Delhi Vikas Pradhikaran v. Diwan Chand Pruthi

Delhi High Court · 20 Jan 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No 397 of 2023 @ W.A.(C) No. 1599 of 2023
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that land acquisition proceedings under the 1894 Act do not lapse under Section 24(2) of the 2013 Act if possession was prevented by court injunction or compensation was paid, overruling earlier contrary precedent.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च् न्यायाल
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं 397 / 2023
( @ �व.अ.या. (�स) सं. 1599 / 2023)
�दल्ल �वकास प्रा�धक
( @डायर� सं 34090 / 2022 ) ... अपीलाथ�(गण)
बनाम
द�वान चंद प्रुथी व अ ... प्रत्(गण)
�नणर्
JUDGMENT

1. नई �दल्ल� िस्थत �दल उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 609/2016 म� पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश से असंतुष् तथा व्य�थत महसू करने पर, िजसक े द्वार उच् न्यायाल ने इसम� प्रत् सं. 1 द्वार पेश क� गई क�थत �रट या�चका को अनुम�त प्रदान है तथा घोषणा क� है �क भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 (िजसे इसम� इसक े बाद 'अ�ध�नयम, 1894' से एम. आर. शाह, न्य. संद�भर्त �कया गय है) क े अंतगर् शुर क� गई अ�धग्र कायर्वाह को प्रश्नगत भ क े संबंध म� भू�म अजर्, पुनवार्सन और पुनव्यर्वस्थापन म� उ�चत प्र�तकर और पारद�शर्ता का अ अ�ध�नयम 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद अ�ध�नयम, 2013 क े रू म� संद�भर् �कया गया है) क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाएगा, �दल्ल �वकास प्रा�धक ने वतर्मा अपील दायर क� है।

2. हमने संबं�धत प�कार� क� ओर से उपिस्थ �वद्वा अ�धवक्त को �वस्ता से सुना है तथा उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश का अवलोकन �कया है। 2.[1] उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश से यह स्पष है �क उच् न्यायाल क े सम� यह भू�म अ�धग्र कलेक्ट (एलएसी) क� ओर से �व�शष् मामला था और इस प्रक प्र-शपथ पत क े अनुछेद 8 म� उिल्ल�खतथा �क चूं�क माननीय उच् न्यायाल ने बेकब्ज क े �खलाफ रोक मंजूर क� थी, इस�लए प्रश् भू�म पर कब्ज नह�ं �लया गया था, तथा�प, प्रश् भू�म क े संबंध म� मुआवजा आरडी क े रूप म� भेजा गया था। उपरोक्त के बावजू, पुणे नगर �नगम व अन्यबनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक� व अन्, (2014) 3 एससीसी 183 म� इस न्यायालय के�पछले आदेश पर �नभर्र हो करउच् न्यायाल ने �रट या�चका को स्वीका कर �लया है और घो�षत �कया है �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाता है। हालां�क, बाद म� इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम मनोहरलाल व अन्, (2020) 8 एससीसी 129 क े मामले म� सं�वधान पीठ क े �नणर्य नेइस न्यायाल ने पुणे नगर �नगम व अन् (पूव�क्) क े अपने पहले क े �नणर् को पलट �दया, िजस पर उच् न्यायाल द्वार आ�े�पत �नणर् व आदेश पा�रत करते समय भरोसा जताया गया है। 2.[2] इंदौर �वकास प्रा�धक (पूव�क्) क े मामले म�, इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ ने माना और अ�भ�नधार्�रत �कय �क य�द न्यायाल क े रोक क े कारण अ�धग्रहणकत �नकाय / लाभाथ� द्वार कब्ज नह�ं �लया जा सकता है, तो रोक क� अव�ध को अलग माना जायेगा। वैसे भी, हमार� राय है �क एक बार बेकब्ज क े �खलाफ रोक प्रा करने क े बाद और िजसक े कारण अ�धग्र करने वाला �नकाय / लाभाथ� कब्ज नह�ं ले सकता था, उसक े बाद, भू-स्वाम क े �लए यह प्र�तवाद करन संभव नह�ं होगा �क चूं�क कब्ज नह�ं �लया गया है, वह अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24(2) का लाभ पाने का हकदार है। 2.[3] इंदौर �वकास प्रा�धक (पूव�क्) क े मामले म� इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ ने अनुछेद 365 व 366 म� �नम्न�ल�ख �टप्पण और अ�भ�नधार्�र �कया हैः “365. प�रणामतः, पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] म� �दए गए �नणर्य क एतद द्वार पलट �दया जाता है तथा अन् सभी �नणर्, िजनम� पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] का अनुसरण �कया गया है, को भी पलट �दया जाता है। श् बालाजी नगर आवासीय संगठन [श् बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम त�मल नाडु राज्, (2015) 3 एस. सी. सी. 353] क े �नणर्य वाल मामले म� यह नह�ं कहा जा सकता �क यह �नणर् अच्छ �व�ध अ�धक�थत कर रहा है, उसे उलट �दया गया है और इसका अनुसरण करते अन् �नणर् भी पलटे जाते ह�। इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम शैलेन् [(2018) 3 एससीसी 412] क े मामले म�, धारा 24(2) क े परंतुक क े संबंध क े पहलू म� और क्य 'या' को “न तो” क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए अथवा 'या' 'क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए को �वचार क े �लए नह�ं रखा गया था। इस�लए, यह �नणर् भी वतर्मा �नणर् म� चचार क े आलोक म� मान् नह�ं हो सकता है।

366. उपयुर्क चचार को ध्या म� रखते हुए, हम प्रश का �नम्न�ल�ख उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1)(क) क े प्रावधा क े अंतगर् य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1-2014 को पंचाट नह�ं �दया जाता है तो कायर्वाह म� कोई व्यपगमन नह� होगा। मुआवजे का �नधार्र 2013 क े तहत �कया जाना होगा। 366.[2] य�द पंचाट न्यायाल क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस् नह�ं �कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म� कब्ज और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्र क� कारर्वा का समझा गया व्यपगमनउस िस्थ� म� होता है, जब उक् अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्र क े कारण भू�म का कब्ज नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द म�, य�द कब्ज ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्ज नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है।

366.4. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख् भाग म� "भुगतान" शब् म� न्यायाल म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावध है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यत पूर� नह�ं क� गई है, तो उक् अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्या �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायाल म�) क े प�रणामस्वर भू�म अ�धग्र क� कायर्वाह का व्यपगमननह�ं होता है। पांच वषर या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ� म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।

366.5. य�द �कसी व्यिक को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावध क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतं नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायाल म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र का व्यपगम हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यत धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रद करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�न अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र क� प्र�क का व्यपगम हो गया था।

366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तु को धारा 24(2) क े भाग क े रू म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।

366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता है, कब्ज लेने का तर�का जांच �रपोटर/�ापन प्रस् करने क े द्वार है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्ज लेने पर अ�ध�नणर् पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकर का प्रावध नह�ं है, क्य�� एक बार कब्ज लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।

366.8. कायर्वा�हय� के समझे गए व्यपगमन क प्रस्ता�वत करने वा धारा 24(2) क े प्रावध उस िस्थ� म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धका क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�ब एक कायर्वाह� म� प�धकार�गण अपनी �निष्क्रयता कारण 2013 क े लागू होने से पूवर पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्ज लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायाल द्वार पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत क� अव�ध को पांच वषर क� गणना म� न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्र क� पूणर हो चुक� कायर्वाह क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन् नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार् 1-1- 2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद् दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर् हो चुक कायर्वाह को �फर से शुरू करत है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्र को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेज म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है।

3. इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ द्वार इंदौर �वकास प्रा�धक (पूव�क्) मामले म� इस न्यायालय द्वारअ�धक�थत �व�ध को लागू करते हुए, उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् व आदेश पोषणीय नह�ं है तथा इसे रद् व अपास्त�कया जाना चा�हए और इसे तदनुसार रद् व अपास्त�कया जाता है। तदनुसार वतर्मा अपील स्वीक ृत क� जातीहै। कोई जुमार्नानह�ं। लं�बत आवेदन�, य�द कोई हो, का भी �नपटान �कया जाता है।.............................न्य. [ एम. आर. शाह ].............................न्य. [ सी. ट�. र�वक ु मार ] नई �दल्ल; 20 जनवर�, 2023. अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी। Translation has been done through AI Tool: SUVAS)