Delhi Government v. Ritu Ram

Delhi High Court · 20 Jan 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No. 399/2023 @ W.P.(C) No. 1600/2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that acquisition proceedings under the 1894 Act are deemed under the 2013 Act only if possession was not taken and compensation not paid for five years before 2014, setting aside the High Court's contrary order.

Full Text
Translation output
ितवे
भारतीय सव च यायालय
िस वल अपीलीय अिधका रता
िस वल अपील सं. 399/2023
( व.अनु.या.(िस) सं. 1600/2023)
(डायर सं. 34333/2022)
रा.रा. े. द ली क सरकार और अ य. ...अपीलाथ (गण)
बनाम
रित राम और अ य .... यथ (गण)
िनणय
एम. आर. शाह, जे.
JUDGMENT

1. 2015 क रट यािचका (िस) सं या 12145 म नई द ली म द ली उ च यायालय ारा पा रत आ े पत िनणय और आदेश से यिथत और असंतु महसूस करते हुए, जसक े ारा उ च यायालय ने यथ सं या 1 ारा तुत उ रट यािचका को वीकार कर िलया है और घोषणा क है क भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 (इसक े बाद "अिधिनयम, 1894" क े प म संदिभत) क े तहत शु क गई अिध हण कायवाह को भूिम अिध हण, पुनवास म उिचत मुआवजे और पारदिशता क े अिधकार क खंड 24 (2) क े तहत यपगत माना जाता है और पुनवास अिधिनयम, 2013 (इसक े बाद "अिधिनयम, 2013" क े प म संदिभत), द ली क रा ीय राजधानी े सरकार और अ य ने वतमान अपील को ाथिमकता द है।

2. हमने संबंिधत प क ओर से उप थत व ान अिधव ा को व तार से सुना है और उ च यायालय ारा पा रत आ े पत िनणय और आदेश का अ ययन कया है। 2.[1] उ च यायालय ारा आ े पत िनणय और पा रत आदेश से, ऐसा तीत होता है क उ च यायालय क े सम, अपीलकता और मूल यथ ने अिध हण कायवाह को चुनौती देने क े िलए मूल रट यािचकाकता क े अिधकार को चुनौती द । वभाग क ओर से यह विश मामला था क अिभिल खत मािलक गाँव सभा थी। उ च यायालय क े सम, वभाग/भूिम अिध हण कले टर (एल.ए.सी.) क ओर से यह भी विश मामला था क गत भूिम का क जा 25.01.2000 पर क जे क कायवाह तैयार करक े ले िलया गया और द ली वकास ािधकरण (ड.ड.ए.) को स प दया गया। अनु छेद 4,[6] और 7 म ित शपथ प म कहा गया थाः- "4. क वतमान रट यािचका आगे खा रज होने क े िलए उ रदायी है य क यािचकाकताओं ने वषय भूिम पर अपनी पा ता दखाने वाला कोई द तावेज रकॉड पर नह ं रखा है य क वे राज व रकॉड म दज मािलक नह ं ह, इस कार यािचकाकता रट अिधकार े क े तहत माननीय यायालय क े सम कसी भी राहत क े हकदार नह ं ह। यािचकाकता वग य ी हरक े श क े उ रािधका रय म से एक होने का दावा कर रहा है, जनक े पास भूिमदार अिधकार थे,य प रट यािचका क े साथ कोई जी वत सद यता माण प दायर नह ं कया गया है। यह तुत कया गया है क भूिमदार अिधकार क े तहत, भूिम वतमान मामले म भी गाँव सभा क े वािम व म रह, भूिम का अिभिल खत मािलक गाँव सभा है जसे वतमान रट यािचका म एक आव यक प कार क े प म नह ं बनाया गया है। XXXXXXXX

6. यह तुत कया जाता है क द ली क े िनयो जत वकास क े उ े य से, उ रदाता यथ ने भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 4 क े तहत एक अिधसूचना जार क, जसक े बाद गढ़ मडू गांव म आने वाली भूिम क े अिध हण क े िलए द ली क े िनयो जत वकास क े िलए उ अिधिनयम क खंड 6 क े तहत अिधसूचना जार क गई। क सं. 13/92-93 दनां कत 19.6.1992 वाला एक अिधिनणय भी पा रत कया गया था और उ अिधसूचना क अ य भूिम स हत वषय भूिम का वा त वक र भौितक क जा दनां कत 25.1.2000 क जे क कायवाह तैयार करक े मौक े पर ह ले िलया गया था और मौक े पर ह ड ड ए को स प दया गया था। यािचकाकताओं ने सरकार ारा क जा कायवाह क े िन पादन क े बारे म भी वीकार कया है य क यािचकाकताओं ने वीकार कया है क वषय भूिम का तीका मक क जा सरकार ारा िलया गया था। यह कहने क आव यकता नह ं है क यािचकाकताओं अिध हण कायवाह और क जे क रपोट को कभी चुनौती नह ं द जो यािचकाकताओं क े िलए अंितम और बा यकार बन गई य क भूिम बना कसी बाधा क े सरकार क े पास िन हत थी।

7. यह तुत कया जाता है क यािचकाकता कभी भी कसी भी मुआवजे का दावा करने क े हकदार नह ं थे य क वषय भूिम का अिभिल खत मािलक गाँव सभा था, इसिलए यािचकाकताओं ारा यह दावा क उ ह कोई मुआवजा नह ं दया गया है, कोई गुणव ा नह ं पाता है और रट यािचका खा रज कए जाने क े यो य है। तथा प गाँव सभा को भी मुआवज़े का भुगतान नह ं कया गया। 2.[2] इसक े बाद, पुणे नगर िनगम व अ य बनाम हरकचंद िमिसर मल सोलंक व अ य, (2014) 3 एस.सी.सी 183, क े मामले म इस यायालय क े िनणय पर भरोसा करते हुए उ च यायालय ने रट यािचका को वीकार कर िलया और घो षत कया क वचाराधीन भूिम क े संबंध म अिध हण अिधिनयम 2013 क धारा 24 (2) क े तहत यपगत माना जाता है। तथा प, पुणे नगर िनगम व अ य (उपयु ) क े मामले म इस अदालत क े पूव फ ै सले को बाद म इंदौर वकास ािधकरण बनाम मनोहरलाल व अ य., (2020) 8 एस.सी.सी 129 क े मामले म इस अदालत क सं वधान पीठ क े फ ै सले ारा उलट दया गया l अनु छेद 365 और 366 म, इस अदालत क सं वधान पीठ ने िन निल खत प म अवलोकन और अिभिनधा रत कया हैः- "365. प रणामतः, पुणे नगर िनगम [पुणे नगर िनगम बनाम हरकचंद िमिस रमल सोलंक, (2014) 3 एससीसी 183] म दए गए िनणय को एत ारा पलट दया जाता है तथा अ य सभी िनणय, जनम पुणे नगर िनगम [पुणे नगर िनगम बनाम हरकचंद िमिस रमल सोलंक, (2014) 3 एससीसी 183] का अनुसरण कया गया है, को भी पलट दया जाता है। ी बालाजी नगर आवासीय संगठन [ ी बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम तिमल नाडु रा य, (2015) 3 एस. सी. सी. 353] क े िनणय वाले मामले म यह नह ं कहा जा सकता क यह िनणय अ छ विध अिधकिथत कर रहा है, उसे उलट दया गया है और इसका अनुसरण करते अ य िनणय भी पलटे जाते ह। इंदौर वकास ािधकरण बनाम शैले [(2018) 3 एससीसी 412] क े मामले म, धारा 24(2) क े परंतुक क े संबंध क े पहलू म और या 'या' को “न तो” क े प म पढ़ा जाना चा हए अथवा 'या' 'क े प म पढ़ा जाना चा हए को वचार क े िलए नह ं रखा गया था। इसिलए, यह िनणय भी वतमान िनणय म चचा क े आलोक म मा य नह ं हो सकता है।

366. उपयु चचा को यान म रखते हुए, हम का िन निल खत उ र देते है:-

366.1. धारा 24(1)(क) क े ावधान क े अंतगत य द 2013 क े अिधिनयम क े लागू होने क तार ख 1-1-2014 को अिधिनणय नह ं कया जाता है तो कायवाह म कोई यपगमन नह ं होगा। मुआवजे का िनधारण 2013 क े अिधिनयम क े ावधान क े तहत कया जाना होगा।

366.2. य द अिधिनणय यायालय क े अंत रम आदेश क े दायरे म आने वाली अविध को छोड़कर पांच साल क अविध क े भीतर पा रत कया गया है, तो 1894 अिधिनयम क े तहत 2013 अिधिनयम क धारा 24(1)(ख) क े तहत कायवाह जार रहेगी ऐसा मानते हुए क इसे िनर त नह ं कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म क जे और मुआवजे क े बीच उपयोग कए गए "या" श द को "न ह " क े प म अथवा "और" क े प म पढ़ा जाना चा हए। वष 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत भूिम अिध हण क कारवाई का यपगमन उस थित म समझा जाता है, जब उ अिधिनयम क े लागू होने से पहले पांच वष या उससे अिधक समय तक अिधका रय क िन यता क े कारण भूिम का क जा नह ं िलया गया हो और न ह मुआवजा दया गया हो। दूसरे श द म, य द क जा ले िलया गया है, मुआवजा नह ं दया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा दया गया है, क जा नह ं िलया गया है तो कोई यपगमन नह ं होता है। 366.[4] 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े मु य भाग म "भुगतान" श द म यायालय म मुआवजे को जमा करना शािमल नह ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म जमा नह ं करने क े प रणाम का ावधान है, य द अिधकांश भूिम जोत क े संबंध म इसे जमा नह ं कया गया है तो 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक सभी लाभाथ (भूिम मािलक) 2013 अिधिनयम क े ावधान क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह गे। य द भूिम अिध हण अिधिनयम, 1894 क धारा 31 क े तहत बा यता पूर नह ं क गई है, तो उ अिधिनयम क धारा 34 क े तहत याज दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने ( यायालय म) क े प रणाम व प भूिम अिध हण क कायवाह का यपगमन नह ं होता है। पांच वष या उससे अिधक अविध क े िलए अिधकांश जोत क े संबंध म जमा न करने क थित म, 1894 अिधिनयम क धारा 4 क े तहत भूिम अिध हण क े िलए अिधसूचना क तार ख तक "भू वािमय " को 2013 अिधिनयम क े तहत मुआवजे का भुगतान कया जाए।

366.5. य द कसी य को 1894 अिधिनयम क धारा 31(1) क े ावधान क े अनुसार मुआवजा दया गया है, तो वह यह दावा करने क े िलए वतं नह ं है क मुआवजे का भुगतान न करने या यायालय म मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अिध हण का यपगमन हो गया है। भुगतान करने क बा यता धारा 31(1) क े तहत रािश को दान करक े पूर हो जाती है। जन भू- वािमय ने मुआवजा लेने से इनकार कर दया था या ज ह ने अिधक मुआवजे क े िलए िसफा रश कए क मांग क थी, वे यह दावा नह ं कर सकते क 2013 क े अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत अिध हण क या का यपगमन हो गया था।

366.6. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े पर तुक को धारा 24(2) क े भाग क े प म माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह ं।

366.7. 1894 अिधिनयम क े तहत और जैसा क धारा 24(2) क े तहत ता वत है, क जा लेने का तर का पंचनामा/ ापन तुत करने क े ारा है। एक बार 1894 क े अिधिनयम क धारा 16 क े तहत क जा लेने पर अिधिनणय पा रत हो जाने क े बाद, भूिम रा य म िन हत हो जाती है, 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) क े तहत कोई िनिन हतीकरण का ावधान नह ं है, य क एक बार क जा लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई यपगमन नह ं है।

366.8. कायवा हय क े समझे गए यपगमन को ता वत करने वाले धारा 24(2) क े ावधान उस थित म लागू होते ह जब दनांक 1-1-2014 तक संबंिधत ािधकार क े पास भूिम अिध हण हेतु लं बत एक कायवाह म ािधकार गण अपनी िन यता क े कारण 2013 क े अिधिनयम क े लागू होने से पूव पांच साल या उससे अिधक समय तक क जा लेने और मुआवजे का भुगतान करने म वफल रहे ह । यायालय ारा पा रत अंत रम आदेश क े अ त व क अविध को पांच वष क गणना म न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अिधिनयम क धारा 24(2) भूिम अिध हण क पूण हो चुक कायवाह क वैधता पर सवाल उठाने क े िलए नए वाद हेतुक को ज म नह ं देती है। धारा 24, 2013 अिधिनयम क े लागू होने क ितिथ अथात 1-1- 2014 को लं बत कसी कायवाह क े िलए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयब दाव को पुनज वत करती है और न ह पूण हो चुक कायवाह को फर से शु करती है और न ह भूिम मािलक को अिध हण को अवैध घो षत करने क े िलए अदालत क े बजाय ेजर म मुआवजे को जमा करने क े तर क े क वैधता पर सवाल उठाने क अनुमित देती है।”

3. अ यथा भी, वचाराधीन भूिम म मूल रट यािचकाकता क े अिधकार पर वचार कए बना, जब यह वभाग/वा त वक िनयं ण रेखा क ओर से विश मामला था क अिभिल खत मािलक गाँव सभा थी और यह त य क वचाराधीन भूिम का क जा मौक े पर ह क जे क रसीद खींचकर ले िलया गया था, उ च यायालय ने मूल रट यािचकाकता क े कहने पर रट यािचका पर वचार करने और यह घो षत करने म बहुत गंभीर ु ट क है क वचाराधीन भूिम क े संबंध म अिध हण को यपगत माना जाता है।

4. कसी भी मामले म, इंदौर वकास ािधकरण (उपयु ) क े मामले म सं वधान पीठ क े फ ै सले म इस यायालय ारा िनधा रत कानून को मामले क े त य पर लागू करते हुए, उ च यायालय ारा पा रत आ े पत िनणय और आदेश अ थर है और इसे अमा य घो षत करने और र करने क े यो य है और तदनुसार इसे अमा य घो षत और र कर दया जाता है। तदनुसार वतमान अपील वीकार क जाती है । यथ सं या 1 ारा तुत मूल रट यािचका यहाँ मूल रट यािचकाकता खा रज हो जाती है। तथा प, मामले क े त य और प र थितय म, लागत क े बारे म कोई आदेश नह ं होगा। लं बत आवेदन, य द कोई ह, तो उनका भी िनपटारा कर दया जाता है। …………………………... या. [एम. आर. शाह] …………………………... या.. [सी.ट. र वक ु मार] नई द ली; 20 जनवर,2023 (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अ वीकरण: देशी भाषा म िनणय का अनुवाद मुक ेबाज़ क े सीिमत योग हेतु कया गया है ता क वो अपनी भाषा म इसे समझ सक एवं यह कसी अ य योजन हेतु योग नह ं कया जाएगा| सम त कायालयी एवं यावहा रक योजन हेतु िनणय का अं ेज़ी व प ह अिभ मा णत माना जाएगा और काया वयन तथा लागू कए जाने हेतु उसे ह वर यता द जाएगी। Disclaimer: The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.