Rashtriya Rajdhani Kshetra Delhi Sarkar v. Rituram

Delhi High Court · 20 Jan 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No 379/2023 (@ W.A. (C) No. 1349/2023)
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court clarified that under Section 24(2) of the 2013 Land Acquisition Act, acquisition lapses only if both possession is not taken and compensation is not paid for five years or more, overruling earlier contrary precedent and allowing the appeal.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च् न्यायाल
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं 379/2023
(@ �व.अ.या. (�स) सं. 1349/2023)
राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल
सरकार
(@डायर� सं. 24886/2022) ... अपीलाथ�(गण)
बनाम
र�तराम व अन् ... प्रत्(गण)
�नणर्
JUDGMENT

1. नई �दल्ल� िस्थत �दल उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 8685/2015 म� पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश �दनां�कत 20.12.2017 से असंतुष् तथा व्य�थत होकर, िजसक े द्वार उच् न्यायाल ने यहाँ प्राइवेप्रत्यथ� द्वारा दक�थत �रट या�चका को अनुम�त प्रदान है तथा घोषणा क� है �क प्रश्नगत भ क े एम. आर. शाह, न्य. संबंध म� अ�धग्र को भू�म अजर्, पुनवार्सन और पुनव्यर्वस्थ म� उ�चत प्र�तकर और पारद�शर्ता का अ�धकार अ�ध�न 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद अ�ध�नयम, 2013 क े रू म� संद�भर् �कया गया है) क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाएगा, राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल सरकार ने वतर्मा अपील दायर क� है।

2. उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश से और यहां तक �क अपीलकतार और अन् लोग� क� ओर से उच् न्यायाल म� दा�खल जवाबी शपथपत से यह प्रत होता है �क यह अपीलकतार और अन् मूल प्रथ�गण क� ओर से �वशेष मामला था �क प्रश् भू�म का कब्ज �दनांक 21.03.2007 को �लया गया था। जवाबी शपथपत क े अनुच्छे 6 और 7 म� �नम्नानुसा कहा गया था – “6. अ�भलेख क े अनुसार, �दल्ल क े घ�डा गुजरान खादर गांव क े राजस् एस्टे म� िस्थ प्रश् भू�म अथार्त खसरा सं. 17(4-12), 18(3-14), 38(1-12), 41(1-16), 42(1-10) क ु ल �ेत्रफ 13 बीघा 04 �बस्व (या�चकाकतार क े पास 1/12वां �हस्स है) को भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत �दनांक 23.09.1989 को अ�धसू�चत �कया गया था और उसक े बाद �दल्ल क े �नयोिजत �वकास क े �लए भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम क� धारा 6 क े तहत �दनांक 20.06.1990 को घोषणा क� गई थी। उक् अ�धसूचना क े अनुसरण म�, धारा 9 और 10 क े तहत, जैसा �क अ�ध�नयम म� प्रावधान, �हतबद् व्यिक्त को नो�टस जार� �कए गए थे, िजसम� सभी �हतबद् व्यिक्त से दावे आमं�त् �कए गए थे और उपरोक् प्रश्न भू�म क े संबंध म� वतर्मा या�चकाकतार्ओ क े �हत म� पूवर्वत स�हत इच् छु व्यिक्त द्वार दावे भी दायर �कए गए थे। तत्काल� भू�म अ�धग्र कलेक्ट ने दावेदार� क े दाव� पर �वचार करने क े बाद अ�ध�नणर् संख्य 8/92-93 �दनां�कत 19.06.1992 पा�रत �कया। यहां यह उल्ले करना उ�चत है �क खसरा सं. 861/639(1-15) का अ�धग्र नह�ं �कया गया है।

7. प्रश् भू�म का कब्ज ले �लया गया और �दनांक 21.03.2007 को लाभाथ� �वभाग को स�प �दया गया। हालां�क, मुआवजे क� रा�श का भुगतान अ�भ�ल�खत स्वाम को नह�ं �कया गया है।”

3. हालां�क, उसक े बाद, प्रश् भू�म का कब्ज लेने और उसे लाभाथ� को स�पने क े तथ् पर �वचार �कए �बना, पुणे नगर �नगम व अन् बनाम हरकचंद �मसर�मल सोलंक� व अन्., (2014) 3 एससीसी 183 क े मामले म� इस न्यायालयक े �नणर्य तथ अन् �नणर्य�पर भरोसा कर और क े वल इस आधार पर �क प्रश् भू�म क े संबंध म� मुआवजा नह�ं �दया गया है, आ�े�पत �नणर् और आदेश द्वार उच् न्यायाल ने घोषणा क� �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24 (2) क े तहत व्यपग माना जाता है।

4. तथा�प, आ�े�पत �नणर् व आदेश पा�रत करते समय उच् न्यायाल द्वार पुणे नगर �नगम व अन् (सुपरा) क े मामले म� इस न्यायाल क े िजस �नणर् पर भरोसा �कया गया है, उसे इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम मनोहरलाल व अन्, (2020) 8 एससीसी 129 क े मामले म� इस अदालत क� सं�वधान पीठ द्वार �वशेष रू से खा�रज कर �दया गया है। इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ ने अनुछेद 365 और 366 म� �नम्न�ल�ख रूप स मत व्यक �कया और अ�भ�नधार्�र �कया है - “365. प�रणामतः, पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] म� �दए गए �नणर्य क एतद द्वार पलट �दया जाता है तथा अन् सभी �नणर्, िजनम� पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] का अनुसरण �कया गया है, को भी पलट �दया जाता है। श् बालाजी नगर आवासीय संगठन [श् बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम त�मल नाडु राज्, (2015) 3 एस. सी. सी. 353] क े �नणर्य वाल मामले म� यह नह�ं कहा जा सकता �क यह �नणर् अच्छ �व�ध अ�धक�थत कर रहा है, उसे उलट �दया गया है और इसका अनुसरण करते अन् �नणर् भी पलटे जाते ह�। इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम शैलेन् [(2018) 3 एससीसी 412] क े मामले म�, धारा 24(2) क े परंतुक क े संबंध क े पहलू म� और क्य 'या' को “न तो” क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए अथवा 'या' 'क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए को �वचार क े �लए नह�ं रखा गया था। इस�लए, यह �नणर् भी वतर्मा �नणर् म� चचार क े आलोक म� मान् नह�ं हो सकता है।

366. उपयुर्क चचार को ध्या म� रखते हुए, हम प्रश का �नम्न�ल�ख उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1)(क) क े प्रावधा क े अंतगर् य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1- 2014 को पंचाट नह�ं �दया जाता है तो कायर्वाह म� कोई व्यपगमन नह� होगा। मुआवजे का �नधार्र 2013 क े तहत �कया जाना होगा। 366.[2] य�द पंचाट न्यायाल क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस् नह�ं �कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म� कब्ज और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्र क� कारर्वा का व्यपगमनउस िस्थ� म� समझा जाता है, जब उक् अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्र क े कारण भू�म का कब्ज नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द म�, य�द कब्ज ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्ज नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है।

366.4. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख् भाग म� "भुगतान" शब् म� न्यायाल म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावध है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यत पूर� नह�ं क� गई है, तो उक् अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्या �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायाल म�) क े प�रणामस्वर भू�म अ�धग्र क� कायर्वाह का व्यपगमननह�ं होता है। पांच वषर या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ� म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।

366.5. य�द �कसी व्यिक को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावध क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतं नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायाल म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र का व्यपगम हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यत धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रद करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�न अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र क� प्र�क का व्यपगम हो गया था।

366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तु को धारा 24(2) क े भाग क े रू म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।

366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता है, कब्ज लेने का तर�का पंचनामा/�ापन प्रस् करने क े द्वार है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्ज लेने पर अ�ध�नणर् पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकर का प्रावध नह�ं है, क्य�� एक बार कब्ज लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।

366.8. कायर्वा�हय� के समझे गए व्यपगमन क प्रस्ता�वत करने वा धारा 24(2) क े प्रावध उस िस्थ� म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धका क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�ब एक कायर्वाह� म� प�धकार�गण अपनी �निष्क्रयता कारण 2013 क े लागू होने से पूवर पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्ज लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायाल द्वार पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत क� अव�ध को पांच वषर क� गणना म� न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्र क� पूणर हो चुक� कायर्वाह क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन् नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार् 1-1- 2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद् दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर् हो चुक कायर्वाह को �फर से शुरू करत है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्र को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेज म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है।

5. इंदौर �वकास प्रा�धक (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल द्वार अ�धक�थत �व�ध को प्रस्तमामले क े तथ्य पर लागू करना और इस तथ् पर �वचार करना �क पुणे नगर �नगम व अन् (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल का �नणर्, िजस पर उच् न्यायाल द्वार आ�े�पत �नणर् और आदेश पा�रत करते समय भरोसा �कया गया है, उलट �दया गया है, उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश पोषणीय नह�ं है और यह रद् व अपास् �कए जाने योग्य ह तथा तदनुसार रद् व अपास् �कया जाता है।

6. उपरोक् को ध्या म� रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण� से वतर्मा अपील सफल होती है। प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग मानने क� घोषणा करने वाले उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश को एतद् द्वा रद् व अपास् �कया जाता है। नतीजतन, मूल �रट या�चका खा�रज क� जाती है। वतर्मा अपील तदनुसार स्वीक ृत क� जाती है। हालां�क, मामले क े तथ्य और प�रिस्थ�तय म�, जुमार्न क े बारे म� कोई आदेश नह�ं होगा। लं�बत आवेदन, य�द कोई हो, का भी �नपटान कर �दया जाता है।.............................न्य. [एम. आर. शाह].............................न्य. [सी. ट�. र�वक ु मार] नई �दल्ल; 20 जनवर�, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।