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भार� क
े सव�च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति�कारिर�ा
सिसविवल अपील संख्या 1141/2023
(एसएलपी (सी) संख्या 27252/2019 से उत्पन्न)
डॉ. बी आर अम्बेडकर विवश्वविवद्यालय, आगरा अपीलार्थी8 (गण)
बनाम
देवर्ष= नार्थी गुप्ता और अन्य प्रत्यर्थी8 (गण)
विनण=य
न्यायमूर्ति� विदनेश माहेश्वरी
अनुमति� प्रदान की गई।
JUDGMENT
2. इसमें शाविमल एक संतिक्षप्त बिंबदु को ध्यान में रख�े हुए, अं��: हमने इसी चरण में विवपक्षी पक्षकारों क े विवद्वान अति�वक्ता को सुना।
3. अपीलक�ा=-डॉ. बी आर अंबेडकर विवश्वविवद्यालय, आगरा1 ने सिसविवल प्रकीण= यातिचका संख्या 871/2019 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ द्वारा पारिर� विनण=य और आदेश 21.05.2019 विदनांविक� से व्यथिर्थी� होकर यह अपील दायर की है, सिYसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्थी8 संख्या 12 और 2 द्वारा दायर रिरट यातिचका को स्वीकार कर लिलया है, सिYसमें विवथिभन्न परीक्षकों क े माध्यम से 1 ए�स्मिस्मनपश्चा�् 'अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय' क े रूप में विनर्दिदष्ट विकया गया है 2 ए�स्मिस्मनपश्चा�् 'रिरट यातिचकाक�ा=' क े रूप में विनर्दिदष्ट विकया गया है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 2023 INSC 721 विpसिYयोलॉYी विवर्षय क े पेपर-II की पुनमू=ल्यांकन आदेश क े लिलए परमादेश की रिरट Yारी करने की मांग की गई है और यविद पुनमू=ल्यांकन से अंकों में वृतिt हो�ी है �ो संशोति�� परिरणाम को स्वीकार विकया Yाए।
3.1. उपयु=क्त रिरट यातिचका पर विवचार कर�े हुए, मामले क े विवथिशष्ट �थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति�यों को ध्यान में रख�े हुए उच्च न्यायालय ने �ीन विवथिभन्न परीक्षकों से प्रश्नग� उत्तर पुस्मिस्�का का पुनमू=ल्यांकन कराया और यह देखने क े बाद विक �ीन विवथिभन्न परीक्षकों द्वारा विकए गए पुनमू=ल्यांकन क े अंक सामान्य �ौर पर समान र्थीे, लेविकन मूल अंकों से बहु� अति�क र्थीे, आदेश विदया विक �ीन परीक्षकों द्वारा इस प्रकार विदए गए अंकों का औस� विpसिYयोलॉYी क े उक्त पेपर-II क े संबं� में रिरट यातिचकाक�ा= को विदया Yाए। इ�ना ही नहीं, उच्च न्यायालय ने रिरट यातिचकाक�ा= को 1 लाख रुपये की राथिश में लाग� अति�विनण8� करने क े लिलए आगे कदम बढ़ा�े हुए अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय को कानूनी रूप से उपबंति�� ऐसी Yांच क े बाद संबंति�� परीक्षक से राथिश वसूल करने की स्व�ंत्र�ा प्रदान की। विpर भी, उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्र्थीा की विक यविद कोई छात्र Yो पूव=व�8 �ीन वर्ष} में विवश्वविवद्यालय की परीक्षा में उपस्मिस्र्थी� हुआ र्थीा, उसे क े वल इस आ�ार पर अस्वीकार नहीं विकया Yाना चाविहए विक विवश्वविवद्यालय अति�विनयम में ऐसी कोई प्रविnया विन�ा=रिर� नहीं की गई र्थीी।उच्च न्यायालय ने यह भी विनद~श विदया विक विनण=य की एक प्रति� उच्च थिशक्षा और माध्यविमक थिशक्षा विवभागों क े सतिचवों को इस मामले को देखने और यह सुविनतिश्च� करने क े लिलए भेYी Yाए विक मूल्यांकनक�ा=ओं को 'यर्थीोतिच� क ु शल �रीक े से' �ैना� विकया गया र्थीा।
4. रिरट यातिचका की विवर्षय-वस्�ु, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर� आदेश की प्रकृ ति� और व�=मान अपील में चुनौ�ी क े संदभ= में, हम संक्षेप में प्रासंविगक पृष्ठभूविम क े पहलुओं पर ध्यान दे सक�े हैंः- उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 4.[1] इस मामले क े रिरट यातिचकाक�ा= (यहां प्रत्यर्थी8 संख्या 1), अपीलार्थी8- विवश्वविवद्यालय से संबt एस. एन. मेतिडकल कॉलेY, आगरा में एम. बी. बी. एस. पाठ्यnम का छात्र होने क े ना�े विदसंबर, 2018 में आयोसिY� एम.बी.बी.एस. परीक्षा में शाविमल हुआ। कथिर्थी� परीक्षा क े परिरणाम में, रिरट यातिचकाक�ा= को 600 में से 344 अंक प्राप्त करने क े बाद भी असpल घोविर्ष� विकया गया र्थीा, क्योंविक विpसिYयोलॉYी क े पेपर-II में, उसे 50 में से क े वल 6 अंक विमले र्थीे।
4.2. इस प्रकार विदए गए अंकों से असं�ुष्ट, रिरट यातिचकाक�ा= ने विpसिYयोलॉYी क े कथिर्थी� पेपर-II की उत्तर पुस्मिस्�का की एक प्रति� प्राप्त की और अंकों की Yांच और उत्तर पुस्मिस्�का की पुनमू=ल्यांकन क े लिलए भी आवेदन विकया।Yब अपीलार्थी8- विवश्वविवद्यालय द्वारा Yांच या पुनमू=ल्यांकन क े लिलए कोई कार=वाई नहीं की गई, �ो रिरट यातिचकाक�ा= ने उच्च न्यायालय का दरवाYा खटखटाया और विनम्नलिललिख� राह� की मांग कीः- “क. यातिचकाक�ा= की उत्तर पुस्मिस्�का को विवथिभन्न परीक्षकों क े माध्यम से दोबारा Yांचने क े लिलए प्रत्यर्थिर्थीयों को विनद~थिश� करने क े लिलए परमादेश की एक रिरट Yारी करें �ाविक एमबीबीएस (प्रर्थीम-प्रोp) परीक्षा 2018 क े लिलए विpसिYयोलॉYी पेपर- II विवर्षय क े लिलए यातिचकाक�ा= की उत्तर पुस्मिस्�का का पुनमू=ल्यांकन विकया Yा सक े और यह भी प्रार्थी=ना की Yा�ी है विक यह माननीय न्यायालय भी प्रत्यर्थिर्थीयों को विनद~श देने की कृ पा करें विक यविद पुनमू=ल्यांकन में यातिचकाक�ा= क े अंक बढ़े हैं �ो Yैसा विक इस माननीय न्यायालय द्वारा विनद~थिश� विकया Yा सक�ा है संशोति�� परिरणाम भी विन�ा=रिर� समय क े भी�र यातिचकाक�ा= क े पक्ष में Yारी विकया Yाना चाविहए। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ख. मामले क े व�=मान �थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति�यों में यातिचकाक�ा= क े पक्ष में कोई अन्य उपयुक्त रिरट, Yैसा यह माननीय न्यायालय ठीक और उतिच� समझे आदेश या विनद~श Yारी करे। ग. यातिचकाक�ा= क े पक्ष में यातिचका की लाग�।”
5. अथिभलेख पर रखी गई सामग्री की Yांच करने क े बाद, उच्च न्यायालय ने इस �थ्य पर ध्यान विदया विक प्रश्न पत्र में 5 प्रश्न र्थीे सिYनमें से पहले 4 प्रश्न वण=नात्मक प्रक ृ ति� क े र्थीे सिYनमें से प्रत्येक क े 10 अंक र्थीे; और 5 वां प्रश्न दो भागों में विवभासिY� है, सिYसक े लिलए प्रत्येक 5 अंकों क े संतिक्षप्त नोट्स की आवश्यक�ा है। उच्च न्यायालय ने आगे इस �थ्य पर ध्यान विदया विक रिरट यातिचकाक�ा= को दी की गई उत्तर पुस्मिस्�का की प्रति� क े अनुसार, वस्�ु�ः परीक्षक द्वारा इसका मूल्यांकन नहीं विकया गया र्थीा और विवचार विकए, अचानक �ीन उत्तरों क े संबं� में प्रत्येक को 2 अंक विदए गए र्थीे। उत्तर पुस्मिस्�का क े परिरशीलन और पक्षकारों की ओर से विकए गए �रेकों पर ध्यान दे�े हुए, उच्च न्यायालय ने अपने आदेश 12 अप्रैल, 2019 विदनांविक� में अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय को नोविटस विदया विक इसक े लिखलाp गंभीर कार=वाई क्यों नहीं की Yानी चाविहए और विनष्पक्ष परीक्षकों द्वारा उत्तर पुस्मिस्�का का मूल्यांकन कराने की प्रविnया को अपनाना समीचीन भी माना।�दनुसार, और उच्च न्यायालय क े विनद~शों क े अनुसार, उत्तर पुस्मिस्�काओं क े �ीन सेट �ैयार विकए गए और उन्हें �ीन अलग-अलग परीक्षकों को भेYा गया, सिYन्होंने अपने व्यविक्तग� और विनष्पक्ष मूल्यांकन में nमशः 19, 20 और 21 अंक प्रदान विकए।मूल परीक्षक द्वारा विदए गए अंकों में भौति�क विवसंगति� पाए Yाने क े बाद, विवशेर्ष रूप से उक्त �ीन विनष्पक्ष परीक्षकों द्वारा विदए गए अंकों को ध्यान में रख�े हुए, उच्च न्यायालय ने विनम्नलिललिख� शब्दों (आक्षेविप� आदेश क े पैराग्राp 15 और 16 में) में अपने प्रभाव और विनष्कर्ष} क े विहस्से का उल्लेख विकयाः- उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “15. उपयु=क्त �ीन परीक्षकों द्वारा विकया गया मूल्यांकन सामान्य �ौर पर समान है और उनक े द्वारा विकए गए मूल्यांकन में कोई विवशेर्ष अं�र नहीं है।विदए गए मूल अंकों में, यातिचकाक�ा= को प्रश्न 1,[3] और 4 में से प्रत्येक में 2 अंक विदए गए हैं, Yबविक प्रश्न 2, 5 (ए) और 5 (बी) में सभी �ीन परीक्षकों, सिYन्होंने इस न्यायालय क े आदेश क े �ह� मूल्यांकन विकया है, ने यातिचयों को उतिच� रूप से अच्छे या कु छ अंक विदए हैं।यहां �क विक प्रश्न 1,[3] और 4 पर भी मूल परीक्षक द्वारा विदए गए अंक इन �ीन परीक्षकों द्वारा विदए गए अंकों क े आसपास भी नहीं हैं।
16. चूंविक, हमने उत्तर पुस्मिस्�का की प्रति�लिलविप देखी है, सिYसे यातिचकाक�ा= ने अति�विनयम 2005 क े �ह� प्राप्त विकया है और पाया है विक वास्�व में यह कॉपी Yाँँची नहीं गई है और यह स्पष्ट र्थीा विक परीक्षक ने विबना विवचार विकये अंक विदए हैं और अब रिरपोट= में �ीन विवशेर्षज्ञ परीक्षकों द्वारा विकए गए मूल्यांकन से सुरतिक्ष� हैं।”
