Shekhar Resorts Limited v. Union of India

High Court of Allahabad · 05 Jan 2023 · 2023 INSC 15
M. R. Shah; B. V. Nagarathna
Civil Appeal No 8957 of 2022
tax appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal directing acceptance of service tax dues payment under the Sabka Vishwas Scheme despite the moratorium under IBC, recognizing legal impossibility as a defense to non-payment during insolvency proceedings.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
दीवानी अपील संख्या 8957 वर्ष" 2022
मैसस" शेखर रिरसॉर्ट्सस" लिलमिमटेड (यूमिनट होटल ओरिरएंट ाज) ... अपीलार्थी8
बनाम
भार संघ और अन्य ... प्रत्यर्थी8गण
मिनण"य
न्यायमूर्ति एम.आर. शाह
JUDGMENT

1. रिरट टैक्स संख्या 328/2021 में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारिर 24.06.2021 क े उस आक्षेमिप मिनण"य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए मूल रिरट यातिPकाक ा" ने व "मान अपील दायर की है, जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने व "मान अपीलक ा" द्वारा दायर उक्त रिरट यातिPका को खारिरज कर मिदया है, जिजसमें "सबका मिवश्वास (मिवरास मिववाद अस्वीकरण: “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवामिद मिनण"य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे ु मिनब[ति प्रयोग क े लिलए है और मिकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं मिकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, मिनण"य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाथिणक माना जाएगा र्थीा मिनष्पादन और मिcयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2023 INSC 15 समा ान) योजना, 2019" (इसक े बाद "2019 की योजना" क े रूप में संदर्भिभ ) योजना क े ह अपीलक ा" क े मामले पर मिवPार करने क े लिलए प्रत्यर्थी8 को मिनदfश देने की मांग की गई र्थीी।

2. संक्षेप में व "मान अपील की ओर ले जाने वाले थ्य इस प्रकार हैंः यह मिक सेवा कर मिवभाग में पंजीक ृ अपीलक ा" -क ं पनी आति थ्य सेवाएँ प्रदान करने में लगी एक क ं पनी र्थीी।सेवा कर मिवभाग ने अपीलक ा" द्वारा सेवा कर की Pोरी करने की जांP की और होटल, सराय, गेस्ट हाउस, रेस् रां सेवाओं, मंडप देखरेख की सेवाओं आमिद जैसी मिवथिभन्न श्रेथिणयों क े ह सेवा कर क े भुग ान की मांग कर े हुए कारण ब ाओ नोमिटस जारी मिकया। 2.[1] मिदवाला और मिदवालिलयापन संमिह ा, 2016 (इसक े बाद "आईबीसी" क े रूप में संदर्भिभ ) क े ह अपीलक ा"-क ं पनी क े लिखलाफ काय"वाही शुरू की गई र्थीी। एनसीएलटी, मिदल्ली ने मिदनांक 2 11.09.2018 क े आदेश क े माध्यम से आईबीसी की ारा 7 क े ह अपीलक ा" क े मिवत्तीय लेनदारों द्वारा दालिखल प्रार्थी"ना-पत्र को स्वीकार कर लिलया। इस प्रकार, मिदनांक 11.09.2018 से अपीलक ा" क े लिखलाफ मिनगमिम मिदवाला समा ान प्रमिcया शुरू हुई और अपीलक ा" पर 11.09.2018 से आईबीसी की ारा 14 क े ह प्रति बं लगा मिदया गया। आईबीसी क े प्राव ानों क े अनुसार गमिt लेनदारों की समिमति ने अपनी 15 वीं बैtक में 04.06.2019 को एनसीजे इंफ्रास्ट्रक्Pर प्राइवेट लिलमिमटेड द्वारा प्रस् ु समा ान योजना को