Sushil Pandey & Ors. v. State of Uttar Pradesh & Ors.

Delhi High Court · 16 Jan 2023
Ajay S. Sogi; Avinrudh Bose
Civil Appeal No. 1838/2018
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The High Court held that seniority lists for Uttar Pradesh Police promotions must strictly comply with statutory rules, excluding retired/deceased officers and properly integrating direct recruits and promotees, setting aside the flawed 2013 list.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
उच्च म न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय अति कारि ा
सिसविवल याति का संख्या - 1838/2018
सुशील पांडे औ अन्य अपीलार्थी)
बनाम
उत्त प्रदेश ाज्य क

प्र ान सति व (गृह) औ अन्य क
े द्वा ा प्रत्यर्थी)
विन र्ण7 य
माननीय न्यायमूर्ति अविनरूद्घ बोस
इस अपील में विववाद का विवषय उत्त प्रदेश पुलिलस, ेतिडयो विवभाग में
सहायक ेतिडयो अति कारि यों क
े पदों क
े लिलए यन सू ी की वै ाविनक ा है। यह
सू ी 25 अक्टूब 2013 को बनाई गई र्थीी, हालांविक विववाद वष7 1998 का है।
उत्त प्रदेश पुलिलस ेतिडयो सेवा विनयमावली, 1979 ("1979 विनयम") क

अनुसा , उक्त पदों में रि विक्तयों को 50 प्रति श सी ी भ ) द्वा ा औ 50 प्रति श
फीड क
ै ड (इस मामले में ेतिडयो विन ीक्षक ) से पदोन्नति द्वा ा भ ा जाना
आवश्यक है। हमा े सामने अपीलक ा7 फीड संवग7 से हैं। वरि ष्ठ ा पद क
े विनमा7र्ण

े संबं में अ ी में कई दौ की मुकदमेबाजी हुई है औ 22 जुलाई 2014 को vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
इलाहाबाद, लखनऊ पीठ में उच्च न्यायालय क
े एक पीठ द्वा ा विदए गए विनर्ण7य ने
25 अक्टूब 2013 की वरि ष्ठ ा सू ी को ब क ा खा है। अपीलक ा7ओं ने
प्रत्यर्थी) से प्रोफॉमा7 संख्या 20 औ 21 को हटाने क
े लिलए एक आवेदन (2021
का आई. ए. सं. 163147) माॅंगा है। प्रत्यर्थी) नं.21 का 7 जुलाई 2017 को
विन न हो गया।जहाँ क उक्त प्रत्यर्थी) का संबं है, उसक
े लिखलाफ अपील समाप्त
हो गई है।इस आवेदन में यह अनु ो विकया गया है विक पंजीक र्ण अनुभाग ने
सूति विकया है विक उक्त दो प्रत्यर्थिर्थीयों द्वा ा दस् ी सेवाओं का कोई साक्ष्य नहीं है।
15 विदसंब 2015 की काया7लय रि पोट7 (आवेदन में ए 1 क
े रूप में संलग्न) में, हालांविक यह दज7 विकया गया है विक का र्ण ब ाआें नोविटस प्रत्यर्थी) सं . 20 को
ामील क ाइ गयी, इसक
े बाद 6 अगस् 2018 को पंजीयक न्यायालय का
आदेश (आवेदन में ए 3 क
े रूप में संलग्न) आया है, सिजसमें यह भी दज7 विकया गया
है विक प्रत्यर्थी) को विवति व ामील क ाया गया है।लेविकन इस आशय की कोई
रि पोट7 अभिभलेखों प उपलब् नहीं है।ऐसी परि स्थिस्र्थीति यों में , अपीलार्थिर्थीयों क

विवद्वान अति वक्ता ने हमा े सामने इस आवेदन प जो नहीं विदया है।इस आवेदन
को दबाए नहीं जाने क
े का र्ण खारि ज क विदया जा ा है।
JUDGMENT

2. सहायक ेतिडयो विन ीक्षक क े पद क े लिलए स्र्थीायी आ ा प 43 रि विक्तया औ ेतिडयो विन ीक्षकों से उन्नीस रि विक्तयों रि विक्तयों क े लिखलाफ सी ी भ ) क े लिलए 11 जनव ी 1992 को उत्त प्रदेश लोक सेवा आयोग ("आयोग") को अनु ो भेजे गए र्थीे।ये रि विक्तयां पहले अलग-अलग वषl में हुई र्थीीं।जहां क प्रत्यक्ष भर्ति यों का संबं है, आयोग की सिसफारि शें 19 सिस ंब 1995 को सन्दर्थिभ पदों क े लिलए की गई र्थीीं।पदोन्न उम्मीदवा ों क े लिलए, सिसफारि शें 26 विदसंब 1995 को की गई र्थीीं।43 अनुशंसिस उम्मीदवा ों में से सोलह पदोन्न उम्मीदवा ों को 31 जनव ी 1996 को विनयुविक्त पत्र जा ी विकए गए र्थीे क्योंविक शेष सत्ताईस यविन उम्मीदवा ों vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ने सेवाविनवृलित्त की आयु प्राप्त क ली र्थीी या उनकी मृत्यु हो गई र्थीी। सी ी भर्ति यों की विनयुविक्त 3 जुलाई 1996 को हुई र्थीी।

3. 10 विदसंब 1999 को एक संयुक्त यन सू ी ैया की गई र्थीी, 12 सिस ंब 2012 को उच्च न्यायालय की एक खण्ड पीठ द्वा ा विदए गए एक फ ै सले में उच्च न्यायालय ने 1979 क े विनयमों क े विनयम 17 औ 22 का उल्लंघन क ने क े लिलए इसे द्द क विदया र्थीा। यह ीन रि ट याति काओं में विदया गया एक सामान्य विनर्ण7य र्थीा।रि ट याति का संख्या - 711(एस. बी.)/2000 को आ तिक्ष श्रेर्णी क े दो सहायक ेतिडयो अति कारि यों द्वा ा प्रस् ु की गई र्थीी, जो अपने इस रुख क े आ ा प अगले उच्च पद प पदोन्नति का दावा क े र्थीे विक वे उस श्रेर्णी क े सबसे वरि ष्ठ अति का ी र्थीे।सी े भ ) विकए गए उम्मीदवा ों ने रि ट याति का संख्या 104 (एस. बी.)/2000 में पदोन्नति क े सार्थी अं -वरि ष्ठ ा प भी सवाल उठाया। रि ट याति का संख्या 10 (एस. बी.)/2000 में, पदोन्न उम्मीदवा ों ने समान वरि ष्ठ ा सू ी को इस आ ा प ुनौ ी दी विक पदोन्न अति कारि यों की विनयुविक्त सी े भ ) होने वालों से पहले की गई र्थीी औ सी े भ ) विकए गए उम्मीदवा ों को संयुक्त यन सू ी में पदोन्न अति कारि यों से ऊप नहीं खा जाना ाविहए।प्रत्यक्ष भर्ति यों का रुख यह र्थीा विक ूंविक यन क े लिलए आवश्यक ाएं आयोग को एक सार्थी भेजी गई र्थीीं, इसलिलए एक सामान्य यन सू ी ैया की जानी ाविहए र्थीी औ उसक े बाद विनयम 22 क े अनुसा वरि ष्ठ ा य की जानी ाविहए र्थीी।सिजस दूस े बिंबदु प प्रत्यक्ष भर्ति यों ने अपना मामला स्र्थीाविप विकया, वह वरि ष्ठ ा सू ी में उन पदोन्नति प्राप्त लोगों क े 4 नामों को शाविमल क ने क े संबं में र्थीा, जो सेवाविनवृत्त हो गए र्थीे या उनका विन न हो गया र्थीा। ऐसा प्र ी हो ा है विक यन सू ी में उनक े स्र्थीान प अन्य पदोन्न अति कारि यों को ऊप क े ल विदया गया र्थीा।उच्च न्यायालय क े समक्ष सी ी भर्ति यों का क 7 र्थीा विक उन्हें नई रि विक्तयों vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd क े रूप में घोविष विकया जाना ाविहए र्थीा औ एक नई यन प्रविvया द्वा ा भ ा जाना ाविहए र्थीा।

4. 1979 क े विनयम विवषय पदों (उक्त सेवा क े भी अन्य पदों क े सार्थी ) में पदोन्नति की प्रविvया विन ा7रि क े हैं।जहाँ क व 7मान अपील का संबं है, विनयम 5 (1), 14,15,17 औ 22 प्रासंविगक हैं।ये विनयम 12 सिस ंब 2012 को विदए गए उक्त फ ै सले में विन ा7रि विकए गए हैं।हम इन विनयमों को नी े उद्धृ क े हैं, जैसा विक उसमें अंविक हैः- "उत्त प्रदेश पुलिलस ेतिडयो सेवा विनयमावली, 1979

5. भ ) का स्रो ःसेवा में विवभिभन्न श्रेभिर्णयों क े पदों प विनम्नलिललिख स्रो ों से भ ) की जाएगीः- सहायक ेतिडयो अति का ीः- क) आयोग द्वा ा सी ी भ ) द्वा ा; औ ख) आयोग द्वा ा स्र्थीायी ेतिडयो विन ीक्षकों की पात्र ा क े आ ा प पदोन्नति द्वा ा; हालांविक उप ोक्त दोनों स्रो ों से भ ) इस ह से की जाएगी विक 50 प्रति श पद सी ी भ ) द्वा ा औ 50 प्रति श पद पदोन्न व्यविक्तयों क े द्वा ा बनाए खा जाए। (2) अप ाज्य ेतिडयो अति का ीः- आयोग द्वा ा से स्र्थीायी सहायक ेतिडयो अति कारि यों में अयोग्य ा को अस्वीका क े हुए वरि ष्ठ ा क े आ ा प पदोन्नति द्वा ा; हालाँविक यविद कोई उपयुक्त व्यविक्त पदोन्नति क े लिलए उपलब् नहीं है, ो सी ी भ ) से भ ) की जा सक ी है। (3) ाज्य ेतिडयो अति का ीः- आयोग द्वा ा से स्र्थीायी सहायक ेतिडयो अति कारि यों में अयोग्य ा को अस्वीका क े हुए वरि ष्ठ ा क े आ ा प पदोन्नति द्वा ा; vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd हालाँविक यविद कोई उपयुक्त व्यविक्त पदोन्नति क े लिलए उपलब् नहीं है, ो सी ी भ ) से भ ) की जा सक ी है। (4) उप पुलिलस महाविन ीक्षक दू सं ा ः आयोग द्वा ा से स्र्थीायी ाज्य ऑतिडयो अति कारि यों की पात्र ा क े आ ा प पदोन्नति द्वा ा हालांविक यविद कोई उपयुक्त व्यविक्त पदोन्नति क े लिलए उपलब् नहीं है, ो विनयम 15 क े ह सी ी भ ) से भ ) की जा सक ी है।

14. रि विक्तयों का विन ा7 र्णःविनयुविक्त प्राति क र्ण वष[7] क े दौ ान भ ी जाने वाली रि विक्तयों की संख्या औ अनुसूति जाति, अनुसूति जनजाति औ अन्य श्रेभिर्णयों क े उम्मीदवा ों क े लिलए आ तिक्ष रि विक्तयों की संख्या विन ा7रि क ेगा औ आयोग को सूति क ेगा।

15. सी ी भ ) क े लिलए प्रविvयाःआयोग विन ा7रि प्रारूप में एक आवेदन आमंवित्र क ेगा, सिजसे भुग ान क ने क े बाद आयोग क े सति व से प्राप्त विकया जा सक ा है। (2) विनयम 6 क े ह आयोग अनुसूति जाति, अनुसूति जनजाति औ अन्य श्रेभिर्णयों क े उम्मीदवा ों क े उति प्रति विनति त्व क े आश्वासन प विव ा क ने क े बाद, उन उम्मीदवा ों को साक्षात्का क े लिलए आमंवित्र क ेगा, जो आवश्यक योग्य ाओं को पू ा क हे हैं। (3) आयोग उनकी दक्ष ा क े vम में उम्मीदवा ों की एक सू ी ैया क ेगा जो मौलिखक प ीक्षा में उम्मीदवा द्वा ा प्राप्त अंकों से प्रति बिंबविब हो ा है।यविद दो या दो से अति क उम्मीदवा समान अंक प्राप्त क ेंगे, ो आयोग पात्र ा क े vम में सामान्य उपयुक्त ा क े आ ा प सेवाओं क े लिलए उनक े नाम खेगा।सू ी में नामों की संख्या रि विक्तयों से अति क होगी, लेविकन 25 प्रति श से अति क नहीं होगी।आयोग इस सू ी को विनयुविक्त प्राति क र्ण को भेजेगा। ……...

17. संयुक्त यन सू ी-यविद विनयुविक्त प्रत्यक्ष भ ) औ पदोन्नति दोनों द्वा ा की गई है, ो एक संयुक्त यन सू ी ैया की जाएगी, सिजसमें उम्मीदवा ों क े नाम विनयम 15 औ विनयम 16 क े ह ैया की गई सू ी से इस ह से लिलए जाएंगे विक प्रत्यक्ष भ ) औ पदोन्नति vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd अति कारि यों का एक विन ा7रि अनुपा होगा।पहला नाम विनयम 16 क े ह ैया की गई सू ी से होगा।.... 22-वरि ष्ठ ा-सेवा में विकसी भी श्रेर्णी क े पद प पद की वरि ष्ठ ा वही होगी जो मूल विनयुविक्त आदेश की ा ीख से विन ा7रि की गई है औ यविद दो या दो से अति क व्यविक्तयों की विनयुविक्त की गई है, ो उसी vम में विन ा7रि की जाएगी, सिजसमें उनक े नाम विनयुविक्त आदेश में खे गए हैं। हालांविक एक-सेवा में सी ी भ ) क े रूप में विनयुक्त व्यविक्तयों की पा स्परि क वरि ष्ठ ा वही होगी जो यन क े समय विन ा7रि की जा ी है। दो-सेवा में पदोन्नति द्वा ा विनयुक्त व्यविक्तयों की पा स्परि क वरि ष्ठ ा होगी, सिजसे वह पदोन्नति क े समय मूल पद प वहन क हा र्थीा।" (पेप बुक से शब्दशः उद्धृ )

5. वरि ष्ठ ा क े विन ा7 र्ण क े सवाल प, खण्ड पीठ ने 12 सिस ंब 2012 को विदए गए फ ै सले में अव ारि विकया र्थीा विक-- “11. यह भा क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 औ 16 का अध्यादेश भी है।स का ी शाखा प्रेस बनाम डी. बी. बेलिलयप्पा ने [(1979) 1 एस. सी. सी. 477] क े मामले में माननीय सव‡च्च न्यायालय की ीन न्याया ीशों की पीठ ने ऐसा विनर्ण7य विदया है। कानून बहु स्पष्ट है विक वरि ष्ठ ा सेवा की एक घटना है औ जहां सेवा विनयम इसकी गर्णना की विवति विन ा7रि क े हैं, इसका सख् ी से पालन विकया जाना ाविहए।

12. इस मामले क े थ्यों में, रि विक्तयां अलग-अलग वषl से संबंति र्थीीं औ रि विक्तयों को प्रत्यक्ष भर्ति यों औ पदोन्नति क े संबं में एक सामान्य मांग द्वा ा भ ा जाना र्थीा, इसलिलए आयोग द्वा ा विकया गया vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd यन अलग-अलग वषl की रि विक्तयों क े लिलए एक विवशेष वष[7] में विकया गया र्थीा।पदोन्नति अति कारि यों को विनयुविक्त पत्र जा ी क ने से पहले प्रत्यक्ष भर्ति यों क े संबं में सिसफारि शें भी प्रत्यर्थी) क े पास र्थीीं औ प्रत्यर्थी) क े लिलए विवद्वान अति वक्ता द्वा ा कोई स्पष्टीक र्ण नहीं विदया जा सका विक ा ा 17 का अनुपालन क्यों नहीं विकया गया औ पदोन्नति क े लिलए विनयुविक्त पत्र जा ी विकए गए।इसलिलए, हमा ी सुविव ारि ाय में, ा ा 17 का अनुपालन आवश्यक र्थीा औ संयुक्त यन सू ी ैया क ने क े बाद ही विनयुविक्त की जानी ाविहए र्थीी औ वरि ष्ठ ा का विन ा7 र्ण विनयमों क े विनयम 22 क े अनुसा विकया जाना ाविहए र्थीा, जो व 7मान मामले में नहीं विकया गया है।"

6. संयुक्त यन सू ी में सेवाविनवृत्त अति कारि यों औ उन अति कारि यों क े नामों क े प्रति बिंबब क े संबं में, खण्ड पीठ ने पाया विकः - "13. दूस ी गल ी जो की गई है वह यह है विक सेवाविनवृत्त /मृ अति कारि यों क े नाम वरि ष्ठ ा सू ी से हटा विदए गए औ उनक े स्र्थीान प अन्य पदोन्न अति कारि यों को आगे बढ़ा विदया गया, यह अभ्यास सेवा न्यायशास्त्र में विबल्क ु ल अनसुना है।इस गल ी ने अपने आप में वरि ष्ठ ा सू ी को कानून क े ह अपोषर्णीय बना विदया।यविद प्रति वादी की इस कवायद को प्रबल क ने की अनुमति दी जा ी है, ो इसक े परि र्णामस्वरूप उन अति कारि यों क े सार्थी बहु अन्याय होगा जो अपनी योग्य ा क े आ ा प कम उम्र में सेवा में शाविमल हो े हैं क्योंविक उस स्थिस्र्थीति में, जो अति का ी उनसे वरि ष्ठ र्थीे औ उम्र में अति क उम्र क े र्थीे, वे सेवाविनवृत्त हो जाएंगे औ उनक े स्र्थीान vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd प जो अति का ी उनसे कविनष्ठ हैं, उन्हें उन अति कारि यों से कविनष्ठ बना विदया जाएगा, सिजन्हें बाद में विनयुक्त विकया गया र्थीा या सिजन्हें अगले वषl की रि विक्तयों में विनयुक्त विकया गया र्थीा।सेवाविनवृलित्त या अति कारि यों की मृत्यु क े का र्ण रि विक्तयों को नई यन प्रविvया क े माध्यम से भ ा जाना र्थीा, इसलिलए, विववाविद वरि ष्ठ ा सू ी कानून क े ह अस्थिस्र्थी है औ इसे द्द विकया जाना ाविहए।

7. उप ोक्त विनर्ण7य विदए जाने क े बाद, 25 अक्टूब 2013 को नई यन सू ी ैया की गई र्थीी।उच्च न्यायालय क े समक्ष अपीलक ा7ओं द्वा ा इस वरि ष्ठ ा सू ी प असफल ुनौ ी विदया गया र्थीा।इसमें रि ट याति काक ा7ओं का मुख्य क 7 र्थीा विक 12 सिस ंब 2012 को विदए गए न्यायालय क े फ ै सले में विनविह विनद•शों का पालन नहीं विकया गया र्थीा।खण्ड पीठ क े समक्ष संवग[7] में उनक े पहले प्रवेश क े आ ा प वरि ष्ठ ा में पदोन्न लोगों को उच्च खे जाने क े क 7 का आग्रह विकया गया र्थीा।हालाँविक, अपील क े ह विदए गए फ ै सले में, खण्ड पीठ ने अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी उक्त वरि ष्ठ ा सू ी को ुनौ ी दे े हुए कहाः- "हमने उप ोक्त कl औ अभिभलेख प थ्यों प विव ा पूव7क विव ा विकया है औ हमने पाया है विक 25 अक्टूब, 2013 की आक्षेविप अंति म वरि ष्ठ ा सू ी में पदोन्नति यों औ सी ी भर्ति यों को वष[7] 1990- 1991 से शुरू होने वाले रि विक्त vमवा वष[7] की ुलना में स्पष्ट रूप से खा गया है। रि विक्त क े वष[7] क े अनुसा विनयुविक्त औ ऐसे व्यविक्तयों क े नाम जो उस प कब्जा क ने क े हकदा र्थीे, विकसी भी ठोस थ्यात्मक आ ा प सवाल नहीं उठाए गए हैं। क 7 विदया गया है विक विनयम 17 औ विनयम 22 का पालन नहीं विकया गया है जैसा विक ऊप देखा गया है।उठाए गए विनवेदनों प विव ा क ने क े बाद हम पा े हैं विक वरि ष्ठ ा सू ी में उसिल्ललिख विनयुविक्त क े वष[7] में विकसी भी थ्यात्मक भ्रांति का vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd संक े देने वाले विकसी भी कर्थीन की अनुपस्थिस्र्थीति में में, याति काक ा7 क े अति वक्ता क े क 7 को स्वीका नहीं विकया जा सक ा है। खण्ड पीठ ने विनद•श जा ी क े हुए कहा र्थीा विक जब पहले की वरि ष्ठ ा सू ी प्रसारि की गई र्थीी ो विनयम 17 औ 22 का पालन नहीं विकया गया र्थीा।पीठ ने आगे कहा विक ाज्य क े अति वक्ता यह स्पष्ट नहीं क पाए हैं विक एक सार्थी विनयुविक्त पत्र जा ी क ने क े संबं में ऐसा अनुपालन क्यों नहीं विकया गया र्थीा। उप ोक्त परि स्थिस्र्थीति यों में हम जो पा े हैं वह यह है विक अब विनयमों का सख् ी से पालन विकया गया प्र ी हो ा है औ ऐसे विनयमों क े अनुपालन में ही एक क े बाद एक संबंति पदोन्नति औ सी ी भ ) क े नाम खे गए हैं। श्री मनीष क ु मा ने उक्त विनयुविक्त की शुद्ध ा प सवाल उठा े हुए आ ोप लगाया विक सी ी भर्ति यों क े मुकाबले, विनयुविक्त क े वष[7] का उल्लेख विकए विबना रि विक्त क े वष[7] क े लिलए जगह को खाली छोड़ विदया गया है।उक्त क को स्वीका नहीं विकया जा सक ा है, क्योंविक ऐसा प्र ी हो ा है विक सू ी पहले पदोन्नति औ विफ रि विक्त क े वष[7] क े अनुसा सी ी भ ) क क े ैया की गई र्थीी। इसलिलए याति काक ा7 क े विवद्वान अति वक्ता द्वा ा विकसी भी विनयम क े उल्लंघन प इस थ्यात्मक स्थिस्र्थीति प सफल ापूव7क ुनौ ी नहीं दी जा सकी।इसलिलए, हमा ी ाय में, पहले क े फ ै सले क े गै -अनुपालन क े आ ा प वरि ष्ठ ा सू ी की शुद्ध ा प सवाल उठाने वाले क 7 में कोई दम नहीं है। हम याति का में कोई मेरि ट नहीं पा े हैं। दनुसा रि ट याति का खारि ज क दी जा ी है। (पेप बुक से शब्दशः उद्धृ )

8. जहाँ क 2013 की वरि ष्ठ ा सू ी का संबं है, अपीलार्थिर्थीयों की मुख्य भिशकाय यह है विक सी ी भ ) (जो इस अपील में विनजी प्रति वादी हैं) को रि विक्तयों क े वष[7] का उल्लेख विकए विबना संयुक्त सू ी में ोटा प्रर्णाली क े अनुसा खा गया र्थीा औ विपछले वषl क े संबंति रि विक्तयों में पदोन्न लोगों को उनकी वरि ष्ठ ा य vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd क े समय प्रविvया में नज अंदाज क विदया गया र्थीा। पहले अपीलक ा7 को vम संख्या 52 प ैना विकया गया र्थीा जबविक दूस े अपीलक ा7 को vम संख्या 48 प ैना विकया गया र्थीा औ उन्हें वष[7] 1993-1994 क े लिलए रि विक्तयों क े संबं में विदखाया गया र्थीा।अ ः अविनवाय[7] रूप से अपीलार्थी) दो मामलों में व्यभिर्थी हैं। पहला यह है विक सी ी भर्ति यों को रि विक्त क े वष[7] को नज अंदाज क े हुए वरि ष्ठ ा सू ी में खा गया है।दूस ा, वे क 7 दे े हैं विक ूंविक उनकी विनयुविक्त औ पुविष्ट प्रत्यक्ष भर्ति यों की ा ा से पहले हुई र्थीी, इसलिलए अपीलार्थी) सी े भ ) से पहले संवग[7] में पैदा हुए र्थीे।अपीलार्थिर्थीयों क े अनुसा, इस क 7 प उन्हें वरि ष्ठ ा सू ी में प्रत्यक्ष भर्ति यों से ऊप खा जाना ाविहए र्थीा।इस मुद्दे प जो क 7 विदया गया है वह यह है विक 1979 क े विनयमों क े विनयम 17 क े ह ैया की गई यन सू ी पदोन्न अति कारि यों औ प्रत्यक्ष भर्ति यों क े बी खाली पदों क े विवभाजन से संबंति है, लेविकन यह सू ी वरि ष्ठ ा क े सवाल से संबंति नहीं है।इस संबं में, उत्त प्रदेश स का ी कम[7] ा ी वरि ष्ठ ा विनयम, 1991 क े विनयम 8 (3) (ii) का उल्लेख विकया गया है।इस विनयम में कहा गया हैः- "8. वरि ष्ठ ा जहाँ पदोन्नति औ विनद•शन भ ) द्वा ा विनयुविक्तयाँ हो ी हैं।- (1) जहां सेवा विनयमों क े अनुसा विनयुविक्तयां पदोन्नति औ प्रत्यक्ष भ ) दोनों द्वा ा की जा ी हैं, वहां विनयुक्त व्यविक्तयों की वरि ष्ठ ा, विनम्नलिललिख उप-विनयमों क े प्राव ानों क े अ ीन, उनकी मूल विनयुविक्तयों क े आदेश की ा ीख से विन ा7रि की जाएगी, औ यविद दो या दो से अति क व्यविक्तयों को एक सार्थी विनयुक्त विकया जा ा है, ो उस vम में सिजसमें उनक े नाम विनयुविक्त आदेश में व्यवस्थिस्र्थी विकए गए हैंः बश • विक यविद विनयुविक्त आदेश विकसी विवशेष विपछली ा ीख को विनर्दिदष्ट क ा है, सिजससे कोई व्यविक्त मूल रूप से 10 बा विनयुक्त विकया गया है, ो उस ा ीख को मूल विनयुविक्त क े आदेश की ा ीख माना जाएगा औ अन्य मामलों में, इसका अर्थी7 आदेश जा ी क ना होगाः बश • विक सी े भ ) विकया गया उम्मीदवा अपनी वरि ष्ठ ा खो सक ा है, यविद वह वै का र्णों क े विबना शाविमल होने में विवफल ह ा है, जब उसे रि विक्त की vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd पेशकश की जा ी है, ो का र्णों की वै ा क े बा े में विनयुविक्त प्राति क र्ण का विनर्ण7य अंति म होगा। (2) विकसी एक यन क े परि र्णामस्वरूप विनयुक्त व्यविक्तयों की वरि ष्ठ ा क े सम्बन् में - (क) प्रत्यक्ष भ ) द्वा ा, वही होगा जो आयोग या सविमति द्वा ा ैया की गई योग्य ा सू ी में विदखाया गया है, जैसा भी मामला हो; (ख) पदोन्नति द्वा ा, विनयम 6 या विनयम 7 में विन ा7रि सिसद्धां ों क े अनुसा विन ा7रि विकया जाएगा, जैसा भी मामला हो, पदोन्नति एक एकल संवग[7] या भिभन्न संवगl से की जानी है। (3) जहाँ विनयुविक्तयाँ विकसी एक यन क े परि र्णाम प पदोन्नति औ प्रत्यक्ष भ ) दोनों द्वा ा की जा ी हैं, वहाँ प्रत्यक्ष भर्ति यों की ुलना में पदोन्नति की वरि ष्ठ ा का विन ा7 र्ण दोनों स्रो ों क े लिलए कोटा क े अनुसा, जहाँ क हो सक े, एक vीय vम (पहला पदोन्न होने क े ना े) में विकया जाएगा। दृष्टां (1) जहां पदोन्नति औ प्रत्यक्ष भर्ति यों का कोटा 1:1 क े अनुपा में है, वहां वरि ष्ठ ा विनम्नलिललिख vम में होगी - प्रर्थीम - प्रोन्नलित्त क े द्वा ा विद्व ीय - प्रत्यक्ष भ ) क े द्वा ा औ इसी ह। (2) जहां उक्त कोटा 1:3 क े अनुपा में है, वहां वरि ष्ठ ा विनम्नलिललिख vम में होगी - प्रर्थीम - प्रोन्नलित्त क े द्वा ा विद्व ीय से ुर्थी7 क - सी ी भ ) द्वा ा छठा से आठ क - सी ी भ ) क े द्वा ा औ इसी हः बश • विक vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (i) जहां विकसी स्रो से विनयुविक्त विन ा7रि कोटे से अति क की जा ी है, वहां विन ा7रि कोटे से अति क विनयुक्त व्यविक्तयों, कोटे से अति क विनयुक्त व्यविक्तयों को वरि ष्ठ ा क े लिलए अगले वष[7] या उन वषl में क े ल विदया जाएगा सिजनमें कोटे क े अनुसा रि विक्तयां हैं। (ii) जहां विकसी भी स्रो से विनयुविक्तयां विनय कोटे से कम हो ी हैं औ ऐसी खाली रि विक्तयों क े लिलए विनयुविक्त बाद क े वष[7] या वषl में की जा ी है, ो इस ह से विनयुक्त व्यविक्तयों को विकसी भी पूव[7] वष[7] की वरि ष्ठ ा नहीं विमलेगी, बस्थिल्क उस वष[7] की वरि ष्ठ ा प्राप्त होगी सिजसमें उनकी विनयुविक्तयां की जा ी हैं, ाविक उनक े नाम शीष[7] प खे जाएं औ उनक े बाद अन्य विनयुविक्तयों क े vीय vम में नाम खे जाएं। (iii) जहां, सेवा विनयमों क े अनुसा, विकसी भी स्रो से रि क्त रि विक्तयों को संबंति सेवा विनयमों में उसिल्ललिख परि स्थिस्र्थीति यों में अन्य स्रो ों से भ ा जा सक ा है औ इस ह से कोटा से अति क विनयुविक्त की जा सक ी है, ो इस ह से विनयुक्त व्यविक्तयों को उसी वष[7] की वरि ष्ठ ा विमलेगी जैसे विक वे अपने कोटे की रि विक्तयों क े लिखलाफ विनयुक्त विकए जा े हैं।" (पेप बुक से शब्दशः उद्धृ )

9. अपीलक ा7ओं ने काय7काल समाप्त हो ुक े या सेवाविनवृत्त व्यविक्तयों क े नाम यन सू ी में शाविमल क ने क े लिखलाफ भी क 7 विदया है।उनका क 7 है विक मृ या सेवाविनवृत्त व्यविक्तयों क े नाम यन सू ी में विबल्क ु ल भी शाविमल नहीं विकए जाने ाविहए र्थीे औ उनसे कम वरि ष्ठ ा वाले पदोन्नति अति कारि यों को ऊप क े ल विदया जाना ाविहए र्थीा औ मृ या सेवाविनवृत्त अति कारि यों को आवंविट पद प समायोसिज विकया जाना ाविहए र्थीा।

10. यन सू ी में सी े भ ) विकए गए अति कारि यों को वरि ष्ठ ा देने क े सवाल प, जो उन्हें अपीलार्थिर्थीयों से वरि ष्ठ मान े हैं, अपीलार्थिर्थीयों ने ीन अति कारि यों प भ ोसा विकया है।ये हैं उत्त प्रदेश ाज्य बनाम अशोक कु मा श्रीवास् व औ अन्य [(2014) 14 एससीसी 720], क े मेघ ंद्र सिंसह औ अन्य बनाम बिंनगम सिस ो vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd औ अन्य [(2020) 5 एससीसी 689] औ बीएस मूर्ति औ अन्य बनाम ए बिंवद सिंसह औ अन्य। [2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 317]। ये विनर्ण7य पूव7व्यापी वरि ष्ठ ा देने क े लिखलाफ हैं। बी. एस. मूर्ति उप ोक्त क े मामले में यह अभिभविन ा7रि विकया गया हैः "60. उप ोक्त ा7 से यह स्पष्ट है विक विकसी एक ैनल (प्रत्यक्ष भ ) या पदोन्नति ) से कोई भी विनयुक्त व्यविक्त अपनी विनयुविक्त से पहले की ा ीख से वरि ष्ठ ा का दावा नहीं क सक ा है।यह विक कानून में स्थिस्र्थीति होने क े का र्ण, अब उन का र्णों प विव ा क ना आवश्यक होगा जो उच्च न्यायालय क े सार्थी यह अभिभविन ा7रि क ने क े लिलए बल ख े हैं विक पदोन्नति (1988 से विनयविम औ मूल क्षम ा में) को प्रत्यक्ष भर्ति यों क े लिलए ास् ा बनाना र्थीा, सिजन्हें 1991-92 में विनयुक्त विकया गया र्थीा।सी े ौ प कहा जाए ो, उच्च न्यायालय की ाय र्थीी विक 1986 क े ओ. एम. क े आवेदन प पदोन्नति यों को उन्हें आवंविट कोटे से अति क पदों प कब्जा क ने वाला माना जाना ाविहए। अब, वास् व में अभिभलेख प सामग्री यह स्र्थीाविप क ी है विक ऐसे समय में पदोन्नति रि विक्तयां र्थीीं जब प्रत्यक्ष भ ) प प्रति बं लागू र्थीा (1984-1990 क े दौ ान)।विदनांक 11-06-2007 क े प्रश्न प, हैद ाबाद में संबंति आयुक्तालय ने विदनांक 30-08.2007 क े अपने उत्त में कहाः इस आयुक्तालय में एक वष[7] में जो भी रि विक्तयां हुई ं, उन्हें 1986 से 1990 की अवति क े दौ ान 3:1 क े अनुपा में विवभासिज विकया गया र्थीा औ सी ी भ ) क े लिलए आने वाली रि विक्तयों को एस. एस. सी. को सूति विकया गया र्थीा औ प्रोन्नति कोटा रि विक्तयों को डी. पी. सी. द्वा ा भ ा गया र्थीा।

11. हम अपीलक ा7 क े इस क 7 से सहम हैं विक पहले संवग[7] में जन्म लेने से बाद की ा ीख में विनयुक्त होने वालों क े अलावा वरि ष्ठ ा स्व ः ही विमल जाएगी।अशोक क ु मा श्रीवास् व उप ोक्त क े मामले में ऐसा अव ारि विकया गया है।हालाँविक, यह सिसद्धां लागू सेवा विनयम में विकसी भी विवप ी प्राव ान की अनुपस्थिस्र्थीति में लागू होना है।व 7मान मामले में इस पहलू को खण्ड पीठ द्वा ा 12 सिस ंब 2012 को विदए गए फ ै सले में संबोति विकया गया है।हमने ऊप इस विनर्ण7य क े पै ाग्राफ 11 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd औ 12 का हवाला विदया है।इस फ ै सले में उच्च न्यायालय की ाय र्थीी विक ूंविक एक आम मांग र्थीी, इसलिलए विनयुविक्तयां संयुक्त यन सू ी ैया क ने क े बाद ही की जानी ाविहए र्थीीं औ वरि ष्ठ ा, विनयम 22 क े अनुसा विन ा7रि की जानी ाविहए र्थीी।फ ै सले का यह भाग अपरि वर्ति हा है।स्वीका की गई स्थिस्र्थीति यह है विक इस विनर्ण7य क े संबं में एक समीक्षा याति का दाय की गई र्थीी, लेविकन समीक्षा विनर्ण7य ने खण्ड पीठ क े इस विनष्कष[7] को प्रभाविव नहीं विकया। अपील क े ह विनर्ण7य में, खण्ड पीठ ने पूव‡क्त विनर्ण7य क े इन दो पै ाग्राफ प अवलंब लिलया है औ इस विनष्कष[7] प आया है।इस प्रका, जहाँ क इस अपील क े अपीलार्थिर्थीयों औ अन्य पक्षों का संबं है, उक्त विनष्कष[7] ने अंति म ा प्राप्त क ली है औ हम लगभग समान थ्यात्मक पृष्ठभूविम प बाद की काय7वाही से उत्पन्न अपील में इस प्रश्न प पुनः प्रति वाद नहीं क सक े हैं।

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12. हालाँविक, अपीलार्थी) ब ा े हैं विक 2013 की सू ी में वरि ष्ठ ा विन ा7रि क ने में, विनयम 22 का पालन नहीं विकया गया है क्योंविक इस ह क े लिलए विनयुविक्त की ा ीखों का पालन नहीं विकया गया है।यह विनयम मूल विनयुविक्त आदेश क े अनुसा वरि ष्ठ ा प्रदान क ने प विव ा क ा है।हम वष[7] 2012 में विदए गए फ ै सले से पा े हैं विक खण्ड पीठ ने यन सू ी ैया क ने से पहले दो श्रेभिर्णयों क े उम्मीदवा ों को विनयुविक्त आदेश जा ी क ना कानून क े विवप ी पाया, लेविकन विनयुविक्त आदेशों को स्वयं द्द नहीं विकया गया र्थीा।न ही विकसी विवभिशष्ट ति भिर्थी को विनयुविक्त की ा ीख क े रूप में लेने का विनद•श विदया गया र्थीा।

13. उच्च न्यायालय ने पहले क े फ ै सले में पाया विक 1999 की वरि ष्ठ ा सू ी ैया क ने में विनयम 17 का अनुपालन नहीं विकया गया र्थीा।उत्त व ) यन सू ी 12 सिस ंब 2012 को विदए गए उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े संदभ[7] में बनाई गई र्थीी। सेवा न्यायशास्त्र का सामान्य सिसद्धां है विक विकसी विवशेष संवग[7] में वास् विवक प्रवेश vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd की ा ीख से वरि ष्ठ ा की गर्णना की जानी आवश्यक है, वह ऐसे मामले में काम नहीं क सक ा है जहां एक अबाति न्यातियक विनष्कष[7] है विक विनयुविक्तयां लागू विनयमों का भंग क े हुए अलग-अलग ति भिर्थीयों प की गई र्थीीं। इसक े अलावा, यन सू ी स्वयं वरि ष्ठ ा का विन ा7 र्ण नहीं क ी है क्योंविक उक्त सू ी में क े वल उन व्यविक्तयों क े नाम हो े हैं जो विकसी विवशेष संवग[7] का विहस्सा हो े हैं। 1979 क े विनयमों में भी, यन सू ी विनयम 17 क े अनुसा ैया की जानी है जबविक वरि ष्ठ ा, विनयम 22 क े संदभ[7] में विन ा7रि की जानी है।2013 की यन सू ी को अंति म रूप देने में अति कारि यों ने जो विकया है, वह यह है विक इस सू ी में पद ारि यों की स्थिस्र्थीति उनकी वरि ष्ठ ा क े आ ा प बनाई गई है।इस प्रका, यह यन औ वरि ष्ठ ा की संयुक्त सू ी बन गई है।

14. हम पा े हैं विक अपील क े ह विदए गए फ ै सले में, वरि ष्ठ ा य क ने क े सवाल प खण्ड पीठ क े समक्ष अति कारि यों का रुख इस प्रका दज[7] विकया गया र्थीाः- " उनका क 7 है विक जहां क वरि ष्ठ ा क े विन ा7 र्ण का संबं है, संबंति रि विक्तयों की उपलब् ा क े वष[7] की ुलना में पदोन्नति क े लिलए प्रर्थीम स्र्थीान औ प्रत्यक्ष भर्ति यों क े लिलए विद्व ीय स्र्थीान क े लिलए कोटा औ ोटा प्रर्णाली को लागू विकया गया है। " (पेप बुक से शब्दशः उद्धृ )

15. यह प्रर्थीा, हमा ी ाय में, विनयम 17 में विव ा विकए गए वरि ष्ठ ा आदेश क े विवप ी है। यन सू ी में विन ा7रि विकया गया र्थीा विक रि क्त पदों को क ै से भ ा जाएगा, लेविकन वरि ष्ठ ा क े लिलए, विनयुविक्त की ा ीखों को संवग[7] में जन्म ति भिर्थी क े रूप में माना जाना र्थीा।प्रवेश की दो ा ाओं क े संबं में, उनक े संवग[7] में प्रवेश क ने क े बाद, उनकी वरि ष्ठ ा प्रवेश की ऐसी ति भिर्थीयों क े आ ा प य की जानी र्थीी।व 7मान काय7वाही में, सिजस ीक े से विनयुविक्त आदेश जा ी विकए vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd गए र्थीे, वह पहले फ ै सले में विनयम 17 क े प्राव ानों का ोड़ा पाया गया र्थीा। लेविकन न ो पहले फ ै सले औ न ही अपील क े ह फ ै सले में यह विन ा7रि विकया गया र्थीा विक दोनों ा ाओं क े अलग-अलग उम्मीदवा ों क े लिलए क ै ड में जन्म की ा ीखें विकस ह से विन ा7रि की गई ं।हम उस उद्देश्य क े लिलए इस मामले को रि मांड प लेने क े लिलए इच्छ ु क नहीं हैं, यह देख े हुए विक व 7मान विववाद लगभग ीन दशकों से जा ी है।लेविकन ूंविक इस मामले प विनर्ण7य लेने क े लिलए उच्च न्यायालय का मुख्य क 7 यह र्थीा विक दोनों प्रारूपों में यन एक सामान्य भ ) प्रविvया से विकया गया र्थीा, हमा ी ाय में, दोनों प्रारूपों क े विनयुविक्त आदेशों की ति भिर्थीयों को एक विवशेष ति भिर्थी से माना जाना ाविहए औ 30 जनव ी 1996, वह ा ीख होगी सिजस ा ीख को पदोन्न उम्मीदवा ों क े विनयुविक्त पत्र जा ी विकए गए र्थीे।

16. सिजस ह से सेवाविनवृत्त औ मृ अति कारि यों क े नामों प विव ा विकया जाना र्थीा, उसक े संबं में उच्च न्यायालय ने 12 सिस ंब 2012 को विदए गए अपने फ ै सले में पहले ही अपने विनष्कष[7] औ विनद•श दे विदए हैं।उन विनद•शों को अंति म रूप देने क े बाद, हम विववाद क े उस विहस्से क े संबं में कोई विनर्ण7य नहीं ले हे हैं।

17. हम, दनुसा, यह मान े हैं औ विनद•श दे े हैं विक अपीलक ा7ओं सविह उम्मीदवा ों की वरि ष्ठ ा 30 जनव ी 1996 को उम्मीदवा ों क े दोनों समूहों (यानी पदोन्नति औ प्रत्यक्ष भ )) क े संवग[7] में प्रवेश को ध्यान में ख े हुए विन ा7रि की जानी ाविहए औ वरि ष्ठ ा की स्थिस्र्थीति को उस आ ा प पुनर्दिन ा7रि विकया जाना ाविहए।हम भा क े संविव ान क े अनुच्छेद 142 क े ह अपने अति का क्षेत्र का आह्वान क े हुए यह विनद•श जा ी क े हैं। अं -संवग)य वरि ष्ठ ा क े प्रश्न प विनयम 22 क े प्राव ान का पालन विकया जाएगा।पुनग7ठन सू ी में, हालांविक, vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd मृ या सेवाविनवृत्त अति कारि यों की मृत्यु प खाली पड़े पदों क े लिलए पद को नए रि विक्तयों क े रूप में माना जाएगा औ नए यन प्रविvया द्वा ा भ ा जाएगा।

18. यविद कोई पद ा ी, ाहे वह व 7मान में सेवाविनवृत्त हो या न हो, पहले से ही 22 जुलाई 2014 को विदए गए विनर्ण7य क े संदभ[7] में की गई वरि ष्ठ ा स्थिस्र्थीति क े अनुसा क ै रि य से संबंति लाभ प्राप्त क ुका है, ो विववाद की उत्पलित्त औ इस विनर्ण7य द्वा ा इसक े विनष्कष[7] क े बी लंबे समय क े अं ाल को ध्यान में ख े हुए उन्हें प ेशान नहीं विकया जाएगा।लेविकन विवषय-पद ा र्ण क ने वाले विकसी भी अति का ी को, सिजसने वरि ष्ठ ा सू ी से क ै रि य में सु ा प्राप्त विकया होगा, ऐसे लाभ विदए जाएंगे। सेवाविनवृत्त होने वालों को काल्पविनक लाभ विदए जाएंगे।

19. अपील क े ह विनर्ण7य दनुसा संशोति विकया जायेगा, औ अपील का उप ोक्त श l में विनस् ारि विकया गया।

20. लंविब आवेदन, यविद कोई हों, काे भी विनस् ा र्ण विकया जा ा है।

21. लाग क े बा े में कोई आदेश नहीं होगा। ……………………... न्यायमूर्ति अजय स् ोगी ……………………... न्यायमूर्ति अविनरुद्ध बोस नई विदल्ली; 16 जनव ी, 2023. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd