Haryana State v. Sushila

Delhi High Court · 13 Jan 2023
M.R. Shah; S. Ravindra Bhat
Civil Appeal No. 9205 of 2022 @ SLP (Crl) No. 23446 of 2022
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that subsequent purchasers who were not owners at the time of acquisition notification have no right to challenge land acquisition proceedings or claim compensation under the Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013.

Full Text
Translation output
[ रपोटयो ]
भारत क
े सव ायालय म
नाग रक अपीलीय ायपािलका
2022 का नाग रक आवेदन नंबर.9205
(2022 का @एसएलपी (सी) नंबर.23446)
(2021 की @डायरी नंबर.29159)
ह रयाणा रा और अ अपीलकतागण
बनाम
सुशीला और अ ितवादीगण
िनणय
M.R.SHAH. J.
JUDGMENT

1. पंजाब और ह रयाणा उ ायालय ारा सी.ड ू.पी नंबर 15720 ऑफ 2014 म चंडीगढ़ म पा रत िकए गए िववािदत फ ै सले और आदेश िदनांक 05.12.2017 से िथत और असंतु महसूस करते ए, िजसक े ारा उ ायालय ने उ रट यािचका को ीकार कर िलया है और घोषणा की है िक िवचाराधीन भूिम क े संबंध म अिध हण को भूिम अिध हण, पुनवास और पुनवास अिधिनयम, 2013 (इसक े बाद 'अिधिनयम 2013' क े प म संदिभत) म उिचत मुआवजे और पारदिशता क े अिधकार की धारा 24 (2) क े तहत पगत माना जाता है, ह रयाणा रा ने वतमान अपील को ाथिमकता दी है।

2. शु आत म, यह ान िदया जाना आव क है िक उ ायालय क े सम मूल रट ितवादीगण की ओर से यह मामला था िक िवचाराधीन भूिम क े संबंध म मुआवजे का भुगतान उ नहीं िकया गया है और यहां तक िक िवचाराधीन भूिम का क ा भी उनक े पास है और इसिलए, अिधिनयम, 2013 की धारा 24 (2) को देखते ए, िवचाराधीन भूिम क े संबंध म अिध हण को समा माना जाता है ोंिक न तो क ा िलया गया है और न ही अिध िहत भूिम क े िलए मुआवजे का भुगतान िकया गया है।

2. 1 उ ायालय क े सम भूिम अिध हण अिधकारी ारा एक िल खत बयान दायर िकया गया था।यह िवशेष प से िववािदत था िक अिध िहत भूिम का क ा नहीं िलया गया था।अपीलकताओं की ओर से यह भी िविश मामला था िक मूल रट यािचकाकता धारा 4 िदनांक 26.08.2003 क े तहत अिधसूचना क े बाद बाद क े खरीदार होने क े नाते उ िकसी भी मुआवजे का भुगतान करने का कोई सवाल ही नहीं था।यह ुत िकया गया था िक यािचकाकताओं को बाद क े खरीदार होने क े नाते अिध हण की कायवाही को चुनौती देने का कोई अिधकार नहीं था, िवशेष प से अिध हण की कायवाही क े समा होने क े िलए ाथना करने का।िल खत कथन का ासंिगक भाग इस कार हैः "1. िक यािचकाकताओं को इस माननीय अदालत क े सम वतमान यािचका दायर करने का कोई अिधकार नहीं है ोंिक यािचकाकता अिधसूचना धारा-4 िदनांक 26.08.2003 और धारा-6 िदनांक 10.08.2004 क े समय अिध िहत भूिम क े मािलक नहीं थे। ाम नाथुपुर की ाम पंचायत खसरा नं.155 (1-7-0), 156/1 (0-3-8), 156/3 (1-18-17) वाली भूिम की मािलक थी। यािचकाकता राज रकॉड क े अनुसार िववािदत भूिम म िकरायेदार थे।माननीय उ ायालय ारा िनयिमत दू सरी अपील सं.1578 ऑफ 1990 और िसिवल िविवध सं.3568 सी ऑफ 2006 म पा रत आदेश िदनांक 24.05.2006 क े अनुसार यािचकाकता िववािदत भूिम क े मािलक बन जाते ह।इसक े तुरंत बाद यािचकाकता सं ा 1,4,5,6,7,8,9,10,11 और 18 ने िववाद म अपनी जमीन दू सरे यानी पारस राम क े बेटे धमपाल को िव य िवलेख 8637 िदनांिकत 4.7.2006 क े ारा बेच दी और इंतकाल नंबर 2218 िदनांिकत 09.08.2006 को भी े ता क े प म ीक ृ त िकया गया था। यािचकाकताओं ारा भूिम की िब ी अवाड सं ा 8 िदनांिकत 04.08.2006 की घोषणा से काफी पहले की गई थी। इसिलए यािचकाकता मुआवजे क े िवतरण क े बाद अिध हण कायवाही क े खलाफ वतमान यािचका दायर करने क े हकदार नहीं ह और वतमान यािचका इस आधार पर लागत क े साथ खा रज होने क े िलए उ रदायी है। XXX XXX XXX

3. िक पुर ृ त भूिम की क ु ल ितपूित रािश 76,32,858/- है।अिध िहत भूिम का मुआवजा यािचकाकताओं को नहीं िदया गया ोंिक अवाड पास होने वाले तारीख को यािचकाकतागण नं 1,4,5,6,7,8,9,10,11 और 18 अिध िहत भूिम क े मािलक नहीं थे और अ भूिम मािलकों ने अिध िहत भूिम की ितपूित रािश ा करने क े िलए अपनी सहमित नहीं दी और अपने ािम को सािबत करने क े िलए कोई द ावेजी माण नहीं िदया और इस तरह से िवत रत रािश, एल.ए.सी क े खाते म जमा है, और पुर ार पा रत करने की तारीख को वा िवक भूिम मािलकों की मांग पर तुरंत भुगतान क े िलए उपल है।

10. िक रट यािचका क े पैरा नं.10 की साम ी इस हद तक ीकार िकया जाता है िक िववािदत भूिम क े अवाड की घोषणा 04.08.2006 को की गई थी।यह िवशेष प से अ ीकार िकया जाता है िक यािचकाकता अिध िहत भूिम क े भौितक क े म ह।यह ुत िकया जाता है िक अिध िहत भूिम का क ा डा क े ितिनिध को उसी िदन रपट नंबर 702 ितिथ 04.08.2006 क े ारा सौंप िदया गया है। यािचकाकता अिध िहत भूिम म अित मणकारी ह।इस पैरा की शेष साम ी रकॉड की बात है।

14. िक रट यािचका क े पैरा नं.14 की साम ी गलत और अ ीक ृ त ह।यह िवशेष प से अ ीकार िकया जाता है िक यािचकाकताओं क े अिध हण की कायवाही भूिम अिध हण, पुनवास और पुनवास अिधिनयम 2013 म उिचत मुआवजे और पारदिशता क े ावधान क े अनुसार समा हो गई है। यह ुत िकया जाता है िक अिध िहत भूिम का भौितक क ा डा क े ितिनिध को उसी िदन रपट सं ा 702 िदनांिकत 04.08.2006 क े ारा सौंप िदया गया है। यािचकाकता अिध िहत भूिम म अित मणकारी ह और अिध िहत भूिम का मुआवजा यािचकाकताओं को नहीं िदया गया ोंिक वे अिध िहत भूिम क े मािलक नहीं ह और वे इसक े हकदार नहीं ह।इस पैरा की शेष साम ी रकॉड की बात है।

17. िक रट यािचका क े पैरा नं.17 की साम ी गलत और अ ीक ृ त ह।यह ुत िकया जाता है िक भूिम अिध हण, पुनवास और पुन व थापन अिधिनयम 2013 म उिचत मुआवजे और पारदिशता क े ावधान क े अनुसार यािचकाकताओं क े अिध हण की कायवाही को समा नहीं िकया जा सकता है, ोंिक अिध िहत भूिम का भौितक क ा डा क े ितिनिध को उसी िदन रपट नंबर 702 िदनांिकत 04.08.2006 क े ारा सौंप िदया गया है। यािचकाकता अिध िहत भूिम म अित मणकारी ह और अिध िहत भूिम का मुआवजा यािचकाकताओं को नहीं िदया गया ोंिक वे अिध िहत भूिम क े मािलक नहीं ह। अिध हण की कायवाही एल.ए अिधिनयम क े अिनवाय ावधानों क े अनुसार िजला, नगर योजनाकार, गुड़गांव ारा िदए गए सीमांकन क े अनुसार की गई है। यह अिध हण कानून क े अनुसार बड़े पैमाने पर जनता क े िहत म है और रट यािचका क े इस पैरा म यािचकाकताओं ारा उ खत िकसी भी आधार पर र करने क े िलए उ रदायी नहीं है। िक रट यािचका म कोई कानूनी िबंदु शािमल नहीं है िजसक े िलए इस माननीय उ ायालय ारा िनणय की आव कता है।उप पैरा (i) से (iv) म उठाई गई दलील गलत ह और इसिलए उनका अ ीक ृ त िकया जाता है।अिध हण की कायवाही कानून क े अनुसार की गई थी।"

3. उपरो से यह देखा जा सकता है िक अपीलकताओं की ओर से यह िविश मामला था िक िवचाराधीन भूिम का क ा ले िलया गया था और 04.08.2006 को लाभाथ को सौंप िदया गया था।अपीलकता की ओर से यह भी मामला था िक यािचकाकता अिध िहत भूिम म अित मणकारी ह और अिध िहत भूिम का मुआवजा उ नहीं िदया गया था ोंिक वे अवाड क े समय सह-मािलक नहीं थे। उ ायालय ारा िववािदत िनणय और आदेश पा रत करते समय उपरो पर िब ु ल भी िवचार नहीं िकया गया है।चूँिक अिध हण िनकाय ारा क ा ले िलया गया था और लाभाथ को सौंप िदया गया था, उसक े बाद यािचकाकताओं ारा िकसी भी क े को अित मण कहा जा सकता है और अित मणका रयों को अिधिनयम, 2013 की धारा 24 (2) क े ावधानों का लाभ लेने की अनुमित नहीं दी जा सकती है और ाथना की जा सकती है िक अब वे क े म ह, अित मणका रयों क े प म हो सकते ह, वे अिधिनयम, 2013 की धारा 24 (2) क े तहत राहत क े हकदार ह। यह अवैधता और अित मणका रयों को एक ीिमयम देगा जो िवधाियका का इरादा नहीं हो सकता है।

4. अ था, जैसा िक इस ायालय ने िद ी शासन क े मामले म सिचव, भूिम और भवन बनाम पवन क ु मार और अ, 2022 की िसिवल अपील सं ा 3646 ऑफ 2022 और िद ी िवकास ािधकरण बनाम गॉड े िफिल (आई) िलिमटेड और अ, िसिवल अपील सं ा 3073 ऑफ 2022 क े मा म से देखा और अिभिनधा रत िकया, बाद क े खरीदारों को अिध हण और/या अिध हण की समा को चुनौती देने का कोई अिधकार नहीं है। 4.[1] उपरो दो िनणयों म इस ायालय ारा िनधा रत कानून को लागू करते ए, इसम िनजी ितवादीगण क े कहने पर रट यािचका-मूल रट यािचकाकता जो बाद क े खरीदार ह, पर उ ायालय ारा अिध हण कायवाही को चुनौती देने और/या अिधिनयम, 2013 की धारा 24 (2) क े तहत अिध हण क े समा होने क े िलए ाथना करने पर िवचार नहीं िकया जाना चािहए था।इन प र थितयों म भी उ ायालय ारा पा रत िववािदत िनणय और आदेश िटकाऊ नहीं है।

5. उपरो को ान म रखते ए और ऊपर बताए गए कारण क े िलए वतमान अपील सफल होती है। 2014 क े सी.ड ू.पी सं ा. 15720 म पा रत उ ायालय ारा पा रत िववािदत िनणय और आदेश को इसक े ारा र कर िदया जाता है और दरिकनार कर िदया जाता है। िनजी ितवादीगण-मूल रट यािचकाकताओं ारा दायर मूल रट यािचका तदनुसार खा रज कर दी जाती है। तदनुसार वतमान अपील की अनुमित है।कोई लागत नहीं। लंिबत आवेदन, यिद कोई हों, तो उनका भी िनपटारा कर िदया जाता है।....................... J [M.R.SHAH].......................... J [S.RAVINDRA BHAT] नई िद ी; 13 जनवरी, 2023 अ ीकरणः थानीय भाषा म अनुवािदत िनणय वादी क े सीिमत उपयोग क े िलए है तािक वह अपनी भाषा म इसे समझ सक े और िकसी अ उ े क े िलए इसका उपयोग नहीं िकया जा सकता है ।सभी वहा रक और आिधका रक उ े ों क े िलए िनणय का अं ेजी सं रण ामािणक होगा और िन ादन और काया यन क े उ े क े िलए उपयु रहेगा ।