Meeta India Private Limited v. Mahendra Jain

High Court of Madhya Pradesh Bench At Indore Translation Suggested By Translator · 20 Feb 2023
Ravi Ramasubramaniam; Pankaj Mittal
Criminal Appeal No 2023 arising from Special Leave Petition (Crl) No 6220/2019
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The High Court erred in quashing a complaint under Section 138 NI Act filed through an authorized power of attorney holder, and the appeal restoring the complaint proceedings was allowed.

Full Text
Translation output
HIGH COURT OF MADHYA PRADESH BENCH AT INDORE
Translation suggested by translator :
प्रकाशन अननुमत
भारत क
े सर्वोच्च न्यायालय में
दाण्डिक अपीलीय क्षेत्राधिकार ,अपील संख्या 2023
[ वर्वशेष अनुमतत याधचका (सीआरएल) संख्या 6220/2019 से उत्पन्न ]
मीता इंडिया प्राइर्वेट लललमटेि
अपीलकताा
वर्वरुद्ि
महेंद्र जैन
प्रततर्वादी
तनर्ाय
पंकज लमत्तल, जे.
JUDGMENT

1. अपीलकताा की ओर से उपण्थित वर्वद्र्वान् र्वररष्ठ अधिर्वक्ता श्री बी. बी. साहनी और प्रततर्वादी की ओर से उपण्थित वर्वद्र्वान अधिर्वक्ता श्री तनततन एस. ताम्बर्वेकर, पक्षकारों क े बीच आदान-प्रदान ककए गए अलभर्वचनों का अलभशीलन ककया गया ।

2. उच्च न्यायालय क े वर्वद्र्वान एकल न्यायािीश द्र्वारा ददनांक 04.04.2019 को दंि प्रकिया संदहता की 482 क े अन्तगात शण्क्तयों का उपयोग करते हुए तनचली अदालत क े ददनांक 30.01.2018 और 23.07.2018 और पुनरीक्षर् अदालत क े ददनांक 26.09.2018 क े आदेशों को रद्द करने क े तनर्ाय को चुनौती दी गयी है।

3. अपीलकताा-क ं पनी, मैससा मीता इंडिया प्राइर्वेट लललमटेि ने देर्वास में अपने संयंत्र में 33 क े. र्वी. वर्वद्युत ओर्वरहेि लाइन को थिानांतररत करने क े ललए प्रततर्वादी-महेंद्र जैन को एक अनुबंि ददया। कधित अनुबंि क े संबंि में, अपीलकताा-क ं पनी ने गलती से अधिक भुगतान ककया. प्रततर्वादी ने अततररक्त रालश र्वापस करने पर सहमतत व्यक्त की और अपने ररफ ं ि क े ललए अपीलकताा-क ं पनी को दो चेक जारी ककए. भुगतान बंद करने क े तनदेशों क े कारर् चेक बाउंस हो गए।

4. अपीलकताा-क ं पनी ने अपने अधिकृ त प्रतततनधि ररपंजीत लसंह कोहली क े माध्यम से परिाम्य ललखत अधितनयम, 1881 की िारा 141/142 क े साि िारा 138 क े अन्तगात मुख्य न्यातयक मण्जथरेट, देर्वास की न्यायालय में लशकायत दजा कराई।

5. वर्वचारर् न्यायालय ने 30 जनर्वरी, 2018 क े आदेश क े तहत पहले आर्वेदन को खाररज कर ददया िा। दूसरा आर्वेदन 23.07.2018 को खाररज कर ददया गया िा, ण्जसक े बाद एक आपराधिक पुनरीक्षर् दायर ककया गया िा, ण्जसे 26.09.2018 क े आदेश द्र्वारा खाररज कर ददया गया िा। उच्च न्यायालय ने आक्षेवपत आदेश द्र्वारा दंि प्रकिया संदहता की खंि 482 क े अन्तगात दायर याधचका को थर्वीकार कर ललया है और उपरोक्त आदेशों को इस आिार पर रद्द करने का आदेश ददया है कक लशकायत उस व्यण्क्त कर्वींदर लसंह आनंद द्र्वारा दायर नहीं की गई िी, ण्जसे मुख्तारनामा ददया गया िा, क्योंकक कर्वींदर लसंह आनंद को अधिकृ त प्रतततनधि ररपंजीत लसंह कोहली को उक्त शण्क्त उप-प्रत्यायोण्जत करने का कोई कानूनन अधिकार नहीं िा । दूसरा, इस आिार पर कक कवर्वंदर लसंह आनंद क ं पनी की ओर से गर्वाही देने क े ललए अधिकृ त नहीं है ।

6. समिान में, ए. सी. नारायर्न बनाम महाराष्र राज्य और अन्य र्वाले मामले में इस न्यायालय क े वर्वतनश्चय पर भरोसा ककया गया है।

7. सर्वोच्च न्यायालय ने उपरोक्त तनर्ाय क े माध्यम से तनम्नललखखत लसद्िांत तनिााररत ककए हैं i) मुख्तारनामा िारक क े माध्यम से खंि 138 तनगोलशएबल इंथूमेंट्स एक्ट, 1881 क े अन्तगात लशकायत दायर करना पूरी तरह से कानूनी है बशते उसे प्रश्नगत लेनदेन (ओं) क े बारे में उधचत जानकारी हो । ii) मुख्तारनामा िारक यदद उसने लेनदेन को देखा है तो र्वह लशकायत की सामग्री को साबबत करने क े ललए शपि पर गर्वाही और सत्यापन कर सकता है। iii) मुख्तारनामा िारक क े माध्यम से दायर लशकायत में एक दार्वा होना चादहए/कक उसे प्रश्नगत लेन-देन क े बारे में जानकारी िी । iv) सामान्य मुख्तारनामा क े अन्तगात काया ककसी अन्य व्यण्क्त को तब तक नहीं सौंपे जा सकते जब तक कक मुख्तारनामा की वर्वलशष्ट अनुच्छेद में इसकी अनुमतत न हो। v) लशकायतकताा, उसक े गर्वाहों या उसक े मुख्तारनामा िारक का शपि पत्र लशकायत पर संज्ञान लेने क े ललए पयााप्त हैं। vi) मूल लशकायतकताा की ओर से मुख्तारनामा िारक द्र्वारा की गई लशकायत पोषर्ीय है, हालांकक र्वह अपने नाम से लशकायत दजा नहीं कर सकता है।

8. उपयुाक्त मामले में इस न्यायालय द्र्वारा अलभकधित वर्वधि क े उपयुाक्त आदेशों क े आलोक में, यह जांच की जानी है कक क्या लशकायत जैसा कक दाखखल ककया गया है, पोषर्ीय है और उच्च न्यायालय द्र्वारा वर्वचारर् न्यायालय और पुनरीक्षर् न्यायालय क े आदेशों को अपाथत कर दंि प्रकिया संदहता अन्तगात िारा 482 क े अिीन अपनी शण्क्त का प्रयोग करना न्यायोधचत है ण्जनमें यह अलभतनिााररत ककया है कक लशकायत पोषर्ीय है क्योंकक यह अटॉनी िारक क े अधिकृ त प्रतततनधि द्र्वारा फाइल की गई है और और यह कक उक्त पार्वर ऑफ़ अटोनी िारक गर्वाही देने हेतु सक्षम है।

9. अपीलकताा-क ं पनी द्र्वारा दायर लशकायत क े क े र्वल अर्वलोकन से पता चलता है कक यह अपने अधिकृ त प्रतततनधि, ररपंजीत लसंह कोहली क े माध्यम से क ं पनी क े नाम पर दायर ककया गया है ।इसललए, लशकायत अपीलकताा क ं पनी द्र्वारा अपने नाम से की गई है।यह मुख्तारनामा िारक क े नाम पर दायर नहीं ककया गया है।लशकायतकताा, यानी अपीलकताा क ं पनी अपने मुख्तारनामा िारक क े माध्यम से अपने नाम से लशकायत दजा करने की अधिकारी है।

10. उक्त मुख्तारनामा, बोिा तनदेशकों द्र्वारा ददनांक 01.05.2010 को हुई अपनी बैठक में अनुमोददत ककए जाने क े बाद तनष्पाददत ककया गया िा। इसललए, अपीलकताा-क ं पनी क े तनदेशकों में से एक, यानी कवर्वंदर लसंह आनंद, अपीलकताा-क ं पनी क े मुख्तारनामा हैं और उसी क े सच्चे और कानूनी अटॉनी हैं। 11.उक्त मुख्तारनामा, उन्हें, समथत र्वादों या अन्य समथत यिोधचत न्यातयक या अिान्यातयक अलभयोजन या बचार्व हेतु अन्य समथत कायों क े संचालन क े ललए, अलभभाषक या वर्वलशष्ट अधिर्वक्ता तनयुक्त करने हेतु, अनन्यतः प्राधिकृ त करता है।

12. उक्त मुख्तारनामे क े आिार पर, पूर्वोक्त मुख्तारनामािारक कवर्वंदर लसंह आनंद ने ररपंजीत लसंह कोहली को पूर्वोक्त लशकायत दजा करने क े ललए प्राधिकृ त ककया । 13.यह वर्वधि अलभतनिााररत है कक सामान्य मुख्तारनामािारक अपनी शण्क्तयााँ ककसी अन्य व्यण्क्त को प्रत्यायोण्जत नहीं कर सकता है, यद्यवप ऐसा ककया जा सकता है यदद कोई वर्वलशष्ट क ं डिका उपप्रत्यायोजन हेतु हो । सािारर् मुख्तारनामा क े सार्विानीपूर्वाक अध्ययन से पता चलेगा कक अपीलकताा - क ं पनी ने, 1 मई, 2010 को बोिा तनदेशक की अपनी बैठक में, अपने एक तन देशक कवर्वंदरलसंह आनंद को क ं पनी का अटॉनी तनयुक्त करने का संकल्प ललया है, ण्जसे वर्वशेष रूप से काउंसेल या वर्वशेष अटॉनी तनयुक्त करने क े ललए क ं डिका 2 द्र्वारा अधिकृ त ककया गया िा । वर्वशेष अधिर्वक्ताओं को तनयुक्त करने क े ललए प्रयुक्त भाषा यह उपदलशात करने क े ललए पयााप्त रूप से थपष्ट है कक मुख्तारनामािारक को मामलों क े संचालन और इस संबंि में अन्य सुसंगत और ताण्त्र्वक काया करने क े लल ए का उंसेल क े अतत रर क्त थपेशल अटा नी लल ए प्रा धि कृ त कक या गया है। 'का उंलस ल या थपेशल अटा नी तन युक्त करने क े लल ये ' शब्दों का अिा यह नहीं हो गा कक र्वह उद्देश्यों हेतु, का उंलस ल या थपेशल अटा नी तन युक्त करने मा त्र क े लल ये प्रा धि कृ त हो गा । 'काउंसेल' और 'थपेशल अटॉनी ' क े उपयोग क े अलग-अलग अिा हैं। मुख्तारनामा क े क ं डिका 2 में काउंसेल या वर्वशेष अटॉनी तन युक्त करने क े ललए पूर्वोक्त शब्दों का उपयोग बबल्क ु ल अलग है और न क े र्वल काउंसेल की तनयुण्क्त क े ललए, बण्ल्क काउंसेल क े अलार्वा वर्वशेष अटॉनी की तनयुण्क्त क े ललए भी संदलभात है। यह मुख्तारनामा की क ं डिका 16 को पढ़ने में अंततनादहत है, जो वर्वशेष रूप से सालललसटर, काउंसेल, अधिर्वक्ताओं, अन्य सलाहकारों या पेशेर्वरों की तनयुण्क्त से संबंधित है, लेककन अटॉनी को संदलभात नहीं करता है। अतः, मुख्तारनामा क े क ं डिका 2 और क ं डिका 16 क े संयुक्त पठन से यह तथ्य सामने आएगा कक मुख्तारनामािारक को अपीलकताा क ं पनी की ओर से, र्वादों क े अलभयोजन र्व सञ्चालन क े प्रयोजनों हेतु, काउंसेल क े अलार्वा थपेशल अटानी तनयुक्त करने क े ललए प्राधिकृ त ककया गया िा । इसक े अततररक्त, मुख्तारनामािारक की तनयुण्क्त अपीलकताा क ं पनी क े बोिा तनदेशकों क े संकल्प क े तहत की गई िी और मुख्तारनामा क े मसौदे को बोिा द्र्वारा यिोधचत अनुमोददत ककया गया िा । उपरोक्त मुख्तारनामा में, सामान्य मुख्तारनामा िारक क े कायों क े उप- प्रत्यायोजन का प्रार्विान है और इस प्रकार अपीलकताा क ं पनी की ओर से, उसक े अधिकृ त प्रतततनधि ररपंजीत लसंह कोहली क े माध्यम से लशकायत दायर करना ककसी भी तरह से अर्वैि या कानून में गलत नहीं है।

14. अब मामले क े दूसरे पहलू पर आते हुए कक क्या कवर्वंदर लसंह आनंद अपीलकताा क ं पनी की ओर से गर्वाही दे सकता है, यह नोट ककया जाना चादहए कक र्वह क ं पनी क े तन देशकों में से एक िा ण्जसे लशकायत दजा करने और इसे आगे बढ़ाने क े ललए वर्वशेष रूप से अधिकृ त ककया गया है। यह ररकॉिा पर आया है कक उसने 26 माचा, 2018 को अपना व्यण्क्तगत मुख्तारनामा दायर ककया है, ण्जसमें कहा गया है कक र्वह अपीलकताा क ं पनी का सामान्य मुख्तारनामािारक है और चूंकक र्वह तनदेशक भी है, इसललए र्वह मामले क े तथ्यों से पूरी तरह अर्वगत है और इसललए अपीलकताा क ं पनी की ओर से मुकदमे को आगे बढ़ाने क े ललए सक्षम है। उच्च न्यायालय ने बहुत सहजता से कधित शपि पत्र को नजरअंदाज कर ददया है और इस कारर् से कक इस तरह का एक प्रकिन लशकायत में शालमल नहीं है, यह अलभतनिााररत ककया कक र्वह अपीलकताा क ं पनी की ओर से गर्वाही देने क े ललए अधिकृ त नहीं िा.

15. हमारी यह सुवर्वचाररत राय है कक उच्च न्यायालय ने उपयुाक्त राय को अलभललखखत करने में प्रकट रूप से गलती की, तब जब मुख्तारनामा िारक का यह मुख्तारनामा अलभलेख पर िा कक उसे संव्यर्वहारों की व्यण्क्त गत जानकारी है।

16. उपयुाक्त को ध्यान में रखते हुए, चूाँकक मुख्तारनामा िारक को संव्यर्वहारों क े बारे में उधचत जानकारी है, र्वह बयान देने हेतु क्षमतार्वान है और वर्वचारर् न्यायलय या पुनरीक्षर् न्यायालय ने प्रततर्वादी क े आर्वेदनों को अथर्वीकार करने में वर्वधि की कोई त्रुदट नहीं की ।

17. तदनुसार, हमारी राय है कक उच्च न्यायालय ने 04 अप्रैल, 2019 को आक्षेवपत आदेश पाररत कर, वर्वचारर् न्यायालय क े आदेशों में हथतक्षेप करक े की गलती की । तदनुसार, उपयुाक्त आदेश ददनांक 04.04.2019 को तनरथत ककया जाता है और वर्वचारर् अदालत और पुनरीक्षर् अदालत क े आदेश बहाल ककए जाते हैं। 18.अपील थर्वीकृ त की जाती है।

8,891 characters total

19. सभी लंबबत आर्वेदनों, यदद कोई हों, का तनथतारर् ककया जाता है। न्यायमूतता र्वी रामासुब्रमखर्यम न्यायमूतता पंकज लम त्तल नई ददल्ली 20 फरर्वरी, 2023. Disclaimer:- The translated judgment in vernacular language is meant for the restricted use of the litigant to understand it in his/her language and may not be used for any other purpose. For all practical and official purposes, the English version of the judgment shall be authentic and shall hold the field for the purpose of execution and implementation.