सव"सम्मति से मंजूरी दे दी। इसक े बाद "सबका मिवश्वास (मिवरास मिववाद समा ान) अस्वीकरण: योजना, 2019" का लाभ उtाने क े लिलए मिवत्त अति मिनयम, 2019 की ारा 125 क े ह 01.09.2019 को 2019 की योजना शुरू की गई। अपीलक ा" ने अपने समा ान पेशेवर क े माध्यम से योजना 2019 क े ह मिवमिह अवति क े भी र एक आवेदन प्रस् ु मिकया। आवेदक-क ं पनी को 27.12.2019 को प्रपत्र संख्या 1 जारी मिकया गया र्थीा। इस स् र पर, यह ध्यान रखना आवश्यक है मिक योजना 2019 क े ह आवेदन करने की अंति म ति थिर्थी 31.12.2019 र्थीी। इस प्रकार, प्रपत्र संख्या 1 मिवमिह समय सीमा क े भी र जारी मिकया गया र्थीा और बकाया कर की गणना अपीलक ा" द्वारा योजना, 2019 क े अनुसार की गई र्थीी। यह मिक इसक े बाद नामिम समिमति द्वारा अपीलक ा" द्वारा योजना क े ह बकाया और देय राथिश का मिन ा"रण कर े हुए 25.02.2020 को प्रपत्र संख्या 3 जारी मिकया गया र्थीा। ऐसा प्र ी हो ा है मिक बकाया कर क े भुग ान क े लिलए उक्त मिववरण क े अनुसार, अपीलक ा" को रु. 1,24,28,500/- का भुग ान करना आवश्यक र्थीा।योजना क े ह अपीलार्थी8/मिन ा"रिर ी को 30 मिदनों की समयावति क े भी र प्रपत्र संख्या 3 क े अनुसार भुग ान करना आवश्यक र्थीा।हालाँमिक कोमिवड-19 महामारी को देख े हुए, सरकार द्वारा भुग ान करने का समय 30.06.2020 क बढ़ा मिदया गया र्थीा। 2.[2] यह मिक एनसीएलटी ने मिदनांक 24.07.2020 क े आदेश क े माध्यम से सफल समा ान आवेदक- एनसीजे इंफ्रास्ट्रक्Pर प्राइवेट लिलमिमटेड की समा ान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रकार, एनसीएलटी द्वारा समा ान योजना को मंजूरी मिमलने पर 24.07.2020 को मिदवाला काय"वाही बंद होने क े सार्थी प्रति बं अवति समाप्त हो गई। एनसीएलटी द्वारा समा ान योजना अस्वीकरण: की स्वीक ृ ति क े बाद, अपीलक ा" ने सफल समा ान आवेदक और आयुक्त, सीजीएसटी और क ें द्रीय उत्पाद शुल्क, आगरा को पत्र लिलखकर उन्हें सूतिP मिकया मिक आईबीसी क े ह समा ान प्रमिcया समाप्त हो गई है और अपीलक ा" फॉम" संख्या 3 में नामिम समिमति द्वारा मिनति~ की गई 1,24,28,500/- रुपये की पूरी राथिश देने क े लिलए ैयार और इच्छ ु क है। मिदनांक 09.10.2020 को सहायक आयुक्त को भेजे गए पत्र में, अपीलक ा" ने ब ाया मिक क ं पनी पर लगाए गए कानून रोक क े कारण अपीलक ा" द्वारा योजना, 2019 क े ह मिन ा"रिर राथिश का भुग ान 30.06.2020 से पहले नहीं मिकया जा सका और बकाया भुग ान करने की अनुमति मांगी गई। संयुक्त आयुक्त, आगरा ने 19.10.2020 मिदनांमिक पत्र क े माध्यम से अपीलक ा" को सूतिP मिकया मिक योजना क े ह भुग ान की अंति म ति थिर्थी 30.06.2020 र्थीी, जिजसे बढ़ाया नहीं जा सक ा।परिरणामस्वरूप अपीलक ा" क े अनुरो को अस्वीकार कर मिदया गया। Pूंमिक अपीलक ा" प्रति बन् हटाए जाने क े बाद बकाया राथिश क े भुग ान क े लिलए अनुमति प्राप्त नहीं कर सका, इसलिलए अपीलक ा" ने रिरट टैक्स संख्या 328/2021 क े माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। आक्षेमिप मिनण"य और आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने उक्त रिरट यातिPका को मिनम्न आ ारों पर खारिरज कर मिदया है मिक (i) ) उच्च न्यायालय योजना क े मिवपरी मिनदfश जारी नहीं करेगा; (i) i) ) मांगी गई राह नहीं दी जा सक ी क्योंमिक योजना क े ह नामिम समिमति मौजूद नहीं है। अस्वीकरण: 2.[3] उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेमिप मिनण"य और आदेश से व्यथिर्थी और असं ुष्ट महसूस कर े हुए, मूल रिरट यातिPकाक ा"-अपीलक ा" ने व "मान अपील दायर की है।

3. अपीलक ा" की ओर से उपस्थिस्र्थी मिवद्वान अति वक्ता सुश्री Pरण्या लक्ष्मीक ु मारन ने जोरदार रीक े से कहा है मिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, माननीय उच्च न्यायालय ने रिरट यातिPका को खारिरज करने और प्राति कारी को योजना, 2019 क े अं ग" बकाया और देय राथिश स्वीकार करने का मिनदfश नहीं देकर गंभीर गल ी की है। 3.[1] यह कहा गया है मिक माननीय उच्च न्यायालय ने यह अथिभमिन ा"रिर करने में गल ी की है मिक नामिम समिमति मौजूद नहीं है।यह कहा गया है मिक योजना क े ह नामिम समिमति का गtन योजना, 2019 क े मिनयम 5 क े अनुसार मिकया गया र्थीा। मामले में अन् र्निनमिह कर नराथिश क े आ ार पर, नामिम समिमति में प्र ान आयुक्त, आयुक्त, अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त या क ें द्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर क े उपायुक्त शामिमल हो े हैं। यह कहा गया है मिक व "मान मामले में, नामिम समिमति में संयुक्त आयुक्त और आयुक्त शामिमल हैं जो प्रत्यर्थी8 संख्या 3 और 4 क े काया"लयों से संबद्ध अति कारी हैं। यह मिक नामिम अति कारी योजना क े ह काय"वाही पूरी होने क योजना क े ह नामिम समिमति क े रूप में काय" कर े रहेंगें। 3.[2] यह कहा गया है मिक योजना क े ह नामिम समिमति का गtन देश भर क े न्यायालयों क े आदेशों का पालन करने क े लिलए आवश्यक ा क े आ ार पर मिकया जा रहा है। यह मिक कई मामलों में नामिम समिमति ने योजना, 2019 क े अस्वीकरण: ह आवेदनों को गल रीक े से नामंजूर कर मिदया और मिवथिभन्न अदाल ों ने 30.06.2020 क े बाद नामिम समिमति क े फ ै सलों को अपास् कर मिदया और नामिम समिमति को योजना, 2019 क े ह संबंति आवेदकों क े मामले पर मिवPार करने का मिनदfश मिदया। यह कहा गया है मिक अदाल ों/उच्च न्यायालयों द्वारा पारिर आदेशों क े अनुसार मामलों पर पुनर्निवPार करने क े लिलए, सीबीईसी ने संबंति नामिम समिमति यों द्वारा योजना क े ह घोर्षणाओं क े मैनुअल प्रमिcया की अनुमति देने क े लिलए 17.03.2021 मिदनांमिक मिनदfश जारी मिकए।यह कहा गया है मिक इसलिलए 30.06.2020 क े बाद भी संबंति नामिम समिमति यों ने योजना क े ह अपने काय‰ को पूरा मिकया, हालांमिक मैनुअल प्रमिcया द्वारा मिकया। यह कहा गया है मिक इसलिलए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मिदया गया क " मिक नामिम समिमति यां 30.06.2020 क े बाद अस्थिस् त्व में नहीं हैं और इसलिलए अपीलक ा" मिकसी भी राह का हकदार नहीं है, स्वीकार नहीं मिकया जा सक ा है, क्योंमिक 30.06.2020 क े बाद भी और यहां क मिक सीबीईसी द्वारा जारी मिनदfशों क े अनुसार, संबंति नामिम समिमति यों ने घोर्षणाओं को मैनुअल रूप से काय" करना और संसाति करना जारी रखा। 3.[3] अपीलक ा" की ओर से उपस्थिस्र्थी मिवद्वान अति वक्ता द्वारा आगे यह क " मिदया गया है मिक व "मान मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने उस कारण का उतिP रूप से मूल्यांकन नहीं मिकया है जिजसक े लिलए अपीलक ा" योजना 2019 क े ह राथिश का 30.06.2020 को या उससे पहले जमा नहीं कर सका र्थीा।यह कहा गया है मिक प्रासंमिगक समय पर और मिवशेर्ष रूप से उस समय जब प्रपत्र संख्या 3 जारी मिकया गया र्थीा और यहां क मिक योजना अस्वीकरण: 2019 क े ह अवति क े दौरान, अपीलक ा" को प्रति बं अवति क े आ ार पर आईबीसी क े प्राव ानों की कtोर ा क े अ ीन मिकया गया र्थीा जो एनसीएलटी द्वारा समा ान योजना को मंजूरी देने पर 24.07.2020 को समाप्त हुई। यह कहा गया है मिक व "मान मामले में, अपीलक ा" कानून क े लागू होने क े कारण, सद्भावनावश 30.06.2020 को या उससे पहले मिन ा"रिर बकाया को जमा नहीं कर सका। इसक े बाद यह क " मिदया गया है मिक प्रति बन् अवति क े दौरान, आईबीसी क े अनुसार कोई भुग ान नहीं मिकया जा सक ा र्थीा। यह क " मिदया गया है मिक यमिद प्रति बन् अवति क े दौरान कोई भुग ान मिकया गया हो ा ो वह आईबीसी क े प्राव ानों का भंग हो ा। यह कहा गया है मिक मिदवालिलया काय"वाही क े दौरान स्वीकार की गई समा ान योजना क े अनुसार, समा ान आवेदक को प्रभावी ति थिर्थी से 6 महीने क े भी र सभी वै ामिनक बकाया (सेवा कर बकाया समिह ) एक एस्cो खा े में जमा करने की आवश्यक ा र्थीी। समा ान योजना क े अनुसार, एस्cो खा े में भुग ान को संबंति परिरPालन लेनदारों को प्रभावी भुग ान क े रूप में माना जाएगा।यह आगे क " मिदया गया है मिक इस मामले में, प्रभावी ति थिर्थी 24.07.2020 है, यह वह ारीख है जब एनसीएलटी द्वारा समा ान योजना को मंजूरी दी गई र्थीी। इसलिलए अन्य वै ामिनक बकाया क े सार्थी सेवा कर बकाया छह महीने की अवति की समामिप्त से पहले 08.01.2021 को एक एस्cो खा े में जमा मिकया गया र्थीा।यह मिनकलकर आया है मिक इस माननीय न्यायालय ने प्र ान आयकर आयुक्त बनाम मोनेट इस्पा एंड एनज[8] लिलमिमटेड, (2018) 18 एससीसी 786 क े मामले में यह अथिभमिन ा"रिर मिकया है मिक एक बार प्रति बं लागू हो जाने क े बाद, देनदार क े अस्वीकरण: लिखलाफ कोई भी मौजूदा काय"वाही मिनमिर्षद्ध होगी। इस संबं में, यह कहा गया है मिक आईबीसी को मिकसी भी असंग क़ानून पर प्रार्थीमिमक ा दी जाएगी। 3.[4] यह जोरदार रीक े से कहा गया है मिक मिकसी भी मामले में, मिकसी भी व्यमिक्त को कानून क े संPालन क े कारण उपPार से वंतिP नहीं मिकया जा सक ा है। यह मिक व "मान मामले में, कोमिवड-19 महामारी और एनसीएलटी क े काम न करने क े कारण आईबीसी क े ह रोक अवति को 11.09.2018 से 24.07.2020 क बढ़ा मिदया गया र्थीा। यह क " मिदया गया है मिक अन्यर्थीा भी, अपीलक ा" कानून क े संPालन द्वारा प्रति बन् अवति क े दौरान कोई भुग ान नहीं कर सक ा र्थीा और भुग ान करने में असमर्थी" ा, आईबीसी क े प्राव ानों क े ह लगाए गए प्रति बन् क े कारण र्थीी। यह आग्रह मिकया गया है मिक जब योजना 2019 क े ह आवेदन जमा मिकया गया और समयसीमा क े भी र प्रमिcया कर दी गयी ो अपीलक ा" को उपPार मिवमिहन नहीं छोड़ा जा सक ा है। उपरोक्त क‰ और मांगे गए अनु ोर्ष क े समर्थी"न में, अपीलक ा" की ओर से पेश मिवद्वान अति वक्ता ने सुनील वासुदेव बनाम सुंदर गुप्ता, (2019) 17 एससीसी 385 (प्रस् र 31), यूनाइटेड एयर ट्रैवल सर्निवसेज बनाम भार संघ, (2018) 8 एससीसी 141 (प्रस् र 13) और भार संघ बनाम आशीर्ष अग्रवाल, (2022) एससीसी ऑनलाइन एससी 543 (प्रस् र 23) क े मामले में इस न्यायालय क े फ ै सलों पर पुरजोर रीक े से अवलम्ब लिलया है। अस्वीकरण: 3.[5] यह दोहराया गया है मिक अपीलक ा" कानूनी अक्षम ा क े कारण भुग ान नहीं कर सका और मिकसी से भी असंभव काय" करने की अपेक्षा नहीं की जा सक ी है। ज्ञानीPंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य, (2016) 15 एससीसी 164 (प्रस् र 11) और कलकत्ता आयरन मP‘र्ट्सस एसोजिसएशन बनाम वाथिणस्थिज्यक कर आयुक्त, (1997) 8 एससीसी 42 (प्रस् र 5) क े मामले में इस न्यायालय क े फ ै सलों पर अवलम्ब लिलया गया है। 3.[6] यह क " मिदया गया है मिक अपीलक ा" क े सार्थी मिबना मिकसी गल ी क े पक्षपा नहीं मिकया जा सक ा है और/या उसे पीमिड़ नहीं मिकया जा सक ा है। अनमोल क ु मार ति वारी और अन्य बनाम झारखंड राज्य (2021) 5 एससीसी 424 क े मामले में, इस अदाल क े फ ै सले पर अवलम्ब लिलया गया है। उपरोक्त क " दे े हुए यह प्रार्थी"ना की गयी है मिक व "मान अपील को अनुमति प्रदान की जाए और प्रत्यर्भिर्थीयों को योजना 2019 क े ह य मिकए गए बकाया क े लिलए 1,24,28,500/- रुपये का भुग ान करने का मिनदfश मिदया जाए और दनुसार अपीलक ा" को उन्मुमिक्त प्रमाण पत्र जारी मिकया जाए।

4. व "मान अपील का मिवरो कर े हुए, भार संघ की ओर से पेश मिवद्वान एएसजी श्री मिवcमजी बनज[8] ने जोरदार ढंग से कहा है मिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रिरट यातिPका को खारिरज करने और प्रत्यर्थी8 को योजना, 2019 क े ह य मिकए गए बकाया क े अस्वीकरण: भुग ान को स्वीकार करने का मिनदfश देने से इनकार करने में कोई त्रुमिट कारिर नहीं की गई है। 4.[1] यह कहा गया है मिक स्वीकाय" रूप से, यह योजना 30.06.2020 क वै र्थीी और योजना, 2019 क े ह य की गई राथिश क े भुग ान की अंति म ति थिर्थी 30.06.2020 र्थीी। इसक े बाद योजना को बंद कर मिदया गया और यहां क मिक नामिम समिमति यों को भी भंग कर मिदया गया और इसलिलए जैसा मिक माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उतिP रूप से पाया गया है, मिक माननीय उच्च न्यायालय क े पास योजना का मिवस् ार करने का कोई अति कार क्षेत्र नहीं है।यह कहा गया है मिक यमिद योजना को बढ़ाया जा ा है ो यह कई जमिटल ाएं उत्पन्न करेगी। 4.[2] आगे यह क " मिदया गया है मिक व "मान मामले में, स्वीकार मिकया गया है मिक योजना क े ह य की गई राथिश का 30.06.2020 से पहले कोई भुग ान नहीं मिकया गया र्थीा और इसलिलए योजना, 2019 क े ह य की गई राथिश का भुग ान करने क े लिलए समय सीमा बढ़ाने क े लिलए मूल यातिPकाक ा" की प्रार्थी"ना को आयुक्त द्वारा उतिP रूप से खारिरज मिकया गया र्थीा और इसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उतिP रूप से ही हस् क्षेप नहीं मिकया गया है। उपरोक्त क " दे े हुए, व "मान अपील को खारिरज करने का अनुरो मिकया गया है।

5. हमने संबंति पक्षों की ओर से उपस्थिस्र्थी मिवद्वान अति वक्ता को मिवस् ार से सुना है। अस्वीकरण:

6. शुरुआ में, यह ध्यान मिदया जाना आवश्यक है और यह मिववाद में नहीं है मिक अपीलक ा" योजना, 2019 क े ह समझौ े का लाभ पाने का हकदार है। 01.09.2019 को योजना, 2019 शुरू की गई र्थीी और योजना क े ह आवेदन करने की अंति म ति थिर्थी 30.12.2019 र्थीी और वास् व में, अपीलक ा" ने 27.12.2019 को यानी आवेदन करने की मिनर्निदष्ट अंति म ति थिर्थी से पहले फॉम" संख्या 1 पर आवेदन दे मिदया र्थीा। योजना क े ह, फॉम" संख्या 1 देने क े बाद नामिम समिमति को इसकी जांP करनी र्थीी और मिनपटान राथिश( य राथिश) का मिन ा"रण करने क े लिलए अंति म फॉम" संख्या 3 जारी करना र्थीा, जिजसका भुग ान आवेदक को अंति म मिन ा"रण- फॉम" संख्या 3 की प्रामिप्त की ारीख से एक महीने की अवति क े भी र करना र्थीा। अपीलक ा" को 25.02.2020 को फॉम" संख्या 3 जारी की गयी र्थीी और 25.03.2020 को या उससे पहले मिनपटान बकाया ( य मिकए गए बकाया) का भुग ान करना आवश्यक र्थीा।हालाँमिक, कोमिवड-19 महामारी को देख े हुए सरकार ने समय को 30.06.2020 क बढ़ा मिदया।इसलिलए अपीलक ा" को 30.06.2020 को या उससे पहले मिनय बकाया जमा करना आवश्यक र्थीा।हालाँमिक योजना, 2019 क े लागू होने से पहले ही, अपीलक ा" को आईबीसी क े ह काय"वाही क े अ ीन मिकया गया र्थीा जो 11.09.2018 को ब शुरू हुई जब एनसीएलटी ने आईबीसी की ारा 7 क े ह आवेदन स्वीकार मिकया।इस प्रकार, आईबीसी क े ह रोक 11.09.2018 को शुरू हुई।सीओसी ने 04.06.2019 को समा ान योजना को मंजूरी दी और इसे एनसीएलटी द्वारा मिदनांमिक 24.07.2020 क े आदेश द्वारा अनुमोमिद मिकया गया।इसलिलए, आईबीसी क े ह रोक 24.07.2020 क जारी रही। अस्वीकरण: आईबीसी क े ह प्रति बं (रोक) की अवति क े दौरान कोई भुग ान नहीं मिकया जा सक ा र्थीा। इसलिलए अपीलक ा" को कोई भी भुग ान करने से वै ामिनक रूप से प्रति बंति /वर्जिज मिकया गया र्थीा।प्रति बं क े दौरान भुग ान करने में, अपीलक ा" की ओर से वै ामिनक अक्षम ा र्थीी। यमिद अपीलक ा" ने रोक की अवति क े दौरान कोई भुग ान मिकया हो ा, ो अपीलक ा" आईबीसी क े प्राव ानों का भंग कर ा। इसलिलए अपीलक ा" क े लिलए रोक की अवति क े दौरान कोई भुग ान करना असंभव र्थीा।रोक समाप्त होने क े ुरं बाद, अपीलक ा"-समा ान पेशेवर/सफल समा ान आवेदक ने प्राति करण से संपक " मिकया और उनसे फॉम" संख्या 3 क े अनुसार योजना, 2019 क े ह मिनय राथिश स्वीकार करने का अनुरो किया।उच्च न्यायालय द्वारा नामंकया।उच्च न्यायालय द्वारा नामजूर करने की पुमिष्ट मिकए जाने पर आयुक्त द्वारा इस रह क े अनुरो को अस्वीकार कर मिदया गया है।

7. इसलिलए इस न्यायालय क े समक्ष मिवPार क े लिलए जो संतिक्षप्त प्रश्न रखा गया है, वह यह है मिक क्या आईबीसी क े ह रोक और/या प्रति बं ों क े मद्देनजर जब अपीलक ा" क े लिलए य की गई राथिश जमा करना असंभव र्थीा, ो अपीलक ा" को मिबना मिकसी गल ी क े दंतिड मिकया जा सक ा है? मिकसी मिदए गए मामले में, क्या अपीलक ा" को उसकी अपनी गल ी क े मिबना भी पीमिड़ मिकया जा सक ा है और उपPार से वंतिP मिकया जा सक ा है और लाभ/राह से वंतिP मिकया जा सक ा है, हालांमिक अपीलक ा" क े लिलए प्रति बं क े दौरान य की गई राथिश को जमा करने जैसा कु छ भी काय" करना असंभव र्थीा। अस्वीकरण: 7.[1] मिवति की य स्थिस्र्थीति क े अनुसार, मिकसी भी पक्ष को उपPार से वंतिP नहीं मिकया जाएगा और पक्षकारों ने अदाल क े समक्ष जो भी समस्या उtाई होगी, उसकी गुण-दोर्ष क े आ ार पर जांP की जानी Pामिहए [सुनील वासुदेव (उपरोक्त) (प्रस् र 31)]। 7.[2] जैसा मिक कलकत्ता आयरन मP‘र्ट्सस एसोजिसएशन (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा पाया और अथिभमिन ा"रिर मिकया गया है, कोई भी कानून मिकसी व्यमिक्त को असंभव Pीज को करने क े लिलए मजबूर नहीं करेगा। [कलकत्ता आयरन मP‘र्ट्सस एसोजिसएशन (उपरोक्त) (प्रस् र 5)] 7.[3] ज्ञानPंद (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय ने कहा मिक न्यायालय की ओर से क ु छ ऐसा करने का मिनदfश देना उतिP नहीं होगा जो असंभव है और यमिद मिकसी व्यमिक्त को क ु छ ऐसा करने का मिनदfश मिदया गया है जो असंभव है और यमिद वह ऐसा करने में मिवफल रह ा है, ो उसे दोर्षी नहीं tहराया जा सक ा है।

8. उपरोक्त मिनण"यों में इस न्यायालय द्वारा प्रति पामिद मिवति को मामले क े थ्यों पर लागू कर े हुए, अपीलक ा" को क ु छ ऐसा ना करने क े लिलए दंतिड नहीं मिकया जा सक ा है जो उसक े लिलए करना असंभव र्थीा। प्रति बं की अवति क े दौरान कोई भी भुग ान करने में अपीलक ा" क े रास् े में एक कानूनी बा ा र्थीी।भले ही अपीलक ा" मिन ा"रिर अवति क े भी र य की गई राथिश जमा करना Pाह ा र्थीा, लेमिकन आईबीसी क े ह प्रति बं को देख े हुए ऐसा नहीं कर सक ा र्थीा क्योंमिक प्रति बं क े दौरान कोई भुग ान नहीं मिकया जा सक ा र्थीा।मामले क े उस दृमिष्टकोण में, अपीलक ा" को उपPार अस्वीकरण: मिवमिहन नहीं छोड़ा जा सक ा है और उसे कानूनी बा ा क े कारण पीमिड़ नहीं मिकया जाना Pामिहए जो इसका कारण र्थीा और/या मिन ा"रिर समय क े भी र काय" नहीं करने पर कारण र्थीा। 8.[1] अब जहाँ क उच्च न्यायालय द्वारा इस आशय की मिटप्पथिणयां की गई हैं मिक उच्च न्यायालय, भार क े संमिव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शमिक्तयों का प्रयोग कर े हुए, योजना 2019 क े ह अवति को बढ़ा नहीं सक ा है, उच्च न्यायालय क ु छ हद क सही है।उच्च न्यायालय भार क े संमिव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह शमिक्तयों का प्रयोग कर े हुए योजना का मिवस् ार नहीं कर सक ा है।हालाँमिक व "मान मामले में, यह उच्च न्यायालय द्वारा योजना क े मिवस् ार का मामला नहीं है; यह उपPारात्मक उपाय करने का मामला है।यह ऐसा मामला नहीं है जहां अपीलक ा" ने योजना क े ह मिन ा"रिर समय क े भी र कोई आवेदन नहीं मिकया हो।यह ऐसा मामला नहीं है जहां मिनपटान ( य की गई) राथिश का मिन ा"रण करने वाला प्रपत्र संख्या 3 योजना की वै ा क े दौरान जारी नहीं मिकया गया र्थीा।यह ऐसा मामला नहीं है जिजसमें अपीलक ा" ने जानबूझकर मिनय राथिश जमा नहीं की हो और/या मिन ा"रिर समय क े भी र मिनय राथिश जमा नहीं करने में अपीलक ा" की ओर से कोई लापरवाही हुई हो। जैसा मिक ऊपर देखा गया है, यह एक ऐसा मामला है जिजसमें अपीलक ा" आईबीसी क े प्राव ानों को देख े हुए कानूनी बा ा और प्रति बं की अवति क े दौरान भुग ान करने पर रोक क े कारण भुग ान करने में असमर्थी" र्थीा। मिकसी मामले में ऐसा हो सक ा है मिक कोई व्यमिक्त जिजसने योजना क े ह आवेदन मिकया हो और जिजसे 30.06.2020 को या उससे पहले भुग ान करना र्थीा, वह 29.06.2020 को गंभीर रूप से बीमार हो गया अस्वीकरण: और उसक े मामलों को देखने वाला कोई नहीं र्थीा और इसलिलए वह राथिश जमा नहीं कर सका; ऐसी असमर्थी" ा उसक े मिनयंत्रण से बाहर र्थीी और उसक े ुरं बाद, बीमारी से बाहर मिनकलने पर उसने राथिश जमा करने का प्रयास मिकया और/या अदाल का दरवाजा खटखटाया- क्या अदाल अपनी आंखें बंद कर सक ी है और कह सक ी है मिक हालांमिक उस व्यमिक्त की भुग ान करने में असमर्थी" ा क े वै कारण और/या कारण हो सक े हैं, मिफर भी उसे कोई राह नहीं दी जा सक ी है?ऐसे असा ारण मामले हो सक े हैं जिजन पर प्रत्येक मामले क े थ्यों पर मिवPार करने की आवश्यक ा हो ी है। अदाल ें न्याय करने क े लिलए हो ी हैं और मिकसी व्यमिक्त को ऐसा कु छ करने क े लिलए मजबूर नहीं कर सक ी हैं जो उसक े लिलए करना असंभव र्थीा। 8.[2] अब जहाँ क उच्च न्यायालय द्वारा मिदए गए दूसरे आ ार का संबं है मिक नामिम समिमति याँ अस्थिस् त्व में नहीं हैं, यह ध्यान रखना आवश्यक है मिक सीबीसीई ने एक परिरपत्र जारी मिकया है मिक ऐसे मामले में जहाँ उच्च न्यायालय/न्यायालयों ने 30.06.2020 क े बाद योजना क े ह दावे की नामंजूरी को अपास् कर े हुए एक आदेश पारिर मिकया है, ो आवेदनों को मैनुअल रीक े से लिलया जा सक ा है। कई मामलों में उच्च न्यायालयों ने मामले को नामिम समिमति यों को वापस भेज मिदया है जिजसमें मिवभाग क े अति कारी शामिमल हो े हैं और उसक े बाद आवेदनों को मैनुअल रीक े से लिलया जा ा है।

9. उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए और ऊपर ब ाई गई परिरस्थिस्र्थीति यों में और कारणों से, क्योंमिक अपीलक ा" सुसंग समय पर, मिवशेर्ष रूप से अस्वीकरण: 30.06.2020 को या उससे पहले, आईबीसी क े ह रोक को देख े हुए मिनय की गई राथिश का भुग ान करने पर रोक और कानूनी बा ा क े कारण मिनय की गई राथिश जमा करने की स्थिस्र्थीति में नहीं र्थीा और जैसा मिक यह पाया गया है मिक अपीलार्थी8 अन्यर्थीा योजना क े ह लाभ का हकदार र्थीा क्योंमिक अपीलार्थी8 द्वारा प्रस् ु फॉम" संख्या 1 को स्वीकार कर लिलया गया है, मिनपटान( य) राथिश का मिन ा"रण करने वाला फॉम" संख्या 3 जारी कर मिदया गया है, उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी8 द्वारा अनुरो की गई कोई राह देने से इनकार करक े गल ी की है।

10. उपरोक्त को देख े हुए और ऊपर ब ाए गए कारणों से, व "मान अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है। उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेमिप मिनण"य और आदेश को ए द्द्वारा मिनरस् और अपास् मिकया जा ा है। यह मिनदfश मिदया जा ा है मिक अपीलक ा" द्वारा पहले ही जमा मिकए गए 1,24,28,500/- रुपये का भुग ान "सबका मिवश्वास (मिवरास मिववाद समा ान) योजना, 2019" क े ह य मिकए गए बकाया भुग ान क े लिलए मिवमिनयोजिज मिकया जाए और अपीलक ा" को उन्मुमिक्त प्रमाण पत्र जारी मिकया जाए। दनुसार व "मान अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है। हालांमिक मामले क े थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों में, लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। ………………………… (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह) अस्वीकरण: ………………………… (न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न) नई मिदल्ली; 5 जनवरी 2023 अस्वीकरण: