Delhi Vikas Pradhikaran v. Shyam

Delhi High Court · 20 Jan 2023
M. R. Shah; C. T. Ravikumar
Civil Appeal No 365/2023 (@ W.A. (S) No. 1503/2023)
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that acquisition under the 1894 Act does not lapse under Section 24(2) of the 2013 Act if possession was taken, even if compensation was unpaid, and set aside the High Court's order declaring lapse.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च् न्यायाल
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं 365/2023
(@ �व.अ.या. (�स) सं. 1503/2023)
�दल्ल �वकास प्रा�धक
(@डायर� सं. 7125/2022) ... अपीलाथ�(गण)
बनाम
श्याम व अन् ... प्रत्(गण)
�नणर्
JUDGMENT

1. नई �दल्ल� िस्थत �दल उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 12174/2015 म� पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश �दनां�कत 20.12.2017 से असंतुष् तथा व्य�थत महसू करने पर, िजसक े द्वार उच् न्यायाल ने प्रत्यथ�. 1 इसम� – मूल �रट या�चकाकतार् द्वारा दायक�थत �रट या�चका को अनुम�त प्रदान एम. आर. शाह, न्य. है तथा घोषणा क� है �क प्रश्नगत भ क े संबंध म� अ�धग्र को भू�म अजर्, पुनवार्सन और पुनव्यर्वस्थापन म� उ�चत प्र�त पारद�शर्ता का अ�धकार अ�ध�नयम 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद अ�ध�नयम, 2013 क े रू म� संद�भर् �कया गया है) क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाएगा, �दल्ल �वकास प्रा�धक ने वतर्मा अपील दायर क� है।

2. उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश से यह प्रत होता है �क यह उच् न्यायाल क े सम� एलएसी क� ओर से �व�शष् मामला था और एलएसी द्वार दायर जवाबी शपथपत म� ऐसा कहा गया था �क भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 4 क े तहत एक अ�धसूचना �दनांक 23.09.1989 को �दल्ल क े �नयोिजत �वकास क े �लए, गांव घ�डा गुजरान खादर म� आने वाल� भू�म क े अ�धग्रहण के � जार� क� गई थी। वह अ�ध�नणर् �दनांक 19.06.1992 को घो�षत �कया गया था और �वषयगत भू�म का वास्त�व �रक् भौ�तक कब्ज �दनांक 21.03.2007 को �लया गया था, िजसम� से मूल या�चकाकतार मौक े पर 1/12 भाग का दावा कर रहा है और मौक े पर कब्ज कायर्वाह तैयार करने क े बाद डीडीए को स�प द� गई थी। यह भी कहा गया �क अ�भ�ल�खत स्वाम/वा�रस कभी भी कोई मुआवजा प्रा करने क े �लए आगे नह�ं आए और इस�लए इसका भुगतान नह�ं हुआ है। हालां�क, इसक े बाद मूल �रट या�चकाकतार क े स्वा�मत और हक क े सवाल का फ ै सला �कए �बना और उसे अ�न�णर् छोड़ कर और �दनांक 23.09.2014 को �न�णर् 2014 क� �रट या�चका (�स) संख्य 1393 म� �ान�द �संह व अन् बनाम भारत संघ व अन् क े मामले म� अपने पहले क े फ ै सले पर भरोसा करते हुए, उच् न्यायाल ने आ�े�पत �नणर् और आदेश पा�रत �कया है और अ�धग्र क� कायर्वाह को इस आधार पर व्यपग घो�षत �कया है �क मूल �रट या�चकाकतार को मुआवजा नह�ं �दया गया था। 2.[1] तथा�प, इस पर ध्यान देने क� आवश्यकता है �ान�द �संह (सुप्) का �नणर्य करते समय उच्च न्यायालय पुणे नगर �नगम व अन् बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक� व अन्, (2014) 3 एससीसी 183 क े मामले म� इस न्यायाल क े पहले क े �नणर्य प भरोसा �कया है। यह ध्यान म� रखा जाए �क पुणे नगर �नगम व अन् (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल का �नणर् (2020) 8 एससीसी 129 म� प्रका� इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम मनोहरलाल व अन् क े मामले म� इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ द्वार खा�रज कर �दया गया है। अनुछेद 365 और 366 म� �नम्न�ल�ख रूप स मत व्यक �कया और अ�भ�नधार्�र �कया गया है - “365. प�रणामतः, पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] म� �दए गए �नणर्य क एतद द्वार पलट �दया जाता है तथा अन् सभी �नणर्, िजनम� पुणे नगर �नगम [पुणे नगर �नगम बनाम हरकचंद �म�स�रमल सोलंक�, (2014) 3 एससीसी 183] का अनुसरण �कया गया है, को भी पलट �दया जाता है। श् बालाजी नगर आवासीय संगठन [श् बालाजी नगर आवासीय संगठन बनाम त�मल नाडु राज्, (2015) 3 एस. सी. सी. 353] क े �नणर्य वाल मामले म� यह नह�ं कहा जा सकता �क यह �नणर् अच्छ �व�ध अ�धक�थत कर रहा है, उसे उलट �दया गया है और इसका अनुसरण करते अन् �नणर् भी पलटे जाते ह�। इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम शैलेन् [(2018) 3 एससीसी 412] क े मामले म�, धारा 24(2) क े परंतुक क े संबंध क े पहलू म� और क्य 'या' को “न तो” क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए अथवा 'या' 'क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए को �वचार क े �लए नह�ं रखा गया था। इस�लए, यह �नणर् भी वतर्मा �नणर् म� चचार क े आलोक म� मान् नह�ं हो सकता है।

366. उपयुर्क चचार को ध्या म� रखते हुए, हम प्रश का �नम्न�ल�ख उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1)(क) क े प्रावधा क े अंतगर् य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1- 2014 को पंचाट नह�ं �दया जाता है तो कायर्वाह म� कोई व्यपगमन नह� होगा। मुआवजे का �नधार्र 2013 क े तहत �कया जाना होगा। 366.[2] य�द पंचाट न्यायाल क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस् नह�ं �कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म� कब्ज और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्र क� कारर्वा का व्यपगमनउस िस्थ� म� समझा जाता है, जब उक् अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्र क े कारण भू�म का कब्ज नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द म�, य�द कब्ज ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्ज नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है।

366.4. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख् भाग म� "भुगतान" शब् म� न्यायाल म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावध है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यत पूर� नह�ं क� गई है, तो उक् अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्या �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायाल म�) क े प�रणामस्वर भू�म अ�धग्र क� कायर्वाह का व्यपगमननह�ं होता है। पांच वषर या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ� म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।

366.5. य�द �कसी व्यिक को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावध क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतं नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायाल म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र का व्यपगम हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यत धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रद करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�न अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र क� प्र�क का व्यपगम हो गया था।

366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तु को धारा 24(2) क े भाग क े रू म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।

366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता है, कब्ज लेने का तर�का पंचनामा/�ापन प्रस् करने क े द्वार है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्ज लेने पर अ�ध�नणर् पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकर का प्रावध नह�ं है, क्य�� एक बार कब्ज लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।

366.8. कायर्वा�हय� के समझे गए व्यपगमन क प्रस्ता�वत करने वा धारा 24(2) क े प्रावध उस िस्थ� म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धका क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�ब एक कायर्वाह� म� प�धकार�गण अपनी �निष्क्रयता कारण 2013 क े लागू होने से पूवर पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्ज लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायाल द्वार पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत क� अव�ध को पांच वषर क� गणना म� न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्र क� पूणर हो चुक� कायर्वाह क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन् नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार् 1-1- 2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद् दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर्हो चुक� कायर्वाह को �फर से शुरू करत है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्र को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेज म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है।

3. इंदौर �वकास प्रा�धण (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल द्वार अ�धक�थत कानून को प्रस् मामले क े तथ्य पर लागू करना और �वशेष रू से जब प्रश् भू�म का कब्ज पंचनामा बनाकर और कब्ज क� कायर्वाह तैयार करक े �लया गया था तथा इसे डीडीए को स�प �दया गया था और यह �क मूल �रट या�चकाकतार अ�भ�ल�खत स्वाम नह�ं था और इस�लए प्रासं� समय पर उसे �कसी प्रका का मुआवजा देने का कोई सवाल ह� नह�ं था, उच् न्यायाल द्वार यह घो�षत करते हुए पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को व्यपग माना गया है, पोषणीय नह�ं है।

4. इस स्त पर यह भी उल्ले �कया जाना आवश्य है �क मूल �रट या�चकाकतार प्रश् भू�म म� 1/12व� �हस्स का दावा कर रहा था। तथा�प, मूल �रट या�चकाकतार क े स्वा�मत और हक का �नणर् �कए �बना उच् न्यायाल ने प्रथ� सं. 1 इसम� – �रट या�चकाकतार द्वार दा�खल �रट या�चका को स्वीका कर �लया और घो�षत �कया �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र व्यपग हो गया है। प्रश् भू�म म� मूल �रट या�चकाकतार क े �कसी भी स्वा�मत और हक का �नणर् करते समय, उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका पर �वचार �कया जाना न्यायसंग नह�ं था। �कसी भी �रट या�चका पर �वचार करने क े �लए स्वा�मत और हक को पहले स्था�प और सा�बत करना होता है और उसक े बाद ह� स्वा�मत और हक का दावा करने वाले व्यिक को अ�धग्र/अ�धग्रहण के व्यप क� कायर्वाह को चुनौती देने वाल� �रट या�चका दायर करने क� अनुम�त द� जा सकती है। इन प�रिस्थ�तय म� भी उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश पोषणीय नह�ं है।

5. उपरोक् को ध्या म� रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण से वतर्मा अपील सफल होती है। उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश को एतद् द्वा रद् व अपास् �कया जाता है। नतीजतन, प्रथ� सं. 1 इसम� - मूल �रट या�चकाकतार द्वार उच् न्यायाल क े सम� दायर मूल �रट या�चका खा�रज क� जाती है। वतर्मा अपील स्वीक ृत क� जातीहै। कोई जुमार्नानह�ं।.............................न्य. [ एम. आर. शाह ].............................न्य. [ सी. ट�. र�वक ु मार ] नई �दल्ल; 20 जनवर�, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।