Bhoomi Evam Bhavan Vibhag, Rashtriya Rajdhani Kshetra Delhi Sarkar v. Dilli Vikas Pradhikaran

Delhi High Court · 20 Jan 2023
M. R. Shah; Hima Kohli
Civil Appeal No 5664 of 2014
property appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that land acquisition completed by possession and handing over before the 2013 Act's enforcement cannot be declared ineffective under Section 24(2) of the 2013 Act despite non-payment of compensation.

Full Text
Translation output
प्र�तवे
भारतीय सव�च् न्यायाल
�स�वल अपील�य अ�धका�रता
�स�वल अपील सं /2023
(@ �व.अ.या. (�स) सं. /2023)
स�चव, भू�म एवं भवन �वभाग, रा.रा.�े. �दल्ल सरकार
(@डायर� सं. 29758/2022) ... अपीलाथ�(गण)
बनाम
ओम प्रका (मृत) द्वारा �व�धक
प्र�त�नगण व अन् ... प्रत्(गण)
सह
�स�वल अपील सं /2023
(@ �व.अ.या. (�स) सं. /2023)
(@डायर� सं. 17938/2022)
�नणर्
JUDGMENT

1. नई �दल्ल� िस्थत �दल उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 5664/2014 म� पा�रत आ�े�पत �नणर् एवं आदेश �दनां�कत एम.आर. शाह, न्य. 18.07.2017 से असंतुष् तथा व्य�थत होकर, िजसक े द्वार उच् न्यायाल ने क�थत �रट या�चका को अनुम�त प्रदान है तथा यह घो�षत �कया है �क प्रश्नगत भ क े संबंध म� अ�धग्र को भू�म अजर्, पुनवार्सन और पुनव्यर्वस्थापन म� उ�चत प्र�त पारद�शर्ता का अ�धकार अ�ध�नयम 2013 (िजसे इसम� इसक े बाद अ�ध�नयम, 2013 क े रू म� संद�भर् �कया गया है) क� धारा 24(2) क े तहत व्यपग माना जाएगा, राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल सरकार व �दल्ल� �वकास प्रा�ध ने वतर्मा अपील दायर क� है।

2. वतर्मा मामले म�, भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 4 क े अंतगर् अ�धसूचना �दनांक 23.01.1965 को जार� क� गई थी। अ�ध�नणर् क� घोषणा �दनांक 09.01.1981 को क� गई थी। राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल� सरकार व उच् न्यायाल क े सम� दायर जवाबी शपथपत क े अनुसार, संबं�धत भू�म का कब्ज ले �लया गया और �दनांक 23.09.1981 को लाभाथ� �वभाग को स�प �दया गया। हालां�क, नक्श मुंतज़�मन क� फट� हुई िस्थ� क े कारण जमीन क े संबंध म� मुआवजे का भुगतान सु�निश्चत नह�ं �कया ज सका। 2.[1] यह �क अ�ध�नणर् पा�रत करने क� तार�ख से लगभग 24 वष� क� अव�ध क े बाद और अ�ध�नयम, 2013 क े लागू होने पर, क�थत अ�ध�नयम का लाभ उठाने क े �लए, यहां प्रथ�(गण) - मूल या�चकाकतार(गण) ने वषर 2014 म� उच् न्यायाल क े सम� या�चका दायर क�, इस घोषणा क े �लए �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24 (2) क े तहत व्यपग माना गया है, अन् बात� क े साथ-साथ यह तक र देते हुए �क भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क े अनुसार पूणर मुआवजा नह�ं �दया गया था। 2.[2] हालां�क, इस तथ् पर �वचार �कए �बना �क प्रश् भू�म का कब्ज �लया गया था और �दनांक 23.09.1981 को लाभाथ� �वभाग को स�प �दया गया था, उच् न्यायाल ने, आ�े�पत �नणर् और आदेश द्वार, घो�षत �कया है �क प्रश् भू�म क अ�धग्र को मूल �रट या�चकाकतार क े �हस्स क� सीमा तक व्यपग माना गया है, क्य�क जवाबी शपथपत से प्रत होता है �क यह स्पष रू से सु�निश्च नह�ं �कया जा सकता है �क क्य कानून क े अनुसार मुआवजा भू�म मा�लक� को �दया गया था। 2.[3] इंदौर �वकास प्रा�धक बनाम मनोहरलाल व अन्, (2020) 8 एससीसी 129 क े मामले म� इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ क े �नणर् को ध्या म� रखते हुए, उच् न्यायाल का मत पोषणीय नह�ं है। इस न्यायाल क� सं�वधान पीठ ने अनुछेद 366 म� �नम्न�ल�ख रूप स मत व्यक �कया और अ�भ�नधार्�र �कया है:-

366. उपयुर्क चचार को ध्या म� रखते हुए, हम प्रश का �नम्न�ल�ख उ�र देते ह�: 366.[1] धारा 24(1)(क) क े प्रावधा क े अंतगर् य�द 2013 क े अ�ध�नयम क े लागू होने क� तार�ख 1-1- 2014 को अ�ध�नणर् नह�ं �कया जाता है तो कायर्वाह म� कोई व्यपगमन नह� होगा। मुआवजे का �नधार्र 2013 क े तहत �कया जाना होगा। 366.[2] य�द अ�ध�नणर् न्यायाल क े अंत�रम आदेश क े दायरे म� आने वाल� अव�ध को छोड़कर पांच साल क� अव�ध क े भीतर पा�रत �कया गया है, तो 1894 अ�ध�नयम क े तहत 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(1)(ख) क े तहत कायर्वाह जार� रहेगी ऐसा मानते हुए �क इसे �नरस् नह�ं �कया गया हो।

366.3. धारा 24(2) म� कब्ज और मुआवजे क े बीच उपयोग �कए गए "या" शब्द को "न ह�" क े रूप म� अथवा "और" क े रू म� पढ़ा जाना चा�हए। वषर 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत भू�म अ�धग्र क� कारर्वा का व्यपगमनउस िस्थ� म� समझा जाता है, जब उक् अ�ध�नयम क े लागू होने से पहले पांच वषर या उससे अ�धक समय तक अ�धका�रय� क� �निष्क्र क े कारण भू�म का कब्ज नह�ं �लया गया हो और न ह� मुआवजा �दया गया हो। दूसरे शब्द म�, य�द कब्ज ले �लया गया है, मुआवजा नह�ं �दया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है। इसी तरह, अगर मुआवजा �दया गया है, कब्ज नह�ं �लया गया है तो कोई व्यपगम नह�ं होता है।

366.4. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े मुख् भाग म� "भुगतान" शब् म� न्यायाल म� मुआवजे को जमा करना शा�मल नह�ं है। धारा 24(2) क े परंतुक म� जमा नह�ं करने क े प�रणाम का प्रावध है, य�द अ�धकांश भू�म जोत� क े संबंध म� इसे जमा नह�ं �कया गया है तो 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक सभी लाभाथ� (भू�म मा�लक) 2013 अ�ध�नयम क े अनुसार मुआवजे क े हकदार ह�गे। य�द भू�म अ�धग्र अ�ध�नयम, 1894 क� धारा 31 क े तहत बाध्यत पूर� नह�ं क� गई है, तो उक् अ�ध�नयम क� धारा 34 क े तहत ब्या �दया जा सकता है। मुआवजा जमा न करने (न्यायाल म�) क े प�रणामस्वर भू�म अ�धग्र क� कायर्वाह का व्यपगमननह�ं होता है। पांच वषर या उससे अ�धक अव�ध क े �लए अ�धकांश जोत क े संबंध म� जमा न करने क� िस्थ� म�, 1894 अ�ध�नयम क� धारा 4 क े तहत भू�म अ�धग्र क े �लए अ�धसूचना क� तार�ख तक "भूस्वा�मय" को 2013 अ�ध�नयम क े तहत मुआवजे का भुगतान �कया जाए।

366.5. य�द �कसी व्यिक को 1894 अ�ध�नयम क� धारा 31(1) क े प्रावध क े अनुसार मुआवजा �दया गया है, तो वह यह दावा करने क े �लए स्वतं नह�ं है �क मुआवजे का भुगतान न करने या न्यायाल म� मुआवजा जमा न करने क े कारण धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र का व्यपगम हो गया है। भुगतान करने क� बाध्यत धारा 31(1) क े तहत रा�श को प्रद करक े पूर� हो जाती है। िजन भू-स्वा�मय ने मुआवजा लेने से इनकार कर �दया था या िजन्ह�न अ�धक मुआवजे क े �लए �सफा�रश �कए क� मांग क� थी, वे यह दावा नह�ं कर सकते �क 2013 क े अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत अ�धग्र क� प्र�क का व्यपगम हो गया था।

366.6. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े परन्तु को धारा 24(2) क े भाग क े रू म� माना जाना है, धारा 24(1)(ख) का भाग नह�ं।

366.7. 1894 अ�ध�नयम क े तहत और जैसा �क धारा 24(2) क े तहत प्रस्ता है, कब्ज लेने का तर�का पंचनामा/�ापन प्रस् करने क े द्वार है। एक बार 1894 क े अ�ध�नयम क� धारा 16 क े तहत कब्ज लेने पर अ�ध�नणर् पा�रत हो जाने क े बाद, भू�म राज्य म� �न�हत हो जाती है, 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) क े तहत कोई �न�न�हर्तीकर का प्रावध नह�ं है, क्य�� एक बार कब्ज लेने क े बाद धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगमन नह�ं है।

366.8. कायर्वा�हय� के समझे गए व्यपगमन क प्रस्ता�वत करने वा धारा 24(2) क े प्रावध उस िस्थ� म� लागू होते ह� जब �दनांक 1-1-2014 तक संबं�धत प्रा�धका क े पास भू�म अ�धग्रहण हेतु लं�ब एक कायर्वाह� म� प�धकार�गण अपनी �निष्क्रयता कारण 2013 क े लागू होने से पूवर पांच साल या उससे अ�धक समय तक कब्ज लेने और मुआवजे का भुगतान करने म� �वफल रहे ह�। न्यायाल द्वार पा�रत अंत�रम आदेश� क े अिस्तत क� अव�ध को पांच वषर क� गणना म� न जोड़ा जाए।

366.9. 2013 अ�ध�नयम क� धारा 24(2) भू�म अ�धग्र क� पूणर हो चुक� कायर्वाह क� वैधता पर सवाल उठाने क े �लए नए वाद हेतुक को जन् नह�ं देती है। धारा 24, 2013 अ�ध�नयम क े लागू होने क� �त�थ अथार् 1-1- 2014 को लं�बत �कसी कायर्वाह क े �लए लागू होती है। यह न तो पुराने और समयबद् दाव� को पुनज��वत करती है और न ह� पूणर्हो चुक� कायर्वाह को �फर से शुरू करत है और न ह� भू�म मा�लक� को अ�धग्र को अवैध घो�षत करने क े �लए अदालत क े बजाय ट्रेज म� मुआवजे को जमा करने क े तर�क े क� वैधता पर सवाल उठाने क� अनुम�त देती है। 2.[4] इस प्रक, इंदौर �वकास प्रा�धक (सुप्) क े मामले म� इस न्यायाल क े �नणर् क े अनुसार, अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24(2) को लागू करने क े �लए कब्ज न लेने और मुआवजा न देने क� दोहर� शत� को पूरा करना होगा। यह पाया गया है और माना गया है �क य�द �कसी एक शतर को पूरा नह�ं �कया गया है, तो अ�ध�नयम, 2013 क� धारा 24(2) क े तहत कोई व्यपगम नह�ं होगा। 2.[5] अन्यथा भ, उच् न्यायाल ने इस तथ् क� समु�चत रू से �ववेचना नह�ं क� है �क पूणर मुआवजा न देने क े संबंध म� �शकायत वषर 2014 म� पहल� बार क� गई थी अथार् अ�ध�नणर् पा�रत होने क� तार�ख से 24 वषर क� अव�ध क े बाद और �वभाग क� ओर से यह �व�शष् मामला था �क नक्श मुंतज़�मन क� फट� हुई िस्थ� क े कारण भू�म क े संबंध म� मुआवजे क े भुगतान को सु�निश्च नह�ं �कया जा सका। यह प्रद�श करने क े �लए अ�भलेख पर क ु छ भी नह�ं है �क जब तक उच् न्यायाल क े सम� �रट या�चका दायर क� गई थी, तब तक �कसी भी समय पूणर मुआवजा न देने क कोई �शकायत क� गई थी। जैसा भी हो, तथ् यह है �क �ववा�दत भू�म का कब्ज ले �लया गया था और �दनांक 23.09.1981 को लाभाथ� �वभाग को स�प �दया गया था। इन प�रिस्थ�तय म�, इस न्यायाल द्वार इंदौर �वकास प्रा�धक (सुप्) क े मामले �नधार्�र कानून को लागू करते हुए, उच् न्यायाल द्वार पा�रत आ�े�पत �नणर् और आदेश पोषणीय नह�ं है।

3. उपरोक् को ध्या म� रखते हुए और ऊपर बताए गए कारण� से, उच् न्यायाल द्वार �रट या�चका (�स) सं. 5664/2014 म� यह घोषणा करते हुए �क प्रश् भू�म क े संबंध म� अ�धग्र को व्यपग माना गया है, आ�े�पत �नणर् और आदेश को एतद् द्वा रद् व अपास् �कया जाता है। भू�म एवं भवन �वभाग, राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल सरकार द्वार दायर क� गई �स�वल अपील को तदनुसार अनुम�त द� जाती है। कोई जुमार्न नह�ं।

4. भू�म एवं भवन �वभाग, राष्ट् राजधानी �ेत �दल्ल सरकार द्वार दायर क� गई �स�वल अपील म� पा�रत आदेश, उक् अपील को अनुम�त देने और उपरोक्त अनुसा �रट या�चका (�स) सं. 5664/2014 म� उच् न्यायाल द्वार पा�रत �नणर् व आदेश को रद् व अपास् करने को ध्या म� रखते हुए, �दल्ल �वकास प्रा�धक द्वार दायर क� गई �स�वल अपील, िजसका इस आदेश द्वारा �नपटान �कया जाता ह, म� आगे �कसी और आदेश को पा�रत करने क� आवश्यकत नह�ं है। लं�बत आवेदन, य�द कोई हो, का भी �नपटान �कया जाता है।.............................न्य. [एम. आर. शाह].............................न्य. [�हमा कोहल�] नई �दल्ल; 20 जनवर�, 2023. (Translation has been done through AI Tool: SUVAS) अस्वीकर: देशी भाषा म� �नणर् का अनुवाद मुकद्द्मेब क े सी�मत प्रय हेतु �कया गया है ता�क वो अपनी भाषा म� इसे समझ सक � एवं यह �कसी अन् प्रयो हेतु प्रय नह�ं �कया जाएगा| समस् कायार्लय एवं व्यावहा�र प्रयोज हेतु �नणर् का अंग्रे स्वर ह� अ�भप्रमा� माना जाएगा और कायार्न्व तथा लागू �कए जाने हेतु उसे ह� वर�यता द� जाएगी।