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भारतीय सव�च् न्यायाल
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं 365/2023
(@ �व.अ.या. (�स) सं. 1503/2023)
�दल्ल �वकास प्रा�धक
(@डायर� सं. 7125/2022) ... अपीलाथ�(गण)
बनाम
श्याम व अन् ... प्रत्(गण)
�नणर्
JUDGMENT
1. नई �दल्ल� िस्थत �दल उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 12174/2015 म� पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश �दनां�कत 20.12.2017 से असंतुष् तथा व्य�थत महसू करने पर, िजसक े द्वार उच् न्यायाल ने प्रत्यथ�. 1 इसम� – मूल �रट या�चकाकतार् द्वारा दायक�थत �रट या�चका को अनुम�त प्रदान एम. आर. शाह, न्य. है तथा घोषणा क� है �क प्रश्नगत भ क े संबंध म� अ�धग्र को भू�म अजर्, पुनवार्सन और पुनव्यर्वस्थापन म� उ�चत प्र�त पारद�शर्ता का अ�धकार अ�ध�नयम 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद अ�ध�नयम, 2013 क े रू म� संद�भर् �कया गया है) क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाएगा, �दल्ल �वकास प्रा�धक ने वतर्मा अपील दायर क� है।
2. उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश से यह प्रत होता है �क यह उच् न्यायाल क े सम� एलएसी क� ओर से �व�शष् मामला था और एलएसी द्वार दायर जवाबी शपथपत म� ऐसा कहा गया था �क भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 4 क े तहत एक अ�धसूचना �दनांक 23.09.1989 को �दल्ल क े �नयोिजत �वकास क े �लए, गांव घ�डा गुजरान खादर म� आने वाल� भू�म क े अ�धग्रहण के � जार� क� गई थी। वह अ�ध�नणर् �दनांक 19.06.1992 को घो�षत �कया गया था और �वषयगत भू�म का वास्त�व �रक् भौ�तक कब्ज �दनांक 21.03.2007 को �लया गया था, िजसम� से मूल या�चकाकतार मौक े पर 1/12 भाग का दावा कर रहा है और मौक े पर कब्ज कायर्वाह तैयार करने क े बाद डीडीए को स�प द� गई थी। यह भी कहा गया �क अ�भ�ल�खत स्वाम/वा�रस कभी भी कोई मुआवजा प्रा करने क े �लए आगे नह�ं आए और इस�लए इसका भुगतान नह�ं हुआ है। हालां�क, इसक े बाद मूल �रट या�चकाकतार क े स्वा�मत और हक क े सवाल का फ ै सला �कए �बना और उसे अ�न�णर् छोड़ कर और �दनांक 23.09.2014 को �न�णर् 2014 क� �रट या�चका (�स) संख्य 1393 म� �ान�द �संह व अन् बनाम भारत संघ व अन् क े मामले म� अपने पहले क े फ ै सले पर भरोसा करते हुए, उच् न्यायाल ने आ�े�पत �नणर् और आदेश पा�रत �कया है और अ�धग्र क� कायर्वाह को इस आधार पर व्यपग घो�षत �कया है �क मूल �रट या�चकाकतार को मुआवजा नह�ं �दया गया था। 2.[1] तथा�प, इस पर ध्यान देने क� आवश्यकता है �ान�द �संह (सुप्) का �नणर्य करते समय उच्च न्यायालय पुणे नगर �नगम व अन् बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक� व अन्, (2014) 3 एससीसी 183 क े मामले म� इस न्यायाल क े पहले क े �नणर्य प भरोसा �कया है। यह ध्यान म� रखा जाए �क पुणे नगर �नगम व अन् (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल का �नणर् (2020) 8 एससीसी 129 म� प्रका� इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम मनोहरलाल व अन् क े मामले म� इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ द्वार खा�रज कर �दया गया है। अनुछेद 365 और 366 म� �नम्न�ल�ख रूप स मत व्यक �कया और अ�भ�नधार्�र �कया गया है - “365. प�रणामतः, पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] म� �दए गए �नणर्य क एतद द्वार पलट �दया जाता है तथा अन् सभी �नणर्, िजनम� पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] का अनुसरण �कया गया है, को भी पलट �दया जाता है। श् बालाजी नगर आवासीय संगठन [श् बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम त�मल नाडु राज्, (2015) 3 एस. सी. सी. 353] क े �नणर्य वाल मामले म� यह नह�ं कहा जा सकता �क यह �नणर् अच्छ �व�ध अ�धक�थत कर रहा है, उसे उलट �दया गया है और इसका अनुसरण करते अन् �नणर् भी पलटे जाते ह�। इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम शैलेन् [(2018) 3 एससीसी 412] क े मामले म�, धारा 24(2) क े परंतुक क े संबंध क े पहलू म� और क्य 'या' को “न तो” क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए अथवा 'या' 'क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए को �वचार क े �लए नह�ं रखा गया था। इस�लए, यह �नणर् भी वतर्मा �नणर् म� चचार क े आलोक म� मान् नह�ं हो सकता है।
366. उपयुर्क चचार को ध्या म� रखते हुए, हम प्रश का �नम्न�ल�ख उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1)(क) क े प्रावधा क े अंतगर् य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1- 2014 को पंचाट नह�ं �दया जाता है तो कायर्वाह म� कोई व्यपगमन नह� होगा। मुआवजे का �नधार्र 2013 क े तहत �कया जाना होगा। 366.[2] य�द पंचाट न्यायाल क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस् नह�ं �कया गया हो।
366.3. धारा 24(2) म� कब्ज और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्र क� कारर्वा का व्यपगमनउस िस्थ� म� समझा जाता है, जब उक् अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्र क े कारण भू�म का कब्ज नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द म�, य�द कब्ज ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्ज नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है।
366.4. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख् भाग म� "भुगतान" शब् म� न्यायाल म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावध है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यत पूर� नह�ं क� गई है, तो उक् अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्या �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायाल म�) क े प�रणामस्वर भू�म अ�धग्र क� कायर्वाह का व्यपगमननह�ं होता है। पांच वषर या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ� म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।
366.5. य�द �कसी व्यिक को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावध क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतं नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायाल म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र का व्यपगम हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यत धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रद करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�न अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र क� प्र�क का व्यपगम हो गया था।
366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तु को धारा 24(2) क े भाग क े रू म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।
366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता है, कब्ज लेने का तर�का पंचनामा/�ापन प्रस् करने क े द्वार है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्ज लेने पर अ�ध�नणर् पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकर का प्रावध नह�ं है, क्य�� एक बार कब्ज लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।
366.8. कायर्वा�हय� के समझे गए व्यपगमन क प्रस्ता�वत करने वा धारा 24(2) क े प्रावध उस िस्थ� म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धका क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�ब एक कायर्वाह� म� प�धकार�गण अपनी �निष्क्रयता कारण 2013 क े लागू होने से पूवर पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्ज लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायाल द्वार पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत क� अव�ध को पांच वषर क� गणना म� न जोड़ा जाए।
366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्र क� पूणर हो चुक� कायर्वाह क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन् नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार् 1-1- 2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद् दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर्हो चुक� कायर्वाह को �फर से शुरू करत है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्र को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेज म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है।
3. इंदौर �वकास प्रा�धण (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल द्वार अ�धक�थत कानून को प्रस् मामले क े तथ्य पर लागू करना और �वशेष रू से जब प्रश् भू�म का कब्ज पंचनामा बनाकर और कब्ज क� कायर्वाह तैयार करक े �लया गया था तथा इसे डीडीए को स�प �दया गया था और यह �क मूल �रट या�चकाकतार अ�भ�ल�खत स्वाम नह�ं था और इस�लए प्रासं� समय पर उसे �कसी प्रका का मुआवजा देने का कोई सवाल ह� नह�ं था, उच् न्यायाल द्वार यह घो�षत करते हुए पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को व्यपग माना गया है, पोषणीय नह�ं है।
4. इस स्त पर यह भी उल्ले �कया जाना आवश्य है �क मूल �रट या�चकाकतार प्रश् भू�म म� 1/12व� �हस्स का दावा कर रहा था। तथा�प, मूल �रट या�चकाकतार क े स्वा�मत और हक का �नणर् �कए �बना उच् न्यायाल ने प्रथ� सं. 1 इसम� – �रट या�चकाकतार द्वार दा�खल �रट या�चका को स्वीका कर �लया और घो�षत �कया �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र व्यपग हो गया है। प्रश् भू�म म� मूल �रट या�चकाकतार क े �कसी भी स्वा�मत और हक का �नणर् करते समय, उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका पर �वचार �कया जाना न्यायसंग नह�ं था। �कसी भी �रट या�चका पर �वचार करने क े �लए स्वा�मत और हक को पहले स्था�प और सा�बत करना होता है और उसक े बाद ह� स्वा�मत और हक का दावा करने वाले व्यिक को अ�धग्र/अ�धग्रहण के व्यप क� कायर्वाह को चुनौती देने वाल� �रट या�चका दायर करने क� अनुम�त द� जा सकती है। इन प�रिस्थ�तय म� भी उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश पोषणीय नह�ं है।
5. उपरोक् को ध्या म� रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण से वतर्मा अपील सफल होती है। उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश को एतद् द्वा रद् व अपास् �कया जाता है। नतीजतन, प्रथ� सं. 1 इसम� - मूल �रट या�चकाकतार द्वार उच् न्यायाल क े सम� दायर मूल �रट या�चका खा�रज क� जाती है। वतर्मा अपील स्वीक ृत क� जातीहै। कोई जुमार्नानह�ं।.............................न्य. [ एम. आर. शाह ].............................न्य. [ सी. ट�. र�वक ु मार ] नई �दल्ल; 20 जनवर�, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।