Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 6693 वर्ष! 2022
मेसस! इंति%यन मेति%सिसन्स फामा!स्युवि*कल्स
कॉप रेशन लिलविम*े% ....अपीलक ा!
बनाम
क
े रल आयुव2वि3क कोऑपरेवि*व सोसाइ*ी
लिलविम*े% एवं अन्य ..... प्रत्यर्थी9गण
और सार्थी में
सिसविवल अपील संख्या 6694 वर्ष! 2022
.
विन ण! य
भार क
े मुख्य न्याया ीश %ॉ. नंजय वाई चंद्रचूड़
इस विनण!य को विवश्लेर्षण की सुविव ा क
े लिलए विनम्नलिललिG भागों में विवभासिज
विकया गया हैः vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
1.0 थ्य
2.0 3लीलें
3.0 विवश्लेर्षण
3.1 राज्य की उ3ार ा:शविQ और क !व्य का सम्मिम्मश्रण
3.2 सरकारी अनुबं ों की न्यातियक समीक्षा:विवस् ार और
3ायराविनविव3ाःएक संवै ाविनक आवश्यक ा?
3.3 परिरचालन वि3शा-विन32शों क
े प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) का विनव!चन।
3.4 आईएमपीसीएल को सरकारी अनुबं 3ेने की वै ा.
1 प्रर्थीम प्रत्यर्थी9, क
े रल आयुव2वि3क सहकारी सविमति लिलविम*े% ने भार ीय
तिचविकत्सा और्षति विनगम लिलविम*े%1
क
े पक्ष में उत्तर प्र3ेश राज्य द्वारा जारी
आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क
े आ3ेश को चुनौ ी 3ेने क
े लिलए संविव ान क
े
अनुच्छे3 226 क
े ह उच्च न्यायालय, इलाहाबा3 की लGनऊ पीठ क
े
समक्ष काय!वाही संम्मिस्र्थी की। 18 अक्*ूबर 2019 क
े एक फ
ै सले द्वारा, उच्च
न्यायालय की एक Gण्% पीठ ने यातिचका को स्वीकार कर लिलया और विन32श
वि3या विक उत्तर प्र3ेश राज्य को विनविव3ाएं आमंविj करने क
े बा3 एक पार3श9
प्रविkया अपनाकर आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 करनी चाविहए।उत्तर प्र3ेश
राज्य और आईएमपीसीएल ने उच्च न्यायालय क
े फ
ै सले क
े लिGलाफ संविव ान
क
े अनुच्छे3 136 क
े ह काय!वाही संम्मिस्र्थी की।मुख्य विववाद्यक विबन्3ु यह
है विक क्या राष्ट्रीय आयुर्ष विमशन2
क
े परिरचालन वि3शाविन32शों क
े प्रस् र 4(vi)(vi)()
(vi)(G) को 3ेG े हुए, अपीलक ा! विनविव3ाएं आमंविj विकए विबना क
े वल
आईएमपीसीएल से आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 कर सक ा र्थीा।
1.0 थ्य
1 "आईएमपीसीएल"
2 "एनएएम" vLohdj.k
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
JUDGMENT
2. सिस ंबर 2014 में, आयुर्ष विवभाग, स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय, भार सरकार ने आयुर्ष तिचविकत्सा प्रणाली को बढ़ावा 3ेने और लाग प्रभावी आयुर्ष सेवाएं प्र3ान करने क े लिलए अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी एनएएम की शुरुआ की।एनएएम क े परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 3 (vi)(i)(i)() में प्राव ान है विक स्वीकाय! सहाय ा का 75 प्रति श क ें द्र सरकार द्वारा अनु3ान सहाय ा क े रूप में प्र3ान विकया जाएगा, जबविक शेर्ष 25 प्रति श राज्यों द्वारा पूरा विकया जाना चाविहए, सिसवाय उत्तर-पूव[9] राज्यों में जहां क ें द्र और राज्यों द्वारा सहाय ा 90:10 क े अनुपा में होगी।
3. प्रस् र 4 (vi)(vi)() आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए वि3शाविन32श प्र3ान कर ा है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(b) ) में कहा गया है विक अनु3ान सहाय ा का 'कम से कम' 50 प्रति श आईएमपीसीएल या राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों3 क े ह साव!जविनक क्षेj क े उपkमों, फाम2सिसयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाना चाविहए।परिरचालन वि3शा-विन32शों का प्रस् र 4(vi)(vi)() नीचे वि3या गया हैः "(vi)(vi)()(vi)(क) विमशन क े काया!न्वयन क े लिलए आवश्यक और्षति यों और 3वाओं को आयुर्ष विवभाग, भार सरकार द्वारा प्रकाशिश आयुव23, यूनानी, सिसद्ध और होम्योपैर्थीी क े लिलए आवश्यक 3वाओं की सूची (vi)(ई%ीएल) से Gरी3ना होगा। (vi)(G) आयुर्ष और्षति यों और 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने की आवश्यक ा को ध्यान में रG े हुए, 3ी गई अनु3ान सहाय ा का कम से कम 50 प्रति श मेसस! इंति%यन मेति%सिसन फामा!स्युवि*कल कॉप रेशन लिलविम*े% (vi)(क ें द्रीय साव!जविनक क्षेj का एक उपkम) या राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों की विवविनमा!ण इकाइयों क े ह साव!जविनक क्षेj क े उपkम, फाम2सिसयों से और सिजनका अच्छा विवविनमा!ण प्रर्थीा (vi)(जीएमपी) अनुपालन हो, से 3वाओं की Gरी3 करने क े लिलए उपयोग विकया जाना चाविहए। (vi)(ग) 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विमशन क े ह वि3ए गए शेर्ष अनु3ान का उपयोग आयुर्ष विवभाग, भार सरकार द्वारा प्रकाशिश आयुव23, यूनानी, 3 “पी.एस.यू” vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सिसद्ध और होम्योपैर्थीी की आवश्यक और्षति यों की सूची (vi)(ई%ीएल) क े अनुसार वै विवविनमा!ण लाइसेंस रGने वाली अन्य अच्छी विवविनमा!ण प्रर्थीाओं (vi)(जीएमपी) अनुपालन इकाइयों से 3वाएं Gरी3ने क े लिलए विकया जा सक ा है। (vi)(घ) वांशिछ उद्देश्यों को प्राप्त करने क े लिलए आवश्यक विवशिभन्न घ*कों क े ह 3वा/आवश्यक और्षति यों क े लिलए स्वीक ृ राशिश में से प्रार्थीविमक तिचविकत्सा क े लिलए %्रेसिंसग आइ*म आवि3 जैसी आवश्यक गैर -3वा वस् ुओं को इस उद्देश्य क े लिलए स्वीक ृ क ु ल राशिश क े पांच प्रति श की सीमा क े अ ीन प्र3ान विकया जा सक ा है।"
4. उत्तर प्र3ेश राज्य आयुर्ष सविमति एक एकल विवk े ा, अर्थीा! ् आईएमपीसीएल, जो अपीलक ा! है, से आयुव2वि3क 3वाएँ Gरी3 रही है। आईएमपीसीएल को विबना विनविव3ा प्रविkया क े नामांकन क े आ ार पर Gरी3 आ3ेश वि3या गया र्थीा।पहला प्रत्यर्थी9 क े रल सहकारी सविमति अति विनयम 1969 क े ह एक पंजीक ृ सहकारी सविमति है।2 माच! 1985 को, पहले प्रत्यर्थी9 को और्षति और सौं3य! प्रसा न विनयमावली 1945 क े प्राव ानों क े ह विबkी क े लिलए आयुव2वि3क और यूनानी और्षति यों क े विनमा!ण का लाइसेंस वि3या गया र्थीा। 31 अगस् 2016 को, पहले प्रत्यर्थी9 को भी अच्छी विवविनमा!ण प्रर्थीा इकाई[4] क े रूप में प्रमाशिण विकया गया र्थीा।
5. 30 अक्*ूबर 2017 को, पहले प्रत्यर्थी9 ने प्र ान सतिचव को मौजू3ा सरकारी नीति क े अनुसार आयुव2वि3क 3वाओं की आपूर्ति क े लिलए सी े Gरी3ने का विन32श 3ेने या Gरी3 क े लिलए विनविव3ा प्रविkया शुरू करने क े लिलए एक अभ्यावे3न वि3या।प्रर्थीम प्रत्यर्थी9 ने कहा विक वह एनएएम क े ह आयुव2वि3क 3वाओं की आपूर्ति करने क े लिलए पाj है और एक एमएसएमई पंजीक ृ इकाई क े रूप में, वह अति मानी Gरी3 क े लिलए नीति ढांचे क े ह पाj है।21 वि3संबर 2018 को विमशन क े विन3ेशक को भी ऐसा ही अभ्यावे3न वि3या गया र्थीा। 4 "जीएमपी" vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
6. प्रर्थीम प्रत्यर्थी9 ने संविव ान क े अनुच्छे3 226 क े ह एक यातिचका 3ायर की सिजसमें आशंका ज ाई गई विक आईएमपीसीएल को 2019-20 क े लिलए एक Gरी3 आ3ेश जारी विकया जाने वाला है।पहले प्रत्यर्थी9 ने आईएमपीसीएल क े पक्ष में Gरी3 आ3ेश को चुनौ ी 3ी और एक विनविव3ा प्रविkया क े माध्यम से राष्ट्रीय आयुर्ष विमशन काय!kम क े ह आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विन32श 3ेने की मांग की।
7. उच्च न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया विक 'क े वल आईएमपीसीएल से आयुव2वि3क 3वाएँ Gरी3ने क े लिलए प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा अपनाई गई प्रर्थीा' अवै है।उच्च न्यायालय ने कहा विक परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4 क े ह, अपीलक ा! को आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विवविह अति ष्ठानों से विनविव3ाएं आमंविj करनी चाविहए।अपीलक ा! को आईएमपीसीएल से 3वाएँ Gरी3ने की अनुमति 3ी गई र्थीी क्योंविक वर्ष! 2019-20 क े लिलए पहले से ही भुग ान विकया जा चुका र्थीा, 3वाओं क े लिलए 50 प्रति श क का Gरी3 आ3ेश आईएमपीसीएल को पहले ही वि3या जा चुका र्थीा और 11 करोड़ रुपये का पूरा भुग ान विकया जा चुका र्थीा। अपीलक ा! को शेर्ष आपूर्ति क े लिलए प्रति स्प 9 3रों और और्षति यों की गुणवत्ता क े लिलए विनविव3ाएं आमंविj करने का विन32श वि3या गया र्थीा।उच्च न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया विकः (vi)(i)() परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4 में आयुव2वि3क और्षति यों और 3वाओं की Gरी3 क े लिलए 'स्रो ' प्र3ान विकए गए हैं। (vi)(i)(i)() प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) में प्राव ान है विक अनु3ान सहाय ा का 50 प्रति श आईएमपीसीएल या राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह अन्य साव!जविनक क्षेj क े उपkमों और फाम2सिसयों से आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाएगा। (vi)(i)(i)(i)() राज्य सरकारों या सहकारी सविमति यों क े ह फाम2सिसयों और साव!जविनक क्षेj क े उपkमों से विनमंjण 3वाओं की 3रों और गुणवत्ता पर प्रति स्प ा! को बढ़ावा 3ेगा। (vi)(i)(v) भार सरकार द्वारा 8 मई 2008 को जारी ज्ञापन में कहा गया है विक 3ेश में आयुव2वि3क और यूनानी 3वाओं क े लिलए पूरी रह से विवकसिस और्ष ीय मानकों की अनुपम्मिस्र्थीति में, क ें द्र सरकार की स्वास्थ्य योजना अनुसं ान परिरर्ष3ें यह vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सुविनतिx करने क े लिलए पूरी रह से सुसलि• नहीं हैं विक Gरी3ी गई 3वाएं सही गुणवत्ता की हैं।प्रस् र 4 (vi)(vi)()(vi)(b) ) 3वाओं की गुणवत्ता पर जोर 3े ा है।अशिभलेG पर यह वि3Gाने क े लिलए क ु छ भी नहीं है विक आईएमपीसीएल गुणवत्ता वाली और्षति यों का उत्पा3न करने वाली एकमाj इकाई है; (vi)(v) 3वाओं की गुणवत्ता की कोई ुलना ब क नहीं की जा सक ी जब क आईएमपीसीएल र्थीा राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह साव!जविनक क्षेj क े उपkम की फाम2सिसयों से विनविव3ाएं आमंविj नहीं की जा ी हैं; और (vi)(vi)() आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए अनु3ान सहाय ा का कम से कम 50 प्रति श का उपयोग परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) में विनर्दि3ष्ट अति ष्ठानों क े बीच विनविव3ाएं आमंविj विकए जाने क े बा3 ही विकया जाना चाविहए। शेर्ष सहाय ा अनु3ान, यवि3 कोई हो, का उपयोग प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(ग) में विनर्दि3ष्ट रीक े से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विकया जाएगा।
2.0 3लीलें
8. आईएमपीसीएल की ओर से पेश अति वQा श्री नरेश कौशिशक ने विनम्नलिललिG क ! वि3एः (vi)(i)() भार सरकार क े पास आईएमपीसीएल क े 98.11 प्रति श शेयर हैं और
1.89 प्रति श शेयर क ु माऊ ं मं%ल विवकास विनगम लिलविम*े% क े माध्यम से उत्तराGं% सरकार क े पास हैं।आईएमपीसीएल की स्र्थीापना क ें द्र सरकार क े स्वास्थ्य काय!kमों की जरूर ों को पूरा करने और आयुर्ष 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने क े लिलए की गई है। (vi)(i)(i)() आईएमपीसीएल क े अविद्व ीय संगठनात्मक ढांचे क े कारण, यह विकफाय ी मूल्य पर गुणवत्तापूण! 3वाओं की आपूर्ति क े लिलए सबसे उपयुQ है।आईएमपीसीएल द्वारा विनर्दिम 3वाओं की कीम ों की क ें द्रीय विवत्त मंjालय द्वारा समय-समय पर जांच की जा ी है।अन्य संगठनों से 3वाओं की Gरी3 भी आईएमपीसीएल की 3रों पर हो ी है क्योंविक इन 3रों को सव त्तम संभव 3र माना जा ा है।इसक े अलावा, आईएमपीसीएल आयुव2वि3क 3वाओं क े vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd लिलए एकमाj सरकारी विवविनमा!ण क ं पनी है सिजसकी अपनी प्रमाशिण 3वा परीक्षण प्रयोगशाला है; (vi)(i)(i)(i)() 16 जुलाई 1994 को भार सरकार ने एक आ3ेश जारी विकया र्थीा सिजसमें उसने विनण!य लिलया र्थीा विक आयुव2वि3क 3वाओं को विनविव3ाओं क े माध्यम से नहीं Gरी3ा जा सक ा है क्योंविक (vi)(क) 3वा बनाने क े लिलए आवश्यक कच्चे माल की कीम ों में व्यापक शिभन्न ा है और उपयोग विकए गए कच्चे माल की गुणवत्ता क े आ ार पर 3वा की लाग अलग-अलग होगी; और (vi)(G) कच्चे माल और उनकी गुणवत्ता क े सं3भ! में 3वाओं की स*ीक संरचना का परीक्षण करना संभव नहीं है; (vi)(i)(v) भार सरकार क े आयुर्ष मंjालय ने विवशिभन्न अवसरों पर आईएमपीसीएल से सी े आयुव2वि3क 3वाएं Gरी3ने की सिसफारिरश की है; (vi)(v) Gरी3 क े वल विनविव3ा क े माध्यम से वहां हो सक ी है जहां राज्य संपलित्त क े व्ययन का प्रस् ाव कर ा है।चूंविक इस मामले में, राज्य की संपलित्त का कोई व्ययन नहीं है, इसलिलए उच्च न्यायालय को यह विन ा!रिर करने क े लिलए क े वल प्रासंविगक सामग्री को 3ेGना चाविहए र्थीा विक क्या आईएमपीसीएल से 3वाएं Gरी3ने में कोई अप्रत्यक्ष उद्देश्य शाविमल है।(vi)(vi)() आईएमपीसीएल एक विनजी उद्यम नहीं है।जब विबkी Gुले बाजार में नहीं हो ी है ो एकाति कार की कोई गुंजाइश नहीं है, जहां 3वाओं की कीम ों की जांच विवत्त मंjालय क े व्यय विवभाग द्वारा की जा ी है और अति ष्ठापन का प्रबं न आयुर्ष मंjालय क े अति कारिरयों द्वारा विकया जा ा है; (vi)(vi)(i)() परिरचालन वि3शाविन32शों का प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) "या" शब्3 क े उपयोग से आईएमपीसीएल को राज्य सरकार और सहकारी सविमति यों क े अ ीन अन्य साव!जविनक उपkमों, फाम2सिसयों से अलग कर ा है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(b) ) आयुर्ष और्षति यों और 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने पर जोर 3े ा है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(b) ) में 'कम से कम' वाक्यांश क े वल Gरी3 क े लिलए एक न्यून म मान3ं% प्र3ान कर ा है और एक ऊपरी सीमा विन ा!रिर नहीं कर ा है; और vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (vi)(vi)(i)(i)() प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) और 4(vi)(vi)()(vi)(ग) को संयुQ रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट हो ा है विक राज्यों को आईएमपीसीएल या राज्य सरकार और सहकारी सविमति यों क े अ ीन विकसी अन्य साव!जविनक क्षेj क े उपkम और फाम2सिसयों से 3वाएं Gरी3ने का विववेकाति कार है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) में उसि•लिG अति ष्ठापनों से 3वाएं Gरी3ने क े बा3 जो बज* बचा है, उसका उपयोग अन्य जीएमपी-अनुपालन करने वाले अति ष्ठापनों से 3वाएं Gरी3ने क े लिलए विकया जा सक ा है। भाग G
9. प्रर्थीम प्रत्यर्थी9 की ओर से पेश अति वQा श्री कलीश्वरम राज ने विनम्नलिललिG क ! प्रस् ु विकए: (vi)(i)() प्रस् र 4(vi)(vi)() क े वल उन अति ष्ठापनों को 3शा! ा है सिजनसे 3वाएं Gरी3ी जा सक ी हैं- यानी विकससे और न विक क ै सेः (vi)(ए) परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4 (vi)(vi)()(vi)(G) में उन अति ष्ठापनों को विन ा!रिर विकया गया है सिजनसे कम से कम 50 प्रति श 3वाओं की Gरी3 की जानी चाविहए।'या' शब्3 का उपयोग इंविग कर ा है विक प्रस् र में उसि•लिG सभी अति ष्ठापन आईएमपीसीएल की रह ही 3वाओं की आपूर्ति करने क े लिलए समान रूप से पाj हैं; और (vi)(G) जबविक प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) यह विन ा!रिर नहीं कर ा है विक Gरी3 एक विनविव3ा प्रविkया क े माध्यम से होनी चाविहए, इसका म लब यह नहीं है विक विनविव3ा की प्रविkया को प्राव ान में नहीं पढ़ा जा सक ा है।यवि3 प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) की व्याख्या विबना विनविव3ा प्रविkया क े विकसी भी उसि•लिG अति ष्ठापन से Gरी3 की अनुमति 3ेने क े लिलए की जा ी है, ो वही व्याख्या प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(ग) पर भी लागू होगी। इसक े अलावा, इसका म लब यह होगा विक विनजी संस्र्थीाओं से Gरी3 क े लिलए भी विनविव3ा प्रविkया करने की कोई आवश्यक ा नहीं है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (vi)(i)(i)() उत्तर प्र3ेश राज्य 3वाओं की Gरी3 क े लिलए पाj संस्र्थीाओं में से विकसी एक को मनमाने ढंग से प्रार्थीविमक ा नहीं 3े सक ी है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) में उसि•लिG सभी अति ष्ठापनों को समान आ ार पर मान्य ा 3ी गई है।इसलिलए Gरी3 एक विनष्पक्ष प्रविkया द्वारा होनी चाविहए सिजसमें सभी पाj अति ष्ठापनों को Gरी3 आ3ेश प्राप्त करने का अवसर वि3या जा ा है। (vi)(i)(i)(i)() यह एक स्र्थीाविप सिसद्धां है विक व्यापार की प्रक ृ ति को ध्यान में रG े हुए या जहां कोई उतिच विवकल्प मौजू3 नहीं है, असा ारण परिरम्मिस्र्थीति यों को छोड़कर राज्य की उ3ार ा(vi)(3ानशील ा) को साव!जविनक नीलामी द्वारा विव रिर विकया जाना चाविहए। व !मान मामले में ऐसी कोई असा ारण परिरम्मिस्र्थीति याँ नहीं हैं विक 3वाओं की Gरी3 क े वल आईएमपीसीएल से ही की जाए; और (vi)(i)(v) आईएमपीसीएल से Gरी3ी गई 3वाओं की कीम की लेGा परीक्षा करने क े सीविम उद्देश्य क े लिलए विवत्त मंjालय क े व्यय विवभाग द्वारा जांच की जा ी है।राष्ट्रीय और्षति मूल्य विन ा!रण प्राति करण 3वाओं की कीम ों को मंजूरी 3े ा है।विवत्त मंjालय क े पास आयुव2वि3क 3वाओं की कीम ें विन ा!रिर करने की शविQ या विवशेर्षज्ञ ा नहीं है।
