धारा 90 क े अनुसार अपीलाथ�-अिभयु� पर बला�ार करने का आरोप िकसी प्रक से िस� नहीं होता है। फािज़ल अिधव�ा क े अनुसार, नव�र 2011 म� अिभयो�ी क े ब�े क े ज� और 2012 म� अिभयु� क े पैतृक घर जाने क े बावजूद माच� 2015 म� अिभयो�ी �ारा िशकायत दज� करवाना ही अिभयो�ी क े कानूनी प्रिक का दु�पयोग करने क े गलत इरादों को दशा�ता है िजस कारण उसने पैसे वसूलने क े उ�े� से अिभयु� पर झूठे आरोप लगाए। इसक े अित�र�, फािज़ल अिधव�ा ने यह भी िनवेदन िकया िक अिभयो�ी �ारा प्र� कहानी क े अनुसार भी अपीलाथ� ने अपने सगी संतान की िज़�ेदा�रयों से मुँह नहीं मोड़ा और अिभयो�ी ने अपने ब�े क े ज� क े प�ात करीब चार साल तक अिभयु� क े साथ स�� बनाये रखे और अिभयु� �ारा अिभयो�ी क े पैसों की मांग को पूरा न करने पर ही अिभयो�ी ने िशकायत दज� कराई। फािज़ल अिधव�ा ने यह भी िनवेदन िकया िक यिद दो प�ों क े बीच का यौन स�� आपसी सहमित से काफी ल�े समय तक चलता है, वत�मान मामले म� करीब पांच साल तक, तो धारा 90 क े अनुसार ऐसे स�� का आधार ‘त� का भ्’ नहीं माना जा सकता और भा.दं.सं. की धारा 375 क े अंतग�त ‘बला�ार’ नहीं माना जा सकता है। अपने इस िनवेदन क े समथ�न म� फािज़ल अिधव�ा ने इस �ायालय �ारा िन�िल�खत मामलों म� पा�रत िनण�यों पर िनभ�रता जताई है: दीिलप िसंह @ िदलीप क ु मार बनाम िबहार रा�, प्रशा भारती बनाम रा� ( रा.रा.�े. िद�ी) और डॉ. ध्रुवार मुरलीधर सोनार बनाम महारा�� रा� एवं अ� ।
7. पर�ु, प्र�-रा� की ओर से उप�स्थ फािज़ल अिधव�ा, श् क े.एल. जनजािन ने यह िनवेदन िकया िक चूँिक सत �ायालय एवं उ� �ायालय ने अपीलाथ�- अिभयु� क े िव�� जांच क े दौरान िमले त�ों को अिभलेख पर रखते �ए उसे भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त दोषी ठहराया है, इस �ायालय को उन िनण�यों म� ह��ेप नहीं करना चािहए। इसक े अित�र�, फािज़ल अिधव�ा क े अनुसार, अिभयोजन प� ने हर संदेह से परे यह सािबत कर िदया था िक अपीलाथ�- अिभयु� ने अिभयो�ी को िववाह का झूठा वचन देकर उसक े साथ यौन स�� बनाने क े िलए उसे फ ु सलाया था। पर�ु, अिभयो�ी क े ब�े क े ज� क े प�ात उसने अपना वचन पूरा नहीं िकया िजससे यह �� है िक अपीलाथ� ने अिभयो�ी की सहमित ‘त� क े भ्’ की सहायता से प्र की थी।
8. चूँिक समन की तामीली क े बावजूद अिभयो�ी का प्रितिनि िकसी अिधव�ा �ारा नहीं िकया जा रहा था, �ायालय ने व�र� अिधव�ा, सुश् इंिदरा जैिसंग को �ाय िमत क े �प म� अिभयो�ी की ओर से �ायालय की सहायता क े िलए िनयु� िकया िज�ोंने अपने िल�खत िनवेदनों क े अित�र� यह प्र� िकया िक ‘बला�ार’ और ‘आपसी सहमित से बनाए गए यौन संबंध’ म� �� अंतर होता है और �ायालय को �ानपूव�क इस बात की जांच करनी चािहए िक �ा अिभयु� ने दुभा�वनापूण� इरादे से िववाह का झूठा वचन िदया था या यह मामला क े वल अिभयु� �ारा वचन भंग करने का था। �ाय िमत क े अनुसार, िनचली अदालतों ने अिभयो�ी �ारा प्र� सा�ों का सही िववेचन िकया था और इस िन�ष� पर प�ंची थी िक अिभयु� क े साथ यौन स�� क े िलए अिभयो�ी की सहमित भा.दं.सं. की धारा 90 क े अंतग�त ‘त� का भ्’ है। अतः अिभयो�ी का मामला भा.दं.सं. की धारा 375 क े ि�तीय खंड क े अंतग�त आता है। सुश् इंिदरा जैिसंग ने भी अपने िनवेदनों क े समथ�न म� इस �ायालय क े कई िनण�यों पर िनभ�रता जताई।
9. प�ों क े फािज़ल अिधव�ाओं क े िनवेदनों की बेहतर िववेचना क े िलए भा.दं.सं. की धारा 90 और धारा 375 म� िन�िल�खत प्रासंि प्रावध िदए गए ह�: “90. स�ित, िजसक े स�� म� यह �ात हो िक वह भय या भ् क े अधीन दी गई है- कोई स�ित ऐसी स�ित नहीं है जैसी इस संिहता की िकसी धारा से आशियत है, यिद वह स�ित िकसी ��� ने �ितभय क े अधीन, या त� क े भ् क े अधीन दी हो, और यिद काय� करने वाला ��� यह जानता हो या उसक े पास िव�ास करने का कारण हो िक ऐसे भय या भ् क े प�रणाम��प वह स�ित दी गई थी; अथवा उ�� ��� की स�ित- यिद वह स�ित ऐसे ��� ने दी हो जो िच�िवक ृ ित या म�ता क े कारण उस बात की, िजसक े िलए वह अपनी स�ित देता है, प्रकृ और प�रणाम को समझने म� असमथ� हो; अथवा िशशु की स�ित- जब तक िक संदभ� से त�ितक ू ल प्रत न हो, यिद वह स�ित ऐसे ��� ने दी हो जो बारह वष� से कम आयु का है।
375. बला�ंग- यिद कोई पु�ष,- (क) िकसी �ी की योिन, उसक े मुंह, मूत्रमा या गुदा म� अपना िलंग िकसी भी सीमा तक प्रव करता है या उससे ऐसा अपने या िकसी अ� ��� क े साथ कराता है; या (ख) िकसी �ी की योिन, मूत्रमा या गुदा म� ऐसी कोई व�ु या शरीर का कोई भाग, जो िलंग न हो, िकसी भी सीमा तक अनुप्रि करता है या उससे ऐसा अपने या िकसी अ� ��� क े साथ कराता है; या (ग) िकसी �ी क े शरीर क े िकसी भाग का इस प्रक ह�साधन करता है िजससे िक उस �ी की योिन, गुदा, मूत्रमा या शरीर क े िकसी भाग म� प्रवे का�रत िकया जा सक े या उससे ऐसा अपने या िकसी अ� ��� क े साथ कराता है; या (घ) िकसी �ी की योिन, मूत्रमा, गुदा पर अपना मुंह लगाता है या उससे ऐसा अपने या िकसी अ� ��� क े साथ कराता है, उसक े बारे म� यह कहा जाएगा िक उसने ‘ बला�ंग’ िकया है, जहाँ ऐसा िन�िल�खत सात भांित की प�र�स्थितयो म� से िकसी क े अधीन िकया जाता है:- पहला- उस �ी की इ�ा क े िव��। दू सरा- उस �ी की स�ित क े िबना। तीसरा- उस �ी की स�ित से, जब उसकी स�ित उसे या ऐसे िकसी ��� को, िजससे वह िहतब� है, मृ�ु या उपहित क े भय म� डालकर अिभप्र की गई है। चौथा- उस �ी की स�ित से, जब िक वह पु�ष यह जनता है िक वह उस �ी का पित नहीं है और उस �ी ने स�ित इस कारण दी है िक वह यह िव�ास करती है िक वह ऐसा अ� पु�ष है िजससे वह िविधपूव�क िववािहत है या िववािहत होने का िव�ास करती है। पांचवा- उस �ी की स�ित से, जब ऐसी स�ित देने क े समय, वह िवक ृ तिच�ता या म�ा क े कारण या उस पु�ष �ारा ���गत �प से या िकसी अ� ��� क े मा�म से कोई मादक या अ�ा�कर पदाथ� िदए जाने क े कारण, उस बात की, िजसक े बारे म� वह स�ित देती है, प्रकृ और प�रणामों को समझने म� असमथ� है। छठवां- उस �ी की स�ित से या उसक े िबना, जब वह अठारह बष� से कम आयु की है। सातवां- जब वह �ी स�ित संसूिचत करने म� असमथ� है। ��ीकरण 1- इस धारा क े प्रयोजन क े िलए, “ योिन” क े अंतग�त वृह� भगौ� भी है। ��ीकरण 2- स�ित से कोई �� �ै��क सहमित अिभप्र है, जब �ी श�ों, संक े तों या िकसी प्रक क े मौ�खक या अमौ�खक संसूचना �ारा िविनिद�� ल�िगक क ृ � म� भाग लेने की इ�ा �� करती है: पर�ु ऐसी �ी क े बारे म�, जो प्रवे क े क ृ � का भौितक �प से िवरोध नहीं करती है, मात इस त� क े कारण यह नहीं समझा जाएगा िक उसने ल�िगक िक्रयाकल क े प्र स�ित प्रद की है। अपवाद 1- िकसी िचिक�ीय प्रिक या ह��ेप को बला�ंग माना नहीं जाएगा। अपवाद 2- िकसी पु�ष की अपनी �यं की प�ी क े साथ मैथुन या ल�िगक क ृ �, यिद प�ी पंद् वष� से कम आयु की न हो, बला�ंग नहीं है।”
10. यहाँ यह �ान म� रखना साथ�क होगा िक आपरािधक �ायशा� क े मूल�प िस�ांतों क े अनुसार अिभयोजन प� को अिभयु� की दोषिस�� हर तक � स�त संदेह से परे ठोस सा�ों क े आधार पर सािबत करनी होती है। पर�ु, भारतीय समाज क े लोकाचार, सं� ृ ित एवं ‘ बला�ार’ जैसे सामािजक अपराध क े बढ़ते ग्र को �ान म� रखते �ए, �ायालयों को भारतीय सा� अिधिनयम की धारा 114ए क े अंतग�त कानूनी उपधारणा बनाने की अनुमित दी गई है। धारा 114ए क े अनुसार, बला�ार से संबंिधत क ु छ मामलों म� जहाँ स�ित न हो वहां उपधारणा बनाई जा सकती है। किथत प्रावध क े अनुसार, यिद अिभयु� �ारा मैथुन का क ृ � सािबत होता है और िजस मिहला का बला�ार �आ हो उसकी स�ित पर सवाल हो और वह मिहला �ायालय क े सम� अपने सा� म� यह कहती है िक उसने स�ित नहीं दी तो �ायालय उसकी बात को स� समझेगा।
11. इस बात से इंकार नहीं िकया जा सकता िक िकसी ��� �ारा दी गई स�ित, जो िक �ितभय या त� क े भ् क े अधीन दी गई हो, जैसा िक भा.दं.सं. की धारा 90 म� प�रक��त िकया गया है, भारतीय दंड संिहता की िकसी भी धारा म� आशियत स�ित नहीं मानी जाएगी। इसक े अित�र�, धारा 375 म� क ु छ काय� का वण�न िकया गया है िजनक े अिभयु� �ारा उस धारा म� उ���खत प�र�स्थितयो म� िकये जाने पर ‘ बला�ार’ का होना माना जाएगा, चाहे वह अिभयो�ी की सहमित से ही �ों न िकया गया हो। हमारी राय म�, जब अिभयु� पर ‘बला�ार’ का आरोप लगाया जाता है तो भा.दं.सं. की धारा 90 म� िनिहत उ��- “त� का भ्” पर भी भा.दं.सं. की धारा 375 म� िदए गए ख�ों, िवशेषतः खंड तीन, चार एवं पांच क े आलोक म� िववेचना होनी चािहए। उपरो� तीन खंडों म� विण�त प�र�स्थितया “त� क े भ्” की उ�� से अिधक �ापक ह�, जैसा िक भा.दं.सं. की धारा 90 म� प�रक��त है। धारा 375 म� सात प�र�स्थितया विण�त ह� िजनक े अंतग�त “बला�ार’ का होना माना जाएगा। तीसरे खंड क े अनुसार जब िकसी �ी की स�ित उसे या ऐसे िकसी ��� को, िजससे वह िहतब� है, मृ�ु या उपहित क े भय म� डालकर अिभप्र की गई हो तब अिभयो�ी की स�ित क े बावजूद ‘बला�ार’ होना माना जाएगा। चौथे खंड क े अनुसार, जब पु�ष यह जनता है िक वह अिभयो�ी का पित नहीं है और अिभयो�ी ने स�ित इस कारण दी है िक वह यह िव�ास करती है िक वह ऐसा अ� पु�ष है िजससे वह िविधपूव�क िववािहत है या िववािहत होने वाली है तो ऐसी स�ित क े बावजूद ‘बला�ार’ का होना माना जाएगा। पांचवे खंड क े अनुसार, जब स�ित देते समय, अिभयो�ी िवक ृ तिच�ता या म�ा क े कारण या उस पु�ष �ारा ���गत �प से या िकसी अ� ��� क े मा�म से कोई मादक या अ�ा�कर पदाथ� िदए जाने क े कारण, उस बात की, िजसक े बारे म� वह स�ित देती है, प्रकृ और प�रणामों को समझने म� असमथ� हो तो ऐसी स�ित क े बावजूद ‘ बला�ार’ का होना माना जाएगा। अतः अिभयो�ी की स�ित धारा 90 म� प�रक��त ‘त� क े भ्’ क े अंतग�त िदए जाने क े अित�र� यिद उसकी स�ित भा.दं.सं. की धारा 375 म� विण�त िकसी प�र�स्थि क े अंतग�त दी गयी है तो भी उसे ‘ स�ित’ नहीं माना जाएगा।
12. इस संबंध म� िविध की �ा�ा इस �ायालय �ारा पा�रत कई िनण�यों से प्र है। पर�ु ऐसे कानून या ऐसे िनण�यों का िक्रया� हर मामले क े िस� त�ों यानी कानूनी सा�ों पर िनभ�र करेगा। मामलों की िववेचना करते समय �ायालय क े �ाियक िवचार को िपछले िनण�यों म� िदए गए अनुपात या इस �ायालय �ारा �� की गई िविध �ारा िदशा िनद�श प्र होता है। पर�ु िविध का िक्रया� करते समय, �ायालयों को अपने सम� रखे गए सा�ों और िजन प�र�स्थितयो म� अिभयु� �ारा किथत अपराध �ए हों, पर भी िवचार करना होगा।
13. इस अपील म� िनण�य पा�रत करने क े िलए, इस �ायालय �ारा पा�रत क ु छ ऐसे िनण�यों का संदभ� लेना लाभदायक होगा िजनम� धारा 90 एवं 375 क े संदभ� म� श� ‘स�ित’ क े िविभ� आयाम एवं �ि�कोणों पर िवचार िकया गया हो।
14. उदय बनाम कना�टक रा� मामले म� 19 वष�य अिभयो�ी ने अिभयु�, िजससे वह ब�त �ार करती थी, क े साथ यौन स�� बनाने की सहमित दी थी और अिभयोजन प� �ारा यह िनवेदन िकया गया था िक अिभयो�ी अिभयु� से लगातार िमलती रही �ोंिक अिभयु� ने उससे बाद म� िववाह करने का वचन िदया था। अंततः अिभयो�ी गभ�वती हो गई और जब अिभयु� ने उससे शादी नहीं की तो िशकायत दज� कराई गई। इस �ायालय ने यह मानते �ए िक इन प�र�स्थितयो म� दी गई स�ित को भा.दं.सं. की धारा 90 म� िनिहत ‘त� क े भ्’ क े अंतग�त िदया जाना नहीं माना जा सकता, पैरा 21 एवं 23 म� िन�िल�खत राय प्र� की: “21. ऐसा प्रत होता है िक �ाियक राय की सव�स�ित इस �ि�कोण क े प� म� है िक अिभयो�ी �ारा अिभयु�, िजससे वह ब�त �ार करती हो और िजसने उससे बाद म� िववाह करने का वचन िदया हो, क े साथ यौन स�� बनाने हेतु दी गई स�ित, त� क े भ् क े अंतग�त दी गई स�ित नहीं मानी जा सकती। संिहता की प�रभाषा म� एक झूठा वचन त� नहीं माना जा सकता और हम इस �ि�कोण से सहमत ह�। पर�ु यहाँ यह उ�ेखनीय है िक ऐसी कोई �� िविध नहीं है िजससे यह �ात हो सक े िक अिभयो�ी �ारा यौन संबंध हेतु दी गई स�ित �ै��क है या त� क े भ् क े अंतग�त दी गई है। अंितम िव�ेषण म� स�ित क े िबंदु पर िवचार क े दौरान �ायालय �ारा िनधा��रत परी�ण क े वल �ाियक िवचार का माग�दश�न कर सकते ह�। पर�ु �ायालय को हर मामले म� िकसी िन�ष� पर प�ंचने से पूव� अपने सम� रखे गए सा� और मामले की प�र�स्थितयो का िववेचन करना अिनवाय� है �ोंिक हर मामले क े अपने िवशेष त� होते ह� िजनका प्रभ स�ित क े सवाल (यिद �ै��क या त� क े भ् क े अंतग�त) पर पड़ सकता है। �ायालय �ारा सा� का िववेचन इस त� क े आलोक म� होना चािहए िक अपराध क े हर पहलू, िजसम� स�ित का अभाव भी शािमल है, को िस� करने का भार अिभयोजन प� का है।
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23. ऐसे मामलों म� �ायालय क े अपेि�त �ि�कोण को �ान म� रखते �ए, अब हम� अिभलेख पर रखे सा�ों क े िववेचन की ओर बढ़ना चािहए। वत�मान वाद म� अिभयो�ी िव�िव�ालय म� पढ़ने वाली एक �सक मिहला थी। अिभयो�ी अपीलाथ� से ब�त �ार करती थी। पर�ु वह इस त� से पूरी तरह से अवगत थी िक उनका िववाह अलग जाती से होने क े कारण संभव नहीं था। िकसी भी प�र�स्थि म� उनक े प�रवार क े सद�ों �ारा उनक े िववाह क े प्र� का पुरज़ोर िवरोध अव�ंभावी था। अिभयो�ी ने इस त� को माना भी है और यह भी बताया है िक जब अपीलाथ� ने पहली बार उसक े सामने प्र� रखा था तब अिभयो�ी ने अपीलाथ� को इस संभावना क े बारे म� अवगत कराया था। अिभयो�ी क े पास इस क ृ �, िजसक े िलए उसने अपनी स�ित दी थी, क े मह� और नैितक गुणव�ा को समझने क े िलए पया�� बु�� थी। इसी कारण उसने इस बात को तब तक गु� रखा जब तक वह रख सकती थी। इसक े बावजूद, उसने अपीलाथ� क े प्र� का प्रितर करने क े बजाय उसे �ीकार कर िलया। अतः अिभयो�ी क े पास प्रितर एवं स�ित क े बीच चुनने की स�ूण� �तंत्र थी। अिभयो�ी इस क ृ � क े प�रणाम से अव� अवगत होगी िवशेषतः तब जब वह जानती थी की यह िववाह जाती भेद क े कारण हो नहीं सकता था। यह सभी प�र�स्थितया हम� इस िन�ष� की ओर ले जाती ह� िक अिभयो�ी ने अपीलाथ� से यौन स�� बनाने क े िलए पूरी �तंत्र, �े�ा एवं जाग�कता से अपनी स�ित दी थी और उसकी स�ित िकसी त� क े भ् क े तहत नहीं दी गई थी।”
15. दीिलप िसंह @ िदलीप क ु मार बनाम िबहार रा� (उपरो�) म�, इस �ायालय ने अपने और दू सरे उ� �ायालयों क े कई िनण�यों पर चचा� करते �ए उदय वाद (उपरो�) क े िनण�य म� दी गई िट�िणयों की �ा�ा की और िन�िल�खत राय प्र� की: “28. उपरो� िदए गए पा�ांश क े पहले दो वा�ों की �ा�ा करने की आव�कता है। हालांिक हम मानते ह� िक क े वल िववाह का वचन धारा 90 क े दायरे म� “त� का भ्” नहीं समझा जाएगा, पर�ु यहाँ यह �� करना आव�क है िक अिभयु� �ारा क े वल पीिड़त की स�ित िनकलवाने क े िलए जानबूझकर िदया गया प्र�, िजसक े पीछे न िववाह का इरादा हो और न ही इ�ा, दी गई स�ित को िन�ल बना देता है। यिद त�ों क े मा�म से यह सािबत हो जाता है िक वादे की शु�आत से ही अिभयु� पीिड़त से िववाह करने का इरादा नहीं रखता था और उसक े �ारा िदया गया वचन क े वल छल था, तो पीिड़त �ारा दी गई स�ित अिभयु� को धारा 375 क े अनुसार दोषमु� िस� करने क े काम नहीं आएगी। इस बात पर कोलकाता उ� �ायालय क े खंडपीठ ने जयंती रानी पांडा [1984 क्. एल.जे. 1535: (1983) 2 सी.एच.एन. 290 ( क ै ल)] मामले म� ज़ोर डाला था िजसे सही मानते �ए उदय वाद [(2003) 4 एस.सी.सी. 46: 2003 एस.सी.सी. (क्) 775: (2003) 2 � े ल 329] म� भी संदिभ�त िकया गया था। कोलकाता उ� �ायालय ने अंत म� अपने पूव� कथन को उिचत �प से प�रिमत करते �ए “जब तक िक �ायालय को यह यक़ीन नहीं िदलाया जाता िक शु�आत से ही अिभयु� का इरादा पीिड़त से िववाह करने का नहीं था” (क् एल.जे. पी. 1538, पैरा 7) की िविश�ता पर ज़ोर िदया गया । अगले पैरा म�, उ� �ायालय ने चांसरी �ायालय क े श्र िनण�य का स�भ� िलया िजसम� यह िनधा��रत िकया गया िक िकसी िविश� क ृ � क े पीछे प्र� क े इरादे का िम�ा कथन त� का िम�ा कथन माना जाएगा िजस से छल सािबत होता है। यह �ि�कोण मद्र उ� �ायालय क े खंडपीठ �ारा जलाडु वाद [ आई.एल.आर. (1913) 36 मैड 453: 15 क् एल.जे. 24] (उपरो� उ��रत पा�ांश का स�भ� िलया जाये) म� भी �� िकया गया था। “संिहता की प�रभाषा म� एक झूठा वचन त� नहीं माना जा सकता”- इस �ायालय क े इस एकमात अवलोकन क े आधार पर यह नहीं माना जा सकता िक �ायालय ने कानून म� प�रवत�न कर िदया है। उपरो� वा� क े अनुगामी अवलोकन भी उतने ही मह�पूण� ह�। �ायालय ने सतक � ता क े साथ अपने अवलोकन म� यह िविश�ता जोड़ दी थी िक जहाँ तक स�ित क े त� क े भ् क े अंतग�त िदए जाने का सवाल है, ऐसी कोई �� िविध नहीं है िजससे यह स्थािप हो सक े । उदय वाद [(2003) 4 एस.सी.सी. 46: 2003 एस.सी.सी. (क्) 775: (2003) 2 � े ल 329] म� पा�रत स�ूण� िनण�य को पढ़ कर हम� ऐसा नहीं लगा िक �ायालय ने सामा�ीकरण करते �ए यह कहा हो िक िववाह का वचन कभी त� क े भ् क े अंतग�त नहीं माना जाएगा। हमारी राय म� यह उस िनण�य का अनुपात नहीं है। वा�व म�, उस वाद म� �ायालय इस िविश� िन�ष� पर प�ंचा था िक प्रा से अिभयु� क े िववाह क े इरादे को खा�रज नहीं िकया जा सकता।”
16. दीपक गुलाटी बनाम हरयाणा रा� मामले म�, इस �ायालय ने ‘बला�ार’ एवं ‘स�ित से बनाये यौन स��’ क े बीच अंतर कर श� ‘स�ित’ को एक और पहलू देते �ए िन�िल�खत अवलोकन िकया: “21. स�ित �� या िनिहत हो सकती है या मजबूरी या ग़लतफ़हमी म� दी जा सकती है अथवा �े�ा से या छल से प्र की जा सकती है। स�ित तक � श�� क े साथ साथ िववेचना से स�ंिधत है जहाँ िदमाग तराज़ू क े दोनों तरफ अ�ाई और बुराई को तोलता है। बला�ार और स�ित से बनाए यौन संबंध क े बीच �� अंतर है और ऐसे मामलों म� �ायालय को �ानपूव�क जांच करनी होगी िक यिद अिभयु� वा�व म� पीिड़त से िववाह करना चाहता था या उसक े इरादे बुरे थे िजस कारण उसने क े वल अपनी हवस को पूरा करने क े िलए िववाह का झूठा वचन िदया था �ोंिक ऐसी प�र�स्थि म� धोखे या छल का मामला बनता है। वचन भंग करने म� और झूठा वचन पूरा न करने म� अंतर होता है। अतः �ायालय को इस बात की जांच करनी होगी िक प्रा से ही अिभयु� �ारा िववाह का झूठा वचन िदया गया था या नहीं और दी गई स�ित यौन स�� की प्रकृ एवं प�रणाम को पूरी तरह से समझने क े प�ात दी गई थी या नहीं। ऐसे मामले भी हो सकते ह� जहाँ अिभयो�ी ने न क े वल अिभयु� क े बहकावे म� ब�� �ार और उ�ेजना म� आकर अिभयु� क े साथ यौन स�� बनाने की अनुमित दी हो या जहाँ अिभयु� अिभयो�ी से अनपेि�त प�र�स्थितयो या अपने िनयंत् से बाहर की प�र�स्थितयो क े कारण िववाह करने का इरादा होने क े बावजूद िववाह करने म� असमथ� हो। ऐसे मामलों पर अलग तरह से िवचार होना चािहए। एक अिभयु� को बला�ार क े िलए तब तक अपराधी नहीं ठहरना चािहए जब तक �ायालय इस िन�ष� पर ना प�ंचे िक अिभयु� क े इरादे बुरे थे और उसक े इस क ृ � क े पीछे गु� उ�े� थे।
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24. अतः यह �� है िक उिचत समय यानी प्रारंि चरण से ही, अिभयु� पीिड़त से िववाह करक े अपने वचन को पूरा करने का कोई इरादा नहीं रखता था, इस त� को िस� करने क े िलए पया�� सा� होने चािहए। बेशक कई ऐसी अप�रहाय� प�र�स्थितया भी हो सकती ह� जहाँ स�े इरादे क े बावजूद एक ��� पीिड़त से िववाह करने म� असमथ� हो सकता है। “भिव� की िकसी अिनि�त ितिथ से संबंिधत वचन को पूरा न करने की असमथ�ता िजसका कारण उपल� सा� से प्र न हो ज़�री नहीं त� क े भ् क े अंतग�त आये। “त� क े भ्” की प�रभाषा क े अंतग�त आने क े िलए, त� की ता�ािलक प्रासंिगक होनी चािहए।” ऐसे मामले म� लड़की को पूरी तरह से दोषमु� करने और स�ूण� आपरािधक दािय� दू सरे इंसान पर डालने क े िलए भा.दं.सं. की धारा 90 का सहारा तब तक नहीं िलया जा सकता जब तक �ायालय इस बात से संतु� न हो जाए िक प्रा से ही अिभयु� का इरादा पीिड़त से िववाह करने का नहीं था।”
17. इसक े अित�र�, डॉ. ध्रुवार मुरलीधर सोनार बनाम महारा�� रा� एवं अ� (उपरो�) मामले म�, धारा 90 एवं भा.दं.सं. की धारा 375 क े ि�तीय खंड की �ा�ा करते �ए इस �ायालय ने िन�िल�खत राय प्र� की: “23. अतः बला�ार और स�ित से बनाए यौन संबंध क े बीच �� अंतर है और ऐसे मामलों म� �ायालय को �ानपूव�क जांच करनी होगी िक यिद अिभयु� वा�व म� पीिड़त से िववाह करना चाहता था या उसक े इरादे बुरे थे िजस कारण उसने क े वल अपनी हवस को पूरा करने क े िलए िववाह का झूठा वचन िदया था �ोंिक ऐसी प�र�स्थि म� धोखे या छल का मामला बनता है। वचन भंग करने म� और झूठा वचन पूरा न करने म� भी अंतर होता है। यिद अिभयु� ने अिभयो�ी को बहका कर उससे यौन स�� बनाने क े एकमात इरादे से वचन नहीं िदया है तो उस पर बला�ार करने का आरोप िस� नहीं होता है। ऐसे मामले भी हो सकते ह� जहाँ अिभयो�ी ने न क े वल अिभयु� क े बहकावे म� ब�� �ार और उ�ेजना म� आकर अिभयु� क े साथ यौन स�� बनाने की अनुमित दी हो या जहाँ अिभयु� अिभयो�ी से अनपेि�त प�र�स्थितयो या अपने िनयंत् से बाहर की प�र�स्थितयो क े कारण िववाह करने का इरादा होने क े बावजूद िववाह करने म� असमथ� हो। ऐसे मामलों पर अलग तरह से िवचार होना चािहए। यिद अिभयु� क े इरादे बुरे थे और उसका उ�े� गु� था तो �� �प से बला�ार का मामला बनता है। प�ों क े बीच स�ित से बनाया गया शारी�रक स�� भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त अपराध नहीं माना जा सकता।”
18. अब, वत�मान मामले म�, वैधािनक प्रावधान एवं इस �ायालय �ारा कई िनण�यों म� दी गई उन प्रावधान की �ा�ा को देखते �ए, �ायालय का �झान अपीलाथ�-अिभयु� को भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त दोषी ठहराने का हो सकता है जैसा िक सत �ायालय एवं उ� �ायालय �ारा िकया गया है। पर�ु अिभलेख पर रखे सा�ों क े �ानपूव�क परी�ण क े प�ात हम इस िन�ष� पर प�ंचे ह� िक िनचली �ायालयों से अपीलाथ� को भा.दं.सं. की धारा 376 क े अंतग�त दोषी ठहराने म� त्रु �ई है।
19. प�ों क े फािज़ल अिधव�ा(गण) �ारा िकये गए िनवेदनों क े आलोक म� अिभलेख क े िविधवत परी�ण क े प�ात िन�िल�खत त� उभर कर सामने आये ह�:- (i) अिभयो�ी एक िववािहत मिहला थी िजसक े तीन ब�े थे। (ii) अिभयु� अिभयो�ी क े घर क े सामने वाले िकराए क े मकान म� रहता था। (iii) प्रार� िहचिकचाहट क े प�ात अिभयो�ी अिभयु� को पसंद करने लगी और दोनों का यौन स�� शु� हो गया। (iv) 28.10.2011 को अिभयो�ी ने अिभयु� क े ब�े (लड़का) को ज� िदया। (v) 2012 म� अिभयो�ी अिभयु� क े पैतृक घर गई जहाँ उसे �ात �आ िक अिभयु� िववािहत था और उसक े ब�े भी थे। (vi) अिभयो�ी इसक े बावजूद अिभयु� क े साथ एक अलग मकान म� रहती रही। (vii) 2014 म� अिभयो�ी और उसक े पित ने पार��रक स�ित से तलाक ले िलया िजसक े प�ात अिभयो�ी ने हमेशा क े िलए अपने तीनों ब�ो को अपने पित क े पास छोड़ िदया। (viii) 21 माच� 2015 को अिभयो�ी ने अिभयु� क े िव�� िशकायत दज� कराई िजसम� उसने यह आरोप लगाया िक उसने यौन स�� की स�ित इसिलए दी थी �ोंिक अिभयु� ने उससे िववाह करने का वचन िदया था पर�ु उसने वचन भंग कर िदया।
20. प्र�(गण) की ओर से उठाया गया मु� िववाद यह है िक अिभयो�ी �ारा दी गई यौन स�� की स�ित त� क े भ् क े अंतग�त दी गई थी �ोंिक अिभयु� ने उससे िववाह करने का झूठा वचन िदया था पर�ु उसने ऐसा नहीं िकया। अतः ऐसी स�ित कानून की �ि� म� स�ित नहीं मानी जा सकती और इसिलए यह वाद भा.दं.सं. की धारा 375 क े अंतग�त आता है। इस स�� म�, यह �ान म� रखना आव�क है िक अिभयु� �ारा झूठा वचन देने म� और वचन भंग करने म� अंतर होता है। झूठे वचन क े मामलों म�, अिभयु� का शु�आत से ही अिभयो�ी से िववाह करने का कोई इरादा नहीं होगा एवं उसने क े वल अपनी हवस को पूरा करने क े इरादे से अिभयो�ी को िववाह का झूठा वचन देकर धोखा और छल िकया होगा। पर�ु वचन भंग क े मामलों म�, इस बात की संभावना से इनकार नहीं िकया जा सकता िक अिभयु� ने अिभयो�ी से िववाह करने का वचन पूरी गंभीरता से िदया होगा िजसक े प�ात उसक े सम� क ु छ अनपेि�त या िनयंत् से बाहर की प�र�स्थितया आ गई होंगी िजनक े कारण वह अपना वचन पूरा करने म� असमथ� रहा होगा। अतः हर वचन भंग क े मामले पर िववाह क े झूठे वचन क े मामले की तरह िवचार कर िकसी ��� को धारा 376 क े अंतग�त अपराधी ठहराना मूख�ता होगी। जैसा की पहले कहा गया है, हर मामला �ायालय क े सम� त�ों की िस�� पर िनभ�र करेगा।
21. वत�मान मामले म�, यह नहीं माना जा सकता िक अिभयो�ी, जो �यं एक िववािहत मिहला थी िजसक े तीन ब�े थे, ने अपीलाथ� से यौन स�� बनाने की स�ित अपीलाथ� �ारा िदए गए किथत झूठे वचन या त� क े भ् क े अंतग�त दी है। िनसंदेह, अिभयो�ी ने 2015 म� िशकायत दज� कराने से पूव� करीब पांच वष� तक अपीलाथ� से अपने संबंध बनाए रखे। यिद �ायालय क े सम� अिभयो�ी �ारा िदए गए अिभसा� म� उ���खत आरोपों क े प्र मू�ों को भी देख� तो भी ऐसे आरोपों से अपीलाथ� �ारा ‘बला�ार’ होने क े िन�ष� पर प�ंचना इस मामले को असामा� �प से खींचना होगा। चूँिक अिभयो�ी, एक िववािहत मिहला थी िजसक े तीन ब�े थे, उसक े पास उस क ृ � की नैितकता या अनैितकता एवं उसकी मह�ता और प�रणाम को समझने क े िलए पया�� प�रप�ता और बु��मता थी िजसक े िलए उसने अपनी स�ित दी थी। इसक े अित�र�, यिद अिभयु� क े साथ अिभयो�ी क े �र�े क े दौरान अिभयो�ी क े आचरण को �ानपूव�क देख� तो यह मालूम होता है िक उसने अिभयु� को पसंद कर उससे �र�ा जोड़ कर अपने पित और तीन ब�ों को धोखा िदया था। अिभयो�ी अपने िववाह क े दौरान अपने पित को छोड़ कर अिभयु� क े साथ एक बेहतर जीवन िबताने क े िलए चली गई थी। 2011 म� अिभयु� �ारा गभ�वती होने एवं अिभयु� क े बालक को ज� देने तक अिभयो�ी को अिभयु� से िववाह का झूठा वचन देने या धोखा देने की कोई िशकायत नहीं थी। 2012 म� अिभयो�ी अिभयु� क े पैतृक घर भी गई थी जहाँ उसे मालूम �आ िक अिभयु� एक िववािहत ��� है िजसक े ब�े भी ह� िफर भी वह एक दू सरे मकान म� अिभयु� क े साथ िबना िकसी िशकायत रहती रही। 2014 म� अिभयो�ी ने पार��रक स�ित से अपने पित से तलाक भी िलया िजसक े प�ात उसने अपने तीनों ब�ों को अपने पित क े पास ही छोड़ िदया। अिभयो�ी ने 2015 म� वत�मान िशकायत दज� कराई िजसका कारण आपसी मतभेद हो सकता है। दं.प.सं. की धारा 313 क े अंतग�त िदए अपने एक और �ान म� अिभयु� ने यह बताया है िक अिभयो�ी ने यह िशकायत उसकी पैसों की भारी मांग पूरी न होने पर दज� कराई है। अतः इस मामले क े त�ों और प�र�स्थितयो को �ान म� रखते �ए और भा.दं.सं. की धारा 375 क े अंतग�त अपीलाथ� को बला�ार का अपराधी ठहराने क े िलए, यह कहना िक अिभयो�ी ने अपीलाथ� क े साथ यौन स�� बनाने की स�ित त� क े भ् क े अंतग�त दी थी, िकसी भी तरह उिचत नहीं होगा।
22. इस �ि�कोण से, अिभयु� को उस पर लगाए गए आरोपों से दोषमु� करना आव�क है। बेशक, िनचली अदालतों �ारा मुआवज़ा देने का िनद�श बदला नहीं जाएगा �ोंिक अपीलाथ� ने ब�े की िज़�ेदारी �ीकार की है और अिभयो�ी को मुआवज़े का भुगतान भी िकया है।
23. इस चरण पर, यह �ान म� रखना आव�क है िक मामले की सुनवाई क े दौरान �ायालय क े सम� यह त� रखा गया िक िवचारण �ायालय �ारा अिभयो�ी का अिभसा� अंग्रे भाषा म� दज� िकया गया था जब िक उसने अपना �ान मातृभाषा म� िदया था। इस स�� म�, दं.प.सं. की धारा 276 एवं 277 का स�भ� लेना आव�क है जो िक िन�िल�खत है: “276 (1) सत �ायालय क े सम� सभी िवचारणों म� प्र� सा�ी का सा�, जैसे जैसे उसकी परी�ा होती जाती है, वैसे वैसे या तो �यं पीठासीन �ायाधीश �ारा िलखा जाएगा या खुले �ायालय म� उनक े �ारा बोलकर िलखवाया जाएगा या इस काम क े िलए उनक े �ारा िनयु� �ायालय क े िकसी अिधकारी �ारा उनक े िनदेशन और अधी�ण म� िलखा जाएगा। (2) ऐसा सा� आम तौर पर कथा�क �प म� िलखा जाएगा िक ं तु पीठासीन �ायाधीश �िववेकानुसार ऐसे सा� क े िकसी भाग को प्र�ो क े �प म� िलख सकते ह� या िलखवा सकते ह�।] (3) ऐसे िलखे गए सा� पर पीठासीन �ायाधीश ह�ा�र कर�गे और वह अिभलेख का भाग होगा।
277. सा� क े अिभलेख की भाषा- प्र� मामले म� जहाँ सा� धारा 275 या धारा 276 क े अधीन िलखा जाता है वहां- (क) यिद सा�ी �ायालय की भाषा म� सा� देता है तो उसे उसी भाषा म� िलखा जाएगा; (ख) यिद वह िकसी अ� भाषा म� सा� देता है तो उसे, यिद सा� हो तो, उसी भाषा म� िलखा जा सक े गा और यिद ऐसा करना सा� न हो तो जैसे जैसे सा�ी की परी�ा होती जाती है, वैसे वैसे सा� का �ायालय की भाषा म� सही अनुवाद तैयार िकया जाएगा, उस पर मिज��ेट या पीठासीन �ायाधीश �ारा ह�ा�र िकए जाएं गे और वह अिभलेख का भाग होगा; (ग) उस दशा म� िजसम� सा� खंड (ख) क े अधीन �ायालय की भाषा से िभ� िकसी भाषा म� िलखा जाए, �ायालय की भाषा म� उसका सही अनुवाद यथासा� शीघ तैयार िकया जाएगा, उस पर मिज��ेट या पीठासीन �ायाधीश �ारा ह�ा�र िकए जाएं गे और वह अिभलेख का भाग होगा; पर�ु जब खंड ( ख) क े अधीन सा� अंग्रे म� िलखा जाता है और �ायालय की भाषा म� उसक े अनुवाद की िकसी प�कार �ारा अपे�ा नहीं की जाती है तो �ायालय ऐसे अनुवाद से अिभमु�� दे सकता है।”
24. हम� इस बात से अवगत कराया गया है िक क ु छ िवचारण �ायालयों म� साि�यों क े बयान उनकी भाषा म� दज� नहीं िकये जा रहे ह� और पीठासीन अिधकारी क े अनुवाद अनुसार क े वल अंग्रे भाषा म� दज� िकये जा रहे ह�। हमारी राय म�, गवाह का सा� दं.प.सं. की धारा 277 क े अनुसार �ायालय की भाषा म� िलखा जाना चािहए। यिद गवाह �ायालय की भाषा म� सा� देता है तो उसे उसी भाषा म� िलखा जाना चािहए। यिद वह िकसी अ� भाषा म� सा� देता है तो उसे, यिद सा� हो तो, उसी भाषा म� िलखा जाएगा और यिद ऐसा करना सा� न हो तो सा� का �ायालय की भाषा म� सही अनुवाद तैयार िकया जाएगा। जब गवाह ने सा� अंग्रे म� िदया हो और उसे उसी भाषा म� िलखा गया हो और �ायालय की भाषा म� उसक े अनुवाद की िकसी प�कार �ारा अपे�ा न की गई हो तो �ायालय ऐसे अनुवाद से अिभमु�� दे सकता है। यिद गवाह �ायालय की भाषा क े अित�र� िकसी अ� भाषा म� सा� देता है तो, जैसे ही सा� हो, सा� का �ायालय की भाषा म� सही अनुवाद तैयार िकया जाएगा।
25. गवाह का सा� �ायालय की भाषा या गवाह की भाषा, जैसा सा� हो, म� िलखा जाएगा और िफर अिभलेख का भाग बनाने क े िलए उसका अनुवाद �ायालय की भाषा म� कराया जाएगा। पर�ु, गवाह क े सा� क े क े वल अंग्रे अनुवाद को अिभलेख पर रखना, जब िक गवाह ने �ायालय की भाषा या अपनी मातृभाषा म� सा� िदया हो, अनु�ेय नहीं है। सा� का सार और अथ� और �ायालय म� गवाह का �वहार तब ही उिचत तरीक े से समझा जा सकता है जब सा� गवाह की भाषा म� दज� िकया गया हो। इसक े अित�र�, जब यह सवाल उठता है िक गवाह ने अपने सा� म� वा�व म� �ा कहा, तब गवाह क े मूल अिभसा� पर िवचार िकया जाता है न की पीठासीन �ायाधीश �ारा तैयार िकया गए अंग्रे म� अनुवािदत �ापन पर। अतः सभी �ायालयों को यह िनद�श िदया जाता है िक गवाहों क े सा�ों क े अिभलेख क े समय दं.प.सं. की धारा 277 म� िदए गए प्रावधान का िविधवत अनुपालन अव� िकया जाए।
26. उपरो� उ���खत कारणवश उ� �ायालय एवं सत �ायालय �ारा पा�रत आ�ेिपत िनण�यों एवं आदेशों को अिभयो�ी को िदए जाने वाले मुआवज़े क े िनद�श क े अपवाद क े �सवा र� िकया जाता है। अपीलाथ�-अिभयु� को उस पर लगाए गए आरोपों से मु� िकया जाता है और उसे तुरंत �रहा करने क े िनद�श िदए जाते ह�। तदनुसार, अपील �ीकार की जाती है।.........�ा. (अजय र�ोगी).........�ा. (बेला एम. ित्रवे) नई िद�ी 30.01.2023 अस्वीकर: देशी भाषा म� आदेश/ �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक े एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।