6. इसक े पश्चा�्, प्रस्�र 17 से 28 में, उच्च न्यायालय ने इसकी व्यर्थीा और विनराशा को व्यक्त विकया विक ऐसे गैर -सिYम्मेदाराना और उपेक्षापूण= परीक्षक क े कारण एक आरंथिभक व्यावसातियक छात्र को कष्ट उठाना पड़ा, सिYसने विबना विवचार विकए उत्तर पुस्मिस्�का का मूल्यांकन करने की परवाह नहीं की और विpर, अवलोकन विकया विक मामले क े �थ्य अपीलक�ा= -विवश्वविवद्यालय की ओर से दक्ष�ा और पय=वेक्षण की कमी को दशा=�े हैं। उच्च न्यायालय ने छात्रों क े क ै रिरयर और थिशक्षा प्रणाली में सु�ार की आवश्यक�ाओं क े बारे में विवथिभन्न विटप्पथिणयां की और ऐसी कविमयों को दूर विकया Yहां परीक्षक/मूल्यांकनक�ा= अपने क�=व्यों क े विनव=हन में गंभीर नहीं र्थीे।उच्च न्यायालय ने एक थिशक्षक को दी गई स्मिस्र्थीति� क े संबं� में भी व्यापक विटप्पथिणयां की और कहा विक व�=मान मामले क े संबं� में परीक्षक Yैसे व्यविक्तयों द्वारा थिशक्षकों में पारंपरिरक विवश्वास को समाप्त विकया Yा रहा है।विpर भी, उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उच्च न्यायालय ने अपनी गंभीर चिंच�ा व्यक्त की विक क ै से अपीलार्थी8 -विवश्वविवद्यालय द्वारा परीक्षकों/मूल्यांकनक�ा=ओं का चयन विकया गया र्थीा, Yबविक इस बा� पर बल विदया विक एक भी छात्र क े भविवष्य से समझौ�ा नहीं विकया Yा सक�ा है।ऐसा कहने क े बाद, उच्च न्यायालय ने मामले क े �थ्यों पर विpर से विवचार विकया और पाया विक अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय को रिरट यातिचकाक�ा= को उक्त �ीन परीक्षकों द्वारा विदए गए अंकों का औस� देने से उसे विpसिYयोलॉYी क े कथिर्थी� पेपर-II में 20 अंक विदए गए हैं, और उसे �दनुसार आगे की परीक्षाओं में उपस्मिस्र्थी� होने की अनुमति� देने का विनद~श देना उतिच� है।
7. उपयु=क्त चचा= क े पश्चा�्, उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय द्वारा प्रर्थीम�ः संदेय 1 लाख रुपए की राथिश में रिरट यातिचकाक�ा= को खचा= अति�विनण8� करने क े लिलए काय=वाही आरंभ की सिYसमें परीक्षक से राथिश वसूल करने की स्व�ंत्र�ा र्थीी।उच्च न्यायालय ने यह उम्मीद और विवश्वास व्यक्त विकया विक अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय उतिच� कदम उठाएगा �ाविक उत्तर पुस्मिस्�काओं क े मूल्यांकन क े लिलए ऐसे परीक्षकों/मूल्यांकनक�ा=ओं को �ैना� न विकया Yा सक े । इसक े अलावा, उच्च न्यायालय ने यह भी प्राव�ान विकया विक यविद कोई छात्र, Yो विपछले �ीन वर्ष} में अपीलार्थी8 -विवश्वविवद्यालय की परीक्षा में उपस्मिस्र्थी� हुआ र्थीा, उसे पुनमू=ल्यांकन या पुनमू=ल्यांकन क े लिलए आवेदन करना र्थीा, �ो अनुरो� को क े वल इस आ�ार पर अस्वीकार नहीं विकया Yाना चाविहए विक अपीलार्थी8 - विवश्वविवद्यालय संविवति� में पुनमू=ल्यांकन का कोई प्राव�ान नहीं र्थीा।विनण=य की एक प्रति� संबंति�� विवभागों क े सतिचवों को इस आवश्यक�ा क े सार्थी अग्रेविर्ष� करने का भी विनद~श विदया गया विक वे यह सुविनतिश्च� करें विक परीक्षकों /मूल्यांकनक�ा=ओं को सख्� विनद~शों क े सार्थी 'उतिच� रूप से क ु शल �रीक े से' �ैना� विकया Yाए �ाविक परीक्षकों/मूल्यांकनक�ा=ओं की ओर से असाव�ानी/लापरवाही क े कारण कोई भी उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" छात्र प्रभाविव� न हो।हम आक्षेविप� आदेश क े अंति�म प्रस्�रों को उपयोगी रूप से इस प्रकार पुनः प्रस्�ु� कर सक�े हैंः- “29. इस मामले क े �थ्यों पर वापस आ�े हुए, हमारे पास इस न्यायालय क े आदेश क े �ह� यातिचकाक�ा= को विदए गए �ीन परीक्षकों क े औस� अंक देने क े लिलए विवश्वविवद्यालय को विनद~श देने क े अलावा कोई विवकल्प नहीं है और उसे विpसिYयोलॉYी, पेपर-II में 20 अंक विदए गए हैं और �दनुसार उसक े अंक पत्र और परिरणाम को सही करें और उसे �दनुसार आगे की परीक्षाओं में उपस्मिस्र्थी� होने की अनुमति� दें।
30. हम याची को 1,00,000/- रुपए (अर्थीा=�् एक लाख रुपए) की लाग� अति�विनण8� करना भी उतिच� समझ�े हैं, Yो विक प्रर्थीम�: आगरा विवश्वविवद्यालय द्वारा देय होगा, विकन्�ु उसे विवति� क े अनुसार Yांच कराकर संबंति�� परीक्षक से राथिश वसूल करने की स्व�ंत्र�ा होगी।
31. हमें उम्मीद और विवश्वास है विक आगरा विवश्वविवद्यालय अब उतिच� कदम उठाएगा �ाविक भविवष्य में उत्तर पुस्मिस्�काओं क े मूल्यांकन क े लिलए ऐसे गैर-सिYम्मेदाराना, विववेकहीन, लापरवाह परीक्षक/मूल्यांकनक�ा= �ैना� न विकए Yाएं, चाहे वह व्यावसातियक परीक्षा हो या सामान्य विवर्षय या अन्य।
32. हम यह भी प्राव�ान कर�े हैं विक यविद कोई छात्र, Yो विपछले �ीन वर्ष} में आगरा विवश्वविवद्यालय की परीक्षा में उपस्मिस्र्थी� हुआ र्थीा, व�=मान मामले को तिचत्रण क े रूप में ले�े हुए पुनमू=ल्यांकन क े लिलए आवेदन कर�ा है, �ो आगरा विवश्वविवद्यालय ऐसे छात्रों की उत्तर पुस्मिस्�काओं का पुनमू=ल्यांकन करेगा और ऐसे मामलों को क े वल इस आ�ार पर पुनमू=ल्यांकन क े लिलए अस्वीकार नहीं विकया Yाएगा विक विवश्वविवद्यालय अति�विनयम में पुनमू=ल्यांकन का कोई प्राव�ान नहीं है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
33. इस विनण=य की प्रति� प्र�ान सतिचव (उच्च थिशक्षा) क े सार्थी- सार्थी सतिचव (माध्यविमक थिशक्षा) को भी अग्रेविर्ष� की Yाए, �ाविक वे भी इस मामले को देख सक ें और यह सुविनतिश्च� कर सक ें विक उत्तर पुस्मिस्�काओं क े परीक्षक/मूल्यांकनक�ा= उतिच� रूप से क ु शल �रीक े से विनयुक्त विकए Yाएं और सख्� विनद~श विदए Yाएं �ाविक परीक्षकों /मूल्यांकनक�ा=ओं की ओर से लापरवाही/लापरवाही आविद क े कारण कोई भी छात्र प्रभाविव� न हो।"
8. पूव�क्त विनद~शों और आवश्यक�ाओं से व्यथिर्थी�, अपीलार्थी8-विवश्वविवद्यालय ने इस न्यायालय का दरवाYा खटखटाया है।यह देखा Yा सक�ा है विक मामले क े �थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति�यों को ध्यान में रख�े हुए, 25.11.2019 को अपील की अनुमति� मांगने वाली यातिचका पर विवचार कर�े हुए, इस न्यायालय ने 21.05.2019 क े आदेश क े संचालन पर रोक लगा दी।हमें सूतिच� विकया गया है विक इस न्यायालय द्वारा इस �रह क े स्र्थीगन आदेश को पारिर� करने से पहले, 21.05.2019 क े आक्षेविप� स्र्थीगन आदेश पर अवलंब ले�े हुए उच्च न्यायालय में क ु छ अन्य रिरट यातिचकाएं दायर की गई र्थीीं और उसमें, उच्च न्यायालय ने प्रश्नग� विनण=य का पालन कर�े हुए पुनमू=ल्यांकन क े लिलए स्र्थीगन आदेश पारिर� विकए।चाहे Yो भी हो, हम विकसी अन्य आदेश पर विटप्पणी नहीं कर रहे हैं, सिYसे इस न्यायालय क े समक्ष चुनौ�ी नहीं दी गई है।
9. हमने 21.05.2019 क े आक्षेविप� आदेश में उच्च न्यायालय द्वारा Yारी की गई विटप्पथिणयों और विनद~शों क े संबं� में पक्षकारों क े अति�वक्ता को विवस्�ार पूव=क सुना है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
9.1. अपीलक�ा= क े विवद्वान अति�वक्ता प्रस्�ु� विकया विक उच्च न्यायालय द्वारा व�=मान मामले में अपनाई गई प्रविnया और Yारी विकए गए विनद~श अविनयंवित्र� हैं, और विवति� की आवश्यक�ाओं क े अनुरूप नहीं हैं। यह प्रस्�ु� विकया Yा�ा है विक Yब विवश्वविवद्यालय का कानून उत्तर पुस्मिस्�काओं क े पुनमू=ल्यांकन क े लिलए कोई प्राव�ान नहीं कर�ा है, �ो उच्च न्यायालय क े विनद~श व्यावहारिरक रूप से विवश्वविवद्यालय अति�विनयम को विनरर्थी=क बना दे�े हैं और यह कानून में अनुज्ञेय नहीं रह�ा है। विहमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग बनाम मुक े श ठाक ु र और अन्यः (2010) 6 एससीसी 759 क े मामले में इस न्यायालय क े विनण=य को विनर्दिदष्ट विकया गया है। यह भी प्रस्�ु� विकया गया है विक उच्च न्यायालय इस पर विवचार करने में विवpल रहा है विक प्रश्न पत्र व्यविक्तपरक होने क े कारण, विवथिभन्न परीक्षकों की मार्किंकग शैली और �रीक े की �ुलना नहीं की Yा सक�ी है क्योंविक यह वस्�ुविनष्ठ प्रकार क े प्रश्न पत्र का मामला नहीं रहा है Yहां संभाविव� विवकल्पों में से क े वल एक उत्तर सही हो सक�ा है। यह आगे प्रस्�ु� विकया गया है विक मूल परीक्षक ने, वास्�व में, कोई अंक नहीं दे�े हुए, अन्य उत्तरों में विदए गये अंक, Yो 'शून्य' अंक देने क े बराबर र्थीे और अंक देने की उनकी शैली को मूल्यांकन क े गैर-सिYम्मेदाराना �रीक े क े रूप में नहीं लिलया Yा सक�ा र्थीा। विवद्व� अति�वक्ता ने रन विवYय सिंसह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2018) 2 एससीसी 357 में इस न्यायालय क े विनण=य पर अवलंब विकया है।
10. इसक े विवपरी�, रिरट यातिचकाक�ा= (प्रत्यर्थी8 नं. १) क े विवद्व� अति�वक्ता ने इस प्रति�वेदन क े सार्थी आक्षेविप� आदेश का विवति�व� समर्थी=न विकया है विक Yब कोई अन्य विवकल्प नहीं बचा र्थीा �ो उससे न्यायालय में Yाने की अपेक्षा की गई र्थीी और व�=मान मामला स्पष्ट रूप से रिरट यातिचकाक�ा= की उत्तर पुस्मिस्�का का उतिच� रूप से मूल्यांकन आदेश में अपने क�=व्य में परीक्षक क े विवpल होने का मामला उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" र्थीा। विवद्व� अति�वक्ता प्रस्�ु� करेंगे विक �थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति�यों क े विदए गए समूह में, उच्च न्यायालय द्वारा दी गई राह� विकसी भी हस्�क्षेप की मांग नहीं कर�ी है।
11. विवरो�ी दलीलों पर उत्सुक�ा से विवचार करने और अथिभलेख की Yांच करने क े बाद, Yबविक हम मामले की विवथिशष्ट परिरस्मिस्र्थीति�यों में आक्षेविप� आदेश क े पैरा 29 में रिरट यातिचकाक�ा= को दी गई मूल राह� को बदलने क े लिलए इच्छ ु क नहीं हैं, लेविकन, हमने ऐसा नहीं विकया है। इसमें �विनक भी संदेह नहीं है विक आक्षेविप� आदेश में उच्च न्यायालय द्वारा Yारी विकए गए अन्य सभी विनद~श और शासनादेश को अनुमोविद� नहीं विकया Yा सक�ा है।
12. Yहां �क पुनमू=ल्यांकन क े प्रश्न का संबं� है, इस न्यायालय द्वारा प्रति�पाविद� सिसtां�ों को उपयोगी रूप से विनम्नानुसार पुनः उtृ� विकया Yा सक�ा हैः
12.1. मुक े श ठाक ु र (उपरोक्त) क े मामले में इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख� म� व्यक्त विकया और अथिभविन�ा=रिर� विकयाः - “24. उत्तर पुस्मिस्�का क े पुनमू=ल्यांकन का मुद्दा अब �क विनण=य नहीं लिलया गया है।इस मुद्दे पर इस न्यायालय द्वारा महाराष्ट्र राज्य माध्यविमक और उच्च�र माध्यविमक थिशक्षा बोड= बनाम परिर�ोर्ष भूपेश कु मार सेठ [(1984) 4 एस. सी. सी. 27: ए. आई. आर. 1984 एस. सी. 1543] में विवस्�ार से विवचार विकया गया, सिYसमें इस न्यायालय ने इस दलील को खारिरY कर विदया विक पुनमू=ल्यांकन क े प्राव�ान क े अभाव में, इस आशय का एक विनदेश न्यायालय द्वारा Yारी विकया Yा सक�ा है। न्यायालय ने आगे यह भी अव�ारिर� विकया है विक यहां �क विक विनयमों/विवविनयमों में शाविमल विकए गए नीति�ग� विनण=य को भी, सिYसमें पुनः Yाँच/सत्यापन/पुनमू=ल्यांकन का प्राव�ान नहीं है, �ब �क चुनौ�ी नहीं दी Yा सक�ी है Yब �क विक यह साविब� करने का आ�ार न हो विक उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" नीति� स्वयं क ु छ वै�ाविनक प्राव�ानों का उल्लंघन कर�ी है।न्यायालय ने विनम्नलिललिख� रूप में अथिभविन�ा=रिर� विकयाः(एससीसी पृष्ठ 39-40 और 42, पैराग्राp 14 और 16) “14. यह विवशेर्ष रूप से विव�ातियका और उसक े प्रति�विनति� क े क्षैत्राति�कार क े �ह� है विक नीति� क े मामले क े रूप में, विवति� क े प्राव�ानों को सव�त्तम �रीक े से क ै से लागू विकया Yा सक�ा है और विनयमों या विवविनयमों में क्या उपाय, मूल और प्रविnया शाविमल विकए Yाने चाविहए Yो अति�विनयम क े लक्ष्य और उद्देश्यों की उपलस्मिब्� क े लिलए प्रभावी हो।
16. न्यायालय विव�ातियका और अ�ीनस्र्थी विवविनयमन विनकाय द्वारा विवकसिस� नीति� की बुतिtमत्ता पर विनण=य नहीं दे सक�ा।यह एक बुतिtमत्तापूण= नीति� हो सक�ी है Yो अति�विनयम क े उद्देश्य को पूरी �रह से प्रभावी करेगी या इसमें प्रभावशील�ा की कमी हो सक�ी है और इसलिलए संशो�न और सु�ार की आवश्यक�ा हो सक�ी है।बिंक�ु विकसी विनयम या विवविनयम में विनगविम� नीति� में कोई खाविमयां इसे उसक े अति�कार से बाहर नहीं बनाएंगी और न्यायालय इस आ�ार पर इसे खारिरY नहीं कर सक�ा विक उसकी राय में यह बुतिtमत्तापूण= या विववेकपूण= नीति� नहीं है अति�कार क े बाहर की नीति� मूख=�ापूण= नीति� है और यह वास्�व में अति�विनयम क े उद्देश्यों को प्रभावी नहीं बनाएगी।
25. इस न्यायालय द्वारा प्रमोद क ु मार श्रीवास्�व बनाम विबहार लोक सेवा आयोग [(2004) 6 एससीसी 714: में यह दृविष्टकोण को स्पीक ृ � विकया गया एवं अवलंब लिलयाा गया है।2004 एस. सी. सी. (एल एंड एस) 883: विनम्नानुसार अव�ारिर� विकया Yा�ा है(एससीसी पृष्ठ 717-18, पैरा 7) उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “7. आयोग क े प्रासंविगक विनयमों क े �ह� ऐसा कोई प्राव�ान नहीं है विक कोई उम्मीदवार अपनी उत्तर पुस्मिस्�का क े पुनमू=ल्यांकन क े लिलए कहने का हकदार हो। क े वल Yांच क े लिलए एक प्राव�ान है सिYसमें उत्तर पुस्मिस्�काओं को यह Yांच करने क े उद्देश्य से देखा Yा�ा है विक क्या विकसी उम्मीदवार द्वारा विदए गए सभी उत्तरों की Yांच की गई है और क्या प्रत्येक प्रश्न क े कु ल अंकों में कोई गल�ी हुई है और उन्हें उत्तर पुस्मिस्�का क े पहले कवर पेY पर सही ढंग से नोट विकया गया है।इसमें कोई विववाद नहीं है विक Yांच क े बाद अपीलक�ा= को सामान्य विवज्ञान क े प्रश्नपत्र में विदए गए अंकों में कोई गल�ी नहीं पाई गई। प्रासंविगक विनयमों में उत्तर पुस्मिस्�काओं क े पुनमू=ल्यांकन क े लिलए विकसी प्राव�ान क े अभाव में, विकसी भी परीक्षा में विकसी भी उम्मीदवार को अपने अंकों क े पुनमू=ल्यांकन का दावा करने या पूछने का कोई अति�कार नहीं है। * * * * * * * * * * * * * * * *
26. इस प्रकार, इस विवर्षय पर विवति� इस प्रभाव से प्रकट हो�ी है विक कानून या सांविवति�क अति�विनयमों/विवअति�विनयमों क े अ�ीन विकसी उपबं� क े अभाव में न्यायालय को सामान्य�ः पुनमू=ल्यांकन का विनदेश नहीं देना चाविहए।" (प्रभाव वर्ति��)
12.2. इसक े अति�रिरक्त, रण विवYय सिंसह (उपरोक्त) क े मामले में, इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख� म� व्यक्त विकया है और अथिभविन�ा=रिर� विकया हैः "30. अ�ः इस विवर्षय पर विवति� काpी स्पष्ट है और हम क े वल कु छ महत्वपूण= विनष्कर्ष} पर प्रकाश डालने का प्रस्�ाव कर�े हैं,वे हैंः-
30.1. यविद विकसी परीक्षा को शासिस� करने वाला कोई कानून, अति�विनयम या विवविनयमन अति�कार क े रूप में उत्तर पुस्मिस्�का क े उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पुनमू=ल्यांकन या उत्तर पुस्मिस्�का की Yांच की अनुमति� दे�ा है, �ो परीक्षा आयोसिY� करने वाला प्राति�करण इसे अनुमति� दे सक�ा है।
30.2. यविद विकसी परीक्षा को शासिस� करने वाला कोई विवति�, अति�विनयम या विवविनयमन विकसी उत्तर पुस्मिस्�का क े पुनमू=ल्यांकन या संवीक्षा की अनुमति� नहीं दे�ा है (Yो इसे प्रति�बंति�� करने से थिभन्न है) �ो न्यायालय पुनमू=ल्यांकन या संवीक्षा की अनुमति� क े वल �भी दे सक�ा है Yब इसे बहु� स्पष्ट रूप से प्रदर्थिश� विकया गया हो, विबना विकसी �क = संग� प्रविnया क े या �क = संग� बनाने की प्रविnया क े द्वारा और क े वल दुल=भ या असा�ारण मामलों में विक कोई �ास्मित्वक त्रुविट की गई है।
30.3. न्यायालय को विकसी भी उम्मीदवार की उत्तर पुस्मिस्�काओं का पुनमू=ल्यांकन या Yांच नहीं करनी चाविहए -उसे इस मामले में कोई विवशेर्षज्ञ�ा नहीं है और अकादविमक मामलों को थिशक्षाविवदों पर छोड़ देना सबसे अच्छा है
30.4. न्यायालय को प्रमुख उत्तरों की शुt�ा की उप�ारणा करनी चाविहए और उस �ारणा पर आगे बढ़ना चाविहए और
30.5. संदेह की स्मिस्र्थीति� में लाभ अभ्यर्थी8 क े बYाय परीक्षा प्राति�कारी को विमलना चाविहए। (प्रभाव वर्ति�� )
12.3. हाल ही में, डॉ. एनटीआर यूविनवर्सिसटी ऑp हेल्र्थी साइंसेY बनाम डॉ. येरा वित्रन� और अन्य: 2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 1520 क े मामले में, इस न्यायालय ने विपछले विनण=यों को संदर्थिभ� करने क े बाद, सिYसमें रान विवYय सिंसह (उपरोक्त) क े मामले में भी शाविमल है, इस बा� पर सं�ुविष्ट क े लिलए उत्तर पुस्मिस्�काओं की मांग अन्यने वाली न्यायालय की प्रविnया को पूरी �रह से उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अस्वीकार कर विदया है विक क्या पुनमू=ल्यांकन की आवश्यक�ा र्थीी या नहीं और उसक े बाद पुनमू=ल्यांकन क े लिलए विनद~श Yारी विकए गए। इस न्यायालय ने विनम्नलिललिख� म� व्यक्त विकया है और अथिभविन�ा=रिर� विकया हैः- “9. उपरोक्त मामलें की परिरस्मिस्र्थीति�यों एवं �थ्यों को इस न्यायालय क े उपरोक्त विनण=यों क े द्वारा विन�ा=रिर� विनयमों को लागू करना एवं उपरोक्त क े �ह� हमारी राय है विक उच्च न्यायालय उत्तर पुस्मिस्�काओं क े अथिभलेख को मॅंगाना एवं विpर यह सं�ुष्ट करने क े लिलए विक क्या पुनमू=ल्यांकन की आवश्यक�ा र्थीी या नहीं, Yो विक विबल्क ु ल उतिच� नहीं र्थीा।Yैसा विक ब�ाया गया है, उच्च न्यायालय इस बा� को सं�ुष्ट करने क े लिलए उत्तर पुस्मिस्�काओं/शीटों की मांग कर रहे हैं विक क्या पुनमू=ल्यांकन की आवश्यक�ा है या नहीं और उसक े बाद आदेश/विनद~श पुनमू=ल्यांकन, Yो पूरी �रह से अननुज्ञेय है।उत्तर पुस्मिस्�काओं/उत्तर पुस्मिस्�काओं को बुलाने और उसक े बाद पुनमू=ल्यांकन का आदेश देने की ऐसी प्रर्थीा और वह भी पुनमू=ल्यांकन क े लिलए संबंति�� विनयमों में विकसी विवशेर्ष प्राव�ान क े अभाव में और वह भी भार� क े संविव�ान क े अनुच्छेद 226 क े �ह� शविक्तयों का उपयोग कर�े हुए अस्वीकाय= है।"
13. इसमें कोई संदेह नहीं है विक प्रश्नग� परीक्षा को शासिस� करने वाला अति�विनयम उत्तर पुस्मिस्�काओं क े पुनमू=ल्यांकन और संवीक्षा का उपबं� नहीं कर�ा है।इसक े अलावा, वण=नात्मक प्रकार क े उत्तरों में अंक प्रदान करना अविनवाय= रूप से व्यविक्तपरक मूल्यांकन का मामला है और न्यायालय मूल्यांकन क े उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा, Yो परीक्षक/मूल्यांकनक�ा= क े लिलए आरतिक्ष� रह�ा है।इसलिलए, सा�ारण परिरस्मिस्र्थीति�यों में, पूव�क्त उविक्तयों क े संदभ= में, उच्च न्यायालय द्वारा अपनाई गई प्रविnया को हमारी मुहर नहीं दी Yा सक�ी र्थीी। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" हालांविक, व�=मान मामले की विवथिशष्ट �थ्यों और अपवादात्मक परिरस्मिस्र्थीति�यों में, हम रिरट यातिचकाक�ा= को दी गई राह� क े मूल भाग में हस्�क्षेप करने से इंकार रक रहें है, विवशेर्ष कारणों क े �ह� यह है विक प्रश्नग� अति�विनयम में एक प्रत्यक्ष विनर्षे� नहीं विदखाया गया है मूल परीक्षक ने उत्तर संख्या 2, 5 (क) और 5 (ख) क े संबं� में अंक देने का पूरी �रह से लोप विकया है और अन्य परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन की प्रविnया को अपनाया गया है और उसी को उच्च न्यायालय द्वारा आगे बढ़ाया गया है, �ीन परीक्षकों क े औस� अंक देने का प्राव�ान करक े और इस समय की अवति� में विकसी भी हस्�क्षेप से रिरट यातिचकाक�ा= को गंभीर प्रति�कू ल परिरणाम हो सक�े हैं।�र्थीाविप, हमें यह स्पष्ट करने की आवश्यक�ा है विक व�=मान मामले में हस्�क्षेप न करने का यह अर्थी= नहीं लगाया Yाना चाविहए विक उच्च न्यायालय द्वारा अपनाई गई प्रविnया क े लिलए इस न्यायालय द्वारा कोई समर्थी=न विकया गया है।
14. आक्षेविप� आदेश में विटप्पथिणयों और विनद~शों से उत्पन्न मामले क े अन्य प्रासंविगक पहलुओं पर आगे बढ़�े हुए, हमारा स्पष्ट विवचार है विक भले ही हम रिरट यातिचकाक�ा= को विदए गए संशोति�� अंकों की राह� में बा�ा नहीं डाल�े हैं, लेविकन 21.05.2019 क े आक्षेविप� आदेश में अन्य विटप्पथिणयों और विनद~शों को अनुमोविद� नहीं विकया Yा सक�ा है।
15. विदनांक 21.05.2019 क े आक्षेविप� आदेश को देखने क े बाद, हम यह देखने क े लिलए विववश हैं विक उसक े पैराग्राp 17 से 28 में आने वाली विटप्पथिणयों का अति�कांश विहस्सा अनावश्यक र्थीा।विकसी भी आ�ार पर, रिरट यातिचकाक�ा= की थिशकाय� और अथिभलेख पर प्रकट हाेने वाले �थ्यों, समाY में थिशक्षकों की स्मिस्र्थीति� और अन्य सह क े रूप में विटप्पथिणयों क े संदभ= में परमादेश की रिरट Yारी करने क े लिलए प्रार्थी=ना से विनपटने वाली अति�विनण=य प्रविnया में -संबंति�� अवलोकन, हमारे उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विवचार में, आवश्यक नहीं र्थीा। यह हो सक�ा है, भले ही हम यह मान लें विक उच्च न्यायालय को मूल परीक्षक से संदर्थिभ� कमYोरिरयों को ध्यान में रख�े हुए अपनी पीड़ा क े लिलए इस �रह की विटप्पथिणयां करने क े लिलए प्रेरिर� विकया गया र्थीा, अपीलक�ा=-विवश्वविवद्यालय पर 1 लाख रुपये की राथिश का अति�रोपण यातिचका क े विवर्षय-वस्�ु क े अनुरूप और विवश्वविवद्यालय की भूविमका क े अनुरूप नहीं प्र�ी� हो�ा है।
16. विpर भी, 'युविक्तयुक्त रूप से क ु शल �रीक े से' परीक्षकों/मूल्यांकनक�ा=ओं की �ैना�ी सुविनतिश्च� करने क े लिलए प्र�ान सतिचव (उच्च थिशक्षा) और सतिचव (माध्यविमक थिशक्षा) को भी विनण=य की एक प्रति� अग्रेविर्ष� करना विवथिशष्ट विनद~श देने वाला प्र�ी� नहीं हो�ा है Yो विनतिश्च��ा क े सार्थी काया=न्वयन में सक्षम हैं।विकसी भी दशा में, युविक्तयुक्त दक्ष�ा की ऐसी सामान्य अपेक्षाएं विnयाकलाप क े प्रत्येक क्षेत्र क े लिलए, चाहे वह विकसी व्यविक्त का हो या राज्य का या राज्य क े परिरकरण का हो, लागू हो�ी हैं, बिंक�ु न्यायालय क े परमादेश क े भाग क े रूप में ऐसी अपेक्षाओं को विनतिश्च��ा क े सार्थी न्यायविनण=यन प्रविnया को पूरा करने की अपेक्षाओं क े अनुरूप नहीं कहा Yा सक�ा।दूसरे शब्दों में, मुकदमेबाYी में विनण=य दे�े समय न्यायालय से क े वल ऐसे विनदेश Yारी करने की अपेक्षा की Yाएगी सिYन्हें विनतिश्च��ा क े सार्थी काया=स्मिन्व�/काया=स्मिन्व� विकया Yा सक े ।उच्च न्यायालय द्वारा उक्त परिरस्मिस्र्थीति�यों में की गई विटप्पथिणयां, Yो काpी हद �क सामान्य अपेक्षाओं की हैं, सिYसे रिरट न्यायालय क े द्वारा परमादेश क े रूप में अनुमोविद� करना कविठन है।
17. उपयु=क्त क े अति�रिरक्त, आक्षेविप� आदेश क े पैरा 32 में Yो विनदेश विदया गया है उसे पूण=�ः अस्वीक ृ � विकया Yाना अपेतिक्ष� है।उक्त पैराग्राp 32 में, उच्च न्यायालय ने इस �रह से विनद~श Yारी करने की प्रविnया शुरू की है विक विपछले �ीन वर्ष} क े दौरान अपीलक�ा= -विवश्वविवद्यालय की सभी परीक्षाओं को पुन= उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आकलन या पुनमू=ल्यांकन करना सभी क े लिलए उपलब्� रहेंगा।सम्मान क े सार्थी कहें �ो हम इस विदशा में कोई उतिच� �क = नहीं ढूंढ पा रहे हैं। 17.[1] हमारे विवचार में, विकसी न्यायालय में, Yब उसक े विवर्षय-वस्�ु क े संदभ= में विकसी विवथिशष्ट मुकदमेबाYी पर अंति�म विवविनश्चय क े लिलए विवचार विकया Yा�ा है, �ो सामान्य�ः, विवविनश्चय को मामले में अव�ारण क े लिलए उद्भू� मुद्दों �क ही सीविम� रहना चाविहए। यविद कोई आनुर्षंविगक राह� या विनदेश समुतिच� समझा Yा�ा है �ो उसे न्यायालय द्वारा मामले क े �थ्यों और परिरस्मिस्र्थीति�यों क े सार्थी प्रत्यक्ष सहसंबं� में ही मंYूर या Yारी विकया Yा सक�ा है, इससे आगे नहीं। इसक े अलावा, एक विवशेर्ष मामले में एक व्यविक्त की एक विवशेर्ष गल�ी क े लिलए, सभी मामलों को विpर से पुन=मूल्याक ं न का आदेश नहीं विदया Yा सक�ा है। व�=मान स्वरूप क े मामले में, यविद एक परीक्षक/मूल्यांकनक�ा= द्वारा मूल्यांकन को उच्च न्यायालय द्वारा संविदग्� पाया गया है, �ो न �ो सभी परीक्षकों को गैरसिYम्मेदाराना माना Yा सक�ा है और न ही विवश्वविवद्यालय द्वारा घोविर्ष� प्रत्येक परिरणाम को विpर से पुन=मूल्यांविक� विकया Yा सक�ा है।Yैसा विक देखा गया, 25.11.2019 को, इस अपील क े �ह� यातिचका पर विवचार कर�े हुए, इस न्यायालय ने 21.05.2019 क े आक्षेविप� आदेश क े संचालन पर रोक लगा दी। हालांविक, इस न्यायालय द्वारा स्र्थीगन मंYूर करने से पहले, उच्च न्यायालय में कई अन्य रिरट यातिचकाएं दायर की गई र्थीीं, सिYनमें पुनमू=ल्यांकन या पुनः Yांच क े लिलए समान राह� की मांग की गई र्थीी और उच्च न्यायालय क े विवद्व� एकल न्याया�ीश क े पास प्रार्थी=ना को मंYूरी देने क े अलावा कोई विवकल्प नहीं र्थीा। हम यह देखने क े लिलए विववश हैं विक इस �रह क े सभी अनावश्यक मुकदमों की उत्पलित्त क े वल अनुतिच� विदशाओं में हुई है, Yैसा विक आदेश क े कथिर्थी� पैराग्राp 32 में विनविह� है। उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"
17.2. Yैसा विक ऊपर कहा गया है, हम विकसी भी विनण8� मामलें को पुनः मूल्यांविक� नहीं कर सक�े है, Yो हमारे समक्ष चुनौ�ी में नहीं है, लेविकन, उसक े सम्बन्� हमें यह देखने की आवश्यक�ा है विक आक्षेविप� आदेश क े पैराग्राp 32 में विनविह� विनद~श पूरी �रह से अमान्य हैं और उन्हें एक सार्थी रद्द विकया Yाना आवश्यक है।इस संबं� में, परमादेश यह भी देख सक�े हैं विक Yब विवश्वविवद्यालय अति�विनयम में पुनमू=ल्यांकन का कोई प्राव�ान नहीं है, �ो इस प्रक ृ ति� की कोई भी रिरट Yारी करना व्यावहारिरक रूप से कु छ ऐसा करने क े लिलए विनद~श Yारी करने क े बराबर होगा, सिYसका कानून द्वारा प्राव�ान नहीं है।
18. हम संक्षेप में यह कह सक�े हैं विक विकसी विदए गए मामले में, भले ही न्यायालय को विकसी विवथिशष्ट स्मिस्र्थीति� क े संबं� में अपना असं�ोर्ष व्यक्त करना हो, अथिभव्यविक्त क े संबं� में भी न्यायालय की स�क = �ा की आवश्यक�ा को छोड़ा नहीं Yा सक�ा है और विकसी विदए गए मामले में अनु�ोर्ष न्यायालय क े समक्ष मुकदमेबाYी क े विवर्षय �क ही सीविम� रहना चाविहए।यहां �क विक सहायक या अन्य राह� प्रदान करने या अन्य विनद~श Yारी करने की प्रविnया भी न्यायालय क े समक्ष विववाद में वास्�विवक प्रश्नों से परे नहीं Yा सक�ी है।इस बा� को दोहराया Yा�ा है विक एक विवशेर्ष स्�र पर एक विवशेर्ष गल�ी या दुब=ल�ा को, Yब न्यायालय द्वारा उतिच� रूप से विनपटाया Yा�ा है, सामान्यीक ृ � नहीं विकया Yा सक�ा है और विकसी भी संस्र्थीान में या संबंति�� व्यविक्त द्वारा इसी �रह की अन्य सभी प्रविnयाओं को अवै��ा या दुब=ल�ाओं से पीविड़� नहीं माना Yा सक�ा है।व�=मान मामले में उच्च न्यायालय ने अपना असं�ोर्ष व्यक्त कर�े हुए और संभव�ः सpाई प्रविnया की व्यवस्र्थीा कर�े हुए अनावश्यक रूप से मुद्दों से आगे की यात्रा की है और अनावश्यक विटप्पथिणयों क े अलावा असमर्थी=नीय विनद~श Yारी विकए हैं। हमारे विवचार उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" में यह सब टाला Yा सक�ा र्थीा और इससे बचा Yाना चाविहए र्थीा। हम और कु छ नहीं कह�े।
19. इसमें ऊपर Yो चचा= की गई है और देखा गया है, उसक े लिलए, आदेश क े पैराग्राp 29 में आक्षेविप� विनद~शों और Yनादेश को बाति�� नहीं कर�े हुए और आक्षेविप� आदेश क े पैराग्राp 31 में आशा और विवश्वास की अथिभव्यविक्तयों क े �ह�, हमारा स्पष्ट म� है विक आक्षेविप� आदेश क े पैराग्राp 30,32 और 33 में विनविह� विनद~शों को अनुमोविद� नहीं विकया Yा सक�ा है और उन्हें अपास्� विकया Yाना चाविहए।
20. �दनुसार, और उपरोक्त को ध्यान में रख�े हुए, यह अपील सpल हो�ी है और आंथिशक रूप से और उस सीमा �क अनुज्ञा� की Yा�ी है विक आक्षेविप� आदेश क े पैराग्राp 30,32 और 33 रद्द विकए Yा�े हैं और अपास्� विकए Yा�े हैं। कोई खच= नहीं।
21. यह दोहराने की आवश्यक�ा नहीं है विक आक्षेविप� आदेश क े अन्य भाग द्वारा रिरट यातिचकाक�ा= (प्रत्यर्थी8 नं. 1) को अन्यर्थीा दी गई राह� क े वल व�=मान मामले की विवथिशष्ट परिरस्मिस्र्थीति�यों क े लिलए ही अप्रभाविव� है। ….…………………….. न्यायमूर्ति� विदनेश माहेश्वरी) ….…………………….. न्यायमूर्ति� संYय क ु मार नई विदल्ली 14 pरवरी, 2023 उद्घोर्षणा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवाविद� विनण=य वादी क े अपनी भार्षा में समझने हे�ु विनबhति�� प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया Yा सक�ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण=य का अंग्रेYी संस्करण प्रामाथिणक माना Yाएगा �र्थीा विनष्पादन और विnयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"