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भार क
े सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कारी
दीवानी अपील संख्या 2627-2628/2012
कमल और अन्य .... अपीलार्थी) (गण)
बनाम
गजराज और अन्य .... प्रत्यर्थी)(गण)
सह
दीवानी अपील संख्या 2604-2605/2012
दीवानी अपील सं 6486-6487/2012
निनण5य
न्यायमूर्ति रस् ोगी,
JUDGMENT
1. व 5मान अपीलें, 12 अगस् 2010 क े फ ै सले और उसक े बाद 12 अक्टूबर 2011 की पुनर्विवलोकन यातिCका को खारिरज करने वाले आदेश, क े निवरूद्ध दायर की गयी हैं।
2. अभिभलेख से प्रकट होने वाले, मामले क े संतिक्षप्त थ्य ये हैं निक व 5मान अपीलार्थी) वे आवेदक हैं, जिजन्हें 20 जुलाई 1996 को हुई बैठक में ग्राम फालेदा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA की भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों पर उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूनिम सु ार अति निनयम, 1950 (ए स्मिस्मनपश्चा ् 'अति निनयम' क े रूप में संदर्भिभ ) क े ह निवनिह प्रनि^या क े माध्यम से भूनिम आवंनिट की गई र्थीी। आवंटन को उप-जिजला मजिजस्ट्रेट खुजा5 द्वारा 6 अप्रैल 1997 को अपनी स्वीक ृ ति द्वारा अस्मिन् म रूप से पुष्ट कर निदया गया, जिजसकी अभिभपुनिष्ट भिशकाय क ा5ओं में से एक की ओर से दायर एक पुनरीक्षण यातिCका क े खारिरज होने पर हुई, जिजसे हालांनिक कोई लोकस स्टेण्डई (सुने जाने का अति कार) नहीं र्थीा और अति निनयम की ारा 333 क े ह शनिg का प्रयोग कर े हुए अपर आयुg, मेरठ प्रभाग, मेरठ द्वारा 31 माC[5] 2008 क े आदेश द्वारा उसे आवंटन नहीं निकया गया र्थीा।
3. अपर आयुg, मेरठ प्रभाग, मेरठ क े आदेश को उच्च न्यायालय द्वारा काय5वाही क े लिलए अजनबी एक व्यनिg, गजराज जो मूल भिशकाय क ा5 र्थीा, की ओर से दायर रिरट यातिCका पर अपास् कर निदया गया, जिजसमें अपीलक ा5ओं को निकए गए आवंटन पर इस आ ार पर सवाल उठाया गया निक उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूनिम सु ार निनयमावली, 1952 (ए स्मिस्मनपश्चा ् 'निनयमावली' क े रूप में संदर्भिभ ) क े निनयम 176 (4) क े ह, अध्यक्ष से प्राप्त होने क े एक सप्ताह क े भी र भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों पर सक्षम प्राति कारी द्वारा निनण5य लिलया जाना र्थीा और प्राति कारी द्वारा अंति म अनुमोदन देने क े लिलए आठ महीने का समय लिलया गया र्थीा जो निनयमावली क े निनयम 176(4) का उल्लंघन र्थीा।
4. दनुसार, अपर आयुg, मेरठ प्रभाग, मेरठ क े निदनांक 31 माC[5] 2008 और अपर कलेक्टर (निवत्त और राजस्व) क े निदनांक 30 जिस ंबर 2006 क े आदेश को रद्द कर े हुए, उच्च न्यायालय ने 12 अगस् 2010 क े आदेश द्वारा मामले को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA निवति क े अनुसार नए जिसरे से जांC करने क े लिलए प्राति कारी को मामला वापस भेज निदया, जो हमारे समक्ष की अपीलों में निवषय-वस् ु है।
5. 20 जुलाई 1996 को हुई बैठक में फालेदा गांव की भूनिम प्रबं न सनिमति की जिसफारिरशों पर निकए गए भू-खण्ड़ क े आवंटन का प्रासंनिगक अंश निनम्नानुसार हैः-... उपरोg भूनिम का निववरण सुनने क े बाद, भूनिम प्रबं न सनिमति ने यह भी निनण5य लिलया है निक जो व्यनिg फालेदा बांगर गांव में आवंटन का लाभ उठाएंगे, उन्हें 0.506 हेक्टेयर क्षेत्रफल की भूनिम आवंनिट की जाएगी, जबनिक सुल् ानपुर फालेदा बांगर गांव में आवंटन का लाभ उठाने वालों को 0.253 हेक्टेयर क्षेत्रफल की भूनिम आवंनिट की जाएगी। निफर लेखपाल को इस आशय क े लिलए कहा गया है निक उसे योग्य उम्मीदवारों की संबंति सूCी की अन् व5स् ु में उजिल्ललिख प्रास्मिस्र्थीति में भूनिम क े आवंटन का उल्लेख करना Cानिहए, जिजसे वास् व में ग्राम प्र ान और भूनिम प्रबं न सनिमति क े सदस्यों द्वारा ैयार निकया गया है। इस भूनिम प्रबं न सनिमति क े समक्ष सभी पात्र व्यनिgयों की यह सूCी पढ़ी गई है, जिजसक े बाद इस संबं में क ु छ निवCार-निवमश[5] निकया गया है और अं में इस निटप्पणी क े सार्थी इसे सव5सम्मति से पारिर निकया गया है, निक उg सूCी निवति व, यर्थीार्थी5 और सही रीक े से ैयार की गई है, क्योंनिक अनुसूतिC जाति क े सदस्य, जिजनक े पास 3 1/8 एकड़ से कम क ृ निष भूनिम का कब्जा है, को भी उg सूCी में शानिमल निकया गया है। क ृ निष आवंटन को निनम्न रूप से प्रभानिव हुए हैंः- ^म संख्या आबंनिट ी का नाम, मा ा-निप ा और प ा जाति खसरा संख्या क्षेत्रफल हेक्टेयर में भू-राजस्व रू. में निववरण 1 2 3 4 5 6 7
1. महेन्द्र पुत्र सोहन जाटव 39/6 0.253 12.50 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA सिंसह, गांव का निनवासी … … … … … … … 110 शंकर पुत्र हरCंदी, गांव का निनवासी ब्राह्मण 324/15 0.506 12.50 उपयु5g क ृ निष आवंटन की अन् व5स् ु को भूनिम प्रबं न सनिमति क े सदस्यों क े सार्थी-सार्थी आम जन ा को पढकर सुनाया गया और ब भूनिम प्रबं न सनिमति क े सदस्यों और आम जन ा क े बीC निववाद उत्पन्न हुआ। इसक े बाद यह निनण5य लिलया गया है निक प्रस् ाव को सही रीक े से पेश निकया गया है और यह प्रकृ ति सही है। सभी उपस्मिस्र्थी सदस्यों ने उपरोg प्रस् ाव का समर्थी5न निकया है और इसक े परिरणामस्वरूप इसे स्वीकार और पारिर निकया गया है। ब ग्राम प्र ान श्रीम ी निवमलेश ने लेखपाल को इस प्रस् ाव से संबंति अपेतिक्ष फाइल द्नुसार ैयार करने का निनद•श निदया र्थीा र्थीा इस स्वीक ृ और पारिर प्रस् ाव की सहमति व अनुमोदन प्राप्त करने क े उद्देश्य से उg पत्रावली को उप-जिजला मजिजस्ट्रेट खुजा5 को भेज निदया गया र्थीा।इस मामले को भूनिम प्रबं न सनिमति की अगली बैठक में पुनिष्ट क े लिलए पेश निकया जाना Cानिहए। इस प्रकार उपयु5g प्रस् ाव को सहष[5] स्वीकार और पारिर निकया गया है।
6. 110 व्यनिgयों क े पक्ष में आबंटन क े प्रस् ाव का सुसंग भाग, जिजसे सक्षम प्राति कारी द्वारा अंति म रूप से अनुमोनिद निकया गया र्थीा और जो 6 अप्रैल 1997 को आयोजिज बैठक क े काय5वृत्त से प्रकट हो ा है, निनम्नानुसार हैः- उप-जिजला मजिजस्ट्रेट, खुजा5 श्रीमान जी, मैंने फालेदा गांव में हुए आवंटन से संबंति संलग्नक फाइल का परिरशीलन निकया है। इसक े अनुसार 110 व्यनिgयों क े पक्ष में आवंटन प्रभानिव हुआ र्थीा, जिजनमें से 7 व्यनिg अनुसूCी जाति से संबंति हैं, 3 निपछड़े वग[5] से Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संबंति हैं, जबनिक शेष सामान्य वग[5] से संबंति हैं। उg फाइल की अन् व5स् ु में संलग्न आवंटन काय5वाही की छायाप्रति से यह स्पष्ट है निक गांव में अनुसूतिC जाति क े 166 व्यनिgयों में से निकसी क े भी पात्र न होने से, दनुसार उनक े पक्ष में भूनिम आवंनिट निकया जाना शेष है। पात्र ा सूCी की वै ा, संकल्प, एजेंडा और मुनादी क े संबं में, क्षेत्र क े राजस्व निनरीक्षक और लेखपाल ने द्नुसार इस मामले में उतिC व सम्यक ् जांC करने क े बाद अपनी अलग-अलग रिरपोट[5] दज[5] की। उन्होंने निवभिभन्न व्यनिgयों क े बयान भी दज[5] निकए र्थीे।जबनिक यह कहा गया है निक वह मौक े पर निकसी भी निववाद से रनिह है, आवंटन में दी जाने वाली प्रस् ानिव भूनिम को श्रेणी 5(1) और 5(3) में नवीन पाट) और बंजर क े रूप में दज[5] निकया गया है। इस प्रकार, राजस्व निनरीक्षक और लेखपाल की रिरपोट[5] क े आ ार पर, उg आवंटन प्रस् ाव को मंजूरी देने क े लिलए ए द्द्वारा जिसफारिरश प्रस् ु की जा ी है।”
7. सक्षम प्राति कारी द्वारा निकए गए आवंटन को अति निनयम की ारा 198(4) क े ह सूट संख्या 12/2004 में Cुनौ ी दी गई र्थीी और अभिभलेख क े मूल्यांकन क े बाद, इसे अपर कलेक्टर (निवत्त और राजस्व), गौ मबुद्ध नगर द्वारा 30 जिस ंबर 2006 क े आदेश द्वारा खारिरज कर निदया गया र्थीा और उसक े बाद अति निनयम की ारा 333 क े ह पुनरीक्षण दायर निकया गया र्थीा, जिजसे अपर आयुg, मेरठ प्रभाग, मेरठ द्वारा 31 माC[5] 2008 क े आदेश द्वारा खारिरज कर निदया गया र्थीा।
8. यह भार क े संनिव ान क े अनुच्छेद 226 और 227 क े ह उच्च न्यायालय क े समक्ष भिशकाय क ा5 गजराज की ओर से दायर रिरट यातिCका में Cुनौ ी की निवषय-वस् ु र्थीी, जो आवंटनों क े संदभ[5] में पूण[5] ः अजनबी र्थीा और उसे कोई लोकस स्टैडई(सुने जाने का अति कार) प्राप्त नहीं र्थीा।
9. यद्यनिप उच्च न्यायालय क े निवद्वान एकल न्याया ीश ने मामले क े थ्यों पर निवCार नहीं निकया है और इस बा की जांC करने की जहम नहीं उठाई है निक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क्या अपर कलेक्टर (निवत्त और राजस्व) और अपर आयुg, मेरठ प्रभाग, मेरठ द्वारा 30 जिस ंबर 2006 और 31 माC[5] 2008 क े अपने आदेशों द्वारा दो Cरणों में जांC करने क े बाद भूनिमहीन व्यनिgयों को भूनिम का आवंटन कर े समय अति कारिरयों द्वारा अपनाई गई निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई त्रुनिट है या नहीं, और इस आ ार पर आगे बढ़े निक सक्षम प्राति कारी को सनिमति द्वारा पारिर प्रस् ाव को अध्यक्ष से प्राप्त होने क े एक सप्ताह क े भी र मंजूरी देने पर निनण5य लेना है और भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों को मंजूरी देने में आठ महीने का समय लगा, जो निनयमावली क े निनयम 176(4) का उल्लंघन र्थीा और दनुसार निदनांक 12 अगस् 2010 क े निनण5य द्वारा मामले को नए जिसरे से निनण5य लेने क े लिलए प्राति करण को भेज निदया गया। बाद में, पुनर्विवलोकन को भी 12 अg ू बर 2011 क े आदेश द्वारा खारिरज कर निदया गया।
10. अपीलार्भिर्थीयों क े निवद्वान अति वgा ने कहा निक भू-खण्ड़ का आवंटन करने में राज्य प्राति कारिरयों द्वारा अपनायी गई निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई त्रुनिट नहीं ब ाई गई र्थीी और जहां क अनुमोदन देने में सक्षम प्राति कारी द्वारा की गई देरी का संबं है, यह अपीलार्भिर्थीयों क े अति कार क्षेत्र क े भी र नहीं है, इस प्रकार, उन पर भारी लाग का बोझ नहीं डाला जा सक ा है जिजसक े लिलए वे कभी भी दोषी नहीं र्थीे और इसक े लिलए उन्हें जिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है।
11. सार्थी ही, निनयम 176 (4) वास् व में इंनिग कर ा है निक सक्षम प्राति कारी द्वारा भूनिम प्रबं न सनिमति की जिसफारिरशों पर उसकी प्रानिप्त क े एक सप्ताह क े भी र निनण5य लिलया जाना है, लेनिकन इसका गैर-अनुपालन काय5वाही को अमान्य नहीं करेगा और यनिद प्राति कारी निनयम 176(4) क े ह निवनिह एक सप्ताह की समय सीमा क े भी र अपनी शनिgयों का प्रयोग करने में निवफल रह ा है ो इसका कोई पारिरणानिमक प्रभाव नहीं होगा। इन परिरस्मिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश कानूनी रूप से पोषणीय नहीं है और प्राति करण को मामला वापस भेजने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े लिलए आदेश पारिर करने से भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों को मंजूरी देने में सक्षम प्राति कारी द्वारा हुई देरी को दूर नहीं निकया जा सक ा है।
12. निवद्वान अति वgा ने आगे कहा निक भूनिम प्रबं न सनिमति की जिसफारिरशों पर निकए गए आवंटन की दो Cरणों में जांC की गई है, पहला, अति निनयम की ारा 198(4) क े ह अपर कलेक्टर क े समक्ष दायर एक मुकदमे में और व 5मान अपीलक ा5ओं को भू-खण्ड़ का आवंटन करने में प्राति करण द्वारा निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई त्रुनिट/गल ी दर्भिश नहीं की गई र्थीी। इसकी अति निनयम की ारा 333 क े ह अपनी अति कारिर ा का प्रयोग कर े हुए, अपर आयुg द्वारा पुनरीक्षण अति कारिर ा में आगे जांC की गई और मामले की निवभिभन्न स् रों पर जांC करने क े बाद, निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई गल ी नहीं ब ाई गई है और क े वल इसलिलए निक सक्षम प्राति कारी निनयम 176(4) क े ह संदर्भिभ एक सप्ताह की अवति क े भी र अपनी शनिg का उपयोग करने में निवफल रहा है, यह अपने आप में काय5वाही को अवै नहीं बनाएगा और उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेश इस न्यायालय द्वारा हस् क्षेप निकए जाने क े योग्य है।
13. इसक े निवपरी, राज्य क े निवद्वान अति वgा ने कहा निक यह सही है निक भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों को मंजूरी देने में सक्षम प्राति कारी द्वारा देरी की गई र्थीी, लेनिकन व्यनिgग आवेदकों, जो क ु ल निमलाकर लगभग 110 हैं, को भू-खण्ड़ का आवंटन करने में निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई गल ी न होने या त्रुनिट कारिर न होने क े कारण, यह मामला प्राति करण को वापस भेजना न्याय क े निह में नहीं है और जब भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों पर निकए गए आवंटन को संबंति सक्षम प्राति कारिरयों द्वारा दो निवभिभन्न Cरणों में जाँC लिलया गया है, ो अब इस स् र पर प्राति कारी क े पास जांC करने क े लिलए कु छ शेष नहीं बCा है। निकसी सांनिवति क अवरो क े अभाव में काय5वाही को अनिवति मान्य करना न्याय क े निह में नहीं होगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
14. प्रत्यर्थी) संख्या 1, गजराज, जो मूल यातिCकाक ा5 र्थीा, की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ और अभिभलेख से यह प ा Cल ा है निक उसका नाम न ो आवंनिटयों की सूCी में र्थीा और न ही आवंटन पर निवCार करने क े लिलए वह आवेदक र्थीा। व 5मान अपीलक ा5ओं क े आवंटन क े भाग्य की परवाह निकए निबना, कम से कम प्रत्यर्थी) संख्या 1 गजराज-मूल यातिCकाक ा5 को नुकसान नहीं होने वाला है, लेनिकन उन व्यनिgयों क े अति कारों को पराजिज कर सक ा है, जिजन्हें योजना क े ह सम्यक प्रनि^या बाद भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों पर आवंटन निकया गया है।
15. हमने पक्षकारों क े निवद्वान अति वgा को सुना है और अभिभलेख पर उपलब् सामग्री का परिरशीलन निकया है।
16. मामले की जांC करने क े लिलए आगे बढ़ने से पहले, निनयम 176 पर ध्यान देना उतिC होगा, जिजसे निनम्नलिललिख रूप में संदर्भिभ निकया गया हैः- "176(1) निनयम 175 क े अनुसार, भूनिम में कानिबज होने (प्रवेश) क े लिलए व्यनिg या व्यनिgयों का Cयन करने क े बाद, सनिमति निनम्नलिललिख व्यनिgयों की सूCी ैयार करेगी- (क) जेड.ए. फाम[5] 57 में इस प्रकार Cयनिन व्यनिgयों की सूCी; (ख) जेड.ए. फॉम[5] 58 में जमीन में कानिबज होने का प्रमाण पत्र; और (ग) जेड.ए. फॉम[5] 58 क में प्रति लेख। (2) उप निनयम (1) क े खंड (क) और खंड (ख) में निनर्विदष्ट दस् ावेजों पर भूनिम प्रबं न सनिमति क े अध्यक्ष द्वारा निवति व हस् ाक्षर निकए जाएंगे, लेनिकन खंड (ग) में निनर्विदष्ट दस् ावेज पर भूनिम में कानिबज होने क े लिलए इस प्रकार Cयनिन व्यनिg द्वारा हस् ाक्षर निकए जाएंगे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (3) उपनिनयम (1) में निनर्विदष्ट दस् ावेज निनम्न दस् ावेजों क े सार्थी त्पश्चा ् उपखण्ड़ क े प्रभारी सहायक कलेक्टर को अग्रेनिष निकया जायेगा- (क) जिजस सनिमति की बैठक में भूनिम बंदोबस् करने का निनण5य लिलया गया र्थीा उसकी काय5वाही की प्रति; और (ख) संबंति लेखपाल से इस आशय का प्रमाण पत्र निक सूCी में उजिल्ललिख भूनिम क े निववरण सही हैं और भूनिम में प्रवेश अति निनयम और निनयमों क े प्राव ानों क े अनुसार है। (4) उप ारा (3) में निनर्विदष्ट दस् ावेजों की प्रानिप्त पर, उप-खण्ड़ का प्रभारी सहायक कलेक्टर सनिमति द्वारा लिलए गए निनण5य की संवीक्षा करेगा और यनिद उसका समा ान हो जा ा है निक सनिमति का निनण5य अति निनयम और उसक े अ ीन बनाई गई निनयमावली क े अनुसार है ो वह जेड.ए. फॉम[5] 57 ख की सूCी में अपना अनुमोदन अभिभलिललिख करेगा और अध्यक्ष से प्राप्त होने क े एक सप्ताह क े भी र कागजा को इस निनदेश क े सार्थी भूनिम प्रबं न सनिमति को लौटाएगा निक कब्जा पट्टेदारों को सुपुद[5] निकया जाए और कब्जा देने क े ुरं बाद लेखपाल दालिखल-खारिरज की रिरपोट[5] को पय5वेक्षक कानूनगो को प्रस् ु करे। (5) यनिद उप-खण्ड़ का प्रभारी सहायक कलेक्टर यह पा ा है निक सनिमति द्वारा लिलया गया संपूण[5] निनण5य या उसका कोई भाग अति निनयम और निनयमावली क े उपबं ों क े अनुसार नहीं है ो वह अपनी अस्वीक ृ ति जेड.ए. फॉम[5] 57 ख में सूCी पर अभिभलिललिख करेगा और कागजा अध्यक्ष को लौटा देगा।"
17. यनिद हम निनयम 176 की योजना पर गौर करें, ो यह उन आवेदकों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रनि^या प्रदान कर ा है जो भूनिम क े आवंटन क े हकदार हैं। उप-निनयम (1) क े ह, इस रह से Cयनिन व्यनिgयों की एक सूCी को अपने संबंति फॉम[5] 57 ख, फॉम[5] 58 और फॉम[5] 58 क को भरना होगा। उप-निनयम (2) उन दस् ावेजों को संदर्भिभ कर ा है जिजन्हें आवंटन मांगने क े उद्देश्य से व्यनिgग आवेदक द्वारा प्रस् ु निकए जाने की आवश्यक ा है। उप-निनयम (3) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े ह, उप-निनयम (1) में निनर्विदष्ट दस् ावेजों की जांC की जानी है और सनिमति द्वारा लिलए गए निनण5य की जांC सहायक कलेक्टर द्वारा की जानी है, जिजसे अपना सं ोष दज[5] करना है निक क्या सनिमति का निनण5य अति निनयम क े प्राव ानों और इसक े ह बनाए गए निनयमों क े अनुसार है और उसका अनुमोदन दज[5] करने क े बाद, आवंटन क े लिलए आगे की कार5वाई की जानी है। यनिद सनिमति द्वारा लिलया गया निनण5य अति निनयम क े अनुसार नहीं है, ो सहायक कलेक्टर को अपनी अस्वीक ृ ति दज[5] करने और अध्यक्ष को कागजा लौटाने का अति कार है।
18. सहायक कलेक्टर द्वारा उपनिनयम (4) क े अन् ग[5] प्राप्त होने क े एक सप्ताह क े अन्दर समुतिC अनुमोदन प्रदान करने का जो निनद•श निदया गया है, वह प्रकरण को समयबद्ध रीक े से निवनिनतिश्च करने क े उद्देश्य से रखा गया प्र ी हो ा है ानिक भूनिमहीन व्यनिgयों को या जिजनक े पक्ष में अति निनयम क े प्राव ानों या उसक े ह बनाए गए निनयमों क े ह प्रनि^या से गुजरने क े बाद जिसफारिरशें की गई हैं, उन्हें उस वै अति कार से वंतिC नहीं निकया जा सक े जो उन्हें प्रदान निकया गया है और प्राति करण को निनण5य लेने का क 5व्य निदया गया है निक वह उसक े अ ीन एक सप्ताह क े भी र यर्थीासंभव शीघ्र ा से निनण5य ले, किंक ु यनिद मंनित्रस् रीय या प्रशासनिनक कारणों से निवलंब हुआ है ो कम से कम आवंनिट आवेदकों को इसक े लिलए जिजम्मेदार नहीं ठहराया जा सक ा है। इसक े सार्थी ही, यनिद प्राति करण निनयमावली क े निनयम 176(4) क े ह निनर्विदष्ट एक सप्ताह क े निन ा5रिर समय क े भी र अपनी शनिgयों का प्रयोग करने में निवफल रहा है, ो कम से कम यह अप्रासंनिगक है और काय5वाही को अमान्य नहीं करेगा।
19. यह ध्यान निदया जाना Cानिहए निक सहायक कलेक्टर द्वारा अनुमोदन निकए जाने क े बाद भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों की, अति निनयम की ारा 198 (4) क े ह और बाद में अति निनयम की ारा 333 क े ह इसकी पुनरीक्षण अति कारिर ा क े ह शनिg का प्रयोग कर े हुए निवभिभन्न प्राति कारिरयों Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा जांC की गयी है और यहां क निक इस न्यायालय क े समक्ष भी, प्रत्यर्थी) यह निदखाने में असमर्थी5 हैं निक भूनिम प्रबं न सनिमति द्वारा की गई जिसफारिरशों पर प्रत्यर्थी)-आवंनिटयों क े पक्ष में आवंटन कर े समय, निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई त्रुनिट या अवै ा की गई र्थीी। इसक े अभाव में, यनिद सक्षम प्राति कारी निवनिह समय क े भी र निनयम 176 (4) क े अ ीन निननिह अपनी शनिgयों का उपयोग करने में निवफल रहा है, जो आवंटी आवेदकों क े दायरे और निनयंत्रण में नहीं है, ो कम से कम इसमें निननिह शनिg क े प्रयोग में अति कारिरयों की निनस्मि•^य ा क े लिलए उन पर भारी लाग का बोझ नहीं लादा जा सक ा। इस रह की काय5वानिहयों को अमान्य करने क े निकसी प्राव ान क े अभाव में, यह अप्रासंनिगक है और उन आबंटनों को रद्द करने का कोई कारण/औतिCत्य नहीं र्थीा।
20. हमारे निवCार में, उच्च न्यायालय ने इस परिरप्रेक्ष्य में मामले की जांC नहीं की है। सार्थी ही, यनिद प्राति करण द्वारा निनयम 176(4) क े ह निनर्विदष्ट एक सप्ताह क े भी र कार5वाई नहीं की गई है, ो इसक े गैर-अनुपालन का कोई पारिरणानिमक प्रभाव नहीं होगा। दी गई परिरस्मिस्र्थीति यों में, उच्च न्यायालय ने निनयम 176(4) की सही परिरप्रेक्ष्य में व्याख्या करने और सार्थी ही, काय5वाही को रद्द करने और निबना निकसी कारण या औतिCत्य क े मामले को प्राति करण को वापस भेजने में एक गंभीर गल ी की है। इसक े अलावा, अति निनयम या इसक े ह बनाए गए निनयमों क े प्राव ानों क े ह प्राति कारिरयों द्वारा अपनाई गई निनण5य लेने की प्रनि^या में कोई त्रुनिट नहीं ब ाई गई है।
21. परिरणाम ः, अपीलें सफल होने क े लिलए दायी हैं और दनुसार उन्हें स्वीकार निकया जा ा है। उच्च न्यायालय का 12 अगस् 2010 का निनण5य और 12 अक्टूबर 2011 का पुनर्विवलोकन आदेश ए द्द्वारा रद्द निकया जा ा है। लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
22. यनिद कोई लंनिब आवेदन हों, ो वे निनस् ारिर माने जाएंगें। …………………………….. (न्यायमूर्ति अजय रस् ोगी) …………………………….. (न्यायमूर्ति बेला एम. नित्रवेदी) नई निदल्ली; 14 फरवरी 2023.. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA