Kumar Reger v. Union of India

Supreme Court of India · 16 Jan 2023
Ajay Rastogi; Bela M. Ved
Special Leave Petition (Civil) No 10499/2022
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the removal of a CISF constable for suppressing a pending criminal case at the time of appointment, affirming that such concealment constitutes grave misconduct justifying dismissal.

Full Text
Translation output
रपोट करने यो य
भारत का सव च यायालय
स वल अपील य े ा धकार
वशेष अवकाश या चका ( स वल) सं या 10499/2022
पूव कां टेबल चालक मुक
े श क
ु मार रेगर - या चकाकता
बनाम
भारत संघ व अ य - यथ
नणय
बेला एम. वेद , याया धप त
JUDGMENT

1. वतमान वशेष अनुम त या चका राज थान उ च यायालय पीठ जयपुर क े लए वारा पा रत 16.11.2021 क े फ ै सले और आदेश क े खलाफ नद शत है, िजसक े तहत ख ड पीठ ने उ रदाताओं-भारत संघ (ख ड पीठ क े सम अपीलकता) वारा दायर डी. बी. वशेष अपील रट सं या 637/2021 को अनुम त द है, और एकल पीठ वारा पा रत 17.02.2021 क े आदेश को दर कनार कर दया है, िजसने वतमान या चकाकता (ख ड पीठ क े सम तवाद ) वारा दायर स वल रट या चका सं या 17475/2018 को अनुम त द थी।

2. वतमान या चकाकता को 03.11.2007 पर CISF म कां टेबल क े पद पर नयु त कया गया था। अ ैल, 2009 म या चकाकता को कमांडट ड सि लन, सी. आई. एस. एफ. क े कायालय से सी. आई. एस. एफ. नयम 2001 (इसक े बाद "उ त नयम" क े प म संद भत) क े नयम 36 क े तहत एक नो टस/आरोप-प ा त हुआ िजसम यह आरोप लगाया गया था क या चकाकता ने अपने च र माण प का स यापन जमा कराते समय इस त य को दबा दया था क वह भा.दं.सं. सी. क धारा 323, 324 और 341 क े तहत अपराध क े लए एक आपरा धक मामले म शा मल था, िजसक े संबंध म उसक े खलाफ 21.10.2003 पर एक एफ. आई. आर. दज क गई थी। यह क उ त कायवाह म जांच अ धकार वारा संबं धत यायालय क े सम आरोप-प तुत करने पर, मामला उ त यायालय क े सम मुकदमे क े लए लं बत था जब या चकाकता वारा च र माण प सी. आई. एस. एफ. अ धका रय को तुत कया गया था। इसम यह भी कहा गया था क चूं क नयुि त प क े साथ दायर उनक े च र माण प म आपरा धक मुकदमे वचाराधीनता होने क े बारे म जानकार को दबाने का काय घोर दुराचार और अनुशासनह नता क ेणी म था, इस लए वह बहुत अनुशा सत पु लस बल यानी सी. आई. एस. एफ. म नयु त होने क े यो य नह ं थे। इसक े बाद या चकाकता क े खलाफ अनुशासना मक कायवाह शु क गई। अनुशासना मक कायवाह क े दौरान, या चकाकता ने अपनी गलती वीकार ाथ मक ल । कमांडट अनुशासन, सी. आई. एस. एफ. ने या चकाकता क कम उ और भ व य क संभावनाओं को यान म रखते हुए, 6320-6070/- ेड वेतन से एक चरण नीचे Rs.5200-20,200/- क े वेतन बड ैड पे देकर दं डत कया। हालाँ क, 06.10.2009 पर, उप महा नर क (पि चम े ), एयर पोट हेड वाटर-नवी मुंबई-ने व ेरणा सं ान लेते हुए दनां कत 11.07.2009 क े आदेश को संशो धत कया और CISF नयम, 2001 क े नयम 54 को लागू करते हुए या चकाकता क े खलाफ नए वभागीय जांच क े लए मामले को वापस भेज दया। उ त वभागीय जांच का समापन 09.03.2010 पर या चकाकता को सेवा से हटाने म हुआ, िजसक े खलाफ या चकाकता ने एक वभागीय अपील दायर क थी, हालां क, उ त अपील को अपील य ा धकरण वारा दनां कत 23.06.2010 आदेश क े मा यम से खा रज कर दया गया। या चकाकता वारा स म ा धकार क े सम दायर क गई पुनर ण या चका, िजसम उ त आदेश दनांक 23.06.2010 का आरोप लगाया गया था, को भी पुनर ण ा धकरण वारा दनां कत 21.12.2010 आदेश क े मा यम से खा रज कर दया गया।

3. सी. आई. एस. एफ. क े व भ न अ धका रय वारा पा रत उ त आदेश से य थत होकर, या चकाकता ने जयपुर म राज थान उ च यायालय क े सम एक रट या चका सं या 8190/2012 दायर क । एकल पीठ ने दनांक 16-02-2018 क े आदेश क े मा यम से या चकाकता क े खलाफ पा रत हटाने क े आदेश को दर कनार कर दया और या चकाकता को अवतार संह बनाम भारत संघ और अ य (2016) 8 एससीसी 471 क े मामले म सव च यायालय क े फ ै सले क े संदभ म अपने मामले पर पुन वचार क े लए नयुि त ा धकरण क े सम एक व तृत अ यावेदन दायर करने का नदश दया। नयुि त ा धकरण को उ त नणय क े संदभ म एक तकपूण और बोलने वाले आदेश वारा या चकाकता क े त न ध व पर नणय लेने का नदश दया। कमांडट सी. आई. एस. एफ. इकाई सी. एस. आई. ए., मुंबई ने अवतार संह (उपरो त) क े मामले म फ ै सले क े आलोक म या चकाकता क े त न ध व पर वचार करने क े बाद कहा क सी. आई. एस. एफ. भारत संघ का एक सश बल है, जो संवेदनशील े म तैनात है, इस लए बल क े क मय को उ चतम म का अनुशासन बनाए रखने क आव यकता है, और गंभीर अपराध म या चकाकता क भागीदार ने उ ह ऐसे बल म नयुि त से वं चत कर दया और इस लए, उ ह सी. आई. एस. एफ. म कां टेबल/जी. डी. क े पद क े लए नयुि त क े लए उपयु त नह ं पाया गया।

4. या चकाकता ने फर से एक रट या चका सं या 17475/2018 दायर क थी िजसम उ त आदेश दनांक 14.05.2018 पर आ ेप लगाया गया था। एकल पीठ ने फर से उ त आदेश को दर कनार कर दया और रट या चका को अनुम त द िजसम तवाद को दनां कत 17.02.2021 क े आदेश क े अनुसार सभी प रणामी लाभ क े साथ या चकाकता को सेवा म बहाल करने का नदश दया गया था। तवाद ने सगल बच वारा पा रत आदेश क े खलाफ ख ड पीठ क े सम वशेष रट अपील दायर क, िजसे ख ड पीठ वारा ववा दत आदेश क े मा यम से अनुम त द गई।

5. या चकाकता क ओर से पेश व वान अ धव ता सु ी आ सफा रा शद मीर ने जोरदार ढंग से कहा क या चकाकता एक आपरा धक मामले म शा मल था जब वह मुि कल से लगभग 19 वष का था और उ त मामले क े प रणाम व प प क े बीच समझौता हुआ था। उनक े अनुसार, उ त समझौते क े आधार पर, नचल अदालत ने 21.11.2007 पर मामला बंद कर दया था, और या चकाकता को 03.11.2007 पर CISF म कां टेबल क े प म नयु त कया गया था। इस यायालय और अ य उ च यायालय क े व भ न नणय पर भरोसा करते हुए, उ ह ने आगे कहा क अपराध क कृ त को देखते हुए िजसम या चकाकता क थत प से शा मल था, उ त मामले वचाराधीनता होने का खुलासा न करने क े आधार पर सेवा से हटाने को एक गंभीर कदाचार नह ं कहा जा सकता है, िजसम सेवा से हटाने क कठोर सजा शा मल है। उ च यायालय क ख ड पीठ, या चकाकता क े वक ल क दल ल चलाती है, उसे एकल पीठ वारा पा रत सु वचा रत आदेश म ह त ेप नह ं करना चा हए था, िजसम या चकाकता को तु छ कृ त क े मामले म शा मल पाया गया था। उनक े अनुसार, भले ह या चकाकता वारा च र माण प दा खल करने क े समय च र माण प दा खल करने क े समय जानबूझकर दमन कया गया था, ले कन उनक उ को देखते हुए और इस त य पर वचार करते हुए क या चकाकता ने अपनी गलती वीकार कर ल थी, तवाद वारा एक उदार ि टकोण अपनाया जाना चा हए था।

6. तवाद क ओर से पेश व र ठ अ धव ता ी आर. बाला सु म यन ने हालां क, अदालत को सी. आई. एस. एफ. नयम 2001 म ले जाते हुए, सी. आई. एस. एफ. स हत सभी क य सश पु लस बल (सी. ए. पी. एफ.) पर लागू होने वाले उन उ मीदवार क े संबंध म नी तगत दशा नदश क े संबंध म लागू होने वाले प रप, िजनक े खलाफ ओ. एम. दनां कत ओ. एम. वारा आपरा धक मामले लं बत ह, सूचना क े दमन से नपटने या स यापन प म गलत जानकार जमा करने क े लए, तुत कया क सी. आई. एस. एफ. बहुत अनुशा सत पु लस बल है और कां टेबल का पद बहुत संवेदनशील पद है, या चकाकता िजसे नयुि त क े समय आपरा धक मामले म अपनी सं ल तता क े भौ तक त य को दबाने क े घोर कदाचार का दोषी पाया गया था, सेवा म जार नह ं रखा जा सकता था, और ख ड पीठ ने इन त य पर सह वचार कया है।

7. त काल मामले म, दोन प क े व वान वक ल ने अवतार संह (उपरो त) मामले म इस यायालय क े फ ै सले पर भरोसा कया है िजसम तीन- यायाधीश क पीठ ने सरकार सेवा म नयु त कए जाने वाले यि त क े च र और पूववृ क े स यापन क आव यकता पर जोर दया और इस यायालय क े व भ न पछले फ ै सल पर वचार करने क े बाद, पैरा 38 म स धांत का सारांश दया था जो न नानुसार हैः "38. हमने व भ न नणय को देखा है और जहां तक संभव हो उ ह समझाने और सामंज य था पत करने का यास कया है। उपरो त चचा को यान म रखते हुए, हम अपने न कष का सारांश इस कार देते ह◌ः

38.1. एक उ मीदवार वारा नयो ता को द गई जानकार, चाहे वह सेवा म वेश करने से पहले हो या बाद म, दोषी ठहराए जाने, दोषमुि त जाने या गर तार, या कसी आपरा धक मामले वचाराधीनता होने क े बारे म, सह होनी चा हए और आव यक जानकार का कोई दमन या गलत उ लेख नह ं होना चा हए। 38.[2] गलत जानकार देने क े लए सेवाओं क समाि त या उ मीदवार को र द करने का आदेश पा रत करते समय, नयो ता ऐसी जानकार देते समय मामले क वशेष प रि थ तय, य द कोई हो, पर यान दे सकता है।

38.3. नयो ता नणय लेते समय कमचार पर लागू सरकार आदेश / नदश / नयम को यान म रखेगा।

38.4. य द कसी आपरा धक मामले म सं ल तता का दमन या झूठ जानकार है, जहां आवेदन/स यापन प भरने से पहले ह दोष स ध या दोषमुि त दज क जा चुक है और ऐसा त य बाद म नयो ता क े सं ान म आता है, तो मामले क े लए उपयु त न न ल खत म से कोई भी उपाय अपनाया जा सकता हैः 38.4.1. तु छ कृ त क े मामले म िजसम दोष स ध दज क गई थी, जैसे क कम उ म नारे लगाना या एक छोटे से अपराध क े लए िजसका खुलासा होने पर कोई पदधार वचाराधीन पद क े लए अयो य नह ं होता, नयो ता अपने ववेकानुसार, त य या झूठ जानकार क े इस तरह क े दमन को नजरअंदाज कर सकता है।38. 4. 2. जहां मामूल कृ त क े मामले म दोष स ध दज क गई है, नयो ता कमचार क उ मीदवार को र द कर सकता है या उसक सेवाओं को समा त कर सकता है। 38.4.3. य द तकनीक आधार पर नै तक अधमता या जघ य/गंभीर कृ त क े अपराध से जुड़े मामले म बर होना पहले ह दज कया जा चुका है और यह नद ष दोषमुि त का मामला नह ं है, या उ चत संदेह का लाभ दया गया है, तो नयो ता पूववृ क े प म उपल ध सभी ासं गक त य पर वचार कर सकता है, और कमचार क े बने रहने क े बारे म उ चत नणय ले सकता है। 38.[5] ऐसे मामले म जहां कमचार ने एक समा त आपरा धक मामले क स चाई से घोषणा क है, नयो ता को अभी भी पूववृ पर वचार करने का अ धकार है, और उ मीदवार को नयु त करने क े लए मजबूर नह ं कया जा सकता है।

38.6. य द तु छ कृ त क े आपरा धक मामले वचाराधीनता होने क े संबंध म च र स यापन प म त य को स चाई से घो षत कया गया है, तो नयो ता, मामले क े त य और प रि थ तय म, अपने ववेक से, ऐसे मामले क े नणय क े अधीन उ मीदवार क नयुि त कर सकता है। 38.[7] कई लं बत मामल क े संबंध म जानबूझकर त य को दबाने क े मामले म ऐसी झूठ जानकार अपने आप म मह वपूण हो जाएगी और एक नयो ता उ मीदवार को र द करने या सेवाओं को समा त करने क े लए उ चत आदेश पा रत कर सकता है य क एक यि त क नयुि त िजसक े खलाफ कई आपरा धक मामले लं बत थे, उ चत नह ं हो सकता है।

38.8. य द आपरा धक मामला लं बत था ले कन फॉम भरने क े समय उ मीदवार को इसक जानकार नह ं थी, तो भी इसका तक ू ल भाव पड़ सकता है और नयुि त ा धकरण अपराध क गंभीरता पर वचार करने क े बाद नणय लेगा। 38.[9] य द कमचार क सेवा म पुि ट हो जाती है, तो दबाव डालने या स यापन प म गलत जानकार जमा करने क े आधार पर बखा तगी/हटाने या बखा तगी का आदेश पा रत करने से पहले वभागीय जांच करना आव यक होगा।

38.10 दमन या गलत जानकार का नधारण करने क े लए माणन/स यापन प व श ट होना चा हए, अ प ट नह ं। क े वल ऐसी जानकार का खुलासा कया जाना चा हए िजसका वशेष प से उ लेख कया जाना आव यक था। य द माँगी गई ले कन ासं गक जानकार नयो ता क े ान म आती है तो फटनेस क े सवाल को संबो धत करते समय उसी पर व तु न ठ तर क े से वचार कया जा सकता है। हालाँ क, ऐसे मामल म दमन या गलत जानकार तुत करने क े आधार पर कारवाई नह ं क जा सकती है य क इस त य क े बारे म पूछा भी नह ं गया था।

38.11 इससे पहले क कसी यि त को दमनकार स चाई या सुझाव देने वाले झूठ का दोषी ठहराया जाए, त य का ान उसक े लए िज मेदार होना चा हए।

8. यह यान दया जा सकता है क तीन- यायाधीश क पीठ वारा अवतार संह क े मामले म नधा रत मागदशक स धांत क े बाद भी, इस यायालय क व भ न पीठ वारा अलग-अलग वचार य त कए गए थे। इस लए, यह यायालय सतीश चं यादव बनाम भारत संघ व अ य (2022) एससीसी ऑनलाइन एससी 1300, क े मामल म लए गए असंगत वचार को यान म रखने क े बाद, भारत संघ व अ य बनाम मेथु मेदा (2022) 1 एससीसी 1; भारत संघ बनाम दल प क ु मार म लक (2022) 6 क े ल 108; पवन क ु मार बनाम भारत संघ व अ य (2022) एससीसी ऑनलाइन एससी 532; राज थान रा य व युत सारण नगम ल मटेड बनाम अ य बनाम अ नल कांव रया (2021) 10 एससीसी 136; मोह मद इमरान बनाम महारा रा य बनाम अ य (2019) 17 एस. सी. सी. 696; आ द, ने आगे न न ल खत स धांत को नधा रत कयाः "89. इस यायालय वारा समय क अव ध म दए गए व भ न नणय का उ लेख करने और उन पर गौर करने का एकमा कारण यह है क इस वषय को नयं त करने वाले कानून क े स धांत थोड़े असंगत ह। अवतार संह (उपरो त) क े मामले म वृहद पीठ 9 क े फ ै सले क े बाद भी व भ न अदालत ने अलग-अलग स धांत तपा दत कए ह।

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90. ऐसी प रि थ तय म, हमने कानून क े यापक स धांत को सूचीब ध करने क े लए क ु छ अ यास कया, िज ह वतमान कृ त क े मुकदम पर लागू कया जाना चा हए। स धांत इस कार ह◌ः क) येक मामले क संबं धत लोक नयो ता वारा, अपने ना मत अ धका रय वारा से, पूर तरह से जांच क जानी चा हए- वशेष प से, पु लस बल क े लए भत क े मामले म, जो यव था बनाए रखने और अराजकता से नपटने क े आदे त य क े तहत ह, य क जनता म व वास पैदा आदेशने क उनक यो यता समाज क सुर ा क े लए एक सुर ा कवच है। [राज क ु मार (ऊपर) देख] ख) ऐसे मामले म भी जहां कमचार ने एक समा त आपरा धक मामले क स चाई और सह घोषणा क है, नयो ता को अभी भी पूववृ पर वचार करने का अ धकार है, और उ मीदवार को नयु त करने क े लए मजबूर नह ं कया जा सकता है। आपरा धक मामले म दोषमुि त से उ मीदवार को वतः ह पद पर नयुि त का अ धकार नह ं मलेगा। यह अभी भी नयो ता क े लए खुला रहेगा क वह पूववृ य पर वचार करे और जांच करे क या संबं धत उ मीदवार पद पर नयुि त क े लए उपयु त और उपयु त है। ग) गर तार, अ भयोजन, दोष स ध आ द से संबं धत भौ तक जानकार को छपाने और स यापन प म गलत बयान देने का कमचार क े च र, आचरण और पूववृ पर प ट भाव पड़ता है। य द यह पाया जाता है क कमचार ने अपनी यो यता या पद क े लए उपयु तता को भा वत करने वाले मामल क े संबंध म गलत जानकार द थी, तो उसे सेवा से बखा त कया जा सकता है। घ) युवाओं, क रयर क संभावनाओं और उ मीदवार क उ क े बारे म सामा यीकरण जो अपरा धय क े आचरण को मा करने का कारण बनते ह, या यक फ ै सले म शा मल नह ं होने चा हए और इससे बचा जाना चा हए। ङ) यायालय को इस बात क जांच करनी चा हए क या संबं धत ा धकरण, िजसक कारवाई को चुनौती द जा रह है, ने दुभावनापूण काय कया है। च) या ा धकरण क े नणय म प पात का कोई त व है? छ) या संबं धत ा धकरण वारा अपनाई गई जांच क या न प और उ चत थी?"

9. अवतार संह (ऊपर) और सतीश चं यादव (ऊपर) क े मामले म नधा रत मागदशक स धांत को यान म रखते हुए, इस यायालय को यह अ भ नधा रत करने म कोई संकोच नह ं है क उ च यायालय क एकल पीठ ने तवाद - ा धकरण वारा पा रत आदेश म ह त ेप करने म ु ट क थी। अवतार संह क े मामले म नणय पर वचार करने क े बाद यथ - ा धकरण ने या चकाकता क सेवाओं को समा त कर दया था, िजसम कहा गया था क या चकाकता को सी. आई. एस. एफ. म नयु त कया गया था, बल म उनक े नामांकन क े समय उनक े खलाफ एक आपरा धक मामला लं बत था, ले कन उ ह ने इसका खुलासा नह ं कया और त य को जानबूझकर दबाया गया था जो एक भयावह प रि थ त थी। यह भी माना गया क सी. आई. एस. एफ. भारत संघ का एक सश बल होने क े नाते, हवाई अ ड, बंदरगाह, परमाणु ऊजा वभाग, अंत र वभाग, मे ो, बजल और इ पात जैसे संवेदनशील े म आंत रक सुर ा कत य आ द क े लए तैनात है और इस लए, बल क े क मय को उ चतम म का अनुशासन बनाए रखने क आव यकता है और ऐसे गंभीर अपराध म 11 या चकाकताओं क भागीदार ने उ ह नयुि त से वं चत कर दया। यथ - ा धकरण क े इस तरह क े सु वचा रत और सु वचा रत नणय म सं वधान क े अनु छेद 226 क े तहत अपनी शि तय का योग करते हुए एकल पीठ वारा ह त ेप नह ं कया जाना चा हए था, वशेष प से जब दुभावनापूण या ाकृ तक याय क े नयम का पालन न करने या वैधा नक नयम क े भंग का कोई आरोप यथ अ धका रय क े खलाफ नह ं लगाया गया था।

10. उड़ीसा रा य और अ य बनाम ब याभूषण महापा ा आकाशवाणी 1963 एससी 779 क े मामले म सं वधान पीठ ने 1963 म कहा था क था पत दुराचार क गंभीरता को यान म रखते हुए, दंड देने वाले ा धकरण क े पास सजा देने क शि त और अ धकार े था। अनु छेद 226 क े तहत उ च यायालय वारा समी ा क े लए खुला नह ं था। बी. सी. चतुवद बनाम भारत संघ और अ य (1995) 6 एस. सी. सी. 749 क े मामले म तीन- यायाधीश क पीठ ने यह भी माना था क या यक समी ा कसी नणय क अपील नह ं है, बि क नणय लेने क े तर क े क समी ा है। या यक समी ा क शि त यह सु नि चत करने क े लए है क यि त को उ चत यवहार ा त हो और यह सु नि चत करने क े लए नह ं क ा धकरण िजस न कष पर पहुंचता है वह अदालत क नजर म आव यक प से सह है। जब कसी लोक सेवक वारा 12 कदाचार क े आरोप क जांच क जाती है, तो यायालय या याया धकरण क े वल यह नधा रत करने क सीमा तक संबं धत होगा क या जांच एक स म अ धकार वारा क गई थी या या ाकृ तक याय और वैधा नक नयम का पालन कया गया था।

11. ओम क ु मार और अ य बनाम भारत संघ 10 म इस यायालय ने वेडनसबर स धांत और आनुपा तकता क े स धांत पर वचार करने क े बाद यह भी नणय दया था क अनुशासना मक मामल म सजा क मा ा का सवाल मु य प से अनुशासना मक ा धकरण क े लए है, और सं वधान क े अनु छेद 226 क े तहत उ च यायालय या शास नक याया धकरण का अ धकार े सी मत है और "वेडनसबर स धांत" 11 क े प म जाने जाने वाले स ध स धांत म से एक या दूसरे क यो यता तक सी मत है, अथात ् या आदेश कानून क े वपर त था, या या ासं गक कारक पर वचार नह ं कया गया था, या या अ ासं गक कारक पर वचार कया गया था या या नणय ऐसा था िजसे कोई उ चत यि त नह ं ले सकता था।

12. पुनः, उप महा बंधक (अपील य ा धकरण) व अ य बनाम अजय क ु मार ीवा तव (2001) 2 एससीसी 386 क े मामले म तीन यायाधीश क पीठ ने संवैधा नक यायालय वारा या यक समी ा क शि त को सी मत करते हुए न नानुसार अ भ नधा रत कयाः 11 एसो सएटेड ो वं शयल प चर हाउस ल मटेड बनाम वे सबर कॉप रेशन [1948] 1 KB 22312 (2021) 2 एससीसी 612 "24. इस कार यह तय कया जाता है क संवैधा नक यायालय क या यक समी ा क शि त नणय लेने क या का मू यांकन है न क नणय क े गुण-दोष। यह यवहार म न प ता सु नि चत करने क े लए है न क न कष क न प ता सु नि चत करने क े लए। यायालय/ याया धकरण अपचार क े खलाफ आयोिजत कायवाह म ह त ेप कर सकता है य द यह कसी भी तरह से ाकृ तक याय क े नयम क े साथ असंगत है या जांच क े तर क े को नधा रत करने वाले वैधा नक नयम का उ लंघन है या जहां अनुशासना मक ा धकरण वारा न कष या न कष बना कसी सबूत क े आधा रत है। य द न कष या न कष ऐसा होता क कोई भी उ चत यि त कभी नह ं पहुंचता या जहां अनुशासना मक ा धकरण वारा पहुंचे गए सा य पर वचार करने पर न कष वकृ त होते ह या रकॉड क े सामने या कसी भी सबूत क े आधार पर पेटट ु ट से पी ड़त होते ह, तो सर शयोरेराई का एक रट जार कया जा सकता है। सं ेप म, या यक समी ा का दायरा त य क े प म ा धकरण क े नणय क शु धता या तकसंगतता क जांच तक नह ं बढ़ाया जा सकता है।

25.

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26.

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27.

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28. सं वधान क े अनु छेद 226 या अनु छेद 136 क े तहत या यक समी ा क े अपने अ धकार े का योग करते हुए संवैधा नक यायालय वभागीय जांच कायवाह म आए त य क े न कष म ह त ेप नह ं करेगा, सवाय दुभावना या वकृ त क े मामले क े, यानी जहां कसी न कष का समथन करने क े लए कोई सबूत नह ं है या जहां कोई न कष ऐसा है क कोई भी यि त उ चत प से और न प ता क े साथ उन न कष पर नह ं पहुंच सकता है और जब तक वभागीय ा धकरण वारा कए गए न कष का समथन करने क े लए क ु छ सबूत ह, तब तक इसे बनाए रखना होगा।"

13. पूव-व णत कानूनी ि थ त को यान म रखते हुए, हमार राय है क उ च यायालय क ख ड पीठ ने एकल पीठ वारा पा रत आदेश को सह ढंग से र द कर दया था, िजसने या चकाकता क े खलाफ तवाद अ धका रय वारा पा रत हटाने क े आदेश म गलत तर क े से ह त ेप कया था। या चकाकता को सी. आई. एस. एफ. जैसे अनुशा सत बल म वेश करने क सीमा पर घोर कदाचार करते हुए पाया गया है, और तवाद अ धका रय ने कानून स यक या का पालन करने क े बाद और दुभावना से े रत हुए बना उसे सेवा से हटाने का आदेश पा रत कया है, अदालत सं वधान क े अनु छेद 136 क े तहत अपने सी मत अ धकार े का योग करने क े लए इ छ ु क नह ं है।

14. इस मामले को यान म रखते हुए एसएलपी को खा रज कर दया जाता है। याया धप त [अजय र तोगी] याया धप त [बेला एम. वेद ] नई द ल 16.01.2023 यह अनुवाद आ ट फ शयल इंटे लजस टूल 'सुवास'क े ज रए अनुवादक क सहायता से कया गया है। अ वीकरण: यह नणय प कार को उसक भाषा म समझाने क े लए सी मत उपयोग क े लए थानीय भाषा म अनुवा दत कया गया है और कसी अ य उ दे य क े लए इसका उपयोग नह ं कया जा सकता है। सभी यावहा रक और आ धका रक उ दे य क े लए, नणय का अं ेजी सं करण मा णक होगा और न पादन और काया वयन क े उ दे य से अं ेजी सं करण ह मा य होगा ।