3.0 विवश्लेर्षण
10. परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) में विन ा!रिर विकया गया है विक सहाय ा अनु3ान का कम से कम 50 प्रति श (vi)(i)() आईएमपीसीएल, या (vi)(i)(i)() राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह साव!जविनक उपkमों और फाम2सिसयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाएगा।यह प्राव ान आगे इंविग कर ा है विक आयुर्ष और्षति यों और 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने क े लिलए, 3वाओं का विनमा!ण उनकी विवविनमा!ण इकाइयों में विकया जाना चाविहए जो अच्छी विवविनमा!ण प्रर्थीाओं (vi)(जीएमपी) का अनुपालन कर ी हों।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(ग) में कहा गया है विक शेर्ष सहाय ा अनु3ान का उपयोग वै विवविनमा!ण लाइसेंस वाली अन्य अच्छी विवविनमा!ण प्रर्थीा (vi)(जीएमपी) अनुपालन इकाइयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विकया जा सक ा है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd अपीलक ा! ने नामांकन क े माध्यम से परिरचालन वि3शाविन32शों क े प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) क े ह आईएमपीसीएल को आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 का अनुबं वि3या र्थीा, सिजससे प्रस् र में उसि•लिG अन्य इकाइयों को ह*ा वि3या गया र्थीा।अपीलक ा! की इस काय! को मनमाना और अनुच्छे3 14 का उ•ंघन ब ा े हुए चुनौ ी 3ी गई है।प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) की व्याख्या करने से पहले यह विन ा!रिर करने क े लिलए विक क्या अपीलक ा! का काय! कानून क े ह अनुज्ञेय है, सरकारी अनुबं ों की न्यातियक समीक्षा की सीमा से संबंति कानून पर चचा! की जानी चाविहए। 3.[1] राज्य की उ3ार ाःशविQ और क !व्य का सम्मिम्मश्रण
11. कल्याणकारी राज्य संविव ान द्वारा मान्य ा प्राप्त सामासिजक-आर्थिर्थीक अति कारों को प्राप्त करने में सहाय ा करने में महत्वपूण! भूविमका विनभा ा है। राज्य द्वारा अपने संवै ाविनक 3ातियत्वों क े ह प्र3ान विकए जाने वाले सामासिजक कल्याण लाभों को आम ौर पर 'उ3ारशील ा' की भार्षा में समझा जा ा है, यह एक ऐसा शब्3 है सिजसका उपयोग उ3ार 3ान का वण!न करने क े लिलए विकया जा ा है।सामासिजक सुरक्षा लाभों, नौकरिरयों, व्यावसातियक लाइसेंसों, अनुबं ों और साव!जविनक संसा नों क े उपयोग से लेकर सरकार क े सभी काय™ को सरकारी उ3ार ा करार 3ेने से सैद्धांति क गल फहविमयां पै3ा हो ी हैं।इसका कारण यह है विक यह राज्य की शविQ को क !व्य क े सार्थी जोड़ ा है।संविव ान नागरिरकों क े कल्याण को प्राप्त करने क े प्रयास को एक वांछनीय लक्ष्य क े रूप में मान्य ा 3े ा है।ऐसा करने में संविव ान राज्य को नागरिरकों की भलाई सुविनतिx करने का क !व्य सौंप ा है।नागरिरकों की भलाई सुविनतिx करने क े उद्देश्य से विक जाने वाले सरकारी काय™ को 'उ3ार ा' क े चश्मे से नहीं 3ेGा जा सक ा है।इस रह की शब्3ावली का उपयोग उस सामासिजक अनुबं की पविवj ा को कम कर ा है जो 'भार क े लोगों' ने अपने विह ों की रक्षा और सुरक्षा क े लिलए राज्य क े सार्थी विकया र्थीा। 3.[2] सरकारी अनुबं ों की न्यातियक समीक्षा:विवस् ार और 3ायरा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
12. प्रस् र 4(vi)(vi)()(vi)(G) उन संस्र्थीाओं को विवविह कर ा है सिजनसे आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 की जा सक ी है।प्रस् र में वह रीका विवविह नहीं विकया गया है सिजसक े माध्यम से उन्हें Gरी3ा जा सक ा है।अपीलक ा! का क ! है विक चूंविक Gरी3 की विवति विन ा!रिर नहीं है, इसलिलए उसे 'नामांकन' क े माध्यम से 3वाएं Gरी3ने का विववेकाति कार है।3ूसरी ओर, प्रत्यर्थी9 का क ! है विक क े वल इसलिलए विक परिरचालन वि3शाविन32श Gरी3 की विवति विन ा!रिर नहीं कर े हैं, इसलिलए काय!पालिलका को 'नामांकन' क े माध्यम से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए बेलगाम विववेकाति कार नहीं वि3या जा सक ा है।
13. 1950 क े 3शक की शुरुआ में, सरकार द्वारा अनुबं ों को समाप्त करने की प्रविkया की न्यातियक समीक्षा सीविम र्थीी।अ3ाल ों ने सरकारी नीति क े आ ार पर राज्य को उतिच सम्मान 3ेने की अनुमति 3ी। सी. क े. अच्यु न बनाम क े रल राज्य[5] में, इस न्यायालय की एक संविव ान पीठ ने कहा विक यह सरकार का विववेकाति कार है विक 'वह अपनी पसं3 क े अनुसार विकसी व्यविQ को चुन सक े, ाविक उन अनुबं ों को पूरा कर सक े सिजन्हें वो पूरा करना चाह ी है।'अ3ाल ने कहा विक जब एक पक्ष को 3ूसरे क े सापेक्ष चुना जा ा है, ो पीविड़ पक्ष अनुच्छे3 14 क े संरक्षण का 3ावा नहीं कर सक ा है क्योंविक सरकार क े पास यह चुनने का विववेकाति कार है विक वह विकसक े सार्थी अनुबं करेगी।
14. वर्ष™ से, इस न्यायालय ने सरकारी काय! की वै ा का परीक्षण करने क े लिलए अनुच्छे3 14 क े ह गैर-मनमानी का मानक लागू विकया है। रमन 3याराम शेट्टी बनाम भार ीय अं रा!ष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राति करण[6] में, इस न्यायालय की ीन-न्याया ीशों की पीठ ने कहा विक सरकार क े पास राज्य की उ3ार ा(vi)(3ानशील ा) को अनु3ान करने में असीविम विववेकाति कार नहीं 5 एआईआर 1959 एससी 490 6 1979 (vi)(3) एससीसी 489; स्*र्लिंलग क ं प्यू*र लिलविम*े% बनाम मेसस! एम एं% पम्मिब्लक े शन लिलविम*े%, (vi)(1993) 1 एससीसी 445; जेस्पर आई स्लोंग बनाम मेघालय राज्य, (vi)(2004) 11 एससीसी 485; एसोसिसएशन ऑफ रसिजस्*्रेशन प्लेट्स बनाम भार संघ, (vi)(2005) 1 एससीसी 679 भी 3ेGें। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd है और उसे विनष्पक्ष ा से काय! करना चाविहए। न्यू होराइजन्स लिलविम*े% बनाम भार संघ में7, 3ूरसंचार विवभाग ने *ेलीफोन विन32शिशकाओं क े मुद्रण, सिजल्3साजी और आपूर्ति क े लिलए सीलबं3 विनविव3ाएं आमंविj कीं। विनविव3ाक ा!ओं क े लिलए विन ा!रिर पाj ा मान3ं%ों की वै ा का विन ा!रण कर े समय, न्यायालय ने पाया विक अनुबं कर े समय राज्य की म्मिस्र्थीति एक विनजी व्यविQ क े समान नहीं है।न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया विक सरकार जन ा क े सार्थी व्यवहार कर े समय मनमाने ढंग से काय! नहीं कर सक ी है, चाहे वह नौकरी 3े े समय हो या अनुबं कर े समय।प्रासंविगक वि*प्पशिणयों को नीचे उद् ृ विकया गया हैः
17. शुरुआ में, हम इंविग कर सक े हैं विक अनुबं करने क े मामले में, राज्य एक ऐसे विनजी व्यविQ क े समान नहीं है जो अपनी पसं3 क े विकसी भी व्यविQ क े सार्थी अनुबं करने क े लिलए स्व ंj है। राज्य अपने विवशिभन्न काय! कर े समय, संविव ान क े अनुच्छे3 14 क े अति 3ेश द्वारा शासिस हो ा है जो राज्य क े काय! में मनमानेपन को अपवर्जिज कर ा है और राज्य से विनष्पक्ष और यर्थीोतिच रूप से काय! करने की अपेक्षा कर ा है।अनुबं 3ेने क े मामले में राज्य क े काय! को इस मान3ं% को पूरा करना होगा। इसक े अलावा एक अनुबं में या ो राज्य क े Gजाने से Gच! या साव!जविनक राजस्व में वृतिद्ध शाविमल होगी और इसक े परिरणामस्वरूप अनुबं 3ेने क े लिलए व्यविQ क े चयन क े मामले में विववेकाति कार का उपयोग इस रह क े चयन में शाविमल साव!जविनक विह को ध्यान में रG े हुए विकया जाना चाविहए।इसलिलए इस न्यायालय क े विनण!यों में इस बा पर जोर वि3या गया है विक जन ा क े सार्थी व्यवहार कर े समय, चाहे नौकरी 3ेने या अनुबं करने या को*ा या लाइसेंस जारी करने या अन्य प्रकार की उ3ार ा प्र3ान करने में, सरकार अपनी इच्छानुसार मनमाने ढंग से काय! नहीं कर सक ी है और एक विनजी व्यविQ की रह काय! नहीं कर सक ी जो अपनी पंस[3] क े विकसी भी व्यविQ क े सार्थी संव्यवहार कर ा है, बम्मिल्क उसकी कार!वाई मानकों या 7 (vi)(1995) 1 एससीसी 478 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd मान3ं%ों क े अनुरूप होनी चाविहए जो मनमाने, क ! हीन या अप्रासंविगक नहीं हों। हालाँविक, यह माना जा ा है विक प्रशासविनक क्षेj में काम करने वाले प्रशासविनक विनकाय क े लिलए "स्वायत्त ा(vi)(विववेक)" का क ु छ उपाय आवश्यक है। (vi)(प्रभाव वर्ति ) 15 भार ीय Gाद्य विनगम बनाम मेसस! काम ेनू क ै *ल फी% इं%स्*्रीज[8] में, इस न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया विक संविव3ात्मक क्षेj में [.] राज्य और उसक े सभी उपकरणों को संविव ान क े अनुच्छे3 14 क े अनुरूप होना चाविहए। प्रत्यर्थी9 ने क्षति ग्रस् चावल क े भं%ार क े लिलए उसक े द्वारा प्रस् ु उच्च म विनविव3ा को स्वीकार करने से अपीलार्थी9 क े इनकार को चुनौ ी 3े े हुए उच्च न्यायालय क े समक्ष एक रिर* यातिचका 3ायर की।इस न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया: "7. संविव3ात्मक क्षेj में अन्य सभी राज्य काय™ की रह, राज्य और उसक े सभी उपकरणों को संविव ान क े अनुरूप होना चाविहए, सिजसमें मनमानी न करना एक महत्वपूण! पहलू है।साव!जविनक कानून में कोई विनरंक ु श विववेकाति कार नहीं हैःएक साव!जविनक प्राति करण क े पास क े वल साव!जविनक भलाई क े लिलए उनका उपयोग करने की शविQयां हो ी हैं।यह विनष्पक्ष रूप से काय! करने और एक ऐसी प्रविkया को अपनाने का क !व्य लागू कर ा है जो 'कार!वाई में विनष्पक्ष' हो।अच्छे प्रशासन क े एक भाग रूप में, इस 3ातियत्व का उतिच पालन प्रत्येक नागरिरक में एक उतिच या वै अपेक्षा पै3ा कर ा है विक राज्य और उसक े उपकरणों क े सार्थी संव्यवहार में उनक े सार्थी विनष्पक्ष व्यवहार विकया जाए, यह त्व सभी राज्य काय™ में विनण!य लेने की प्रविkया का एक आवश्यक घ*क है।इसलिलए राज्य क े काय! में मनमानी न करने की इस आवश्यक ा को पूरा करने क े लिलए, विनण!य से प्रभाविव होने की संभावना वाले व्यविQयों की युविQयुQ या वै अपेक्षाओं पर विवचार करना और उन्हें उतिच महत्व 3ेना आवश्यक है या अन्यर्थीा शविQ क े प्रयोग में यह अनुतिच ा विकसी मामले में विनण!य की प्रामाशिणक ा(vi)(सद्भावना) को प्रभाविव करने क े अलावा शविQ क े 8 (vi)(1993) 1 एससीसी 71 भाग ग vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd 3ुरुपयोग या शविQ की अति क ा क े समान हो सक ी है। इस प्रकार विकए गए विनण!य को मनमानेपन क े आ ार पर चुनौ ी 3ी जाएगी। विवति का शासन शविQ क े प्रयोग में विववेक को पूरी रह से समाप्त नहीं कर ा है, क्योंविक यह अवास् विवक है, लेविकन न्यातियक समीक्षा द्वारा इसक े प्रयोग पर विनयंjण का प्राव ान कर ा है। 3.2.[1] विनविव3ाःएक संवै ाविनक आवश्यक ा?
16. इस न्यायालय ने विनरं र यह अशिभविन ा!रिर विकया है विक सरकारी अनुबं एक पार3श[9] प्रविkया द्वारा वि3ए जाने चाविहए।विनविव3ाएं आमंविj करने की प्रविkया प्रति स्प 9 संस्र्थीाओं क े लिलए एक समान अवसर सुविनतिx कर ी है। हालांविक ऐसी परिरम्मिस्र्थीति याँ हो सक ी हैं सिजनमें विनविव3ाओं को आमंविj करने या साव!जविनक नीलामी आयोसिज करने क े विनयम से ह*ने की आवश्यक ा हो ी हैं, लेविकन ह*ने का काय!(vi)(विवचलन) अनुतिच या भे3भावपूण!9 नहीं होना चाविहए। सें*र फॉर पम्मिब्लक इं*रेस्* लिलवि*गेशन बनाम भार संघ10 में, प्राक ृ ति क संसा नों को अलग कर े हुए 'पहले आओ पहले पाओ' नीति को मनमाना माना गया र्थीा।हालांविक, न्यायालय ने पाया विक यद्यविप नीलामी आवं*न का एक 'अति मान' रीका है, लेविकन इसे संवै ाविनक आवश्यक ा नहीं माना जा सक ा है।
17. विवशेर्ष सं3भ! संख्या 1/2012 क े वा3 में, प्राक ृ ति क संसा न क े आवं*न11 में, सें*र फॉर पम्मिब्लक इं*रेस्* लिलवि*गेशन (vi)(उपरोQ) में विनण!य की पृष्ठभूविम में एक राष्ट्रपति सं3भ! वि3या गया र्थीा, सिजसमें इस न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया र्थीा विक 2 जी रेति%यो स्पेक्*्रम आवंवि* करने क े लिलए उपयोग की जाने वाली 'पहले आओ पहले पाओ' का रीका मनमाना और अवै र्थीा। सं3भ! इस बा पर र्थीा विक क्या 'सभी क्षेjों में और सभी 9 मेसस! कस् ूरी लाल लक्ष्मी रेड्डी बनाम जम्मू और कश्मीर राज्य, (vi)(1980) 4 एससीसी 1; सतिच्च3ानं3 पां%े बनाम पतिxम बंगाल राज्य (vi)(1980) 4 एससीसी 1; हाजी *ी. एम. हस्साम रावर्थीर बनाम क े रल विवत्तीय विनगम (vi)(1988) 1 एससीसी 166 10 (vi)(2012) 3 एससीसी 1 10 (2012) 3 एस.सी.सी 1 11 (vi)(2012) 10 एससीसी 1 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd परिरम्मिस्र्थीति यों में सभी प्राक ृ ति क संसा नों क े विनराकरण का एकमाj अनुमेय रीका नीलामी का संचालन है'।न्यायमूर्ति Gेहर ने प्राक ृ ति क संसा न आवं*न (vi)(सुप्रा) क े मामले में, अपनी सहमति व्यQ कर े हुए कहा विक हालांविक अनुच्छे3 14 क े ह नीलामी क े पक्ष में कोई संवै ाविनक आ3ेश नहीं है, लेविकन नीलामी क े माध्यम से आवं*न क े विनयम से विवचलन को मनमानी और विनष्पक्ष ा क े आ ार पर परीक्षण विकया जाना चाविहए। इस सं3भ! में, विनम्नानुसार अवलोकन विकया गया: "148. हमारी राय में, प्राक े अलगाव/आवं*न का एक बेह र रीका होने क े बावजू3 नीलामी को सभी प्राक ृ ति क संसा नों क े अलगाव क े लिलए एक संवै ाविनक आवश्यक ा या सीमा नहीं माना जा सक ा है और इसलिलए, नीलामी क े अलावा हर विवति को संवै ाविनक जना3ेश क े विवपरी नहीं माना जा सक ा है।
149. उपरोQ उप3ेशों क े संबं में, हमारी राय है विक नीलामी को एक सा न क े रूप में संवै ाविनक सिसद्धां का 3जा! नहीं वि3या जा सक ा है।प्राक ृ ति क संसा नों का अलगाव एक नीति ग विनण!य है, और इसक े लिलए अपनाए गए सा न इस प्रकार काय!कारी विवशेर्षाति कार हैं।हालांविक, जब इस रह का नीति ग विनण!य विकसी सामासिजक या कल्याणकारी उद्देश्य से समर्थिर्थी नहीं हो ा है, और कीम ी और 3ुल!भ प्राक ृ ति क संसा नों को विनजी उद्यविमयों को अति क म लाभ क े व्यावसातियक उद्देश्यों क े लिलए अलग-र्थीलग कर वि3या जा ा है, ो प्रति स्प 9 और अति क म राजस्व वाले सा नों क े अलावा अन्य सा नों को अपनाना मनमाना हो सक ा है और संविव ान क े ह प्राव ानों का सामना करना पड़ सक ा है।इसलिलए, हमारा मानना है विक विकसी विवति को विन ा!रिर करने या प्रति बंति करने क े बजाय, प्राक े विनप*ान क े रीकों की न्यातियक जांच प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरम्मिस्र्थीति यों पर विनभ!र होनी चाविहए, उन सिसद्धां ों क े अनुरूप होगा जो हमने ऊपर उद्धघोविर्ष विकया हैं।ऐसा न करने पर, न्यायालय, न्यातियक समीक्षा की शविQ का प्रयोग कर े हुए, काय!कारी कार!वाई vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd को मनमाना, अनुतिच, अनुपयुQ और संविव ान क क े विवपरी होने क े कारण मनमाना करार 3ेगा।"
18. वसि•यनूर इयाका!ई प%ुकप्पु मैयम बनाम भार संघ12 में, इस न्यायालय की ीन-न्याया ीशों की पीठ ने विनण!य वि3या विक राज्य विनविव3ा द्वारा पानी, विबजली और कच्चे माल जैसे संसा नों को आवंवि* करने क े लिलए बाध्य नहीं है और एक विनजी उद्यमी क े सार्थी बा ची करने क े लिलए स्व ंj है।उस मामले में, पांति%चेरी सरकार ने कोई विवज्ञापन जारी विकए विबना या विनविव3ा आमंविj विकए विबना पांति%चेरी बं3रगाह क े विवकास क े लिलए एक समझौ ा विकया। इस न्यायालय क े द्वारा यह अव ारिर विकया गया विक पांति%चेरी सरकार द्वारा की गइ काय!वाही ऐति हासिसक, राजनीति क और अन्य कारणों से उतिच र्थीी क्योंविक क ें द्र शासिस प्र3ेश अभी क औद्योविगक रूप से विवकसिस नहीं हुआ है इसलिलए उद्यविमयों को उद्योग स्र्थीाविप करने क े लिलए एवं आकर्ष!क श ™ की पेशकश की जानी चाविहए।प्रासंविगक वि*प्पशिणयों को नीचे वर्थिण विकया गया हैः "171. इस रह क े मामले में जहां राज्य बं3रगाह क े विवकास को प्रोत्साविह करने क े उद्देश्य से पानी, विबजली, कच्चा माल आवि3 जैसे संसा नों का आवं*न कर रहा है, यह न्यायालय यह नहीं सोच ा है विक राज्य विवज्ञापन 3ेने और लोगों को यह ब ाने क े लिलए बाध्य है विक वह एक विवशेर्ष रीक े से बं3रगाह का विवकास चाह ा है और इस उद्देश्य क े लिलए प्रस् ाव लाने क े लिलए इच्छ ु क लोगों को आमंविj कर ा है।राज्य ऐसा करने का विवकल्प चुन सक ा है यवि3 वह उतिच समझ ा है और विकसी 3ी गई म्मिस्र्थीति में ऐसा करना राज्य क े लिलए फाय3ेमं3 साविब हो सक ा है, लेविकन यवि3 कोई विनजी पक्ष राज्य क े समक्ष आ ा है और बं3रगाह को विवकसिस करने का प्रस् ाव 3े ा है, ो राज्य विकसी भी संवै ाविनक 3ातियत्व का भंग नहीं करेगा यवि3 वह ऐसे पक्ष क े सार्थी बा ची कर ा है और बं3रगाह क े उद्देश्य से संसा न और अन्य सुविव ाएं प्र3ान करने क े लिलए सहम हो ा है। 12 (vi)(2009) 7 एससीसी 561 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
172. राज्य प्रत्यर्थी9 11 से कहने क े लिलए बाध्य नहीं है "क ृ पया प्र ीक्षा करें मैं पहले विवज्ञापन 3ूंगा, 3ेGूंगा विक क्या कोई अन्य प्रस् ाव आ रहे हैं और विफर सभी प्रस् ावों पर विवचार करने क े बा3, य करू ं गा विक क्या मुझे आपक े द्वारा बं3रगाह विवकसिस कराना चाविहए।"इस रह की प्रविkया पर जोर 3ेना सबसे अवास् विवक होगा, विवशेर्ष रूप से पांति%चेरी जैसे क्षेj में, जो ऐति हासिसक, राजनीति क और अन्य कारणों से अभी क औद्योविगक रूप से विवकसिस नहीं हुआ है और जहां उद्यविमयों को उद्योग स्र्थीाविप करने क े लिलए आकर्ष!क श ™ की पेशकश की जानी चाविहए।ऐसे मामले में राज्य को विकसी विनजी उद्यमी क े सार्थी बा ची करने क े लिलए स्व ंj होना चाविहए ाविक उसे बं3रगाह क े लिलए प्रेरिर विकया जा सक े और यवि3 राज्य ऐसे उद्यमी क े सार्थी बं3रगाह क े विवकास क े लिलए संसा न और अन्य सुविव ाएं प्र3ान करने क े लिलए अनुबं कर ा है, ो अनुबं को अमान्य नहीं माना जा सक ा है क्योंविक राज्य ने स3भाव, उतिच और साव!जविनक विह में काम विकया है।"
19. नगर विनगम बनाम अल फरहीम मांस विनया! क (vi)(पी) लिलविम*े%13 13 में, प्रत्यर्थी9 को अपीलार्थी9-विनगम क े स्वाविमत्व वाले बूचड़Gाने को चलाने क े लिलए एक वर्ष! क े लिलए लाइसेंस वि3या गया र्थीा। अनुज्ञविप्त की अवति पूरी होने पर, अपीलक ा! ने एक विवज्ञापन जारी कर नया अनुबं 3ेने क े लिलए आवे3न आमंविj विकए। प्रत्यर्थी9 ने विवज्ञापन को चुनौ ी 3ी।न्यायालय ने कहा विक यह अनुच्छे3 14 में अशिभविन ा!रिर गैर-मनमानी क े सिसद्धां की आवश्यक ा है विक राज्य, उसक े विनगमों, उपकरणों और एजेंसिसयों द्वारा अनुबं एक सामान्य विनयम क े रूप में साव!जविनक विनविव3ा द्वारा वि3ए जाने चाविहए।यह 3ेG े हुए विक साव!जविनक अनुबं ों क े अनु3ान में पार3र्थिश ा बनाए रGना आवश्यक है, न्यायालय ने फ ै सला सुनाया विक राज्य को क े वल विनविव3ा द्वारा अनुबं 3ेना चाविहए न विक विनजी बा ची द्वारा अनुबं वि3या जाना चाविहए।इस न्यायालय ने अशिभविन ा!रिर विकया विक एक अनुबं क े वल 'व्यापार या उ3ार ा की प्रक ृ ति या विकसी अन्य अच्छे कारण' को ध्यान में 13 (vi)(2006) 13 एससीसी 382 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd रG े हुए असा ारण परिरम्मिस्र्थीति यों में विनजी बा ची द्वारा वि3या जा सक ा है।क ु छ असा ारण परिरम्मिस्र्थीति याँ सिजन्हें सूचीबद्ध विकया गया र्थीा वे र्थीींः(vi)(ए) प्राक ृ ति क आप3ाओं और आपा म्मिस्र्थीति यों की म्मिस्र्थीति में अनुबं ों पर अति विनण!य; (vi)(बी) ऐसी परिरम्मिस्र्थीति यां जहां आपूर्ति क ा! का माल पर विवशेर्ष अति कार है और कोई उतिच विवकल्प नहीं है; और (vi)(सी) जहां कोई बोली लगाने वाला नहीं हैं या जहां प्रस् ाविव बोली बहु कम है।न्यायालय ने उन म्मिस्र्थीति यों में साव!जविनक नीलामी आयोसिज विकए विबना अनुबं ों क े अति विनण!य को बरकरार रGा है जहां आसपास की परिरम्मिस्र्थीति यों को 3ेG े हुए साव!जविनक नीलामी आयोसिज करना असंभव है।जब सरकार विनविव3ा आमंविj करने जैसी पार3श[9] प्रविkया का पालन विकए विबना अनुबं आवंवि* करने क े सामान्य विनयम से भ*क ी है, ो उसे अनुच्छे3 14 में प्रति पावि3 सिसद्धां ों क े आ ार पर अपने काय™ को उतिच ठहराना हो ा हैः
13. इस न्यायालय ने बार-बार साव!जविनक अनुबं ों क े अनु3ान में पार3र्थिश ा बनाए रGने की आवश्यक ा पर जोर वि3या है।आम ौर पर, पार3र्थिश ा बनाए रGने क े सार्थी-सार्थी संविव ान क े अनुच्छे3 14 का अनुपालन अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी प्रसिसद्ध समाचार पjों में विवज्ञापन जारी होने पर साव!जविनक नीलामी आयोसिज करक े सुविनतिx विकया जाना चाविहए।इस मामले में ऐसा नहीं विकया गया है। हालाँविक नगर विनगम ने अनुबं का विवज्ञापन विकया र्थीा, लेविकन उच्च न्यायालय ने विन32श वि3या है विक इसे विकसी विवशेर्ष पक्ष (vi)(प्रति वा3ी
1) को 10 साल क े लिलए वि3या जाना चाविहए।यह स्पष्ट रूप से अवै र्थीा।
14. यह अच्छी रह से य विकया गया है विक आम ौर पर राज्य या उसक े उपकरणों को विनजी बा ची द्वारा अनुबं नहीं 3ेना चाविहए, बम्मिल्क व्यापक पी. ए. आर. *ी. सी. प्रचार क े बा3 Gुली साव!जविनक नीलामी/विनविव3ा द्वारा 3ेना चाविहए। इस मामले में अनुबं न क े वल विनजी बा ची क े माध्यम से वि3या गया है, बम्मिल्क बा ची उच्च न्यायालय द्वारा ही की गई है, जो अस्वीकाय! है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
15. हमें इसमें कोई सं3ेह नहीं है विक 3ुल!भ और असा ारण मामलों में, व्यापार या उ3ार ा की प्रक ृ ति या विकसी अन्य अच्छे कारण को ध्यान में रG े हुए, एक अनुबं विनजी बा ची द्वारा वि3या जाना चाविहए, लेविकन आम ौर पर ऐसा नहीं विकया जाना चाविहए क्योंविक यह जन ा क े विवश्वास को Gो 3ेगा है।
16. कानून अच्छी रह से य विकया गया है विक राज्य, उसक े विनगमों, उपकरणों और एजेंसिसयों द्वारा अनुबं सामान्य रूप से योग्य व्यविQयों से विनविव3ाएं आमंविj करक े साव!जविनक नीलामी/साव!जविनक विनविव3ा द्वारा से वि3ए जाने चाविहए और साव!जविनक नीलामी की अति सूचना या विनविव3ाएं आमंविj करने का विवज्ञापन सभी प्रासंविगक विववरणों जैसे नीलामी की ारीG, समय और स्र्थीान, नीलामी का विवर्षय, कनीकी विवविन32श, अनुमाविन लाग, बकाया राशिश जमा, आवि3 क े सार्थी इलाक े में व्यापक प्रसार वाले प्रसिसद्ध 3ैविनक समाचार पjों में विकया जाना चाविहए। साव!जविनक नीलामी/साव!जविनक विनविव3ा द्वारा सरकारी अनुबं ों का पुरस्कार साव!जविनक Gरी3 में पार3र्थिश ा सुविनतिx करने, सरकारी Gरी3 में अर्थी!व्यवस्र्थीा और 3क्ष ा को अति क म करने, विनविव3ाकारों क े बीच स्वस्र्थी प्रति स्प ा! को बढ़ावा 3ेने, सभी विनविव3ाकारों क े सार्थी विनष्पक्ष और न्यायसंग व्यवहार प्र3ान करने और संबंति अति कारिरयों द्वारा अविनयविम ाओं, हस् क्षेप और भ्रष्ट प्रर्थीाओं को समाप्त करने क े लिलए है।संविव ान क क े अनुसार यह आवश्यक है।हालांविक, 3ुल!भ और असा ारण मामलों में, उ3ाहरण क े लिलए सरकार द्वारा घोविर्ष प्राक ृ ति क आप3ाओं और आपा म्मिस्र्थीति यों क े 3ौरान; जहां Gरी3 क े वल एक ही स्रो से संभव है; जहां आपूर्ति क ा! या ठेक े 3ार क े पास वस् ुओं या सेवाओं क े संबं में विवशेर्ष अति कार हैं और कोई उतिच विवकल्प या विवकल्प मौजू3 नहीं है; जहां नीलामी कई ारीGों पर आयोसिज की गई र्थीी, लेविकन कोई बोली3ा ा नहीं र्थीे या प्रस् ाविव बोलिलयां बहु कम र्थीीं, आवि3, इस सामान्य विनयम से अलग विकया जा सक ा है और ऐसे अनुबं ों को "विनजी बा ची " द्वारा वि3या जा सक ा है।(vi)(राम और श्याम क ं पनी बनाम हरिरयाणा राज्य 3ेGें vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd [(vi)(1985) 3 एस. सी. सी. 267: ए. आई. आर. 1985 एस. सी. 1147]।
20. विनविव3ाएं आमंविj करना और साव!जविनक नीलामी आयोसिज करना 3ो कारणों से आवं*न का पसं3ी3ा रीका माना जा ा हैःपहला, Gरी3 सव त्तम मूल्य पर की जा सक ी है और 3ूसरा, आवं*न एक पार3श[9] प्रविkया द्वारा विकया जा ा है।हालाँविक, यवि3 राज्य द्वारा आवं*न का उद्देश्य राजस्व को अति क म करना नहीं है, ो राज्य अन्य रीकों से अनुबं प्र3ान कर सक ा है, बश 2 विक यह गैर -मनमाना हो और अनुच्छे3 14 की आवश्यक ाओं को पूरा कर ा हो। 21 अपीलक ा!-राज्य का क ! है विक चूंविक व !मान मामले में, 'राज्य अनु3ान' की कोई भागी3ारी नहीं है और राज्य की संपलित्त का कोई विनस् ारण नहीं है, इसलिलए वह विनविव3ा द्वारा से आई. एम. पी. सी. एल. को अनुबं 3ेने क े लिलए बाध्य नहीं र्थीा।यह क ! वि3या जा ा है विक ऐसी म्मिस्र्थीति में, उच्च न्यायालय को प्रासंविगक सामग्री क े अवलोकन पर, क े वल भी जांच करनी चाविहए र्थीी जब आई. एम. पी. सी. एल. से 3वाएं Gरी3ने में कोई अप्रत्यक्ष उद्देश्य शाविमल र्थीा। सरकारी अनुबं ों में सरकारी Gजाने से होने वाला Gच! शाविमल हो ा है।चूंविक इनमें सरकारी Gजाने से भुग ान शाविमल हो ा है, इसलिलए Gच! विकए गए न को मनमाने ढंग से Gच! नहीं विकया जाना चाविहए। साव!जविनक न Gच! कर े समय राज्य क े पास अन् !विनविह अति कार नहीं है।राज्य द्वारा वि3ए गए सरकारी अनुबं ों सविह सभी सरकारी काय™ का अनुच्छे3 14 क े आ ार पर परीक्षण विकया जाना चाविहए। 22 उपरोQ चचा! से विनम्नलिललिG सिसद्धां लागू हो े हैंः (vi)(i)() सरकारी कार!वाई न्यायसंग, विनष्पक्ष और उतिच और अनुच्छे3 14 क े सिसद्धां ों क े अनुसार होनी चाविहए; और (vi)(i)(i)() जबविक सरकार अनुबं ों क े अनु3ान क े लिलए विनविव3ाओं या साव!जविनक नीलामी क े माग! से विवचलिल हो सक ी है, विवचलन भे3भावपूण! या मनमाना नहीं होना चाविहए।विनविव3ा माग! से विवचलन को उतिच ठहराया जाना चाविहए vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd और इस रह क े औतिचत्य को अनुच्छे3 14 की आवश्यक ाओं का पालन करना चाविहए।
3. 3 परिरचालन वि3शाविन32शों क े पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) की व्याख्या
23. परिरचालन वि3शाविन32शों क े पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) की व्याख्या करने से पहले, यह आवश्यक है विक हम आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 पर परिरपjों काे सन्3र्थिभ करें।1994 में, स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय ने एक संचार जारी विकया सिजसमें कहा गया र्थीा विक आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े वल आई. एम. पी. सी. एल. से की जानी है क्योंविक यह एकमाj इकाई है जो गुणवत्तापूण! 3वाओं का विनमा!ण कर ी है।8 मई 2008 को भार सरकार ने इसी ज! पर एक और ज्ञापन जारी विकया। 9 अगस् 2016 को आयुर्ष मंjालय ने आई. एम. ए. से आयुर्ष 3वाओं की Gरी3 पर राज्यों द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण क े जवाब में एक परिरपj जारी विकया। परिरपj में कहा गया है विक राज्य आई. एम. पी. एल से आयुव2वि3क और यूनानी 3वाओं की 'Gरी3' कर सक े हैं। 7 वि3संबर 2016 को, आयुर्ष मंjालय ने एक परिरपj जारी विकया सिजसमें कहा गया विक एनएएम क े ह Gरी3 वि3शाविन32श राज्य सरकारों क े साव!जविनक उपkमों और फाम2सिसयों और सहकारी सविमति यों से 3वाओं की Gरी3 की भी अनुमति 3े े हैं, सिजनकी अपनी विवविनमा!ण इकाइयाँ हैं और जी. एम. पी. क े अनुरूप हैं।इस प्रकार यह कहा गया विक राज्य आवश्यक आयुव2वि3क 3वाओं को सी े और्षति (vi)(क े रल सरकार क े स्वाविमत्व वाली आयुव2वि3क 3वा विनमा!ण इकाई) से भी Gरी3 सक े हैं, बश 2 विक 3वाएं आई. एम. पी. सी. एल. की 3रों क े भी र प्र3ान की जानी चाविहए।
24. 2 जनवरी 2019 को, आयुर्ष मंjालय ने 7 वि3संबर 2016 की अति सूचना क े स्र्थीान पर एक अति सूचना 14 जारी की।यह विन ा!रिर कर े हुए विक 3वाओं की Gरी3 राज्य सरकार का 'विवशेर्षाति कार' है, अति सूचना में कहा गया है विक विनम्नलिललिG वि3शाविन32शों का पालन विकया जाना चाविहएः 14 "2019 अति सूचना" vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (vi)(i)() आयुर्ष मंjालय द्वारा प्रकाशिश आवश्यक 3वाओं की सूची (vi)(ई%ीएल) से आवश्यक 3वाओं की Gरी3 की जानी चाविहए। (vi)(i)(i)() सहाय ा अनु3ान का कम से कम 50 प्रति श आई. एम. पी. सी. एल. या अन्य क ें द्रीय/राज्य साव!जविनक उपkमों या राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह फाम2सिसयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाना चाविहए। (vi)(i)(i)(i)() शेर्ष सहाय ा अनु3ान का उपयोग अन्य इकाइयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विकया जा सक ा है सिजनक े पास वै विवविनमा!ण लाइसेंस हैं; और (vi)(i)(v) 3वाओं का विनमा!ण उनकी अपनी विवविनमा!ण इकाइयों में विकया जाना चाविहए और जी. एम. पी. क े अनुरूप होना चाविहए।
25. इस प्रकार, क ें द्रीय स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय द्वारा 1994 में जारी विकया गया पj सिजसमें कहा गया र्थीा विक आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े वल आई. एम. पी. सी. एल. से की जानी चाविहए, 2019 में आयुर्ष मंjालय द्वारा जारी नवीन म अति सूचना द्वारा प्रति स्र्थीाविप विकया गया है, सिजसमें कहा गया है विक परिरचालन वि3शाविन32शों क े पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(बी) प्राव ान में उसि•लिG इकाइयों क े बीच अं र नहीं कर ा है।पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) में यह विन ा!रिर नहीं विकया गया है विक पैराग्राफ में उसि•लिG राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों की अन्य विवविनमा!ण इकाइयों की ुलना में आई. एम. पी. सी. एल. का 3जा! अति क होगा।2019 की अति सूचना से प ा चल ा है विक आयुर्ष मंjालय की म्मिस्र्थीति यह है विक अनु3ान सहाय ा का 50 प्रति श पैराग्राफ में विनर्दि3ष्ट विकसी भी प्रति ष्ठान से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाएगा।इस विनष्कर्ष! की पुविष्ट पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) )-आई. एम. पी. सी. एल. में 'या' साव!जविनक उपkमों से ', 'या' राज्य सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह फाम2सिसयों क े उपयोग से हो ी है।इस प्रकार, पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) क े एक सा3े पठन पर, यह स्पष्ट है विक पैराग्राफ में उसि•लिG सभी इकाइयों को समान आ ार पर रGा गया है।यह प्राव ान vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd पैराग्राफ में उसि•लिG विवविनमा!ण इकाइयों क े बीच एक श्रेणीkम नहीं बना ा है।न ही यह एकाति कार बनाने क े इरा3े को 3शा! ा है।
3. 4 आई. एम. पी. सी. एल. को सरकारी अनुबं 3ेने की वै ा
26. अपीलक ा!, विनमा!ण की प्रविkया में विवशिशष्ट समस्याओं क े कारण आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 क े लिलए अनुबं 3ेने में 3ुग!म कविठनाइयों को रेGांविक कर ा है।स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय द्वारा 16 जुलाई 1994 को जारी पj का सं3भ! वि3या गया र्थीा सिजसमें कहा गया र्थीा विक आयुव23, सिसद्ध और यूनानी 3वाओं की Gरी3 क े लिलए विनविव3ा द्वारा Gरी3 'अपया!प्त' होगी क्योंविक (vi)(i)() कच्चे माल की कीम ों में व्यापक शिभन्न ा है सिजसक े परिरणामस्वरूप 'सव त्तम कच्चे माल' का उपयोग करने वाली एक ही 3वा की लाग कच्चे माल की 'सबसे Gराब' गुणवत्ता का उपयोग करने वाली 3वा से शाय[3] 3स गुना अति क हो सक ी है; और (vi)(i)(i)() 3वाओं में उपयोग विकए जाने वाले कच्चे माल की संरचना और गुणवत्ता का परीक्षण करना असंभव है। स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय का 16 जुलाई 1994 का पj का उद्धरण नीचे वि3या गया हैः "आप शाय[3] जान े होंगे विक भार सरकार ने भार ीय तिचविकत्सा प्रणालिलयों की उच्च गुणवत्ता वाली 3वाओं क े विनमा!ण क े लिलए उत्तर प्र3ेश सरकार एवं इंति%यन मेति%सिसन फामा!स्युवि*कल कॉप रेशन लिलविम*े% क े सहयोग से स्र्थीापना की है।3वाओं को शास्त्रीय ग्रंर्थीों क े अनुसार सख् ी से ैयार विकया जा ा है और इन 3वाओं को ैयार करने क े लिलए उपयुQ कच्चे माल का उपयोग विकया जा ा है।
