Talat Sanvi v. Jharkhand State & Others

Supreme Court of India · 24 Jan 2023
Sanjay Trikshan Kaul; Abhay S. Oka
Criminal Appeal No 205 of 2023 @ SLP (Crl) No 8501 of 2022
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that interim compensation payable to victims cannot be imposed as a condition for anticipatory bail under Section 357 CrPC, setting aside such a condition imposed by the High Court.

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पत्रिकाओं में छपने योग्य
भारत क
े सर्वोच्च न्यायालय में
आपरात्रिक अपीलीय क्षेिात्रिकार
आपराधिक अपील संख्या 205/2023
[@ एसएलपी [सीआरएल] सं.8501/2022]
तलत सानवी ...अपीलार्थी
बनाम
झारखंड राज्य एवं अन्य ....प्रधतवादीगण
त्रनर्णय
संजय त्रकशन कौल, न्याया.
प्रार्थथना स्वीकार की जाती है।
JUDGMENT

1. इस अपील में उठाया गया मुद्दा यह है धक क्या ‘पीध़ित को धदए जाने वाले अंतररम मुआवजे’ को अधिम जमानत की कायथवाही क े दौरान एक शतथ क े रूप में लगाया जा सकता है।

2. हमारा धनधित मत है धक आक्षेधपत आदेश पाररत करने में कानून का उल्लंघन धकया गया है क्योंधक पीध़ित को धदया जाने वाला अंतररम मुआवजा जमानत न्यायशास्त्र का भाग नहीं हो सकता।

3. यह मुद्दा पहले से ही साहब आलम @ गुड्ड ू बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य -आपराधिक अपील संख्या 1318/2022, धदनांक 24.08.2022 तर्था उिो ठाक ु र एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य -आपराधिक अपील संख्या 1703-1704/2022 धदनांक 29.09.2022 क े मामलों में इस न्यायालय क े फ ै सलों से स्पष्ट है।

4. साहब आलम मामले (ऊपर) में धवचार करते समय हमने कई मामलों में धवद्वान न्यायािीशों द्वारा पाररत आदेशों पर धवचार धकया र्था, धजसमें अपरािों की प्रक ृ धत क े अनुसार जमानत की आवश्यकता पर धवचार धकए धबना ही क े वल पयाथप्त िनराधश जमा करने की शतथ पर जमानत दे दी गई र्थी और तब, यह धनणथय धदया गया र्था धक क े वल इस कारण धकसी व्यक्ति को जमानत नहीं दी जा सकती धक वह व्यक्ति पैसे जमा करने में सक्षम है या भुगतान करने की क्षमता रखता है।

5. ऐसे सभी आक्षेधपत आदेशों को अपास्त कर धदया गया और मामले वापस भेज धदए गए।

6. उिो ठाक ु र (ऊपर) क े मामले में भी "पीध़ित मुआवजा" शतथ/वाक्यांश क े प्रयोग क े पहलू को अनुधचत पाया गया, क्योंधक धगरफ्तारी पूवथ जमानत की कायथवाही कोई िन वसूली की कायथवाही नहीं है।

7. यह मामला उनसे भी एक कदम आगे है, क्योंधक यहां, पैसे का भुगतान/पैसा जमा करना क े वल अधिम जमानत क े धलए क े वल एक शतथ ही नहीं है, बक्ति अधिम जमानत की कायथवाही में ही पीध़ित को अंतररम मुआवजे का भुगतान करने का धनदेश है।

8. पीध़ित को धदए जाने वाले मुआवजे संबंिी मामले का इधतहास देखने पर हम पाते हैं धक 1960 क े दशक में 'पीध़ितवाद' (धवक्तिमोलॉजी) आंदोलन क े द्वारा मौधिक मुआवजे का रास्ता तैयार धकया गया और इस तरह क े मुआवजे को आपराधिक अधभयोगों क े अनुशीलन में पीध़ितों क े सहयोग से जो़िकर सरकारों को प्रोत्साहन धदया। कनाडा और संयुि राज्य अमेररका क े कई राज्यों ने पीध़ितों को मुआवजा देना शुरू कर धदया और इस प्रकार, आपराधिक अधभयोजन में मुआवजे की सहभाधगता का मागथ प्रशस्त हुआ। 80 क े दशक की शुरुआत में पीध़ितों क े धहत क े धलए आपराधिक न्याय प्रणाली में सुिार क े धलए कई महत्वपूणथ पहल और पीध़ितवाद क े अगुआ भी हुए। ‘पीध़ितों क े धलए न्याय’ और ‘शक्ति क े दुरुपयोग’ क े मूलभूत धसद्ांतों पर संयुि राष्टर द्वारा की गई घोषणा महासभा द्वारा सवथसम्मधत से 1985 में स्वीकार की गई (िोएनहुइजसेन, 2014)। इस घोषणा से अपराि-पीध़ितों क े धवशेष अधिकारों तर्था हकदारी क े सार्थ-सार्थ मुआवजे क े अधिकार को भी बल धमला।

9. दंड प्रधिया संधहता की िारा 357 में मुआवजे का भुगतान करने का आदेश देने का प्राविान तब है, जब कोई अदालत जुमाथना लगाती है या कोई ऐसी सजा (मौत की सजा सधहत) देती है, धजसमें जुमाथना उस मामले में वधणथत पररक्तथर्थधतयों का ही एक भाग हो। इसमें उप-िारा (2) क े द्वारा एक सीमा भी धनिाथररत की गई है धक जब धकसी ऐसे मामले में जुमाथना लगाया जाता है, जो अपील क े योग्य है, तो अपील दाक्तखल करने क े धलए धनिाथररत अवधि समाप्त होने से पहले उि मुआवजे का भुगतान नहीं धकया जाएगा और यधद अपील की जाती है, तो अपील का धनणथय धकए जाने तक उि भुगतान नहीं धकया जाएगा। उप-िारा (3) क े अनुसार यह मुआवजा उस व्यक्ति (पीध़ित) क े धलए है, धजसे उस अपराि क े कारण नुकसान हुआ है या चोट लगी है, धजसक े धलए अधभयुि को सजा सुनाई गई है। उप-िारा (4) में अपीलीय अदालत, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय क े द्वारा पुनरीक्षण की शक्ति का प्रयोग करते हुए मुआवजे क े भुगतान क े धलए आदेश धदए जाने का भी प्राविान धकया गया है।

10. हमने जो ऐसा धनिाथररत धकया है, इसका अर्थथ यह है धक आरोधपत अपराि पर धदए गए अंधतम धनणथय अर्थाथत वह अपराि उसी तरह से काररत धकया गया है या नहीं, इसक े धनणथय क े समय ही पीध़ित को धदया जाने वाला मुआवजा धनिाथररत धकया जाता है। इस प्रकार, अंधतम धनणथय तक पहुंचने से पूवथ अर्थवा मामले पर धवचारण से पहले ही धकसी प्रकार का मुआवजा लगाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

11. िमेश बनाम गुजरात राज्य क े मामले में इसी न्यायालय क े एक हाधलया फ ै सले में भी यही कहा गया र्था धक िारा 357 को सामान्य रूप से पढ़ने से ही यह स्पष्ट होता है धक इस तरह का मुआवजा क े वल धवचारण पूणथ होने क े बाद ही लगाया जा सकता है, तर्थाधप यह धनधित रूप से न्यायािीश क े धववेक पर धनभथर है। उच्च न्यायालय का यह धनदेश धक आरोपी, मृतक (पीध़ित) क े कानूनी उत्तराधिकाररयों को मुआवजे की राधश का भुगतान करे, और वह भी जमानत की एक शतथ क े रूप में, धबलक ु ल स्वीकायथ नहीं है और इसधलए, इसे तक थ क े आिार पर खाररज धकया जाता है।

12. न्यायालय ने कहा है धक उद्देश्य स्पष्ट है धक शारीररक अपरािों क े मामलों में, पीध़ित को मुआवजा धमलना ही चाधहए। इसी तरह, अनावश्यक उत्पी़िन को रोकने क े धलए भी मुआवजे का प्राविान धकया गया है, जहां अनावश्यक आपराधिक कायथवाही शुरू की गई हो। इस तरह क े मुआवजे को भी जमानत देते समय धनिाथररत नहीं धकया जा सकता।

13. इस तरह क े न्याधयक दुस्साहस को स्वीकार न करते हुए, हमें अधिम जमानत देने क े आक्षेधपत आदेश में लगाई गई इस शतथ को रद्द करने में कोई संकोच नहींहै। यद्यधप अन्य बातों को बरकरार रखा जाता है।

14. तदनुसार, इस अपील में की गई प्रार्थथना थवीकार की जाती है। पक्षकार अपना-अपना खचथ स्वयं वहन करेंगे। ……………………………………....न्याया.। [संजय धकशन कौल] …………………………………….... न्याया.। [अभय एस. ओका] नई धदल्ली जनवरी 24, 2023 अस्वीकरर्: धहन्दी भाषा में अनूधदत धनणथय का उपयोग इतना ही है धक वादी इसे अपनी भाषा में समझ सक े । इसका उपयोग धकसी अन्य उद्देश्य क े धलए नहीं धकया जा सकता। सभी व्यावहाररक और आधिकाररक कायों में तर्था धनष्पादन और कायाथन्वयन क े धलए उि धनणथय का अंिेजी संस्करण ही मान्य होगा।