2. यह हमारा अनुभव है विक आयुव23, सिसद्ध और यूनानी 3वाओं की Gरी3 क े संबं में विनविव3ा जैसी सामान्य विवत्तीय प्रविkयाएं अपया!प्त हैं।ऐसा इसलिलए है क्योंविकः
1. 3वाओं को बनाने क े लिलए आवश्यक कच्चे माल की कीम ों में बहु व्यापक शिभन्न ा है।यवि3 सबसे Gराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग विकया जा ा है ो उसकी लाग सबसे अच्छे कच्चे माल का vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd उपयोग करने वाली एक ही 3वा की लाग से 10 गुना कम हो सक ी है।
2. 3वाओं क े कच्चे माल की स*ीक संरचना और उनकी गुणवत्ता का परीक्षण करने में सक्षम न होना।
3. 3वाओं की इन प्रणालिलयों में और्ष ीय काय! प्रारंशिभक चरण में है। व !मान में उपलब् परीक्षण हाविनकारक अवयवों /विमलाव* की उपम्मिस्र्थीति क े बारे में ब ा सक े हैं और क ु छ यौविगकों की उपम्मिस्र्थीति का अच्छा संक े 3े सक े हैं।हालाँविक, चूंविक आई. एस. एम. 3वाओं क े मूल घ*क जड़ी-बूवि*याँ हैं जो स्वयं कई काब!विनक यौविगकों से बनी हैं, इसलिलए कनीक की व !मान म्मिस्र्थीति क े सार्थी यह परीक्षण और जांच करना लगभग असंभव है विक क्या 3ावा की गई सामग्री वास् व में 3ावा विकए गए अनुपा में मौजू3 है और क्या वे सही गुणवत्ता क े हैं और क्या प्राचीन ग्रंर्थीों में विन ा!रिर उतिच प्रविkया का उपयोग 3वाओं को ैयार करने क े लिलए विकया गया है। इस प्रकार विवशुद्ध रूप से विनविव3ा क े आ ार पर Gरी3 से ऐसी 3वाओं की Gरी3 होने की संभावना है जो अप्रभावी हैं।
4. 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने क े लिलए व !मान में उपलब् एकमाj विवकल्प यह है विक जब विवविनमा!ण प्रविkया चल रही हो ो विवविनमा!ण स्र्थील पर विनरीक्षक हों।यह भी एक व्यावहारिरक विवकल्प नहीं है क्योंविक 3वा विनयंjण संगठनों क े पास वहां उपम्मिस्र्थी होकर पय!वेक्षण करने क े लिलए कम!चारी उपलब् नहीं है।यह म्मिस्र्थीति ऐसी 3वाओं क े संबं में कशिर्थी क3ाचार क े लिलए सिजम्मे3ार है।यह इन परिरम्मिस्र्थीति यों क े ह है विक स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय क े द्वारा क े वल आई. एम. पी. सी. एल. से सी. जी. एच. एस. की आवश्यक ाओं को Gरी3ने का विनण!य लिलया गया है जो विनष्पक्ष हैं और विवत्त मंjालय की लाग लेGा शाGा क े एक प्रति विनति द्वारा उनकी जांच की गई है।
5. परंम्पराग रीक े से 3वाओं क े विनमा!ण को सख् ी से सुविनतिx करने क े बावजू3, आई. एम. पी. सी. एल. द्वारा ली जाने वाली कीम ें ज्या3ा र मामलों में प्रति स्प 9 ब्रां%ों क े सार्थी अनुक ू ल रूप से ुलना vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd कर ी हैं, क ु छ मामलों में प्रविkया र्थीोड़ी अति क हो सक ी है लेविकन जैसा विक पहले ही ब ाया गया है विक गुणवत्ता आश्वासन क े मामले में अति क विवश्वसनीय ा है क्योंविक आई. एम. पी. सी. एल. वास् विवक कच्चे माल का उपयोग करक े शास्त्रीय ग्रंर्थीों क े अनुसार 3वाओं को सख् ी से ैयार करने क े लिलए वाशिणम्मिज्यक विह ों की अनुमति नहीं 3े ा है। उ3ाहरण क े लिलए आई. एम. पी. सी. एल. मुख्य रूप से अपनी 3वाओं को अति क लोकविप्रय बनाने क े लिलए अति रिरQ चीनी या अन्य स्वा3 बढ़ाने वाले प3ार्थी! का उपयोग नहीं कर ा है।
6. उपरोQ को ध्यान में रG े हुए, आप आई. एम. पी. सी. एल. द्वारा विनर्दिम 3वाओं को राज्य सरकार क े और्ष ालयों और अस्प ालों में सी. जी. एच. एस. की आवश्यक ाओं को पूरा करने लिलए विन ा!रिर 3रों पर आपूर्ति को पूरा करने क े लिलए विवचार कर सक े हैं, लेविकन परिरवहन लाग क े कारण स्र्थीानीय शिभन्न ा उत्पन्न हो जा ी है।उस म्मिस्र्थीति में आप अध्यक्ष सह प्रबं विन3ेशक, इंति%यन मेति%सिसन फामा!स्युवि*कल कॉप रेशन लिलविम*े% (vi)(आई. एम. पी. सी. एल.), मोहन सिजला, अल्मोड़ा, यू. पी. से संपक ! कर सक े हैं। (vi)(प्रभाव वर्ति )
27. 8 मई 2008 को, भार सरकार ने एक और ज्ञापन जारी विकया सिजसमें कहा गया विक आई. एम. पी. सी. एल. द्वारा उत्पावि3 3वाएं परम्पराग रीकों क े अनुसार और सुविनतिx गुणवत्ता की हैं।ज्ञापन मे उ•ेG विकया गया विक आयुव2वि3क एवं यूनानी 3वाओं की गुणवत्ता का परीक्षण करने क े लिलए पूरी रह से विवकसिस 3वा मानकों का अभाव है।ज्ञापन क े प्रासंविगक पैराग्राफ से विनम्न लिललिG संक े विमल ा है विकः (vi)(i)() आई. एम. पी. सी. एल. द्वारा उत्पावि3 3वाएं सख् ी से परम्पराग रीकों से विनर्दिम हो ी है और इसलिलए गुणवत्ता साविब कर ी हैं। (vi)(i)(i)() क ं पनी द्वारा उत्पावि3 3वाओं की 3रें उतिच हैं क्योंविक वे विवत्त मंjालय की लाग लेGा विवभाग द्वारा विन ा!रिर की जा ी हैं। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (vi)(i)(i)(i)() 3ेश में आयुव2वि3क और यूनानी 3वाओं क े लिलए पूरी रह से विवकसिस 3वा मानकों क े आभाव में, सी. जी. एच. एस. अनुसं ान परिरर्ष3ें यह सुविनतिx करने क े लिलए पूरी रह से सक्षम नहीं हैं विक Gरी3ी गई 3वाएं सही गुणवत्ता की है।"
28. पj इंविग कर ा है विक आयुव2वि3क 3वाओं की सामग्री और गुणवत्ता विन ा!रिर करने की कोई विवति नहीं है।इसका म लब यह होगा विक आई. एम. पी. सी. एल. द्वारा उत्पावि3 3वाओं की गुणवत्ता विन ा!रिर करने का कोई रीका नहीं र्थीा।स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय ने कहा विक उसने क े वल आई. एम. पी. सी. एल. से आयुव2वि3क 3वाएं Gरी3ने का फ ै सला विकया है क्योंविक प्रविkया विनष्पक्ष है और विवत्त मंjालय क े एक प्रति विनति द्वारा इसकी जांच की जा ी है।हालांविक, पहले प्रत्यर्थी9 का क ! है विक आई. एम. पी. सी. एल. से Gरी3ी गई 3वाओं की लेGा परीक्षा करने क े सीविम उद्देश्य क े लिलए विवत्त मंjालय द्वारा जांच की जा ी है।इस समय यह ध्यान 3ेंना आवश्यक है विक आई. एम. पी. सी. एल. की स्र्थीापना भार सरकार द्वारा उत्तराGं% सरकार क े सहयोग से की गई है।भार सरकार क े पास आई. एम. पी. सी. एल. क े 98.11 प्रति श शेयर हैं और 1.89 प्रति श शेयर राज्य सरकार क े पास हैं।स्वास्थ्य और परिरवार कल्याण मंjालय द्वारा जारी पj से संक े विमल ा है विक क े वल इसलिलए विक आई. एम. पी. सी. एल. एक ऐसा प्रति ष्ठान है सिजसमें क ें द्र सरकार की बड़ी विहस्से3ारी है, यह माना जा ा है विक कोई 'वाशिणम्मिज्यक हस् क्षेप' नहीं है और 3वाएं 'वास् विवक कच्चे माल' का उपयोग करक े शास्त्रीय ग्रंर्थीों क े अनुसार ैयार की जा ी हैं।
29. इस कर्थीन का समर्थी!न करने क े लिलए अशिभलेG पर कोई सामग्री नहीं है विक आई. एम. पी. सी. एल. पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(ए) में उसि•लिG प्रति ष्ठानों में से एकमाj प्रति ष्ठान है जो अच्छी गुणवत्ता वाली आयुव2वि3क 3वाओं का विनमा!ण कर ा है।वास् व में, पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) में कहा गया है विक आयुर्ष 3वाओं और 3वाओं की गुणवत्ता सुविनतिx करने की आवश्यक ा को ध्यान में रG े हुए पैराग्राफ में उसि•लिG इकाइयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए अनु3ान का 50 प्रति श उपयोग विकया जाएगा।"यह इंविग करेगा विक गुणवत्ता vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd सुविनतिx करने की आवश्यक ा वहां उसि•लिG सभी स्रो ों क े अ ीन है। आई. एम. पी. सी. एल. क े अलावा, जो भार सरकार की एक संस्र्थीा है, पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(बी) में राज्य सरकारों या सहकारी सविमति यों क े अन्य प्रति ष्ठान शाविमल हैं।यह क ! विक आई. एम. पी. सी. एल. का कोई वाशिणम्मिज्यक विह नहीं है क्योंविक यह भार सरकार द्वारा विवकसिस एक प्रति ष्ठान है, ब पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(बी) में विन ा!रिर अन्य प्रति ष्ठानों पर समान रूप से लागू हो ा है।
30. यह क ! विक आई. एम. पी. सी. एल. से आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 असा ारण परिरम्मिस्र्थीति यों (vi)(गुणवत्तापूण! 3वाओं का आश्वासन) क े 3ायरे में आएगी, गल है।अपीलक ा! का यह विनवे3न विक आई. एम. पी. सी. एल. गुणवत्तापूण! आयुव2वि3क 3वाओं का एकमाj उत्पा3क है इस 3ावे 15 का समर्थी!न करने क े लिलए विबना विकसी ठोस सामग्री क े क और अनुमानों पर आ ारिर है। वास् व में, आयुर्ष मंjालय द्वारा जारी 2 जनवरी 2019 की अति सूचना में कहा गया है विक अनु3ान-सहाय ा का 50 प्रति श आई. एम. पी. सी. एल. या अन्य क ें द्रीय/राज्य साव!जविनक उपkमों या राज्य-सरकारों और सहकारी सविमति यों क े ह फाम2सिसयों से 3वाओं की Gरी3 क े लिलए उपयोग विकया जाना चाविहए।अपीलक ा! क े लिलए यह उपलब् है विक वह विनविव3ा क े अलावा विकसी भी अन्य विवति का उपयोग करक े 3वाएं Gरी3 सक ा है, जब क विक यह मनमाना न हो।अपीलक ा! का 3ावा है विक यह विनविव3ा क े विनयम से भ*क गया क्योंविक आई. एम. पी. सी. एल. एकमाj ऐसा प्रति ष्ठान है जो गुणवत्तापूण! 3वाओं का उत्पा3न कर ा है।हालाँविक, इस 3ावे की पुविष्ट करने क े लिलए कोई सामग्री नहीं है विक आई. एम. पी. सी. एल. एकमाj ऐसा प्रति ष्ठान है जो पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(बी) में उसि•लिG अन्य प्रति ष्ठानों को छोड़कर 'गुणवत्ता' वाली 3वाओं का विनमा!ण कर ा है। अपीलक ा! को वि3ये गये ठोस सामाग्री क े उत्पा3न क े भार को वह विनवा!हन करने में असमर्थी! रहा विक गुणवत्ता की आवश्यक ा को प्रभाविव करने वाली असा ारण परिरम्मिस्र्थीति यों क े अम्मिस् त्व क े कारण नामांकन द्वारा से 3वाओं की 15 विमलना%ु राज्य बनाम राष्ट्रीय 3तिक्षण भार ीय न3ी आपस में जोड़ने वाले क ृ विर्ष संगठन, 2021 की सिसविवल अपील 6764/2021 3ेGें। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd Gरी3 आवश्यक है।पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(c) ) में उसि•लिG अन्य प्रति ष्ठानों को बाहर करने क े लिलए क े वल आई. एम. पी. सी. एल. से 3वाओं की Gरी3 की अपीलक ा!ओं की कार!वाई मनमाना और संविव ान क े अनुच्छे3 14 का उ•ंघन है। 31 3ी गई परिरम्मिस्र्थीति यों में, पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) में उसि•लिG संस्र्थीाओं से विनविव3ाएं आमंविj करना आवं*न का सबसे पार3श[9] और गैर -मनमाना रीका है सिजसे अपनाया जा सक ा है।इसलिलए, अपीलक ा! को अब से क े वल विनविव3ा जैसी मुफ् और पार3श[9] प्रविkया द्वारा आयुव2वि3क 3वाएं Gरी3नी चाविहए।अपीलक ा! इस विनयम को छाेड़ सक ा है और क े वल असा ारण परिरम्मिस्र्थीति याँ होने पर ही नामांकन द्वारा 3वाएँ Gरी3 सक ा है। ऐसी म्मिस्र्थीति में, अपीलक ा! को ठोस सामग्री क े आ ार पर असा ारण परिरम्मिस्र्थीति यों क े बारे में ब ाना चाविहए।
32. ऊपर ब ाए गए कारणों से, इलाहाबा3 में उच्च न्यायालय की लGनऊ पीठ क े 18 अक्*ूबर 2019 क े फ ै सले क े ह अपीलों को Gारिरज कर वि3या जा ा है।
33. हस् क्षेप क े लिलए आवे3न16 16 आयुर्ष और्षति विनमा! ा संघ17 17, संघ क े अध्यक्ष और सतिचव, "एस-यौविगक"18 18 क े विनवेशक और आयुव2वि3क 3वाओं क े उत्पा3न में लगी एक छो*े पैमाने की विवविनमा!ण इकाई द्वारा 3ायर विकए गए र्थीे।संघ में नौ स3स्य हैं जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विवकास अति विनयम 2006 क े ह पंजीक ृ हैं और आयुव2वि3क 3वाओं क े विनमा!ण और विबkी में लगे हुए हैं।आवे3न में विनम्नलिललिG क ! वि3ए गए र्थीेः 16 आइए 9631/2020; आइए सं. 46786/2020 17 "संघ" 18 एस-यौविगक एक मान्य ा प्राप्त हब!ल आयुव2वि3क 3वा है सिजसका उपयोग 'संति शोर्थी' और 'ऑम्मिस्*यो गविठया' क े उपचार में विकया जा ा है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (vi)(i)() क ै *रविपलर भार प्राइवे* लिलविम*े% बनाम वेस्*न! कोल फील्ड्स19 में इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक Gरी3 वरीय ा एकाति कार पै3ा कर ी है। क ै *रविपलर भार उपरोQ में विनण!य को ध्यान में रG े हुए, क ें द्रीय मंविjमं%ल ने 21 नवंबर 2007 वि3नांविक आ3ेश द्वारा एक नीति को अपनाया सिजसक े ह क ें द्रीय साव!जविनक क्षेj क े उद्यमों को Gरी3 वरीय ा 31 माच! 2008 से समाप्त कर 3ी गई र्थीी; और (vi)(i)(i)() विन3ेशक, क ें द्रीय स क ! ा आयोग ने क ै *रविपलर भार प्राइवे* लिलविम*े% (vi)(उपरोQ) क े फ ै सले को 3ेG े हुए क ें द्रीय साव!जविनक क्षेj क े उद्यमों क े उत्पा3ों और सेवाओं क े लिलए Gरी3 वरीय ा नीति की समीक्षा करने क े लिलए 9 नवंबर 200920 को एक परिरपj जारी विकया।23 माच! 2012 को, एमएसएमई मंjालय ने "सूक्ष्म और लघु उद्यमों (vi)(एमएसई) आ3ेश 2012 क े लिलए साव!जविनक Gरी3 नीति " शीर्ष!क से एक नीति ैयार की, सिजसमें कहा गया है विक प्रत्येक क ें द्रीय मंjालय या साव!जविनक क्षेj क े उपkम का विवभाग सूक्ष्म और लघु उद्यमों से कु ल वार्दिर्षक Gरी3 का न्यून म 20 प्रति श Gरी3ेगा। 34 हस् क्षेप आवे3क ने विनम्नानुसार प्रस् ु विकयाः (vi)(i)() क ें द्र और राज्य सरकार की नीति यों में विन ा!रिर विकया गया है विक 25 प्रति श 3वाओं की Gरी3 एमएसएमई से की जाएगी।इस प्रकार, परिरचालन वि3शाविन32शों क े पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) में 'कम से कम 50 प्रति श ' शब्3 को पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) में प्रति ष्ठानों से Gरी3 को 50 प्रति श क सीविम करने और अन्य विनमा! ाओं को पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(c) ) क े ह समान अवसर 3ेने क े रूप में पढ़ा जाना चाविहए। (vi)(i)(i)() क ें द्र और राज्य सरकारों ने Gरी3 नीति यों को अति सूतिच विकया है सिजसमें विन32श वि3या गया है विक Gरी3 का एक विनतिx प्रति श एमएसएमई से 19 (vi)(2007) 11 एससीसी 32 20 परिरपj सं. 31/10/09 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd होना चाविहए।नामांकन पर आई. एम. पी. सी. एल. से 3वाओं की Gरी3 सरकार द्वारा अति सूतिच Gरी3 नीति यों क े विवपरी है। (vi)(i)(i)(i)() आई. एम. पी. सी. एल. Gुले बाजार में भी उत्पा3ों की विबkी कर ी है। इस प्रकार, यह क ! विक आई. एम. पी. सी. एल. पूरी रह से सरकार को 3वाओं की आपूर्ति क े लिलए स्र्थीाविप है, भ्रामक है; और (vi)(i)(v) आई. एम. पी. सी. एल. ने यह वि3Gाने क े लिलए रिरकॉ%! जमा नहीं विकए हैं विक अन्य विनमा! ा समकक्ष या बेह र गुणवत्ता वाली 3वाओं की आपूर्ति नहीं कर सक े हैं।
35. हस् क्षेप आवे3न, विवशेर्ष अनुमति यातिचका क े 3ायरे को बढ़ाने का प्रयास कर े हैं।इस न्यायालय क े समक्ष मुद्दा पूरी रह से पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(b) ) की व्याख्या पर विनभ!र कर ा है।हालांविक, हस् क्षेप आवे3क ने प्रार्थी!ना की है विक राज्य और क ें द्र सरकार की नीति यों क े अनुसार, पैराग्राफ 4 (vi)(vi)() (vi)(c) ) क े ह एमएसएमई से न्यून म प्रति श आयुव2वि3क 3वाओं की Gरी3 की जानी चाविहए।यह त्काल विवशेर्ष अनुमति यातिचका क े 3ायरे से बाहर है।
36. ऊपर ब ाए गए कारणों से आइ.ए. संख्या - 9631/2022 एवं आइ.ए. संख्या - 46786/2022 Gारिरज विकए जा े हैं। हस् क्षेप आवे3कों को विवति क े अनुसार अपने स्वयं क े स्व ंj उपायों का पालन करना होगा।
37. लंविब आवे3न, यवि3 कोई हों, का विनस् ारण विकया जा ा है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd …………………………………………….. भार क े मुख्य न्याया ीश %ॉ. नंजय वाई चंद्रचूड़ ……………………….. न्यायमूर्ति विहमा कोहली नई वि3•ी; 3 जनवरी, 2023. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd